Homeराजनीतिकांशीराम आवास योजना के फर्जी आवंटन पत्र बाँटने में फँसे भू-माफिया आज़म खान, जाँच...

कांशीराम आवास योजना के फर्जी आवंटन पत्र बाँटने में फँसे भू-माफिया आज़म खान, जाँच के लिए टीम गठित

जिला प्रशासन में कुछ लोगों द्वारा शिकायतें आईं हैं कि आज़म खान ने कांशीराम योजना के अंतर्गत उन्हें फर्जी आवंटन पत्र दिए। जेपी गुप्ता ने कहा कि वो इस मामले की जाँच करेंगे और यदि जाँच में सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है, तो आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भू-माफिया सपा सांसद आज़म खान की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अब उन पर मकानों का फर्जी आवंटन पत्र बाँटने का आरोप लगा है। पीड़ितों ने आज़म खान पर कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत फर्जी आवंटन पत्र देने का आरोप लगाया है।

15 से 20 परिवारों का आरोप है कि साल 2016 में सपा सांसद आज़म खान ने ‘कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना’ के अंतर्गत सपा कार्यालय से मकानों के आवंटन पत्र बाँटे थे। जबकि, सरकारी ऑफिस में इन मकानों के आवंटन का कोई रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित परिवारों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह से की। उन्होंने पीड़ितों की शिकायत के बाद जाँच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 3 दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट आ जाएगी और उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट जेपी गुप्ता ने भी इस बारे में रविवार (सितंबर 1, 2019) को बताया कि जिला प्रशासन में कुछ लोगों द्वारा शिकायतें आईं हैं कि आज़म खान ने कांशीराम योजना के अंतर्गत उन्हें फर्जी आवंटन पत्र दिए। जेपी गुप्ता ने कहा कि वो इस मामले की जाँच करेंगे और यदि जाँच में सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है, तो आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जाँच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है।

गौरतलब है कि, इससे पहले शनिवार (अगस्त 31, 2019) को आज़म खान और इनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ रामपुर जिले में घर खाली करने के लिए मजबूर करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित ने पुलिस से की गई शिकायत में दावा किया था कि अक्टूबर 15, 2016 को 15 से 20 लोगों का एक समूह उसके घर में घुसा और उसे खाली करने के लिए कहा। घर खाली न करने पर जाने से मारने की धमकी भी दी। इस मामले में पुलिस ने आज़म खान और उनके साथियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 427, 323, 504 ,506, 395 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया था।

आज़म खान पर मदरसे से किताबें चुरा कर जौहर यूनिवर्सिटी में रखने, सिंचाई विभाग की ज़मीन हड़पने, शत्रु सम्पत्ति को फर्जीवाड़ा कर फ़र्ज़ी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्ति घोषित किए जाने समेत कई मामले दर्ज हैं। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चेहरे चमक गए, पर मुद्दे धुंधले पड़े: CJP की अंदरूनी लड़ाई ने आंदोलन की साख पर उठाए सवाल, छात्रों के टूटते भरोसे की कहानी

CJP के भीतर विवाद, नेताओं की सक्रियता और छात्रों की नाराजगी ने आंदोलन की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। समझें कैसे असली मुद्दे पीछे छूट गए?

CJP प्रोपेगेंडा आपकी टाइमलाइन तक कैसे पहुँच रहा? समझिए Meta का एल्गोरिदम और मॉडरेशन कैसे साध रहे ग्लोबल लेफ्ट का नैरेटिव

CJP के प्रदर्शन से जुड़े Videos और पोस्ट Meta का एल्गोरिदम कैसे लोगों के फीड तक पहुँचा रहा है, जिन्होंने फॉलो नहीं किया, वो भी इनको देख रहे।
- विज्ञापन -