Homeदेश-समाजहाईकोर्ट ने WFI के चुनावों पर लगाई रोक, असम कुश्ती संघ की याचिका पर...

हाईकोर्ट ने WFI के चुनावों पर लगाई रोक, असम कुश्ती संघ की याचिका पर लिया फैसला

याचिका में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 5 नवम्बर 2014 को भारतीय कुश्ती महासंघ की जनरल काउंसिलिंग की मीटिंग हुई थी।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इसी साल 11 जुलाई को होने वाले कुश्ती महासंघ के चुनाव पर रोक लगा दी है। यह निर्णय रविवार (25 जून, 2023) को असम कुश्ती महासंघ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय को भी आदेश दिया है कि वो अगली तारीख तय होने तक इन चुनावों को स्थगित रखे। असम कुश्ती महासंघ ने अपनी याचिका में WFI, भारतीय ओलम्पिक संघ और खेल मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम कुश्ती संघ ने इन चुनावों की तारीख टालने की याचिका दायर की थी। खेल मंत्रालय और भारतीय कुश्ती महासंघ को पार्टी बनाते हुए असम कुश्ती संघ ने खुद को भारतीय कुश्ती संघ का सदस्य बनने का हकदार बताया था। याचिका में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 5 नवम्बर, 2014 को भारतीय कुश्ती महासंघ की जनरल काउंसिलिंग की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में WFI कार्यकारी समिति ने असम कुश्ती संघ को अपना संबद्ध सदस्य बनने योग्य बताया था।

याचिका में आगे बताया गया है कि साल 2014 में पास हुए प्रस्ताव में असम कुश्ती संघ को WFI का मेंबर बनाने की सहमति के बावजूद आज तक उस पर अमल नहीं हुआ है। असम कुश्ती संघ का यह भी कहना है कि जब तक वो WFI से संबद्ध नहीं है तब तक वो निर्वाचक मंडल में अपना कोई प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर सकते। इस आधार पर असम कुश्ती संघ ने 11 जुलाई को प्रस्तावित भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपक संघ और WFI को भी इस बावत निर्देश जारी किए हैं।

इन निर्देशों में अगली तारीख तय होने तक चुनाव न करवाने के लिए कहा गया है। बताते चलें कि पहले भारतीय कुश्ती महासंघ का चुनाव 6 जुलाई को प्रस्तावित था। बुधवार (21 जून 2023) को भारतीय ओलम्पिक संघ ने इसे 5 दिनों के लिए और बढ़ा कर 11 जुलाई कर दिया था। इस पैनल के निर्वाचन मंडल के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 25 जून (रविवार) तक रखी गई थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं, पढ़ें- CJP...

कॉकरोचों के प्रदर्शन में छात्रों के मुद्दे नहीं बल्कि आजादी के नारे, डफली गैंग, तिरंगे से बदसलूकी और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान दिखा। पढ़ें रिपोर्ट।

तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के ‘घृणा मॉडल’ को अन्नामलाई की चुनौती, पेरियार नहीं, कलाम हैं आदर्श: समझें- ‘We The Change’ से राष्ट्रवाद का शंखनाद...

अन्नामलाई ने कहा कि तमिल संस्कृति-भाषा पर गर्व और भारत माता के प्रति समर्पित रहना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
- विज्ञापन -