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‘अगली बार रोका तो छुरा घोंप दूँगा’: संभल के रहीश अहमद ने ड्यूटी कर रहे कॉन्स्टेबल को दी धमकी, Video हुआ वायरल तो UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक पुलिसकर्मी को चाकू घोंपकर मारने की धमकी दी गई है। यह धमकी रहीश अहमद नाम के एक बुजुर्ग ने दी है। अहमद को पुलिसकर्मी ने चेकिंग के दौरान रोका था। इससे वह नाराज हो गया था। उसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज करके रहीश को गिरफ्तार कर लिया है। घटना मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) की है।

यह घटना संभल के थानाक्षेत्र चंदौसी की है। इसको लेकर कॉन्स्टेबल देवेंद्र कुमार ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने कहा कि दोपहर लगभग 12:30 बजे एक पेट्रोल पम्प के पास उनकी ड्यूटी लगी थी। वहाँ उन्होंने देखा कि बाइक पर सवार 2 लोग बिना हेलमेट के आ रहे थे। देवेंद्र ने बाइक को रोक कर चेकिंग की तो रहीश के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं मिला। इसके बाद देवेंद्र ने चालान काट दिया।

चालान करने से रईस अहमद भड़क गया। उसने पुलिसकर्मी को जान से मारने की धमकी दी। उस दौरान कुणाल नाम के एक अन्य सिपाही बीच-बचाव करता रहा। इसके बावजूद रहीश धमकियाँ देता रहा। उसने पेट की ओर इशारा करते हुए कहा, “अगली बार रोका तो छुरा घोंप दूँगा।” रईस की इस हरकत का जब पुलिसकर्मी वीडियो बनाने लगे तो वो रिश्वत के झूठे आरोप लगाने लगा।

कुछ ही समय में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के साथ नेटीजेंस रहीश अहमद पर कार्रवाई की माँग करने लगे। कार्रवाई की माँग करने वालों में भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी भी शामिल हैं। इधर पुलिस ने की तहरीर पर रहीश अहमद को नामजद करते हुए उसके साथ बाइक पर बैठे एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया है।

यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 121 (1), 132 और 351 (2) के तहत दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास इसकी कॉपी मौजूद है। वहीं, शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) को संभल पुलिस ने बताया किआरोपित रहीश अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया है। रहीश के साथ बाइक पर मौजूद उसके दूसरे साथी की पहचान व तलाश के प्रयास किए जा रहे हैं।

‘पति-पत्नी के यौन संबंध निजी, अप्राकृतिक सेक्स की डिमांड करना क्रूरता नहीं’ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की महिला की याचिका, दहेज का केस रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक पति-पत्नी के बीच का विवाद सामने आया, जिसमें पत्नी ने पति पर दहेज की माँग, प्रताड़ना, और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे। दोनों की शादी 7 दिसंबर 2015 को हुई थी और मामला 23 जुलाई 2018 को दर्ज किया गया। पत्नी का कहना था कि पति शराब का आदी है, उससे अप्राकृतिक सेक्स करने की कोशिश करता है, और जब वह मना करती है तो उसे मारने की धमकी देता है। पत्नी ने अपने पति पर अश्लील फिल्में देखने और उसके सामने गंदी हरकतें करने का भी आरोप लगाया। उसने बताया कि सिंगापुर में भी उसे पति द्वारा प्रताड़ित किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान पति और उसके परिवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पत्नी के सभी आरोपों को खारिज करने की माँग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों के बयान और FIR की जाँच के बाद यह पाया कि दहेज की माँग और प्रताड़ना के आरोप अस्पष्ट थे। महिला के पास अपने दावों का कोई ठोस सबूत नहीं था, और किसी भी स्थिति में उसे कोई गंभीर शारीरिक चोट नहीं पहुँचाई गई थी।

कोर्ट ने पाया कि पति द्वारा पत्नी से यौन संबंध बनाने की माँग को क्रूरता का मामला नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की, “यदि पति अपनी पत्नी से सेक्स की डिमांड नहीं करेगा, तो वह अपनी यौन इच्छाओं को कैसे पूरा करेगा?” कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मामले सभ्य समाज के यौन संबंधों के सामान्य नियमों के खिलाफ नहीं हैं।

जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “यह स्पष्ट है कि विवाद पार्टियों के सेक्स को लेकर एकमत नहीं होने की वजह से था। अगर पार्टियों के बीच यौन संबंध को लेकर सहमति न हो, तो इससे आपसी विवाद स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है।”

महिला ने अपने पति पर सिंगापुर में भी प्रताड़ना के आरोप लगाए थे, लेकिन कोर्ट ने इस आरोप को भी सबूतों की कमी के कारण खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं था कि महिला को सिंगापुर में किस प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था, और FIR में इसके स्पष्ट विवरण का अभाव था। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में दहेज की माँग का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं था और क्रूरता के आरोप भी सही साबित नहीं हुए।

इस केस में महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की कोशिश की और जब उसने इनकार किया, तो उसके साथ मारपीट की गई। लेकिन कोर्ट ने यह देखा कि पति द्वारा अप्राकृतिक यौन संबंध की कोशिश के ठोस सबूत पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों का सवाल एक व्यक्तिगत मामला है, और अगर इसमें दोनों पक्षों की सहमति नहीं होती, तो इसे दहेज या प्रताड़ना से जोड़ना गलत है।

महिला के आरोपों में से एक यह भी था कि उसका पति अश्लील फिल्में देखने का आदी है और उसके सामने अश्लील हरकतें करता है। लेकिन इस आरोप का भी समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था। कोर्ट ने कहा कि पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों में साक्ष्यों की कमी है, और ऐसे में यह मामला दहेज प्रताड़ना का नहीं है।

मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कोर्ट ने पाया कि पति और पत्नी के बीच मुख्य विवाद यौन संबंध बनाने को लेकर था। पत्नी ने पति की यौन इच्छाओं को अप्राकृतिक माना, जबकि पति का कहना था कि उसने कुछ भी असामान्य नहीं किया। कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि इस मामले में पति द्वारा पत्नी से यौन संबंध बनाने की मांग को असामान्य नहीं माना जा सकता, और इसे दहेज या प्रताड़ना के आरोपों से जोड़कर देखना उचित नहीं है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “पति-पत्नी के बीच यौन संबंध का मामला उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा है। अगर इसमें सहमति नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि मामला दहेज प्रताड़ना का है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यौन संबंधों को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो उसे क्रूरता के रूप में नहीं देखा जा सकता, जब तक कि इसके पीछे कोई स्पष्ट और गंभीर कारण न हो।

इस फैसले के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला द्वारा दर्ज की गई FIR को खारिज कर दिया और कहा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में ठोस सबूतों की कमी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दहेज की माँग और क्रूरता के आरोपों में कोई स्पष्टता नहीं थी, और पति के यौन संबंध बनाने की माँग को क्रूरता के दायरे में नहीं रखा जा सकता।

इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि यौन संबंधों से जुड़े विवादों को गंभीरता से लेने के लिए साक्ष्यों की आवश्यकता होती है। बिना ठोस सबूतों के, किसी भी पति-पत्नी के व्यक्तिगत मामलों को कानूनी रूप से अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यौन संबंधों से जुड़े मुद्दों को निजी और व्यक्तिगत मामलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, और इन्हें क्रूरता या प्रताड़ना के आरोपों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में महिला के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों का मामला एक निजी मामला है, और इसमें सहमति न होने पर इसे कानूनी अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने पति की यौन संबंध बनाने की माँग को सही ठहराया और कहा कि यह क्रूरता के दायरे में नहीं आता।

राम मंदिर के पास गुब्बारे बेचने आया मोहम्मद हयात, महिला श्रद्धालुओं को देख करने लगा अश्लील इशारे: UP पुलिस ने केस दर्ज कर की कार्रवाई

धर्मनगरी अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में महिला श्रद्धालुओं से छेड़खानी का मामला सामने आया है। इस छेड़खानी के आरोप में पुलिस ने मोहम्मद हयात नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। हयात मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का रहने वाला है। वह रामजन्मभूमि नव निर्मित मंदिर के पास लम्बे समय से गुब्बारे बेच रहा था। घटना मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) की है।

यह घटना अयोध्या के थानाक्षेत्र रामजन्मभूमि की है। यहाँ मंगलवार को उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला सब इंस्पेक्टर आशा तिवारी ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में आशा ने बताया कि 8 अक्टूबर को वो महिला सब इंस्पेक्टर उमा देवी और होमगार्ड गायत्री के साथ हनुमान गढ़ी के पास गश्त पर थीं। इसी दौरान एक मुखबिर ने उनको बताया कि टी-शर्ट और लोअर पहने एक व्यक्ति महिलाओं से छेड़खानी कर रहा है। छेड़खानी की जगह रामजन्मभूमि के नवनिर्मित राम मंदिर के पास बताई गई।

मुखबिर की सूचना पर महिला पुलिसकर्मियों की यह टीम घटनास्थल की तरफ निकल पड़ी। सूचना सही पाई गई और राम मंदिर के पास बताए गए हुलिए से मिलता-जुलता एक व्यक्ति मौजूद मिला। महिला पुलिसकर्मी दूर से ही उस व्यक्ति की हरकतों की निगरानी करने लगीं। उन्होंने देखा कि एक महिला के साथ 3 लड़कियाँ उधर से गुजरीं जिनको देख कर आरोपित अश्लील हरकतें करने लगा। वह लड़कियों को गंदे-गंदे गाने भी सुना रहा था।

शिकायत में बताया गया है कि आरोपित की इस करतूत से मंदिर के पास गुजर रहीं लड़कियाँ शर्मिंदगी महसूस कर रहीं थीं। वो बिना कुछ बोले ही वहाँ से चली गईं। यह हरकत देख कर पुलिसकर्मियों की टीम आरोपित की तरफ आगे बढ़ी। पुलिस को अपनी तरफ बढ़ता देख कर आरोपित मंदिर की तरफ भागने लगा। आखिरकार महिला पुलिसकर्मियों की टीम ने आरोपित को दौड़ा कर पकड़ लिया। यहाँ पूछताछ में उसने अपना नाम मोहमद हयात बताया।

लगभग 32 वर्षीय मोहम्मद हयात मूल रूप से लखनऊ के सुंदर नगर इलाके का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम बाबू रज़ा है। वह लम्बे समय से अयोध्या में रामजन्मभूमि के पास गुब्बारे बेच रहा था। महिला सब इंस्पेक्टर की इस तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है। इस FIR में मोहम्मद हयात को नामजद करते हुए उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 के तहत कार्रवाई की गई है।

इस मामले में 7 साल से कम की सजा होने की वजह से उसको भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 (C) की नोटिस दे कर रिहा कर दिया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। शुक्रवार (11 अक्टूबर) को अयोध्या पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘BJP आतंकियों की पार्टी… लिंचिंग और जनजातियों के सिर पर पेशाब करती है’: कॉन्ग्रेस प्रमुख खड़गे के विवादित बोल, RSS पर भी निकाली कुंठा

कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा को आतंकवादियों की पार्टी कहा है। उन्होंने शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को कहा कि प्रधानीमंत्री मोदी की आदत है कि वो कॉन्ग्रेस को हमेशा अर्बन नक्सल पार्टी बताते हैं, लेकिन उनकी पार्टी क्या है? उन्होंने कहा कि भाजपा आतंकवादियों की पार्टी है, जो लिंचिंग में शामिल रहती है। इसलिए मोदी को ऐसे आरोप लगाने का हक नहीं है।

दलित समाज से आने वाले खड़गे ने ANI से बातचीत में कहा, “जहाँ भी भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ शेड्यूल कास्ट खासकर आदिवासियों पर अत्याचार किया जा रहा है। शेड्यूल कास्ट के लोगों पर पेशाब करती है। आदिवासियों का रेप करती है। ऐसा करने वालों का सपोर्ट भी करती है। वो दूसरों पर आरोप लगाते हैं। उनको ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।”

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ठाणे में कहा कॉन्ग्रेस और उसकी नीतियों को लेकर जमकर हमला बोला था। प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय कहा था, “कॉन्ग्रेस और उनके सहयोगियों का एक ही मिशन है- बाँटो और सत्ता में रहो। कॉन्ग्रेस को अर्बन नक्सल गैंग चला रहे हैं। वह देश विरोधियों के साथ खड़ी है।”

वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भी उन्होंने पलटवार किया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जिस पार्टी का मकसद देश को बाँटना है, उन्हें सपोर्ट करने वाले देश में ही हैं। वह संघ प्रमुख भागवत हैं। संविधान बदलना हो, रिजर्वेशन हो, हिंदू-मुसलमानों को अलग करने की बात करने वाले ये लोग हैं और बुद्धि दूसरे लोगों को बाँट रहे हैं।”

दरअसल, शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को महाराष्ट्र के नागपुर में विजयदशमी के कार्यक्रम में RSS के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी कुछ ऐसा ही कहा था। उन्होंने किसी का लिए बिना देश को बाँटने की साजिश रचने का आरोप लगाया। इसी बयान को लेकर खड़गे ने यह बात कही है।

दिलवर खान ने फँसाई नाबालिग हिंदू लड़की, अश्लील वीडियो बनाकर कई बार रेप किया: उत्तराखंड के चमोली में बवाल के बाद हुआ गिरफ्तार, अवैध रूप से रह रहे मुस्लिमों को बाहर करने की माँग

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर से लव जिहाद के आरोप में हिन्दू समाज आंदोलित है। इस बार घटनास्थल चमोली जिला है जहाँ दिलवर खान नाम के मुस्लिम युवक पर एक नाबालिग हिन्दू लड़की से रेप करने और उसका अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने का आरोप लगा है। पुलिस इस मामले में 10 अक्टूबर को आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं क्षेत्र में घटना से नाराज हिन्दुओं का प्रदर्शन भी देखने को मिला, जिन्होंने माँग उठाई है कि इलाके में गैर कानूनी ढंग से रह रहे मुस्लिमों को बाहर किया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना चमोली के थराली क्षेत्र की है। लगभग 4 साल पहले यहाँ मुकेश नाम के मकान मालिक के यहाँ दिलवर खान ने किराए पर दुकान ली। धीरे-धीरे यहाँ दिलवर का व्यापार को ले कर आना-जाना शुरू हो गया। पहाड़ी क्षेत्रों में व्यापार करते हुए दिलवर खान ने एक नाबालिग लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। बताया जा रहा है कि पीड़िता और आरोपित की पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी।

कुछ ही दिनों की दोस्ती के बाद दिलवर खान ने पीड़िता को मिलने के लिए बुलवाया। यहाँ उसने नाबालिग लड़की से बलात्कार किया। आरोप है कि इसी दौरान दिलवर ने पीड़िता की अश्लील फोटो और वीडियो बना डाली। इन्हीं वीडियो और फोटो के जरिए उसने कई बार नाबालिग से रेप किया। आखिरकार तंग हो कर लड़की ने अपने पिता को सारी बात बता दी। लड़की के पिता ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस में शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलते ही दिलवर ने पीड़िता के तमाम आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल कर दिए। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़क उठा। हिन्दू संगठन के सदस्यों सहित तमाम पहाड़ी लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारी अवैध तौर पर रह रहे बाहरी मुस्लिमों को तत्काल बाहर निकालने की माँग कर रहे थे। लोगों ने हुजूम में उन हिन्दू मकान मालिकों की भी निंदा की जिन्होंने अपनी दुकानें बाहरी मुस्लिमों को किराये पर दे रखीं हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए धराली व आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। चमोली के पुलिस अधीक्षक आईपीएस सर्वेश पंवार ने 10 अक्टूबर को बताया कि दिलवर खान को समुचित धाराओं में चालान करते हुए जेल भेज दिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इस कार्रवाई के साथ चमोली पुलिस ने जिले में सत्यापन अभियान भी छेड़ रखा है।

‘कॉन्ग्रेस के अहंकार ने लिखी हरियाणा में हार की पटकथा’: EVM रोने पर AAP नेता ने कसा तंज, बोले- अब हमें ही करनी होगी 2029 की तैयारी

हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बाद कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग में EVM की गड़बड़ी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के हरियाणा प्रमुख सुशील गुप्ता ने कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोला। गुप्ता ने कहा, “हमने हरियाणा से बीजेपी को हटाने के लिए पूरी कोशिश की थी। INDIA गठबंधन का हिस्सा होने के नाते, हमने अंतिम समय तक कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन की उम्मीद की थी। लेकिन कॉन्ग्रेस के अहंकार ने ये मौका गंवा दिया। अगर कॉन्ग्रेस इतनी घमंडी न होती, तो आज हरियाणा में उनकी गठबंधन सरकार होती।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने कभी अव्यवहारिक माँगें नहीं कीं, न ही ज्यादा सीटें माँगी थीं। लेकिन कॉन्ग्रेस की जिद और अहंकार ने बीजेपी को फायदा पहुँचाया। अब 2029 के चुनाव की तैयारी AAP अभी से शुरू करेगी। हरियाणा में कॉन्ग्रेस बीजेपी को हराने में सक्षम नहीं है, लेकिन अरविंद केजरीवाल इस बदलाव को सुनिश्चित करेंगे।”

यह बयान कॉन्ग्रेस के लिए न सिर्फ एक चेतावनी है, बल्कि हरियाणा की राजनीति में AAP की नई रणनीति का संकेत भी है। सुशील गुप्ता के इस तंज से साफ है कि कॉन्ग्रेस की असफलता के पीछे उसकी खुद की गलतियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

हार के बाद कॉन्ग्रेस में आपसी कलह

हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बाद कॉन्ग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ गया है। पूर्व मंत्री अजय यादव ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की हार का मुख्य कारण नेतृत्व की अक्षमता और पार्टी के भीतर के मतभेद हैं। यादव का मानना है कि अगर पार्टी नेतृत्व समय पर सही फैसले लेता और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करता, तो परिणाम अलग होते।

अजय यादव ने सुझाव दिया कि कॉन्ग्रेस पार्टी को हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र में मिली करारी हार पर आत्म-चिंतन करना चाहिए। यहाँ की 11 में से 10 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गई हैं। यादव ने कहा, “कॉन्ग्रेस कार्यसमिति, पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति, अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस समिति या हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति में अहीरवाल का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।”

OBC कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय यादव ने आगे कहा, “पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने मुझे ओबीसी विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसका कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह शक्तिहीन है। हम चुनाव इसलिए हार गए, क्योंकि राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच कोई समन्वय नहीं था।” इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने न तो कार्यकर्ताओं की सुनी और न ही सही दिशा में काम किया। परिणामस्वरूप, पार्टी को इस हार का सामना करना पड़ा।

ठप कर देंगे सारी मेडिकल सेवा… RG Kar रेप-मर्डर मामले में न्याय माँग रहे डॉक्टर आमरण अनशन पर, 1 प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने पर दी ममता सरकार को चेतावनी

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के विरोध में डॉक्टरों का आमरण अनशन जारी है। अनशन पर बैठे डॉक्टरों में से एक की हालत बिगड़ गई है। उसे गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) की रात अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस डॉक्टर की हालत गंभीर हो गई है। इसके बाद इन डॉक्टरों के समर्थन में मेडिकल एसोसिएशन भी आ गए हैं।

भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने जूनियर डॉक्टरों के आमरण अनशन के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से स्थिति बिगड़ने से पहले हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों को कोई नुकसान पहुँचा तो वह देश भर में चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर देगा। 

IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरवी अशोकन ने प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों से मुलाकात की और उनकी चिंताओं को सुना। अशोकन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से ‘बिना समय बर्बाद किए’ स्थिति को तुरंत संभालने का आह्वान किया। उहोंने कहा कि जूनियर डॉक्टरों ने अपना अनशन समाप्त करने पर चर्चा नहीं की। वे अपनी माँगों पर केंद्रित रहे और अपने दिवंगत सहयोगी के लिए न्याय को लेकर आश्वस्त रहे।

अशोकन ने कहा कि जूनियर डॉक्टर अपने मारे गए सहयोगी के लिए न्याय के साथ-साथ सुरक्षित कामकाजी माहौल उपलब्ध कराने और राज्य के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम को तत्काल हटाने की माँग कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों के प्रति प्रशंसा भाव से अशोकन ने कहा, “मैं इस बात से अभिभूत हूँ कि ये बच्चे अपने लिए नहीं, बल्कि लोगों की हित के लिए लड़ रहे हैं। वे असली नायक हैं और हमें उन पर गर्व है।”

शनिवार (5 अक्टूबर 2024) की रात से सात जूनियर डॉक्टर आमरण अनशन पर हैं। इनमें आरजी कर के अनिकेत महतो, कोलकाता मेडिकल कॉलेज की स्निग्धा हाजरा, तनया पांजा और अनुस्तुप मुखोपाध्याय, एसएसकेएम अस्पताल के अर्नब मुखोपाध्याय, एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पुलस्थ आचार्य और केपीसी मेडिकल कॉलेज की सायंतनी घोष हाजरा शामिल हैं।

अनशन के कारण हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो की हालत गंभीर, लेकिन स्थिर बताई जा रही है। क्रिटिकल केयर यूनिट में उनकी निगरानी कर रही पाँच डॉक्टरों की टीम के एक सदस्य के अनुसार, उन पर उपचार का असर होने लगा है। उन्हें गुरुवार रात को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

IMA ने गुरुवार को सीएम ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया है कि सुरक्षित कामकाजी माहौल एक विलासिता नहीं, बल्कि एक शर्त है। युवा डॉक्टरों को भूख हड़ताल शुरू किए हुए लगभग एक सप्ताह हो गया है और उन पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए। IMA ने कहा कि मानव जीवन से ज्यादा कीमती कुछ भी नहीं है। राज्य का कर्तव्य है कि वह उचित माँगों को स्वीकार करे।

नाबालिग दलित बच्चों की पहले की पिटाई… फिर सिर छिलाकर-कालिख पोतकर गाँव में जुलूस निकाला: बहराइच में केस दर्ज; नाजिम, कासिम और इनायत गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहाँ नाबालिग बच्चों को मारपीट करके बाजार में घुमाया गया है। इन बच्चों के बाल छील दिए गए और चेहरे पर कालिख पोत दी गई। इस अमानवीय करतूत का आरोप नाज़िम, कासिम, इनायत और शानू खाँ पर लगा है। इन सभी ने बच्चों और उनके परिवार का नरसंहार करने की भी धमकी दी है। पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। चौथे आरोपित शानू खाँ की संलिप्तता की जाँच करवाई जा रही है। घटना मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) की है।

यह घटना बहराइच जिले के नानपारा थानाक्षेत्र की है। यहाँ ताजपुर टेड़िया गाँव के रहने वाले राजित राम पासवान ने 8 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनके गाँव में शाहिद खाँ के बेटे नाज़िम का मुर्गी फार्म है। इस मुर्गी फार्म पर नाज़िम राजित राम के बेटे अमन के साथ उनके पड़ोसी अनूप व रोहित को जबरन काम करवाने ले जाता था। काम करवाने एक बाद वह बच्चों को 10-20 रुपए थमा दिया करता था।

मंगलवार (8 अक्टूबर) की दोपहर लगभग 1 बजे नाज़िम अपने बेटे कासिम व एक अन्य सहयोगी इनायत के साथ राजित राम के घर पहुँचा। वह अमन, अनूप और रोहित पर अपने मुर्गी फार्म से 5 किलो गेहूं चोरी का आरोप लगाने लगा। यहीं पर नाज़िम ने अपने साथियों सहित तीनों पीड़ितों को पीटना शुरू किया। वह तीनों को पीटते हुए अपने मुर्गी फार्म पर ले गया। यहाँ पर उसने तीनों नाबालिगों का गला दबा कर मार डालने की भी कोशिश की।

बेरहमी से हुई पिटाई के बाद नाज़िम, कासिम और इनायत ने तीनों बच्चों के चेहरे पर कालिख पोत दिया। उनके सिर के बाल छील कर उस पर पेंट से चोर लिख डाला गया। इसके बाद भीड़ जुटा कर रोहित, अनूप और अमन को पूरे इलाके में घुमाया गया। नाबालिगों का जुलूस निकाले जाने के दौरान आरोपितों ने ठहाके लगाए। इस दौरान बच्चों की पिटाई भी होती रही। लगभग 3 घंटे घुमाने के बाद तीनों बच्चों को उनके घर के पास 4 बजे छोड़ दिया गया।

राजित राम का आरोप है कि इतना सब कुछ घट जाने के बाद गाँव के पूर्व प्रधान शानू खाँ भी वहाँ पहुँचा। उसने पीड़ितों की मदद के बजाय आरोपितों का ही पक्ष लेना शुरू कर दिया। शानू से राजित राम सहित अन्य बच्चों को कहीं भी मुँह खोलने या किसी से शिकायत करने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी। इसी दौरान पीड़ित को जातिसूचक शब्द बोले गए और गंदी-गंदी गालियाँ भी दी गईं। रोते बिलखते बच्चों ने अपने परिजनों को सारी बात बताई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

अपने बच्चे व उसके साथियों के साथ हुए अत्याचार को सुनकर राजित राम ने पुलिस में तहरीर दी। उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस ने इस तहरीर पर नाज़िम, कासिम, इनायत और शानू खाँ को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 352, 351 (3) और 109 (1) के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। नाज़िम, कासिम और इनायत को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

140 यात्रियों की बची जान, 3 घंटे बाद खराब विमान लैंड हुआ: उड़ान भरते ही फ्लाइट के हाइड्रोलिक सिस्टम में आई थी खराबी, नीचे खड़ी थी 20+ एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे से शारजाह के लिए उड़ान भरने वाली वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट का हाइड्रोलिक होने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। दरअसल, शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) की शाम को उड़ान भरने के थोड़ी ही देर बाद ही विमान का हाइड्रोलिक गियर खराब हो गया। इसके बाद आपात स्थिति में इसकी लैंडिंग हुई। इस विमान में कुल 141 यात्री सवार थे। 

हाइड्रोलिक में खराबी का पता चलते ही फ्लाइट की आपातकालीन लैंडिंग कराने की कोशिश की गई। इसके लिए ईंधन को कम करना जरूरी था। इस कारण विमान करीब 2 घंटे तक शहर का गोल-गोल चक्कर काटता रहा। ईंधन कम होने के बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई। इसको लेकर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बयान भी जारी किया है।

एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने बयान में कहा कि वह तिरुचिरापल्ली-शारजाह मार्ग पर संचालित होने वाली उड़ान से संबंधित मीडिया रिपोर्टों से अवगत हैं। उसने कहा कि विमान के ऑपरेटिंग क्रू द्वारा किसी इमरजेंसी की घोषणा नहीं की गई थी। विमानन कंपनी ने यह भी बताया है कि विमान को बार-बार चक्कर क्यों लगवाया गया था।

कंपनी ने बताया कि सुरक्षित लैंडिंग से पहले विमान ने एक निर्दिष्ट क्षेत्र में कई बार चक्कर लगाए। ऐसा रनवे की लंबाई को ध्यान में रखते हुए विमान के ईंधन और वजन को कम करने के लिए किया गया। कंपनी ने कहा कि इस घटना या गड़बड़ी के कारणों की विस्तृत जाँच की जाएगी। वहीं, यात्रियों के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था करने की बात भी कही।

त्रिची के कलेक्टर ने कहा कि इससे पहले विमान को हल्का करने के लिए ईंधन गिराने पर विचार किया जा रहा था। हालाँकि, ऐसा नहीं किया गया क्योंकि विमान आवासीय क्षेत्रों के ऊपर चक्कर लगा रहा था। जिला कलेक्टर ने कहा, “एहतियाती उपाय के तौर पर हमने एम्बुलेंस और बचाव दल को स्टैंडबाय पर रखा है।”

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) हाइड्रोलिक विफलता के कारण का पता लगाने के लिए उस विमान की जाँच करेगा। बता दें कि उड़ान में हाइड्रोलिक फेल तब होती है जब लैंडिंग गियर, ब्रेक और फ्लैप जैसे महत्वपूर्ण भागों को नियंत्रित करने के लिए दबावयुक्त तरल पदार्थ का उपयोग करने वाली प्रणाली ठीक से काम करना बंद कर देती है।

घटना के वक्त इस विमान में कुल 141 यात्री सवार थे। इमरजेंसी लैंडिंग से पहले विमान ने कुल 21 चक्कर काटे। यात्रियों को इसकी वजह नहीं बताई गई। विमान के कैप्टन ने सिर्फ इतना अनाउंस किया कि विमान में तकनीकी खराबी है और कुछ देर में दुबारा लैंडिंग करेंगे। विमान से उतरने के बाद यात्रियों को पता चला कि फ्लाइट की हाइड्रोलिक गियर खराब हो गया था।

कहीं तोड़ी माँ की मूर्ति, कहीं पंडाल में फेंके पेट्रोल बम: भारत से बांग्लादेश तक दुर्गा पूजा में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदू आस्था पर किया हमला, पढ़ें 10 घटनाएँ

दुर्गा पूजा, जो हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, हर साल भारत और बांग्लादेश दोनों में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। लेकिन इस साल, पूजा के दौरान दोनों देशों में कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने त्योहार के उत्सव को विघ्नित करने की कोशिश की। इन घटनाओं ने न केवल पूजा के धार्मिक महत्व को ठेस पहुँचाई, बल्कि हिंदू समुदाय के मनोबल पर भी गहरा असर डाला।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान बमबाजी और मूर्तियों के विखंडन जैसी 35 सांप्रदायिक घटनाएँ हुईं, जिससे हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बन गया है। पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने कहा कि इन घटनाओं में शामिल 17 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। कट्टरपंथियों द्वारा लगातार हो रहे हमलों ने हिंदू समुदाय को एकजुट होने और अपनी रक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।

भारत में भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के आयोजनों में विघ्न डालने की कोशिश की, जिसमें कई स्थानों पर विवाद और हिंसा की घटनाएँ सामने आईं। ये घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि धार्मिक असहिष्णुता का खतरा दोनों देशों में बढ़ रहा है, और इस पर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। आइए इन घटनाओं को विस्तार से समझते हैं:

ढाका में पेट्रोल बम हमला

11 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दुर्गा पूजा पंडाल पर पेट्रोल बम से हमला हुआ। यह घटना टाटी बाजार इलाके में घटी, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा स्थल पर बम फेंक दिया, जिससे भगदड़ मच गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोपित मोहम्मद और उसके साथी इस घटना के पीछे थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह हमला बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ते खतरे का प्रतीक है, जिसने देश के हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया।

पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाई और हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया। घटना के बाद कई संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस्लामी कट्टरपंथियों के इस हमले ने बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया है।

चटगाँव में दुर्गा पूजा के मंच पर कब्जा कर गाए इस्लामी गाने

9 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में दुर्गा पूजा मंडप पर एक और घटना घटी, जब कुछ मुस्लिम युवकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान इस्लामी गाने गाने शुरू कर दिए। आरोपियों में से छह युवकों को बाद में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने पहले आयोजकों से देशभक्ति के गाने गाने की अनुमति माँगी थी, लेकिन मंच पर कब्जा कर इस्लामी क्रांति का प्रचार करने लगे। उनकी इस हरकत ने पूजा में आए श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया और वहाँ तनाव का माहौल बना दिया।

चटगाँव में इस घटना ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दिया, क्योंकि यह बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार किया और मामले की जाँच शुरू की। यह घटना दिखाती है कि किस तरह से कट्टरपंथी ताकतें धार्मिक समारोहों को विघ्नित करने की कोशिश कर रही हैं।

दुर्गा पूजा के दौरान मूर्तियों पर हमला और तोड़फोड़

चटगाँव में ही दुर्गा पूजा के दौरान एक और गंभीर घटना घटी, जब कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक मंदिर पर हमला किया और दुर्गा मूर्तियों को तोड़ दिया। यह घटना पूजा के मुख्य कार्यक्रम के दौरान हुई, जब स्थानीय हिंदू समुदाय पूजा में व्यस्त था। हमलावरों ने मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया और पूजा स्थल पर तोड़फोड़ की, जिससे पूजा स्थल में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस ने इस घटना पर भी तेजी से कार्रवाई की, लेकिन अधिकांश आरोपी फरार हो गए। इस तरह के हमलों ने बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता की स्थिति को और बढ़ा दिया है। हिंदू समुदाय के नेताओं ने सरकार से ऐसे कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

बौद्ध समुदाय पर कट्टरपंथियों का दबाव: त्योहार रद्द

बांग्लादेश में सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि बौद्ध समुदाय भी इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया। इस साल, बौद्ध समुदाय को अपने प्रमुख त्योहार ‘कथिन चीवर दान’ को रद्द करना पड़ा। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को दुर्गा पूजा और मूर्ति विसर्जन से रोकने की धमकी दी थी, और साथ ही बौद्ध समुदाय को भी अपने त्योहार न मनाने की चेतावनी दी।

धमकियों के चलते, स्थानीय बौद्ध समुदाय ने अपना त्योहार रद्द कर दिया, ताकि सांप्रदायिक हिंसा से बचा जा सके। यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ते खतरे का प्रतीक है, जहां कट्टरपंथी ताकतें अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए डर और धमकियों का सहारा ले रही हैं।

बांग्लादेश के IGP का बयान: 35 घटनाओं में 17 गिरफ्तार

बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने बयान में कहा है कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान कुल 35 हमलों की घटनाएँ हुई हैं, जिनमें पूजा पंडालों पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा शामिल है। अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात ये है कि बांग्लादेश के आईजीपी मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं को कमतर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती है।

मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने कहा, “पूरे बांग्लादेश में 32000 मंडप लगे हैं। ऐसी घटनाएँ हिंदुओं ही नहीं, मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती हैं।” रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में ज्यादातर हमलावर इस्लामिक कट्टरपंथी थे, जो हिंदू धार्मिक स्थलों और त्योहारों को निशाना बना रहे थे। इन घटनाओं से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में दुर्गा पूजा पंडाल पर हमला

भारत में भी दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा हिंसा की घटनाएँ दर्ज की गईं। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पंडाल में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोपितों में कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार शामिल हैं, जिन्होंने महिला श्रद्धालुओं से अभद्रता की और पंडाल में लगे भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। महिलाओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना दुर्गा पूजा के शांतिपूर्ण उत्सव में बाधा डालने का एक स्पष्ट उदाहरण है। हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान पथराव

उत्तर प्रदेश के गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान आतिशबाजी को लेकर विवाद हुआ। असलम पुत्र लल्लन, सुल्तान पुत्र अजात, मुन्ना पुत्र इदरीश की अगुवाई में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आतिशबाजी पर आपत्ति जताई और फिर पूजा स्थल पर पथराव शुरू कर दिया। यह घटना सांप्रदायिक तनाव का परिणाम थी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने पथराव में शामिल आरोपितों में से कई को गिरफ्तार किया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और पुलिस गश्त तेज कर दी। हालाँकि, इस प्रकार की घटनाओं ने क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल दिया है।

कोलकाता में माइक की आवाज पर विवाद

कोलकाता में एक दुर्गा पूजा पंडाल में मुस्लिमों ने माइक की आवाज को लेकर विवाद खड़ा किया। अजान के दौरान माइक की आवाज को बंद करने की माँग करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा समारोह को बाधित किया। आयोजकों ने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हंगामा शुरू कर दिया।

शिकायत में कहा गया है कि 11 अक्तूबर की सुबह न्यू बंगाल स्पोर्टिंग क्लब द्वारा जब अष्टमी और नवमी के अनुष्ठान किए जा रहा था, तब आज दोपहर 1.13 बजे लगभग 50-60 उपद्रवी लोग आए और उन्होंने पूजा को रोकने को कहा और पूजा को भंग करने का प्रयास किया। उन्होंने धमकी दी कि अगर पूजा नहीं रोकी गई तो वो मां दुर्गा की प्रतिमा को तोड़ देंगे। इस दौरान उन्होंने धक्का-मुक्की की और हमारी महिला सदस्यों के खिलाफ गलत शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

कुशीनगर में दुर्गा मूर्ति पर पथराव

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक और गंभीर घटना सामने आई, जब दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मूर्ति पर पथराव किया। इस घटना में 10 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए आरोपितों को गिरफ्तार किया और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। इस तरह की घटनाएँ पूजा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देती हैं और समाज में दरार पैदा करती हैं। हिंदू समुदाय ने प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

असम के करीमगंज में सांप्रदायिक हिंसा

असम के करीमगंज में दुर्गा पूजा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा स्थल पर पथराव किया, जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया और स्थिति को काबू में लाया। यह घटना असम में सांप्रदायिक सौहार्द पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है, जहाँ धार्मिक त्योहारों के दौरान हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है। पुलिस ने सहाबुल अहमद (21 साल), अब्दुल अहद (18 साल) और एक नाबालिग को भी गिरफ्तार किया है।

इस साल दुर्गा पूजा के दौरान भारत और बांग्लादेश में कई घटनाएँ सामने आईं, जहाँ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पूजा स्थलों पर हमले किए। इन घटनाओं ने धार्मिक असहिष्णुता की गंभीरता को उजागर किया है। दोनों देशों की सरकारों को इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखा जा सके।