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बंगाल की CPIM सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को ममता सरकार ने आगे बढ़ाया: 24 घंटे में लिए ताबड़-तोड़ फैसले, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे में चौंकाने वाले खुलासे

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने बिना किसी जाँच-पड़ताल के मुस्लिम समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे में शामिल कर लिया, ताकि अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधा जा सके। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सरकार ने न केवल राज्य में पिछली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सरकार द्वारा अपनाई गई तुष्टिकरण नीति को जारी रखा, बल्कि उसमें और इजाफा भी किया।

अब, ममता बनर्जी की सरकार पर 77 जातियों को मनमाने ढंग से ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के लिए आलोचना हो रही है। इन 77 जातियों में 75 जातियाँ मुस्लिमों से संबंधित हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 22 मई को अपने ऐतिहासिक फैसले में 5 मार्च 2010 और 11 मई 2012 के बीच वामपंथी और टीएमसी सरकारों द्वारा 77 समूहों को जारी किए गए ओबीसी प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया था।

इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करके अपने फैसले का बचाव किया। CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने 5 अगस्त के अपने आदेश में ओबीसी श्रेणी में शामिल होने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में सरकार से विवरण माँगा था। हालाँकि, इसके विवरणों से पता चलता है कि मुस्लिम मतदाताओं को खुश करने के लिए सभी मानदंडों का उल्लंघन किया।

जटिल 3-स्तरीय प्रक्रिया, लेकिन कई खामियाँ

TOI के अनुसार, सरकार ने दावा किया कि ओबीसी सूची का विस्तार एक जटिल तीन-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। इसमें दो सर्वेक्षण और पिछड़ा वर्ग आयोग की एक सुनवाई शामिल थी। दूसरी ओर यह खुलासा किया गया है कि कुछ मुस्लिम समूहों के लिए यह प्रक्रिया एक दिन से भी कम समय में पूरी की गई। यह जटिलता और सरकारी मशीनरी की गति को देखते हुए असंभव प्रतीत होता है।

यह बात सामने आई है कि खोट्टा मुस्लिम समुदाय ने 13 नवंबर 2009 को आवेदन किया और उसी दिन पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग ने उसे ओबीसी सूची में शामिल करने की सिफारिश कर दी। इसी तरह 21 अप्रैल 2010 को आवेदन करने वाले जमादार मुस्लिम समूह को उसी दिन ओबीसी श्रेणी में शामिल कर लिया गया।

इसने एक दिन के भीतर गायेन और भाटिया मुस्लिम समुदायों को शामिल करने की सिफारिश की गई। चार दिनों में चुटोर मिस्त्री मुस्लिम समुदाय को शामिल किया और एक महीने से भी कम समय में एक दर्जन अन्य मुस्लिम समूहों को ओबीसी सूची में शामिल कर लिया गया। ओबीसी आयोग ने इस मामले में आश्चर्यजनक गति से काम किया।

ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ उप-वर्गीकरण सर्वेक्षण का काम समुदाय के सदस्यों द्वारा ओबीसी श्रेणी में शामिल होने के लिए आयोग में आवेदन करने से पहले ही कर दिया गया। काजी, कोटल, हजारी, लायेक, खस और कुछ अन्य मुस्लिम समुदायों के लिए सर्वेक्षण जून 2015 में पूरा कर लिया गया था, लेकिन उन्हें OBC में शामिल करने का आवेदन काफी बाद में, यहाँ तक ​​कि एक या दो साल बाद दिए गए।

पश्चिम बंगाल की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में इसके पक्ष में अपना तर्क दिया। राज्य सरकार ने दावा किया, “विस्तृत जाँच और/या मौखिक या दस्तावेजी प्रकृति में उसके समक्ष प्रस्तुत सामग्री पर विचार करने के बाद ही 34 समुदायों में से प्रत्येक पर अंतिम रिपोर्ट आयोग द्वारा अंतिम सिफारिश के साथ तैयार की गई थी।”

अभिजीत मुखर्जी द्वारा प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, प्रक्रिया उन समुदायों द्वारा आवेदन से शुरू होती है जो ओबीसी सूची में शामिल होना चाहते हैं। इनमें वर्ग का नाम, उसकी जनसंख्या, उसका निवास क्षेत्र के साथ-साथ उनकी सामाजिक, शैक्षिक, वैवाहिक, व्यावसायिक और आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है। मुखर्जी फिलहाल पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव और पदेन संयुक्त आयुक्त (आरक्षण) हैं।

अभिजीत मुखर्जी ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस मामले में तीन-स्तरीय प्रक्रिया का बेहद सावधानीपूर्वक पालन किया है। आयोग अपने सदस्यों (2012 से पहले) या राज्य सरकार के सांस्कृतिक अनुसंधान संस्थान (CRI) और उनके साथ काम करने वाले मानवविज्ञानियों (2012 के बाद) के माध्यम से अनुरोध करने पर क्षेत्र का सर्वेक्षण करता है।

आयोग आवेदन की सुनवाई और ऐसे सर्वेक्षण के दौरान दावे के किसी भी विरोध के बारे में जनता को सूचित करता है। आयोग प्रस्ताव को स्वीकृत या अस्वीकृत करने का निर्णय लेने से पहले सार्वजनिक सुनवाई में प्रस्तुत दस्तावेजों, सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं, प्रश्नों और साक्ष्यों की समीक्षा करता है।

राज्य सरकार ने कहा कि यह सिफारिश स्वीकृति के बाद सरकार पर सामान्य रूप से बाध्यकारी है और सरकार उस समूह को ओबीसी सूची में शामिल कर लेती है। उसके बाद कैबिनेट को इसे स्वीकृत करने के लिए कहा जाता है और बाद में प्राधिकरण के बाद इसे आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है।

कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणी

इस साल मई में कलकत्ता हाई कोेर्ट की न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती और राजशेखर मंथा की पीठ ने 5 मार्च 2010 और 11 मई 2012 के बीच वामपंथी और तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकारों द्वारा 77 समूहों को जारी किए गए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र रद्द कर दिए थे। न्यायाधीशों ने पाया कि पश्चिम बंगाल प्रशासन ने 2006 की सच्चर समिति की रिपोर्ट का ‘व्यापक रूप से’ उपयोग किया।

कोर्ट ने यह पाया कि इसके व्यापक उपयोग से कुख्यात निष्कर्ष निकाला गया कि भारत में मुस्लिम अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सदस्यों की तुलना में बदतर स्थिति में हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के अनुसार, मुस्लिमों को पिछड़ा बताने और उन्हें ओबीसी के रूप में वर्गीकृत करने के लिए राज्य द्वारा इस्तेमाल की गई सच्चर समिति की रिपोर्ट में संवैधानिक वैधता का अभाव था।

न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा नियुक्त आयोग की लापरवाही पर भी सवाल उठाया, क्योंकि उसने ओबीसी श्रेणी में शामिल समूहों के सामाजिक वंचना की गहराई का पता लगाने के लिए गहन जाँच करने में विफल रहा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल पुरानी हो चुकी मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 2011 से 2022 के बीच ओबीसी श्रेणियों को अधिसूचित करना उचित नहीं है।

इसके अलावा, कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) अधिनियम 2012 पारित करके और नए ओबीसी की पहचान करने की प्रक्रिया में आयोग की भागीदारी को समाप्त करके, पश्चिम बंगाल सरकार ने ‘राज्य की संवैधानिक शक्ति के साथ धोखाधड़ी’ की है।

विद्वान न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग ने मुसलमानों को ओबीसी के रूप में वर्गीकृत करने के लिए संवैधानिक प्रावधानों की कैसे अवहेलना की। अदालत ने आगे बताया कि कलकत्ता विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग ने धार्मिक मानदंडों पर आधारित नए ओबीसी के पहले समूह की घोषणा करने के फैसले को सही ठहराने के लिए पिछली वामपंथी सरकार के साथ सहयोग किया था।

न्यायाधीशों ने मुस्लिमों को ‘राजनीतिक वस्तु’ के रूप में इस्तेमाल करके अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल प्रशासन की कड़ी आलोचना की। कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा लगभग पाँच लाख ओबीसी प्रमाण-पत्रों को रद्द करने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने घोषणा की, “मैं कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं करती। ओबीसी आरक्षण वैसे ही जारी रहेगा।”

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) ने जून 2023 में पाया कि पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासियों मुस्लिमों को भी ओबीसी प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए थे। एनसीबीसी ने आगे पाया कि पश्चिम बंगाल में हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन राज्य में मुस्लिम ओबीसी जातियाँ हिंदू ओबीसी जातियों से अधिक हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉनग्रेस (TMC) से पहले राज्य में सीपीआईएम की सरकार थी। उसने सन 1994 से सन 2009 के बीच 66 वर्गों को ओबीसी घोषित किया था। इनमें से करीब 12 वर्ग मुस्लिम समुदाय के थे। सीपीआईएम सरकार ने 5 मार्च से 10 सितंबर 2010 के बीच सात कार्यकारी आदेश जारी करके 42 अतिरिक्त वर्गों को ओबीसी की मान्यता दी।

यह कदम संभवतः 2011 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। इन 42 वर्गों में से 41 मुस्लिम समुदाय से थे। नतीजतन, ये नए समूह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तावित नौकरियों में प्रतिनिधित्व और आरक्षण के लिए योग्य हो गए। अपने मुस्लिम वोट बैंक को और अधिक समायोजित करने के लिए सीपीआईएम ने फरवरी 2010 में सरकारी पदों पर मुस्लिमों के लिए 10% आरक्षण भी दे दी।

हालाँकि, इन सब कामों के बावजूद सीपीआईएम चुनाव में हार गई और तृणमूल कॉन्ग्रेस जीत गई। इसके बाद मई 2011 में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार सँभाला। उन्होंने वामपंथी शासन की तुष्टिकरण नीति को जारी रखा। 11 मई 2012 के कार्यकारी आदेश में TMC सरकार ने ओबीसी के रूप में अतिरिक्त 35 नए वर्गों जोड़ा।

इनमें से 34 वर्ग मुस्लिम समुदाय के थे। इस तरह केवल दो वर्षों में वामपंथी और टीएमसी सरकारों ने ओबीसी समूह में 77 नए वर्ग (जिनमें से 75 मुस्लिम थे) जोड़े। ममता बनर्जी की सरकार ने एक नए कानून के जरिए इन 77 समूहों को ओबीसी ए (अधिक पिछड़ा) और ओबीसी बी (पिछड़ा) नाम की दो श्रेणियों में विभाजित कर दिया।

इसके बाद 18 जनवरी 2011 को अमल चंद्र दास नाम के व्यक्ति ने वामपंथी सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए पहली याचिका दायर की। उन्होंने 42 जातियों को केवल धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ओबीसी के रूप में नामित करने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ओबीसी की पहचान में मदद करने के लिए स्थापित आयोग का सर्वेक्षण पूर्वनिर्मित था।

साल 2012 से साल 2020 तक अमल चंद्र दास, पूरबी दास और आत्मदीप ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) अधिनियम 2012 की संवैधानिकता और इसके कई प्रावधानों को चुनौती देते हुए तीन और याचिकाएँ दायर कीं। सभी चार याचिकाओं को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक साथ जोड़ा और उन पर फैसला सुनाया।

RG कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और 4 ट्रेनी डॉक्टरों का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट: कोर्ट की मंजूरी के बाद ट्रेनी डॉक्टर की रेप-हत्या से पर्दा उठाएगी CBI

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष का पॉलीग्राफ टेस्ट होगा। सीबीआई ने पॉलीग्राफ टेस्ट की माँग को लेकर कोर्ट का रुख किया था, जिसके कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 31 साल की डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उस समय महिला डॉक्टर के साथ तैनात रहे 4 अन्य ट्रेनी डॉक्टरों, जो महिला डॉक्टर के साथ शिफ्ट में थे, उनका भी पॉलीग्राफ टेस्ट किया जाएगा।

सीबीआई जानना चाहती है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के उस समय प्रिंसिपल रहे डॉ संदीप घोष और पीड़ित महिला डॉक्टर के साथ तैनात रहे 4 डॉक्टरों के बयान में कितनी सच्चाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई आरोपितों को सियालदह कोर्ट में पॉलीग्राफ टेस्ट और मजिस्ट्रेट के सामने बयान की अर्जी के लिए लेकर पहुँची थी। पॉलीग्राफ टेस्ट में जज और जिसका पॉलीग्राफ टेस्ट होना है, दोनों की सहमति लेना जरूरी होता है। इस मामले में सियालदह कोर्ट से सीबीआई को पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद साफ हो गया है कि कोलकाता कांड में आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और 4 ट्रेनी डॉक्टर्स का पॉलीग्राफ टेस्ट होगा।

एक अधिकारी ने बताया कि हम घोष के जवाबों की और पुष्टि करना चाहते हैं, क्योंकि हमारी ओर से पूछे गए सवालों के कुछ उत्तरों में झोल है। ऐसे में हम उनका पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के विकल्प पर विचार कर रहे। दरअसल पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान व्यक्ति की ओर से सवालों के जवाब दिए जाते समय एक मशीन की मदद से उसकी शारीरिक प्रतिक्रियाओं को मापा जाता है और यह पता लगाया जाता है कि वह सच बोल रहा है या झूठ। इस मामले में मुख्य आरोपित संजय रॉय के पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए भी मामला कोर्ट में है जिस पर शुक्रवार (23 अगस्त 2024) को फैसला आएगा।

पीड़ित की पहचान उजागर करने का भी केस

इस बीच, कोलकाता पुलिस ने भी संदीप घोष पर शिकंजा कसना तेज कर दिया है। पुलिस ने डॉ. घोष को अब मृतक महिला डॉक्टर की पहचान उजागर करने के मामले में तलब किया है। हालाँकि, सीबीआई की पूछताछ के कारण पेश नहीं हो सके और दूसरी तारीख माँगी है।

एक तरफ तो सीबीआई लगातार घोष से पूछताछ कर रही है और अब उनकी गिरफ्तारी की तैयारी में लगी है, तो दूसरी तरफ डॉ संदीप घोष को ममता सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय में ओएसडी बना दिया है। बुधवार (21 अगस्त 2024) को जारी अधिसूचना में डॉ संदीप घोष को पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में ओएसडी नियुक्त किया गया है।

कौन हैं संदीप घोष?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप घोष ने अपनी स्कूली शिक्षा कोलकाता के पास बोंगांव हाई स्कूल से पूरी की थी। मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की। डॉ. घोष ने 1994 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और एक आर्थोपेडिक सर्जन बने। साल 2021 में वो आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल बने। इससे पहले, उन्होंने कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज में उप-प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया था।

हालाँकि संदीप घोष के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिसिंपल बनने के पीछे अलग कहानी नजर आ रही है। आजतक के मुताबिक, जब प्रिसिंपल के पद को लेकर इंटरव्यू चल रहे थे, तो संदीप घोष का नाम 16वें स्थान पर था। लेकिन रातोंरात वो सभी कैंडिडेट्स को पीछे छोड़कर लिस्ट में टॉप पर पहुँच गए और प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त हो गए।

कौन हैं संदीप घोष, जिसे ममता बनर्जी के स्वास्थ्य मंत्रालय में बनाया OSD: जानें कैसे 16वें नंबर पर होने के बावजूद बना था RG कर मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पूछताछ कर रही है। इसी मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ रेप-हत्या के बाद संदीप घोष को इस्तीफा देना देना पड़ा था, लेकिन तुरंत उन्हें कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिंसिपल नियुक्त कर दिया गया। इस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने फटकार लगाई और छुट्टी पर भेजने के लिए कहा, तो अब ममता सरकार ने संदीप घोष को स्वास्थ्य मंत्रालय में बुलाकर ओएसडी ही बना दिया है।

खास बात ये है कि संदीप घोष जैसे दागी व्यक्ति को न सिर्फ एक से बढ़कर एक महत्वपूर्ण जगहों पर तैनात किया जा रहा है, बल्कि उसके कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिंसिपल बनने के पीछे भी एक बड़ी जानकारी सामने आई है कि वो मेरिट लिस्ट में 16वें नंबर पर होने के बावजूद कैसे कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिंसिपल बनने में कामयाब रहा। यही नहीं, उस पर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में तमाम अनियिमतताओं का भी आरोप है।

ममता बनर्जी ने डॉ संदीप घोष को बनाया ओएसडी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार (21 अगस्त 2024) को जारी अधिसूचना में डॉ संदीप घोष को पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में ओएसडी नियुक्त किया गया है।

डॉ संदीप घोष के हटाने की खबर के बीच ही फिर खबर आई है कि संदीप घोष को संदीप घोष को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी बनाया गया है। आंदोलनकारी छात्रों ने सवाल किया है कि आखिर सरकार ने संदीप घोष को बर्खास्त क्यों नहीं किया, जबकि उनके खिलाफ लगातार आरोप लग रहे हैं। क्या वह इतने प्रभावशाली हैं कि सरकार उनके खिलाफ कदम नहीं उठा पा रही है?

कौन हैं संदीप घोष?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप घोष ने अपनी स्कूली शिक्षा कोलकाता के पास बोंगांव हाई स्कूल से पूरी की थी। मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की। डॉ. घोष ने 1994 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और एक आर्थोपेडिक सर्जन बने। साल 2021 में वो आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल बने। इससे पहले, उन्होंने कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज में उप-प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया था।

हालाँकि संदीप घोष के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिसिंपल बनने के पीछे अलग कहानी नजर आ रही है। आजतक के मुताबिक, जब प्रिसिंपल के पद को लेकर इंटरव्यू चल रहे थे, तो संदीप घोष का नाम 16वें स्थान पर था। लेकिन रातोंरात वो सभी कैंडिडेट्स को पीछे छोड़कर लिस्ट में टॉप पर पहुँच गए और प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त हो गए।

बायोमेडिकल वेस्ट और मेडिकल सामानों की तस्करी बाँग्लादेश तक

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार संदीप घोष को लेकर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डिप्टी सुप्रीटेंडेंट अख्तर अली ने दावा किया कि संदीप घोष तो अस्पताल से बायोमेडिकल वेस्ट और मेडिकल सप्लाई की तस्करी बांग्लादेश में भी करते थे। अख्तर अली का दावा है कि साल 2023 में उन्होंने इस बात की चिंता राज्य सतर्कता आयोग के समक्ष उठाई थी। जाँच में वह दोषी भी पाए गए लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बीवी को बेरहमी से पीटा, पड़ोसी आज तक नहीं भूले

इंडिया टुडे की एक अन्य मीडिया रिपोर्ट बताती है कि आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल अपनी पत्नी को बेरहमी से मारने के कारण भी बदनाम हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार संदीप घोष पहले बारासाट में रहते थे। वहीं के पड़ोसी ने इंडिया टुडे को बताया कि कैसे 12 साल पहले जब संदीप ने अपनी पत्नी को उस समय बुरी तरह पीटा था जब उसकी सिजेरियन हुए 14 दिन ही हुए थे।

रिपोर्ट में खुद को संदीप का पूर्व पड़ोसी बताने वाला शख्स कहता है, “एक बार मेरे और घोष के बीच बहस हुई थी। उनका व्यवहार हमेशा खराब रहता था। बाद में मुझे पता चला कि वह एक डॉक्टर थे। यहाँ रहने के दौरान एक घटना हुई जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उनके सिजेरियन टांके फट गए और उन्हें खून बहने लगा। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि इसे पारिवारिक मामला माना गया, लेकिन जब मामला बहुत गंभीर हो गया तो सभी ने विरोध करना शुरू कर दिया।”

गौरतलब है कि आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के रेप और हत्या के मामले में घोष को 12 अगस्त को रिजाइन देना पड़ा था। बाद में सीबीआई ने उनसे पूछताछ शुरू की और संदीप से जुड़े विवाद सामने आते रहे। बांग्लादेश में तस्करी, बीवी से मारपीट के अलावा संदीप घोष पर जून 2023 में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। उस समय उन्हें वित्तीय गड़बड़ी के आरोप में मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर किया गया था। हालाँकि बाद में दोबारा उनका आरजी कर अस्पताल में कार्यभार मिल गया।

अस्पताल में हुई रहस्यमयी मौतें, देह व्यापार का भी दावा

बता दें कि जिस तरह आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल का नाम पहली बार विवादों से नहीं जुड़ा, उसी तरह इस अस्पताल का नाम भी विवादों में पहली बार नहीं आया है। कहा जा रहा है कि इस अस्पताल मेंपहले भी रहस्यमयी मौते हुई हैं। कभी यहाँ मेडिकल प्रोफेशनल मारे गए तो कभी प्रोफेसर और कभी हाउस स्टाफ।

  1. 25 अगस्त, 2001 को ऐसी एक घटना हुई थी जब चौथे वर्ष के छात्र सौमित्र विश्वास को छात्रावास के कमरे में ही फंदे से मृत लटका हुआ पाया गया था। उनकी मौत को भी प्रशासन ने आत्महत्या बताया था, लेकिन तब भी हॉस्टल में अश्लील फिल्मों के निर्माण की बात उड़ी थी। अरोमिता दास और अमित बाला नामक उसके 2 सहपाठियों की गिरफ़्तारी के बावजूद ये मामला अनसुलझा रहा, जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने CID जाँच का आदेश दिया था।
  2. 5 फरवरी, 2003 को अरिजीत दत्ता नामक हाउस स्टाफ ने आत्महत्या की थी। बताया गया कि उसने पहले खुद को हाथ में एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया, फिर कलाई की नस काट ली और फिर छत से कूद गया। वो बीरभूम के सिउरी के रहने वाले थे। न कोई सुसाइड नोट मिला, न आत्महत्या का कारण पता चला।
  3. घटना के कुछ ही दिन बाद 16 फरवरी को प्रवीण गुप्ता ने आत्महत्या का प्रयास किया। हरियाणा के प्रवीण मानिकतल्ला स्थित लालमोहन हॉस्टल में रहते थे, उन्होंने अपनी दोनों कलाई की नस काटने का प्रयास किया था। प्रवीण के पिता ने बेटे के किसी बात से परेशान होने की बात कही थी, वहीं पुलिस ने प्रेम-प्रसंग बता कर कहा कि उसने अपनी प्रेमिका को सुसाइड नोट भेजा था। हालाँकि, उसके साथियों ने उसे कभी अवसादग्रस्त नहीं पाया।
  4. 24 अक्टूबर, 2016 को 52 वर्षीय मेडिसिन के प्रोफेसर गौतम पाल का सड़ा-गला शव दक्षिणी दमदम स्थित उनके किराए के घर से बरामद हुआ था। दरवाजा अंदर से बंद था तो हार्ट अटैक से अचानक मौत की बात कह पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया।
  5. कोरोना महामारी के दौरान स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा पौलमी साहा की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस ने अस्पताल की छठी मंजिल से कूद कर आत्महत्या की बात कही, सहपाठियों ने उसके अवसाद में होने की बात कही थी। आज तक ये भी रहस्य है।

इन रहस्यमयी मौतों के अलावा इस अस्पताल में देह-व्यापार का धंधा चलने से लेकर यहाँ ड्रग्स तस्करों तक के सक्रिय रहने की बातें होती रही हैं… अब इन बातों की सच्चाई क्या है जाहिर सी बात है ये जाँच के बाद ही सामने आ पाएगा, लेकिन सवाल तो उठता है कि अगर एक राज्य में किसी अस्पताल से जुड़ी इतनी गड़बड़ घोटालों को लेकर खुलासे हो रहे हैं तो फिर जाँच क्यों नहीं हुई। क्यों संदीप घोष को मुर्शिदाबाद से दोबारा आरजीकर अस्पताल में अपनी नौकरी वापस मिल गई, क्यों बार-बार ट्रांसफर होते-होते रह गया।

OpIndia Impact: लव जिहाद के आरोपित कथित डॉक्टर अब्दुर्रहमान को गाजियाबाद पुलिस ने दबोचा, पूर्व IAS अधिकारी की MBBS बेटी से की है दरिंदगी

गाजियाबाद पुलिस ने ओडिशा की हिंदू महिला डॉक्टर के साथ लव जिहाद करने वाले अब्दुर्रहमान को गुरुवार (22 अगस्त 2024) गिरफ्तार कर लिया। अब्दुर्रहमान ने नोएडा के एक अस्पताल में डॉक्टरी का काम करता था। इसी दौरान उसने हिंदू महिला डॉक्टर को फँसाकर उससे हिन्दू रीति-रिवाज से शादी कर कर लिया। हालाँकि, उसका जब बेटा हुआ तो उसने उसका नाम अली रखा और उसका खतना करवाया।

इस घटना को ऑपइंडिया ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया। इसके साथ ही यह प्रकरण मेन स्ट्रीम मीडिया का हिस्सा भी बना था। ऑपइंडिया ने इस मामले को ‘नेहा जैसा न हो MBBS डॉक्टर का हश्र: जिसके पिता IAS अधिकारी, उसे दवा बेचने वाले अब्दुर्रहमान ने फँसा लिया… इकलौती बेटी को बचाने की गुहार’ से प्रमुखता से छापा था।

पीड़िता वर्षा सारंगी (बदला नाम) मूल रूप से ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के रहने वाली है। उसके पिता आरके सारंगी एक रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। वह अपने माँ-बाप की इकलौती संतान है। वर्षा की माँ सांगविका सारंगी ने इस संबंध में गाजियाबाद के थाना कोतवाली में FIR दर्ज कराई थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद पुलिस ने गुरुवार अब्दुर्रहमान को गिरफ्तार कर लिया।

सांगविका सारंगी ने बताया कि उनकी बेटी वर्षा सारंगी ने यूक्रेन से MBBS की पढ़ाई की है। वह भारत आकर नोएडा के यथार्थ प्राइवेट हॉस्पिटल में नौकरी शुरू कर दी। यहाँ उसकी जान-पहचान अब्दुर्रहमान से हुई। अब्दुर्रहमान मेरठ जिले के किठौर का रहने वाला है। माँ का आरोप है कि 17 नवंबर 2017 को अब्दुर्रहमान ने अपने फ्लैट में आग लगाकर उनकी बेटी को अपंग बना दिया।

सागंविका सारंगी का कहना है कि इस घटना में उनकी बेटी करीब 28 प्रतिशत जल गई है। बेटी ने पुलिस को बयान दिया था कि उसको किसी प्रकार से बेहोश किया गया था। इसके बाद फ्लैट में अचानक आग लग गई। उन्होंने कहा कि साल 2018 में अब्दुर्रहमान ने अपना धर्म परिवर्तन करके हिंदू बनने का ढोंग किया और गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में मेरी बेटी से शादी कर ली।

इसके बाद उसने एक ही दिन में अपना धर्मांतरण किया, बेटी से शादी की और उसका रजिस्ट्रेशन भी करा लिया। इसके बाद साल 2021 में वर्षा सारंगी ने एक बेटे ने एक बच्चे को जन्म दिया। अब्दुर्रहमान ने उसका नाम अली रखा। वर्षा की माँ का आरोप है कि अब्दुर्रहमान जब धर्मांतरण कर चुका है तो उसको अपने बच्चे का नाम हिन्दू नाम रखना चाहिए था। लेकिन उसने मुस्लिम नाम रखा और उसका सुन्नत भी कराया।

IAS ने जारी किया था वीडियो

इससे पहले अप्रैल 2024 में ओडिशा के पूर्व IAS अधिकारी एवं वर्षा के पिता ने वीडियो जारी करके अपनी बेटी को भी ‘लव जिहाद’ के चंगुल में फँसा बताया था। उन्होंने अब्दुर्रहमान नाम के युवक पर अपनी एकलौती बेटी को धोखे से जाल में फँसाने और ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में उन्होंने सारे विवरण 21 अप्रैल 2024 को ऑपइंडिया को भेजे थे।

वीडियो में पूर्व IAS आरके सारंगी के साथ उनकी पत्नी सांगविका सारंगी भी मौजूद थीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई थी। वीडियो में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अपनी तरफ से खोजबीन की तो उनकी बेटी की मौजूदगी मेरठ के मवाना इलाके में पाई गई थी। उन्होंने बेटी को खोजने का आग्रह किया था।

नोएडा के अस्पताल में मिला अब्दुर्रहमान

RK सारंगी हमें आगे बताया कि नोएडा के एक अस्पताल में इंटर्नशिप करने के दौरान वर्षा को अब्दुर्रहमान मिला था। वह उसी अस्पताल में यूनानी दवाओं का कोई काम करता था। शुरुआत में वर्षा ने अपने माता-पिता से शिकायत की थी कि अब्दुर्रहमान जबरन उससे बातचीत की कोशिश करता है।

इस शिकायत के बाद वर्षा को दूसरे अस्पताल में काम करने के लिए भेजा गया था। बाद में आर के सारंगी का ट्रांसफर गुजरात के राजकोट हो गया था। इसके बाद वर्षा ने अपनी डॉक्टरी का इंटर्नशिप जारी रखने की माँग की और नोएडा में ही कुछ और समय रहने की मोहलत माँगी।

घर में मिली थी जली हालत में

आर के सारंगी ऑपइंडिया को आगे बताते हैं कि एक दिन उन्हें राजकोट में कॉल आई कि उनकी बेटी नोएडा के अपने घर में जल गई है। आनन-फानन में वो नोएडा पहुँचे तो वर्षा एक अस्पताल में जली हालत में भर्ती मिलीं। यहाँ पर अब्दुर्रहमान भी मौजूद मिला, जिसने वर्षा के जलने के सवाल पर गोलमोल जवाब दिया।

पुलिस जाँच में वर्षा ने बताया कि उन्हें बेहोशी की हालात में सम्भवतः जलाया गया। जब होश आया तो वो शॉवर के नीचे नग्न हालत में पड़ी थीं। RK सारंगी को अब्दुर्रहमान पर शक हुआ लेकिन उन्होंने पहले बेटी के स्वास्थ्य की चिंता की। इसके बाद वो वर्षा को लेकर राजकोट चले गए।

राजकोट में हुआ इलाज

सारंगी दम्पति हमें आगे बताते हैं कि राजकोट के अस्पताल में इलाज के दौरान पाया गया कि वर्षा के चेहरे पर और सीने पर जले के निशान थे। उन्होंने अपनी बेटी का महँगे से महँगा इलाज करवाया। थोड़ा ठीक होने के बाद वर्षा फिर से इंटर्नशिप पूरा करने के नाम पर नोएडा जाने की जिद करने लगीं।

सारंगी दम्पति को आशंका है कि अब्दुर्रहमान छिप कर राजकोट आया था। उसने घायल अवस्था में नग्न पड़ी वर्षा की कई आपत्तिजनक तस्वीरें खींच ली थी, जिसके सहारे पीड़िता को ब्लैकमेल किया गया। आर के सारंगी ने हमें बताया कि उनकी बेटी को राजकोट से नोएडा लाकर अब्दुर्रहमान गाजियाबाद ले गया।

गाजियाबाद में हिन्दू बन कर फर्जी शादी की साजिश

आरोप है कि अप्रैल 2022 में यहाँ एक ‘आर्य समाज सेवा ट्रस्ट’ नाम से बनी संस्था में उसने वर्षा से शादी का नाटक किया। उक्त संस्था पहले से ही विवादित रही है और दयानंद सरस्वती वाला ‘आर्य समाज’ से इसका कोई संबंध नहीं है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय भी उक्त संस्था पर टिप्पणी करते हुए फटकार लगा चुका है।

आरोप है कि अब्दुर्रहमान ने इस शादी में खुद के हिन्दू धर्म में ‘घर वापसी’ का दावा किया था। हालाँकि, गाजियाबाद पुलिस ने इस केस में IPC की धारा 420 के तहत FIR दर्ज कर ली थी। पूर्व अधिकारी की पत्नी का दावा है कि जिस शादी के नाम पर अब्दुर्रहमान उनकी बेटी को अपनी बीवी बताने का दावा करता है, वो कानूनन अवैध है।

बना रहा है केस वापसी का दबाव

आरके सारंगी की पत्नी ने हमें बताया था कि अब्दुर्रहमान उनकी बेटी पर केस वापसी का दबाव बना रहा है। केस वापसी से इनकार करने पर लम्बे समय तक वर्षा से बात नहीं करवाई जाती है। बकौल पीड़ित दम्पति, उन्हें यह भी बताया गया कि अब्दुर्रहमान ने कई बार वर्षा की निर्ममता से पिटाई की है। अब वर्षा एक बच्चे की माँ है। आरोप है कि अक्सर अब्दुर्रहमान बच्चे की फोटो स्टेटस पर डाल कर सारंगी दम्पति को चिढ़ाने का भी काम करता है।

सम्पत्ति पर है नजर और ‘लव जिहाद’ का टास्क

सारंगी दम्पति ने आशंका जताई थी कि अब्दुर्रहमान की नजर उनकी सम्पत्ति पर है। उन्होंने बताया कि अब्दुर्रहमान यह जानता है कि वर्षा अपने परिवार की इकलौती संतान है। हमें यह भी बताया गया था कि मानसिक तनाव के चलते अक्सर आर के सारंगी की तबीयत खराब ही रहने लगी है। सारंगी की पत्नी ने बताया था वह उनकी सारी चल-अचल सम्पत्ति का मालिक भी बनना चाह रहा है।

‘नहीं मिला साथ तो मार डाली जाएगी बेटी’

सारंगी परिवार ने हमें आगे बताया था कि केस वापसी का दबाव सिर्फ इसलिए बनाया जा रहा है, जिससे अब्दुर्रहमान उनकी बेटी को बाद में मार भी डाले तो कोई कानूनी अड़चन न आए। अपनी बेटी को पूरी तरह से ब्रेनवॉश बताते हुए सारंगी परिवार मामले की जाँच CBI या NIA से करवाने की माँग की थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि किसी अधिकारी के आगे बयान दिलाने से पहले अब्दुर्रहमान उनकी बेटी को ड्रग्स देता है और साथ ही मुँह खोलने पर बेटे को मार डालने के लिए धमकाता है। पीड़ित परिवार ने कम से कम 1 महीने वर्षा को अपने साथ रखने की गुहार लगाई थी। प्रशासन के अलावा सारंगी परिवार ने हिन्दू संगठनों से भी मदद की अपील की थी।

सुरक्षा के लिए NTF गठन के बाद AIIMS के डॉक्टरों का हड़ताल खत्म, CJI बोले- हम भी सरकारी अस्पताल के फर्श पर सोए हैं, मरीजों से सहानुभूति

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में 13 दिनों से हड़ताल कर रहे AIIMS के डॉक्टरों ने गुरुवार (22 अगस्त 2024) को काम पर लौटने की घोषणा कर दी। इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने डॉक्टरों से काम पर लौटने के लिए कहा था। इसके साथ ही उनकी समस्याएँ सुनने के लिए कमिटी बनाने की बात भी कही।

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, “सरकारी अस्पतालों की स्थिति मैं जानता हूँ। जब मेरे परिवार का एक सदस्य बीमार था, तब मैं खुद एक सरकारी अस्पताल के फर्श पर सोया हूँ। मरीजों की स्थिति जानता हूँ। उनसे सहानुभूति है।” CJI ने कहा, “हम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश देते हैं कि वे राज्य के मुख्य सचिवों और DGP के साथ मिलकर डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।”

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह काम एक सप्ताह में पूरी हो जानी चाहिए। इसके साथ ही राज्य सरकारें इसे दो हफ्तों के अंदर लागू करें। उन्होंने आगे कहा, “पहले निर्णय लिया गया था कि नेशनल टास्क फोर्स सभी पक्षकारों से परामर्श करेगा। इससे प्रभावित होने वाले सभी हितधारकों और चिकित्सा पेशेवरों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल बनाए रखने के लिए जिम्मेदार लोगों की बात सुनी जाएगी।”

सीजेआई ने आगे कहा, “(1) संकट कॉल सिस्टम, (2) संस्थागत एफआईआर, (3) मुआवजा संकट निधि पर सुझाव देते हैं। इन पर एनटीएफ (NTF) द्वारा विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधियों के सुझावों को एनटीएफ द्वारा लिया जाना चाहिए; हम एनटीएफ द्वारा सुझावों को लिए जाने के लिए मंत्रालय की वेबसाइट पर एक पोर्टल खोलने का निर्देश देते हैं।” 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टास्क फोर्स सभी हितधारकों की बात सुनेगा। इनमें इंटर्न, रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं। सीजेआई ने कहा, “डॉक्टरों को के बारे में हमें चिंता है। उन्हें 36 घंटे काम करना पड़ता है। हम सभी के परिवार के सदस्य, रिश्तेदार हैं, जो सरकारी अस्पतालों में गए हैं। हमने डॉक्टरों को 36 घंटे काम करते देखा है।”

सीजेआई ने आगे कहा, “सार्वजनिक अस्पतालों में एक चलन बन गया है। जूनियर डॉक्टर सिर्फ़ यौन उत्पीड़न ही नहीं बल्कि कई तरह के उत्पीड़न के शिकार होते हैं। हमें बहुत सारे ईमेल मिले हैं… 48 या 36 घंटे की ड्यूटी अच्छी नहीं है।” इसके बाद सीजेआई ने सभी डॉक्टरों से काम पर लौटने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “डॉक्टर काम पर लौट आएँ। अगर आप काम पर नहीं लौटेंगे तो सार्वजनिक प्रशासनिक ढाँचा कैसे चलेगा?” 

डॉक्टरों ने भी कहा कि वे काम पर लौटने के इच्छुक हैं, लेकिन उन्हें कार्रवाई का डर है। इस पर सीजेआई ने उन्हें आश्वस्त किया और कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। सीजेआई ने अधिकारियों से भी आग्रह किया कि वे डॉक्टरों के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई ना करें। इस तरह कोर्ट की कार्रवाई खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी। 

अयोध्या में मोईद खान का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ध्वस्त, कन्नौज में नवाब मलिक से जुड़े कोल्ड स्टोरेज पर चला बुलडोजर: बलात्कार आरोपित सपा नेताओं पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर योगी सरकार की बुलडोजर कार्रवाई जारी है। अयोध्या जिला प्रशासन ने गैंगरेप के आरोपित सपा नेता मोईद खान के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर गुरुवार (22 अगस्त 2024) को बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त करवा दिया। यह कार्रवाई उस कॉम्प्लेक्स के खिलाफ की गई थी जो तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर बनाया गया था। इसके साथ ही कन्नौज में भी बुलडोजर एक्शन हुआ, जहाँ रेप के आरोपित सपा नेता नवाब सिंह यादव के करीबी के कोल्ड स्टोरेज की बॉउड्री वाल को गिरा दी गई।

जानकारी के मुताबिक, इस बिल्डिंग का कुछ हिस्सा तालाब की भूमि पर निर्मित कराया गया था। राजस्व प्रशासन ने इसकी नाप जोख करने के बाद गिराने की चेतावनी देकर किराएदारों को खाली करने की नोटिस करीब दस दिन पूर्व ही दिया था, इसी भवन में संचालित पीएनबी बैंक न हटाए जाने से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई टल रही थी। बैंक के हटने के बाद ये कार्रवाई अंजाम दी गई है।

जिस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को ढहाया गया है, वो 4 हजार स्क्वॉयर फीट में बना था। उसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए आँकी जा रही है। वो तालाब की जमीन पर कब्जा करके बनाया गया था। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान पूरे भदरसा कस्बे में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

सोहावल के एसडीएम अशोक कुमार सैनी ने बताया कि भदरसा कस्बे में दोपहर करीब डेढ़ बजे बुलडोजर ने कॉम्प्लेक्स को गिराना शुरू किया था। उन्होंने कहा, “मोईद खान का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सरकारी जमीन पर बना था, इसलिए अनधिकृत इमारत को गिराने की कार्रवाई की गई। इस बारे में अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी के सचिव ने जमीन को खाली कराने का निर्देश दिया था। ये कॉम्प्लेक्स तालाब की जमीन पर बना था।”

गौरतलब है कि अयोध्या पुलिस ने इसी साल 30 जुलाई को जिले के पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा कस्बे में बेकरी चलाने वाले स्थानीय सपा नेता मोईद खान और उसके कर्मचारी राजू को 12 साल की एक बच्ची से दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक मोईद और राजू ने दो महीने पहले नाबालिग से दुष्कर्म किया था और इस कृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की थी। इस मामले में पीड़ित का गर्भपात हो गया था और उसके डीएनए को सुरक्षित रख लिया गया था।

कन्नौज में भी गरजा बुलडोजर

इस बीच, कन्नौज में रेप के आरोपित सपा नेता नवाब सिंह यादव के करीबी के कोल्ड स्टोरेज की बॉउड्री वाल को गिरा दी गई। कन्नौज के ठठिया थाना क्षेत्र के बलनापुर गाँव में बने कोल्ड स्टोरेज पर बुलडोजर चला है। कन्नौज में कार्रवाई के लिए पहुंचे एसडीएम ने कहा कि ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर बाउंड्री वॉल बनाई गई थी। दीवार हटाने की नोटिस भी दी गई थी। नोटिस की समय अवधि पूरी होने के बाद भारी पुलिस बल के साथ पहुँची राजस्व टीम ने अवैध बाउंड्री वॉल ध्वस्त कराई।

‘प्रभाष का नाम लेकर पब्लिसिटी पा रहे अरशद वारसी’: ‘जर्सी’ और ‘मक्खी’ वाले हीरो ने साधा निशाना, ‘कल्कि’ पर साउथ और बॉलीवुड में ‘फैन वॉर’

बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी का तेलुगु अभिनेता प्रभास की आलोचना करना कई लोगों को पसंद नहीं आया है। अरशद वारसी ने एक इंटरव्यू में प्रभास की हालिया फिल्म ‘कल्कि 2898’ की आलोचना की थी। इसके बाद अब प्रभास के फैन्स और कई तेलुगु सिनेमा से जुड़े लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।

पूरा मामला अरशद वारसी की कल्कि मूवी पर राय से जुड़ा है। अरशद वारसी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में सिनेमा के कई आयामों को लेकर बातचीत की थी। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्हें हालिया दिनों में कौन सी फिल्म सबसे खराब लगी है तो उन्होंने जवाब में इसे कल्कि बताया।

उन्होंने कहा, “मैंने कल्कि हाल ही में देखी जो मुझे अच्छी नहीं लगी। कल्कि में अमिताभ बच्चन अविश्वसनीय लगे। उनके जैसा पावर मुझे भी चाहिए, जिन्दगी बन जाएगी। लेकिन प्रभास को इस फिल्म में जोकर बना दिया। तुमने उसको क्या बना दिया यार, क्यों करते हैं ऐसा समझ में नहीं आता।”

अरशद वारसी की यह टिप्पणी काफी वायरल हो गई। उनकी इस क्लिप को लाखों बार सोशल मीडिया पर साझा किया गया है। हालाँकि, उनकी इस टिप्पणी को लेकर तेलुगु सिनेमा के कई कलाकार गुस्सा हो गए और अरशद वारसी को सीमा से बाहर जाने वाला बता डाला।

तेलुगु एक्टर सुधीर बाबू ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “रचनात्मक आलोचना करना ठीक है, लेकिन किसी को उलटा सीधा नहीं कहना चाहिए। अरशद वारसी से ऐसे गैरजिम्मेदार अंदाज़ की उम्मीद कभी नहीं की थी। प्रभास का कद छोटी सोच वाले लोगों की टिप्पणियों करने वालों के लिए बहुत बड़ा है।”

वहीं तेलुगु डायरेक्टर अजय भूपति ने कहा, “प्रभास वो शख्स हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुँचाने के लिए अपना सबकुछ दिया है और कुछ भी करने को तैयार हैं, वो हमारे देश का गौरव हैं। हम आपकी आँखों में उस फिल्म के लिए, ईर्ष्या देख सकते हैं, क्योंकि आपका ग्राफ गिर गया है और आपको कोई नहीं पूछता। अपनी राय देने की एक सीमा और एक तरीका होता है। ऐसा लगता है कि आपने उसके बारे में जो कहा है, वो आप ही हैं।”

वहीं तेलुगु एकत्र नानी इनसे भी आगे बढ़ गए। उन्होंने अरशद वारसी की टिप्पणी को लेकर पूछे जाने पर कहा, “जिस आदमी के बारे में आप बात कर रहे हैं, वो अब तक सबसे ज्यादा पब्लिसिटी इसी बात से पाया है। आपलोग खाली में एक मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हो।”

कल्कि 2898 AD फिल्म जून, 2024 में आई थी। इस फिल्म में प्रभास के अलावा दीपिका पादुकोण, अमिताभ बच्चन, दिशा पाटनी और कमल हसन जैसे कलाकरों ने काम किया था। इस फिल्म को बॉक्सऑफिस पर लगभग ₹1000 करोड़ की कमाई हुई है।

जिस ब्रिटिश YouTuber को पकड़ कर तालिबान ने 8 महीने कैद में रखा, वो दे रहा भारत पर परमाणु बम गिराने की धमकी: भारतीयों पर नस्लवादी टिप्पणी भी की

ब्रिटेन यूट्यूबर माइल्स रूटलेज ने सोशल मीडिया पर भारतीय लोगों का मजाक उड़ाते हुए कई नस्लवादी टिप्पणी की है। इतना ही नहीं, उसने भारत पर परमाणु बम गिराने का भी मजाक किया है। इसके बाद माइल्स को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, जो माइल्स से सवाल कर रहे हैं उनसे भी वह अमर्यादित भाषा में बात कर रहा है।

नस्लवादी टिप्पणी करने के लिए कुख्यात इस यूट्यूबर ने सोशल मीडिया पर अपने कई पोस्टों में एक अनाम ट्रोलर पर भारतीय होने का आरोप लगाया। इसके लिए उसने किसी तरह का सबूत नहीं दिया। 25 साल माइल्स रूटलेज एक छात्र और यूट्यूबर है। वह पहली बार साल 2021 में चर्चा में आया था। इसके बाद वह भारत पर आरोप एवं नस्लवादी टिप्पणी करके चर्चा में बना रहता है।

साल 2024 में रूटलेज ने भारत और अफ्रीका के खिलाफ अपनी नस्लवादी टिप्पणियों के लिए सुर्खियाँ बटोरी थीं। उसने एक अज्ञात यूजर्स के साथ अपनी बातचीत साझा की, जिसने उन्हें ढूँढ़ने की धमकी दी। संदेश में लिखा था, “मैं तुम्हें ढूँढ़ लूँगा, मैं वादा करता हूँ, तुम्हारा माफ़ीनामा वीडियो बहुत अच्छा होगा।” उसने अजनबी के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उसे अपना पता साझा किया था।

उस एक्स यूजर को भारतीय कहते हुए उसने लिखा, “भारतीय मुझे खोजने की धमकी देते हैं लेकिन यह उन पर उल्टा पड़ता है। तुम नहीं लेकिन मैं तुम्हें ढूंढ लूँगा और फिर तुम्हें माफी माँगते हुए वीडियो बनाना होगा।” रूटलेज ने इसके अलावा, कई आपत्तिजनक टिप्पणी की। उसने अपने वीडियो में भारतीयों के बात करने के तरीकों का भी मजाक उड़ाया है।

परमाणु हमले को लेकर रूटलेज ने लिखा, “जब मैं इंग्लैंड का प्रधानमंत्री बनूँगा तो मैं ब्रिटिश हितों और मामलों में हस्तक्षेप करने वाली किसी भी विदेशी शक्ति को स्पष्ट चेतावनी के रूप में परमाणु साइलो खोलूँगा। मैं बड़ी घटनाओं के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ, मैं छोटे से छोटे उल्लंघन पर पूरे देश पर परमाणु हमला कर दूँगा। मैं सिर्फ भारत के लिए ही न्यूक्लियर लॉन्च कर सकता हूँ।”

दरअसल, जब Google ने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान को ‘यात्रा करने के लिए सबसे ख़तरनाक देशों‘ की सूची में सबसे टॉप पर शामिल किया था। इसके बाद साल 2021 में वह अफगानिस्तान घुमने गया। वहाँ तालिबान के कब्जे के दौरान वह अफगानिस्तान में फँस गया था। हालाँकि, अन्य विदेशी नागरिकों की तरह अमेरिका एवं ब्रिटेन की सरकार ने उसे भी वहाँ से निकाला था।

अफगानिस्तान से लौटने के बाद रूटलेज ने एक साक्षात्कार में कहा था कि वह फिर भी अफ़गानिस्तान जाएगा और अपना सांस्कृतिक आदान-प्रदान जारी रखेगा। रूटलेज को अक्सर ‘ख़तरनाक पर्यटक’ के रूप में टैग किया जाता है। वह ‘लॉर्ड माइल्स’ से YouTube चलाता है, जिसके 1,26,000 सब्सक्राइबर हैं। वह फिर दोबारा अफगानिस्तान गया था।

फ़रवरी 2023 के अंत में अफ़गानिस्तान की अपनी तीसरी यात्रा पर माइल्स को तालिबान खुफिया ने हिरासत में लिया था। रूटलेज ने कहा था, “मुझे तालिबान खुफिया द्वारा आठ महीने के लिए हिरासत में लिया गया, जो मेरी अब तक की सबसे सुखद छुट्टी बन गई। न केवल मैंने बहुत अच्छा समय बिताया, बल्कि मैंने तालिबान सरकार के शीर्ष लोगों से दोस्ती की और फिर मुझे वापस बुलाया गया।”

मालगाड़ी को पलटाने के लिए पटरी पर जानबूझकर डाल दिया बाइक का पहिया, रिपोर्ट में दावा- अलीगढ़ की साजिश में आया अफ़सान का नाम

कानपुर में साबरमती एक्स्प्रेस को डिरेल करने की घटना के बाद दो दिन पहले अलीगढ से मालगाड़ी को डिरेल करने की साजिश सामने आई थी। छानबीन में पटरी पर से एक बाइक का एलॉय व्हील मिला था जिसे देख लोगों ने अंदाजा लगाया कि शायद इस व्हील को इसलिए रखा गया ताकि रेल पटरी से उतर जाए और एक हादसा और हो जाए। अब इसी मामले में व्हील को रखने वाले का नाम सामने आया है।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित का नाम अफसान है। उसी पर ट्रेन को डिरेल करने की साजिश रचने का आरोप है। कहा जा रहा है कि अगर 20 अगस्त की सुबह 7:45 बजे तलासपुर गाँव से गुजरते हुए थर्ड लाइन पर मालगाड़ी की स्पीड कम नहीं होती तो हादसा हो सकता था। गनीमत ये रही कि उस समय मालगाड़ी की स्पीड कम थी और व्हील के ट्रेन से टकराते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाने से ट्रेन रुक गई।

बाद में इस घटना की जानकारी सुरक्षाकर्मियों को दी गई और फिर पड़ताल शुरू हुई। आरपीएफ के एएसआई धीरज ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचकर सब देखा तो उन्हें मौके पर से बाइक का एलॉय व्हील एक प्लास्टिक के बोरे में भरा पड़ा मिला। इसके साथ ही ट्रैक के पास कुछ टूटे हुए टुकड़े भी मिले। बाद में रिपोर्ट तैयार करके उच्च अधिकारियों को भेजी गई जिसके बाद घटना करने वालों की तलाश शुरू हुई।

अंदाजा लगाया गया कि ये काम किसी बाइक चोरी करने वाली गैंग का हो सकता है जिन्हें बाइक के टुकड़े करके बेचना हो और वो चाहते हों कि इसके टायर के भी टुकड़े हो जाए। हालाँकि बाद में इस मामले में अफसान का नाम सामने आया। रिपोर्ट में अफसान को कैलपुर का निवासी बताया जा रहा है। अब सुरक्षाकर्मी उससे आगे की पूछताछ करेंगे। वहीं कुछ संदेह होने पर पुलिस को सूचित करके इस मामले में केस दर्ज करवाया जाएगा।

मालूम हो कि इस घटना से कुछ दिन पहले कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस को पलटने की साजिश सामने आई थी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ बताया था कि रेल किसी भारी चीज से टकराने के बाद डिरेल हुई है। इस हादसे में साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बे डीरेल हो गए थे।

मिट्टी में मिला कॉन्ग्रेस नेता हाजी अली का करोड़ों का महल: पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगा इस्लामी भीड़ ने किया था दंगा, पत्थर चलने के बाद अब चला बुलडोजर

मध्य प्रदेश के छतरपुर में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद की बेअदबी के नाम कट्टरपंथियों की भीड़ ने बुधवार (21 अगस्त 2024) को जमकर हिंसा की। यह भीड़ बेअदबी के मामले में थाने में ज्ञापन देने गई थी, लेकिन वहाँ पहुँचते ही थाने पर पथराव कर दिया। इस हमले में थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। हिंसा में शामिल लोगों पर प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई की है।

हिंसा में शामिल कॉन्ग्रेस के जिला उपाध्यक्ष एवं पूर्व सदर मोहम्मद हाजी शहजाद अली के आलीशान बंगले को बुलडोजर लगाकर ढहा दिया गया है। इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपए से अधिक है। हिंसा में शामिल लोगों का नेतृत्व हाजी अली ही कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने हाजी अली सहित 50 लोगों और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखी है।

दरअसल, छतरपुर की अंजुमन इस्लामिया कमिटी के सदर हाजी अली के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ 21 अगस्त को सिटी कोतवाली थाना पहुँची थी। वहाँ महाराष्ट्र के अहमदनगर में महंत रामगिरि महाराज द्वारा पैगंबर पर की गई टिप्पणी के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने महंत रामगिरि पर कार्रवाई करते हुए तत्काल गिरफ्तारी की माँग की थी।

इतना ही नहीं, ज्ञापन में चेतावनी भी दी गई थी। कहा गया था कि अगर महंत रामगिरि कोे गिरफ्तार करके उन पर कार्रवाई नहीं की गई तो महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी शांति भंग की आशंका है। इस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ कोतवाली थाने का घेराव किया। फिर भीड़ हिंसक हो गई और थाने एवं पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया।

इस पथराव में कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद कुजूर सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा, थाने के वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। आखिरकार हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े। घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बात करके आरोपितों पर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक में प्रवचन के दौरान सरला द्वीप के महंत रामगिरि ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की बात कही थी। इसका उदाहरण देेते हुए उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का भी जिक्र किया था। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इसे ईशनिंदा और उनके पैगंबर मुहम्मद का अपमान बताकर उनके खिलाफ कई जगहों पर एफआईआर दर्ज करवाई है।

इतना ही नहीं, अहमदनगर और नासिक सहित महाराष्ट्र के कई इलाकों में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने सड़कों पर निकल कर हिंसा फैलाई। उन्होंने जगह लोगों पर हमला किया, दुकानों में तोड़फोड़ की और वाहनों में तोड़फोड़ एवं आग लगाई। इसको देखते हुए महाराष्ट्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब नूपुर शर्मा मामले की तरह इसे भी कट्टरपंथियों द्वारा देश के अन्य हिस्सों फैलाने की कोशिश की जा रही है।