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आशीष नौटियाल

पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

प्यारे बुद्धिजीवियो! नितिन गडकरी उड़ता तीर है, इसे लेकर बुरे फँसोगे

दिवास्वप्न देखना और कॉन्पिरेसी थ्योरी में यकीन करना कॉन्ग्रेस पार्टी का एक पार्ट टाइम पेशा बनता जा रहा है, और शायद इस तरह की संभावनाओं पर भविष्यवाणियाँ कर के कॉन्ग्रेस के नेता अपने लिए 2019 के आम चुनावों के बाद रोज़गार तलाश रहे हैं।

बजट में हुई MEME आयोग के लिए विशेष फंड की घोषणा

अस्वस्थ चल रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली के स्थान पर कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल कैबिनेट द्वारा अंतरिम बजट स्वीकार कर लिए जाने के बाद एकदम जोश में दिखे।

3.5 करोड़ के सर पर आई छत; 42वीं बैठक में 4.78 लाख और मकानों को मंजूरी

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने शहरी गरीबों के लाभ के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 4,78,670 अन्‍य किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है।

राहत ब्रो, ‘काफ़िरों की शराब, शबाब और पैसा पसंद’ होना ठीक, लेकिन पैसों की स्मगलिंग ‘गल्त बात’ है

राहत फ़तेह अली ख़ान 3 सालों से फॉरेन करेंसी की स्मगलिंग के धंधे में लिप्त थे। 'काफ़िरों' के पैसों पर ही एक और पाकिस्तानी गायक की भी कहानी पढ़िए।

कलिकाल के संजय हैं दिव्यदृष्टिधारी जनेऊधारी शिवभक्त रामभक्त दत्तात्रेय गोत्री राहुल गाँधी

राहुल गाँधी की दिव्यदृष्टि एक के बाद एक सपने देखने में अब तक लगातार कामयाब रही है। जैसे उनका एक सपना था कि राफेल डील की फ़ाइलें पर्रीकर के बेडरूम में थीं।

‘उरी’ से हमारी जली, ‘मणिकर्णिका’ से हुए धुआँ-धुआँ: कट्टर वामपंथी गिरोह एवं एकता मंच

आज तक इस निर्धारित पैटर्न में होता यह था कि 'संप्रदाय विशेष' हमेशा दोस्ती के लिए जान देने को तैयार दिखाया जाता था। ब्राह्मण और पुजारी को व्यभिचारी, बनिया को हेरफ़ेर करने वाला दिखाया जाता रहा था। तब तक इस गिरोह को कभी समस्या नहीं हुई थी।

अस्त होती सभ्यता का सूर्य हैं सरस्वती पुत्र ‘पद्मश्री’ प्रीतम भरतवाण

देवताओं की इस धरती पर यदि सबसे पहले किसी को नमन किया जाना चाहिए तो वह यह ‘दास समुदाय' है जिन्हे स्थानीय भाषा में ‘औजी’ कहा जाता है, जिनके आवाह्न से ही किसी भी शुभ कार्य या समारोह में सर्वप्रथम देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है।

अगर ‘JNU कांडियों’ और नम्बी नारायणन में से आप सिर्फ़ पहले वालों को जानते हैं, तो समस्या आपके साथ है

नम्बी नारायणन को प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अपनी डिग्री पूरी करने में मात्र 10 महीने लगे थे। मात्र 10 महीने? जेएनयू के ‘सेलेब्रिटी छात्रों’ ने अकेले टीवी स्टूडियो में ही 10 महीने से अधिक समय बिता दिया होगा।