कव्वाली 'न तो कारवाँ की तलाश है, न तो हमसफर की तलाश है' का सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक पहली फिल्मी रिकॉर्डिंग 1960 की हिंदी फिल्म 'बरसात की रात' से मिलती है।
कांतारा चैप्टर 1 में लाल माटी से ढँके गाँव, वर्षा में भीगी वन-भूमि और अंधकार में छिपे दृश्य, दर्शक को स्मरण कराते हैं कि सिनेमा का चमत्कार उसकी दृश्य-भाषा है, न कि केवल संवाद।
हमारे चारों तरफ बसे देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार या तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या राजनीतिक रूप से अस्थिर हैं। इसका मतलब साफ है कि प्रवासन का अगला टारगेट भारत है।