गुप्त सूत्र बताते हैं कि दिल्ली चुनाव से पहले ही कॉन्ग्रेस आलाकमान ने उच्चस्तरीय बैठक में सभी उम्मीदवारों को जमानत जब्त करवाने के निर्देश दिए थे। नतीजों के बाद जो तीन उम्मीदवार ऐसा नहीं कर पाए हैं अब वे पार्टी भी अपने भविष्य को लेकर सशंकित हैं।
यही शाहीन बाग़ की भीड़ हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक चिन्हों को गाली देती देखी गई। क्या हिन्दुओं की आस्था को ठेस लगाने के लिए गाय पर चुटकुले बनाने से लेकर हिन्दुओं की कब्र खोदने की धमकी देने वाला यह शाहीन बाग़, एक शव यात्रा के लिए बैरिकेड खोलकर इंसानियत का उदाहरण बन सकता है?
भला हो मोदी, LG, हाशमी दवाखाना और हर उस आदमी का जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को कभी कुछ करने ही नहीं दिया, वरना शाहीन बाग़ वालों को लंदन में बिरियानी के लिए लंगर लगाने और धरना प्रदर्शन करने की इजाजत ही कैसे मिल पाती, क्योंकि लंदन में तो हर काम के लिए कागज दिखाने पड़ते हैं और शाहीन बाग़ वालों के कागज़ तो कब की बकरी खा गई थी।
आम दुनिया से अलग एक मेन्टोस दुनिया भी है, जिसे कहते हैं दी लल्लनटॉप! यह दुनिया बजट के दौरान इस बात को लेकर परेशान थी कि आखिर प्रियंका चोपड़ा की ड्रेस खिसकती क्यों नहीं? वैसे, बजट-वजट बाद में देखा जाएगा, पहले NDTV चाहता है कि आप सपना चौधरी का डांस देखें।
सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कालजयी मुस्कान लेकर जरा देर से अपने प्राइम टाइम में आए लेकिन इससे पहले ही उनकी घातक टुकड़ियों के सिपहसालार ध्रुव राठी से लेकर शेहला रशीद और स्वरा भास्कर ट्विटर पर गोडसे और गो** में तालमेल बैठाते नजर आए।
नीरज प्रजापति JNU से नहीं थे, वो मूर्तियाँ बनाते थे और उसी से अपने घर का पेट पालते थे। लेकिन मृतक नीरज का परिवार आज भी आतंकवादी अफजल गुरु की यादों में खून रोने वाली मीडिया और लिबरल गिरोह की संवेदनाओं के इन्तजार में है।
टिकट बुकिंग के दौरान उपभोक्ता को कुणाल कमरा के दो सस्ते एवं निहायत ही घटिया (मतलब कामरा का कोई भी) चुटकुले सुनाए जाएँगे, इसके बाद यदि उपभोक्ता टिकट खिड़की पर हँसते हुए पाया जाता है, तो उसके लिए कुणाल कमरा की इस विमान सेवा में 6 महीने की समयावधि के लिए मुफ्त सफर घोषित किया जाएगा।
वास्तविकता आज बुरका पहनकर शाहीन बाग़ में अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए पत्रकारों की सामूहिक लिंचिंग कर रही है। सेकुलर शाहीन बाग़ आज ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्हम्दुलिल्लाह का स्वर बोल रहा है, और क्योंकि यह स्वर क्रांतिजीवों, JNU-मतावलम्बियों के श्रीमुख से निकला है, इसलिए प्रोग्रेसिव लिबरल भी उनकी हाँ में हाँ मिलाता नजर आ रहा है।