Wednesday, April 1, 2020
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भगवान जब लोगों को अक्ल बाँट रहे थे, तब स्वरा भास्कर NRC के ‘रिलीवेंट सेक्शन्स’ पढ़ने में व्यस्त थी

स्वरा भास्कर साबित करती है कि आप कितने ही बड़े झुमके पहन लो, लेकिन अगर आप सिर्फ नकलची मूर्ख हैं तो न ही बड़े झुमके और न ही कांजीवरम उद्योग आपकी कोई मदद कर सकता है। स्वरा कुछ नहीं बल्कि इंटरनेट लेफ्ट-लिबरल गिरोह की राहुल गाँधी मात्र हैं। - रवीश ने यह कह कर दिल तोड़ दिया अभिनेत्री का!

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध ने इस देश के लेफ्ट लिबरल्स को जितनी तेजी से सस्ती लोकप्रियता दी है, उस स्ट्राइक रेट से आजादी के बाद इस देश में किसी को शायद ही लोकप्रियता मिली हो। लेकिन इस घटना ने ब्रह्माण्ड के सारे पिछले दावों को झुठला दिया है और देवलोक में देवताओं के सिंहासन हिलने लगे हैं। कारण बताया जा रहा है कि नागरिकता कानून के बहाने स्वरा भास्कर, कुणाल कामरा और अनुराग कश्यप जैसों को बेरोजगारी में जिस रफ़्तार से अटेंशन और सस्ती लोक्रप्रियता मिलती जा रही है, वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की लोकप्रियता के ग्राफ को सीधी चुनौती दे रहा है।

कॉमन सेन्स के वितरण को लेकर देवलोक में आपात बैठक

इसके बाद देवलोक में एक आपात बैठक आयोजित कराई गई। इसका उद्देश्य था कि अब लोकप्रियता का कम्पास इंटरनेट पर दिन भर सरकार विरोधी ट्वीट करने के बजाए कॉमन सेन्स, बुद्धि और विवेक की ओर शिफ्ट कर दिया जाए। कार्यकारिणी की बैठक में यह कार्य एक बार फिर ब्रह्मा जी को सौंपने का फैसला लिया गया। ब्रह्मा जी ने कहा कि वो बुद्धि और विवेक सिर्फ उन्हीं लोगों को बाँटेंगे, जिनके पास कागज होंगे। यह सुनते ही झट से राहुल गाँधी ने अपने कागज छुपा दिए और देखा-देखी दिग्विजय सिंह से लेकर तमाम इंटरनेट बुद्धिजीवियों ने भी अपने कागज छुपाकर ब्रह्मा जी को ‘बेफिटिंग रिप्लाई’ दे दिया।

अक्ल वितरण के कुछ दिन बाद अचानक ‘इंटरनेट लिबरल्स’ बिरियानी बाग़ में धरना देते देखे गए। जब पत्रकार उन तक पहुँचे तो लेफ्ट-लिबरल्स गिरोह ने कहा- “हमारा मकसद नागरिकता कानून नहीं, बल्कि कॉमन सेन्स और अक्ल वितरण में किया गया पक्षपात का विरोध है।”

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इस पर जब पत्रकारों ने अपनी बॉडी लैंग्वेज से ज्यादा ही सक्रीय प्रदर्शनकारी नजर आ रही गिरोह की मुख्य सदस्य स्वरा भास्कर से पूछा कि महज दो दिन पहले ही तो भगवान जब घोषणा कर रहे थे कि सभी लोगों में बुद्धि और विवेक बाँटा जाएगा और इसके लिए कागज दिखाने होंगे, तब आप कहाँ थे? इस पर स्वरा भास्कर ने पत्रकारों को जो ‘बेफिटिंग रिप्लाई‘ दिया उसने पत्रकारों के पैरों तले जमीन खिसका दी। स्वरा भास्कर ने कहा- “जब ब्रह्मा अक्ल बाँट रहे थे, उस समय मैं NRC के ‘रिलिवेंट सेक्शंस’ पढ़ रही थी।”

स्वरा भास्कर के इस ‘बेफिटिंग रिप्लाई’ पर उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और लगे हाथ फैज़ की एक नज़्म भी पढ़ डाली। मौके पर मौजूद कुणाल कामरा ने कहा कि बुद्धि बाँटने में उनके साथ भी फासीवादी ब्रह्मा ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है, इसी वजह से उनके चुटकुलों पर किसी को हँसी नहीं आती है और उन्हें कॉमेडी करने के लिए गालियों का सहारा लेना होता है।

रवीश कुमार ने बताया स्वरा को लेफ्ट-लिबरल गिरोह का राहुल गाँधी

इस मनुवादी घटना पर रवीश कुमार ने स्वरा भास्कर के खिलाफ बड़ा खुलासा करते हुए प्राइम टाइम में बताया कि इंसान की बॉडी लैंग्वेज हमेशा उसकी बुद्धिमत्ता की व्युत्क्रम संबंध (इन्वर्सली प्रोपोर्शनल) में होती है। और स्वरा भास्कर के साथ भी यही हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि स्वरा भास्कर साबित करती है कि आप कितने ही बड़े झुमके पहन लो, लेकिन अगर आप सिर्फ नकलची मूर्ख हैं तो न ही बड़े झुमके और न ही कांजीवरम उद्योग आपकी कोई मदद कर सकता है। ब्रह्मा द्वारा अक्ल बाँटते समय स्वरा भास्कर के NRC के रिलिवेंट सेक्शंस पढ़ने के फैसले से निराश रवीश कुमार ने कहा कि स्वरा भास्कर और कुछ नहीं बल्कि इंटरनेट लेफ्ट-लिबरल गिरोह की राहुल गाँधी मात्र हैं।

IQ वितरण पर हुए पक्षपात के विरोध में इस्तीफा देते-देते रह गए राहुल गाँधी

लेकिन ब्रह्मा द्वारा किए गए इस पक्षपात पर सबसे ज्यादा कड़ी प्रतिक्रिया राहुल गाँधी ने व्यक्त की है। उन्होंने आस्तीन थोड़ी सी ऊपर सरकाते हुए कहा- “देखो भई, मैं एक बात साफ़-साफ़ बोलता हूँ, मैं इस पर पहले भी कहा चुका हूँ।”

इसके बाद कुछ देर चुप रह कर राहुल गाँधी ने आगे कहा- “मैं कहता हूँ बुद्धि नहीं बाँटनी है, मत बाँटो लेकिन अगर टीवी पर छोटा भीम देखने के लिए किसी तरह का कागज माँगा गया तो मैं फौरन अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दूँगा।” इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें कान में चुपके से याद दिलाया कि वो आजकल अध्यक्ष पद पर नहीं हैं तब जाकर राहुल गाँधी अपने गुस्से पर नियंत्रण कर पाए।

लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ब्रह्मा जी द्वारा अक्ल बाँटने पर कोई आपत्ति नहीं की। उन्होंने कहा कि जब तक वो कम से कम 2 और राज्यों के मुख्यमंत्री नहीं बन जाते हैं, तब तक हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि उनके साथी अल्बर्ट मनीष सिसोदिया पर वैसे भी माँ सरस्वती का आशीर्वाद है तभी वो मोटर से पानी खींच पाने में कामयाब भी हुए।

वहीं, लिबरल गिरोह के भक्तगणों ने इस बात पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ पहले उनके पास सिर्फ अल्बर्ट मनीष सिसोदिया जैसी वैज्ञानिक ही मौजूद थे, अब उनके पास स्वरा भास्कर जैसी गणितज्ञ भी हैं क्योंकि रवीश कुमार ने उनके IQ की तुलना अक्ल के साथ कुछ व्युत्क्रम संबंध बताकर की है।

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