दंगाई भीड़ ने हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं और आम लोगों की पिटाई कर दी। यहाँ तक कि बच्चों को भी नहीं बख़्शा गया। हिन्दू समुदाय के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
"जिस देश में गाँधी विचारधारा का नेतृत्व करने वाले नेता को लोग अनसुना एवं अनदेखा कर दें, उस देश में जीने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। मुझे देश की न्याय प्रणाली पर विश्वास है और इच्छा मृत्यु की अनुमति चाहिए।"
इस बार जिस दृढ़निश्चय के साथ राहुल गाँधी अपने इस्तीफे के फैसले पर अड़े हुए हैं, उससे भाजपा और तमाम गाँधी परिवारविरोधी शक्तियों में निराशा की लहर छाई हुई है।
हम स्वीडन जैसे आर्थिक रूप से सशक्त देश नहीं हैं जहाँ पर नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा और हेल्थ चेकअप के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। हमारे संसाधन इतने सीमित हैं कि कुल बजट का 2.5% हिस्सा स्वास्थ्य के लिए झोंकना अभी हमारा लक्ष्य ही है और वर्तमान सरकार इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। लेकिन हमारा देश का अभी भी एक बड़ा वर्ग कुपोषित है और यही कुपोषण चमकी बुखार जैसी बिमारियों का पहला कारण है, ना की आयुष्मान भारत योजना।
शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पर्वतराज हिमालय की केदार नामक शिखा पर दुर्गम रूप में स्थित है। समुद्र की सतह से करीब साढ़े 12 हजार फीट की ऊँचाई पर केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम का सर्वोच्य स्थान है। साथ ही यह पंच केदार में से एक है।
दो सौ से दो हजार तक साल लगते हैं उस परत को बनने में जिस भूरी और बेहद उपजाऊ मिट्टी के ऊपर जन्म लेती है 10 से 12 इंच मोती मखमली घास यानी बुग्याळ! और मात्र 200 करोड़ रुपए लगते हैं इन सभी तथ्यों को नकारकर अपने उपभोक्तावाद के आगे नतमस्तक होकर पूँजीपतियों के समक्ष समर्पण करने में।
ये पत्रकारिता के कुछ ऐसे संस्थान हैं, जो भोजन शुरू करने से पहले अन्न का प्रथम अंश जवाहरलाल नेहरू और दूसरा अंश गाँधी परिवार के लिए रख देते हैं। कम ही लोग ये बात जानते हैं कि BBC जैसे मीडिया गिरोह राहुल गाँधी द्वारा हर चुनाव नतीजों के बाद त्याग दिए गए जनेऊ गले में धारण कर के ही कार्यक्षेत्र को रवाना होते हैं।
...लेकिन 2019 के चुनावों के बाद से इन नमक-हराम मीडिया गिरोहों ने नेहरू को ऐसे निकाल फेंका है जैसे लोग चाय में से मक्खी को निकाल फेंकते हैं। मीडिया अब समझ गया है कि वो नेहरू को गन्ने की तरह गन्ने की मशीन में ठूँसकर जितना निचोड़ सकते थे, निचोड़ चुके हैं।