लिबरल-वामपंथी गैग कहती है कि लव जिहाद जैसा कुछ नहीं है... अगर ये सच है तो फिर क्यों नाम छिपा कर लड़कियों को फँसाया जाता है और फिर उनपर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जाता है।
हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत पर वामपंथी मीडिया को उतना ही दुख है जितना उन्हें कभी बगदादी और लादेन की मौत पर हुआ था और उन्होंने उनके लिए संवेदना बटोरने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
अर्चना तिवारी के सवालों के जवाब में कश्मीरी मुसलमान जो जवाब दे रहे हैं वो लोगों तक न पहुँचें इसलिए यास्मीन खान चाहती हैं कि अर्चना तिवारी को गिरफ्तार किया जाए।
ये हिंदू हैं विश्वास पर इतना बड़ा आघात हो गया और ये शांत हैं... सोशल मीडिया परअपना विरोध दिखा रहे हैं। क्या अगर ये किसी और मजहब के लोगों के साथ होता तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी होती।
राजनीतिक दल की सदस्यता लेनी खिलाड़ियों के लिए नई बात नहीं है। लेकिन बजरंग और विनेश ने जिस तरह से पॉलिटिकल एंट्री ली है, उससे खिलाड़ियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
7-8 दिन तक IC814 में गुजारने वाले पीड़ितों ने बताया कि विमान में उन्हें इस्लाम कबूलने वाली बातें कही जा रही थीं लेकिन सिन्हा ने सीरिज में कहीं भी इसे नहीं दिखाया।
महरंग भी अपने प्रान्त बलूचिस्तान के लोगों के हकों के लिए एक दशक से ज्यादा समय से लड़ रही हैं। इस लड़ाई में वो अपने अब्बा को खो चुकी हैं और भाई के अचानक गायब होने के दर्द को जानती हैं।