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जयन्ती मिश्रा

क्या बिहार में ईसाई धर्मांतरण पर सवाल उठाना है गुनाह, क्या दुर्दांत अपराधी है मिथुन मिश्रा जो हथकड़ी में जकड़ा: सुशासन पर बाढ़ ही...

मिथुन मिश्रा ने कुछ दिन पहले अपने चैनल पर ईसाई धर्मांतरण गिरोह की पोल खोली थी। इसके बाद उन्होंने बिहार बाढ़ पर रिपोर्टिंग करके लोगों का दर्द दर्शकों को दिखाया था।

माता-पिता के सामने हिंदू बच्चों के कटवाए अंग, धर्मांतरण से इनकार तो सूली पर लटका जिंदा जलवाया… जिस फ्रांसिस जेवियर को ‘संत’ कहते हैं...

जिस फ्रांसिस जेवियर को 'संत' कह प्रचारित किया जाता है, उसका गोवा की डेमोग्राफी बदलने में बड़ा योगदान है। जानिए कैसे हिंदुओं को धर्मांतरण नहीं करने पर यातना दी गई, कैसे मंदिरों की पहचान मिटाई गई?

इतना तो गिरगिट भी नहीं बदलता रंग, जितने विनेश फोगाट ने बदल लिए

विनेश फोगाट का बयान सुनने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि राजनीति में आने के बाद विनेश कितनी सच्ची और कितनी झूठी हो गई हैं।

हिंदू लड़कियों को ‘प्रेम’ में फँसाओ, मुस्लिम आबादी बढ़ाओ, भारत को बनाओ पाकिस्तान-बांग्लादेश: जिस ‘लव जिहाद’ को ठुकराते हैं लिबरल, अदालत ने उसे माना...

लिबरल-वामपंथी गैग कहती है कि लव जिहाद जैसा कुछ नहीं है... अगर ये सच है तो फिर क्यों नाम छिपा कर लड़कियों को फँसाया जाता है और फिर उनपर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जाता है।

किसी के लिए ‘परोपकारी’, किसी के लिए ‘करिश्माई’: जो नसरल्लाह मरा वह आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह का सरगना था, पर ‘सम्मानित’ बता मातम मना रहा...

हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत पर वामपंथी मीडिया को उतना ही दुख है जितना उन्हें कभी बगदादी और लादेन की मौत पर हुआ था और उन्होंने उनके लिए संवेदना बटोरने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

अर्चना तिवारी ‘पत्रकार’ नहीं, उस पर एक्शन ले कश्मीर पुलिस, क्योंकि उससे बात करते ही बाहर आ जाता है कश्मीरियों का ‘जहर’: यास्मीन खान...

अर्चना तिवारी के सवालों के जवाब में कश्मीरी मुसलमान जो जवाब दे रहे हैं वो लोगों तक न पहुँचें इसलिए यास्मीन खान चाहती हैं कि अर्चना तिवारी को गिरफ्तार किया जाए।

गुलाम भारत में अंग्रेज नहीं खिला पाए चर्बी, स्वतंत्र भारत में तिरुपति के बीफ वाले लड्डू खिला दिए: क्या दक्षिण से उठेगी सनातन रक्षा...

ये हिंदू हैं विश्वास पर इतना बड़ा आघात हो गया और ये शांत हैं... सोशल मीडिया परअपना विरोध दिखा रहे हैं। क्या अगर ये किसी और मजहब के लोगों के साथ होता तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी होती।

PM की इफ्तार पार्टी में CJI का जाना ‘सेकुलरिज्म’, मुख्य न्यायाधीश की गणेश पूजा में प्रधानमंत्री का होना ‘लोकतंत्र पर खतरा’: इतना दोगलापन कहाँ...

न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच कितनी दूरी होनी चाहिए इसका ज्ञान लिबरलों को कभी तब नहीं आया था जब इफ्तार पार्टियों में नेताओं की शिरकत दिखती थी।