मोदी सरकार के बनने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा था कि देश के मुस्लिम समुदाय में आज असुरक्षा का माहौल है, अपने आखिरी इंटरव्यू के जरिए हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि भारत का समाज सदियों से बहुलतावादी रहा है, लेकिन सबके लिए ये स्वीकार्यता का माहौल अब खतरे में है।
उदित ने खुद को मुस्लिम हितैशी साबित करते हुए कुछ आँसू अपनी हथेली पर गिराए और लिखा, "बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से प्रताड़ित मुस्लिम भारत में नागरिकता नहीं ले सकते। बाकी शेष अन्य धर्म के लोगों के लिए भारतीय नागरिकता का दरवाजा खुला है। इससे दलित समाज भावुक रूप से आहत हुआ।"
खबर के अंत में लिखे गए एक पैराग्राफ को पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह से 'जय श्री राम' के प्रयोग से हिंदुओं को न सिर्फ दंगाई बताया गया बल्कि अपनी चापलूसी की सारी हदों को पार कर खबर में अश्लीलता भी परोसी गई कि हिंदुओं ने ही मुस्लिम महिलाओं के सामने अपने पैंट उतारे और उनको अपना लिंग दिखाया।
ब्रज क्षेत्र में फाल्गुन माह लगते ही होली की शुरूआत हो जाती है, लेकिन इसके सबसे खास बरसाने की लड्डू मार होली और लट्ठ मार होली मानी जाती है। वृंदावन मथुरा और खासकर बरसाना में मनाई जाने वाली लट्ठ मार होली और लड्डू मार होली को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की भीड़ एकत्र होती है।
दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में छोटे से लेकर बड़े तक, जवान से लेकर बूढ़े तक और महिलाओं से लेकर बच्चों तक - हर कोई शामिल था। इसे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लड़ाई एक दिन या CAA विरोध की नहीं बल्कि गजवा-ए-हिंद के सपने को साकार करने की थी।
बरसाना से रवाना होते ही दूर दराज से पहुँच रहे लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है। कोई बरसाना में मौजूद मंदिरों के दर्शन कर रहा था तो कोई मंदिरों में खेले जाने वाली लड्डू मार होली का आनंद ले रहा था। यही क्रम देर रात तक चलता रहा।