2008 में आतंक से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मनमोहन सरकार एक कानून लाती है। यह अच्छा काम भी कर रही होती है। लेकिन कॉन्ग्रेस के ही एक मुख्यमंत्री को इससे दिकक्त होने लगी, पहुँच गए सुप्रीम कोर्ट। कॉन्ग्रेसी CM के फैसले से खुश कौन है? - PFI, वही, जिस पर खुद बैन लगने की तलवार लटक रही है।
निर्भया मामले में फाँसी की सजा पाए चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद बुधवार शाम को पटियाला हाउस कोर्ट में डेथ-वारंट पर रोक लगाने की माँग करते हुए याचिका दायर की थी। जिसके बाद कोर्ट ने आज इसपर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।
"यह विरोध जोखिम भरा हो सकता है और बच्चों को खतरों का भी सामना करना पड़ सकता है। निश्चित रूप से यह गंभीर रूप से चिंता का विषय है कि जो अपराध बच्चों ने किया ही नहीं उसके लिए उन्हें दंडित भी किया जा सकता है।"
बीते दिनों हुए इन प्रदर्शनों में करीब 30 पोस्टर ऐसे दिखाई दिए, जो हिंदूघृणा की खुली किताब थे। जिन्हें देखते ही अंदाजा लग जाएगा कि सेकुलरिज्म बचाने के नाम पर ये हिंदुत्व पर हमला है।
हिन्दू घृणा से सने शाहीन बाग़ इलाक़े में CAA और NRC के ख़िलाफ़ ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ जैसे नारे लगाए गए थे। इस दौरान ऐसे पोस्टर भी देखे गए जिनमें हिन्दू धर्म की तुलना नाज़ीवाद से और स्वास्तिक का दुरुपयोग करते हुए विखंडित दिखाया गया।
हमने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है, जिससे कि आतंक प्रयोजित और उनके लिए फंडिंग करने वाले देशों को कूटनीतिक तरीके से विश्व स्तर पर अलग-थलग किया जा सके। हम आतंक को खत्म करना चाहते हैं तो हमें अमेरिका द्वारा 9/11 के बाद आंतकियों के ख़िलाफ अपनाई गई नीति को अपनाना होगा
"मुझे पाकिस्तानी कहकर बुलाया जाता है, आज मैं कहना चाहता हूँ कि हाँ, मैं पाकिस्तानी हूँ। आप जो करना चाहते हैं, वो कर सकते हैं। आज हमारे देश में कोई सही बात नहीं कह सकता है, क्योंकि अगर आप सच कहते हो तो आपको देशद्रोही कह दिया जाता है।"
पाँच लाख की डिमांड पूरी न होने पर महिला को तीन तलाक दे दिया। महिला ने एक महीने पहले ही बाबूपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद नूरजादे सउदी अरब भाग गया। जिसके बाद देवर फैसल ने मायके में आकर धमकी देना शुरू कर दिया।