ममता ने इन वारदातों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उन्हें हिंसा फैलाने के लिए भाजपा से रुपए मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 'राज्य की बाहरी ताक़तों' ने मुस्लिम समुदाय का हितैषी होने का दावा करते हुए ये तड़फोड़ मचाई।
"शनिवार को ही राहुल गाँधी की रीलॉन्चिंग के लिए रैली हुई थी और अगले ही दिन हिंसा भड़क गई। उनके मुताबिक विपक्ष नागरिकता कानून पर हिंदू-मुस्लिम कर विभाजनकारी नीति अपना रहा है और लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है।"
30 सितंबर को पीड़िता के घर पर मारपीट करने के मामले में उसने एसपी को प्रार्थना-पत्र दिया था। आरोपितों ने हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मामत ले रखी थी, इसलिए उनकी गिरफ़्तारी नहीं की गई। इस मामले में मुक़दमा दर्ज करने के साथ पुलिस विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
''उन्होंने मेरा मोबाइल फोन भी छीन लिया था क्योंकि मैंने उनके दुर्व्यवहार का वीडियो बना लिया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया जिससे वो सबूतों को मिटा सकें। इससे पहले सितंबर महीने में भारी बारिश के दौरान भी मुझे घर से निकाल दिया था पर अदालत के हस्तक्षेप के बाद वे अपने घर में वापस लौट पाई थीं।''
अपने ट्वीट में अपर्णा यादव ने जामिया मिलिया, NRC बिल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और 16 दिसंबर के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “जो भारत का है उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है?”