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ऑपइंडिया स्टाफ़

कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

आतंक पर फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान, 26/11 का गुनाहगार हाफिज सईद जेल से बाहर

अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी होने के बावजूद हाफिज सईद के पाकिस्तान में खुलेआम घूमते रहने की खबरें पहले भी आती रही हैं। भारत द्वारा कई बार सबूत दिए जाने के बाद भी पाकिस्तान उस पर कार्रवाई करने से हिचकता रहा है।

इस्लामाबाद में लगे शिवसेना के बैनर: ‘आज J&K लिया है, कल POK लेंगे’

पोस्टर पर शिवसेना सांसद संजय राउत का वो बयान लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था,”आज जम्मू और कश्मीर लिया है, कल बलूचिस्तान लेंगे, पीओके लेंगे और मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अखंड भारत का सपना पूरा करेंगे।”

370 पर पुलवामा दोहराने की धमकी देने के बाद डरे हुए पाकिस्तान ने बंद की अपनी वायुसीमा

पाकिस्तान ने अपनी हवाई सीमा बंद करने के अलावा अपने हाई कमिश्नर को हिंदुस्तान न लौटने का निर्देश दिया है।

2024 तक रहने दो राष्ट्रीय पार्टी: तृणमूल और CPI ने EC से लगाई गुहार

तृणमूल और सीपीआई के अलावा एनसीपी के राष्ट्रीय दर्जे पर भी तलवार लटक रही है। अगर किसी पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन जाता है तो वह एक ही चुनाव चिह्न पर पूरे देश में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रह जाती है।

Breaking: अफगानिस्तान में तालिबान का कार बम धमाका, 95 घायल

धमाका ऐसे वक़्त में हुआ है जब अमेरिका और तालिबान के सुलह के अंतिम समझौते के करीब पहुँचने की खबरें आ रहीं थीं। घायलों में महिलाएँ और बच्चें भी हैं।

शिवलिंग पर पैर रखकर कराया फोटोशूट, यूपी पुलिस ने कहा- ‘आरोपितों की तलाश जारी’

हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें हिन्दू प्रतीक चिह्नों और देवी-देवताओं का अपमान किया गया। कुछ दिनों पहले इरशाद नामक व्यक्ति द्वारा शिवलिंग पर पेशाब करने की बात सामने आई थी।

Article370: महबूबा, उमर अब्दुल्ला पर मुराद अली ने दर्ज कराया देशद्रोह का मुकदमा

मुराद ने कहा है कि मुफ़्ती और अब्दुल्ला ने देश की सरकार के ख़िलाफ़ जनता को भड़काते हुए 370 हटाने का विरोध किया। उनके मुताबिक, "इन नेताओं ने देश के अन्य राज्यों के लोगों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने देश की एकता और अखंडता चोट पहुँचाई है।"

बाबरी मस्जिद के पैरोकार को CJI गोगोई ने फटकारा, कहा- मर्यादा में रहिए

निर्मोही अखाड़ा ने खुद को पंजीकृत संस्था बताते हुए कहा कि विवादित भूमि पर उसका दावा 1934 से है, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस पर अपना दावा उसके कई वर्षों बाद 1961 में किया था। कई दशक पहले मुस्लिमों ने वहाँ नमाज पढ़ना बंद कर दिया था।