अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी होने के बावजूद हाफिज सईद के पाकिस्तान में खुलेआम घूमते रहने की खबरें पहले भी आती रही हैं। भारत द्वारा कई बार सबूत दिए जाने के बाद भी पाकिस्तान उस पर कार्रवाई करने से हिचकता रहा है।
पोस्टर पर शिवसेना सांसद संजय राउत का वो बयान लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था,”आज जम्मू और कश्मीर लिया है, कल बलूचिस्तान लेंगे, पीओके लेंगे और मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अखंड भारत का सपना पूरा करेंगे।”
तृणमूल और सीपीआई के अलावा एनसीपी के राष्ट्रीय दर्जे पर भी तलवार लटक रही है। अगर किसी पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन जाता है तो वह एक ही चुनाव चिह्न पर पूरे देश में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रह जाती है।
हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें हिन्दू प्रतीक चिह्नों और देवी-देवताओं का अपमान किया गया। कुछ दिनों पहले इरशाद नामक व्यक्ति द्वारा शिवलिंग पर पेशाब करने की बात सामने आई थी।
मुराद ने कहा है कि मुफ़्ती और अब्दुल्ला ने देश की सरकार के ख़िलाफ़ जनता को भड़काते हुए 370 हटाने का विरोध किया। उनके मुताबिक, "इन नेताओं ने देश के अन्य राज्यों के लोगों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने देश की एकता और अखंडता चोट पहुँचाई है।"
निर्मोही अखाड़ा ने खुद को पंजीकृत संस्था बताते हुए कहा कि विवादित भूमि पर उसका दावा 1934 से है, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस पर अपना दावा उसके कई वर्षों बाद 1961 में किया था। कई दशक पहले मुस्लिमों ने वहाँ नमाज पढ़ना बंद कर दिया था।