नेहरू और इंदिरा ने 370 की आड़ में शेख अब्दुल्ला से विभिन्न करार किए, जिनकी न कोई वैधानिकता थी न ज़रूरत। उन्हीं करारों के चलते जम्मू-कश्मीर राज्य को अलग झंडा और न जाने क्या-क्या दे दिया गया, जिसके कारण बाद के वर्षों में अलगाववाद को हवा मिली।
शाह फैसल की पार्टी से जुड़ीं शेहला रशीद ने कहा कि सरकार को गवर्नर मान लेने और संविधान सभा की जगह विधानसभा को रखने का फैसला संविधान के साथ धोखा है। वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी।
आज होने वाले वाले बड़े फैसले के मद्देनज़र केंद्र ने विभिन्न एयरलाइन्स के टिकट बढ़ते दाम पर रोक लगाते हुए उसकी क़ीमत 7,000 रुपए कर दी थी जिससे अमरनाथ यात्री और पर्यटक घाटी से निकलने में काफ़ी मदद मिली।
अजित डोभाल आज ही जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएँगे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। वहाँ की स्थितियों को देखते हुए वो रुक भी सकते हैं और स्थितियाँ सामान्य होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेंगे।
कश्मीर से 370 जाने पर कभी "मार दूँगा-चीर दूँगा", तो कभी "ऐ जानेवफ़ा, ये ज़ुल्म न कर" का ऑड-ईवेन खेलने वाले इन नेताओं ने PM मोदी के साथ-साथ पूरे देश को जिस-जिस भाषा में धमकी दी थी, उसका पूरा कच्चा चिट्ठा यहाँ है। आज ये नेता कहाँ होंगे, क्या कर रहे होंगे, सोचिए...
स्लीपर बस होने के कारण घटना के समय कई यात्री ऊपर के बर्थ पर सो रहे थे। जिस कारण वे आग लगी बस से नहीं निकल पाए और उनकी मौत हो गई। कई यात्री शीशा तोड़कर बस से निकल पाए।
अब्दुल्ला को घर में नजरबंद किए जाने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट किया, "आप अकेले नहीं हैं उमर अब्दुल्ला। लोकतंत्र को मानने वाला हर भारतीय कश्मीर की मुख्यधारा से जुड़े नेताओं के साथ खड़ा होगा। संसद का सत्र अभी भी चल रहा है और हमारी आवाज खामोश नहीं रहेगी।"