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Shiv Mishra

कराहते केरल में बकरीद के बाद विकराल कोरोना लेकिन लिबरलों की लिस्ट में न ईद हुई सुपर स्प्रेडर, न फेल हुआ P विजयन मॉडल!

काँवड़ यात्रा के लिए जल लेने वालों की गिरफ्तारी न्यायालय के आदेश के प्रति उत्तराखंड सरकार के जिम्मेदारी पूर्ण आचरण को दर्शाती है। प्रश्न यह है कि हम ऐसे जिम्मेदारी पूर्ण आचरण की अपेक्षा केरल सरकार से किस सदी में कर सकते हैं?

उत्तर-पूर्वी राज्यों में संघर्ष पुराना, आंतरिक सीमा विवाद सुलझाने में यहाँ अड़ी हैं पेंच: हिंसा रोकने के हों ठोस उपाय  

असम के मुख्यमंत्री नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के सबसे महत्वपूर्ण नेता हैं। उनके और साथ ही अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए यह अवसर है कि दशकों से चल रहे आंतरिक सीमा विवाद का हल निकालने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाएँ।

समर्थन ले लो… सस्ता, टिकाऊ समर्थन: हर व्यक्ति, संस्था, आंदोलन और गुट के लिए है राहुल गाँधी के पास झऊआ भर समर्थन!

औसत नेता समर्थन लेकर प्रधानमंत्री बनता है, बड़ा नेता बिना समर्थन के बनता है पर राहुल गाँधी समर्थन देकर बनना चाहते हैं।

‘कारगिल कमेटी’ पर कॉन्ग्रेस की कुण्डली: लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा राजनीतिक दृष्टिकोण का न हो मोहताज

हमें ध्यान में रखना होगा कि जिस लोकतंत्र पर हम गर्व करते हैं उसकी सुरक्षा तभी तक संभव है जबतक राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय किसी राजनीतिक दृष्टिकोण का मोहताज नहीं है।

रूठे कॉन्ग्रेसियों के लिए मौसम अच्छा… पर सचिन पायलट न सिद्धू हैं और न राजस्थान की आबोहवा पंजाब जैसी

पंजाब में सिद्धू की लड़ाई पार्टी के भीतर अपना 'कद' हासिल करने की थी, जबकि राजस्थान में पायलट अपना 'हक' हासिल करने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

‘वामपंथी लिबरल गिरोह में खुद को मोदी विरोधी साबित करने की होड़’: पेगासस लिस्ट में खंगाले जा रहे नाम

"बस एक बार किसी लिस्ट में नाम आ जाए तो लोग यह एक्सेप्ट कर लें कि मोदी सरकार हमसे भी डरने लगी है तो मैं भी उसके एवज में कुछ वसूल कर लूँगा।"

पंजाब कॉन्ग्रेस का एक ‘कैप्टन’-4 पहरेदार, असल में कौन सरदार: सिद्धू VS अमरिंदर में साफ न हो जाए ‘हाथ’

सिद्धू को पंजाब कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बनाने से अंदरूनी विवाद कुछ दिनों के लिए भले शांत हो जाए, लेकिन दो पावर सेंटर होने से भविष्य में संकट और गहरा होगा।

सुरसा की तरह बढ़ती आबादी, मजहबी कुतर्कों से नहीं टलेगा खतरा: योगी सरकार के इस कदम पर बात करनी ही होगी

बढ़ती जनसंख्या के आर्थिक और राजनीतिक आयाम आज भी वही हैं जो पहले थे। यह समझने की आवश्यकता है कि इससे पैदा होनेवाले प्रश्न और खतरों को और पीछे नहीं फेंक सकते।