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मीडिया में 7+ वर्षों का सफर। ETV भारत, इंडिया न्यूज़, सुदर्शन न्यूज़, MH1 और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया। डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, एंकरिंग और सोशल मीडिया, हर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में ऑपइंडिया के साथ जुड़ी हूँ।

शशांकासन का नमाज से नहीं कोई लेना-देना, फिर भी पकड़े जाने पर ‘मजहबी टीचर’ देते हैं एक ही तर्क: जानिए ‘सजदा’ और ‘योग’ की...

जिस नमाज और शशांकासन को एक जैसा बताकर मुस्लिम टीचर हिंदू बच्चों को स्कूलों में करवाते प्रयास, उनकी दोनों की मुद्रा में जमीन-आसमान का अंतर है।

कड़ाके की ठंड, सीमित हथियार और हजारों चीनी दुश्मनों के सामने 120 जवानों ने रेजांग-ला में लहराया तिरंगा: पढ़ें उस युद्ध की शौर्यगाथा जिस...

रेजांग ला की लड़ाई सेना के इतिहास में बहादुरी की सबसे बड़ी मिसालों में से एक है, जिसमें '120 अहीर वीरों' ने 5000 चीनी सैनिकों को धूल चटाई थी।

भारत के विकास का ‘जल मार्ग’: जिस ‘ब्लू इकोनॉमी’ की हुई अनदेखी, उसे PM मोदी ने बनाया ‘टॉप एजेंडा’, जानें क्या है मैरीटाइम विजन...

'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' का लक्ष्य, भारत को साल 2030 तक दुनिया की सबसे ताकतवर, सबसे समृद्ध और सबसे आधुनिक समुद्री शक्तियों में शामिल करना।

‘कट्टा-दुनाली’ से लेकर ‘यादव रंगदार बनेंगे’ तक: बिहार चुनाव से जुड़े RJD समर्थकों के गानों में दिख रही जंगलराज की झलक, चुनावी मंचों पर...

बिहार विधानसभा चुनाव आते ही RJD और उसके समर्थक अपने चुनावी प्रचार में हिंसा, बंदूक और अश्लीलता का सहारा लेकर राजनीतिक स्तर को गिरा रहे हैं।

राघोपुर से पहिले त तू तेजस्वी के यार रहलू… ये PK न ‘जन्मभूमि’ का, न ‘कर्मभूमि’ का

प्रशांत किशोर ने पहले राघोपुर से चुनाव लड़ने का दावा किया, अब कह रहे हैं कि चुनाव के दौरान प्रचार-संगठन के काम पर ध्यान देंगे।

सुनो कंचना यादव! जंगलराज सिर्फ एक शब्द नहीं, इसलिए आज भी डरता है बिहार: TV पर गों-गों मत करो, हाई कोर्ट ने लालू-राबड़ी राज...

आजतक की डिबेट में RJD प्रवक्ता कंचन यादव ने 'जंगलराज' शब्द की उत्पत्ति सवाल का पूछा था। ये शब्द 1997 में पटना HC ने लालू यादव सरकार की नाकामी पर दिया था।

हम समझ गए मजहब के लिए आतंकवादी मतलब ‘शांतिदूत’ होता है, इसके लिए ‘द वायर’ पर अफजल गुरु-यासीन मलिक के नाम से रोना-धोना क्यों...

महबूबा मुफ्ती अफजल गुरु को 'बलि का बकरा' और यासीन मलिक को 'शांतिदूत' बता रही है। याद दिला दें कि ये दोनों आतंकवाद और अलगाववाद के चेहरे हैं।

₹12 लाख कमाई पर नेहरू वसूलते थे ₹10 लाख तो इंदिरा गाँधी ने 97.5% लगाया था कर, मोदी सरकार ने ‘टैक्स टेरर’ खत्म कर...

एक तरफ इंदिरा-नेहरू का दौर, जहाँ इनकम टैक्स रेट पहुँचा था 97.5% और आम जनता की कमाई कॉन्ग्रेस खाती थी। वहीं, पीएम मोदी के दौर में आम जनता अपनी मेहनत की कमाई को अपने पास रख सकती हैं।