अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाई। वे कहते हैं कि उन्होंने दोनों देशों को धमकी दी थी कि अगर जंग नहीं रुकी तो व्यापार बंद कर देंगे। लेकिन अब पाकिस्तान के ही विदेश मंत्री इशाक डार ने ट्रंप की पोल खोल दी है। डार ने साफ कहा कि भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं मानी। सब कुछ द्विपक्षीय था, यानी सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच।
पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने अल जजीरा को इंटरव्यू में ट्रंप के दावे को झूठा साबित कर दिया। डार ने कहा, “हम तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के खिलाफ नहीं, लेकिन भारत ने हमेशा कहा कि ये द्विपक्षीय मुद्दा है।”
डार ने बताया कि मई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था। रुबियो ने कहा था कि किसी तीसरी जगह पर बातचीत होगी, लेकिन 25 जुलाई को वॉशिंगटन में रुबियो से मिले तो रुबियो से उन्होंने भारत से बात के बारे में पूछा। इस पर रुबियो ने जवाब दिया, “भारत ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। भारत ने कहा कि ये उनका द्विपक्षीय मामला है।”
डार ने जोड़ा, “हम किसी से भीख नहीं माँग रहे। पाकिस्तान शांति चाहता है। डायलॉग ही रास्ता है, लेकिन बातचीत दोनों तरफ से हो। अगर भारत तैयार हो तो हम बात करने को तैयार हैं।” डार ने साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका से कोई मदद नहीं माँगी।
हालाँकि डार ये कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने मदद नहीं माँगी, लेकिन भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान ने पहले घुटने टेके और ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से गुहार लगाई थी। खैर, दावे अमेरिका की तरफ से भी हुए, पाकिस्तान की तरफ से भी। लेकिन हकीकत क्या है, ये सारी दुनिया देख चुकी है। भारत ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर में न सिर्फ पंगु कर दिया था, बल्कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली को पंगु करते हुए अंदर तक जोरदार हमले किए। अभी तक पाकिस्तान के सभी एयरबेस ऑपरेशन नहीं हो पाए हैं।
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों देशों ने पूर्ण युद्धविराम कर लिया। ट्रंप कहते रहे हैं, “मैंने दो न्यूक्लियर देशों की जंग रोकी। लाखों लोग मर सकते थे।” ट्रंप ने दावा किया था कि व्यापार की बात करके भारत को मनाया। लेकिन भारत ने हमेशा इनकार किया।
अब डार के बयान ने सबकुछ साफ कर दिया है। डार का बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। पहले पाकिस्तान ने ट्रंप के दावे का समर्थन किया था, लेकिन अब डार ने पलट दिया। भारत ने हमेशा कहा कि आतंकवाद पर बात होगी, लेकिन कश्मीर को अलग मुद्दा बनाना गलत। व्यापार या मध्यस्थता का कोई लिंक नहीं।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिसमें अधिकतर हिंदू पर्यटक थे। भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नौ कैंपों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की और हवाई झड़पें हुईं। जिसमें भारतीय वायुसेना ने पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान गिराए।
गुजरात के खेड़ा शहर के मातर तालुका स्थित नानी भागोल गाँव में मस्जिद के पास एक बोर्ड लगाया गया, जिस पर विवाद हो गया है। बोर्ड में लिखा गया कि नानी भागोल हुसैनी चौक पर दरगाह, मस्जिद और मदरसों के आसपास गरबा खेलने पर मनाही है। बोर्ड लगाए जाने के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया।
हिंदू संगठन ने इस विवादित बोर्ड को संविधान के विरुद्ध बताते हुए पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई। मामला पुलिस तक पहुँचा तो मुस्लिमों ने बोर्ड को हटाने के बजाए उस पर तुरंत काला रंग पोत दिया। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए जिला बजरंग दल संयोजक केयूर पटेल ने बताया कि यह पूरा मामला खेड़ा जिले के मातर तालुका के नानी भागोल गाँव का है। सोमवार (15 सितंबर 2025) की सुबह हिंदू संगठन को जानकारी मिली की नानी भागोल के हुसैनी चौक पर गरबा न करने से संबंधित विवादित बोर्ड लगाया गया है। इस पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।
पटेल के मुताबिक, यह बोर्ड स्थानीय मस्जिद समिति ने एक निजी जमीन की दीवार पर लगाया था। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन ने विरोध-प्रदर्शन कर कार्रवाई की माँग की। संगठन के कार्यकर्ताओं ने मातर थाने के पुलिस निरीक्षक को लिखित में शिकायत भी दी है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी भी उपलब्ध है।
हिंदू संगठनों ने जिहादी मानसिकता की निंदा की
हिंदू संगठनों ने पुलिस को सौंपी शिकायत में इस घटना की आलोचना की और इसे जिहादी मानसिकता बताया है। शिकायत में कहा गया कि नानी भगोल गाँव में मस्जिद समिति ने दरगाहों, मदरसों और मस्जिदों के आसपास गरबा खेलने पर सख्त पाबंदी लगाने की बात लिखी है। हिंदू संगठनों ने इस घटना को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ बताया है।
पुलिस को दी शिकायत में यह भी लिखा गया कि इस विवादित बोर्ड को लगाने का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19(1)(D), अनुच्छेद 35, अनुच्छेद 26, अनुच्छेद 153, अनुच्छेद 295 और अनुच्छेद 505 का उल्लंघन है। ये सभी अनुच्छेद धार्मिक स्वतंत्रता और समानता की बात करते हैं। यह भी बताया कि इस तरह की पाबंदी गुजराती संस्कृति के विरुद्ध हैं और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं।
इसके अलावा हिंदू संगठन ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएँ में समाज में फूट और नफरत फैलाने का काम करती हैं। हिंदू संगठनों ने पुलिस से माँग की कि इस तरह के विवादित बोर्ड को तुरंत हटाया जाए और जिम्मेदार लोगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। इसके साथ यह भी माँग की गई कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।
हिंदू संगठन ने बताया कि हुसैनी चौक मुस्लिम बहुल इलाका है। इलाके में नवरात्रि जैसे कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध रहता है। इसके बावजूद कुछ मुस्लिम लोगों ने दुश्मनी फैलाने के लिए ऐसे विवादित लेख के साथ बोर्ड लगाया है।
पुलिस की जाँच शुरू
वहीं ऑपइंडिया से बात करते हुए मातर पुलिस थाने के इंस्पेक्टर आरएन खाट ने बताया कि पुलिस ने आवेदन मिलने के कुछ घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू कर दी थी। पुलिस ने मस्जिद आयोग को घटना की जानकारी दी और विवादित बोर्ड हटाने के आदेश दिए। इसके बाद बोर्ड पर काला रंग पोतकर लिखावट मिटा दी गई।
इंस्पेक्टर ने आगे बताया कि इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है। जाँच के बाद बोर्ड लगाने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मूलरूप से गुजराती में प्रकाशित इस रिपोर्ट को यहाँ लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर अंतरिम फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि पूरा कानून वैध है, लेकिन कुछ हिस्सों पर अस्थाई रोक लगा दी। ये रोक भी ऐसे प्वॉइंट्स पर हैं, जिसका कानून पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला।
सुप्रीम कोर्ट ने पाँच साल इस्लाम प्रैक्टिस प्रमाण (सेक्शन 3(r)), सरकारी संपत्ति जाँच के एकतरफा फैसले (सेक्शन 3C) और बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की अधिक संख्या पर रोक लगाई। लेकिन वक्फ-बाय-यूजर हटाना, ट्राइबल जमीन पर रोक, रजिस्ट्रेशन अनिवार्य और संरक्षित स्मारकों पर वैध ठहराया। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला मुस्लिम समुदाय के मजहबी अधिकारों, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और सरकारी संपत्तियों की रक्षा पर क्या असर डालेगा, इसे विस्तार से समझते हैं।
वक्फ क्या है? इस बात को समझना जरूरी
भारत में वक्फ संपत्तियाँ बहुत पुरानी हैं – कुछ मुगल काल की, कुछ इससे पहले की। आज देश में करीब 8 लाख वक्फ संपत्तियाँ हैं, जिनकी कीमत अरबों में है। लेकिन समस्या ये है कि कई जगहों पर इनका दुरुपयोग होता रहा है – अवैध कब्जे, किराया न लेना या फिर सरकारी जमीनों को वक्फ बताकर हड़प लेना।
इसी दुरुपयोग को रोकने के लिए देश में साल 1923 से कानून बने। 1923 का मुसलमान वक्फ एक्ट पहला था, जो रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता लाया। फिर 1934 में बंगाल वक्फ एक्ट, 1954 में वक्फ एक्ट, 1995 में यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट एक्ट आया।
साल 2013 में इस कानून में फिर से बदलाव लाया गया, लेकिन वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग रुका नहीं। ऐसे में अब साल 2025 में वक्फ संशोधन अधिनियम आया है, जो वक्फ बोर्डों को मजबूत बनाने, रजिस्ट्रेशन सख्त करने और दुरुपयोग रोकने के लिए है। हालाँकि मुस्लिम संगठनों ने इसे चुनौती दी है, ये कहते हुए कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-26) और समानता (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है।
कानूनी चुनौती मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्रावधानों पर केंद्रित थी-
वक्फ संपत्तियों को रद्द करने की शक्ति: कोर्ट, वक्फ-बाय-यूजर या वक्फ डीड के जरिए घोषित संपत्तियों को डी-नोटिफाई करने की शक्ति पर सवाल उठे।
वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना: याचिकाकर्ताओं का कहना था कि केवल मुस्लिम ही इनमें होने चाहिए, सिवाय उन सदस्यों के जो पदेन (एक्स-ऑफिशियो) हैं।
कलेक्टर की जाँच का प्रावधान: इसमें कहा गया था कि अगर कलेक्टर जाँच के बाद संपत्ति को सरकारी जमीन मानता है, तो उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
ये मामला कई रिट याचिकाओं का बंडल था। मुख्य याचिका व्रिट पिटिशन (सिविल) नंबर 276/2025 है, जो ‘इन रे: द वक्फ अमेंडमेंट एक्ट, 2025’ पर है। इसमें 2013 की पुरानी याचिका (नंबर 814) और 2025 की 18 नई याचिकाएँ (269, 284, 314, 331, 344, 353, 375, 381, 398, 415, 427, 431, 436, 439, 440, 445, 447, 450) शामिल हैं। एक ट्रांसफर पिटिशन (1316/2025) भी थी।
सुनवाई अप्रैल 2025 से चल रही थी। 16-17 अप्रैल को चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने तीन मुख्य मुद्दे तय किए थे – 1) वक्फ बाय यूजर का डी-रिकग्निशन, 2) सरकारी संपत्तियों पर स्पेशल प्रोविजन, 3) सेंट्रल काउंसिल और स्टेट बोर्ड की कंपोजिशन में बदलाव।
अब इस मामले में सोमवार (15 सितंबर 2025) को चीफ जस्टिस गवई, जस्टिस अगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने फाइनल अंतरिम फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक लगाने से किया साफ इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी नए कानून (जैसे ये वक्फ अमेंडमेंट) को तुरंत रोकना (स्टे लगाना) आसान नहीं है। ये रेयर केस में ही होता है। क्यों? क्योंकि कोर्ट को लगता है कि हर कानून को ‘संवैधानिक’ मानकर चलना चाहिए (प्रेजम्प्शन ऑफ कन्स्टिट्यूशनलिटी), जब तक साफ-साफ गलती न साबित हो।
सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर नहीं लगाई रोक (SC के फैसले की कॉपी का स्क्रीनशॉट)
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सिर्फ 2 हालात में तुरंत किसी भी कानून पर रोक लगा सकते हैं, जब– 1-अगर कानून बनाने का हक ही न हो (लेगिस्लेटिव कम्पिटेंस न हो)। 2-अगर ये फंडामेंटल राइट्स (जैसे रिलिजन की आजादी, इक्वालिटी) का बिल्कुल साफ उल्लंघन करे।
कोर्ट ने बताया कानून को वैध
याचिकाकर्ताओं की दलीलों को पढ़ें
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ये कानून वक्फ को ‘प्रोटेक्ट’ करने का नाम लेकर संपत्ति छीनने का प्लान है। कपिल सिब्बल ने कहा, “ये कानून वक्फ को बचाने का बहाना है, लेकिन असल में सरकारी संपत्तियाँ हड़प लेने का। 2025 से पहले वक्फ रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं था। 1923 के मुसलमान वक्फ एक्ट और 1954 के एक्ट में प्रोविजन था, लेकिन न करने पर सिर्फ म्यूतावल्ली (मैनेजर) को हटाने की सजा थी, वक्फ पर असर नहीं पड़ता था।”
याचिकाकर्ताओं ने चेतावनी दी कि वक्फ-बाय-यूजर प्रावधान को खत्म करने से सदियों पुरानी मस्जिदें, कब्रिस्तान और अन्य धार्मिक स्थल खो सकते हैं। उनका कहना था कि यह मुस्लिम धार्मिक मामलों में दखलंदाजी है और यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक समुदायों को अपने अजहबी मामलों को संभालने का अधिकार देता है।
सरकार की तरफ से क्या कहा गया?
सरकार का साफ कहना है कि ये कानून वक्फ संपत्तियों का मिसयूज रोकता है, वक्फ को मजबूत बनाता है। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “वक्फ का आधार भले ही इस्लामी परंपरा में हो, लेकिन यह कोई जरूरी मजहबी प्रथा नहीं है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड मुख्य रूप से सांसारिक (सेक्युलर) काम करते हैं, जैसे संपत्ति प्रबंधन, लेखा-जोखा रखना और ऑडिट करना।”
वक्फ-बाय-यूजर को खत्म करने के मुद्दे पर मेहता ने कहा कि यह 2013 में बनाया गया एक वैधानिक प्रावधान था, कोई मौलिक अधिकार नहीं। 2025 के संशोधन के जरिए संसद को इसे हटाने का पूरा अधिकार था।
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विभिन्न प्रावधानों पर गहन विश्लेषण किया है, जो पेज 72 से 123 तक फैला हुआ है। यह हिस्सा कानून की हर मुख्य धारा को छूता है, जिसमें याचिकाकर्ताओं की आपत्तियाँ, सरकार की सफाई और कोर्ट का तर्क शामिल है। कोर्ट ने कहा कि ये संशोधन वक्फ संपत्तियों को मजबूत बनाने और दुरुपयोग रोकने के लिए हैं, लेकिन कुछ जगहों पर संतुलन की जरूरत है।
5 साल इस्लाम की प्रैक्टिस की जरूरत वैध, लेकिन SC ने लगाई अस्थाई रोक
1- सबसे पहले बात करते हैं सेक्शन 4(ix)(a) की, जो मूल वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 3(r) में संशोधन लाता है। यह धारा वक्फ की परिभाषा तय करती है। संशोधन में एक नया नियम जोड़ा गया है कि कोई व्यक्ति अगर अपनी संपत्ति को वक्फ घोषित करना चाहता है, तो उसे साबित करना होगा कि वह कम से कम पाँच साल से इस्लाम का पालन कर रहा है।
कोर्ट ने इसे वैध माना, क्योंकि यह दुरुपयोग रोकने का तरीका है। कल्पना कीजिए, कोई व्यक्ति अचानक संपत्ति दान कर दे और बाद में कहे कि वह वक्फ था – इससे विवाद बढ़ते हैं। यह प्रावधान ऐसी धोखाधड़ी को रोकता है, खासकर जब संपत्ति सरकारी या विवादित हो। लेकिन कोर्ट ने एक समस्या देखी- अभी तक कोई तंत्र नहीं है कि कैसे यह पाँच साल का प्रमाण चेक होगा। राज्य सरकार को नियम बनाने होंगे, जैसे दस्तावेज, गवाह या रिकॉर्ड। जब तक ऐसा तंत्र न बने, कोर्ट ने इस हिस्से पर अस्थाई रोक लगा दी।
5 साल के इस्लाम के पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
मतलब फिलहाल कोई नया वक्फ बनाने के लिए यह प्रमाण न दिखाना पड़ेगा। यह स्टे प्राइमा फेसी है, यानी पहली नजर में जरूरी लग रहा है, लेकिन फाइनल सुनवाई में बदल सकता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि यह भेदभावपूर्ण है, क्योंकि दूसरे धर्मों में ऐसा नहीं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि वक्फ इस्लामिक कॉन्सेप्ट है, तो इसकी खास सुरक्षा जरूरी। फिर भी बिना मैकेनिज्म के लागू न हो।
सरकारी संपत्तियों को हड़पने पर भी लगाई रोक, अब सरकार की एंट्री
सेक्शन 5 में नई धारा 3C जोड़ी गई है, जो सरकारी संपत्तियों पर विशेष प्रावधान को लेकर है। यह कहता है कि कोई सरकारी संपत्ति, चाहे पहले या बाद में वक्फ घोषित की गई हो, वक्फ नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने मूल विचार को सही माना, क्योंकि सरकारी संपत्ति पब्लिक ट्रस्ट है, इसे वक्फ बताकर हड़पना गलत। लेकिन कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी।
खासकर सब-सेक्शन (2) का प्रोविजो, जो कहता है कि डेजिग्नेटेड ऑफिसर (कलेक्टर से ऊपर का अधिकारी) की रिपोर्ट आने से पहले ही संपत्ति को वक्फ न मानो। साथ ही सब-सेक्शन (3) और (4) पर स्टे – ये कहते हैं कि अगर ऑफिसर जाँच कर कहे कि सरकारी है, तो रेवेन्यू रिकॉर्ड बदल दो और बोर्ड को निर्देश दो। कोर्ट ने कहा यह एकतरफा है, बिना पूर्ण सुनवाई के स्टेटस बदलना अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विवादित मामलों में वक्फ ट्रिब्यूनल ही फैसला करेगा। जाँच शुरू होने पर तीसरे पक्ष को बेचना या हस्तांतरित न हो सकेगा, लेकिन हाई कोर्ट में अपील का रास्ता खुला रहेगा।
ASI संरक्षित धरोहरों पर नहीं होगा वक्फ का अधिकार, पर नमाज की दी अनुमति
इसी सेक्शन 5 का एक और हिस्सा धारा 3D संरक्षित स्मारकों से जुड़ा है। यह कहता है कि अगर कोई स्मारक 1904 या 1958 के कानूनों के तहत ‘प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट’ घोषित हो, तो वक्फ घोषणा शून्य हो जाएगी। कोर्ट ने इसे वैध माना, क्योंकि पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (ASI) को स्मारकों की रक्षा का अधिकार है। लेकिन महत्वपूर्ण बात- मजहबी प्रथाएँ जारी रहेंगी। मतलब अगर मस्जिद या कब्रिस्तान स्मारक में है, तो नमाज या पूजा रुकेगी नहीं – 1958 एक्ट की धारा 5(6) यही कहती है।
ट्राइबल की जमीनें नहीं की जा सकेंगी वक्फ, सभी दलीलें खारिज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अगला हिस्सा धारा 3E है, जो ट्राइबल भूमि से जुड़ा है। यह कहता है कि संविधान के पाँचवीं और छठी अनुसूची के तहत अनुसूचित जनजातियों की जमीन वक्फ नहीं घोषित की जा सकती। कोर्ट ने इसे पूरी तरह सही ठहराया। कारण-ट्राइबल समुदाय कमजोर हैं, उनकी जमीनें संरक्षित हैं ताकि बाहरी लोग हड़प न लें। यह संवैधानिक प्रोटेक्शन है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ट्राइबल मुसलमान अपनी जमीन वक्फ नहीं कर सकेंगे, जो धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। लेकिन कोर्ट ने कहा अनुच्छेद 25-26 यहाँ लागू नहीं, क्योंकि ट्राइबल हित प्राथमिक हैं। उदाहरण- नॉर्थ-ईस्ट या झारखंड जैसे इलाकों में ट्राइबल मुसलमानों की जमीनें वक्फ क्लेम से सुरक्षित रहेंगी। याचिकाकर्ता इस पर स्टे ऑर्डर माँग रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या सीमित
अब सेक्शन 10, 12 और 16 पर, जो सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ बोर्ड की संरचना बदलते हैं (मूल धारा 9 और 14)। संशोधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई – काउंसिल में 22 में 12 तक, बोर्ड में 11 में 7 तक। कोर्ट ने संरचना को वैध माना, क्योंकि ये सलाहकारी और प्रशासनिक निकाय हैं, धार्मिक मामलों में दखल नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कैपिंग कर दी। अब काउंसिल में 4 से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं, बोर्ड में 3 से ज्यादा नहीं। यह बैलेंस है। याचिकाकर्ताओं ने इसे अनुच्छेद 26 (धार्मिक प्रबंधन का अधिकार) का उल्लंघन करार दिया, तो सरकार ने इसे स्वभाव से सेकुलर बताया। हालाँकि इन बोर्ड्स में दबदबा मुस्लिमों का ही रहेगा।
वक्फ का रजिस्ट्रेशन रहेगा अनिवार्य, नहीं मानी गई कोई दलील
सेक्शन 21 रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाता है (मूल धारा 36)। कोर्ट ने कहा 1923 के कानून से ही रजिस्ट्रेशन जरूरी था, यह दुरुपयोग रोकता है। लिखित दस्तावेज (डीड) अनिवार्य, वक्फ दान अब वैध नहीं रहेगा। याचिकाकर्ताओं ने कहा इस्लामिक प्रथा में मौखिक दान मान्य, लेकिन कोर्ट ने कहा कानून में रिकॉर्ड जरूरी, विवाद सुलझाने के लिए। इस मामले में कोर्ट ने कोई स्टे नहीं दिया।
वक्फ कानूनों में कब-कब हुआ बदवाल
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में वक्फ कानूनों में कब-कब बदलाव हुए, इसे भी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को समझा कि नए कानून की जरूरत क्यों पड़ी। फैसले के मुताबिक, वक्फ मतलब मुस्लिम रिलिजन में चैरिटी प्रॉपर्टी, जो कभी बेची या ट्रांसफर नहीं हो सकती – ये हमेशा गरीबों, मस्जिद या पढ़ाई के लिए रहती है। लेकिन इतिहास बताता है कि वक्फ का मिसयूज (गलत इस्तेमाल) बहुत हुआ, इसलिए रजिस्ट्रेशन जरूरी बना। चलिए, आपको वक्फ कानून में हुए बदलाव के बारे में विस्तार से बताते हैं…
1923 का मुसलमान वक्फ एक्ट: ये पहला बड़ा कानून था। मकसद? वक्फ का मिसमैनेजमेंट (गलत मैनेजमेंट) रोकना। पहले वक्फ प्रॉपर्टी को क्रेडिटर्स (कर्ज देने वाले) से बचाने का तरीका था, लेकिन लोग इसे लूट लेते थे। इसलिए रजिस्ट्रेशन की शुरुआत हुई – मतलब वक्फ को रजिस्टर कराओ, वरना मैनेजर (मुतावल्ली) को हटा दो। लेकिन सख्त पेनल्टी नहीं थी, बस नाममात्र का। कोर्ट कहता है, ये कानून वक्फ को ‘सुरक्षित’ रखने के लिए बनाया गया था, लेकिन बेहद कमजोर था।
1934 का बंगाल वक्फ एक्ट: ये बंगाल के लिए स्पेशल था। यहाँ पहली बार ‘वक्फ बाय यूजर’ का कॉन्सेप्ट आया। मतलब? अगर कोई प्रॉपर्टी लंबे समय से वक्फ की तरह इस्तेमाल हो रही है (जैसे मस्जिद बनी हुई है), तो वो वक्फ मानी जाएगी, भले पेपर पर न हो। ये अच्छा स्टेप था, क्योंकि पुरानी वक्फ प्रॉपर्टी को बचाया। लेकिन ये सिर्फ बंगाल तक सीमित रहा।
1954 का वक्फ एक्ट: आजादी के बाद का पहला नेशनल कानून। इसमें सर्वे (सभी वक्फ चेक करना), रजिस्ट्रेशन और पेनल्टी जोड़ी गई। मतलब सरकारी अफसर वक्फ प्रॉपर्टी का लिस्ट बनाएँगे, रजिस्टर कराएँगे और गलती पर जुर्माना लगेगा। कोर्ट ने कहा कि ये कानून वक्फ को ऑर्गनाइज करने के लिए था, क्योंकि पहले बहुत कन्फ्यूजन था।
1976 की वक्फ इंक्वायरी कमिटी: एक कमिटी बनी, जिसने वक्फ के मिसयूज की जाँच की। उन्होंने कहा कि नॉन-रजिस्ट्रेशन (रजिस्टर न कराना) रोकने के लिए सेक्शन 55A जोड़ो – मतलब, अगर रजिस्टर न किया तो कोर्ट में केस न लड़ सको। ये सिफारिश अच्छी थी, लेकिन ये बदलाव तुरंत लागू नहीं हो पाया।
1984 का अमेंडमेंट: 1976 की कमिटी के बाद ये चेंज आया। सेक्शन 55E जोड़ा गया, जो रजिस्ट्रेशन को और सख्त बनाता। लेकिन कोर्ट कहता है, ये ठीक से इम्प्लीमेंट (लागू) नहीं हुआ – यानी, कागजों पर रह गया।
1995 का ओरिजिनल वक्फ एक्ट: ये सबसे बड़ा था। इसमें ‘वक्फ बाय यूजर’ को नेशनल लेवल पर मान्यता दी, रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया, और वक्फ ट्रिब्यूनल (खास कोर्ट) बनाया। सेक्शन 87 में कहा कि अगर रजिस्टर न किया तो कोर्ट में सूट (केस) नहीं चलेगा (लेकिन 2013 में ये डिलीट हो गया)। कोर्ट कहता है, ये एक्ट वक्फ को मजबूत बनाने के लिए था, लेकिन फिर भी मिसयूज जारी रहा।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पाँच साल इस्लाम प्रैक्टिस प्रमाण (सेक्शन 3(r)), सरकारी संपत्ति जाँच के एकतरफा फैसले (सेक्शन 3C) और बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की अधिक संख्या पर रोक लगाई है। लेकिन इसमें भी सुप्रीम कोर्ट ने 5 साल इस्लाम की प्रैक्टिस को भी जरूरी माना। चूँकि अभी ऐसा कोई सिस्टम नहीं बना है, जिसमें 5 साल इस्लाम की प्रैक्टिस की जाँच की जा सके, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सिस्टम बनने तक इस पर अस्थाई रोक लगाई है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कानून में वक्फ-बाय-यूजर को हटाने, ट्राइबल जमीन को वक्फ में बदलने पर रोक, रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता और संरक्षित स्मारकों पर सरकार द्वारा बनाए गए कानून की स्थिति को सही माना है। ऐसे में मूल मुद्दे पर इस फैसला का कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया की ऐतिहासिक रैली में यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव का असली एजेंडा क्या होगा। पीएम मोदी ने जो शब्द कहे, वे सिर्फ चुनावी भाषण नहीं थे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला संदेश था।
उन्होंने साफ कर दिया कि बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश को यह समझना होगा कि घुसपैठ और डेमोग्राफी में बदलाव देश की सुरक्षा, संस्कृति और पहचान के लिए सबसे बड़ा खतरा है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में विपक्षी दलों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि बिहार में एक भी घुसपैठिया नहीं छोड़ा जाएगा और यह मिशन किसी भी राजनीतिक समीकरण से ऊपर है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कॉन्ग्रेस और राजद को विशेष रूप से निशाना बनाया। उन्होंने राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव पर सीधे आरोप लगाए कि वे घुसपैठियों के हितैषी बनकर सामने आए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का असली मकसद तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह गठबंधन उन लोगों के साथ खड़ा है जो सीमांचल जैसे संवेदनशील इलाकों में देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं। पीएम मोदी का यह आक्रामक रुख साफ बताता है कि भाजपा इस चुनाव को सिर्फ बिहार की राजनीति तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि इसे एक राष्ट्रीय मुहिम के रूप में पेश करेगी।
प्रधानमंत्री का फोकस खास तौर पर सीमांचल क्षेत्र पर था। यह इलाका पश्चिम बंगाल और असम से सटा हुआ है और यहाँ की भौगोलिक संवेदनशीलता के कारण यह घुसपैठ का सबसे बड़ा रास्ता माना जाता है। भाजपा का दावा है कि यहाँ योजनाबद्ध तरीके से जनसंख्या संरचना बदली जा रही है।
पीएम मोदी ने जनता को चेताया कि अगर यह प्रवृत्ति नहीं रोकी गई तो स्थानीय लोग अपने ही घर में अल्पसंख्यक हो जाएँगे और उनकी संस्कृति, परंपरा और अधिकार छिन जाएँगे। यह चेतावनी न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि विपक्ष के संरक्षण में घुसपैठिए न केवल वोट बैंक का हिस्सा बनते हैं, बल्कि वे समाज में असंतुलन भी पैदा करते हैं। यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी साजिश है जो भारत के ताने-बाने को तोड़ने के लिए रची गई है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कॉन्ग्रेस और राजद जैसी पार्टियाँ अपने स्वार्थ के लिए घुसपैठियों को बचाती हैं, उन्हें पहचान पत्र दिलवाती हैं और फिर उनका उपयोग चुनाव जीतने के लिए करती हैं। उनका यह सीधा हमला विपक्ष के वोट बैंक की राजनीति को पूरी तरह से बेनकाब करने वाला था।
घुसपैठ को लेकर चिंता केवल प्रधानमंत्री मोदी की ही नहीं है बल्कि संवैधानिक संस्थाएँ भी इसे लेकर चिंतित हैं। बिहार में चुनाव आयोग द्वारा किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का एक उद्देश्य वोटर लिस्ट से घुसपैठियों को बाहर करना भी है। इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा की गई है।
भाजपा का कहना है कि इससे फर्जी वोटर और घुसपैठियों का नाम हटाया जाएगा। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह पूरी कवायद मुस्लिम समुदाय और सीमावर्ती जिलों के मतदाताओं को चुनाव से बाहर करने की कोशिश है।
राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव का कहना है कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है लेकिन भाजपा इसे देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है। बीजेपी का कहना है कि असली लोकतंत्र वही है जिसमें केवल वैध नागरिक ही मतदान कर सकें।
घुसपैठ को लेकर जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े चिंता है वो पीएम मोदी ने पहली बार नहीं जाहिर की है। 15 अगस्त 2025 को लाल किले से अपने भाषण में उन्होंने घुसपैठ के खिलाफ अपने अभियान के स्पष्ट संकेत दे दिए थे।
उन्होंने कहा था कि देश में कुछ ताकतें ऐसी हैं जो सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफी बदल रही हैं। यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और उसकी सामाजिक संरचना को कमजोर करने की कोशिश है।
उन्होंने यह भी कहा था कि यह घुसपैठ न केवल सीमाओं को असुरक्षित बनाती है, बल्कि बहन-बेटियों की सुरक्षा और आदिवासियों की जमीन के अधिकारों पर भी सीधा खतरा है। पूर्णिया की रैली इसी संदेश का विस्तार थी, जिसने बिहार चुनाव को एक राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है।
भाजपा के लिए यह चुनाव रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। बिहार में जीत हासिल करने के लिए सीमांचल और पूर्वी बिहार के इलाके निर्णायक भूमिका निभाएँगे। भाजपा का प्रयास है कि वह घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर हिंदू मतदाताओं को एकजुट करे और विपक्ष को डिफेंसिव मोड में ले आए।
यह रणनीति सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड जैसे राज्यों में भी इसका प्रभाव दिखाई देगा। यह भाजपा के लिए एक दीर्घकालिक नैरेटिव तैयार करने का अवसर है।
घुसपैठ का मुद्दा हमेशा से भारत की राजनीति में गहराई से जुड़ा रहा है। भाजपा ने हमेशा देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाई है। वहीं, विपक्ष पर यह आरोप लगता रहा है कि वह केवल मुस्लिम वोट बैंक के लालच में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करता है। पूर्णिया की रैली ने इस बहस को और तीखा कर दिया है।
यह चुनाव सिर्फ विकास और वादों का नहीं होगा बल्कि यह तय करेगा कि बिहार और पूरे देश की राजनीति किस दिशा में जाएगी। पीएम मोदी के भाषण के बाद यह स्पष्ट है कि बीजेपी के लिए यह चुनाव जीतना सिर्फ राजनीतिक तौर पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
यह चुनाव देश के भविष्य की दिशा तय करने का है। भाजपा का संदेश स्पष्ट है यह लड़ाई घुसपैठियों और देशद्रोहियों के खिलाफ है। अब यह देखना होगा कि जनता इस संदेश को कितनी मजबूती से स्वीकार करती है और क्या यह मुद्दा भाजपा को निर्णायक बढ़त दिला पाता है या नहीं।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भारत को मक्का आयात नहीं कर पाने पर अफसोस जताते हुए कहा है कि भारत की 140 करोड़ की आबादी है, फिर भी वह हमसे एक बुशल मक्का नहीं खरीद रहा। एक बुशल का मतलब 25.40 किलो होता है।
उन्होंने कहा, “भारत शेखी बघारता है कि उसके पास 1.4 अरब लोग हैं, फिर भी वह हमसे एक बुशल मक्का क्यों नहीं खरीदता? क्या यह बात आपको बुरी नहीं लगती कि वह हमें सब कुछ बेचता है, और हमारा मक्का नहीं खरीदता? वह हर चीज़ पर टैरिफ लगाता है। या तो आप इसे मान लीजिए, वरना दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता के साथ व्यापार करना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा।”
राष्ट्रपति ट्रंप का जिक्र करते हुए ल्यूटनिक ने कहा, “वे ( ट्रंप ) कहते हैं कि हमारे साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा हम तुम्हारे साथ करते हैं। हमने वर्षों की गलतियों को सुधारा है। इसलिए हम चाहते हैं कि टैरिफ दूसरी तरफ हो। हम इसे ठीक करेंगे।” यही राष्ट्रपति का आदर्श वाक्य है।
.@mikeallen asks on The Axios Show if the U.S. is “pissing away valuable relationships” with steep tariffs against allies.@howardlutnick: “India brags that they have 1.4 billion people. Why won’t their 1.4 billion people buy one bushel of U.S. corn?” pic.twitter.com/SPZUJLzWEM
लेकिन लुटनिक की बात आंशिक रूप से गलत हैं, क्योंकि भारत ने 2024-25 में कुछ अमेरिकी मक्का खरीदा था। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने 1100 टन अमेरिकी मक्का का आयात किया। ये 1100 टन 2024-25 में भारत के कुल मक्का आयात का छोटा-सा हिस्सा था। कुल आयात 0.97 मिलियन टन हुआ, जिसका अधिकांश हिस्सा म्यांमार और यूक्रेन से आता है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत ने 2024-25 में म्यांमार से 0.53 मिलियन टन और यूक्रेन से 0.39 मिलियन टन मक्के का आयात किया।
भारत अमेरिका से अधिक मक्का क्यों नहीं आयात करता?
भारत की मक्के की घरेलू माँग उसकी तीव्र आर्थिक वृद्धि के साथ लगातार बढ़ रही है। भारत मुख्य रूप से पशुधन और मुर्गी पालन उद्योग में चारे के लिए और इथेनॉल उत्पादन उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में मक्के का आयात करता है। म्यांमार और यूक्रेन भारत के पारंपरिक रूप से मक्के के सबसे बड़े निर्यातक रहे हैं।
लगभग सभी अमेरिकी मक्का आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों से प्राप्त होता है। भारत जीएम फसलों के आयात की अनुमति नहीं देता है। इससे अमेरिका के ज्यादातर मक्के की किस्में भारत में आयात नहीं की जा सकती।
भारत मक्के के आयात के लिए टैरिफ दर कोटा (TRQ) लागू करता है। सीमित मात्रा में आयात कम शुल्क पर किया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक मात्रा पर 50% शुल्क लगता है, जिससे अमेरिकी मक्का महँगा हो जाता है।
रूस से युद्ध से पहले यूक्रेन और म्यांमार भारत को सस्ती कीमत पर मक्का बेचते रहे हैं। म्यांमार से आयात करने पर माल ढुलाई शुल्क कम लगता है। इसके अलावा, भारत सरकार पारंपरिक रूप से अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत म्यांमार से आयात को प्राथमिकता देती रही है।
मोदी सरकार में आत्मनिर्भरता पर पूरा जोर है। भारत सरकार दूर-दराज़ के देशों से महँगे कृषि आयात से बचने की कोशिश करती है। यहाँ तक कि जब अमेरिका से गैर-जीएम मक्के की छोटी खेप उपलब्ध होती है, तब भी उनकी गैर-जीएम स्थिति प्रमाणित करना और भारत की सख्त फाइटोसैनिटरी आवश्यकताओं को पूरा करना भारतीय आयातकों के लिए मुश्किल होता है।
अमेरिका भारत को मक्का क्यों बेचना चाहता है?
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा मक्का उत्पादक है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई मक्का यहाँ पैदा होता है। अच्छी पैदावार होने पर घरेलू खपत के काफी ज्यादा मक्का इनके पास बच जाता है। अगर निर्यात ठीक से नहीं होता है, तो घरेलू बाजार में अतिरिक्त मक्का होगा, जिससे मक्का की कीमतें गिरेंगी और मक्का किसानों को नुकसान होगा।
अमेरिका में मक्का उत्पादन ज्यादा होने की वजह से वह जापान, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों के साथ अमेरिका की व्यापार वार्ताओं और समझौतों में अक्सर मक्का निर्यात को शामिल करता है।
यूएस ग्रेन्स काउंसिल और नेशनल कॉर्न ग्रोअर्स एसोसिएशन जैसे कृषि लॉबी और कमोडिटी समूह अमेरिकी सरकार पर नए निर्यात बाज़ार खोलने, घरेलू किसानों को खुश रखने और ज़मीन की कीमतें ऊँची रखने के लिए जबरदस्त दबाव डाल रहे हैं। अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ता जा रहा है। इससे घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की माँग और खपत में कमी आ रही है।
इसके अलावा, बड़े एशियाई बाजारों में मक्का निर्यात के लिए अमेरिका को ब्राजील, अर्जेंटीना जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है।
चीन अमेरिका के मक्के का सबसे बड़ा आयातक देश रहा है। चीन ने अमेरिका से 2022 में करीब 5.21 अरब डॉलर का मक्का आयात किया। 2024 में ये घटकर मात्र 33.1 करोड़ डॉलर रह गया। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन के आयात में भारी गिरावट आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, 2025 के पहले 7 महीनों में, चीन ने केवल 24 लाख डॉलर का अमेरिकी मक्का आयात किया है।
इसलिए, अमेरिका को अपने मक्का के निर्यात के लिए एक नए और पर्याप्त बड़े बाजार की सख्त जरूरत है। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक का रोना धोना इसी को लेकर है। ये अमेरिकी मक्का को भारत में नहीं बेच पाने को लेकर हताशा ज्यादा लगता है, व्यापार संतुलन को लेकर बेचैनी कम।
(ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने भारत की मोदी सरकार पर जहर उगला है और राहुल गाँधी की तारीफ की है। राहुल गाँधी की सोच को शाहिद अफरीदी ने सकारात्मक बताया और कहा कि वे पाकिस्तान से बातचीत करने को तैयार है। शाहिद अफरीदी ने भारत की तुलना इजरायल से भी की है।
पाकिस्तानी मीडिया के साथ एक इंटरव्यू में बोलते हुए अफरीदी ने कहा, “अगर आप राहुल गाँधी को देखें तो वे बहुत सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हैं। वे चाहते हैं कि बातचीत आगे बढ़े… लेकिन ये लोग… मेरा मतलब है। क्या एक इजराइल काफी नहीं है कि आप दूसरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”
After Hafiz Saeed now Shahid Afridi ( Terror apologist & India hater ) praises Rahul Gandhi… Not surprised! Everyone who hates India finds an ally in Rahul Gandhi & Congress
शाहिद अफरीदी ने भारत की मोदी सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा, “भारत भी पाकिस्तान के साथ वैसा ही बर्ताव कर रहा है, जैसे गाजा के साथ इजरायल करता है। जब तक इनके टॉप लीडर है, ऐसा ही चलता रहेगा।” अफरीदी ने मोदी सरकार पर सत्ता में बने रहने के लिए हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने का भी आरोप लगाया।
शाहिद अफरीदी के भारत-विरोधी बयान
ये वही शाहिद अफरीदी है जो अक्सर भारत विरोधी और हिंदू विरोधी बयान देते रहते है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शाहिद अफरीदी ने जहरीला बयान दिया था। शाहिद आफरीदी ने कहा था कि भारत खुद ही अपने लोगों को मरवाता है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अफरीदी को लोगों ने जमकर लताड़ा था।
शाहिद अफरीदी की हमेशा से ही इस्लामी कट्टरपंथी वाली सोच रही है। कई बार अफरीदी ने बयान दिए हैं बहन-बेटियों को इस्लामी कानून के तौर-तरीकों पर ही चलना चाहिए। एक बार शाहिद अफरीदी की बेटी भारत में टीवी सीरियल देख रही थी। बेटी ने हिंदू आरती का सीन देखकर खुद भी आरती की तरह हाथ घुमाने लगी। तभी इस्लामी कट्टरपंथ सोच वाले शाहिद अफरीदी ने टीवी फोड़ डाला था।
मध्यप्रदेश के धार में बनने वाले पीएम मित्र पार्क यानी मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एपेरल पार्क का भूमिपूजन पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन के मौके पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री इसका भूमिपूजन करने जा रहे हैं। ये योजना देश के 7 राज्यों के 7 जिलों में शुरू हो रहा है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलगा और बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक आकर्षित होंगे।
एमपी के धार के पीएम मित्र पार्क की खासियत
धार जिले के भैंसोला गाँव में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एपेरल पार्क का भूमिपूजन हो रहा है। यह देश का सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क होगा, जिसमें कपास से परिधान तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित होगी। ये करीब 2000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इससे करीब 6 लाख किसान सीधे उद्योग से जुडेंगे। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सागर समेत तमाम केन्द्रों में टेक्सटाइल सेक्टर बुस्ट और विस्तारित होगा।
भोपाल के सतगढ़ी में 61 हेक्टेयर पर रेडीमेड गारमेंट पार्क भी बनाया जा रहा है। एक गारमेंट कॉन्प्लेक्स इंदौर के परदेशीपुरा में बन रहा है। इसमें 4 ब्लॉक और 184 यूनिट होंगे। इससे मुरैना के मेगा फुटवियर और एक्ससेरीज कलस्टर को भी मदद मिलेगी
बिजली-पानी समेत विश्वस्तरीय सुविधाएँ मिलेगी
पार्क में विश्वस्तरीय सुविधाएँ होंगी। यहाँ पावर सप्लाई के लिए 220 केवी का बिजली सब स्टेशन बनेगा। 20 एमएलडी क्षमता वाली वाटर सप्लाई डोरस्टेप तक मिलेगी। स्काडा की मॉनिटरिंग होगी। हाउसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। पानी, सौर ऊर्जा संयंत्र की खास व्यवस्था के साथ-साथ श्रमिकों और महिला कर्मचारियों को घर और सामाजिक सुविधाएँ दी जाएँगी। पार्क को इंडियन ग्रीन इंडस्ट्रियल टाउनशिप का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
अब तक 27109 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव
अभी भूमिपूजन हो रहा है, लेकिन एमपी के पीएम मित्र पार्क को अब तक 27109 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिल चुका है। इससे हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद बँधी है। दरअसल मध्यप्रदेश में टैक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जरूरी कपास का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। राज्य 40 फीसदी जैविक कपास का उत्पादन करता है। इंदौर, धार, खरगोन, खंडवा जैसे मालवा क्षेत्र के जिले कपास उत्पादन के लिए अहम हैं।
पीएम मित्र पार्क से जुडेंगे ये इंस्टीट्यूट
मध्यप्रदेश के पीएम मित्र पार्क से NIFT नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी , NID (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन) IITDM (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, डिजाइन एंड मैन्युफेक्चरिंग) और ग्लोबल स्किल पार्क भी जुड़े होंगे।
कहाँ-कहाँ बन रहा पीएम मित्र पार्क
केन्द्र ने 7 राज्यों के 7 शहरों में पीएम मित्र पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसमें एमपी का धार, उत्तर प्रदेश का लखनऊ, महाराष्ट्र का अमरावती, तमिलनाडु का विरुधनगर, तेलंगाना का वारंगल, गुजरात का नवसारी, कर्नाटक का कलबुर्गी शामिल है।
तमिलनाडु में हो चुका है पीएम पार्क का शुभारंभ
तमिलनाडु के पियोनियर में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क योजना की शुरुआत 22 मार्च 2024 को हुई। ये विधुरनगर के ई कुमारालिंगापुरम गाँव के 1052 एकड़ में बना है। इसपर 2000 करोड़ रुपए लागत का अनुमान है। परियोजना से 19000 करोड़ रुपए के निवेश की उम्मीद है। साथ ही 2 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ देश के विकास में ये योजना अहम साबित होगा। तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्धन निगम यानी (SIPCOT) इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए मास्टर डेवलपर की भूमिका निभा रहा है।
5F विजन पर आधारित है योजना
पीएम मित्र पार्क वस्त्र उद्योग में कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, प्रिंटिंग से लेकर कपड़े बनाने तक की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी। ये 5F विजन- ‘फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से फॉरेन’ पर आधारित है। इसका मतलब है खेत से कपास और धागा पैदा करना, धागे को कारखाने में ले जाना, कारखानों से फैशन ट्रेंड बनना और फिर से विदेश भेजना। इन सब से लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
2023 में वस्त्र उद्योग को लेकर पीएम मोदी ने की थी घोषणा
पीएम मोदी ने 2023 में घोषणा की थी मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना,कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएँगे। इसके लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर दिया जाएगा और इसके माध्यम से करोड़ों का निवेश उद्योगपतियों से करवाया जाएगा।
‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ का बेहतरीन उदाहरण
केन्द्र सरकार ने 2021-22 से 2027-28 तक सात पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र यानी पीएम मित्र पार्क स्थापित करने के लिए 4445 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है। ये योजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ का बेहतरीन उदाहरण है। ये देश को वस्त्र उद्योग के महाशक्ति बनने की यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा। इस योजना से वस्त्र उद्योग में क्रांति आएगा। पूँजी निवेश होगा और रोजगार के नए अवसर बड़ी संख्या में पैदा होंगे। ये महत्वाकांक्षी परियोजना देश के आर्थिक समृद्धि में योगदान देगा और वैश्विक मंच पर वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में स्थिति को और मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर 2025 से स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान शुरू होने जा रहा है। अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देकर उन्हें सशक्त बनाना है। प्रधानमंत्री खुद इस अभियान की शुरुआत करेंगे।
पीएम इस कार्यक्रम की शुरुआत बिहार से करेंगे। इसके लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अभियान की सफलता के लिए सभी तैयारियों की समीक्षा की। मंत्री ने बैठक में कहा कि अभियान 17 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 तक पीएम के जन्मदिन के मौके पर आयोजित ‘सेवा पखवाड़ा’ के तहत शुरू किया जाएगा। इसके तहत कई जनकल्याणकारी कार्यक्रम होंगे।
शिविर में महिलाओं और बच्चों की होगी स्वास्थ्य जाँच
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के दौरान महिला स्वास्थ्य जाँच, मातृ और शिशु देखभाल, जागरूरकता और व्यवहार परिवर्तन, निक्षय मित्र अभियान, रक्तदान के करीब 75,000 शिविर आयोजित किए जाएँगे। ये शिविर सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लगाए जाएँगे।
इन शिविरों में महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को विशेष टीकाकरण के साथ-साथ स्त्री रोग, बाल रोग और अन्य बीमारियों की जाँच और उपचार से जुड़ी सेवाएँ प्रदान की जाएँगी। साथ ही ENT, दाँत और आँखों की जाँच की सुविधा भी उपलब्ध होगी और जरूरतमंदों को चश्मा भी दिया जाएगा। शिविरों में आने वाले सभी मरीजों का आभा ID से ऑनलाइन पंजीकरण कराया जाएगा।
इसके अलावा 9 से 14 साल की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV टीका भी लगाया जाएगा। इसके साथ 591 स्थलों पर आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए समर्पित स्टॉल लगाए जाएँगे, जहां लाभार्थी आसानी से अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकेंगे।
आँगनवाड़ी में मनाया जाएगा पोषण माह
स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत देशभर के आँगनवाड़ी केंद्रों में पोषण माह भी मनाया जाएगा, जिसमें महिलाओं और बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता पर ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
इनमें महिलाओं को जागरूक किए जाएगा कि कैसे चीनी और खाद्य तेलों में 10 प्रतिशत की कमी के साथ मोटापा कम कर सकते हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों की देशखभाल और शिशु के आहार से संबंधित आचरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता और पोषण की जानकारी दी जाएगी। साथ टेक होम राशन (THR) वितरित किया जाएगा।
BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा की अभियान से जुड़ने की अपील
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर पोस्ट में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान से जुड़ने की अपील की। जेपी नड्डा ने निजी अस्पतालों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अन्य स्टेक होल्डर्स से भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लेने की अपील की है।
Hon’ble Prime Minister Shri @NarendraModi ji will launch the Swasth Nari Sashakt Parivar Abhiyaan on 17th September 2025. This initiative aims to strengthen healthcare services for women and children across India, ensuring better access, quality care, and awareness.
उन्होंने कहा, “विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। भारत को सर्वोपरि मानते हुए, आइए हम इस सामूहिक प्रयास का हिस्सा बनें।”
बिहार में RJD की माई-बहिन मान योजना के नाम पर महिलाओं के साथ ठगी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दरभंगा जिले में गुड़िया देवी नामक से 2500 रुपए हर महीने मिलने का लालच देकर 200 रुपए की ठगी की गई है। पुलिस ने महिला की शिकायत पर इस मामले में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत 4 नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
माई-बहिन योजना के नाम पर महिलाओं को कैसे ठगा?
ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता गुड़िया देवी से बातचीत की है। गुड़िया देवी आशा कार्यकर्ता हैं और पशुपालन का काम करती हैं। उन्होंने इस पूरी घटना को सिलसिलेवार तरीके से बताया है। उन्होंने बताया कि 2-3 दिन पहले RJD का एक कार्यकर्ता उनके पास आया था और उसने माई-बहिन योजना का फॉर्म भरने को कहा था।
गुड़िया देवी ने हमें बताया, “एक आदमी आया और RJD कार्यकर्ता बोलकर हमसे जानकारी माँगने लगा। कहने लगा कि माई-बहिन योजना का फॉर्म भरवा लीजिए, आपको अगले महीने से 2500 रुपए, हर महीने मिलने शुरू हो जाएँगे।”
उन्होंने बताया, “उसने हमसे हमारा मोबाइल लिया और आधार कार्ड व बैंक खाता माँगा। उसने फॉर्म भरने के बाद OTP आने की बात कही थी।” गुड़िया ने आगे बताया, “इसके बाद उसने कहा कि आपको इस फॉर्म के 200 रुपए देने होंगे।”
जब गुड़िया ने उसे ऑनलाइन पैसे देने की बात कही तो युवक ने इनकार कर दिया। इसके बाद गुड़िया ने उसे 200 रुपए नकद दिए जिन्हें लेते ही वह चला गया। कुछ देर बाद जब गुड़िया के पति मिथलेश घर आए तो उन्होंने इसकी जानकारी अपने पति को दी।
गुड़िया ने कहा, “मेरे पति यह बात सुनकर गुस्सा हो गए कि यह फ्रॉड हो सकता है। उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस में देने को कहा जिसके बाद हमने तेजस्वी यादव और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दी।”
‘अब धमका रहे RJD के लोग, बाहर जाने में भी लग रहा डर’
गुड़िया ने बताया कि शिकायत देने के बाद अब RJD के लोग उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमका रहे हैं। गुड़िया ने कहा, “मैं आशा वर्कर का काम करती हूँ और मुझे घर से बाहर जाना पड़ता है। अब मुझे घर से बाहर निकलने में भी डर लगा रहा है कि कहीं हमारे ऊपर कोई हमला ना कर दे।”
गुड़िया ने अपनी शिकायत में कहा, “घर आए लोगों ने मुझसे और महिलाओं को बुलाने कहा था और सभी महिलाओं से आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और 200 रुपया देने को कहा था।”
गुड़िया द्वारा दी गई शिकायत
शिकायत नहीं लेंगे वापस: गुड़िया के पति
गुड़िया के पति मिथलेश ऑटो चालक हैं। मिथलेश ने ऑपइंडिया से कहा, “मैं ऑटो चलाता हूँ तो बाहर रहना होता है। मुझे भी बाहर जाने में खतरा है, लोगों का दबाव भी है लेकिन अब शिकायत वापस नहीं लेंगे।”
उन्होंने गुस्से भरे लहजे में कहा, “अगर गुंडों से डरकर शिकायत वापस लेनी होती तो शिकायत क्यों ही करते।” उनका कहना है कि उन्हें आधार कार्ड के नंबर माँगने पर शक हुआ था और इससे फ्रॉड होने का पूरा खतरा था।
वहीं, पीड़ित परिवार का कहना है कि गाँव के अन्य लोगों के साथ भी ऐसा फ्रॉड किया गया है लेकिन वो डरे हुए हैं और डर से बाहर आकर अपनी बात नहीं कह पा रहे हैं।
FIR में तेजस्वी के अलावा किसका नाम?
दरभंगा जिले के सिंघवाड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4), 3 (4) के तहत पुलिस ने FIR दर्ज की है। पुलिस ने इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ-साथ मशकुर अहमद उस्मानी (पूर्व प्रत्याशी जाले विधान सभा), संजय यादव (सांसद राज्यसभा) और ऋषि मिश्रा (पूर्व विधायक जाले) को आरोपित बनाया है।
FIR में गुड़िया के हवाल से लिखा गया है, “पति (मिथलेश) के बताने पर हम लोगों को पता चला की हम लोग ठगे गए है और उसके पीछे RJD के बड़े कद्दावर नेता का हाथ है उनके ही द्वारा मासूम जनता को ठगने की योजना बनाई गई है।”
पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR का हिस्सा
पुलिस ने क्या बताया?
ऑपइंडिया ने इस मामले में सिंघवाड़ा थाने के SHO बसंत कुमार से भी बात की है। बंसत कुमार ने बताया कि FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि जल्द से इससे जुड़े लोगों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस को इस मामले में और पीड़ित मिलने का भी शक है।
पहले भी मिली हैं माई-बहिन योजना को लेकर शिकायतें
बिहार में इस योजना के लॉन्च होने के बाद से ही यह विवादों में है। कभी इसे लेकर RJD-कॉन्ग्रेस में राजनीति रस्सा-कशी की शिकायतें मिलीं तो कहीं लोगों को बरलाए जाने के आरोप लगे हैं। इससे पहले सामने आया था कि आरजेडी और कॉन्ग्रेस ने माई बहिन मान योजना के फॉर्म भरवाने के लिए जिन लोगों को काम पर लगाया है, उनके पास कोई अथॉरिटी नहीं है।
ये लोग बिहार में लोगों के पास जाकर उनसे आधार कार्ड माँग रहे थे, NDA के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। जिसके बाद यह योजना लगातार विवादों में है। इसे बीजेपी के नेताओं ने बड़ा घोटाला बताया है।
असम पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में असम सिविल सेवा (ACS) की एक अधिकारी नूपुर बोरा को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्यमंत्री की स्पेशल विजलेंस सेल के अधिकारियों की एक टीम ने बोरा के गुवाहाटी स्थित आवास पर छापेमारी कर 90 लाख रुपए से अधिक नकद और करीब 1 करोड़ रुपए के गहने जब्त किए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारपेटा में उनके किराए के घर से 10 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। 2019 में असम सिविल सेवा की अधिकारी बनीं गोलाघाट निवासी नूपुर बोरा वर्तमान में कामरूप जिले के गोरोइमारी में सर्कल अधिकारी के तौर पर तैनात थीं। इससे पहले वह बारपेटा और कार्बी आंगलोंग में सर्कल ऑफिसर के तौर पर काम कर चुकी हैं।
हिंदुओं की जमीन मुस्लिमों को देने का आरोप
नूपुर बोरा पर आरोप है कि उन्होंने बारपेटा में तैनाती के समय करोड़ों रुपए की जमीन के दस्तावेज अवैध रूप से ट्रांसफर किए थे। आरोप है कि बोरा ने सरकारी और सत्रा (धार्मिक ट्रस्ट) की जमीन भी संदिग्ध लोगों के नाम की थी।
इनमें से अधिकतर जमीनें हिंदुओं की थी जिन्हें मुस्लिमों के नाम किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सरकारी जमीनों को अवैध रूप से संदिग्ध घुसपैठियों के नाम पर दर्ज करवा दिया थी। साथ ही, बोरा के बारपेटा और गोलाघाट में कई बैंक लॉकर हैं और उनकी भी अब सतर्कता अधिकारियों द्वारा जाँच की जा रही है।
क्या बोले CM हिमंता?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “सरकार को सूचना मिली है कि यह अधिकारी हिंदुओं की जमीन एक विशेष समुदाय को हस्तांतरित कर रही थी।” सीएम ने कहा कि नूपुर बोरा पर जमीन की अनियमितताओं को लेकर मिली शिकायतों के चलते पिछले छह महीनों से नजर रखी जा रही थी।
उन्होंने कहा, “अधिकारी ने हिंदुओं की जमीन को संदिग्ध लोगों को ट्रांसफर किया था। जिसके चलते उन पर नजर रखी जा रही थी। उन्होंने बारपेटा में तैनाती के दौरान पैसों के जमीन ट्रांसफर का काम किया था।”
असम सरकार की एक अधिकारी के खिलाफ अवैध धन प्राप्त करने के मामले में कार्रवाई जारी है।
सरकार को सूचना मिली है कि यह अधिकारी हिंदुओं की ज़मीन एक विशेष समुदाय को हस्तांतरित कर रही थी। pic.twitter.com/giYYtf0z7r
स्पेशल विजिलेंस सेल ने बोरा से जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी शुरू कर दी है। सेल ने बोरा के कथित सहयोगी लाट मंडल सुरजीत डेका के बारपेटा स्थित आवास पर भी छापेमारी की है। डेका पर आरोप है कि उसने बोरा के साथ मिलकर कई बारपेटा में कई जमीनें खरीदी थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है, और भ्रष्टाचार के इस मामले में बोरा से जुड़े अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर भी जाँच हो सकती है।