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कौन है ‘लेडी अलकायदा’ आफिया सिद्दीकी, क्यों अमेरिका ने 86 साल के लिए जेल में किया है बंद: जानें पाकिस्तान की ‘आतंकी बेटी’ के बारे में सब कुछ

अमेरिका की जेल में बंद ‘लेडी अलकायदा’ आफिया सिद्दीकी की रिहाई की माँग नए सिरे से की जा रही है। वह एक पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट हैं, जिस पर अमेरिकी सैनिकों पर गोलीबारी करने, अमेरिकी सैनिकों को मारने की कोशिश करने और एक हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था। उसे 86 साल जेल की सजा मिली थी। वह फिलहाल टेक्सास के फोर्ट वर्थ के जेल में बंद है।

‘लेडी अल-क़ायदा’ आफिया सिद्दीकी कौन है?

कभी एमआईटी से प्रशिक्षित एक प्रतिभाशाली न्यूरोसाइंटिस्ट आफ़िया सिद्दीकी की कहानी जिहाद, आतंकी साजिशों और 86 साल की अमेरिकी जेल की सजा तक पहुँच चुकी है। हालाँकि पाकिस्तान उसे अपने ‘मुल्क की बेटी’ कहता है। उसकी रिहाई को लेकर चल रहे इस्लामी दुष्प्रचार और वैश्विक अभियानों को भी उसने शह दी है।

एक पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट से लेकर कुख्यात ‘लेडी अलकायदा’ बनने के बावजूद वह पाकिस्तानी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों का समर्थन हासिल करती रही हैं। सिद्दीकी को 2010 में न्यूयॉर्क कोर्ट ने अफगानिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों की हत्या के प्रयास का दोषी पाया था।

ऑपरेशन सिंदूर में करारी हार के बाद जब अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका गए, तो पाकिस्तान के आफिया समर्थकों को उम्मीद थी कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने उसकी रिहाई की बात करेंगे। लेकिन मुनीर ने इस मुद्दे को नहीं उठाया।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इससे पहले आफ़िया सिद्दीकी को माफी देने से इनकार कर दिया था। अमेरिकी सरकार ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को सूचित किया कि सिद्दीकी की क्षमा याचिका को खारिज कर दी गई है।

पाकिस्तान में आफिया सिद्दीकी के मामले की सुनवाई के लिए गठित इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की बेंच को भंग कर दिया गया , क्योंकि न्यायमूर्ति इनाम अमीन मिन्हास ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और एक बड़ी पीठ के गठन करने का अनुरोध किया। यह याचिका आफिया सिद्दीकी की बहन फौजिया सिद्दीकी ने दायर की थी। इससे पहले, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके मंत्रिमंडल को पिछली अदालती आदेशों का पालन करने और मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं करने पर अवमानना ​​नोटिस जारी किया गया था।

मानवाधिकार उल्लंघन की शिकार या इस्लामी आतंकवादी?

आफिया सिद्दीकी पाकिस्तानी मूल की 52 वर्षीय आतंकवादी हैं। कराची में जन्मी सिद्दीकी 1990 में छात्र वीजा पर अमेरिका आई थीं। उसने एमआईटी से जीव विज्ञान में स्नातक और 2001 में ब्रांडीज विश्वविद्यालय से तंत्रिका विज्ञान में पीएचडी की। आफिया की माँ एक इस्लामी शिक्षिका और राजनीतिज्ञ थी और उनके पिता एक न्यूरोसर्जन थे। बोस्टन में आफ़िया सिद्दीकी अल-किफा केंद्र सहित इस्लामी ‘धर्मार्थ संस्थाओं’ के साथ जुड़ गई, जिसका संबंध अलकायदा से पाया गया था। सिद्दीकी ने 9/11 के इस्लामी आतंकवादी हमले के बाद भी अमेरिका विरोधी बयान दिया था। उसने जिहाद के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया था।

एफबीआई ने सिद्दीकी और उनके तत्कालीन पति अमजद खान से कुछ किताबों की खरीदारी को लेकर पूछताछ की थी। दोनों ने नाइट विज़न गॉगल्स, विस्फोटकों से संबंधित मैनुअल, बॉडी आर्मर और ‘द एनार्किस्ट्स आर्सेनल’ सहित 45 किताबें खरीदी थी। एफबीआई को दिए इंटरव्यू में अमजद खान ने दावा किया कि उन्होंने ये किताबें शिकार के लिए लाया था। एफबीआई जाँच के दौरान, आफिया और उसके पति का तलाक हो गया और वह अपने तीन बच्चों के साथ पाकिस्तान लौट आई।

सिद्दीकी और उसके बच्चे मार्च 2023 में पाकिस्तान के कराची में गायब हो गए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसके कथित अल-कायदा संबंधों पर पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लेने की बात मानी थी। लेकिन बाद में उसकी अलकायदा से जुड़े होने की बात से इनकार कर दिया। मई 2004 में, अमेरिकी एफबीआई ने आफिया सिद्दीकी को पहली महिला ‘मोस्ट-वांटेड’ आतंकवादी बताते हुए अलर्ट जारी किया। एफबीआई के मुताबिक वह एक अलकायदा आतंकवादी और कूरियर थी।

2003 और 2008 के बीच उसका ठिकाना बदलता रहा। सिद्दीकी का समर्थन करने वाली एक पत्रकार, यवोन रिडले ने दावा किया कि आफिया का अपहरण किया गया और बगराम एयर बेस पर गुप्त तरह से रखकर प्रताड़ित किया गया। हालाँकि अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि वह अल-कायदा जिहादी आतंकवादी और 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद के परिवार के साथ अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमावर्ती इलाकों में छिपी थी।

सिद्दीकी ने बाद में खालिद शेख के भतीजे से निकाह कर ली। उसका नाम अम्मार अल-बलूची है। आफिया की बहन फौजिया सिद्दीकी ने निकाह से इनकार किया, लेकिन पाकिस्तानी और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों, अल-बलूची के परिवार और खुद आफिया ने निकाह की पुष्टि की।

2008 में अफगान अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। न्याय विभाग के अनुसार, उसके पास से कई चीजें मिलीं। इनमें हमले का जिक्र करते हुए हाथ से लिखा हुआ एक नोट भी शामिल था। उसके पास से अमेरिका के प्लम आइलैंड, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी, वॉल स्ट्रीट और ब्रुकलिन ब्रिज जैसे कई अहम इमारतों की लिस्ट भी थी।

2008 में एफबीआई के विशेष एजेंट मेहताब सैयद के अनुसार, अफगानिस्तान राष्ट्रीय पुलिस के अधिकारियों ने सिद्दीकी को एक लड़के के साथ गजनी के गवर्नर के परिसर में देखा था। अफगानिस्तीनी पुलिस ने सिद्दीकी से स्थानीय बोलियों, दारी और पश्तो में पूछताछ भी की, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। चूँकि सिद्दीकी उर्दू में बात कर रही थी, इसलिए अधिकारियों को लगा कि वह विदेशी है।

एएनपी अधिकारियों ने उसके पर्स की तलाशी ली। इसमें कई विवादित दस्तावेज मिले। इसमें विस्फोटकों, रासायनिक और जैविक हथियारों के निर्माण से संबंधित थे। आफिया सिद्दीकी के दस्तावेजों में न्यूयॉर्क सहित संयुक्त राज्य अमेरिका के अहम स्थलों की जानकारी भी थी।

सिद्दीकी के सामानों में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों से जुड़ी जानकारी और एक गीगाबाइट डिजिटल मीडिया स्टोरेज डिवाइस (थंब ड्राइव) मिले। उसके पास बोतलों में भरे हुए जेल और लिक्विड कैमिकल भी मिले।

18 जुलाई 2008 को, दो FBI एजेंट और एक अमेरिकी सैन्य दुभाषिया सिद्धीकी से मिलने अफगानिस्तान पहुँचे। इस दौरान अमेरिकी अधिकारी की राइफल छीनकर उसे अधिकारी पर ही तान दिया और अंग्रेजी में चिल्लाते हुए कहा कि ‘यहाँ से निकल जाओ’ और गोली चला दी।

इस दौरान सिद्दीकी को काबू में करने के लिए पैर पर गोली मारी गई। वह ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए अधिकारियों पर लात-घूँसे से हमला करने की कोशिश कर रही थी। वह अंग्रेजी में चिल्ला रही थी कि वह अमेरिकियों को मारना चाहती है। उसने कहा, “मैं आप सभी अमेरिकियों को मार डालूँगी।”

आफिया सिद्दीकी के बेहोश होने के बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। सिद्दीकी पर हत्या के प्रयास, हमले और हथियार रखने को लेकर केस दर्ज किया गया।

वेबसाइट पर आफिया सिद्दीकी की स्टोरी, लेख और तस्वीर मौजूद हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे एक शिक्षित पाकिस्तानी-मुस्लिम महिला के साथ ‘जुर्म’ हो रहा है। इसमें बताया गया है कि कुरान कंठस्थ करने वाली ‘हाफिजा’ आज जेल में बंद है। अमेरिकी अधिकारियों ने ‘आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध’ के नाम पर ‘पीड़ित’ किया और ‘अत्याचार’ का शिकार बनाया। ऐसा ही एक वेबसाइट ‘द आफिया फाउंडेशन’ भी है।

2023 में, फ़ौजिया सिद्दीकी और वकील क्लाइव स्टैफोर्ड स्मिथ ने कहा कि आफ़िया ‘अमेरिका के लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखती’ और पाकिस्तान सरकार ने उसे वापस लाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। स्मिथ ने तो आफ़िया की जगह शकील अफ़रीदी को लाने की भी वकालत की थी। अफरीदी अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का पता लगाने में अमेरिका की मदद करने के आरोप में कई वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। लादेन 2012 में एबटाबाद में मारा गया था। पाकिस्तानी सरकार ने आफिया- अफरीदी की ‘अदला-बदली’ के लिए कोई कोशिश नहीं की।

वर्तमान में, आफ़िया आंदोलन आफ़िया सिद्दीकी की जेल से रिहाई के लिए शुरू किया गया है। इसे सोशल मीडिया, साक्षात्कारों, सेमिनारों, जागरूकता अभियानों और दूसरे माध्यमों से चलाया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस्लामी आतंकवादी ग्रुप, इस्लामी समर्थक ग्रुप, इस्लामी समर्थक ‘मानवाधिकार’ ग्रुप सिद्दीकी की कैद को ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ बता रहे हैं, वहीं आफिया का परिवार अलकायदा या किसी भी इस्लामी आतंकवादी समूह से उसके संबंधों से पूरी तरह इनकार कर रहा है।

आफिया सिद्दीकी एक घोर यहूदी विरोधी हैं। अपने मुकदमे के दौरान भी उन्होंने यह दावा करके कार्यवाही में बाधा डाली कि उनके खिलाफ एक यहूदी साजिश रची जा रही है। उन्होंने जूरी सदस्यों के डीएनए परीक्षण की भी माँग की। उन्होंने कहा कि अगर जस्टिस इजराइली या ‘जायोनी’ है, तो मुकदमा निष्पक्ष नहीं होगा।

इस्लामवादी आफ़िया सिद्दीकी की रिहाई की माँग तेज

पाकिस्तान और अमेरिका, दोनों में कई ‘मानवाधिकार’ समर्थक ग्रुप और इस्लामी संगठन आफ़िया सिद्दीकी को ‘पीड़ित’ बताते हैं। 2022 में सिद्दीकी की रिहाई की माँग करने वाले व्यक्ति अकरम ने टेक्सास में एक यहूदी पूजास्थल पर आतंकी हमला किया था। ये हमला 15 जनवरी 2022 को कोलीविले में बेथ इजराइली धर्मसमाज में हुआ था। इस दौरान कई यहूदियों को बंधक बना लिया गया और इन बंधकों को मुक्ति के एवज में आफिया सिद्दीकी की जेल से रिहाई की माँग की गई।

आतंकियों ने सिद्दीकी को कैद किये गए फेडरल मेडिकल सेंटर कार्सवेल के पास मौजूद यहूदी पूजा स्थल को निशाना बनाया था। जिहादी अकरम ने जब चार लोगों को बंधक बनाया, उस वक्त यहूदी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हो रहा था। अकरम ने वहाँ खड़े होकर जिहादी भाषण दिए। करीब 10 से 11 घंटे के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने आतंकियों पर काबू पाया और बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस दौरान अमेरिकी पुलिस ने अकरम को गोली मारी।

एफबीआई ने इसे आतंकी और यहूदी-विरोधी के साथ-साथ इस्लामी जिहादी कट्टरपंथियों द्वारा किया गया अपराध बताया अकरम की छानबीन के दौरान आफिया सिद्दीकी से जुड़ी जानकारी भी पुलिस के हाथ लगी।

2014 में, इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने अमेरिकी बंधकों, पत्रकार जेम्स फोले और मानवाधिकार कार्यकर्ता कायला मुलर के बदले सिद्दीकी की रिहाई की माँग की थी। हालाँकि अमेरिका ने हमेशा इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया और फोले और मुलर दोनों को अलग-अलग घटनाओं में आईएसआईएस जिहादियों ने मार डाला।

‘काफ़िरों’ को मारने की कसम खाने वाले इस्लामी आतंकवादी समूहों ने सिद्दीकी की रिहाई की माँग की है और उसे मुस्लिम ‘पीड़ित’ बताया है। इस्लामवादियों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ‘मानवाधिकार’ समूहों ने भी सिद्दीकी की रिहाई की वकालत की है।

यहाँ तक कि पाकिस्तानी सरकारों और नेताओं ने भी सिद्दीकी की रिहाई की वकालत की है। पाकिस्तानी सीनेट ने 2018 के एक प्रस्ताव में ‘लेडी अल-क़ायदा’ आफ़िया सिद्दीकी को ‘पाकिस्तान की बेटी’ कहा था।

2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तक ने सिद्दीकी की रिहाई के लिए अमेरिका से पैरवी की है। अलकायदा आतंकवादी की रिहाई के लिए प्रस्ताव, बयानबाजी और आग्रह वर्षों से पाकिस्तान की रणनीति रहे हैं। पिछले वर्ष पाकिस्तान के सीनेटरों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सिद्दीकी की रिहाई की माँग के लिए अमेरिका गया था।

साल 2024 में, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को मानवीय आधार पर उसकी रिहाई के लिए एक पत्र लिखा था। हालाँकि, बाइडेन ने शरीफ़ के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

इस साल जुलाई में, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने आफ़िया सिद्दीकी के मामले की तुलना जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के मामले से करके विवाद खड़ा कर दिया था और इसे ‘उचित प्रक्रिया’ का मामला बताया था।

हाल ही में, आफ़िया सिद्दीकी के वकील क्लाइव स्टैफ़ोर्ड स्मिथ ने कहा कि वह न्यूयॉर्क में एक नई अपील दायर करने की योजना बना रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें घटना के वीडियो सबूत मिले हैं जो कथित तौर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों को खारिज करते हैं।

वकील क्लाइव स्टैफ़ोर्ड स्मिथ और आफिया सिद्दीकी

इसके अलावा, जिहादी समूहों, पाकिस्तान सरकार, अमेरिका और ब्रिटेन स्थित ‘मानवाधिकार’ और इस्लामी समूहों जैसे सीएआईआर, एमनेस्टी इंटरनेशनल, केज इंटरनेशनल, कोड पिंक आदि ने ‘लेडी अल-कायदा’ की रिहाई की वकालत की है।

गौरतलब है कि टेक्सास सिनेगॉग हमले से ठीक दो महीने पहले, सीएआईआर इंटरनेशनल (अमेरिकी-इस्लामिक संबंध परिषद) ने सिद्दीकी की रिहाई की माँग की थी और उसके समर्थन में कार्यक्रम और रैलियाँ आयोजित की थी। सीएआईआर टेक्सास डीएफडब्ल्यू सिद्दीकी के समर्थन में कई ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियान चलाता है और सजा के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई के लिए धन भी जुटाता है।

ऑपइंडिया ने पहले सीएआईआर इंटरनेशनल की हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति, क्राउडफंडिंग घोटाले की आरोपित ‘पत्रकार’ राणा अय्यूब के प्रति उनके समर्थन और बेहद हिंदू-विरोधी ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ सम्मेलन को उनके समर्थन के बारे में रिपोर्ट छापी थी।

2022 में, रटगर्स विश्वविद्यालय और नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया। इसमें दिखाया गया कि टेक्सास में यहूदी पूजास्थल पर हमले से पहले ‘फ्री आफ़िया मूवमेंट’ को लेकर ट्विटर पर अभियान चलाया गया। अलजजीरा और क्रिसेंट इंटरनेशनल जैसे इस्लामी प्रचार माध्यम भी आफ़िया सिद्दीकी के पक्ष में बोल रहे हैं।

आफ़िया सिद्दीकी की बहन डॉ. फ़ौज़िया सिद्दीकी भी ‘आफ़िया मूवमेंट’ चला रही हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार, “आफिया मूवमेंट एक अंतरराष्ट्रीय पहल है जो डॉ. आफिया सिद्दीकी के लिए न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है, जो एक पाकिस्तानी-मुस्लिम महिला है और वर्तमान में अमेरिकी संघीय जेल में 86 साल की अन्यायपूर्ण सजा काट रही है।”

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

‘कुछ चीजें देश का गर्व हैं, उन पर हंगामा ना हो’: वंतारा को सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट, जानें अनंत अंबानी के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ की कहानी जहाँ रहते हैं 1.5 लाख जानवर

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को जामनगर गुजरात में रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा को क्लीन चिट दे दी है। कोर्ट ने कहा कि इस ‘ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर’ द्वारा जानवरों को लिया जाना कानून के दायरे में है।

इससे पहले वंतारा में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया था। कोर्ट ने उसकी रिपोर्ट पर भी यह फैसला दिया है।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने कहा कि रिपोर्ट में साफ है कि सभी जानवरों की खरीद जिसमें हाथी भी शामिल हैं नियमों और कानून के हिसाब से की गई है। जस्टिस मित्तल ने रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा, “जानवरों की खरीद पूरी तरह नियमानुसार की गई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोर्ट ने साफ कर दिया कि SIT को जाँच में कहीं भी गड़बड़ी नहीं मिली चाहे जानवर भारत के अंदर से लाए गए हों या विदेश से लिए गए हों।

बेंच ने कहा कि उन्होंने सुनवाई से पहले रिपोर्ट को अच्छे से नहीं पढ़ा क्योंकि वे इसे खुले तौर पर अदालत में ही देखना चाहते थे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे जो वंतारा की तरफ से पेश हुए और याचिकाकर्ता के वकील मौजूद थे।

जस्टिस मित्तल ने कहा कि जानवरों की खरीद नियमानुसार की गई है और कोर्ट रिपोर्ट को आदेश का हिस्सा बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आदेश चैंबर में पारित किए जाएँगे और उसके बाद मामला बंद कर दिया जाएगा।

रिपोर्ट सार्वजनिक करने को लेकर वकीलों ने उठाए सवाल

मेहता और साल्वे दोनों ने कोर्ट से कहा कि SIT की रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। उन्होंने कहा कि पहले से ही तरह तरह की बातें चल रही हैं और रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर और ज्यादा अटकलें शुरू हो जाएँगी। साल्वे ने कहा कि जानवरों की देखभाल से जुड़ी कुछ गोपनीय बातें होती हैं। जस्टिस मित्तल ने कहा कि कोर्ट आदेश लंच के समय चैंबर में देगा और उसके बाद मामला बंद कर दिया जाएगा।

साल्वे ने कहा, “जब कमेटी आई तो वंतारा का पूरा स्टाफ मौजूद था सब कुछ दिखाया गया। लेकिन कुछ देखभाल से जुड़ी बातें होती हैं कि जानवरों को कैसे रखा जाता है। इस पर काफी पैसा और विशेषज्ञ लगाए गए हैं। यह सुविधा विश्व स्तर की है। लेकिन एक नकारात्मक कहानी बनाने की कोशिश चल रही है। अगर पूरा रिकॉर्ड बाहर आ गया तो कल न्यूयॉर्क टाइम्स या टाइम्स मैगजीन जैसी जगहों पर और लेख छपेंगे।”

जस्टिस मित्तल ने सख्त लहजे में कहा कि अब जबकि स्वतंत्र विशेषज्ञों ने सब कुछ जाँच लिया है तो बेवजह शक नहीं उठने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट हैं उन्होंने विशेषज्ञों की मदद से जाँच की है और जो रिपोर्ट दी है हम उसी पर चलेंगे। सभी विभाग रिपोर्ट की सिफारिशों पर कार्रवाई करने को स्वतंत्र हैं और अब कोई बार बार सवाल नहीं उठा सकेगा।”

कोर्ट ने कहा- अब वंतारा पर खत्म हो विवाद

बेंच ने यह भी कहा कि सिर्फ विवाद खड़ा करने के लिए आरोप नहीं लगाने चाहिए। जस्टिस मित्तल ने कहा, “कुछ चीजें देश का गर्व होती हैं उन पर बेवजह हल्ला नहीं मचाना चाहिए। देश के लिए अच्छी चीजें हो रही हैं तो हमें खुश होना चाहिए। अगर हाथियों की खरीद कानून के हिसाब से है तो इसमें दिक्कत क्या है।”

उन्होंने कहा कि मंदिरों में भी हाथी उत्सव और दशहरा जैसे जुलूसों में इस्तेमाल होते हैं और अगर यह परंपरा स्वीकार है तो फिर जब हाथी कानूनन किसी रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाए जाते हैं तो आपत्ति क्यों उठाई जाती है।

कोर्ट ने मंदिर के हाथी को शिफ्ट करने पर दाखिल एक नई याचिका भी स्वीकार नही की और कहा कि यह मामला पहले ही SIT की रिपोर्ट में कवर हो चुका है। बेंच ने SIT की तेजी से जाँच पूरी करने की सराहना की और कहा कि उसके सदस्यों को उनके काम के लिए सम्मान राशि दी जानी चाहिए।

इसके साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया कि वंतारा से जुड़े जानवरों की खरीद पर चल रहा विवाद अब खत्म होना चाहिए क्योंकि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है।

क्या है वंतारा के विवाद की कहानी?

वंतारा को लेकर विवाद इस साल तब शुरू हुआ जब यह सवाल उठे कि जानवर खासकर हाथियों को रिलायंस फाउंडेशन के इस सेंटर में कैसे लाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ एनजीओ ने आरोप लगाया कि जानवरों को यहाँ लाने में वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 और अंतरराष्ट्रीय संधियों जैसे CITES का पालन नहीं किया जा रहा है।

जुलाई में कोल्हापुर के एक मंदिर से महादेवी नाम की हथिनी को जामनगर लाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया। 25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए SIT बनाने का आदेश दिया जिसकी अगुवाई अपने पूर्व जज जस्टिस जे चेलमेश्वर को सौंपी गई।

इस SIT में उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेन्द्र चौहान, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर हेमंत नगराले और वरिष्ठ कस्टम अधिकारी अनीश गुप्ता शामिल थे। एसआईटी को तुरंत जांच करके 12 सितंबर तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया था।

एसआईटी को कई मुद्दों पर जाँच करनी थी जैसे वन्यजीव कानून और आयात निर्यात नियमों का पालन हुआ या नहीं, जानवरों की देखभाल के मानक क्या हैं, पानी और कार्बन क्रेडिट जैसे संसाधनों का दुरुपयोग तो नहीं हुआ, आर्थिक गड़बड़ी और तस्करी तक के आरोपों की भी जाँच की जानी थी।

कोर्ट ने उस समय कहा था कि याचिकाएँ ज्यादातर मीडिया रिपोर्ट्स और शिकायतों पर आधारित हैं और इनमें ठोस सबूत नहीं हैं। लेकिन आरोप गंभीर होने के कारण उसने तथ्य जानने के लिए जाँच कराना जरूरी समझा है।

अब जब SIT ने कोई गड़बड़ी नहीं पाई और सुप्रीम कोर्ट ने मामला बंद कर दिया तो अब मुद्दा फिर से वंतारा के काम पर जाएगा जिसे दुनिया के सबसे बड़े जानवरों के बचाव और पुनर्वास केंद्रों में गिना जाता है।

वंतारा ने रिपोर्ट पर क्या कहा?

वंतारा ने SIT की रिपोर्ट का स्वागत किया है। वंतारा ने कहा, “SIT की रिपोर्ट और SC का आदेश यह स्पष्ट करता है कि वंतारा के पशु कल्याण मिशन पर उठाए गए संदेह और आरोप निराधार थे। सत्य की पुष्टि न केवल वंतारा के सभी सदस्यों के लिए राहत है बल्कि एक आशीर्वाद भी है।”

वंतारा ने अपने बयान में कहा, “हम जीवन भर पशु और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करुणा के साथ करते रहेंगे। जब हम जानवरों की देखभाल करते हैं, तो हम मानवता की आत्मा की भी देखभाल करते हैं।”

वंतारा में क्या-क्या है?

जामनगर स्थित वंतारा करीब 12.14 किमी में फैला है जो करीब 3000 एकड़ है। यह मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। भारत सरकार द्वारा वंतारा को ‘कॉरपोरेट’ श्रेणी में पशु कल्याण के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘प्राणी मित्र’ से सम्मानित किया जा चुका है।

इसका मकसद घायल जानवरों को बचाना और लुप्तप्राय जानवरों को बचाना है। यहाँ जानवरों की देखभाल के लिए हजारों कर्मचारी और डॉक्टर मौजूद हैं। वनतारा में एशिया का पहला वन्यजीव अस्पताल भी है, जिसमें CT स्कैन और MRI यूनिट्स हैं। साथ ही, यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा और भारत का इकलौता पशु वन्यजीव क्वारंटाइन सेंटर भी है।

इसके अलावा वंतारा 48 से अधिक प्रजातियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा संरक्षण और प्रजनन केंद्र भी है। इसमें 2,000 से अधिक प्रजातियों और 1.5 लाख से ज्यादा बचाए गए संकटग्रस्त जानवर रहते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता शुरू, 50% टैरिफ का मुद्दा सुलझाने की कोशिश: दिल्ली में US के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच, जानिए उनके बारे में सबकुछ

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते पिछले कुछ महीनों से काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाली चीजों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिससे दोनों देशों की बातचीत रुक गई। लेकिन अब लगता है कि हालात बदल रहे हैं। अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच सोमवार रात (15 सितंबर 2025) से दिल्ली में हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 सितंबर 2025) से दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो जाएगी। यह छठे दौर की वार्ता से पहले की तैयारी वाली मीटिंग होगी। भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल हैं, जो वाणिज्य विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी हैं। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अब नरम रुख अपना रहा है, जबकि भारत सरकार कड़ी सौदेबाजी करके अपने हितों की रक्षा करेगी।

भारत-अमेरिका में कैसे और कब बढ़ा तनाव, जानें- पूरी टाइमलाइन

सबसे पहले तो समझते हैं कि यह तनाव कैसे शुरू हुआ। इस साल मार्च में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत शुरू की थी। मकसद था कि अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पहले चरण को पूरा कर लिया जाए। तब तक पाँच दौर की वार्ता हो चुकी थी। लेकिन मुख्य समस्या यह थी कि अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी बाजारों में घुसना चाहता था।

भारत ने साफ मना कर दिया, क्योंकि ये सेक्टर यहाँ लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं। साथ ही अमेरिकी डेयरी में जानवरों को GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फीड देने की बात है, जो भारत की संस्कृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए ठीक नहीं लगती। भारत ने कहा कि हम अपने किसानों और छोटे डेयरी उत्पादकों को खतरे में नहीं डाल सकते।

इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। फिर भारत के रूस से तेल खरीदने की वजह से और 25 प्रतिशत जोड़ दिया, कुल 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार घाटा होने वाले देशों पर ऐसा ही करना पड़ेगा, ताकि ‘फेयर ट्रेड’ हो।

लेकिन भारत ने इन टैरिफ को ‘अनुचित’ बताया। इससे भारत का अमेरिका को निर्यात कम हो गया, खासकर कपड़ा, ज्वेलरी और फार्मा जैसी चीजों का। राजनीतिक स्तर पर भी तनाव बढ़ा। ट्रंप और उनके अधिकारियों ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना की। छठा दौर 25-29 अगस्त को होना था, लेकिन टैरिफ की वजह से टल गया।

अब हाल ही में दोनों तरफ से नरमी के संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के भारत-अमेरिका रिश्तों को ‘स्पेशल’ बताने पर धन्यवाद दिया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि वे ट्रंप के विचारों की सराहना करते हैं और भारत-अमेरिका का रिश्ता एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। ट्रंप ने भी कहा कि मोदी के साथ उनका दोस्ताना रिश्ता हमेशा रहेगा और चिंता की कोई बात नहीं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते कहा कि दोनों देश सक्रिय संवाद में हैं और गिरावट तक डील हो सकती है। यह दिखाता है कि ट्रंप के सख्त तेवर अब काम नहीं आ रहे, इसलिए अमेरिका ने अपना मुख्य वार्ताकार भेजने का फैसला किया। भारत सरकार भी खुश है, क्योंकि इससे साफ है कि हमारी कड़ी नीति के सामने अमेरिका को झुकना पड़ रहा है।

ब्रेंडन लिंच की दिल्ली यात्रा इसी नई शुरुआत का हिस्सा है। वे अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि (दक्षिण और मध्य एशिया) हैं। उनका काम है इस क्षेत्र के 15 देशों के साथ अमेरिकी व्यापार नीति बनाना और लागू करना। इसमें भारत-अमेरिका व्यापार नीति फोरम का प्रबंधन भी शामिल है।

किन मुद्दों पर हैं मतभेद, अमेरिका को चाहिए भारतीय बाजार

लिंच मंगलवार को भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। लेकिन चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं। अमेरिका अभी भी कृषि और डेयरी में एंट्री चाहता है, लेकिन हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अब बड़े बाजार की बजाय प्रीमियम चीज जैसे ब्लू-वेन, आर्टिसनल या पाउडर्ड चीज पर फोकस कर रहे हैं। भारत में ये चीजें सिर्फ 2-5 प्रतिशत अमीर लोगों द्वारा इस्तेमाल होती हैं।

भारत पहले से ही लिथुआनिया, एस्टोनिया, इटली और यूके से थोड़ी मात्रा में ऐसी चीज इंपोर्ट करता है, जिस पर 30-40 प्रतिशत ड्यूटी लगती है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 10.8 मिलियन डॉलर की ऐसी चीजें आईं। अगर अमेरिका इसी छोटे सेगमेंट तक सीमित रहे, तो भारत सहमत हो सकता है, क्योंकि इससे हमारे छोटे किसानों को नुकसान नहीं होगा।

एक और मुद्दा है GMO वाले कृषि उत्पाद। भारत ने हमेशा GMO फूड को मना किया है, स्वास्थ्य और पर्यावरण की वजह से। लेकिन बातचीत में एक बीच का रास्ता निकल सकता है। पहले दौरों में चर्चा हुई थी कि भारत GMO कॉर्न को इथेनॉल बनाने के लिए इंपोर्ट करने की इजाजत दे सकता है। चूँकि ये सीधे इंसानों के खाने के लिए नहीं है, इसलिए सख्त नियम लागू नहीं होंगे।

इसी तरह GMO एनिमल फॉडर की भी बात चली। अगर अमेरिका इन छोटे समझौतों पर राजी हो जाता है, तो भारत भी कुछ रियायत दे सकता है। लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ हटाने का कोई साफ संकेत अभी नहीं है। शायद अगर बातचीत अच्छी चली, तो धीरे-धीरे टैरिफ कम हो जाएँ। भारत की तरफ से साफ है कि हम अपने संवेदनशील सेक्टरों की रक्षा करेंगे, लेकिन विन-विन सॉल्यूशन ढूँढेंगे।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता बेहद महत्वपूर्ण

इस बातचीत का महत्व बहुत बड़ा है। भारत और अमेरिका दोनों को एक-दूसरे से फायदा है। अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और एशिया में रणनीतिक साझेदार। भारत के लिए अमेरिका तकनीक, निवेश और चीन के खिलाफ बैलेंस का स्रोत है। पिछले महीनों का तनाव दोनों को नुकसान पहुँचा रहा था। भारत का निर्यात प्रभावित हुआ, अमेरिका को भी भारतीय बाजार से वंचित रहना पड़ा।

अब अगर दोनों तरफ समझदारी बरती गई, तो अक्टूबर-नवंबर तक पहले चरण का समझौता हो सकता है। मोदी सरकार कड़ी सौदेबाजी करेगी, ताकि भारत के हित सुरक्षित रहें। ट्रंप प्रशासन को भी लग रहा होगा कि सख्ती से ज्यादा फायदा बातचीत से है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील सीमित लेकिन सार्थक हो सकती है, बिना किसी की लाल लकीर पार किए।

भारत सरकार का रुख साफ है। हम रूस से तेल खरीदना जारी रखेंगे, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा जरूरी है। लेकिन अमेरिका के साथ रिश्ते भी महत्वपूर्ण हैं। पीयूष गोयल ने कहा है कि हम संतुलित और पारस्परिक फायदे वाला समझौता चाहते हैं।

अगर अमेरिका प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर अड़े रहता है और GMO को गैर-खाद्य उपयोग तक सीमित रखता है, तो रास्ता निकल सकता है। भारत पहले से ही कई देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। यह वार्ता न सिर्फ व्यापार को पटरी पर लाएगी, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाएगी। वैश्विक हालात में जैसे चीन का बढ़ता प्रभाव, दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। लिंच की यात्रा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उम्मीद है कि कल की मीटिंग से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।

अब देखते हैं कि क्या अमेरिका टैरिफ हटाने को तैयार होता है। अभी तो कोई पक्का ऐलान नहीं, लेकिन अगर भारत छोटी रियायतें देता है, जैसे प्रीमियम चीज इंपोर्ट बढ़ाना, तो अमेरिका भी पीछे हट सकता है। भारत के लिए यह मौका है कि हम अमेरिका को ‘फेस-सेविंग’ दें, लेकिन अपने किसानों की रक्षा करें।

कुल मिलाकर यह बातचीत भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़ ला सकती है। ट्रंप के सख्त तेवर अब पीछे छूट रहे हैं और व्यावहारिक दृष्टिकोण आगे आ रहा है। अगर सब ठीक रहा, तो यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

कौन हैं अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच?

ब्रेंडन लिंच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के सहायक व्यापार प्रतिनिधि हैं, जो दक्षिण और मध्य एशिया के लिए जिम्मेदार हैं। उनका जन्म अमेरिका में हुआ और उन्होंने बोस्टन कॉलेज से बीएस की डिग्री हासिल की, उसके बाद जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।

साल 2013 में वे USTR में शामिल हुए, जहाँ पहले कृषि मामलों के ऑफिस में काम किया। वहाँ उन्होंने अमेरिकी कृषि उत्पादों के हितों को बढ़ावा दिया और कई देशों जैसे ताइवान, इजराइल, मध्य अमेरिका, कैरिबियन, मैक्सिको, कनाडा और रूस के साथ द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं।

बाद में वे भारत के डायरेक्टर बने, जहाँ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का प्रबंधन किया। फिर डिप्टी असिस्टेंट के रूप में प्रमोशन मिला, जहाँ उन्होंने कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे सेक्टरों में नेगोशिएशंस हैंडल कीं। मार्च 2023 से वे एक्टिंग असिस्टेंट थे और 2024 में स्थाई रूप से इस पद पर नियुक्त हुए।

लिंच का मुख्य काम इस क्षेत्र के 15 देशों (जैसे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि) के साथ अमेरिकी व्यापार नीति बनाना और लागू करना है। वे यूएस-इंडिया ट्रेड पॉलिसी फोरम को मैनेज करते हैं और ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट्स (TIFAs) के तहत गतिविधियों का समन्वय करते हैं।

USTR जॉइन करने से पहले वे यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन में इंटरनेशनल ट्रेड एनालिस्ट थे, जहाँ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का आर्थिक विश्लेषण किया और कॉन्ग्रेस कमेटियों व USTR को व्यापार बाधाओं पर सलाह दी। लिंच को दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है, खासकर भारत के साथ डीलिंग में।

यूएस ट्रेड प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने उनकी 10 साल की सेवा की तारीफ की है। उनकी यात्राएँ और वार्ताएँ अमेरिकी हितों को मजबूत करने पर फोकस्ड रहती हैं लेकिन वे समझौतावादी रुख के लिए भी मशहूर हैं।

कर्नाटक में वाल्मीकि कॉरपोरेशन का बजट खा गए कॉन्ग्रेसी नेता, CBI को मिले फर्जीवाड़े के व्यापक सबूत: ₹84.63 करोड़ के घोटाले में 16 जगह छापेमारी

कर्नाटक के वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाले में सोमवार (15 सितंबर 2025) को CBI कार्रवाई की। CBI ने बेंगलुरु और आंध्र प्रदेश में 16 जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी में सरकारी योजना से करोड़ों रुपए कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे बी नागेंद्र और उनके करीबी लोगों तक पहुँचाने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBI की जाँच में सामने आया कि वाल्मीकि कॉरपोरेशन के अलावा अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग और कर्नाटक जर्मन टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (KGTTI) के फंड्स का भी गलत इस्तेमाल किया गया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से ₹2.17 करोड़ बैंक ऑफ बड़ोदा, सिद्धैया रोड शाका से निकाले गए हैं।

इतनी रकम फर्जी कंपनियाँ M/s SKR Infrastructure और M/s Golden Establishment के जरिए M/s Dhanalaxmi Enterprises के खाते में ट्रांसफर की गई हैं। यह कंपनी कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री बी नागेंद्र के करीबी नेक्कांति नागराज के नाम पर है। इनमें से ₹1.20 करोड़ नागेंद्र की बहन, बहनोई और पर्सनल एसिस्टेंट के खाते में भी भेजे गए हैं।

इसी तरह KGTII से ₹64 लाख रुपए भी अलग-अलग फर्जी ट्रस्ट और कंपनियों के जरिए पूर्व मंत्री एमटीबी नागराज के भाई एन रविकुमार और भाँजे एन यशवंत चौधरी तक पहुँचाए गए।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने CBI को इन सभी आरोपों की जाँच की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने भी साफ कहा कि सरकारी योजनाओं का पैसा निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

क्या है पूरा मामला ?

यह पूरा मामला साल 2024 में सामने आया। जब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के DGM ने मामले में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि फरवरी 2024 से मई 2024 के बीच करीब ₹84.63 करोड़ फर्जीवाड़े के जरिए ट्रांसफर कर गायब किए गए हैं।

शिकायत के बाद 3 जून 2024 को मामले में CBI ने जाँच शुरू की। इसके बाद नवंबर 2024 में बीजेपी विधायक बसनगौड़ा आर पाटिल ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर माँग की कि मामले में CBI फाइन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे और जाँच के दौरान भी स्टेटस रिपोर्ट जमा करे। तब से हाईकोर्ट भी मामले पर नजर बनाए हुए है।

‘घुसपैठियों के पीछे चाहे जितनी कर लें रैलियाँ, बाहर निकाल कर रहेंगे’: पूर्णिया में गरजे PM मोदी, कहा- कॉन्ग्रेस-RJD जितना भी जोर लगाएँ, नहीं बचेंगे विदेशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को बिहार के पूर्णिया में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया और विपक्षी दलों कॉन्ग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने घुसपैठ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस और आरजेडी विदेशी घुसपैठियों को बचाने के लिए रैलियाँ कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा और संसाधनों को खतरे में डाल रहा है।

पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा, “भारत में भारत का कानून चलेगा, घुसपैठियों की मनमानी नहीं। जो भी घुसपैठिया है, उसे बाहर जाना होगा।” उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताते हुए एनडीए की जिम्मेदारी पर जोर दिया कि घुसपैठ पर ताला लगाया जाएगा।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस और आरजेडी को खुली चुनौती दी कि चाहे जितना जोर लगा लें, भारत में कानून का राज स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता इन दलों के घुसपैठ समर्थक रवैये का जवाब देगी, क्योंकि लोग जंगलराज और अपराध से मुक्ति चाहते हैं।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर बिहार को अपमानित करने का भी आरोप लगाया, खासकर तब जब विपक्ष ने बिहार की तुलना ‘बीड़ी’ से की। उन्होंने कहा, “इन लोगों को बिहार से नफरत है। इन्होंने घोटालों और भ्रष्टाचार से बिहार की साख को नुकसान पहुँचाया।” उन्होंने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले केंद्र से भेजे गए 100 रुपए में से 85 रुपए लुट जाते थे, लेकिन अब डबल इंजन की सरकार हर पैसा सीधे जनता के खाते में पहुँचाती है।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने बिहार के विकास को देश के विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि पूर्णिया और सीमांचल का विकास बिहार के लिए जरूरी है। इस मौके पर उन्होंने 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिसमें रेल, एयरपोर्ट, बिजली और पानी से जुड़ी योजनाएँ शामिल हैं।

खास तौर पर पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया गया, जो मात्र पाँच महीने में तैयार हुआ। इस टर्मिनल से सीमांचल की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके अलावा भागलपुर में 2400 मेगावॉट का थर्मल पावर प्रोजेक्ट और कोसीमेची इंट्रा-स्टेट रिवर लिंक प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ, जिससे सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी।

पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 40 हजार से ज्यादा गरीब परिवारों को पक्के घर सौंपे। उन्होंने कहा कि धनतेरस, दीपावली और छठ पूजा से पहले इन परिवारों का गृह प्रवेश सौभाग्य की बात है। पीएम मोदी ने बेघर लोगों को भरोसा दिलाया कि हर गरीब को पक्का घर मिलेगा और यह उनकी गारंटी है।

पीएम मोदी ने बताया कि पिछले 11 साल में सरकार ने 4 करोड़ से ज्यादा पक्के घर बनवाए हैं और अब 3 करोड़ नए घर बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, “जब तक हर गरीब को घर नहीं मिल जाता, मोदी रुकने वाला नहीं है।” गरीबों की सेवा और पिछड़ों को प्राथमिकता को उन्होंने अपना मुख्य लक्ष्य बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने मखाना किसानों के लिए भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत मखाना किसानों को बेहतर कीमत और टेक्नोलॉजी का समर्थन मिलेगा। करीब 500 करोड़ रुपए की योजनाओं को मँजूरी दी गई है, जिससे मखाना सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों ने मखाना उत्पादन की उपेक्षा की, लेकिन अब उनकी सरकार इसे प्राथमिकता दे रही है।

विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस और आरजेडी की सरकारों ने बिहार को कुशासन और भ्रष्टाचार के दलदल में धकेला। उन्होंने जनता से अपील की कि वे विकास के एजेंडे को समझें और वोट के जरिए सही फैसला लें। उन्होंने यह भी कहा कि सात दिन बाद नवरात्रि से जीएसटी में कमी आएगी, जिससे रसोई खर्च और बच्चों की पढ़ाई में लोगों के पैसे बचेंगे।

मोदी ने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि एनडीए सरकार सीमांचल और पूर्णिया को विकास के केंद्र में ला रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र को उपेक्षित रखा गया, लेकिन अब डबल इंजन की सरकार बिहार को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने फिर दोहराया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है और एनडीए इस पर कोई ढील नहीं देगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “घुसपैठियों पर कार्रवाई होगी, और देश इसके अच्छे नतीजे देखेगा।”

राहुल गाँधी ने साथ छोड़ा तो अपनी यात्रा पर निकल पड़े तेजस्वी यादव, कॉन्ग्रेस के सम्मलेन में आमंत्रण के बाद भी नहीं पहुँचे RJD नेता: बिहार चुनाव से पहले ‘INDI Alliance’ टूटने के संकेत

बिहार में पिछले दिनों वोटर अधिकार यात्रा (SIR) में तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी की जोड़ी ने खूब हवाबाजी की। लेकिन अब ये जोड़ी टूटने की कगार पर है। इसके संकेत तेजस्वी यादव की राहुल गाँधी से बनाई दूरी से साफ मिल रहे हैं। इसके बाद अब कॉन्ग्रेस भी नाराज हो गई, जब एक बैठक में आमंत्रण के बाद भी RJD नेता नहीं पहुँचे।

दरअसल, बिहार के औरंगाबाद में 13 दिसंबर 2025 को सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें बिहार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने RJD को भी आमंत्रण भेजा था। इसके बावजूद RJD का कोई भी नेता सम्मेलन में हिस्सा लेने नहीं पहुँचा। इससे भी दिलचस्प बात यह है कि अब उसी जगह पर RJD सम्मेलन आयोजित करने जा रही है।

तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी के बीच दरार के संकेत सिर्फ इतने ही नहीं हैं। इससे पहले भी तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया। एक तरफ जब बिहार में विपक्ष के पास मुख्यमंत्री का चेहरा न होने पर सवाल उठ रहे थे, अब इससे साफ हो गया है। वहीं इससे बिहार में ‘महागठबंधन’ टूटने के सवालों पर भी जवाब साफ नजर आ रहा है।

अकेले 243 सीटों पर बिहार चुनाव लड़ेंगे तेजस्वी यादव

बिहार में कॉन्ग्रेस के साथ ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में जुड़ने वाले तेजस्वी यादव ने अपनी अलग ‘बिहार अधिकार यात्रा’ निकालने का भी फैसला लिया है। इस यात्रा में तेजस्वी यादव 5 दिन में 10 जिलों का दौरा करेंगे और बिहार की जनता से RJD के प्रतिनिधि और सीएम चेहरा बनकर मिलेंगे।

मंगलवार (16 सितंबर 2025) से शुरू हो रही इस यात्रा की शुरुआत जहानाबाद से होगी। यात्रा नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर जिले होकर वैशाली तक का सफर तय करेगी। इन जिलों में जिस भी इलाके से तेजस्वी की यात्रा निकलेगी, वहाँ BJP और JDU की पकड़ मानी जाती है।

ये यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को खत्म हुए अभी 15 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं। जहाँ राहुल गाँधी के साथ यात्रा में तेजस्वी यादव को प्रमुखता तो मिली लेकिन ‘लीडरशिप’ दिखाने का मौका नहीं मिल पाया। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ RJD की कम और कॉन्ग्रेस के बैनर तले ज्यादा दिखाई दी।

फिर जब राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस के बड़े राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को यात्रा में शामिल किया तो इससे तेजस्वी यादव की प्रमुखता घट सी गई। साथ ही इस यात्रा में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा ना दर्शाए जाने पर भी RJD में खास नाराजगी है। इसीलिए अब तेजस्वी यादव स्थानीय पार्टी RJD के फेस बनकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।

संभल के गाँव में सरकारी जमीन पर कब्जा कर बना लिए थे मस्जिद-मदरसे: अब चलेगा योगी सरकार का बुलडोजर, लगाए गए लाल निशान

संभल में अवैध तरीके से बनाए गए मस्जिद, मदरसे और मैरिज हॉल को प्रशासन ने अल्टीमेटम दिया है। इनका निर्माण सरकारी जमीनों पर किया गया है। यहाँ तक कि तालाब की जमीन पर मदरसे के मुतवल्ली ने अपना घर भी बना लिया है।

इसका जायजा लेने शनिवार (13 सितंबर 2025) को प्रशासनिक अधिकारी के साथ राजस्व विभाग की टीम पहुँची। जाँच में सरकारी जमीन पर पाए गए मस्जिद, मदरसे समेत कई इमारतों पर लाल निशान लगा दिया गया और हफ्ते भर में इसे खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया।

नोटिस में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को 20 सितंबर तक हटा लेने को कहा गया है, वरना इन्हें ध्वस्त करने की बात कही गई है। दरअसल इस इलाके में कई गाँवों में सरकारी जमीन पहले खाली पड़ी थी। इनपर धीरे-धीरे कब्जा किया गया। पहले कच्चा ढाँचा खड़ा किया गया और फिर पक्की इमारत बना ली गई। इसको देखते हुए अवैध कब्जे को हटाने की मुहिम चल रही है। कई जगहों पर अवैध कब्जे को हटा भी दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किया चिन्हित

तहसीलदार धीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में टीम राया बुजुर्ग गाँव और सलेमपुर सलार गाँव का दौरा किया। तहसीलदार के मुताबिक, सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर गाँव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इसको लेकर स्थानीय कोर्ट में धारा 67 के तहत केस दायर था।

कोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था। लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया है। इसलिए ऐसे जमीन पर बनी इमारत पर लाल निशान लगाए गए हैं। गाँव राया बुजुर्ग में गड्ढों वाली सरकारी जमीन पर मस्जिद और तालाब की भूमि पर मदरसे और दो घर बनाए गये हैं। इस घर पर मस्जिद के मुतवल्ली का कब्जा है।

सलेमपुर सलार गाँव में सड़क किनारे की सरकारी जमीन को चारदिवारी से घेर लिया गया है। सामने 4-5 दुकानें हैं और अंदर जाने पर ग्राउंड फ्लोर पर 4 से 5 कमरे बने हैं। पहली मंजिल पर एक कमरा और बरामदा है। इमारत को देखकर ये नहीं लगता कि मदरसा या पढ़ाई-लिखाई का काम यहाँ होता होगा। यहाँ काफी गंदगी थी। इससे पता चलता है कि कोई व्यावसायिक काम यहाँ से किया जा रहा है।

गाँव के सरकारी बंजर भूमि पर एक मस्जिद का निर्माण कर दिया गया है। अब इन इमारतों को ध्वस्त करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है।

तालाब की जमीन पर बना बैक्वेट हॉल

राया बुजुर्ग गाँव में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर मदरसा निर्माण किए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन जब जाँच करने के लिए प्रशासनिक टीम पहुँची तो उन्हें वहाँ एक बैक्वेट हॉल मिला। इसे भी हटाने का नोटिस थमा दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने जब गाँव में पैमाइश का काम शुरू किया, तो खलबली मच गई। वहाँ बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन अधिकारियों ने सफलतापूर्व जमीन मापने का काम पूरा किया और अवैध इमारतों पर लाल निशान लगाए।

27 साल बाद ‘आउटलुक’ ने राजा भैया से माँगी माफी, 1997 में लिखा था ‘कुंडा का गुंडा’: विधायक बोले- खलनायक बनाना आसान काम है

एक माफी के लिए कोई कितना इंतजार कर सकता है, 1 हफ्ते, 1 महीने या 1 साल? उत्तर प्रदेश की कुंडा विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने एक अदद माफी के लिए 27 वर्षों का इंतजार किया है। वो भी एक समाचार पत्रिका से।

क्या है मामला?

राजा भैया ने सोमवार (15 सिंतबर 2025) को X पर एक पोस्ट कर बताया कि उन्हें लेकर लिखी गई एक खबर के लिए ‘आउटलुक’ मैगजीन ने 27 वर्ष बाद माफी माँगी है। राजा भैया ने अपने पोस्ट में इस माफीनामे के पीछे की पूरी कहानी भी साझा की है।

उन्होंने लिखा, “27 वर्ष पहले, देश की एक बड़ी पत्रिका Outlook ने हमारा साक्षातकार लिया पर बहुत ही अभद्र भाषा में उसे छापा, लोग उसे पढ़के हतप्रभ थे कि इतनी बड़ी पत्रिका ऐसी भाषा का उपयोग कैसे कर सकती है।”

राजा भैया ने आगे बताया, “हमारे एक समर्थक से रहा नहीं गया और उन्होंने Outlook पर न्यायालय में मानहानि का मुकदमा कर दिया, न्यायचक्र चलता रहा और समय बीतता गया, अब फैसले का दिन निकट आ गया था।”

भैया ने लिखा, “उन्हें लगा कि निर्णय सत्य के पक्ष में होगा और उनके विपरीत जायेगा तो उन्होंने हमसे सम्पर्क किया, मुकदमा वापस लेने का अनुरोध किया और माफीनामा छापने पर सहमत हुए।”

उन्होंने लिखा, “उन्होंने उक्त माफीनामा छापा जो आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। यद्यपि 27 वर्ष बाद माफीनामा छापने से सार्वजनिक जीवन में हुई हानि की भरपाई नहीं की जा सकती है। मीडिया के लिए बहुत आसान है किसी को ‘हीरो’ या ‘खलनायक’ बना देना, खासकर मुझे लेकर बहुत ही अनर्गल बातें छप चुकी हैं, लेकिन कहते हैं ना कि साँच को आँच नहीं। सत्यमेव जयते।”

क्या थी ‘आउटलुक’ की खबर?

जिस पूरी खबर को लेकर बवाल हुआ था उसकी जानकारी ‘आउटलुक’ ने अपने इस माफीनामे में दी है। आउटलुक ने लिखा है, “27 साल पहले, आउटलुक पत्रिका के 17 नवंबर 1997 के अंक में कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ के बारे में ‘आज का मंत्री, कुंडा का गुंडा राजा’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ था।”

‘आउटलुक’ ने लिखा, “हमें खेद है कि इस लेख में ऐसे सुझाव और अभिव्यक्तियाँ शामिल थीं जिनसे पिछले कुछ वर्षों में उनकी प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुँचा होगा। शीर्षक में ‘गुंडा’ शब्द का प्रयोग विशेष रूप से अनुचित था और इसने राजा भैया के बारे में झूठा नैरेटिव बनाया, इन्हें अब हम पूरी तरह से अनुचित मानते हैं।”

आउटलुक का माफीनामा

पत्रिका ने अपनी खबर में पेश की गई राय को वापस लेते हुए कहा, “राजा भैया को खबर के प्रकाशन के कारण हुई परेशानी, पीड़ा, चोट और प्रतिष्ठा को पहुँची क्षति के लिए गहरा और गंभीर खेद व्यक्त करती है।” आउटलुक की वेबसाइट पर भी इस लेख का लिंक अब उपलब्ध नहीं है।

पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वक्त रोया रोना, अब मैच का हल्ला देख उगल रही जहर: प्रोपेगेंडा ‘बीबी’ आरफा खानम शेरवानी की ‘मौकापरस्ती’ फिर हुई एक्सपोज

आज के दौर में सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्से ऐसे हो गए हैं, जहाँ राष्ट्र विरोधी तत्वों को खुला मैदान मिला हुआ है। इनमें से एक प्रमुख नाम है आरफा खानम शेरवानी का। खुद को अवॉर्ड-विनिंग जर्नलिस्ट बताने वाली यह महिला ‘द वायर’ नामक वामपंथी प्रोपेगैंडा पोर्टल की सीनियर एडिटर है। लेकिन असलियत में वह इस्लामी कट्टरपंथ और वामपंथी विचारधारा के मिश्रण से भारत को कमजोर करने का काम करती नजर आती है।

आरफा खानम शेरवानी की मिक्स्ड विचारधारा हमेशा से राष्ट्र विरोधी रही है, जो देश की एकता, हिंदू संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाती है। इसी तरह इसकी इस्लामी कट्टरपंथ भी भारत की संप्रभुता के खिलाफ काम करता है।

आरफा खानम शेरवानी इन दोनों का ऐसा कॉकटेल है, जो हर मौके पर भारत विरोधी ट्वीट्स से सुर्खियाँ बटोरती है। शेरवानी की प्रोफाइल से साफ दिखता है कि वह भारत सरकार, हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ लगातार जहर उगलती रहती है।

आरफा खानम शेरवानी ने रविवार (14 सितंबर 2025) को एक्स पर लिखा, “ध्यान से सुनिए, उन दो गुजरातियों के लिए हर भावना, हर धर्म से बड़ा धंधा है। अब समझना और सहना आसान होगा।” यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के संदर्भ में है, जहाँ वह क्रिकेट प्रशासकों की आड़ में देश के शीर्ष नेताओं पर हमला बोल रही है।

पहले वह मैच न खेलने पर खेल भावना की दुहाई दे रही थीं, लेकिन मैच होने पर गुजरातियों को निशाना बनाया। कमेंट बॉक्स में उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स हैं, जो पाकिस्तान समर्थन और युद्ध विरोधी हैं। यह ट्वीट न सिर्फ भारत विरोधी है, बल्कि गुजराती समुदाय को टारगेट करके हिंदू विभाजन की कोशिश है।

आरफा की एक्स प्रोफाइल (@khanumarfa) को स्कैन करें तो दर्जनों ऐसे ट्वीट्स मिलते हैं, जो भारत सरकार और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। ऐसा ही विवाद 24 अप्रैल 2021 का है, जब उसने सीधे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखा। यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच आया, जब पूरा देश पाकिस्तान को दुश्मन मान रहा था। राष्ट्रवादी विचार से यह खुला तौर पर देशद्रोह है, क्योंकि पाकिस्तान ने हमेशा भारत पर आतंकी हमले करवाए हैं। आरफा का यह स्टैंड साफ करता है कि वह पाकिस्तान की तरफदारी करती हैं।

आरफा के ट्वीट का वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट

फिर आया 2025 का ऑपरेशन सिंदूर। यह भारतीय सेना का एक सफल मिशन था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का बदला लेते हुए पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। 28 निर्दोषों की मौत, जिनमें 24 हिंदू थे, का बदला लिया गया। लेकिन आरफा ने एक्स पर विलाप शुरू कर दिया: “Peace is Patriotism. War is destruction. Borders don’t bleed – people do. Stop the war. Deescalate Now.” यह ट्वीट पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का आईना है।

यही नहीं, एक पैनल डिस्कशन में आरफा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए लोग आतंकी नहीं, बल्कि आम नागरिक थे। उसने ऑपरेशन के नाम ‘सिंदूर’ पर भी उंगली उठाई, जो हिंदू परंपरा का प्रतीक है। पाकिस्तान के लोगों को ‘परेशान’ बताकर उसने दुश्मन देश का एजेंडा चलाया।

शिवलिंग को डस्टबिन बताने से गौमूत्र पर तंज तक, हिंदू विरोध से भरी है X टाइम लाइन

आरफा की प्रोफाइल में हिंदू विरोधी कंटेंट भरा पड़ा है। 1 अगस्त 2024 को उन्होंने ‘बाहुबली’ फिल्म का आइकॉनिक पोस्टर शेयर किया, जहां प्रभास शिवलिंग उठा रहा है, लेकिन उन्होंने शिवलिंग को डस्टबिन से रिप्लेस कर दिया। कैप्शन था ‘विजन 2047’। यह हिंदू धर्म का अपमान है, जिसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज हुई। राष्ट्रवादी नजरिए से, यह हिंदुत्व को कुचलने की कोशिश है। पहले भी उन्होंने भगवान राम को दलितों पर अत्याचार करने वाला कार्टून शेयर किया। ‘गौमूत्र’ और ‘गोबर’ पर तंज कसते हुए ट्वीट्स किए, जो पुलवामा हमलावर आदिल डार के शब्दों से प्रेरित हैं।

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 9 जून 2024 को रियासी में 2 साल के हिंदू बच्चे टीटू की हत्या पर आरफा चुप रहीं। लेकिन 2015 में सीरिया के मुस्लिम बच्चे एलन कुर्दी और 2016 में रोहिंग्या बच्चे की मौत पर मातम मचाया। दो दिन बाद भी टीटू पर कोई ट्वीट नहीं, बल्कि उसने पूछा कि संसद में एक भी मुस्लिम सांसद या मंत्री क्यों नहीं? यह ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की थ्योरी है, जहाँ हिंदू पीड़ितों की अनदेखी होती है।

इसने 2022 में PFI जैसे इस्लामी संगठनों के इवेंट्स में स्पीच दी, जहाँ हिंदुत्व को खतरा बताया। 2023 में सिद्दीक कप्पन की रिहाई पर मुस्लिम विक्टिम कार्ड खेला था।

इन सब से साफ है कि आरफा हिंदू संस्कृति को नीचा दिखाती हैं, जबकि इस्लामी कट्टरता को बचाती हैं। राष्ट्रवादी विचार से, यह हिंदू फोबिया है, जो देश की सांस्कृतिक एकता को तोड़ता है।

इस्लामी प्रोपेगैंडा की प्रोपेगेंडा मशीनरी का हिस्सा है आरफा

आरफा खानम शेरवानी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की पूर्व छात्रा हैं, जो खुद एक ऐसा संस्थान है जहाँ से कई बार कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिलता देखा गया है।

एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए आरफा ने कई बार ट्वीट किया है कि मुस्लिम समुदाय को उनके जैसे लीडर की जरूरत है। लेकिन सर सैयद अहमद खान वही शख्स थे, जिसने ‘टू नेशन थ्योरी’ का विचार दिया था, जिसके चलते भारत का बँटवारा हुआ। आरफा का यह स्टैंड साफ दिखाता है कि वह भारत की एकता से ज्यादा इस्लामी अलगाववाद को महत्व देती हैं।

आरफा खानम शेरवानी की प्रोफाइल स्कैन करने पर साफ है कि वह मौका परस्त हैं। कभी पाकिस्तान जिंदाबाद, कभी ऑपरेशन सिंदूर पर शांति की दुहाई, कभी हिंदू प्रतीकों का अपमान।

ऑपइंडिया ने उसके कई प्रोपेगैंडा को एक्सपोज किया है, जो अभी भी जारी है। राष्ट्रवादी भारत को ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए। सरकार को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि देश की एकता बनी रहे। आरफा जैसे लोग ‘पोस्टर गर्ल’ नहीं, बल्कि प्रोपेगैंडा मशीन हैं, जो वामपंथी विचारधारा और इस्लामी कट्टरपंथ के जरिए भारत को कमजोर करना चाहती हैं। समय है कि सच्चाई सामने आए और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो।

अमेरिका में 17 सितंबर को TikTok बैन होगा खत्म, ट्रंप बोले- चीन पर निर्भर आगे का रास्ता: अब तक 3 बार बढ़ चुका है प्रतिबंध, US को है जासूसी का शक

अमेरिका में सोशल मीडिया टिकटॉक बैन है। इस पर बैन की समयसीमा 17 सितंबर 2025 को पूरी हो रही है। इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने अहम बयान दिया है। न्यू जर्सी में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह समझौते के लिए समयसीमा को फिर से बढ़ाएँगे या नहीं क्योंकि यह पूरी तरह चीन पर निर्भर करता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हो भी सकता है और नहीं भी। हम अभी TikTok पर बातचीत कर रहे हैं। हम इसे खत्म होने दे सकते हैं, या नहीं… मुझे नहीं पता। यह चीन पर निर्भर करता है।”

3 बार बढ़ चुकी है टिकटॉक बैन की समयसीमा

टिकटॉक पर बैन की समयसीमा 17 सितंबर 2025 को खत्म हो रही है। इसे अगर आगे बढ़ाया जाता है, तो ये चौथी बार होगी। अमेरिका ने टिकटॉक की कंपनी बाइटडांस को जनवरी 2025 तक इस लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बेचने या बंद करने का समय दिया था।

अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनके पास ऐप के लिए अमेरिकी खरीदार हैं। अगर चीन कंपनी को बेचने के लिए तैयार है, तो वह समय सीमा को और बढ़ा सकते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने TikTok की मूल कंपनी बाइटडांस को धमकी दी थी कि अगर टिकटॉक को अमेरिका के हाथों नहीं बेचा गया, तो वे अमेरिका में इसपर प्रतिबंध लगा देंगे। मोबाइल ऐप को हर जगह से हटवा देंगे और ऐप के पुराने वर्जन को अपडेट नहीं किया जाएगा।

अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा, जासूसी का है डर

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह ऐप को बचाना चाहते हैं, क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में ऐप ने मदद की। दरअसल दुनियाभर के नौजवान टिकटॉक पर ज्यादा हैं। उन्हें डर है कि अगर चीन की ऐप को अमेरिका में इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अमेरिका की जासूसी हो सकती है, नौजवानों का निजी जानकारी लीक हो सकती है

TikTok के ‘एल्गोरिदम’ को अमेरिकी खरीदार के साथ साझा करने से पहले कंपनी को चीन की मंजूरी लेनी होगी। इसलिए सौदा अभी तक अटका हुआ है। 2025 की शुरुआत में TikTok को खरीदने पर बात हो रही थी। इसका अधिकांश स्वामित्व अमेरिकी निवेशकों के पास होता और वे उसका संचालन करते। हालाँकि, ट्रम्प की टैरिफ की वजह से इसे चीन ने मंजूरी नहीं दी।

ट्रम्प ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया और TikTok की अमेरिकी संपत्ति की बिक्री या उसे बंद करने संबंधी कानून को लागू नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने पहले समय सीमा को अप्रैल की शुरुआत तक, फिर मई से जून तक और तीसरी बार सितंबर तक बढ़ाया।