बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक पार्टियाँ आधी आबादी को लुभाने की कोशिशों में लगी हुई है। आरजेडी ने वादा किया है कि अगर महागठबंधन को सत्ता मिलती है तो महिलाओं को माई- बहिन योजना के तहत हर महीने 2500 रुपए दिए जाएँगे। पार्टी इसको लेकर अभी से फॉर्म भरवा रही है। महिलाओं से उनके आधार कार्ड माँगे जा रहे हैं।
एनडीए ने आधार कार्ड नंबर लेने पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे गैर कानूनी कहा है। माई बहन मान योजना पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल कहते हैं, “यह योजना एक घोटाला है और जनता समझती है कि राजद और कॉन्ग्रेस झूठे वादे कर रहे हैं। महिलाओं को फॉर्म भरकर गुमराह किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उन्हें पैसा तभी मिलेगा जब पार्टी जीतेगी।”
Patna, Bihar: On Mai Bahin Maan Yojana, BJP State President Dilip Jaiswal says, "This scheme is a scam, and the public understands that the RJD and Congress are spreading false promises. Women were being misled with forms claiming they would receive money only if the party won… pic.twitter.com/ZQANg3Z6Bo
नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए महिला रोजगार योजना की शुरुआत की है। इसमें परिवार की एक महिला को तत्काल 10 हजार रुपए और 6 महीने बाद 2 लाख रुपए देने की योजना है। इसकी शुरुआत सितंबर में की जा रही है। इसको लेकर आरजेडी कह रही है कि ये माई बहिन मान योजना को देखते हुए लाया गया है।
क्या है माई बहिन मान योजना?
महागठबंधन के कार्यकर्ता और समर्थक महिलाओं के बीच जा रहे हैं और उनसे फॉर्म भरवा रहे हैं। ये फॉर्म दो तरह के हैं- एक है माई बहिन योजना और दूसरा तेजस्वी रोजगार योजना। जाहिर तौर पर पूर्व डिप्टी सीएम के नाम पर लोगों से रोजगार का वादा किया जा रहा है। वहीं माई बहिन मान योजना के तहत महागठबंधन की सरकार बनने पर हर जरूरतमंद महिला के खाते में हर महीने 2500 रुपए भेजे जाएँगे, इसका वादा किया जा रहा है।
आधार नंबर लेना गैरकानूनी
किसी भी योजना को लागू तभी किया जा सकता है जब सरकार उसे मंजूर करे। इसके लिए लाभार्थियों से सरकारी कागजात भरवाए जाते हैं और आधार कार्ड नंबर लिया जाता है। यहाँ मौजूद महिलाओं में ज्यादातर को योजना की पूरी जानकारी नहीं है। एक महिला ने कहा कि अगर धोखाधड़ी हुई, तो खूब पिटाई होगी।
चुनाव से पहले पार्टियाँ वादा कर सकती हैं। फॉर्म भरवाना या नागरिकों के पहचान पत्र लेना गैर कानूनी है। बिहार में महिलाओं की बड़ी आबादी अनपढ़ है। उन्हें ये नहीं पता है कि जो फॉर्म उनके नाम पर भरा जा रहा है, उसमें क्या है। ऐसे में झाँसे में लेकर फॉर्म भरवाना, कम पढ़े-लिखे और अनपढ़ महिलाओं को धोखा देना है।
बजट कहाँ से लाएँगे- प्रशांत किशोर
जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने महागठबंधन से कहा है कि माई बहिन मान योजना का बजट कहाँ से आएगा, पहले ये बता दीजिए। उन्होंने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कैलकुलेटर लेकर भी इस योजना में कितना पैसा खर्च होगा, ये वह नहीं बता सकते। इतना बजट कहाँ से आएगा, ये बात तो छोड़ दीजिए।
फॉर्म भरवा रहे लोग कौन हैं?
आरजेडी और कॉन्ग्रेस माई बहिन मान योजना के फॉर्म भरवाने के लिए कई लोगों को काम में लगाया है। इनके पास किसी तरह की अथॉरिटी नहीं है, न ही कोई पार्टी से जारी किया गया पत्र है। ऐसे में पहचान पत्र लेने वाले लोगों की खुद की पहचान ही शक के दायरे में आ जाती है। ये पार्टी कार्यकर्ता हैं या बाहरी लोग हैं। फॉर्म भरवाने आयी एक महिला का कहना है कि वह पीआर एजेंसी की तरफ से आई हैं। पार्टी की कार्यकर्ता नहीं हैं। वह महिलाओं को बता रही हैं कि जब तेजस्वी यादव की सरकार आएगी, तो महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए मिलेंगे।
कॉन्ग्रेस ने दिया था महिलाओं को ‘धोखा’
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कॉन्ग्रेस ने घोषणा की थी कि वह महिलाओं को 1 लाख रुपए देगी। चुनाव में करारी हार के बाद महिलाएँ उन्हें वादा याद दिलाने पहुँची। कांग्रेस ने कई परिवारों को ‘गारंटी कार्ड’ वितरित किए थे। इसमें हर गरीब परिवार की महिला मुखिया को हर साल 1 लाख रुपए देने का वादा किया गया था। नतीजों के बाद कॉन्ग्रेस के नेता महिलाओं से बचते हुए नजर आए थे। महिलाएँ पैसे लेने कॉन्ग्रेस दफ्तर तक पहुँच गई थी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान लाखों नागरिकों की जासूसी कर रहा है। इसके लिए वह चीन निर्मित इंटरनेट फायरवॉल और फोन टैपिंग प्रणाली का इस्तेमाल करता है। यह चीन से बाहर सरकारी निगरानी का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान का मॉनिटरिंग नेटवर्क चीनी और पश्चिमी तकनीक को मिलाकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण करना है। एमनेस्टी का कहना है कि पाकिस्तान की एजेंसियाँ लॉफुल इंटरसेप्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) के जरिए एक बार में 40 लाख मोबाइल फोन की निगरानी कर सकती हैं।
वहीं WMS 2.0 नामक फायरवॉल 20 लाख इंटरनेट सत्रों को ब्लॉक करने की क्षमता रखता है। दोनों प्रणालियाँ साथ मिलकर कॉल और टेक्स्ट की टैपिंग से लेकर सोशल मीडिया और वेबसाइटों को धीमा या बंद करने तक का काम करती हैं। रिपोर्ट का आधार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी का वह मामला है, जिसमें 2024 में उनकी निजी कॉल ऑनलाइन लीक हुई थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान टेलीकॉम रेगुलेटर ने स्वीकार किया कि फोन कंपनियों को LIMS से जुड़ने का आदेश दिया गया था। एमनेस्टी ने बताया कि पाकिस्तान ने अब तक करीब 6.5 लाख वेब लिंक ब्लॉक किए हैं और यूट्यूब, फेसबुक और एक्स पर पाबंदी लगाई है।
इन प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर बलूचिस्तान पर पड़ा है, जहाँ कई जिलों में सालों से इंटरनेट बंद है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सेना वहाँ कार्यकर्ताओं के जबरन गायब होने और हत्याओं में शामिल है, हालाँकि सेना इन आरोपों से इनकार करती है।
रिपोर्ट में तकनीकी आपूर्तिकर्ताओं के नाम भी सामने आए हैं। फायरवॉल की सप्लाई बीजिंग की गीज नेटवर्क्स करती है, जबकि इसमें अमेरिका की नियाग्रा नेटवर्क्स के उपकरण, फ्रांस की थेल्स डीआईएस का सॉफ़्टवेयर और चीनी सरकारी IT कंपनी के सर्वर शामिल हैं।
फोन टैपिंग प्रणाली जर्मनी की यूटिमाको ने बनाई है, जिसे यूएई स्थित डेटाफ्यूजन के जरिए ऑपरेट किया जाता है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि फोन टैपिंग भले ही कई देशों में होती है, लेकिन इंटरनेट फ़िल्टरिंग को इतने बड़े पैमाने पर लागू करना बहुत दुर्लभ है।
पाकिस्तान में दोनों प्रणालियों का एक साथ होना निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरे की निशानी है। एमनेस्टी ने साफ कहा कि इस तरह की निगरानी से लोग अपने अधिकारों का प्रयोग करने से डरने लगते हैं, जिससे समाज में दमनकारी माहौल और गहराता है।
एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, जहाँ झूठे आरोपों में फँसाए जाने से लोगों की जिंदगी तबाह हो जाती है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के झाँसी से सामने आया है, जहाँ आकाश पांडेय नाम के युवक को एक झूठे मामले में 3 साल से ज़्यादा जेल में बिताना पड़ा। आकाश पांडेय पर आत्महत्या का झूठा केस किया गया।
इस दौरान आकाश के माता-पिता की मौत हो गई और उसकी पढ़ाई-लिखाई सब छूट गई। अब कोर्ट ने उसे निर्दोष करार दिया है, लेकिन सवाल यह है कि बर्बादी के इस कगार पर पहुँची जिंदगी की भरपाई कैसे होगी?
क्या है पूरा मामला?
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 8 जून 2018 की है, जब मातादीन अहिरवार की बेटी का शव फाँसी के फँदे से लटका मिला। मातादीन ने कोर्ट के आदेश पर आकाश पांडेय और उसके ममेरे भाई अंकित मिश्रा पर छेड़छाड़, आत्महत्या के लिए उकसाने, SC/ST एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई थी।
पुलिस की जाँच में आकाश का भाई सचिन निर्दोष पाया गया, लेकिन आकाश और अंकित को जेल भेज दिया गया। आकाश 3 साल से ज़्यादा जेल में रहा, जबकि अंकित एक साल बाद जमानत पर छूट गया।
जेल में बीता जीवन, माता-पिता की मौत और बर्बाद हुआ करियर
ट्रायल के दौरान आकाश के माता-पिता दोनों की मौत हो गई। संभवतः वो बेटे के जेल जाने के सदमे को झेल नहीं पाए। अब 7 साल बाद, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर दोनों को निर्दोष करार दिया है। कोर्ट ने पाया कि लड़की ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई थी, जिसे उसके पिता और परिवार के सदस्यों ने मिलकर अंजाम दिया था।
SC-ST एक्ट में केस कर आकाश पांडेय का पूरा जीवन किया बर्बाद? अब कोर्ट ने माना बेगुनाह! किया बरी।
– 3 साल जेल में रहा। केस लड़ते-लड़ते माँ- बाप की मौत। अब कोर्ट से बेगुनाह।
– 8 जून 2018 को मातादीन अहिरवार के बेटी की लाश मिली फांसी के फंदे से लटकी मिली। मातादीन अहिरवार ने आकाश… pic.twitter.com/15zfY6FqyD
स्पेशल जज ने पिता मातादीन के खिलाफ झूठे सबूत पेश करने और मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि लड़की की मौत के बाद परिवार को मिला मुआवजा भी वसूला जाएगा।
न्याय मिला, पर जिंदगी की भरपाई कैसे?
कोर्ट के फैसले के बाद आकाश और अंकित फूट-फूटकर रो पड़े। लेकिन, उनके आंसू केवल न्याय मिलने की खुशी के नहीं थे, बल्कि खोए हुए सालों और बर्बाद हुए जीवन पर भी थे। आकाश का कहना है कि ‘जिंदगी क्या बदली है, बस जेल से बाहर आ गए हैं। लोगों की निगाहें हर रोज आपसे सवाल करती हैं। जवाब नहीं होते।’ उसकी पढ़ाई छूट गई, खेत बिक गए और जमा-पूँजी भी खत्म हो गई।
फिल्हाल आकाश 6 हजार रुपए महीने की नौकरी कर रहा है, जबकि ITI पूरी हो जाती तो अच्छी सैलरी मिल सकती थी। अंकित, जो डिफेंस की तैयारी कर रहा था, उसकी पढ़ाई भी छूट गई। उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया।
विष्णु तिवारी का मामला: 20 साल जेल के बाद मिली आजादी
इसी तरह, इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद विष्णु तिवारी करीब 20 साल बाद जेल से बाहर आए हैं। उन पर 1999 में रेप का झूठा आरोप लगाया गया था। इस दौरान उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई और उन्हें पैरोल पर भी रिहा नहीं किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
ये दोनों मामले दर्शाते हैं कि कैसे न्याय मिलने में देरी या झूठे आरोप जीवन को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या विष्णु या आकाश जैसे लोगों के जीवन की जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई किसी भी मुआवजे या फैसले से हो सकती है? क्या उनकी जिंदगी की बर्बादी की भरपाई संभव है?
‘समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ विजन डॉक्यूमेंट के लिए राज्य सरकार के पोर्टल पर रविवार (7 सितंबर) तक 27,500 से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें अब तक सबसे अधिक सुझाव शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। यह दिखाता है कि लोग मानते हैं कि विकास की असली कुंजी शिक्षा ही है।
योजना विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि रविवार तक पोर्टल पर कुल 27,551 सुझाव दर्ज हो चुके थे। इनमें से 18,780 सुझाव पुरुषों ने दिए जबकि 8,459 महिलाओं से आए। इसके अलावा 312 सुझाव ऐसे भी हैं, जिनमें सुझाव देने वाले लोगों के लिंग की पहचान नहीं हो सकी है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार ग्रामीण आबादी ने शहरों के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्रियता दिखाई है। कुल प्राप्त फीडबैक में से 22,158 सुझाव गाँवों से आए जबकि शहरों से केवल 5,393 सुझाव दर्ज हुए।
नागरिकों को नीति निर्माण से जोड़ने के लिए पोर्टल लॉन्च
इस समारोह में सीएम योगी ने राज्य के भविष्य का रोडमैप बनाने के लिए नागरिकों से भागीदारी की अपील की थी। यह अभियान विधानसभा के विशेष मैराथन सत्र के बाद शुरू किया गया जिसमें विजन 2047 पर चर्चा हुई थी।
इस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए लोग 12 प्राथमिक क्षेत्रों पर अपने सुझाव दे सकते हैं। इनमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, आईटी, आधारभूत संरचना, पर्यटन, सामाजिक कल्याण, सुरक्षा और सुशासन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह पूरी कवायद आर्थिक शक्ति, नवाचार और जीवन्तता की थीम पर आधारित है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ विजन के अनुरूप है।
विस्तृत भागीदारी और विशेषज्ञों की मौजूदगी
अभियान की शुरुआत के समय लखनऊ के लोक भवन में 400 से ज्यादा रिटायर अधिकारी और प्रशासन, पुलिस, वानिकी, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस अवसर पर ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत एक लघु फिल्म से हुई जिसमें 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश के विकास को दिखाया गया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि शताब्दी संकल्प अभियान का मकसद हर नागरिक को विकास का साझीदार बनाना है। उन्होंने खास तौर पर बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों और पेशेवरों से अपील की कि वे अपने अनुभव को राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए इस्तेमाल करने में मदद करें।
राज्य की आर्थिक को लेकर सीएम योगी ने बताया कि पिछले 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 13 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 35 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है और प्रदेश भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।
कैसे चल कर रहा है यह अभियान?
अभियान के शुरुआती चरण में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सेमिनार किए जा रहे हैं ताकि युवाओं को जोड़ा जा सके। इसके बाद मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सक्रिय भागीदारी होगी। योजना यह भी है कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर प्रस्ताव पारित किए जाएँ ताकि जमीनी स्तर से सुझाव लिए जा सकें।
प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सार्वजनिक जगहों, स्कूलों और कॉलेजों में क्यूआर कोड लगाए गए हैं। कोई भी व्यक्ति इन्हें स्कैन करके सीधे ऑनलाइन अपने सुझाव भेज सकता है। पोर्टल को भी बिल्कुल आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सभी सुझावों का मूल्यांकन उस विषय के एक्सपर्ट और नीति आयोग द्वारा किया जाएगा। सबसे अच्छे और नवाचार वाले आइडिया को अंतिम विज़न डॉक्यूमेंट में शामिल किया जाएगा। साथ ही, उन्हें जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा।
2047 तक UP की $6 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
यह अभियान 5 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चलेगा और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इसे होर्डिंग, अखबार, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के जरिए प्रचारित किया जाएगा।
प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने विजन डॉक्यूमेंट का खाका पेश करते हुए कहा कि राज्य का लक्ष्य 2047 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 6 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना है। उन्होंने बताया कि यह यह दस्तावेज तीन स्तंभों पर टिका है जिसमें आर्थिक ताकत, इनोवेशन और जीवंतता शामिल हैं। यह एक सामूहिक विजन होगा, जो जनता के विचारों से ही बनाया जाएगा।
क्या आपको राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के इंजीनियर सत्येंद्र दुबे याद हैं। दुबे की हत्या इसलिए कर दी गई थी, क्योंकि वो बिहार में सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर काफी सख्त थे। अब एक ऑडियो सामने आया है जिसमें में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव NHAI के ही एक अधिकारी को धमकाते हुए सुनाई दे रहे हैं।
इस वीडियो में पप्पू यादव NHAI अधिकारी पर एक एंबुलेंस ड्राइवर को नौकरी पर रखने का दवाब डाल रहे हैं। पप्पू यादव अधिकारी को धमकती देते हुए कहते की 2 मिनट में ‘लतखोरी’ खत्म कर दूँगा। जब अधिकारी उनके सासंद होने का हवाला देते हुए मर्यादित तरीके से बात करने की गुजारिश करते हैं, तब भी सासंद का लहजा नहीं बदलता है। वे अपने लोगों से इस अधिकारी के घर के बारे में पूछते हुए सुनाई देते है।
पप्पू यादव के वायरल ऑडियो में क्या हैं।
इस वायरल ऑडियों की पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह ऑडियों कब का है। इसमें में पप्पू यादव NHAI अधिकारी को धमकाते हुए सुनाई देते हैं। फोन पर आते ही पप्पू यादव कहते है शेखर जी पप्पू यादव… NHAI अधिकारी जब कहते हैं, ‘हाँ’, तब पप्पू यादव कहते हैं कि इतना लूज मत होईये, हाँ… टाइट रहिए। फिर पप्पू यादव NHAI अधिकारी को कहते हैं एंबुलेंस में ड्राइवर थे मनीष को रख लो यार। जब अधिकारी कहते हैं कि हमारे अंदर का चीज नहीं है, तब पप्पू यादव भड़क जाते हैं और गुस्सा करते हुए कहते ‘जो है उसको रखो’।
इसके बाद अधिकारी सासंद से कहते हैं कि ‘हम कहाँ से रखें’। आग बबूला हुए पप्पू यादव अधिकारी से पूछते हैं कि ‘अभी कहाँ हो’। अधिकारी जवाब देते हैं कि ‘दिल्ली में हैं’। पप्पू यादव अधिकारी से कहते हैं कि ‘लतखोरी’ और जो ‘पैसा इधर-उधर करते हो’ 2 मिनट में खत्म हो जाएगी। इसके बाद पप्पू यादव अपने आसपास खड़े लोगों से पूछते हैं ‘घर कहाँ है इस साले का’। पीछे खड़े लोग बताते हैं कि पूर्णिया में है हॉस्पिटल में हैं। पप्पू यादव पूछते हैं ‘हॉस्पिटल में क्या काम करता है’।
पप्पू यादव इसके बाद अधिकारी से पूछते है ‘कब आ रहे हैं इधर’। अधिकारी जवाब देते हुए कहते हैं ‘हम काहें आप को बोले’। पप्पू यादव 2 से 3 बार कहते हैं कि ‘तुम्हारा दिमाग खराब है क्या’। और अधिकारी उन्हें याद दिलाते हैं कि ‘आप सांसद है, तहजीब से बात कीजिए’। फिर पप्पू यादव गाली देते हुए बोलते है ‘बह@$द तुम्हारा दिमाग खराब है क्या’, तुम आओ सा$, तुम्हारा इलाज करवाकर सही करते हैं। लेकिन फिर भी अधिकारी कहते रहते हैं कि ‘आप सांसद है तमीज में बात कीजिए।’ इतने में पीछे से आवाज आती है कि ‘आने दो इसको’। पप्पू यादव और NHAI अधिकारी का ऑडियो क्लिप भी आप सुन सकते हैं।
इस ऑडियो के वायरल होने के बाद, कई लोगों को सत्येंद्र दुबे की याद आई। सत्येंद्र दुबे एक ईमानदार इंजीनियर थे जो NHAI के तहत काम कर रहे थे। सत्येंद्र दुबे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ PMO को पत्र लिखा था। पर वो गलती कर बैठे, पत्र में अपना नाम लिख दिया। सरकार की तरफ से उनकी पहचान उजागर कर दी। और फिर हुआ वही, जो बिहार के ‘जंगलराज’ में अक्सर होता था। बिहार के गया में सर्किट हाउस में 27 नवंबर 2003 को सत्येंद्र दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना ने देश भर में इंजीनियरों के बीच डर पैदा कर दिया था कि ईमानदारी से काम करने पर उन्हें भी इसी तरह का अंजाम भुगतना पड़ सकता है। हालाँकि, इस मामले में मुख्य आरोपित उदय मल्लाह को पकड़ा गया, लेकिन सत्येंद्र दुबे के भाई का मानना है कि असली अपराधी अभी भी बाहर हैं और सीबीआई ने इस मामले को ठीक से नहीं सुलझाया।
पप्पू यादव खुद को कॉन्ग्रेस का बताते हैं और हाल ही में उन्होंने तेजस्वी यादव को जननायक बताया है। बिहार में जंगलराज अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। इनकी सरकार बनने के बाद क्या ही होगा। 90 से 2015 का दौर देखकर समझ सकते हैं। खुद को ‘गरीबों का मसीहा’ के तौर पर प्रचार करते हुए पप्पू यादव जी, लालू यादव के उसी जंगलराज की उपज है।
असम में घुसपैठिया होने के शक में पकड़ा जाने पर अब सिर्फ 10 दिन में अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को गुवाहाटी में असम कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि राज्य ने अब तक 30,128 घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा है। इसके साथ ही असम कैबिनेट में सीएम सरमा ने अब एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने पर मुहर लगाई है।
असम में घुसपैठिययों को डिपोर्ट करने के लिए सरकार लगातार कमर कस कर काम कर रही है। ऑपरेशन पुशबैक समेत हर तरह से सरकार घुसपैठियों को राज्य और देश से बाहर निकालने पर काम कर रही है। इसी में अब राज्य में अवैध घुसपैठियों की समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम की कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए। इन फैसलों का मूल उद्देश्य असम राज्य की सांस्कृतिक पहचान और जनसांख्यिकीय संतुलन को सुरक्षित रखना है।
बैठक में 1950 के Immigrants (Expulsion from Assam) Act के तहत एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) मंजूर किया गया। इसके तहत स्थानीय प्रशासन को सीधे कार्रवाई का अधिकार मिलेगा।
नए SOP पर सीएम सरमा ने कहा, “अब हमें हर बार अदालत जाने की जरूरत नहीं है। जिला आयुक्त अब सीधे घुसपैठियों की पहचान कर डिपोर्टेशन या निष्कासन का आदेश जारी कर सकते हैं।”
क्या है नया SOP
असम में लागू किए गए नए SOP के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध घुसपैठिया पाया जाता है, तो उसे अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 10 दिन का समय दिया जाएगा। अगर 10 दिन में वह अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता तो जिला प्रशासन 24 घंटे के भीतर उसके लिए डिपोर्टेशन का आदेश जारी कर सकता है।
अब प्रशासन संदिग्ध घुसपैठियों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करने के लिए 10 दिन की अवधि देगा।
Today Assam has issued a detailed Standard Operation Procedure to detect and deport illegals pic.twitter.com/hL5yMPaLv1
इसके बाद व्यक्ति को या तो होल्डिंग सेंटर में भेजा जाएगा या सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मदद से देश से बाहर खदेड़ दिया जाएगा। यह प्रक्रिया अब विदेशी न्यायाधिकरणों (Foreigners’ Tribunals) को दरकिनार कर सीधे प्रशासनिक स्तर पर की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले को ‘ऐतिहासिक और निर्णायक’ बताया। उन्होंने कहा, “हमारे न्यायाधिकरणों में 82,000 से अधिक मामले लंबित हैं और यह SOP उस प्रणाली को दरकिनार करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह SOP उन लोगों पर भी लागू होगा जिनका नाम NRC में शामिल होने के बाद भी उनकी नागरिकता पर संदेह हो।
सीमा में घुसते पकड़े गए तो 12 घंटे में होगी वापसी
कैबिनेट ने यह भी तय किया कि सभी चिन्हित व्यक्तियों के बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय विवरण को Foreigners Identification Portal पर दर्ज किया जाएगा। इससे भविष्य में निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति सीमा पार करते हुए 12 घंटे के भीतर पकड़ा जाता है, तो उसे बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के तुरंत वापस भेजा जा सकता है।
यह SOP सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा अक्टूबर 2024 में दिए गए उस निर्णय के बाद लागू किया गया है जिसमें कहा गया था कि असम सरकार को 1950 के कानून का उपयोग करने की पूरी आजादी है। इस फैसले को असम में दशकों से चली आ रही घुसपैठ की समस्या से निपटने में एक निर्णायक बदलाव माना जा सकता है।
सीएम हिमंता ने यह भी साफ किया कि विदेशी न्यायाधिकरणों में लंबित 42,000 मामलों की सुनवाई जारी रहेगी। नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का उपयोग उन घुसपैठियों के मामलों में किया जाएगा जिनके खिलाफ न्यायाधिकरणों में कोई मामला लंबित नहीं है।
पुराने आँकड़ों के अनुसार, विदेशी न्यायाधिकरणों में कुल 1,68,000 मामले दर्ज थे। हालाँकि इनमें से कई घुसपैठिए गायब हो चुके हैं, जिनके मामले अभी तक निपटाए नहीं गए हैं। ऐसे में यह स्थिति प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है।
50 फीसदी ट्रैरिफ लादने के बाद अमेरिका अब भारत से संबंध सुधारना चाहता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के लिए उत्सुक हैं। इसके जवाब में पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि वे भी बातचीत को लेकर उत्साहित हैं। राष्ट्पति ट्रंप ने पीएम मोदी के ट्वीट को अपने अकाउंट से शेयर भी किया है।
India and the US are close friends and natural partners. I am confident that our trade negotiations will pave the way for unlocking the limitless potential of the India-US partnership. Our teams are working to conclude these discussions at the earliest. I am also looking forward… pic.twitter.com/3K9hlJxWcl
ट्रंप की बातचीत की पेशकश पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ” भारत और अमेरिका घनिष्ठ मित्र और स्वाभाविक साझेदार हैं। मुझे विश्वास है कि हमारी व्यापार वार्ताएँ भारत-अमेरिका साझेदारी की असीम संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेंगी। हमारी टीमें इन चर्चाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। मैं राष्ट्रपति ट्रम्प से बातचीत के लिए भी उत्सुक हूँ। हम दोनों देशों के लोगों के लिए एक उज्जवल और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘बहुत अच्छा दोस्त’
अमेरिका के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुझे ये घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संबंधी रुकावटों को दूर करने के लिए बातचीत जारी है। मैं आने वाले हफ्तों में अपने अच्छे दोस्त पीएम मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे दोनों महान देशों को निष्कर्ष तक पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं होगी।”
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को ‘खास संबंध’ कहते हुए कहा था कि वे और पीएम मोदी हमेशा दोस्त रहेंगे। मोदी एक महान प्रधानमंत्री हैं।
अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीद को मुद्दा बनाते हुए 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ गई थी। लेकिन पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ सख्ती दिखाने वाले ट्रंप के तेवर नरम दिख रहे हैं। ट्रंप ने कई बार पीएम मोदी को महान प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि वो उनके दोस्त रहेंगे। पीएम मोदी ने भी इसका सकारात्मक जवाब दिया है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर द्विपक्षीय वार्ता लगातार चल रही है। अमेरिकी दल को छठे दौर की वार्ता को लेकर 25 अगस्त को भारत आना था, लेकिन ट्रंप के टैरिफ की घोषणा के बाद ये वार्ता टाल दिया गया। अभी नई तारीख की घोषणा नहीं हुई है। दरअसल कृषि, डेयरी समेत कुछ क्षेत्रों को खोले जाने की अमेरिकी माँग को भारत ने अस्वीकार कर दिया।
नेपाल में भड़की हिंसा के बीच प्रधानमंत्री केपी ओली ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद देश की कमान वहाँ की नेपाली सेना ने संभाली है। सेना ने चेतावनी भी दी कि अगर हिंसा-लूटपात बंद नहीं हुई, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पीएम नरेंद्र मोदी समेत UN के महासचिव ने शांति बनाए रखने की अपील की है। GenZ प्रदर्शनकारियों ने पशुपतिनाथ मंदिर पर भी हमला किया।
इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में हुई थी। इस हिंसा में 22+ लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए।
नेपाली सेना ने संभाली सुरक्षा की कमान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे के बावजूद हिंसा जारी रहने पर, नेपाली सेना ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) रात 10 बजे से देश की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली। सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने देश के नाम अपने संबोधन में प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की।
सेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर हिंसा, लूटपाट और आगजनी बंद नहीं हुई, तो सेना सख्त कार्रवाई करेगी। सेना प्रमुख ने कहा कि कुछ समूह इस स्थिति का अनुचित लाभ उठा रहे हैं और आम नागरिकों तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, हिंसक प्रदर्शनों के दौरान असामाजिक तत्वों ने पशुपतिनाथ मंदिर जैसे ऐतिहासिक और राष्ट्रीय धरोहरों को भी निशाना बनाने की योजना बनाई। तस्वीर में आपको प्रदर्शनकारी मंदिर के गेट पर तोड़फोड़ करते हुए सफाई दिखाई दे रहे होंगे। हालाँकि, सेना की तैनाती से इसे रोका गया।
नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर पर प्रदर्शनकारियों का हमला (फोटो साभार : NDTV)
भारत और यूएन की प्रतिक्रिया
नेपाल की स्थिति पर भारत और संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता व्यक्त की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि नेपाल में हुई हिंसा हृदयविदारक है और इसमें कई युवाओं की जान गई है, जिससे उन्हें बहुत पीड़ा हुई है। उन्होंने नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए, सभी नेपाली भाई-बहनों से शांति बनाए रखने की विनम्र अपील की।
आज हिमाचल प्रदेश और पंजाब के दौरे से लौटने के बाद Cabinet Committee on Security की बैठक में नेपाल के घटनाक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। नेपाल में हुई हिंसा हृदयविदारक है। यह जानकर बहुत पीड़ा हुई कि इसमें अनेक युवाओं की जान गई है। नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि हमारे लिए…
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी इस स्थिति पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे नेपाल में हो रही घटनाओं पर करीब से नजर रख रहे हैं और हिंसा में जानमाल के नुकसान से वे बहुत दुखी हैं। उन्होंने अधिकारियों से मानवाधिकारों का पालन करने और हिंसा को रोकने के लिए संयम बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होने चाहिए, जिसमें जीवन और संपत्ति का सम्मान हो।
I'm closely following the situation in Nepal & I'm deeply saddened by the loss of life.
I urge a thorough investigation, restraint to avoid further escalation of violence & dialogue towards forging a constructive path forward.
बता दें कि नेपाल में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत ‘स्टूडेंट्स फॉर जस्टिस’ नामक एक छात्र संगठन ने की थी। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास और कई राजनेताओं के घरों को आग लगा दी। इस हिंसा में 22 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों से अधिक लोग घायल हुए।
हिंदू धर्म के लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध के बाद चर्चा में आई उत्तर प्रदेश के मेरठ की अब्दुल्ला रेजीडेंसी में अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया गया है। इससे पहले प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर ने कॉलोनी के निर्माण में जाँच की माँग को लेकर मेरठ के जिलाधिकारी को पत्र लिखा था।
300 मीटर अवैध निर्माण ध्वस्त
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्री की शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर डॉ. दीक्षा जोशी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया गया था। पुलिस-प्रशासन और आवास विकास परिषद की टीम ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को मौके पर जाकर जाँच की और करीब 300 मीटर अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया है।
प्रशासन की टीम जमीन से जुड़े 8 बिंदुओं पर केंद्रित जाँच कर रही थी जिसमें जमीन की प्रकृति, कब्जा और मानचित्र जैसी चीजें शामिल थी। टीम द्वारा जब इसकी जाँच की गई तो मानचित्र के मुकाबले करीब 300 मीटर जमीन पर कब्जा पाया गया था। जिसके बाद इस पर बनी बाउंड्रीवॉल को गिरा दिया गया।
बताया जा रहा है कि इस कॉलोनी के लिए 22,000 वर्ग मीटर के मानचित्र को ही स्वीकृत किया गया था लेकिन बिल्डर ने 300 मीटर अतिरिक्त जमीन पर कब्जा जमा लिया था। कॉलोनी के निर्माण की जाँच कर रही इस टीम में सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और आवास विकास के एसई राजीव कुमार शामिल हैं। वहीं, अधिकारियों ने जाँच पूरी होने तक कुछ ही कहने से इनकार कर दिया है।
गैंगस्टर की जमीन पर बनी कॉलोनी में हिंदुओं की नो-एंट्री
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इस कॉलोनी का निर्माण जेल में बंद गैंगस्टर शारिक की जमीन पर किया गया था। इस कॉलोनी में एक मस्जिद का निर्माण भी करा दिया गया था। मंत्री तोमर ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अब्दुल्ला रेजीडेंसी पिछले 10 सालों से विकसित की जा रही है, जिसमें केवल मुस्लिम लोगों को बसाने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कॉलोनी में बनी मस्जिद का नक्शा वैध तरीके से स्वीकृत हुआ है या नहीं। साथ ही गैंगस्टर शारिक की जमीन शामिल होने की बात पर कहा कि इसकी गहराई से जाँच की जाएगी। तोमर ने कहा कि धार्मिक आधार पर बाँटने का प्रयास किसी भी सूरत में सफल नहीं हो पाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल्ला रेजीडेंसी में 90 प्रतिशत प्लॉट मुस्लिम लोगों को बेचे गए हैं। कॉलोनी में कुल 75 प्लॉट हैं, जिनमें सिर्फ 4 प्लॉट हिंदुओं के हैं। इस कॉलोनी के प्रोजेक्ट के दो पार्टनर हैं, मेजर जनरल जावेद इकबाल और महेंद्र गुप्ता। इस आरोपों के बाद ही मंत्री ने जाँच के लिए डीएम को पत्र लिखा था।
नेपाल में सबसे बड़े नागरिक आंदोलन ने सरकार को गिरा दिया है। देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति इस्तीफा दे चुके हैं। अब नेपाल को चलाने के लिए अपने अगले लीडर की जरूरत है। इस पूरे GenZ प्रदर्शन के पीछे दो किरदार सामने आ रहे हैं। पहला है काठमांडू का मेयर बालेन शाह, जिसे प्रदर्शनकारी अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। वहीं, दूसरा नाम प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले हामी नेपाल का फाउंडर सुदन गुरुंग का है।
ये दोनों नाम नेपाल में GenZ प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आए हैं। सुदन गुरुंग, जिसने पूरे प्रदर्शन का आयोजित किया। वहीं बालेन शाह, जिसने इन प्रदर्शनकारियों को भड़काया। तो आइए जानते हैं आखिर कौन है बालेन शाह और सुदन गुरुंग।
बालेन शाह की GenZ प्रदर्शन में भूमिका
बालेन शाह एक रैपर और काठमांडू का मेयर है। शाह ने ही नेपाल के युवाओं को बरगलाया और देश में सरकार के विरोध में खड़ा करने का काम किया। यह उसकी सोशल मीडिया पर सक्रियता से साफ नजर आता है। जहाँ युवा उसे अगला प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।
तो ये शुरू होता हे रविवार (07 सितंबर 2025) से जब बालेन शाह ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए GenZ प्रदर्शन का समर्थन किया। पोस्ट में लिखा, “कल स्पष्ट रूप से GenZ का स्वतःस्फूर्त आयोजन है, वे 28 वर्ष से कम आयु के हैं, जिसके कारण मैं अभी भी बड़ा दिखता हूँ। मैं उनकी इच्छाशक्ति, उद्देश्य और सोच को भी समझना चाहता हूँ।”
बालेन शाह के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट
आगे लिखा, “कल होने वाली इस स्वतःस्फूर्त रैली में किसी भी दल, नेता, कार्यकर्ता, सांसद, बहुला, इंजीनियर को अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए होशियार नहीं होना चाहिए। मैं आयु सीमा के कारण नहीं जा सकता लेकिन उन्हें समझना जरूरी है, मेरा पूरा समर्थन है। प्रिय GenZ, मुझे बताइए कि आप कैसा देश देखना चाहते हैं?”
इसके बाद सोमवार (08 सितंबर 2025) को नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत 7 से अधिक शहरों में 13 से 28 साल की उम्र के युवा सोशल मीडिया ऐप के बैन के खिलाफ सड़कों पर उतरते हैं। सोशल मीडिया ऐप के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब पीएम केपी ओली के इस्तीफे की माँग तक पहुँच जाता है। इस हिंसक प्रदर्शन में 19 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोग घायल हो जाते हैं।
लेकिन यह प्रदर्शन तब भी नहीं थमता बल्कि और अधिक हिंसा की ओर बढ़ जाता है। प्रदर्शन के दूसरे दिन मंगलवार (09 सितंबर 2025) को प्रधानमंत्री केपी ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल तक इस्तीफा दे देते हैं। अब बारी आती है बालेन शाह की। अब बालेन को प्रधानमंत्री बनाने की माँग बढ़ती चली जाती है।
बालेन शाह के फेसबुक पोस्ट पर ‘We want you as PM’ और ‘Please take Lead Balen’ जैसे कमेंट बढ़ने लगते हैं।
बालेन शाह की फेसबुक पोस्ट पर नेपाली युवाओं के कमेंट
इसके बाद नेपाल की स्थानीय मीडिया में भी बालेन शाह को नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनाने की माँग तेज होने लगती हैं। वहीं बालेन शाह भी GenZ प्रदर्शनकारियों को देश की संपत्ति को नुकसान ना पहुँचाने की अपील करते हैं।
बालेन शाह के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट
बालेन शाह ने लिखा, “प्लीज GenZ, देश तुम्हारे हाथ में है। तुम लोग इसे संभाल लोगे। अब, चाहे कितना भी नुकसान हो, तुम हमारे ही रहोगे। अब घर वापस जाओ।”
बालेन शाह के अमेरिका से कनेक्शन
बालेन शाह यूँ तो काठमांडू के मेयर हैं लेकिन अधिकांश मेयर से विपरीत उनकी पहुँच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैली है। बालेन शाह के अमेरिका से सीधे कनेक्शन सामने आए हैं। टाइम मैगजीन 2023 के टॉप-100 लोगों में बालेन शाह का नाम है। इसके अलावा द न्यूयॉर्क टाइम्स में मीडिया कवरेज भी मिल चुकी है।
इतना ही नहीं बालेन का नेपाल में अमेरिकी दूतावास में आना-जाना लगा रहता है। साल 2022 में पहली बार अमेरिकी राजदूत आर थॉम्पसन से मुलाकात की, जिनकी तस्वीरें खुद राजदूत ने अपने एक्स अकाउंट पर शेयर की।
Great introductory meeting with Mayor of Kathmandu @ShahBalen yesterday. I particularly enjoyed discussing the ways we can work together on cultural preservation! pic.twitter.com/brEDyR7kq4
— U.S. Ambassador Dean R. Thompson (@USAmbNepal) December 2, 2022
इसके बाद साल 2024 में भी बालेन शाह की अमेरिकी राजदूत आर थॉम्पसन से मिलने की खबरें सामने आईं। इस बैठक में अमेरिकी राजदूत ने बालेन शाह को अमेरिका आने का भी न्यौता दिया था।
ओली सरकार के विरोध में बालेन शाह के गाने
बालेन शाह को राजनीति में आने से पहले रैपर के तौर पर जाना जाता था। उनके गाने के बोल अक्सर नेपाल की ओली सरकार की आलोचना को लेकर लिखे जाते रहे हैं। बालेन शाह के ही एक गाने के बोल हैं- “देश की रक्षा करने वाले सब मूर्ख हैं। सारे नेता चोर हैं, देश को लूटकर खा रहे हैं।”
बालेन शाह के गानों ने ही नेपाल के GenZ को सरकार के खिलाफ खड़ा करने का काम किया। खासकर बालेन का गाना ‘बलिदान’ से नेपाल के युवा देश की राजनीति के विरोध में खड़े हुए है। हालिया GenZ प्रदर्शन में भी बालने ने इस गाने को फेसबुक पर शेयर किया।
इस गाने को फेसबुक पर शेयर करते हुए बालेन शाह ने लिखा, “सरकार मुझे बोलने दे।”
मेयर का चुनाव लड़ते हुए बालेन शाह का विवादों में रहा, जब शाह ने काले ब्लेजर पर नेपाल का झंडा लगाते हुए चुनावी अभियान शुरू किया। इस मामले में बालेन के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। इसके बावजूद शाह की लोकप्रियता युवाओं में बढ़ती गई। युवा भी शाह के सरकार विरोधी एजेंडे में फँसते चले गए, जिसका नतीजा आज नेपाल की सरकार गिराकर सामने आया है।
बालेन शाह भी भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में आगे रहे हैं। याद हो कि आदिपुरुष फिल्म की रिलीज के समय बालेन शाह ने न सिर्फ इस फिल्म का विरोध किया, बल्कि काठमांडू के सिनेमाघरों में भारतीय फिल्मों की रिलीज तक पर रोक लगा दी थी। हालाँकि नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बालेन को पीछे हटना पड़ा था। अब इस समय GenZ के प्रदर्शनों को भी बालेन शाह खूब भुना रहे हैं।
‘हामी नेपाल’ के सुदन गुरुंग ने ही GenZ प्रदर्शन किया प्लान
नेपाल में GenZ प्रदर्शन में दूसरा नाम 36 साल के सुदन गुरुंग का है। इस पूरे प्रदर्शन का आयोजनकर्ता। खुद को NGO ‘हामी नेपाल’ का फाउंडर बताने वाले सुदन गुरुंग ने ही देश के 28 साल से कम उम्र के युवाओं को प्रदर्शन के लिए एकत्रित किया। यहाँ तक कि युवाओं को प्रदर्शन करना भी गुरुंग ने ही सिखाया।
इंस्टाग्राम पर ‘How to Protest’ वीडियो शेयर कर नेपाल के युवाओं को भड़काया। वीडियो में गुरुंग ‘शांतिप्रिय’ प्रदर्शन की बात कहता है लेकिन साथ में यह भी कहता है कि अगर जरूरत पड़े तो उग्र होना जरूरी है।
नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने जो पोस्टर लिए थे उनपर भी हामी नेपाल का ही नाम था। हामी नेपाल ने ही सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक मोबाइलाइजेशन करवाया। हामी नेपाल ने भीड़ इकट्ठा करने के लिए डिस्कोर्ड एप का इस्तेमाल किया जहाँ ग्रुप चैट में प्रदर्शन के सारे निर्देश दिए जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों को स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर आने के लिए कहा गया।
इन ग्रुप चैट की छानबीन में पता लगा कि कहीं बांग्लादेश जैसे सत्ता उखाड़ फेंकने की बात की तो कोई हिंसा की ज्यादा से ज्यादा तस्वीरें इंटरनेशनल मीडिया को भेजने की बात कहता दिखा। ग्रुप में पेट्रोल बम बनाने के तरीके भी बताए गए। लोगों से अनुरोध किया जा रहा है कि वो हत्यारा सरकार लिखा हुआ डीपी लगाए।
इन ग्रुप में नेपाल पुलिस और सैन्य बल की तस्वीरों को शार्प शूटर बताकर शेयर किया गया। इस ग्रुप चैट में लगातार हिंसा और नरसंहार तक की बातें हुईं। कुछ-कुछ वैसी ही जैसा बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के समय देखा गया था।
प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाला ‘हामी नेपाल’ का रजिस्ट्रेशन साल 2020 में हुआ, जिसमें सुदन गुरुंग को सोशल एक्टिविस्ट बताया गया। नेपाल में GenZ प्रदर्शन से पहले भी ‘हामी नेपाल’ का नाम बाढ़ राहत कार्य में ही सामने आया है। लेकिन सरकार के खिलाफ इतना बड़ा प्रदर्शन करने में ‘हामी नेपाल’ का हाथ आना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
हामी नेपाल को विदेशी फंडिंग
सुदन गुरुंग के NGO ‘हामी नेपाल’ को कोका-कोला, वाइबर, गोल्डस्टार और मलबरी होटल्स जैसे ब्रांडों से 20 करोड़ नेपाली रुपए की वित्तीय सहायता मिली है। ये सभी विदेशी ब्रांड्स हैं। NGO ने अपनी वेबसाइट में इसकी जानकारी भी दी है।
ये वही NGO है, जिसने साल 2025 की शुरुआत में भारत के ओडिशा में एक इंजीनियरिंग कॉलेज में नेपाल की छात्रा की मौत के बाद जमकर बवाल काटा था। यहाँ तक कि नेपाल में भी भारत विरोधी भावनाओं को खूब भड़काया था। सुदन गुरुंग, जो खुद को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में दुनिया के सामने दिखाता है। वो इस पूरे GenZ प्रदर्शन में युवाओं को भड़काने में सबसे आगे रहता है। यहाँ तक की युवाओं को बांग्लादेश और श्रीलंका का उदाहरण देते हुए देश-विरोधी गाइडेंस भी दी जाती है।
नेपाल में क्या खेल खेलने वाले हैं बालेन शाह और सुदन गुरुंग
कुल मिलाकर देखा जाए तो सुदन गुरुंग और बालेन शाह नेपाल में छिड़े हिंसक प्रदर्शन और सरकार गिराने में प्रमुख जिम्मेदार व्यक्तियों के रूप में सामने आए हैं। लेकिन इनकी प्रवृत्ति न सिर्फ भारत विरोधी है, बल्कि मूल रूप से नेपाल विरोधी भी है। सुदन गुरुंग विदेशी पैसों के दम पर नेपाल की सरकार, नेपाल के लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त कर चुका है, तो अब उसका संगठन पश्चिमी संबंधों के हिमायती बालेन शाह का नाम देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद के लिए उछाल रहा है।
ऐसे में बालेन शाह और सुदन गुरुंग का ये गठबंधन कहीं न कहीं बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है। आपको याद हो कि कुछ समय पहले बांग्लादेश में भी इसी तरह लोकतांत्रिक रूप से देश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता को उखाड़ दिया गया था। उनकी जगह पर पश्चिमी देशों के पपेट मोहम्मद यूनुस को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया था। वहाँ भी युवा खून का इस्तेमाल पश्चिमी देशों ने बांग्लादेश को अपनी जकड़ में लेने के लिए किया था। ठीक ऐसा ही काम नेपाल में भी पश्चिमी देश कर रहे हैं, जो NGO की आड़ में अंधाधुंध पैसा झोंक कर नेपाल की सत्ता को गिरा चुके हैं।
आने वाले समय में बालेन-गुरुंग की ये जोड़ी नेपाल को किस दिशा में लेकर जाती है, ये देखने वाली बात होगी। इस पर भारत और नेपाल के लोगों की ही नहीं, चीन-रूस जैसी महाशक्तियों की भी नजर है। चूँकि नेपाल भारत और चीन से सटा हुआ देश है। इस तरह नेपाल में कुछ भी बदलाव होता है, तो इससे प्रभावित भारत और चीन भी होंगे। ऐसे में ये 2 क्षेत्रीय महाशक्तियाँ क्या कदम उठाती हैं, इस पर भी दुनिया की नजर बनी रहेगी।