Homeदेश-समाजCM हिमंता ने जिसे बताया 'फ्लड जिहाद', उसके पीछे सच में था महबूब-उल-हक का...

CM हिमंता ने जिसे बताया ‘फ्लड जिहाद’, उसके पीछे सच में था महबूब-उल-हक का हाथ: SC जाँच में खुलासा- जंगल की जमीन कब्जा कर बनी USTM, पेड़-पहाड़ काटने से आई बाढ़

CEC ने USTM पर ₹150.35 करोड़ का जुर्माना लगाया है। साथ ही, 25 हेक्टेयर जमीन बहाली और खनन रोकने का आदेश दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द ही सुनवाई करेगा।

असम के गुवाहाटी में 5 अगस्त 2024 को भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ आ गई थी। पहाड़ी इलाकों से आया पानी जराबात और मालीगाँव जैसे निचले इलाकों में भर गया, जिससे सड़कें डूब गईं, ट्रैफिक रुक गया और भारी नुकसान हुआ।

उस समय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मेघालय की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (USTM) पर ‘जमीन कब्जाने’ का आरोप लगाते हुए इसे ‘फ्लड जिहाद’ कहा था। इस बयान पर काफी विवाद हुआ।

USTM के चांसलर महबूब-उल-हक ने तब दावा किया था कि यूनिवर्सिटी पूरी तरह वैध है और मेघालय सरकार से सभी मंजूरी ली गई है। उन्होंने गुवाहाटी की खराब ड्रेनेज व्यवस्था को बाढ़ का असली कारण बताया था।

लेकिन अब, एक साल बाद, सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की जाँच में USTM पर गंभीर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। जाँच में पाया गया कि यूनिवर्सिटी ने बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा किया, पहाड़ काटे और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया। इन कामों की वजह से ही गुवाहाटी के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी।

USTM एक निजी संस्था है, जिसकी स्थापना 2008 में एजुकेशन रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन ने की थी। यह मेघालय के री-भोई जिले के 9th माइल इलाके में, असम की सीमा से लगे जराबात के पास स्थित है।

असम सरकार लंबे समय से इस यूनिवर्सिटी पर जंगल काटने और पहाड़ नुकसान पहुँचाने के आरोप लगाती रही है। असम में रहने वाले एक युवक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर री-भोई और ईस्ट खासी हिल्स (मेघालय) में हो रहे पर्यावरण नुकसान और उसका असर असम पर पड़ने की शिकायत की थी। मई 2025 में असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि CEC इस मामले की निगरानी और जाँच करे।

USTM की CEC जाँच में क्या पाया गया?

यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय (USTM) का कैंपस लगभग 100 एकड़ पहाड़ी इलाके में फैला हुआ है। यहाँ अकादमिक इमारतों के साथ-साथ पीए संगमा मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, ऑडिटोरियम और अन्य ढाँचे बनाए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, 2011 से अब तक यूनिवर्सिटी ने कम से कम 5 पहाड़ों को समतल कर दिया ताकि निर्माण के लिए जमीन तैयार हो सके। खास बात यह है कि ज्यादातर कटाई मेघालय की तरफ नहीं बल्कि गुवाहाटी की दिशा वाली ढलानों पर की गई।

पहाड़ों और प्राकृतिक अवरोधों को काटने से जो पहले बारिश के पानी की रफ्तार को धीमा करते थे, अब पानी सीधे और तेजी से नीचे की ओर बहने लगा। इसका नतीजा यह हुआ कि मानसून का पानी सीधे उमखराह और बासिष्ठा नदियों में पहुँचने लगा, जो आगे गुवाहाटी में बाढ़ की स्थिति पैदा करता है।

भारी जंगल कटाई और खुदाई से मिट्टी ढीली हो गई, जिससे बड़े पैमाने पर कटाव और भूस्खलन शुरू हो गए। इसके कारण नदियों में भारी मात्रा में मिट्टी जमा होने लगी।

सबसे अहम बात यह भी है कि जिन इलाकों में यह खुदाई और पहाड़ काटे गए, वह ‘डिम्ड फॉरेस्ट’ क्षेत्र थे, जिन्हें फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 के तहत सुरक्षित माना जाता है। यहाँ प्राकृतिक ढलान और पेड़-पौधे बरसात के पानी को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी थे।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी (CEC) की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि केवल मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने भी पहले कई बार जराबात इलाके को बाढ़ का बड़ा कारण बताते हुए सीमा पार हो रही जंगल कटाई पर चिंता जताई थी।

USTM द्वारा बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ और पर्यावरणीय क्षति

सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की जाँच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय (USTM) ने बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने लगभग 25 हेक्टेयर ‘डिम्ड फॉरेस्ट’ जमीन पर बिना अनुमति कब्जा कर लिया, जिसमें से 15.71 हेक्टेयर क्षेत्र पर निर्माण हुआ है। इसमें से 13.62 हेक्टेयर यानी 87 प्रतिशत जमीन असल में जंगल थी।

इसी तरह, पीए संगमा मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के लिए तय 12.13 हेक्टेयर जमीन में से करीब 7.64 हेक्टेयर (63%) को तोड़ दिया गया। बाकी जमीन को 2021 तक जंगल माना जाता था लेकिन उस पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया, जो 1973 के मेघालय फॉरेस्ट रेगुलेशन का सीधा उल्लंघन है।

जाँच में यह भी पाया गया कि 2017 से लगातार बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और खुदाई की गई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के आदेशों के बावजूद यूनिवर्सिटी ने कभी भी क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) नहीं किया।

स्थिति यह है कि यूनिवर्सिटी का करीब 93 प्रतिशत हिस्सा अब नष्ट, खुदाई की गई और अवैध रूप से कब्जाई गई जंगल की जमीन है, जिसे CEC ने ‘भयानक पर्यावरणीय आपदा’ बताया है।

रिपोर्ट के अनुसार,असम की तरफ ढलानों पर बड़े पैमाने पर मिट्टी काटी गई और कृत्रिम नाले बनाए गए, जिससे पानी का बहाव और तेज हो गया। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने कभी भी पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) नहीं कराया। इतना ही नहीं, री-भोई जिले में अवैध खनन भी जारी है।

कुल मिलाकर, CEC ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 100 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में जंगल और पहाड़ काटने से गुवाहाटी में 2024 की बाढ़ और भी विनाशकारी हो गई, यहाँ तक कि सात किलोमीटर दूर तक के इलाके भी पानी में डूब गए।

CEC ने USTM पर भारी जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय (USTM) पर कड़ा कदम उठाते हुए कुल ₹150.35 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना जंगल की जमीन के अवैध इस्तेमाल, पेड़ कटाई, पर्यावरण क्षतिपूर्ति और बहाली की लागत को ध्यान में रखकर लगाया गया है, जिसकी गणना 2017 से हुई उल्लंघनों के आधार पर की गई है।

CEC ने आदेश दिया है कि 25 हेक्टेयर क्षेत्र को एक साल के भीतर प्राकृतिक जंगल में बहाल किया जाए और वहां बने सभी अवैध ढाँचे हटाए जाएँ। साथ ही, बराबर क्षेत्रफल की गैर-जंगल जमीन पर क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) करने का भी निर्देश दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि री-भोई जिले में फिलहाल चल रहे सभी अवैध खनन, पत्थर तोड़ाई और क्रशिंग कार्यों को तुरंत रोका जाए, जब तक कि इस पर व्यापक समीक्षा पूरी न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट अब जल्द ही इस पूरे मामले की सुनवाई करेगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लंबे समय से USTM और उसके संस्थापक महबूब-उल-हक की अवैध गतिविधियों पर सवाल उठाते रहे हैं। बता दें कि 22 फरवरी 2025 को असम पुलिस ने महबूब-उल-हक को गुवाहाटी स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था।

उन पर आरोप था कि उन्होंने श्रीभूमि जिले के एक परीक्षा केंद्र में सीबीएसई की कक्षा 12वीं की फिजिक्स परीक्षा के दौरान गड़बड़ी और अनियमितताएँ की। हालांकि, कांग्रेस और अन्य ‘लिबरल’ समूहों ने इस गिरफ्तारी की आलोचना की थी और इसे राजनीतिक तौर पर निशाना साधना बताया था। बाद में महबूब-उल-हक को जमानत मिल गई।


(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में संघमित्रा ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है)

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Sanghamitra
Sanghamitra
reader, writer, dreamer, no one

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

PM सूर्य घर योजना में लखनऊ बना देश का नंबर-1 सोलर जिला, नागपुर-सूरत को पछाड़ा: समझें कई श्रेणियों में शीर्ष स्थान पाकर कैसे UP...

पीएम सूर्य घर पुरस्कार समारोह में उत्तर प्रदेश ने विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल कर अपना परचम लहराया है

अमेरिका-ईरान शांति समझौते से भारत को फायदा ही फायदा, कच्चे तेल की कम कीमतों से मिलेगी महँगाई से राहत-मजबूत होगा रुपया: समझें विकास की...

अमेरिका-ईरान शांति समझौता भारत के लिए हर मोर्चे पर एक 'मास्टरस्ट्रोक' साबित होने जा रहा है। भारत के लिए साल 2026 की यह सबसे सकारात्मक खबर है।
- विज्ञापन -