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ऑपरेशन सिंदूर से डरे जैश-हिजबुल आतंकी, बदलने लगे अपना ठिकाना: PAK एजेंसियाँ कर रहीं शिफ्टिंग में मदद, अफगान बॉर्डर पर बनाया ट्रेनिंग सेंटर

जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर से अपना ट्रेनिंग कैंप मंसेहरा जिले के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में शिफ्ट किया है। वहीं हिजबुल मुजाहिदीन ने लोअर दिर जिले के बंदाई इलाके में नया ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया है, जिसका नाम 'HM 313' रखा गया है।

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन अपने ठिकानों को बदल रहे हैं। अब ये संगठन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से हटकर खैबर पख्तूनख्वा इलाके में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस काम में पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियाँ भी इनकी मदद कर रही हैं।

खैबर पख्तूनख्वा का इलाका पहाड़ी और दुर्गम है। इससे वहाँ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को अंजाम देना मुश्किल होता है। यह क्षेत्र अफगानिस्तान की सीमा के पास है।ऐसे में यह इलाका आतंकियों के लिए एक ‘सुरक्षित पनाहगाह’ बन जाता है। इसीलिए आतंकी इस इलाके में अब अपना जखीरा तैयार करने की सोच रहे हैं।

जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर से अपना ट्रेनिंग कैंप मंसेहरा जिले के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में शिफ्ट किया है। वहीं हिजबुल मुजाहिदीन ने लोअर दिर जिले के बंदाई इलाके में नया ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया है, जिसका नाम ‘HM 313’ रखा गया है। इन जगहों पर नए लड़ाकों को तैयार करने के साथ-साथ कट्टरपंथी सोच फैलाने का काम भी हो रहा है।

313 नाम बद्र गजवा (एक बड़ा इस्लामी युद्ध) और अलकायदा की ब्रिगेड 313 को एक तरह से श्रद्धांजलि है। ये दुनिया में जिहादी को सही ठहराने के हिज़्ब के इरादे को दर्शाता है।

14 सितंबर 2025 को जैश ने गढ़ी हबीबुल्लाह में एक धार्मिक सभा रखी थी। खास बात ये है कि इसमें हथियारबंद लोगों के साथ पाकिस्तान की स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। इस सभा के जरिए युवाओं को आतंकी संगठन से जोड़ने की कोशिश की गई।

25 सितंबर को जैश-ए-मोहम्मद पेशावर के मरकज शहीद मकसूदाबाद में ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए मसूद अजहर के भाई यूसुफ अजहर की याद में एक भर्ती अभियान आयोजित करने की योजना बना रहा है।

यहीं पर संगठन के लिए एक नया नाम ‘अल-मुराबितुन’ की घोषणा भी की जा सकती है। ‘अल-मुराबितुन’ का मतलब इस्लाम की धरती के रक्षक है। ये पश्चिमी अफ्रीका के अलकायदा समूह जैसा होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इन गतिविधियों में पाकिस्तान की सेना, पुलिस और कुछ राजनीतिक संगठन भी शामिल हैं और पूरी मदद कर रहे हैं। हाल ही में जैश के एक कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी ने सार्वजनिक रूप से यह माना है कि ऑपरेशन सिंदूर में मसूद अजहर के परिवार के कई लोग मारे गए हैं। इससे आतंकी संगठन को काफी नुकसान हुआ है।

ऑपरेशन सिंदूर से डरे आतंकी

जम्मू-कश्मीर में पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने अपनी पूरी तैयारी के साथ 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर की एक बड़ी और सटीक कार्रवाई की।

इस कार्रवाई के तहत पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। सेना ने बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद समेत कई आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी कार्रवाई की।

इसके बाद जैश, हिजबुल और लश्कर-ए-तैयबा समेत पाकिस्तान में बसे कई आतंकी संगठनों को तगड़ा नुकसान पहुँचा। साथ ही उन्हें ये संदेश भी मिला कि भारतीय सेना के निशाने पर वो कभी भी आ सकते हैं।

इस ऑपरेशन के बाद ही आतंकियों ने अपने ठिकानों को भारत की रेंज से दूर शिफ्ट करने का फैसला किया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से हटकर अब वे खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में शरण ले रहे हैं और इसमें पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों की भूमिका भी सामने आ रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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