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पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वक्त रोया रोना, अब मैच का हल्ला देख उगल रही जहर: प्रोपेगेंडा ‘बीबी’ आरफा खानम शेरवानी की ‘मौकापरस्ती’ फिर हुई एक्सपोज

आज के दौर में सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्से ऐसे हो गए हैं, जहाँ राष्ट्र विरोधी तत्वों को खुला मैदान मिला हुआ है। इनमें से एक प्रमुख नाम है आरफा खानम शेरवानी का। खुद को अवॉर्ड-विनिंग जर्नलिस्ट बताने वाली यह महिला ‘द वायर’ नामक वामपंथी प्रोपेगैंडा पोर्टल की सीनियर एडिटर है। लेकिन असलियत में वह इस्लामी कट्टरपंथ और वामपंथी विचारधारा के मिश्रण से भारत को कमजोर करने का काम करती नजर आती है।

आरफा खानम शेरवानी की मिक्स्ड विचारधारा हमेशा से राष्ट्र विरोधी रही है, जो देश की एकता, हिंदू संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाती है। इसी तरह इसकी इस्लामी कट्टरपंथ भी भारत की संप्रभुता के खिलाफ काम करता है।

आरफा खानम शेरवानी इन दोनों का ऐसा कॉकटेल है, जो हर मौके पर भारत विरोधी ट्वीट्स से सुर्खियाँ बटोरती है। शेरवानी की प्रोफाइल से साफ दिखता है कि वह भारत सरकार, हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ लगातार जहर उगलती रहती है।

आरफा खानम शेरवानी ने रविवार (14 सितंबर 2025) को एक्स पर लिखा, “ध्यान से सुनिए, उन दो गुजरातियों के लिए हर भावना, हर धर्म से बड़ा धंधा है। अब समझना और सहना आसान होगा।” यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के संदर्भ में है, जहाँ वह क्रिकेट प्रशासकों की आड़ में देश के शीर्ष नेताओं पर हमला बोल रही है।

पहले वह मैच न खेलने पर खेल भावना की दुहाई दे रही थीं, लेकिन मैच होने पर गुजरातियों को निशाना बनाया। कमेंट बॉक्स में उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स हैं, जो पाकिस्तान समर्थन और युद्ध विरोधी हैं। यह ट्वीट न सिर्फ भारत विरोधी है, बल्कि गुजराती समुदाय को टारगेट करके हिंदू विभाजन की कोशिश है।

आरफा की एक्स प्रोफाइल (@khanumarfa) को स्कैन करें तो दर्जनों ऐसे ट्वीट्स मिलते हैं, जो भारत सरकार और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। ऐसा ही विवाद 24 अप्रैल 2021 का है, जब उसने सीधे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखा। यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच आया, जब पूरा देश पाकिस्तान को दुश्मन मान रहा था। राष्ट्रवादी विचार से यह खुला तौर पर देशद्रोह है, क्योंकि पाकिस्तान ने हमेशा भारत पर आतंकी हमले करवाए हैं। आरफा का यह स्टैंड साफ करता है कि वह पाकिस्तान की तरफदारी करती हैं।

आरफा के ट्वीट का वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट

फिर आया 2025 का ऑपरेशन सिंदूर। यह भारतीय सेना का एक सफल मिशन था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का बदला लेते हुए पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। 28 निर्दोषों की मौत, जिनमें 24 हिंदू थे, का बदला लिया गया। लेकिन आरफा ने एक्स पर विलाप शुरू कर दिया: “Peace is Patriotism. War is destruction. Borders don’t bleed – people do. Stop the war. Deescalate Now.” यह ट्वीट पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का आईना है।

यही नहीं, एक पैनल डिस्कशन में आरफा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए लोग आतंकी नहीं, बल्कि आम नागरिक थे। उसने ऑपरेशन के नाम ‘सिंदूर’ पर भी उंगली उठाई, जो हिंदू परंपरा का प्रतीक है। पाकिस्तान के लोगों को ‘परेशान’ बताकर उसने दुश्मन देश का एजेंडा चलाया।

शिवलिंग को डस्टबिन बताने से गौमूत्र पर तंज तक, हिंदू विरोध से भरी है X टाइम लाइन

आरफा की प्रोफाइल में हिंदू विरोधी कंटेंट भरा पड़ा है। 1 अगस्त 2024 को उन्होंने ‘बाहुबली’ फिल्म का आइकॉनिक पोस्टर शेयर किया, जहां प्रभास शिवलिंग उठा रहा है, लेकिन उन्होंने शिवलिंग को डस्टबिन से रिप्लेस कर दिया। कैप्शन था ‘विजन 2047’। यह हिंदू धर्म का अपमान है, जिसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज हुई। राष्ट्रवादी नजरिए से, यह हिंदुत्व को कुचलने की कोशिश है। पहले भी उन्होंने भगवान राम को दलितों पर अत्याचार करने वाला कार्टून शेयर किया। ‘गौमूत्र’ और ‘गोबर’ पर तंज कसते हुए ट्वीट्स किए, जो पुलवामा हमलावर आदिल डार के शब्दों से प्रेरित हैं।

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 9 जून 2024 को रियासी में 2 साल के हिंदू बच्चे टीटू की हत्या पर आरफा चुप रहीं। लेकिन 2015 में सीरिया के मुस्लिम बच्चे एलन कुर्दी और 2016 में रोहिंग्या बच्चे की मौत पर मातम मचाया। दो दिन बाद भी टीटू पर कोई ट्वीट नहीं, बल्कि उसने पूछा कि संसद में एक भी मुस्लिम सांसद या मंत्री क्यों नहीं? यह ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की थ्योरी है, जहाँ हिंदू पीड़ितों की अनदेखी होती है।

इसने 2022 में PFI जैसे इस्लामी संगठनों के इवेंट्स में स्पीच दी, जहाँ हिंदुत्व को खतरा बताया। 2023 में सिद्दीक कप्पन की रिहाई पर मुस्लिम विक्टिम कार्ड खेला था।

इन सब से साफ है कि आरफा हिंदू संस्कृति को नीचा दिखाती हैं, जबकि इस्लामी कट्टरता को बचाती हैं। राष्ट्रवादी विचार से, यह हिंदू फोबिया है, जो देश की सांस्कृतिक एकता को तोड़ता है।

इस्लामी प्रोपेगैंडा की प्रोपेगेंडा मशीनरी का हिस्सा है आरफा

आरफा खानम शेरवानी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की पूर्व छात्रा हैं, जो खुद एक ऐसा संस्थान है जहाँ से कई बार कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिलता देखा गया है।

एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए आरफा ने कई बार ट्वीट किया है कि मुस्लिम समुदाय को उनके जैसे लीडर की जरूरत है। लेकिन सर सैयद अहमद खान वही शख्स थे, जिसने ‘टू नेशन थ्योरी’ का विचार दिया था, जिसके चलते भारत का बँटवारा हुआ। आरफा का यह स्टैंड साफ दिखाता है कि वह भारत की एकता से ज्यादा इस्लामी अलगाववाद को महत्व देती हैं।

आरफा खानम शेरवानी की प्रोफाइल स्कैन करने पर साफ है कि वह मौका परस्त हैं। कभी पाकिस्तान जिंदाबाद, कभी ऑपरेशन सिंदूर पर शांति की दुहाई, कभी हिंदू प्रतीकों का अपमान।

ऑपइंडिया ने उसके कई प्रोपेगैंडा को एक्सपोज किया है, जो अभी भी जारी है। राष्ट्रवादी भारत को ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए। सरकार को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि देश की एकता बनी रहे। आरफा जैसे लोग ‘पोस्टर गर्ल’ नहीं, बल्कि प्रोपेगैंडा मशीन हैं, जो वामपंथी विचारधारा और इस्लामी कट्टरपंथ के जरिए भारत को कमजोर करना चाहती हैं। समय है कि सच्चाई सामने आए और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो।

अमेरिका में 17 सितंबर को TikTok बैन होगा खत्म, ट्रंप बोले- चीन पर निर्भर आगे का रास्ता: अब तक 3 बार बढ़ चुका है प्रतिबंध, US को है जासूसी का शक

अमेरिका में सोशल मीडिया टिकटॉक बैन है। इस पर बैन की समयसीमा 17 सितंबर 2025 को पूरी हो रही है। इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने अहम बयान दिया है। न्यू जर्सी में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह समझौते के लिए समयसीमा को फिर से बढ़ाएँगे या नहीं क्योंकि यह पूरी तरह चीन पर निर्भर करता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हो भी सकता है और नहीं भी। हम अभी TikTok पर बातचीत कर रहे हैं। हम इसे खत्म होने दे सकते हैं, या नहीं… मुझे नहीं पता। यह चीन पर निर्भर करता है।”

3 बार बढ़ चुकी है टिकटॉक बैन की समयसीमा

टिकटॉक पर बैन की समयसीमा 17 सितंबर 2025 को खत्म हो रही है। इसे अगर आगे बढ़ाया जाता है, तो ये चौथी बार होगी। अमेरिका ने टिकटॉक की कंपनी बाइटडांस को जनवरी 2025 तक इस लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बेचने या बंद करने का समय दिया था।

अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनके पास ऐप के लिए अमेरिकी खरीदार हैं। अगर चीन कंपनी को बेचने के लिए तैयार है, तो वह समय सीमा को और बढ़ा सकते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने TikTok की मूल कंपनी बाइटडांस को धमकी दी थी कि अगर टिकटॉक को अमेरिका के हाथों नहीं बेचा गया, तो वे अमेरिका में इसपर प्रतिबंध लगा देंगे। मोबाइल ऐप को हर जगह से हटवा देंगे और ऐप के पुराने वर्जन को अपडेट नहीं किया जाएगा।

अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा, जासूसी का है डर

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह ऐप को बचाना चाहते हैं, क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में ऐप ने मदद की। दरअसल दुनियाभर के नौजवान टिकटॉक पर ज्यादा हैं। उन्हें डर है कि अगर चीन की ऐप को अमेरिका में इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अमेरिका की जासूसी हो सकती है, नौजवानों का निजी जानकारी लीक हो सकती है

TikTok के ‘एल्गोरिदम’ को अमेरिकी खरीदार के साथ साझा करने से पहले कंपनी को चीन की मंजूरी लेनी होगी। इसलिए सौदा अभी तक अटका हुआ है। 2025 की शुरुआत में TikTok को खरीदने पर बात हो रही थी। इसका अधिकांश स्वामित्व अमेरिकी निवेशकों के पास होता और वे उसका संचालन करते। हालाँकि, ट्रम्प की टैरिफ की वजह से इसे चीन ने मंजूरी नहीं दी।

ट्रम्प ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया और TikTok की अमेरिकी संपत्ति की बिक्री या उसे बंद करने संबंधी कानून को लागू नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने पहले समय सीमा को अप्रैल की शुरुआत तक, फिर मई से जून तक और तीसरी बार सितंबर तक बढ़ाया।

लखनऊ में दो दिवसीय कौशल महोत्सव का आयोजन, IT-बैंक-ऑटोमोबाइल सेक्टर में 40000 युवाओं को मिलेगा रोजगार: CM योगी आदित्यनाथ करेंगे उद्घाटन

युवाओं को रोजगार प्रदान करने की दिशा महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दो दिवसीय कौशल महोत्सव का आयोजन किया है, जिसकी शुरुआत मंगलवार (16 सितंबर 2025) से होगी। दो दिवसीय महोत्सव लखनऊ स्थित कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज में होगा। इस महोत्सव से जुड़ने के लिए युवा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

कौशल महोत्सव में युवाओं की शैक्षिक योग्यता और साक्षात्कार के आधार पर ₹15000 से ₹25000 तक की सैलरी पर नौकरी मिलेगी। मंगलवार (16 सितंबर 2025) से शुरू हो रहे महोत्सव का उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कौशल विकास विभाग और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी करेंगे।

कौशल विकास विभाग और उद्यमशीलता मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में लगभग 40 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने की योजना है। इसमें 80 से अधिक कंपनियाँ भाग लेंगी, जो कि 30 से ज्यादा सेक्टर में नौकरी के अवसर देंगी। इनमें भी ऑटोमोबाइल, रिटेल, हेल्थकेयर, IT, बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन, कृषि समेत 11 सरकारी कंपनियाँ हैं, जो अप्रेंटिस के लिए भर्ती करेंगी। 

कौशल विभाग के मुताबिक, साल 2025 का कौशल महोत्सव विशेष है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर युवाओं को 7500 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कौशल विभाग के अनुसार, “यह केवल एक महोत्सव नहीं बल्कि युवाओं के उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ाया गया सशक्त कदम है।”

न मिलाया हाथ-न की कोई बात, दरवाजा भी मुँह पर बंद किया: पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ भारतीय टीम का बर्ताव देख रोया ‘आतंकिस्तान’, ACC के पास जाकर गिड़गिड़ाया

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मुकाबला खेला गया। इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को करारी हार दी। लेकिन मुकाबले की सबसे खास बात थी, भारतीय टीम का पाकिस्तान की टीम से हाथ ना मिलाना। अब इस No Handshake पर पाकिस्तानी क्रिकेटर और मुल्क की आवाम तिलमिला गई है।

पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने तो अपना रोना लेकर एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) तक पहुँच गए, जिसके अध्यक्ष मोहसिन नकवी खुद पाकिस्तान से हैं। PCB ने एक बयान में कहा, “मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट ने टॉस के समय कप्तान सलमान अली आगा से भारतीय टीम के कप्तान से हाथ न मिलाने को कहा था। पाकिस्तानी टीम मैनेजमेंट ने इस व्यवहार को खेल भावना के विरुद्ध बताते हुए अधिकारिक विरोध दर्ज कराया है।”

भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी टीम से हाथ मिलाने से बचने का टीम इंडिया का फैसला प्रशंसकों के लिए भले ही एक नई बात हो लेकिन मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी। मैच रेफरी ने भी पाकिस्तान को भारत के इरादे के बारे में पहले ही बता दिया था और सलमान अली आगा को भी सूर्यकुमार और अन्य भारतीय खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से बचने की सलाह दी थी।

पाकिस्तानी क्रिकेट जगत में बौखलाहट

पाकिस्तानी के क्रिकेट जगत से भी भारतीय टीम के No Handshake पर खूब प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर जो भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं, उनको यह घटना काफी दुखद लगी और उनका दिल पसीज गया।

शोएब अख्तर ने कहा, “यह निराशाजनक और अवाक है, यह दुखद है, पता नहीं क्या कहूँ। इस पर राजनीति मत करो। हमने तुम्हारे बारे में अच्छी बातें कही हैं, बस हाथ मिलाओ यार, क्रिकेट का खेल है। थोड़ी शालीनता दिखाओ। घर-घर में भी झगड़े होते हैं लेकिन हाथ न मिलाकर बात को आगे मत बढ़ाओ।”

वहीं, मैच के बाद सेरेमनी में शामिल न होने के पाकिस्तानी टीम के कप्तान सलमान आगा के फैसले को शोएब अख्तर ने सही बताया, “वो नहीं गए, ठीक किया। बहुत अच्छा।”

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कोच माइक हेसन ने कहा, “हम हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े थे लेकिन तब तक वे ड्रेसिंग रूम जा चुके थे। यह मैच का निराशाजनक अंत था। हम अपने खेल से पहले ही निराश थे लेकिन हम हाथ मिलाने के लिए तैयार थे।”

पाकिस्तान के एक और पूर्व क्रिकेटर कामरान अकमल ने भी एक डिबेट के दौरान कहा, “हम इस काबिल नहीं हैं कि शीर्ष की पाँच छह टीमों के साथ खेल पाएँ। सबसे निचले पायदान पर रहने वाली टीमों जैसे बांग्लादेश के साथ खेलते हुए हम अच्छे लगते हैं।”

पाकिस्तान मीडिया ने बताया ‘छोटी हरकत’

भारतीय टीम के कैप्टन सूर्य कुमार ने मुकाबले की शुरुआत में टॉस के वक्त भी पाकिस्तान के कैप्टन सलमान से हाथ मिलाने से परहेज किया। इसके बाद मैच के अंत में भारत की जीत के बाद खिलाड़ी बिना हाथ मिलाए पाकिस्तान टीम के मुँह पर ड्रेसिंग रूम का दरवाजा बंद कर चले गए। उधर, पाकिस्तानी खिलाड़ी स्टेडियम में इंतजार करती रही।

अब भारतीय टीम की इस No Handshake मोमेंट पर पाकिस्तानी मीडिया विश्लेषण तैयार कर रही है। कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स को डिबेट में बिठाकर भारतीय खिलाड़ियों को कम आँक रहे हैं। कुछ पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने तो इसे भारतीय क्रिकेट टीम की ‘छोटी हरकत’ करार दिया।

ऐसे ही एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट, जो भारत-पाकिस्तान मुकाबले का एनालिसिस करने बैठे थे, वो कहते हैं, “आप (भारतीय क्रिकेट टीम) हाथ नहीं मिलाएँगे तो क्या हीरो बन जाएँगे। जो क्रिकेट को जानता है वो कभी इसकी सराहना नहीं करेगा।”

अन्य पाकिस्तानी क्रिकेट एक्सपर्ट तो यह तक बोलने लगे, “इससे क्रिकेट की बेकदरी हुई है। बेचारे प्लेयर्स की रेप्युटेशन खराब हो रही है। मैं इसे छोटी हरकत समझता हूँ। वो (भारतीय क्रिकेट टीम) बेचारे मजबूर हुए हैं ऐसा करने पर, उन पर दबाव था ये करने का।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान आवाम की प्रतिक्रिया

जहाँ पाकिस्तानी क्रिकेटर और मीडिया ने भारतीय टीम के No Handshake पर खूब रोना रोया। वहीं सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने भारत-पाकिस्तान के बीच खराब रिश्ते को और बढ़ावा दिया। सोशल मीडिया पर एक तरफ पाकिस्तान टीम को दरियादिल दर्शाया गया और भारतीय टीम को दुश्मन बताया गया।

निर्बाज रमजान नाम की यूजर ने कहा, “मैच के बाद हाथ नहीं मिलाया। पाकिस्तान टीम इंडिया के हाथ मिलाने का इंतजार कर रही थी लेकिन वे नहीं आए।” इस रिएक्शन में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को ‘महान’ बनाकर पेश किया गया।

मर्यम नाम की यूजर ने एक्स पर लिखा, “भारतीय कप्तान ने टॉस और मैच के बाद हाथ मिलाने से इनकार कर दिया, जो पाकिस्तान का साफतौर पर अपमान है। फिर भी पंजाबी कहते हैं कि “भारत नहीं, अफगनिस्तान दुश्मन है” जबकि अफगान टीम ने हमारी टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। अजीब बात है कि हकीकत हर बार उन्हें गलत साबित करती है।”

सिम्बा नाम से एक्स यूजर ने कहा, “क्रिकेट को हमेशा से सज्जनों का खेल कहा जाता रहा है लेकिन आज भारत ने एक साधारण हाथ मिलाने से इनकार करके इसके इमोशन पर दाग लगा दिया, जो स्पोर्ट्समैनशिप के बिल्कुल खिलाफ है। इसके विपरीत, पाकिस्तान ने शालीनता से आगे बढ़कर साबित कर दिया कि असल में दिल किसका होता है। आगे बढ़ो, लड़कों, दिल जीतते रहो।”

जहानजैब दुर्रानी नाम की यूजर ने कहा, “मैच के बाद हाथ मिलाने से इनकार करके और दरवाजा बंद करके, भारतीय टीम ने दिखा दिया कि वे कितने बेढंगे और तुच्छ हैं। छोटे दिल, छोटा दिमाग!!! ठीक यही वजह है कि जिन्ना ने कहा था कि हमारे बीच कुछ भी समान नहीं है। शुक्र है कि हमने अपनी आजादी ले ली और हमें उनके साथ नहीं रहना पड़ रहा। छोटे लोग हैं।”\

जहानजैब दुर्रानी के कमेंट का स्क्रीनशॉट

भारतीय खिलाड़ियों के No Handshake ने दर्शाया देशप्रेम

भारतीय टीम के हाथ ना मिलाने पर पाकिस्तान ने रोना शुरू कर दिया। इससे साफ नजर आता है कि पाकिस्तान अब भी भारत के सामने झुका हुआ है। भारतीय टीम का रवैया पाकिस्तान को ‘छोटी हरकत’ लगा, तो मुल्क का आतंकी को पनाह देना किस हद तक सही है। शायद पाकिस्तान भूल गया है कि भारत का यह रवैया देशप्रेम है, ये उन पीड़ितों का सम्मान है, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपनी जान गवा दी। वही हमला, जिसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को शिकस्त दी।

भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर ने भी इस हैंडशेक विवाद पर बात करते हुए कहा, “यह मैच हमारे लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि हम पहलगाम हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता दिखाना चाहते थे और उन्होंने जो कुछ भी सहा, उसके लिए भी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम भारतीय सेना को उनके सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं। हम अपने देश को गौरवान्वित और खुश करने की कोशिश करेंगे।”

टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव ने भी मैच के बाद दिए बयान में कहा, “पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं, हम अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं और इस जीत को आर्म्ड फोर्सेस को समर्पित करना चाहते हैं।

सूर्या ने पाकिस्तान के ख‍िलाड़‍ियों संग हाथ ने म‍िलाने की वजह भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार और BCCI पूरी तरह से एकमत थे। हमने फैसला लिया कि हम सिर्फ खेल खेलने आए हैं और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया।

देशप्रेम में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम से हाथ नहीं मिलाया। इसके बावजदू अगर पाकिस्तान इसे ‘छोटी हरकत’ समझता है तो समझता रहे। लेकिन भारत द्वारा पाकिस्तान के किसी भी ‘शांतिप्रिय’ बयान को माना नहीं जाएगा। देशप्रेम में भारत अब पाकिस्तान को बॉयकॉट भी करना चाहे तो करेगा, चाहे वह क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में ही क्यों न हो। पाकिस्तान और भारत बहुत अलग हैं।

‘हिंदू-मुसलमान कुछ नहीं होता’ कहने वाली हिंदू Insta इन्फ्लुएंसर को यूट्यूबर मेराज ने इस्तेमाल करके छोड़ा, रोते-रोते Video बनाई: बोली- लोग समझाते थे ये जिहादी है

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर वन्नू डी ग्रेट ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर इंसाफ की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि वह इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर मनी मेराज के साथ काम करती थी। मनी मेराज ने उसे अपने प्यार में फँसाया। उसका शारीरिक शोषण किया। धर्म परिवर्तन करा कर निकाह किया। अब उसे धोखा देकर दूसरी बार निकाह करने जा रहा है।

पीड़िता ने अपने वीडियो में कहा है, “वह कहता था कि बीवी हो, तुम्हारे साथ जबरदस्ती नहीं करूँगा, तो किसके साथ करूँगा।” रोते हुए अब वह कह रही है कि उसके साथ धोखा हुआ है, क्योंकि मनी मेराज दूसरी बार निकाह करने जा रहा है। मनी मेराज का फोन भी स्विच ऑफ है।

मुस्लिम यूट्यूबर 9 सितंबर 2025 से फरार है। पीड़िता का कहना है कि जब उसने आरोपित के परिजनों से मिलने बिहार के मुजफ्फरपुर पहुँची और मिली, तो उसे डराया-धमकाया गया। यूट्यूबर के अब्बू ने कहा कि पुलिस और मुखिया उनकी तरफ है और वो वही करेंगे, जो उन्हें कहा जाएगा।

इंस्टाग्राम पर वन्नू डी ग्रेट ने कहा है, “जो आरोप लगाए हैं, उसके सारे साक्ष्य मेरे पास मौजूद हैं। उसे किस तरह से यूट्यूबर मनी मेराज ने अपने प्रेम में फँसाया और चुपके से निकाह किया। लेकिन अब उसे धोखा दे रहा है। ” इस्लाम कबूल करने को लेकर भी अब वह पछता रही है। उसका कहना है, “मैंने गलती की गलत इंसान पर विश्वास किया और इस्लाम कबूल करके निकाह कर लिया। मेरी सजा तो मुझे मिल गई है, लेकिन मनी मेराज की सजा अब आप लोग या कानून तय करेगा।”

वह खुद कह रही है कि एक मुस्लिम लड़के से निकाह करने से पहले कुछ हिंदुओं ने उसे जिहादियों से दूर रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह नहीं समझी और अब उसे अपने किए का अंजाम भुगतना पड़ रहा है।

इंस्टाग्राम इंफ्लोएंसर मनी मेराज के 7.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं। वह खुद को एक्टर, डांसर, कॉमिडियन और गायक कहता है। वह भोजपुरी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा रहा है। यूट्यूब पर उसके 10k फोलोअर्स हैं।

बिहार में शिक्षा की आड़ में धर्मांतरण और यौन शोषण का जाल: जेम्स इंग्लिश स्कूल में गरीब परिवार की बच्चियों को बनाया जा रहा निशाना, केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्ट

बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में शिक्षण संस्थान में जबरन धर्मांतरण और रेप के मामले का खुलासा हुआ है। इंद्रपुरी के सिकरिया गाँव में स्थित जेम्स इंग्लिश स्कूल और उससे जुड़े जेम्स टेलरिंग इंस्टीट्यूट में धर्मांतरण और नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण की घटना सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह खुलासा रोहतास जिला बाल कल्याण समिति की जाँच में हुआ है। समिति ने हाल ही में स्कूल परिसर की जाँच की थी और अपनी रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट भारत सरकार के गृह सचिव, डीएम समेत कई अधिकारियों को भेजी गई है और उच्चस्तरीय जाँच की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान समिति को पता चला कि जेम्स टेलरिंग इंस्टीट्यूट में गरीब परिवार के बच्चों को झांसा देकर लाया जाता था और उनका धर्मांतरण करा दिया जाता था।

मामला कैसे आया सामने?

27 अगस्त 2025 को गया जिले की एक किशोरी लापता हो गई थी। उसकी माँ ने 30 अगस्त को इंद्रपुरी थाने में FIR दर्ज कराई। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने 8 सितंबर 2025 को स्कूल परिसर में जाँच की। जाँच टीम में समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार, सदस्य ददन पांडेय, गायत्री कुमारी, इंद्रपुरी की थानाध्यक्ष माधुरी कुमारी और प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी प्रशांत सिंह विष्ट शामिल थे।

जब समिति के लोग जेम्स टेलरिंग इंस्टीट्यूट पहुँचे तो वहाँ 7-8 बच्चियों को सिलाई सिखाई जा रही थी। जाँच के दौरान बच्चियों का नामांकन रजिस्टर, हाजिरी पंजी या अन्य कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। संस्था कब से चल रही है, किस आधार पर बच्चियों को रखा गया है इसका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

इस दौरान टीम ने देखा कि एक लड़की जोर-जोर से रो रही थी और दो लोग उसे खींचकर ले जा रहे थे। पूछने पर कहा गया कि उसके पेट में दर्द है। बताया गया कि वह ऐसे ही करती रहती है। इंद्रपुरी थानाध्यक्ष व समिति सदस्य गायत्री कुमारी ऊपर गई। लड़की को चुप कराकर नीचे आ गईं।

इसके बाद लड़की को पीटा जाने लगा। टीम ने उसे रेस्क्यू कर गंभीर अवस्था में इलाज के लिए भेजा, लेकिन डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद उसे समिति में लाया गया। महिला काउंसलर से बात करने पर लड़की ने बताया कि चार लोगों ने उसके साथ रेप किया था। मेडिकल जाँच के बाद उसे बालिका गृह भेजा गया।

आगे की कार्रवाई

9 सितंबर 2025 को समिति की सदस्य गायत्री कुमारी की निगरानी में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन और इंद्रपुरी थाना अध्यक्ष की टीम ने वहाँ से कुल सात बच्चियों को मुक्त कराया। समिति ने बताया कि इन सभी बच्चियों को बालिका गृह में शिफ्ट कर दिया गया है।

टीम द्वारा दी गई रिपोर्ट में बच्चियों के बयान दर्ज हैं। उनमें से कई बच्चियों ने नामांकन फॉर्म में जो जानकारी दी थी, उससे यह संदेह हुआ कि वहाँ धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियाँ चल रही थीं। इस आधार पर समिति ने जिलाधिकारी से माँग की है कि एक उच्चस्तरीय जाँच समिति बनाई जाए और पूरे मामले की गहराई से जाँच की जाए।

सासाराम के एसपी रौशन कुमार ने भी कहा है कि डीएम स्तर से जाँच टीम का गठन किया जाएगा और रिपोर्ट आने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

बिलासपुर से दुर्ग तक प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण को लेकर बवाल: मिशनरियों ने फाड़े हिन्दू महिला के कपड़े, विरोध में 10 घंटे तक प्रदर्शन और चर्च के सामने भजन-कीर्तन

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में धर्मांतरण को लेकर तनाव बना हुआ है। 13 सितंबर 2025 को प्रार्थना सभा में करीब 300 लोगों को ईसाई बनाने के लिए प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। वहीं दुर्ग में भी धर्मांतरण के विरोध में हिन्दू संगठन सड़क पर आ गए।

बिलासपुर में प्रार्थना सभा में करीब 300 लोग मौजूद थे। इनलोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा था। इस मामले में सीपत पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसको लेकर ईसाईयों ने जमकर बवाल किया।

प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण

हिन्दू संगठन ने भी धर्मांतरण के विरोध में करीब 10 घंटे तक प्रदर्शन किया। इस लोगों ने मसीही समाज के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। हिन्दू संगठनों का कहना है कि लगातार प्रार्थना सभा की आड़ में हिन्दुओं को लालच और पैसे देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। इनलोगों ने ईसाईयत और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

हिन्दू संगठनों ने थाने के सामने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। पुलिस के मुताबिक, प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण की सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और 7 ईसाईयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

बिलासपुर में धर्मांतरण का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते 28 अगस्त 2025 को प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण की कोशिश की जा रही थी। हिन्दू संगठनों को जानकारी मिलने पर वे मस्तूरी थाना क्षेत्र के पेंड्री पहुँचे। यहाँ एक बंद पड़े पोल्ट्री फॉर्म में 15-20 लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा था। इसके लिए प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। पुलिस ने इस मामले में पास्टर संजीव सूर्यवंशी समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया था।

दुर्ग में भी धर्मांतरण को लेकर तनाव

छत्तीसगढ़ के दुर्ग के पद्मनाभपुर में रविवार (14 सितंबर 2025) को चर्च में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इसको लेकर आस पास के लोगों ने हिन्दू संगठनों को जानकारी दी कि यहाँ धर्मांतरण के लिए लोगों को जुटाया गया है। इसके बाद हिन्दू संगठन वहाँ पहुँच गए और चर्च के बाहर हंगामा किया। मौके पर पहुँची पुलिस ने प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों के नाम और पता नोट किए। हिन्दू समुदाय ने इस दौरान चर्च के बाहर भजन-कीर्तन किया।

विवाद बढ़ने पर पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने लेकर गई। हिन्दुओं का कहना है कि चर्च से जुड़े जॉन को धर्मांतरण के लिए बाहर से फंडिंग होती है। उसकी बैंक खातों की जाँच की जानी चाहिए। उसे जिला बदर किया जाना चाहिए। इनका कहना है कि जॉन ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर मारपीट किया और गालियाँ दी।

इनलोगों ने बजरंग दल कार्यकर्ता निर्मित कौर को धक्का दिया। यहाँ तक की उसके कपड़े फाड़ दिए। इसके बाद जॉन को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पीटा। फिलहाल जॉन को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दाता त्रयनाथ को बनाया अब्दुल रहमान, लक्ष्मी बनी सलमा: UP के देवरिया में ‘छांगुर पीर’ जैसा धर्मांतरण का सिंडिकेट, उस्मान गनी अपने मॉल के कर्मियों को बना रहा था मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक बड़े धर्मांतरण सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जिसकी तुलना छांगुर पीर के मामले से की जा रही है। इस सिंडिकेट का मुख्य सरगना उस्मान गनी बताया जा रहा है। वह SS मॉल और EG मार्ट का संचालक है।

SS मॉल का मालिक उस्मान गनी, उसकी बीवी तरन्नुम और साले गौहर अली पर उसी मॉल में काम करने वाली एक युवती ने धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में FIR दर्ज है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। वहीं, अब सामने आया है कि रविवार (14 सितंबर 2025) को उस्मान गनी और उसकी बीवी दोनों मॉल में ताला बंद कर फरार हो गए हैं।

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है। इसी बीच EG मार्ट का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ काम करने वाले दाता त्रयनाथ मद्धेशिया नाम के कर्मचारी ने अपने पूरे परिवार के साथ इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है। अब वह अब्दुल रहमान बन चुका हैं। इस बात की पुष्टि ग्राम प्रधान राम नारायण गुप्ता और एडवोकेट विजय तिवारी ने की है।

एक और खुलासे के तहत यह भी सामने आया है कि खुखुंदू थाना क्षेत्र के रहने वाले उमेश सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह को उस्मान गनी के साले गौहर अली ने बहलाकर निकाह किया और धर्म बदलवाकर उसका नाम सलमा रख दिया। इस मामले में गौहर अली को जेल भेज दिया गया है। लक्ष्मी के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को गुमराह किया गया है और अब वह उसी का साथ दे रही है।

आरोप है कि ये लोग युवतियों को लग्जरी लाइफ का लालच देकर व्यापारियों को सप्लाई करते थे। वहीं अब पीड़ित परिवारों को धमकियाँ भी दी जा रही हैं। मामले में सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि जिले में छांगुर पीर जैसे सिंडिकेट को पनपने नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और SS मॉल और EG मार्ट की जाँच की माँग की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार खुलासों के बाद अब SS मॉल और EG मार्ट पर स्थानीय लोगों द्वारा भी जाँच की माँग उठाई जा रही है। विधायक के अनुसार, उस्मान गनी, उसकी बीवी और साले, सभी इस धर्मांतरण गिरोह में शामिल हैं और सुनियोजित तरीके से काम कर रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों के बाद ईसाई मिशनरियों को खुश करने में जुटी सिद्धारमैया सरकार, धर्मांतरण की साजिशों को दी ‘क्लीन चिट’: कर्नाटक CM ने कहा- हिंदुओं में नहीं समानता

इस्लामी कट्टरपंथियों को लेकर कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार का रुख तो लंबे वक्त से साफ रहा है। आरक्षण से लेकर मुस्लिम कॉलोनियाँ बनाने तक तुष्टिकरण के लिए वो कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। अब उनका प्रेम ईसाई मिशनरियों पर उमड़ता दिख रहा है।

कुछ दिनों पहले बेंगलुरु में शिवाजी नगर मेट्रो स्टेशन का नाम सेंट मेरी बेसिलिका के नाम पर रखने की घोषणा करने वाले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अब हिंदू धर्म में सारी खामियाँ नजर आने लगी हैं। हिंदुओं के धर्मांतरण की जो साजिश चल रही है, उसे सिद्धारमैया ने जाति व्यवस्था से जोड़ दिया है। उन्हें हिंदू धर्म में असमानता की बात भी दिखने लगी है।

सिद्धारमैया ने क्या कहा?

सिद्धारमैया ने धर्मांतरण पर अपनी बात रखते हुए बड़ी सफाई से यह बताने की कोशिश की है कि जो लोग धर्मांतरण करते हैं वो असल में व्यवस्थाओं से परेशान हैं। उन्होंने कहा, “भले ही हम कहें कि धर्मांतरण मत करो लेकिन कुछ लोग व्यवस्था के कारण ऐसा करते हैं। हमारे हिंदू समुदाय में, अगर समानता और समान अवसर होते, तो कोई धर्मांतरण क्यों करता?”

उन्होंने आगे कहा कि क्या हिंदू समाज ने छुआ छूत नहीं बनाई। कर्नाटक सीएम ने कहा, “इस्लाम या ईसाई धर्म या किसी अन्य धर्म में भी असमानताएँ हो सकती हैं। हमने या बीजेपी ने किसी को धर्मांतरण करने के लिए नहीं कहा, यह लोगों का अधिकार है और वह अपने मन से ऐसा करते हैं।”

क्या वाकई समानता और समान अवसर ना होने के चलते हो रहा धर्मांतरण?

सिद्धारमैया ने धर्मांतरण पर हिंदुओं को लेकर जो आसानी से कह दिया और जो असमानता की बात उन्होंने कह दी है। उस पर क्या वो किसी और मजहब से सवाल पूछ पाएँगे। जाहिर है, ऐसा नहीं होगा। क्योंकि उनके लिए हिंदुओं पर सवाल उठाना एक आसान टार्गेट है।

अब आते हैं समानता और समान अवसरों से धर्मांतरण पर, क्या ईसाई या मुस्लिम समाज पूरी तरह समानता और अवसरों से भरे हुए हैं? वहाँ भी जातीय, वर्गीय और आर्थिक भेद साफ-साफ दिखते हैं। फिर भी क्या दुनिया में उनका धर्मांतरण उस स्तर पर होता है?

इतिहास गवाह है कि मध्यकालीन आक्रांताओं का दौर रहा हो या ब्रिटिश हुकूमत के दौर में मिशनरियों का अभियान, उस दौरान में जो धर्मांतरण हुए वे राजनीतिक या आर्थिक दबाव के कारण हुए थे। गरीबों और वंचितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पैसे का लालच देकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया गया।

वहीं, अगर समान अवसर की बात करें तो यह संवैधानिक तौर पर सरकार का काम है कि वो लोगों को समान अवसर दे। अगर समान अवसर ना मिलने के कारण लोगों को धर्मांतरण के लिए मजबूर होना पड़ रहा है तो इसके लिए उनकी खुद की सरकार कितनी जिम्मेदार है?

सिद्धारमैया का बयान ‘मिशनरियों और कट्टरपंथियों को क्लीन चिट’

यह बयान जिस तरह से दिया गया है वह बहुत खतरनाक है। सिद्धारमैया का यह तर्क उन मिशनरियों और कट्टरपंथी संगठनों को खुला लाइसेंस देने जैसा है जो दशकों से गरीबों, दलितों और वंचितों को लालच और झूठे वादों के जरिए हिंदू समाज से तोड़ने में लगे हुए हैं।

क्या यह सच नहीं कि ईसाई मिशनरियाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और सहायता के नाम पर गरीबों को पहले निर्भर बनाती हैं और फिर मजबूरी के हालात में धर्मांतरण करवा लेती हैं? क्या यह सच नहीं कि इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों द्वारा ‘लव जिहाद’ और पैसों के लालच से हजारों युवतियों और परिवारों को फँसाया गया है?

समाज के तौर पर अगर कुछ कमियाँ हैं भी तो क्या उन्हें ठीक नहीं करने की कोशिशें हुई हैं? क्या मुस्लिम या ईसाई बनना ही इसका समाधान है? हिंदुओं ने सुधार के लिए जितना काम किया है, उतना किसी अन्य पंथ ने नहीं किया होगा।

आज करोड़ों दलित और पिछड़े वर्ग से आने वाले लोग हिंदू समाज में ही रहते हुए राजनीति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में ऊँचाइयों तक पहुँचते हैं। देश के शीर्ष पदों पर आसीन लोगों से इसका साफ पता चलता है।

आज जरूरत है कि ऐसे नेताओं की बयानबाजी को बेनकाब किया जाए। अगर हिंदू समाज की कुछ कमियाँ हैं, तो उनका हल समाज-सुधार और शिक्षा है, न कि धर्मांतरण। हर बार हिंदू धर्म को कठघरे में खड़ा करके मिशनरियों को क्लीन चिट देना, असल में राष्ट्र और संस्कृति पर सीधा हमला है।

10% मुस्लिमों के दम पर भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश, RSS-PM मोदी का जिक्र: जानें महबूब आलम की गिरफ्तारी से चर्चा में आए PFI के ‘इंडिया विजन 2047’ की कहानी

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार (14 सितंबर 2025) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के बिहार राज्य अध्यक्ष महबूब आलम उर्फ महबूब आलम नदवी को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 2022 के फुलवारीशरीफ़ आपराधिक साजिश मामले से जुड़ी हुई है।

महबूब आलम, जो बिहार के कटिहार जिले के हसनगंज इलाके के रहने वाले हैं, उनको किशनगंज से पकड़ा गया। वह इस मामले में गिरफ्तार और चार्जशीट किए गए कुल 26 आरोपितों में से 19वें व्यक्ति हैं। यह केस PFI की उन गतिविधियों से जुड़ा है, जिनका मकसद धार्मिक नफरत फैलाकर समाज में डर और आतंक का माहौल बनाना और देश विरोधी साजिशों को अंजाम देना था।

NIA के मुताबिक, यह मामला शांति और सौहार्द बिगाड़ने, लोगों में असंतोष फैलाने और देश के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने से जुड़ा है। यह मुकदमा सबसे पहले स्थानीय पुलिस ने 26 संदिग्धों के खिलाफ दर्ज किया था। एजेंसी ने बताया कि आरोपित अवैध और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, जिनका लक्ष्य था, धार्मिक उन्माद भड़काना, समाज में अशांति फैलाना और हिंसा को हथियार बनाकर अपने मकसद पूरे करना।

जाँच एजेंसी ने खुलासा किया कि महबूब आलम और दूसरे आरोपित PFI के उस विजन डॉक्यूमेंट पर काम कर रहे थे, जिसे 11 जुलाई 2022 को फुलवारीशरीफ़ स्थित अहमद पैलेस से बरामद किया गया था। इसी दस्तावेज में संगठन की गुप्त योजना का जिक्र था।

NIA ने बताया कि महबूब आलम इस साजिश का हिस्सा था और उसने भर्ती, ट्रेनिंग, बैठकों और अन्य देशविरोधी गतिविधियों में भाग लिया। इतना ही नहीं, उसने फंड भी जुटाया और इसे अपने साथियों और PFI कार्यकर्ताओं तक पहुँचाया। एजेंसी ने कहा कि इस मामले की जाँच BNS और UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत जारी है।

जाँच में पता चला कि आलम और उसके साथी एक गुप्त विजन डॉक्यूमेंट पर काम कर रहे थे। इसका नाम इंडिया विजन 2047 था।

क्या है इंडिया विजन 2047

बिहार पुलिस ने जुलाई 2022 में आठ पन्नों का एक दस्तावेज जब्त किया था। जिस दस्तावेज का मकसद साफ था, वे 2047 तक भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की योजना बना रहे थे। इसमें कहा गया कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का मात्र 10% भी उनका साथ दे दे तो वे बहुसंख्यक समुदाय को दबाकर अपना वर्चस्व कायम कर लेंगे।

डायरेक्ट रोडमैप में भर्ती और प्रशिक्षण पर जोर था। खासकर एक PE विंग बनाकर उन्हें तलवार, डंडे और अन्य हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि आक्रमक व रक्षात्मक दोनों काम कर सकें। साथ ही सरकारी विभागों, कोर्ट, पुलिस और सेना में विश्वासी मुसलमान घुसाने की रणनीति बताई गई थी। दस्तावेज ने विरोधियों को अलग-थलग करने और जरूरत पड़ी तो हटा देने तक की बात कही थी।

PFI का डॉक्यूमेंट

रणनीति में मीडिया-आउटरीच, हर इलाके में PFI की मौजूदगी और संघ या परिवार के नेताओं के खिलाफ जानकारी इकट्ठा करने जैसे कदम भी बताए गए थे। आखिरी हिस्से में कहा गया कि सीधी लड़ाई की स्थिति में विदेशों, खासकर तुर्की जैसे मित्र इस्लामी देशों से मदद ली जाएगी।

इस दस्तावेज में लिखा था कि 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की योजना है। इस दस्तावेज में पीएम मोदी पर हमले की साजिश का भी जिक्र था। दस्तावेज में साफ लिखा था कि सिर्फ 10% मुस्लिमों की मदद से भी ‘कायर हिंदुओं’ को दबाया जा सकता है।

योजना में विदेशी इस्लामी देशों, खासकर तुर्की से मदद लेकर भारत के खिलाफ हथियारबंद विद्रोह खड़ा करने की बात थी। इसके बाद NIA ने 17 राज्यों में छापेमारी की। इसमें बम बनाने के मैनुअल, ट्रेनिंग मॉड्यूल, विजन 2047 डॉक्यूमेंट और एक सीडी जब्त की गई।

इन सबका मकसद था भारत में दहशत फैलाना और इस्लामी शासन थोपना। इन खुलासों के बाद सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने PFI और उसके सहयोगी संगठनों पर 5 साल का बैन लगा दिया।

सरकार ने साफ कहा कि ये सभी संगठन यूएपीए कानून के तहत अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। बैन किए गए संगठनों में ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), रहाब इंडिया फाउंडेशन, NCHRO, नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रहाब फाउंडेशन, केरल भी शामिल हैं।