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मुस्लिम बनो, 3 बीवी पाओ… बरेली में अब्दुल मजीद का जो मदरसा था ‘धर्मांतरण का मरकज’, वह भी निकला अवैध: व्हाट्सएप ग्रुप में अश्लील तस्वीर-वीडियो पोस्ट कर फँसाते थे

बरेली में धर्मांतरण के बड़े गिरोह का खुलासा होने के बाद अब रोज़ नई परतें खुल रही हैं। ताजा जानकारी ये है कि गिरोह जिस मदरसे से हिंदुओं का धर्मांतरण करता था, वो मदरसा अवैध निकला है। इस मदरसे पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही के भी आदेश दिए जा चुके हैं।

धर्मांतरण गिरोह ने हिंदू युवकों को फँसाने के लिए 20+ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इनमें अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजे जाते थे। इसके बाद लड़कों को शादी, जन्नत और ‘तीन बीवियाँ’ मिलने का लालच दिया जाता था। जो युवक दिलचस्पी दिखाते थे, उन्हें मदरसे में बुलाकर ब्रेनवॉश किया जाता था। अब तक कई युवक इस जाल में फँस चुके हैं।

किस तरह चलता था व्हाट्सएप वाला जाल

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह ने अलग-अलग नामों से कई व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। शुरू में इनमें सामान्य बातें होती थीं। फिर धीरे-धीरे ग्रुप में अश्लील वीडियो और लड़कियों की फोटो डाली जाती थीं। हिंदू लड़कों को शादी का झाँसा दिया जाता था। कहा जाता, ‘अगर मुस्लिम बन जाओगे तो तीन-चार बीवियाँ भी मिलेंगी और जन्नत भी।’ जो लड़के इस लालच में आ जाते, उन्हें मदरसे में बुलाकर लड़कियों और मौलानाओं के जरिए मानसिक रूप से तोड़ा जाता था।

मदरसे के अंदर युवकों को बताया जाता कि इस्लाम अपनाने से सारी परेशानियाँ खत्म हो जाएँगी। उन्हें कहा जाता कि मुस्लिम बनने पर नौकरी, घर, पैसा और खूबसूरत बीवी जैसी चीजें आसानी से मिलेंगी। कुछ युवकों को उर्दू सिखाई जाती थी। कुरान और हदीस पढ़ने को दी जाती थी। जब कोई युवक थोड़ा बहुत मजहबी जानकारी सीख जाता, तो उसे मौलवी बनने का सपना दिखाया जाता।

फैजनगर का मदरसा बना था धर्मांतरण की फैक्ट्री

बरेली से 30 किलोमीटर दूर फैजनगर का यह मदरसा 2014 में शुरू हुआ था। लेकिन असलियत में यह कोई शिक्षा देने वाली जगह नहीं थी। यह एक धर्मांतरण की फैक्ट्री बन चुका था, जहाँ युवकों का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जाता था।

इस मदरसे का कोई सरकारी रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। यानी यह अवैध रूप से चलाया जा रहा था। यहाँ से बरामद हुआ अब्दुल मजीद का पैन कार्ड भी फर्जी निकला है।

कैसे टारगेट किए जाते थे युवक

गिरोह का टारगेट वे युवक होते थे जो अकेले रहते थे, आर्थिक रूप से कमजोर थे या फिर तलाकशुदा थे। गाँव-शहरों में ऐसे युवकों पर निगरानी रखी जाती थी। फिर धीरे-धीरे उन्हें जाल में फँसाया जाता था। गिरोह का संचालन अब्दुल मजीद करता था। सलमान, आरिफ और फहीम जैसे लोग उसका साथ देते थे।

पुलिस ने कुछ दिन पहले प्रोफेसर प्रभात उपाध्याय को एक मदरसे से बंधक बना कर छुड़ाया। वो नेत्रहीन हैं और उनका जबरन धर्मांतरण करवाया जा रहा था। प्रभात का नाम बदलकर ‘हामिद’ रख दिया गया था और उनका खतना किया जा रहा था। इसी कार्रवाई के दौरान चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अब्दुल मजीद भी शामिल था।

पुलिस को आरोपितों के पास से ज़ाकिर नाइक की किताबें और 21 से ज़्यादा बैंक खातों का पता चला है, जिनमें ₹13 लाख से ज़्यादा का लेनदेन हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं, बल्कि देश के 13 राज्यों तक फैला है और इसमें 200 से ज़्यादा मौलाना भी शामिल हो सकते हैं।

एक खालिस्तानी, दूसरा पाकिस्तानी की पैदाइश: जानिए कौन हैं हरमीत ढिल्लो-उम्मेद मलिक, इनके ‘घुसपैठ’ से ही भारत को आँखें दिखा रहे डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित नहीं करने और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने के दावों को खारिज करने के बाद भारत-अमेरिकी संबंधों में खटास आ गई है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष को ‘मोदी का युद्ध‘ बताना। भारत पर यूक्रेन युद्ध को आर्थिक सहायता देने का आरोप लगाना और रूसी तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25% (कुल 50%) टैरिफ लगाने का फैसला, भारत- अमेरिकी संबंधों में आई कड़वाहट की वजह बने हैं। जबकि बीजिंग द्वारा उसी तेल की खरीद का बेशर्मी से बचाव करना, ये दिखाता है कि ट्रंप के इरादे ठीक नहीं हैं।

भारत की दृढ़ता और संप्रभुता ने निश्चित रूप से ट्रंप के नाज़ुक अहंकार को चोट पहुँचाई है। हालाँकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी धमकाने वाली चालों के आगे झुकने को तैयार नहीं दिखते। ट्रंप प्रशासन ने भारत-विरोधी लोगों को अपने प्रशासन में शामिल कर रही सही कसर पूरी कर दी है। खालिस्तान समर्थक हरमीत ढिल्लो और आधे पाकिस्तानी उम्मेद मलिक ऐसे ही दो व्यक्ति हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी हैं।

उम्मेद मलिक कौन हैं?

46 वर्षीय उम्मेद मलिक ईरानी और पाकिस्तानी प्रवासियों के घर पैदा हुए थे। उनका पालन-पोषण न्यू जर्सी में हुआ। द फ्री प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उनके माता-पिता डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए चंदा जमा करते थे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को दो बार वोट दिया था। डेमोक्रेटिक हिलेरी क्लिंटन को चंदा दिया और न्यू जर्सी के दो डेमोक्रेट्स उम्मीदवारों के लिए काम किया।

‘ब्लैक लाइव्स मैटर’, ‘मी टू’ आंदोलन और दूसरे उदारवादी नीतियों की वजह से मलिक का पार्टी से मोहभंग हो गया। वह रिपब्लिकन के साथ आ गए। आज वह MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के कट्टर समर्थक हैं और ट्रंप परिवार के करीबी भी।

डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ उनकी दोस्ती ने कथित तौर पर उन्हें ट्रम्प परिवार के वित्तीय मामलों से जोड़ दिया है। दोनों की मुलाकात 2019 की गर्मियों में हैम्पटन्स पार्टी में हुई थी। इसके बाद वे दोनों अक्सर मिलते थे। वह ट्रम्प जूनियर की उस वक्त की प्रेमिका किम्बर्ली गुइलफॉयल को 10 साल से जानते थे।

मलिक ने जो बाइडेन को 2,800 डॉलर देने के एक महीने बाद ही ट्रम्प को 5,600 डॉलर का अपना पहला दान दिया था। वर्तमान राष्ट्रपति के सबसे बड़े बेटे के ‘1789 कैपिटल’ में भी मलिक भागीदार है। इसके अलावा पत्रकार टकर कार्लसन की कंपनी का वह सबसे बड़ा निवेशक है। कार्लसन और मलिक 2015 से दोस्त थे।

अपने इजराइल विरोधी बयानों के लिए कुख्यात मलिक भारत के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित रहा है। उसने ब्रिटिश साम्राज्य की तारीफ की थी। उन्होंने 2022 में तर्क दिया था, “मजबूत देश कमजोर देशों पर हावी होते हैं। यह चलन नहीं बदला है। जब अंग्रेज भारत से चले गए, तो वे अपने पीछे एक पूरी सभ्यता, एक भाषा, एक कानूनी व्यवस्था, स्कूल, चर्च और सार्वजनिक इमारतें छोड़ गए, जो आज भी उपयोग में हैं।” उसके बयान की जबरदस्त आलोचना हुई थी।

टकर कार्लसन नेटवर्क (टीसीएन) में अहम निवेशक मलिक की कई बार आलोचना भी हुई। लॉरा लूमर ने उन्हें कार्लसन नेटवर्क में इजराइल की आलोचना करने के पीछे का मास्टरमाइंड बताया था। पिछले साल कार्लसन ने एक ऐसे व्यक्ति का साक्षात्कार लिया था जिसने आरोप लगाया था कि एडॉल्फ हिटलर स्वर्ग में है।

बाद में, वही व्यक्ति तस्कर जेफरी एपस्टीन पर हुए एक कार्यक्रम में दिखा। कार्लसन ने उसे ‘संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे अच्छा और सबसे ईमानदार लोकप्रिय इतिहासकार’ बताया। जुलाई में उसने ईरानी राष्ट्रपति का इंटरव्यू लिया। हालाँकि MAGA और इजराइल-ईरान मुद्दे पर इस इंटरव्यू में विवाद हो गया।

मलिक का नाम एक एक्स पोस्ट में नेटवर्क का ‘प्रमुख समर्थक’ बताया गया था। 1789 कैपिटल अब कार्लसन की कंपनी में निवेशक के रूप में शामिल नहीं है।

ट्रंप प्रशासन के साथ उम्मेद मलिक के गहरे संबंध

मलिक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के सदस्य रहे हैं। मलिक ने एक प्रमुख थिंक टैंक, मिल्केन इंस्टीट्यूट को धन दान किया था। वह इंस्टीट्यूट के बोर्ड में भी थे। यह एक ऐसी गैर लाभकारी विदेश नीति से जुड़ी संस्था है, जिसने कुख्यात जॉर्ज सोरोस सहित उदारवादी हस्तियों के सम्मान में वार्षिक समारोह आयोजित किए हैं।

मलिक ने 2018 में अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक ऑफ अमेरिका छोड़ दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैंक ने उन पर कॉर्पोरेट मानकों की अनदेखी और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाते हुए बर्खास्त कर दिया। इसके बाद मलिक ने बैंक ऑफ अमेरिका पर 100 मिलियन डॉलर से अधिक का मुकदमा दायर किया। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और मलिक ने उस पैसे से अपनी निवेश कंपनी, फरवाहर पार्टनर्स शुरू की।

मलिक 2021 में फ्लोरिडा पहुँचे और वहाँ रिपब्लिकन से जुड़ गए। वह रूढ़िवादी संगठन रॉकब्रिज नेटवर्क में भी शामिल हो गए। इसकी स्थापना जेडी वेंस और क्रिस बुस्किर्क ने की थी। बुस्किर्क 1789 कैपिटल के सह-संस्थापक और दक्षिणपंथी वेबसाइट अमेरिकन ग्रेटनेस के प्रकाशक थे।

मलिक ने 2023 में बुस्किर्क और रिपब्लिकन मेगाडोनर रेबेका मर्सर के साथ मिलकर ‘1789 कैपिटल’ की स्थापना की। मलिक की कंपनी ने पहला निवेश कार्लसन के नेटवर्क में किया था।

मलिक अब सबसे प्रसिद्ध उद्यमियों में से एक बन गए हैं। वह फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित मार-ए-लागो क्लब में काफी समय बिताते हैं। रिपब्लिकन उम्मीदवारों और चैरिटी संस्थाओं को एक बार में हजारों डॉलर के चेक भेजते हैं। स्कॉट बेसेंट को ट्रंप का वित्त मंत्री नियुक्त किए जाने से उन्होंने उनसे मुलाकात की थी। 10 साल पहले बेसेंट को 2015 में पहला ‘हेज फंड’ शुरू करने में उनकी मदद की थी।

बेसेंट ने हाल ही में राहुल गाँधी के अडानी-अंबानी वाले तंज को दोहराते हुए कहा था कि ‘सबसे अमीर भारतीय परिवार’ रूसी तेल से मुनाफा कमा रहे हैं।

मलिक वर्तमान प्रशासन के साथ जुड़े हुए हैं। ट्रंप जूनियर के साथ कई परियोजनाओं पर सहयोग कर रहे हैं। ये परियोजनाएँ लोकतंत्र-विरोधियों को बढ़ावा देने के लिए एक ‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ की स्थापना के लिए चलाई जा रही हैं। साथ ही भारत, हिंदुओं और मोदी सरकार के खिलाफ भावना को बढ़ाने के लिए एक क्लब बनाया गया है।

खालिस्तान समर्थक हरमीत ढिल्लो को जानिए

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस कार्यकाल में भारतीय-अमेरिकी हरमीत कौर ढिल्लन को अमेरिकी न्याय विभाग में नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया। उनका “द ढिल्लन लॉ ग्रुप” नामक एक कानूनी फर्म है। इसके पूरे देश में ऑफिस खुले हुए हैं। हालाँकि, ट्रंप प्रशासन में शामिल होने के बाद उन्हें 2025 में कंपनी छोड़नी पड़ी।

उनके विवादास्पद अतीत और खालिस्तान समर्थक रवैये को देखते हुए उनकी कड़ी आलोचना भी हुई।

ढिल्लो पर बार-बार अमेरिका में खालिस्तानियों का समर्थन करने के आरोप लगे। वह भारत विरोधी गुट की मुखर समर्थक रही हैं। उन्होंने नई दिल्ली पर अमेरिका और कनाडा में मारने के लिए लोगों को भेजने का आरोप लगाया है और यह भी कहा है कि आलोचकों की हत्या में प्रवासी भारतीय भी शामिल हैं।

ढिल्लो ने आरोप लगाया कि खालिस्तानी समर्थकों की हत्या के पीछे मोदी सरकार का हाथ है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने इन हत्याओं पर अजीब चुप्पी साध ली है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से पूछा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।

ढिल्लो ने कनाडा में विपक्ष के नेता पियरे पोलीव्रे का भी हवाला दिया, जिन्होंने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का समर्थन किया था। ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। उन्होंने अमेरिका में खालिस्तानी समर्थकों को ‘सिख नेता’ करार दिया। साथ ही खालिस्तानियों की कट्टरपंथी विचारधारा को कम करके आंका।

ढिल्लो ने भारत में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों पर रॉयटर्स के एक लेख का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में हाल ही में इंटरनेट पर लगे बैन से लोगों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सिख कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को निशाना बनाया गया है। दरअसल उन्होंने उस वक्त की बात की, जब पंजाब में खालिस्तानी प्रचारक और सांसद अमृतपाल सिंह पर कार्रवाई को लेकर झूठा प्रचार किया जा रहा था।

ढिल्लो पहले डेमोक्रेटिक नेता कमला हैरिस की समर्थक थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सैन फ्रांसिस्को के जिला अटॉर्नी पद के लिए हैरिस के लिए काम किया था। हालाँकि कार्लसन शो के दौरान उन्हें हैरिस के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी की।

ढिल्लो ने कमला हैरिस के उच्चारण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह दूसरे अक्षर पर जोर देती हैं, जिससे यह कमाला बन जाता है, जबकि भारत में इसे कमला कहा जाता है। ढिल्लन ने कहा, “वह एक उच्च जाति ‘ब्राह्मण’ के परिवार से आती हैं। उनकी माँ एक ब्राह्मण हैं।”

ट्रम्प प्रशासन रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अपने हास्यास्पद हमलों में भी इस निराधार ब्राह्मण-विशेषाधिकार कथा को जारी रखता है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने जातिगत राजनीति का सहारा लेने की कोशिश की और ज़ोर देकर कहा कि ब्राह्मण ही इस व्यापार के असली लाभार्थी हैं।

ढिल्लो पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। जून 2023 में द गार्जियन में छपी एक खबर में खुलासा हुआ कि उनके नेतृत्व में एक गैर-लाभकारी संस्था में 10 लाख डॉलर से ज्यादा का निवेश किया गया।

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है, “द गार्जियन ने पाया है कि सेंटर फॉर अमेरिकन लिबर्टी (CAL) से कम से कम 13.2 लाख डॉलर उनकी लॉ फर्म, ढिल्लो लॉ ग्रुप को हस्तांतरित किए गए हैं। इसके अलावा, राज्य और संघीय दस्तावेजों से पता चलता है कि ढिल्लो दो घंटे के साप्ताहिक कार्य के लिए CAL से 120,000 डॉलर का वेतन लेती हैं।”

हरमीत ढिल्लो का पार्टनर फर्म भी कट्टरपंथी

जॉन-पॉल-देओल ‘द ढिल्लो लॉ ग्रुप’ के पार्टनरों में एक हैं। वह एक ऑनलाइन ट्रोल की तरह काम करता है, जो नियमित रूप से हिंदुओं और हिंदू देवताओं का अपमान करता है। उसने 2023 में ‘द वायर’ के लेख में आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की निंदा करने वाले एक यूजर्स के पोस्ट पर प्रतिक्रिया स्वरूप भगवान शिव के लिए एक अपमानजनक ट्वीट भेजा था।

हालाँकि ट्वीट को हटा दिया गया, लेकिन उनका इतिहास उन हिंदुओं और सिखों पर हमला करने के लिए जातिवादी और नस्लीय शब्दों का इस्तेमाल करने का रहा है जो उनकी मान्यताओं से सहमत नहीं हैं। वह अक्सर “ब्राह्मणों” को निशाना बनाते हैं, हिंदुओं का “लिंडू” कहकर मजाक उड़ाते हैं और सबसे “पिछड़ी सभ्यता” कहते हैं।

अमेरिका में जाति-विरोधी हिंदू-विरोधी कानून के प्रबल समर्थक देओल ने भी वेदों को जाति से जोड़कर उनका अपमान किया।

दरअसल ट्रंप के आचरण से ज्यादा खतरनाक उनकी सोच है। उन्हें लगता है कि बाकी दुनिया पर अमेरिका का दबदबा है। वह गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के मोदी सरकार से संबंधों को लेकर विपक्ष के प्रचार का इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही जातिगत राजनीति के मुद्दे पर मतदाताओं को भड़का रहे हैं, ताकि नई दिल्ली को अपनी माँगें मनवाने के लिए धमकाया जा सके।

ट्रंप की हताशा और उनके आसपास मौजूद भारत विरोधी लोगों को देखते हुए उनके ‘भारत-विरोध’ को समझा जा सकता है। ‘खालिस्तानी आतंकवाद’ का महिमामंडन भी इसकी कड़ी है।

(ये लेख मूल रूप में अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

अलीगढ़ में अतिक्रमण हटाने पहुँचा दस्ता, विरोध में हिंदुओं की शोभायात्रा से पहले फाड़े भगवान श्रीकृष्ण के पोस्टर: ऑपइंडिया से बोले VHP नेता- इलाका मुस्लिम बहुल

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अतिक्रमण के विरोध में भगवान कृष्ण और भगवान राम के पोस्टर फाड़े गए। हिंदू देवताओं का अपमान बताते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने आक्रोश जताया है। VHP ने गाँधी पार्क पुलिस थाने में मामले की तहरीर दी है, जिसमें उचित कार्रवाई की माँग की गई है।

शिकायतकर्ता VHP के जिला सह मंत्री राहुल वर्मा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया गया कि 30 अगस्त 2025 को मामू भाँजा बाजार में नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी था। यहाँ दुकानों के बाहर टीनशेड के नीचे काउंटर लगाकर अतिक्रमण किया जाता है, जिसे हटाने के लिए नगर निगम कार्यवाही में जुटी थी।

विश्व हिंदू परिषद ने पुलिस को दी तहरीर की फोटो

राहुल वर्मा ने बताया कि ये मुस्लिम बहुल इलाका है, जहाँ हर दुकान किसी मुस्लिम व्यक्ति की है। वे कहते हैं कि इन दुकानदारों ने अतिक्रमण का विरोध करना शुरू कर दिया। भारी संख्या में दुकानदार ने सड़क के बीचोबीच हंगामा शुरू कर दिया।

VHP नेता ने बताया कि विरोध के बीच कुछ मुस्लिम युवकों ने सड़कों पर लगे शोभायात्रा के पोस्टर को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिन पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर थी। उन्होंने बताया कि जमीन के काफी ऊपर लगाए गए पोस्टर को नीचे उतारा और तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसमें भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के पोस्टर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए।

इस घटना का वीडियो ऑपइंडिया के पास है। वीडियो में भी देखा जा सकता है कि एक मुस्लिम युवक भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के पोस्टर पर हमला कर रहा है। वह हवा में आधे लटके पोस्टर को हाथों से पीटता नजर आ रहा है और उसके पीछे खड़ी कुछ लोग वीडियो भी बना रहे हैं।

विश्व हिंदू परिषद की शोभायात्रा के थे पोस्टर

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ब्रजप्रांत के मीडिया प्रमुख प्रतीक रघुवंशी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि 31 अगस्त 2025 को VHP के स्थापना दिवस के अवसर पर शोभायात्रा निकालने की तैयारी हो रही थी। इसके तहत पूरे शहर में हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर लगाए गए थे। ये पोस्टर मामू भाँजा मार्केट में भी लगाए, जहाँ मुस्लिमों की आबादी काफी ज्यादा है।

ऑपइंडिया से बातचीत में रघुवंशी ने कहा कि शोभायात्रा से एक दिन पहले ही भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के पोस्टर को फाड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि इस कृत्य से सभी VHP और बजरंग दल कार्यकर्ता आक्रोशित हैं, क्योंकि यह हिंंदू धर्म का अपमान है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा।

पुलिस ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

जिला सह मंत्री राहुल वर्मा के नेतृत्व में VHP और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस से भी मामले की शिकायत की है। मामले के दिन 30 अगस्त 2025 को ही संबंधित गाँधी पार्क पुलिस थाने में थाना प्रभारी राजवीर सिंह परमार को तहरीर सौंपी गई।

इस अवसर पर ब्रजप्रान्त मीडिया प्रमुख करन चौधरी, महानगर सह सोशल मीडिया प्रमुख दिनेश बघेल समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

राहुल वर्मा ने बताया कि पुलिस ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने मामले में पुलिस की लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी के नेता ने सहायक नगरायुक्त को दी धमकी

वहीं समाजवादी पार्टी (SP) महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी ने मामू भाँजा मार्केट में अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध किया और नगर निगम सहायक नगरायुक्त वीर सिंह को फोन पर धमकी दी। इस फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी ऑपइंडिया के पास है।

सहायक नगरायुक्त से बातचीत के दौरान अब्दुल हमीद गुंडागर्दी पर उतर आए। अब्दुल हमीद ने नगर निगम पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत विशेष समुदाय को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया। सपा नेता ने धमकी दी कि वे नगर निगम अधिकारियों को अतिक्रमण करने से रोकेंगे।

12 साल की हिंदू बच्ची को अगवा कर कराया निकाह, पीड़ित पिता को 200 की भीड़ ने घेर कर कहा- अब मुस्लिम हो गई, तुम्हारा अधिकार नहीं: जान से मारने की दी धमकी

वाराणसी के आदमपुर में एक 12 साल की हिंदू बच्ची का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण कराने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित निहाल और एक अन्य महिला को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची के पिता ने आरोप लगाया है कि निहाल तीन महीने पहले उनकी बेटी को अगवा करके ले गया था और बाद में उसका धर्म बदलवाकर मौलवी से निकाह करवा दिया। जब वे अपनी बेटी को वापस लेने गए तो आरोपित परिवार और 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

बच्ची के पिता ने लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी तीन महीने से लापता थी। जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी निहाल के पास है, तो वे उसे वापस लाने के लिए उसके घर गए। लेकिन वहाँ निहाल, उसका अब्बू शरीफ, भाई लालू और अन्य परिजनों ने उन्हें धमकी दी।

आरोपितों ने कहा कि उनकी बेटी का धर्मांतरण हो चुका है और अब उस पर उनका कोई अधिकार नहीं है। जब पिता ने इसका विरोध किया तो करीब 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और धमकी दी कि अगर उन्होंने अपनी बेटी को वापस लेने की कोशिश की तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। डरकर पीड़ित पिता को वहाँ से भागना पड़ा।

पुलिस पर भी लगे लापरवाही के आरोप

पिता का आरोप है कि उन्होंने इस घटना की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस चौकी और थाने में दी, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर टाल दिया कि ‘बड़े साहब नहीं हैं, बाद में आना।’

कई बार थाने के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी बेटी को ढूँढने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल से गुहार लगाई, जिन्होंने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए।

दो आरोपित गिरफ्तार, तनाव का माहौल

पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद पुलिस ने निहाल, उसके अब्बू शरीफ, भाई लालू और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सोमवार (1 सितंबर 2025) की रात को मुख्य आरोपित निहाल और एक महिला को गिरफ्तार कर लिया।

बाकी आरोपितों की तलाश जारी है। इस घटना के बाद आदमपुर इलाके में तनाव का माहौल है। पीड़ित परिवार ने अपनी बच्ची की सुरक्षित वापसी की माँग की है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले की गहनता से जाँच कर रहे हैं और जल्द ही बच्ची को ढूँढकर आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ वाली थ्योरी के फिर से फूट गए गुब्बारे, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास मिले 2 एक्टिव वोटर ID: मतदाता सूची में मृत सदस्य का भी नाम

कॉन्ग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ की बातें उनकी पार्टी के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गईं। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 2 सितंबर 2025 को खुलासा किया कि कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो एक्टिव EPIC नंबर हैं। एक निजामुद्दीन ईस्ट में जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में और दूसरा नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के काका नगर में।

खेड़ा के नाम पर दो एक्टिव EPIC नंबर

मालवीय द्वारा साझा की गई जानकारी सार्वजनिक है। OpIndia ने इन जानकारियों को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मिलान किया है, जिसमें ये दावा सच पाया गया है। वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि खेड़ा का नाम जंगपुरा में EPIC नंबर XHC1992338 के साथ दर्ज है।

Source: Amit Malviya/ECI

पवन खेड़ा का नाम न सिर्फ जंगपुरा में है, बल्कि नई दिल्ली में EPIC नंबर SJE0755967 के साथ भी है। वोटर लिस्ट में एंट्री अभी भी एक्टिव हैं।

Source: Amit Malviya/ECI

खेड़ा का वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट नाम होना एक गंभीर सवाल उठाता है कि चुनाव आयोग को इसकी जाँच करनी चाहिए कि उनके पास दो एक्टिव वोटर आईडी कैसे हैं। इसके अलावा मालवीय ने अपने पोस्ट में कहा कि अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या खेड़ा ने कभी एक से ज्यादा बार वोट डाला है।

मृत परिवार के सदस्य का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में

उसी पते पर अन्य वोटरों की जाँच करने पर OpIndia को पता चला कि रूपम खेड़ा का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में एक्टिव है। खास बात ये है कि रूपम का निधन 2021 में कोविड-19 की वजह से हो गया था।

Source: Amit Malviya/ECI

इसके अलावा एक व्यक्ति श्रावण कुमार प्रजापत का नाम दोनों वोटर लिस्ट में दिखा। दिलचस्प बात ये है कि जंगपुरा क्षेत्र से खेड़ा की पत्नी का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है।

Source: Amit Malviya/ECI

कॉन्ग्रेस नेताओं के बार-बार ‘वोट चोरी’ के दावों के बावजूद, उनके अपने मृत परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने जैसे बेसिक काम भी नजरअंदाज किए गए हैं।

पाखंडी राजनीति की खुल गई पोल

कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा दूसरों को चुनावी ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं और जब किसी का नाम अलग-अलग जगहों पर चार बार वोटर लिस्ट में दिखा तो हंगामा मचाया। बाद में वह व्यक्ति कैमरे पर आया और साफ किया कि उसने पहले जहाँ रहता था, वहाँ से नाम हटाने की अर्जी दी थी, लेकिन वोटर लिस्ट अपडेट नहीं हुई।

इसमें विडंबना ये है कि उनके अपने रिकॉर्ड ही गड़बड़ियों से भरे हैं। मालवीय ने ये भी बताया कि सोनिया गाँधी का नाम भारत की वोटर लिस्ट में तब दर्ज था, जब वो भारत की नागरिक भी नहीं बनी थीं। उन्होंने ये भी कहा कि राहुल गाँधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा में चुनावी गड़बड़ी के अपने आरोपों के बारे में कोई औपचारिक शपथपत्र शिकायत नहीं दी है और सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में गड़बड़ी के आरोप वाले केस को पहले ही खारिज कर दिया है।

इससे पहले, पवन खेड़ा ने CSDS-Lokniti के संजय कुमार के X पर एक पोस्ट के आधार पर डेटा शेयर किया था, जिसमें महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का दावा था। हालाँकि बाद में संजय कुमार ने वो पोस्ट डिलीट कर दी और कहा कि उनकी टीम ने टेबल्स को ‘गलत पढ़ा’। राहुल गाँधी और अन्य नेताओं के चुनाव आयोग के खिलाफ किए गए हर दावे पिछले कुछ महीनों में खोखले साबित हुए हैं।

यूट्यूबर ने एयरबेस-सेना की जानकारी पाकिस्तान भेजी, फोन में मिले 120 ISI एजेंट के नंबर: 1700 पन्नों की चार्जशीट, ज्योति मल्होत्रा के साथ दिखता था जसबीर सिंह

पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई यू्ट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के साथ गिरफ्तार जसबीर सिंह के खिलाफ पुलिस ने 1700 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसमें जसबीर सिंह के पाकिस्तान को भारत के फाइटर जेट एयरबेस, आर्मी बेस और भाखड़ा नांगल डैम की जानकारी भेजने के सबूत हैं।

चार्जशीट के मुताबिक, जसबीर पाकिस्तान के 120 लोगों से संपर्क में था। इसमें ISI के भी लोग शामिल थे। ISI के शाकिर का नंबर उसके फोन में जट रँधावा के नाम से सेव मिला। जसबीर के पाकिस्तान के होटलों में भी ISI के लोगों से मिलने की जानकारी सामने आई है।

जसबीर के पास 2 पासपोर्ट, 4 बार गया पाकिस्तान

जसबीर के पास 2 पासपोर्ट थे और वह चार बार पाकिस्तान जा चुका है। वह पाकिस्तानी यूट्यूबर नासिर ढिल्लो के जरिए पाकिस्तान दूतावास का अधिकारी और ISIS का सदस्य दानिश से भी मिला। पुलिस ने यह भी बताया कि जसबीर कई बार ज्योति मल्होत्रा के साथ भी पाकिस्तानी दूतावास गया था। ज्योति मल्होत्रा को भी पाकिस्तान की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

चार्जशीट में सामने आया कि दूतावास में दानिश ने उससे भारत के सिम माँगे थे, जिसे वह उपलब्ध नहीं करा पाया था। साथ ही जसबीर सिंह ने अपना लैपटॉप भी दानिश को दिया था। बाद में जसबीर ने लैपटॉप और मोबाइल का डाटा भी डिलीट कर दिया। इस डाटा को वापस लाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि दानिश वही है, जिसकी ज्योति मल्होत्रा के साथ नई दिल्ली के पाकिस्तानी दूतावास में आयोजित पार्टियों में ली गई तस्वीरें वायरल हुई थी। ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान की जासूसी के आरोप में पकड़े जाने के बाद दानिश को भी दूतावास से निलंबित कर दिया गया था।

कौन है यूट्यूबर जसबीर सिंह?

यूट्यूबर जसबीर सिंह को जून 2025 में पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया था। अधिकारियों के मुताबिक, जसबीर सिंह पाकिस्तान की ISI के लिए जासूसी कर रहा था। जसबीर के समान आरोप में पकड़ी गई हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के साथ लिंक जुड़े थे।

जसबीर सिंह के मूलरूप से पंजाब के रूपनगर स्थित महलान गाँव का रहने वाला है। वह ‘जानमहल वीडियो’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाता था, जिसके 11 लाख सब्सक्राइबर थे। जसबीर ट्रैवलिंग और फूड व्लॉगिंग से जुड़ा कन्टेन्ट वीडियो में डालता था। इसी चैनल पर उसके पाकिस्तान से जुड़े कुछ वीडियो भी मिले थे।

यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की चार्जशीट में भी खुले थे कई राज

इससे पहले यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा, जिसे पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, उसके खिलाफ भी पुलिस ने 14 अगस्त 2025 को चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट में ज्योति मल्होत्रा के पाकिस्तान के कई एजेंटो से संपर्क की बात सामने आई थी।

2500 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया कि ज्योति मल्होत्रा लंबे समय से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जासूसों के संपर्क में थी। वह पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश के अलावा हसन अली, शाकिर और नासिर ढिल्लों से भी लगातार बातचीत करती थी।

‘भारत की चिप से बदलेगी दुनिया की तस्वीर’: सेमीकॉन इंडिया 2025 के उद्घाटन पर बोले PM मोदी, सेमीकंडक्टर के 1 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजार में होगा अहम हिस्सा

पीएम मोदी ने नई दिल्ली की यशोभूमि में मंगलवार (2 सितंबर 2025) को सेमीकॉन इंडिया 2025 (Semicon India 2025) का उद्घाटन किया। इसका मकसद भारत को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में सुपर पावर बनाना और तकनीक के क्षेत्र में आगे ले जाना है। इस सबसे बड़े सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रोनिक्स शो में 33 देशों से आए करीब 350 से अधिक कंपनियाँ शामिल हुई हैं।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, “साल के पहले तिमाही पर जीडीपी में भारत ने हर उम्मीद, हर अपेक्षा, हर आकलन से बेहतर प्रदर्शन किया है। एक तरफ दुनियाभर में इकोनोमी की चिंताएँ हैं, उस हालत में भारत ने 7.1 फीसदी ग्रोथ दिखाई है। ये ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, कंस्ट्रक्शन समेत हर क्षेत्र में दिख रहा है। इससे देश में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। इसके साथ ही भारत तीसरी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।”

छोटे से चिप में दुनिया सिमटी- पीएम

पीएम ने कहा कि पहले दुनिया का भाग्य तेल की कुओं से तय होता था, इस आधार पर ग्लोबल इकोनॉमी ऊपर नीचे होती रहती थी। लेकिन 21वीं शताब्दी की इकोनॉमी छोटे से चिप में सिमट कर रह गयी है। ये चिप भले छोटी सी है लेकिन इसमें दुनिया की प्रगति को गति देने की ताकत है। इसीलिए आज सेमीकंडक्टर का वैश्विक बाजार 600 अरब डॉलर तक पहुँच रहा है और अगले कुछ वर्षों में यह 1 ट्रिलियन डॉलर को भी पार कर जाएगा, इसमें अहम हिस्सा भारत का होगा।

सेमीकॉन इंडिया 2025 कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “वह दिन दूर नहीं जब भारत की सबसे छोटी चिप दुनिया में सबसे बड़ा बदलाव लाएगी। बेशक, हमारी यात्रा देर से शुरू हुई, लेकिन अब हमें कोई रोक नहीं सकता।”

इससे पहले पीएम ने निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि वह दिन दूर नहीं जब दुनिया कहेगी, भारत में डिजाइन, भारत में निर्मित, दुनिया द्वारा विश्वसनीय चिप भारत का है। ये कार्यक्रम जिस क्षेत्र पर फोकस किया गया है, उनमें सेमीकंडक्टर फैब्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रिसर्च एंड इनवेस्टमेंट और एडवांस्ड पैकेजिंग शामिल हैं।

ट्रंप ने पाकिस्तान में फैमिली बिजनेस डील के लिए भारत के साथ संबंधों की दी कुर्बानी: अमेरिका के पूर्व NSA ने अपने ही राष्ट्रपति को घेरा, PM मोदी की RIC कूटनीति से होश उड़े

चीन में SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती देख बौखलाए बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने अब भारत पर लगाए 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर सफाई दी है तो वहीं अमेरिकी के ही पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पाकिस्तान के साथ ट्रंप के रिश्ते को लेकर झिड़की दी है।

अमेरिका में जो बाइडन सरकार के दौरान NSA रहे जेक सुलिवन ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने अपने परिवार पाकिस्तान के साथ फैमिली बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भारत के साथ दशकों पुराने रिश्तों को ठुकरा दिया है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को पूरी तरह से एकतरफा आपदा बताया था। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि भारत ने जीरो टैरिफ की पेशकश की थी।

ट्रंप ने एक्स हैंडल ट्रुथ सोशल पर किए एक पोस्ट में लिखा, “वे (भारत) हमें भारी मात्रा में सामान बेचते हैं लेकिन हम उन्हें बहुत कम सामान बेचते हैं। अब तक यह पूरी तरह से एकतरफा रिश्ता रहा है और यह कई दशकों से चला आ रहा है। इसकी वजह यह है कि भारत ने अब तक हमसे इतने ऊँचे टैरिफ वसूले हैं, जो किसी भी देश से ज्यादा हैं। हम भारत में सामान नहीं बेच पा रहे हैं। यह पूरी तरह से एकतरफा आपदा रही है।”

इसके साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर अपने उस दावे को दोहराया, जिसे नई दिल्ली पहले ही खारिज कर चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने अपने टैरिफ को ‘जीरो’ करने की पेशकश की थी लेकिन इसमें देर हो चुकी थी, जबकि भारत को सालों पहले ऐसा कर लेना चाहिए था।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका ने पिछले महीने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दी थी। ट्रंप ने अपने पोस्ट में फिर से दोहराया कि रूस से भारत तेल और हथियार खरीद रहा है। लेकिन अब भारत और रूस के बीच रिश्ते और भी बेहतर देखकर ट्रंप बौखला गए हैं।

चीन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच गहरी दोस्ती देखी गई थी। इसके कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने टैरिफ पर सफाई देनी शुरू कर दी। ट्रंप को यह परेशानी है कि उन्होंने भारत और रूस के रिश्ते खराब करने के लिए देश पर भारी भरकम टैरिफ लगाया जबकि नतीजा इससे उलट दिखने को मिला।

भारत को रूस से दूर करने के प्रयास ध्वस्त: अमेरिकी के पूर्व NSA

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन, जिन्होंने 2018 से 2019 तक डोनाल्ड ट्रंप के साथ काम किया। उन्होंने भी ट्रंप को भारत-रूस के रिश्ते खराब करने के कारण देश पर लगाए टैरिफ को लेकर घेरा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की टैरिफ नीति ने भारत को रूस से दूर करने और चीन से बढ़ते खतरे से निपटने के प्रयासों को ध्वस्त कर दिया है।

जॉन बोल्टन ने डोनाल्ट ट्रंप की टैरिफ नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को गहरा करने के अमेरिका के दशकों के प्रयासों को झटका लगा है जबकि चीन को एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिल गया है।

पूर्व NSA ने कहा- पाकिस्तान से बिजनेस के लिए तोड़ा रिश्ता

इसके साथ ही अमेरिकी पूर्व NSA जेक सुलिवन ने भी डोनाल्ड ट्रंप की पोल खोली। जेक सुलिवन ने यूट्यूब चैनल मेदासटच (MeidasTouch) को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “भारत के साथ हमें तकनीक, टैलेंट, अर्थव्यवस्था और कई अन्य क्षेत्रों में साथ काम करना चाहिए, खासकर चीन से रणनीतिक खतरे का मुकाबला करने के लिए।”

सुलिवन कहते हैं कि लेकिन ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ अपने फैमिली बिजनेस को बढ़ाने के लिए भारत के साथ रिश्तों को ‘दरकिनार कर दिया।’ उन्होंने इसे अमेरिका के लिए ‘बड़ा रणनीतिक नुकसान’ बताया है।

भारत की दोस्ती 21वीं सदी की साझेदारी: अमेरिकी दूतावास

चीन में SCO सम्मेलन के बाद जहाँ डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर सफाई देने पर उतर आए। वहीं इससे पहले अमेरिकी दूतावास ने भी नरम लहजे में भारत के साथ दोस्ती को याद किया। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि भारत-अमेरिका की दोस्ती 21वीं सदी की ‘परिभाषित साझेदारी’ है।

दूतावास ने कहा था कि दोनों देशों की साझेदारी लगातार नई ऊँचाइयों को छू रही है और इसकी असली वजह दोनों देशों के लोगों के बीच की दोस्ती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बयान जारी कर कहा था कि भारत और अमेरिका के लोगों के बीच की गहरी दोस्ती ही उनके संबंधों का आधार है। उन्होंने यह भी माना कि यही दोस्ती उन्हें आर्थिक संबंधों की अपार संभावनाओं को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।

पीटर नवारो के ‘ब्राह्मण’ वाले बयान पर उदित राज का समर्थन, विदेशी झूठ को घरेलू हथियार बना रही कॉन्ग्रेस

हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत के ख़िलाफ कई तीखे बयान दिए हैं। उन्होंने भारत की व्यापार नीतियों पर निशाना साधते हुए उसे ‘टैरिफ का महाराजा’ बताया और रूस से तेल ख़रीदने को लेकर भी आलोचना की। पीटर नवारो ने आरोप लगाया कि रूसी तेल से ‘ब्राह्मण’ मुनाफ़ा कमा रहे हैं। वहीं, इस बात का समर्थन कॉन्ग्रेस के नेता उदित राज ने किया है।

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज का बयान

जहाँ एक तरफ भारत में पीटर नवारो के बयान की चौतरफा निंदा हो रही थी, वहीं कॉन्ग्रेस के नेता उदित राज ने उनके बयान का समर्थन किया। उदित राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में नवारो की बात को ‘तथ्यात्मक रूप से सही’ बताया। उदित राज ने कहा कि भारत में ऊँची जाति के कारोबारी ही रूस से तेल खरीदकर फ़ायदा कमा रहे हैं और आम भारतीयों को इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछड़ी जातियों और दलितों को कॉर्पोरेट जगत में स्थापित होने में 100 साल लग जाएँगे।

पीटर नवारो का बयान या तो अज्ञानता से भरा था या फिर जानबूझकर भारत के सामाजिक ढाँचे पर हमला करने की रणनीति का हिस्सा था। लेकिन उदित राज ने उस बयान से सहमत होकर एक तरह से गलती से सच बोल दिया। उदित राज को ‘बोस्टन ब्राह्मण’ शब्द का अर्थ जरूर पता होगा। वो इतने बेवकूफ़ नहीं, जितने लगते हैं। सच ये है कि कॉन्ग्रेस और अमेरिका अब एक जैसी भाषा बोल रहे हैं।

‘बोस्टन ब्राह्मण’ का संदर्भ और भारतीय संदर्भ में भ्रम

पीटर नवारो के बयान की तह तक जाएँ तो, उन्होंने संभवत अमेरिकी राजनीतिक संदर्भ में इस्तेमाल होने वाले शब्द ‘बोस्टन ब्राह्मण‘ का गलत इस्तेमाल किया है। अमेरिका में यह शब्द एक अभिजात वर्ग के लिए इस्तेमाल होता है, जो अपनी सामाजिक और आर्थिक हैसियत के कारण राजनीति और व्यापार में प्रभावी माने जाते हैं।

कुछ लोग इसी अभिजात्य, शक्तिशाली, पढ़े-लिखे और खुद को बहुत हद तक बाहरियों से दूरी बनाकर चलने वाले वर्ग पर खीझ उतारने और फब्तियाँ कसने के लिए ‘बोस्टन ब्राह्मण’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ट्रंप के साथी का भी रेफरेंस यही था। कॉन्ग्रेसियों ने भी भारतीय कंपनियों को इसी टर्म की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की है, क्योंकि दोनों की मानसिकता एक जैसी है।

इसका किसी जाति विशेष से कोई लेना-देना नहीं है। पीटर नवारो ने इस शब्द का इस्तेमाल कर भारत की सामाजिक संरचना को बिना समझे, राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की।

ब्रिटेन में फिर से हिंदुओं को निशाना बनाने में जुटे इस्लामी कट्टरपंथी, गणेश चतुर्थी पर भगवा झंडे को बताया ‘कट्टरवाद’: एकजुट बोले- ये शांति-साहस और सच्चाई का प्रतीक, कार्रवाई की माँग

ब्रिटेन के लीसेस्टर में एक बार फिर हिंदू विरोधी माहौल खड़ा करने की कोशिश हो रही है। गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा में भगवा झंडे लगाने पर मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (MCB) ने आपत्ति जताई है। इसे ‘हिंदुत्व कट्टरवाद’ बताकर कार्रवाई की माँग की गई है। हिंदू संगठनों ने इसे न सिर्फ गलत बताया है, बल्कि चेतावनी दी है कि इससे नफरत को बढ़ावा मिल सकता है। 2022 में लीसेस्टर हिंसा के जख्म अभी भरे नहीं हैं, और एक बार फिर वही स्क्रिप्ट दोहराई जा रही है।

भगवा झंडे पर क्यों हुआ विवाद?

गुरुवार (28 अगस्त 2025) को मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (MCB) ने एक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा में भगवा झंडों का इस्तेमाल ‘हिंदुत्व अतिवाद’ को दिखाता है। उन्होंने प्रशासन से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की।

इसके बाद लीसेस्टर की 40 हिंदू संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले हिंदू कम्युनिटी ऑर्गनाइजेशन ग्रुप (HCOG) ने इसका कड़ा विरोध किया। HCOG के संयोजक विनोद पॉपट ने कहा कि भगवा झंडा सदियों से हिंदू धर्म में पूज्य है। यह शांति, साहस और सच्चाई का प्रतीक है, न कि कट्टरता का। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप हिंदुओं का अपमान हैं और इससे समाज में नफरत फैल सकती है।

2022 में भी हुआ था ऐसा ही विवाद

यह पहली बार नहीं है कि लीसेस्टर में इस तरह का विवाद हुआ हो। 2022 में, भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के बाद भी यहाँ हिंसा भड़की थी। उस समय भी झूठी खबरें और अफवाहें फैलाई गई थीं। झूठे दावे किए गए कि हिंदुओं ने मुस्लिमों के खिलाफ नारे लगाए और मस्जिद को तोड़ा।

पुलिस ने इन दावों को बाद में गलत बताया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। झूठी खबरों के कारण एक महीने तक हिंसा हुई, जिसमें हिंदू घरों और मंदिरों पर हमले हुए, भगवा झंडों का अपमान किया गया और लोगों को चाकू तक मारा गया।

2022 की हिंसा के पीछे कई तरह की अफवाहें थीं। जैसे, हिंदूओं द्वारा मुस्लिम लड़की को अगवा करना या कुरान का अपमान करना, जिसे पुलिस ने झूठा पाया। कुछ सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों ने वीडियो फैलाए और भीड़ को भड़काया। उन्होंने ‘मुस्लिम पेट्रोल इन लीसेस्टर’ जैसे नारे भी लगाए।

नवंबर 2022 में आई एक रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि हिंसा ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ से नहीं, बल्कि इस्लामी दुष्प्रचार से भड़की थी। इस रिपोर्ट ने यह भी बताया कि कई मीडिया संस्थानों ने इन झूठी खबरों को बढ़ावा दिया, जिससे हिंदुओं के लिए ख़तरा पैदा हुआ।

आगे क्या?

लीसेस्टर की घटना एक बड़ा सबक है। यह दिखाती है कि जब झूठे दावे और अफवाहें समाज और मीडिया द्वारा फैलाए जाते हैं, तो वे एक समुदाय के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। भगवा झंडे को ‘कट्टरपंथ’ बताना केवल एक अपमान नहीं है, बल्कि यह हिंदुओं को अलग-थलग करने और डराने की एक सोची-समझी कोशिश है।

जब तक ब्रिटिश सरकार और मीडिया इस तरह के झूठे आख्यानों को रोकना नहीं सीखेगी, तब तक ब्रिटेन में हिंदुओं को ऐसी राजनीति का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।