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भारत को तटस्थ देख बदले US प्रशासन के सुर: नए राजदूत ने कहा- इंडिया हमारी प्राथमिकता, विदेश मंत्री ने माना- दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण संबंध

अमेरिका की राजनीति में भारत को एक महत्वपूर्ण और केंद्रीय साझेदार के रूप में माना जा रहा है। पहले कभी डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की नीतियों पर सवाल उठाए थे, वहीं अब उनका प्रशासन भारत को ‘भविष्य की दिशा तय करने वाला साझेदार’ बता रहा है। इस बदलाव का संकेत कई घटनाओं से भी मिलता है, जैसे कि भारत के मंत्रियों को व्यापार वार्ता के लिए वॉशिंगटन बुलाना।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने भी भारत के साथ रिश्ते को ‘दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक’ बताया है। अमेरिका के अगले राजदूत नामित किए गए सर्जियो गोर ने साफ किया है कि भारत को चीन से दूर करके अपनी तरफ लाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ट्रंप प्रशासन के इस रणनीतिक बदलाव से यह साफ है कि अमेरिका अब भारत के बिना आगे नहीं बढ़ना चाहता।

भारत अब अमेरिका की ‘टॉप रिलेशनशिप’

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने भारत के साथ अमेरिका का रिश्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक बताया है। मार्क रुबियो का मानना है कि 21वीं सदी में दुनिया का भविष्य कैसा होगा, यह तय करने में यह रिश्ता बहुत मायने रखता है। मार्क रुबियो का कहना है कि 21वीं सदी की कहानी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लिखी जाएगी। भारत का महत्व इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने अपनी कमान का नाम भी बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक’ कर दिया है।

मार्क रुबियो के अनुसार, भारत-अमेरिका के बीच कई अहम मुद्दे हैं जिन पर उन्हें मिलकर काम करने की जरूरत है, जैसे कि यूक्रेन और अन्य मामले। मार्क रुबियो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में एक ऐसा प्रतिनिधि होना चाहिए, जिसकी सीधी पहुँच अमेरिकी राष्ट्रपति तक हो। इसलिए मार्क ने सर्जियो गोर को इस पद के लिए सही उम्मीदवार बताया हैं। क्योंकि वह प्रशासन और ट्रंप ऑफिस दोनों जगह से काम करवा सकते हैं। ऐसा व्यक्ति होने से दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

भारत को चीन से दूर करके अमेरिका की तरफ लाना

अमेरिका के अगले राजदूत के तौर पर सर्जियो गोर को चुना गया है। सर्जियो गोर ने कहा अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता भारत को चीन से दूर करके अपनी तरफ लाना है। इसके अलावा, भले ही अभी भारत और अमेरिका के बीच कुछ छोटे-मोटे मतभेद हों, लेकिन ये जल्द ही सुलझ जाएँगे। दोनों देशों के बीच दशकों पुराने और चीन की तुलना में काफी गहरे संबंध हैं।

सर्जियो गोर ने कहा कि चीन सिर्फ भारत के साथ लगी सीमा पर ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में विस्तारवाद की नीति अपना रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत का बाज़ार उनके कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) के लिए खुले। सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत का मध्यवर्ग अमेरिका की पूरी आबादी से भी बड़ा है।

ट्रंप प्रशासन की बदली सोच

सुनवाई के दौरान रूबियो ने साफ कहा कि सेर्जियो गोर सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के भरोसेमंद लोगों में हैं और उनके पास सीधे ओवल ऑफिस तक पहुँच है। ऐसे में भारत को अमेरिका में वो जगह मिल रही है, जहाँ से नीतियाँ बनती हैं। यह अमेरिका की नीति में एक बड़ा बदलाव है, जो दिखाता है कि भारत को अब सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक साथी माना जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन का यह यू-टर्न सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी नहीं है। भारत के मंत्रियों को अमेरिका बुलाया गया है। वहाँ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी है। यह सब दर्शाता है कि अब अमेरिका समझ चुका है कि भविष्य की वैश्विक व्यवस्था भारत को साथ लिए बिना नहीं बनाई जा सकती।

जहाँ कभी ट्रंप प्रशासन भारत को लेकर दोराहे पर खड़ा था, अब वहीं भारत को भविष्य का केंद्र मान रहा है। दिल्ली को अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि रणनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव भारत की मजबूती का संकेत भी है और दुनिया में उसकी बढ़ती अहमियत का सबूत भी।

राहुल गाँधी ने म्यांमार से बनवाया ‘वोट चोरी’ का खाका? चर्चा शुरू होते ही कॉन्ग्रेसी देने लगे सफाई: जानिए क्या है मेटाडाटा, जिसे खंगालने पर मिले ‘विदेशी’ लिंक

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग (ECI) को बदनाम करने के लिए ‘वोट चोरी’ की साजिश का प्रपंच रचा। इसके लिए बकायदा कागज भी सामने लेकर आए । लेकिन वे अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। बुधवार (10 सितंबर 2025) को यह खुलासा हुआ कि राहुल गाँधी ने इस साल 7 अगस्त 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिन दस्तावेजों से ‘वोट चोरी’ को साबित करने की कोशिश की थी, वह असल में म्यांमार में तैयार किया गया था।

यह खुलासा सबसे पहले एक्स हैंडल ‘खुरपेंच’ ने किया। 7 पोस्ट की एक थ्रेड में इस अकाउंट ने ठोस सबूतों के साथ दावा किया कि राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ वाला दस्तावेज भारत के बाहर बनाया गया था।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इस दस्तावेज को अपनी वेबसाइट पर साझा किया था, जिसे ‘वोट चोरी प्रूफ’ नाम के टेक्स्ट से हाइपरलिंक किया गया था। गूगल ड्राइव के एक फोल्डर में कुल 3 PDF फाइलें मिलीं, जिसका नाम था, ‘Rahul Gandhi’s Presentation’। इन फाइलों में अंग्रेजी, हिंदी और कन्नड़ भाषा में वही दस्तावेज मौजूद थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस नेता ने 7 अगस्त की अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया था।

एक्स हैंडल ‘खुरपेंच’ ने इन फाइलों का मेटाडाटा खंगाला। जानकारी के लिए बता दें कि मेटाडाटा किसी भी फाइल की वह जानकारी होती है, जो उसकी सामग्री से अलग होती है।

मेटाडाटा में लेखक का नाम, फाइल बनने की तारीख, समय और साइज जैसी जानकारियाँ होती हैं। इसकी मदद से किसी फाइल को इस्तेमाल करना, ढूँढना और व्यवस्थित करना आसान हो जाता है।

क्या है मेटाडाटा

मेटाडाटा को ‘डेटा के बारे में डेटा’ कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण संदर्भ परत है, जो रॉ डाटा को मीनिंगफूल ढाँचे में लाता है और उसको इस्तेमाल करने लायक बनाता है। मेटाडाटा डेटा और उसके इस्तेमाल के बीच पुल का काम करता है, ताकि ये यूजर और सिस्टम दोनों जानकारी को सही तरीके से समझ सके और उपयोग कर सके।

चाहे किसी दस्तावेज के लेखक की पहचान करनी हो, डेटाबेस के फ़ील्ड की संरचना तय करनी हो या किसी फोटो में स्थान से जुड़ा टैग जोड़ना हो, मेटाडाटा वह ढाँचा देता है जो बिखरे हुए डेटा को उपयोगी जानकारी में बदल देता है।

अपनी जाँच में ‘खुरपेंच’ ने पाया कि राहुल गाँधी की प्रेजेंटेशन के तीनों वर्ज़न म्यांमार स्टैंडर्ड टाइम (MMT) में बनाई गई हैं। MMT म्यांमार का टाइम जोन है, जो कॉर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) से 6 घंटे 30 मिनट आगे है। तुलना के लिए बता दें कि भारतीय मानक समय (IST) UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

भारत में बनी PDF फाइलों में हमेशा UTC +5:30 का समय दिखेगा, न कि +6:30। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता के ‘वोट चोरी’ दस्तावेज के मेटाडाटा से साफ है कि ये फाइलें म्यांमार टाइम जोन में बनी हैं।

‘खुरपेंच’ ने यह भी बताया कि वीपीएन (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करने या गूगल ड्राइव से फाइल शेयर करने पर भी PDF फाइल का एम्बेडेड मेटाडाटा नहीं बदलता।

इस खुलासे से कॉन्ग्रेस खेमे में हलचल मच गई। आरोपों का जवाब देने के लिए कॉन्ग्रेस की IT सेल के ट्रोल और समर्थक एक्स पर सक्रिय हो गए। खुरपेंच के दावों को कॉन्ग्रेस नेता और समर्थक नकारने में लग गए। गुरुवार (11 सितंबर 2025) को कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने राहुल गाँधी की सफाई में चैट जीपीटी की मदद लेने की कोशिश की, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं हुआ।

उन्होंने दावा किया कि टाइमजोन में गड़बड़ी किसी सॉफ्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन की समस्या या फिर एडोबी बग के कारण हुई है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह एक घंटे का फर्क किसी स्थान परिवर्तन का सबूत नहीं है, बल्कि यह आम तकनीकी गड़बड़ी है। एडोबी प्रोडक्ट्स में अक्सर टाइमस्टैम्प से जुड़ी ऐसी दिक्कतें आती हैं, जहाँ मेटाडाटा फील्ड्स में ऑफसेट मेल नहीं खाता।”

इसके जवाब में ‘खुरपेंच’ ने बताया कि एडोबी किसी भी बग को तुरंत पहचानकर ठीक कर देता है। उसने साफ किया कि कौन-सा सॉफ्टवेयर वर्ज़न इस्तेमाल हुआ और पूछा कि आखिर कौन-सा बग था जिसने IST को बदलकर MMT दिखा दिया।

उसने यह भी बताया कि यह पीडीएफ एडोबी इलस्ट्रेटर (Adobe Illustrator) से बनाई गई थी, इसलिए इसकी तुलना दूसरे एडोबी प्रोडक्ट्स जैसे लाइटरूम (Lightroom) या ब्रिज (Bridge) से करना बिल्कुल गलत है।

जब कॉन्ग्रेस समर्थित कुछ ट्रोल्स ने ‘लाइटरूम में टाइमज़ोन बग’ का मामला उठाया, तो ‘खुरपेंच’ ने साफ किया कि यह बग 14 साल पहले ही ठीक कर दिया गया था और एडोबी इलस्ट्रेटर (जिससे राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ दस्तावेज बना) में ऐसा कोई बग था ही नहीं।

इसके बाद से सुप्रिया श्रीनेत और राहुल गाँधी ने अब तक इन गंभीर आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।

कॉन्ग्रेस के अलावा वामपंथी और प्रोपेेगेंडा जर्नलिस्ट और मीडिया ने भी खुरपेंच के खिलाफ ‘फैक्टचेक’ का खेल शुरू किया। आल्टन्यूज के जुबैर और अभिषेक ने अडोबी इलस्ट्रेटर के जरिए ये बताने की कोशिश की कि राहुल गाँधी के दस्तावेज सही हैं और म्यांमार में बनाए जाने के दावे गलत।

यह ध्यान देना जरूरी है कि राहुल गाँधी का राजनीतिक करियर विदेशी शक्तियों की संलिप्तता को लेकर लगातार विवादों में घिरा रहा है। चाहे कॉन्ग्रेस का चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता (MoU) करना हो या फिर राहुल गाँधी की रहस्यमयी विदेशी यात्राएँ, उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ हमेशा देश की नजरों में रही हैं।

विदेशी अधिकारियों से गुप्त मुलाकातें, कजाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया से चलाए गए बॉट्स के जरिए सोशल मीडिया पर असर डालने वाले कैंपेन इन सबने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रति जनता का शक और गहरा कर दिया है।

इसके अलावा भारत के दुश्मन माने जाने वाले देश तुर्की में कॉन्ग्रेस के दफ्तर खोलने की योजना, संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियाँ और बिना किसी सबूत के बार-बार भारत की चुनावी प्रणाली पर सवाल खड़े करना वाकई चिंताजनक है।

नोट- खबर को मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इस लिंक के जरिए इसे पढ़ा जा सकता है।

क्या है ‘Yellow Book Protocol’, जिसे तोड़ने के लिए राहुल गाँधी पर बिफरा CRPF: अब तक 113 बार Z+ सिक्योरिटी प्रोटोकॉल तोड़ चुके हैं कॉन्ग्रेस के युवराज

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। उनकी VVIP सुरक्षा संभालने वाली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर ‘येलोबुक प्रोटोकॉल’ तोड़ने की शिकायत की है।

राहुल गाँधी पर आरोप है कि पिछले 9 महीनों में वे बिना जानकारी दिए 6 बार विदेश यात्रा पर गए। इसमें इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया जैसे देशों की यात्राएँ शामिल हैं।

CRPF ने राहुल गाँधी को अलग से पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि इस तरह की चूक उनकी Z+ कैटेगरी की सुरक्षा को कमजोर कर सकती है और उन्हें गंभीर खतरा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी पर प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप लगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गाँधी ने साल 2020 से अब तक वे 113 बार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर चुके हैं। इसमें उनकी भारत जोड़ो यात्रा का दिल्ली वाला हिस्सा भी शामिल है।

क्या है ‘येलोबुक प्रोटोकॉल’ ?

गृह मंत्रालय ने VVIP सुरक्षा के लिए एक खास गाइडलाइन बनाई है जिसे ‘येलोबुक’ कहा जाता है। इस किताब में साफ लिखा है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को छोड़कर बाकी सभी बड़ी हस्तियों की सुरक्षा इन्हीं नियमों के आधार पर तय होगी।

जिन लोगों को Z+ या Z सुरक्षा दी गई है, उन्हें अपनी सभी गतिविधियों और यात्राओं की जानकारी पहले से सुरक्षा एजेंसियों को देनी होती है। ताकि खतरे का आकलन कर उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। अलग-अलग खतरे की स्थिति को देखते हुए X, Y, Z और Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है।

इतिहास गवाह है कि अगर सुरक्षा नियमों को गंभीरता से न लिया जाए तो इसके भयानक परिणाम हो सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने भी अपनी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह और प्रोटोकॉल की अनदेखी की थी, जिसका नतीजा उनकी हत्या के रूप में सामने आया। यही वजह है कि CRPF बार-बार राहुल गाँधी को नियमों का पालन करने की सलाह दे रही है।

2 घंटों तक व्हीलचेयर नहीं मिली, कोयंबटूर में बुजुर्ग पिता को फर्श पर घसीटकर ले गया मजबूर बेटा: काम की जगह चेहरा चमकाने में जुटे हैं तमिलनाडु के CM स्टालिन

तमिलनाडु की DMK सरकार की विफलता सामने आई है। जहाँ कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (CMCH) में एक बीमार पिता को कंधे पर खींचते हुए लाचार बेटे का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाएँ उजागर होती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो मंगलवार (09 सितंबर 2025) का है, जब वी कालीदासन अपने 84 वर्षीय पिता सी वडिवेल का इलाज कराने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (CMCH) पहुँचे थे।

वी कालीदास ने बताया, “रिसेप्शन में सिर्फ एक ही स्टाफ था, जो सही से बात भी नहीं कर रहा था। डॉक्टरों ने मेरे पिता का पैर काटने की सलाह दी थी। मैं उन्हें लिफ्ट की मदद से तीन मंजिला ऊपर ले गया। चूँकि मेरा भी मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा है इसलिए मैं वजन नहीं उठा सकता। उन्हें फिर से नीचे ले जाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं एक महिला स्टाफ के पास गया, जिसके पास खाली व्हीलचेयर थी तो उसने 100 रुपए माँगे। मैं देने को तैयार हो गया। लेकिन फिर उसने मुझे 30 मिनट और इंतजार करने को कहा। इसीलिए मैं लिफ्ट की मदद से पिता को ले गया। हमारे साथ आए एक व्यक्ति ने वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया तो कर्मचारी व्हीलचेयर बढ़ाने के लिए आगे आया। लेकिन तब तक हम ऑटोरिक्शा तक पहुँच चुके थे।”

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद अस्पताल के खिलाफ जाँच शुरू की गई। जाँच के बाद CMCH के दो सुपरवाइजर एस्थर रानी और मनी मणि वासगम को 5 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

CMCH की डीन एम गीतांजलि ने मीडिया से बातचीत में पीड़ित वी कालीदासन की बात को नकारते हुए कहा कि स्टाफ के पैसे माँगने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। डीन ने कहा, “भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए और मरीजों के इंतजार के समय को कम करने के लिए ग्रीन ब्रिगेड पहले लॉन्च की जाएगी।”

DMK सरकार की विफलता, CM स्टालिन को विदेश घूमने से नहीं फुरसत

कोयंबटूर के सरकारी अस्पताल का ये निंदनीय मामला सामने आने से तमिलनाडु की DMK सरकार की विफलता भी उजागर हुई है। उधर, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन विदेश का दौरा करते नहीं थक रहे हैं। एक RTI के अनुसार, मुख्यमंत्री की विदेश यात्राों पर राज्य सरकार ने ₹7.12 करोड़ खर्च कर दिए हैं। इसमें भी साल 2022 की दुबई यात्रा का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, जिसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए थे।

मार्च 2025 में तमिलनाडु के बजट पेश करने के बाद यह भी सामने आया था कि पिछले चार साल में प्रदेश पर दोगुना कर्जा हो गया है। इसके बावजूद तमिलनाडु की DMK सरकार ने 46,467 करोड़ रुपए के घाटे वाला बजट पेश किया था।

जहाँ तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार सिर्फ विदेश में घूमने पर खर्चा कर रही है और राज्य पर खर्चा बढ़ाए जा रही है, ऐसे में जनता तो परेशान होगी ही। इसके बाद जब सरकारी अस्पताल में भी मरीज को व्हीलचेयर न मिले तो इससे निंदनीय क्या ही होगा।

योगी सरकार में 60 लाख युवाओं को नौकरी, ₹45 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव: 8 साल में औद्योगिक विकास की नई ऊँचाइयों पर पहुँचा UP

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पिछले 8 सालों में विकास की ऐसी गति पकड़ी है कि निवेश और रोजगार दोनों ही रफ्तार पकड़ चुके हैं। मिशन रोजगार की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य को निजी क्षेत्र से 45 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं, जिससे लाखों नौकरियाँ पैदा हुई हैं।

खास बात ये है कि यूपी के 60 लाख से ज्यादा युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी मिल चुकी है। ये आँकड़े बताते हैं कि कैसे मजबूत नीतियाँ, केंद्र सरकार के साथ तालमेल और लगातार प्रयासों से भारत का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य औद्योगिक हब बन रहा है।

गोरखपुर के गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA) इलाके में एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने खुद ये आँकड़े साझा किए। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार का मकसद है कि यूपी का कोई युवा बाहर नौकरी तलाशने न जाए। हर बच्चे को राज्य में ही रोजगार मिले।’

इसी मौके पर उन्होंने 2251 करोड़ रुपये के प्रोजेक्टों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। ये प्रोजेक्ट पूर्वांचल के विकास को नई गति देंगे और हजारों नौकरियाँ पैदा करेंगे। योगी ने बताया कि GIDA के चल रहे और आने वाले प्रोजेक्ट्स से 15,000 से ज्यादा नौकरियाँ मिलेंगी। अलॉटेड प्लॉट्स पर 5903 करोड़ का निवेश होगा, जो 10,000 रोजगार देगा।

बता दें कि 2017 से पहले यूपी को बीमारू राज्य कहा जाता था, जहाँ अपराध और माफिया राज के कारण निवेशक दूर भागते थे। लेकिन योगी सरकार ने माफिया पर सख्ती बरती, कानून-व्यवस्था सुधारी और निवेशकों का भरोसा जीता। नतीजा ये कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में यूपी 7वें से 2रे स्थान पर पहुँच गया। अब राज्य दुनिया भर से निवेश खींच रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि ये सब पीएम मोदी के विकसित भारत विजन का हिस्सा है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए योगी बोले, ‘जो लोग समाज को जाति-धर्म के नाम पर बाँटते थे, दंगे करवाते थे, वे विकास की बात कैसे करेंगे? हमने पारदर्शिता लाई, भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाया।’

गौरतलब है कि योगी सरकार ने एमएसएमई पॉलिसी 2022 के तहत 96 लाख यूनिट्स को बढ़ावा दिया, जो देश में नंबर वन है। इससे 1.75 करोड़ नौकरियाँ पैदा हुईं। औद्योगिक लोन 2017 के 3.54 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 9.24 लाख करोड़ हो गया। हाल ही में 60,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई, जिसमें गोरखपुर के कई युवा शामिल हैं। आईटीआई में 1.84 लाख सीटें उपलब्ध हैं, जहाँ स्किल ट्रेनिंग दी जा रही है।

सीएम योगी ने कहा, ‘सुरक्षित माहौल में निवेश फलता-फूलता है, जो खुशहाली लाता है।’ ये प्रयास यूपी को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर हैं।

PM मोदी पहुँचे देहरादून, बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर सुना उनका दर्द: केंद्र की ओर से ₹1200 करोड़ की मदद का ऐलान, राहत-बचाव कार्यों का लिया जायजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (11 सितंबर 2025) को उत्तराखंड के देहरादून का दौरा किया, जहाँ भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से मची तबाही का जायजा लिया। पीएम वाराणसी से सीधे जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुँचे, जहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके मंत्रिमंडल ने उनका स्वागत किया।

सीएम धामी ने कहा, ‘आपदा की इस कठिन घड़ी में पीएम की प्रदेशवासियों के बीच उपस्थिति प्रभावितों के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता दिखाती है।’ एयरपोर्ट पर ही पीएम ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और आपदा मित्र स्वयंसेवकों के साथ राहत और पुनर्वास कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई।

हालाँकि मौसम खराब होने की वजह से धराली और थराली जैसे प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण टल गया, लेकिन पीएम ने मीटिंग में प्रेजेंटेशन के जरिए पूरे राज्य की बाढ़ स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्ण सहयोग देगी और बहुआयामी तरीके से पूरे क्षेत्र को पटरी पर लाने का काम होगा।

इस दौरान पीएम मोदी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उनका दर्द सुना और सांत्वना दी। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

पीएम ने तत्काल राहत के तौर पर उत्तराखंड के लिए 1200 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता का ऐलान किया। इसके अलावा, बाढ़ और संबंधित आपदाओं में मरने वालों के परिवारों को 2 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

हाल की बाढ़ और भूस्खलन से अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत व्यापक समर्थन देने का भरोसा दिलाया, जिसमें उनकी लंबी अवधि की देखभाल और कल्याण शामिल होगा। पीएम ने कहा कि यह सहायता आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अस्थायी है, लेकिन राज्य की माँग पर और केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की मदद पर विचार होगा।

बता दें कि उत्तराखंड में इस साल अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं से 85 लोगों की जान चली गई, 128 घायल हुए और 94 लापता हैं। भारी बारिश ने उत्तरकाशी के धराली-हरसिल, चमोली के थराली, रुद्रप्रयाग के चेनागढ़, पौड़ी के सैंजी, बागेश्वर के कपकोट और नैनीताल के कई हिस्सों को बुरी तरह प्रभावित किया। करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हुई, सड़कें, स्कूल, घर और पशुधन को भारी नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने केंद्र से 5700 करोड़ रुपये की विशेष सहायता माँगी है, जिस पर पीएम के दौरे से सकारात्मक फैसला की उम्मीद है।

पीएम ने पुनर्निर्माण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत ‘विशेष परियोजना’ के जरिए क्षतिग्रस्त ग्रामीण घरों के लिए वित्तीय मदद देने का ऐलान किया। राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत, स्कूलों का पुनर्निर्माण, पीएम राष्ट्रीय राहत कोष से सहायता और पशुधनों के लिए मिनी किट वितरण जैसे कदमों पर जोर दिया। उन्होंने NDRF, SDRF, सेना, राज्य प्रशासन और अन्य सेवा संगठनों के जवानों की तारीफ की, जो तुरंत राहत पहुँचाने में जुटे हैं।

पीएम ने कहा, ‘केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस मुश्किल वक्त में हर संभव मदद करेंगी।’ दौरे के बाद पीएम दिल्ली रवाना हो गए। यह दौरा न केवल राहत का संदेश देता है, बल्कि भविष्य की तैयारी पर भी फोकस करता है।

‘पुलिस को भेदभाव से ऊपर उठना होगा’: अकोला दंगों की जाँच में ढिलाई पर SC की महाराष्ट्र पुलिस को फटकार, SIT गठन के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस की को फटकार लगाई है। कोर्ट ने अकोला दंगे 2023 में हुई हत्या की जाँच पर ढिलाई बरतने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया जाए, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हों और मामले की निष्पक्ष जाँच की जाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिया। याचिकाकर्ता ने खुद को उस हत्या का आँखों देखा गवाह बताया है, जो अकोला दंगों के दौरान हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि असली दोषियों के बजाए कुछ अन्य व्यक्तियों पर FIR दर्ज की गई और पक्षपातपूर्ण जाँच की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी पिटाई और गाड़ी जलाए जाने की भी शिकायत की है।

मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “एक बार कोई व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनता है तो उसे जाति, धर्म आदि से ऊपर उठकर कानून के अनुसार निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी माना कि मामला गंभीर है और निष्पक्ष जाँच के लिए SIT जरूरी है।

क्या है मामला ?

महाराष्ट्र के अकोला में मई 2023 में दंगे भड़क उठे थे। कारण था सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट, जो पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी थी। इसमें विलास महादेवराव गायकवाड़ नाम के व्यक्ति की हत्या की गई थी और याचिकाकर्ता (उस समय 17 वर्ष का) घायल हो गया था।

याचिकाकर्ता का दावा है कि उसने 4 लोगों को गायकवाड़ पर तलवार, लोहे की पाइप और अन्य हथियारों से हमला करते देखा। जब वह बीच-बचाव करने गया तो उसे भी पीटा गया और उसकी गाड़ी जला दी गई। महाराष्ट्र पुलिस ने कहा कि उन्हें याचिकाकर्ता के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली थी लेकिन जब पुलिस अधिकारी वहाँ पहुँचे तो याचिकाकर्ता बोलने की स्थिति में नहीं था।

पुलिस ने अपनी जाँच में कुछ आरोपितों को गिरफ्तार किया, जिनसे हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद किए गए और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला फिर से एक नए विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा देखा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वास्तव में जाँच में धार्मिक आधार पर पक्षपात किया गया था या नहीं।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका क्यों की थी खारिज?

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उन्होंने समय रहते पुलिस को जानकारी नहीं दी। मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी थी और पीड़ित पक्ष (मारे गए व्यक्ति के परिवार) ने कोर्ट में कोई शिकायत नहीं की थी। कोर्ट को याचिका में ‘छिपा हुआ मकसद'(ulterior motive) नजर आया। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

जिस पोस्टर में PM मोदी-CM योगी को ‘लोगों को मूर्ख बनाते’ बताया गया, उस कार्यक्रम को IIT बॉम्बे ने किया स्पॉन्सर: विवाद बढ़ने पर संस्थान बोला- हमें कुछ नहीं मालूम

देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT बॉम्बे इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है। वजह है संस्थान द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाया जाना।

यह कार्यक्रम दक्षिण एशियाई पूंजीवाद ‘South Asian Capitalism(s)’ नाम से दो दिन का वर्कशॉप है, जिसे यूसी बर्कले और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स-एमहर्स्ट के साथ मिलकर आयोजित करने वाली है।

इस वर्कशॉप का एक पोस्टर कॉलमनिस्ट हर्षिल मेहता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। पोस्टर में भारत की तथाकथित ‘कैपिटलिस्ट पिरामिड’ दिखाई गई। इस पिरामिड के एक हिस्से में “We fool you” लिखा है और उसमें PM नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्टून जैसी तस्वीरें बनाई गई हैं।

यह निशुल्क वर्कशॉप है, जो कि 12 और 13 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाली है। इसमें चर्चा की जाएगी कि दक्षिण एशिया में पूंजीवादी व्यवस्था किस तरह सामाजिक ढाँचे के जरिए बनी है। इस कार्यक्रम का आयोजन न्यू पॉलिटिकल इकोनॉमिक इनिशिएटिव (NPEI) कर रहा है, जो सीधे IIT बॉम्बे के अधीन काम करता है।

इस पहल (NPEI) के प्रमुख अनुष कपाड़िया हैं, जिन्हें फोर्ड फाउंडेशन से करीब 4 मिलियन डॉलर (लगभग ₹35 करोड़) की फंडिंग मिली है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अनुष कपाड़िया ब्रिटेन (UK) के नागरिक हैं और IIT बॉम्बे में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

हालाँकि, गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 10 साल में अनुष कपाड़िया ने सिर्फ 2 शोध-पत्र (जर्नल पेपर्स) ही लिखे हैं और उनका H-Index मात्र 7 है(H-Index वह पैमाना है जिससे किसी शोधकर्ता के प्रकाशित काम की संख्या और प्रभाव का आकलन किया जाता है)।

विवाद बढ़ने के बाद IIT बॉम्बे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफाई दी। संस्थान ने कहा कि उसे इस वर्कशॉप की कोई जानकारी नहीं थी। IIT बॉम्बे ने कहा, “IIT बॉम्बे का ‘न्यू पॉलिटिकल इकोनॉमिक इनिशिएटिव’ नाम का एक प्रोजेक्ट है। हालाँकि, हमें प्रकाशित फ़्लायर के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। इस पोस्ट के बारे में पता चलने पर हमने आयोजकों को तुरंत निर्देश जारी किए कि वे सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से फ़्लायर हटा दें और इस आयोजन से जुड़ी हर चीज़ से IIT बॉम्बे का नाम हटा दें।”

संस्थान ने यह भी कहा, “न्यू पॉलिटिकल इकोनॉमी इनिशिएटिव (NPEI) की वेबसाइट से कार्यक्रम का विवरण तुरंत हटा दिया गया है। IIT बॉम्बे से कोई भी इस सम्मेलन में भाग नहीं ले रहा है। संस्थान से इस फ़्लायर के बारे में कोई भी परामर्श नहीं लिया गया। हम भी इसे देखकर हैरान और आहत हुए हैं।”

IIT बॉम्बे ने यह भी साफ किया कि वह इस घटना के बाद यूसी बर्कले और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स-एमहर्स्ट के फैकल्टी सदस्यों से सभी संबंध खत्म करेगा।

जल्द ही यह मामला भी सामने आया कि IIT बॉम्बे ने कॉलमिस्ट हर्षिल मेहता को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया।

हर्षिल मेहता ने सवाल उठाया, “IIT बॉम्बे का ऑफिशियल अकाउंट ने मुझे क्यों ब्लॉक किया? क्या सार्वजनिक संस्थानों से सवाल करना और प्रशासन पर सवाल उठाना अपराध है? यह एक सार्वजनिक और आधिकारिक अकाउंट है, तो फिर ऐसा बचकाना व्यवहार क्यों? क्या प्रधानमंत्री @narendramodi का बचाव करना अपराध है?”

कॉलमिस्ट हर्षिल मेहता ने पहले यह मुद्दा उठाया था कि IIT बॉम्बे के फैकल्टी सदस्य प्रभीर विष्णु पोरुथियिल, जो मूल रूप से भारतीय सरकार के वेतनभोगी हैं, ने एक शोध पत्र प्रकाशित किया, जिसमें बड़े कारोबारियों को फासीवाद के सहयोगी बताया गया। इसके अलावा, प्रभीर विष्णु पोरुथियिल को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के ‘संपत्ति का दोबारा वितरण’ वाले विचारों का समर्थन करते हुए भी देखा गया।

ऑपइंडिया ने पहले भी इस बात पर प्रकाश डाला था कि कैसे भारत के कुलीन तकनीकी संस्थान मार्क्सवादी-वामपंथी विचारधारा के लिए उत्पत्ति स्थल बन रहे हैं।

भारत में ‘खिलाफत’ की तैयारी कर रहे ISIS के 5 आतंकी पकड़े गए, 4 राज्यों में ऑपरेशन चलाकर दिल्ली पुलिस ने दबोचा: टेरर मॉड्यूल का लीडर अशरफ दानिश भी गिरफ्तार

देश के चार राज्यों में छापेमारी के बाद ISIS के 5 आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं। इन आतंकी को दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड और हैदराबाद से पकड़ा गया है। पकड़े गए आतंकियों में अशहर दानिश पाकिस्तान से हैंडल किए जा रहे पैन इंडिया टेरर मॉड्यूल का हेड निकला है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और राष्ट्रीय जाँच एजेंसियों के संयुक्त अभियान चलाकर दो दिल्ली, एक मध्य प्रदेश और एक-एक आतंकी तेलंगाना के हैदराबाद और झारखंड के राँची से 5 आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से हथियार और IED बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद हुआ है।

पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के ब्यावरा से कामरान कुरैशी, राँची के एक लॉज से हेड अशरफ दानिश और दिल्ली से आफताब और सूफियान को खुफिया इनपुट के बाद पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, अशरफ दानिश भारत से टेरर मॉडयूल ऑपरेट कर रहा था। दानिश को गिरफ्तार कर ट्रांजिड रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।

अशरफ दानिश टेरर मॉड्यूल का हेड

दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद सिंह ने बताया कि अशरफ दानिश पूरे नेटवर्क का मुखिया था। उसकी पहचान संगठन में गजवा लीडर के तौर पर थी। उसका कोड नेम सीईओ रखा गया था। जाँच में यह भी सामने आया कि वह भारत में खिलाफत घोषित करने और आतंकी स्ट्राइक की बड़ी साजिश रच रहा था।

पुलिस को राँची में दानिश के ठिकाने से एक देसी पिस्टल, कारतूस, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, सल्फर पाउडर जैसे रसायन, कॉपर शीट, बॉल बेयरिंग, स्ट्रिप वायर, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, लैपटॉप, मोबाइल फोन और कैश मिला है।

बोकारो के रहने वाले दानिश के अब्बा पेशे से अधिवक्ता हैं। दानिश को ब्रेनवॉश किया गया था। वह कोडरमा के एक छात्र के साथ राँची के लॉज में रहता था। लेकिन दानिश ने अपने रूममेट को आतंकी संगठन की बात नहीं बताई। लॉज संचालक और उसके करीबियों ने बताया कि दानिश बेहद शांच रहता था और ज्यादा समय कमरे में बिताता था।

वहीं दानिश से पूछताछ में भी सामने आया कि ट्रेनिंग के दौरान आतंकियों को सिखाया जाता है कि वे अपनी गतिविधियों की जानकारी घरवालों और दोस्तों के साथ साझा ना करें।

भारत में आतंकी स्ट्राइक की थी तैयारी

पुलिस के मुताबिक, अशरफ दानिश को ही पाकिस्तान का हैंडलर सारी जानकारियाँ देता था। दानिश को IED के लिए रॉ मैटेरियल जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। पकड़े गए सभी आतंकी भारत में एक जगह तय कर खिलाफत का ऐलान करने और वहाँ से स्ट्राइक की शुरुआत करने की तैयारी में थे।

दिल्ली से पकड़े गए आफताब को हथियार खरीदने की जिम्मेदारी मिली थी। आफताब के दिल्ली से मुंबई लौटने पर ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आफताब की निशानदेही पर सुफियान भी पकड़ा गया। पुलिस ने बताया कि सभी आतंकी सोशल मीडिया से आपस में संपर्क में रहते थे।

राजदीप सरदेसाई ने फेक न्यूज फैलाते हुए किया दावा-चुनाव से पहले बड़े प्रोजेक्ट्स पास करती है मोदी सरकार: जानें उनके दावों की सच्चाई

11 सितंबर 2025 को नरेंद्र मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि चुनावी फायदे के लिए सरकार बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को मंजूरी देती है।। एक्स पर एक पोस्ट में, सरदेसाई ने बिहार से गुज़रने वाली रेलवे परियोजना और एक एक्सप्रेसवे परियोजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंजूरी दी गई है।

गौरतलब है कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 10 सितंबर 2025 को कुल ₹7,616 करोड़ की दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी। पहली परियोजना बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट सिंगल रेलवे लाइन खंड का है। इसमें कुल 177 किलोमीटर लंबा रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जाएगा। इसकी कुल लागत ₹3,169 करोड़ है।

दूसरी परियोजना बिहार में बक्सर-भागलपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के 82.4 किलोमीटर लंबे मोकामा-मुंगेर खंड का 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल है, जिसकी लागत ₹4447.38 करोड़ है। रेलवे ट्रैक दोहरीकरण परियोजना बिहार सहित तीन राज्यों से होकर गुजरती है, जबकि एक्सेस-कंट्रोल हाईवे परियोजना बिहार के लिए है।

राजदीप सरदेसाई ने आरोप लगाया कि दोनों परियोजनाओं को आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के कारण ही मंज़ूरी दी गई है। उन्होंने 5 सवाल उठाए – राज्यों के लिए बड़ी परियोजनाओं का अनावरण केवल चुनाव के समय ही क्यों किया जाता है? क्या इस बात का कोई ऑडिट होता है कि पैसा वास्तव में कैसे खर्च किया जाता है? क्या केंद्र और विपक्ष शासित राज्यों के लिए नियम अलग-अलग हैं? अगर एक राष्ट्र, एक चुनाव हो तो क्या होगा? क्या ये कहा जा सकता है कि एक पार्टी की फ्रीबीज या रेवड़ी, दूसरी पार्टी के लिए कल्याणकारी/विकास कहलाता है?

राजदीप सरदेसाई ने ये सवाल पूरी तरह से झूठे और निराधार दावे के आधार पर उठाए हैं, क्योंकि यह आरोप लगाना पूरी तरह से गलत है कि मोदी सरकार केवल चुनाव के समय ही बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी देती है। एनडीए सरकार का बुनियादी ढाँचे पर जोर जगजाहिर है और लगभग हर कैबिनेट बैठक में ऐसी बड़ी परियोजनाओं को नियमित रूप से मंज़ूरी दी जाती है। पिछले कुछ महीनों में, सरकार ने पूरे भारत में ऐसी कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ऐसी परियोजनाओं में एनडीए और गैर-एनडीए दोनों दलों द्वारा शासित राज्य और वे राज्य शामिल हैं जहाँ हाल ही में चुनाव नहीं हुए हैं।

पिछले कुछ महीनों में घोषित प्रोजेक्ट

DateProjectStatesAmount
27 August 2025Railway multi tracking projectsKarnataka, Telangana, Bihar, Assam₹12,328 Crore
27 August 2025New railway line projectGujarat₹2,526 Crore
19 August 2025Green Field Airport at Kota-BundiRajasthan₹1,507.00 Crore
12 August 2025700 MW Tato-II Hydro Electric ProjectArunachal Pradesh₹8,146.21 Crore
8 August 20254-lane Marakkanam – Puducherry RoadTamil Nadu₹2,157 Crore
31 July 2025Railway multi tracking projectsMaharashtra, Madhya Pradesh, West Bengal, Bihar, Odisha, and Jharkhand₹11,169 Crore
1 July 20254-Lane Paramakudi – Ramanathapuram RoadTamil Nadu₹1853 Crore
11 June 2025Railway multi tracking projectsJharkhand, Karnataka and Andhra Pradesh₹6,405 Crore
28 May 2025Railway multi tracking projectsMaharashtra and Madhya Pradesh₹3,399 Crore
28 May 20254-Lane Badvel- Nellore HighwayAndhra Pradesh₹3,653.10 Crore
9 April 20256 lane access controlled Zirakpur BypassPunjab and Haryana₹1,878.31 Crore
9 April 2025Railway multi tracking projectsAndhra Pradesh and Tamil Nadu₹1,332 Crore
4 April 2025Railway multi tracking projectsMaharashtra, Odisha, and Chhattisgarh₹18,658 Crore
28 March 20254-Lane Highway projectBihar₹3,712.40 Crore
28 March 2025Kosi Mechi Intra-State Link ProjectBihar₹6,282.32 Crore
19 March 20256- lane access controlled Greenfield HighwayMaharashtra₹4,500.62 Crore
5 March 2025Govindghat to Hemkund Ropeway projectUttarakhand₹2,730.13 Crore
5 March 2025Sonprayag to Kedarnath Ropeway projectUttarakhand₹4,081.28 Crore
Total₹66,039.06 Crore

उपरोक्त तालिका से साफ पता चलता है कि राजदीप सरदेसाई केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाने के लिए कैसे झूठ बोल रहे हैं। पिछले छह महीनों में, सरकार ने हर महीने कई ऐसी ही बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

इसके अलावा, राज्यों पर एक नज़र डालें तो पता चलता है कि राजदीप सरदेसाई का केवल चुनाव से पहले ही परियोजना शुरू करने की पहल करना और विपक्षी राज्यों के साथ भेदभाव करने का दावा भी पूरी तरह से गलत है। कई परियोजनाओं को उन राज्यों के लिए भी मंजूरी दी गई है, जहाँ विधानसभा चुनाव नहीं होने वाले हैं। इनमें गैर-एनडीए शासित राज्यों, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, मेघालय शामिल हैं।

अब, राजदीप सरदेसाई के सवालों के जवाब यहाँ दिए गए हैं।

1) राज्यों के लिए बड़ी परियोजनाओं का अनावरण केवल चुनाव के समय ही क्यों किया जाता है?

उत्तर: यह दावा गलत है, राज्यों के लिए बड़ी परियोजनाओं का अनावरण हमेशा होता रहता है, न कि केवल चुनाव के समय, जैसा कि ऊपर देखा जा सकता है।

2) क्या इस बात का ऑडिट होता है कि (हम करदाताओं से प्राप्त) धन वास्तव में कैसे खर्च किया जाता है?

उत्तर: एक अनुभवी पत्रकार का यह सवाल बेतुका है। CAG बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं सहित सरकार के सभी खर्चों का ऑडिट करता है। रेलवे, NHAI और अन्य संबंधित कार्यान्वयन संगठनों के अपने आंतरिक ऑडिट होते हैं।

इसके अलावा, ये सभी परियोजनाएँ पूरी तरह से सरकारी पैसों पर निर्भर नहीं हैं, कई परियोजनाओं में निजी क्षेत्र भी मदद कर रहा है।

3) क्या केंद्र और विपक्ष शासित राज्यों के लिए नियम अलग-अलग हैं? क्या भेदभावपूर्ण संघवाद ‘डबल इंजन’ राजनीति का आधार है?

उत्तर: ऊपर दी गई लिस्ट से पता चलता है कि यह एक और झूठा दावा है। कई बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ गैर-एनडीए शासित राज्यों में हैं। सड़क और रेलवे परियोजनाएँ कई राज्यों में फैली हुई हैं और सत्तारूढ़ दल के आधार पर उनका निर्माण संभव भी नहीं है।

नोट: राजदीप सरदेसाई ‘विपक्ष शासित’ शब्द सही नहीं है, क्योंकि विपक्ष का अर्थ सरकार में न होना है, कोई ‘विपक्ष शासित सरकार’ नहीं हो सकती। शायद वह ‘गैर-एनडीए शासित’ कहना चाहते थे।

4) अगर एक राष्ट्र, एक चुनाव हो तो क्या होगा?

उत्तर: यह एक काल्पनिक प्रश्न है जिसका फिलहाल कोई मतलब नहीं है। हालाँकि यह पहले ही बताया जा चुका है कि परियोजनाओं को बिना किसी चुनाव के मंजूरी दी जाती है।

5) क्या यह कहना उचित है कि एक पार्टी की मुफ्त/रेवड़ी दूसरी पार्टी के कल्याण/विकास का खजाना है?

उत्तर: एक और बेतुका सवाल, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर पैसा खर्च होना फ्रीबीज या रेवड़ी नहीं है। रेवड़ी सीधे लोगों को दिया जाता है। जबकि ये पूँजीगत व्यय है, जो प्रमुख बुनियादी ढाँचे का निर्माण करेंगे, रोजगार पैदा करेंगे और उन स्थानों के समग्र आर्थिक विकास में योगदान देंगे।

2025 में परियोजनाओं की लगातार मंज़ूरी, यह साबित करता है कि राजदीप सरदेसाई कितनी बेशर्मी से झूठ बोल रहे हैं। ये परियोजनाएँ पीएम गति शक्ति जैसी पहलों के तहत राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इनका चुनावों या राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।

(मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)