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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी के भी पीछे पड़ा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम, राहुल गाँधी से ‘वोट चोरी’ पर माँगा था हलफनामा: ‘सजा’ देने के लिए परिवार पर झुंड बनाकर टूटे

राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ वाले प्रोपेगेंडा की पोल खोलने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अब कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम टारगेट कर रहा है। यहाँ तक की उनके परिवार को भी सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। ज्ञानेश कुमार की दोनों बेटी मेधा रूपम और अभिश्री को भी इसका हिस्सा बनाया गया।

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने ज्ञानेश कुमार के परिवार को बीजेपी का परिवार करार दिया। कॉन्ग्रेसियों ने सोशल मीडिया पर एक क्रम से ज्ञानेश कुमार के परिवार पर पोस्ट डालने चालू किए। हर पोस्ट में ज्ञानेश कुमार के परिवार का डाटा निकालकर ट्रोल किया गया।

पोस्ट में बताया गया कि ज्ञानेश कुमार की पहली बेटी मेधा रूपम, जो नोएडा की डीएम हैं और उनके पति मनीष बंसल सहारनपुर के डीएम हैं। इसके बाद दूसरी बेटी अभिश्री श्रीनगर IRS की डिप्टी डायरेक्टर हैं और उनके पति अखय लाब्रू श्रीनगर के डीएम हैं।

अब ज्ञानेश कुमार की बेटी और उनके पति को प्रशासन में उच्च पद हासिल करने को लेकर सवाल उठाए गए। कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने इसे बीजेपी से जोड़ दिया। इनमें कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया स्टार और कॉन्ग्रेस की चापलूसी करने वाले कई वामपंथी लोग शामिल हैं।

मुंबई कॉन्ग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के परिवार को टारगेट किया। उन्होंने भी ज्ञानेश कुमार, उनकी बेटी और दामाद के प्रशासनिक पद हासिल करने पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश के परिवार को ‘बीजेपी का परिवार’ करार दिया।

भारतीय युवा कॉन्ग्रेस (IYC) के सोशल मीडिया की स्टार मिनी नागरारे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के परिवार को टारगेट किया।

इसी क्रम में आगे ज्ञानेश कुमार को ‘बीजेपी का परिवार’ बताते हुए कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने पोस्ट किए।

ये वही लोग हैं जो ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया ब्रीफिंग करने वाले विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बेटी के ट्रोल होने पर दक्षिणपंथी को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। उस समय ट्रोलर्स को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने फटकार भी लगाई थी।

ज्ञानेश कुमार और उनके परिवार पर ये हमला ऐसे समय में शुरु हुआ है, जब उन्होंने वोट चोरी के आरोपों पर राहुल गाँधी से 7 दिनों के भीतर हलफनामा देने या माफी माँगने के लिए कहा है। इसके बाद से वो लगातार कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम से जुड़े लोगों के निशाने पर आ चुके हैं।

छांगुर पीर के धर्मांतरण गैंग में सपा नेता भी शामिल: पीड़िता ने अखिलेश यादव के साथ फोटो दिखाकर किया दावा, कहा- रेप करने के बाद मुस्लिम बना मेरा निकाह करवाया

धर्मांतरण और यौन शोषण के लिए कुख्यात छांगुर पीर गैंग का एक और मामला सामने आया है। कुशीनगर की एक पीड़िता ने विश्व हिंदू रक्षा परिषद के लखनऊ कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आपबीती सुनाई। पीड़िता ने बताया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया, उसका धर्मांतरण कराया और फिर शारीरिक शोषण के बाद उसे छोड़ दिया।

नशीला पदार्थ, जूठा पान, निकाह और धर्मांतरण

जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि 2017 में जब वह हाई स्कूल की छात्रा थी, तब उसकी मुलाकात बबलू खान उर्फ रफी खान से हुई। बबलू उसे अपने घर ले गया और तीन दिन तक उसका रेप करता रहा।

बाद में उसने अपने दोस्त नौशाद उर्फ नाटा नवाब और आलमगीर अंसारी से मिलवाया, जो उसे छांगुर पीर के पास ले गए। पीड़िता ने बताया कि छांगुर ने उसे नशीला पदार्थ और जूठा पान खिलाकर नौशाद के साथ उसका निकाह करवाया और धर्मांतरण करा दिया।

आरोपितों की पहचान समाजवादी पार्टी के नेता के रूप में हुई है, जिनकी तस्वीरें सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ भी हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि नौशाद उसे मुंबई ले गया, जहाँ वह एक साल तक रही और लगातार उसका शारीरिक शोषण किया गया।

गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग का खुलासा

यह पहली बार नहीं है जब छांगुर पीर गैंग के जघन्य अपराधों का खुलासा हुआ है। इससे पहले बेंगलुरु और औरैया की पीड़ितों ने भी अपनी कहानियाँ सुनाई थीं। बेंगलुरु की पीड़िता ने बताया था कि सऊदी अरब में उसके साथ गैंगरेप हुआ और उसे ब्लैकमेल कर ₹10 लाख ऐंठे गए।

आरोपित राजू राठौर ऊर्फ वसीम ने इंस्टाग्राम पर दोस्ती की थी। औरैया की पीड़िता ने बताया कि शराब की लत छुड़ाने के बहाने उसके पिता को झाँसे में लिया गया और फिर आरोपित ने उससे शादी कर ली।

इन सभी मामलों में पीड़िताएँ बताती हैं कि अपराधियों को स्थानीय पुलिस का संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण उनकी शिकायत दर्ज नहीं हो सकी। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अध्यक्ष ने पुलिस पर बिना पैसे के मदद न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से माँग की है कि छांगुर पीर के गिरोह पर सख्त कार्रवाई की जाए, क्योंकि उसके गुर्गे अभी भी बाहर घूम रहे हैं और पीड़ितों के लिए खतरा बने हुए हैं।

ब्रिटिश पत्रकार से आमिर खान के संबंध, एक बेटा भी: बॉलीवुड हीरो के छोटे भाई फैसल खान का दावा, कहा- मुझ पर खाला से निकाह का दबाव डाल रहे थे परिवार के लोग

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भाई फैसल खान एक बार फिर चर्चा में है। उन्होंने एक लेटर लिखकर भाई आमिर और पूरे परिवार से नाता तोड़ लिया है। इसके बाद मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परिवार पर बड़े आरोप लगाए हैं। फैसल ने दावा किया है कि उन पर अम्मी की बहन यानि उनकी खाला से निकाह करने का दबाव बनाया गया था।

फैसल खान ने कहा, “मेरा परिवार मुझ पर मेरी खाला से निकाह करने का दबाव डाल रहा था, जो मेरी अम्मी की चचेरी बहन हैं। मैं ऐसा कभी नहीं चाहता था। मैं अपने काम में लगा रहता था और उसमें कोई दिलचस्पी नहीं रखता था। इस वजह से घर में काफी बहस होती थी इसीलिए मैं उनसे दूर रहने लगा। यहाँ तक कि खाला से निकाह ना करने के लिए मेरी अम्मी भी मुझसे नाराज थी।”

फैसल खान ने यह भी दावा किया है कि आमिर खान का ब्रिटिश पत्रकार जेसिका हाइन्स से एक बेटा है। फैसल ने कहा, “आमिर का रीना के साथ रिश्ता टूट चुका था और वह जेसिका हाइन्स के साथ रिलेशनशिप में थे। जेसिका से उनको बिना निकाह के एक बेटा भी है। उस वक्त आमिर किरण राव के साथ लिव-इन में भी थे।”

कानूनी तौर पर परिवार से अलग होंगे फैसल खान

फैसल खान ने 18 अगस्त 2025 को मुंबई में एक प्रेस वार्ता की। फैसल ने बताया कि वह परिवार से कानूनी तौर पर अलग होने के लिए एक महीने के भीतर कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हैं। इस मामले पर खुलकर बात करते हुए फैसल ने बताया कि 2005 से उनकी जिंदगी खराब हो गई है। फैसल ने आरोपों की झड़ी लगाते हुए आमिर खान और पूरे परिवार को लपेटे में लिया।

फैसल ने कहा, “पूरा परिवार मिलकर मेरे निकाह के पीछे पड़ा रहा। मेरी निकाह के अगले साल ही तलाक हो गया। इसके बाद निखत ने आमिर को भड़काया और दोनों मिलकर मुझे ड्रग्स देने लगे। मुझे टेस्ट कराने के बहाने क्लीनिक में कैद किया गया। पानी में ड्रग्स मिलाकर दिए जाते थे, जिससे मैं 20-20 घंटे सोने लगा।”

फैसल खान ने यह भी कहा, “2008 में बिग बॉस ने मुझे 4 लाख रुपए का साइनिंग अमाउंट ऑफर किया था लेकिन मुझे यकीन है कि आमिर को ये पता चल गया होगा और उन्होंने इसे ना होने देने की व्यवस्था की होगी। अब मैं कानूनी तरीके से परिवार से नाता तोड़ दूँगा। मैं इस मामले में एक महीने के भीतर एक याचिका दायर करूँगा। मैं मानहानि का मुकदमा नहीं करूँगा क्योंकि मुझे कुछ नहीं चाहिए।”

पहले भी भाई आमिर पर फैसल लगा चुके गंभीर आरोप

यह पहली बार नहीं है जब फैसल खान अपने भाई आमिर खान और परिवार के खिलाफ बोल रहे हैं। वे पिछले कुछ सालों में कई बार खुद पर आमिर द्वारा की गई प्रताड़ना के बारे में बात कर चुके हैं।

साल 2022 में बॉलीवुड हंगामा को दिए गए इंटरव्यू में फैसल खान ने कहा था कि उन्हें जबरन एक साल तक हाउस अरेस्ट में रखा गया और गलत-गलत दवाएँ खिलाई गईं। इसके अलावा फैसल ने करण जौहर का नाम लेते हुए फिल्म इंडस्ट्री में पक्षपात के बारे में भी बात की है।

फैसल ने यह भी कहा था कि उन्होंने इंडस्ट्री में पक्षपात व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया है। साथ ही फैसल ने आमिर के 50वें जन्मदिन पर करण जौहर द्वारा अपमानित किए जाने पर भी खुलकर बात की थी।

‘हम जैसे ही घर में भोले बाबा की पूजा करते, वे हालेलुइया का मचाने लगते शोर’: बिहार में ‘सोशल वर्कर’ बनकर आई महिला, फिर अपने गैंग के साथ मिल हिंदुओं को बनाने लगी ईसाई

भारत में धर्मांतरण का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है, खासकर जब यह शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत जरूरतों के नाम पर गरीब और कमजोर समुदायों को निशाना बनाता है। बिहार के पटना के पास कन्नौजी गाँव में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया, जहाँ एक कोचिंग सेंटर की आड़ में अवैध धर्मांतरण की गतिविधियाँ चल रही थीं।

कोचिंग सेंटर की आड़ में धर्मांतरण का जाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना से लगभग 15 किलोमीटर दूर कन्नौजी गाँव के वार्ड नंबर 5 में गोपालपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत एक चौंकाने वाला धर्मांतरण रैकेट सामने आया। इस गाँव में यादव, मल्लाह, कुर्मी और SC समुदाय, जिसमें खास तौर पर मुसहर जाति के लोग रहते हैं, वो सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े हैं।

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब नालंदा के राजगीर की रहने वाली सुषमा कुमारी ने दो-तीन साल पहले संजय कुमार के घर को किराए पर लिया। उसने खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया और धीरे-धीरे गाँव में अपनी पैठ बनाई।

सुषमा ने साल 2024 में किराए के ही मकान में हॉल जैसी व्यवस्था कर ली, जिसमें एक शेड और मंच था। उसने दावा किया कि यह गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा प्रदान करने वाला कोचिंग सेंटर है। इस दावे के आधार पर उसने पास के मुसहर समुदाय के बच्चों को आकर्षित करना शुरू किया। लेकिन इस कोचिंग सेंटर में शिक्षा के नाम पर जो गतिविधियाँ हो रही थीं, वे चौंकाने वाली थीं।

पटना धर्मांतरण रैकेट की मुख्य आरोपित सुषमा

सुषमा के सेंटर के पास रहने वाले अभिषेक कुमार ने बताया कि वहाँ नियमित रूप से ईसाई प्रार्थना होती थी। उसने कहा, “जब भी हम अपने घर में भोले बाबा की पूजा करते, सेंटर वाले अजीब-अजीब आवाज़ें निकालते और ‘हालेलुइया’ बोलते ताकि हमारी पूजा में खलल पड़े।” उसने ये भी कहा, “वो दावा करते थे कि वो बुरी आत्माओं को भगा सकते हैं।”

धर्मांतरण की रणनीति और निशाने पर गरीब

स्थानीय लोगों के बयानों से पता चला कि इस तथाकथित कोचिंग सेंटर में बच्चों को ईसाइयत की ओर आकर्षित करने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया जा रहा था। कुछ प्रमुख गतिविधियाँ इस प्रकार हैं-

धार्मिक प्रचार और हिंदू परंपराओं का विरोध: बच्चों को ‘आमीन’ कहना सिखाया जाता था, जबकि ‘जय विश्वकर्मा’ या ‘जय श्री राम’ कहने पर उन्हें डाँटा जाता था। कुछ बच्चों ने बताया कि सुषमा और उनके सहयोगी उन्हें मारते थे अगर वे हिंदू देवी-देवताओं का नाम लेते।

हिंदू प्रथाओं का अपमान : बच्चों को सिखाया जाता था कि हनुमान और राम जैसे हिंदू देवता ‘झूठे और काल्पनिक’ हैं, जबकि ‘येशु’ उनके असली भगवान हैं। उनकी माताओं को बिंदी, सिंदूर और चूड़ियाँ पहनने से मना किया जाता था, जो हिंदू संस्कृति में महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।

लालच का जाल: सुषमा और उनके तीन सहयोगियों (रेखा कुमारी, सीता कुमारी और आशीष कुमार) द्वारा बच्चों और उनके परिवारों को प्रलोभन दिए जाते थे। इनमें मुफ्त शिक्षा, बीमारियों का इलाज और आर्थिक सहायता का वादा शामिल था। इसके अलावा वे ‘येसु के प्रति प्रेम’ दिखाने के लिए नाटकीय प्रदर्शन करते थे।

सामाजिक और आर्थिक कमजोरी का शोषण: अत्यंत गरीबी और अशिक्षा से जूझ रहा मुसहर समुदाय इस रैकेट का आसान निशाना बना। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी जरूरतों की आड़ में इन लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया गया। यह एक ऐसी रणनीति थी जो भारत के कई हिस्सों में मिशनरी गतिविधियों में देखी गई है, जहाँ आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को निशाना बनाया जाता है।

समुदाय का विरोध और पुलिस कार्रवाई

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग एक साल तक यह रैकेट चुपके-चुपके चलता रहा, लेकिन मई 2024 में गाँव के एक युवा दीपक कुमार ने इस अवैध गतिविधि के खिलाफ आवाज उठाई। दीपक और विश्वास कुमार ने मिलकर स्थानीय लोगों को संगठित किया और गोपालपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की।

इस शिकायत के आधार पर 18 मई 2024 को प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR नंबर 208/2025) दर्ज की गई। FIR में कहा गया कि सुषमा कुमारी और उनके सहयोगी लगभग दो साल से अवैध धार्मिक गतिविधियाँ चला रहे थे। जब गाँव वालों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें झगड़ा, शारीरिक हमला और यहाँ तक कि जान से मारने की धमकी दी गई।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुषमा कुमारी और उसके तीन सहयोगियों रेखा कुमारी, सीता कुमारी और आशीष कुमार को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए जानबूझकर किए गए कार्य) और धारा 302 (किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाना) के तहत गिरफ्तार किया। पुलिस द्वारा तैयार की गई जब्ती सूची में बाइबल, इवेंजलिस्ट मैनुअल और ‘चुने हुए लोग’ (Chosen People) जैसी किताबें शामिल थीं।

हालाँकि, बिहार में अभी तक कोई विशेष ‘विरोधी-जबरन धर्मांतरण कानून’ नहीं है, जिसके कारण आरोपितों पर केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। यह एक महत्वपूर्ण कमी है, क्योंकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसे कानूनों ने धर्मांतरण के मामलों में सख्त कार्रवाई को संभव बनाया है।

फिलहाल, कोचिंग सेंटर अब बंद हो चुका है और गाँव वालों ने इस धर्मांतरण रैकेट को पूरी तरह से बाहर कर दिया है। हालाँकि, गोपालपुर पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं, क्योंकि पुलिस का संपर्क नंबर बंद या रेंज से बाहर था। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि गिरफ्तार आरोपितों को जमानत मिली है या नहीं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इस घटना ने गाँव में डर और तनाव का माहौल पैदा किया। कुछ महिलाओं ने भास्कर की टीम को बताया कि पिछले दो सालों से हर रविवार को सेंटर से अजीब आवाजें आती थीं, और जब भी उन्होंने वहाँ झाँकने की कोशिश की, तो पर्दे लटकाए जाते थे। यहाँ तक कि जिस जगह को पहले छठ पूजा की तैयारी के लिए इस्तेमाल किया जाता था, वहाँ अब दूसरी प्रार्थनाएँ होने लगी थीं।

बिहार में इस तरह के अन्य मामले

यह बिहार में धर्मांतरण का पहला मामला नहीं है। छह महीने पहले, बक्सर में एक समान मामला सामने आया था, जहाँ दो पादरियों पर 50-60 हिंदू पुरुषों और महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगा था। एक वीडियो में दिखाया गया कि पादरी महिलाओं को गंगा में डुबकी लगवाकर उनका सिंदूर मिटा रहे थे। पादरी ने दावा किया कि सभी प्रतिभागी स्वेच्छा से बाइबल पढ़ने के बाद शामिल हुए थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसे जबरन धर्मांतरण करार दिया।

कन्नौजी गाँव का यह मामला भारत में अवैध धर्मांतरण की गहरी समस्या को उजागर करता है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी जरूरतों की आड़ में गरीब और कमजोर समुदायों को निशाना बनाना एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। स्थानीय लोगों की साहसी पहल ने इस रैकेट को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालाँकि, इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि बिहार जैसे राज्यों में मजबूत विरोधी-जबरन धर्मांतरण कानून की आवश्यकता है। साथ ही सामुदायिक जागरूकता और स्थानीय नेतृत्व को बढ़ावा देना जरूरी है ताकि इस तरह की गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके। यह घटना न केवल धार्मिक संवेदनशीलता का मामला है, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का भी सवाल उठाती है।

दूध वाला है कोई… जो भी मिला उससे यही पूछ रहे थे भीम सिंह ठाकुर, गोद में थी 9 महीने की बच्ची: किश्तवाड़ की तबाही के बीच वायरल हुए Video की क्या है कहानी

किश्तवाड़ में 14 अगस्त 2025 को आई भयानक त्रासदी के दौरान कई ऐसे लोग सामने आए, जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान बचाई। एनडीआरएफ और दूसरी टीमों के काम में मदद की और मलबे के अंदर दबे लोगों को बाहर निकाला। ऐसा ही एक नाम है भीम सिंह ठाकुर का।

चशौती गाँव, गुलाबगढ़ और मचैल माता मंदिर का वह इलाका, जहाँ 14 अगस्त को अचानक बादल फटा और सब कुछ बह गया। घटना में अब तक 62 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। लेकिन जब घटना घटी तो स्थानीय लोगों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों को बचाने के लिए आगे आए।

भीम सिंह ठाकुर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह एक 9 महीने की छोटी सी बच्ची के लिए फरिश्ता बन कर आए। मलबे से बचाकर बच्ची को गोद लिए वो बोल रहे हैं। गुड़िया उठो, उठो गुड़िया, थपथपाते हुए बच्ची को उठाने की जद्दोजहद करते वो दिख रहे हैं। बच्ची को सीपीआर दे रहे हैं ताकि उसकी साँसे चले। इधर-उधर दौड़ रहे हैं। पत्थरों के ढेर और टूटे-फूटे रास्ते वीडियो में दिखाई दे रहा है, जो वहाँ का मंजर बताने के लिए काफी है। ये वीडियो जब वायरल हुआ तो लोगों ने उनके बारे में जानने की कोशिश की।

न्यूज 18 की टीम भी उन तक पहुँची। उन्होंने अपने इंटरव्यू में बच्ची के बारे में बताते हुए कहा, ” बच्ची बेहोश हो गई थी। ऐसा लग रहा था कि उसकी साँसें थम गई हैं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। बच्ची को उठाया और उसे बचाने के लिए हरसंभव कोशिश करने लगा।” इस दौरान उन्हें लगा कि बच्ची को दूध की जरूरत है। उन्होंने आस-पास दिख रही महिलाओं से आग्रह किया कि कोई इसे दूध पिला दे। घटना को एक बार सुनाते हुए वह भावुक हो जाते हैं और ईश्वर से कामना करते हैं कि ऐसी घटना फिर कहीं न हो।

भीम सिंह ठाकुर का कहना है कि अफरा-तफरी के बीच वे लोगों को बचाने में जुटे हुए थे। मलबों के बीच कई लोग फँसे थे, जिनकी साँसे चल रही थी। उन्हें निकालने में मदद की। इस बीच ये बच्ची मिली। बच्ची जिंदा है या नहीं ये उन्हें नहीं पता था। बस किसी तरह बच्ची को दोबारा जिंदगी मिल जाए यही वह सोच रहे थे। उनका कहना है कि वह उस मंजर को जीवन में कभी नहीं भूल सकते।

पेशे से पत्रकार भीम सिंह ठाकुर की मेहनत और जज्बे को लोग सलाम कर रहे हैं। उनका वीडियो शेयर कर एक यूजर ने लिखा है कि ऐसे रियल हीरो की देश को जरूरत है। उन्होंने छोटी सी बच्ची को सीपीआर दिया, ताकि उसकी साँस चल सके। जब नेशनल मीडिया सिर्फ बाढ़ की खबर टीआरपी बढ़ाने के लिए करता है, वहाँ एक पत्रकार ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाया। वहीं एक यूजर ने कहा ऐसे वीरों का सम्मान जरूरी है! पत्रकार भीम सिंह जी ने सीपीआर देकर एक मासूम की जान बचाई। मैंने देखा है कि राष्ट्रीय मीडिया सिर्फ़ टीआरपी के लिए ही आगे आता है, लेकिन हर स्तर पर स्थानीय लोग ही ऐसी त्रासदियों में मजबूती से खड़े होते हैं।

अब राहुल गाँधी की गाड़ी के नीचे आया पुलिस का जवान, पत्रकार भी हो चुके हैं अराजकता के शिकार: लालू यादव के बेटे ने भी खोली ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की पोल

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के खिलाफ ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत मंगलवार (19 अगस्त 2025) को गयाजी से नवादा पहुँचे। इस दौरान राहुल गाँधी की गाड़ी के नीचे सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी आ गया।

जानकारी के मुताबिक, वहाँ मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों ने खींचकर पुलिसकर्मी को बाहर निकाल लिया, जिससे उसकी जान बच पाई। राहुल गाँधी की इस यात्रा को लेकर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।

इससे पहले स्वराज पोस्ट नामक चैनल के एडिटर इन चीफ और बिहार के पत्रकार कन्हैया भेलारी ने एक्स पर ट्वीट करते हुए तमाम लापरवाहियों का खुलासा किया था। सोमवार (18 अगस्त) को अपनी एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे राहुल गाँधी की इस यात्रा में मीडियाकर्मियों तक के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, उल्टे उन्हें भी अराजकता का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने लिखा, “सासाराम में वोटर अधिकार यात्रा के लिए चयनित स्थल पर बाहर से गए मीडियाकर्मियों को घोर कुब्यवस्था व आराजकता का सामना करना पड़ा।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक पत्रकार बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। दिल्ली से आईं कुछ महिला पत्रकारों ने कहा कि अब वो कभी किसी खबर को कवर करने बिहार नहीं आयेंगी। उनके साथ बदतमीजी की गई है। दरअसल मीडिया की देखभाल की जिम्मेदारी कॉन्ग्रेस को दी गई थी जबकि बाकी सबकुछ आरजेडी के जिम्मे था।”

बता दें कि मीडियाकर्मियों के साथ अमानवीयता की एक और घटना का खुलासा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी किया था।

तेज प्रताप ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव लोकतंत्र बचाने के लिए निकले हैं या फिर लोकतंत्र को तार-तार करने निकले हैं। क्योंकि जिस प्रकार से नबीनगर विधानसभा से विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह के गाड़ी चालक को और उसके साथ एक मीडिया पत्रकार भाई को जयचंद द्वारा मारा-पीटा और गाली गलौज किया गया है, यह बेहद ही गलत और शर्मनाक है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं इसकी कड़ी आलोचना करता हूँ। मैं तेजस्वी को कहना चाहता हूँ अभी भी समय है। अपने आस पास के जयचंदो से सावधान हो जाओ नहीं तो चुनाव में बहुत बुरा परिणाम देखने को मिलेगा। अब आप कितने समझदार हैं यह चुनाव परिणाम तय कर देगा।”

गौरतलब है कि तेज प्रताप को उनके पिता लालू यादव घर और पार्टी दोनों से निकाल चुके हैं। उ

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी बिहार में 16 दिनों की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ कर रहे हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने रविवार (17 अगस्त 2025) को सासाराम से की थी। सबसे बड़ी बात ये है कि सासाराम के लोगों ने ही इस यात्रा के मकसद पर सवाल उठाए थे।

कॉन्ग्रेस और RJD को लेकर सासाराम के लोगों ने कहा था कि वे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने के लिए, यह ढोंग कर रहे हैं। जहाँ एक तरफ राहुल गाँधी SIR के खिलाफ यह यात्रा निकाल रहें हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के लोगों का कहना है कि चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया के तहत जो कुछ भी किया है वो सही है।

यात्रा को लेकर एक व्यक्ति ने कहा, “नाम देश में किसी का नहीं कटा है। कॉन्ग्रेस दोमुँही बातें करती है। कर्नाटक के मुद्दे को लेकर इसने पूरे देश में हंगामा मचाया कि वोटर लिस्ट गलत है। वहाँ चुनाव जीती भी। लेकिन जब यहाँ SIR के तहत चुनाव आयोग पूरी तरह लगा कि मतदाता सूची को शुद्ध कर दिया जाए, तो कॉन्ग्रेस ने फिर ड्रामा शुरू कर दिया है।”

वहीं एक शख्स ने राहुल गाँधी के आरोपों पर कहा था, “जिसका खानदान ही चोर हो और अगर वो दूसरे को चोर बोले तो यह ठीक नहीं है। सरदार पटेल जी को प्रधानमंत्री बनना था लेकिन जवाहरलाल नेहरू बन गए और तभी से कॉन्ग्रेस वोट चोरी कर रही है।”

एक अन्य शख्स ने बातचीत के दौरान कहा, “कॉन्ग्रेस की वोट चोरी की परंपरा है। सबसे पहली वोट चोरी 1975 में हुई, जब इंदिरा गाँधी ने वोट चोरी कर चुनाव जीता, कोर्ट ने उनका चुनाव रद्द किया और देश को आपातकाल जैसा गंभीर परिणाम भुगतना पड़ा।”

डोनाल्ड ट्रंप की ‘टैरिफ बलजोरी’ ने भारत-चीन को किया करीब, गलवान संघर्ष के 5 साल बाद द्विपक्षीय संबंधों में गर्मजोशी: दुर्लभ खनिज-उर्वरक-मशीनों पर उम्मीदों को बल

लंबे समय तक आपसी तनातनी के बाद भारत और चीन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसकी वजह अमेरिका द्वारा दोनों देशों पर लगाया गया नया टैरिफ यानी आयात शुल्क है। 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इससे पहले तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्री मिले।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार (18 अगस्त 2025) को दिल्ली में हुए इस मुलाकात के दौरान राजनयिक संबंधों को सुधारने के साथ-साथ व्यापार, बॉर्डर और आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

इस मौके पर विदेश मंत्री जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के दोनों देशों के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए। दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए।

हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, अब दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस प्रयास में, हमें तीन परस्पर सिद्धांतों – परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हित का ध्यान रखना चाहिए। मतभेदों को विवाद या संघर्ष में नहीं बदलने देना चाहिए..”

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बैठक में सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए मार्ग खोलने को लेकर चीनी कोशिश का भी जिक्र किया। चीनी विदेश मंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए हैं। उन्होंने कहा, “हमने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखा है और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश पर्वत और कैलाश मानसरोवर की भारतीय तीर्थयात्रा फिर से शुरू की है।”

चीनी विदेश मंत्री यी ने कहा, “हमने हस्तक्षेप को दूर करने, सहयोग बढ़ाने और चीन-भारत संबंधों में सुधार के साथ- साथ विकास की गति को और मज़बूत करने पर विश्वास जताया। हम एक-दूसरे की सफलता में योगदान देने के अलावा एशिया और पूरी दुनिया को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ें…” यी मंगलवार (19 अगस्त) को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे।

चीन करेगा भारत की रेयर खनिज, उर्वरक की चिंता का समाधान

रिपोर्टों के अनुसार, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री जयशंकर को आश्वासन दिया कि चीन दुर्लभ खनिज, उर्वरक और सुरंग खोदने वाली मशीनों से संबंधित भारत की चिंताओं का समाधान कर रहा है। इस वर्ष अप्रैल में, चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए निर्यातकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। साथ ही दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। रेयर खनिज इलेक्ट्रिक और पेट्रोल वाहनों, रक्षा उपकरणों और ऊर्जा से जुड़े उपकरणों में इस्तेमाल होता है।

ट्रंप का ‘टैरिफ बम’ ला रहा भारत-चीन को करीब

वार्ता के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने यी का ध्यान गलवान घाटी में हुए गतिरोध की ओर भी आकर्षित किया। जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों में सकारात्मकता का आधार सीमा पर संयुक्त रूप से शांति और सौहार्द बनाए रखने की क्षमता है। यह भी आवश्यक है कि तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़े।”

ये घटना अप्रैल-मई 2020 की है, जब गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के जवानों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में कमांडिंग ऑफिसर समेत कम से कम 20 भारतीय सैनिक बलिदान हो गए। भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक चीन के 43-45 सैनिक हताहत हुए।

हालाँकि रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी टैरिफ से पैदा हुई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हुए, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों को पुनर्जीवित किया है।

प्राइवेट पार्ट में मारे करंट, जनेऊ तोड़ मुँह में माँस ठूँसा, कहा- बीवी को नंगा कर बेटी से रेप करेंगे: मालेगाँव ब्लास्ट में जो हिंदू हुए बरी उन्होंने सुनाई रूह कँपाने वाली आपबीती

मालेगाँव ब्लास्ट मामले में 17 साल बाद आए कोर्ट के फैसले ने ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी को पूरी तरह से खारिज किया। 31 जुलाई 2025 को स्पेशल NIA कोर्ट ने इस केस के सभी सात आरोपितों को बाइज्जत बरी किया, जिनमें पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय और समीर कुलकर्णी शामिल थे। मालेगाँव ब्लास्ट के सात आरोपितों में रमेश और समीर कुलकर्णी ने बताया कि कैसे उनकों ATS ने पहले झूठे केस में फँसाया और फिर कुछ हिंदू नेताओं के नाम लेने के लिए प्राइवेट पार्ट में करंट, जबरन मांस खिलाना, जनेऊ- धार्मिक ग्रंथों को पैरों से कुचलना और पत्नी-बेटी को नंगा करने और रेप की धमकी देकर प्रताड़ित किया गया।

मालेगाँव ब्लास्ट केस में आरोपित रहीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी भयानक यातनाओं से गुजरना पड़ा। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से अपने दर्द को साझा किया है। उनके मुताबिक, हिरासत में उन्हें पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाए जाते थे और भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या आ गई थी। इन यातनाओं के कारण उन्हें कैंसर और न्यूरो संबंधी बीमारियाँ हो गईं और उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

रमेश उपाध्याय और समीर कुलकर्णी की दर्दनाक कहानी

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपित रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय ने बताया कि कैसे उन्हें महाराष्ट्र ATS ने बिना किसी वजह के उठाया और गैरकानूनी हिरासत में रखा। उनके अनुसार, उन्हें बुरी तरह पीटा गया, प्राइवेट पार्ट्स पर बिजली के झटके दिए गए और उनके पैरों पर लकड़ी रखकर दो पुलिसवाले खड़े हो जाते थे। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए उनकी पत्नी को नंगा करने और बेटी के साथ रेप करने की धमकी दी गई। ATS उन पर दबाव डाल रही थी कि वे योगी आदित्यनाथ, प्रवीण तोगड़िया, इंद्रेश और श्री श्री रविशंकर जैसे हिंदू नेताओं का नाम लें और कहें कि इन्हीं लोगों ने उन्हें ब्लास्ट करने के लिए कहा था।

इस मामले में एक अन्य आरोपित समीर कुलकर्णी ने भी ऐसी ही आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पुलिसवाले उन्हें रोज 20-20 घंटे तक पीटते थे, जिससे उनके तीन दाँत टूट गए। शाकाहारी होने के बावजूद, उनके मुँह में जबरन माँस के टुकड़े ठूँसे गए। समीर ने बताया कि ATS अधिकारियों ने उनके धार्मिक ग्रंथ जैसे गीता और हनुमान चालीसा को उनके सामने फाड़ा और जनेऊ को उतरवाकर पैरों से कुचला। इन अत्याचारों का मकसद उनसे मनचाही गवाही उगलवाना था।

कॉन्ग्रेस और ‘हिंदू आतंकवाद’ की साजिश

यह स्पष्ट है कि यह पूरा मामला तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार की एक सुनियोजित साजिश थी। ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि ने अपनी किताब ‘हिंदू टेरर’ में इसका खुलासा किया है। गवाहों और आरोपितों के बयान से यह बात सामने आई कि कॉन्ग्रेस की तत्कालीन सरकार के इशारे पर एजेंसियों ने हिंदू नेताओं को फँसाने के लिए लोगों पर दबाव बनाया।

कर्नल पुरोहित ने कोर्ट को बताया था कि कॉन्ग्रेस सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और RSS प्रमुख मोहन भागवत को इस मामले में फँसाने की कोशिश की थी। यह सब जनता का ध्यान कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे घोटालों से हटाने के लिए किया गया था।

कोर्ट का फैसला और निष्कर्ष

गौरतलब है कि मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट के जज एके लाहोटी ने अपने 500 से ज्यादा पेज के फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा, “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों पर होनी चाहिए।” इस फैसले ने पिछले 17 वर्षों से चल रही ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी को पूरी तरह से नकार दिया।

कोर्ट ने विक्टिम्स के लिए मुआवजे का भी ऐलान किया। इस पूरे मामले से यह साबित होता है कि एक राजनीतिक साजिश के तहत निर्दोष लोगों को प्रताड़ित किया गया, जिनके जीवन के महत्वपूर्ण साल जेल में यातनाओं के बीच गुजरे। इस मामले ने भारतीय न्याय प्रणाली में एक नई मिसाल पेश की है, जहाँ सच्चाई और न्याय की जीत हुई है।

अब बांग्लादेश में हिंदुओं के तीर्थस्थल पर कब्जा करने की कोशिश, चंद्रनाथ पहाड़ी-मंदिर को इस्लामी कट्टरपंथी बता रहे ‘पर्यटन स्थल’: मस्जिद बनाने को चल रहा अभियान

बांग्लादेश के चटगाँव जिले के सीताकुंडा में स्थित चंद्रनाथ मंदिर और चंद्रनाथ पहाड़ी एक बार फिर कब्जे और अपवित्र करने के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह पवित्र स्थान हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहाँ का चंद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में हिंदू शासक चंद्रसेन ने करवाया था।

अब, कुछ इस्लामी कट्टरपंथी इस तीर्थस्थल को जबरन ‘पर्यटन स्थल’ घोषित कराकर वहाँ मस्जिद और मुस्लिम प्रार्थना स्थल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अभियान दिसंबर 2023 से ही चल रहा है, लेकिन  शनिवार (16 अगस्त 2025) को इसे एक नई गति दी गई। ‘SKM Shoe Shop’ के चेयरमैन और इस्लामी प्रचारक एम एम सैफुल इस्लाम ने 16 अगस्त को फेसबुक पर दावा किया कि चंद्रनाथ पहाड़ी पर मस्जिद का निर्माण ‘90% तय’ हो चुका है।

सैफुल ने यह भी लिखा कि उन्हें और उनके साथी को चोटी पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने दुःख जताते हुए लिखा, “93% मुस्लिम आबादी वाले देश में चंद्रनाथ पहाड़ी पर दो मंदिर हो सकते हैं, लेकिन एक मस्जिद नहीं? क्या हम मुस्लिम इस देश में किराएदार हैं?”

इसके बाद उन्होंने देवबंदी कट्टरपंथी हारून इजहार से मुलाकात की, जो पहले हिफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है। उन्होंने भी फेसबुक पर पोस्ट कर कहा, “चंद्रनाथ पहाड़ी पर मस्जिद बनाने की बातचीत चल रही है, सभी मुस्लिम भाई इस पोस्ट को शेयर करें ताकि सभी को इसके बारे में पता चले और वे मिशन की कामयाबी के लिए दुआ करें।”

सैफुल इस्लाम ने अपने पोस्ट में साफ तौर पर कहा, “मैं साफ-साफ कहना चाहता हूँ। चूँकि आपने मुझे और मेरे दोस्त को नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी, इसलिए आज या कल, मैं सीताकुंड पहाड़ी पर नमाज के लिए एक अलग जगह जरूर बनवाऊँगा। इंशाअल्लाह।”

उसने हिंदू समुदाय को ‘मालौन’ (एक अपमानजनक शब्द) कहकर अपमानित किया, जिसके बाद उसका फेसबुक अकाउंट, जिस पर 52,000 फॉलोअर्स थे, सस्पेंड कर दिया गया।

हालाँकि उसने तुरंत एक दूसरा अकाउंट ‘Mufti Saiful Islam’ से फिर से पोस्ट करना शुरू कर दिया और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलता रहा।

नवंबर 2024 से  बांग्लादेश में कुछ इस्लामी कट्टरपंथी ‘Total Malaun Death’ (TMD) नामक अभियान चला रहे हैं, जिसमें खुलेआम सनातन धर्मियों के सफाए की बात की जा रही है।

जुलाई 2025 में, एक चरमपंथी मोहम्मद अबीर ने हिंदू व्यापारी भजन कुमार गुहा की निर्मम हत्या कर दी और सोशल मीडिया पर उसे ‘मालौन’ कहकर हत्या को जायज ठहराया।

इस विवाद के बाद हारून इजहार, जिसे 2021 में गिरफ्तार किया गया था, उसने सफाई देते हुए चंद्रनाथ पहाड़ी को ‘कथित हिंदू तीर्थस्थल’ कहा और दावा किया कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के पास नहीं, बल्कि वहाँ होगा जहाँ मुस्लिम ‘पर्यटक’ बनकर जाते हैं। यह बयान स्पष्ट रूप से हिंदू धार्मिक स्थलों की धार्मिक पहचान को नकारने की कोशिश है।

उसने कहा कि एक मुस्लिम होने के नाते ‘अवैध भूमि’ पर मस्जिदों और प्रार्थना स्थलों के निर्माण की वकालत करना उसका अधिकार है। देवबंदी चरमपंथी ने तब आरोप लगाया कि उन्होंने चटगाँव में हिंदुओं की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में मदद की थी, ताकि उनके इस दावे को बल मिले कि मस्जिद निर्माण का उद्देश्य चंद्रनाथ पहाड़ी पर कब्जा करना नहीं है।

उसने आगे दावा किया कि यह पूरा विवाद भारत में हिंदू समुदाय के राजनीतिक आकाओं और ‘सांप्रदायिक ताकतों’ की साजिश है। यह उल्लेख करना आवश्यक है कि हारुन इजहार लालखान बाजार मदरसा में ग्रेनेड हमले सहित 11 मामलों में वांछित है, जिसे 2013 में हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश द्वारा अंजाम दिया गया था।

2023 से ही चंद्रनाथ पहाड़ी पर कब्जा करने की फिराक में हैं इस्लामी कट्टरपंथी

हिंदू श्रद्धालुओं के लिए यह जगह धार्मिक आस्था का प्रतीक है, लेकिन अब इसे ट्रेकिंग स्पॉट और इस्लामी प्रचार स्थल में बदलने की कोशिशें हो रही हैं।

दिसंबर 2023 में रेहान रियाद नाम के एक इस्लामी कट्टरपंथी ने चंद्रनाथ मंदिर क्षेत्र में बीफ बारबेक्यू पार्टी आयोजित की, जिसे कई अन्य कट्टरपंथियों का समर्थन मिला। यह हिंदू धार्मिक स्थल का सीधा अपमान था। स्थानीय हिंदू समाज ने इस हरकत के खिलाफ पर्चे बाँटे और मंदिर की रक्षा की अपील की।

लेकिन जब उन्होंने विरोध किया, तो उन पर हमला कर दिया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर के मुताबिक, मुस्लिम हमलावरों ने हिंदू देवी-देवताओं को पूजा करने वालों के पीछे धकेलने की धमकी दी।

जब हिंदुओं ने इसका विरोध किया, तो धारदार हथियारों से लैस उन्हीं चरमपंथियों के गुट ने उन पर हमला कर दिया। खबरों के मुताबिक, इस हमले में कुल 10 हिंदू गंभीर रूप से घायल हुए।

इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जिनमें इस्लामी कट्टरपंथी चंद्रनाथ मंदिर क्षेत्र में अजान दे रहे थे। ‘टाइगर्स तामीम’ नाम का एक व्यक्ति मंदिर की दीवार पर पैर रखे बैठा दिखा। मोहम्मद शिब्बीर बिन नजीर नामक एक अन्य व्यक्ति ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “इंशाअल्लाह, यहाँ इस्लाम का झंडा जल्द लहराएगा।”

इनामुल हक नाम के एक और कट्टरपंथी ने लिखा, “मैं वहाँ दो बार गया हूँ, मस्जिद की कमी महसूस हुई। वहाँ अभी भी ‘शिर्क’ (मूर्तिपूजा) हो रही है।”

फरवरी 2024 में कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें कई मुस्लिम पुरुष टोपी पहनकर मंदिर क्षेत्र में नारे लगाते और इधर-उधर घूमते नजर आए। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के एक अधिकारी ने स्वराज्य  को बताया, “अप्रैल 2023 से कुछ मौलवियों ने हर शुक्रवार को मंदिर के पास नमाज का आयोजन शुरू कर दिया है और हमने सुना है कि पहाड़ी पर एक मस्जिद बनाने की योजना है। यह झूठी कहानी भी फैलाई जा रही है कि पहाड़ी के ऊपर एक मस्जिद थी और उसे हिंदुओं ने मंदिर बनाने के लिए तोड़ दिया।”

पिछले साल हिंदू समाज की ओर से चंद्रनाथ मंदिर के संरक्षण का आह्वान करने वाला एक पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें लिखा था, “सबधन, राहुर कोबोले चंद्रनाथ धाम” यानी सावधान, राहु के कब्जे में चंद्रनाथ धाम।” इससे साफ है कि हिंदू समाज मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

यह मंदिर नागर शैली में बना है, जो भारतवर्ष के कई प्राचीन मंदिरों में पाई जाती है। इसमें एक शिखर (ऊँचा बुर्ज), आमलक (गोलाकार ढाँचा) और कलश होता है।

कट्टरपंथियों की यह मुहिम लगातार तेज हो रही है और ऐसा कहा जा रहा है कि मोहम्मद यूनुस की सरकार की नर्म नीति की वजह से इन्हें बढ़ावा मिल रहा है। इससे भविष्य में चंद्रनाथ मंदिर पर खतरा और भी बढ़ सकता है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में दिबाकर दत्ता ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। इसका अनुवाद सौम्या सिंह ने किया है।

जो कल कह रहे थे- चुनाव आयोग ने पैर पर मारी कुल्हाड़ी, वे अब खुद ‘फेक डाटा’ के लिए चुनाव आयोग से माँग रहे माफी: CSDS वाले संजय कुमार ने खुद का थूका चाटा

सीएसडीएस के संजय कुमार ने महाराष्ट्र चुनाव को लेकर शेयर किए फर्जी डाटा को डिलीट कर माफी माँगी है। इसी फर्जी डाटा के दम पर राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ के कैंपेन को कॉन्ग्रेस आगे बढ़ा रही थी। संजय कुमार ने पहले कहा था कि चुनाव आयोग को राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब देना चाहिए। बाद में जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी आरोपों के सिलसिलेवार जवाब दिए तो संजय कुमार ने एक लेख में लिखा – चुनाव आयोग ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है।

संजय कुमार के फर्जी डाटा के आधार पर कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 18 अगस्त 2025 को X पर एक ग्राफिक शेयर कर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच छह महीनों में रामटेक और देओलाली जैसे क्षेत्रों से करीब 40% वोटर हटा दिए गए। वहीं, नासिक वेस्ट और हिंगना में करीब 45% वोटर बढ़ गए। चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा, “अब ये कहेंगे कि 2 और 2 जोड़ने से 420 होता है।” इस डेटा का स्रोत लोकनीति-CSDS था।

पवन खेड़ा का ट्वीट

आज हम एक ऐसे घिनौने खेल की हर परत को उधेड़कर सामने लाने जा रहे हैं, जिसने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा आघात किया है। सीएसडीएस (सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज) के संजय कुमार ने अपनी चालाकी, फर्जी डेटा और साजिशों के जरिए न सिर्फ चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश की, बल्कि कॉन्ग्रेस के लिए एक सुनियोजित हिट जॉब भी अंजाम दिया।

संजय कुमार नाम का यह शख्स खुद को प्रोफेसर और रिसर्चर कहता है, असल में वो एक प्यादे की तरह काम कर रहा है, जो विदेशी फंडिंग और राजनीतिक एजेंडा के पीछे छिपा हुआ है। दरअसल, उसने फर्जी डाटा शेयर कर न सिर्फ आम लोगों में भ्रम फैलाया, बल्कि लगातार भारत की सर्वोच्च चुनावी संस्था चुनाव आयोग को भी निशाना बनाया और जब उसका खेल पकड़ में आ गया, तो चुपचाप अपने फर्जी डाटा को डिलीट कर माफी माँग ली। आइए, समझते हैं ये पूरा खेल…

संजय कुमार के फर्जीवाड़े का खेल

इस साजिश की शुरुआत 11 अगस्त 2025 को हुई, जब संजय कुमार ने ट्विटर पर एक भड़काऊ बयान फेंका। उसने दावा किया कि महाराष्ट्र चुनावों को लेकर चुनाव आयोग को सफाई देनी चाहिए, बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ आरोपों की बौछार कर दी। यह बस शुरुआत थी। इसके बाद उसने सीएनबीसी आवाज जैसे बड़े चैनल पर जाकर अपनी बात को और हवा दी। उसने कहा, “जो कुछ भी हो रहा है, वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है… चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बातचीत की कड़ी भी टूट गई है… चुनाव आयोग को आगे आकर सफाई देने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा और माहौल बिगड़ता जा रहा है।”

ये शब्द सुनकर ऐसा लगता है जैसे वो कोई निष्पक्ष विश्लेषक हो, लेकिन असलियत में वो कॉन्ग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहा था। उसकी ये बातें सुनियोजित थीं, ताकि जनता के मन में शक पैदा हो और चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगे। उसने इस दौरान कई टीवी डिबेट्स में भी हिस्सा लिया, जहां उसने बार-बार यही रट लगाई कि चुनाव आयोग पारदर्शिता नहीं बरत रहा, लेकिन उसने कभी भी अपने दावों के पीछे पुख्ता सबूत नहीं दिए।

महाराष्ट्र चुनाव को लेकर जारी किया फर्जी डाटा

17 अगस्त 2025 को संजय कुमार ने ट्विटर पर एक नया हमला बोला। उसने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें महाराष्ट्र के चुनावी डेटा का दावा पेश किया गया। इस डेटा में कहा गया कि नासिक वेस्ट में 2024 के लोकसभा चुनाव से विधानसभा चुनाव तक वोटरों की संख्या 47.38% बढ़ी, जबकि हिंगना में 43.08% की वृद्धि हुई।

संजय कुमार का ट्वीट, और विस्फोटक खुलासा करते कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम से जुड़े एक्स हैंडल

ये आँकड़े देखने में तो चौंकाने वाले थे, लेकिन इनकी सच्चाई कहीं और थी। इस फर्जी डेटा को शेयर करते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। विपक्ष खासकर कॉन्ग्रेस ने इस मौके को दोनों हाथों से लपक लिया। कॉन्ग्रेसी नेताओं ने इसे ‘एटम बम’ तक कह डाला, मानो ये कोई बड़ा खुलासा हो। उसने दावा किया कि ये डेटा साबित करता है कि चुनावों में धाँधली हुई और बीजेपी ने सत्ता हथियाई।

लेकिन सच्चाई यह थी कि ये सारा डेटा झूठ का पुलिंदा था, जिसे संजय कुमार ने जानबूझकर गढ़ा था। बाद में पता चला कि उसकी टीम ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के डेटा को गलत तरीके से पढ़ा और तुलना की, जिससे ये भ्रामक आँकड़े सामने आए।

ओपिनियन आर्टिकल लिखकर किया चुनाव आयोग पर हमला

संजय कुमार ने अपनी साजिश को और मजबूत करने के लिए नवभारत टाइम्स में एक ओपिनियन आर्टिकल लिखा, जो 18 अगस्त 2025 को प्रकाशित हुआ। लेख का शीर्षक था, “वोट चोरी पर जवाब… चुनाव आयोग खुद ही अपने पैर पर मार रहा कुल्हाड़ी”। इस लेख में उसने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद उठे विवाद को फिर से हवा दी। उसने राहुल गाँधी के उस दावे को दोहराया, जिसमें कहा गया था कि प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में फर्जी वोटर जोड़े गए और वोट प्रतिशत बढ़ाकर धांधली की गई। विपक्ष का तर्क था कि मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र में पाँच महीनों में मतदाता सूची में 8% की वृद्धि हुई, और कुछ बूथों पर 20-50% तक की बढ़ोतरी देखी गई। संजय ने इसको आधार बनाकर चुनाव आयोग पर ऊँगली उठाई और उसे ‘असफल’ ठहराने की कोशिश की।

संजय ने लिखा कि चुनाव आयोग को दोनों चुनावों की मतदाता सूचियाँ सार्वजनिक करनी चाहिए थीं, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, जो उसकी नाकामी को दर्शाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग ने 24 दिसंबर 2024 को कॉन्ग्रेस को लिखित जवाब दे दिया था, जिसमें इन आरोपों को ‘निराधार’ और ‘बेतुका’ करार दिया गया था। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर भी ये जवाब रखा, लेकिन संजय कुमार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और अपना एजेंडा चलाया।

माफी का नाटक यानी सच्चाई छिपाने की कोशिश

जब इस फर्जी डेटा की पोल खुलने लगी, तो संजय कुमार को मजबूरी में पीछे हटना पड़ा। उसने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया और 18 अगस्त 2025 की रात एक माफी ट्वीट जारी किया। उसने लिखा, “मैं महाराष्ट्र चुनावों को लेकर किए गए ट्वीट्स के लिए दिल से माफी माँगता हूँ। 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के डेटा की तुलना में गलती हो गई। हमारी डेटा टीम ने इसे गलत पढ़ लिया। ट्वीट हटा दिया गया है और मेरा इरादा किसी तरह की गलत जानकारी फैलाने का नहीं था।”

लेकिन क्या ये माफी सचमुच दिल से आई? बिल्कुल नहीं! ये तो बस कानूनी कार्रवाई से बचने का एक सस्ता नाटक था। सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत इसकी आलोचना की और कहा कि ये माफी मजबूरी में दी गई है। कई लोगों का मानना है कि संजय ने जानबूझकर गलत डेटा फैलाया, ताकि कॉन्ग्रेस को फायदा हो और जब पकड़ा गया, तो उसने पीछे हटने का ढोंग किया।

बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने संजय कुमार की इस करतूत पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने 19 अगस्त 2025 की सुबह ट्वीट करके लिखा, “माफी माँग ली और संजय कुमार बाहर हो गया। योगेंद्र यादव का यह चेला आखिरी बार कब सही साबित हुआ? हर चुनाव से पहले वो भविष्यवाणी करता है कि बीजेपी हार रही है, लेकिन जब उलटा होता है, तो टीवी पर आकर जस्टिफाई करता है कि बीजेपी कैसे जीती। शर्मनाक!”

उन्होंने आगे लिखा, “इस बार भी ये कोई ईमानदार गलती नहीं थी। कॉन्ग्रेस के फर्जी नैरेटिव को हवा देने के चक्कर में सीएसडीएस ने बिना जाँच के डेटा डाल दिया। ये विश्लेषण नहीं, बल्कि कन्फर्मेशन बायस है। अब वक्त आ गया है कि संजय कुमार और योगेंद्र यादव जैसे लोगों की पवित्र-सी बातों को नमक के एक थैले के साथ लिया जाए।” मालवीय का ये बयान साफ करता है कि संजय कुमार का ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही संदिग्ध रहा है, और ये घटना उसकी पुरानी आदतों का हिस्सा है।

राहुल गाँधी का फ्लॉप शो और विदेशी हैंडलर्स

राहुल गाँधी ने संजय कुमार के फर्जी डेटा पर आँख मूँदकर भरोसा किया और अपनी सारी प्रतिष्ठा दाँव पर लगा दी। वैसे, राहुल की कितनी प्रतिष्ठा बची है, अब इसका अंदाजा भी कोई नहीं लगा पा रहा।

खैर, राहुल ने दावा किया कि ये डेटा साबित करता है कि चुनावों में धाँधली हुई और बीजेपी ने सत्ता हथियाई। लेकिन जब सीएसडीएस ने अपनी गलती मानी, तो राहुल और उसके विदेशी हैंडलर्स का सपना धराशायी हो गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये सारी साजिश कॉन्ग्रेस के विदेशी समर्थकों के इशारे पर रची गई थी, ताकि भारत की चुनावी प्रणाली को बदनाम किया जा सके। राहुल का ये कदम न सिर्फ उसकी अज्ञानता को दिखाता है, बल्कि उसकी टीम की लापरवाही और जल्दबाजी को भी उजागर करता है।

सीएसडीएस का गंदा खेल, विदेशी फंडिंग का एजेंडा

सीएसडीएस कोई साधारण शोध संस्थान नहीं है। यह एक ऐसी मशीन है, जो विदेशी फंडिंग और राजनीतिक एजेंडा के बल पर देश को अंदर से कमजोर करने का काम कर रही है। फोर्ड फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, आईडीआरसी (कनाडा), डीएफआईडी (यूके), नॉराड (नॉर्वे), ह्यूलेट फाउंडेशन और डच एजेंसियों जैसे संगठनों से मिलने वाला पैसा सीएसडीएस को हिंदू समाज को जाति के आधार पर बाँटने और गलत नैरेटिव बनाने में मदद करता है।

इसके लोकनीति प्रोग्राम के तहत हिंदुओं को ओबीसी, ईबीसी, दलित, और सवर्ण में बाँटकर वोटिंग पैटर्न पर डेटा जारी किया जाता है, जो द हिन्दू और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों में बड़े-बड़े शीर्षकों के साथ छपता है। लेकिन मुसलमानों की अंदरूनी जातीय दरारों (जैसे दलित मुसलमान, अशरफ, अज्लाफ, अरज़ल) पर चुप्पी साध ली जाती है।

ये साफ है कि सीएसडीएस का मकसद हिंदू समाज को तोड़ना और कॉन्ग्रेस को फायदा पहुँचाना है। योगेंद्र यादव से लेकर संजय कुमार तक, ये लोग लगातार इस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। ये कोई भूल नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद भारत की एकता को कमजोर करना है।

संजय कुमार की कायरता और कॉन्ग्रेस का पुराना ट्रिक

संजय कुमार ने जो किया, वो कॉन्ग्रेस के पुराने ट्रिक का हिस्सा है। पहले किसी बड़े संस्थान या अखबार से फर्जी खबर चलवाओ, फिर उसे वायरल करो, और जब पकड़े जाओ तो चुपके से माफी माँग लो। संजय ने पहले चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश की, फिर जनता को गुमराह किया, और आखिर में माफी मांगकर पल्ला झाड़ लिया। ये शख्स न सिर्फ लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि देश की जनता के भरोसे को भी ठेस पहुँचाई।

कॉन्ग्रेस का ये पैटर्न पहले भी कई बार देखा गया है – चाहे वो 2019 के चुनावों में फर्जी सर्वे हों या 2024 में गलत दावे, हर बार ये लोग उसी रास्ते पर चलते हैं। संजय कुमार ने बिल्कुल वही कारनामा दोहराया, जो कॉन्ग्रेस के तमाम प्यादों ने पहले किया है।

चुनाव आयोग को उठाने होंगे गंभीर कदम

चुनाव आयोग ने अब तक इस मामले पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया, जो हैरानी की बात है। अगर आयोग सचमुच फर्जी खबरों और गलत जानकारी से निपटने के लिए गंभीर है, तो उसे तुरंत संजय कुमार और सीएसडीएस के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ये लोग लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और अगर इन्हें बक्शा गया, तो भविष्य में और भी बड़े घोटाले सामने आएँगे।

चुनाव आयोग को चाहिए कि वो इस मामले की गहन जाँच करे, सीएसडीएस के फंडिंग स्रोतों की पड़ताल करे और संजय कुमार पर कानूनी कार्रवाई शुरू करे। अगर आयोग चुप रहा, तो ये माना जाएगा कि वो इस तरह की साजिशों को बढ़ावा दे रहा है। जनता अब आयोग से जवाब माँग रही है – क्या वो सिर्फ कागजों पर ही मजबूत है, या असल में भी कार्रवाई कर सकता है?

बहरहाल, संजय कुमार जैसे लोगों की करतूतें अब छिपी नहीं रह सकतीं। उसने फर्जी डेटा फैलाकर, कॉन्ग्रेस के लिए हिट जॉब करके और चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश करके देश की जनता के साथ धोखा किया है। सीएसडीएस का विदेशी फंडिंग वाला एजेंडा और संजय की कायरता साफ दिख रही है। ऐसे में संजय कुमार और सीएसडीएस पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की साजिश न कर सके। वरना, लोकतंत्र का मजाक और बनेगा… और फिर देश की जनता का भरोसा टूटेगा।