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जिस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित, उसकी गर्भगृह में मुस्लिम मंत्री के साथ घुसे CM नीतीश: हिंदू भड़के, गंगाजल से धुला परिसर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हिंदू आस्था से खिलावड़ करने का आरोप लगा है। खबर है कि प्रदेश में गया जिले के दौरे के समय नीतीश कुमार विष्णु पद देवी मंदिर में पूजा पाठ करने गए थे। इस मंदिर के बाहर साफ लिख रखा है कि इसमें गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। मगर, बावजूद इस नोटिस के नीतीश अपने साथ सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद इसरायल मंसूरी को लेकर गए।

मंदिर से लौटने के बाद जहाँ बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी ने मीडिया से बात करते हुए अपनी खुशी जाहिर की और बोले, “मेरा संजोग है, सौभाग्य है कि मुझे सीएम नीतीश कुमार के साथ विष्णु पद मंदिर के गर्भ गृह का दर्शन करने का भी मौका मिला।” वहीं हिंदू यह सुन भड़क गए।

बता दें कि विष्णु पद मंदिर के भीतर जाकर जहाँ मोहम्मद इसरायल फूले नहीं समा रहे हैं। वहीं इस बयान को सुनने के बाद हिंदुओं में गुस्सा है। मंदिर के पंडितों ने भी इस घटना को गलत बताया है। साथ ही बीजेपी ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य हरिभूषण ठाकुर बचौल ने इसे लेकर आक्रोश जताया है।

गर्भगृह को गंगाजल से धोया गया

खबरों की मानें तो यह पता चलने के बाद कि गर्भगृह में एक गैर हिंदू का प्रेवश हुआ, प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभु लाल बिठ्‌ठल ने भगवान विष्णु से क्षमा माँगी। इसके बाद पहले गर्भगृह को गंगा जल से धोया फिर भगवान को भोग लगाया गया। 

मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि मुस्लिम को प्रवेश कराकर मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा तोड़ी गई है। उन लोगों को इस बात का बिलकुल अंदाजा नहीं था कि सीएम के साथ कोई एक ऐसा मंत्री है जो मुस्लिम है। ऐसी बड़ी गलती के लिए वह न सिर्फ भगवान से क्षमा माँग रहे हैं बल्कि समाज के लोगों से भी भी क्षमा माँग रहे हैं। उनका कहना है कि इस घटना से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

बता दें कि सीएम नीतीश रबर डैम के निरीक्षण के लिए गया गए हुए थे। वहाँ उनके साथ इसरायल भी थे और मुख्य सचिव आमिर सुहानी भी। सुहानी जानते थे कि मंदिर में गैर हिंदू प्रवेश नहीं कर सकते, इसलिए वे वहाँ बाहर रुक गए। लेकिन मंसूरी रुकने की बजाय गर्भगृह तक अंदर गए और फोटो में भी दिखे।  

भीड़ जुटाने के लिए ‘आंदोलनजीवियों के राजा बाबू’ की शरण में राहुल गाँधी? कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को YoYa का समर्थन

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर, 2022 से होनी है। इसकी तैयारियों को लेकर राहुल गाँधी ने सोमवार (22 अगस्त, 2022) को सामाजिक एवं गैर सरकारी संगठनों (NGO) के अलावा ‘स्वराज इंडिया’ के योगेंद्र यादव से भी मुलाकात की है। योगेंद्र यादव अन्ना हजारे सत्याग्रह, किसान आंदोलन और शाहीन बाग़ से लेकर कई प्रकार के प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं, ऐसे में लोग उन्हें आंदोलनकारियों के ‘राजा बाबू’ भी बताते हैं, जो कभी भी चोला बदल सकते हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि राहुल गाँधी और योगेंद्र यादव मिलकर देश भर में मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए निकलेंगे। इस बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगेंद्र यादव ने ऐसे ही संकेत भी दिए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो कॉन्ग्रेस का साथ दें। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘सिविल सोसाइटी’ एक विस्तृत अपील भी जारी करेगा।

दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि वह कॉन्ग्रेस की इस यात्रा के विचार से सहमत हैं। उन्होंने यह भी कहा, “भारत जोड़ो यात्रा समय की माँग है। दिन भर की बातचीत के बाद यह राय बनी है कि हम सर्वसम्मति से इस यात्रा का स्वागत करते हैं और अपने-अपने तरीके से इस यात्रा से जुड़ेंगे।”

बताया जा रहा है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर दिल्ली के ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ में हुई इस बैठक में तथाकथित सिविल सोसायटी के सदस्यों के साथ इस बारे में चर्चा हुई है कि कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में उन लोगों की क्या भूमिका हो सकती है।

इस बैठक में ‘स्वराज इंडिया’ के योगेंद्र यादव के अलावा ‘सफाई कर्मचारी आंदोलन’ के बेजवाड़ा विल्सन, ‘योजना आयोग’ की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद, ‘एकता परिषद’ के पीवी राजगोपाल समेत करीब 150 लोग मौजूद थे।

2014 और 2019 लोकसभा चुनावों में हार के बाद कॉन्ग्रेस ने कई राज्यों में भी सत्ता गँवाई है। राहुल गाँधी को अब फिर से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनाने की चर्चा जोरों पर है। हालाँकि, अब ‘भारत छोड़ो यात्रा’ समेत अन्य ऐसे ही अन्य प्रयास करके कॉन्ग्रेस की मंशा है कि भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया जाए। कई लोग इसे राहुल गाँधी की दोबारा ताजपोशी के लिए बनाया गया कार्यक्रम भी बता रहे हैं। तो क्या अब कॉन्ग्रेस ‘आंदोलनजीवियों’ के सहारे सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही है?

कॉन्ग्रेस की यह यात्रा कुल 3500 किलोमीटर की है, जिसकी शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू होगी। इस यात्रा को लेकर कॉन्ग्रेस द्वारा कहा गया है कि इसमें सभी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और समान विचारधारा के लोग शामिल हो सकते हैं।

अब्दुल करीम ने भगवान गणेश की प्रतिमा पर फेंका अंडा, फिर बाथरूम में छिप गया: महाराष्ट्र पुलिस ने किया गिरफ्तार, हिन्दुओं का प्रदर्शन

महाराष्ट्र के कमाठीपुरा में भगवान गणेश की प्रतिमा पर अंडा फेंकने की घटना सामने आई है, जिसके बाद पुलिस ने अब्दुल करीम नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ये घटना रविवार (21 अगस्त, 2022) रात की है, जब कमाठीपुरा मंडल के गली संख्या 13 के कार्यकर्ता गणपति बप्पा की प्रतिमा लेकर आ रहे थे। आरोप है कि तभी अब्दुल करीम अटरू खान उर्फ़ शाहबाज़ नामक 25 वर्षीय युवक ने प्रतिमा पर अंडे फेंके।

हालाँकि, इस दौरान उसका निशाना चूक गया और अंडा उस ट्रॉली की दाहिनी तरफ जा गिरा, जिस पर प्रतिमा को लाया जा रहा था। बता दें कि महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार गणेश चतुर्थी आने ही वाला है। इस बार 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी है, लेकिन महाराष्ट्र में इस दौरान पूरे 10 दिनों का उत्सव मनाया जाता है। लोग 15 दिन पहले ही प्रतिमा लेकर आ जाते हैं। मंडल के कार्यकर्ता ये काम करते हैं। मूर्ति बनाने के स्थल से पूजा वाले स्थल तक प्रतिमा को धूमधाम से लाया जाता है।

पंडाल में प्रतिमा को स्थापित किए जाने के बाद पूजा-पाठ शुरू हो जाता है और फिर उत्सव की तैयारी होती है। इसी तरह कमाठीपुरा के गली संख्या 13 का ‘अमृत कला मंडल’ पिछले 34 वर्षों से गणेश चतुर्थी मनाता आ रहा है। इस बार भी वो चिंचपोकली से प्रतिमा लेकर आ रहे थे। जब ये पद्धा कॉटेज बिल्डिंग से गुजर रहा था, तभी इस पर अंडा फेंका गया। इससे मंडल कार्यकर्ताओं में आक्रोश भर गया, लेकिन उन्होंने किसी प्रकार की हिंसा नहीं की।

उन्होंने 100 नंबर पर पुलिस को फोन कॉल कर के इस करतूत के बारे में तुरंत सूचना दी। उसी दौरान एक पुलिस अधिकारी बाइक से जा रहे थे, जिन्हें मंडल कार्यकर्ता बुला कर ले आए। फिर नागपाड़ा पुलिस थाने को सूचित किया गया, जहाँ के अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे। इमारत के दूसरे फ्लोर से अंडा फेंका गया था। वहाँ एक घर में एक महिला और एक बुजुर्ग मिले, जो पुलिस के सवालों का जवाब नहीं दे रहे थे। फिर अब्दुल करीम बाथरूम में छिपा हुआ मिला।

वो इस बात का जवाब नहीं दे पाया कि वो छिपा क्यों हुआ है। पूछताछ के बाद उसने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे पुलिस थाने ले जाया गया। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया गया। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि इस तरह की घटना पिछले सालों में कभी नहीं हुई और यहाँ दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। DCP योगेश कुमार ने कहा कि मुद्दा सांप्रदायिक नहीं था और इलाके में अब शांति है।

दारू पार्टी में दोस्तों ने गुदाद्वार से घुसा दी स्टील की ग्लास, 10 दिन तक आँतों में अटका रहा: ढाई घंटे की सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने निकाला

ओडिशा में सर्जनों की एक टीम ने एक व्यक्ति के पेट में से स्टील का ग्लास निकालने में सफलता पाई है, जो उसके दोस्तों ने गुदाद्वार से अंदर घुसा दिया था। रविवार (21 अगस्त, 2022) को इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया। जब इस स्टील के ग्लास को उनके गुदाद्वार में दोस्तों ने घुसाया, तब वो लोग शराब के नशे में थे। 45 वर्षीय पीड़ित कृष्णा राउत गुजरात के सूरत में काम करता है। घटना के 10 दिन बाद उसका ऑपरेशन हुआ।

तब वो अपने दोस्तों के साथ जम कर पार्टी कर रहा था, उसी समय ये घटना हुई। इसके अगले ही दिन से उसके आँत के निचले हिस्से में दर्द शुरू हो गया था, लेकिन लोक-लाज के भय से उसने किसी को ये बात नहीं बताई। बताया जा रहा है कि दोस्तों से शरारत से ये काम किया था। उसने अपने परिवार तक को नहीं बताया। लेकिन, जब दर्द असहनीय हो गया तो वो ओडिशा स्थित अपने गाँव गंजम के लिए निकल गया।

उस समय तक उसकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि वो न सिर्फ भारी दर्द से कराह रहा था, बल्कि वो मल त्याग करने में भी असमर्थ था। परिवार वालों की सलाह पर कृष्णा राउत ने MKCG मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में चेकअप कराया। पहले डॉक्टरों ने उसके गुदाद्वार के माध्यम से ही स्टील के ग्लास को निकालने का प्रयास किया, लेकिन असफल होने पर सर्जरी का निर्णय लिया गया। पेट में कट लगा कर स्टील के ग्लास को िकाला गया।

अस्पताल ने बताया है कि मरीज की हालत स्थित है और उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। उक्त स्टील के ग्लास का डायमीटर 8 सेंटीमीटर का था और उसकी लंबाई 15 सेंटीमीटर थी। आश्चर्य की बात ये है कि जिस गुजरात में ये लोग दारू पार्टी कर रहे थे, वो एक ड्राई स्टेट है और वहाँ शराब बैन है। सूरत के टेक्सटाइल मिल में काम करने वाला कृष्णा दर्द के बाद भुवनेश्वर से 140 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित बुगुड़ा प्रखंड के बालीपदर स्थित अपने जन्मस्थान पहुँचा।

अस्पताल जाने के बाद भी उसने नहीं बताया कि माजरा क्या है। जब डॉक्टरों ने X-Ray किया, तब जाकर सच्चाई पता लगी। स्टील के ग्लास को हटाने की प्रक्रिया में डॉक्टरों को ढाई घंटे लगे। उसके बाद उसे 4 अतिरिक्त दिनों के लिए निगरानी में रखा जा रहा है। मल त्याग के लिए उसके लिए अलग से व्यवस्था की गई है। सर्जनों ने ‘Laparotomy’ नामक प्रक्रिया का सहारा लिया, क्योंकि उसके गुदाद्वार में इन्फेक्शन होने का भी खतरा था।

गुजरात के गृह मंत्री ने 24 पाकिस्तानी हिन्दुओं को दी भारतीय नागरिकता, राजस्थान से 2 साल में वापस लौटे 1500 हिन्दू शरणार्थी

हाल ही में गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने पाकिस्तान से आए 24 हिन्दू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की। इसके उलट राजस्थान में 2021-22 में लगभग 1500 ऐसे हिन्दू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता न मिलने के कारण वापस लौटना पड़ा। पाकिस्तान से आने वाले ये शरणार्थी पीड़ित होते हैं, जिन्हें उस मुस्लिम मुल्क में प्रताड़ित किया जाता है। पाकिस्तान में हिन्दू या सिख लड़कियों का अपहरण और धर्मांतरण के साथ-साथ जबरन निकाह कराना भी आम हो गया है।

गुजरात की बात करें तो वहाँ के राजकोट में सोमवार (12 अगस्त, 2022) को एक कार्यक्रम में हर्ष संघवी ने लंबे समय से राज्य में रह रहे हिन्दुओं को नागरिकता सौंपी। ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ के मौके पर मिली इस नागरिकता से शरणार्थी गदगद नजर आए और गुजरात सरकार का धन्यवाद किया। एक बुजुर्ग महिला तो रो पड़ीं और उन्होंने कहा कि इस क्षण का उन्हें वर्षों से इंतजार था, लेकिन अब उनके धैर्य का परिणाम मिल गया है।

एक अन्य युवती, जो एविएशन क्षेत्र में अपना करियर बना रही हैं, उन्हें भी भारत सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें नागरिकता न होने के कारण कोर्स में भी दिक्कतें आ रही थीं। उनके परिवार को 16 वर्षों से इसका इंतजार था। उन्होंने कहा कि अब जब वो भारतीय नागरिक बन गई हैं, अपने सपने को पूरा करने को लेकर उनके अंदर आत्मविश्वास आया है। एक अन्य युवक ने कहा कि अब वो स्नातक पूरा कर के अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा।

इस दौरान हर्ष संघवी ने उन सभी का स्वागत करते हुए आश्वासन दिया कि उनके विकास एवं प्रगति में सरकार उनका साथ देगी। वहीं राजस्थान में इस साल 334 ऐसे शरणार्थियों को वापस लौटना पड़ा है। इसके लिए ‘सीमान्त लोक संगठन’ नामक संस्था ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार की सुस्ती और केंद्र सरकार द्वारा उन पर ध्यान न दिए जाने को भी जिम्मेदार बताया। इनमें से अधिकतर के पास भारतीय नागरिकता पाने के लिए संसाधन और वित्त नहीं हैं, जिस कारण वो वापस पाकिस्तान लौटने को मजबूर हुए।

हिन्दू शरणार्थियों के हित के लिए काम कर रहे संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि पैसे खर्च करने के बावजूद नागरिकता मिलने को लेकर अनिश्चितता है। उनमें से कई पाकिस्तानी हिन्दू 10-15 वर्षों से शरणार्थी बने हुए हैं। 2004-05 में एक कैंप का आयोजन कर 25,000 हिन्दू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिली थी, लेकिन पिछले 5 वर्षों में ये आँकड़ा महज 2000 है। नियमानुसार इन शरणार्थियों को पाकिस्तानी दूतावास से पासपोर्ट लाना होता है, जिसे रिन्यू कराने के लिए 10,000 रुपए तक वसूले जाते हैं। शरणार्थियों में अधिकतर गरीब हैं और इनके पास यहाँ-वहाँ खर्च करने के लिए रुपए नहीं हैं।

‘बाहर से कोई इमाम आता है तो तुरंत पुलिस को बताएँ’: ग्रामीणों से असम CM की अपील, रजिस्ट्रेशन बिना मदरसों में नहीं आ पाएँगे बाहरी मुल्ला-मौलवी

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि अब राज्य के मदरसों में बाहर से आने वाले इमामों और अन्य लोगों को पहले अपना पंजीकरण कराना होगा। असम में हाल ही में दो आतंकवादी गिरफ्तार किए गए हैं, जो दो अलग-अलग मस्जिद के इमाम के रूप में अलकायदा के लिए काम कर रहे थे। इसीलिए, राज्य की भाजपा सरकार ने इससे सबक लेते हुए मदरसों के लिए एक ‘स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ तय करने का निर्णय लिया है।

असम के मुख्यमंत्री ने सोमवार (22 अगस्त, 2022) को बताया कि इसके लिए एक पोर्टल होगा, जिस पर मदरसों में बाहर से आने वाले इमामों और अन्य लोगों को रजिस्टर करना पड़ेगा। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि राज्य के मुस्लिम नागरिकों से इसे लागू करने के लिए मदद ली जा रही है। हालाँकि, जो पहले से ही असम के नागरिक हैं, उन्हें इस SoP के तहत अपना नाम रजिस्टर कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। ये राज्य के बाहर के लोगों के लिए है।

साथ ही उन्होंने गाँव वालों से भी कहा है कि अगर इलाके में कोई ऐसा इमाम आता है जिसे वो लोग नहीं जानते हैं, तो ग्रमीणों को तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाने में देनी चाहिए। इसके बाद पुलिस अज्ञात इमाम की पुष्टि करेगी, तत्पश्चात ही उन्हें वहाँ रुकने की अनुमति दी जाएगी। सीएम सरमा ने कहा कि असम के मुस्लिम समुदाय से राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को लागू करने में मदद मिल रही है। कुछ ही महीनों पहले असम में 800 मदरसों को नियमित विद्यालयों में बदल दिया गया था।

अप्रैल में असम में अलकायदा के गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 16 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं जुलाई में भी एक टेरर मॉड्यूल के खुलासे के बाद 12 आतंकी दबोचे गए थे। वहाँ मस्जिदों-मदरसों में आतंकवादी गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं। मोरीगाँव के एक मदरसे में आतंकी गतिविधि में शामिल 8 मौलवी धराए थे। हाल ही में दो ऐसे इमाम को गिरफ्तार किया गया, जो मस्जिद की आड़ में अलकायदा के लिए भर्ती कर रहे थे और आतंकी स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे थे।

‘AAP तोड़ दो सारे केस बंद करवा देंगे’: सिसोदिया ने किया BJP से ऑफर मिलने का दावा, केजरीवाल ने कहा- इन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए

शराब घोटाले में अपने घर पर हुई छापेमारी के बाद से दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बीजेपी पर लगातार हमला कर रहे हैं। सोमवार (22 अगस्त 2022) को उन्होंने दावा किया कि उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) को तोड़ने का ऑफर बीजेपी ने दिया है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा के क्षेत्र में सिसोदिया के कार्यों को देखते हुए उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की माँग की है। केजरीवाल की इस माँग के बाद नेटिजन्स भी कंफ्यूज हैं कि उन्होंने अपने डिप्टी का समर्थन किया है या फिर उन पर तंज कसा है।

सिसोदिया ने एक ट्वीट में कहा है, “मेरे पास भाजपा का संदेश आया है- आप तोड़कर भाजपा में आ जाओ, सारे CBI/ED के केस बंद करवा देंगे। मेरा भाजपा को जवाब- मैं महाराणा प्रताप का वंशज हूँ, राजपूत हूँ। सर कटा लूँगा लेकिन भ्रष्टाचारियो षड्यंत्रकारियों के सामने झुकूँगा नहीं। मेरे ख़िलाफ़ सारे केस झूठे हैं। जो करना है कर लो।”

मनीष सिसोदिया के इस ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल का एक बयान मजाक का विषय बना हुआ है। इसमें उन्होंने कहा है, “मनीष सिसोदिया ने सरकारी स्कूलों में सुधार किया जो अन्य पार्टियाँ 70 वर्षों में नहीं कर सकीं। ऐसे व्यक्ति को भारत रत्न मिलना चाहिए। पूरे देश की शिक्षा प्रणाली उन्हें सौंप दी जानी चाहिए। लेकिन, इसके बजाय उन पर सीबीआई के छापे मरवाए जा रहे हैं।”

गौरतलब है कि शुक्रवार (19 अगस्त) को सीबीआई ने सिसोदिया के घर सहित कुल 31 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान सीबीआई ने आवश्यक दस्तावेजों सहित सिसोदिया का मोबाइल व लैपटॉप भी जब्त किया है। एजेंसी ने इस मामले में 15 लोगों पर नामजद एफआईआर की है। सिसोदिया को मुख्य आरोपित बनाया है।

ननदी सन भउजी सनकीः ‘ब्रह्मास्त्र’ की रिलीज से पहले आलिया भट्ट ने दिखाई करीना कपूर वाली अकड़, कहा- मैं पसंद नहीं तो मेरी फिल्म मत देखो

फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ की रिलीज से पहले अभिनेत्री आलिया भट्ट ने करीना कपूर वाली अकड़ दिखाई है। बता दें कि फरवरी 2022 में रिलीज हुई आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने दुनिया भर में 200 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया था, जिसके बाद से वो सातवें आसमान पर हैं। हाल ही में आई ‘ डार्लिंग्स’ को Netflix ने रिलीज किया। ‘ब्रह्मास्त्र’ में वो अपने पति रणबीर कपूर के ऑपोजिट दिखेंगी। उन्होंने हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की भी घोषणा की है।

वैसे तो सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से ही बॉलीवुड में नेपोटिज्म के बोलबाले को लेकर आलोचना जोर-शोर से हो रही है, लेकिन उससे पहले भी ये बातें उठती रहती थीं। करण जौहर ने ही आलिया भट्ट को 2011 में ‘स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर’ से लॉन्च किया था, जो डेविड धवन के बेटे वरुण की भी डेब्यू थी। आलिया खुद फिल्म निर्देशक महेश भट्ट की बेटी हैं। उनके पिता ने उन्हें लेकर ‘सड़क 2 (2020)’ बनाई भी थी, जो बुरी तरह फ्लॉप रही।

अब नेपोटिज्म के कारण बॉलीवुड को निशाना बनाए जाने को लेकर आलिया भट्ट ने कहा है कि उनका मानना है कि इस चर्चा को वो एक ही चीज के माध्यम से विराम से सकती हैं और वो है उनकी फ़िल्में। उन्होंने कहा कि प्रतिक्रिया न देने पर उन्हें बुरा नहीं लगता है। ‘Mid Day’ से बात करते हुए आलिया भट्ट ने कहा कि उन्हें लोगों की आलोचना का बुरा ज़रूर लगता है, लेकिन जिस काम के लिए उन्हें सम्मान और प्यार मिलता है, उसकी ये एक छोटी सी कीमत है।

आलिया भट्ट ने कहा, “मैं बोल-बोल कर खुद का बचाव नहीं कर सकती हूँ। और आप अगर मुझे पसंद नहीं करते हैं, तो मेरी फ़िल्में मत देखो। मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती। लोगों को कुछ न कुछ कहना रहता है। मैंने ‘गंगूबाई’ नामक एक हिट फिल्म दी। जीत किसकी हुई? मेरी। कम से कम तब तक, जब तक मेरी कोई फिल्म फ्लॉप नहीं हो जाती। मैं अपनी फिल्मों के जरिए ये साबित करूँगी कि मैं जहाँ हूँ, उसके योग्य हूँ। आखिर ये बेवकूफाना चर्चा कहाँ से आई? इसका कोई कारण ही नहीं है।”

याद दिला दें कि करीना कपूर ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था, लेकिन ‘लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज के बाद जब फिल्म फ्लॉप होनी शुरू हुई तो उनके सुर बदल गए थे। फिल्म के प्रमोशन के दौरान करीना कपूर खान ने कहा था कि अगर फिल्म अच्छी होगी तो इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी और ये सभी उम्मीदों के पार चली जाएगी। उन्होंने कहा था कि बॉयकाट जैसी चीजों का अच्छी फिल्म पर असर नहीं होता और वो इसे गंभीरता से भी नहीं लेतीं। एक अन्य इंटरव्यू में करीना कहा था कि विवादों पर सफाई देना वो जरूरी नहीं समझतीं।

‘नहीं कबूला इस्लाम, हिंदू हूँ और हिंदू ही रहूँगा’: जिस पुजारी के मुस्लिम बनने का ‘विज्ञापन’ अखबार में आया, वे शुद्धिकरण करवा धर्म में लौटे

कर्नाटक के तुमकुर जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के 61 वर्षीय पुजारी एचआर चंद्रशेखर, जो पिछले दिनों इस्लाम में परिवर्तित होने की खबर के कारण में चर्चा में आए थे, उन्होंने अब अपना फैसला बदल लिया है। मीडिया में दिए बयान में उन्होंने कहा कि वो हिंदू ही रहेंगे।

बता दें कि, चंद्रेशकर पिछले 25 सालों से तुमकुर जिले के हीरेहल्ली स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पुजारी रहे हैं। लेकिन पिछले हफ्ते शुक्रवार को उन्होंने एक अखबार में खबर निकलवाई कि वह अपनी निजी दिक्कतों के चलते मुस्लिम बन रहे हैं। इसके बाद उनकी इस्लामी फोटो पहने तस्वीर भी सामने आई जो बहुत जल्दी वायरल हो गई।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में चंद्रशेखर के दोस्त रुद्र आराध्य ने बताया, “मंदिर के पुरोहितत्व के साथ-साथ संपत्ति मामलों में विवाद के बाद, चंद्रशेखर अपने दो भाइयों से परेशान थे। उनके भाइयों ने 4 साल पहले पुजारी से कहा था कि कुछ साल के लिए उन्हें पुरोहित बनाया जाए। लेकिन अब चंद्रशेखर के भतीजे पुरोहित बन गए हैं। वह अपने भाइयों को सबक सिखाना चाहते थे जिन्होंने उनसे उनका पुरोहित का पद छीना था। “

चंद्रेशेखर द्वारा ऐलान किए जाने के बाद, कई अखबारों में पुजारी के इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने की खबर आई, जिसके बाद भाजपा नेतका सोगाड़ू शिवन्ना ने उनसे मुलाकात की और समझाया कि ऐसा न करें।

लंबी बातचीत के बाद चंद्रशेखर ने कहा, “मुझे मुस्लिमों में दाह संस्कार का जो रिवाज है वो अच्छा लगता था, इसलिए मैं मुस्लिम बनना चाहता था। मैंने अखबारों में दिया जरूर, लेकिन मैंने इस्लाम नहीं अपनाया। मैं हिंदू हूँ और हिंदू ही रहूँगा।”

जब उनसे जालीदार टोपी वाली तस्वीर के बारे में पूछा गया तो वह बोले कि वो तो वह एक नया मस्जिद खुला है, उसके उद्घाटन में गए थे।

कथिततौर पर शिवन्ना ने उनकी काउंसलिंग की और उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इसके बाद वह उनके शुद्धिकरण के लिए उन्हें तुमकुरु में व्यासराज मठ में ले गए। चंद्रशेखर ने कहा “सोगडु शिवन्ना ने मुझसे बात की और मेरे शुद्धिकरण के लिए एक पंडित के पास ले गए। मैं एक बार फिर लिंगायत ‘दीक्षा’ लूँगा।”

जिन्हें बताते हैं पुतिन का ब्रेन, उनकी बेटी को मॉस्को में कार ब्लास्ट में उड़ाया: टारगेट पर खुद थे डुगिन, यूक्रेन का हाथ होने की आशंका

रूस की राजधानी मॉस्को में शनिवार (20 अगस्त 2022) को जोरदार कार ब्लास्ट हुआ। इस ब्लास्ट में दारिया डुगिन (Darya Dugina) की मौत हो गई। पेशे से पत्रकार रही दारिया रूस के राष्ट्रपति व्लामिदीर पुतिन का ब्रेन कहे जाने वाले अलेक्जेंडर डुगिन (Alexander Dugin) की बेटी थीं। कहते हैं कि पुतिन के फैसलों के पीछे अलेक्जेंडर डुगिन की ही सोच काम करती है।

हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही रूस के भीतर मौजूद पुतिन विरोधी भी शक के दायरे में हैं। बताया जा रहा है कि डुगिन ही टारगेट पर थे। लेकिन उनकी बेटी शिकार बन गईं।

रूसी जाँच एजेंसी ने कहा है, “शुरुआती जाँच से यह सुनियोजित हमला लगता है। विस्फोटक ड्राइवर की सीट की तरफ से कार के नीचे लगाया गया था।” रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल मॉस्को में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद दारिया टोयोटा लैंड क्रूजर कार में सवार हुईं। जैसे की कार स्टार्ट हुआ उसमें जोरदार धमाका हुआ। इस कार्यक्रम में उनके पिता अलेक्जेंडर डुगिन भी मौजूद थे। लेकिन लौटते समय उन्होंने कार बदल ली थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अलेक्जेंडर डुगिन की हत्या के लिए ही कार के नीचे विस्फोटक लगाया गया था।

बता दें कि अलेक्जेंडर डुगिन की रूस में पहचान राजनीतिक विश्लेषक और बेहतरीन रणनीतिकार के रूप में है। लेकिन पश्चिमी देश और पुतिन विरोधी उन्हें फासीवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला शख्स मानते हैं। रूसी मीडिया में इस हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ होने की चर्चा है। ऐसे में यूक्रेन पर जारी रूसी हमलों में और तेजी आने की आशंका जताई जा रही है। हालॉंकि यूक्रेन ने हमले से संबंध होने से इनकार किया है।