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शिवसेना किसकी? उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की लड़ाई संवैधानिक पीठ के हवाले, 25 अगस्त तक चुनाव आयोग को फैसला करने से SC ने रोका

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे पाँच जजों की बड़ी बेंच को सौंप दिया है। शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सेना बनाम शिवसेना विवाद में उद्धव और शिंदे गुटों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर 7 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इसे संविधान पीठ को सौंप दिया।

बता दें कि शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है। इसके अलावा शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर शिंदे और ठाकरे गुटों के बीच झगड़ा है। इस मामले में अब अगली सुनवाई गुरुवार (25 अगस्त, 2022) को होगी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा, “मामले में गुरुवार को संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें और पीठ शुरुआत में निर्वाचन आयोग की कार्यवाही से संबंधित चुनाव चिह्न के संबंध में फैसला करेगी। और पहले निर्णय लिया जाएगा कि क्या चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगानी है?”

बता दें कि कई संवैधानिक मुद्दे, विशेष रूप से 10 वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) से संबंधित मुद्दे भी याचिकाओं में शामिल हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 10वीं अनुसूची पर व्यापक विचार विमर्श की जरूरत है। वहीं स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की शक्तियों को भी सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ परिभाषित करेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में CM एकनाथ शिंदे ने दलबदल, विलय और अयोग्यता से जुड़े कई संवैधानिक सवाल उठाए हैं। जहाँ इस मामले को प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को संविधान पीठ के समक्ष याचिकाओं को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। वहीं निर्वाचन आयोग को शिंदे गुट की उस याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं करने का निर्देश दिया जिसमें शिंदे गुट ने कहा था कि उसे असली शिवसेना माना जाए और पार्टी का चुनाव चिह्न आवंटित किया जाए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि नेबाम राबिया के फैसले की समीक्षा करने की भी जरूरत है। दरअसल, नेबाम रेबिया के फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि स्पीकर के लिए दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करना संवैधानिक रूप से अनुचित था, जबकि अध्यक्ष के कार्यालय से अपने स्वयं के निष्कासन के लिए संकल्प की सूचना लंबित थी।

‘नीतीश कुमार को हिंदुओं को अपमानित करना पसंद, क्या वे मक्का जाएँगे’: बिहार के CM को बीजेपी ने घेरा, मुस्लिम मंत्री के साथ गया के मंदिर में किया था प्रवेश

मुस्लिम मंत्री के साथ गया के विष्णुपद मंदिर में प्रवेश करने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) घिरते जा रहे हैं। बीजेपी ने कहा है कि नीतीश कुमार को हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करना पसंद है। साथ ही पूछा है कि अपना साम्प्रदायिक सद्भाव दिखाने के लिए क्या वे मक्का जा सकते हैं?

बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल (Sanjay Jaiswal) ने मंगलवार (23 अगस्त 2022) को कहा, “”सोमवार को जिस प्रकार से हिंदू धर्म का अपमान हुआ है, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। नीतीश कुमार जान-बूझकर इसराइल मंसूरी को लेकर विष्णुपद गए। हिंदू समाज को अपमानित करना उन्हें बहुत पसंद है। वे कई वर्षों से गया के विष्णुपद मंदिर जाते रहे हैं। वे इस बात को अच्छे से जानते हैं कि वहाँ गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।”

जायसवाल ने कहा, “नीतीश कुमार ने न केवल हिंदुओं को अपमानित किया है, बल्कि सामाजिक ताना-बाना तोड़ने की कोशिश भी की है। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या वे अपना साम्प्रदायिक सद्भाव दिखाने के लिए मक्का जाएँगे?” बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने इस घटना को लेकर नीतीश कुमार से सार्वजनिक माफी की माँग की है। ऐसा नहीं होने पर सड़क से सदन तक मुख्यमंत्री का पार्टी द्वारा विरोध किए जाने की बात कही है।

जायसवाल ने कहा कि नीतीश कुमार मंसूरी के मंदिर जाने को सेकुलरिज्म बताएँगे। लेकिन यह सेकुलरिज्म मक्का में क्यों नहीं है? उन्होंने कहा, “जब मस्जिद में उसी मजहब के लोग जाएँगे तो मंदिर में सिर्फ हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति के नियम का भी पालन किया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि नीतीश कुमार सोमवार (22 अगस्त 2022) को गया के विष्णुपद मंदिर में पूजा-पाठ करने गए थे। इस मंदिर के बाहर स्पष्ट रूप से लिखा है- यहाँ गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। इसके बावजूद नीतीश के साथ बिहार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी भी मंदिर के गर्भगृह में चले गए थे। इसको लेकर हिंदुओं ने नाराजगी जताई है। इस घटना के बाद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभु लाल बिठ्‌ठल ने भगवान विष्णु से क्षमा माँगी। गर्भगृह को गंगा जल से धोया गया।

हैदराबाद में जिस MLA के लिए लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, उन्होंने पूछा- राम भक्तों की सुनवाई क्यों नहीं होती: तेलंगाना में BJP अध्यक्ष भी गिरफ्तार

तेलंगाना पुलिस ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उधर विधायक टी राजा सिंह ने पूछा है कि राम भक्तों की कोई सुनवाई क्यों नहीं है? बता दें कि मंगलवार (23 अगस्त, 2022) को भाजपा तेलंगाना में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रही है और पार्टी के कार्यकर्ता जगह-जगह सड़कों पर उतरे हुए हैं। सत्ताधारी TRS की विधान पार्षद कलवाकुन्तल कविता के हैदराबाद स्थित आवास के बाहर से भाजपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिसका पार्टी विरोध कर रही है।

असल में ये मामला दिल्ली में शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें AAP नेता और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम सामने आया है। उनके कई ठिकानों पर CBI की छापेमारी भी हुई है। इसी घोटाले में TRS महिला नेता कविता का नाम भी जुड़ा है। 2014-19 के बीच वो निजामाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुकी हैं। बंदी संजय कुमार जब गिरफ्तार किए गए, तब वो जगाँव में एक धरना प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ी रोक कर इस गिरफ़्तारी का विरोध किया।

इसके बाद तेलंगाना पुलिस हिंसक हो उठी और भाजपा कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया गया। पुलिस की लाठीचार्ज में कई भाजपा कार्यकर्ता घायल हुए हैं। इससे एक दिन पहले कलवाकुन्तल कविता के हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। वो राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी भी हैं। प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ताओं को न सिर्फ TRS कार्यकर्ताओं ने खदेड़ा, बल्कि पुलिस ने भी उन्हें पीटा और गिरफ्तार किया।

विधायक T राजा सिंह ने हिन्दू देवी-देवताओं को निशाना बनाए जाने को लेकर उठाया सवाल

उधर भाजपा विधायक टी राजा सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा है कि जब हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर चुटकुले सुनाए जाते हैं और उन्हें निशाना बनाया जाता है, तब ऐसी कोई FIR नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज उनके खिलाफ राज्य में जगह-जगह FIR किए जा रहे हैं, लेकिन क्या हमारे राम, भगवान नहीं हैं? क्या हमारी सीता माँ नहीं है? बता दें कि मुस्लिम भीड़ उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगे।

उन्होंने कहा, “आज तेलंगाना में भगवान राम और माँ सीता के भक्त पूछ रहे हैं कि हमारे देवी-देवताओं पर बदजुबानी करने वालों को पुलिस की सुरक्षा क्यों मिलती है? उसे ऐसी सुरक्षा दी जाती है, जैसी देश के प्रधानमंत्री को भी न मिले। आप जनता को किस तरह का सन्देश देना चाहते हैं?” उनका इशारा मुनव्वर फारूकी की तरफ था। पुलिस की भारी तैनाती के बीच उसका कॉमेडी शो कराया गया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और माँ सीता के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द बोलने वालों का यहाँ सम्मान है, उनके भक्तों की कोई इज्जत नहीं है।

जानवर काटने वाले कसाई रिजवान ने 8 साल की बच्ची को काटा: जिस महिला से थे अंतरंग संबंध, उसकी ही बेटी की रेप के बाद कर दी हत्या

दिल्ली में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहाँ नाबालिग लड़की को अगवा कर उसके साथ बलात्कार और उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में पुलिस ने आरोपित कसाई को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित का नाम रिजवान है, वह पेशे से कसाई है, जिसने यमुना खादर के वन क्षेत्र में 8 साल की बच्ची के अपहरण और बलात्कार के मामले में अपना गुनाह कबूल लिया है। बच्ची पिछले 15 दिनों से लापता थी।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि 4-5 अगस्त की रात दरियागंज निवासी ने अपने घर में अपनी बेटी को गायब पाया। वहीं इस मामले में डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने बताया कि 5 अगस्त की सुबह हमारे पास फोन आया था जिसमें बताया गया कि एक बच्ची को घर से अगवा किया गया है। इस मामले में 50 पुलिस कर्मियों की एक टीम का गठन किया गया था लेकिन काफी खोजने के बाद भी बच्ची नहीं मिल पाई।

18 अगस्त को बरामद हुई क्षत-विक्षत लाश

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि 18 अगस्त को एक बच्ची का शव यमुना खादर इलाके में मिला जिसकी पहचान उसके अभिभावकों ने की। पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपित रिजवान उर्फ ​​बादशाह तुर्कमान गेट इलाके में कसाई का काम करता था। वह नशे का आदी था और यमुना खादर में अक्सर गांजा पीने जाया करता था। आरोपित रिजवान का बच्ची के घर भी आना-जाना था।

रिजवान ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि एक दिन बच्ची ने उसे अपनी माँ के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा लिया था। ऐसे में उसने बच्ची को जान से मारने का फैसला कर लिया था। जिससे यह बात किसी को पता न चले। वह रात में पीड़िता के घर में घुसा और सो रही बच्ची को अगवा कर उसे यमुना खादर इलाके में ले गया। जहाँ उसने उसके साथ बलात्कार कर उसका गला काट दिया और उसकी पहचान छुपाने के लिए चेहरा क्षत-विक्षत कर दिया।

बता दें कि इस मामले में आरोपित रिजवान को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि बच्ची की हत्या में माँ का कोई रोल अभी तक सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि जहाँ इस मामले में आरोपित रिजवान गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट को नोटिस भेजकर एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, आरोपित का विवरण, प्राप्त शिकायतों की प्रति और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण माँगा है।

दिल्ली HC ने 15 साल की लड़की के निकाह को ठहराया जायज, इस्लामी कानून का हवाला देकर कहा- ‘कोई तुम्हें अलग नहीं कर सकता’

मुस्लिम लड़कियों के निकाह की उम्र को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि इस्लामी कानून के अनुसार, लड़की अगर 18 साल से कम भी है तो भी उसे अधिकार है कि वो अपने अम्मी-अब्बू की मर्जी के बगौर निकाह कर ले।

जस्टिस जसमीत सिंह ने एक मुस्लिम दंपत्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान अपनी यह टिप्पणी दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दंपत्ति ने इसी साल मार्च में एक दूसरे से निकाह किया था और परिवार के डर से कोर्ट में याचिका दी थी कि उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

दरअसल लड़की के परिजन इस निकाह के खिलाफ थे। उन्होंने धारा 363 के तहत केस भी दर्ज करवाया था। इसमें आईपीसी की धारा 375 और पॉक्सो की धारा 6 भी बाद में जोड़ी गई थी। जबकि, लड़की ने अपने बयान में कहा कि उसके माता पिता उसे हमेशा मारते थे। वह अपनी मर्जी से शादी के लिए भागी है।

कोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार, लड़की की जन्मतिथि 2 अगस्त 2006 की है। यानी लड़की की उम्र शादी के समय 15 साल 5 महीने की थी। परिवार की शिकायत के बाद उसे अप्रैल में शौहर के पास से वापस लाया गया और उसका दीन दयाल अस्पताल में मेडिकल चेक अप हुआ।

मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि निकाह के बाद लड़की और उसके शौहर के बीच शारीरिक संबंध बने और अब लड़की माँ बनने वाली है। दंपत्ति ने परिवार से बचने के लिए कोर्ट में याचिका दी और कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा,

“इस्लामी कानून के अनुसार अगर लड़की सयानी हो गई है तो वो अपने अम्मी-अब्बू की मर्जी के बगैर निकाह करके अपने शौहर के साथ अलग रह सकती है। चाहे उस समय वो 18 साल से कम या नाबालिग ही क्यों न हो।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि इस केस में वो पॉक्सो कानून नहीं लगा सकते, क्योंकि ये यौन हिंसा का मामला नहीं है। इसमें दंपत्ति ने प्रेम में पड़कर निकाह किया और फिर शारीरिक संबंध बनाए। कोर्ट ने यह भी पाया कि लड़की ने शौहर से कानूनी ढंग से निकाह किया है और एक दूसरे के साथ रहना चाहते हैं।

बेंच ने कहा,

“अगर याचिकाकर्ताओं को अलग करते हैं तो ये याचिकाकर्ताओं और उनके आने वाले बच्चे के लिए ट्रॉमा होगा। राज्य का मकसद याचिकाकर्ता को संरक्षण देना है। अगर याचिकाकर्ता ने मर्जी से निकाह किया है और खुश है। तो कोई उनके निजी जीवन में घुसकर उन्हें अलग नहीं कर सकता।”

इसके बाद कोर्ट ने लड़की को अपने शौहर के साथ आराम से रहने को कहा और दंपत्ति की सुरक्षा के निर्देश दिए।

राजस्थान: सरकारी स्कूल में नाबालिग छात्राओं से शिक्षक ने की छेड़छाड़, नाराज ग्रामीणों ने इकबाल हुसैन को पीटा; काट दिए बाल

राजस्थान (Rajasthan) के सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) जिले में एक शिक्षक पर दो नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ (Molested) का आरोप लगा है। आरोपित शिक्षक का नाम इकबाल हुसैन है। मामला सामने आने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शिक्षक की जमकर पिटाई की और उसके बाल काट दिए। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसमें ग्रामीण इकबाल हुसैन की कॉलर पकड़कर उसे मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रहा आरोपित काफी उम्रदराज लग रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सवाई माधोपुर जिले के रवाजना डूंगर थाना इलाके में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खिजुरी में 20 अगस्त 2022 को स्कूल के शिक्षक इकबाल हुसैन ने दो नाबालिग छात्राओं को सफाई के बहाने कम्प्यूटर रूम में बुलाया और उनके साथ छेड़छाड़ की। छात्राओं ने घर पहुँचकर रोते हुए परिजनों को इकबाल हुसैन की करतूत के बारे में बताया। अगले दिन यानी 21 अगस्त (रविवार) को स्कूल में छुट्टी थी। सोमवार (22 अगस्त 2022) को स्कूल खुलते ही बालिकाओं के परिजन ग्रामीणों के साथ वहाँ पहुँच गए। बाद में स्कूल के गेट पर ताला लगाकर लालसोट कोटा मेगा हाइवे पर जाम लगा दिया।

आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपित की जमकर पिटाई की और बाद में उसके बाल भी काट दिए। परिजनों और ग्रामीणों ने माँग की कि आरोपित शिक्षक को सस्पेंड किया जाए और स्कूल का स्टाफ बदला जाए। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी आरोपित इकबाल पर छात्राओं से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे हैं। वह स्कूल में अक्सर किसी ना किसी बहाने छात्राओं को गलत तरीके से छूने का प्रयास करता था। इसके बावजूद उस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार बवाल होने के बाद उसे सस्पेंड (Suspend) कर दिया गया है।

जिसने सलमान खान से लिया ‘पंगा’, BJP की उस महिला नेता की गोवा में मौतः 12 घंटे पहले इंस्टाग्राम पर डाला था Video, बदला था ट्विटर प्रोफाइल पिक

अभिनेत्री और हरियाणा की भाजपा नेता सोनाली फोगाट की गोवा में संदिग्ध हार्ट अटैक से मौत हो गई है। उन्होंने TikTok के जरिए शोहरत बटोरी थी। इंस्टाग्राम पर सोनाली फोगट के 8.82 लाख फॉलोवर्स हैं। भाजपा ने उन्हें हरियाणा विधानसभा चुनाव में आदमपुर से कॉन्ग्रेस के कुलदीप बिश्नोई के विरुद्ध उतारा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालाँकि, अब कुलदीप बिश्नोई भी कॉन्ग्रेस से बागी होकर भाजपा में ही आ चुके हैं। AAP ने इस मौत को संदिग्ध और रहस्यमयी बताते हुए जाँच की माँग की है। मौत से 12 घंटे पहले ही इंस्टाग्राम पर उन्होंने वीडियो डाला था और ट्विटर पर प्रोफाइल तस्वीर बदली थी।

सोनाली फोगाट ने कुछ टीवी सीरियलों और वेब सीरीज में भी काम किया था। उनकी उम्र मात्र 42 साल थी। उन्होंने हिसार में ‘हरियाणा कला परिषद’ के साथ भी काम किया था। उनकी मौत सोमवार (22 अगस्त, 2022) की रात हुई। उन्हें नॉर्थ गोवा स्थित अंजुना के सेंट एंथोनी हॉस्पिटल लाया गया। उन्होंने बेचैनी की शिकायत की थी। वहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जाँच में हार्ट अटैक मौत का कारण है, लेकिन जाँच चल रही है।

बोम्बोलिम स्थित गोवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सोनाली फोगाट का पोस्टमॉर्टम किया गया। सोनाली फोगाट अपने कुछ कर्मचारियों के साथ गोवा के दौरे पर थीं। उन्होंने 2008 में ही भाजपा का रुख किया था। पिछले सप्ताह कुलदीप बिश्नोई ने सोनाली फोगाट के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी, भाजपा में शामिल होने के बाद। कुछ वर्षों पहले सोनाली फोगाट के पति की भी हार्ट अटैक से ही मृत्यु हुई थी। वो मूल रूप से फतेहाबाद के भूथन कलाँ गाँव की रहने वाली थीं।

सोनाली फोगाट की शादी हिसार के संजय फोगाट से हुई थी। 2016 में वो अपने फार्महाउस में ही मृत पाए गए थे। अब सोनाली फोगाट के परिवार के सदस्य उनकी डेड बॉडी को लेने गोवा पहुँचे हैं। उन्हें 2020 में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 14’ में भी देखा गया था। उसमें सलमान खान के साथ उनकी बहस हो गई थी। वो जून 2020 में अपशब्द कहने पर हिसार मार्केट कमेटी के सचिव को पुलिस की मौजूदगी में थप्पड़ जड़ने और सैंडल से पीटने को लेकर भी चर्चा में आई थीं। वो जाट समुदाय से ताल्लुक रखती थीं।

सोनाली फोगाट का जन्म 21 सितंबर, 1979 को हुआ था। हिसार दूरदर्शन से एंकरिंग करते हुए उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी। पंजाबी और हरियाणवी म्यूजिक वीडियोज में उन्होंने फिर कदम रखा। इंदौर से सांसद रहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें भाजपा में शामिल करवाया था। उन्होंने उन्हें तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से मिलवाया था। 10वीं तक पढ़ाई के बाद उनकी शादी का दी गई थी। उन्होंने बताया था कि उनके पति की मौत के बाद लोगों ने उनका फायदा उठाने की कोशिश की और उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

‘हैदराबाद में चलेगा हमारा राज’: टी राजा सिंह के खिलाफ सड़कों पर उतरे कट्टरपंथी, पुलिस के सामने लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, BJP नेता गिरफ्तार

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक टी राजा सिंह को गिरफ्तार किया गया है। उनपर कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया है कि उनकी वीडियो में पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया गया।

वीडियो सोमवार रात मुनव्वर फारूकी के शो के खिलाफ बनाई गई थी। इसी में टी राजा सिंह ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर और उनके निकाह को लेकर विवादित टिप्पणी की। इसे देखने के बाद मुस्लिम भड़क गए और देर रात सड़कों पर कट्टरपंथियों की ऐसी भीड़ देखने को मिली, जो ‘खुलेआम सर तन से जुदा’ के नारे लगा रही थी।

एक सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर सैयद कशफ द्वारा इस भीड़ का नेतृत्व किया गया। हैदराबाद कमिश्नर ऑफिस के बाहर ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा-सर तन से जुदा’ के नारे लगते रहे। शिव अरूर के ट्वीट के मुताबिक, कशफ की वीडियो में कहते सुना गया, “हैदराबाद में चलता है हमारा राज (Hyderabad is controlled by us)।”

आजतक की रिपोर्ट बताती है कि कट्टरपंथियों की यह भीड़ पूरी रात सड़क पर डटी थी और सुबह होने पर इन्होंने नमाज पढ़ी। फिर अपनी माँग करने लगे। वहीं हैदराबाद पुलिस ने इस मामले के संज्ञान में आते ही ये केस दायर किया।

दबीरापुरा थाने में आईपीसी की धारा 153ए, 295ए, 505 (1)(b)(c), 505 (2), 506 के तहत केस को दर्ज हुआ और आज सुबह टी राजा सिंह की गिरफ्तारी हुई।

टी राजा सिंह ने इस बीच ये बयान भी दिया कि उन्होंने अपनी वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया है। उनकी वीडियो को गलत लिया जा रहा है। इसलिए वह एक और वीडियो साझा करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि हर एक्शन का एक रिएक्शन होता है।

बता दें कि टी राजा सिंह ने हैदराबाद में मुनव्वर फारूकी का शो रद्द करवाने के लिए लगातार बयान दे रहे थे। लेकिन सोमवार को उन्होंने फारूकी की हिंदूविरोधी कॉमेडी पर निशाना साधते हुए एक वीडियो बनाई और जिसमें बात करते करते वह एक बुजुर्ग व्यक्ति की बात बताने लगे। मुस्लिमों ने उसे सीधा पैगंबर मोहम्मद से जोड़ा और सैंकड़ों की तादाद में सड़कों पर आ गए।

ये क्लिप अब सोशल मीडिया पर वायरल है। मुस्लिम इसे देख भड़क रखे हैं। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगह से हिरासत में लिया है। सबको बशीर बाग समेत अन्य नजदीकी थानों में रखा गया है। अन्य पार्टियों के नेता कह रहे हैं कि भाजपा नेता ने राज्य की शांति भंग करने का प्रयास किया है। उन्हें विधानसभा से सस्पेंड करने की माँग हो रही है।

मैं राहुल गाँधी से मिली हूँ, वे ‘पप्पू’ नहीं हैं: स्वरा भास्कर बोलीं- जैसे कॉन्ग्रेस नेता के साथ हुआ, वैसे ही बॉलीवुड का भी कर दिया ‘पप्‍पूकरण’

फिल्मों की दुनिया में स्वरा भास्कर और राजनीति की दुनिया में राहुल गाँधी का ‘प्रदर्शन’ एक जैसा रहा है। अनिल कपूर के शब्दों में कहें तो- झकास। उनका अभिनय झकास है। इनकी नेतागिरी झकास है। इसलिए उनकी फिल्में चलती नहीं है, ये चुनाव में चलते नहीं हैं। दोनों में एक और समानता हैं। दोनों ही नामचीन लिबरल-सेकुलर माता-पिता के संतान हैं।

लेकिन, स्वरा भास्कर की मानें तो केवल वही नहीं, पूरा बॉलीवुड ही राहुल गाँधी हो गया है। उनका यह भी कहना है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘पप्पू’ नहीं हैं। वे खुद उनसे मिली हैं और उन्हें ‘इंटेलिजेंट’ भी पाया है। वैसे पार्ट टाइम एक्ट्रेस फुल टाइम एक्टिविस्ट स्वरा भास्कर की गिनती उन लोगों में होती है जो हर चीज के ‘विशेषज्ञ’ हैं। जाहिर है कि इंटेलिजेंसी मापने का उनका पैमाना भी सबसे अलग होगा।

इंडिया टुडे से बात करते हुए स्वरा भास्कर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि इस तरह की तुलना जायज होगी, लेकिन मुझे राहुल गाँधी की याद आ रही है। उन्हें हर कोई पप्पू कहने लगा। इसके कारण धीरे-धीरे लोगों को यकीन होने लगा कि वे पप्पू हैं। लेकिन मैं उनसे मिली हूँ। वे बेहद ही बुद्धिमान और मुखर इंसान हैं। इसी तरह बॉलीवुड का भी पप्पूकरण कर दिया गया है।”

दरअसल, इस समय कई हिंदी फिल्मों को लेकर बायकॉट ट्रेंड चर्चा में है। इसको लेकर ही स्वरा अपने विचार रख रही थीं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जिस सुशांत सिंह राजपूत की ‘आत्महत्या’ के बाद बॉलीवुड को जिस तरह प्रोजेक्ट किया गया उसके कारण ही इस तरह की स्थिति पैदा हुई है। ऐसा माहौल बना दिया गया जिससे लोगों को लगने लगा कि बॉलीवुड ऐसी जगह है जहाँ शराब, ड्रग्‍स और सेक्‍स ही होता है। लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन और दोबारा जैसी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ने की वजह को लेकर स्वरा ने अनुराग कश्यप की बात से भी सहमति जताई। अनुराग ने कहा था कि दम तोड़ महँगाई के कारण लोगों के पास पैसा नहीं और वे फिल्में देखने थिएटर में नहीं आ रहे हैं।

कुल मिलाकर स्वरा ने इस इंटरव्यू के दौरान बॉलीवुड को पाक साफ बताने और उसकी दुर्गति के लिए उनलोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार ठहराने की पूरी कोशिश की जिन्हें वह हर मामले में विलेन बताने की आदी रही हैं। लेकिन इस पूरे मामले में उन्होंने जिस तरह राहुल गाँधी को खींच लिया है, उसकी हम कड़ी निंदा करते हैं!

हिंदुत्व-गोरक्षा के लिए लड़ते थे, इसलिए आश्रम में घुस गोलियों से भूना फिर शव को कुल्हाड़ी से काट डाला: जब ओडिशा में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके शिष्यों की हुई हत्या

बीते 3-4 सालों में दर्जनों साधुओं की निर्मम हत्याओं की कई खबरें मीडिया में आई। इनमें पालघर वाली मॉब लिंचिंग को याद किया जाए तो आज भी रूह कांप जाती है। पूरी भीड़ ने बेरहमी से उन साधुओं को पीट-पीटकर मारा था। कोई एक भी ऐसा शख्स नहीं था जो उन्हें बचाने आगे आया हो। जाँच हुई तो पता चला कि ईसाई मिशनरियाँ और माओवादी इसमें शामिल थे।

ऐसा पहली बार नहीं था कि साधुओं की हत्या में ये नाम पहली दफा आए हों। आज से 14 साल पहले आज की ही तारीख में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की भी निर्ममता से हत्या हुई थी। वह दिन जन्माष्टमी का था जब स्वामी लक्ष्मणानंद पर हमला हुआ। माओवादियों ने उनके आश्रम में घुसकर उनके चार शिष्यों को मारा, फिर उनको गोलियों से भून दिया।

हिंदुत्व का प्रचार करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद के प्रति माओवादियों में इतनी घृणा थी कि गोलियों से भूनने के बाद उन लोगों ने उनके शव पर कुल्हाड़ियाँ चलाईं। उनके शरीर को काटा।

ये घृणा क्यों थी?

दरअसल, आदिवासी इलाकों में घुसपैठ कर लोगों को धर्मांतरण का लालच देना ईसाई मिशनरियों का पुराना खेल रहा है। देश के कोने-कोने में ये मिशनरियाँ गरीब-लाचारों को निशाना बनाती हैं और फिर अपने काम को अंजाम देती हैं। ओडिशा में भी दशकों पहले इन लोगों ने इसी तरह का हाल किया हुआ था। लेकिन, 1970 के करीब स्वामी लक्ष्मणानंद वहाँ बसे और इनका सारा खेल बिगड़ गया।

स्वामी लक्ष्मणानंद ओडिशा के वनवासी बहुल फुलबनी (कंधमाल) जिले के गाँव गुरुजंग के रहने वाले थे। छोटी उम्र में ही उन्होंने अपना जीवन दुखी-पीड़ितों की सेवा में समर्पित कर देने का संकल्प किया था। वह साधना के लिए हिमालय पर गए थे और वहाँ से लौटने के बाद गोरक्षा आंदोलन का हिस्सा बने थे।

उन्होंने ओडिशा के वनवासी बहुल फुलबनी के चकापाद गाँव को अपनी कर्मस्थली बनाया। उसके बाद धर्मांतरण कर ईसाई बनाए गए लोगों की हिंदू धर्म में घरवापसी के लिए अभियान चलाया। धीरे-धीरे लोग उनसे प्रभावित होने लगे और यही बात ईसाई मिशनरियों को अखरने लगी।

बताया जाता है कि 1970 से 2007 के बीच स्वामी स्वामी लक्ष्मणानंद पर 8 बार जानलेवा हमले हुए थे। मिशनरियाँ लगातार उनकी हत्या की साजिश रच रही थीं।, जिसे अंत में अंजाम तक 23 अगस्त 2008 को पहुँचाया गया। वो दिन जन्माष्टमी का था। स्वामी लक्ष्मणानंद पर गोली उस समय चलाई गई जब वो श्रीकृष्ण की आराधना में लीन थे। माओवादियों ने पहले उन्हें गोलियों से भूना। फिर उनके शव को कुल्हाड़ी से काटा।

माओवादी नेता निकला हत्या का ओरोपित

उनकी हत्या की बात जैसे ही ओडिशा में फैली, कई जगह प्रदर्शन शुरू हो गए। पड़ताल में सामने आया कि हत्या का मुख्य आरोपित माओवादी नेता सब्यसाची पांडा था। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में माओवादी नेता पांडा सहित उसके 14 साथियों के खिलाफ़ विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल किया था। लेकिन, गिरफ्तार केवल 9 ही हुए। इनमें एक माओवादी नेता उदय था और बाकी के नाम थे- दुर्योधन सुना मांझी, मुंडा बडमांझी, सनातन बडमांझी, गणनाथ चालानसेठ, बिजय कुमार सनसेठ, भास्कर सनमाझी, बुद्धदेव नायक।

हत्या के बाद स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर बलात्कार जैसे झूठे आरोप लगाए गए। एक फादर के घर की नौकरानी को नन बताकर बलात्कार का झूठा प्रचार किया गया। वहीं माओवादी नेताओं ने हत्या को दबाने की खूब कोशिश की। मगर उस वक्त के भाजपा महासचिव पृथ्विराज हरिचंदन ने इसे प्रायोजित बताया और सरकार पर मामला दबाने का आरोप मढ़ा। विश्व हिंदू परिषद ने भी इस घटना के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए आवाज उठाई। साथ ही ओडिशा सरकार से परिषद् के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की जाँच के लिए बने दो न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने को भी कहा गया।