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शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी ने कराई अविवाहित हिंदू युवक की नसबंदी, लालच देकर पूरा किया ‘टारगेट’: विहिप ने लगाया हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप

गुजरात के मेहसाणा जिले में नसबंदी कांड ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी ने अपने टारगेट पूरा करने के लिए दो युवकों की बिना सहमति के नसबंदी कर दी। पीड़ितों में से एक युवक की शादी एक महीने बाद शादी होने वाली थी। इस घटना के बाद लड़की वालों ने रिश्ता तोड़ दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मी शहजाद अजमेरी ने नवी शेधावी गाँव निवासी 31 साल के अविवाहित गोविंद धनतरी को काम का लालच देकर झाँसा दिया। शहजाद ने गोविंद से कहा कि उसे खेतों में मजदूरी के लिए ले जाया जाएगा। लेकिन इसके बजाय उसे एडालज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुँचने के बाद गोविंद को शराब पिलाई गई और नसबंदी के लिए सहमति पत्र पर उसके अंगूठे का निशान ले लिया गया। कागजों में उसे विवाहित दिखाया गया, ताकि नियमों का उल्लंघन छुपाया जा सके।

इस घटना में मुख्य आरोपित शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी हैं। शहजाद का एक ऑपरेशन का टारगेट बाकी था, जिसे पूरा करने के लिए उसने जहीर के साथ मिलकर गोविंद की नसबंदी की। दोनों स्वास्थ्यकर्मी अब निलंबित हैं। शहजाद ने दावा किया कि वह निर्दोष है और जहीर ने ही युवक को लाकर ऑपरेशन कराया।

इस घटना ने विभाग में टारगेट आधारित नसबंदी अभियान की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य अधिकारी जी.बी. गढ़वी ने स्वीकार किया कि सबरकांठा में 375 ऑपरेशनों को टारगेट बेस पर अंजाम दिया गया। हालाँकि, स्वास्थ्य मंत्री रिषिकेश पटेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नसबंदी पूरी तरह स्वैच्छिक है।

बहरलहाल, घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए धनाली स्वास्थ्य केंद्र के मल्टीपर्पज स्वास्थ्यकर्मी शहजाद अजमेरी को निलंबित कर दिया। उन्हें मेहसाणा से खेरालु स्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरित किया गया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने 8 अन्य कर्मचारियों को नोटिस जारी किया और मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। इस कांड के बाद विभाग ने एडालज अस्पताल में 22 नवंबप 2024 को हुए सभी 28 नसबंदी ऑपरेशनों की जाँच शुरू कर दी है।

विहिप ने लगाया हिंदुओं को टारगेट करने का आरोप

विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले को हिंदू युवकों को टारगेट करने की साजिश बताया है। यह कांड न केवल स्वास्थ्य विभाग की खामियों को उजागर करता है, बल्कि लोगों के विश्वास को भी गहरा आघात पहुँचाता है। पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

माथे पर तिलक और हाथ में त्रिशूल, हिंदू-गोरक्षक बनने का नाटक कर उमर गैंग करता था गोतस्करी-गोहत्या: UP पुलिस ने पैर में गोली मार कर पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में पुलिस ने 7 गोतस्कर को मुठभेड़ के बाद पकड़ा है। यह सभी हिन्दू गोरक्षक बन कर गायों की तस्करी करते थे। गायों को काटने के लिए ले जाने के दौरान यह भगवा गमछा गले में डाल लेते थे और माथे पर तिलक लगा कर चलते थे। इनके खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने बताया कि 8 दिसम्बर, 2024 को उसे रात में सतरिख थाना क्षेत्र में गोतस्करों के होने की सूचना मिली थी। पुलिस को पता चला था कि यहाँ कुछ लोग एक जंगल में घूम रहे हैं और उनके पास दो तीन गाड़ियाँ भी हैं। इनके पास एक गाय भी बंधी हुई थी।

इसके बाद जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची तो इन गोतस्करों ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने इसका जवाब दिया। इस फायरिंग में सरवर और गुफरान पैर में गोली लगने के कारण घायल हो गए। पुलिस ने उनके साथ अंकुल, उमर, नवीजान, इरफ़ान और अजीज को पकड़ा है। यह सभी गोतस्कर बाराबंकी और सीतापुर के रहने वाले हैं।

पुलिस ने इनके पास से 2 तमंचे और गाय काटने वाला चापड़ बरामद किया है। इनके पास से एक इको गाड़ी और एक मोटरसाइकिल भी बरामद हुई है। एक गाय भी इनके पास से बरामद हुई है। आशंका थी कि यह आसपास से गाय पकड़ कर लाते हैं और फिर उनको काट कर हिन्दू बन कर तस्करी करते हैं।

पुलिस ने खुलासा किया है कि इनका सरगना उमर गोतस्करी करने के लिए गोरक्षक बन कर गायों को ले जाता था। वह गायों की तस्करी वाली गाड़ी में आगे गमछा डाल कर बैठता था। साथ ही माथे पर तिलक लगाता था और हाथ में त्रिशूल तक रखता था। कोई अगर उसे पूछता था तो खुद को गोरक्षक बताता था।

यह ट्रिक उसने पहले गोतस्करी के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अपनाई थी। पुलिस ने बताया है कि इन गोतस्करों पर पहले से 14 मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकांश मामले गौहत्या सम्बन्धी ही हैं। पुलिस ने इन सभी गोतस्करों के खिलाफ नए मुकदमे भी दर्ज किए हैं और जाँच कर रही है कि कि इन्होने कितनी गायों की तस्करी की है। पुलिस इनके खिलाफ पुराने मुकदमे भी खोल रही है और उन सभी थानों से जानकारी मँगवा रही है।

कंपनी ने वर्क स्ट्रेस को लेकर कराया सर्वे, कर्मचारियों को दे दी नई टेंशन: 100 लोगों को नौकरी से निकाला, नेटिजन्स बोले- गरीब की आँख फोड़ दो ताकि वो गरीबी न देख सके

सोशल मीडिया में नोएडा की एक कंपनी यस मैडम (Yes Madam) चर्चा में है। डोरस्टेप ब्यूटी सर्विस देने वाली इस कंपनी को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसने करीब 100 कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया है। एक वायरल ई-मेल की माने तो ऐसा कंपनी के भीतर वर्क स्ट्रेस जानने को लेकर किए गए सर्वे के बाद किया गया है।

लिंक्डइन पर अनुष्का दत्ता ने यह मेल शेयर किया है। अनुष्का ने बॉयो में खुद को यस मैडम में ‘यूएक्स कॉपीराइटर’ बताया है। अपने पोस्ट में लिखा है, “यस मैडम में क्या हो रहा है? पहले कंपनी एक रैंडम सर्वे करते हैं और फिर रातोंरात हमें नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि हम तनाव महसूस कर रहे? ऐसा मेरे ही साथ नहीं हुआ है। 100 अन्य लोगों को भी नौकरी से निकाला गया है।”

अनुष्का ने इस पोस्ट के साथ एक ई मेल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। कथित तौर पर नौकरी से निकाले गए लोगों को कंपनी की एचआर की तरफ से यह मेल भेजा गया है। इसमें लिखा है;

हाल में हमने काम पर तनाव के बारे में आपकी भावनाओं को समझने के लिए एक सर्वे किया। आपमें से कई ने अपनी चिंताएँ साझा की। इसे हम काफी महत्व देते हैं और सम्मान करते हैं। हेल्दी और सपोर्टिव वर्क एनवायरनमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध कंपनी के तौर पर हमने इस फीडबैक पर काफी विचार किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी काम पर तनावग्रस्त न रहे, हमने ऐसे कर्मचारियों को कंपनी से अलग करने का कठिन निर्णय लिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभावी है। प्रभावित कर्मचारियों को अधिक जानकारी अलग से दी जाएगी। आपके योगदानों के लिए धन्यवाद।

इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ इसे पीआर स्टंट बता रहे हैं तो कुछ कंपनी के इस रवैए की आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, “गरीब की आँख फोड़ दो ताकि वो गरीबी न देख सके।” यस मैडम से की गई कथित छँटनी के दावों की हम पुष्टि नहीं कर पाए हैं। इस संबंध में कोई भी जानकारी मिलते ही हम खबर को अपडेट करेंगे।

वैसे अजीब तरीके से छँटनी को लेकर कोई कंपनी पहली बार चर्चा में नहीं है। 2021 में Better.com ने एक साथ 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। कंपनी के सीईओ विशाल गर्ग ने जूम पर कॉन्फ्रेंस मीटिंग के दौरान ऐलान किया था कि जो कर्मचारी इस मीटिंग में जुड़ा है उसे तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट किया जाता है। इसी तरह अमेरिकी कंपनी फ्रंटडेस्क ने दो मिनट के गूगल मीट कॉल में 200 से अधिक कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

नासिक पुलिस ने मिजान शेख और आयान सहित 5 के खिलाफ दर्ज की FIR, इंस्टाग्राम पर शौर्य दिवस स्टोरी लगाने पर हिंदू दलित की बेहरमी से की थी पिटाई

महाराष्ट्र में नासिक पुलिस ने शनिवार (7 दिसंबर 2024) को मिज़ान शेख, अयान शेख, आयेश शाह, शारीक शाह और फहीम शेख पर मामला दर्ज किया है। दरअसल, शौर्य दिवस (6 दिसंबर का वो दिन जब राम जन्मभूमि पर खड़ी बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया था) के उपलक्ष्य में उस हिंदू व्यक्ति ने इंस्टाग्राम स्टोरी डाली थी। इसके 5 मुस्लिमों ने उस पर हमला कर दिया था।

पाँचों आरोपितों ने दलित युवक के घर पर पथराव भी किया था। इसके साथ ही उसे डंडों से पीटा था। यह घटना नासिक के निफाड़ के पिंपलगाँव इलाके की है। ऑपइंडिया के पास एफआईआर की कॉपी के अनुसार, पीड़ित की पहचान नयन (सुरक्षा कारणों से नाम बदला गया है) के रूप में हुई है। उसने 6 दिसंबर को शौर्य दिवस के अवसर पर जश्न मनाते हुए अपने इंस्टाग्राम एक स्टोरी शेयर की थी।

इससे पीड़ित का कथित दोस्त मिजान शेख नाराज हो गया। मिजान ने शुरू में पीड़ित को परेशान किया और उस पर कथित ‘जातिवाद’ करने का आरोप लगाया। इसके बाद मिजान ने उसे गाली देते हुए कहा कि उसे ‘जातिवाद’ करने में क्या खुशी मिलती है। इस पर पीड़ित ने कहा कि जातिवाद और शौर्य दिवस मनाने वाली पोस्ट में कोई संबंध नहीं है। इसके बाद आरोपित ने गाली देते हुए पीड़ित पर हमला कर दिया।

वहाँ से दोनों चले गए। कुछ घंटों के बाद नयन अपनी बहन को लेने के लिए स्कूल जा रहा था। इसी दौरान मिजान ने उसे रोक लिया। उसने अयान शेख, आयेश शाह, शरीक शाह और फहीम शेख सहित अपने 15-20 साथियों को भी बुला लिया था। इसके बाद आरोपितों ने नयन पर पथराव किया और शौर्य दिवस मनाने के लिए उसे डंडों से बुरी तरह पीटा।

पीड़ित नयन ने मदद के लिए किसी तरह अपने चचेरे भाई को बुलाया। इसके बाद उसके चचेरे भाई ने उसे अस्पताल पहुँचाया। इस बीच मौका पाकर आरोपित मौके से भाग गए। इस घटना की को लेकर पीड़ित के पिता ने पुलिस में शिकायत दी और शिकायत के आधार पर पुलिस ने सभी 5 आरोपितों के खिलाफ नामजद मुकदाम दर्ज कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2024 की धारा 109, 118(1), 115(2), 352, 351(3), 126(2), 189(2), 191(2), 191(3) और 190 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वीए) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बता दें कि भारत में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढाँचे को गिराया गया था। इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाबरी ढाँचा क्रूर शक्ति का प्रतीक था, जिसने देशी संस्कृति को रौंदते हुए भगवान राम का अपमान किया था। यह अत्याचार और बर्बरता का एक काला प्रतीक था। वहीं, इस्लामवादी इसे ‘काला दिवस’ कहते हैं।

राम मंदिर में दर्शन की गाँधी परिवार को फुर्सत तक नहीं, पर बीवी के MP बनते ही रॉबर्ट वाड्रा को ‘हाजी अली ने बुलाया’: इस सेक्युलरिज्म की बत्ती बना लो कॉन्ग्रेसियों, हम ‘भक्त’ ही ठीक हैं

प्रियंका गाँधी वाड्रा के पहली बार सांसद बनने के कुछ दिनों बाद ही उनके शौहर रॉबर्ट वाड्रा को ‘हाजी अली ने बुलाया’। यह हम नहीं कह रहे खुद सोनिया गाँधी के दामाद और राहुल गाँधी के जीजा ने मुंबई के दरगाह पर मत्था टेकने के बाद मुनादी की है।

इस दौरान वाड्रा ने मस्जिदों के सर्वे पर भी चिंता जताई। सेकुलरिज्म का पाठ भी पढ़ाया। यह भारतीय राजनीति की विडंबना ही कही जा सकती है कि सेकुलरिज्म का पाठ कॉन्ग्रेस के उस शीर्ष परिवार का एक सदस्य आम भारतीयों को पढ़ा रहा, जिसका कोई भी सदस्य अयोध्या राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दर्शन करने तक नहीं गया है।

अयोध्या का राम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है। यह भारत के उस गौरव की पुर्नस्थापना का प्रतीक है जिसे इस्लामी आक्रांताओं ने कुचल दिया था। लेकिन यह उस परिवार को शायद ही समझ आए जिसकी जड़ें जवाहर लाल नेहरू से जुड़ी हो। ये नेहरू ही थे जो स्वतंत्र भारत में भी अयोध्या में भगवान की मूर्ति को बाहर निकलवाना चाहते थे।

शायद वाड्रा का सेक्युलरिज्म, धर्म से तो निरपेक्ष है, लेकिन मजहब से निरपेक्ष नहीं है। ऐसे में उन्हें दरगाह के लिए बुलावे आ रहे हैं लेकिन राम मंदिर जाने की उन्हें कोई इच्छा नहीं होती। ना ही उनकी पत्नी के परिजन यहाँ जा पाते हैं जबकि उन्हें राम मंदिर की कमिटी ने न्योता भी भेजा था।

सोचने वाली बात यह है कि अब तक रॉबर्ट वाड्रा भी राम मंदिर क्यों नहीं जा पाए हैं। माना जा सकता है कि गाँधी परिवार मुस्लिम वोटों को लेकर डरता होगा, जिस कारण से उसने न्योता ठुकरा दिया। लेकिन रॉबर्ट वाड्रा के साथ क्या समस्या यह अभी तक नहीं पता। रॉबर्ट तो सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति में भी नहीं हैं।

वह चले जाते तो शायद गाँधी परिवार का कुछ फायदा हो जाता और रॉबर्ट वाड्रा की ‘धार्मिक यात्रा’ में एक स्थान और जुड़ जाता। शायद उन पर गाँधी परिवार का दबाव रहा हो। वह बात अलग है कि राम मंदिर का फैसला टलवाने के प्रयास में गाँधी परिवार के नियंत्रण वाली कॉन्ग्रेस के नेता कपिल सिब्बल सबसे आगे थे।

उन्होंने लगातार सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में बहस की थी। ऐसे में उनका सेक्युलर होने की सलाह देना कुछ ठीक नहीं मालूम पड़ता। गाँधी परिवार से संबंध रखने वाले रॉबर्ट वाड्रा ने यह भी समझाया है कि हमें धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए और दोनों को अलग रखना चाहिए। इस सलाह की पिछले लगभग 50 वर्षों से जरूरत कॉन्ग्रेस को सबसे अधिक है।

शाहबानो मामला हो या फिर प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट और फिर 2013 का वक्फ कानून और अब वक्फ में संशोधन का विरोध, यह सभी ऐसे मामले हैं जब कॉन्ग्रेस मजहबी राजनीति करती है। हालाँकि, रॉबर्ट वाड्रा को इस मुद्दे पर सही भी कहा जा सकता है, क्योंकि कॉन्ग्रेस धर्म नहीं मजहब की राजनीति जरूर करती है।

आस्था निजी विषय है और ऐसा नहीं है कि गाँधी परिवार के नेता कभी मंदिर नहीं जाते हों। लेकिन राहुल गाँधी का दत्तात्रेय ब्राह्मण होना और उनका मंदिरों में जाना तभी नजर आता है, जब चुनाव निकट हों। विशेष कर उन राज्यों के चुनावो में जहाँ हिन्दू आबादी निर्णायक भूमिका में हो। गाँधी परिवार के लोग ऐसे समय मंदिर जाते हैं, त्रिपुंड लगाते हैं और गोत्र तक की चर्चा होती है।

उनकी पार्टी के सदस्य जनेऊ वाली फोटो लहराते हैं। हालाँकि, बाकी समय सेक्युलरिज्म की दुहाई देते हुए कहीं नहीं जाया जाता। आगे यह बात देखने वाली होगी कि रॉबर्ट वाड्रा की धार्मिक यात्रा में गाँधी परिवार शामिल होता है या नहीं और वह स्वयं राम मंदिर तक पहुँच पाते हैं या नहीं।

तो कुल मिलाकर बात ये है कि सेक्युलरिज्म की सलाह देने वाले वाड्रा सबसे पहले खुद इस नियम चलें, उसके बाद गाँधी परिवार को सिखाएँ। उसने यह कहें कि धर्मनिरपेक्ष या सेक्युलर बनना है, तो सही मायनों में बने। ऐसा ना हो कि धर्मनिरपेक्ष तो रहें लेकिन मजहब की बात आते ही सबसे आगे बचाव में खड़े हो जाएँ। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हम लोग भक्त ही ठीक हैं।

बाराबंकी में मोहम्मद आरिफ और दमोह में शाहबाज़… UP-MP की 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियाँ बनीं लव जिहाद की शिकार: 1 दिल्ली से मिली, 1 का अब भी कुछ पता नहीं

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से लव जिहाद के 2 अलग-अलग मामले सामने आए हैं। पहले मामले में मध्य प्रदेश के दमोह में नाबालिग हिन्दू लड़की को शाहबाज दिल्ली भगा ले गया। शाहबाज़ के साथ 2 अन्य लोग इस करतूत में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं दूसरा मामला UP के बाराबंकी जिले का है। यहाँ 18 साल की हिन्दू लड़की के पिता ने मोहम्मद आरिफ पर अपनी बेटी को भगा ले जाने का आरोप लगाया है। दोनों आरोपित फरार हैं जिनकी तलाश में राज्य पुलिस दबिश दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश के दमोह जिले की घटना थानाक्षेत्र देहात की है। यहाँ रहने वाली एक नाबालिग हिन्दू लड़की को शाहबाज़ नाम के एक युवक ने पहले प्यार के जाल में फँसाया और बाद में उसे निकाह का झाँसा दिया। इसके बाद दोनों के बीच बात और मुलाकात होती रही। लगभग 1 माह पहले शाहबाज़ पीड़िता को बहला-फुसला कर अपने साथ दिल्ली ले गया। तब लड़की के परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

कुछ दिनों के बाद लड़की के परिजनों को पता चला कि शाहबाज़ भी अपने घर से गायब है। तब पीड़िता के परिजनों ने हिन्दू संगठनों से सम्पर्क किया। हिन्दू संगठनों ने थाने पहुँच कर कार्रवाई की माँग उठाई। पुलिस ने पीड़िता को ट्रेस किया तो लोकेशन दिल्ली निकली।

रविवार (8 दिसंबर 2024) को आखिरकार नाबालिग को दिल्ली से बरामद कर लिया गया। पुलिस की दबिश में शाहबाज़ हाथ नहीं लगा। पीड़िता ने पूछताछ में उसके साथ 2 अन्य लोग भी शामिल बताए। अब तीनों आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

सहेली की मदद से हिन्दू लड़की को ले भागा आरिफ

दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का है। यहाँ के थानाक्षेत्र असंद्रा में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़ित ने बताया कि उनकी 18 वर्षीया बेटी पास की ही बाजार में कम्प्यूटर सीखने जाया करती थी। यहाँ पीड़िता के पीछे इसी थानाक्षेत्र के गाँव रामपुर का रहने वाला मोहम्मद आरिफ पड़ गया। आरिफ भी पीड़िता के ही कोचिंग सेंटर में पढ़ता है। वह पीड़िता से दोस्ती करना चाहता था। आरोप है कि इसी कोचिंग संस्थान में एक अन्य छात्रा ने पीड़ित की बेटी का ब्रेनवॉश किया।

कुछ दिनों तक बातचीत के बाद शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) की शाम को मोहम्मद आरिफ पीड़िता को अपने साथ कहीं बहला-फुसला कर भगा ले गया। काफी खोजबीन के बाद भी पीड़िता अपने परिजनों को नहीं मिली। लड़की के पिता ने पुलिस में तहरीर दे कर आरिफ के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। उस पर पीड़िता को इस्लाम कबूल करवाने की साजिश रचने का भी आरोप है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरिफ फरार है जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

भारत ने घर में घुसकर बांग्लादेश को सुनाया, कहा- हिंदुओं और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करो: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद पहली बार ढाका पहुँचे विदेश सचिव

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद जारी हिंदुओं के नरसंहार के बाद भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार (9 दिसंबर 2024) को ढाका में अपने बांग्लादेशी समकक्ष मोहम्मद तौहीद हुसैन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों एवं उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा। साथ ही हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर भी चर्चा की।

दरअसल, शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद 8 अगस्त को बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का गठन हुआ था। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली उच्चस्तरीय बातचीत है। यह बैठक बांग्लादेश की राजधानी ढाका के राजकीय अतिथि गृह जमुना में संपन्न हुई।

विदेश सचिव ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी को लेकर बांग्लादेश के विदेश सचिव के समक्ष आपत्ति उठाई। दरअसल, दास को एक रैली के दौरान बांग्लादेशी राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। उनकी गिरफ्तारी के कारण उनके समर्थकों में आक्रोश फैल गया और सुरक्षाबलों के साथ हिंसक झड़पें हुईं।

विदेश सचिव मिस्री ने कहा, “मैंने महसूस किया कि भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध चाहता है, जैसा कि हमने अतीत में हमेशा देखा है और भविष्य में भी देखते रहेंगे। यह संबंध जन-केंद्रित और जन-उन्मुख संबंधों पर आधारित हैं, जिसका केंद्रीय लक्ष्य सभी लोगों का लाभ है।”

उन्होंने कहा कि दोनों के बीच के रिश्ते बांग्लादेश में जारी परियोजनाओं में दिखते हैं। उन्होंने कहा, “यह व्यापार, वाणिज्य, संपर्क, बिजली, पानी, ऊर्जा, विकास सहयोग और सांस्कृतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों में भी परिलक्षित होता है।” उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि पारस्परिक लाभकारी सहयोग दोनों देशों के लोगों के बीच जारी ना रहे।

विदेश सचिव ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमने हाल के घटनाक्रमों पर भी चर्चा की और मैंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सहित अपनी सभी चिंताओं से अवगत कराया। हमने सांस्कृतिक और धार्मिक संपत्तियों पर हमलों की खेदजनक घटनाओं पर भी चर्चा की।”

आज कनाडा को 51वाँ स्टेट बनने का ‘ऑफर’ दे रहे डोनाल्ड ट्रंप, कभी कब्जा करने को तैयार था अमेरिका: जानिए क्या था ‘वॉर प्लान रेड’, क्यों नहीं हुआ पूरा

डोनाल्ड ट्रंप का नाम जब भी सुर्खियों में आता है, वह अपने विवादित बयानों और अनोखे अंदाज के लिए चर्चा का विषय बनते हैं। हाल ही में ट्रंप ने ऐसा ही एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वाँ राज्य बनने की पेशकश कर डाली। इसके साथ ही उन्होंने एक एआई-जनरेटेड तस्वीर भी पोस्ट की, जिसने लोगों को और ज्यादा चौंका दिया। लेकिन इस मजाक के पीछे एक ऐतिहासिक सच छिपा है-अमेरिका और कनाडा के बीच एक समय ऐसा भी था जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई की तैयारी कर चुके थे।

ट्रंप का बयान: मजाक या इशारा?

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको को सालाना अरबों डॉलर की सब्सिडी दे रहा है, तो बेहतर है कि ये दोनों देश अमेरिका का हिस्सा बन जाएँ। उनके शब्द थे, “हम कनाडा को हर साल $100 बिलियन और मेक्सिको को $300 बिलियन सब्सिडी देते हैं। क्यों न ये हमारे राज्य बन जाएँ?”

ट्रंप का यह बयान जहाँ मजाकिया लगा, वहीं इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट कर इसे और बड़ा बना दिया। तस्वीर में वह एक पहाड़ की चोटी पर खड़े थे, हाथ में कनाडा का झंडा था। लेकिन मजेदार बात यह थी कि पहाड़ स्विस आल्प्स के लग रहे थे, न कि कनाडा के। तस्वीर के साथ ट्रंप ने लिखा, “ओह, कनाडा!”

कनाडा को 51वाँ राज्य बनाने की ‘जोक डिप्लोमेसी’

ट्रंप ने यह बयान उस वक्त दिया जब उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ मार-ए-लागो में डिनर किया। दोनों में टैरिफ विवाद भी चल रहा है। इसी डिनर के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने मजाक करते हुए ट्रूडो से कहा, “अगर कनाडा ट्रेड टैरिफ से बचना चाहता है, तो उसे अमेरिका का हिस्सा बन जाना चाहिए।” इस पर ट्रूडो और वहाँ मौजूद अन्य लोगों ने हंसने की कोशिश की, लेकिन यह हंसी थोड़ी ‘नर्वस’ थी। ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर कनाडा अमेरिका का हिस्सा बनता है, तो इसे दो राज्यों में बाँटा जा सकता है-एक ‘लिबरल’ और एक ‘कंजरवेटिव’।

अमेरिका का ‘रेड प्लान’: कनाडा पर हमले की थी तैयारी

हालाँकि ट्रंप का यह बयान मजाक था, लेकिन इतिहास में एक ऐसा समय भी था जब अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई की प्लानिंग कर ली थी। केविन लिपर्ट ने अपनी किताब ‘वार प्लान रेड-द यूनाइटेड स्टेट्स’s सीक्रेट प्लान तो इनवेड कनाडा एंड कनाडा’s सीक्रेट प्लान टू इनवेट द यूनाईटेड स्टेट्स’ में इस बारे में विस्तार से बताया है।

इस किताब में बताया गया है कि साल 1930 में अमेरिका ने ‘रेड प्लान’ नाम से एक खुफिया दस्तावेज तैयार किया, जिसमें कनाडा पर हमले का पूरा खाका बनाया गया था। इस योजना के तहत अमेरिकी सैनिकों को तीन तरफ से हमला कर कनाडा पर कब्जा करना था।

कनाडा के प्रमुख शहरों पर कब्जा: योजना में टोरंटो, मॉन्ट्रियल, वैंकूवर और हलिफ़ैक्स जैसे शहरों को निशाना बनाया गया था।

आर्थिक दबाव: कनाडा के पावर ग्रिड और व्यापारिक मार्गों को बाधित करने का सुझाव दिया गया था।

रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल: अमेरिका ने युद्ध में केमिकल वेपन का भी विकल्प रखा था।

जासूसी का जाल: अमेरिका ने कनाडा के कमजोर क्षेत्रों की जानकारी जुटाने के लिए सीक्रेट मिशन भी चलाए।

कनाडा की ‘डिफेंस स्कीम नंबर 1’

अमेरिका की इस योजना का जवाब कनाडा ने भी तैयार किया। कनाडा ने ‘डिफेंस स्कीम नंबर 1’ नामक योजना बनाई, जिसमें अमेरिका पर पांच अलग-अलग मार्गों से हमला कर न्यूयॉर्क और वर्मोंट जैसे शहरों को कब्जे में लेने की योजना थी।

कनाडाई सेना के अधिकारियों ने यह मान लिया था कि अगर अमेरिका हमला करेगा, तो ब्रिटेन से मदद मिलने में समय लगेगा। इसलिए उन्होंने खुद ही अमेरिका को जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी।

हालाँकि, दोनों देशों के बीच यह युद्ध कभी नहीं हुआ। 1935 में ‘रेड प्लान’ का खुलासा हो गया, जिससे इसे रोक दिया गया। साथ ही, दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक निर्भरता इतनी ज्यादा थी कि युद्ध अव्यवहारिक हो गया।

कनाडा ने जलाया था व्हाइट हाउस

यहाँ यह बताना जरूरी है कि अमेरिका-कनाडा के बीच दुश्मनी का इतिहास नया नहीं है। 1812 के युद्ध के दौरान, जब कनाडा ब्रिटिश उपनिवेश था, कनाडाई सैनिकों ने वॉशिंगटन डीसी पर हमला कर व्हाइट हाउस को आग लगा दी थी। यह घटना अमेरिका-कनाडा संबंधों में सबसे कड़वी घटनाओं में से एक थी।

आज, अमेरिका और कनाडा के रिश्ते मजबूत हैं। दोनों देश व्यापारिक साझेदार हैं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप का बयान और उनकी एआई-जनरेटेड तस्वीर भले ही मजाक के तौर पर देखी जाए, लेकिन इतिहास के पन्नों को खंगालने पर यह साफ होता है कि अमेरिका-कनाडा के रिश्ते हमेशा इतने सरल नहीं थे।

निकाह का कार्ड और नाम नौशाद अहमद ‘दुबे’… UP के एक गाँव में अलग तरीके से ‘घर वापसी’ कर रहे मुस्लिम: कहा- शेख-पठान-सैय्यद हमारे नहीं विदेशियों के टाइटल

भारत के मुस्लिम अब पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं और वे अपनी जड़ें अरब-तुर्की या अफगानिस्तान-ईरान में खोजने के बजाय भारत में खोज रहे हैं और इस पर गर्व भी कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कुंदरकी उपचुनाव में इसकी झलक भी मिली। यहाँ के हिंदू और भारतीय जड़ों वाले लोगों ने भाजपा के ठाकुर रामवीर सिंह को मत देकर चुनाव जीताया, जबकि इस पर अब तक प्रभावी रहे तुर्क मुस्लिमों को हरा दिया।

ये भारत में बदले माहौल का उदाहरण भर है। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, इस देश में जहाँ हिंदू से मुस्लिम बने लोग अपनी जड़ों से आज भी जुड़े हुए हैं। पहले क्षत्रिय समाज के मुस्लिम लोग खुलकर अपने नाम में राणा, चौहान, तोमर आदि लगाते रहे हैं। अब ब्राह्मण समाज के धर्मांतरित मुस्लिम भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वे भी अपने पूर्वजों के उपनाम और गोत्र को अपने नाम में जोड़ रहे हैं। इसका उदाहरण यूपी का डेहरी गाँव है।

जौनपुर शहर से करीब 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर केराकत तहसील में एक छोटा सा गाँव है डेहरी। डेहरी गाँव के लोग अपने नाम में मिश्रा, दुबे, शुक्ला जैसे अपने पुरखों के उपनाम जोड़ रहे हैं। यहाँ के रहने वाले 60 साल के नौशाद अहमद ने अपने घर की शादी के कार्ड पर नौशाद अहमद दुबे लिखा तो लोग चौंक गए। इसके बाद यह गाँव सुर्खियों में आ गया। मीडिया उन तक पहुँच गई।

नौशाद अहमद का कहना है कि उनके पूर्वज हिंदू थे, इसलिए अब वे अपने नाम के साथ अपने पूर्वजों के उपनाम और गोत्र लिख रहे हैं। नौशाद अहमद दुबे ने बताया कि लगभग सात पीढ़ी पहले उनके पूर्वजों में से एक लाल बहादुर दुबे मुस्लिम बन गए थे। वो अपना नाम लाल मोहम्मद शेख लिखने लगे थे। उनका कहना है कि उनके पूर्वज आजमगढ़ के रानी की सराय से आए थे।

नौशाद दुबे ने यह भी बताया कि आजमगढ़ के मार्टिनगंज तहसील में एक गाँव है बीसवाँ। वहाँ के रहने वाले सुभाष मिश्रा के करीब 14 पीढ़ी पहले मिश्रा से शेख हो गए थे। वहाँ के मिश्रा और शेख को लोग जानते हैं कि वे पहले हिंदू ब्राह्मण थे। नौशाद दुबे भी खुद को गर्व से मुस्लिम ब्राह्मण कहते हैं। वहीं, इसी गाँव के अशरफ अपने नाम में दुबे और शिराज अपने नाम में शुक्ला लगाते हैं।

डेहरी के ही रहने वाले इसरार अहमद दुबे का कहना है कि वे सभी लोगों से अपील करेंगे कि वे अपनी जड़ों से जुड़े। इसरार दुबे ने कहा, “शेख, पठान, सैय्यद… ये सब हमारा टाइटल नहीं है। विदेशों से आए शासकों ने ये टाइटल दिया है। इसलिए अपने टाइटिल को खोजकर अपने जड़ों से जुड़ें। इससे हमारा देश मजबूत होगा और हम आपस में सौहार्द्रपूर्वक रह सकेंगे।”

नौशाद अहमद दुबे की घर में निकाह का कार्ड (साभार: आजतक)

नौशाद दुबे ने आजतक को बताया कि लोग उनसे पूछते हैं कि वे अपने नाम में दुबे क्यों लगाते हैं। इस पर नौशाद कहते हैं, “अपने नाम में दुबे नहीं लिखें तो क्या लिखें… लोगों के पास इस बात का जवाब नहीं होता… अरबी का टाइटल शेख है, तुर्कों का टाइटल मिर्जा है, मंगोल या मुगलों का टाइटल खान है। ऐसे में हम उनका टाइटल क्यों अपनाएँ? मेरे पास अपना टाइटल है और मैं उसे अपनाऊँगा।”

गौसेवा करने वाले नौशाद कहते हैं कि वे अपनी जड़ों से अपनी चीजें ले रहे हैं और उधार की चीजें छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म को मानने वालों के अंदर मानवता होनी चाहिए। नौशाद का मानना है कि तिलक लगाने से उन्हें कोई एतराज नहीं है। पूजा में उनकी आस्था एक ईश्वर की आस्था है। नौशाद का कहना है कि उनके खिलाफ बार फतवे भी जारी हुए। हालाँकि, उन्होंने उसकी परवाह नहीं की।

नौशाद दुबे आगे कहते हैं, “पैगंबर साहब का नाम गलत तरीके से लेने पर लोग ‘सर तन से जुदा’ की बात करते हैं। उन्हीं मोहम्मद साहब को उनके अनुयायियों के सामने गाली दी जाती थी और कीचड़ फेंका जाता था, लेकिन वो गुस्सा नहीं करते थे।” वो कहते हैं, “अपने आपको मैं मुस्लिम ब्राह्मण कहलाने में खुशी महसूस करता हूँ। मुझे नौशाद अहमद नहीं, नौशाद दुबे ही कहा जाए।”

नौशाद दुबे के यहाँ 10 नवंबर को निकाह था। उन्होंने निकाह का कार्ड हिंदी में छपवाया था और उस पर नाम लिखा था नौशाद अहमद दुबे। उनका कहना है, “मुसलमान कार्ड या तो अंग्रेजी में छपवाते हैं या उर्दू में, चाहे उर्दू कोई पढ़ ना पाए। उन्होंने पूछा कि हिंदी से इतनी नफरत क्यों? हम भारतीय हैं और हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और मातृभाषा है।” वे बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार के भी गलत मानते हैं।

मुस्लिमों में अपनी जड़ों की ओर लौटने को लेकर नौशाद अहमद दुबे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, जौनपुर और मऊ मिलाकर लगभग 100 से अधिक ऐसे लोग हो हैं, जिन्होंने अपनी जड़ें खोजीं। ये बताते हैं कि उनके पूर्वज दुबे, तिवारी, पांडे, शुक्ला या यादव हैं। नौशाद दुबे की तरह ना जाने कितने और लोग होंगे, जो अपनी जड़ें तलाश रहे होंगे और वे संभवत: आगे चलकर इससे जुड़ जाएँगे।

नाम- अली इंटरनेशनल सर्विसेज, काम- विदेशों में नौकरी के नाम पर भारतीयों से साइबर फ्रॉड करवाना: दिल्ली पुलिस ने कामरान हैदर को दबोचा, 2500 किमी तक करना पड़ा पीछा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शनिवार (7 दिसंबर 2024) को मानव तस्करी केस में लम्बे समय से वांछित अपराधी कामरान हैदर को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। कामरान हैदर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) का वांटेड मुल्जिम था जिसे 2500 किलोमीटर तक पीछा करके हैदराबाद से पकड़ा गया। उस पर आरोप है कि वह लोगों से फ्रॉड करके उन्हें फर्जी कॉल सेंटरों में काम करने भेजता था और पुलिस से बचने के लिए लंबे समय से अपनी लोकेशन बदल रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कामरान हैदर दिल्ली में ‘अली इंटरनेशनल सर्विसेज’ नाम से एक कंसल्टेंसी फर्म चलाता था। इस काम में उसके साथ मंजूर आलम, अखिल और अफ़ज़ल भी जुड़े थे। ये सभी मिल कर लोगों को विदेश में नौकरी लगवाने का लालच देते थे। हालाँकि इन सभी का असल काम मानव तस्करी हुआ करता था। ये गिरोह नौकरी के जरूरतमंद भारतीयों को लाओस और थाईलैंड जैसे देशों में भेजा करता था।

दिल्ली के रहने वाले नरेश लखावत भी इसी नेटवर्क के झाँसे में आ गए। इन्हें अली इंटरनेशनल की तरफ से लाओस और थाईलैंड में काम करने का ऑफर मिला। नरेश इस झाँसे में आकर थाईलैंड पहुँच गए। यहाँ उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। बाद में उन्हें साइबर फ्रॉड करने वाली चीन की एक कम्पनी में जबरन काम करवाया गया। भारत लौट कर नरेश ने जून 2024 में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

मानव तस्करी से रैकेट जुड़ा होने के कारण यह केस राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया। NIA की जाँच में पता चला कि कामरान की कम्पनी ने मानव तस्करी के शिकार लोगों को उन कॉल सेंटरों में भेजा जहाँ अमेरिकी और यूरोपीय नागरिकों से ऑनलाइन ठगी की जाती थी। वह क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के जरिए अवैध तौर पर पैसे भी निकाल चुका था। NIA ने यह भी पाया कि कामरान हैदर की कम्पनी का आपराधिक नेटवर्क दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में खासतौर से फैला था।

आगे की जाँच में NIA ने यह भी पाया कि अली इंटरनेशनल द्वारा पीड़ितों से अमानवीय ढंग से काम करवाया गया था। अपने खिलाफ जाँच शुरू होते ही कामरान हैदर फरार हो गया। NIA के साथ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी उसकी खोजबीन शुरू कर दी। गिरफ्तारी से बचने के लिए कामरान लगातार ठिकाने बदल रहा था। आखिरकार NIA ने कामरान पर 2 लाख रुपयों का इनाम रखा। शनिवार को उसकी लोकेशन हैदराबाद के नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास मिली।

दिल्ली पुलिस ने 2500 किलोमीटर दूरी का फासला तय करके कामरान को दबोच लिया। कामरान को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है। यहाँ पुलिस के साथ NIA की टीमें भी उससे पूछताछ कर रही हैं। पूछताछ में पता चला कि कामरान थाईलैंड और लाओस भागने की फिराक में था। जाँच में अभी कुछ और पीड़ितों के नाम सामने आ सकते हैं। कामरान के गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी पड़ताल जारी है।

बताते चलें कि नवंबर 2024 में ऑपइंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि कैसे झाँसा दे कर थाईलैंड ले जाए गए भारतीयों को नर्क से भी बदतर जीवन बिताना पड़ता था। इन्हें खाने में सुअर का माँस और पीने के लिए टॉयलेट का पानी तक शामिल होता है। इन सभी को लाखों में सैलरी और आईटी से जुड़ा हल्का-फुल्का काम जैसे सपने दिखा कर ले जाया गया था। पीड़ितों ने अपने दर्दनाक अनुभवों में उलटा लटकाने और बिजली के झटके देने जैसी प्रताड़ना का हवाला दिया है।