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1 किमी में 4 मस्जिद, प्रशासन ने माना नमाज के लिए एक और जगह की जरूरत नहीं; फिर भी जस्टिस मोहम्मद नियास ने ‘सुन्नी सेंटर’ की दी अनुमति: जानिए क्या है मामला

केरल के कोझिकोड में सुन्नी सेंटर में नमाज पढ़ने की हाई कोर्ट ने अनुमति दे दी है। प्रशासन ने इस इलाके में 4 मस्जिद होने की बात कहते हुए इसके लिए इजाजत नहीं दी थी। आसपास के लोग भी इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि नमाज के नाम पर बिना अनुमति मस्जिद बनाई जा रही है।

हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ दूसरे समुदाय के कुछ लोगों के विरोध के चलते नमाज पढ़ने के लिए बनाई जा रही इमारत का उपयोग करने से नहीं रोका जा सकता है। हाई कोर्ट ने इसके साथ ही मजहबी गतिविधियों की अनुमति दे दी। केरल हाई कोर्ट के जस्टिस मुहम्मद नियास सीपी ने यह फैसला सुनाया।

उन्होंने नमाज के लिए बनाए जा रहे सुन्नी सेंटर को NOC देने के लिए भी कोझिकोड के कलेक्टर को दोबारा विचार के आदेश दिए हैं। जस्टिस नियास ने इस मामले में प्रशासन की वह दलीलें भी नकार दी जिनमें कहा गया था कि यहाँ नमाज के लिए बनाई जा रही इमारत से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला केरल के कोझिकोड जिले के कडलुंदी गाँव का है। यहाँ रहने वाले केटी मुजीब के पास एक इमारत है। इस इमारत में 2004 से नमाज पढ़ी जा रही है। 2014 में मुजीब ने इस इमारत की छत की मरम्मत करने के लिए ग्राम पंचायत से NOC माँगी थी। वह उसे दे दी गई थी।

इसके कुछ दिनों बाद इस इमारत के पास रहने वाले हिन्दुओं ने शिकायत की कि यहाँ अवैध निर्माण चल रहा है। इसके बाद पंचायत ने काम रोक दिया। इसके बाद यह मामला जिला प्रशासन के पास पहुँचा, उसने भी 2016 में मुजीब की इमारत में किसी भी प्रकार की नमाज या बाकी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगा दी।

इसके खिलाफ मुजीब कोर्ट पहुँच गया। हाई कोर्ट ने प्रशासन के आदेश पर रोक लगाई और अंतरिम तौर पर मुजीब को राहत देते हुए नमाज आयोजित करने की अनुमति दे दी। हालाँकि, कोर्ट ने मुजीब को आदेश दिया कि इस दौरान लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं होना चाहिए और ना ही यहाँ जुमे की नमाज पढ़ी जानी चाहिए।

इस मामले में कोर्ट ने जिला कलेक्टर से इस मामले में पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट लेकर फैसला लेने को कहा। कोझिकोड कलेक्टर ने भी आगे इस मामले में स्थानीय हिन्दुओं के विरोध के चलते NOC जारी करने से मना कर दिया। इसके बाद मुजीब फिर कोर्ट पहुँच गया।

मामले की सुनवाई के दौरान स्थानीय हिन्दुओं की तरफ से हाई कोर्ट को बताया गया कि मुजीब इस इमारत को एक मस्जिद के जैसे चला रहा है और इसकी कोई भी अनुमति नहीं ली गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यहाँ संदिग्ध लोगों का आना जाना होता है। उन्होंने मुजीब पर कोर्ट के पुराने आदेश का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

इस मामले में स्थानीय पुलिस अधिकारी और तहसीलदार द्वारा कलेक्टर को भेजी गई रिपोर्ट में भी कहा गया कि इस नई इमारत के 1 किलोमीटर के दायरे में पहले से 4 मस्जिद हैं और नई कि आवश्यकता नहीं है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि स्थानीय हिन्दू इसका विरोध कर रहे है।

सुन्नी सेंटर को मस्जिद में बदलने का विरोध इसके बाद जिले के ADM की रिपोर्ट में भी किया गया। इसके बाद कलेक्टर ने NOC देने से इनकार कर दिया। इस मामले में कोर्ट को गाँव के सचिव ने भी कमोबेश यही बात बताई। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि जिस इमारत पर विवाद है, वह एक परिवार के रहने के लिए है ना कि नमाज का हॉल बनाने के लिए।

क्या कहा हाई कोर्ट ने अपने फैसले में?

हाई कोर्ट में जस्टिस नियास ने हिन्दू पक्ष और मुजीब की दलीलों को सुनने के बाद NOC पर लगाई गई रोक को रद्द कर दिया। जस्टिस नियास ने कहा, “जिला प्रशासन के अधिकारियों की रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्हें दूसरे समुदाय (हिन्दुओं) द्वारा की गई आपत्तियों के कारण कानून और व्यवस्था की स्थिति की आशंका है। केवल इसीलिए कि एक समुदाय दूसरे समुदाय द्वारा मजहबी स्थल की स्थापना का विरोध करता है, यह नहीं माना जा सकता कि इससे शांति भंग होगी।”

जस्टिस नियास ने आगे कहा,”एक लोकतांत्रिक देश में जहाँ नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने का मौलिक अधिकार है, किसी भी समुदाय द्वारा मजहबी स्थल की स्थापना को केवल अन्य समूहों के विरोध के कारण रोका नहीं किया जाना चाहिए।”

जस्टिस नियास ने इस मामले में जिला कलेक्टर से कहा है कि वह NOC पर दोबारा विचार करें और कोर्ट के फैसले के हिसाब से फैसला करें। जस्टिस नियास ने इसी के साथ मुजीब को अपने हॉल को नमाज के लिए उपयोग करने की इजाजत दे दी।

ATS के बाद अब IB की रडार पर भी मदरसे-मकतब, गोंडा में 286 की फंडिंग की हो रही जाँच: बिना मान्यता के ही 19 का हो रहा संचालन

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में अवैध तौर पर संचालित हो रहे अवैध मकबतों और मदरसों को मिलने वाली फंडिंग के खिलाफ इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपनी जाँच शुरू कर दी है। इस जाँच में IB का साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक टीम (ATS) भी दे रही है। ये मदरसे और मकतब मान्यता न होने की वजह से जाँच के दायरे में हैं। इन्हें मिलने वाली फंडिंग से लेकर इसमें पढ़ने-पढ़ाने वालों को लेकर भी पड़ताल होगी।

दैनिक भास्कर के मुताबिक, जिले में 286 मकतब और अवैध तौर पर चल रहे 19 मदरसे रडार पर हैं। इस क्रम में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी गोंडा के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग पहुँचे। यहाँ उन्होंने मौजूद अधिकारी से राज्य में चल रहे 286 मकतबों और बिना मान्यता के संचालित 19 मदरसों की लिस्ट ली। अब खुफ़िया विभाग इन मकतबों और मदरसों में मिलने वाले पैसों के स्रोत जानने में जुटा हुआ है। इसे चलाने वालों से यह भी पूछा जाएगा कि उन्होंने संचालन के लिए सरकारी मान्यता क्यों नहीं ली।

बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS विंग पहले से ही इस दिशा में जाँच कर रही थी। अब इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो के भी शामिल होने से जाँच में तेजी आने और कई नए खुलासों की संभावना है। इन टीमों को शासन द्वारा जरूरी दिशा निर्देश भी मिले हैं। जाँच के बाद रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाएगी। शासन प्राप्त बिंदुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। गोंडा जिले के जिला समाज कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र को भी शासन ने जाँच में सहयोग का निर्देश दिया है।

गोंडा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने मीडिया से बताया कि जाँच एजेंसियों द्वारा माँगे गए कागजात उपलब्ध करवा दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा मदरसे और मकतबों के संचालकों को भी साफ निर्देश दिया गया है कि वो जाँच में सहयोग करें। इन संचालकों से पूछताछ की लिस्ट में मकतब-मदरसे कब से और कैसे चलाए जा रहे आदि प्रश्न शामिल हैं। इनको चंदा देने वालों की भी लिस्ट बनाई गई है जिनसे बाद में पूछताछ की जा सकती है। इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों का भी आंकड़ा जुटाया जा रहा है।

बताते चलें कि मकतब एक ऐसा स्थान होता है, जहाँ बच्चों को कोचिंग सेंटर की तरह दीनी तालीम दी जाती है, जबकि मदरसे से डिग्री मिलती है। मकतब में सिर्फ कोचिंग दी जाती है। मकतब और मदरसों में विस्तार से अंतर जानने के लिए हमारी यह रिपोर्ट पढ़ें।

भीड़ ने घर में घुस माँ-बेटी को पीटा, फाड़ दिए कपड़े… फिर भी 2 दिन तक पीड़िताओं की कर्नाटक पुलिस ने नहीं सुनी: Video वायरल होने पर दर्ज किया केस

कर्नाटक के बेलगावी में एक महिला और उसकी बेटी पर वेश्यावृत्ति का आरोप लगाकर भीड़ द्वारा हमला करने का मामला सामने आया है। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। राज्य पुलिस ने इस मामले को दो दिन बाद दर्ज किया। वहीं भाजपा ने इस मामले के प्रकाश में आने के बाद कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बेलगावी के थानाक्षेत्र मालामारुति की है। यहाँ के गाँव वड्डारावाड़ी में एक महिला अपनी बेटी के साथ पिछले 4 वर्षों से रहती है। 11 नवंबर को महिला के घर में आसपास के कुछ पड़ोसी घुसे। उन्होंने महिला पर वेश्यावृत्ति का आरोप लगाया और मकान खाली करने का दबाव बनाने लगे। वो पीड़िता को कॉलगर्ल कह कर बुला रहे थे। इन सभी का कहना था कि महिला के घर में तमाम बाहरी लोगों का आना-जाना था।

महिला ने पड़ोसियों के आरोपों से इंकार किया और मकान खाली करने से मना कर दिया। इस बात पर घर में घुसे पड़ोसी भड़क उठे। उन्होंने पहले महिला और उनकी बेटी को बेरहमी से पीटा । बाद में इन्होंने महिला के कपड़े फाड़ और उसे निर्वस्त्र कर दिया। आरोपितों ने पीड़िता की पिटाई का वीडियो भी अपने मोबाइल में बना डाला। पिटाई के बाद सभी आरोपित पीड़िता को धमकी देते हुए वापास लौट गए। कुछ देर बाद महिला अपने साथ हुई प्रताड़ना की शिकायत करने पुलिस स्टेशन पहुँची।

बताया जा रहा है कि पुलिस ने 2 दिनों तक पीड़िता की शिकयत को अनसुना किया। बाद में महिला की पिटाई और उसको निर्वस्त्र करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मामला संज्ञान में लेते हुए पीड़िता को पीटने वाले 3 पड़ोसियों के खिलाफ FIR दर्ज की। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 3(5), 331, 352 और 74 के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। BJP ने इस घटना के बाद कर्नाटक सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा का आरोप है कि कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं।

झारखंड में ‘वर्ग विशेष’ से पत्रकार को भी लगता है डर, सवाल पूछने पर रवि भास्कर को मारने दौड़े JMM कैंडिडेट निजामुद्दीन अंसारी: समर्थकों ने लिया घेर तो ग्रामीणों ने बचाया

झारखंड में केवल बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठियों का ही आतंक नहीं है। ‘वर्ग विशेष’ का खौफ ऐसा है कि पत्रकार भी डरते हैं। रवि भास्कर नाम के एक पत्रकार ने ऑपइंडिया से बातचीत में यह डर साझा किया है। भास्कर का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें सवाल पूछने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रत्याशी निजामुद्दीन अंसारी उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

ऑपइंडिया को रवि भास्कर ने बताया है कि अंसारी ने उन्हें धमकी भी दी। उनके समर्थकों ने उन्हें घेर लिया था। उनका माइक तोड़ दिया। स्थानीय ग्रामीणों के कारण उनकी जान बची। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौके पर ‘वर्ग विशेष’ के लोग ज्यादा होते तो उनके साथ ‘अनहोनी’ भी हो सकती थी।

घटना 17 नवंबर 2024 की है जब झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी निजामुद्दीन अंसारी विधानसभा धनवार में लाव लश्कर के साथ अपना चुनाव प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान खबर मंत्र लाइव न्यूज़ चैनल के पत्रकार रवि भास्कर ने उनसे सवाल-जवाब किया। रवि भास्कर ने निजामुद्दीन अंसारी सहित कुछ अन्य नेताओं के द्वारा पूर्व में पाला बदलने को लेकर सवाल किया। इसी सवाल पर निजामुद्दीन अंसारी भड़क उठे।

निजामुद्दीन अंसारी ने पत्रकार की तरफ थप्पड़ ताना और कहा, “मारेंगे दो थप्पड़।” इतना कहकर वो रवि भास्कर की तरफ दौड़ भी पड़े। रवि भास्कर ने JMM प्रत्याशी की इस हरकत का प्रतिरोध किया और उन्हें तमीज से पेश आने के लिया कहा। इसी दौरान मौके पर मौजूद ग्रामीणों और सुरक्षाकर्मियों ने बीच बचाव किया। न्यूज़ मंत्र लाइव ने अपने एक शो में ग्रामीणों को अपने पत्रकार को बचाने के लिए धन्यवाद भी किया है।

रवि भास्कर ने आरोप लगाया कि न सिर्फ निजामुद्दीन अंसारी बल्कि उनके तमाम समर्थक गुंडागर्दी पर उतारू हो गए थे। पत्रकार का माइक भी तोड़ दिया गया। बकौल रवि भास्कर अगर ग्रामीण बीच-बचाव न करते तो उनके साथ कोई बड़ी घटना हो सकती थी। पत्रकार के आसपास मौजूद ग्रामीणों ने भी निजामुद्दीन की इस हरकत को गलत बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी की हरकत बहुत ही गलत थी। एक ग्रामीण ने कहा, “निजामुद्दीन गुंडा है।”

झारखंड भाजपा ने निजामुद्दीन की इस करतूत को अपने आधिकारिक हैंडल से शेयर किया है। उन्होंने अपने कैप्शन में लिखा, “लगता है पूरा का पूरा झारखंड मुक्ति मोर्चा ही हार की हताशा में डूब गया है। पूर्व विधायक और वर्तमान में धनवार सीट से झामुमो प्रत्याशी निजामुद्दीन अंसारी की बौखलाहट इतनी बढ़ गई है कि वो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानि कि पत्रकार बंधुओं को भी मारने और धमकाने पर उतर आए हैं। जरा सोचिए अभी तो ये सिर्फ प्रत्याशी हैं, कहीं धोखे से अगर ये जीत गए तो जनता पर कितना जुल्म और कहर बरपाएँगे इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।”

वर्ग विशेष के लोग ज्यादा होते तो हो जाती अनहोनी

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में पत्रकार रवि भास्कर से बात की। रवि भास्कर ने हमें बताया कि अगर निजामुद्दीन अंसारी के सहयोगियों और वर्ग विशेष के लोगों की संख्या ज्यादा होती तो उनके साथ कोई अनहोनी हो जाती। बकौल रवि भास्कर जब उनको निजामुद्दीन अंसारी के समर्थकों ने घेर लिया तब उन्होंने ग्रामीणों से अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगाई। इस गुहार पर कई महिलाएँ विरोध करती हुई सामने आईं तब निजामुद्दीन अंसारी अपने समर्थकों सहित वहाँ से वापस लौटा।

रवि भास्कर ने बताया कि वो अपनी कवरेज चुनाव आयोग की बाकायदा अनुमति से कर रहे थे। जाते-जाते निजामुद्दीन अंसारी और उसके साथियों ने पत्रकार को धमकी भी दी है कि चुनाव के बाद उनको देख लिया जाएगा। इन्हीं ने मिल कर पत्रकार का मोबाइल भी छीन लिया था। रवि भास्कर और उनके न्यूज़ संस्थान के अन्य स्टाफ मिल कर जल्द ही मामले की पुलिस में शिकायत करने जा रहे हैं। हमें बताया गया कि इसके लिए वो सभी निजामुद्दीन अंसारी और उनके समर्थकों के खिलाफ आवेदन लिख रहे हैं। रवि भास्कर ने अन्य तमाम मीडिया संस्थानों से अपने खिलाफ हुए अत्याचार पर सहयोग की अपील की है।

मणिपुर सरकार से बाहर हुई NPP, दिल्ली में मैतेई महिलाओं का प्रदर्शन: अमित शाह की हाई लेवल मीटिंग, 2 साल के बच्चे-बुजुर्ग महिला की लाश बहकर असम पहुँची

नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) ने मणिपुर की NDA सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। NPP ने यह फैसला मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसा के बाद किया है। NPP मुखिया कोनराड संगमा ने कहा है कि मणिपुर में बिरेन सिंह की सरकार हिंसा रोकने में असफल रही है, इस कारण से वह अपना समर्थन वापस ले रहे हैं।

NPP मुखिया संगमा ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा कर मणिपुर सरकार से समर्थन वापस लेने की जानकारी दी है। NPP ने अभी NDA में रहने या बाहर निकलने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। NPP के मणिपुर विधानसभा में 7 विधायक हैं।

NPP के समर्थन वापस लेने के बाद भी राज्य में NDA सरकार को कोई खतरा नहीं है। 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में भाजपा अकेले ही बहुमत है। भाजपा के पास यहाँ 37 सीटें हैं और उसे 9 विधायकों का समर्थन भी हासिल है। हालाँकि, NPP का यह कदम स्थिति की गम्भीरता को दर्शाता है।

NPP ने मणिपुर सरकार से समर्थन तब वापस लिया है जब पिछले एक सप्ताह में राज्य के भीतर भारी हिंसा हुई है। रविवार (17 नवम्बर, 2024) को भी असम में दो लाशें नदी में मिली हैं। यह लाशें मणिपुर से बह कर आई हैं। इनमें से एक लाश वृद्ध महिला जबकि दूसरी 2 साल के एक बच्चे की है।

बच्चे की लाश के साथ काफी बर्बरता की बात सामने आई है। इस लाश से उसका सर गायब था। यह हत्या और बर्बरता करने का आरोप कुकी लड़ाकों पर लगा है। कुकी लड़ाकों ने इस परिवार के कई लोगों को मणिपुर के जिरिबाम से अगवा किया था और उसके बाद हत्या कर दी।

कुकी लड़ाकों ने इन दोनों के साथ ही 4 और परिजनों को अगवा किया था। NDTV की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह मणिपुर सरकार में काम करने वाले हीरोजीत का परिवार था। उनके बेटे और सास के अलावा उनकी पत्नी, एक और बच्चा, पत्नी की बहन, बहन के बच्चे की भी कुकी लड़ाकों ने हत्या कर दी है।

इन सभी को कुकी लड़ाकों ने मणिपुर के बोरोबेकरा इलाके से एक राहत कैम्प से अगवा किया था। कुकी लड़ाकों ने यह कार्रवाई CRPF से हुई एक मुठभेड़ के दौरान की थी। उन्होंने वापस लौटते समय इन 6 लोगों को अगवा कर लिया था और बाद में मार दिया। इससे पहले CRPF के साथ हुई मुठभेड़ में 11 कुकी लड़ाके मारे गए थे।

मारे गए लोग मैतेई समुदाय से थे। यह 6 लाशें मिलने के बाद राज्य में गुस्सा है। लाशें मिलने के बाद रविवार को मणिपुर के अलग-अलग हिस्सों में भारी हिंसा हुई। लोगों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया। कई जगह तोड़फोड़ भी हुई। कई भाजपा विधायकों के घरों को भी निशाने पर लिया गया है।

कई MLA के घर में आगजनी और हमला किया गया। इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह के घर के बाहर मैतेई समुदाय ने रविवार (17 नवम्बर, 2024) को प्रदर्शन भी किया। उन्होंने 6 लोगों की हत्या के मामले में कार्रवाई की माँग की है।

गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को भी इस मामले में एक मीटिंग की थी। उन्होंने सोमवार को भी इस मसले पर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि केंद्र सरकार और भी जवान मणिपुर भेजने पर विचार कर रही है।

40 साल से जहाँ रह रहा दलित परिवार, अब वहीं से पलायन को हुआ मजबूर: दरवाजे पर लिखा- ये मकान बिकाऊ है, क्योंकि मुस्लिम प्रताड़ना से परेशान हैं… शादाब समेत 7 पर FIR

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दलित परिवार ने अपने घर के आगे पलायन का पोस्टर चिपका दिया है। पोस्टर में पलायन की वजह मुस्लिम प्रताड़ना को बताया गया है। आरोप है कि पीड़ितों पर मुस्लिमों द्वारा किसी पुराने केस में समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। मुख्य आरोपित का नाम शादाब है जिस पर पीड़ित के घर सुतली बम फेंकने का भी आरोप है। रविवार (17 नवंबर 2024) को मामले की शिकायत दर्ज करवाई गई है। हिन्दू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने 7 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना इंदौर के बगीचे कॉलोनी की है। यहाँ राजेश कलमोइया अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह अपने घर के ही बगल अंडे का ठेला लगा कर गुजर-बसर करते हैं। लगभग 1 माह पहले कॉलोनी में पाइप लाइन का काम हो रहा था। इसी दौरान राजेश की अपने पड़ोस में लगभग 40 वर्षों से रहने वाले शादाब शानू से बहस हुई थी। बताया जा रहा है कि शादाब लगातार राजेश को घूर रहा था जिस पर दोनों में कहासुनी हो गई थी।

इस दौरान शादाब शानू ने राजेश को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए धमकी दी थी। तब राजेश की शिकायत पर शादाब शानू के खिलाफ SC/ST एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी मुकदमे में समझौते के लिए राजेश और उनके परिवार पर शादाब की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उनको शादाब शानू की तरफ से परिवार सहित जान से मार डालने की धमकियाँ मिल रहीं थी। शुक्रवार को शादाब, रईस, इरफान, सोनू, सलीम, जल्लू, रिजवान, रेहाना और हिना राजेश की पत्नी के पास दबाव बनाने भी गए थे।

हालाँकि, राजेश ने केस वापस लेने से इंकार कर दिया था। राजेश का कहना है कि शनिवार रात लगभग पौने 3 बजे उनकी नींद घर के पास हुए एक धमाके से खुल गई। राजेश अपनी पत्नी मीनाक्षी के साथ बाहर निकले तो वहाँ उनका पड़ोसी रईस खड़ा मिला। पूछने के बावजूद रईस ने धमाका करने वाले के बारे में कुछ नहीं बताया। इसी दौरान पास एक अन्य बम पड़ा था जिसे मीनाक्षी ने देख लिया। उन्होंने फ़ौरन ही अपने पति को अंदर खींच लिया तभी धमाका हो गया।

राजेश का कहना है कि अगर थोड़ी सी देर हुई होती तो वो इस धमाके की चपेट में आकर झुलस गए होते। शनिवार को हुई इस घटना से तंग आकर राजेश ने अपने घर के बाहर पलायन का पोस्टर चिपका दिया। उन्होंने पोस्टर में लिखा, “यह मकान बिकाऊ है। मुस्लिम प्रताड़ना से परेशान।” इस मामले की जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता राजेश के घर पहुँचे। उन्होंने शादाब और उसके साथियों पर एक्शन की माँग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि राजेश के घर पर हुए धमाके में सुतली बम और कीलों का प्रयोग किया गया था। इस मामले की सूचना मिलते ही फ़ौरन ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा देकर नाराज लोगों को समझाया। आसपास के CCTV फुटेज को खंगाला गया। डॉग स्क्वायड को भी बुलवाया गया। घटनास्थल से बरामद कीलों और छर्रों को कब्ज़े में लेकर जाँच के लिए लैब भेज दिया गया है।

जाँच के दौरान शादाब शानू की तरफदारी करने वाले भी वहाँ पहुँच गए थे। वह राजेश के आरोपों को झूठा बता रहे थे। पुलिस ने दूसरे पक्ष को भी समझा कर वापस भेजा। फ़िलहाल इंदौर पुलिस ने इस केस में 7 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। क्षेत्र के एडिशनल डीसीपी आनंद यादव के अनुसार, दोनों परिवार 40 साल से आमने-सामने रह रहे हैं। घटना के पीछे कहासुनी का पुराना विवाद है। पटाखे फोड़ने के आरोपों के समर्थन में अभी तक पुलिस को सबूत नहीं मिल पाए हैं। फिलहाल मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘मैं गुजरात सरकार का फैन हो गया हूँ’ : तेलंगाना में शराब वाले गानों पर बैन लगने से भड़के दिलजीत दोसांझ, बोले- आप ड्राय स्टेट घोषित करो, मैं गाने नहीं बनाऊँगा

पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में अहमदाबाद में एक कॉन्सर्ट के दौरान तेलंगाना सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस नोटिस का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सभी राज्य शराब को प्रतिबंधित कर दें, तो वह कसम खाते हैं कि वह शराब पर कोई गाना नहीं गाएँगे। दिलजीत ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद शराब नहीं पीते और उनके पास केवल कुछ ही गाने हैं जो शराब पर आधारित हैं। उन्हें भी वो कभी भी बदलकर सुना सकते हैं।

अहमदाबाद के मंच से, दिलजीत ने कहा– “एक खुशखबरी है कि आज मुझे कोई नोटिस नहीं आया है लेकिन मैं फिर भी शराब पर कोई गाने नहीं गाऊँगा, क्योंकि गुजरात ड्राय स्टेट है।”

वह तेलंगाना सरकार द्वारा दिए गए नोटिस पर बोले- “मैंने डिवोशनल गाने दर्जनों गाए, पिछले 10 दिनों में भी मैंने दो गाने डिवोशनल गाए। एक शिव बाबा पर और एक गुरुनानक बाबा पर, लेकिन उस पर किसी ने कोई बात नहीं की। हर बंदा सिर्फ पटियाला पेग की बात कर रहा हैं। लेकिन भाई मैंने खुद किसी को फोन करके पटियाला पेग लगाने को नहीं कहा। मैं गाना गाता हूँ बस। बॉलीवुड में तो हजारों गाने शराब पर हैं। मेरा एक-दो गाने है। मैं वो भी नहीं गाऊँगा। मुझे टेंशन ही नहीं है क्योंकि मैं तो खुद शराब नहीं पीता।”

दोसांझ आगे बोले, “आप मेरे को छेड़ो मत। मैं जहाँ जाता हूँ, चुप करके अपना प्रोग्राम करता हूँ, चला जाता हूँ। आप क्यों छेड़ रहे हो मुझे। ऐसा करते हैं, एक मूवमेंट शुरू करते हैं। जब इतने लोग इकट्ठे हो जाएँ तो मूवमेंट शुरू हो सकती है, जितनी भी स्टेट हैं हमारे यहाँ, अगर वो सारी अपने आपको ड्राय स्टेट घोषित कर दें तो अगले ही दिन दिलजीत दोसांझ अपनी लाइफ में शराब पर कोई गाना नहीं गाएगा।”

उन्होंने कहा, “अगर सरकारें ड्राय स्टेट नहीं बन सकतीं तो एक दिन का ड्राय डे घोषित कर दें मैं तब भी नहीं गाऊँगा। मेरे लिए गाने बदलना बहुत आसान हैं। मैं कोई नया कलाकार नहीं हूँ कि ये गाना बदलकर नहीं गा सकता। मैं गाने बदलकर गाऊँगा और गानों में उतना ही मजा आएगा।” उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता सब कह रहे हैं कि गुजरात ड्राय स्टेट हैं। अगर ये सच है तो मैं खुलेआम कह रहा हूँ कि मैं गुजरात सरकार का फैन हो गया हूँ। मैं उन्हें खुला सपोर्ट करता हूँ। हम तो चाहते हैं कि अमृतसर भी ड्राय स्टेट बन जाए। शुरू करते हैं। मैं शराब पर गाना गाने बंद कर दूँगा।”

बता दें कि पिछले दिनों तेलंगाना में दिलजीत का कॉन्सर्ट हुआ था। उस समय तेलंगाना तेलंगाना सरकार ने उन्हें नोटिस जारी कर कहा था कि वो स्टेज पर कहीं शराब, ड्रग्स से जुड़े गाने न गाएँ। इसी के बाद दिलजीत ने स्टेज पर गाने के बोल में बदलाव करके अपना जवाब दिया था।

इधर मुस्लिम लड़की के हिंदू प्रेमी की मौलाना-फौजियों ने पीट पीटकर कर दी हत्या, उधर मोहम्मद युनुस मान नहीं रहे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार

बांग्लादेश में एक हिन्दू युवक की मौलानाओं और फौज ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। युवक को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसका एक मुस्लिम लड़की से प्रेम प्रसंग करता था। यह घटना जिस दिन हुई उसके अगले दिन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद युनुस ने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमलों की बातें झूठी हैं और उन्हें बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना बांगाल्देश के ढाका मंडल के किशोरगंज जिले में हुई। यहाँ करीमगंज उपजिला में रहने वाले रिदॉय रोबी दास की शनिवार (17 नवम्बर, 2024) की हत्या कर दी गई। रिदॉय यही नाई का काम करता था और उसकी खुद की दुकान थी।

उसे शुक्रवार को उसकी दुकान से ही 3 मौलानाओं और बाकी कुछ लोगों ने उठा लिया। रिदॉय का अपहरण करने वालों में स्थानीय प्रशासन के लोग भी शामिल थे। उसके साथ ही उसके एक चचेरे भाई को भी उठाया गया। इसके बाद उन्हें एक अनजान जगह पर ले जाया गया।

यहाँ पर मुस्लिम मौलानाओं ने उसको बुरी तरीके से पीटा और यातनाएँ दी। इसके बाद उसका फोन भी छीन लिया। इसके बाद जब रिदॉय अधमरा हो गया तो उसे पास के फौजी कैम्प में एक ऑटो में भेज दिया गया गया। यहाँ पर फौजियों ने रिदॉय और उसके चचेरे भाई को अलग कर दिया।

रिदॉय से फौजी कैंप में भी पूछताछ हुई। यहाँ से उसे अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि जब उसे इलाज के लिए लाया गया था तब उसके शरीर पर पिटाई के निशान थे। अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई।

फौजियों ने रिदॉय के घरवालों को फोन करके उसकी मौत की सूचना दी। रिदॉय के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और यहाँ से रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। रिदॉय के साथ ले जाए गए शकील रबी दास ने कहा है कि उसे नहीं पता फौजी कैम्प में रिदॉय के साथ क्या हुआ।

स्थानीय मौलानाओं ने आरोप लगाया है कि रिदॉय जिस मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था उसको हिन्दू बनाना चाहता था, इसलिए उसको यह सजा दी गई। रिदॉय के घरवालों ने इस घटना के बाद फौजियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की है।

जिस दिन रिदॉय की हत्या हुई उसके अगले ही दिन रविवार (17 नवम्बर, 2024) को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनुस ने देश में अल्पसंख्यकों पर हमले की बात को सिरे से नकार दिया। मोहम्मद युनुस ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले की बातों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है।

उन्होंने देश के नाम संबोधन में कहा, “उस समय अल्पसंख्यकों में डर भय फैलाने की कोशिश की गई थी। कुछ मामलों में उन्हें हिंसा का भी सामना करना पड़ा। हालाँकि, इन घटनाओं के बारे में बहुत ज़्यादा प्रचार बढ़ा-चढ़ाकर किया गया… हिंसा के जो कुछ मामले हुए वे राजनीति से प्रेरित थे, लेकिन बांग्लादेश को एक बार फिर अस्थिर करने के लिए उन्हें मजहबी संघर्ष के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया। हमने इस स्थिति को संभाल लिया है।”

मोहम्मद युनुस ने इस दौरान देश में दुर्गा पूजा का जिक्र भी किया। हालाँकि मोहम्मद युनुस यह बताना भूल गए कि दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामी संगठनों ने खुली धमकियाँ दी थी। एक और इस्लामी कट्टरपंथी संगठन ने दुर्गा पूजा आयोजन के लिए 5 लाख टका की रंगदारी माँगी थी।

मोहम्मद युनुस को यह भी नहीं याद रहा कि किस तरह इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने ASI संतोष साहा को मार कर उन्हें चौराहे पर लटका दिया था और उनकी देह से बर्बरता की थी। कई जगह पर हिन्दू मंदिरों पर हमले हुए थे, आग लगाई गई थी। मोहम्मद युनुस यह भी नहीं याद रख पाए कि ईशनिंदा के आरोप में एक हिन्दू युवक को मार मार कर अधमरा कर दिया गया था।

महाराष्ट्र में महायुति सरकार लाने की होड़, मुख्यमंत्री बनने की रेस नहीं: एकनाथ शिंदे, बाला साहेब को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहने का राहुल गाँधी को दिया चैलेंज

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का दिन बेहद नजदीक है। इस बीच शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आजतक को दिए इंटरव्यू में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि वो सीएम पद की रेस में नहीं है। उन्होंने कहा कि महायुति में मुख्यमंत्री पद की कोई रेस नहीं है। हम सिर्फ महायुति की सरकार लाने पर फोकस्ड हैं।

इंटरव्यू में एकनाथ शिंदे से पूछा गया, “मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी से बात हुई है या नहीं। आपने ही बताया था कि उद्धव ठाकरे ने बताया कि ढाई साल का वादा किया था। आपकी अंदर कोई बात हुई है कि सीएम आप ही बनाए जाएँगे?” इस पर एकनाथ शिंदे ने कह, “मैं उद्धव ठाकरे नहीं हूँ। मैं एकनाथ शिंदे हूँ। मैं चीफ मिनिस्टर बनने की होड़ में नहीं हूँ। महाविकास आघाड़ी में वो दिल्ली तक घूम रहे हैं कि सीएम बनाओ। ऐसा हमारे में नहीं है। हमारे में कोई रेस नहीं है। हमारी रेस इस बात की है कि महाराष्ट्र में महायुति की सरकार लाना और इस महाराष्ट्र में विकास लाना।” इंटरव्यू का ये हिस्सा 2.03 मिनट से सुन सकते हैं।

आज तक को दिए इंटरव्यू में शिंदे ने उद्धव ठाकरे और कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की नीति हमेशा ‘फूट डालो और राज करो’ की रही है। बालासाहेब ठाकरे का जिक्र करते हुए शिंदे ने राहुल गाँधी से सवाल किया, “क्या राहुल गाँधी बालासाहेब को कभी हिंदू हृदय सम्राट कहेंगे?” शिंदे ने राहुल गाँधी द्वारा बालासाहेब ठाकरे की तारीफ पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है कि उन्होंने बालासाहेब की पुण्यतिथि पर उनके लिए कुछ कहा। अगर उनमें हिम्मत है, तो बालासाहेब को हिंदू हृदय सम्राट कहकर दिखाएँ।”

शिंदे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने अपने स्वार्थ के लिए बालासाहेब के विचारों से समझौता किया और कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया। उन्होंने कहा, “बालासाहेब कहते थे कि मैं अपनी पार्टी को कभी कॉन्ग्रेस नहीं बनने दूँगा, लेकिन उद्धव ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए उनके विचारों को त्याग दिया।”

मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “अगर आज बालासाहेब ठाकरे होते, तो उद्धव से कहते कि जंगल में जाकर वाइल्ड लाइफ की फोटो खींचो। उन्होंने सिर्फ सत्ता के लिए बीजेपी की पीठ में छुरा घोंपा और महाराष्ट्र की जनता को धोखा दिया।” शिंदे ने दावा किया कि उद्धव को लगा था कि उनके बिना सरकार नहीं बनेगी, और इस अवसर का उन्होंने पूरा फायदा उठाया।

ये पूरा इंटरव्यू आजतक ने जारी किया है। राहुल गाँधी और उद्धव ठाकरे पर हमले का हिस्सा 1.50 मिनट से सुन सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक हैं तो सेफ हैं’ नारे का समर्थन करते हुए शिंदे ने कहा कि यह नारा महायुति के एकजुट एजेंडे को दर्शाता है। शिंदे ने अपनी साफगोई से जिस तरह हर मुद्दे पर खुलकर बयान दिया है, वो महायुति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उद्धव ठाकरे के खिलाफ उनकी नाराजगी को भी दर्शाता है। यह साफ है कि महाराष्ट्र में इस बार का चुनाव विचारधारा और वादों के साथ-साथ व्यक्तिगत हमलों का भी केंद्र रहेगा।

महाराष्ट्र में चुनाव देख PM मोदी की चुनौती से डरा ‘बच्चा’, पुण्यतिथि पर बाला साहेब ठाकरे को किया याद; लेकिन तारीफ के दो शब्द जुटा न सके राहुल गाँधी

हिंदू हृदय सम्राट और शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की 12वीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (17 नवंबर 2024) उन्हें याद किया। पीएम ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए बाला साहेब को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया और कहा कि महाराष्ट्र के लोगों के विकास में उनका अहम योगदान है।

आश्चर्यजनक बात ये है कि बाला साहेब की पुण्यतिथि पर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी बाला साहेब के लिए ट्वीट किया। उनका ये ट्वीट पीएम मोदी के चैलेंज के बाद सामने आया है।

जब पीएम मोदी ने उद्धव ठाकरे को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा था कि वो राहुल गाँधी के मुँह से वीर सावरकर और बाला साहेब ठाकरे की तारीफ करवाकर दिखाएँ।

पीएम मोदी ने कहा था, “मैंने इनको चुनौती दी है… अघाड़ी वाले जरा मेरी चुनौती को स्वीकार करें… उनके युवराज के मुंह से, वीर सावरकर की तारीफ में एक भाषण करवा दें जरा… मैं अघाड़ी के साथियों को कहता हूं… अगर उनमें दम हो तो उनके युवराज के मुंह से बाला साहेब ठाकरे की जरा तारीफ करवाके सुनवायें महाराष्ट्र को… साथियों, कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसके पास न नीति है न नीयत है, और नैतिकता का नामोनिशान नहीं है”

इसी चुनौती के बाद ही राहुल गाँधी का बाला साहेब को श्रद्धांजलि देने का ट्वीट आया। हालाँकि देखने वाली बात ये है इतनी बड़ी शख्सियत के लिए राहुल गाँधी अपने ट्वीट में कहीं भी दो लाइन प्रशंसा की नहीं लिख पाए।

उनका ट्वीट आने के बाद लोगों ने उन्हें जमकर घेरा। लोगों ने कहा कि 12 साल में पहली बार बाला साहेब की याद राहुल को आई है। सीएम शिंदे ने तो आजतक से बात करते हुए कहा,

“अच्छी बात है। अभी तक इन्होंने ये भी बोलने की कोशिश नहीं की थी। अनके मन में शिवसेना के लिए क्या भावना थी ये नहीं पता लेकिन उनमें अगर सच में हिम्मत है तो वो बाला साहेब ठाकरे को हिंदू हृदय सम्राट बोलकर दिखाएँ।”

मालूम हो कि आज उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने राजनीति के दाव-पेंच चलते हुए भले ही राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस से अपनी साठ-गाँठ कर ली हो। मगर सच ये हैं कि शिवसेना की नींव रखने वाले बाला साहेब कभी इन लोगों के समर्थक नहीं थे। वह स्पष्ट तौर पर कॉन्ग्रेस से गठबंधन के हमेशा खिलाफ थे और यही नहीं, वह राहुल गाँधी को ‘आज का बच्चा’ और ‘कल का पोपट’भी कहते थे।

अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले ही राहुल गाँधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए बाल ठाकरे ने उन्हें ‘बच्चा’ बताया था। यह दूसरी बात है कि बाद में सत्ता की लालसा में उनके बेटे उद्धव ठाकरे उसी राहुल गाँधी के शरणागत हो गए।