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क्या है ऑपरेशन सागर मंथन, कौन है लॉर्ड ऑफ ड्रग्स हाजी सलीम, कैसे दाऊद इब्राहिम-ISI के नशा सिंडिकेट का भारत ने किया शिकार: सब कुछ जानिए एक साथ

भारत की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पिछले कुछ महीनों में ड्रग्स के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसका नाम ‘ऑपरेशन सागर मंथन’ रखा गया है। इस ऑपरेशन का मकसद पाकिस्तान में स्थित कुख्यात ड्रग्स तस्कर हाजी सलीम, जिसे ‘ड्रग्स का सरगना’ या ‘रक्तबीज’ भी कहा जाता है, के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करना है। हाजी सलीम का नाम सबसे पहले 2015 में तब सुर्खियों में आया था, जब केरल के पास समुद्र में उसकी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी।

हाजी सलीम का पूरा साम्राज्य पाकिस्तान के बलूचिस्तान से संचालित होता है और यह तस्करी नेटवर्क पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मॉरीशस, मालदीव्स से लेकर अमेरिका तक फैला हुआ है। उसके ड्रग्स तस्करी के साम्राज्य का फैलाव इतना बड़ा है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और अफगानिस्तान जैसे देशों की जाँच एजेंसियाँ भी उसे पकड़ने की कोशिश में हैं।

हाजी सलीम बड़े पैमाने पर हेरोइन, मेथामफेटामाइन और अन्य अवैध नशीले पदार्थों की खेप एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी देशों में पहुँचाता है। भारतीय जाँच एजेंसियों के अनुसार, वह समुद्री मार्ग से अपनी तस्करी करता है और उसकी खेपों पर विशेष निशान जैसे 777, 555, 999, उड़ते घोड़े और बिच्छू अंकित होते हैं।

इस ऑपरेशन के दौरान हाल ही में गुजरात तट से 4,000 किलोग्राम अवैध ड्रग्स जब्त किए गए, जिसमें कई पाकिस्तानी और ईरानी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया। भारत के गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर यह अभियान शुरू किया गया है, जिससे NCB ने पिछले ढाई वर्षों में कुल 40,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की हैं।

हाजी सलीम के बारे में जानकारी सीमित है। जाँच एजेंसियों के पास उसकी एक पुरानी तस्वीर और कुछ व्यक्तिगत विवरण हैं। माना जाता है कि वह कराची में रहता है, और उसकी गतिविधियां वहाँ से संचालित होती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सलीम का संबंध कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से भी है। कुछ समय पहले उसे दाऊद के घर में जाते और बाहर आते हुए कैमरे में कैद किया गया था।

सलीम का नेटवर्क केवल ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गतिविधियाँ नार्को-आतंकवाद को भी बढ़ावा देती हैं। जाँच एजेंसियों ने बताया कि वह बेरोजगार युवाओं को अपने तस्करी नेटवर्क में शामिल करता है और आईएसआई से उसे समर्थन मिलता है। सलीम के पास सैटेलाइट फोन जैसी सुविधाएँ हैं, जिनका उपयोग वह समुद्र में अपने एजेंट्स से संपर्क बनाए रखने के लिए करता है।

NCB के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, ज्ञानेश्वर सिंह के अनुसार, “हाजी सलीम दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करों में से एक है। उसके तस्करी नेटवर्क का पैमाना अद्वितीय है।” उसकी पहचान ‘रक्तबीज’ के रूप में इसलिए हुई है क्योंकि उसके ऑपरेशन पर कितनी भी बार प्रहार किया जाए, वह फिर से अपने तस्करी नेटवर्क को सक्रिय कर लेता है।

उसके तस्करी के मुख्य मार्ग ईरान से शुरू होते हैं, जो अफगानिस्तान और मलेशिया से होते हुए श्रीलंका पहुँचते हैं। वहाँ से छोटे जहाजों के जरिए रात में भारतीय तटों पर लाया जाता है, जहाँ वे कम चर्चित बंदरगाहों और तटीय स्थानों पर उतरते हैं।

हाजी सलीम की तस्करी गतिविधियों का पहला बड़ा सबूत 2015 में मिला था जब केरल तट के पास उसकी करोड़ों की ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी। तब से NCB ने उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी हुई है, लेकिन वह अब तक गिरफ्त से बाहर है और कराची में छिपा हुआ है।

‘भगवा लव ट्रैप’ का प्रोपेगेंडा रचने वाले मौलाना नोमानी की खिदमत में शौहर संग पहुँची स्वरा भास्कर: लड़कियों के स्कूल जाने को बता चुका है ‘हराम’, अब BJP को वोट देने पर हुक्का-पानी बंद करने की दे रहा धमकी

हिंदुओं और भाजपा से दिल की गहराई घृणा करने वाली फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर अपने शौहर फहद अहमद के साथ मौलाना सज्जाद नोमानी की। फहद ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा कीं। नोमानी वही मौलाना हैं, जो हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं और भाजपा को वोट देने वालों का हुक्का-पानी बंद करने की धमकी दी है।

मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह मुस्लिम समुदाय से कह रहे हैं, “जो बीजेपी का साथ दे, ऐसे लोगों का हुक्का-पानी बंद होना चाहिए।” इसको लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है और कार्रवाई की माँग की है। इसको लेकर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कॉन्ग्रेस सहित विपक्षी दलों पर निशाना साधा है।

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “क्या शरद पवार को शर्म आती है या उन्हें हिंदुओं के बारे में बोलने में डर लगता है? मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी जैसा बयान कोई नहीं देता कि अगर कोई हिंदू बीजेपी के खिलाफ वोट करता है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर उसका नाम अब्दुल रहमान रख दो। हिंदुत्व में इस तरह की भाषा नहीं है।”

किरीट सोमैया ने आगे कहा, “शरद पवार ने ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड और मराठी मुस्लिम सेवा संघ को समर्थन दिया है। शरद पवार ने वोट जिहाद जैसी बातें फैलाई हैं। राहुल गाँधी, सलमान खुर्शीद के परिवार ने वोट जिहाद फैलाया है। इन लोगों को शर्म आनी चाहिए।” किरीट सोमैया ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलउर रहमान सज्जाद नोमानी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

महिलाओं के खिलाफ रहा है नोमानी का मत

पिछले साल अप्रैल 2023 में नोमानी ने मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा था कि रमजान के वक्त लड़कियों को स्कूल/कॉलेज अकेले नहीं भेजना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना इस्लाम में हराम है। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें वो मुस्लिम अभिभावकों को भड़काते हुए नजर आते हैं।

वीडियो में नोमानी कहते नजर आते हैं, “अपनी बच्चियों को हिजाब पहनने के बाद भी अकेले स्कूल-कॉलेज मत भेजो। ये हराम है, हराम। पाक रमजान की रात में उन लोगों पर लानत भेजता हूँ, जो अपनी बच्चियों को अकेले कोचिंग सेंटर या स्कूल-कॉलेज भेजते हैं। अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा।”

वह पूछते हैं, “क्या उन्हें (लड़कियों के अम्मी-अब्बू को) पता है उनकी बेटी स्कूल-कॉलेज जाकर पीरियड अटेंड करती है या नहीं या फिर कॉलेज में आकर चुपके से कहीं चली जाती है। आप अगर बाप हैं। आप अगर मुसलमान हैं। अगर आप शरीफ इंसान हैं और हलाल बाप के रुतबे से पैदा हुए हैं तो ये हराम है कि आप अपनी बच्चियों की तरह से बेफिक्र हों।”

हिंदू लड़कों पर लगाया था लव जिहाद का आरोप

सितंबर 2021 में नोमानी का एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वह हिंदू लड़कों पर लव जिहाद का आरोप लगाया था। अल कमल टीवी पर अपलोड की गई इस वीडियो में नोमानी ने दावा किया था कि 5,000 मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू लड़कों के साथ भागकर शादी की और हिंदू बन गईं। नोमानी के मुताबिक, ये लड़कियाँ हाई प्रोफाइल परिवारों से थीं।

सज्जाद नोमानी ने कहा था, “मुस्लिम महिलाओं को हिंदू धर्म की ओर लुभाने के लिए सुनियोजित साजिश के तहत ये सब किया जा रहा है। दूसरी तरफ (हिंदू धर्म के लोगों की ओर) से ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं को लुभाने, उनके मजहब को बर्बाद करने और उनको इस्तेमाल के बाद छोड़ने की साजिश चल रही है। ये सब प्लान के तहत हो रहा है।”

उन्होंने दावा किया था, “मुझे सूत्रों से पता चला है कि एक ग्रुप है जो लड़कों को ट्रेनिंग देता है कि मुस्लिमों से कैसे बात करें। वह उन्हें सलाम वालेकुम बोलना सिखाते हैं। पूछते हैं- कैसे मिजाज हैं। उन्हें ‘खैरियत है’, ‘इंशाल्लाह’ ‘माशाल्लाह’ ‘रहमुदिल्लाह’, ‘सुभानअल्लाह’ और अन्य शब्द कहना सिखाते हैं। वे हमारी बच्चियों से नर्म जुबान में बात करते हैं, ताकि फँसा सकें।”

नोमानी ने दावा किया था कि मोबाइल फोन और स्कूल-कॉलेज में दी जा रही तालीम के कारण ऐसा होता है। उनके मुताबिक, लड़कियों को ऐसी स्वतंत्रता दी जाती है कि वे दूसरे समुदाय के लोगों से दोस्ती करें। नोमानी कहते हैं कि माता-पिता अपनी लड़कियों को इस्लाम का तालीम नहीं देते और न ही जानते हैं कि उनके इर्द-गिर्द क्या हो रहा है।

तालिबान को भेजा था सलाम

इसके अलावा साल 2021 में तालिबान ने जब अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तब सज्जाद नोमानी ने भारत में इसका स्वागत किया था। मौलाना सज्जाद नोमानी ने ‘तालिबान के हौसले’ को सलाम करते हुए कहा था कि तालिबान ने दुनिया की सबसे मजबूत फौज को शिकस्त दे दी है।

AIMPLB प्रवक्ता नोमानी ने कहा था, “एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है। एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को शिकस्त दी है। काबुल के महल में वे दाखिल होने में कामयाब रहे। उनके दाखिले का अंदाज पूरी दुनिया ने देखा। उनमें कोई गुरूर और घमंड नहीं था।”

मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान की तारीफों के पुल बाँधते हुए कहा था, “उनके कोई बड़े बोल नहीं थे। ये नौजवान काबुल की सरजमीं को चूम रहे हैं। मुबारक हो। आपको दूर बैठा हुआ यह हिंदी मुसलमान सलाम करता है। आपके हौसले को सलाम करता है। आपके जज्बे को सलाम करता है।”

कार्तिक पूजा कर रहे थे हिंदू, ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा इस्लामी कट्टरपंथियों ने बोला धावा: बंगाल में पत्थरबाजी-आगजनी, BJP ने साझा किया हिंसा का Video

मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा कस्बे में शनिवार (16 नवंबर 2024) की शाम को उग्र इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के घरों पर हमला कर दिया। यह हमला उस समय हुआ जब पूरे राज्य में हिंदू समुदाय कार्तिक पूजा मना रहा था। भीड़ ने हिंदुओं पर ‘ईशनिंदा’ करने का आरोप लगाकर आगजनी और पत्थरबाजी शुरू कर दी।

भाजपा के प्रवक्ता अमित मालवीय द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक हिंदू व्यक्ति ने बताया, “पुलिस की मौजूदगी के बावजूद, देखें कैसे हिंदू घरों को जलाया जा रहा है। चारों ओर पत्थर बिखरे हुए हैं। एक कार को भी आग लगा दी गई।”

अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “कार्तिक पूजा के दिन, मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में मुसलमानों ने हिंदू घरों पर हमला किया। ममता बनर्जी की पुलिस मूक दर्शक बनी रही।”

भाजपा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बेलडांगा में हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेश जैसे ‘सफाए’ की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बमबारी और हिंदू महिलाओं को दी जा रही जान से मारने की धमकियों का भी उल्लेख किया।

इस बीच, मजहबी टोपी पहने एक इस्लामिक कट्टरपंथी ने वीडियो जारी कर हिंदुओं को धमकियाँ दीं और मुस्लिमों को बेलडांगा में दंगे करने के लिए बुलाया। उसने कहा, “मैं अपने सभी मुस्लिम भाइयों को बताना चाहता हूँ कि बेलडांगा के एक कार्तिक पूजा पंडाल में अल्लाह का अपमान किया गया। मैं अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करता हूँ कि बेलडांगा की जमीन हिलनी चाहिए।”

उस व्यक्ति ने कहा, “जिसने यह किया है, उसे खत्म करना जरूरी है। हिंदुस्तान को यह संदेश मिलना चाहिए कि अल्लाह और पैगंबर का अपमान करने के बाद क्या होता है।” उसने अपने समुदाय के लोगों से हिंसा फैलाने और आरोपी को सजा देने की अपील की, जिसमें न्यायिक प्रणाली को छोड़कर मॉब लिंचिंग का आह्वान किया। उसने अपने हिंदुओं को ‘हमें सौंप दो’ कहकर भीड़ को उकसाया, ताकि इस्लामी भीड़ उनकी मॉब लिंचिंग की जा सके।

क्या है AFSPA, जिसे मणिपुर में मंत्री-MLA के घरों पर हमले के बाद 6 थाना क्षेत्रों में किया गया है लागू: क्यों राज्य सरकार ने इसे हटाने के लिए केंद्र को लिखा पत्र

मणिपुर में लापता 6 लोगों की लाश मिलने के बाद राज्य में हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया और तीन मंत्रियों एवं छह विधायकों के घरों पर हमला करके आग लगा दी गई। इसके बाद हिंसा प्रभावित छह पुलिस थानों में केंद्र सरकार ने ‘सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA)’ को फिर से लागू कर दिया है। शनिवार को इसकी समीक्षा करने और उसे हटाने का अनुरोध किया गया है।

केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (गृह) को एक पत्र में कहा गया है, “राज्य मंत्रिमंडल ने 15 नवंबर को हुई बैठक में इस (AFSPA को फिर से लागू करने) पर विचार-विमर्श किया है और केंद्र सरकार को इसकी समीक्षा करने और इसे वापस लेने की सिफारिश की है।” राज्य के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA 1958 की धारा 3 के तहत अशांत क्षेत्र घोषित की गई है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 नवंबर 2024 को राजधानी इंफाल के पश्चिम जिले सेकमाई पीएस एवं लामसांग पीएस, इंफाल पूर्व में लामलाई, बिष्णुपुर में मोइरांग, कांगपोकपी में लीमाखोंग और जिरीबाम जिले के जिरीबाम पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू कर दिया था। सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA) विशेष शक्तियों वाला प्रावधान है।

बता दें कि 11 नवंबर को मणिपुर कुकी उग्रवादियों जिरीबाम जिले के बोरोबेकरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया था। इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने 11 कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था। इस हमले के बाद तीन महिलाएँ और तीन बच्चे लापता हो गए थे। माना जाता है कि कुकी उग्रवादियों ने इनका अपहरण किया था। अब इनकी लाश मिली है।

क्या है AFSPA?

सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को केवल अशांत क्षेत्रों में ही लागू किया जाता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने लगा तो यहाँ भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया था। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।

यह किसी भी राज्य या किसी भी क्षेत्र में तभी लागू किया जाता है, जब राज्य या केंद्र सरकार उस क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ अर्थात डिस्टर्बड एरिया एक्ट (Disturbed Area Act) घोषित करती है। इस कानून के लागू होने के बाद ही वहाँ सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं। कानून के लगते ही सेना या सशस्त्र बल को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है।

अंग्रेजों के कानून को नेहरू सरकार ने भी जारी रखा

इस एक्ट को सबसे पहले अंग्रेजों के जमाने में लागू किया गया था। उस वक्त ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य बलों को विशेष अधिकार दिए थे। आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने भी इस कानून को जारी रखने का फैसला लिया। फिर वर्ष 1958 में एक अध्यादेश के जरिए AFSPA को लाया गया और तीन महीने बाद ही अध्यादेश को संसद की स्वीकृति मिल गई। इसके बाद 11 सितंबर 1958 को AFSPA एक कानून के रूप में लागू हो गया।

कानून को लागू करने के पीछे का तर्क

इस कानून को लागू करने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि इसे उन इलाकों में लागू किया जाता है, जिनमें उग्रवादी गतिविधियाँ होती रहती हैं। भारत और म्यांमार की सीमा के दोनों तरफ कई अलगाववादी विद्रोही संगठनों के ठिकाने हैं। नागालैंड के अलावा मणिपुर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सक्रिय है, जो सेना पर हमले करती रहती है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी अलगाववादी संगठन सक्रिय है। इन संगठनों से निपटने और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना को अफस्पा के तहत विशेष अधिकार दिए गए।

इन राज्यों में लागू रहा AFSPA कानून

AFSPA को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में लागू किया गया था। हालाँकि, समय-समय पर परिस्थितियों को देखते हुए हटा भी दिया जाता है। नागालैंड, असम और मणिपुर में साल 2022 में AFSPA के दायरे को कम कर दिया गया था।

मणिपुर में अफस्फा के खिलाफ इरोम चानू शर्मिला ने 16 साल तक अनशन किया था। नवंबर 2000 में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला के सामने एक बस स्टैंड के पास दस लोगों को सैन्य बलों ने गोली मार दी थी। इस घटना का विरोध करते हुए उस वक्त 29 वर्षीय इरोम ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, जो 16 साल तक चली।

महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान नवनीत राणा पर हमला, बोलीं BJP नेत्री- अल्लाहू अकबर के नारे लगा किए गंदे इशारे: आमिर ने दी थी गैंगरेप की धमकी

महाराष्ट्र के अमरावती में भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद नवनीत राणा की रैली में उन पर हमला कर दिया गया। हालाँकि, इस हमले में वह बाल-बाल बचीं। नवनीत जब भाषण दे रही थीं तब उन्हें गंदे इशारे किए गए और ‘अल्लाह हू अकबर’ के आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसके बाद भीड़ ने उन्हें गालियाँ देते हुए उन पर कुर्सी से हमला शुरू कर दिया। इस मामले में पुलिस अज्ञात लोगों के मामला दर्ज कर लिया है।

दरअसल, नवनीत राणा अपने पति रवि राणा की ‘युवा स्वाभिमान पार्टी’ के दरियापुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार रमेश बुंडिले के समर्थन में रैली करने पहुँची थीं। यह रैली खल्लार गाँव में आयोजित की गई थी। घटना के बाद नवनीत राणा खल्लार पुलिस स्टेशन पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। पुलिस ने लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच ग्रामीण अमरावती किरण वानखेड़े का कहना है, “बीजेपी नेता नवनीत राणा कल खल्लार गाँव में दरियापुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार रमेश बुंदिले के लिए प्रचार करने आए थे…रैली के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। हमने नवनीत राणा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है।” रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

नवनीत राणा ने कहा, “खल्लार में शांतिपूर्वक तरीके से प्रचार चल रहा था। जब मैं भाषण दे रही थी तो कुछ लोग दूर से इशारे और हूटिंग कर रहे थे। मैं अपना भाषण खत्म करने की कोशिश कर रही थी। जब मैं भाषण खत्म करके नीचे आई तब भी मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी बीच मुझे और मेरे कार्यकर्ताओं को देखकर उन लोगों ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए।”

पूर्व सांसद ने आगे कहा, “जब हमारे लोगों ने उनसे (उपद्रवियों से) कहा कि आप लोग भाभी के लिए अपशब्द ना कहें, हम जाने वाले हैं। इसके बाद वे कुर्सियाँ फेंकने लगे और मारना शुरू कर दिया। वे मुझे गाली देने लगे, मेरे ऊपर कुर्सी फेंकने लगे। इस दौरान मेरे ऊपर थूका। मेरी जाति को लेकर गाली दी। अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए। मेरे 6 अंगरक्षक और मेरे निजी सचिव मुझे घेरकर बाहर ले गये।”

बता दें कि 11 अक्टूबर को पूर्व सांसद नवनीत राणा को एक चिट्ठी भेजकर धमकी दी गई थी। इस चिट्ठी में उनसे 10 करोड़ रुपए की माँग की गई थी। इतना ही नहीं आमिर नाम से भेजे गई इस चिट्ठी में नवनीत को गैंगरेप की धमकी दी गई थी। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि उनके घर के सामने गाय काटा जाएगी। आमिर ने चिट्ठी में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ भी लिखा था।

स्पीड पोस्ट से भेजी गई इस चिट्ठी में नवनीत के लिए चिट्ठी में बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही उनके पति रवि राणा के लिए भी अभद्र बातें लिखी गई थीं। यह पत्र नवनीत राणा के आवास पर एक कर्मचारी को मिला था। इसके बाद नवनीत राणा के निजी सचिव विनोद गुहे ने अमरावती के राजापेठ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

बता दें कि नवनीत राणा फिल्म अभिनेत्री से राजनेता बनी हैं। उन्होंने हिंदी, तेलुगु, कन्नड, मलयालम और पंजाबी फिल्मों में काम किया है। साल 2014 में वह एनसीपी की टिकट पर पहली बार अमरावती से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सकीं। साल 2019 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद अडसुल को हराकर लोकसभा सांसद बनीं। नवनीत काफी मुखर वक्ता मानी जाती हैं।

सरगना मुस्लिम डॉक्टर, मंसूबा भारत में इस्लामी हुकूमत लाने का… दिल्ली पुलिस का कोर्ट में खुलासा- मोदी सरकार की योजना से मिले पैसों का इस्तेमाल कर रहे थे अल-कायदा आतंकी

दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया है कि झारखंड में अल-कायदा प्रेरित आतंकी मॉड्यूल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के माध्यम से जिहाद के लिए धन इकट्ठा करने की योजना बनाई थी। अगस्त में 11 लोगों की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने यह दावा किया। जाँच में पता चला कि इनमें से दो आरोपित इस योजना के लाभार्थी थे और इन्होंने आतंकवादी गतिविधियों के लिए हथियार खरीदने के लिए पैसा दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 अगस्त 2024 को हुई इस गिरफ्तारी के लिए पुलिस को केंद्रीय एजेंसियों से जानकारी मिली थी कि झारखंड आधारित एक आतंकी समूह और दिल्ली में उनके समर्थक आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार लोगों में अनीमुल अंसारी, शाहबाज अंसारी, अल्ताफ अंसारी, हसन अंसारी, अरशद खान, और उमर फारूक शामिल हैं, जिन्हें राजस्थान के भीवाड़ी में हथियार प्रशिक्षण लेते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने मौके से एक असॉल्ट राइफल, पिस्तौल, रिवॉल्वर, 66 जीवित कारतूस, एक हैंड ग्रेनेड, बैटरी के साथ एक रिमोट कंट्रोल डिवाइस, एक कार्बाइन, और एक नकली INSAS राइफल बरामद की।

इसके अलावा, रांची में छापेमारी कर डॉ. इश्तियाक अहमद उर्फ कैप्टन, मोहम्मद रिजवान, मोती-उर-रहमान, मोहम्मद रहमतुल्ला, और फैजान अहमद को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से SLR, कार्बाइन और 5.1 लाख रुपये जब्त किए गए। जाँच में सामने आया कि इस मॉड्यूल की अगुवाई डॉक्टर इश्तियाक अहमद कर रहा था और सभी सदस्य भीवाड़ी में हथियार चलाने का प्रशिक्षण ले रहे थे। ताकि इश्तियाक फिदायीन आतंकी दस्ता तैयार कर कर देश में इस्लामी खिलाफत ला सके।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के माध्यम से जिहाद के लिए धन इकट्ठा करने की योजना पर ये ग्रुप काम कर रहा था, ऐसे में वो ऐसे युवाओं को आतंकी समूह से जोड़ता, जिन्हें सरकार की तरफ से पैसे मिले। इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 12 नवंबर को पुलिस को आठ आरोपितों की छह दिन की हिरासत दी, जिसमें यह कहा गया कि उन्हें 18 नवंबर को पेश किया जाएगा

कोर्ट में पेशी के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपितों से पूछताछ बेहद जरूरी है ताकि साजिश के पूरे जाल का पर्दाफाश किया जा सके और इसके अन्य जुड़े लोगों की पहचान की जा सके। सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा कि पुलिस हिरासत में पूछताछ से ही इस केस की गहराई तक जाया जा सकता है। अदालत ने इस तर्क को मानते हुए हिरासत की मंजूरी दे दी।

कोर्ट ने जाँच अधिकारी (IO) को निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान आरोपितों की सेहत और सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाए। इसके तहत, भारतीय कानूनी प्रावधानों के अनुसार, पुलिस हिरासत के दौरान इनकी नियमित मेडिकल जाँच कराना अनिवार्य होगा। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस की यह जिम्मेदारी होगी कि आरोपितों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये गिरोह खास नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था और इसके पीछे बड़े स्तर पर योजना बनाई गई थी। जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि इनका कनेक्शन कुछ बाहरी समूहों से भी हो सकता है। पुलिस अब इनके फोन रिकॉर्ड और संपर्कों की गहनता से जाँच कर रही है ताकि पूरे मामले को समझा जा सके।

बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये दिए जाते हैं, जो 3 किश्तों में सीधे उनके खाते में आते हैं। ये योजना किसानों को खाद-बीज खरीदने में मदद के लिए सरकार ने शुरू की थी, लेकिन आतंकवादी इस योजना का लाभ अपने घिनौने मकसद को पूरा करने में लगा रहे हैं।

‘तेजी से बढ़ रही है अवैध घुसपैठियों की तादाद, फर्जी बनवा रहे हैं वोटर और आधार’: दिल्ली के LG ने अधिकारियों से कहा- पहचान के लिए विशेष अभियान चलाओ

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गुरुवार (14 नवंबर 2024) को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध घुसपैठियों की पहचान करने के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर सहित कई अधिकारियों को निर्देश दिए। LG कार्यालय से जारी एक पत्र में आधार कार्ड और वोटर कार्ड में हेराफेरी का सरकारी जगहों पर अतिक्रमण की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ समय में घुसपैठियों की बढ़ी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीके सक्सेना ने दिल्ली के प्रमुख सचिव, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन दिल्ली (MCD) के कमिश्नर और नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) को एक पत्र लिखकर जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने राजधानी में तेजी से बढ़ती अवैध घुसपैठियों की संख्या पर ध्यान दिलाते हुए इस दिशा में जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसके लिए एक महीने तक विशेष अभियान चलाने के लिए कहा गया है।

उपराज्यपाल के इस पत्र में दिल्ली के अधिकारियों से कहा गया है कि घुसपैठियों का इस्तेमाल कुछ लोगों द्वारा राजनैतिक स्वार्थों के लिए किया जा रहा है। इसमें आगे कहा गया है कि अवैध घुसपैठियों की जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से आई है। ये संख्या तेजी से बढ़ रही है। आशंका है कि ये घुसपैठियों ने फर्जी कागजातों से आधार और वोटर कार्ड हासिल कर मतदान की कोशिश कर रहे हैं।

मतदान का अधिकार लोकतंत्र का सबसे प्रभावी हक बताते हुए इस पत्र में कहा गया है कि इसे घुसपैठियों को मिलना किसी भी रूप में देश हित में नहीं हो सकता। घुसपैठियों की बढ़ती संख्या को उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया है। पत्र में घुसपैठियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाने और केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने के लिए कहा गया है।

उपराज्यपाल के इसी पत्र में सभी सरकारी संस्थाओं से कहा गया है कि दिल्ली में कहीं भी अवैध कब्ज़ा किसी भी रूप में न हो। इस बावत उपराज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने की नसीहत दी है। बताते चलें कि दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वो घुसपैठियों का मुद्दा विधानसभा चुनावों में अपने राजनैतिक लाभ के लिए उठा रही है।

PM मोदी ने कार्यकर्ताओं से बातचीत में दिया जीत का ‘महामंत्र’, बताया कैसे फतह होगा महाराष्ट्र का किला: लोगों से संवाद से लेकर बूथ मैनेंज के बारे में बताया, जानिए डिटेल में

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उनको चुनाव को लेकर निर्देश दिए। पीएम मोदी ने इस दौरान समझाया कि कैसे राज्य में महायुति के लिए वोट बढ़ाए जाएँ। उन्होंने इस दौरान कॉन्ग्रेस पर भी हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक देश में SC-ST-OBC समाज जागरूक नहीं हुआ था, तब तक कॉन्ग्रेस को बहुमत मिलता था। पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को भाजपा का मजबूत सिपाही बताया और कहा कि आप सभी मेरे प्रतिनिधि हैं।

जल्दबाजी ना करें, लोगों को आराम से समझाएँ

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा, “जल्दबाजी में घर से बाहर जुलूस में गए, पर्चा दे दिया, वोट दे देना कह दिया, ऐसे प्रचार नहीं करना है। एक-एक के घर में जाकर बैठना है, बात करना है, समस्या समझनी है। उनसे बात करनी है। हमारा काम मत परिवर्तित करना है। बहुत से मतदाता ऐसे होते हैं जिनके पास गलत जानकारी और समस्या होती है। उन्हें सुलझाना हमारी जिम्मेदारी है… ऐसे में सभी घरों से निकट संबंध बनेगा और वह हमारे कहने पर घरों से निकलेंगे और वोट देंगे।”

पीएम मोदी ने कहा कि लोगों को एक एक मुद्दे पर समझाया जाए कि आखिर भाजपा की क्या रणनीति है और वह सत्ता में आने पर कैसे समस्याएँ सुलझाएँगे। पीएम मोदी ने कहा कि मतदाता की बात नहीं काटनी है और विवाद को संवाद में बदलना है। उन्होंने वोट डलवाने पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को बताया कि बूथ सबसे मजबूत कड़ी है और किसी युद्ध में जिस तरह चौकी जीती जाती हैं, वैसे ही बूथ चुनाव के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा एक काडर आधारित पार्टी है और ऐसे में बूथ मैनेजमेंट से ही चुनाव जीता जाएगा।

महायुति से लोग खुश

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को बताया कि वह जहाँ भी गए उन्होंने पाया कि लोग महायुति की सरकार से खुश हैं। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार में लोगो नको काफी दुख झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार महाराष्ट्र का गौरव बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को बताया जाए कि उन्हें क्या फायदा मिला है और कितनी आसानी से मिली है। उन्होंने कहा कि लोगों के अनुभव जान कर ही आगे की रणनीति बन पाएगी।

कार्यकर्ताओं से की सीधी बातचीत

पीएम मोदी ने इस दौरान कई कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उनके अनुभव भी जानने की कोशिश की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछा कि आखिर महाराष्ट्र के लोगों को महाविकास अघाड़ी और महायुति की सरकार में क्या फर्क लगता है। इस पर कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि अघाड़ी सरकार में विकास कार्य पूरी तरह से रुक गया था।

कार्यकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान सरकार में बुलेट ट्रेन और मेट्रो प्रोजेक्ट तेज हो गया है। कार्यकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों को योजनाओं का लाभ मिला है वह अपने आप वोट देने को कह रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जब विकास होता है तो उसका फायदा हर वर्ग को होता है।

पीएम मोदी को महिला कार्यकर्ताओं ने बताया कि सरकार की लाडकी बहिन योजना की जनता में काफी चर्चा है, विशेष कर महिलाएँ इस योजना का समर्थन कर रही है। महिला कार्यकर्ताओं ने बताया कि लोग अघाड़ी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं।

आदिल और आयशा ने नाबालिग लड़की का अपहरण किया, फिर गुजरात के व्यापारी को बेचा: लगातार होती रही रेप की शिकार, पुलिस ने 4 को दबोचा

मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण करके उसे गुजरात में एक किराना व्यापारी को बेचने के मामले में आयशा एवं उसके शौहर आदिल को गिरफ्तार किया है। किराना व्यापारी ने पीड़िता को लम्बे समय तक बंधक बनाकर रेप किया। जैसे-तैसे पीड़िता आरोपितों के चंगुल से निकल पाई। पुलिस ने इस केस में आयशा और आदिल के अलावा 5 अन्य आरोपितों को भी नामजद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला इंदौर के थाना क्षेत्र चंदननगर का है। यहाँ 5 नवंबर की रात 9 बजे 17 वर्षीया पीड़िता अपने घर के बाहर खड़ी थी। उसी दौरान उसकी परिचित महिला आयशा और उसका शौहर आदिल वहाँ बाइक से पहुँचे। इन दोनों ने लड़की को बेटमा घुमाने का झाँसा दिया और बाइक पर बैठा लिया। पीड़िता कहीं जाने की बात अपने घर में किसी को नहीं बता पाई।

थोड़ी दूर जाकर आयशा और आदिल लड़की के साथ राज मोहल्ला में रुके। वहाँ विमला, धर्मेंद्र, जीवन और रवि एक कार लेकर खड़े थे। इन सभी ने पीड़ित को कार में बैठा लिया और सभी पीड़िता को लेकर गुजरात के राजकोट पहुँचे। यहाँ से वे एक किराना व्यापारी प्रकाश के पास गए और 1.80 लाख देकर खरीद पीड़िता को बेच दिया। इस पैसे को सभी आरोपितों ने आपस में बाँट लिया और लौट गए।

प्रकाश ने पीड़िता को अपने गोदाम में बंधक बना कर रखा। यहाँ उसने लड़की से कई बार बलात्कार किया। इधर गोदाम में कैद पीड़िता जैसे-तैसे खुद को छुड़ाने की कोशिश करती थी। 9 नवंबर (शनिवार) को पीड़िता कैद से आज़ाद हो गई। वह ट्रेन पकड़ कर इंदौर पहुँच गई और अपनी माँ को पूरी बात बताई। मामले की जानकारी हिन्दू संगठन को हुई तो उन्होंने पीड़िता के साथ जाकर पुलिस में तहरीर दी।

पुलिस ने BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस की 3 टीमों ने ताबड़तोड़ दबिश दी और रात भर में 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इनसे हुई पूछताछ में पता चला कि किराना व्यापारी प्रकाश अधेड़ उम्र का हो चुका है। अभी तक उसकी शादी नहीं हो पाई है।

उसने अपने नौकर से शादी के लिए कोई लड़की खोजने को कहा था। प्रकाश का नौकर आरोपित रवि का दोस्त है। उसने रवि से लड़की खोजने को कहा। आखिरकार रवि ने अपने गिरोह के साथ नाबालिग पीड़िता को अपना टारगेट बनाया। जाँच में यह भी पता चला कि आरोपित विमला के पति की कुछ वर्ष पहले हत्या हो चुकी थी। तब से वह आयशा के साथ जुड़कर ऐसे अनैतिक कामों को अंजाम दे रही थी।

आयशा के साथ उसका शौहर आदिल भी इस काम में शामिल हो गया। धीरे-धीरे इस गिरोह में कई अन्य लोग जुड़ते चले गए। फ़िलहाल 7 में से 6 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें जेल भेज दिया है। पीड़िता का मेडिकल और काउंसिलिंग करवाई गई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नमाज के लिए शुक्रवार की छुट्टी पर सीएम सरमा ने उठाया सवाल: कहा- हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए मंगलवार को छुट्टी क्यों नहीं?

झारखंड में विधानसभा चुनावों के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को स्कूलों में साप्ताहिक छुट्टी के मुद्दे को सियासी बहस का केंद्र बना दिया है। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर नमाज पढ़ने के लिए शुक्रवार को स्कूलों में छुट्टी दी जा सकती है, तो हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए मंगलवार को क्यों नहीं?

हिमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड में कहा, “हम हिंदू सांप्रदायिक नहीं हैं। संविधान निर्माण के समय हिंदू नेताओं ने बड़ा दिल दिखाकर रविवार को राष्ट्रीय अवकाश का समर्थन किया, लेकिन अब शुक्रवार को स्कूल बंद किए जा रहे हैं। यह कहाँ तक सही है?” उनका कहना है कि “अगर मुस्लिम समुदाय के लिए शुक्रवार को स्कूल बंद किए जा सकते हैं, तो हिंदू बच्चों के लिए मंगलवार को क्यों नहीं?”

हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि यह केवल धार्मिक पक्षपात का मामला नहीं है, बल्कि इससे समाज में असमानता और तनाव पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, “हमने कभी सांप्रदायिक सोच नहीं रखी, लेकिन दूसरों की माँगों के सामने हमारी परंपराओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।”

सरमा ने अपने बयान को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी साझा करते हुए राज्य की जेएमएम-कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा। सरमा का आरोप है कि यह छुट्टी तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है।

यह विवाद नया नहीं है। झारखंड और बिहार के कई जिलों में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी देने की परंपरा पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही है। झारखंड में यह मुद्दा पहली बार तब उभरा जब जामताड़ा और दुमका के 33 स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी घोषित की गई। इसके बाद, मामला बिहार के किशनगंज तक पहुँचा, जहाँ 37 स्कूलों ने इसी परंपरा को अपनाया।

गौरतलब है कि झारखंड में दो चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, 13 नवंबर के बाद अब 20 नवंबर को दूसरे चरण के मतदान होंगे। वहीं, वोटों की गिनती 23 नवंबर को होगी। बीजेपी ने झारखंड विधानसभा के लिए बीजेपी का सह-प्रभारी बनाया गया है। इस बीच, झारखंड में विधानसभा चुनाव के दौरान शुक्रवार की छुट्टी और हनुमान चालीसा पर बहस ने सियासत को गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या यह मुद्दा चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा, या सिर्फ एक विवाद बनकर रह जाएगा।