झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों का घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है। जनजातीय समान की रोटी, बेटी और माटी को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रमुखता से उठाया है। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में घुसपैठ रोकने और एसटी वर्ग की जिन जमीनों पर कब्जा किया गया है, उनको वापस दिलाने के लिए कानून बनाने का वादा किया है।
इसी कड़ी में झारखंड बीजेपी ने शनिवार (16 नवंबर 2024) को अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया है। बीजेपी ने लिखा है, “ध्यान से देखिए कि एक गलत वोट कितनी बड़ी गलती बन सकता है। इसलिए 2019 वाली गलती इस बार ना करें। सही चुनें, भाजपा चुनें।”
इस वीडियो में आप देख सकते हैं, एक घर के बाहर जेएमएम का झंडा लगा है। घर के अंदर परिवार के लोग खुश दिख रहे हैं। बुजुर्ग संगीत सुन रहे हैं। पिता-पुत्र नाश्ते की टेबल पर बैठे हैं। अचानक उनके घर की घंटी बजती है। दरवाजा खोलते ही सामने टोपी-बुर्के वालों की भीड़ दिखती है। वो झटके से ‘अस्सलाम वालेकुम’ कहते हुए घर में प्रवेश कर जाते हैं। परिवार के लोगों को कुछ समझ में आता, इससे पहले वो घर के कोने-कोने में कब्जा कर लेते हैं। कोई सोफे पर कूद रहा है। कोई उसी घर में रुई धुन रहा है।
ये हालात देखकर घर का मालिक सवाल करता है, “अरे ये हमारा घर बर्बाद कर रहे हैं” तब वो व्यक्ति बोलता है, “आपने जिस सरकार को जिताया है, वही इन्हें लेकर आई है।” इसके बाद घर का मालिक है, “तो?” जवाब में घुसपैठियों को लाने वाला व्यक्ति बोलता है, “तो हमारी बस्तियाँ क्यों बर्बाद हो, आपक भी तो घर बर्बाद होना चाहिए न”
ध्यान से देखिए कि एक गलत वोट कितनी बड़ी गलती बन सकता है। इसलिए 2019 वाली गलती इस बार ना करें।
झारखंड बीजेपी ने रविवार (17 नवंबर 2024) को एक अन्य वीडियो पोस्ट किया और कैप्शन में लिखा, “हेमंत सोरेन के इलाके में जनता ने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। हमारी बहू-बेटियों को गलत नजर से देखते हैं। इसलिए घुसपैठियों को भगाने के लिए सभी लोग भाजपा को जिताना चाहते हैं।”
इस वीडियो में एक बुजुर्ग बोलते दिख रहे हैं, “यहाँ से जीत जाएगा बीजेपी, कारण.. यहाँ मुसलमानों का दबदबा बढ़ रहा है। बाहरी मुसलमान आया है यहाँ, रोहिंग्या से, बांग्लादेश से। चलिए मैं दिखाता हूँ, 500 से ज्यादा घर हो गए हैं।” वो आगे बोलते हैं, “इन्हें मोदी हटाएगा।” वो खुलेआम बोलते हैं कि टोटल आदमी बीजेपी को पसंद कर रहा है। वो कहते हैं, “मुसलमानों को चाहिए आदिवासी। वो खुद ही आदिवासी में घुसा है। आदिवासी मुसलमानों को नहीं चाहता है। ये लुटेरा है। आदिवासी बहू-बेटियों पर मुसलमानों की गंदी नजर रही है। उनकी बेईज्जती करना, छीनना, झगड़ा करना, यही तो काम है उनका।”
हेमंत सोरेन के इलाके में जनता ने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है।
बीजेपी ने 19 सितंबर 2024 को एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें एक बुजुर्ग हेमंत सोरेन की सरकार के प्रति अपनी निराशा जता रहे हैं। वो बदलाव की बात करते हैं।
इस वीडियो में बांग्लादेशी घुसपैठ, तुष्टिकरण और बढ़ते अपराध से आक्रोशित जनता ने खोली हेमंत सरकार के कुशासन की पोल। pic.twitter.com/F6zCSuBjQv
बता दें कि BJP द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह रिपोर्ट बताती है कि राज्य की 10 विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची और 2024 की मतदाता सूची का अध्ययन किया है। भाजपा ने पाया है कि झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कुछ बूथ पर (विशेष कर मुस्लिम आबादी वाले बूथ) पर वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि पाँच वर्षों में हुई है।
रिपोर्ट में सामने आया है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में यह अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है। भाजपा ने कहा है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने यह भी बताया है कि हिन्दू आबादी वाले बूथ पर वोटरों की संख्या में बढ़त मात्र 8% से 10% हुई है। भाजपा ने यह भी बताया है कि कई बूथ पर हिन्दू मतदाता घट भी गए हैं।
आँकड़ों में बताया गया है कि 1951 में संताल परगना में 41% आदिवासी आबादी थी जो कि 2011 में 28% ही बची है। इस बीच मुस्लिमों की आबादी 9.4% से 22% पहुँच चुकी है।
बीजेपी का घुसपैठियों का मुद्दा केवल चुनावी मंच तक सीमित नहीं है। यह पार्टी की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और विकास जैसे पहलुओं को जनता के समक्ष प्रमुखता से रखा जा रहा है। पार्टी की इस रणनीति का उद्देश्य मतदाताओं के बीच मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की छवि बनाना है।
झारखंड इन दिनों विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election 2024) के शोर में डूबा है। इस चुनाव में रोटी, बेटी, माटी की गूँज है। इसी गूँज के बीच 8 नवंबर और 15 नवंबर (जनजातीय गौरव दिवस) भी बीता है। 8 नवंबर वह तारीख है, जिसको लेकर माना जाता है कि आज के झारखंड में जनजातीय/आदिवासी समाज (Scheduled Tribes) का पहली बार ईसाई धर्मांतरण हुआ।
झारखंड में पहली बार कब-कैसे ST बने ईसाई?
1873 में खुंटपानी (Khuntpani/Khutpani) में 6 मुंडा परिवारों के 28 लोगों का कोलकाता से आए आर्क बिशप स्टांइस ने बपतिस्मा कराया था। खुंटपानी आज के झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला का हिस्सा है। यहाँ एक शिलापट्ट भी है, जिस पर उनलोगों के नाम दर्ज हैं जो पहली बार ईसाई बने। इसकी स्मृति में हर साल 8 नवंबर को यहाँ एक ‘तीर्थ मेला’ लगता है। इसमें झारखंड और आसपास के प्रदेशों के ईसाई धर्मांतरित लोगों का जमावड़ा ही नहीं लगता, बल्कि अच्छी-खासी संख्या में विदेशों से भी रोमन कैथोलिक धर्मावलंबी आते हैं।
संथाल परगना: पहले ईसाई धर्मांतरण, अब मुस्लिमों की घुसपैठ
खुंटपानी वैसे तो छोटानागपुर का हिस्सा है। लेकिन ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण कुचक्र से सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में झारखंड का संथाल परगना (Santhal Pargana) भी आता है। इतना प्रभावित कि इस क्षेत्र में ST से ईसाई बने लोगों का जन प्रतिनिधि चुना जाना सामान्य सी बात है।
आश्चर्यजनक तौर पर यह संथाल परगना इस समय बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ (Bangladeshi Rohingya Muslim infiltrators) से डेमोग्राफी बदलाव को लेकर चर्चित है। इस क्षेत्र से सरना (जनजातीय समाज का धार्मिक स्थल) विलुप्त हो रहे हैं, मस्जिद-मजार उग रहे हैं। जनजातीय समाज अपनी जमीन-रोजगार से लेकर बेटी तक गँवा रहे हैं, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक कई रैलियों में कर चुके हैं।
घुसपैठ रोकने और सरना कोड का वादा
इस विकट हालात को देखते हुए बीजेपी ने वादा किया है कि यदि प्रदेश में एनडीए की सरकार बनी तो वह घुसपैठ रोकने के साथ ही उन जमीनों को वापस लेने के लिए कानून बनाएगी, जिन पर घुसपैठियों का कब्जा है या फिर उन्होंने जालसाजी कर खरीदा है। घुसपैठ के अलावा इन चुनावों में ‘सरना धर्म कोड (Sarna Dharam Code/Sarna Religious Code)’ भी चर्चा में है।
क्या है सरना धर्म कोड?
भारत में इस समय 6 धार्मिक समुदायों को मान्यता देने वाला कानून है। ये हैं- हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन। घुसपैठ को नकारने वाला कॉन्ग्रेस-झामुमो गठबंधन ने सरना आदिवासी धर्म कोड का वादा किया है।
नवंबर 2020 में INDI गठबंधन की सरकार ने झारखंड विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया था। इसमें 2021 की जनगणना में ‘सरना’ को एक अलग धर्म के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था। सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए बीजेपी ने भी समर्थन किया था। इस प्रस्ताव के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर भी यह माँग दुहराई थी।
झारखंड चुनावों के लिए बीजेपी का संकल्प-पत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरना कोड पर विचार करने और उचित निर्णय लेने की बात कही थी। राज्य में बीजेपी के चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कई मौकों पर पार्टी की इस लाइन को दोहरा चुके हैं। वहीं असम के मुख्यमंत्री और चुनाव सह प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा तो यह भी कह चुके हैं सरकार बनने पर पार्टी सरना कोड लागू करेगी।
सरना कोड जनजातीय समाज को अलग धार्मिक समुदाय के तौर पर मान्यता देता है। बीजेपी ने सार्वजनिक तौर पर कभी इसका विरोध नहीं किया। लेकिन वह इसको लेकर कभी मुखर भी नहीं रही है। इन चुनावों में सरना कोड पर बीजेपी के सुर में जो नरमी दिख रही है, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सोच से भी उलट है। संघ जनजातीय समाज को हिंदू धर्म का हिस्सा मानता रहा है। वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठनों के जरिए जनजातीय क्षेत्रों में वह इसी सोच के साथ कार्य करता है। संघ के ही एक संगठन जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय (बिहार-झारखंड) संयोजक संदीप उरांव का कहना है कि सरना कोड लागू होने पर कई स्तरों पर समस्याएँ पैदा होंगी।
ईसाई धर्मांतरण के जिस कुचक्र में जनजातीय समाज फँसा हुआ है, उसका उपचार सरना कोड है भी नहीं। सन 1871 से लेकर 1951 तक की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड था। बावजूद ईसाई धर्मांतरण हो रहा था। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं झारखंड में यह सिलसिला 1873 में खुंटपानी से शुरू हो चुका था।
खुंटपानी की तरह ही मदकू द्वीप में भी लगता है मेला
खुंटपानी की तरह ही मदकू द्वीप (Madku Dweep) पर भी ईसाइयत का मेला लगता है। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले का यह द्वीप शिवनाथ नदी की जलधारा से घिरा है। इसी द्वीप पर माण्डूक्य ऋषि ने ‘मुण्डकोपनिषद्’ की रचना की जिससे ‘सत्यमेव जयते (Satyamev Jayate)’ निकला है।
इस द्वीप तक पहुँचना सरल नहीं है। सितंबर 2022 में नाव से नदी पार कर मैं यहाँ तक पहुँचा था। लेकिन जब इस निर्जन द्वीप पर क्रॉस वाला एक मंच देखा तो आश्चर्यचकित रह गया। पता चला कि हर साल फरवरी में इस द्वीप पर सबसे बड़ा जमावड़ा लगता है। यह जमावड़ा सप्ताह भर चलने वाले ‘मसीही मेला’ को लेकर लगता है। यह मेला साल 1909 से लग रहा है।
मदकू द्वीप का वह मंच जहाँ लगता है मसीही मेला
खुंटपानी जैसी ही है खड़कोना की भी कहानी
छत्तीसगढ़ का जशपुर ईसाई धर्मांतरण का बड़ा केंद्र है। इसी जिले के कुनकुरी में इस देश का सबसे बड़ा चर्च है। यहाँ भी जनजातीय समाज के लोगों को ईसाई बनाने का सिलसिला तभी शुरू हो गया था, जब अंग्रेजों ने सरना को अलग से मान्यता दे रखी थी।
1906 में कोरकोटोली और खड़कोना में ईसाई बनने वाले शुरुआती लोगों की याद में लगा शिलापट्ट
जशपुर जिले के मनेरा ब्लॉक में एक गाँव है- खड़कोना। इस गाँव में प्रवेश करते ही आपको क्रूस चौक मिलता है। चर्च के पास एक शिलापट्ट पर उन 56 लोगों के नाम अंकित हैं, जिनका 21 नवंबर 1906 को बपतिस्मा हुआ था। इसी गाँव में मैंने ‘साहेब कोना’ भी देखा है, जहाँ धर्मांतरित हिंदुओं का सालाना आयोजन होता है।
ईसाई धर्मांतरण का जमीन पर कितना भयावह असर हो सकता है, यह जानने-समझने में यदि आपकी दिलचस्पी हो तो आपको जशपुर की यात्रा करनी चाहिए। खड़कोना तक जाना चाहिए। सरकारी कागजों के हिसाब से इस जिले का हर चौथा व्यक्ति ईसाई है। डेमोग्राफी में यह बदलाव तब भी आ चुका है जब इस जिले में आज भी एक ऐसे राजपरिवार (दिलीप सिंह जूदेव का परिवार) का व्यापक प्रभाव है जो शुरुआत से ही ईसाई मिशनरियों की साजिशों से लड़ता रहा है। इस राजपरिवार की पहचान चरण पखार कर धर्मांतरित हिंदुओं खासकर जनजातीय समाज के लोगों की घर वापसी कराने को लेकर है।
सरना हासिल करने की एक लड़ाई क्लेमेंट लकड़ा की भी
सरना कोड पर 24 साल पुराने झारखंड में जारी राजनीतिक लड़ाई से भी पुरानी (30+ साल) सरना हासिल करने की लड़ाई 58 साल के क्लेमेंट लकड़ा की है। 2022 की एक शाम मैं जब क्लेमेंट से मिलने उनके घर पहुँचा था तो उन्होंने कहा था;
मेरे पिता को ठगा गया। बेवकूफ बनाया गया। इस बात को मैंने जिस दिन समझा उसी दिन मेरा मन इससे (ईसाई) उचट गया। मैंने प्रण किया है कि जिस सरना को इन्होंने (कैथोलिक संस्था) अपवित्र किया, वह इनसे वापस लूँगा और वहीं अपने पुरखों के धर्म में लौटूँगा। देखता हूँ आखिर कब तक इनसे लड़ पाता हूँ।
दो बेटियों के पिता क्लेमेंट अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ की कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र के दुलदुला में रहते हैं। उनकी पत्नी सुषमा लकड़ा दुलदुला की सरपंच हैं। उनके घर की दीवारों पर लगी तस्वीरें बताती हैं कि यह परिवार धर्मांतरित होकर ईसाई बन चुका है। लेकिन घर के कोने में एक टेबल पर पड़ी दस्तावेजों में वह दर्द अंकित है, जिसे धर्मांतरण के बाद इस परिवार ने भोगा है।
क्लेमेंट की करीब 10 एकड़ जमीन पर कैथोलिक संस्था का कब्जा है। इस जमीन पर चर्च है। स्कूल है। फादर और नन के रहने के लिए घर बने हुए हैं। खाली पड़ी जमीनों पर संस्था के ही लोग खेती करते हैं। यह जमीन क्लेमेंट के पिता भादे उर्फ वशील उरांव ने ईसाई बनने के बदले खोई थी।
ईसाई संस्था से कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी क्लेमेंट उस जमीन पर लौट नहीं पा रहे हैं। उलटे कैथोलिक संस्था के अधिकारी और उनके साथी उनके परिवार को प्रताड़ित करते हैं। दुलदुला पंचायत के विकास कार्यों में रोड़ा अटकाया जाता है। उनकी पत्नी से कहा जाता है कि अपने पति से केस वापस लेने के लिए कहो। ऐसी ही एक घटना का जिक्र करते हुए क्लेमेंट ने ऑपइंडिया को बताया था, “फरवरी 2022 में चर्च में एक मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में मुझसे कहा गया कि यदि केस वापस नहीं लोगे तो तुम्हें समाज से बाहर कर देंगे। फिर तुम्हारी बेटियों से कौन शादी करेगा।”
आपदा में भी अवसर तलाश लेते हैं ईसाई मिशनरी
एक संस्था है- अनफोल्डिंग वर्ल्ड। बाइबिल का हर भाषा में अनुवाद करने के मिशन पर काम कर रही है। इसके CEO डेविड रीव्स ने 2021 में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने बताया था कि कोविड काल में करीब 1 लाख लोगों को ईसाई बनाया गया। हर चर्च को 10 गाँवों में प्रार्थना आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। महामारी के दौरान जब लोगों का मिलना-जुलना नहीं था तो फोन और व्हाट्सएप्प से उन तक प्रार्थनाएँ पहुँचाई गईं।
रीव्स के अनुसार भारत में 25 साल में जितने चर्च बने थे, उतने अकेले कोरोना काल में बनाए गए। ऐसा ही एक चर्च मैंने जशपुर के गिरांग में वन विभाग की जमीन पर देखा था। यह चर्च उस जगह पर बनाई जा रही थी, जहाँ जाने के लिए रास्ता तक नहीं था। विरोध के बाद इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। 2022 में जब मैं यहाँ पहुँचा था तो यह बंद पड़ा था। भाजयुमो से जुड़े अभिषेक गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया था, “ईसाई मिशनरी इसी तरह लैंड जिहाद करती है। जहाँ खाली जगह दिखी ये क्रॉस गाड़ देते हैं। चर्च बना लेते हैं। कुछ समय बाद प्रशासनिक मिलीभगत से वहाँ जाने का रास्ता तैयार हो जाता है और फिर प्रार्थना होने लगती है। बाद में आप जितना विरोध कर लें प्रशासन कब्जा नहीं हटाता।”
कोरोना काल के दौरान गिरांग में हो रहे इस चर्च का निर्माण विरोध के बाद रोकना पड़ा था
जोशुआ प्रोजेक्ट पर अंकुश लगा पाएगा सरना कोड?
अमेरिका से संचालित एक संगठन है- जोशुआ प्रोजेक्ट। 1995 में शुरू हुए इस संगठन का कहना है कि वह बाइबल में दिए गए उस निर्देश पर काम करता है, जिसमें विश्व के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को ईसाइयत का अनुयायी बना कर उनका बपतिस्मा कराने का आदेश मिला है।
एक रिपोर्ट के अनुसार यह संगठन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में जनजातीय लोगों को धर्मांतरित कर उनकी जमीन पर चर्च बना रहा है। 2011-12 में इन चारों राज्यों में लगभग 12,000 चर्च थे जो अब बढ़कर 25,000 को पार कर चुके हैं। यह सब उन इलाकों में हो रहा है जहाँ बाहरी व्यक्ति जमीन तक नहीं ले सकते, लेकिन मिशनरियाँ लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रही हैं।
जनजातीय लोगों को ईसाइयत में लाने के बाद सरना (वह पेड़ जो उनके लिए पवित्र है) काटने को कहा जाता है। ईसाई धर्मांतरण का जोर ऐसा है कि पूरे के पूरे गाँव धर्मांतरित हो चुके हैं। कुछ गाँवों में नाम मात्र के हिन्दू परिवार बचे हैं। जिन गाँवों में ईसाई मिशनरी अपने काम में सफल हो रही हैं, उनके बाहर क्रॉस लगा दिया गया है।
जोशुआ प्रोजेक्ट केवल जनजातीय समूह तक ही नहीं सिमटा हुआ है। भारत की अलग-अलग जातियों और जनजातीय समूहों के आँकड़े इकट्ठा किए हैं। जोशुआ प्रोजेक्ट के पास देश की 2272 जातियों-जनजातियों के आँकड़े हैं। जोशुआ प्रोजेक्ट बताता है कि वह इनमें से अभी 2041 जातियों तक नहीं पहुँच सका है। वहीं 103 जातियों में ईसाइयत का प्रभाव डालने में यह सफल रहा है। इनमें एक छोटी संख्या में लोग ईसाइयत को मानने लगे हैं। वहीं 128 जाति समूह ऐसे हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर ईसाइयत की घुसपैठ हो गई है।
जिस गाँव में बड़ी आबादी ईसाई हो जाती है, वहाँ ऐसा ही निशान लगा दिया जाता है
जोशुआ प्रोजेक्ट का डाटा बताता है कि उसने कई जातियों में 10%-100% तक ईसाइयत में धर्मांतरण करवाया है। जिन जातियों में बड़ी संख्या में ईसाइयत में धर्मांतरण हुआ है, उनको अलग नाम दे दिया गया है। तेलंगाना के मडिगा और माला समुदाय में 21000 की आबादी को ईसाइयत में बदल कर उसे ‘आदि क्रिश्चियन’ का नाम दिया गया है। बोडो समुदाय की 15.7 लाख आबादी में से लगभग 1.5 लाख आबादी को ईसाइयत में लाया गया गया है।
‘रोटी-बेटी-माटी’ पर झारखंड के चुनावों को केंद्रित कर बीजेपी ने घुसपैठियों और ईसाई मिशनरियों के उस दोहरे कुचक्र को चर्चा में अवश्य ला दिया है, जिसमें जनजातीय समाज फँसा हुआ है। उन वैध-अवैध तरीकों पर बात हो रही है, जिसके तहत गाँव-गाँव में चर्च का फैलाव हो रहा है। ईसाई बनने के कारण जनजातीय समाज आरक्षण के लाभ से वंचित न हो जाए, इसलिए उन्हें ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’ बनाया जा रहा है।
कन्याकुमारी के कैथोलिक पादरी जॉर्ज पोन्नैया से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने भी इस ओर ध्यान खींचा था। कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने संकेत दिया था कि तमिलनाडु का यह जिला ईसाई बहुल आबादी में तब्दील हो चुका है। जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा था;
धार्मिक तौर पर कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव देखा गया है। 1980 के बाद से जिले में हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे। हालाँकि 2011 की जनगणना बताती है कि 48.5 फीसदी आबादी के साथ हिंदू सबसे बड़े धार्मिक समूह हैं। पर यह जमीनी हकीकत से अलग हो सकती है। इस पर गौर किया जाना चाहिए कि बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ पाने के लिए खुद को हिंदू बताते रहते हैं।
जाहिर है कि यह कुचक्र नया नहीं है। इसकी जड़ें केवल झारखंड तक सीमित नहीं हैं। केवल जनजातीय समाज ही इसकी चपेट में नहीं है। केवल धर्मांतरण विरोधी सख्त कानूनों से ही इसे नहीं रोका जा सकता है। कुछ दल, संगठन और परिवारों को ईसाई मिशनरियों से लड़ने की ठेकेदारी देकर हिंदू समाज सोया नहीं रह सकता है।
इस दलदल से हिंदुओं को निकालने के लिए राजनीतिक-प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ जरूरी है कि हर हिंदू भी अपने आसपास जनसांख्यिकी में हो रहे इस बदलाव को लेकर सचेत और मुखर हो। दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में न तो राजनीति ने ऐसी इच्छाशक्ति दिखाई है और न हिंदुओं ने एक समूह के तौर पर उन्हें ऐसा करने को मजबूर किया है। यही कारण है कि राजनीतिक दाल अलग सरना धार्मिक पहचान को हवा देकर हिंदुओं को बाँटने और ईसाई मिशनरियों को खाद-पानी देने का काम करते रहे हैं।
झारखंड विधानसभा में जब जनगणना में सरना को अलग धार्मिक पहचान देने का प्रस्ताव लाया गया था तो बीजेपी ने भी इस तरह की आशंका जताई थी। अब उसे उन उपायों पर गौर करना चाहिए जो मिशनरियों का सदा-सदा के लिए बधिया कर सके। उसे इस मसले पर भी उतनी ही आक्रामकता दिखानी चाहिए जितनी घुसपैठ पर है। इस मामले में जगह/काल/परिस्थिति के हिसाब से राजनीति उन हिंदुओं को जनसांख्यिकी के स्तर पर और कमजोर करेगी, जिनके दम पर ‘अखंड भारत’ का स्वप्न बुना जा रहा है।
दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को गहरा झटका लगा है। दिल्ली सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत ने पार्टी से त्याग-पत्र दे दिया है। कैलाश गहलोत के पास दिल्ली सरकार में गृह, प्रशासनिक सुधार, महिला एवं बाल विकास, परिवहन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी की बड़ी जिम्मेदारी रही है। कैलाश ने अरविंद केजरीवाल को लिखी चिट्ठी X पर भी शेयर की है।
इस चिट्ठी में कैलाश में आरोप लगाया है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनता को किए गए अपने वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने यमुना की सफाई में नाकामी, अरविंद केजरीवाल के बंगले का निर्माण सहित कई मुद्दों को उठाया है और कहा कि इन सब अजीबो-गरीब मुद्दों के कारण AAP की जनता में छवि खराब हुई है और पार्टी बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है।
अपने पत्र में गहलोत ने लिखा है, “पार्टी आज गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। मूल्यों की भी चुनौतियाँ हैं, जो हम साथ लेकर चले थे। राजनीतिक महत्वाकांक्षी ने लोगों के प्रति प्रतिबद्धता को पीछे छोड़ दिया है और कई वादे अधूरे रह गए हैं। इसमें यमुना का उदाहरण है, जिसे हमने स्वच्छ नदी बनाने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं कर पाए। यमुना अब पहले से भी अधिक प्रदूषित हो गई है।”
अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, इन सबके अलावा शीशमहल जैसे अजीबो-गरीब और शर्मिंदा करने वाले विवाद सामने आए। इसके कारण अब हर कोई इस बात पर आशंका करने लगा है कि क्या हम आज भी ‘आम आदमी’ में विश्वास रखते हैं। अब लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय हम लोग अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए लड़ रहे हैं।”
दिल्ली के लोगों को किए गए वादों को पूरा करने में नाकामी के साथ केंद्र से लड़ाई को लेकर गहलोत ने कहा, “इन सब कारणों ने दिल्ली के लोगों के लोगों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की हमारी क्षमता को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। अब यह निश्चित है कि दिल्ली का वास्तविक विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक वह अपना अधिकांश समय केंद्र के साथ लड़ाई में व्यतीत करती है।”
अपने राजनीतिक जीवन और अंत में इस्तीफे को लेकर लेकर जाट परिवार में जन्मे कैलाश गहलोत ने आगे लिखा, “मैंने अपना राजनीतिक जीवन दिल्ली के लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए शुरू किया था। मेरे पास आम आदमी पार्टी से अलग होने के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है और इसलिए मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।”
बता दें कि पिछले कुछ महीने में दिल्ली सरकार के 2 मंत्रियों और 2 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। इससे पहले स्वाति मालीवाल ने भी बागी रुख अपना लिया है। माना जा रहा है कि दिल्ली के नजफगढ़ से भाजपा उम्मीदवार को हराकर विधायक बने कैलाश गहलोत जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। बता दें कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव फरवरी 2025 में प्रस्तावित है।
भारत की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पिछले कुछ महीनों में ड्रग्स के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसका नाम ‘ऑपरेशन सागर मंथन’ रखा गया है। इस ऑपरेशन का मकसद पाकिस्तान में स्थित कुख्यात ड्रग्स तस्कर हाजी सलीम, जिसे ‘ड्रग्स का सरगना’ या ‘रक्तबीज’ भी कहा जाता है, के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करना है। हाजी सलीम का नाम सबसे पहले 2015 में तब सुर्खियों में आया था, जब केरल के पास समुद्र में उसकी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी।
हाजी सलीम का पूरा साम्राज्य पाकिस्तान के बलूचिस्तान से संचालित होता है और यह तस्करी नेटवर्क पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मॉरीशस, मालदीव्स से लेकर अमेरिका तक फैला हुआ है। उसके ड्रग्स तस्करी के साम्राज्य का फैलाव इतना बड़ा है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और अफगानिस्तान जैसे देशों की जाँच एजेंसियाँ भी उसे पकड़ने की कोशिश में हैं।
हाजी सलीम बड़े पैमाने पर हेरोइन, मेथामफेटामाइन और अन्य अवैध नशीले पदार्थों की खेप एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी देशों में पहुँचाता है। भारतीय जाँच एजेंसियों के अनुसार, वह समुद्री मार्ग से अपनी तस्करी करता है और उसकी खेपों पर विशेष निशान जैसे 777, 555, 999, उड़ते घोड़े और बिच्छू अंकित होते हैं।
इस ऑपरेशन के दौरान हाल ही में गुजरात तट से 4,000 किलोग्राम अवैध ड्रग्स जब्त किए गए, जिसमें कई पाकिस्तानी और ईरानी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया। भारत के गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर यह अभियान शुरू किया गया है, जिससे NCB ने पिछले ढाई वर्षों में कुल 40,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की हैं।
हाजी सलीम के बारे में जानकारी सीमित है। जाँच एजेंसियों के पास उसकी एक पुरानी तस्वीर और कुछ व्यक्तिगत विवरण हैं। माना जाता है कि वह कराची में रहता है, और उसकी गतिविधियां वहाँ से संचालित होती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सलीम का संबंध कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से भी है। कुछ समय पहले उसे दाऊद के घर में जाते और बाहर आते हुए कैमरे में कैद किया गया था।
सलीम का नेटवर्क केवल ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गतिविधियाँ नार्को-आतंकवाद को भी बढ़ावा देती हैं। जाँच एजेंसियों ने बताया कि वह बेरोजगार युवाओं को अपने तस्करी नेटवर्क में शामिल करता है और आईएसआई से उसे समर्थन मिलता है। सलीम के पास सैटेलाइट फोन जैसी सुविधाएँ हैं, जिनका उपयोग वह समुद्र में अपने एजेंट्स से संपर्क बनाए रखने के लिए करता है।
NCB के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, ज्ञानेश्वर सिंह के अनुसार, “हाजी सलीम दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करों में से एक है। उसके तस्करी नेटवर्क का पैमाना अद्वितीय है।” उसकी पहचान ‘रक्तबीज’ के रूप में इसलिए हुई है क्योंकि उसके ऑपरेशन पर कितनी भी बार प्रहार किया जाए, वह फिर से अपने तस्करी नेटवर्क को सक्रिय कर लेता है।
उसके तस्करी के मुख्य मार्ग ईरान से शुरू होते हैं, जो अफगानिस्तान और मलेशिया से होते हुए श्रीलंका पहुँचते हैं। वहाँ से छोटे जहाजों के जरिए रात में भारतीय तटों पर लाया जाता है, जहाँ वे कम चर्चित बंदरगाहों और तटीय स्थानों पर उतरते हैं।
हाजी सलीम की तस्करी गतिविधियों का पहला बड़ा सबूत 2015 में मिला था जब केरल तट के पास उसकी करोड़ों की ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी। तब से NCB ने उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी हुई है, लेकिन वह अब तक गिरफ्त से बाहर है और कराची में छिपा हुआ है।
हिंदुओं और भाजपा से दिल की गहराई घृणा करने वाली फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर अपने शौहर फहद अहमद के साथ मौलाना सज्जाद नोमानी की। फहद ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा कीं। नोमानी वही मौलाना हैं, जो हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं और भाजपा को वोट देने वालों का हुक्का-पानी बंद करने की धमकी दी है।
मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह मुस्लिम समुदाय से कह रहे हैं, “जो बीजेपी का साथ दे, ऐसे लोगों का हुक्का-पानी बंद होना चाहिए।” इसको लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है और कार्रवाई की माँग की है। इसको लेकर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कॉन्ग्रेस सहित विपक्षी दलों पर निशाना साधा है।
जनाब हज़रत मौलाना सज्जाद नौमानी साहब की ख़िदमत में हाज़िर हुए और उन्होंने हमे खूब दुआओं से नवाज़ा pic.twitter.com/5P7S3OIaJj
विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “क्या शरद पवार को शर्म आती है या उन्हें हिंदुओं के बारे में बोलने में डर लगता है? मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी जैसा बयान कोई नहीं देता कि अगर कोई हिंदू बीजेपी के खिलाफ वोट करता है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर उसका नाम अब्दुल रहमान रख दो। हिंदुत्व में इस तरह की भाषा नहीं है।”
किरीट सोमैया ने आगे कहा, “शरद पवार ने ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड और मराठी मुस्लिम सेवा संघ को समर्थन दिया है। शरद पवार ने वोट जिहाद जैसी बातें फैलाई हैं। राहुल गाँधी, सलमान खुर्शीद के परिवार ने वोट जिहाद फैलाया है। इन लोगों को शर्म आनी चाहिए।” किरीट सोमैया ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलउर रहमान सज्जाद नोमानी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
#WATCH | Mumbai: BJP leader Kirit Somaiya says, "…Does Sharad Pawar feel ashamed or is he scared to speak about Hindus?…No one makes statements like Maulana Khalilur Rahman Sajjad Nomani, that if any Hindu votes against the BJP, then socially boycott them and name them Abdul… pic.twitter.com/9YBRP0WT7R
पिछले साल अप्रैल 2023 में नोमानी ने मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा था कि रमजान के वक्त लड़कियों को स्कूल/कॉलेज अकेले नहीं भेजना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना इस्लाम में हराम है। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें वो मुस्लिम अभिभावकों को भड़काते हुए नजर आते हैं।
वीडियो में नोमानी कहते नजर आते हैं, “अपनी बच्चियों को हिजाब पहनने के बाद भी अकेले स्कूल-कॉलेज मत भेजो। ये हराम है, हराम। पाक रमजान की रात में उन लोगों पर लानत भेजता हूँ, जो अपनी बच्चियों को अकेले कोचिंग सेंटर या स्कूल-कॉलेज भेजते हैं। अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा।”
वह पूछते हैं, “क्या उन्हें (लड़कियों के अम्मी-अब्बू को) पता है उनकी बेटी स्कूल-कॉलेज जाकर पीरियड अटेंड करती है या नहीं या फिर कॉलेज में आकर चुपके से कहीं चली जाती है। आप अगर बाप हैं। आप अगर मुसलमान हैं। अगर आप शरीफ इंसान हैं और हलाल बाप के रुतबे से पैदा हुए हैं तो ये हराम है कि आप अपनी बच्चियों की तरह से बेफिक्र हों।”
हिंदू लड़कों पर लगाया था लव जिहाद का आरोप
सितंबर 2021 में नोमानी का एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वह हिंदू लड़कों पर लव जिहाद का आरोप लगाया था। अल कमल टीवी पर अपलोड की गई इस वीडियो में नोमानी ने दावा किया था कि 5,000 मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू लड़कों के साथ भागकर शादी की और हिंदू बन गईं। नोमानी के मुताबिक, ये लड़कियाँ हाई प्रोफाइल परिवारों से थीं।
सज्जाद नोमानी ने कहा था, “मुस्लिम महिलाओं को हिंदू धर्म की ओर लुभाने के लिए सुनियोजित साजिश के तहत ये सब किया जा रहा है। दूसरी तरफ (हिंदू धर्म के लोगों की ओर) से ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं को लुभाने, उनके मजहब को बर्बाद करने और उनको इस्तेमाल के बाद छोड़ने की साजिश चल रही है। ये सब प्लान के तहत हो रहा है।”
उन्होंने दावा किया था, “मुझे सूत्रों से पता चला है कि एक ग्रुप है जो लड़कों को ट्रेनिंग देता है कि मुस्लिमों से कैसे बात करें। वह उन्हें सलाम वालेकुम बोलना सिखाते हैं। पूछते हैं- कैसे मिजाज हैं। उन्हें ‘खैरियत है’, ‘इंशाल्लाह’ ‘माशाल्लाह’ ‘रहमुदिल्लाह’, ‘सुभानअल्लाह’ और अन्य शब्द कहना सिखाते हैं। वे हमारी बच्चियों से नर्म जुबान में बात करते हैं, ताकि फँसा सकें।”
नोमानी ने दावा किया था कि मोबाइल फोन और स्कूल-कॉलेज में दी जा रही तालीम के कारण ऐसा होता है। उनके मुताबिक, लड़कियों को ऐसी स्वतंत्रता दी जाती है कि वे दूसरे समुदाय के लोगों से दोस्ती करें। नोमानी कहते हैं कि माता-पिता अपनी लड़कियों को इस्लाम का तालीम नहीं देते और न ही जानते हैं कि उनके इर्द-गिर्द क्या हो रहा है।
तालिबान को भेजा था सलाम
इसके अलावा साल 2021 में तालिबान ने जब अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तब सज्जाद नोमानी ने भारत में इसका स्वागत किया था। मौलाना सज्जाद नोमानी ने ‘तालिबान के हौसले’ को सलाम करते हुए कहा था कि तालिबान ने दुनिया की सबसे मजबूत फौज को शिकस्त दे दी है।
AIMPLB प्रवक्ता नोमानी ने कहा था, “एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है। एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को शिकस्त दी है। काबुल के महल में वे दाखिल होने में कामयाब रहे। उनके दाखिले का अंदाज पूरी दुनिया ने देखा। उनमें कोई गुरूर और घमंड नहीं था।”
मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान की तारीफों के पुल बाँधते हुए कहा था, “उनके कोई बड़े बोल नहीं थे। ये नौजवान काबुल की सरजमीं को चूम रहे हैं। मुबारक हो। आपको दूर बैठा हुआ यह हिंदी मुसलमान सलाम करता है। आपके हौसले को सलाम करता है। आपके जज्बे को सलाम करता है।”
मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा कस्बे में शनिवार (16 नवंबर 2024) की शाम को उग्र इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के घरों पर हमला कर दिया। यह हमला उस समय हुआ जब पूरे राज्य में हिंदू समुदाय कार्तिक पूजा मना रहा था। भीड़ ने हिंदुओं पर ‘ईशनिंदा’ करने का आरोप लगाकर आगजनी और पत्थरबाजी शुरू कर दी।
भाजपा के प्रवक्ता अमित मालवीय द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक हिंदू व्यक्ति ने बताया, “पुलिस की मौजूदगी के बावजूद, देखें कैसे हिंदू घरों को जलाया जा रहा है। चारों ओर पत्थर बिखरे हुए हैं। एक कार को भी आग लगा दी गई।”
अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “कार्तिक पूजा के दिन, मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में मुसलमानों ने हिंदू घरों पर हमला किया। ममता बनर्जी की पुलिस मूक दर्शक बनी रही।”
On the day of Kartik Puja, Muslims attack Hindu houses in Murshidabad’s Beldanga. Mamata Banerjee’s police remains a mute spectator.
West Bengal has become a graveyard for Hindus. Every festival and puja of their’s is attacked, while Mamata Banerjee looks the other way.
भाजपा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बेलडांगा में हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेश जैसे ‘सफाए’ की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बमबारी और हिंदू महिलाओं को दी जा रही जान से मारने की धमकियों का भी उल्लेख किया।
সাম্প্রদায়িক মুখ্যমন্ত্রীর নির্লজ্জ তোষণের রাজত্বে গভীর রাতেও জ্বলছে মুর্শিদাবাদের বেলডাঙা। বাংলাদেশের কায়দায় চলছে হিন্দুনিধন যজ্ঞ! দিকে দিকে নিরীহ হিন্দুদের বেছে বেছে মারধর, বাড়িতে বাড়িতে অগ্নিসংযোগ, বোমাবাজি চলছে। এমনকি বাড়িতে বলপূর্বক ঢুকে নিরীহ মহিলাদেরও দেওয়া হচ্ছে… pic.twitter.com/T3ikjhnHc2
इस बीच, मजहबी टोपी पहने एक इस्लामिक कट्टरपंथी ने वीडियो जारी कर हिंदुओं को धमकियाँ दीं और मुस्लिमों को बेलडांगा में दंगे करने के लिए बुलाया। उसने कहा, “मैं अपने सभी मुस्लिम भाइयों को बताना चाहता हूँ कि बेलडांगा के एक कार्तिक पूजा पंडाल में अल्लाह का अपमान किया गया। मैं अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करता हूँ कि बेलडांगा की जमीन हिलनी चाहिए।”
उस व्यक्ति ने कहा, “जिसने यह किया है, उसे खत्म करना जरूरी है। हिंदुस्तान को यह संदेश मिलना चाहिए कि अल्लाह और पैगंबर का अपमान करने के बाद क्या होता है।” उसने अपने समुदाय के लोगों से हिंसा फैलाने और आरोपी को सजा देने की अपील की, जिसमें न्यायिक प्रणाली को छोड़कर मॉब लिंचिंग का आह्वान किया। उसने अपने हिंदुओं को ‘हमें सौंप दो’ कहकर भीड़ को उकसाया, ताकि इस्लामी भीड़ उनकी मॉब लिंचिंग की जा सके।
मणिपुर में लापता 6 लोगों की लाश मिलने के बाद राज्य में हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया और तीन मंत्रियों एवं छह विधायकों के घरों पर हमला करके आग लगा दी गई। इसके बाद हिंसा प्रभावित छह पुलिस थानों में केंद्र सरकार ने ‘सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA)’ को फिर से लागू कर दिया है। शनिवार को इसकी समीक्षा करने और उसे हटाने का अनुरोध किया गया है।
केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (गृह) को एक पत्र में कहा गया है, “राज्य मंत्रिमंडल ने 15 नवंबर को हुई बैठक में इस (AFSPA को फिर से लागू करने) पर विचार-विमर्श किया है और केंद्र सरकार को इसकी समीक्षा करने और इसे वापस लेने की सिफारिश की है।” राज्य के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA 1958 की धारा 3 के तहत अशांत क्षेत्र घोषित की गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 नवंबर 2024 को राजधानी इंफाल के पश्चिम जिले सेकमाई पीएस एवं लामसांग पीएस, इंफाल पूर्व में लामलाई, बिष्णुपुर में मोइरांग, कांगपोकपी में लीमाखोंग और जिरीबाम जिले के जिरीबाम पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू कर दिया था। सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA) विशेष शक्तियों वाला प्रावधान है।
बता दें कि 11 नवंबर को मणिपुर कुकी उग्रवादियों जिरीबाम जिले के बोरोबेकरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया था। इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने 11 कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था। इस हमले के बाद तीन महिलाएँ और तीन बच्चे लापता हो गए थे। माना जाता है कि कुकी उग्रवादियों ने इनका अपहरण किया था। अब इनकी लाश मिली है।
क्या है AFSPA?
सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को केवल अशांत क्षेत्रों में ही लागू किया जाता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने लगा तो यहाँ भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया था। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।
यह किसी भी राज्य या किसी भी क्षेत्र में तभी लागू किया जाता है, जब राज्य या केंद्र सरकार उस क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ अर्थात डिस्टर्बड एरिया एक्ट (Disturbed Area Act) घोषित करती है। इस कानून के लागू होने के बाद ही वहाँ सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं। कानून के लगते ही सेना या सशस्त्र बल को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है।
अंग्रेजों के कानून को नेहरू सरकार ने भी जारी रखा
इस एक्ट को सबसे पहले अंग्रेजों के जमाने में लागू किया गया था। उस वक्त ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य बलों को विशेष अधिकार दिए थे। आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने भी इस कानून को जारी रखने का फैसला लिया। फिर वर्ष 1958 में एक अध्यादेश के जरिए AFSPA को लाया गया और तीन महीने बाद ही अध्यादेश को संसद की स्वीकृति मिल गई। इसके बाद 11 सितंबर 1958 को AFSPA एक कानून के रूप में लागू हो गया।
कानून को लागू करने के पीछे का तर्क
इस कानून को लागू करने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि इसे उन इलाकों में लागू किया जाता है, जिनमें उग्रवादी गतिविधियाँ होती रहती हैं। भारत और म्यांमार की सीमा के दोनों तरफ कई अलगाववादी विद्रोही संगठनों के ठिकाने हैं। नागालैंड के अलावा मणिपुर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सक्रिय है, जो सेना पर हमले करती रहती है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी अलगाववादी संगठन सक्रिय है। इन संगठनों से निपटने और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना को अफस्पा के तहत विशेष अधिकार दिए गए।
इन राज्यों में लागू रहा AFSPA कानून
AFSPA को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में लागू किया गया था। हालाँकि, समय-समय पर परिस्थितियों को देखते हुए हटा भी दिया जाता है। नागालैंड, असम और मणिपुर में साल 2022 में AFSPA के दायरे को कम कर दिया गया था।
मणिपुर में अफस्फा के खिलाफ इरोम चानू शर्मिला ने 16 साल तक अनशन किया था। नवंबर 2000 में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला के सामने एक बस स्टैंड के पास दस लोगों को सैन्य बलों ने गोली मार दी थी। इस घटना का विरोध करते हुए उस वक्त 29 वर्षीय इरोम ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, जो 16 साल तक चली।
महाराष्ट्र के अमरावती में भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद नवनीत राणा की रैली में उन पर हमला कर दिया गया। हालाँकि, इस हमले में वह बाल-बाल बचीं। नवनीत जब भाषण दे रही थीं तब उन्हें गंदे इशारे किए गए और ‘अल्लाह हू अकबर’ के आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसके बाद भीड़ ने उन्हें गालियाँ देते हुए उन पर कुर्सी से हमला शुरू कर दिया। इस मामले में पुलिस अज्ञात लोगों के मामला दर्ज कर लिया है।
दरअसल, नवनीत राणा अपने पति रवि राणा की ‘युवा स्वाभिमान पार्टी’ के दरियापुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार रमेश बुंडिले के समर्थन में रैली करने पहुँची थीं। यह रैली खल्लार गाँव में आयोजित की गई थी। घटना के बाद नवनीत राणा खल्लार पुलिस स्टेशन पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। पुलिस ने लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच ग्रामीण अमरावती किरण वानखेड़े का कहना है, “बीजेपी नेता नवनीत राणा कल खल्लार गाँव में दरियापुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार रमेश बुंदिले के लिए प्रचार करने आए थे…रैली के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। हमने नवनीत राणा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है।” रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
#WATCH | Amravati: Inspector Crime Branch Rural Amravati, Kiran Wankhade says, "BJP leader Navneet Rana came to Khallar village yesterday, to campaign for the BJP candidate from the Daryapur Assembly constituency, Ramesh Bundile…During the rally, a dispute broke out between two… pic.twitter.com/RCrVQI2PQz
नवनीत राणा ने कहा, “खल्लार में शांतिपूर्वक तरीके से प्रचार चल रहा था। जब मैं भाषण दे रही थी तो कुछ लोग दूर से इशारे और हूटिंग कर रहे थे। मैं अपना भाषण खत्म करने की कोशिश कर रही थी। जब मैं भाषण खत्म करके नीचे आई तब भी मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी बीच मुझे और मेरे कार्यकर्ताओं को देखकर उन लोगों ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए।”
पूर्व सांसद ने आगे कहा, “जब हमारे लोगों ने उनसे (उपद्रवियों से) कहा कि आप लोग भाभी के लिए अपशब्द ना कहें, हम जाने वाले हैं। इसके बाद वे कुर्सियाँ फेंकने लगे और मारना शुरू कर दिया। वे मुझे गाली देने लगे, मेरे ऊपर कुर्सी फेंकने लगे। इस दौरान मेरे ऊपर थूका। मेरी जाति को लेकर गाली दी। अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए। मेरे 6 अंगरक्षक और मेरे निजी सचिव मुझे घेरकर बाहर ले गये।”
बता दें कि 11 अक्टूबर को पूर्व सांसद नवनीत राणा को एक चिट्ठी भेजकर धमकी दी गई थी। इस चिट्ठी में उनसे 10 करोड़ रुपए की माँग की गई थी। इतना ही नहीं आमिर नाम से भेजे गई इस चिट्ठी में नवनीत को गैंगरेप की धमकी दी गई थी। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि उनके घर के सामने गाय काटा जाएगी। आमिर ने चिट्ठी में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ भी लिखा था।
स्पीड पोस्ट से भेजी गई इस चिट्ठी में नवनीत के लिए चिट्ठी में बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही उनके पति रवि राणा के लिए भी अभद्र बातें लिखी गई थीं। यह पत्र नवनीत राणा के आवास पर एक कर्मचारी को मिला था। इसके बाद नवनीत राणा के निजी सचिव विनोद गुहे ने अमरावती के राजापेठ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
बता दें कि नवनीत राणा फिल्म अभिनेत्री से राजनेता बनी हैं। उन्होंने हिंदी, तेलुगु, कन्नड, मलयालम और पंजाबी फिल्मों में काम किया है। साल 2014 में वह एनसीपी की टिकट पर पहली बार अमरावती से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सकीं। साल 2019 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद अडसुल को हराकर लोकसभा सांसद बनीं। नवनीत काफी मुखर वक्ता मानी जाती हैं।
दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया है कि झारखंड में अल-कायदा प्रेरित आतंकी मॉड्यूल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के माध्यम से जिहाद के लिए धन इकट्ठा करने की योजना बनाई थी। अगस्त में 11 लोगों की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने यह दावा किया। जाँच में पता चला कि इनमें से दो आरोपित इस योजना के लाभार्थी थे और इन्होंने आतंकवादी गतिविधियों के लिए हथियार खरीदने के लिए पैसा दिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 अगस्त 2024 को हुई इस गिरफ्तारी के लिए पुलिस को केंद्रीय एजेंसियों से जानकारी मिली थी कि झारखंड आधारित एक आतंकी समूह और दिल्ली में उनके समर्थक आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार लोगों में अनीमुल अंसारी, शाहबाज अंसारी, अल्ताफ अंसारी, हसन अंसारी, अरशद खान, और उमर फारूक शामिल हैं, जिन्हें राजस्थान के भीवाड़ी में हथियार प्रशिक्षण लेते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने मौके से एक असॉल्ट राइफल, पिस्तौल, रिवॉल्वर, 66 जीवित कारतूस, एक हैंड ग्रेनेड, बैटरी के साथ एक रिमोट कंट्रोल डिवाइस, एक कार्बाइन, और एक नकली INSAS राइफल बरामद की।
इसके अलावा, रांची में छापेमारी कर डॉ. इश्तियाक अहमद उर्फ कैप्टन, मोहम्मद रिजवान, मोती-उर-रहमान, मोहम्मद रहमतुल्ला, और फैजान अहमद को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से SLR, कार्बाइन और 5.1 लाख रुपये जब्त किए गए। जाँच में सामने आया कि इस मॉड्यूल की अगुवाई डॉक्टर इश्तियाक अहमद कर रहा था और सभी सदस्य भीवाड़ी में हथियार चलाने का प्रशिक्षण ले रहे थे। ताकि इश्तियाक फिदायीन आतंकी दस्ता तैयार कर कर देश में इस्लामी खिलाफत ला सके।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के माध्यम से जिहाद के लिए धन इकट्ठा करने की योजना पर ये ग्रुप काम कर रहा था, ऐसे में वो ऐसे युवाओं को आतंकी समूह से जोड़ता, जिन्हें सरकार की तरफ से पैसे मिले। इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 12 नवंबर को पुलिस को आठ आरोपितों की छह दिन की हिरासत दी, जिसमें यह कहा गया कि उन्हें 18 नवंबर को पेश किया जाएगा
कोर्ट में पेशी के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपितों से पूछताछ बेहद जरूरी है ताकि साजिश के पूरे जाल का पर्दाफाश किया जा सके और इसके अन्य जुड़े लोगों की पहचान की जा सके। सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा कि पुलिस हिरासत में पूछताछ से ही इस केस की गहराई तक जाया जा सकता है। अदालत ने इस तर्क को मानते हुए हिरासत की मंजूरी दे दी।
कोर्ट ने जाँच अधिकारी (IO) को निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान आरोपितों की सेहत और सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाए। इसके तहत, भारतीय कानूनी प्रावधानों के अनुसार, पुलिस हिरासत के दौरान इनकी नियमित मेडिकल जाँच कराना अनिवार्य होगा। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस की यह जिम्मेदारी होगी कि आरोपितों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये गिरोह खास नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था और इसके पीछे बड़े स्तर पर योजना बनाई गई थी। जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि इनका कनेक्शन कुछ बाहरी समूहों से भी हो सकता है। पुलिस अब इनके फोन रिकॉर्ड और संपर्कों की गहनता से जाँच कर रही है ताकि पूरे मामले को समझा जा सके।
बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये दिए जाते हैं, जो 3 किश्तों में सीधे उनके खाते में आते हैं। ये योजना किसानों को खाद-बीज खरीदने में मदद के लिए सरकार ने शुरू की थी, लेकिन आतंकवादी इस योजना का लाभ अपने घिनौने मकसद को पूरा करने में लगा रहे हैं।
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गुरुवार (14 नवंबर 2024) को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध घुसपैठियों की पहचान करने के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर सहित कई अधिकारियों को निर्देश दिए। LG कार्यालय से जारी एक पत्र में आधार कार्ड और वोटर कार्ड में हेराफेरी का सरकारी जगहों पर अतिक्रमण की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ समय में घुसपैठियों की बढ़ी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीके सक्सेना ने दिल्ली के प्रमुख सचिव, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन दिल्ली (MCD) के कमिश्नर और नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NDMC) को एक पत्र लिखकर जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने राजधानी में तेजी से बढ़ती अवैध घुसपैठियों की संख्या पर ध्यान दिलाते हुए इस दिशा में जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसके लिए एक महीने तक विशेष अभियान चलाने के लिए कहा गया है।
उपराज्यपाल के इस पत्र में दिल्ली के अधिकारियों से कहा गया है कि घुसपैठियों का इस्तेमाल कुछ लोगों द्वारा राजनैतिक स्वार्थों के लिए किया जा रहा है। इसमें आगे कहा गया है कि अवैध घुसपैठियों की जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से आई है। ये संख्या तेजी से बढ़ रही है। आशंका है कि ये घुसपैठियों ने फर्जी कागजातों से आधार और वोटर कार्ड हासिल कर मतदान की कोशिश कर रहे हैं।
मतदान का अधिकार लोकतंत्र का सबसे प्रभावी हक बताते हुए इस पत्र में कहा गया है कि इसे घुसपैठियों को मिलना किसी भी रूप में देश हित में नहीं हो सकता। घुसपैठियों की बढ़ती संख्या को उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया है। पत्र में घुसपैठियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाने और केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने के लिए कहा गया है।
उपराज्यपाल के इसी पत्र में सभी सरकारी संस्थाओं से कहा गया है कि दिल्ली में कहीं भी अवैध कब्ज़ा किसी भी रूप में न हो। इस बावत उपराज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने की नसीहत दी है। बताते चलें कि दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वो घुसपैठियों का मुद्दा विधानसभा चुनावों में अपने राजनैतिक लाभ के लिए उठा रही है।