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हाथों में सारंगी, तन पर गेरुआ वस्त्र… साधु बन भीख माँगते पकड़े गए सोहराब, नियाज और शहजाद: खुद को गोरखनाथ मठ से बता रहे थे, गंगाजल पीने को नहीं थे तैयार

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में लोगों ने शुक्रवार (1 नवंबर 2024) को गेरुआ वस्त्र पहनकर साधु वेश में भीख माँगते हुए तीन मुस्लिमों को पकड़ा है। तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने इन पर FIR दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है। इनके नाम सोहराब, शहज़ाद खान और नियाज़ हैं। तीनों पड़ोसी जिले मऊ के रहने वाले हैं।

जब स्थानीय लोगों ने इनसे ऐसा करने के बारे में पूछा तो इन्होंने बताया कि ये उनका खानदानी पेशा है। यही हरकत उनके बाप-दादा भी करते आए हैं। इस स्थानीय हिंदुओं ने इन साधु वेशधारियों से गंगाजल पीने के लिए कहा। हालाँकि, तीनों ने गंगाजल पीने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचित करके तीनों को उसके हवाले कर दिया।

मामला गाजीपुर के थाना क्षेत्र कासिमाबाद का है। शुक्रवार को शिवकुमार गुप्ता ने पुलिस में तहरीर देकर बताया कि 1 नवंबर को वो अपने घर पर मौजूद थे, तभी गेरुआ वस्त्रों में साधु वेश बनाकर तीन लोग उनके पास भीख माँगने आए। जब शिवकुमार ने जब इनके नाम-पूछे तो ये तीनों आनाकानी करने लगे। इन तीनों ने खुद को गोरखनाथ मंदिर से जुड़ा योगी बताया।

हालाँकि, इनके हावभाव को देखकर शिवकुमार और अन्य लोगों को इन पर शक गहरा गया। जोर देकर पूछने पर तीनों ने कबूल किया कि वो मुस्लिम हैं। इन्होंने अपने नाम सोहराब, नियाज़ और शहजाद खान बताए। ये सभी पड़ोसी जिले मऊ के थाना क्षेत्र दोहरीघाट में पड़ने वाले गाँव अतरसांवा के रहने वाले हैं।

पूछताछ के दौरान इन सभी ने शिवकुमार गुप्ता से विवाद भी किया और उत्तेजना में कहा, “तुम कौन होते हो पूछने वाले।” शिवकुमार तीनों को थाने ले जाने की कोशिश कर रहे थे तो वो झगड़ना शुरू कर दिए।शिकायतकर्ता ने इन नियाज़, सोहराब और शहज़ाद को बहरूपिया बताते हुए कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने अपने साथ भविष्य में किसी अनहोनी की भी आशंका जताई है।

पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319 (1) के तहत दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। डिप्टी एसपी कासिमाबाद के मुताबिक, तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सोहराब, कासिम और नियाज़ अपना गुनाह कबूल करते दिखाई दे रहे हैं। लोग उन पर हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं। जवाब में तीनों ने कहा कि गेरुआ कपड़ों में सिर्फ वही नहीं, उनके बाप-दादा भी भीख माँगकर गुजारा किए हैं। तीनों ने मजदूरी करके कमाने-खाने की नसीहत को भी टाल दिया।

बांधवगढ़ में एक के बाद एक 10 हाथी मरे मिले, क्या मध्य प्रदेश में इंसानों को मारकर बदला ले रहे हैं उनके साथी: जानिए क्या है मामला, कितनी मौतें अब तक

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में हाथियों ने 2 लोगों पर हमला करके उनकी जान ले ली। एक युवक को गाँव वालों के सामने पटक पटक कर घायल कर दिया। यह घटना बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े इलाके में हुई है। घटना से कुछ दिन पहले ही यहाँ 10 हाथियों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो चुकी है। हाथी के हमले से प्रभवित लोग इसे बदला मान रहे हैं। हमले के बाद सीएम मोहन यादव ने एक टीम भी बाँधवगढ़ भेजी है। मामले में वन विभाग भी खाली हाथ है, कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा है।

2 को मारा, 1 को किया घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहाँ के चंदिया क्षेत्र में शनिवार (2 नवम्बर, 2024) को बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के भीतर से आए तीन हाथियों ने रामरतन यादव की हत्या कर दी। रामरतन यादव सुबह अपने खेतों की तरफ गए हुए थे। उनको हाथी ने काफी दूर तक खींचा और मार दिया। उनका शव उनके बेटे को मिला।

पास में खड़े लोगों ने जानकारी दी कि रामरतन यादव को हाथियों ने मार दिया है। वहीं पास के ही इलाके के भैरव कोल की हत्या भी हाथियों ने कर दी। भैरव कोल भी अपने खेतों की तरफ जा रहे थे, इसी दौरान उन पर हाथियों ने हमला किया और हत्या कर दी।

दोनों को मारने के अलावा हाथी और भी लोगों पर हमलावर हुए। यहीं के एक गाँव में फसल काट रहे लोगों पर हाथियों ने हमला कर दिया। हाथियों ने सचिन नाम के एक युवक को उठा लिया और उसे पटक पटक कर घायल कर दिया। गाँव वालों ने किसी तरह हाथियों को जंगल की तरफ वापस भेजा।

हमले में सचिन की हड्डियाँ टूट गई हैं और उसका इलाज चल रहा है। गाँव वाले अब हाथियों के आतंक के कारण फसल भी नहीं काट पा रहे। वहीं हाथी फसल बर्बाद करने में जुटे हुए हैं। गाँव वालों ने बताया है कि हमला करने वाले हाथियों की संख्या तीन है।

10 हाथियों की हुई है मौत

हाथियों के हमले का यह सिलसिला दिवाली के समय से चालू हुआ। यहाँ 29 अक्टूबर के दिन से हाथियों की मौत चालू हो गई। यह मौतें चंदिया के पास के गाँव सलखनिया में होनी चालू हुई थी। 29 अक्टूबर को 4 जबकि 30 अक्टूबर को भी 4 की मौत हुई। बाकी हाथी वन विभाग को बीमार मिले। इलाज चालू हुआ लेकिन 31 अक्टूबर आते-आते 2 और ने दम तोड़ दिया।

इस तरह मरने वाले हाथियों की संख्या 10 पहुँच गई। एक हाथी को वन विभाग बीमारी से ठीक करने में कामयाब रहा। हाथियों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन स्थानीय प्रशासन का दावा है कि यह मौतें पास के गाँव में लगाई जाने वाली कोदों की फसल खा कर हुई हैं। दावा है कि हाथियों ने ज्यादा फसल खा ली और इससे उनकी तबियत बिगड़ गई।

गाँव वालों ने बताया- हाथी बदला ले रहे

गाँव वालों का दावा है कि हमला करने वाले 3 हाथी, उसी झुंड का हिस्सा हैं जिसके बाकी 10 हाथियों की रहस्यमयी तरीके से मौत हुई है। समाचार पत्र दैनिक भास्कर को गाँव के लोगों ने बताया है कि उन्होंने पहली बार हाथियों को रौद्र रूप में देखा है। हाथी इससे पहले कभी भी बेकाबू नहीं हुए हैं।

गाँव के लोगों का कहना है कि इससे पहले हाथी उनके गाँव की सीमा तक आते थे लेकिन इंसानों पर हमला नहीं करते थे। हालाँकि, वह वह लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाथी इससे पहले फसल खराब किया करते थे। उन्होंने कई बार पूरी पूरी फसल तबाह की है लेकिन यह रूप पहली बार दिखा है।

गाँव के कुछ लोगों का दावा है कि अपने साथियों की मौत के बाद हाथी परेशान इसलिए हमला कर रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि जो हाथी हमला कर रहे हैं, उन्होंने भी वह जहरीला पदार्थ खाया है, जिससे बाकी हाथी मारे गए हैं। ऐसे में उनका संतुलन बिगड़ गया है। अब गाँव वाले बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।

CM ने टीम भेजी, रिपोर्ट आना बाकी

हाथियों के हमले में हुई मौतों के बाद राज्य के CM मोहन यादव ने एक आपातकालीन बैठक बुला कर एक टीम बाँधवगढ़ भेजी है। दो सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट CM को सौंप दी गई है। बताया गया है कि टीम ने भी हाथियों की मौत का कारण प्रथम दृष्टया कोदों की फसल बताया है। टीम हाथियों की मौत के पीछे साजिश की बात नकारी है।

वहीं स्थानीय वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बताने से हिचक रहे हैं। स्थानीय वन अधिकारी कुलदीप त्रिपाठी ने बताया है कि उन्हें 2 लोगों के मौत की सूचना मिली थी। हाथियों ने यहाँ हमला किया है। उन्होंने बताया है कि वन विभाग की टीम लगातार काम्बिंग कर रही है और आसपास के गाँवों में मुनादी करवाई जा रही है।

चीन के करीब पहुँची भारतीय वायुसेना, 13700 फीट की ऊँचाई पर एयरफील्ड तैयार: कभी लद्दाख में एयरस्ट्रिप खोलने पर कॉन्ग्रेस की सरकार ने पूछा था- क्यों किया ऐसा?

लद्दाख के न्योमा में भारत का अत्याधुनिक एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) लगभग तैयार है, जो चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित है। इसे 13,700 फीट की ऊँचाई पर बनाया गया है, और इसमें 3 किलोमीटर लंबा रनवे है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।

मोदी सरकार द्वारा ये प्रोजेक्ट साल 2021 में शुरू हुआ था और इसके लिए सरकार ने 214 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। इस एएलजी के तैयार होने से भारतीय सुरक्षा बलों को उत्तरी सीमा पर त्वरित रूप से पहुँचने में सहायता मिलेगी।

न्योमा एएलजी की स्टेटजिक लोकेशन बनाती है इसे खास

लद्दाख में न्योमा ALG का लोकेशन इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यह LAC के सबसे नजदीक स्थित हवाई अड्डा है, जो कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में भारतीय वायुसेना को सीधी पहुँच प्रदान करेगा। भारत-चीन तनाव के दौरान, इस तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल के वर्षों में गलवान की घटना के बाद से भारत-चीन के बीच विवादित क्षेत्रों में अक्सर तनाव बना रहता है। इस नई एयरस्ट्रिप के जरिए भारत अपनी सामरिक और लॉजिस्टिक क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ा सकता है, क्योंकि एलएसी से इसकी दूरी महज 30 किमी है।

दौलत बेग ओल्डी के लिए सरकार से छिपाकर वायुसेना ने किया था काम

इससे पहले, एक अन्य एयरस्ट्रिप दौलत बेग ओल्डी (DBO) को 2008 में बिना सरकारी अनुमति के दोबारा शुरू किया गया था। ये हवाई पट्टी 16,614 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसे भी एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 43 साल तक बंद रहने के बाद वायुसेना के उस समय के उप प्रमुख एयर मार्शल पीके बारबोरा ने इसे पुनः चालू कराया था।

साल 2020 में पीके बारबोरा ने बताया था कि इस मिशन को पूरी तरह सीक्रेट रखा गया था, और तत्कालीन रक्षा मंत्री को भी मिशन के पूरा होने के बाद ही इसकी जानकारी दी गई थी। बारबोरा ने बताया कि अगर उन्होंने सरकार से लिखित अनुमति माँगी होती, तो कई बार की तरह उनकी इस योजना को भी रोका जा सकता था। इसलिए उन्होंने अपने समकक्ष अधिकारियों से बात करके, और बिना किसी लिखित आदेश के, दौलत बेग ओल्डी को फिर से चालू करने का निर्णय लिया।

इस बार सरकार ने खुलकर किया वायुसेना का सहयोग

इस बार न्योमा एएलजी की स्थापना में सरकार का पूर्ण समर्थन मिला है। सरकार ने न केवल बजट आवंटित किया बल्कि सेना को पूरी छूट भी दी। हाल ही में भारत और चीन के बीच तनाव के चलते, भारत ने अपनी सीमाओं पर बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए तेजी से काम किया है। यह रणनीति दिखाती है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार है।

सेना के साथ ही नागरिकों को भी होगा फायदा

न्योमा एएलजी के चालू होने से भारत की LAC पर ऑपरेशनल क्षमता में भारी इजाफा होगा। सेना अब ऊँचे और दुर्गम इलाकों में त्वरित रूप से पहुँच सकती है। इसके अलावा, इस एएलजी से नागरिक क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी सुधरेगी, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। स्थानीय स्तर पर यात्राओं के लिए इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे आपूर्ति और अन्य जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सकेगा।

‘कार्यकर्ताओं के कहने पर गई मंदिर, पूजा-पाठ नहीं की’ : फतवा जारी होते ही सपा प्रत्याशी नसीम सोलंकी ने की तौबा, पार्टी वाले वीडियो शेयर कर बता रहे थे सेकुलरिज्म की मिसाल

समाजवादी पार्टी की नेत्री और कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट से प्रत्याशी नसीम सोलंकी के खिलाफ फतवा जारी हुआ है। यह फतवा एक मंदिर में उनके द्वारा पूजा-अर्चना करने के बाद जारी हुआ है। फतवे में बुतपरस्ती को इस्लाम में हराम बताते हुए नसीम सोलंकी से तौबा करने के लिए कहा गया है। यह फतवा बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने शुक्रवार (1 नवंबर 2024) को जारी किया है। हालाँकि फतवा जारी होने के बाद सपा प्रत्याशी मंदिर में पूजा करने के समाजवादी पार्टी के तमाम नेताओं के दावों से पलट गईं हैं। उन्होंने कहा कि वो मंदिर में अपने कार्यकर्ताओं के कहने पर गई थीं।

क्या कहा मौलाना ने

फतवा जारी करने के बाद ऑपइंडिया को भेजे गए वीडियो संदेश में मौलाना ने फतवा देने की वजह को विस्तार से बताया है। मौलाना शहाबुद्दीन से किसी ने सवाल किया था कि अगर कोई मुस्लिम महिला मंदिर में पूजापाठ कर रही हो तो उसके बारे में शरीयत क्या कहती है ? मौलाना ने इसके जवाब में कहा, “शरीयत ए इस्लामिया का नजरिया है ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूलुल्लाह। नहीं है कोई माबूद सिवाय अल्लाह के। यानी पूजने के लायक सिर्फ खुदा है।”

मौलाना ने अपने बयान में आगे मोहम्मद को अंतिम नबी बताया। उन्होंने आगे कहा, “इस्लाम में मूर्ति पूजा हराम है। कोई भी शख्स महिला हो या पुरुष, अगर वो अपनी मर्जी से, राजी ख़ुशी से पूजा अर्चना या जलभिषेषक करती है, तो उस पर अगर वो जानबूझ कर करती है तो सख्त हुक्म है। अगर वो अनजाने में या किस के दबाव में करती है तो उस पर सिर्फ तौबा का हुक्म है।” मौलाना शहाबुद्दीन ने शिवलिंग पर जल चढ़ाने वाली मुस्लिम महिला को शरीयत की नजर में मुजरिम बताया है।

नसीम सोलंकी को फ़ौरन तौबा करने का फतवा देते हुए शहाबुद्दीन ने आगे कहा कि आइंदा भविष्य में वो दोबारा ऐसा कभी न करें। उन्होंने कहा, “जिस से उसका ईमान, उसका इस्लाम खतरे में पड़ जाए। शहाबुद्दीन की तरफ से सपा कैंडिडेट नसीम सोलंकी को दुबारा से कलमा पढ़ने की भी नसीहत दी गई है। बताते चलें कि अक्सर अपने विवादित बयानों से चर्चा में रहने वाले मौलाना शहाबुद्दीन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। वो मौलाना के साथ मुफ़्ती भी हैं।

‘मैंने कोई पूजा नहीं की वहाँ, आगे से ध्यान भी रखेंगे’

अपने खिलाफ फतवा आने के बाद नसीम सोलंकी की सफाई भी आ गई। नसीम सोलंकी ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने महादेव के मंदिर में कोई पूजा अर्चना नहीं की थी। बकौल नसीम सोलंकी उनके मंदिर में जाने की वजह बस इतनी थी कि उनके साथ मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनसे कह दिया कि आज दीपावली है और वो दीया जला कर लोगों को त्यौहार की शुभकामनाएँ दे दें। खुद के खिलाफ जारी फतवे का सम्मान करते हुए नसीम ने कहा है कि वो आगे से ध्यान रखेंगी।

नसीम सोलंकी ने यह माना कि उनके मज़हब में बुत (मूर्ति) पूजा नहीं होती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने कोई भी नसीम ने अपनी इच्छा नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की सलाह बताया है। उन्होंने कहा कि वो कोई धर्म अपना नहीं रहीं हैं अलबत्ता वो सबका सम्मान करती हैं। नसीम ने भविष्य में गुरूद्वारे और चर्च भी जाने की बात कही है।

वामपंथियौं और समाजवादियों ने बताना चाहा था भाईचारा

भले ही नसीम सोलंकी मंदिर में पूजा करने के तमाम प्रचार से अचानक मुकर गईं लेकिन उस से पहले उनकी शान में कसीदे गढ़े जा चुके थे। वामपंथी और समाजवादी मानसिकता वाले हैंडलों ने समाजवाद को ही देश के विकास का रास्ता बताना शुरू कर दिया था। फ़िलहाल नसीम सोलंकी के मुकर जाने के बाद इन हैंडलों से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

खुद की लगाई आग में जल रही है सपा

इस बीच नसीम सोलंकी के खिलाफ जारी हुए फतवे पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने मज़हबी कट्टरता की जो आग लगाई थी उसमें वो अब खुद ही जल रही है। बकौल राकेश त्रिपाठी फतवा जारी करने वालों का मनोबल सपा जैसी ही पार्टियों की वजह से बढ़ता है। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अब ये समझ लेना चाहिए कि मज़हबी कट्टरता से किसी का भी भला नहीं होने वाला है।

मंदिर का हुआ शुद्धिकरण

नसीम सोलंकी के जाने के बाद तमाम श्रद्धालुओं ने मंदिर का शुद्धिकरण किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए इस शुद्धिकरण के लिए हरिद्वार से 1 हजार लीटर जल मंगवाया गया। हर हर महादेव के नारों के बीच पुजारी ने सनातन के शत्रुओं के विनाश की कामना की।

बताते चलें कि दीपावली को समाजवादी पार्टी की सीसामऊ से प्रत्याशी नसीम सोलंकी अपने समर्थकों सहित चुनाव प्रचार कर रहीं थीं। इस दौरान वो रास्ते में पड़ने वाले एक मंदिर में रुकी। उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया और वायरल वीडियो में उनको हाथ भी जोड़े देखा गया। हालाँकि फिलहाल नसीम सोलंकी पूजा करने के तमाम सपा नेताओं के दावों से साफ पलट चुकी हैं।

कर्नाटक में ASI की संपत्ति के भी पीछे पड़ा वक्फ बोर्ड, 53 ऐतिहासिक स्मारकों पर दावा: RTI से खुलासा, पहले किसानों की 1500 एकड़ जमीन को बता चुका है अपना

कॉन्ग्रेस-शासित कर्नाटक में वक्फ बोर्ड ने राज्य के 53 ऐतिहासिक स्मारकों पर अपना दावा किया है, जिनमें से 43 स्मारक पहले ही उनके कब्जे में आ चुके हैं। ये स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अंतर्गत आते हैं और इनमें प्रसिद्ध गोल गुम्बज, इब्राहिम रौजा, बारा कमान और बीदर व कलबुर्गी के किले शामिल हैं। इन 53 स्मारकों में से 43 विजयपुरा में हैं, जो कभी आदिल शाही साम्राज्य की राजधानी था, इसके अलावा 6 हम्पी में और 4 बेंगलुरु सर्कल में मौजूद हैं।

वक्फ बोर्ड का दावा और दस्तावेजी सबूत

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, विजयपुरा वक्फ बोर्ड ने इन 43 स्मारकों को 2005 में अपना घोषित कर दिया था, जब मोहम्मद मोहसिन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग (मेडिकल एजुकेशन) के प्रधान सचिव थे। मोहसिन ने उस समय वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और विजयपुरा के डिप्टी कमिश्नर का पद भी संभाला था। उनके मुताबिक, राजस्व विभाग ने सरकारी गजट अधिसूचना जारी कर वक्फ बोर्ड के दावे को मान्यता दी थी, जिसमें उन्होंने ‘प्रामाणिक दस्तावेजी सबूत’ पेश किए थे।

वक्फ बोर्ड कथित तौर पर संपत्ति के मालिकाना हक के प्रमाणपत्र का फायदा उठा रहा है, जबकि कानून के अनुसार एक बार ASI के पास किसी संपत्ति का अधिकार आ जाता है तो उसे वापस किसी अन्य के नाम नहीं किया जा सकता।

साल 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल (AMASR) अधिनियम और नियमों के तहत ASI द्वारा संरक्षित संपत्ति को किसी अन्य को नहीं सौंपा जा सकता है। ASI के एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्यवाही ASI की सहमति के बिना हुई है, जो कि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। 2012 में एक संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान वक्फ बोर्ड अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका था, और ASI ने पुष्टि की थी कि इन स्मारकों पर कब्जा हो चुका है।

साल 2007 से चल रहे अवैध कब्जे

ASI के अधिकारी का कहना है कि विजयपुरा में 43 स्मारकों को बदलने और उनके साथ छेड़छाड़ करने के लिए उन पर प्लास्टर और सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें पंखे, एसी, ट्यूबलाइट और टॉयलेट जैसी सुविधाएँ जोड़ी जा रही हैं। कुछ संपत्तियों पर दुकानें भी बनाई जा चुकी हैं, जो इन ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति को खराब कर रही हैं और पर्यटकों के आकर्षण को भी प्रभावित कर रही हैं।

ASI ने लंबे समय से राज्य सरकार और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को इन कब्जों को हटाने के लिए निर्देश भेजे हैं। लेकिन 2007 से अब तक, केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद कर्नाटक के चीफ सेक्रेटरी, विजयपुरा के डिप्टी कमिश्नर और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसीलिए स्मारकों पर अवैध कब्जे बने हुए हैं।

कर्नाटक के ऐतिहासिक स्मारकों पर वक्फ बोर्ड का दावा और कब्जा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिससे न केवल कानूनी सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि इनकी ऐतिहासिक विरासत भी खतरे में पड़ रही है। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस सरकार और संबंधित विभागों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

एयरइंडिया की फ्लाइट में मिला कारतूस, चेकिंग के वक्त सीट पॉकेट से निकला: पुलिस जाँच में जुटी, दुबई से दिल्ली आया था विमान

एयर इंडिया की एक इंटरनेशनल उड़ान में कारतूस मिलने की खबर है। यह विमान दुबई से दिल्ली आया था। कारतूस जहाज की एक सीट के पॉकेट में रखा हुआ था। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कारतूस फ्लाइट में कैसे पहुँचा। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है। पुलिस जाँच में जुट गई है। घटना रविवार (27 अक्टूबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 27 अक्टूबर को एयर इंडिया की फ्लाइट AI 916 दुबई से दिल्ली पहुँची थी। सवारियाँ उतर जाने के बाद जब विमान की तलाशी हुई तो उसकी एक सीट के पॉकेट में कारतूस मिला। हालाँकि इस कारतूस से किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। प्रोटोकॉल का पालन करते हुए फ़ौरन ही मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और जाँच-पड़ताल में जुट गई।

फ़िलहाल अभी तक पुलिस के हाथ भी खाली हैं। कोई यात्री कारतूस ले कर कैसे तमाम सुरक्षा तंत्र को नाकाम करते हुए जहाज तक पहुँच गया यह पहेली अभी पुलिस नहीं सुलझा पाई है। विमान में करतूस मिलने की घटना तब सामने आई है जब 26 अक्टूबर से पहले 13 दिनों के अंदर विमानों के अंदर बम होने की 300 से अधिक झूठी शिकायतें और धमकियाँ रिकॉर्ड की गईं थीं। इसके अलावा खालिस्तानी पन्नू ने भी धमकी जारी कर कहा था 1 नवंबर से 19 नवंबर के बीच फ्लाइट में सफर न करें।

‘फारुख ने किया बहन से रेप, अश्लील वीडियो वायरल कर शादी तुड़वाई’: कौशांबी के युवक ने CM योगी से लगाई मदद की गुहार, UP पुलिस ने जाँच शुरू की

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक युवक अपनी बहन के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाकर CM योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगा रहा है। युवक ने आरोप लगाया है कि फारुख नाम के लड़के ने उसकी बहन को बेहोश करके रेप किया और फिर उसकी अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रहा है।

गुहार लगाने वाला शख्स कह रहा है कि फारुख ने उसकी बहन को ना सिर्फ ब्लैकमेल किया, बल्कि उससे लाखों रुपयों की उगाही भी की। जब लड़की की शादी कहीं तय हुई तो फारुख ने उसे भी तुड़वा दिया।बताया जा रहा है कि घटना कौशाम्बी जिले के थाना क्षेत्र कड़ाधाम की है। यहाँ एक विधवा महिला अपनी एक बेटी और एक बेटे के साथ रहती है। महिला के दोनों बच्चे बालिग हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बेटा मेहनत-मजदूरी करके घर-परिवार चलाता है, जबकि बेटी घर पर ही रहती थी। इस परिवार के पड़ोस में फारुख नाम का युवक रहता है। कहा जा रहा है कि फारुख ने महिला की बेटी से जान-पहचान बढ़ाकर उसे विश्वास में ले लिया। कुछ दिनों के बाद फारुख ने लड़की को मिलने के बुलाया और नशीला पदार्थ खिलाकर उसे बेसुध कर दिया और उसी हालत में उसका रेप किया।

इस दौरान फारुख ने लड़की का अश्लील वीडियो भी बना डाला। बलात्कार के बाद फारुख आए दिन पीड़िता को 5 लाख रुपए और गहने देने के लिए ब्लैकमेल करने लगा। इनकार करने पर वह फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। पीड़ित परिवार लम्बे समय तक लोक-लाज के डर से चुप रहा। लड़की के भाई के मुताबिक, थोड़ा-थोड़ा करके वो फारुख को 5-6 लाख रुपए दे चुका है।

लड़की के भाई का आरोप है कि पैसे मिलने के बाद फारुख का लालच बढ़ता गया। वह 5 लाख रुपए और माँगने के साथ-साथ पीड़िता की शादी के लिए रखे गए सोने के गहनों को भी हड़पने की साजिश रचने लगा। इस बीच लड़की का रिश्ता उसके परिजनों ने तय कर दिया। इस बात से फारुख भड़क गया। उसने लड़की की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो वायरल लड़के को भेजकर रिश्ता तुड़वा दी।

लड़की की किसी तरह परिजनों ने शादी की तो फारुख ने उसके पति को वीडियो भेजकर शादी तुड़वा दी। इतना ही नहीं, इस वीडियो को लड़की के रिश्तेदारों को भी भेज दिया। परेशान होकर पीड़िता के भाई ने वीडियो जारी करके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है। लड़की के भाई ने कहा कि फारुख ने धमकी दी कि अगर थाने में शिकायत की तो जान से मरवा देगा।

इस मामले पर एडिशनल एसपी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि अश्लील वीडियो वायरल होने का मामला संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पीड़ित परिवार से संपर्क करके तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि हर पहलू की गहनता से जाँच होगी और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शाइना एनसी को ‘इम्पोर्टेड माल’ बोल फँसे उद्धव गुट के नेता, FIR के बाद अरविंद सावंत ने माँगी माफी: संजय राउत ने पूछा- आखिर गलत क्या कहा

मुंबई की राजनीति में बीते कुछ दिनों से ‘इम्पोर्टेड माल’ बयान पर गरमाहट बनी हुई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत के इस बयान ने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अरविंद सावंत ने बीजेपी की नेता शाइना एनसी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें “इम्पोर्टेड माल” कहा, जो अब महायुति की ओर से मुम्बादेवी सीट से चुनाव लड़ रही हैं। इस बयान के बाद सियासी हलकों में बवाल मच गया और महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगने लगा। इसके बाद सावंत को अपनी सफाई देने के साथ माफी माँगनी पड़ी। हालाँकि संजय राउत अब भी अरविंद सावंत का बचाव करते दिख रहे हैं।

संजय राउत ने किया सावंत का बचाव

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत सावंत के बयान का समर्थन करते नजर आए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इसमें किसी महिला का अपमान नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सावंत ने सिर्फ यह कहा था कि शाइना एनसी इस क्षेत्र की नहीं हैं, वो बाहरी हैं और बाहर से आई हुई उम्मीदवार हैं। राउत ने कहा, “अगर इम्पोर्टेड माल कहा गया तो इसमें महिला का अपमान कहाँ हुआ?”

राउत ने अपने बयान में कहा कि शाइना मूल रूप से मुम्बादेवी क्षेत्र की नहीं हैं और स्थानीय नहीं हैं। यह बयान देते हुए उन्होंने बीजेपी को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि बीजेपी ने भी सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ कई बार अपमानजनक टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को सिर्फ एक राजनीतिक विवाद बताया और इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किए जाने का आरोप लगाया।

साइना एनसी ने दर्ज कराई एफआईआर

सावंत के इस बयान पर शाइना एनसी ने सख्त प्रतिक्रिया दी और नागपाड़ा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शाइना का कहना है कि सावंत का बयान महिलाओं के सम्मान पर हमला है और इसे कतई नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। शाइना ने कहा, “यह बयान केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि महिलाओं के प्रति पूरे समाज की सोच को दर्शाता है। मैंने ठान लिया है कि इस मामले को लेकर न्याय के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।”

शाइना ने चुनाव आयोग और महिला आयोग से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल उनके काम के आधार पर ही जानी जानी चाहिए न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों के आधार पर। शाइना ने बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) द्वारा महिलाओं के लिए उठाए गए कदमों को भी रेखांकित किया और विपक्ष के नेताओं पर सवाल उठाए कि वे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।

अरविंद सावंत ने माँगी माफी और दी सफाई

बयान पर बढ़ते विरोध और कानूनी कार्यवाही के चलते अरविंद सावंत ने सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया और उनका किसी को आहत करने का कोई इरादा नहीं था। सावंत ने कहा, “अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुँची है तो मैं माफी माँगता हूँ। मेरे 55 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने कभी महिलाओं का अपमान नहीं किया। यह मुद्दा केवल राजनीतिक लाभ के लिए खड़ा किया गया है।”

सावंत ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया और उनके बयान को जानबूझकर विवादित बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महायुति गठबंधन का उद्देश्य एक झूठी और नकली कहानी बनाना है। सावंत ने हाल ही में कुछ नेताओं के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की भी बात की और इस विवाद को राजनीतिक खेल बताया।

यह विवाद महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के करीब आने के कारण और भी बड़ा रूप ले चुका है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बयानबाजी और उसका समर्थन दोनों ही चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं। अब देखना यह होगा कि इसका असर आने वाले चुनावों में कितना दिखाई देगा।

600 परिवारों की जमीन पर Waqf का दावा… केरल कोर्ट ने सरकारों से जवाब माँगा, याचिकाकर्ता बोले-गैर इस्लामी लोगों की संपत्ति पर क्यो हो इनका अधिकार

केरल के मुनम्बम में 600 परिवारों की जिन जमीनों पर वक्फ बोर्ड ने अपना फर्जी दावा किया है, उस जमीन विवाद को लेकर राज्य और केंद्र सरकार को केरल हाई कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। यह मामला मुनम्बम के निवासी जोसेफ बेनी और अन्य सात लोगों द्वारा दायर की गई याचिका के आधार पर सामने आया है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड उन्हें और लगभग 600 अन्य परिवारों को जमीन से बेदखल करने की तैयारी में है, यह दावा करते हुए कि यह जमीन वक्फ की संपत्ति है। जोसेफ और अन्य निवासियों ने फारूक कॉलेज, कोझिकोड के प्रबंध समिति से यह जमीन खरीदी थी, लेकिन अब राजस्व अधिकारियों ने वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अनुरोध पर जमीन के दस्तावेजों का म्युटेशन करने से इनकार कर दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने वक्फ अधिनियम की धारा 14 को असंवैधानिक बताया है, जिसमें वक्फ बोर्ड को किसी भी ट्रस्ट या सोसायटी की संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित करने का अधिकार दिया गया है। उनका कहना है कि यह प्रावधान प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है और गैर-इस्लामिक धर्म के लोगों की संपत्ति को लेकर वक्फ बोर्ड को इस प्रकार के अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कब्जाधारियों को बेदखल करने का अधिकार देना संविधान के अनुच्छेद 300 ए का उल्लंघन है।

इस बीच, विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने विवादित जमीन को वक्फ संपत्ति न मानते हुए सरकार से इस मुद्दे को जल्द सुलझाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहे तो इस विवाद को दस मिनट में हल कर सकती है। सतीसन ने मुनम्बम में एक बैठक में हिस्सा लिया और आंदोलनरत लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि लोग इस क्षेत्र में पहले से बसे हुए थे, और ऐसी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता।

सतीसन के अनुसार, नासर आयोग जिसे आच्युतानंदन सरकार ने नियुक्त किया था, ने इस जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में पहचाना था। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्ति बिना किसी शर्त के होती है, जबकि इस जमीन के दस्तावेजों में शर्तें दर्ज हैं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि फरूक कॉलेज प्रबंधन ने इस जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया था, जबकि वक्फ संपत्ति का वित्तीय लेन-देन संभव नहीं होता।

सतीसन ने यह स्पष्ट किया कि यह विवाद नए वक्फ अधिनियम से जुड़ा नहीं है, और पूर्व की यूडीएफ सरकार ने भी इस जमीन को वक्फ संपत्ति न मानने का रुख अपनाया था।

बता दें कि करीब पाँच साल पहले साल 2019 वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि केरल में मुनम्बम, चेराई और पल्लिकाल के इलाके उसकी संपत्ति हैं। यह इलाका न केवल केरल के 600 से अधिक परिवारों का घर है, बल्कि यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, जिनके पास 1989 से जमीन के वैध कागजात हैं। इसके बावजूद, वक्फ बोर्ड ने इस इलाके पर अपना दावा ठोक दिया। इन परिवारों ने अपनी जमीन को वैध रूप से खरीदा था, लेकिन अब उन्हें जबरन खाली करने के आदेश दिए जा रहे हैं, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।

दीवाली के दिन देवी माँ के मंदिर पर लिखा ‘786’, बरेली के गाँव में माहौल बिगड़ा: हाफिजगंज में पटाखे फोड़ने पर बढ़ी बात, मुस्लिम भीड़ ने हिंदू परिवार पर हमला किया

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दीपावली के दिन मंदिर पर 786 लिखने का मामला सामने आया है। इससे हालत तनावपूर्ण हो गए। यह मंदिर देवी माँ का है, जो आसपास के गाँवों में आस्था का बड़ा केंद्र है। आक्रोशित लोगों ने इसके दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने भी घटना का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है। मंदिर की पुताई करवा दी गई है।

वहीं इसी जिले में दूसरे थाना क्षेत्र में दीवाली पर ही पटाखे फोड़ने के विवाद में पत्थरबाजी हुई है। पहला मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र आँवला का है। यहाँ गाँव गोठा खंडुआ में माँ गामा देवी का मंदिर है। मंदिर ग्रामीणों की आस्था का बड़ा केंद्र है दीपावली की सुबह जब यहाँ लोग पूजा पाठ के लिए पहुँचे, तब इसकी दीवाल पर लाल रंग से 786 लिखा मिला।

कुछ ही देर में खबर गाँव और आसपास फ़ैल गई। लोग इसे दीपावली में अशाँति फैलाने की साजिश बताते हुए विरोध करने लगे। पुलिस से दोषियों को चिन्हित कर के कार्रवाई की माँग की जाने लगी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस फ़ौरन ही मौके पर पहुँची। लोगों को समझाबुझा कर शाँत करवाया गया।

जिस जगह 786 लिखा गया था, उसे मिटा कर मंदिर को फिर से पहले जैसी स्थिति में किया गया। हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में बरेली पुलिस से आरोपितों को खोजकर कार्रवाई की माँग की है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

पटाखे फोड़ने पर पथराव

दूसरा मामला बरेली के ही थाना क्षेत्र हाफिजगंज का है। यहाँ दीपावली पर पटाखे फोड़ रहे एक हिन्दू युवक के घर पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव कर दिया। पीड़ित युवक सचिन ने 31 अक्टूबर को इस घटना की तहरीर पुलिस में दी। तहरीर में सचिन ने बताया कि दीपावली पर वह पटाखे फोड़ रहा था। तभी उसके पड़ोस में रहने वाले नासिर, इमरान अंसारी और अनस ने पटाखे फोड़ने से मना किया।

सचिन ने अपना त्यौहार और अपने घर के आगे पटाखे फोड़ने की दलील दी तो आरोपित भड़क गए। सचिन का आरोप है कि आरोपितों ने उनको धमकाते हुए कहा, “साले, हम तुझको और जितने भी तेरे साथ पटाखे फोड़ रहे हैं, उनके घरों में आग लगा देंगे।” इसके बाद इमरान, अनस और नासिर सचिन से मारपीट पर उतारू हो गए। अपनी बचत में सचिन ने भी कुछ लोगों को बुलवाया।

इस घटना के बारे में कुछ ही देर में खबर गाँव और आसपास फ़ैल गई। लोग इसे दीपावली में अशांति फैलाने की साजिश बताते हुए विरोध करने लगे। शिकायत में अंत में सचिन ने यह भी बताया है कि आरोपित आए दिन उनको व उनके परिवार को ऐसे ही प्रताड़ित करते हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पत्थरबाजी की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची और हालात को सामान्य किया।