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15 साल की नौकरानी को गर्म तवा-सिगरेट से दागा, मर गई तो घर छोड़ भाग गया मोहम्मद निशाद और उसकी बीवी: बाथरूम में मिली लाश, पुलिस ने 6 लोगों को पकड़ा

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में मोहम्मद निशाद और नासिया ने 15 साल की अपनी घरेलू नौकरानी की हत्या कर दी है। हत्या से पहले दोनों ने किशोरी को बुरी तरह से प्रताड़ित किया था। उसे सिगरेट और लोहे के तवे से दागा था। मृतका का शव बाथरूम से बरामद हुआ है। पुलिस ने दोनों मियाँ-बीवी मोहम्मद निशाद और निवेता उर्फ नासिया को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना चेन्नई के अमीनजीकराई थाना क्षेत्र स्थित मेहतानगर की है। यहाँ मोहम्मद निशाद और उसकी बीवी नसिया ने घरेलू काम के लिए 15 वर्षीया एक नाबालिग नौकरानी को रखा था। उसे एक भाई-बहन ने निशाद के घर काम पर रखवाया था। नाबालिग मूलतः तंजावुर की थी। लड़की अपनी विधवा माँ को सहारा देने के लिए घरेलू कामकाज करती थी।

बताया जा रहा है कि 35 वर्षीय मोहम्मद निशाद और 30 साल की उसकी बीवी अपनी नौकरानी को कई दिनों से प्रताड़ित कर रहे थे। आरोप है कि करीब डेढ़ साल पहले लाई गई किशोरी को निशाद और उसकी बीवी अक्सर पीटते थे। कई बार उसे सिगरेट और लोहे के तवे से जलाया था। उसके गले पर भी घोंटने के निशान मिले हैं। 31 अक्टूबर को फ्लैट के बाथरूम में शव मिला था।

पुलिस के अनुसार, दिवाली के दिन उसे मृतका को बेरहमी से पीटा गया था। जब वह बाथरूम में गई और वहीँ उसकी मौत हो गई। पीड़िता की मौत के बाद मोहम्मद निशाद और उसकी बीवी नसिया घर को बंद करके भाग गए और दोस्त के यहाँ छिप गए। कहा जा रहा है कि मौत की जानकारी पुलिस को आरोपितों के वकील ने दी थी। पुलिस फौरन मौके पर पहुँची और लाश को कब्ज़े में लिया।

पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए किलपॉक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद किशोरी की प्रताड़ना और उसकी मौत के असली कारणों का खुलासा होगा। पुलिस ने व्यवसायी मोहम्मद निशाद और उसकी बीवी नसिया को खोज कर गिरफ्तार कर लिया है। इनके अलावा 4 अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

हिरासत में लिए गए लोगों में लड़की को काम रखवाने वाले भाई-बहन और निशाद के पति-पत्नी दोस्त हैं, जिनके घर वह छिपा था। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट में भी मामला दर्ज कर लिया है। भारतीय महिलाओं के राष्ट्रीय महासंघ ने आरोप लगाया कि दीपावली के दिन घर के काम ठीक से करने के बावजूद पिटाई की गई।

दिल्ली के लोगों को पानी-बिजली का बिल नहीं भरने के लिए अरविंद केजरीवाल ने उकसाया, कहा- फरवरी में AAP की सरकार बनते ही कर दूँगा माफ

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को सलाह दी है कि वह बिजली और पानी के बिल ना भरें। उन्होंने वादा किया कि वह जब चुनाव में जीतेंगे तो इन बिलों को माफ़ कर देंगे। केजरीवाल ने माना कि दिल्ली में अब लोगों को बढ़े हुए बिजली और पानी के बिल मिल रहे हैं।

शनिवार (2 नवम्बर, 2024) को दिल्ली के संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में केजरीवाल ने यह सलाह जनता को दी। वह यहाँ एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हाल ही में जब मैं जेल में था तो मैंने सुना कि तो उन्होंने मेरी पीठ पीछे कुछ गड़बड़ की और आपको फिर से भारी-भरकम पानी का बिल भेज दिया। कई लोगों को गलत और बढ़ा हुआ बिल मिला है।”

इसके बाद केजरीवाल ने कहा, “जिन लोगों को पानी के गलत बिल मिले हैं, उन्हें भरने की जरूरत नहीं है। बस फरवरी में मेरी सरकार एक बार फिर से बन जाए, मैं सबके पानी के बिल माफ कर दूँगा और आपको पहले की तरह ही पानी के बिल जीरो मिलने लगेंगे।”

जहाँ एक ओर केजरीवाल वादा कर रहे हैं कि वह पानी के बढ़े हुए बिल माफ़ कर देंगे, वहीं दूसरी तरफ यह बिल भेजे भी उन्हीं की सरकार ने ही हैं। यह समस्या लम्बे समय से चली आ रही है। वह अपनी ही सरकार द्वारा पैदा की गई समस्या से लड़ने को अब ‘मास्टरस्ट्रोक’ घोषित करना चाहते हैं।

केजरीवाल की यह घोषणा उनके पुराने क़दमों के भी विपरीत जा रही है। जहाँ अब वह बिल भरने से मना कर रहे हैं तो वहीं उनकी ही सरकार ने फरवरी, 2024 में बकाया बिल वसूलने को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत बढ़े हुए बिल वसूले जाने थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दिल्ली के 10 लाख से अधिक परिवार बढ़े हुए पानी के बिल से परेशान हैं। यह बढ़ा हुआ बिल तब आया है जब केजरीवाल सरकार लोगों को मुफ्त पानी देने का दावा करती है और इसको हर बार चुनावी घोषणापत्र में भी जगह देती है।

केजरीवाल ने दिल्ली के भीतर पानी के बिल जीरो करने का वादा तो कर दिया है, लेकिन उन्होंने इस बीच यह नहीं बताया है कि इससे दिल्ली जल बोर्ड और भी घाटे में जाएगा। दिल्ली जल बोर्ड वर्तमान में ₹3000 करोड़ से अधिक के घाटे में हैं।

भाजपा ने केजरीवाल के इस वादे पर हमला बोला है। भाजपा ने पूछा है कि आखिर किसने यह बिल बढ़ाए हैं। भाजपा दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि AAP सरकार में दिल्ली की स्थित बदहाल है और लोग त्यौहार के दिन भी बिजली नहीं पा रहे हैं।

मदरसे में 20 बच्चों से कारी ने किया कुकर्म, पीड़ित नाबालिगों ने वीडियो बना मदद की लगाई गुहार: परिजनों को करना पड़ा समझौता, पाकिस्तान का मामला

पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक मदरसे के अंदर दीनी तालीम ले रहे 20 नाबालिग बच्चों से कुकर्म का मामला सामने आया है। आरोप मदरसे के कारी (पढ़ाने वाला) जफर पर लगा है। कारी की तरफ से इन बच्चों को किसी से बताने पर मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ित बच्चों के अभिभावकों के साथ एक समझौते के तहत मदरसा मैनेजमेंट ने कारी को निकाल दिया।

मामला रावलपिंडी के नाला मुसलमाना इलाके का है। यहाँ मुस्लिमों की बरेलवी विचारधारा वाला मदरसा जामिया फैजान-ए-खुशबू-ए-मदीना है। यहाँ के कुछ छात्रों ने 16 अक्टूबर 2024 को अपना सामूहिक वीडियो वायरल किया। 1 मिनट 1 सेकेंड के इस वीडियो की शुरुआत में एक छात्र ने आरोप लगाया कि उनके साथ मदरसे के अंदर कारी गलत हरकत करते हैं।

उसने बताया कि इस हरकत एक विरोध करने और किसी से बताने पर मारने की धमकी दी जाती है। कारी की करतूत से छात्रों ने मदरसे में जाना ही छोड़ दिया था। पीड़ित छात्र ने आगे बताया कि आरोपित कारी पहले इसी मदरसे का छात्र था, जिसे पढ़ाने के लिए अब नियुक्त कर दिया गया है।

जब पीड़ितों ने कारी की इस करतूत की शिकायत मदरसा मैनेजमेंट से की तो उन पर कोई असर नहीं पड़ा। वीडियो में पीछे दिख रहे अन्य छात्रों ने भी इन आरोपों पर हाँ में हाँ मिलाई। सभी ने एकजुट होकर कारी जफर पर कार्रवाई की माँग की है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर अब तक वायरल हो रहा है।

वायरल के वीडियो होने और पुलिस की किरकिरी होने के बाद आखिरकार इसका संज्ञान पाकिस्तानी पुलिस ने लिया है। पुलिस ने गुरुवार (17 अक्टूबर) को सभी बच्चों को मदरसे के मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों के सामने बुलवाया गया। अंत में सर्वसम्मति से कारी जफर को नौकरी से निकालने का निर्णय लिया गया।

मदरसे बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी कारी को मदरसे से निकालने पर अपनी सहमति दे दी। पीड़ितों के परिजनों ने मदरसा मैनेजमेंट के साथ लिखित समझौता कर लिया है। उन्होंने बताया कि वो आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। फ़िलहाल पीड़ित छात्र का वीडियो अब तक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गुलामुद्दीन ने बीवी आबिदा संग मिल अनीता को घर बुलाया, शरबत में बेहोशी की दवा मिला पिलाई: मांस काटने वाले चाकू से किए टुकड़े-टुकड़े, कर्ज उतारने के लिए हिंदू महिला की हत्या

राजस्थान के जोधपुर में 50 वर्षीया अनीता चौधरी नाम की महिला की हत्या करने के आरोपित आबिदा परवीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, उसके फरार शौहर गुलामुद्दीन की तलाश जारी है। इस बीच मृतका के पति और मृतका के पार्लर में काम करने वाली महिला के बीच बातचीत का ऑडियो सामने आया है। इसके कारण केस उलझता जा रहा है। वहीं, पुलिस करीब डेढ़ दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

शव का अभी तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। इससे मौत की वजह का पता नहीं चल पाया है। ना ही मृतका का मोबाइल मिला है। वहीं, एक रिपोर्ट में बताया कि अनीता का शव जिन कपड़ों में बरामद हुआ है, वो पार्लर के सीसीटीवी में ऑटो रिक्शा में बैठने के दौरान नजर आ रहे कपड़ों से अलग हैं। अब सवाल ये भी है कि जिस घटना को लूट बताया जा रहा है, उसमें मृतका का कपड़े कैसे चेंज हो गए। 

कहा जा रहा है कि गुलामुद्दीन और उसकी बीवी आबिदा ने अनीता चौधरी के गहने बेचकर 12 लाख रुपयों का कर्ज उतारने के लिए उसकी हत्या कर दी थी। हत्या से पहले मृतका को शर्बत पिलाकर बेहोश किया गया था। इसके बाद हत्या करके उसकी लाश को 6 टुकड़ों में काटकर दफना दिया गया था। पुलिस ने आबिदा को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फरार गुलमुद्दीन की तलाश जारी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला जोधपुर के पश्चिमी इलाके की है। यहाँ सरदारपुरा सी रोड पर 50 वर्षीया अनीता चौधरी अपने पति मनमोहन चौधरी के साथ रहती थी। अनीता ब्यूटी पॉर्लर चलाती थी। 26 अक्टूबर की दोपहर 12 बजे अनीता ने अपने पति से बात की। इसके बाद वो लापता हो गई। पति ने फोन किया तो उसका फोन भी बंद आने लगा।

काफी खोजबीन के बाद भी जब अनीता नहीं मिली तो मनमोहन चौधरी ने अगले दिन पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस ने अनीता चौधरी की खोजबीन शुरू की। एक CCTV फुटेज में घटना के दिन दोपहर ढाई बजे के आसपास अनीता टैक्सी में बैठकर जाती दिखी। टैक्सी वाले से पूछताछ हुई तो उसने बताया कि अनीता गुलमुद्दीन के गंगाना स्थित घर उतरी थी।

42 वर्षीय गुलमुद्दीन उर्फ़ गुल मोहम्मद की अनीता के पॉर्लर के सामने ही स्टार ड्राई क्लीन नाम से दुकान है। दोनों के बीच लगभग 25 साल पुरानी जान-पहचान थी। पुलिस 30 अक्टूबर को यहाँ पहुँची तो घर पर गुलमुद्दीन की बीवी आबिदा मिली। शुरुआती पूछताछ में आनाकानी करने के बाद आखिरकार आबिदा ने शौहर के साथ मिलकर अनीता की हत्या का गुनाह कबूल कर लिया।

आबिदा ने बताया कि उसके शौहर गुलामुद्दीन को जुआ और ऑनलाइन गेमिंग की लत है। उसने हाल ही में मकान भी खरीदा था। इन सबके कारण उस पर 12 लाख रुपए का कर्ज हो गया है। गुलमुद्दीन अनीता चौधरी को अक्सर महँगे गहनों में देखता था। ऐसे में उसने अनीता को मारकर गहने हड़पने की साजिश रची। इस साजिश में उसकी बीवी आबिदा भी शामिल हो गई।

तय प्लान के मुताबिक दोनों ने अनीता को अपने घर पर बुलाया। वहाँ उसे पीने के लिए शर्बत दिया गया। इस शर्बत में बेहोशी की दवा डाल दी गई थी, जिसको पीने के बाद अनीता बेहोश हो गई। बेहोशी की हालत में मियाँ-बीवी ने मिलकर अनीता को मार डाला। दोनों ने अनीता की लाश से सारी ज्वैलरी उतार ली और लाश को ठिकाने लगाने की तरकीब सोचने लगे।

इसके बाद दोनों मांस काटने वाले चाकू से शव को 6 टुकड़ों में काटा। शव के हाथ, पैर और सिर को धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद इन मानव अंगों को बोरे में भर लगभग घर के पास में ही 10 फीट गड्ढा खोदकर उसमें दफना दिया। यह गड्ढा गुलमुद्दीन के घर के बाहर है। इस बीच अनीता चौधरी के घर नहीं पहुँचने पर परिजनों ने तलाश शुरू कर दी।

पहले से ही रची गई थी साजिश

पुलिस की पूछताछ में आबिदा ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। इस साजिश के तहत JCB मशीन से गुलमुद्दीन के घर के आगे 10 फ़ीट गड्ढा पहले से खोदवा दिया गया था। शव के टुकड़े करने के लिए बाजार से मांस काटने वाला चाकू भी पहले से मँगवा लिया गया था। गड्ढे से लाश की बदबू ना आए, इसके लिए इत्र की शीशियाँ भी उसने खरीदकर लाश पर छिड़क दी थी।

पुलिस ने अनीता की एक अंगूठी आबिदा के पास से बरामद की है। अनीता की मोबाइल को आरोपितों ने गायब कर दिया है, जिसकी खोजबीन जारी है। फरार गुलमुद्दीन की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। अनीता के पति द्वारा हत्या का केस दर्ज करवाया गया है, जिसमें गुलमुद्दीन फारुकी और उसकी बीवी आबिदा के साथ तैयब अंसारी नाम के व्यक्ति को भी नामजद किया गया है।

सर्व समाज के साथ धरने पर परिजन

अनीता के परिजनों ने अभी तक शव नहीं उठाया है। इसका पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ है। तेजाजी मंदिर में धरने पर बैठे हैं। वहाँ हिन्दू संगठनों के लोग भी मौजूद हैं। इस धरने को सर्व समाज का समर्थन भी मिल रहा है। इन लोगों की माँग है कि पूरे प्रकरण की हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जाँच करवाई जाए। इसी के साथ मृतका के बेटे को सरकारी नौकरी के साथ परिजनों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा भी मिले।

अनीता के पति मनमोहन और अनीता के पार्लर में काम करने वाली सुनीता उर्फ सुमन सेन के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हो रहा है। इसमें सुनीता किसी अंसारी का नाम ले रही है। अंसारी को केस में नामजद तैयब अंसारी माना जा रहा है। इसमें सुनीता अपनी जान खतरे में बताती है और कई लोगों के नाम भी लेती है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुनीता ने मनमोहन से कहा था कि तैयब अंसारी उसको मार सकता है। शव मिलने से पहले की इस बातचीत में सुनीता ने मनमोहन से कहा था, “तैयब दीदी (अनीता) को निपटा दिया होगा। अब मैं अंसारी को फोन करूंगी तो चार दिन के अंदर वह मुझे भी मरवा देगा।” मृतक अनीता के पति ने ऑडियो की पुष्टि की है। अब इस मामले में कई मोड़ आ गए हैं।

बाज नहीं आ रही जस्टिन ट्रूडो की सरकार, भारतीय राजनयिकों की ऑडियो-वीडियो निगरानी: कूटनीतिक प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर कनाडा को लताड़

भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है। इस बीच भारत ने कनाडा पर आरोप लगाया है कि वह भारतीय राजनयिकों और वाणिज्य दूतावास अधिकारियों की निगरानी, उत्पीड़न और जासूसी कर रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार (2 नंबर 2024) को इस मुद्दे पर बयान दिया, जिसमें कहा गया कि कनाडाई सरकार ने न केवल भारतीय राजनयिकों की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की, बल्कि उनके संचार को भी इंटरसेप्ट किया है। उन्होंने इसे ‘अत्यंत गंभीर’ मुद्दा बताया और कहा कि यह सभी कूटनीतिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

रणधीर जायसवाल ने बताया कि कनाडाई अधिकारियों ने भारतीय राजनयिकों को हाल ही में सूचित किया कि वे लगातार निगरानी में हैं। भारत ने इसे ‘उत्पीड़न’ करार देते हुए कहा कि इन हरकतों का उद्देश्य राजनयिकों को डराना और उनके कामों में बाधा डालना है। विदेश मंत्रालय ने कनाडा की इस हरकत की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक नियमों के खिलाफ बताया।

भारत का कहना है कि कनाडा की सरकार तकनीकी का सहारा लेकर अपनी इस हरकत को जायज ठहराने की कोशिश कर रही है। जायसवाल ने कहा, “हमारे कूटनीतिक और वाणिज्य दूतावास के अधिकारी पहले से ही चरमपंथ और हिंसा के वातावरण में काम कर रहे हैं, ऐसे में उन पर इस तरह की निगरानी और जासूसी का सीधा मतलब उनका उत्पीड़न है।”

इस विवाद की जड़ कनाडा के उपविदेश मंत्री डेविड मॉरिसन का बयान है, जिसमें उन्होंने भारतीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी टिप्पणी की थी। भारत ने इसे ‘बेहद बेतुका’ और ‘निराधार’ बताते हुए कड़े शब्दों में विरोध जताया और कहा कि ऐसी टिप्पणियों से द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

पिछले महीने कनाडा ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारतीय राजनयिकों को ‘जाँच के दायरे’ में बताते हुए उन पर नजर रखने का संकेत दिया था। इसके बाद भारत ने अपने उच्चायुक्त और अन्य प्रमुख राजनयिकों को कनाडा से वापस बुला लिया था। कनाडा ने भी जवाबी कदम उठाते हुए कई भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।

युवती को जबरन हिजाब पहनाना चाहता था ईरान का कठमुल्ला शासन, ब्रा-पैंटी में पूरी यूनिवर्सिटी घूमी: Video वायरल होने के बाद बता रहे ‘मानसिक बीमार’

ईरान के एक विश्वविद्यालय के भीतर एक महिला ने अपने कपड़े उतार कर विरोध किया। महिला ने अपने अंडरगारमेंट छोड़ कर सब कुछ उतार दिया और विश्वविद्यालय में घूमती रही। महिला की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दावा है कि यह कदम महिला ने हिजाब पहनने के दबाव के विरोध में उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान के आजाद इस्लामिक विश्वविद्यालय में शनिवार (2 नवम्बर, 2024) को एक छात्रा ने यह कदम उठाया। बताया गया कि महिला पर ईरान की पुलिस ने हिजाब पहनने का दबाव डाला था। इसके बाद वह इन पुलिसकर्मियों से भिड गई।

इसके बाद महिला ने अपने कपड़े उतार दिए। वह केवल अंडरगारमेंट में रह गई। उसने इसी अवस्था में पूरे विश्वविद्यालय परिसर के चक्कर काटे। इस दौरान बाकी छात्र-छात्राएँ उसकी फोटो वीडियो बनाते रहे। महिला ने एक जगह पर बैठ कर विरोध प्रदर्शन भी किया।

उसकी कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। एक वीडियो में महिला को अंडरगारमेंट में एक सीमेंट के स्लैब पर बैठे हुए देखा जा सकता है। वह इस दौरान कुछ लोगों से बहस कर रही है। उसके आसपास कई लोग इकट्ठे हैं और देख रहे हैं।

एक अन्य वीडियो में वह विश्वविद्यालय परिसर में घूमती हुई दिखाई पड़ती है। इस बीच वह कपड़े फाड़ती है। उसका वीडियो बना रहे लड़के-लडकियाँ आश्चर्य में शोर मचाते हुए भी दिखते हैं। महिला की पहचान नहीं हो पाई है।

महिला को इस विरोध प्रदर्शन के बाद गार्ड एक गाड़ी में उठा ले गए। विश्वविद्यालय ने कहा है कि महिला मानसिक तौर पर बीमार है इसलिए उसने यह कदम उठाया। विश्वविद्यालय ने बताया है कि महिला को पुलिस ले गई और उसे अब इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है।

वहीं सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा है कि महिला ने यह ईरान के मुल्लों की कट्टरपंथी सरकार का विरोध करने के लिए उठाया और अब उसकी विश्वसनीयता खत्म करने को उसे मानसिक तौर पर बीमार बताया जा रहा है। ईरान में महिला अधिकारों के लिए बोलने वालों ने दावा किया है कि महिला के साथ इसके बाद ज्यादती की गई है और वह कोमा में है।

गौरतलब है कि ईरान में महिलाओं के हिजाब और पहनावे को लेकर काफी कड़े नियम हैं। ईरान में महिलाओं को हिजाब पहनने पर मजबूर करने के लिए यहाँ सड़कों पर पुलिस घूमती रहती है। महिलाएँ इसका लम्बे समय से विरोध करती रही हैं। 2022 में ऐसे ही एक मामले में पुलिस ने नाबालिग को मार दिया था। इसके बाद ईरान में काफी प्रदर्शन हुए थे।

दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे बांग्लादेश के हिंदू, चटगाँव में 30 हजार लोगों की रैली: शेख हसीना के जाने के बाद से निशाने पर, सुरक्षा देने में अंतरिम सरकार नाकाम

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों और उत्पीड़न की घटनाओं में हाल के महीनों में तेजी से इजाफा हुआ है, जो देश के बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल का गहरा संकेत देता है। इस बीच, शुक्रवार (1 नवंबर 2024) के बाद शनिवार (2 नवंबर 2024) को भी बाँग्लादेश के चटगाँव में 30,000 से अधिक हिंदू प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी सुरक्षा की माँग की।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से हिंदू नेताओं पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप वापस लेने की भी माँग की। उल्लेखनीय है कि इन आरोपों का सामना 19 हिंदू नेताओं को करना पड़ रहा है, जिनमें से कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है। ये आरोप तब लगे जब एक रैली के दौरान एक भगवा झंडा बांग्लादेश के झंडे के ऊपर फहराने की घटना हुई, जिसे सरकारी ध्वज का अपमान माना गया। हालाँकि हिंदू नेताओं का कहना है कि ये आरोप झूठे हैं और उनका उद्देश्य केवल समुदाय को डराना है।

शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन के बाद जातीय पार्टी और उसके समर्थकों पर भी हमले बढ़े हैं। जातीय पार्टी का मुख्यालय हाल ही में उपद्रवियों द्वारा आग के हवाले कर दिया गया, जिसके बाद पार्टी प्रमुख जीएम क़ादिर ने हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जातीय पार्टी अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण रैली जारी रखेगी, भले ही इसके लिए उनके समर्थकों को खतरा झेलना पड़े।

बता दें कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने और एक इस्लामी कट्टरपंथी समर्थित अंतरिम सरकार के गठन के बाद से हिंदू, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरी है। बांग्लादेश में लगभग 170 मिलियन की आबादी है, जिसमें 91% मुस्लिम और मात्र 8% हिंदू हैं।

हालाँकि इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव में बढ़ोतरी से हिंदू समुदाय की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है, जो चिंता का विषय है। इस बीच, यूनुस सरकार ने इस्लामिक कट्टरपंथियों को कानूनी कवच दे दिया है। शेख हसीना सरकार को गिराने वाले प्रदर्शनों और हिंदुओं को निशाना बनाने वाले मामलों में ऐसे कट्टरपंथियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

हिंदू अल्पसंख्यकों की घटती जनसंख्या, उनके धार्मिक स्थलों और संपत्तियों पर हमलों की घटनाएँ बांग्लादेश में एक बड़े संकट का संकेत देती हैं। नए इस्लामी कट्टरपंथी सरकार के अधीन स्थिति और भी विकट हो रही है, क्योंकि ये ताकतें देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं और उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं कर रही है।

हाथों में सारंगी, तन पर गेरुआ वस्त्र… साधु बन भीख माँगते पकड़े गए सोहराब, नियाज और शहजाद: खुद को गोरखनाथ मठ से बता रहे थे, गंगाजल पीने को नहीं थे तैयार

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में लोगों ने शुक्रवार (1 नवंबर 2024) को गेरुआ वस्त्र पहनकर साधु वेश में भीख माँगते हुए तीन मुस्लिमों को पकड़ा है। तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने इन पर FIR दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है। इनके नाम सोहराब, शहज़ाद खान और नियाज़ हैं। तीनों पड़ोसी जिले मऊ के रहने वाले हैं।

जब स्थानीय लोगों ने इनसे ऐसा करने के बारे में पूछा तो इन्होंने बताया कि ये उनका खानदानी पेशा है। यही हरकत उनके बाप-दादा भी करते आए हैं। इस स्थानीय हिंदुओं ने इन साधु वेशधारियों से गंगाजल पीने के लिए कहा। हालाँकि, तीनों ने गंगाजल पीने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचित करके तीनों को उसके हवाले कर दिया।

मामला गाजीपुर के थाना क्षेत्र कासिमाबाद का है। शुक्रवार को शिवकुमार गुप्ता ने पुलिस में तहरीर देकर बताया कि 1 नवंबर को वो अपने घर पर मौजूद थे, तभी गेरुआ वस्त्रों में साधु वेश बनाकर तीन लोग उनके पास भीख माँगने आए। जब शिवकुमार ने जब इनके नाम-पूछे तो ये तीनों आनाकानी करने लगे। इन तीनों ने खुद को गोरखनाथ मंदिर से जुड़ा योगी बताया।

हालाँकि, इनके हावभाव को देखकर शिवकुमार और अन्य लोगों को इन पर शक गहरा गया। जोर देकर पूछने पर तीनों ने कबूल किया कि वो मुस्लिम हैं। इन्होंने अपने नाम सोहराब, नियाज़ और शहजाद खान बताए। ये सभी पड़ोसी जिले मऊ के थाना क्षेत्र दोहरीघाट में पड़ने वाले गाँव अतरसांवा के रहने वाले हैं।

पूछताछ के दौरान इन सभी ने शिवकुमार गुप्ता से विवाद भी किया और उत्तेजना में कहा, “तुम कौन होते हो पूछने वाले।” शिवकुमार तीनों को थाने ले जाने की कोशिश कर रहे थे तो वो झगड़ना शुरू कर दिए।शिकायतकर्ता ने इन नियाज़, सोहराब और शहज़ाद को बहरूपिया बताते हुए कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने अपने साथ भविष्य में किसी अनहोनी की भी आशंका जताई है।

पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319 (1) के तहत दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। डिप्टी एसपी कासिमाबाद के मुताबिक, तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सोहराब, कासिम और नियाज़ अपना गुनाह कबूल करते दिखाई दे रहे हैं। लोग उन पर हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं। जवाब में तीनों ने कहा कि गेरुआ कपड़ों में सिर्फ वही नहीं, उनके बाप-दादा भी भीख माँगकर गुजारा किए हैं। तीनों ने मजदूरी करके कमाने-खाने की नसीहत को भी टाल दिया।

बांधवगढ़ में एक के बाद एक 10 हाथी मरे मिले, क्या मध्य प्रदेश में इंसानों को मारकर बदला ले रहे हैं उनके साथी: जानिए क्या है मामला, कितनी मौतें अब तक

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में हाथियों ने 2 लोगों पर हमला करके उनकी जान ले ली। एक युवक को गाँव वालों के सामने पटक पटक कर घायल कर दिया। यह घटना बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े इलाके में हुई है। घटना से कुछ दिन पहले ही यहाँ 10 हाथियों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो चुकी है। हाथी के हमले से प्रभवित लोग इसे बदला मान रहे हैं। हमले के बाद सीएम मोहन यादव ने एक टीम भी बाँधवगढ़ भेजी है। मामले में वन विभाग भी खाली हाथ है, कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा है।

2 को मारा, 1 को किया घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहाँ के चंदिया क्षेत्र में शनिवार (2 नवम्बर, 2024) को बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के भीतर से आए तीन हाथियों ने रामरतन यादव की हत्या कर दी। रामरतन यादव सुबह अपने खेतों की तरफ गए हुए थे। उनको हाथी ने काफी दूर तक खींचा और मार दिया। उनका शव उनके बेटे को मिला।

पास में खड़े लोगों ने जानकारी दी कि रामरतन यादव को हाथियों ने मार दिया है। वहीं पास के ही इलाके के भैरव कोल की हत्या भी हाथियों ने कर दी। भैरव कोल भी अपने खेतों की तरफ जा रहे थे, इसी दौरान उन पर हाथियों ने हमला किया और हत्या कर दी।

दोनों को मारने के अलावा हाथी और भी लोगों पर हमलावर हुए। यहीं के एक गाँव में फसल काट रहे लोगों पर हाथियों ने हमला कर दिया। हाथियों ने सचिन नाम के एक युवक को उठा लिया और उसे पटक पटक कर घायल कर दिया। गाँव वालों ने किसी तरह हाथियों को जंगल की तरफ वापस भेजा।

हमले में सचिन की हड्डियाँ टूट गई हैं और उसका इलाज चल रहा है। गाँव वाले अब हाथियों के आतंक के कारण फसल भी नहीं काट पा रहे। वहीं हाथी फसल बर्बाद करने में जुटे हुए हैं। गाँव वालों ने बताया है कि हमला करने वाले हाथियों की संख्या तीन है।

10 हाथियों की हुई है मौत

हाथियों के हमले का यह सिलसिला दिवाली के समय से चालू हुआ। यहाँ 29 अक्टूबर के दिन से हाथियों की मौत चालू हो गई। यह मौतें चंदिया के पास के गाँव सलखनिया में होनी चालू हुई थी। 29 अक्टूबर को 4 जबकि 30 अक्टूबर को भी 4 की मौत हुई। बाकी हाथी वन विभाग को बीमार मिले। इलाज चालू हुआ लेकिन 31 अक्टूबर आते-आते 2 और ने दम तोड़ दिया।

इस तरह मरने वाले हाथियों की संख्या 10 पहुँच गई। एक हाथी को वन विभाग बीमारी से ठीक करने में कामयाब रहा। हाथियों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन स्थानीय प्रशासन का दावा है कि यह मौतें पास के गाँव में लगाई जाने वाली कोदों की फसल खा कर हुई हैं। दावा है कि हाथियों ने ज्यादा फसल खा ली और इससे उनकी तबियत बिगड़ गई।

गाँव वालों ने बताया- हाथी बदला ले रहे

गाँव वालों का दावा है कि हमला करने वाले 3 हाथी, उसी झुंड का हिस्सा हैं जिसके बाकी 10 हाथियों की रहस्यमयी तरीके से मौत हुई है। समाचार पत्र दैनिक भास्कर को गाँव के लोगों ने बताया है कि उन्होंने पहली बार हाथियों को रौद्र रूप में देखा है। हाथी इससे पहले कभी भी बेकाबू नहीं हुए हैं।

गाँव के लोगों का कहना है कि इससे पहले हाथी उनके गाँव की सीमा तक आते थे लेकिन इंसानों पर हमला नहीं करते थे। हालाँकि, वह वह लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाथी इससे पहले फसल खराब किया करते थे। उन्होंने कई बार पूरी पूरी फसल तबाह की है लेकिन यह रूप पहली बार दिखा है।

गाँव के कुछ लोगों का दावा है कि अपने साथियों की मौत के बाद हाथी परेशान इसलिए हमला कर रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि जो हाथी हमला कर रहे हैं, उन्होंने भी वह जहरीला पदार्थ खाया है, जिससे बाकी हाथी मारे गए हैं। ऐसे में उनका संतुलन बिगड़ गया है। अब गाँव वाले बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।

CM ने टीम भेजी, रिपोर्ट आना बाकी

हाथियों के हमले में हुई मौतों के बाद राज्य के CM मोहन यादव ने एक आपातकालीन बैठक बुला कर एक टीम बाँधवगढ़ भेजी है। दो सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट CM को सौंप दी गई है। बताया गया है कि टीम ने भी हाथियों की मौत का कारण प्रथम दृष्टया कोदों की फसल बताया है। टीम हाथियों की मौत के पीछे साजिश की बात नकारी है।

वहीं स्थानीय वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बताने से हिचक रहे हैं। स्थानीय वन अधिकारी कुलदीप त्रिपाठी ने बताया है कि उन्हें 2 लोगों के मौत की सूचना मिली थी। हाथियों ने यहाँ हमला किया है। उन्होंने बताया है कि वन विभाग की टीम लगातार काम्बिंग कर रही है और आसपास के गाँवों में मुनादी करवाई जा रही है।

चीन के करीब पहुँची भारतीय वायुसेना, 13700 फीट की ऊँचाई पर एयरफील्ड तैयार: कभी लद्दाख में एयरस्ट्रिप खोलने पर कॉन्ग्रेस की सरकार ने पूछा था- क्यों किया ऐसा?

लद्दाख के न्योमा में भारत का अत्याधुनिक एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) लगभग तैयार है, जो चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित है। इसे 13,700 फीट की ऊँचाई पर बनाया गया है, और इसमें 3 किलोमीटर लंबा रनवे है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।

मोदी सरकार द्वारा ये प्रोजेक्ट साल 2021 में शुरू हुआ था और इसके लिए सरकार ने 214 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। इस एएलजी के तैयार होने से भारतीय सुरक्षा बलों को उत्तरी सीमा पर त्वरित रूप से पहुँचने में सहायता मिलेगी।

न्योमा एएलजी की स्टेटजिक लोकेशन बनाती है इसे खास

लद्दाख में न्योमा ALG का लोकेशन इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यह LAC के सबसे नजदीक स्थित हवाई अड्डा है, जो कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में भारतीय वायुसेना को सीधी पहुँच प्रदान करेगा। भारत-चीन तनाव के दौरान, इस तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल के वर्षों में गलवान की घटना के बाद से भारत-चीन के बीच विवादित क्षेत्रों में अक्सर तनाव बना रहता है। इस नई एयरस्ट्रिप के जरिए भारत अपनी सामरिक और लॉजिस्टिक क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ा सकता है, क्योंकि एलएसी से इसकी दूरी महज 30 किमी है।

दौलत बेग ओल्डी के लिए सरकार से छिपाकर वायुसेना ने किया था काम

इससे पहले, एक अन्य एयरस्ट्रिप दौलत बेग ओल्डी (DBO) को 2008 में बिना सरकारी अनुमति के दोबारा शुरू किया गया था। ये हवाई पट्टी 16,614 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसे भी एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 43 साल तक बंद रहने के बाद वायुसेना के उस समय के उप प्रमुख एयर मार्शल पीके बारबोरा ने इसे पुनः चालू कराया था।

साल 2020 में पीके बारबोरा ने बताया था कि इस मिशन को पूरी तरह सीक्रेट रखा गया था, और तत्कालीन रक्षा मंत्री को भी मिशन के पूरा होने के बाद ही इसकी जानकारी दी गई थी। बारबोरा ने बताया कि अगर उन्होंने सरकार से लिखित अनुमति माँगी होती, तो कई बार की तरह उनकी इस योजना को भी रोका जा सकता था। इसलिए उन्होंने अपने समकक्ष अधिकारियों से बात करके, और बिना किसी लिखित आदेश के, दौलत बेग ओल्डी को फिर से चालू करने का निर्णय लिया।

इस बार सरकार ने खुलकर किया वायुसेना का सहयोग

इस बार न्योमा एएलजी की स्थापना में सरकार का पूर्ण समर्थन मिला है। सरकार ने न केवल बजट आवंटित किया बल्कि सेना को पूरी छूट भी दी। हाल ही में भारत और चीन के बीच तनाव के चलते, भारत ने अपनी सीमाओं पर बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए तेजी से काम किया है। यह रणनीति दिखाती है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार है।

सेना के साथ ही नागरिकों को भी होगा फायदा

न्योमा एएलजी के चालू होने से भारत की LAC पर ऑपरेशनल क्षमता में भारी इजाफा होगा। सेना अब ऊँचे और दुर्गम इलाकों में त्वरित रूप से पहुँच सकती है। इसके अलावा, इस एएलजी से नागरिक क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी सुधरेगी, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। स्थानीय स्तर पर यात्राओं के लिए इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे आपूर्ति और अन्य जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सकेगा।