Home Blog Page 596

‘ऊपर से आदेश’ है इसलिए राम गोपाल मिश्रा के घर नहीं जा सकते, हिंदू पीड़ित बात करने से डरते हैं क्योंकि ‘चुप रहने का दबाव’ है: बहराइच में 7 दिन तक ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने जो भोगा, वह जस का तस

बहराइच में माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस में 13 अक्टूबर को भड़की हिंसा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब सामान्य हो रहे हैं। पुलिस का पहरा भी काफी हद तक कम हो गया है। CCTV फुटेज, गवाहों व अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारियाँ कर रही है। पुलिस के हाथों से बेकाबू हुए हालात संभालने में PAC का बेहद अहम रोल रहा, जिसकी वजह से प्रशासन को केंद्रीय बलों की जरूरत नहीं पड़ी।

ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई कि पुलिस का ज्यादातर फोकस इस बात पर केंद्रित रहा कि पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा सामने न आने पाए। उनके गाँवों के रास्तों पर बैरिकेड कर दिए गए थे जबकि सोशल मीडिया पर भी हिंदूवादियों को हड़काया गया। वहीं मुस्लिम पक्ष खुल कर मीडिया इंटरव्यू देता रहा। सोशल मीडिया पर भी पुलिस इस्लामी हैंडलों के प्रति नरम रही। हालाँकि इन सबके बावजूद हिन्दू पक्ष का कहना है कि वो डरने वाले नहीं हैं और आने वाले समय में इससे भी बड़ी शोभा यात्रा निकालेंगे।

पीड़ित हिन्दुओं से मिलने की राह पर ही पहरा

अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हमने ये पाया कि शुरुआत में पुलिस का फोकस इस बात पर ज्यादा था कि हिंसा में पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा सामने न आने पाए। इसकी शुरुआत रामगोपाल से ही करते हैं। मेरे द्वारा उनके घर जाने के कम से कम 5 अलग-अलग दिनों व भिन्न-भिन्न समय पर किए गए प्रयास सफल नहीं हो पाए। कभी घर के ठीक बाहर मौजूद भारी फ़ोर्स ने मुझे रोक दिया तो कभी 3 किलोमीटर पहले ही सोतिया भट्टा क्षेत्र में लगे बैरिकेड से आगे नहीं जाने दिया। हमने जब इसकी वजह पूछी तो बताया गया कि ‘ऊपर’ से आदेश हैं।

रामगोपाल मिश्रा के घर से 3 किलोमीटर पहले ही रोका गया हमें

रामगोपाल के बाद हमने विनोद और सत्यवान मिश्रा के भी गाँव सिपहिया प्यूली जाने के प्रयास किए तो रास्ते में पुलिस वाले मिल गए। यहाँ भी हमें रोका और आगे नहीं जाने दिया गया। तीसरी जगह गौरिया घाट थी, जहाँ प्रतिमाओं का विसर्जन होना था। वहाँ भी जाने के क्रम में खूब रोकटोक हुई। महसी बाजार के निवासी आदित्य मिश्रा ने ऑपइंडिया को जैसे-तैसे छिप कर इंटरव्यू दिया भी, तो अगले ही दिन उनके घर पुलिस पहुँच गई और गिरफ्तारी के बाद चालान कर जेल भेज दिया गया। बंद कैमरे पर चोटिल विनोद मिश्रा ने भी हमें बताया उन पर चुप रहने का दबाव है। तिवारी का पुरवा की तरफ जाने में भी कमोबेश यही दिक्क्तें झेलनी पड़ीं।

कई ऐसे हिन्दू भी रहे, जिन्होंने खुद को हिंसा पीड़ित बता कर हमसे फोन नंबर शेयर किया था। इन्होने अगले दिन या थोड़ी देर बाद मिलने का वादा किया था। हालाँकि बाद में उनको कई बार कॉल करने के बावजूद उनके फोन नहीं उठे। जब हम दिव्यांग पीड़ित सत्यवान मिश्रा का इंटरव्यू कर रहे थे, तब उनके परिवार के ही सदस्य विनोद मिश्रा के मोबाइल नंबर पर किसी की कॉल भी आई और उनको मीडिया से दूर रहने के लिए कहा गया। मीडिया से दूरी बनाने के लिए आदित्य मिश्रा पर भी दबाव बनाया गया है।

हालाँकि इसके ठीक उलट मुस्लिम पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए लगातार इंटरव्यूदेता रहा। उनके द्वारा दुकानों से सामान निकालने से ले कर घरों के हिस्से खुद तोड़े जाने के एक-एक पल को बाकायदा सभी चैनलों पर बिना आपत्ति के लाइव प्रसारित किया गया। नथुआपुर से महसी के बीच लगभग 8 किलोमीटर की दूरी में हमें तमाम मुस्लिम परिवार पूरी तरह से भयमुक्त हो, बिना किसी दबाव के मीडिया में इंटरव्यू देते मिले। इसी दोहरे रवैये की वजह से शुरुआत में हिंसा का एकतरफा पीड़ित मुस्लिम पक्ष और हमलावर के तौर पर हिन्दुओं को साबित करने की साजिश रची गई थी।

सोशल मीडिया पर भी हिंदूवादी ही हड़काए गए

बहराइच प्रशासन का दोतरफा रवैया सिर्फ जमीनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी साफ देखने को मिला। उन तमाम हैंडलों को बहराइच पुलिस द्वारा एक्शन लेने की धमकी दी गई, जिन्होंने या तो हिन्दुओं की पीड़ा दिखाई या मुस्लिम पक्ष के कारनामों को उजागर करना चाहा। यह धमकी ऑपइंडिया और पांचजन्य सहित कई अन्य संस्थानों को मिली। तमाम चश्मदीदों के बयानों के बावजूद मस्जिद से हमले के एलान की बात को सिरे से नकारने वाली पुलिस ने तो दैनिक जागरण को नोटिस भी जारी करने का फरमान सुना डाला। हिंदूवादी लोगों और संस्थानों से हर ट्वीट और हर शब्द का सबूत भी माँगा गया।

जियाउर रहमान और पांचजन्य के लिए बहराइच पुलिस की अलग-अलग शब्द शैली

वहीं दूसरी तरफ द वायर जैसी संस्थाएँ अपने मनमाफिक खबरों को परोसती रहीं। एकतरफा हिन्दुओं को ही दोषी बताने वाले मुस्लिमों के इंटरव्यू पर बहराइच पुलिस ने न तो कोई आपत्ति जताई और न ही उनसे सबूत माँगा। गिरफ्तारी के बाद अपने परिजनों को बेगुनाह बताती मुस्लिम महिलाओं के बयानों के बीच प्यार भरे कमेंट कर के किसी बेगुनाह के साथ अन्याय न होने देने जैसा भरोसा भी दिया जाता था। हालत तो यहाँ तक पहुँच गए थे कि बहराइच पुलिस ने आतंकियों को वकील दिलाने वाली संस्था जमीयत को शाँति दूत समझा और उनके उर्दू भाषा में लिखे पत्रों को आधिकारिक तौर पर शेयर किया।

कुछ ऐसा ही हुआ था, जब सोशल मीडिया में खबर उड़ी कि रामगोपाल मिश्रा के शव के साथ बर्बरता हुई थी। तब नाखून आदि उखाड़ लेने का दावा कई जगहों पर हुआ जिस पर फ़ौरन ही बहराइच पुलिस एक्टिव हुई और इसे भ्रामक बताते हुए खंडन जारी कर दिया। हालाँकि इस खंडन के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। इसके उलट जब मुस्लिम पक्ष अपने घरों को बेरहमी से जलाने और महिलाओं संग छेड़खानी आदि करने जैसे गंभीर आरोप बिना सबूत के मढ़ रहे थे, तब बहराइच पुलिस की तरफ से कोई खंडन जारी नहीं हुआ।

कितना भी दबा लो, शोभा यात्रा निकलती रहेगी

पहले मज़हबी हमला और अब तमाम प्रकार के दबाव झेल रहे महसी क्षेत्र के पीड़ित हिन्दुओं का साफ ऐलान है कि वो अपनी धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात नहीं होने देंगे, भले ही इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े। विनोद मिश्रा, सत्यवान, आदित्य और मारुति नंदन आदि ने साफ़ तौर पर कहा कि ये हमला सिर्फ इसलिए हुआ, जिससे हिन्दू समाज अपनी शोभा यात्रा निकालना बंद कर दे। इन सभी ने ‘मुस्लिम इलाका’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, लेकिन वो अगले साल भी आने वाले हर साल वो शोभा यात्रा निकालते रहेंगे।

हमले से ठीक पहले शोभा यात्रा का दृश्य

पीड़ित हिन्दुओं ने एक स्वर में एलान किया है कि ये तमाम सनातनी परम्पराएँ उनके पूर्वजों द्वारा एक धरोहर के तौर पर उनको सौंपी गई हैं। इन परम्पराओं पर कुठाराघात कतई सहन नहीं किया जाएगा, भले ही उनका किसी भी स्तर पर कितना ही दमन क्यों न हो। यहाँ तक कि पीड़ितों ने खुद को रामगोपाल की तरह बलिदान देने के लिए भी तैयार बताया। वहीं रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने भी एलान किया है कि वो अपने पति के हत्यारों को मृत्युदंड की सजा दिलाने के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करेंगी।

हिंसा काबू करने में PAC की भूमिका अहम, नहीं उतारने पड़े केंद्रीय बल

बहराइच हिंसा की शुरुआत में बहराइच पुलिस पर लापरवाही बरतने और लॉ एन्ड ऑर्डर न संभाल पाने के आरोप लगे हैं। ये आरोप मृतक रामगोपाल के परिजनों ने भी सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल कर लगाए। कार्रवाई के तौर पर तत्काल ही चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और डिप्टी एसपी को सस्पेंड कर दिया गया। कुछ ही घंटों बाद एडिशनल एसपी को भी मुख्यालय अटैच कर दिया गया। हालत बिगड़ने के बाद UP पुलिस की ही एक विंग PAC ने मोर्चा संभाला था।

गाँव नथुआपुर में गश्त करते PAC के जवान

PAC ने कुछ ही घंटों में स्थिति को संभाल लिया था। कई मौकों पर हमें सीनियर आईपीएस अजय कुमार न सिर्फ घटनास्थल महराजगंज बल्कि आसपास के गाँवों में भी दल-बल के साथ गश्त करते मिले। STF प्रभारी आईपीएस अमिताभ यश के आने से भी सरकारी मशीनरी काफी एक्टिव हुई थी। इसी सामूहिक सक्रियता से 13 अक्टूबर को भड़की हिंसा उसी दिन रुक गई। यही वजह थी कि केंद्रीय बलों को भी उतारने की जरूरत नहीं पड़ी। थानों और जिले में तमाम नए अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं। वो भी आरोपितों को चिन्हित कर के आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटे हुए हैं।

‘हलुलुईया’ पर छमक-छमक कर डांस, दीवाली पर पटाखों से समस्या: राजपाल यादव का पाखंड देख भड़के नेटिजन्स, पूछा- ईद-क्रिसमस पर क्यों नहीं उमड़ता पशु प्रेम

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की दीवाली से पहले एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में वो दीवाली में पटाखे फोड़ने का विरोध कर रहे हैं और समझा रहे हैं कि पटाखे फोड़ने से जानवर डरते हैं और वायु प्रदूषण होता है इसलिए बिन पटाखे फोड़े दीवाली मनाई जाए।

उन्होंने इस वीडियो को साझा करते हुए कैप्शन में लिखा- दीवाली की मिठाई और रंगोली तो डबल हो सकती है लेकिन प्रदूषण नहीं। आइए दीवाली खुशियों के साथ मनाएँ न कि धुएँ के साथ क्योंकि प्रकृति माँ भी हैप्पी दीवाली मनाना डिजर्व करती हैं।

उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। नेटीजन्स उनसे सवाल कर रहे हैं कि आखिर हिंदू त्योहार पर वो इस तरह का ज्ञान देने क्यों आए हैं। ईद पर करोड़ों जानवर कटते हैं तब कोई कुछ क्यों नहीं कहता या जब क्रिसमस पर पटाखे फोड़े जाते हैं तो क्यों उनका विरोध नहीं होता।

इसके अलावा राजपाल यादव की कुछ पुरानी वीडियोज भी शेयर की जा रही है। इन वीडियोज में राजपाल यादव उन विवादित पादरी बजिंदर सिंह के साथ दिखाई दे रहे हैं जो दावा करते हैं कि उनकी प्रार्थना से कैंसर, पैरालाइसिस जैसी बीमारी ठीक हो जाती हैं।

देख सकते हैं कि बजिंदर के पास राजपाल यादव कैसे भक्त बनकर खड़े है। किसी वीडियो में उन्हें चूम रहे हैं तो कहीं उन्हें गले लगाकर ‘यशु-यशु’ का म्यूजिक बनवाकर नाच रहे हैं और कहीं उनका हाथ पकड़कर चल रहे हैं।

ऐसे में लोग उन्हें कह रहे हैं कि राजपल यादव जो आजकल ईसाई धर्म मान रहे हैं उन्हें हिंदुओं के त्योहार दीवाली से क्या समस्या हो रही है। पिक्चर पिट रही हो तो कम से कम काम तो अच्छे करने चाहिए।

बता दें कि राजपाल यादव भूल भुलैया जैसी फिल्मों में हिंदू धर्म और ब्राह्णणों की वेशभूषा का मजाक बना चुके हैं। इसके अलावा जो राजपल यादव आज दीवाली पर पशु प्रमी बनकर दिखा रहे हैं वो समय आने पर ‘बिरयानी बाय किलो’ के विज्ञापन कर चुके हैं।

लोगों का यही सारी वीडियोज देख पूछना है कि आखिर ये चिंताएँ बॉलीवुड कलाकारों में सिर्फ तभी क्यों जागती है जब हिंदू पर्व आए। न क्रिसमस और न ईद कोई प्रेम नहीं जागता।

मदरसों के बाद अब मकतब की बारी, UP ATS खँगाल रही रिकॉर्ड-फंडिंग की जुटा रही जानकारी: जानिए कैसे चलते हैं दीनी तालीम के ये ‘कोचिंग सेंटर’

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राज्य में मदरसों की जाँच के बाद अब मकतबों पर भी नज़र डालना शुरू कर दिया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, UP ATS ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 473 मकतबों की जाँच शुरू की है, जिनमें से कई बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस बाबत अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं।

इन मकतबों में से अधिकांश मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में स्थित हैं, और UP ATS इन संस्थानों की फंडिंग और उनके संचालन के स्रोतों की जाँच कर रही है। मकतब एक प्रकार का स्थान है, जहाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम बच्चों को दीनी शिक्षा प्रदान की जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ATS की जाँच में अब तक सबसे अधिक 190 मकतब शामली में पाए गए हैं। इसके बाद मुज़फ्फरनगर में 165 और सहारनपुर में 118 मकतब संचालित हो रहे हैं। जाँच में ATS ने कई बिंदु तय किए हैं, जिनमें मकतबों की मान्यता न होने के कारण, फंडिंग के स्रोत, संचालन का समय, बच्चों की संख्या, सुरक्षा प्रबंध, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संबद्धता के स्रोत प्रमुख हैं। मकतबों की जाँच के लिए ATS ने सहारनपुर मंडल के तीन जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं।

शुरुआती जाँच में कई मकतबों में खामियाँ पाई गई हैं, साथ ही उनके वित्तीय लेन-देन में भी संदेहजनक गतिविधियाँ देखी गई हैं। ATS ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों का व्यापक सर्वेक्षण कराया था, जिसके तहत कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया था।

सहारनपुर मंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आने वाले गोंडा जिले में भी कई मकतब चलते पाए गए हैं। यहाँ के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अपने जिले में चल रहे 20 मकतबों को बंद करने की सिफारिश शासन को भेजी है। यहाँ कुल 286 मकतब चलते पाए गए हैं जिसमें 19 गैर मान्यता प्राप्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ATS मुख्यालय से प्रदेश के हर जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से मकतबों की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

शासनादेश

क्या होता है मकतब

ऑपइंडिया ने मकतब के बारे में गाजियाबाद के मौलवी अब्दुल सलाम से जानकारी ली। उनके अनुसार, मकतब एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पढ़ाई-लिखाई का स्थान’। उन्होंने बताया कि मकतब और मदरसे में अंतर है। मदरसे में पढ़ाई के बाद एक औपचारिक डिग्री प्राप्त होती है, जबकि मकतब में ऐसी कोई डिग्री नहीं दी जाती। अब्दुल सलाम ने मकतब को एक तरह का ‘कोचिंग सेंटर’ बताया, जहाँ आस-पास के मुस्लिम बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 95% मस्जिदों में मकतब चलते हैं।

अब्दुल सलाम ने आगे बताया कि मकतब खासतौर से मुस्लिम बच्चों के लिए होते हैं, जहाँ कुरान और हदीस की तालीम दी जाती है। मकतब संचालित करने वाले मौलवी, मौलाना या हाफिज आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन कहीं-कहीं मेहनताना के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मौलवी के अनुसार, मकतब में पढ़ने वालों की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन सामान्यतः नाबालिग बच्चे ही इनमें पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मकतब इस्लामी जानकारों के घरों में भी संचालित होते हैं।

अब ‘मेक इन इंडिया’ होगा C-295, वायुसेना के इस विमान में क्या है खास: PM मोदी ने एयरबस-टाटा के जिस प्लांट का किया उद्धाटन, उसके बारे में जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो संशेज के साथ गुजरात के वडोदरा में C-295 विमान फैक्ट्री का उद्घाटन किया है। यह विमान ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम के तहत एयरबस और टाटा मिलकर बनाएँगी। इनका उपयोग भारतीय वायुसेना करेगी। पीएम मोदी ने इस दौरान रक्षा क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उठाए गए क़दमों पर भी बात की है।

वडोदरा में बनी इस फैक्ट्री के उद्घाटन पर पीएम मोदी ने कहा, “भारत में डिफेन्स निर्माण का इकोसिस्टम नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। अगर हमने 10 साल पहले ठोस कदम नहीं उठाए होते तो आज यह संभव नहीं होता… हमने डिफेन्स निर्माण में निजी सहभागिता को बढ़ाया है और सरकारी कम्पनियों को किफायती बनाया है।”

पीएम मोदी ने इस दौरान टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा को याद किया और कहा कि यदि वह इस मौके पर मौजूद होते तो काफी खुश होते। रतन टाटा का हाल ही में बीमारी के चलते निधन हो गया था। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ भी रतन टाटा की आत्मा होगी, वह प्रसन्न होगी।

वडोदरा में जिस फैक्ट्री का पीएम मोदी और स्पेन के पीएम ने उद्घाटन किया है, वह भारत की पहली निजी क्षेत्र की विमान निर्माण फैक्ट्री है। इससे पहले मात्र हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ही देश में विमानों का निर्माण करती रही है।

कौन से एयरक्राफ्ट बनेंगे, भारत को क्या फायदा?

वडोदरा में एयरबस और टाटा की संयुक्त फैक्ट्री में एयरबस के ही C-295 विमानों का निर्माण होगा। यह निर्माण वायुसेना के आर्डर के लिए किया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने 2021 में 56 C-295 विमानों का आर्डर दिया था। इनमें से 16 विमान स्पेन से तैयार होकर आएँगे जबकि बाक़ी 40 का निर्माण भारत में ही होगा।

वडोदरा की फैक्ट्री में इनमें सारे सिस्टम और इंजन समेत बाकी पुर्जे लगाए जाएँगे जबकि इनकी बॉडी हैदराबाद में तैयार की जाएगी। हैदराबाद में स्थित टाटा की फैक्ट्री में ही बॉडी का निर्माण होगा। यह फैक्ट्री अन्य विमानों बॉडी का निर्माण भी करती है।

भारत में निजी क्षेत्र में विमान बनाने का यह पहला मौका है। इसके चलते देश में विमान पुर्जों का सप्लायरों का जला बिछ सकेगा और आगे भविष्य में भारत से विमानों का निर्यात भी संभव हो सकेगा। इसके अलावा यदि वायुसेना या नौसेना इसी तरह के और भी विमान आर्डर करती है, तो उन्हें यह जल्दी हासिल हो सकेंगे।

इस फैक्ट्री के चलते बड़ी संख्या में नौकरियाँ भी पैदा होंगी। भारत में इसके चलते विमान निर्माण का इकोसिस्टम बन सकेगा। साथ ही में वायुसेना को अपने पायलट समेत बाकी टीमों को स्पेन नहीं भेजना पड़ेगा। उनकी ट्रेनिंग भी यहीं हो सकेगी।

वायुसेना की बढ़ेगी ताकत

वायुसेना ने इन एयरबस विमानों का ऑर्डर अपने पुराने HS-748 विमानों को हटाने के लिए दिया है। HS-748 लगभग 60 साल पुराने हो गए हैं और आधुनिक समय के हिसाब से काम नहीं कर पाते। जबकि C-295 आधुनिक सिस्टम से लैस हैं और इनमे सैन्य साजोसामान ढोना अपेक्षाकृत आसान है। इसके अलावा इनकी क्षमता भी अधिक है और रखरखाव भी कम है।

सैन्य जानकारों का कहना है यदि वायुसेना को यह विमान शुरू में पसंद आए तो एक और ऑर्डर एयरबस और टाटा को मिल सकता है। वायुसेना को HS-748 के अलावा अपने पुराने हो रहे AN-32 विमान भी बदलने हैं। यदि वायुसेना इन्हें बदलने के लिए C-295 चुनती है तो यह काफी बड़ा ऑर्डर होगा।

क्या हैं इस विमान की क्षमताएँ

टाटा और एयरबस द्वारा मिलकर बनाया जा रहा यह विमान कई मायनों में ख़ास है। यह मूल रूप से एक कार्गो ट्रांसपोर्ट विमान है। इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य साजोसामान या फिर सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना है। दो पायलटों द्वारा उड़ाया जाने वाला यह विमान, 73 सैनिकों को एक बार में लेकर जा सकता है।

यह विमान एक बार में लगभग 9 टन सामान ले जा सकता है। यह विमान एयर एम्बुलेंस की तरह भी काम कर सकता है। इसके अलावा यह विमान हथियार तक ले जा सकता है। इसे उतरने के लिए भी कोई विशेष रनवे की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में यह दुर्गम क्षेत्रों में तैनात भारतीय सेना की मदद के लिए काम आएगा।

भारत में घुसपैठ करने वाले केवल रोहिंग्या मुस्लिम, बंगाली हिन्दू नहीं पार कर रहे सीमा: असम CM हिमंता बोले- 138 को बॉर्डर पर पकड़ा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि पीड़ित बंगाली हिन्दू नहीं बल्कि रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठिए ही देश में घुस रहे हैं। उन्होंने बताया है कि बीते दो महीने में असम सीमा पर पकड़े गए सभी अवैध घुसपैठिए रोहिंग्या ही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल से भी घुसपैठियों की पहचान में सहयोग करने को कहा है।

गुवाहाटी में रविवार (27 अक्टूबर, 2024) को CM सरमा ने घुसपैठ की समस्या पर बात की। उन्होंने कहा, “पिछले दो महीनों में हमने 138 घुसपैठियों का पता लगाया है और उन्हें वापस भी भेज दिया है। लेकिन एक बात मैं फिर से दोहराना चाहता हूँ कि बांग्लादेश में उत्पीड़न के चलते हिंदुओं के भारत में आने के कयासों के उलट हम घुसपैठियों में केवल रोहिंग्या मुसलमानों को ही देख रहे हैं ना कि हिंदू बंगाली। हिंदू बंगाली हमारे देश के भीतर नहीं आ रहे।”

उन्होंने कहा कि बीते दो माह में असम की सीमा पर 138 अवैध घुसपैठिए पकड़े गए और यह सारे ही रोहिंग्या मुस्लिम थे। उन्होंने कहा कि हिंदू बंगालियों के बारे में लगाए गए सारे कयास गलत साबित हुए हैं। उन्होंने हर राज्य से रोहिंग्या घुसपैठ पर सतर्क रहने को कहा है।

CM सरमा ने बताया है कि उन्होंने कुछ ऐसे लोगों की पहचान भी की है जो भारत में घुसपैठ के बाद वापस बांग्लादेश जाते हैं और नए घुसपैठियों को लाते हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से आने वाले जिन घुसपैठियों को असम रोक रहा है, वह पश्चिम बंगाल के रास्ते फिर घुस सकते हैं। CM सरमा ने कहा है कि यदि पश्चिम बंगाल सहयोग करे तो घुसपैठिए भारत में नहीं आ पाएँगे।

CM सरमा ने असम के अलावा त्रिपुरा द्वारा घुसपैठ रोकने के लिए किए गए प्रयासों की भी तारीफ़ की है। CM सरमा ने यह भी कहा कि उन्हें इससे मतलब नहीं है कि बांग्लादेश से कौन आ रहा है, वह बांग्लादेश से अवैध रूप से घुसने वाले लोगों को वापस भेजना चाहते हैं।

गौरतलब है कि म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या घुसपैठिए लगातार भारत में घुसने की कोशिश करते रहते हैं। रोहिंग्या घुसपैठियों की बड़ी संख्या भारत में पहले ही आ चुकी है। असम, [पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के रास्ते घुसने वाले यह घुसपैठिए बाद में देश के अलग-अलग हिस्से में फ़ैल जाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में अब 2 मंदिरों पर हमला, कट्टरपंथियों ने की तोड़फोड़: शिवलिंग को तोड़ा, दान पेटी लूट कर हुए फरार

ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा शहर में शनिवार (26 अक्टूबर 2024) की दोपहर को नकाब पहने कट्टरपंथियों ने दो हिंदू मंदिरों पर हमला किया। इस घटना में उन्होंने तोड़फोड़ और चोरी की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव के शिवलिंग और अन्य मूर्तियों को भी नुकसान पहुँचाया।

ऑस्ट्रेलिया टुडे के अनुसार, चार नकाबपोश हमलावर एक काले रंग की होंडा वैन में फ्लोरी स्थित हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र पहुँचे। कट्टरपंथियों ने मंदिर के मुख्य द्वार को तोड़ दिया और अंदर से चार दान पेटियाँ उठा ले गए, जिनमें से एक का वजन करीब 200 किलोग्राम था और उसमें हजारों डॉलर की नकदी थी। यह हमला उस समय हुआ, जब राजधानी कैनबरा में हर साल आयोजिन होने वाले दीवाली मेले का आयोजन हो रहा था।

सीसीटीवी फुटेज में चरमपंथी फ्लोरी के हिंदू मंदिर में घुसते दिख रहे हैं, तस्वीर ऑस्ट्रेलिया टुडे से ली गई है

मंदिर के उपाध्यक्ष तरुण अगस्ती ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से बातचीत करते हुए कहा, “हम इस घटना से बेहद दुखी और परेशान हैं। यह हमारे पूजा स्थल और समुदाय के प्रति घोर अपमान है। हम अपनी समुदाय को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि हम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस मामले की गहन जाँच कर रहे हैं ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।”

तरुण अगस्ती ने इस घटना पर कार्रवाई की माँग की और कहा, “यह घटना न केवल हमारे हिंदू समुदाय को प्रभावित करती है, बल्कि कैनबरा के विविधतापूर्ण समाज में आपसी सम्मान, सहिष्णुता और समावेशिता के मूल्यों पर भी चोट करती है।”

ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इन कट्टरपंथियों ने इसके बाद करीब दोपहर 2 बजे श्री विष्णु शिव मंदिर का रुख किया। उस समय मंदिर के पुजारी और देखभालकर्ता लंच के लिए बाहर गए हुए थे। चारों कट्टरपंथियों ने मंदिर का मुख्य द्वार लोहे के रॉड से तोड़ा और प्रवेश किया। उन्होंने मंदिर के रिसेप्शन पर तोड़फोड़ की और कंक्रीट में जड़ी दान पेटियों को हथौड़े की मदद से तोड़कर नकदी लूट ली।

विष्णु शिव मंदिर में तोड़फोड़, फोटो साभार: ऑस्ट्रेलिया टुडे

कट्टरपंथी मंदिर के गर्भगृह में भी घुस गए और वहाँ कपड़े रखने की अलमारी और वसंत मंडप को नुकसान पहुँचाया। इसी दौरान उन्होंने मंदिर के शिवलिंग को भी तोड़ दिया।

इस मामले में श्री विष्णु शिव मंदिर के अध्यक्ष थामो श्रीथरन ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से बातचीत करते हुए कहा, “मैं ऑस्ट्रेलियाई सरकार से अपील करना चाहूँगा कि हमारे मंदिरों और समुदाय की सुरक्षा के लिए हमें आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए।”

इन हमलावरों द्वारा इस्तेमाल की गई होंडा वैन पर विक्टोरिया का नंबर प्लेट लगा हुआ था, लेकिन यह अभी यह साफ नहीं हो गया है कि घटना में इस्तेमाल की गई गाड़ी चोरी की थी, या नंबर प्लेट गलत लगाया गया था। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जाँच कर रही है।

ऑस्ट्रेलिया में कई मंदिरों पर हो चुके हैं हमले

यह पहली बार नहीं है जब ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हमला हुआ है। साल 2023 में भी ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर पाँच हमले किए गए थे। ब्रिसबेन के लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी समर्थकों ने हमला कर मंदिर के बाहरी हिस्से पर नफरत भरी पेंटिंग की थी। इसी तरह मेलबर्न के अल्बर्ट पार्क में स्थित इस्कॉन मंदिर की दीवारों पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ लिखा गया था।

विक्टोरिया के कर्रुम डाउन्स में स्थित श्री शिव विष्णु मंदिर को भी तोड़फोड़ का निशाना बनाया गया और मेलबर्न के स्वामीनारायण मंदिर पर भारत विरोधी पेंटिंग की गई थी। सिडनी में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को भी ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ जैसे शब्दों से अपमानित किया गया। खालिस्तानी समर्थकों ने मेलबर्न के काली माता मंदिर को धमकी दी थी कि वे ‘कट्टर हिंदू’ गायक कन्हैया मित्तल के भजन कार्यक्रम का आयोजन न करें।

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर बढ़ते हमलों के कारण वहाँ के हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

28 लाख दीपों से जगमग होंगे 55 घाट, 50 क्विंटल फूलों से सजेगा राम मंदिर… अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पहली दीवाली: 30 हजार स्वयंसेवक सँभालेंगे जिम्मेदारी

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने के बाद 2024 में पहली दीवाली मनाई जाएगी। यह दीवाली विशेष रूप से आयोजित करने की योजना सरकार ने बनाई है। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद 28 लाख दीए जलाए जाएँगे।

2024 की दीवाली में अयोध्या में नया कीर्तिमान बनाया जाएगा। इस दिन अयोध्या के सरयू घाटों और मंदिर समेत बाकी जगह 28 लाख दीए जलाए जाएँगे। यह दीए बिछाने के काम चालू हो गया है। इसके लिए वालंटियर लगाए गए हैं। यह काम धनतेरस (29 अक्टूबर, 2024) से पहले ही पूरा जाएगा।

अयोध्या में यह दीए 55 घाटों पर बिछाए जा रहे हैं। इनको जलाने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो सके, इसके लिए उनकी एक टीम को भी आमंत्रित किया गया है। यह दीए छोटी दीवाली (30 अक्टूबर, 2024) को जलाए जाएँगे।

इस कार्यक्रम को आयोजित कर रहे वालंटियरों का कहना है कि वह प्राण प्रतिष्ठा के बाद की पहली दीवाली को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इस काम में 30,000 वालंटियर शामिल हैं। अयोध्या में जलने वाले दीयों के लिए 92 हजार लीटर सरसों का तेल उपयोग किया जाएगा। यह तेल अयोध्या पहुँच भी गया है।

अयोध्या में इन दीयो की निगरानी के लिए पुलिस प्रशासन और सुरक्षाबल भी लगाए गए हैं। वहीं घाटों के अलावा मंदिर परिसर के भीतर भी दीए जलाने का अलग इंतजाम किया गया है। मुख्य प्रांगण के लिए अलग तरह के दीए भी मँगवाए गए हैं।

मंदिर के भीतर जलाने के लिए मँगवाए गए दीए कालिख और धुआं नहीं छोड़ेंगे। इससे मंदिर की दीवालों और पत्थर पर निशान और दाग नहीं पड़ेंगे। यह दीए मोम के बने होंगे। मंदिर के गर्भगृह के लिए अलग तरह के दीए बनवाए गए हैं। यह दीए हाथी के आकार के हैं। इन्हें देशी घी से जलाया जाएगा।

गर्भ गृह के अलावा मंदिर प्रांगण में भी 1 लाख दीए जलाए जाएँगे। यह दीए सरसों के तेल से जलेंगे। दीयों के अलावा मंदिर में फूलों की सजावट भी की गई है। राम मंदिर को 50 कुंतल फूलों से सजाया जा रहा है। इसके साथ ही मंदिर के चारों प्रवेश द्वारों पर तोरण द्वार बन गए हैं। मंदिर को 29 अक्टूबर से अगले 4 दिनों तक खुला रखा जाएगा।

दिल्ली के जामिया में पुलिस ने रोकी तेज आवाज वाली बुलेट, आसिफ-रियाजुद्दीन ने SHO को पीटा: समझौता करने का डाल रहे थे दबाव, नहीं मानने पर बोला हमला

दक्षिण पूर्वी दिल्ली के बटला हाउस इलाके में आसिफ और रियाजुद्दीन नाम के बाप-बेटे ने एसएचओ को ही पीट दिया। जिसके बाद एसएचओ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ये घटना जामिया नगर इलाके की है।

जानकारी के मुताबिक, जामिया नगर थाने के SHO नरपाल सिंह रात में गश्त पर थे, तभी उन्होंने एक तेज आवाज में चल रही बुलेट बाइक को रोका। बाइक में अवैध साइलेंसर लगाया गया था, जिससे उसकी आवाज तय सीमा से अधिक हो गई थी, जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करता है।

SHO ने बाइक सवार 24 वर्षीय आसिफ को रुकने का इशारा किया और जाँच शुरू कर दी। जैसे ही आसिफ को कानून कार्रवाई का सामना करना पड़ा, उसने अपने अब्बू रियाजुद्दीन को मौके पर बुला लिया। दोनों ने मिलकर SHO से बुलेट वापस लेने और यहीं समझौता करने का दबाव बनाया।

बात नहीं मानने पर दोनों ने SHO के साथ हाथापाई शुरू कर दी। रियाजुद्दीन ने SHO को पकड़ लिया और आसिफ ने उनके चेहरे पर मुक्का मारा। यह मारपीट इतनी गंभीर हो गई कि SHO नरपाल सिंह को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

पुलिस ने इस घटना के बाद अब्बू रियाजुद्दीन और बिगड़ी औलाद आसिफ, दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी है और पुलिस इस पर सख्त कार्रवाई कर रही है।

बता दें कि दिल्ली में तेज आवाज़ वाले साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगाने पर जुर्माना लगता है। मोटर व्हीकल्स एक्ट के नियम 39/192 के तहत, दिल्ली में प्रेशर हॉर्न बजाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अगर किसी शांत इलाके में बार-बार हॉर्न बजाया जाए, तो 2,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। मॉडिफ़ाइड साइलेंसर लगाना रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट के उल्लंघन में आता है। इन्हीं कार्रवाईयों से बचने के लिए ही रियाजुद्दीन और आसिफ न सिर्फ एसएचओ जैसे सीनियर पुलिस कर्मी से भिड़ गए, बल्कि हमला कर उनकी आँख को भी चोट पहुँचाया।

झारखंड में सोनू बन शाहरुख ने नाबालिग लड़की को फँसाया, दोस्त संग मिल किया गैंगरेप: राँची से अदनान भी ST बच्ची को लेकर हुआ फरार, दिल्ली में कराता देह व्यापार

झारखंड में लव जिहाद के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ताजा मामला राँची का है, जहाँ अदनान नाम के युवक ने नाबालिग एसटी लड़की को इंस्टाग्राम के माध्यम से प्रेम के जाल में फंसाया, फिर उसे लेकर दिल्ली भाग गया और फिर वो दिल्ली में नाबालिग के देह व्यापार कराने की तैयारी कर रहा था। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिजनों और पुलिस की सक्रियता के चलते अदनान आखिरी समय में अपने मकसद में कामयाब होने से चूक गया। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक अन्य मामले में अदनान ने सोनू बनकर फंसाया और फिर गैंगरेप किया है।

इस घटनाक्रम की जानकारी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बालूलाल मरांडी ने भी शेयर की है। झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा, “झारखंड में हिंदू, आदिवासी बेटियों के खिलाफ अपनी पहचान छुपाकर उन्हें प्रेमजाल में फंसाने, धर्मांतरित करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। लव जिहाद की ये घटनाएँ चिंतित करने वाली हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “ताजा मामले के अनुसार, राँची के विधानसभा थाना क्षेत्र की एक नाबालिग युवती को अदनान नामक मुस्लिम युवक ने अपनी वास्तविक पहचान छुपाकर इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्ती की, फिर बहला फुसलाकर अपने पास दिल्ली बुलाया और उसे देह व्यापार में धकेलने का प्रयास किया। अभिभावकों की संजीदगी और प्रशासन की तत्परता से लड़की को सकुशल बरामद कर लिया गया है, लेकिन ऐसी घटनाओं पर सरकार कब संज्ञान लेगी? लव जिहाद की साजिश दो लोगों के बीच का व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि हमारे हिंदू, आदिवासी समाज के विरुद्ध बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।”

शाहरुख ने सोनू बनाकर फंसाया, किया गैंगरेप

दूसरा मामला, बिहार-झारखंड की सीमा पर गढ़वा का है। यहाँ शाहरुख नाम के युवक ने नाबालिग हिंदू लड़की को सोनू के नाम से प्रेम जाल में फंसाया। लड़की इंटरमीडिएट की छात्रा है। मूल रूप से औरंगाबाद की रहने वाली लड़की को कोचिंग जाते समय शाहरुख अपने दोस्त तौकीर अंसारी उर्फ फरहान के साथ एसयूवी गाड़ी में बैठाकर फरार हो गया। उसने गढ़वा के जंगलों में गैंगरेप को अंजाम दिया।

सोनू नाम बनाकर की थी दोस्ती, कलावा-टीका लगाकर मिलता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद की है। माता-पिता दिल्ली में काम करते हैं, ऐसे में वो गढ़वा में रिश्तेदार के घर रहती है। यहाँ वो इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही थी। उसे औरंगाबाद का रहने वाला मोहम्मद शाहरुख इंस्टाग्राम पर मिला था। वो कलावा बाँधता था और टीका लगाए रखता था, जब भी वो मिलता। वो अक्सर लड़की से मिलता। शनिवार (26 अक्टूबर 2024) सुबह छह बजे उसने लड़की को अपनी कार में बैठा लिया और जंगल में ले गया। दोनों ने गैंगरेप किया। घटनास्थल पर निर्वस्त्र हालत में पीड़िता रोती मिली। लोगों और परिजनों ने शाहरुख और तौकीर अंसारी उर्फ फरहान को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

दिल्ली में 1 साल में 6 गुना बढ़े पराली जलाने के मामले, पंजाब में भी संंख्या 1983 पहुँची: AAP प्रदूषण का ठीकरा UP-हरियाणा पर फोड़ रही

आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पंजाब के बाद अब दिल्ली में तक पराली जलना नहीं रोक पा रही है। राजधानी दिल्ली में 2024 में पराली जलने के मामले 6 गुने हो गए हैं। पंजाब में भी पराली जलाने का आँकड़ा लगभग 2000 के पास पहुँच रहा है। इस बीच दिल्ली-NCR वालों को सांस लेना दूभर हो रहा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS द्वारा जारी किया गया आँकड़ा AAP की नाकामी बयान करता है। इसके अनुसार, दिल्ली में 2024 में पराली जलाने की कम से कम 12 घटनाएँ सामने आई हैं। यह आँकड़ा 2023 के मुकाबले 6 गुना है। 2023 में दिल्ली में पराली जलाने के मात्र 2 मामले सामने आए थे।

यह आँकड़ा देखने में भले छोटा लगे लेकिन दिल्ली जैसे राज्य के लिए यह खतरे की घंटी है। दिल्ली में AAP पराली खत्म करने के लिए अलग-अलग उपाय देने का दावा करती आई है। हालाँकि, फिर भी यहाँ यह घटनाएँ सामने आईं। इसके अलावा यह हवा सीधे तौर पर दिल्ली को दूषित करेगी।

दिल्ली के अलावा पंजाब का भी पराली से बुरा हाल है। CREAMS के आँकड़े के अनुसार, पंजाब में 27 अक्टूबर, 2024 तक पराली जलाने की कम से कम 1983 घटनाएँ सामने आई हैं। यह आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। पंजाब में पराली जलाने के सबसे अधिक मामले अमृतसर से सामने आए हैं।

पंजाब के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी 1000+ पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। इन सबके चक्कर में दिल्ली में हवा खराब होती जा रही है। 28 अक्टूबर, 2024 की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में AQI 300+ है। AQI का 300+ वाला स्तर सभी के लिए हानिकारक है और ज्यादा देर खुले वातावरण में रहने पर आँखों में जलन और गले में खराश होती है।

दिल्ली में यह स्थिति तब है जब अभी पूरी तरीके से पंजाब में धान की कटाई नहीं हुई है और ठण्ड का मौसम अभी आने को है। इन सबके बीच हाल ही में दिल्ली सरकार ने दीवाली के पटाखों पर भी बैन लगा दिया था। हालाँकि, दीवाली आने से पहले ही राजधानी में हवा की स्थिति बिगड़ गई है।

AAP सरकार इस बार भी दिल्ली में प्रदूषण का ठीकरा उत्तर प्रदेश-हरियाणा से आने वाली बसों पर फोड़ने के चक्कर में है। जबकि असल बात यह है कि गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण का हिस्सा मात्र एक तिहाई है। इसमें भी जिम्मेदार केवल यूपी हरियाणा की बसें नहीं बल्कि सभी तरह की गाड़ियाँ हैं।