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नाम में हिंदू, पर हमदर्द इस्लामी कट्टरपंथियों का: भारत विरोधी HfHR को सुहा नहीं रही लंदन की दीवाली, मुस्लिम मेयर से कहा- हिंदू संगठनों से तोड़ो रिश्ते

हिंदू और भारत विरोधी अमेरिकी संगठन हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने इंग्लैंड की राजधानी लंदन में दिवाली मनाने में खलल डालने की कोशिश की है। HfHR के डायरेक्टरराजीव सिन्हा ने लंदन के मेयर सादिक खान को एक पत्र लिखकर विश्व हिंदू परिषद (VHP), BAPS और चिन्मय मिशन जैसी हिंदू संस्थाओं के साथ ‘सभी संबंध खत्म’ करने को कहा है।

भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाने के लिए कुख्यात हिंदू विरोधी संगठन HfHR, इस बात से नाराज था कि इन हिंदू संस्थाओं ने 27 अक्टूबर को लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में दिवाली कार्य्रकम के आयोजन में भाग लिया था।

HfHR द्वारा लिखे इस पत्र को एक्स(पहले ट्विटर) पर सुहाग शुक्ला ने साझा किया। इस पत्र हिन्दूस फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने इस बात पर ‘निराशा’ जताई कि VHP और बाकी संस्थाओं ने लंदन के मेयर सादिक खान के कार्यक्रम को आयोजित करने में मदद की थी।

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) ने लंदन के मेयर से इन हिंदू संगठनों से संबंध तोड़ने और भविष्य में दिवाली समारोह आयोजित करने के लिए नए संगठन तलाशने को कहा है। HfHR ने दावा किया कि यह हिंदू संगठन ”भारत और यूके में हिंदुत्व आंदोलन के लिए एक मुखौटे का काम करते हैं।”

HfHR का हिन्दू विरोधी इतिहास

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) के नाम से लग सकता है कि यह हिंदू समुदाय के हित के लिए काम करने वाला कोई हिंदू संगठन है। असल में यह भेड़ की खाल में भेड़िया है। यह संगठन अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू विरोधी गतिविधियों को बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।

इसने लगातार खुद को मानवाधिकारों के कथित रक्षक के रूप में पेश किया है, जबकि असल में यह अपना लिबरल एजेंडा चलाता है। इस संगठन को टाइड्स फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से पैसा मिलता है। टाइड्स अमेरिका में हमास के समर्थन वाली रैलियों को भी पैसा देती है। HfHR अक्सर हिन्दुओं के विरोध में ही दिखता है।

टाइड्स फाउंडेशन खुद कई ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जो वामपंथी और भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाती हैं। विकिपीडिया को लेकर बनाए गए ऑपइंडिया के डोजियर में बताया गया है कि टाइड्स कई भारत विरोधी और हिंदू विरोधी संगठनों को पैसा देता रहा है। यह भारत और हिन्दुओं को बदनाम करते हैं और कट्टरपंथियों को बढ़ावा देते हैं।

HfHR अक्सर अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए हिंदू प्रतीकों का उपयोग करता है। हिंदू विश्वासों को लगातार HfhR नीचा दिखाता रहा है। यह हिन्दू ग्रन्थों की गलत व्याख्या करके प्रश्न उठाने और हिन्दुओं कि छवि खराब में जुटा एक संगठन है।

HfHR का गठन वर्ष 2019 में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और ऑर्गनाइजेशन फॉर माइनॉरिटीज ऑफ इंडिया (OFMI) द्वारा किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों संगठनों ने अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी (AJA) नामक एक और संगठन बनाया था।

द हिंदू में छपे एक लेख के अनुसार, 22 सितंबर, 2019 को पीएम मोदी की ह्यूस्टन यात्रा के खिलाफ़ प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में AJA सबसे आगे थी। ‘HfHR’ की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने भी 2019 में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर भारतीय मुसलमानों में दहशत पैदा करने की कोशिश की थी।

शिवलिंग को नुकसान नहीं पहुँचा सके आतंकी, हमले में वह मंदिर क्षतिग्रस्त जो भारत-पाक युद्ध के समय बना: 27 घंटे की मुठभेड़ के बाद हुए ढेर, हथियारों का जखीरा मिला

जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में 28 अक्टूबर 2024 को भारतीय सेना की एंबुलेंस पर आतंकियों ने हमला किया था। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया था। करीब 27 घंटे तक मुठभेड़ चली थी। इस दौरान वह मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया जिसमें छिपकर आतंकी गोलीबारी कर रहे थे। लेकिन वे मंदिर के शिवलिंग को कोई नुकसान नहीं पहुँचा सके। ढेर किए गए आतंकियों के पास से मिले हथियारों और सामानों से पता चलता है कि वे लंबी जंग की तैयारी करके आए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुठभेड़ पाकिस्तान की सीमा से लगे केरी बट्टल इलाके में हुई। इस इलाके में शिव आसन मंदिर है जो साल 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने बनाया था। इस मंदिर को सैनिकों का प्रेरणा स्रोत भी माना जाता है। यहाँ जवानों द्वारा अक्सर पूजा-पाठ और भंडारे का आयोजन किया जाता है। 28 अक्टूबर एम्बुलेंस पर फायरिंग के बाद आतंकी इसी मंदिर में घुस गए थे। सुरक्षा बलों ने मंदिर को चारों तरफ से घेर कर ऑपरेशन चलाया था।

गोलीबारी में मंदिर के ढाँचे को काफी नुकसान पहुँचा है। लेकिन इतनी गोलीबारी के बावजूद मंदिर का शिवलिंग जस का तस है। इसके ऊपर लगी जल की गगरी भी ज्यों की त्यों है। अब मंदिर कमेटी और सेना मिल कर इस मंदिर का फिर से जीर्णोद्धार करवाएगी। मंदिर में होने वाले सभी कार्यक्रम भी पहले की तरह जारी रहेंगे। ग्रामीणों ने इसे मंदिर की महिमा और भगवान शिव की कृपा ही बताया है कि इतनी लंबी मुठभेड़ के बावजूद सभी जवान सुरक्षित रहे।

आतंकियों के पास था हथियारों का जखीरा

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार आतंकी लंबी जंग की तैयारी कर के आए थे। उनके पास M4 कार्बाइन, और AK-47 राइफल जैसे घातक और अत्याधुनिक हथियार थे। खाने-पीने के सामान भी बरामद हुए हैं। इनमें कैंडी, किशमिश, काजू, खजूर, चने के पैकेट और शहद की बोतलें शामिल हैं। अन्य हथियारों में 1 पिस्टल, M4 की 3 मैगजीन, AK 47 की 4 मैगजीन, 9mm पिस्टल के 20 राउंड, 7.62mm के 77 राउंड, 5.6mm के 129 राउंड, 1 हैंड ग्रेनेड, 1 साइलेंसर और 3 चाकू शामिल हैं।

आतंकियों के पास से बरामद हुए अन्य सामानों में 1 डिजिटल घड़ी, लाल रंग की 1 नोटबुक, 1 बाइनोकुलर, 1 पावर बैंक, 1 सोलर पैनल, कपड़े, जूते, मोज़े और कंबल शामिल हैं। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि आतंकी इलाके से अच्छे से वाकिफ थे। इस अभियान में स्पेशल फोर्सेस के अलावा NSG कमांडो भी उतारे गए थे।

दिल्ली के स्कूलों में रोहिंग्या मुस्लिमों के बच्चों को एडमिशन दिलाने हाई कोर्ट पहुँच गया ‘सोशल ज्यूरिस्ट’, याचिका खारिज: कहा- यह अंतरराष्ट्रीय मुद्दा, हम नागरिकता नहीं दे सकते

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (29 अक्टूबर 2024) को म्यांमार से भारत आए रोहिंग्या मुस्लिमों के बच्चों को स्कूल में दाखिला देने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश देने की माँग पर विचार करने से इनकार कर दिया। दायर की गई जनहित याचिका (PIL) में दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम के स्थानीय स्कूलों में प्रवेश देने का निर्देश देने की माँग की गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया जा सकता है। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, “इसमें पहला कदम हाई कोर्ट नहीं हो सकता। पहले सरकार से संपर्क करें… जो आप सीधे नहीं कर सकते, उसे आप अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकते। कोर्ट को इसमें माध्यम नहीं बनना चाहिए।”

हाई कोर्ट ने कहा कि ये बच्चे भारतीय नहीं हैं। इसलिए इसमें अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थ शामिल हैं। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है, जिस पर निर्णय लेने के लिए भारत सरकार सबसे उपयुक्त है। उन्होंने कहा, “‘बच्चे’ का मतलब यह नहीं है कि पूरी दुनिया यहाँ आ जाएगी। ये अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हैं। सुरक्षा और राष्ट्रीयता पर इनका असर पड़ता है।”

अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ा है, जिसका सुरक्षा और नागरिकता पर असर है। कोर्ट ने कहा कि रोहिंग्या विदेशी हैं, जिन्हें आधिकारिक या कानूनी रूप से भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क करने के लिए कहा।

न्यायालय ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6A की संवैधानिकता को बरकरार रखा गया है। यह निर्णय असम समझौते के अंतर्गत आने वाले अप्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने से संबंधित है। हाई कोर्ट ने कहा कि इस निर्णय के कारण राज्य में काफी उथल-पुथल मचा और आंदोलन हुआ।

कोर्ट ने कहा, “दुनिया के किसी भी देश में न्यायालय यह निर्णय नहीं करेगा कि किसे नागरिकता दी जाए।” इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए इस पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस जनहित याचिका को सोशल ज्यूरिस्ट नाम के एक सिविल राइट ग्रुप ने दायर किया था।

सोशल ज्यूरिस्ट ने अपनी जनहित याचिका में कहा था कि स्कूल रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को स्कूल में प्रवेश देने से इनकार कर हैं, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड और बैंक खाता नहीं है। उनके पास केवल संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) द्वारा जारी शरणार्थी कार्ड है। इस एनजीओ ने इसे मूल अधिकारों का हनन बताया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जिन रोहिंग्या छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला मिला था, उन्हें भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने उन्हें स्कूल यूनिफॉर्म और लेखन सामग्री जैसी वैधानिक सुविधाएँ देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उनके परिवार के पास बैंक खाता नहीं है।

दरअसल, अशोक अग्रवाल नाम के एक एडवोकेट ने दिल्ली के एक इलाके में शरणार्थी कॉलोनी का दौरा किया था। इस मुद्दे को उन्होंने दिल्ली सरकार को लिखित रूप में भी बताया। हालाँकि, जब सरकार की ओर से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने हाईकोर्ट में इस मामले में एक जनहित याचिका दायर किया।

सबूत नहीं फिर भी वाशिंगटन पोस्ट से की भारत की चुगली, दबाव बनाने को घसीटा अमित शाह का नाम: कनाडा की NSA और ट्रूडो के उप विदेश मंत्री ने कैमरे पर कबूली कारस्तानी

कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और उप विदेश मंत्री ने निज्जर मामले में खुफिया जानकारी लीक करने की बात कबूली है। इन दोनों ने यह जानकारी अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट को लीक की थी। इन्होने भारत के गृह मंत्री अमित शाह का नाम खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ा था।

मंगलवार (29 अक्टूबर, 2024) को कनाडा में विदेशी दखल की जाँच करने वाली कमिटी के सामने दोनों ने यह बात कबूल की है। इस कमिटी के सामने कनाडा की NSA नताली द्रूइन ने कबूला कि उन्होंने कई मीडिया संस्थानों को भारत सरकार के निज्जर की हत्या में शामिल होने के आरोप वाली खुफिया जानकारी साझा की।

नथाली ने कहा कि मीडिया संस्थान को यह गोपनीय जानकारी लीक करना, असल में एक रणनीतिक निर्णय था। उन्होंने कहा कि इससे वह कनाडा का पक्ष अमेरिकी अखबार के माध्यम से सामने रखना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि उनकी यह तथाकथित रणनीति ट्रूडो की जानकारी में थी। उन्होंने यह जानकारी लीक करने की तारीख 14 अक्टूबर बताई है।

नथाली ने इस दौरान लगातार दावा किया कि उन्होंने जो जानकारी मीडिया को लीक कर दी, वह खुफिया नहीं थी। उनके साथ ही कनाडा के उप विदेश मंत्री डेविड मॉरिसन ने भी जानकारी लीक करने कि बात कबूल की है।

डेविड मॉरिसन ने कबूल किया कि उन्होंने ही द वाशिंगटन पोस्ट से निज्जर समेत बाकी खालिस्तानियों की हत्याओं में गृह मंत्री अमित शाह का नाम जोड़ने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि जब एक पत्रकार ने उनसे फोन करके अमित शाह का नाम लिया तो उन्होंने इस पर हामी भर दी।

द वाशिंगटन पोस्ट ने इससे पहले कनाडा के हवाले से कहा था कि भारत में बैठे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कनाडा में खालिस्तानियों की हत्या का आदेश दिया। इसके बाद वाशिंगटन पोस्ट ने अमित शाह का नाम लिया था। गृह मंत्री अमित शाह का नाम कहाँ से आया अब इसकी पुष्टि भी हो गई है।

मॉरिसन और नथाली की बातों से स्पष्ट हुआ है कि उन्होंने ही अमित शाह का नाम इसमें घसीटा ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। यह सारी जानकारी भारत और कनाडा के बीच सिंगापुर में मीटिंग के पहले लीक की गई। इन दोनों के बयानों पर अभी भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।

कनाडा के सांसदों ने यह जानकारी लीक करने को लेकर मॉरिसन और नथाली को जम कर लताड़ा है। कमिटी ने कहा है कि आखिर इन दोनों ने कनाडाई जनता को यह जानकारी देने के बजाय एक अमेरिकी अखबार से साझा की।

गौरतलब है कि इससे पहले इसी कमिटी के सामने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने के संबंध में कोई भी सबूत ना होने की बात कही थी। इसके बाद भारत ने उन्हें लताड़ा था।

‘मोबाइल नंबर माँग रहा हूँ, तुझे समझ में नहीं आ रहा’: अमजद ने साथियों सहित हिंदू लड़कियों को दुकान में खींचा, गर्दन पर चाकू रख धमकाया; बचाने गए दलित की भी पिटाई

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्कूल की नाबालिग हिन्दू छात्राओं से छेड़खानी करने का मामला सामने आया है। इन लड़कियों को बबलू कुरैशी की दुकान में घसीट कर ले जाया गया। विरोध करने पर उनकी पिटाई की गई और गर्दन पर चाकू रख दिया गया। बच्चियों को बचाने गए एक दलित युवक पर भी हमला किया गया। यह घटना शनिवार (26 अक्टूबर 2024) की है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू समाज के लोग विरोध में उतर आए और थाने के पास इकट्ठा होकर विरोध में प्रदर्शन किया। इस मामले में पुलिस ने सोमवार (28 अक्टूबर) को अमजद नाम के एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपित फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इनकी तलाश में पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है।

यह घटना सहारनपुर के थाना क्षेत्र नकुड़ की है। यहाँ 26 अक्टूबर को एक नाबालिग पीड़िता के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि शनिवार शाम लगभग 5:35 बजे उसकी 16 वर्षीया बेटी अपनी 4 नाबालिग सहेलियों के साथ कोचिंग से ट्यूशन पढ़कर लौट रही थी। रास्ते में बबलू कुरैशी की सेटरिंग की दुकान है, जहाँ 5 लोग बैठे थे। इनमें बबलू कुरैशी का बेटा और अमजद भी था।

पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि इन लोगों ने पाँच में से 2 लड़कियों को हाथ और बाल पकड़ कर दुकान के अंदर खींच लिया। इस दौरान आरोपितों ने दोनों लड़कियों पिटाई भी की और कहा, “तुझे इतने दिन से बोल रहा हूँ कि अपना मोबाइल नंबर दे, तेरी समझ में नहीं आ रही है।” इस दौरान पाँचों में से एक ने शिकायतकर्ता की बेटी की गर्दन पर चाकू रख दिया।

आरोपितों ने नाबालिग छात्राओं को गंदे-गंदे इशारे किए और कहा, “आज तुम्हें कोई नहीं बचा पाएगा।” इससे डरकर दोनों छात्राएँ शोर मचाने लगीं। इन छात्राओं की गुहार सुनकर बाहर खड़ी उनकी तीन सहेलियों ने राहगीरों से मदद करने की अपील की। तभी उधर से राजकुमार वाल्मीकि नाम का एक युवक गुजर रहा था। उसने लड़कियों की गुहार सुनकर उन्हें बचाने के लिए कान के अंदर घुस गया।

राजकुमार ने आरोपितों से दोनों बच्चियों को छोड़ने के लिए कहा। इस पर आरोपितों ने राजकुमार को जातिसूचक शब्द बोले और कहा, “$ले भं#, यहाँ से भाग जा नहीं तो तुझे भी जान से मार देंगे।” इनमें से 2 आरोपितों ने राजकुमार को लोहे की रॉड और डंडे से पीटना शुरू कर दिया। हंगामा सुनकर गाँव के कुछ लोग आ गए और उन्होंने दुकान में जाकर देखा तो आरोपित लड़कियों और राजकुमार को पीट रहे थे।

भीड़ को आता देखकर पाँचों आरोपित वहाँ से फरार हो गए। भागते हुए आरोपित अपनी एक हीरो होंडा पैशन बाइक भी घटनास्थल पर छोड़ गए। इस दौरान हमलावरों को बचाने के लिए कुछ मुस्लिम महिलाओं ने अपनी छतों से जमा हो रहे हिंदुओं पर पथराव कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और किसी तरह हालात को सँभाला।

पीड़ित पिता ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इन छात्राओं की उम्र 15 से 16 साल के बीच बताई जा रही है। इस घटना के विरोध में आसपास के तमाम हिंदू समुदाय के लोग थाने पर जमा हो गए। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ SC/ST एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है। लगातार दबिश दे रही पुलिस टीम को आखिरकार मंगलवार (28 अक्टूबर) को सफलता मिली और अमजद को गिरफ्तार कर लिया। मामले में तमाम सबूतों के माध्यम से अन्य आरोपितों को चिन्हित कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

न होगी गिरफ्तारी, न मिलेगी कोई सजा: बांग्लादेश में जिन इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर किए तमाम अत्याचार, उन्हें युनूस सरकार ने दिया ‘कानूनी कवच’

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद की स्थिति अब और भी खतरनाक होती जा रही है। शेख हसीना के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद हिंदुओं, बौद्धों, अहमदियों को बांग्लादेश में धार्मिक और मजहबी पहचान के लिए इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाया गया, लेकिन अब मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने उन कथित छात्रों (इस्लामिक कट्टरपंथियों) को कानूनी संरक्षण देने का फैसला किया है, जिन्होंने पूरे बांग्लादेश में उथल-पुथल मचाई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली नई सरकार ने 15 जुलाई से 8 अगस्त के बीच हुए प्रदर्शनों में शामिल ‘प्रदर्शनकारियों’ को किसी भी सजा से मुक्त रखने का आदेश जारी किया है। यूनुस सरकार के इस कदम से विवाद भी पैदा हो रहा है, क्योंकि कई लोग इसे उस समय की हिंसा के लिए जिम्मेदारी से बचने का तरीका मानते हैं। इस नियम की व्याख्या को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इससे यह आशंका है कि यह गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को भी सुरक्षा दे सकता है, क्योंकि इस दौरान बहुत सारे मजलूमों को भी निशाना बनाया गया।

बता दें कि ‘छात्र-नेतृत्व वाले’ आंदोलन में सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन जो लोग इस हिंसा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें डर है कि नए अधिकारियों द्वारा किया गया ‘न्याय का वादा’ अब उन्हें न्याय नहीं देगा।

बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया, “एक नए गैर-भेदभावपूर्ण बांग्लादेश की यात्रा शुरू हो गई है। जो छात्र और नागरिक इस उथल-पुथल में शामिल थे, उन्हें 15 जुलाई से 8 अगस्त के बीच उनके कार्यों के लिए दंड, गिरफ्तारी या परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।” महत्वपूर्ण यह है कि बांग्लादेश में हिंदू, मुस्लिम अहमदिया सूफी समुदाय, बौद्ध और ईसाई जैसे अल्पसंख्यक समुदायों पर भयानक हमले हुए हैं।

बता दें कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया, जब उनके खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे। उनके जाने के बाद, बांग्लादेशी सेना ने सत्ता संभाली और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी। इस बीच, बांग्लादेश के हिंदू इस्लामिस्टों द्वारा देशभर में निशाना बनाए जाने लगे। ऑपइंडिया ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ घृणा की अनगिनत रिपोर्टें प्रकाशित की हैं, जिन्हें यहाँ पढ़ सकते हैं।

मूल रिपोर्ट विस्तार से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

पहले नाबालिग बेटी से किया 2 बार रेप, फिर भतीजी को भी जंगल में बनाया हवस का शिकार: छत्तीसगढ़ पुलिस ने पेरोल पर छूटे ‘रेपिस्ट’ को दबोचा, मिल चुकी है उम्रकैद की सजा

छत्तीसगढ़ के कोरिया में एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी और भतीजी का बलात्कार किया है। आरोपित को इससे पहले रेप के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। फ़िलहाल वह पेरोल पर आया हुआ था। दुष्कर्म के बाद आरोपित फरार हो गया था जिसे पुलिस ने कोरबा के जंगलों से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना कोरिया जिले के थानाक्षेत्र बैकुंठपुर की है। यहाँ 22 अक्टूबर 2024 को एक 11 वर्षीया नाबालिग लड़की ने अपने ही पिता के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर में बेटी ने बताया था कि 19 अक्टूबर की रात को घर में ही रेप किया। विरोध करने व किसी को बताने पर आरोपित ने अपनी बेटी को कत्ल करने की धमकी दी थी। 21 अक्टूबर की दोपहर में आरोपित पिता अपनी बेटी को लेकर लकड़ियाँ बीनने के बहाने जंगल गया। यहाँ उसने एक बार फिर से अपनी बेटी को हवस का शिकार बनाया।

पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2), 65(2), 87 और 127 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज कर लिया। अभी पुलिस मामले की जाँच शुरू ही की थी कि एक अन्य 12 वर्षीया नाबालिग लड़की ने बैकुंठपुर थाने में पहुँच कर उसी आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने आरोपित को अपना चाचा बताया। बकौल पीड़िता 21 अक्टूबर की शाम लगभग 5 बजे उसके चाचा ने लकड़ी के बहाने जंगल ले जा कर उस से रेप किया।

आरोपित ने अपनी भतीजी को भी कहीं मुँह खोलने पर मार डालने की धमकी दी थी। अपनी बेटी व भतीजी से रेप के बाद आरोपित फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों मामलों में एक ही धाराओं में FIR दर्ज कर के आरोपित की खोजबीन शुरू कर दी। सबसे पहले अरोपित को उसके नाते-रिश्तेदारों के यहाँ तलाशा गया। जब वो नहीं मिला तो सर्विलांस की मदद ली गई। आरोपित ने एक नंबर पर किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल से कॉल किया था।

पुलिस ने उसी को आधार बना कर खोजबीन की तो वह कोरबा के जंगलों से दबोच लिया गया। आरोपित को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया गया है। बताते चलें कि अपनी बेटी व भतीजी से रेप का यह आरोपित एक अन्य दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह अंबिकापुर जेल में बंद है। फ़िलहाल के लिए उसे पेरोल पर छोड़ा गया था। मामले में पुलिस की जाँच जारी है।

‘आतंकवाद’ पर लिखी किताब, अब हवाई जहाजों को उड़ाने की दे रहा धमकी?: जानें कौन है वो फरार ‘लेखक’ जिसकी तलाश में जुटी पुलिस, PM मोदी से मिलने की करता है माँग

देशभर में लगातार धमकी भरे कॉल्स और ईमेल्स की घटनाएँ सामने आई, जिसमें हवाई जहाजों से लेकर महत्वपूर्ण जगहों को उड़ाने की धमकी दी गई, लेकिन अब तक ये सभी अफवाहें साबित हुई हैं। पुलिस का मानना है कि इन धमकी भरे संदेशों के पीछे महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के गोंदिया जिले के रहने वाले 35 वर्षीय व्यक्ति, जगदीश उइके का हाथ हो सकता है। जगदीश उइके एक लेखक है, जिसने आतंकवाद पर एक किताब भी लिखी है। उसका दावा है कि उसने एक “सीक्रेट टेरर कोड” (25-MBA-5-MTR) को डिकोड किया है, जिसमें पाँच दिनों में 30 धमाकों की धमकी देने के बारे में बताया गया है।

उइके पर आरोप है कि कई सरकारी अधिकारियों को ईमेल भेजे, जिनमें प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय रेलवे मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य एजेंसियों के नाम शामिल हैं। इन ईमेल में उसने धमकी दी है कि यदि उसकी बात नहीं सुनी गई तो गंभीर नतीजे हो सकते हैं। इसके चलते नागपुर पुलिस ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर की सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचाव किया जा सके।

जगदीश उइके ने प्रधान मंत्री मोदी से मिलने की भी माँग की है, ताकि वह अपनी खोज के बारे में जानकारी साझा कर सके। उसने दावा किया है कि उसके पास आतंकवादी हमलों से जुड़ी कुछ खास जानकारियाँ हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके कारण रेलवे स्टेशनों और एयरलाइंस में सुरक्षा को बढ़ाया गया है और आतंकवाद-रोधी दस्ते भी सतर्क हो गए हैं।

इस घटना के बाद पुलिस ने उइके को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उइके के भेजे गए ईमेल्स के कारण कई जगहों पर सुरक्षा की सख्ती बढ़ाई गई है ताकि कोई भी अनहोनी न हो सके।

इसी बीच, 22 अक्टूबर को लगभग 50 उड़ानों में बम की झूठी धमकी मिलने की घटनाएँ हुईं। इसमें इंडिगो और एयर इंडिया की 13-13 उड़ानें शामिल थीं। ऐसे में सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ इन सभी धमकियों को गंभीरता से ले रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर मजबूत किया जा रहा है।

अयोध्या में साधुओं ने नहीं छेड़ी कोई लड़की, इस्लामी पत्रकारों ने झूठ फैलाया: जाँच के बाद UP पुलिस ने सच बताया, रील के कारण हुआ विवाद

उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बाइक सवार 2 साधुओं को कुछ लोगों से वाद-विवाद करते देखा जा सकता है। हिन्दू विरोधी अफवाह उड़ाने के लिए पहले से ही कुख्यात ज़ाकिर अली त्यागी और कविश अज़ीज़ जैसे हैंडलों से दावा किया गया है कि दोनों साधु महिलाओं से छेड़खानी कर रहे थे। इन्होने साधुओं पर एक व्यक्ति को पीटने का भी आरोप लगाया है। ऑपइंडिया ने इन दावों की जमीनी स्तर पर पड़ताल की।

वायरल वीडियो में एक बाइक पर सवार 2 साधु दिखाई दे रहे हैं। तीसरा साधु सड़क पर है। कुछ लोगों से बाइक सवार साधुओं की पहले बहस होती है। बाद में एक साधु की वीडियो बना रहे युवक से हाथापाई भी होती है। वीडियो बना रहा युवक साधुओं पर लड़कियों को छेड़ने का आरोप लगाता सुनाई दे रहा है। सड़क पर खड़ा तीसरा साधु बीच बचाव करता दिख रहा है। थोड़ी देर के झगड़े के बाद दोनों साधु बाइक से लौट जाते हैं।

लगभग 2 मिनट 6 सेकेण्ड लम्बे इस वीडियो को ज़ाकिर अली त्यागी ने 23 अक्टूबर को शेयर किया है। उसने अपने कैप्शन में लिखा, “अयोध्या में 2 साधुओं ने लड़की के साथ की छेड़छाड़ की तो हुई सरेआम धुनाई, साधुओं ने बाद में छेड़छाड़ का विरोध करने वाले युवक की भी पिटाई की, लड़की के साथ छेड़छाड़ करने के बाद बाइक पर भागे साधू।”

ज़ाकिर अली के साथ हिन्दू विरोधी अफवाहों का ही एजेंडा चलाने वाली कविश अज़ीज़ ने भी इसी वीडियो को शेयर किया है। कविश अज़ीज़ ने लिखा, “मतलब बिना मुसलमान के कुछ नहीं हो सकता। अयोध्या में तीन साधू लड़की छेड़ते पकड़े गए तो राहगीरों ने पिटाई कर दिया, बाबा की जब धुनाई होने लगी तो कहने लगे ‘इसीलिए मुसलमान हावी है’ मतलब लड़की छेड़ते हुए पकड़े गए अगर कोई कूट दे तो वहाँ भी धर्म का कार्ड खेलना है।”

चित्र – X/ज़ाकिर अली & कविश

अयोध्या पुलिस ने बताई सच्चाई

अयोध्या पुलिस ने इस पूरे मामले की असलियत बताई है। एडिशनल एसपी अयोध्या ने गुरुवार (22 अक्टूबर) को बताया कि घटना थानाक्षेत्र कैंट की है। घटनास्थल पंचमुखी हनुमान मंदिर तिराहा बताया गया। जब पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि एक पक्ष बाइक से वीडियो रील बनाता हुआ जा रहा था। रील बनाने पर दूसरे पक्ष ने कुछ टिप्पणी की जिस से दोनों पक्षों में वाद-विवाद हो गया। यही वाद-विवाद बाद में हाथापाई में बदल गया।

एडिशनल एसपी ने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे मामले में छेड़खानी जैसी कोई घटना नहीं घटित हुई है। पुलिस ने इस मामले में 2 लोगों को हिरासत में लिया है। इनके खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई की गई है। अयोध्या पुलिस ने अपने मीडिया सेल में साफ तौर पर भ्रामक सूचना न फैलाने की हिदायत दी है।

सफाई के बावजूद नहीं सुधरा ज़ाकिर

अयोध्या पुलिस की सफाई के बावजूद अपने नाम में त्यागी लगाने वाला ज़ाकिर अली बाज नहीं आया। पोल खुलने के बाद उसने एक फैक्ट चेक करने वाले हैंडल को अपशब्द बोले। ज़ाकिर ने लिखा, “अबे अपना फ़र्ज़ी एनालिसिस अपने पिछवाड़े में घुसेड़ ले!”

ज़ाकिर अली ने अपने इस अपशब्द वाले ट्वीट में 2 अलग-अलग समाचार संस्थानों के स्क्रीनशॉट भी अटैच किए हैं। इन दोनों खबरों की हेडलाइन में भी ज़ाकिर के दावों से मिलती जुलती हेडलाइन लिखी हुई है।

शरिया काउंसिल नहीं जारी कर सकती तलाक सर्टिफिकेट, कोर्ट के आदेश तक निकाह रहेगा मान्य: HC में शौहर की याचिका खारिज, बीबी को देना पड़ेगा गुजारा भत्ता

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने हाल ही में यह निर्णय दिया कि शरिया काउंसिल एक निजी संगठन है और कानूनी अदालत नहीं है। यह निर्णय एक मुस्लिम दंपति के तलाक से जुड़े मामले में दिया गया। मामला तमिलनाडु शरिया काउंसिल के 2017 में एक शौहर को तलाक प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ा था, जिसने अपनी बीवी से 2010 में निकाह किया था। कोर्ट ने कहा कि शरिया काउंसिल परिवार और वित्तीय मुद्दों में मदद कर सकती है, लेकिन तलाक सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकती और न ही किसी पर जुर्माना लगा सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में जस्टिस जी.आर. स्वामिनाथन ने इस तलाक सर्टिफिकेट को “चौंकाने वाला” बताया और कहा, “केवल राज्य द्वारा स्थापित अदालतें ही फैसले दे सकती हैं।” जस्टिस स्वामिनाथन ने शौहर की याचिका को खारिज करते हुए यह पुष्टि की कि निकाह तब तक मान्य रहेगा जब तक कि कोई अधिकार प्राप्त अदालत इसे भंग नहीं करती।

जानकारी के मुताबिक, 2018 में बीवी ने इस तलाक को चुनौती दी थी और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत के लिए मामला दायर किया था। उन्होंने दावा किया कि तीसरी बार “तलाक” उन्हें कभी नहीं दिया गया था। साल 2021 में मजिस्ट्रेट ने उनके पक्ष में फैसला दिया और घरेलू हिंसा के लिए उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा और उनके नाबालिग बच्चे के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश दिया। शौहर की इस आदेश के खिलाफ अपील को भी खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने मौजूदा पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।

जस्टिस स्वामिनाथन ने यह भी कहा कि अदालत की मान्यता के बिना शौहर का एकतरफा तलाक देकर निकाह को तोड़ नहीं सकता। उन्होंने कहा कि दूसरा निकाह करना “मानसिक उत्पीड़न” का कारण बनता है, जो कि क्रूरता के दायरे में आता है। जस्टिस स्वामिनाथन ने यह साफ कहा कि दूसरी शादी का मामला किसी भी धर्म में क्रूरता की श्रेणी में आता है, और इससे प्रभावित जीवनसाथी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत पाने के हकदार होते हैं।