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‘काफिर से शादी कर इस्लाम का अपमान किया’: दिवाकर के इश्क में UP आई ईरान की फायजा डर के साए में जी रही, कट्टरपंथी कह रहे- तेरा हश्र बुरा होगा

मुरादाबाद में एक अंतरधार्मिक विवाह को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है, जहाँ ईरानी युवती फायजा और मुरादाबाद के यूट्यूबर दिवाकर सिंह को सोशल मीडिया पर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। फायजा और दिवाकर की मुलाकात तीन साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। इसके बाद दोनों ने ईरान और भारत में क्रमशः ईरानी और हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। इस विवाह को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, और दोनों पिछले छह महीनों से साथ रह रहे हैं।

फायजा ने बताया कि शादी के बाद से ही उन्हें और उनके पति को सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिलनी शुरू हो गईं। खासतौर पर फायजा को कहा जा रहा है कि वह भारत छोड़कर वापस ईरान चली जाएँ। धमकी भरे संदेशों में यह भी कहा गया कि उन्होंने “एक काफिर से शादी करके इस्लाम का अपमान किया है” और उन्हें “भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” धमकी देने वालों ने जाकिर नाइक के वीडियो देखने की सलाह भी दी है।

फायजा और दिवाकर

फायजा और दिवाकर के परिवारों को इस शादी से कोई आपत्ति नहीं थी और दोनों ने अपनी पसंद से शादी की थी। फायजा ने बताया कि वह दिवाकर के साथ खुश हैं और उनकी शादी पूरी तरह से उनकी मर्जी से हुई है। वह भारत के लोकतंत्र और कानून पर भरोसा करती हैं कि उनकी सुरक्षा की जाएगी। लेकिन सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों ने उनके जीवन को खतरे में डाल दिया है।

दिवाकर, जो एक ट्रैवल ब्लॉगर हैं, ने बताया कि जैसे ही यह मामला मीडिया में आया, धमकियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। पहले सिर्फ कुछ संदेश मिलते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया पर लगातार उन्हें और उनकी पत्नी को निशाना बनाया जा रहा है। फायजा ने कहा कि वह अब डर के साए में जी रही हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है। फायजा ने उम्मीद जताई है कि भारत सरकार और प्रशासन उनके मानवाधिकारों की रक्षा करेंगे और उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराएंगे।

इस मामले में फायजा और दिवाकर ने मुरादाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सतपाल अंतिल से मिलकर सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने बताया कि धमकियों से वे और उनका परिवार बेहद परेशान हैं और उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच के आदेश दिए हैं। एसपी सिटी रणविजय सिंह ने कहा कि पुलिस साइबर सेल धमकी देने वालों की पहचान करने में लगी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जो मुल्ले की सुनने के आदी, क्या वे मी लॉर्ड की सुनेंगे… सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह पर जो खींची नई लकीरें, क्या उससे मिटेगी पीरियड आते ही निकाह कर देने की मजहबी लकीर?

बालिग होने से पहले बच्चों की शादी करा देना आज से 20-25 साल पहले कोई बड़ी बात नहीं हुआ करती थी, लेकिन आज के समय में इनका होना चिंता का विषय है। कारण- शायद पहले लोगों में जागरुकता न रही हो, लेकिन अब बाल विवाह के दुष्प्रभावों को लेकर समाज में अभियान चलाए जाते हैं और इसकी रोकथाम के लिए कानून भी है।ॉ

बावजूद इसके भी अगर समाज में ये कुरीति जिंदा है तो स्थिति चिंताजनक है। मतलब साफ है कि लोग ये तो जान-समझ रहे हैं कि बचपन में शादी कर देने से बच्चों की जिंदगी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी, उनपर मानसिक और शारीरिक बल पड़ेगा…लेकिन सब समझने के बाद भी वो इससे निजात नहीं पा रहे।

बाल विवाह पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और टिप्पणी

हाल में सुप्रीम कोर्ट में CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की और 141 पन्नों के फैसला देते हुए साफ कहा, “बाल विवाह निषेध अधिनियम किसी भी ‘पर्सनल लॉ’ की परंपरा से बाधित नहीं हो सकता। ये बच्चों की आजादी, उनकी पसंद, उनके निर्णय लेने की क्षमता, बचपन में आनंद लेने के अधिकार को प्रभावित करता है।”

इसके साथ कोर्ट ने मामले पर फिक्र जाहिर करते हुए ‘सोसाइटी फॉर एनलाइटनमेंट एंड वॉलेंटरी एक्शन’ द्वारा 2017 में लगाई गई याचिका पर फैसला देते हुए कुछ निर्देश दिए-

  • दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा है कि बालविवाह रोकने के लिए राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र जिला स्तर पर चाइल्ड मैरिज ​प्रिवेंशन ऑफिसर नियुक्त किए जाएँ।
  • हर राज्य इस संबंध में 3 महीने में रिपोर्ट अपलोड करें।
  • स्कूल, पंचायत, स्थानीय संस्थाओं में चाइल्डलाइन (1098) और महिला हेल्पलाइन (181) की जानकारी दी जाए। बच्चों को समझाया जाए कि कैसे मदद ली जाती है।
  • स्कूलों, धार्मिक संस्थाओं और पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ। स्थानीय भाषा में प्रभावी होर्डिंग्स और स्लोगन बनाए जाएँ।
  • ‘बाल विवाह मुक्त गाँव’ की पहल हो। ऐसे गांवों व ग्राम पंचायतों को ‘बाल विवाह मुक्त’ सर्टिफिकेट दिया जाए। सामुदायिक नेतृत्व को सक्रिय भूमिका के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • राज्य बाल विवाह निषेध यूनिट बनाएँ। इसमें पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को रखा जाए, जिनमें 2 महिलाएँ जरूर हों।
  • मजिस्ट्रेट स्वत: संज्ञान लेकर निर्देश जारी कर सकेंगे। केंद्र, राज्य सरकारों के साथ मिलकर ऐसे मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएँ।
  • कोई सरकारी कर्मचारी बाल विवाह में शामिल पाया गया तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

भारत में घटे बाल विवाह के मामले, लेकिन खत्म क्यों नहीं हुए

ऊपर आँकड़े भले ही आपको यहाँ गिरते दिखें लेकिन बाल विवाह एक चिंता का विषय है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तरफ जहाँ सुप्रीम कोर्ट इसके रोकथाम के लिए तरीके सुझा रही है, निर्देश दे रही है। वहीं समाज में मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसी चीजें भी हैं जो एक मजहब को पूरी तरह से आजादी देती हैं कि लड़की का निकाह 15 साल की उम्र में करवा दिया जाए। यानी अगर कोई मुस्लिम परिवार बच्ची के इस उम्र में एंटर करते ही उनकी शादी करा देता है तो इसका मतलब ये है कि वो उनके हिसाब से गलत नहीं है और कानून भी उन्हें कोई सजा न दे।

संविधान से ऊपर मुस्लिम पर्सनल लॉ

ये आजादी एक समुदाय एक ऐसे देश में मिली हुई है जहाँ की सरकार से लेकर न्याय व्यवस्था बाल विवाह जैसे मुद्दे पर चिंतित है और विचार कर रहे हैं कि अभी जो लड़कियों की शादी की उम्र 18 है उसे बढ़ाकर 21 कर देनी चाहिए। ऐसे देश में एक मजहब अपना पर्सनल लॉ चलाता है और देश के संविधान, उसमें लिखी बात, मानवाधिकार बचाने के लिए लागू कानून को मानने से इनकार कर देता है। क्या बाल विवाह से लड़ने के क्रम में देश में एक समान कानून लागू करने का काम नहीं होना चाहिए। या फिर संविधान का दुहाई सिर्फ अपने वो अधिकार माँगने के लिए ही की जाएगी जो उनसे छीने ही नहीं गए। या आजादी ऐसे मामलों में चाहिए जो समाज को आगे बढ़ाने की जगह सदियों पहले के समय में ढकेंले

बीते समय भारत में कई ऐसे प्रदर्शन हुए हैं जहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों को संविधान का हवाला देते अधिकार की बात करते देखा गया, लेकिन बात जैसे ही इस्लामी कट्टरपंथी रवायतें बदलने (तीन तलाक से लेकर बुर्का पहनने) पर आई सब तुरंत एकजुट होकर अपने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दुहाई के अनुसार चलने की बात कहने लगे और धमकियाँ दी जाने लगीं कि वो मुस्लिम पर्सनल लॉ में छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।

मालूम हो कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937 के तहत नाबालिगों (18 साल से कम उम्र की लड़ी) को निकाह की अनुमति दी गई है। कानून के अनुसार लड़की के यौवन में प्रवेश करते ही उसे वयस्क मान लिया जाता है और उसका निकाह जायज होता है

देश का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते बताइए क्या ये रवायत सही है? क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का असर सिर्फ उन्हीं तक है जो इसको मानते हैं। न्यायालय में फैसले देते समय इसका असर कैसे पड़ता है ये तो आपने पढ़ा ही…अब सामाजिक तौर पर भी सोचिए। जहाँ ऐसी चीजों को बढ़ावा मिलेगा क्या उससे दूसरा समुदाय प्रभावित नहीं होगा! क्या वो देखा-देखी में अपनी कम उम्र की बेटी की शादी के ख्याल मन में नहीं लाएँगे?

ये ध्यान रखने वाली बात है कि देश में बाल विवाह के आँकड़े कम जरूर हुए लेकिन देश से खत्म नहीं हुए हैं। सरकार कानून बनाकर प्रयास कर रही है, सामाजिक संगठन अभियान चलाकर लोगों को जारूक कर रहे हैं, न्याय व्यवस्था बच्चों के अधिकार छीनने वालों पर कार्रवाई कर रही हैं… लेकिन ये सारी चीजें तब तक काफी नहीं हैं जब तक कि जमीनी स्तर पर इस काम न हो। ऐसे पर्सनल लॉ रहेने की वजह से हमेशा संविधान से चलने वाले देश और मुस्लिम पर्सनल लॉ मानने वालों के भी टकराव होगा। संविधान में मिले अधिकार की बात करके देश में एक अन्य कानून को समान रूप से चलाते रहना उचित नहीं है।

क्या होगा बाल विवाह का असर

बाल विवाह के दुष्परिणाम अनेक हैं और ये किसी धर्म-मजहब को देख अपना असर नहीं दिखाते। कम उम्र में निकाह या शादी से बच्चियों की शिक्षा रुकती है, उनका सामाजिक विकास बाधित होता है, उन्हें घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ आती हैं वो अलग। लड़कों पर पढ़ाई छोड़ जल्दी कमाने का दबाव होता है और लड़कियों पर परिवार बढ़ाने का। बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले ये नहीं सोचते कि बढ़ती दुनिया को देख आगे चलकर उनके बच्चे कितना पिछड़ा महसूस करेंगे और उनकी क्षमताएँ कैसे मरती चली जाएँगी। अगर सिर्फ ये तर्क देकर इसे जायज ठहराया जाएगा कि किसी पर्सनल लॉ के कारण ये उचित है तो ये जिद्द केवल और केवल समाज के भावी युवाओं से उनके अधिकार छीनने का काम करेगी और बाल अवस्था में ही उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर कर देगी, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।

ईंट मार प्रतिमा तोड़ी, DJ वाले को खींचकर मारा, फिर मस्जिद से हुआ ऐलान… चश्मदीदों ने बताया बइराइच में क्या-क्या हुआ, कहा- राम मंदिर से नाराज हैं मुस्लिम

बहराइच में 13 अक्टूबर 2024 को हुए सांप्रदायिक तनाव ने एक बार फिर जिले में खौफ और आतंक का माहौल बना दिया है। इस हिंसा में 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की निर्मम हत्या कर दी गई, जिससे हिंदू समुदाय में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह हमला पहले से सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था, जिसमें स्थानीय मस्जिद से भड़काऊ ऐलान किए गए थे और भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया गया था।

मूर्ति पर हमले से झगड़े की शुरुआत, फिर मस्जिद से ‘सभी को’ मारने का ऐलान

कट्टरपंथियों की हिंसा के शिकार हुए विनोद कुमार मिश्रा ने ऑपइंडिया से बातचीत में पूरे घटनाक्रम को याद किया और अपनी आपबीती सुनाई। विनोद मिश्रा ने शुरुआत से लेकर हिंसा तक की घटना को सिलसिलेवार तरीके से बताया कि कैसे एक शांत धार्मिक जुलूस ने अचानक हिंसा का रूप ले लिया। उन्होंने कहा, “जब हमारी मूर्ति मौके पर पहुँची, तो मुस्लिम लोगों ने मूर्ति पर ईंटें फेंकी, जिससे प्रतिमा का हाथ टूट गया और फिर दूसरी मूर्ति भी ईंट-पत्थर मारने की वजह से टूट गई। इसके बाद डीजे वाले को खींचकर मारा गया।”

मिश्रा का आरोप है कि इस विवाद की शुरुआत अब्दुल हमीद के बेटे ने की, जिसने छत से पत्थर फेंककर माहौल बिगाड़ा। इसके बाद हिंदू समुदाय ने धरने पर बैठने का निर्णय लिया और प्रशासन से हस्तक्षेप की माँग की। हालाँकि पुलिस और प्रशासन ने हिंदुओं को आश्वासन दिया कि मामले को संभाला जाएगा, लेकिन हिंसा थमने के बजाय और बढ़ गई। विनोद कुमार मिश्रा ने बताया, “मुस्लिमों ने जो किया, वो अन्याय है। हमने माफी की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने हमारी माँगें नहीं मानी।”

हिंसा को रोकने के प्रयास में विनोद कुमार मिश्रा और अन्य हिंदू नेताओं ने अब्दुल हमीद से बातचीत भी की। हालाँकि, हमीद ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि डीजे पर पाकिस्तान का गाना बज रहा था, जिससे मुस्लिमों को आपत्ति थी। विनोद कुमार मिश्रा ने बताया, “अब्दुल हमीद मेरे साथ ही पढ़ता था, इसलिए मैंने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने कहा कि उसका लड़का अब उसके काबू में नहीं है।”

विनोद ने भावुक होते हुए बताया कि उनके बचपन का दोस्त अब्दुल हमीद भी इस हिंसा में शामिल था। उन्होंने कहा, “बचपन का दोस्त था अब्दुल हमीद। मुझे कभी नहीं लगा था कि वो ऐसा करेगा। ये मेरे लिए बहुत बड़ा धक्का था।”

उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद से बातचीत के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही थी। इसके बाद मस्जिद से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का ऐलान किया गया, और लाउडस्पीकर पर कहा गया कि ‘जो जहाँ मिले, उसे मार डालो, काट दो।’ इसके तुरंत बाद करीब 150-200 लोगों की भीड़ हथियारों के साथ निकली और हमला शुरू कर दिया।

बाइक से भागने की कोशिश की, तो टायर काट डाला

विनोद कुमार मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी जान पर बनी आपबीती भी साझा की। जब वे अपनी बाइक से भागने की कोशिश कर रहे थे, तो उन पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। “गाड़ी स्टार्ट ही की थी, कि हमारे ऊपर हमला बोल दिया। 5-7 लोग आए और फरसे से हमला किया। मेरे अंगूठे और सर में गहरा घाव लगा। मैं लहूलुहान हो गया।” इसके बाद उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया गया।

विनोद ने बताया कि पुलिस की निष्क्रियता इस पूरे घटनाक्रम में बहुत ही चौंकाने वाली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक मुस्लिम भीड़ हमला करती रही, तब तक पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जब हिंदू लोग एकत्रित होकर जवाब देने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। “पुलिस ने हमारी कोई रिपोर्ट तक नहीं लिखी,” उन्होंने कहा। विनोद के अनुसार, इस हिंसा में 7-8 हिंदू घायल हुए, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

‘सिर्फ झंडा उतारने पर मार डालोगे?’

ऑपइंडिया से बातचीत में घटना स्थल पर मौजूद रहे चंद्रपाल मिश्रा ने बताया कि कैसे झंडा उतारने पर ओम प्रकाश को मार डाला गया। उन्होंने कहा, “उस लड़के (ओम प्रकाश) की क्या गलती थी? उसने किसी को नहीं मारा, उसने सिर्फ हरा झंडा ही उतारा था, जो पत्थर बरसाने के बाद किया गया था।”

चंद्रपाल ने यह भी बताया कि राम मंदिर बनने के बाद से मुस्लिमों में गुस्सा है, इसके बाद से ऐसी घटनाएँ बढ़ गई हैं। मुस्लिम राम मंदिर बनने का गुस्सा उतार रहे हैं। उन्होंने ताजिया को लेकर भी अपनी बात रखी। चंद्रपाल ने कहा, “हम लोग तो ताजिया में भी शामिल रहते थे लेकिन कोरोना के दौरान ताज़िया नहीं उठने की घटना से मुस्लिम समुदाय नाराज था, और इसी कारण से उन्होंने हिंदू जुलूस को निशाना बनाया।” चंद्रपाल ने कहा, “मुस्लिमों का कहना था कि हमारा ताज़िया नहीं उठा, तो हिंदुओं की मूर्ति भी नहीं उठने देंगे।”

अतीत में भी हो चुकी है इस तरह की घटना

इस हिंसा की घटनाएँ पहली बार नहीं हुई हैं। 1994-95 में भी बहराइच में ऐसी ही सांप्रदायिक घटनाएँ हुई थीं, जब मुस्लिम समुदाय ने मूर्तियों को रोकने का प्रयास किया था। विनोद कुमार मिश्रा ने इस घटना की तुलना करते हुए कहा कि इस बार हिंसा कहीं ज्यादा संगठित और भयावह थी। उन्होंने कहा, “अगर प्रशासन सख्त होता, तो ये घटना नहीं होती।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से डरने वाला नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “हम अगले साल भी यात्रा निकालेंगे, चाहे हमें बलिदान क्यों न हो जाएँ।”

बहराइच में हुई इस सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सांप्रदायिकता की आग कितनी घातक हो सकती है, जब इसे सही समय पर नियंत्रित नहीं किया जाता।

‘अल जजीरा’ ने हिंदुओं के अमेरिकी संगठन को किया बदनाम, HAF को बताया ‘भारतीय एजेंट’: भारत-मोदी घृणा में चलाया एक और प्रोपेगेंडा

क़तर की सरकार के पैसे पर चलने वाले भारत और हिन्दू विरोधी अल जजीरा ने हाल ही में एक लेख प्रकाशित किया है। इस लेख में ‘हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन’ नाम के संगठन पर भारत की मोदी सरकार के लिए अमेरिका में ‘प्रचार शाखा’ की तरह काम करने का आरोप लगाया है। अल जजीरा ने दावा किया कि यह संगठन अमेरिका में भारत सरकार के लिए लॉबिंग करता है।

अल जजीरा में 15 अक्टूबर, 2024 ‘कैपिटल हिल पर भारत की मोदी सरकार के लिए कौन कर रहा लॉबिंग’ (Who is lobbying for India’s Modi government on Capitol Hill) शीर्षक से यह लेख मुक्ता जोशी नाम की एक कथित पत्रकार ने लिखा है। जोशी खुद को वकील से बनी पत्रकार बताती है।

हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) अमेरिका में हिन्दू हितों के लिए काम करने वाला एक संगठन है। इसे विदेशी सरकार के लिए काम करने वाला एक संगठन घोषित करना उसके हिन्दू हित के लिए किए जाने वाले काम को रोकने का एक प्रयास है। साथ ही इस संगठन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठाने का यह एक प्रयास है।

यह सभी दावे करने के लिए अल जजीरा ने वाशिंगटन में काम करने वाले के बेनामी अमेरिकी कर्मचारी का हवाला दिया है। इसने आरोप लगाया कि हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन पाकिस्तान को सितंबर 2022 में F-16 लड़ाकू विमानों के लिए एक अपडेट लेने से रोकना चाहता था।

यह दावा काफी हास्यास्पद है क्योंकि हिन्दुओं के लिए काम करने वाला कोई भी संगठन पाकिस्तान का विरोध करेगा, क्योंकि पाकिस्तान खुले तौर भारत और हिन्दुओं का विरोध किया है। यह बात तब और भी स्पष्ट हो जाती है कि जब पाकिस्तान कुछ समय पहले आतंक पालने के लिए FATF की ग्रे सूची में था।

अल जजीरा का कहना है कि क्योंकि भारत सरकार पाकिस्तान को F-16 अपडेट नहीं लेना चाहती थी, इसीलिए हिन्दू अमेरिका फाउंडेशन अमेरिका में विरोध दर्ज करवा रही थी। जबकि असल बात ये है कि पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कोई भी मानवाधिकार के लिए काम करने वाला संगठन यही कदम उठाएगा।

बेनामी अमेरिकी कर्मचारी और आरोप

कतर से पैसे लेने वाले अल जजीरा में लिखने वाली मुक्ता जोशी ने लिखा, “बेनामी अमेरिकी कॉन्ग्रेस कर्मचारी से बात करने के बाद मुझे ये साफ़ हो गया कि हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) भारत सरकार की ओर से काम कर रहा था।” अल जजीरा ने इसके बाद HAF के बारे में दावा किया कि यह 2014 से ही भाजपा और मोदी सरकार के लिए काम किया है।

अल जजीरा ने HAF को एक विदेशी संस्था की कठपुतली के रूप में बदनाम करने की कोशिश की, जबकि असल बात यह है कि यह हिन्दुओं के अधिकारों के लिए अमेरिका में जबरदस्त काम करता है और इसकी अमेरिका काफी अच्छी साख है।

अल जजीरा ने आगे अपना प्रलाप जारी करते हुए “HAF निष्पक्ष होने के दावे के बावजूद भाजपा के वकील के रूप में उभरा है। यह भारत से संबंधित अमेरिकी विदेश नीति और अमेरिका में पारित किए जाने वाले कानून को प्रभावित करने के लिए काम करता है।”

HAF को ‘विदेशी एजेंट’ बताने का प्रयास

कथित ‘खोजी पत्रकार’ मुक्ता जोशी के लेख में माँग की गई कि HAF को विदेशी एजेंट के तौर पर अमेरिकी कानून के तहत रजिस्टर किया जाए। इसके पीछे मुक्ता जोशी ने भाजपा के लिए काम करने वाले प्रलाप का तर्क दिया था। HAF के मीडिया विभाग के डायरेक्टर मैट मैकडरमॉट ने अल जज़ीरा को इस लेख पर दिए गए बयान में कहा, ” अगर हमारी विचारधारा किसी विदेशी सरकार की विचारधारा से मेल खाती है तो यह अकेला तथ्य हमें विदेशी एजेंट घोषित किए जाने के लिए पर्याप्त नहीं है।”

तर्कों को धता बताते हुए मुक्त जोशी और अल जजीरा ने HAF के खिलाफ अपना प्रोपेगेंडा जारी रखा। HAF के खिलाफ अल जजीरा ये कुछ सबूत पाया है, जिसके शेयर वह इसे मोदी सरकार का एजेंट और विदेशी बताने पर तुला हुआ है। यह पढ़ने में ही हास्यास्पद लगते हैं। यह कथित सबूत निम्नलिखित हैं-

1. गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी पर वीजा प्रतिबंध लगाने पर HAF का विरोध

2. भारत और हिंदू धर्म पर कैलिफोर्निया की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का प्रस्ताव

3.दिवाली को अमेरिका में सरकारी त्यौहार के तौर पर मान्यता देने की वकालत

4.योग को बढ़ावा

5. हिंदुओं को निशाना बनाने वाली एकतरफा USCIRF रिपोर्ट की आलोचना

6. धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपने देश को छोड़ने वाले अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करने वाले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का समर्थन

7. सांसद प्रमिला जयपाल के हिंदू विरोधी प्रस्ताव की खिलाफत

इस लेख के अंत में दावा किया गया, “इस साल के आम चुनाव से पहले, जिसमें मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे थे, हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन ने भाजपा के मुद्दों को दोहराना जारी रखा।” हालाँकि, इस आरोप को साबित करने के लिए अल जजीरा ने कोई सबूत नहीं दिया।

दो अलग संस्थाओं को बताया अलग

अल जजीरा ने ‘पता लगाया’ कि HAF के बोर्ड में शामिल लोग एक अन्य संस्थान हिंदू अमेरिकन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (HAPAC) के बोर्ड में भी काम करते हैं। इसने दावा किया कि HAPAC ने 2012 से अब तक 200,000 डॉलर (₹1.68 करोड़) का राजनीतिक दान दिया है।

असल बात यह है कि HPAC और HAF दोनों अलग-अलग संस्थाएँ हैं। दोनों स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और अमेरिकी कानून के दायरे में रह कर काम करते हैं। यह सब जानने के बाद HAF और HAPAC को अल जजीरा ने एक ही बताने का प्रयास किया। इसके बाद अल जजीरा ने इस बात पर तक दुख जताया कि HAF के लोग किसी का प्रचार क्यों कर रहे हैं।

अल जजीरा की मोदी के प्रति घृणा

कतर से पैसे लेने वाले अल जजीरा 2002 के गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी के विषय में लगातार झूठी अफवाहें फैलाता रहा है। अल जजीरा गोधरा में हिन्दुओं पर हुए हमले को छुपाता रहा है और प्रधानमंत्री को दंगों को आरोपित बताता रहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त SIT ने 2012 में नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी। अमेरिकी सरकार द्वारा उन पर वीजा प्रतिबंध दंगों में उनकी कथित सहभागिता के आरोपों के कारण लगाया गया था, असल में यह आरोप झूठ थे और बाद में इस बात को सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया।

ऐसे में साफ़ हो जाता है कि अगर HAF नरेन्द्र मोदी को वीजा ना दिए जाने का विरोध कर रहे थे तो वह गलत नहीं थे। किसी नेता का प्रचार करना या फिर हिन्दुओं के अधिकार के लिए बात करना अल जजीरा के अनुसार, भाजपा का समर्थन करना हो जाता है।

असल में हिन्दू विरोधी एजेंडा है मकसद

अल जजीरा इस बात पर दुखी है कि HAF हिन्दुफोबिया की बात करता है। उसके दुख का कारण यह है कि हिन्दुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और हिन्दूफोबिया को इस्लामी कट्टरपंथियों और वापमंथी नकारते रहे हैं। यह तब है जब हिन्दुओं के विरुद्ध हमलों से अखबार पटे पड़े हैं।

कतर के पैसे पर चलने वाले अल जजीरा ने सितंबर 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ सम्मेलन के खिलाफ HAF द्वारा चलाए गए अभियान पर भी चिंता जताई। अल जजीरा ने कहा कि भले ही यह कार्यक्रम बाद में आयोजित हुआ लेकिन कई लोग इससे पीछे हट गए। HAF की राम माधव द्वारा प्रशंसा को भी अल जजीरा ने सही नहीं माना।

HAF और भारतीय दूतावास के बीच भी संबंध स्थापित करने का असफल प्रयास

अल जजीरा ने लिखा कि जून, 2017 में HAF के सदस्यों को भारतीय दूतावास ने आमंत्रित किया था और यह अलग बात थी। अल जजीरा को समझाना चाहिए कि आखिर किसी राष्ट्राध्यक्ष की एक दूसरे देश की यात्रा के दौरान हिन्दू समुदाय के लोग क्यों नहीं बुलाए जाएँगे।

अल जजीरा और उसकी लेख लिखने वाली मुक्ता जोशी इतनी शातिर हैं कि उन्होंने यह सारी बातें लिखने के बाद निष्कर्ष निकाला कि भारतीय दूतावास और HAF के बीच कोई संबंध नहीं है। ताकि आदमी आसानी से उनके एजेंडे को पहचान ना पाए।

भारत की धरती पर जन्म लेकर हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाली इस्लामी कट्टरपंथियों की ‘मानसिक गुलाम’ मुक्ता जोशी ने ट्विटर पर यह लेख साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने इस मामले की 7 महीने तक जाँच की है। हास्यास्पद यह है कि 7 महीने तक जाँच करने के बावजूद एक भी बात साबित नहीं कर पाई कि HAF कैसे भारत सरकार के लिए काम करता है। इन सबके बाद भी मुक्ता जोशी के इस लेख को अल जजीरा ने केवल इसलिए जगह दी है क्योंकि यह हिन्दू विरोधी एजेंडा को बढ़ाता है।

महाराष्ट्र CM रहते दुबई में दाऊद इब्राहिम से मिले थे शरद पवार: भीमराव अंबेडकर के पौत्र का दावा, कहा- बाबा सिद्दीकी के साथ जो हुआ वह केवल एक शुरुआत है

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व एनसीपी नेता शरद पवार के अंडरवर्ल्ड दाउद इब्राहिम से रिश्तों पर फिर दावा हुआ है। ये दावा वंचित बहुजन अघाड़ी नेता व भीम राव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने किया है। उन्होंने 18 अक्टूबर 2024 को मीडिया से बात करते कहा कि 1988-91 में जब शरद पवार मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने दुबई जाकर दाऊद इब्राहिम से मुलाकात की थी।

उन्होंने सवाल किया है कि क्या केंद्र सरकार ने उन्हें इस मुलाकात के लिए मंजूरी दी थी? अगर हाँ, तो केंद्र सरकार इसकी रिपोर्ट को पब्लिश करे। और अगर इस मुलाकात के लिए उन्हें मंजूरी नहीं मिली थी तो क्या उन्होंने लौटकर इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी?

अंबेडकर कहते हैं कि इतने समय बाद उन्होंने ये सवाल इसलिए उठाया है क्योंकि अब दोबारा से महाराष्ट्र में 90 की स्थिति बनती दिख रही है। बाबा सिद्दीकी के साथ जो हुआ वो केवल शुरुआत है। इसकी वजह क्या है केंद्र को इसे ढूँढना चाहिए।

पूर्व रॉ अधिकारी का दावा

मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है कि शरद पवार और दाऊद के संबंधों पर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले रॉ के एक पूर्व अधिकारी एनके सूद ने बताया था कि एनसीपी के मुखिया शरद पवार के भी दाऊद से संबंध थे। उन्होंने बताया था कि इसकी एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं से करीबी के चलते ही अंडरवर्ल्ड डॉन देश से भागने में सफल हुआ था। इसके अलावा उसे पकड़ने के लिए जो खुफिया ऑपरेशन चले वो भी इन्हीं करीबियों के कारण नहीं सफल हुए और इसी कारण दाऊद भारत भी नहीं लौटा। पूर्व रॉ अधिकारी ने बयान में कहा था कि जब दाऊद के सरेंडर की बात हुई थी तो शर्त सिर्फ ये थी कि उसे ऑर्थर जेल में थर्ड डिग्री न दी जाए। मगर शरद पवार ने उस माँग को भी नहीं स्वीकार। उन्हें डर था अगर दाऊद लौटता तो पवार समेत उन सभी नेताओं को डर था कि उसके मुँह खोलते ही इनका राजनैतिक करियर चौपट हो जाएगा।

मुंबई धमाकों पर बोला झूठ

इसके अलावा मालूम हो कि मुंबई ब्लास्ट जिनका इल्जाम दाऊद और टाइगर मेमन पर लगता है उसमें भी शरद पवार पर झूठ बयान देने का आरोप है। हमलों के तुरंत बाद शरद पवार नेदूरदर्शन पर आकर सबको कहा था कि 13 धमाके हुए हैं जिनमें मुस्लिम बहुल इलाके को भी निशाना बनाया गया। बाद में उन्होंने बताया कि उन्होंने ये झूठ सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए की थी ताकि हिंदुओं को लगे मुस्लिमों को भी निशाना बनाया गया है जबकि बहकीकत में जहाँ धमाके हुए थेवो जगह- मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, नरसी नाथ स्ट्रीट, शिव सेना भवन, एयर इंडिया बिल्डिंग, सेंचुरी बाज़ार, माहिम, झावेरी बाज़ार, सी रॉक होटल, प्लाजा सिनेमा, जुहू सेंटॉर होटल, सहार हवाई अड्डा और एयरपोर्ट सेंटॉर होटल थीं।

अब्दुल हमीद के जिस घर में हुई रामगोपाल मिश्रा की हत्या उस पर लगा नोटिस, बुलडोजर चलने से पहले सामान समेटने लगे लोग: मस्जिद से सटी दुकानें भी हो रहीं खाली

बहराइच जिले के महाराजगंज में प्रशासन अवैध निर्माणों पर जल्द कार्रवाई कर सकता है। कुल 23 मकानों पर नोटिस चिपकाए गए हैं। इनमें अब्दुल हमीद का घर भी है। उसके ही घर में रामगोपाल मिश्रा को खींचकर मार डालने का आरोप है। मिश्रा की हत्या 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा विसर्जन जुलूस पर इस्लामी भीड़ के हमले के दौरान हुई थी।

नोटिस चिपकाए जाने के बाद 19 अक्टूबर 2024 को कई लोग सामान समेटते नजर आए। ग्राउंड पर मौजूद ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने पाया कि कुछ ऐसे भी लोग अपनी दुकान खाली कर रहे थे जिनको नोटिस नहीं मिला है। उस मस्जिद से सटी दुकानें भी खाली हो रही हैं, जिससे मुस्लिमों को उकसाए जाने का आरोप कुछ चश्मदीदों ने लगाया है।

जिन 23 मकानों पर नोटिस चिपकाए गए हैं उनमें 19 मुस्लिमों के और 4 हिंदुओं के बताए जा रहे हैं। 17 अक्टूबर को जारी यह नोटिस पीडब्ल्यूडी और पुलिस प्रशासन ने 18 अक्टूबर को मकानों पर लगाए हैं। इसमें कहा गया है कि तीन दिन के भीतर लोग खुद से अवैध निर्माण हटा लें। ऐसा नहीं होने पर प्रशासन बुलडोजर से इन्हें ध्वस्त कर देगा। मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद के घर के बारे में बताया जा रहा है कि ये घर पहले किसी हिंदू परिवार का था, लेकिन बाद में अब्दुल परिवार ने इसे ले लिया।

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, बुलडोजर चलाने की तैयारी

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया है कि इन अवैध निर्माणों की जाँच पूर्व में भी हुई थी। तब भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब दोबारा नाप-जोख करके नोटिस जारी की गई है, जिसमें तीन दिनों के भीतर अवैध निर्माण हटाने का समय दिया गया है। इन निर्माणों को बिना विभागीय अनुमति के सरकारी सड़क के बीच से 60 फीट की दूरी पर बनाया गया था, जो नियमों के खिलाफ है।

नोटिस में कहा गया है, “उपरोक्त विषय के संबंध में सूचित करना है कि कुण्डासर महसी नानपारा मार्ग प्रमुख जिला मार्ग की श्रेणी का मार्ग है। विभागीय मानक के अनुसार प्रमुख जिला मार्ग पर रूरल एरिया में मार्ग के मध्य बिन्दु से 60 फुट की दूरी के अंदर बिना विभागीय अनुमति के कोई भी निर्माण कराया जाना अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है। अतः आपको नोटिस के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि आपने यह निर्माण जिलाधिकारी महोदय, बहराइच या पूर्व विभागीय अनुमति से किया गया है तो उसकी मूल प्रति तत्काल उपलब्ध करायें व उक्त अवैध निर्माण तीन दिवस के अंदर स्वयं हटा लें। अन्यथा की दशा में अवैध निर्माण पुलिस एवं प्रशासन के सहयोग से हटवाने की कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई में किये गये व्यय को राजस्व के माध्यम से आपसे ही वसूला जाएगा।”

प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण के लिए जारी किया गया नोटिस

प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी कर ली है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी और पुलिसकर्मी मिलकर इस अभियान को अंजाम देंगे। लोगों से तीन दिनों के भीतर अपनी संपत्तियों के वैध दस्तावेज पेश करने को कहा गया है, ताकि अवैध निर्माण होने पर कार्रवाई की जा सके। महसी के एसडीएम अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि पहले भी अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दी जा चुकी थी, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस बार यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो तीन दिनों के बाद अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कौन है अब्दुल हमीद?

अब्दुल हमीद बहराइच हिंसा के मुख्य आरोपित के रूप में नामजद है। उस पर और उसके परिवार पर 13 अक्टूबर को माँ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। अब्दुल हमीद के अलावा इस मामले में 6 अन्य नामजद और 4 अज्ञात लोगों पर भी मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने हमीद सहित सभी नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

बताया जा रहा है कि जिस घर में अब्दुल हमीद अपने परिवार के साथ रहता है, पहले वो घर किसी हिंदू परिवार का ही था, लेकिन अब्दुल हमीद के परिवार ने उसे खरीद लिया था और हिंदू परिवार किसी अन्य जगह रहने लगा था। ऑपइंडिया से बातचीत में उस परिवार ने भी इसकी पुष्टि की है।

इस बीच, प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि हिंसा में शामिल आरोपियों की संपत्तियों की जाँच की जाएगी। रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले में शामिल सभी आरोपितों की प्रॉपर्टी पर भी नज़र रखी जा रही है। पुलिस के अनुसार अब तक इस मामले में 87 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

महाराजगंज में अब शांति, लेकिन तनाव बरकरार

बता दें कि 13 अक्टूबर 2024 को बहराइच के महाराजगंज कस्बे में माँ दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे पर गाना बजाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। यह विवाद बढ़ते-बढ़ते सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गया, जिसमें 22 वर्षीय युवक रामगोपाल मिश्रा की गोली लगने से मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए। हिंसक भीड़ ने कई घर, दुकानें, बाइक और कारें जला दीं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

13 अक्टूबर 2024 को हुई हिंसा के बाद अब महाराजगंज बाजार में शांति है, लेकिन तनाव अब भी महसूस किया जा सकता है। बाजार में पुलिस की तैनाती जारी है, लेकिन व्यापारिक गतिविधियाँ बंद हैं। हिंसा के बाद से लोग अपने घरों में हैं और बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।

MP अमृतपाल सिंह की शह पर सिख एक्टिविस्ट की हत्या, कनाडा में रह रहा खालिस्तानी गैंगस्टर मास्टरमाइंड: पंजाब पुलिस का खुलासा, 3 को पकड़ा

पंजाब पुलिस ने एक सिक्ख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह की हत्या का खुलासा किया है। पंजाब पुलिस ने बताया है कि सिख एक्टिविस्ट की हत्या खालिस्तानी सांसद अमृतपाल सिंह की शह पर की गई थी। हत्या की साजिश में शामिल 3 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस हत्या में कनाडा में रहने वाले वांटेड आतंकी अर्शदीप डल्ला की भूमिका की बात कही है।

शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने इस घटना पर हुई कार्रवाई के बारे में बताया। पंजाब DGP ने बताया है कि SIT की जाँच में कनाडा में रहने वाला खालिस्तानी गैंगस्टर अर्शदीप डल्ला इस हत्या का मास्टरमाइंड निकला है।

पुलिस ने हत्या के सिलसिले में बिलाल अहमद, गुरमनदीप सिंह और अर्शदीप सिंह उर्फ़ झंडू को गिरफ्तार किया है। यह तीनों डल्ला के गैंग के लिए काम करते हैं। इन तीनों ने इस हत्या के लिए रेकी का काम किया था। इसके बाद यह जानकारी शूटरों को दी गई और उन्होंने इसके बाद इस हत्या को अंजाम दिया।

गिरफ्तार हुए इन तीनों का हैंडलर करमवीर सिंह उर्फ़ गोरा भी कनाडा में रहता है। जिन शूटरों ने यह हत्या की उनके हैंडलर भी विदेशों में ही रहते हैं, यह पंजाब पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है। इस जाँच के दौरान पंजाब पुलिस को सांसद अमृतपाल सिंह के इस हत्या में शामिल होने के भी सबूत मिले हैं।

इस घटना के बारे में हुई पूछताछ में सामने आया है कि यह हत्या सांसद और वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल सिंह की शह पर की गई थी। अमृतपाल इस समय असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। पुलिस ने आगे अमृतपाल सिंह के रोल के बारे में और जाँच करने को कहा है। वह अमृतपाल सिंह से पूछताछ भी कर सकती है।

पंजाब पुलिस को इन गिरफ्तारियों में सफलता CCTV और मोबाइल फोन की जाँच के जरिए मिली है। पुलिस ने उन शूटरों की पहचान भी कर ली है, जिन्होंने गुरप्रीत सिंह की हत्या की थी। पुलिस अब उन्हें पकड़ने के लिए जोर लगा रही है। इसके लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

गौरतलब है कि पंजाब के फरीदकोट में 9 अक्टूबर,2024 को सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह हरी नाव उर्फ ​​भोडी को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या तब हुई थी जब वह अपने मोटरसाइकिल से गाँव के गुरूद्वारे से घर की तरफ लौट रहा था।

गुरप्रीत सिंह बेहबलकलां इन्साफ मोर्चा का सदस्य था और इस बार के पंजाब पंचायत चुनावों में भी सक्रिय रहा था। यह मोर्चा बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दो युवकों के पुलिस फायरिंग में मारे जाने पर कार्रवाई की मांग करता आया है।

रेप के झूठे इल्जाम में 4 साल जेल में बंद रहा युवक… बरेली कोर्ट ने कहा- जितनी सजा पुरुष ने काटी उतनी महिला भी काटेगी, देना होगा ₹5 लाख जुर्माना

उत्तर प्रदेश के बरेली का एक युवक 4 साल से रेप के झूठे इल्जाम में जेल की सजा काट रहा था। कोर्ट को जब संदेह हुआ तो उन्होंने इल्जाम लगाने वाली युवती से सवाल-जवाब किए और फिर युवक को बाइज्जत बरी करते हुए उस लड़की को जेल काटने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि बेगुनाह युवक को जितनी सजा झूठे इल्जाम में काटनी पड़ी है उतनी ही ये लड़की भी काटेगी। साथ ही पीड़ित युवक को 5 लाख रुपए देने का निर्देश दिया

कोर्ट ने कहा कि जितना समय युवक जेल में रहा अगर वह बाहर रहता और मजदूरी करता तो इतने समय में वो 5,88000 से अधिक कमा चुका होता है। ऐसे में ये रकम इसी युवती से वसूल करके निर्दोष लड़के को दी जाए। अगर युवती इसे देने से मना करे तो उसकी सजा 6 महीने और बढ़ा दी जाए।

कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित अजय उर्फ राघव खुश तो हैं लेकिन उन्हें यही लग रहा है कि ऐसे इल्जाम अदालतों में खत्म हो जाते हैं लेकिन समाज उन्हें उसी नजर से देखता रहता है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया- ये मामला 2019 में शुरू हुआ था। सावन का कार्यक्रम के लिए युवती अपनी बड़ी बहन के साथ उनके पास आई और कहा कि उन्हें भी कार्यक्रम सीखना है। इसके लिए अजय उस युवती के घर जाते थे और जब प्रोग्राम होता था तब नीतू के पति भी साथ होते थे। माँ और भाई को भी पता था कि इस उद्देश्य से आना जाना है।

अजय बताते हैं कि एक बार उनकी माँ की तबीयत खराब हुई तो वो सबको बताकर गए कि उन्हें अपनी माँ के पास जाना है। अजय के अनुसार, जिस दिन उन्होंने ये बताया उसी दिन युवती खुद भी गायब हो गई। बाद में मिली तो अपहरण, रेप का इल्जाम लगा दिया।

अजय भावुक होकर कहते हैं कि युवती के एक इल्जाम से उनका करियर खराब हो गया। कहीं जाने पर लोग शक की निगाह से देखने लगे। मामला तो तब खुला जब अदालत में गवाही देने के दौरान युवती ने गड़बड़ की। उसने जज के आगे पहले खुद को अनपढ़ बताया और फिर अंग्रेजी में साइन कर दिए। जज भी समझ गए वो झूठ बोल रही है। इसके बाद उसपर झूठी गवाही देने के आरोप में केस दर्ज हुआ।

जस्टिन ट्रूडो की सरपरस्ती में PM मोदी की मौत माँग रहे खालिस्तानी, तिरंगे का कर रहे अपमान: कनाडा में प्रदर्शन कर कहा- भारतीय राजनयिकों को बाहर निकालो

कनाडा में बैठ कर भारत तोड़ने की साजिश रचने वाले खालिस्तानी आतंकी जस्टिन ट्रूडो की जय-जयकार कर रहे हैं। खालिस्तानी आतंकी बोलने की आजादी के नाम पर भारत के प्रधानमंत्री मोदी की मृत्यु की कामना कर रहे हैं। खालिस्तानियों ने तिरंगे का अपमान किया और वीडियो भी बनाया और फिर भारतीय राजनयिकों के खिलाफ भी जहर उगला।

एक कनाडाई पत्रकार के अनुसार, खालिस्तानी आतंकियों ने यह प्रदर्शन शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को टोरंटो में किया। इस प्रदर्शन में मौजूद खालिस्तानियों ने पीएम मोदी का पुतला जलाया और नारे लगाए। टोरंटो में खास्लितानियों ने भारतीय झंडे के साथ ही रूस के झंडे का भी अपमान किया। उन्होंने यहाँ ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ वाला राग दोहराया औरजस्टिन ट्रूडो की शान में कसीदे पढ़े।

खालिस्तानियों ने कनाडा में चल रहे सभी भारतीय दूतावास बंद करने की माँग की है। खालिस्तानियों के प्रदर्शन में झंडे लहराए गए। इस दौरान खालिस्तानी आतंकी निज्जर और भिंडरावाले के पोस्टर भी इन लोगों ने लहराए।

प्रदर्शन के अलावा आगामी दिनों में खालिस्तानी उस गुरूद्वारे में कार्यक्रम भी आयोजित कर रहे हैं जहाँ हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। यह कार्यक्रम खालिस्तानी आतंकियों की याद में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में निज्जर, एयर इंडिया के विमान में धमाका करने वाले तलविंदर परमार समेत बाकी आतंकियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

कनाडा में खालिस्तानी भारत के खिलाफ यह जहर ट्रूडो की शह पर उगल रहे हैं। ट्रूडो ने हाल ही में खालिस्तानियों के भारत तोड़ने के अभियान को बोलने की आजादी करार दिया था। इसके बाद इनकी हिम्मत और भी बढ़ गई है। ट्रूडो भी महज कुछ वोटों के लिए कनाडा को गर्त में धकेल रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में भारत और कनाडा के राजनयिक रिश्ते निचले स्तर पर पहुँच गए। भारत ने कनाडा के 6 राजनयिकों को निकाल दिया है जबकि अपने राजनयिक भी वापस बुलाए हैं। इस बीच जस्टिन ट्रूडो लगातार भारत पर हदीप सिंह निज्जर की हत्या करने का आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने खुद इस संबंध में भारत के खिलाफ सबूत ना होने की बात कबूली है।

इससे पहले भी खालिस्तानी कनाडा में भारत विरोधी एजेंडा चलाते रहे हैं। खालिस्तानियों ने यहाँ एक ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ भी करवाया था जो कथित तौर पर खालिस्तान के समर्थन में सिखों की राय जानने का एक माध्यम था। भारत ने इस संबंध में कनाडा से कार्रवाई की माँग की थी लेकिन कनाडा ने उलटे खालिस्तान को ही प्रश्रय दिया।

जयपुर के करणी विहार में शरद पूर्णिमा के धार्मिक कार्यक्रम के दौरान चाकू से हमला, 10 आरएसएस कार्यकर्ता घायल : नसीब चौधरी और बेटा गिरफ्तार, बाकियों की जारी तलाश

राजस्थान की राजधानी जयपुर के करणी विहार में शरद पूर्णिमा के अवसर पर हुए एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हिंसा की घटना सामने आई, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 10 कार्यकर्ता घायल हो गए। ये घटना गुरुवार (18 अक्टूबर, 2024) को करणी विहार के शिव मंदिर में हुई, जहाँ आरएसएस द्वारा शरद पूर्णिमा के मौके पर खीर वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। हमले में चाकुओं से लैस लोग मंदिर में घुस आए और श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। हमले के बाद नसीब चौधरी और उसके बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर में आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा था और प्रसाद के रूप में खीर बांटी जा रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले दो लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और शोर और भीड़ का हवाला देते हुए कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। इन लोगों ने आयोजकों से कार्यक्रम को रोकने की माँग की, जिसके बाद बहस शुरू हो गई। बहस के बाद रात करीब 10 बजे चाकुओं और अन्य हथियारों से लैस लोगों ग्रुप मंदिर में घुस आया और हमला कर दिया।

जयपुर के करणी विहार में हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के श्रद्धालुओं पर चाकुओं से हमला किया और प्रसाद की खीर को जमीन पर फेंक दिया। इस हिंसक हमले में श्रद्धालुओं के पेट और छाती जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर वार किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में शंकर बागड़ा, मुरारीलाल, राम पारीक, लखन सिंह जादौन, पुष्पेंद्र और दिनेश शर्मा शामिल हैं, जिन्हें इलाज के लिए जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद बड़ी संख्या में आरएसएस कार्यकर्ता करणी विहार थाने के बाहर जमा हो गए और आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की माँग की। इस घटना से लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने दिल्ली-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग को कुछ देर के लिए जाम भी कर दिया। हालाँकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जाम हटा लिया गया। पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए नसीब चौधरी और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या के प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया है।

इस घटना पर जयपुर पश्चिम के सहायक पुलिस आयुक्त आलोक गौतम ने कहा, “यह घटना गुरुवार रात जयपुर के करणी विहार में आरएसएस के कार्यक्रम के दौरान हुई। दो स्थानीय निवासियों ने शोर और भीड़ पर आपत्ति जताई, जिसके बाद उनका आरएसएस कार्यकर्ताओं से टकराव हो गया। हालात तब और बिगड़ गए जब इन लोगों ने अपने समूह के और लोगों को बुला लिया, जिसके बाद हमला हुआ।”

हालाँकि, इस हमले के पीछे का सही कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन कुछ लोगों के मुताबिक यह जमीन से जुड़ा विवाद हो सकता है। भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने आरोप लगाया कि नसीब चौधरी जमीन हड़पने की गतिविधियों में शामिल है और मंदिर के पास उसका घर अवैध रूप से बना हुआ है। वहीं, कॉन्ग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस मामले को सांप्रदायिक विवाद मानने से इनकार किया और इसे एक निजी जमीन विवाद बताया, जिसमें एक ही समुदाय के लोग शामिल हैं। फिलहाल, मामले की जाँच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।