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3 एटमी ताकत, 28% GDP, 44% जनसंख्या… 15 साल में ही दुनिया की एक धुरी बन गया BRICS, जानिए इसकी करेंसी आई तो क्या होगा बदलाव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस के कजान शहर में BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए हुए हैं। यहाँ वह BRICS बैठक के साथ चीन समेत अन्य कई देशों के प्रमुखों से मुलाकर कर रहे हैं। BRICS की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस बैठक में इसके सदस्य देशों के अलावा अन्य कई देश भी शामिल हो रहे हैं।

पीएम मोदी ने BRICS की शिखर बैठक में आतंक समेत तमाम मुद्दों की बात की। उन्होंने यहाँ कहा कि दुनिया में आंतक को लेकर कोई दोहरे मानक नहीं होने चाहिए। उन्होंने यहाँ संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत तमाम बहुराष्ट्रीय संगठनों में सुधार किए जाने की माँग की है। पीएम मोदी ने इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की।

BRICS की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय पर हो रही है, जब इसके तीन प्रमुख सदस्य चीन, भारत और रूस तथा पश्चिमी देशों के बीच दूरियाँ बढ़ रही हैं। बांग्लादेश में हुई हालिया घटनाओं और अमेरिका के खालिस्तानी पन्नू की हत्या साजिश मामले में भारत पर दबाव बनाना भी उसे चीन तथा रूस के निकट ले जा रहा है।

क्या है BRICS?

BRICS दुनिया के महत्वपूर्ण 9 देशों का एक संगठन है। इसमें भारत, रूस, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, UAE और ईरान सदस्य हैं। यह संगठन पश्चिमी देशों के संगठन G-7 का प्रभाव कम करने और विश्व की बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को साथ लाने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसकी स्थापना 2009 में हुई थी।

2009 में इसकी स्थापना के समय इसमें भारत, रूस, चीन और ब्राजील ही सदस्य थे लेकिन इसके बाद इसमें दक्षिण अफ्रीका जुड़ गया और यहीं से इसका BRICS हो गया। 2024 में इस संगठन में नए 6 सदस्य जोड़ लिए गए। सऊदी अरब को छोड़ कर बाकी देश अब इसमें आधिकारिक रूप से हिस्सा ले चुके हैं।

BRICS की बैठकें हर साल होती हैं। रूस के कजान शहर में इसका 16वाँ शिखर सम्मेलन हो रहा है। हर साल इसके सदस्य देशों के नेता इसकी मेजबानी वाले देश में इकट्ठा होते हैं। इन बैठकों में आर्थिक-सामाजिक सहयोग समेत वैश्विक मुद्दों पर निर्णय लिए जाते हैं।

BRICS की मेजबानी हर साल इसके सदस्य देशों को दी जाती रहती है। 2023 में यह मेजबानी दक्षिण अफ्रीका ने की थी। 2024 की मेजबानी रूस को मिली है। रूस ने इसका आयोजन कजान शहर में किया है। कजान में 28 देश इस BRICS बैठक में शामिल हुए हैं। BRICS में जुड़ने के लिए लगभग 40 देश अपनी रूचि दिखा चुके हैं।

कितना महत्वपूर्ण है BRICS?

वैश्विक लिहाज से BRICS काफी महत्वपूर्ण संगठन है। विश्व की लगभग 44% जनसंख्या इसके सदस्य देशों में निवास करती है। इसके अलावा BRICS में शामिल देश विश्व की अर्थव्यवस्था में 28% की हिस्सेदारी रखते हैं। यह देश विश्व के लगभग 30% भूभाग पर फैले हुए हैं।

इसके अलावा, BRICS में भारत और चीन के रूप में बड़े बाजार और सबसे तेजी से बढ़ने वाली दो अर्थव्यवस्थाएँ हैं। साथ ही इसके सभी सदस्यों में तीन परमाणु हथियार वाले देश हैं। विश्व की पाँच बड़ी सेनाओं में तीन बड़ी सेनाओं वाले देश BRICS में हैं। BRICS का विस्तार भी विश्व के सभी महाद्वीपों में है, ऐसे में प्रतिनिधित्व की चिंताएँ नहीं है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो BRICS, पश्चिमी देशों के समानांतर सबसे बड़ा समूह है और उतना ही प्रभावशाली भी है। इसके अलावा इसका लगातार विस्तार हो रहा है, इस कारण से यह और शक्तिशाली होता जा रहा है। BRICS में ग्लोबल साउथ की माँगों को भी बल मिला है। जैसे-जैसे BRICS के सदस्य देश आर्थिक रूप से मजबूत बनते जाएँगे, इसका प्रभाव और बढ़ेगा।

BRICS करेंसी क्या है?

पश्चिमी देशों की दादागिरी को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया यह समूह अब सहयोग के नए तरीके तलाश रहा है। वर्तमान में रूस को छोड़ कर BRICS में शामिल देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए SWIFT सिस्टम इस्तेमाल करते हैं। यह सिस्टम पश्चिमी देशों के नियंत्रण में है।

अपनी मनमानी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने और दबाव डालने की नीति से पश्चिमी देश SWIFT और ऐसी व्यवस्थाओं का उपयोग करने से रोक सकते हैं। वर्तमान में पश्चिमी देशों ने रूस के अरबों डॉलर इसी इन्हीं देशों ने दबा रखे हैं। ऐसे में BRICS देश अपनी एक समानांतर व्यवस्था बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।

ब्राजील और रूस इन देशों के बीच एक कॉमन करेंसी के उपयोग की बात कर चुके हैं। भारत और चीन, रूस से पहले ही अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार कर रहे हैं। भारत और रूस आपस में तेल का व्यापार इसी तरीके से हो रहा है। इस तरीके से व्यापार ककरे इन देशों ने पश्चिमी देशों की व्यवस्थाओं को दरकिनार किया है।

पीएम मोदी ने 2024 कजान समिट में इसका समर्थन भी किया है। ऐसे में यदि सभी देश किसी एक करेंसी में व्यापार करने को राजी होते हैं तो यह पश्चिमी देशों के लिए बड़ा झटका होगी। ऐसे में यह देश डॉलर के एकाधिकार को भी चुनौती दे सकेंगे।

मदरसा कानून पर हाई कोर्ट के फैसले को लेकर योगी सरकार ने उठाए सवाल, NCPCR से सुप्रीम कोर्ट का सवाल- आप केवल मदरसों से ही क्यों चिंतित हैं?

मदरसा शिक्षा प्रणाली के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा अपनाए गए रुख को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (22 अक्टूबर) को सवाल उठाया। शीर्ष न्यायालय ने NCPCR से पूछा कि क्या उसने अन्य धर्मों के ऐसी ही संस्थानों के खिलाफ यही रुख अपनाया है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि मदरसा शिक्षा बोर्ड खत्म नहीं करना चाहिए था।

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की बेंच ने की। ऐसे अन्य संस्थान भी हैं, जहाँ अन्य धर्मों के बच्चे को धार्मिक शिक्षा और पुरोहित का प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इसकी ओर इशारा करते हुए कोर्ट ने पूछा, “NCPCR को केवल मदरसों की ही चिंता क्यों है। क्या वह सभी समुदाय के साथ समान व्यवहार करता है।”

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा, “क्या NCPCR ने मदरसा पाठ्यक्रम का अध्ययन किया है? क्या उस पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के बारे में बात की गई है? धार्मिक शिक्षा क्या है? आपने क्या समझा है? ऐसा लगता है कि आप सभी ‘धार्मिक निर्देश’ शब्द से मंत्रमुग्ध हैं और इसीलिए आप इससे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।”

इसी दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा, “क्या एनसीपीसीआर ने अन्य समुदायों में धार्मिक शिक्षाओं पर प्रतिबंध लगाया है?” उन्होंने आगे कहा, “NCPCR इस तथ्य से अवगत है कि पूरे भारत में छोटे बच्चों को उनके समुदाय की संस्थाओं द्वारा धार्मिक शिक्षा दी जाती है। क्या NCPCR ने उन सभी पर यही रुख अपनाया कि यह मौलिक संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है?”

जब NCPCR ने जवाब दिया कि ,धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य शिक्षा के रूप में प्रतिस्थापित नहीं किया जाना चाहिए’, इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने फिर पूछा, “हमें बताएँ कि क्या NCPCR ने पूरे देश में कोई निर्देश जारी किया है कि बच्चों को मठों, पाठशालाओं में न भेजा जाए… या क्या उसने कोई निर्देश जारी किया है कि जो बच्चे इन संस्थानों में जाते हैं, उन्हें विज्ञान, गणित आदि अवश्य पढ़ाया जाना चाहिए?”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की यह बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को असंवैधानिक करार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई।

सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने कहा कि उन प्रावधानों को खत्म किया जाना चाहिए, जो उल्लंघनकारी हों। यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने कहा कि राज्य सरकार ‘उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004’ को खत्म करने के पक्ष में नहीं है। पूरे मदरसा अधिनियम को खत्म नहीं करना चाहिए था।

इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए NCPCR ने एक रिपोर्ट दायर की है, जिसमें मदरसा प्रणाली पर विभिन्न आपत्तियाँ उठाई गई हैं। जिसमें कहा गया है कि मानक शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के अनुरूप नहीं हैं। बता दें कि हाई कोर्ट द्वारा मदरसा बोर्ड खत्म करने के बाद 13,364 मदरसों में पढ़ाई कर रहे 12 लाख बच्चों को राज्य मान्यता प्राप्त बोर्ड में भर्ती करने का आदेश दिया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।

बहराइच में जिन्होंने पकड़ रखी थी माँ दुर्गा की मूर्ति, अब उन्होंने मस्जिद से ऐलान का किया दावा: कहा- पत्थरबाजी में मुस्लिम औरतें भी थीं, हमलावर कह रहे थे मारने से सवाब मिलेगा

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 13 अक्टूबर 2024 को माँ दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के दौरान मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। इस हमले में राम गोपाल मिश्रा की हत्या कर दी गई थी, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल हो गए थे। घायलों में पद्माकर दीक्षित भी शामिल हैं। बहराइच पुलिस के दावों के विपरीत पद्माकर दीक्षित ने भी खुद को भुक्तभोगी और चश्मदीद बताते हुए कहा कि विसर्जन यात्रा पर हमले का ऐलान मस्जिद से किया गया था।

पद्माकर दीक्षित मूर्ति विसर्जन जुलूस में माँ दुर्गा की प्रतिमा पकड़ कर चल रहे थे। हमले में घायल होने के बाद उन्हें इलाज के बाद घर भेज दिया गया। पीड़ित पद्माकर दीक्षित मूल रूप से महराजगंज के पास ही स्थित सिपहिया प्यूली गाँव के निवासी हैं। वे थोड़ी-सी खेती-बाड़ी के साथ दूध आदि बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन वो 9 दिन का नवरात्रि व्रत पर थे और पूरे श्रद्धा भाव से विसर्जन यात्रा लेकर अन्य हिंदुओं के साथ निकले थे। पद्माकर दीक्षित ट्रैक्टर ट्रॉली पर जा रही माँ दुर्गा की मूर्ति को पकड़ रखा था। मार्ग में वह अन्य श्रद्धालुओं की भाँति ‘जय माता दी’ के नारे भी लगा रहे थे। इसी दौैरान पथराव हो गया।

पथराव में मूर्ति तोड़ी, फिर मस्जिद से हमले का ऐलान

पद्माकर दीक्षित ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग मूर्ति के साथ आगे बढ़ रहे थे, तभी एक पत्थर आकर लगा। इससे माँ दुर्गा की प्रतिमा का हाथ टूट गया। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले दूसरा पत्थर आ गिरा। इससे प्रतिमा की गर्दन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद प्रतिमा और श्रद्धालुओं पर पत्थरों की बरसात हो गई।

पथराव के बीच हिंदू खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सामने मुस्लिमों की भीड़ आती देखकर पद्माकर दीक्षित भी अपनी जान बचाकर भागने लगे। उन्होंने बताया कि भगदड़ के दौरान उन्होंने मस्जिदों से एनाउंस होते सुना। इसमें कहा जा रहा था, “अल्लाह हु अकबर। जो मिले उनको काट दो।” पद्माकर के अनुसार, मुस्लिम भीड़ का कहना था कि जितना हिंदू को मारोगे उतना ही सवाब मिलेगा।

मुस्लिम भीड़ के हिंसक रूप को देखकर वहाँ अफरा-तफरी का और अधिक माहौल बन गया। श्रद्धालुओं में छोटे-छोटे बच्चे भी थे। इनकी सुरक्षा को लेकर लोग और ज्यादा चिंतित हो उठे। पद्माकर दावा करते हैं कि कई नाबालिग बच्चे भी मुस्लिम भीड़ के हमले में चोटिल हुए हैं, लेकिन उनके परिजन डर से उनका नाम सामने नहीं लाना चाहते।

मुस्लिम महिलाओं ने भी चलाए पत्थर

पद्माकर दीक्षित ने हमें आगे बताया कि जान बचाकर भागने के दौरान उन्होंने देखा हमलावर भीड़ में कुछ मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल थीं। वो छतों से श्रद्धालुओं पर पत्थर बरसा रही थीं। इसके अलावा हथियार लेकर सड़कों पर उतरी कट्टरपंथियों की भीड़ में बच्चों से लेकर बूढ़े तक शामिल थे। इनके पास लाठी-डंडों और धारदार हथियार भी थे। पद्माकर का दावा है कि हिन्दुओं की तरफ से कई बुजुर्ग शांति की अपील कर रहे थे, लेकिन मुस्लिमों की ओर से कोई भी ऐसा करता नहीं दिखा।

कहाँ से आईं इतनी काँच की बोतलें

पीड़ित को इस बात की भी हैरानी है कि हमलावरों के पास इतनी काँच की बोतलें कहाँ से आईं। उन्होंने बताया कि महराजगंज बाजार में कोई कोल्डड्रिंक आदि का डिस्ट्रीब्यूटर भी नहीं है। ऐसे में इतनी बोतलें पहले से कैसे जमा थीं? बकौल पद्माकर, अचानक इतने पत्थर बरसना और हथियारों का निकल आना इस बात का संकेत है कि अब्दुल हमीद और उसके साथियों ने हमले की तैयारी पहले से कर रखी थी।

पद्माकर दावा करते हैं कि जब हिंदुओं ने पुलिस ने हिन्दुओं की मदद करने के बजाय उन्हें ही दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। इसके कारण पद्माकर सहित कई लोगों को काफी चोटें आईं। हमले में किसी का हाथ टूटा तो किसी का मुँह फट गया। आखिरकार पद्माकर अपनी जान बचाकर खेतों के रास्ते से घर की ओर भागे। रास्ते में वो बेहोश होकर गिर पड़े।

पद्माकर के अनुसार, उनके साथियों ने पानी का छींटा मार कर उन्हें उठाया और घर पहुँचाया। उनके पैरों में चोट आई थी। घर पहुँचने पर उनके परिजन इलाज के लिए महसी स्थित अस्पताल ले गए। पैरों पर चोट के निशान अभी भी देखे जा सकते हैं, जिसका इलाज चल रहा है। पद्माकर दीक्षित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हमलावरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है।

अपने बचाव में झूठे आरोप लगा रहा मुस्लिम पक्ष

जब हमने पद्माकर दीक्षित से मुस्लिम पक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने इसे सच्चाई नहीं, बल्कि साजिश बताया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष आरोप इसलिए लगा रहा है, ताकि वो बच जाए और दोष हिन्दुओं पर मढ़ दी जाए। हिन्दू को पीड़ित बताते हुए पद्माकर ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने ही हिन्दुओं और मूर्तियों पर हमले किए थे। उन्होंने सरफराज और तालिब के एनकाउंटर पर असंतोष जताया।

पद्माकर दीक्षित ने कहा कि दोनों आरोपितों के पैर के बजाय सीने पर गोली लगनी चाहिए थी। अब तक की पुलिस कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए पद्माकर ने कहा कि इससे हमलावरों का मनोबल और बढ़ा है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि इस बार उन्होंने एक को मारा है, लेकिन अगली बार वे चार को मारेंगे। पद्माकर को आशंका है कि राम गोपाल मिश्रा के हत्यारे जल्द ही छूट सकते हैं।

सजा था मंच… वो बुदबुदाया और बेसुध हो गई जेमिमा रोड्रिगेज: महिला क्रिकेटर के पिता ईसाई धर्मांतरण में फँसे तो पुराने Video हुए वायरल

भारतीय महिला क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिगेज का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो 2015 का बताया जा रहा है। वीडियो में जेमिमा और उनके पिता एक ईसाई कार्यक्रम में शामिल दिखाई पड़ते हैं। वीडियो जेमिमा की मुंबई के खार जिमखाना क्लब सदस्यता खत्म किए जाने पर हो रहे विवाद के बाद आया है।

इस वीडियो में दिखता है कि काफी कम उम्र की जेमिमा रोड्रिगेज एक बड़ी सभा को संबोधित कर रही हैं। वह इस वीडियो में बताती हैं कि उन्होंने 37 गेंदों पर 25 रन नाबाद बनाए, इसके लिए जेमिमा ईश्वर का धन्यवाद करती हैं। इसके बाद जैसे ही होस्ट उनके पास जाता है, वह ऐसा अभिनय करती है जैसे कि उन पर भूत सवार हो और फिर वह जमीन पर गिर जाती है।

इस वीडियो को एक एक्स यूजर ने सोशल मीडिया पर साझा किया। यूजर ने यह भी दावा किया कि जेमिमा और उनके पिता इवान पिता दोनों ही ब्रदर मैनुअल मिनिस्ट्रीज से जुड़े थे। ब्रो मैनुएल मिनस्ट्री यूट्यूब पेज पर दिए गए विवरण के अनुसार यह ईसाई मिशनरी संगठन है।

एक विचित्र बात यह है कि ‘ब्रो मैनुअल मिनिस्ट्रीज’ के यूट्यूब पेज पर बताया गया है कि खार जिमखाना क्लब में उनका महीने में दो बार रविवार को एक दिवसीय कार्यक्रम होता है। यह वीडियो खार जिमखाना क्लब से उनकी सदस्यता खत्म करने को चल रहे विवाद के बाद सामने आया है।

जेमिमा रोड्रिगेज की सदस्यता खत्म करने के पीछे उनके पिता इवान का रोल बताया जा रहा है। आरोप है कि इवान जेमिमा की सदस्यता के आधार पर जिमखाना को बार-बार अपने को ‘ईसाई धर्मांतरण बैठक’ के लिए बुक करते थे। महिला क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्स पिछले साल मार्च इस क्लब की सदस्यता पाई थीं। वह क्लब में सदस्य बनने वाली पहली महिला क्रिकेटर थीं।

खार जिमखाना की कमिटी के सदस्य शिव मल्होत्रा ने इस मामले पर कहा है कि जेमिमा के पिता इस सदस्यता का दुरूपयोग कर रहे थे और क्लब के बाकी सदस्यों को अपनी बैठकों के लिए हॉल नहीं मिल रहा था। खार जिमखाना क्लब के अध्यक्ष ने इन बातों से इनकार किया है।

बताया गया है कि इवान ने यह कार्यक्रम मार्च 2023 और नवंबर 2024 के बीच ब्रदर मैनुअल मिनिस्ट्रीज नामक एक ईसाई मिशनरी समूह के कहने पर किए। खार जिमखाना के नियमों के अनुसार, इसके भीतर कोई भी धार्मिक गतिविधियाँ नहीं की जा सकती हैं।

हिरोइन को पहले प्यार में फाँसा, फिर ब्रेनवॉश कर बना दिया मुस्लिम: कहा- मैं भटक गई थी, भाग्यशाली हूँ कि सनातन में वापसी हो गई

एक्ट्रेस चाहत खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें इस्लाम की तरफ ले जाने के लिए ब्रेनवाश किया गया था। चाहत ने यह भी बताया कि वह अपने सनातन धर्म में वापसी करके काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके धर्म का हर पहलू गलत बताया जाता था। यह सारी बातें चाहत खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताई हैं।

चाहत खन्ना ने टेलीटॉकइंडिया नाम के एक चैनल को दिए गए 43 मिनट लम्बे इंटरव्यू में यह सारे खुलासे किए। चाहत खन्ना ने फरहान मिर्जा से निकाह के बाद इस्लाम कबूल करने और उसके बाद वापस सनातन में आने को लेकर अपना पक्ष रखा।

चाहत खन्ना ने बताया, “मैं काली भक्त हूँ, कृष्ण भक्त हूँ। मुझे मेरे तलाक के बाद वापस अपने मूल धर्म में आने में काफी वक्त लगा। मुझे लगभग 4-5 साल लग गए क्योंकि मुझे इस्लाम में विश्वास था, मुझे इस्लाम की कुछ चीजे अब भी पसंद हैं। लेकिन फिर भी मैं अपनी जड़ों की ओर वापस लौटी, और मैं अपने आप को भाग्यशाली मानती हूँ कि मैं वापस लौटी।”

चाहत खन्ना ने इसके बाद बताया, “मैं भटक गई थी। क्योंकि जब आप बच्चे होते हैं और साथ ही जल्द ही प्रभावित किए जा सकते हैं तब आपको बताया जाता है कि आप जो कर रहे हैं वह गलत है, तो आपस शर्तिया भटक ही जाएँगे… ऐसा कुछ मेरे साथ हुआ। लेकिन मैं सनातन में वापस आ गई, इसमें कुछ समय लगा।”

चाहत खन्ना से अब इसके बाद पूछा गया कि क्या वह इस्लाम में जाने को ब्रेनवाश का नाम देंगी तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं मालूम क्या था, लेकिन ऐसा कह सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ब्रेनवाशिंग हो ही जाती है और यह काफी बढ़ी है। चाहत खन्ना ने इसके बाद फिर से एक बार सनातन में वापसी पर ख़ुशी जताई। आप यह पूरी बातचीत नीचे लगे वीडियो में 26:00 से लेकर 29:00 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

38 साल की चाहत खन्ना सोनी टीवी के पॉपुलर शो ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ और जी टीवी के हो कुबूल है में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों में भी काम किया है। चाहत खन्ना एक मॉडल भी हैं। खन्ना ने 2006 में एक कारोबारी भरत नरसिंहानी से शादी की थी। हालाँकि, उनसे चाहत का तलाक हो गया था।

चाहत ने इसके बाद फरहान मिर्जा से निकाह किया था। फरहान भी बॉलीवुड से जुड़े हुए हैं। फरहान से निकाह के बाद चाहत ने इस्लाम में धर्मांतरण कर लिया था। दोनों के 2 बेटियाँ हैं। फरहान से भी चाहत का 2018 में तलाक हो गया था। इसके बाद चाहत ने सनातन में वापसी कर ली है और अब इस्लाम कबूल करने के बारे में खुलासा किया है।

पुणे के एक गाँव को बांग्लादेशियों ने बना रखा था ठिकाना, फर्जी दस्तावेजों के साथ 21 गिरफ्तार: त्रिपुरा में 3 रोहिंग्या पकड़े गए, जा रहे थे हैदराबाद

महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगाँव में अवैध रूप से रह रहे 21 बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, त्रिपुरा पुलिस ने 3 रोहिंग्या मुस्लिम और 2 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुणे पुलिस ने 10 अवैध घुसपैठियों को कोर्ट में पेश किया, जहाँ अदालत ने उन्हें 24 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इनके पास से पैन-वोटर कार्ड सहित कई फर्जी दस्तावेज मिले हैं।

पुणे ग्रामीण एसपी पंकज देशमुख ने कहा, “कल रंजनगाँव एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में हमने एक अपराध दर्ज किया। पूछताछ के बाद हमें पता चला कि वे रंजनगाँव इलाके में अवैध रूप से रह रहे थे। इसलिए हमने एक अपराध दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट ले जाया गया है। कोर्ट ने 24 अक्टूबर तक 10 ऐसे आरोपियों की पुलिस हिरासत मंजूर की है।”

उन्होंने कहा, “हम पता लगा रहे हैं कि वे कितने समय से भारत में हैं। प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि वे 6 महीने से लेकर 10 साल से ये देश में रहे हैं। हम पता लगा रहे हैं कि इस देश में रहने का उनका मकसद क्या है। उनमें से कई लोग श्रम गतिविधि में लिप्त हैं और उन्हें मजदूरी कर रहे हैं। इसलिए, उनकी वास्तविक स्थिति पर टिप्पणी करना अभी बहुत प्रारंभिक है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने उनके पास से मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों के पास से अवैध रूप से रह रहे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है। हम इस पहलू की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या कोई संगठित रैकेट या एजेंट है, जो बांग्लादेशी नागरिकों को हमारे देश में लाकर स्थापित कर रहा है।”

कहा जा रहा है कि आरोपितों में 15 पुरुष, 4 महिलाएँ और 2 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336(2), 336(3), 338, 340(2) और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1920 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जाँच जारी है।

दरअसल, खुफिया सूचना के आधार पर पुणे पुलिस ने रजनगाँव में सोमवार (21 अक्टूबर 2024) को सर्च ऑपरेशन चलाया था और इन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने कहा, “उनमें से नौ के पास फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड थे और उनमें से एक के पास वोटर आईडी कार्ड भी था। बांग्लादेशी नागरिक के पास वोटर आईडी कार्ड था, उसने इसे गुजरात से हासिल किया था।”

एसपी ने कहा कि ये सभी या तो पैदल चलकर सीमा पार करते हुए पश्चिम बंगाल में यहाँ आए या फिर नावों से समुद्री मार्ग से अवैध रूप से यहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से पाँच साल के बीच है। भारत में घुसने के बाद ये गुजरात और मुंबई चले गए। कुछ दिन पहले ये पुणे आए हैं।” उन्होंने कहा कि जाँच चल रही है और 2-3 दिन में यह बात स्पष्ट हो जाएगी।

जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनके नाम हैं- अजमुल शरत खान उर्फ ​​हासिफ खान (50) मोहम्मद अकबर अजीज अकबर सरदार (32) शफीकुल अलीमिया शेख (20) हुसैन मुखिद शेख (30) तारिकुल अतियार शेख (38) मोहम्मद उमर फारूक बाबू उर्फ ​​बाबू बुख्तियार शेख (32) शाहीन शाहजान शेख ( 44) मोहम्मद हुसैन शेख (32) रऊफ अकबर दफादार (35) इब्राहिम काजोल शेख (35) फरीद अब्बास शेख (48) मोहम्मद सद्दाम अब्दुल सखावती (35) मोहम्मद अब्दुल हबीब रहमान सरदार (32) आलिमिया तोहकील शेख (60) मोहम्मद इसराइल फकीर (35) फ़िरोज़ा मुताक़ीन शेख़ (20) लिपिया हसमुख मुल्ला (32) सलमा मलिक रोशन मलिक (23) हिना मुल्ला जुल्फिकार मुल्ला (40) सोनदीप उर्फ ​​काजोल बासुदीप विशेष (30) येनूर शाहदता मुल्ला (25).

त्रिपुरा में बांग्लादेशी और रोहिंग्या गिरफ्तार

वहीं, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) की सुबह तीन रोहिंग्या मुस्लिम और दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी अधिकारी तपस दास ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक त्रिपुरा से बाहर जाने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पर आएँगे।

दास ने कहा, “सूचना के आधार पर जीआरपी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और बीएसएफ के जवान सादे कपड़ों में स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे। जब वे लोग पहुँचे तो हमने उनमें से पाँच को हिरासत में लिया। शुरू में उन्होंने भारतीय नागरिक होने का दावा किया, लेकिन पूछताछ के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि उनमें से तीन रोहिंग्या और दो बांग्लादेशी हैं। वे अवैध रूप से राज्य में घुसे थे।”

तपस दास ने आगे बताया कि पूछताछ में पता चला कि रोहिंग्या नागरिक हैदराबाद जाने वाले थे, जबकि बांग्लादेशी नागरिक मुंबई जाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “हमने उनके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन जब्त किए हैं। हम उन्हें अदालत में पेश करके आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड माँगेंगे।”

मुजफ्फरनगर दंगा में AIMIM के 3 नेताओं सहित 19 गिरफ्तार, मुस्लिम भीड़ ने की थी पत्थरबाजी: अखिल त्यागी के विरोध में लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में सड़क पर दंगा-पत्थरबाजी करने वाली इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ पर पुलिस ने कार्रवाई करना चालू कर दिया है। पुलिस ने कथित ईशनिंदा के मामले में दंगा करने वाले AIMIM के पदाधिकारियों समेत 19 लोगों को पकड़ा है। पुलिस बाकी दंगाइयों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फरनगर पुलिस ने बुढ़ाना विधानसभा AIMIM अध्यक्ष आजम, हसनैन और राहिल को पकड़ा गया है। AIMIM के दो अन्य पदाधिकारी रमीज और तारिक फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

मुजफ्फरनगर के SSP अभिषेक सिंह ने बताया है कि AIMIM के इन पाँचों पदाधिकारियों ने मुस्लिम भीड़ को इकट्ठा किया था। इसके लिए उन्होंने व्हाट्सएप पर मैसेज किए थे और ऑडियो भी भेजे थे और खुद बुलाने तक गए थे। इसके अलावा इन लोगों ने कथित ईशनिंदा के कथित आरोपित अखिल के घर पर पथराव के लिए भी उकसाया था।

SSP अभिषेक सिंह ने बताया कि इनके अलावा 16 लोग और गिरफ्तार किए गए हैं। बाकी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश डाल रही है। पुलिस ने इस मामले में 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले में सबूत भी जुटाया जा रहे हैं।

जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके खिलाफ बलवा और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस घटना के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए हंगामे के वीडियो और CCTV फुटेज भी जुटा रही है। पुलिस ने लोगों से इस विषय सूचना देने को कहा है।

गौरतलब है कि शनिवार (20 अक्टूबर, 2024) को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में शाम को इस्लामी कट्टर पंथियों की एक भीड़ इकट्ठा हुई थी। इस भीड़ में शामिल लोगों को कहना था कि अखिल त्यागी नाम के एक स्थानीय युवक ने उनके मजहब के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की है।

इस भीड़ को इस बात पर उकसाया गया था कि अखिल त्यागी को पुलिस ने पकड़ने के 20 मिनट के बाद ही छोड़ दिया था। भीड़ ने बुढ़ाना में कई घंटे तक बवाल काटा था और रोड जाम कर दिया था। भीड़ ने अखिल त्यागी के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ वाले नारे भी लगाए थे।

इसके बाद अखिल त्यागी की दुकान और घर पर भी इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पथराव किया था। इस्लामी कट्टरपंथियों के इस बवाल के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इस्लामी कट्टरपथियों की भीड़ हिंसक होने के बाद पुलिस ने यहाँ लाठीचार्ज करके मामला शांत किया था। इसके बाद दंगाइयों पर कार्रवाई चालू की गई थी।


‘पैसा क्या चीज है, यीशु की पूजा करो सब मिलेगा’: नेटवर्क मार्केटिंग की तरह पति-पत्नी चला रहे थे धर्मांतरण रैकेट, जिसे बनाते ईसाई उसे ही नए हिंदू को फँसाने का देते थे टास्क

उत्तर प्रदेश के मेरठ में ईसाई में धर्मांतरण का खुलासा किया है। पुलिस की छापेमारी में एक मकान के भीतर 40 से ज्यादा महिलाएँ और बच्चे मौजूद मिले। धर्मांतरण के लिए लोगों को लड़का-लड़की की शादी कराने के लिए चर्च द्वारा खर्च उठाने, नकद पैसे देने और बीमारी दूर करने का लालच देकर ब्रेनवॉश किया जा रहा था। यह सब नेटवर्क मार्केटिंग की तरह अंजाम दिया जा रहा था।

कंकरखेड़ा थाना इलाके की विकास एन्क्लेव कॉलोनी में केरल का बिज्जू मैथ्यू दो महीने पहले किराए का मकान लेकर अपने परिवार के साथ यहाँ रहता है। यहाँ वह हर रविवार को प्रार्थना सभा का आयोजन करता था। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सुबह से लेकर शाम तक इस मकान में आते रहते थे। इसको देखकर स्थानीय लोगों को संदेह हुआ और उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और हिंदू संगठनों को दे दी।

रविवार (20 अक्टूबर 2024) को पुलिस और हिंदू संगठन के लोग वहाँ पहुँचे तो महिलाएँ और बच्चे जमीन पर बैठे हुए थे। वहीं, बिज्जू और उसकी पत्नी कुर्सी पर बैठकर हिंदू धर्म के खिलाफ लोगों को भड़का रहे थे। बिज्जू कह रहा था, “जो तुमसे प्यार करे उसको प्यार करो। आज करवाचौथ का दिन है लेकिन परिवार तुमसे प्यार नहीं करता, परमेश्वर करता है इसलिए परमेश्वर की शरण में आओ।”

वह लोगों से कह रहा था, “तुम्हें यीशु की पूजा करनी है। पैसा क्या चीज है? जो तुम चाहोगे, वह सब मिलेगा। तुम्हारे देवता क्या दे पाए आज तक? समाज में तुम्हें इज्जत तक नहीं मिलती। यीशु की शरण में चले आओ। यहाँ सब कुछ मिलेगा तुम्हें।” उसके हिंदू विरोधी प्रवचन को सुनकर हिंदू संगठनों के साथ-साथ स्थानीय लोग भड़क गए। इस दौरान भाजपा के पूर्व पार्षद ऋषिपाल सिंह भी मौजूद थे।

इसके बाद पुलिस ने बिज्जू और उसकी पत्नी के साथ-साथ एक व्यक्ति को लेकर थाने आ गई। एक व्यक्ति की तहरीर पर पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। भाजपा नेता अनमोल ने दावा किया कि पूछताछ में उन्हें पता चला है कि ये पति-पत्नी अब तक 300 लोगों का धर्मांतरण करा चुके हैं। दरअसल, बिज्जू पादरी के रूप में काम करता है।

भास्कर की टीम ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पाया कि धर्मांतरण का यह खेल बहुत सुनियोजित तरीके से खेला जा रहा था। यह बिल्कुल नेटवर्क मार्केटिंग की तरह काम करता है। यहाँ जिस व्यक्ति का धर्मांतरण किया जाता है, उसे दो अन्य लोगों को लाना होता है और उन्हें धर्मांतरण कराना होता है। इसके बदले में उन्हें तमाम तरह के लालच दिए जाते हैं।

ईसाई में धर्मांतरण के लिए बिज्जू तीन लालच देता था। पहला, धर्मांतरण करने वाले परिवार के लड़का या लड़की की शादी करवाएगी और इसका खर्च चर्च के लोग उठाएँगे। दूसरा, धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति या परिवार को खुद का रोजगार करने के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक की मदद देने का वादा करता था। तीसरा, बीमारियाँ ठीक करने के लिए पवित्र जल और झाड़-फूँक का वादा करते थे।।

भाजपा नेता अनमोल ने कहा कि करीब डेढ़ महीने से बिज्जू के आवास वाले मकान में महिलाओं एवं बच्चों का लगातार आना-जाना लगा था। बाद में पता चला कि वे ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं। अनमोल का दावा है कि बिज्जू और उसकी पत्नी पिछले 15 साल से मेरठ के अलग-अलग इलाके में किराए पर मकान लेते हैं और वहाँ पर प्रार्थना सभा आयोजित करके लोगों। को ईसाई में धर्मांतरण करवाते हैं।

अनमोल के अनुसार, यहाँ आने वाली एक महिला ने बताया कि हमसे कहा जाता था कि जो कुछ हम सीखते हैं, उसको आगे भी 2 लोगों को बताना और सिखाना है। उन्हें परमेश्वर की कृपा और उसके चमत्कारों के बारे में बताना है। इस तरह से यह नेटवर्क बनता चला जाता था। एक आदमी का धर्म बदलता तो वो दूसरे आदमी को धर्मांतरण के लिए तैयार करता। उनका फोकस गरीब और महिलाओं पर होता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्मांतरण के इस गिरोह का नेटवर्क बहुत मजबूत है। आम जनता के बीच में इनके लोग मौजूद हैं। इनमें मिशनरी स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं। ये शिक्षक शहर के नामी स्कूलों में बच्चों का नामांकन कराने का लालच देते हैं। ये गरीब और महिलाओं को अनाज एवं दवाएँ देकर झाँसे में लेते और फिर उनका ब्रेनवॉश करते थे।

इस मामले पर एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि धर्मांतरण का आरोप है और इसकी जाँच सीओ दौराला शुचिता सिंह को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जाँच के बाद जो भी तथ्य सामने आएँगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी आयुष विक्रम सिंह ने कहा कि यदि धर्मांतरण की बात सच निकलती है तो आरोपितों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

जामिया में दीपोत्सव मना रहे छात्रों पर इस्लामी कट्टरपंथियों का हमला, लगे अल्लाह-हू-अकबर और फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे: पीड़ित बोले- मेवात स्टूडेंट यूनियन ने किया उपद्रव, छात्राओं से कहा हिजाब पहनो

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में इस्लामी कट्टरपंथियों ने दीवाली मना रहे हिन्दू छात्रों पर हमला बोल दिया। इस्लामी कट्टरपंथियों ने बदतमीजी की और मारपीट की। उन्होंने अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारे लगाए। इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले के कारण कई छात्रों को अस्पताल ले जाना पड़ा।

जामिया में यह घटना मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को हुई। यहाँ हर साल की तरह जामिया में गेट नम्बर 7 पर गुलिस्ताँ-ए-ग़ालिब के पास दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया रहा था। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय कला मंच कर रहा था। इसके अंतर्गत एक रंगोली प्रतियोगिता भी करवाई गई थी।

शाम लगभग 7:00-7:30 बजे के आसपास इस कार्यक्रम पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने धावा बोल दिया। उन्होंने यहाँ पैरों से दीए तोड़ डाले और रंगोलियों को बर्बाद कर दिया। उन्होंने यहाँ मौजूद छात्राओं से भी बदतमीजी की। छात्रों के साथ धक्कामुक्की करते हुए इस्लामी कट्टरपंथी अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाने लगे। यहाँ कट्टरपंथियों ने फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे भी लगाए।

हिन्दू छात्रों पर हमला करने और दीपोत्सव में हंगामा करने का आरोप मेवात स्टूडेंट यूनियन नाम के एक इस्लामी छात्र संगठन पर लगा है। पीड़ितों का आरोप है कि इन लोगों ने बाहर भी लोगों को बुलाया और उसके बाद भीड़ के रूप में हमला बोला।

इस घटना के कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनमें यह कट्टरपंथी यह नारे लगाते हुए सुने जा सकते हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में 2 छात्रों के चोट आने की भी सूचना है, जिनको अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। कुछ छात्रों को इस वजह से चक्कर भी आ गए।

इस कार्यक्रम में शामिल जामिया के BA मास मीडिया पाठ्यक्रम के छात्र प्रियांशु कुमार ने ऑपइंडिया को बताया, “हर साल की तरह इस बार भी आयोजन को किया जा रहा था। इस आयोजन में बड़ी संख्या में मुस्लिम लडकियाँ भी शामिल थीं। इसी बीच जामिया की ही मेवात स्टूडेंट यूनियन के कुछ कट्टरपंथी आए और हंगामा करने लगे।”

प्रियांशु ने ऑपइंडिया को बताया, “मेवात स्टूडेंट यूनियन के इस्लामी कट्टरपंथियों ने यहाँ हाथापाई चालू कर दी। उन्होंने लड़कियों को हिजाब पहनने को लेकर धमकी दी। इसके बाद वह अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर चिल्लाने लगे। हिन्दू छात्रों को यहाँ से बड़ी मुश्किल से निकाला गया।”

प्रियांशु ने यह भी बताया कि मेवात स्टूडेंट यूनियन के गुंडों ने यहाँ जबरदस्ती सबके पहचान पत्र चेक करने की कोशिश की, उन्होंने यहाँ चोटिल हुए छात्रों को इलाज के लिए ले जाए जाने के दौरान बाधाएँ खड़ी की। प्रियांशु ने बताया कि यह इस्लामी कट्टरपंथी लगभग बड़ी संख्या में हमला करने की तैयारी करके आए थे।”

जामिया में हँगामे की सूचना के बाद भारी पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। अभी हंगामा करने वालों की पहचान नहीं हो पाई है। इस बीच ABVP ने जामिया प्रशासन और दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने माँग की है कि इन दंगाइयों की पहचान करने के बाद उनको गिरफ्तार किया जाए।

दिल्ली पुलिस ने इस घटना पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ” यह घटना शाम 7:30-8 बजे गेट 7 के पास हुई। ABVP से जुड़े छात्रों का एक समूह दिवाली के लिए दीये और रंगोली बना रहा था, जिससे छात्रों का एक अन्य समूह भड़क गया। दूसरे समूह ने इस सजावट पर हमला कर दिया, इसके बाद हाथापाई हुई। दोनों पक्षों ने नारेबाजी की। शांति बनाए रखने के लिए पुलिस को तैनात किया गया था, छात्रों को तितर-बितर होने का आदेश दिया गया और रात 9 बजे तक भीड़ यहाँ से चली गई।”

BRICS की बैठक से पहले कजान में मिले PM मोदी-राष्ट्रपति पुतिन, यूक्रेन युद्ध पर बोला भारत- हम हर रोल निभाने को तैयार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को कजान शहर में द्विपक्षीय वार्ता हुई है। पीएम मोदी कजान में 2024 के BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस गए हैं। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस के संबधों की गहराई को लेकर बात की। पीएम मोदी ने इस दौरान यूक्रेन-रूस संघर्ष का जिक्र भी किया।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “पिछले तीन महीनों में मेरा दो बार रूस आना हमारी करीबी को दिखाता है। जुलाई में मास्को में हुई हमारी वार्षिक बैठक से हर क्षेत्र में हमारे सहयोग को बल मिला है। पिछले एक वर्ष में BRICS की सफल अध्यक्षता के लिए आपको मैं बधाई देता हूँ। अब विश्व के अनेक देश इससे जुड़ना चाहते हैं।”

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा, “रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर हम सम्पर्क में रहे हैं। हमारा मानना है कि समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से ही होना चाहिए। शांति और स्थिरता की जल्द बहाली का हम समर्थन करते हैं। हमारे प्रयास मानवता को प्रमुखता देते हैं।”

पीएम मोदी ने अपने स्वागत सत्कार के लिए राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने बात पर ख़ुशी जताई कि कजान को BRICS बैठक के लिए चुना गया है। उन्होंने इस दौरान कजान में नए भारतीय दूतावास का जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती मिलेगी। पीएम मोदी ने शांति प्रयासों में अपनी पूरी सहभागिता का वादा भी किया।

वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को कजान आने का निमंत्रण स्वीकारने के लिए धन्यवाद दिया। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि BRICS समिट के दौरान सभी नेता महत्वपूर्ण नेता बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति पुतिन ने इस दौरान उनकी पीएम मोदी से जुलाई में मुलाकात और टेलीफोन की बातचीत का जिक्र किया।

राष्ट्रपति पुतिन ने इस दौरान मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके और पीएम मोदी के रिश्ते इतने गहरे हैं कि पीएम मोदी उनकी बात बिना अनुवाद के समझ जाएँगे। पीएम मोदी राष्ट्रपति पुतिन की इस बात पर हंस पड़े। दोनों नेताओं के बीच इस दौरान अन्य कई मुद्दों पर बातचीत भी हुई।

पीएम मोदी मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को ही कजान पहुँचे थे। वह बुधवार को BRICS शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। BRICS की शिखर बैठक के लिए पीएम मोदी के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पहुँचे हैं। हाल ही में लद्दाख में भारत और चीन के बीच हुए सझौटे के बाद आशा जताई जा रही है कि यहाँ दोंनो नेताओं की मुलाक़ात भी होगी।