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टेंट में महिला, 5 दिन घर नहीं जा सकती क्योंकि चल रही माहवारी: जानिए सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्यों दिखाई 2023 की तस्वीर, क्यों कहा- सिर्फ दिल्ली-मुंबई ही भारत नहीं

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय करोल ने शनिवार (19 अक्टूबर 2024) को एक ऐसी महिला की दर्दनाक कहानी का खुलासा किया, जिसे अपने मासिक धर्म के दौरान घर से बाहर रहना पड़ता है। जज ने साल 2023 में खींची गई एक तस्वीर भी दिखाई, जिसमें महिला को एक टेंट के नीचे रहते हुए दिखाया गया है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश करोल ने कहा, “यह तस्वीर मैंने एक सुदूर गाँव में ली थी। यह तस्वीर एक महिला की है, जिसे उन पाँच दिनों के लिए अपने घर में प्रवेश करने की मनाही कर दी गई थी, जब वह शारीरिक परिवर्तन से गुज़र रही होती है। यह वह भारत है, जिसमें हम रह रहे हैं। हमें इन लोगों तक पहुँचना होगा।”

दरअसल, न्यायाधीश संजय करोल ने यह बात इंटरनेशनल सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड (SCAORA) लीगल कॉन्फ्रेंस में कही। हालाँकि, जज ने यह नहीं बताया कि यह तस्वीर कहाँ ली गई थी। घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बिहार और त्रिपुरा के दूरदराज के इलाकों का जिक्र किया, जहाँ अभी तक अदालती व्यवस्था नहीं पहुँच पाई है।

सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों के संदर्भ में बोलते हुए न्यायाधीश ने कहा कि ये उदाहरण ऐसे लोगों के हैं, जिनकी न्याय तक पहुँच थी, जो मुख्य रूप से शिक्षित थे और महानगरों में रहते थे। न्याय प्रणाली के ‘महानगर-केंद्रित’ दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हुए जज ने कहा, “भारत दिल्ली नहीं है। भारत बॉम्बे नहीं है। हम भारत के संविधान के रक्षक और संरक्षक हैं।”

जस्टिस संजय करोल ने कहा, “हम लोगों को उन लोगों तक पहुँचने में एक प्रमुख भूमिका निभानी है, जिनके पास न्याय तक पहुँच नहीं है या जो वास्तव में नहीं जानते कि न्याय क्या है। क्या आपने कभी भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के बारे में सोचा है? क्या आपने उनकी भाषा बोली है? क्या आप उन तक पहुँचे हैं? क्या आप उन्हें समझ पाए हैं?”

न्यायाधीश ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक न्याय एक दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं और एक दूसरे पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, “असमानता केवल संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि दूसरों के सापेक्ष अभाव का एक गहरा अनुभव है।” उन्होंने संविधान को एक जीवंत दस्तावेज बताया और कहा कि यह सामाजिक और आर्थिक न्याय दोनों को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में कार्य करता है।

70+ विमानों को बम की धमकी, ₹200+ करोड़ का नुकसान… DGCA प्रमुख हटाए गए, BCAS ने कहा- भारतीय आसमान सुरक्षित: जानिए क्या कर रहीं एजेंसियाँ

भारत के आसमान में हाल ही में बम धमकी की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। देशभर की एयरलाइंस को एक हफ्ते में 70 से ज्यादा बम की धमकियाँ मिली हैं, जिनमें से अधिकांश झूठी साबित हुईं। इन घटनाओं ने यात्रियों में डर और असुविधा का माहौल पैदा किया है, जबकि एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव बना है। इस संदर्भ में नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और अन्य संबंधित एजेंसियाँ लगातार प्रयासरत हैं कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान हो सके।

इन धमकियों के बाद डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के प्रमुख विक्रम देव दत्त का तबादला कर दिया गया है। उन्हें कोयला मंत्रालय में सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है और उनकी जगह जल्द ही एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी लेंगे। बताया जा रहा है कि यह कदम हालिया बम धमकी की घटनाओं के बाद लिया गया है।

70 विमानों को मिल चुकी हैं धमकियाँ

इस बीत, शनिवार (19 अक्टूबर 2024) को 30 से अधिक विमानों को बम की धमकी मिली, जिससे हवाई सुरक्षा में चिंता बढ़ गई। अब तक कुल 70 विमानों को धमकियाँ मिल चुकी हैं। इन विमानों में Vistara, IndiGo, Air India, SpiceJet, Akasa, Star Air और Alliance Air शामिल थीं। इस बीच, मुंबई से कोलंबो जा रही एक Vistara की फ्लाइट में बम की खबर मिलने के बाद सभी 96 यात्रियों और 8 क्रू सदस्यों को सुरक्षित उतारा गया। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी धमकियों का सामना करना पड़ा। हालाँकि जाँच के बाद यह पाया गया कि अधिकांश धमकियाँ फर्जी थीं।

200 करोड़ से अधिक का नुकसान

बता दें कि हरेक फर्जी धमकी के बाद होने वाली जाँच और प्रोटोकॉल को पूरा करने में काफी समय और पैसा खर्च होता है। ऐसी हरेक धमकी पर 3 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होता है। एक अनुमान के मुताबिक, इन धमकियों से अब तक 200 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। साथ ही यात्रियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

सोशल मीडिया पर धमकियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इन धमकियों की जाँच के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) से संपर्क किया है। पुलिस को संदेह है कि धमकियाँ देने वाले लोग VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का उपयोग कर रहे हैं ताकि उनकी असली लोकेशन छिपाई जा सके। इसके अलावा, कई धमकियों की लोकेशन लंदन, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका से ट्रैक की गई हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया हैंडल्स को निलंबित करने और पोस्ट हटाने का अनुरोध किया है। जाँच में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) भी शामिल हो गए हैं।

भारतीय आसमान सुरक्षित: BCAS महानिदेशक

इन धमकियों के बीच, BCAS के महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय आसमान पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “भारतीय आसमान में सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल हैं, जिनका सख्ती से पालन किया जा रहा है। यात्रियों को बिना किसी डर के यात्रा करनी चाहिए।” हसन ने यह भी बताया कि धमकियों से निपटने के लिए सभी एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाया जा रहा है। उनका दावा है कि जल्द ही इन फर्जी धमकियों पर काबू पा लिया जाएगा।

एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों की बैठक

शनिवार (19 अक्टूबर 2024) को नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) के मुख्यालय में एयरलाइंस के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में बम की धमकियों से उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। त्योहारी सीजन के दौरान इन धमकियों के कारण एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। BCAS ने आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही धमकियों के मूल कारण तक पहुँचने में सफल होंगे।

केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई की तैयारी

बम की इन फर्जी धमकियों को रोकने के लिए सरकार भी सख्त कदम उठाने की योजना बना रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर विमान अधिनियम-1934 और विमान नियम-1937 में संशोधन करने की दिशा में काम कर रहा है। इस संशोधन के तहत फर्जी धमकी देने वालों को 5 साल की सजा और नो-फ्लाई लिस्ट में डालने की सिफारिश की जा रही है। कानून और गृह मंत्रालय के परामर्श से एक समिति गठित की जाएगी, जो इस संशोधन का मसौदा तैयार करेगी।

मैकेनिकल इंजीनियर से बनी पार्षद, अब प्रियंका गाँधी को देंगी सीधी टक्कर: मिलिए 39 साल की नव्या हरिदास से, वायनाड से BJP ने बनाया है उम्मीदवार

केरल के वायनाड में 13 नवंबर 2024 को लोकसभा के उपचुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी प्रियंका गाँधी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने मैदान में अपनी जिन उम्मीदवार को उतारा है उन्हें लेकर क्षेत्र से हटकर भी काफी चर्चा है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वो नव्या हरिदास कौन हैं जो वायनाड में प्रियंका के सामने खड़ी होंगी।

नव्या हरिदास को लेकर मौजूद जानकारी बताती है कि 39 साल की भारतीय जनता पार्टी का कोई नया चेहरा नहीं हैं। वह राज्य में भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की मुख्य सचिव हैं।

इसके अलावा नव्या कोझिकोड निगम से दो बार पार्षद भी रह चुकी हैं। साल 2021 में भी चुनाव के वक्त भाजपा ने उन्हें कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अहमद देवरकोविल के खिलाफ मैदान में उतारा था। इन चुनावों में तीसरे नंबर पर रहीं थीं।

राजनीति से अलग बात करें तो नव्या एक मैकेनिकल इंजीनियर भी हैं। केएमसीटी इंजीनियरिंग कॉलेज कालीकट विश्वविद्यालय से 2007 में बी.टेक की और बाद में राजनीति में प्रवेश किया।

वायनाड से प्रत्याशी बनाए जाने पर वह कहती हैं कि वायनाड में प्रगति की जरूरत है। कॉन्ग्रेस परिवार वास्तव में वायनाड के लोगों की जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा है। इस चुनाव के बाद से वायनाड के निवासियों को संसद में बेहतर सदस्य की जरूरत है।

गौरतलब है कि आने वाले दिनों में 24 विधानसभा और 1 लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। वायनाड की सीट की चर्चा इसलिए है क्योंकि बीते लोकसभा चुनावों में राहुल गाँधी ने यहाँ और राय बरेली से चुनाव लड़ा था। जीत के बाद उन्होंने राय बरेली से सांसद बने रहना चुना और वायनाड की सीट छोड़ दी। अब यहाँ से उनकी बहन चुनाव लड़ेंगी।

रोहिणी के CRPF स्कूल के पास धमाके बाद हाई अलर्ट पर दिल्ली, NSG का सर्च ऑपरेशन: क्रूड बम ब्लास्ट की आशंका, सफेद पाउडर मिला

दिल्ली के रोहिणी स्थित प्रशांत विहार इलाके में CRPF स्कूल के पास रविवार (20 अक्टूबर 2024) की सुबह जोरदार धमाका हो गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, फोरेंसिक टीम, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉयड और फायर ब्रिगेड की टीम के साथ-साथ जाँच के लिए NSG की टीम भी पहुँची है। प्रारंभिक जाँच में वहाँ सफेद पाउडर मिला है। इसे क्रूड बम का धमाका होने की आशंका जताई जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने इस घटना के बाद मौके पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। इसके साथ ही ​जिले की पुलिस को अलर्ट मोड में रहने को कहा है। NSG की टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। DCP अमित गोयल ने बताया कि धमाका किसमें हुआ है और कैसे हुआ है? इसका पता लगाने के लिए एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

उन्होंने कहा कि घटनास्थल की प्राथमिक जाँच से पता चला है कि स्कूल की जिस दीवार के पास धमाका हुआ है वहाँ आसपास मिठाई की दुकान है। सिलिंडर फटने की भी आशंका जताई जा रही है। घटनास्थल से तेज दुर्गंध आ रही थी। धमाके से स्कूल से सटी दुकान, आसपास खड़ी कारों और घरों के शीशे टूट गए। लोगों का कहना है कि धमाका बहुत जोरदार था।

पुलिस ने बताया कि स्कूल की दीवार, आसपास की दुकानें और एक कार क्षतिग्रस्त हो गई। दिल्ली पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने विस्फोटक की जाँच के लिए एनएसजी बम निरोधक दस्ते की टीम से अनुरोध किया है। विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को स्कैन करने के लिए भी एक टीम को नियुक्त किया गया है।

एक अधिकारी ने कहा, “एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद मामला विशेष इकाई को सौंप दिया जाएगा। हमें सुबह 7.50 बजे सीआरपीएफ स्कूल की चारदीवारी के पास विस्फोट होने की सूचना मिली। हमने तुरंत दो दमकल गाड़ियां मौके पर भेजीं। विस्फोट के कारण कोई आग नहीं लगी और कोई घायल नहीं हुआ, इसलिए हमारी गाड़ी वापस लौट आई।”

वहीं, शशांक नाम के एक चश्मदीद ने कहा, “विस्फोट के समय हमें यह लगा कि सिलेंडर ब्लास्ट हुआ है या बिल्डिंग गिरी है। यहाँ धुएँ का गुबार फैल गया था, जो करीब 10 मिनट तक रहा।” उन्होंने बताया कि विस्फोट की वजह से दुकानों के शीशे टूट गए और होर्डिंग्स उखड़ गए। हालाँकि, किसी को चोट नहीं लगी। घटना के कुछ ही देर में दिल्ली पुलिस मौके पर पहुँच गई।

एक सहज व्रत को सिनेमा ने ग्लैमर से जोड़ा, नारीवादियों ने गढ़ा स्त्रियों के शोषण का प्रोपेगेंडा; फिर भी ‘करवा चौथ’ के चाँद पर नहीं लगा पाए दाग

‘माई बॉडी माई चॉइस’ का नारा देने वाली और लड़की की हर फालतू माँग को पर्सनल चॉइस कहने वाली कम्युनिस्ट फेमिनिस्ट लॉबी करवाचौथ पर सक्रिय हो जाती है। बुर्के तक की माँग को व्यक्तिगत पसंद मानने वाले ये लोग करवाचौथ को शोषण का त्योहार बताने लगते हैं।

ऐसा माहौल बनाया जाता है कि जैसे करवाचौथ का व्रत रखने के लिए लड़कियों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके गले पर तलवार रखकर उनसे यह व्रत रखवाया जा रहा है। ऐसा डरावना माहौल बनाया जाता है कि जैसे भारत की महिलाओं को उनके पति को हमेशा सताते हैं, मारते हैं और फिर इस व्रत के दिन कुछ गिफ्ट आदि देकर अपनी अपराध की भावना को छिपाते हैं।

मगर, क्या वास्तव में यही सच है? क्या वास्तव में ऐसा होता है? क्या वास्तव में महिलाओं को जबरन यह व्रत रखने पर मजबूर किया जाता है? क्या भारत के मर्द इतने दुष्ट होते हैं कि वे लगातार अपनी पत्नियों को मारते रहते हैं और एक दिन उन्हें तोहफे देते हैं?

नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। ऐसा कुछ भी नहीं है कि लड़की को जबरन मजबूर किया जाता हो और यह भी बहुत ही भद्दा मजाक है कि कुछ लोग इसे यश चोपड़ा की फिल्मों की उपज बताते हैं। मगर, ऐसा कहने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि इस पर्व का इतिहास आज का नहीं है। उत्तर भारत के क्षेत्रों में यह व्रत शताब्दियों से मनाया जाता रहा है।

हम लोगों ने यह बचपन से देखा कि हमारी दादी, नानी जैसी महिलाएँ सुबह से रात तक अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती थीं। हाँ, यह बात पूरी तरह से सच है कि पति-पत्नी के असाधारण प्रेम के इस सहज व्रत को फिल्मों ने ग्लैमर से भर दिया है। उसमें डिजाइनर साड़ी, गहने और गिफ्ट का तड़का लगा दिया है, मगर प्यार का पर्व तो बहुत पुराना है।

और, यदि हम अपनी मान्यताओं, अपनी परंपराओं को आगे लेकर जाना चाहते हैं, तो समस्या किसे और क्यों है? आखिर प्यार के मसीहा कहे जाने का दावा करने वाले ये लोग पति-पत्नी के प्रेम के पर्व के इस सीमा तक दुश्मन क्यों हैं कि चैन से त्योहार भी नहीं मनाने देते हैं। कभी यह कहते हैं कि इस पर्व का कोई इतिहास नहीं है, तो कभी यह कि लड़कियों पर अत्याचार है और फिर कभी यह कि यह फिल्मों और सीरियल्स की उपज है।

मगर इतने प्रोपोगैंडा के बाद भी पति-पत्नी का यह पर्व दिनों-दिन लोकप्रिय होता जा रहा है, युवा से लेकर वृद्ध तक अपने जीवनसाथी के प्रति प्रेम दर्शाने के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और चाँद देखकर ही यह कहती हैं कि “मेरा चाँद आ गया है!”

‘जिन्दा नहीं निकला अल्हम्दुलिल्लाह’: रामगोपाल मिश्रा की हत्या पर बहराइच की जमीन से सोशल मीडिया तक जश्न, आतंकियों को वकील दिलाने वाली जमीयत उलेमा की चिट्ठियों से शांति अपील

उत्तर प्रदेश के बहराइच में माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा के दौरान रामगोपाल मिश्रा की हत्या को लगभग 1 सप्ताह बीत चुके हैं। पिछले रविवार (13 अक्टूबर) को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने उनकी हत्या कर दी थी। मिश्रा की मौत पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ख़ुशी मना रहे हैं। ये हरकत सोशल मीडिया पर भी की गई। वहीं, बहराइच पुलिस शांति बहाली के लिए आतंकियों को वकील दिलाने के लिए कुख्यात जमीयत उलेमा से अपील जारी करवा रही है।

जश्न हो रहा रामगोपाल की हत्या पर

खुद को चश्मदीद बताते हुए हरदी थाना क्षेत्र के चंद्रपाल कुमार मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात की। उनका दावा है कि रामगोपाल मिश्रा की मौत पर मुस्लिम समुदाय के कई लोग ख़ुशी मना रहे हैं। बकौल चंद्रपाल, एक जगह उन्होंने कुछ मुस्लिमों को कहते सुना कि जो हुआ वो बहुत सही हुआ। जब चंद्रपाल ने उनसे पूछा कि ‘यही तुम्हारे घर में हुआ होता तो क्या कहते’? तब वो लोग बुरा मान गए।

बाजीराव पेशवा को अपना आदर्श मानने वाले महसी के आदित्य मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने रामगोपाल मिश्रा की हत्या को सेलिब्रेट किया। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक जिले अथवा क्षेत्र का एक भी मुस्लिम नेता रामगोपाल की हत्या पर संवेदना नहीं व्यक्ति की। इसके उलट, सभी लोग मृतक को ही दंगाई साबित करने पर तुले हुए हैं।

आदित्य मिश्रा का कहना है कि असली दंगाई मुस्लिम भीड़ पर ये नेता सभी खामोश हैं। उन्होंने कहा कि रामगोपल के कत्ल का सेलिब्रेशन न सिर्फ जमीनी स्तर पर हुआ, बल्कि इसे सोशल मीडिया पर भी देखा जा सकता है। सबूत के तौर पर आदित्य मिश्रा ने ऑपइंडिया को सोशल मीडिया का एक लिंक शेयर किया। यह लिंक ‘बहराइच क्वीन 786’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल का है।

इस हैंडल पर वो वीडियो शेयर हुआ है जिसमें रामगोपाल मिश्रा अब्दुल हमीद की छत पर खड़े दिख रहे हैं। कैप्शन के तौर पर इसमें बहराइच क्वीन ने लिखा, “वसीम जिस दिन मैदान में हम आएँगे।” इस वीडियो को इंस्टाग्रम पर अब तक सवा लाख से अधिक लोग देख चुके हैं। इसी जगह 800 से अधिक कमेंट हैं, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम समुदाय से हैं।

इसी में तौफीक खान नाम के एक यूजर ने हरे रंग के दिल का निशान बनाया और लिखा, “जिन्दा नहीं निकला। इंशाअल्लाह।” जीशान ने हँसी की 2 इमोजी बनाकर लिखा, “इसको गोली मार दी गई।” कनीज़ फातिमा ने सलमान अज़हरी वाली लाइन दोहराई और लिखा, “आज कुत्तों का वक्त है। कल हमारा दौर आएगा। इंशाअल्लाह।”

इसी पोस्ट के कमेंट में रियाज़ पठान 2 इमोजी लगाकर लिखता है, “पेल दिया गया दंगाई।” शब्बू निशा नाम की महिला के हैंडल से लिखा गया, “सुना है यह कुत्ते की मौत मारा गया।” खातून शब्बू निशा ने हँसी की एक इमोजी भी शेयर की है। मेजीब भाई नाम के हैंडल से रामगोपाल मिश्रा को माँ की गाली दी गई है। इसके अलावा मायरा सहित कई अन्य हैंडलों से ‘इस्लाम जिंदाबाद’ व ‘पठान जिंदाबाद’ आदि लिखकर रामगोपाल के कातिलों का उत्साहवर्धन किया गया है।

चित्र साभार – Insta/bahraich_queen786

जमीयत उलेमा के उर्दू वाले पत्रों से शांति की अपील

इस बीच बहराइच पुलिस ने जिले में शांति बहाली के लिए आधिकारिक तौर पर जमीयत उलेमा संगठन का सहारा लिया है। पुलिस ने अपने आधिकारिक ग्रुप में जमीयत उलेमा के उर्दू व हिंदी में लिखे गए पत्र शेयर किए हैं। सोमवार (14 अक्टूबर 2024) को लिखे गए इन पत्रों में मौलाना कारी जुबेर अहमद ने लोगों से फिरकारस्त ताकतों को सफल न होने देने की अपील की है। बताते चलें कि जमीयत उलेमा कई आतंकियों को कानूनी मदद दिलाने की वजह से अक्सर चर्चा में रहती है।

चित्र- बहराइच पुलिस मीडिया सेल

हम रोकते हैं बच्चों को गलत बात से, वो लालकर रहे थे कत्ल के लिए

ऑपइंडिया ने इस घटना के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा घायल किए गए कई हिन्दुओं से बात की। इन हिन्दुओं में 70 साल के वृद्ध व 90% दिव्यांग जन भी शामिल हैं। इन सभी ने हमें एक स्वर में बताया कि जब मुस्लिम भीड़ उन पर हमला कर रही थी, तब उसमें शामिल बच्चों और जवानों को उनके बुजुर्ग समझाने के बजाय ललकार रहे थे। हमसे दावा किया गया कि मस्जिद से हुए ऐलान के बाद भड़की हिंसा में मुस्लिम समुदाय के नाबालिग बच्चों से ले बुजुर्ग तक शामिल थे।

पहले भूख से तड़पाया, फिर यजीदी बच्चों का मीट खिलाया… ISIS की बर्बरता उस युवती से सुनिए जिसे आतंकियों ने 11 साल की उम्र में बनाया सेक्स स्लेव: गाजा से इजरायली फोर्स ने छुड़ाया

‘काफिरों’ के साथ इस्लामी आतंकी कैसी बर्बरता की हदें पार करते हैं ये किसी से छिपा नहीं है। अगर फिर भी कोई संदेह हो तो आतंकियों से संवेदना रखने वाले लोगों को 10 साल बाद गाजा से बचाई गई यजीदी युवती की आपबीती सुननी चाहिए। युवती के अनुसार, ISIS ने उन्हें और अन्य यजीदी महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ बनाकर कैद में रखा था और खाने में उन्हें इंसानी बच्चों का मीट परोसा जाता था।

पीड़ित यजीदी युवती का नाम फावजिया अमीन सिदो है। ISIS ने उन्हें 2014 में बंधक बनाया था जब वो 11 साल की थीं। बाद में उन्हें हमास ने कैद कर लिया। आज उनकी उम्र 21 है और इजरायल डिफेंस फोर्स व यूएस एबेंसी के कारण वो 10 साल बाद (अक्टूबर 2024 में) उस जहन्नुम से निकल पाई हैं।

एक दशक बाद घर लौटीं फावजिया ने बताया, कि जब वो 11 साल की थीं तब उन्हें और उनके भाई को ISIS ने कैद कर दिया था। आगे उन्होंने कहा, “घर से उठाने के बाद तो 4 दिन हमें भूख से तड़पाया गया। कुछ खाने को नहीं मिला। फिर आतंकियों ने हमसे कहा कि वो हमें खाना देंगे। उन्होंने हमारे लिए चावल बनाया और उसके साथ मीट खाने को दिया। मीट का स्वाद बहुत अजीब था। कुछ को तो पेट दर्द भी शुरू हो गया था उसे खाकर…।”

आगे वह कहती हैं, “हमने जब खाना खत्म किया तो हमें कहा गया कि ये मीट यजीदी बच्चों का था। फिर उन्होंने हमें तस्वीरें दिखाईं जिसमें वो बच्चों का कत्ल कर रहे थे। फोटो दिखाकर उन्होंने बोला कि ये वो बच्चे हैं जिनका मीट तुमने अभी खाया। तस्वीर देखते ही एक महिला का तो हार्ट फेल हो गया और वो कुछ समय बाद मर गई। वहीं हमारे साथ वो महिलाएँ भी थीं जो उन बच्चों की माँ थी। उनमें से एक ने तो अपने बच्चे का हाथ देख उसे पहचाना भी लिया था।”

2014 में बनाया गया था यजीदियों को बंधक

बता दें कि 2014 से ISIS लगातार यजीदी समुदाय के लोगों को निशाना बनाता आया है। कभी सामूहिक नरसंहार के जरिए, कभी गुलाम बनाकर, कभी धर्मांतरण के जरिए तो कभी उनकी जगहों से उन्हें विस्थापित होने को मजबूर करके।

आँकड़े बताते हैं कि 6000 से ज्यादा यजीदियों को ISIS ने इराक के सिंजार से बंधक बनाया था। महिलाओं का इस्तेमाल उनसे सेक्स गुलामी करवाने के लिए किया गया जबकि बच्चों को ट्रेंड करके तुर्की, सीरिया भेज दिया गया। सालों प्रयास के बाद इन बंधक बनाए गए यजीदियों में से 3500 का रेस्क्यू की बात खबरों में बताई जाती है वहीं 2600 अब भी लापता हैं।

फावजिया उन्हीं लोगों में से एक थीं जिन्हें बंधक बनाया गया। फावजिया के अनुसार, ISIS आतंकियों ने एक साल तक उन्हें सेक्स स्लेव बनाए रखा और उसके बाद उन्हें पाँच बार बेचा गया। उन्हें आखिरी बार एक फिलीस्तीनी आतंकी के हाथों बेचा गया। शुरू में वो खुद को बाथरूम में छिपाकर बचाती थीं मगर एक दिन उन्हें ड्रग देकर उनका रेप किया गया। जब वो प्रेगनेंट हो गई और 15 साल की उम्र में दो बच्चों की माँ बन गई। बाद में उन्हें हमास भेजा गया जहाँ जहन्नुम से बद्तर जिंदगी उन्हें देखने को मिली। पीड़िता के अनुसार एक बार तो वो घर से बाहर निकलीं तो उनके सिर पर बंदूक रख दिया गया और कहा कि उन्हें इसकी अनुमति नहीं है।

अब फिलहाल फावजिया उत्तरी इराक के सिंजार में है। इजरायल और यूएस ने मिलकर यहाँ से ISIS आतंकियों का प्रभाव समाप्त कर दिया है लेकिन अभी भी पश्चिमी एशिया और अफ्रीका में ISIS सक्रिय है।

सुशील शिंदे ने 11 साल बाद बताया ‘भगवा आतंकवाद’ कैसे गढ़ा: कहा- कॉन्ग्रेस ने बोलने को कहा था, मुझे नहीं पता भगवा के साथ आतंकवाद क्यों जोड़ा

कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 में गृहमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे ने ‘भगवा आतंकवाद’ पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भगवा आतंकवाद शब्द कहने के लिए उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस ने बोला था। शिंदे ने कहा कि वे इस शब्द का इस्तेमाल करना नहीं चाहते थे, लेकिन करना पड़ा। बता दें कि पहले पी. चिदंबरम और फिर शिंदे ने भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।

यूट्यूबर शुभांकर मिश्रा के साथ एक पॉडकास्ट में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं कॉन्ग्रेस से सेवानिवृत राजनेता सुशील कुमार शिंदे ने इस मुद्दे पर गंभीरता से बात की थी। भगवा आतंकवाद शब्द के इस्तेमाल को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उस वक्त रिकॉर्ड पर जो आया था, उन्होंने वही कहा था। ये उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस ने बताया था कि भगवा आतंकवाद हो रहा है।

शिंदे ने कहा, “उस वक्त पूछा था तो उस बारे में बोल दिया था भगवा आतंकवाद। बस इतना ही है। आतंकवाद शब्द लगाया, लेकिन सही बोले तो क्यों आतंकवाद शब्द लगाया मुझे पता नहीं है। लगाना नहीं चाहिए। ये गलत था। भगवा टेररिस्ट… ऐसा नहीं बोलना चाहिए। ये उस पार्टी की विचारधारा होती है। ये चाहे भगवा हो या रेड हो या सफेद हो। ऐसा कोई आतंकवाद नहीं होता है।”

बता दें कि भारत के गृहमंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने साल जनवरी 2013 में कहा था कि भाजपा और आरएसएस के कैंपों में ‘हिंदू आंतकवादियों’ को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस बयान को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई थी। हालाँकि, इन आलोचनाओं के बाद भी वे अपने बयान पर कायम थे।

तब गृहमंत्री शिंदे ने कहा था, “ये सब इतनी बार अख़बार में आ गया है। ये कोई नई चीज़ नहीं है जो मैंने आज कही है। ये भगवा आतंकवाद की ही बात मैंने की है, कोई दूसरी बात नहीं कही है।” दरअसल, 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान शिंदे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आरोप लगाया था।

अपने बयान के पीछे शिंदे ने एक कथित रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था, “हमारे पास रिपोर्ट आ गई है। जाँच में भाजपा हो या आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप, हिंदू आतंकवाद बढ़ाने का काम देख रहे हैं।समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी का धमाका हो, मक्का मस्जिद ब्लास्ट हो या फिर मालेगाँव, हिंदू चरमपंथियों ने वहाँ जाकर बम धमाके करवाए और फिर कह दिया कि ये धमाके अल्पसंख्यकों ने करवाए।”

सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि ऐसी कोशिशों से देश को सतर्क रहना चाहिए। शिंदे के इस बयान पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकवाद दी थी। इससे पहले गृहमंत्री रहते हुए कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने साल 2010 में सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।

केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में 25 अगस्त 2010 को डीजीपी और आईजी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”

‘नमाज पढ़ने की छूट, टीका लगाने पर सजा’: एयर इंडिया की हिंदू कर्मचारी ने मुस्लिम अधिकारी पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, न्याय के लिए PM मोदी से लगाई गुहार

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कार्यरत एयर इंडिया की महिला कर्मचारी चंचल त्यागी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने उत्पीड़न की शिकायत की है। चंचल का आरोप है कि एयर इंडिया की एक मुस्लिम अधिकारी महजबीन उन्हें माथे पर तिलक लगाने से रोक रही हैं। इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा, जब चंचल ने अपने इस उत्पीड़न के खिलाफ दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तहरीर भी दी, लेकिन वहाँ से कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने वीडियो जारी कर पीएम मोदी से लेकर अन्य नेताओं से न्याय की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सहारनपुर के जड़ौदा पांडा गाँव की निवासी चंचल त्यागी एयर इंडिया में ढाई साल से कार्यरत हैं। वो वर्तमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल नंबर 3 पर सहायक के पद पर काम कर रही हैं। चंचल का कहना है कि उन्होंने बचपन से ही सनातन परंपराओं का पालन किया है, जिसमें रोज पूजा के बाद तिलक लगाना शामिल है। शुरूआती दिनों में कंपनी में किसी को उनके तिलक लगाने से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन जब मुस्लिम अधिकारी महजबीन आईं, तो उन्होंने तिलक लगाने पर आपत्ति जताई और चंचल को तिलक हटाने का दबाव डालने लगीं।

चंचल ने कहा कि वह नवरात्रि के समय से महजबीन के निशाने पर हैं। महजबीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि एयर इंडिया में काम करने के लिए तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और अगर चंचल तिलक लगाकर ऑफिस आती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चंचल का दावा है कि उन्हें बार-बार तिलक न लगाने के लिए मजबूर किया गया, और जब उन्होंने इस दबाव को नजरअंदाज किया, तो उनके साथ अन्य तरीकों से उत्पीड़न शुरू हो गया।

चंचल त्यागी ने आरोप लगाया कि उनके काम में हस्तक्षेप किया जाने लगा, उन्हें बेवजह टोका-टोकी की जाने लगी। उन्होंने बताया कि वॉशरूम जाने तक पर उन्हें टोक दिया जाता था, और उनके काम की सही तरीके से एंट्री भी नहीं की जाती थी। 8 घंटे की ड्यूटी के बावजूद, आधे दिन की ही एंट्री की जाती थी। इसके अलावा, जब चंचल ने दिवाली की छुट्टी के लिए आवेदन किया, तो उसे भी निरस्त कर दिया गया। चंचल का मानना है कि उनके उत्पीड़न का मुख्य कारण उनका तिलक लगाना है।

चंचल त्यागी ने बताया कि महजबीन ने मुस्लिम स्टाफ को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने की अनुमति दी है, लेकिन जब चंचल अपनी सनातन परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर आती हैं, तो उन्हें इसके लिए सजा दी जाती है। चंचल ने वीडियो में कहा, “यह कोई पाकिस्तान नहीं है, जो हम तिलक नहीं लगा सकते। हिंदू संस्कार हमारे खून में हैं, और मैं इसे नौकरी के लिए नहीं छोड़ सकती।”

चंचल त्यागी ने अपने उत्पीड़न की शिकायत पहले एयरपोर्ट प्रशासन और फिर दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पास की, लेकिन जब वहाँ से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी व्यथा व्यक्त की और पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ने के अलावा उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि महजबीन लगातार उनका उत्पीड़न कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब एयर इंडिया की मुस्लिम अधिकारी महजबीन से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि कंपनी के नियम और ड्रेस कोड सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। महजबीन ने कहा, “कंपनी में ड्रेस कोड के तहत हिंदू कर्मचारी को तिलक लगाने और मुस्लिम कर्मचारी को टोपी पहनने की अनुमति नहीं है। एयरपोर्ट पर विभिन्न धर्मों के यात्री आते हैं, और इसलिए यह नियम बनाए गए हैं ताकि किसी भी धार्मिक प्रतीक को दिखाने से बचा जा सके।”

महजबीन ने यह भी कहा कि कंपनी में सभी धर्मों के लोग काम करते हैं और उन पर समान नियम लागू होते हैं। लेकिन चंचल त्यागी ने इन नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद उन्हें हिदायत दी गई थी।

चंचल त्यागी के वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ गया है। सोशल मीडिया पर कई लोग चंचल के समर्थन में आ गए हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, एयर इंडिया की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन महजबीन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया है।

जो विकास यादव अमेरिका में वांटेड, उसे दिल्ली पुलिस ने 10 महीने पहले गिरफ्तार किया था: खुद को लॉरेंस बिश्नोई का आदमी बता कारोबारी को धमकाया था, अब आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश में तलाश रही FBI

खालिस्तानी आतंकी गुरवतपंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश मामले में नया मोड़ आ गया है। अमेरिका की जाँच एजेसी FBI ने पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप जिस पूर्व भारतीय अधिकारी विकास यादव के खिलाफ लगाया है, उस पर दिल्ली पुलिस का केस दर्ज है और वह जमानत पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विकास यादव कोअप्रैल, 2024 में जमानत मिली थी। विकास यादव के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दिसम्बर, 2023 में हत्या की कोशिश और अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। यह मामला दिल्ली के एक व्यापारी ने दर्ज करवाया था।

दिल्ली के इस व्यापारी ने अपनी शिकायत में कहा था कि विकास यादव से वह एक मित्र के जरिए मिले थे। जिस व्यापारी ने विकास यादव के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करवाई है, वह आईटी सेक्टर का काम करते हैं। व्यापारी विकास यादव के शेयर मध्य एशिया में आईटी का काम लेना चाहता था।

उसे लगता था कि विकास यादव सरकार में कोई बहुत बड़े अधिकारी पद पर है। दोनों के बीच कई बार बातचीत भी हुई थी। व्यापारी का आरोप है कि एक दिन दिल्ली में विकास ने उन्हें मिलने बुलाया और वहाँ से अपने एक साथी के साथ उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद एक जगह ले जाकर मारपीट की और उनको लूट लिया।

व्यापारी का आरोप है कि विकास यादव ने खुद को गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई का आदमी बताया था और धमकी भी दी थी। व्यापारी की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने विकास यादव को गिरफ्तार किया था। इस मामले में जाँच के बाद विकास यादव को जमानत मिल गई थी।

इससे पहले विकास यादव को FBI ने पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोप में वांटेड घोषित किया था। FBI ने बताया था कि विकास यादव ने अमेरिका में पन्नू को मरवाने की साजिश रची और इसके लिए सुपारी दी। विकास यादव को पूर्व अर्धसैनिक बताया गया था।

अमेरिका ने पहले CC1 नाम दिया था। भारत ने हाल ही में बताया था कि विकास यादव अब नौकरी से निकाला जा चुका है। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि अमेरिका के विदेश मंत्रालय की इस बात की पुष्टि करते हैं कि विकास यादव अब भारत सरकार के लिए काम नहीं करता हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका ने आरोप लगाया है कि निखिल गुप्ता नाम का एक व्यक्ति अमेरिका में पन्नू को मारने की सुपारी दे रहा था, वह भारत सरकार के एक अधिकारी की शह पर पर काम करता था। अमेरिका ने इसके लिए कुछ सबूत भी जारी किए थे। अमेरिका ने अब यह अधिकारी विकास यादव बताया है।