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अब्दुल हमीद के जिस घर में हुई रामगोपाल मिश्रा की हत्या उस पर लगा नोटिस, बुलडोजर चलने से पहले सामान समेटने लगे लोग: मस्जिद से सटी दुकानें भी हो रहीं खाली

बहराइच जिले के महाराजगंज में प्रशासन अवैध निर्माणों पर जल्द कार्रवाई कर सकता है। कुल 23 मकानों पर नोटिस चिपकाए गए हैं। इनमें अब्दुल हमीद का घर भी है। उसके ही घर में रामगोपाल मिश्रा को खींचकर मार डालने का आरोप है। मिश्रा की हत्या 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा विसर्जन जुलूस पर इस्लामी भीड़ के हमले के दौरान हुई थी।

नोटिस चिपकाए जाने के बाद 19 अक्टूबर 2024 को कई लोग सामान समेटते नजर आए। ग्राउंड पर मौजूद ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने पाया कि कुछ ऐसे भी लोग अपनी दुकान खाली कर रहे थे जिनको नोटिस नहीं मिला है। उस मस्जिद से सटी दुकानें भी खाली हो रही हैं, जिससे मुस्लिमों को उकसाए जाने का आरोप कुछ चश्मदीदों ने लगाया है।

जिन 23 मकानों पर नोटिस चिपकाए गए हैं उनमें 19 मुस्लिमों के और 4 हिंदुओं के बताए जा रहे हैं। 17 अक्टूबर को जारी यह नोटिस पीडब्ल्यूडी और पुलिस प्रशासन ने 18 अक्टूबर को मकानों पर लगाए हैं। इसमें कहा गया है कि तीन दिन के भीतर लोग खुद से अवैध निर्माण हटा लें। ऐसा नहीं होने पर प्रशासन बुलडोजर से इन्हें ध्वस्त कर देगा। मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद के घर के बारे में बताया जा रहा है कि ये घर पहले किसी हिंदू परिवार का था, लेकिन बाद में अब्दुल परिवार ने इसे ले लिया।

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, बुलडोजर चलाने की तैयारी

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया है कि इन अवैध निर्माणों की जाँच पूर्व में भी हुई थी। तब भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब दोबारा नाप-जोख करके नोटिस जारी की गई है, जिसमें तीन दिनों के भीतर अवैध निर्माण हटाने का समय दिया गया है। इन निर्माणों को बिना विभागीय अनुमति के सरकारी सड़क के बीच से 60 फीट की दूरी पर बनाया गया था, जो नियमों के खिलाफ है।

नोटिस में कहा गया है, “उपरोक्त विषय के संबंध में सूचित करना है कि कुण्डासर महसी नानपारा मार्ग प्रमुख जिला मार्ग की श्रेणी का मार्ग है। विभागीय मानक के अनुसार प्रमुख जिला मार्ग पर रूरल एरिया में मार्ग के मध्य बिन्दु से 60 फुट की दूरी के अंदर बिना विभागीय अनुमति के कोई भी निर्माण कराया जाना अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है। अतः आपको नोटिस के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि आपने यह निर्माण जिलाधिकारी महोदय, बहराइच या पूर्व विभागीय अनुमति से किया गया है तो उसकी मूल प्रति तत्काल उपलब्ध करायें व उक्त अवैध निर्माण तीन दिवस के अंदर स्वयं हटा लें। अन्यथा की दशा में अवैध निर्माण पुलिस एवं प्रशासन के सहयोग से हटवाने की कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई में किये गये व्यय को राजस्व के माध्यम से आपसे ही वसूला जाएगा।”

प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण के लिए जारी किया गया नोटिस

प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी कर ली है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी और पुलिसकर्मी मिलकर इस अभियान को अंजाम देंगे। लोगों से तीन दिनों के भीतर अपनी संपत्तियों के वैध दस्तावेज पेश करने को कहा गया है, ताकि अवैध निर्माण होने पर कार्रवाई की जा सके। महसी के एसडीएम अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि पहले भी अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दी जा चुकी थी, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस बार यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो तीन दिनों के बाद अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कौन है अब्दुल हमीद?

अब्दुल हमीद बहराइच हिंसा के मुख्य आरोपित के रूप में नामजद है। उस पर और उसके परिवार पर 13 अक्टूबर को माँ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। अब्दुल हमीद के अलावा इस मामले में 6 अन्य नामजद और 4 अज्ञात लोगों पर भी मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने हमीद सहित सभी नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

बताया जा रहा है कि जिस घर में अब्दुल हमीद अपने परिवार के साथ रहता है, पहले वो घर किसी हिंदू परिवार का ही था, लेकिन अब्दुल हमीद के परिवार ने उसे खरीद लिया था और हिंदू परिवार किसी अन्य जगह रहने लगा था। ऑपइंडिया से बातचीत में उस परिवार ने भी इसकी पुष्टि की है।

इस बीच, प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि हिंसा में शामिल आरोपियों की संपत्तियों की जाँच की जाएगी। रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले में शामिल सभी आरोपितों की प्रॉपर्टी पर भी नज़र रखी जा रही है। पुलिस के अनुसार अब तक इस मामले में 87 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

महाराजगंज में अब शांति, लेकिन तनाव बरकरार

बता दें कि 13 अक्टूबर 2024 को बहराइच के महाराजगंज कस्बे में माँ दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे पर गाना बजाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। यह विवाद बढ़ते-बढ़ते सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गया, जिसमें 22 वर्षीय युवक रामगोपाल मिश्रा की गोली लगने से मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए। हिंसक भीड़ ने कई घर, दुकानें, बाइक और कारें जला दीं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

13 अक्टूबर 2024 को हुई हिंसा के बाद अब महाराजगंज बाजार में शांति है, लेकिन तनाव अब भी महसूस किया जा सकता है। बाजार में पुलिस की तैनाती जारी है, लेकिन व्यापारिक गतिविधियाँ बंद हैं। हिंसा के बाद से लोग अपने घरों में हैं और बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।

MP अमृतपाल सिंह की शह पर सिख एक्टिविस्ट की हत्या, कनाडा में रह रहा खालिस्तानी गैंगस्टर मास्टरमाइंड: पंजाब पुलिस का खुलासा, 3 को पकड़ा

पंजाब पुलिस ने एक सिक्ख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह की हत्या का खुलासा किया है। पंजाब पुलिस ने बताया है कि सिख एक्टिविस्ट की हत्या खालिस्तानी सांसद अमृतपाल सिंह की शह पर की गई थी। हत्या की साजिश में शामिल 3 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस हत्या में कनाडा में रहने वाले वांटेड आतंकी अर्शदीप डल्ला की भूमिका की बात कही है।

शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने इस घटना पर हुई कार्रवाई के बारे में बताया। पंजाब DGP ने बताया है कि SIT की जाँच में कनाडा में रहने वाला खालिस्तानी गैंगस्टर अर्शदीप डल्ला इस हत्या का मास्टरमाइंड निकला है।

पुलिस ने हत्या के सिलसिले में बिलाल अहमद, गुरमनदीप सिंह और अर्शदीप सिंह उर्फ़ झंडू को गिरफ्तार किया है। यह तीनों डल्ला के गैंग के लिए काम करते हैं। इन तीनों ने इस हत्या के लिए रेकी का काम किया था। इसके बाद यह जानकारी शूटरों को दी गई और उन्होंने इसके बाद इस हत्या को अंजाम दिया।

गिरफ्तार हुए इन तीनों का हैंडलर करमवीर सिंह उर्फ़ गोरा भी कनाडा में रहता है। जिन शूटरों ने यह हत्या की उनके हैंडलर भी विदेशों में ही रहते हैं, यह पंजाब पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है। इस जाँच के दौरान पंजाब पुलिस को सांसद अमृतपाल सिंह के इस हत्या में शामिल होने के भी सबूत मिले हैं।

इस घटना के बारे में हुई पूछताछ में सामने आया है कि यह हत्या सांसद और वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल सिंह की शह पर की गई थी। अमृतपाल इस समय असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। पुलिस ने आगे अमृतपाल सिंह के रोल के बारे में और जाँच करने को कहा है। वह अमृतपाल सिंह से पूछताछ भी कर सकती है।

पंजाब पुलिस को इन गिरफ्तारियों में सफलता CCTV और मोबाइल फोन की जाँच के जरिए मिली है। पुलिस ने उन शूटरों की पहचान भी कर ली है, जिन्होंने गुरप्रीत सिंह की हत्या की थी। पुलिस अब उन्हें पकड़ने के लिए जोर लगा रही है। इसके लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

गौरतलब है कि पंजाब के फरीदकोट में 9 अक्टूबर,2024 को सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह हरी नाव उर्फ ​​भोडी को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या तब हुई थी जब वह अपने मोटरसाइकिल से गाँव के गुरूद्वारे से घर की तरफ लौट रहा था।

गुरप्रीत सिंह बेहबलकलां इन्साफ मोर्चा का सदस्य था और इस बार के पंजाब पंचायत चुनावों में भी सक्रिय रहा था। यह मोर्चा बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दो युवकों के पुलिस फायरिंग में मारे जाने पर कार्रवाई की मांग करता आया है।

रेप के झूठे इल्जाम में 4 साल जेल में बंद रहा युवक… बरेली कोर्ट ने कहा- जितनी सजा पुरुष ने काटी उतनी महिला भी काटेगी, देना होगा ₹5 लाख जुर्माना

उत्तर प्रदेश के बरेली का एक युवक 4 साल से रेप के झूठे इल्जाम में जेल की सजा काट रहा था। कोर्ट को जब संदेह हुआ तो उन्होंने इल्जाम लगाने वाली युवती से सवाल-जवाब किए और फिर युवक को बाइज्जत बरी करते हुए उस लड़की को जेल काटने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि बेगुनाह युवक को जितनी सजा झूठे इल्जाम में काटनी पड़ी है उतनी ही ये लड़की भी काटेगी। साथ ही पीड़ित युवक को 5 लाख रुपए देने का निर्देश दिया

कोर्ट ने कहा कि जितना समय युवक जेल में रहा अगर वह बाहर रहता और मजदूरी करता तो इतने समय में वो 5,88000 से अधिक कमा चुका होता है। ऐसे में ये रकम इसी युवती से वसूल करके निर्दोष लड़के को दी जाए। अगर युवती इसे देने से मना करे तो उसकी सजा 6 महीने और बढ़ा दी जाए।

कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित अजय उर्फ राघव खुश तो हैं लेकिन उन्हें यही लग रहा है कि ऐसे इल्जाम अदालतों में खत्म हो जाते हैं लेकिन समाज उन्हें उसी नजर से देखता रहता है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया- ये मामला 2019 में शुरू हुआ था। सावन का कार्यक्रम के लिए युवती अपनी बड़ी बहन के साथ उनके पास आई और कहा कि उन्हें भी कार्यक्रम सीखना है। इसके लिए अजय उस युवती के घर जाते थे और जब प्रोग्राम होता था तब नीतू के पति भी साथ होते थे। माँ और भाई को भी पता था कि इस उद्देश्य से आना जाना है।

अजय बताते हैं कि एक बार उनकी माँ की तबीयत खराब हुई तो वो सबको बताकर गए कि उन्हें अपनी माँ के पास जाना है। अजय के अनुसार, जिस दिन उन्होंने ये बताया उसी दिन युवती खुद भी गायब हो गई। बाद में मिली तो अपहरण, रेप का इल्जाम लगा दिया।

अजय भावुक होकर कहते हैं कि युवती के एक इल्जाम से उनका करियर खराब हो गया। कहीं जाने पर लोग शक की निगाह से देखने लगे। मामला तो तब खुला जब अदालत में गवाही देने के दौरान युवती ने गड़बड़ की। उसने जज के आगे पहले खुद को अनपढ़ बताया और फिर अंग्रेजी में साइन कर दिए। जज भी समझ गए वो झूठ बोल रही है। इसके बाद उसपर झूठी गवाही देने के आरोप में केस दर्ज हुआ।

जस्टिन ट्रूडो की सरपरस्ती में PM मोदी की मौत माँग रहे खालिस्तानी, तिरंगे का कर रहे अपमान: कनाडा में प्रदर्शन कर कहा- भारतीय राजनयिकों को बाहर निकालो

कनाडा में बैठ कर भारत तोड़ने की साजिश रचने वाले खालिस्तानी आतंकी जस्टिन ट्रूडो की जय-जयकार कर रहे हैं। खालिस्तानी आतंकी बोलने की आजादी के नाम पर भारत के प्रधानमंत्री मोदी की मृत्यु की कामना कर रहे हैं। खालिस्तानियों ने तिरंगे का अपमान किया और वीडियो भी बनाया और फिर भारतीय राजनयिकों के खिलाफ भी जहर उगला।

एक कनाडाई पत्रकार के अनुसार, खालिस्तानी आतंकियों ने यह प्रदर्शन शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को टोरंटो में किया। इस प्रदर्शन में मौजूद खालिस्तानियों ने पीएम मोदी का पुतला जलाया और नारे लगाए। टोरंटो में खास्लितानियों ने भारतीय झंडे के साथ ही रूस के झंडे का भी अपमान किया। उन्होंने यहाँ ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ वाला राग दोहराया औरजस्टिन ट्रूडो की शान में कसीदे पढ़े।

खालिस्तानियों ने कनाडा में चल रहे सभी भारतीय दूतावास बंद करने की माँग की है। खालिस्तानियों के प्रदर्शन में झंडे लहराए गए। इस दौरान खालिस्तानी आतंकी निज्जर और भिंडरावाले के पोस्टर भी इन लोगों ने लहराए।

प्रदर्शन के अलावा आगामी दिनों में खालिस्तानी उस गुरूद्वारे में कार्यक्रम भी आयोजित कर रहे हैं जहाँ हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। यह कार्यक्रम खालिस्तानी आतंकियों की याद में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में निज्जर, एयर इंडिया के विमान में धमाका करने वाले तलविंदर परमार समेत बाकी आतंकियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

कनाडा में खालिस्तानी भारत के खिलाफ यह जहर ट्रूडो की शह पर उगल रहे हैं। ट्रूडो ने हाल ही में खालिस्तानियों के भारत तोड़ने के अभियान को बोलने की आजादी करार दिया था। इसके बाद इनकी हिम्मत और भी बढ़ गई है। ट्रूडो भी महज कुछ वोटों के लिए कनाडा को गर्त में धकेल रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में भारत और कनाडा के राजनयिक रिश्ते निचले स्तर पर पहुँच गए। भारत ने कनाडा के 6 राजनयिकों को निकाल दिया है जबकि अपने राजनयिक भी वापस बुलाए हैं। इस बीच जस्टिन ट्रूडो लगातार भारत पर हदीप सिंह निज्जर की हत्या करने का आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने खुद इस संबंध में भारत के खिलाफ सबूत ना होने की बात कबूली है।

इससे पहले भी खालिस्तानी कनाडा में भारत विरोधी एजेंडा चलाते रहे हैं। खालिस्तानियों ने यहाँ एक ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ भी करवाया था जो कथित तौर पर खालिस्तान के समर्थन में सिखों की राय जानने का एक माध्यम था। भारत ने इस संबंध में कनाडा से कार्रवाई की माँग की थी लेकिन कनाडा ने उलटे खालिस्तान को ही प्रश्रय दिया।

जयपुर के करणी विहार में शरद पूर्णिमा के धार्मिक कार्यक्रम के दौरान चाकू से हमला, 10 आरएसएस कार्यकर्ता घायल : नसीब चौधरी और बेटा गिरफ्तार, बाकियों की जारी तलाश

राजस्थान की राजधानी जयपुर के करणी विहार में शरद पूर्णिमा के अवसर पर हुए एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हिंसा की घटना सामने आई, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 10 कार्यकर्ता घायल हो गए। ये घटना गुरुवार (18 अक्टूबर, 2024) को करणी विहार के शिव मंदिर में हुई, जहाँ आरएसएस द्वारा शरद पूर्णिमा के मौके पर खीर वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। हमले में चाकुओं से लैस लोग मंदिर में घुस आए और श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। हमले के बाद नसीब चौधरी और उसके बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर में आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा था और प्रसाद के रूप में खीर बांटी जा रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले दो लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और शोर और भीड़ का हवाला देते हुए कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। इन लोगों ने आयोजकों से कार्यक्रम को रोकने की माँग की, जिसके बाद बहस शुरू हो गई। बहस के बाद रात करीब 10 बजे चाकुओं और अन्य हथियारों से लैस लोगों ग्रुप मंदिर में घुस आया और हमला कर दिया।

जयपुर के करणी विहार में हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के श्रद्धालुओं पर चाकुओं से हमला किया और प्रसाद की खीर को जमीन पर फेंक दिया। इस हिंसक हमले में श्रद्धालुओं के पेट और छाती जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर वार किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में शंकर बागड़ा, मुरारीलाल, राम पारीक, लखन सिंह जादौन, पुष्पेंद्र और दिनेश शर्मा शामिल हैं, जिन्हें इलाज के लिए जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद बड़ी संख्या में आरएसएस कार्यकर्ता करणी विहार थाने के बाहर जमा हो गए और आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की माँग की। इस घटना से लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने दिल्ली-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग को कुछ देर के लिए जाम भी कर दिया। हालाँकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जाम हटा लिया गया। पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए नसीब चौधरी और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या के प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया है।

इस घटना पर जयपुर पश्चिम के सहायक पुलिस आयुक्त आलोक गौतम ने कहा, “यह घटना गुरुवार रात जयपुर के करणी विहार में आरएसएस के कार्यक्रम के दौरान हुई। दो स्थानीय निवासियों ने शोर और भीड़ पर आपत्ति जताई, जिसके बाद उनका आरएसएस कार्यकर्ताओं से टकराव हो गया। हालात तब और बिगड़ गए जब इन लोगों ने अपने समूह के और लोगों को बुला लिया, जिसके बाद हमला हुआ।”

हालाँकि, इस हमले के पीछे का सही कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन कुछ लोगों के मुताबिक यह जमीन से जुड़ा विवाद हो सकता है। भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने आरोप लगाया कि नसीब चौधरी जमीन हड़पने की गतिविधियों में शामिल है और मंदिर के पास उसका घर अवैध रूप से बना हुआ है। वहीं, कॉन्ग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस मामले को सांप्रदायिक विवाद मानने से इनकार किया और इसे एक निजी जमीन विवाद बताया, जिसमें एक ही समुदाय के लोग शामिल हैं। फिलहाल, मामले की जाँच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

भारत का ‘भगोड़ा’ कनाडा में पुलिस अधिकारी, मोदी सरकार ने कहा- हमारे हवाले करो: शौर्य चक्र विजेता की हत्या में भी शामिल रहा है खालिस्तानी आतंकी

भारत और कनाडा के बीच चल रहा विवाद अभी शांत नहीं हुआ है। खबर है कि अब भारत ने कनाडा सीमा सेवा एजेंसी में काम कर रहे संदीप सिंह सिद्धू नाम के व्यक्ति को आतंकियों की सूची में शामिल किया है। भारत ने संदीप को भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी डिटेल कनाडा के साथ साझा की है।

भारत ने बताया है कि संदीप सिंह सिद्धू प्रतिबंधित इंटरनेश्नल सिख यूथ फेडरेशन का सदस्य है और उस पर पंजाब में आतंकिी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है। इसके अलावा संदीप के खालिस्तान आतंकवादी लखबीर सिंह रोडे और अन्य ISI गुर्गों के साथ भी संबंध हैं।

इसके अलावा उसका नाम शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या में भी है। संधू वही व्यक्ति हैं जिन्होंने खालिस्तान जनमत संग्रह का खुलकर विरोध किया था और जिनकी अक्टूबर 2020 में हत्या कर दी की गई थी।

भारत ने कनाडा को दी गई जानकारी में कहा है कि संदीप सिंह संधू फिलहाल सीबीएसए में कार्यरत है और हाल में उसे सुप्रीटेंडेंट पोस्ट पर प्रमोट किया गया है। इसके अलावा भारत ने संदीप के प्रत्यर्पण की माँग भी की है। साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले एक दशक या उससे अधिक समय में भारत ने कम से कम 26 प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया लेकिन कनाडा सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की।

गौरतलब है कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कना़डा द्वारा लगाए गए इल्जामों के कारण भारत के साथ उनकी खींचतान जारी है। कुछ दिन पहले पीएम ट्रूडो ने भारतीय राजनयिकों पर आरोप लगाया था कि वो लोग भारत को खालिस्तानियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। हालाँकि भारत ने इस आरोप को खारिज कर दिया था और बाद में सामने आया था कि कनाडा ने जो आरोप लगाए उसके उनके पास कोई पुख्ता सबूत भी नहीं है।

जो जगमीत सिंह खालिस्तानी आतंकियों का ‘दोस्त’, वह कनाडा का PM बनने पर बंदूक हिंसा रोकने का कर रहा वादा: कभी जस्टिन ट्रूडो की सरकार में होता था मंत्री

कनाडा में न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के नेता जगमीत सिंह ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को कहा कि वो उसकी पार्टी अगर सत्ता में आई और तो कनाडा में गन कल्चर पर रोक लगाई जाएगी। खास बात ये है कि ये बयान उस जगमीत सिंह का है, जो कनाडा में भारत के दुश्मनों यानी खालिस्तानी आतंकियों का समर्थन करता है।

जगमीत ने कहा कि अगर उसकी पार्टी सत्ता में आई, तो वो कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के उन 1000 से अधिक एजेंटों को फिर से बहाल करेगी, जिन्हें एक दशक पहले कंजरवेटिव सरकार ने हटा दिया था। खालिस्तान समर्थक नेता जो खुद आतंकवादियों का समर्थन करता है, उसने कहा है कि उसके इस कदम से कनाडा में अवैध हथियारों की तस्करी पर रोक लगेगी।

जगमीत सिंह ने कहा, “हमारे देश में हर किसी को सुरक्षित महसूस करना चाहिए। दुख की बात है कि अभी ऐसा महसूस नहीं होता। हम बंदूक हिंसा में गंभीर बढ़ोतरी देख रहे हैं। खासकर इस हफ्ते हमें RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) की चिंताजनक रिपोर्टें सुनने को मिलीं, जिनमें कहा गया कि एक विदेशी सरकार संगठित अपराधी गिरोहों को बंदूक हिंसा में शामिल होने के लिए भर्ती कर रही है। हम जानते हैं कि जिन गंभीर अपराधों में बंदूकें शामिल हैं, उनमें से जब भी पुलिस उन्हें जब्त करती है, तो पता चलता है कि 85% बंदूकें सीमा पार से तस्करी की गई हैं।”

जगमीत सिंह ने आगे दावा किया कि CBSA की टीम कम स्टाफ के साथ ज्यादा काम कर रही है, क्योंकि साल 2012 में कंजरवेटिव सरकार ने एक दिन में 1100 सीमा अधिकारियों को हटा दिया था।

जबकि जगमीत सिंह ने RCMP और ट्रूडो सरकार द्वारा बिना किसी ठोस आधार के लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए भारतीय सरकार पर निशाना साधा। वो ये भूल गया कि वह खुद खालिस्तानी आतंकवादियों, जिसमें मारे गए हरदीप सिंह निज्जर भी शामिल हैं, का समर्थन करता है। यह विडंबना ही है कि जगमीत सिंह कनाडा के लोगों को हिंसा से सुरक्षित रखने की बात करता है, जबकि उसने साल 2017 में एयर इंडिया बम धमाके के दोषी तलविंदर सिंह परमार की निंदा करने से इनकार कर दिया था और खुलेआम भारत विरोधी खालिस्तानी आतंकवादियों का समर्थन किया था, जो हथियारों के दम पर हिंसा फैलाते हैं।

हाल ही में जगमीत सिंह ने 15 अक्टूबर को एक बयान में भारतीय राजनयिकों पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी, जिसके बाद वहाँ मौजूद पत्रकारों ने जगमीत की इस मूर्खता पर हंसी उड़ाई थी। जगमीत ने कहा था, “हम भारत के राजनयिकों को निष्कासित करने के आज के फैसले का समर्थन करते हैं और कनाडा की सरकार से फिर से आग्रह कर रहे हैं कि वह भारतीय राजनयिकों पर प्रतिबंध लगाए, कनाडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाए, और कनाडा की धरती पर संगठित आपराधिक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताए।”

भारत से आरफा खानुम शेरवानी की घृणा फिर छलकी, चाहती हैं मुस्लिमों को ‘दिशा’ देने कोई सैयद अहमद खान आए: इसने ही दिया था पाकिस्तान का विचार

हिंदू और भारत विरोधी एजेंडा फैलाने के लिए कुख्यात द वायर की आरफा खानुम शेरवानी ने हाल ही में उस आदमी को याद किया जिसने भारत के टुकड़े करने का विचार सबसे पहले दिया था। आरफा ने 17 अक्टूबर, 2024 को सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए कहा कि आज के भारत में मुस्लिमों को उनकी जरूरत है। आरफा खानुम शेरवानी ने कहा कि सर सैयद अहमद खान अकेले ऐसे नेता थे जो तथाकथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत से निपटने के लिए मुस्लिमों को राह दिखा सकते थे।

आरफा ने खान की 207वें जन्मदिन के मौके पर एक्स (पहले ट्विट्टर) पर लिखा, “आज भारत और भारतीय मुसलमानों को सर सैयद अहमद खान की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। हम अपने इतिहास के उस मोड़ पर हैं जहाँ सरकार और समाज ने मुसलमानों को पूरी तरह से त्याग दिया है। दिशाहीन और निराश मुस्लिम एक नेता की तलाश में है।”

आरफा ही नहीं बल्कि कई अन्य वामपंथी, इस्लामी कट्टरपंथी और बाकियों ने खान की तारीफ में कसीदे पढ़े। यह वही सर सैयद अहमद खान थे जो इस्लाम के आधार पर भारत को दो हिसों में बाँटना चाहते थे। कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI के सोशल मीडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जीशान अहमद खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की स्थापना और मुस्लिमों में शिक्षा की विरासत छोड़ने के लिए उनकी तारीफ की।

जीशान अहमद खान ने लिखा, “शिक्षा सबसे बड़ी विरासत है जो माता-पिता अपने बच्चों के लिए छोड़ सकते हैं। AMU के संस्थापक डॉ. सर सैयद अहमद खान को उनकी 207वीं जयंती, सर सैयद दिवस पर श्रद्धांजलि। सर सैयद अहमद खान ने AMU के रूप में देश और दुनिया के लिए एक महान विरासत छोड़ी है!”

AMU के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने भी इस संबंध में एक ट्वीट किया और इसमें एक वीडियो डाला। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

सर सैयद अहमद खान पर इन महान बातों के बीच यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भले ही इस्लामी और वामपंथी स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर को ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ प्रचारित करने का आरोप लगाते हों, लेकिन असल में यह विचार सबसे पहले इस्लामी नेता सर सैयद अहमद खान ने सबसे पहले इस सिद्धांत को हवा दी थी।

सैयद अहमद खान ने 1876 में कहा था, “मुझे अब यकीन हो गया है कि हिंदू और मुसलमान कभी एक राष्ट्र नहीं बन सकते क्योंकि उनका मजहब और जीवन जीने का तरीका एक दूसरे से बिल्कुल अलग है।” सात साल बाद, वर्ष 1888 में, उन्होंने इसी तरह की बातें कही थीं।

सर सैयद अहमद ने लिखा, “दोस्तों, भारत में हिंदू और मुसलमान के नाम से दो प्रमुख देश रहते है। हिंदू या मुसलमान होना निजी आस्था का मामला है जिसका आपसी रिश्तों और बाहरी परिस्थितियों से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में भगवान का हिस्सा भगवान पर छोड़ दो और जो तुम्हारा है, उससे खुद को मतलब रखो। भारत हम दोनों का घर है…भारत में इतने लंबे समय तक रहने से दोनों का खून बदल गया है।”

सर सैयद अहमद खान कोई साधारण इस्लामी विद्वान नहीं थे, बल्कि एक कट्टरपंथी मौलवी थे, जो हिंदुओं के खून के प्यासे थे। 14 मार्च, 1888 को एक भाषण के दौरान उन्होंने कहा आपको याद रखना चाहिए कि भले ही मुसलमानों की संख्या हिंदुओं से कम है, और भले ही मुसलमानों में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग बहुत कम हैं, फिर भी मुसलमानों को महत्वहीन या कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए।”

आगे उन्होंने खूनखराबे की बात करते हुए कहा, “अपनी मौजूदगी को बनाए रखने के लिए मुसलमान अकेले ही काफी हैं। लेकिन मान लीजिए कि वो ना भी हों तब हमारे मुसलमान भाई, पठान, अपनी पहाड़ी घाटियों से टिड्डियों के झुंड जैसे निकलेंगे और उत्तर से लेकर बंगाल के अंतिम छोर तक खून की नदियाँ बहाएँगे।”

इसी भाषण में खान ने कहा, “अब मान लीजिए कि अंग्रेज लोग और सेना भारत छोड़कर चले जाएँ, और अपने साथ अपनी सारी तोपें, अपने हथियार और बाकी सब कुछ भी अपने साथ ले जाएँ तो भारत पर कौन राज करेगा। क्या दो देश – मुसलमान और हिंदू – इन परिस्थितियों में एक ही सिंहासन पर बैठ सकते हैं और एक बराबर से रह सकते हैं। इसका उत्तर है नहीं।”

आगे खान ने कहा, “मुसलमान और हिन्दुओं में से एक को दूसरे पर जीत हासिल करनी होगी। यह आशा करना कि दोनों एक बराबर में रह सकें असंभव और अकल्पनीय की इच्छा करना है। लेकिन जब तक एक दूसरे पर विजय प्राप्त नहीं कर लेता और उसे अपनी बात मानने को मजबूर नहीं करता तब तक शांति नहीं आती।”

सर सैयद अहमद खान का साफ़ तौर पर मानना था कि हिंदुओं और मुसलमानों का एक साथ रहना असंभव और अकल्पनीय विचार है, इसलिए उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि दो देश बनाना, जिसमें एक हिंदुओं तथा दूसरों मुसलमानों के लिए ही देश में शांति लेकर आ सकते हैं।

खान का मानना था कि मुसलमानों और हिंदुओं के धर्म, संस्कृति और जीवन शैली में बुनियादी अंतर हैं और यह अंतर इतने बड़े हैं कि उन्हें अलग-अलग समाज और राजनीतिक इलाका चाहिए। सर सैयद अहमद खान ने कहा था कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद, मुसलमानों को काफी कष्ट झेलना पड़ा था। खान ने मुस्लिमों को अंग्रेजों से संबंध सुधारने को कहा था। खान का मानना ​​था कि अंग्रेजों के साथ मिलने से मुसलमान ज्यादा समृद्ध हो सकेंगे। उनका कहना था कि कॉन्ग्रेस हिन्दुओं की पार्टी थी।

सर सैयद अहमद खान का कहना था कि आने वाले समय में कॉन्ग्रेस में मुसलमानों को दरकिनार कर दिया जाएगा और उन्हें कॉन्ग्रेस के अलावा अपना खुद एक मुस्लिम नेतृत्व तैयार करना होगा। इसी विचार के चलते आगे मुस्लिम लीग का जन्म हुआ जिसने देश का बँटवारा करवाया और जिन्ना जैसे नेता पैदा किए। मुसलमानों में अंग्रेजी शिक्षा की कमी को देखते हुए उन्होंने AMU की स्थापना की थी, इसे तब एंग्लो मोहम्मडन स्कूल कहा जाता था।

आरफा खानुम शेरवानी जब सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए यह कहती हैं कि आज मुसलमानों को सही तरीके से केवल वही ‘राह’ दिखा सकते हैं, उनका मतलब होता है कि हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच खाई को और गहरा करना चाहती हैं। उनके ‘राह दिखाने’ से आखिर क्या तात्पर्य है?

क्या वह चाहती हैं कि वर्ष 1888 में हिंदुओं के खून के प्यासे होने की बात कहने वाले सर सैयद अहमद खान वापस आएँ। क्या वह चाहती हैं कि खान मुस्लिमों को हिंदुओं पर जीत हासिल करने का आदेश दें जैसा उन्होंने 1888 में कहा था? या वह चाहती हैं कि मुस्लिम हिंदुओं से प्रतिस्पर्धा करें और हिंदू बहुल देश भारत में अपनी सत्ता चलाएँ?

वायर की ‘पत्रकार’ का सर सैयद अहमद खान का समर्थन करना दिखाता है कि वह इस बात में विश्वास करती हैं कि मुस्लिम और हिंदू एक देश में नहीं रह सकते। आरफा खानुम शेरवानी और उनके समर्थकों जैसे वामपंथी तथा इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमेशा ही जिहाद और इस्लामी आतंक को कम करके दिखाया है। यह लोग हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार को यह कह कर नहीं दिखाते हैं कि इससे अल्पसंख्यक खतरे में पड़ जाएँगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस्लामी कट्टरपंथी भारत को 2047 तक मुस्लिम राष्ट्र में तब्दील करना चाहते हैं।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में सिद्धी सोमानी ने लिखा है। इसे अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

मस्जिद से हुआ ऐलान- जो दिखे उसे काट दो… तलवार-डंडों के साथ सड़क पर उतर गई मुस्लिम भीड़: चश्मदीदों ने बताया बहराइच में हिंसा कैसे भड़की

बहराइच जिले के महराजगंज कस्बे में 13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए, जिनमें विनोद मिश्रा और उनके दिव्यांग भाई सत्यवान मिश्रा भी शामिल हैं। विनोद का हाथ टूट गया है और उनका सिर भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। वहीं, उनके भाई सत्यवान, जो 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं, भी इस हिंसा में बुरी तरह से घायल हो गए। इलाज के बाद अब दोनों अपने घर लौट आए हैं, लेकिन इस घटना ने उनके दिलों में गहरी चोट छोड़ी है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, कैसे हुई हिंसा की शुरुआत

विनोद और सत्यवान ने ‘आजतक’ से बातचीत में बताया कि उस दिन वे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में शामिल थे और डीजे के ठीक पीछे खड़े थे। अचानक अब्दुल हमीद के परिवार की ओर से डीजे पर बज रहे गाने पर आपत्ति जताई गई। जब डीजे नहीं रोका गया, तो डीजे ऑपरेटर को गालियाँ दी गईं और थप्पड़ मारा गया। इसके बाद डीजे की लीड खींच ली गई और दुर्गा प्रतिमा पर पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे मूर्तियाँ खंडित हो गईं। इस घटना के बाद तनाव बढ़ गया और हिंसा फैल गई।

विनोद मिश्रा बताते हैं कि उस वक्त उन्हें लग रहा था कि वे शायद इस हिंसा में बच नहीं पाएंगे। पत्थरबाजी में कई लोगों के सिर फट गए, तो कई के हाथ टूट गए। बवाल इतना बढ़ गया कि मस्जिदों से ऐलान किया जाने लगा कि “जो दिखे उसे काट दो।” इसके बाद भारी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथी तलवार और डंडे लेकर सड़कों पर निकल आए। शोभायात्रा में जा रही भीड़ भी उग्र हो गई और देखते ही देखते हिंसा ने विकराल रूप ले लिया।

विनोद का दावा है कि हिंसा के दौरान उनके घर पर भी हमला हुआ। अब्दुल हमीद के परिवार के लोग उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किसी तरह से उन्होंने अपनी जान बचाई। दूसरी ओर, रामगोपाल मिश्रा के परिवार पर भी हमला किया गया, जिनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रामगोपाल को बचाने के लिए लोग हमीद के घर में घुसे थे, लेकिन पत्थरबाजी के कारण उन्हें भी चोटें आईं। विनोद का कहना है कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका है।

हिंसा के बाद से ही महराजगंज कस्बे में तनाव का माहौल है। पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती कर दी गई है और हर आने-जाने वाले से सख्ती से पूछताछ की जा रही है। जिले में बाहरी लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इलाके में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है।

बहराइच हिंसा की जड़ें और पुलिस की कार्रवाई

13 अक्टूबर 2024 को बहराइच के महराजगंज कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद शुरू हुआ, जिससे हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद कस्बे में लगातार दो दिनों तक हिंसा होती रही, जिसमें उपद्रवियों ने कई दुकानों और घरों में आग लगा दी।

इस हत्याकांड के मुख्य आरोपितों में मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद तालिब शामिल थे, जिनकी पुलिस से मुठभेड़ बहराइच के नानपारा बायपास पर हुई। पुलिस ने उन्हें घेरकर जवाबी फायरिंग की, जिसमें दोनों आरोपी घायल हो गए। ये आरोपित नेपाल भागने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस ने इन्हें धर दबोचा।

इसके अलावा पुलिस ने पाँच और लोगों में से तीन अन्य मोहम्मद फहीन, मोहम्मद हमीद और मोहम्मद अफजल को भी गिरफ्तार किया। सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘कटे हुए पेड़ से ज्यादा सस्ता है कटा हुआ सिर’: 3 बेटियों के साथ बलिदान हुईं अमृता देवी, कुल 363 लोग कुल्हाड़ी से काटे गए, उसी समाज के लोगों का हुआ नरसंहार जिससे आता है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई

कटे हुए पेड़ से ज्यादा सस्ता है कटा हुआ सिर

यह आखिरी शब्द थे, उस महिला के लिए जो पेड़ ब​चाने के लिए बलिदान हो गईं। उनका नाम था- अमृता देवी बिश्नोई (Amrita Devi Bishnoi)। उनकी तीन बेटियाँ भी बलिदान हो गईं। कुल मिलाकर 363 लोगों का बलिदान हुआ। सबको कुल्हाड़ी से काटा (khejarli Massacre) गया था। ये सारे बलिदानी उसी बिश्नोई समाज से थे, जिस समाज का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) आजकल सुर्खियों में है।

अमृता देवी का बलिदान

बात 11 सितंबर 1730 की है। राजस्थान के शुष्क रेगिस्तान में प्रचुर मात्रा में खेजड़ी पेड़ों से भरा बिश्नोई समाज का एक खेजरली गाँव है। इस गाँव के लोग शुरुआत से ही वनस्पतियों को पूजनीय मानकर हमेशा उनकी पूजा करते हैं, जान देकर वृक्षों की रक्षा करते हैं। अमृता देवी बिश्नोई और बाकी 363 लोगों ने भी यही किया था। आज पूरा बिश्नोई समाज अपने पुरखों के बलिदान की कहानी बच्चे-बच्चे को सुनाता है। वहीं दुनिया उस घटना को ‘खेजरली नरसंहार’ के तौर पर जानती है।

इस नरसंहार के पीछे का कारण जोधपुर के तत्कालीन महाराजा अभय सिंह का एक आदेश बताया जाता है। 1730 में महाराजा की ओर से आदेश आया कि नए महल के निर्माण के लिए खेजरली गाँव में लगे खेजड़ी के पेड़ों को काटा जाए…आदेश सुन राजा के दूत बड़ी-बड़ी कुल्हाड़ी लेकर गाँव की ओर बढ़ने लगे। जब अमृता देवी को इसका पता चला तो वो अपनी तीन बेटियों के साथ राजा के लोगों के सामने आ खड़ी हुईं।

हाथ में कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने आए पुरुष हैरान थे कि वृक्ष के बदले वो महिला अपनी बेटियों समेत अपनी जान देने को तैयार थी। उनकी बहादुरी को देख समाज के सैंकड़ों लोग उनके पीछे थे। अमृता देवी को समझाया गया लेकिन पर्यावरण के लिए उनका अटूट प्रेम, जान से बढ़कर था। उन्होंने वही बात कही जो आपने ऊपर पढ़ीकटे हुए पेड़ से ज्यादा सस्ता है कटा हुआ सिर। वो पेड़ से लिपटी रहीं और आखिर में सैनिकों ने उनका सिर काटकर उनका शरीर चीर दिया। बेटियाँ स्तब्ध थीं। मगर उन्होंने भी वही किया जो माँ को करते देखा था।

अमृता देवी बिश्नोई और उनकी बेटियों के इस बलिदान की सूचना जब समाज के अन्य लोगों को मिली तो विरोध बढ़ गया। 83 गाँवों के बिश्नोई समाज के लोग वृक्षों को बचाने खेजरली पहुँचे और किसी ने जान की परवाह नहीं की। उन्होंने अहिंसक रास्ते पर चलते हुए अपनी वनस्पति बचाने की कोशिश की जिसके बाद कहा जाता है कि 49 गाँव के 363 लोग बलिदान हुए।

राजा ने बिश्नोई समाज से माँगी माफी, निकाला आदेश

इस बीच लड़की लाने का आदेश देने वाले राजा अभय सिंह को जब गाँव में चल रहे संघर्ष के बारे में पता चला, तब फौरन उन्होंने पेड़ काटने के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही बिश्नोई समाज के लोगों से न केवल माफी माँगी बल्कि एक आदेश जारी किया जिसके बाद इस समाज के लोगों के ग्रामों के आसपास पेड़ काटने और जानवर मारने पर रोक लगा दी गई।

साल बीते, दशक बीते, सदियाँ बीती। मगर सन् 1730 की यह घटना राजस्थान के लोग कभी नहीं भूले। नतीजतन खेजड़ी के पेड़ को प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना गया और 2013 में, पर्यावरण और वन विभाग ने 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के रूप में घोषित किया।

राजस्थान से बाहर अन्य़ समाज के लोग भी जानते हैं कि बिश्नोई समाज के लिए हर पौधा और जानवर मनुष्य जीवित प्राणी की तरह है। वह उन्हें संरक्षित करने के लिए किसी भी हद्द तक जाते हैं। बिश्नोइयों के उस प्रदर्शन का ही नतीजा था कि लोग प्रकृति को संरक्षित करने के लिए सचे हुए और हमने इतिहास में आगे चलकर टिहरी गढ़वाल में चिपको आंदोलन (1973), बिहार-झारखंड में जंगल बचाओ आंदोलन (1982), कर्नाटक के पश्चिमी घाट में अप्पिको चालुवली (1983) जैसे विरोध प्रदर्शन हुए। जिनका असर विदेशों तक देखने को मिला।

बिश्नोई समाज का परिचय

बता दें कि बिश्नोई समाज पश्चिमी थार रेगिस्तान और भारत के उत्तरी राज्यों में पाया जाने वाला समुदाय है। इसके संस्थापक जांभोजी महाराज है। बिश्नोई समाज उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मान उनकी पूजा करता है। उन्हीं के संदेशों को पालन कर ये समाज जीवनयापन करता है और यही वजह भी है कि ये काले हिरण को इतना मानते हैं। कहा जाता है कि गुरु जंभेश्वर ने अपने अनुयायियों से कहा था कि वह काले हिरण को उन्हीं का स्वरूप मान कर पूजा करें। यही वजह है कि बिश्नोई हिरणों की खास रूप से पूजा करते हैं। बिश्नोई समाज का मुख्य मंदिर ‘मुक्तिधाम मुकाम’ भी राजस्थान के बीकानेर में है।

नोट: इस रिपोर्ट में जिस खेजरी पेड़ के बारे में बात हुई है उसके बारे में बता दें कि इसे शमी के पेड़ के नाम से भी जाना जाता है। ये सामान्यत: रेगिस्तान में मिलता है लेकिन इसकी खास बात है कि रेगिस्तान के शुष्क माहौल में भी ये पेड़ हरा-भरा रहता है। मरुस्थल में ये न लोगों को केवल ठंडी छाँव देकर गर्मी से बचाता है बल्कि इसके पात पशुओं का आहार बनते हैं।