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मस्जिद में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने से आहत नहीं होती मजहबी भावनाएँ: हाई कोर्ट ने हिंदुओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द की, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने किया विरोध

कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मस्जिद के अंदर ‘जय श्रीराम’ कहने से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं की ठेस नहीं पहुँचती। इसके बाद हाई कोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने पिछले महीने धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने के दो आरोपितों- कीर्तन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

दरअसल, दक्षिण कन्नड़ जिले की पुलिस ने कीर्तन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A, 447 और 506 सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया था कि पिछले साल सितंबर (सितंबर 2023) में एक रात दोनों स्थानीय मस्जिद में घुसे और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए।

अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा, “धारा 295A किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने से संबंधित है। यह समझ से परे है कि अगर कोई ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता है तो इससे किसी वर्ग की धार्मिक भावना कैसे आहत होगी।”

हाई कोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ता खुद कहता है कि इलाके में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द्र के साथ रह रहे हैं तो इस घटना का किसी भी तरह से कोई मतलब नहीं निकाला जा सकता है। दोनों याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि मस्जिद एक सार्वजनिक स्थान है। इसलिए इसमें आपराधिक अतिक्रमण का कोई मामला नहीं बनता। ‘जय श्रीराम’ का नारा IPC की धारा 295A के तहत परिभाषित अपराध भी नहीं है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर पेश से वकील सौम्या आर ने इस याचिका का विरोध किया और कहा कि मामले में आगे की जाँच की आवश्यकता है। हालाँकि, अदालत ने माना कि वर्तमान मामले में कथित अपराध का सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इस हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का मानना ​​है कि हर कार्य IPC की धारा 295A के तहत अपराध नहीं बनता है।

महेंद्र सिंह धोनी बनाम येरागुंटला श्यामसुंदर (2017) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा, “जिन कार्यों का शांति या सार्वजनिक व्यवस्था को नष्ट करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, उन्हें आईपीसी की धारा 295A के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। इन कथित अपराधों में से किसी भी अपराध के कोई तत्व नहीं पाए जाने पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और न्याय की विफलता होगी।”

बच्चे के सामने सेक्स करना POCSO का अपराध, नंगा होना माना जाएगा यौन उत्पीड़न के बराबर: केरल हाई कोर्ट का फैसला, जानिए क्या है मामला

केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी नाबालिग के सामने नग्न होकर सेक्स करना POCSO के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने कहा है कि इस अपराध में सजा भी दी जा सकती है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई करते हुए की है जहाँ नाबालिग ने अपनी माँ और एक अन्य व्यक्ति को सेक्स करते हुए देख लिया था।

इस मामले की सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट के जस्टिस ए बदरुद्दीन ने POCSO एक्ट की धारा 11(i) और 12 का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “स्पष्ट रूप से कहें तो, जब कोई व्यक्ति बच्चे को नग्न शरीर दिखाता है, तो यह बच्चे का यौन उत्पीड़न करने के इरादे से किया गया काम है और इसलिए यह POCSO की धारा 11(i) के साथ 12 के तहत दंडनीय अपराध होगा।”

कोर्ट ने आगे कहा, “इस मामले में आरोप है कि आरोपितों ने कमरे को बंद किए बिना ही नग्न होकर संबंध बनाए और नाबालिग को कमरे में घुसने दिया ताकि वह यह सब देख पाए। ऐसे में प्रथम दृष्टया, इस मामले में POCSO अधिनियम की धारा 11(i) के साथ धारा 12 के तहत दंडनीय अपराध करने का आरोप बनता है।”

केरल हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आरोपित पुरुष को नाबालिग के साथ मारपीट का आरोपित माना लेकिन उसे किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं में छूट दे दी। नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार वाले इस मामले में नाबालिग की माँ को हाई कोर्ट ने आरोपित माना है। नाबालिग की माँ के विरुद्ध POCSO के अलावा इस धारा में भी मामला चलाया जाएगा।

क्या था मामला?

मामले में महिला और उसके साथी पुरुष पर आरोप है कि उन्होंने 8 अगस्त, 2021 को तिरुवनंतपुरम के एक लॉज में नग्न हो कर किया और इस दौरान दरवाजा खुला रहने दिया जिसे महिला के 16 वर्षीय बेटे ने देख लिया। महिला ने अपने बेटे को इससे पहले कुछ सामान लेने भेज दिया था।

जब वह वापस आया तो उसने माँ को व्यक्ति के साथ नग्न आपत्तिजनक हालत में देखा। उसने जब इस संबंध में प्रश्न खड़े किए तो महिला के पुरुष साथी ने नाबालिग को धमकाया और उसको पीटा भी। महिला के साथी ने उसके बेटे को थप्पड़ मारा, गर्दन से पकड़ा और लात भी मारी। इससे नाबालिग की माँ ने भी नहीं रोका।

इस घटना के चलते महिला और उसके पुरुष मित्र पर POCSO, किशोर न्याय अधिनियम समेत IPC की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। यह मामला तिरुवनंतपुरम के ईस्ट फोर्ट थाने में दर्ज हुआ था। कार्रवाई से बचने के लिए पुरुष आरोपित ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी।

आरोपित पुरुष ने माँग की थी कि हाई कोर्ट इस मामले में सारी कार्रवाई को रद्द कर दे। हालाँकि, कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपित पुरुष को पूरी राहत देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने आरोपित पुरुष के खिलाफ IPC 294(बB), 341 के और 34 के साथ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत कार्रवाई को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने आरोपित पुरुष के खिलाफ IPC 323 के साथ 34 और POCSO के तहत मामला चलाने का आदेश दिया है।

दलित युवती को फँसाने के लिए आसिफ बन गया आशीष, वीडियो वायरल करने की धमकी दे इस्लामी धर्मांतरण का डाला दबाव: मोहसिन भी देता था साथ

सहारनपुर जिले के नकुड़ क्षेत्र में लव जिहाद का एक संगीन मामला सामने आया है, जिसमें एक दलित युवती ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद आसिफ नामक युवक ने अपना नाम छिपाकर पहले उसे प्रेमजाल में फंसाया और फिर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। इस मामले में पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, आसिफ ने खुद को “आशीष” बताकर युवती से संबंध बनाए और फिर आपत्तिजनक वीडियो व फोटो के आधार पर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

युवती की शिकायत के अनुसार, आसिफ सहारनपुर जिले के नकुड़ कस्बे में आने वाले मोहल्ला जोगियान का रहने वाला है। उसने आठ महीने पहले युवती से संपर्क साधा और उसे धोखे से अपने प्रेमजाल में फंसा लिया। युवती को बताया कि उसका नाम आशीष है, जबकि उसका असली नाम आसिफ था। इस दौरान आसिफ ने युवती के साथ कई आपत्तिजनक वीडियो और फोटो खींच ली। जब युवती को उसके असली नाम का पता चला, तो उसने तुरंत उससे संबंध खत्म कर लिया।

इससे नाराज आसिफ ने अपने साथी मोहसिन के साथ मिलकर युवती पर धर्मांतरण का दबाव बनाना शुरू कर दिया। युवती का आरोप है कि आसिफ और मोहसिन ने उसे जान से मारने और उसकी वीडियो वायरल करने की धमकी दी। युवती ने यह भी बताया कि दोनों आरोपितों ने उसके साथ मारपीट की और उसे मलिक कंप्यूटर सेंटर में जबरन घसीट कर ले गए। युवती ने अपनी तहरीर में बताया कि जब वह किसी काम से कंप्यूटर सेंटर के पास से गुजर रही थी, तो मोहसिन और आसिफ ने उसे वहाँ बुलाकर मारपीट की और धमकाया कि अगर उसने इस्लाम नहीं अपनाया तो वे उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया है कि दोनों आरोपितों ने उसे जातिसूचक गालियाँ भी दी और कहा कि “हराम*** चमा***, तुझे नहीं छोड़ेंगे।” यही नहीं, कई बार उसने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसे अपमानित किया। पीड़ित द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

युवती ने यह भी आरोप लगाया कि मोहसिन, जो मलिक कंप्यूटर सेंटर चलाता है, आसिफ के साथ मिलकर कई अन्य लड़कियों को भी इसी तरह से फंसाता है। युवती का कहना है कि कंप्यूटर सेंटर पर आने वाली अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया जाता है और उनके नंबर मुस्लिम लड़कों को दिए जाते हैं, जो उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाते हैं।

पुलिस ने युवती की शिकायत दर्ज कर ली है और आसिफ व मोहसिन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। इस केस की जाँच की जिम्मेदारी नकुड़ कोतवाली के सीओ द्वारा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की बात कही है।

कार में बैठ गरबा सुन रहे थे RSS कार्यकर्ता, इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर कर किया हमला: पीड़ित ने ऑपइंडिया को सुनाई आपबीती

गुजरात के द्वारका जिले में आरएसएस स्वयंसेवक पर हमला हुआ, जिसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह अपनी कार में गरबा सुन रहा था। यह घटना जामखंभालिया के मदीना मस्जिद चौक की है, जहाँ पीड़ित को लाला शेख और रुस्तम समेत इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर लिया। पीड़ित ने ऑपइंडिया को अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे उसे धमकाया गया और कार से बाहर निकालकर मारपीट की गई। पुलिस ने इस घटना पर कार्रवाई करते हुए 2 लोगों समेत 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

ये मामला सोमवार (14 अक्टूबर 2024), सोमवार का है। जब जामखंभालिया के मदीना मस्जिद चौक के पास से पीड़ित युवक अपने एक मित्र को उसके घर छोड़ने के लिए जा रहा था। मदीना मस्जिद चौक पर मुस्लिम समुदाय का मजलिस कार्यक्रम चल रहा था। जैसे ही पीड़ित वहाँ पहुँचा, 25-30 लोगों की भीड़ ने उसे घेर लिया। उन्होंने पीड़ित को उसकी कार से बाहर निकाला, उसके कॉलर को पकड़ा और उसे धमकियाँ दीं। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने लाला शेख और रुस्तम समेत इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित ने बताया कि घटना उस रात हुई जब वह अपने दोस्त को घर छोड़ने जा रहा था। कार में गरबा बज रहा था, और जैसे ही वह मदीना मस्जिद चौक पहुँचा, उसने देखा कि वहाँ मजलिस का कार्यक्रम चल रहा था। इस दौरान उसे भीड़ ने घेर लिया। उसने बताया कि कुछ लोगों ने उसे इशारा किया कि वह वहाँ से निकल सकता है, लेकिन जब वह वापस लौटा, तो भीड़ ने उसकी कार को घेर लिया और उसे बाहर बुलाया।

पीड़ित ने कहा कि भीड़ ने उसकी कार को रोककर उसे बाहर निकाला। लाला शेख और रुस्तम समेत 25-30 लोग उसे गालियाँ देने लगे और धमकियाँ दीं कि अगर वह फिर कभी वहाँ से गुजरेगा, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। वह किसी तरह भीड़ से निकलकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुँचा और शिकायत दर्ज कराई।

इस पूरी घटना के बाद जामखंभालिया की पुलिस भी तुरंत हरकत में आई। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे और पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। पुलिस ने लाला शेख और रुस्तम समेत 30 लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 352, 351 (3), 198 (2), 190, और 191 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास इस एफआईआर की एक प्रति उपलब्ध है।

घटना के बाद की कार्रवाई पर जानकारी देने के लिए ऑपइंडिया ने जामखंभालिया पुलिस स्टेशन के पीआई भूपेंद्रसिंह सरवैया से संपर्क किया। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “यह घटना कल (सोमवार – 14 अक्टूबर 2024) के रात की है। जैसे ही शिकायतकर्ता हमारे पास पहुँचा, हमने तुरंत उसकी शिकायत दर्ज की और कार्रवाई शुरू कर दी। हमने इस मामले में दंगे का अपराध दर्ज किया है। वहाँ मुस्लिम समुदाय का मजलिस कार्यक्रम चल रहा था, इसलिए पुलिस पहले से तैनात थी। अब जो नामजद आरोपित हैं, उन्हें पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी।”

पीआई सरवैया ने आगे बताया, “जो भी सबूत जुटाए जाने थे, उन्हें इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता को सिर्फ दो व्यक्तियों के नाम ज्ञात थे, अन्य लोगों की पहचान अभी बाकी है। इसके लिए हम आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच करेंगे और उनमें से अन्य लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे। जो नामजद आरोपित हैं, उनकी जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता को किसी प्रकार का डर न हो, इसीलिए उनके घर के पास सुरक्षा तैनात कर दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई जारी है।”

गौरतलब है कि इस घटना को लेकर जामखंभालिया क्षेत्र में फिलहाल शांति बनी हुई है, लेकिन तनाव बना हुआ है। पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए काम कर रही है और पूरे क्षेत्र पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कनाडा में जब पिता बने आतंक की ढाल तो विमान में हुआ ब्लास्ट, 329 लोगों की हुई मौत… अब बेटा उसी बारूद से खेल रहा

भारत और कनाडा की बीच राजनीतिक तनातनी चरम सीमा पर पहुँच गई है। कनाडा के लगातार आतंकियों का समर्थन करने के चलते भारत ने अपने हाई कमिश्नर को कनाडा से वापस बुला लिया है और कनाडा के 6 राजनयिकों को देश से निकलने को कहा है। इस तनातनी का कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का खालिस्तानी आतंकियों से प्रेम है।

जस्टिन ट्रूडो स्थानीय राजनीति चमकाने के लिए लगातार भारत विरोधी रवैया अपना रहे हैं। चाहे खालिस्तानियों को अपनी सरकार में जगह देना हो या फिर उन्हें अपने देश में शरण देना, वह लगातार भारत विरोधियों की सहायता कर रहे हैं। कनाडा में भारत विरोधी जलसे और रैलियाँ हो रही हैं।

जस्टिन ट्रूडो और उनकी पुलिस इस बीच हास्यास्पद दावे भी कर रही है। कनाडा की पुलिस ने इस बीच यह स्वीकार कर लिया है कि उनके यहाँ खालिस्तान समर्थक खुला घूम रहे हैं। उन्होंने यह बात स्वीकारी है कि कनाडा भारत विरोधी गतिविधियाँ करने वालों के लिए काफी सुरक्षित जगह है।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में अभी तक कोई सबूत ना पेश कर पाने वाला कनाडा अब गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई को भी इस मामले में संलिप्त बता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चेहरा बचाने और घरेलू राजनीति में वोट बढ़ाने के लिए ट्रूडो एकदम मूर्खता पर उतर आए हैं।

39 सालों में भी कनिष्क विमान बम धमाके की जाँच को अंजाम तक ना पहुँचा पाने वाली कनाडा सरकार भारत को घेरने का विफल प्रयास कर रही है। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब कनाडा ने भारत विरोधी रवैया अपनाया हो। इससे पहले जस्टिन ट्रूडो के पिता और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो ने भी ऐसा ही कारनामा किया था।

जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो ने भी खालिस्तानी आतंकियों का पक्ष लिया था। इसकी कनाडा को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। जस्टिन के पिता पियरे वर्ष 1968 से लेकर 1979 और 1980 से 1984 के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री रहे थे। इस दौरान भारत में खालिस्तान का आतंक चरम पर था और खालिस्तानी आतंकी भारत से भागकर कनाडा में शरण ले लेते थे।

भारत ने बढ़ते हुए आतंकवाद को रोकने के लिए कनाडा से इन तत्वों पर कार्रवाई की माँग की थी। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान भारत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान ना ही कनाडा में संचालित भारत विरोधी गतिविधियों को रोका और ना ही उन आतंकियों को भारत वापस भेजा जो कि लगातार कनाडा में बैठकर भारत को तोड़ने की साजिश कर रहे थे।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था।

तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी।

तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे।

उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

इसके लिए उसने वैंकुवर से उड़े एक विमान में रखे एक बैग में बम रखा था जो कि आगे जाकर टोक्यो में एयर इंडिया के विमान में हस्तांतरित किया जाना था। टोक्यो के एयरपोर्ट में यह बैग इस विमान से निकाले जाने और एयर इंडिया के विमान में रखे जाने से पहले ही स्टोरेज क्षेत्र में फट गया जिसमें 2 जापानी एयरपोर्ट कर्मियों की मृत्यु हो गई थी।

इस हादसे की जाँच भी आगे कहीं नहीं पहुँच सकी क्योंकि कनाडा की सरकार ने इसमें काफी ढील बरती और मात्र इंदरजीत सिंह रैयत ही मात्र आरोपी ठहराया जा सका। इंदरजीत को भी जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने 2017 में छोड़ दिया था और सामान्य जीवन बिताने को कह दिया था।

यह भी दावा किया जाता है कि कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस बात की जानकारी थी कि तलविंदर सिंह ऐसा कोई बड़ा काण्ड करने वाला है लेकिन तब भी उन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया और इसके कारण इतना बड़ा हमला हुआ।

तलविंदर सिंह परमार को कॉमनवेल्थ नियमों का हवाला देकर भारत को नहीं सौंपा गया था। नियमों के अनुसार, 2 कॉमनवेल्थ देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए अलग से संधि नहीं करनीं पड़ती है।

इसी आधार पर इंदिरा गाँधी की सरकार ने परमार को भारत वापस भेजने को कहा था लेकिन पियरे ट्रूडो की सरकार ने यह कारण दिया कि भारत कॉमनवेल्थ का सदस्य तो है लेकिन वह ब्रिटेन की रानी को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानता, इसलिए परमिंदर को भारत नहीं भेजा जा सकता।

परमिंदर को भारत ना भेजने और खालिस्तानियों पर ढील बरतने के कारण कनाडा में उस समय खालिस्तानी आतंकवादियों के हौसले खूब बढ़ गए थे, उन्होंने ऐसे सिखों को निशाना बनाना चालू कर दिया था जो कि अलग देश की माँग का विरोध करते थे।

इसी कड़ी में वर्ष 1998 में इंडो-कैनेडियन अखबार के सम्पादक तारा सिंह हायेर को मार दिया गया था। तारा सिंह को 18 नवम्बर, 1998 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। वह सिख आतंकवाद के विरोधी थे और इस बारे में लिखते रहते थे। उन्होंने 1988 में एयर इंडिया विस्फोट के बारे में लिखते हुए बताया था कि इसमें तलविंदर का हाथ हो सकता है।

तलविंदर सिंह परमार बाद में भारत में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। वह एयर इंडिया के इस विमान में बम धमाका करने के बाद भारत लौट आया था और यहाँ पर अपनी आतंकी गतिविधियों में लिप्त था। उसे वर्ष 1992 में पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।

जस्टिन ट्रूडो लगातार ऐसे तत्वों के साथ नजर आते रहे हैं जो कि भारत को तोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जस्टिन, जसपाल अटवाल के साथ नजर आते रहे हैं जो कि एक खालिस्तानी आतंकवादी है। कनाडा में गुरवन्तपंत सिंह पन्नू पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह दिन भर भारत के विरुद्ध जहर उगलता है।

कनाडा सरकार के इस रवैये से भारत में सुरक्षा खतरों के साथ ही कनाडा में रहने वाले हिन्दुओं तथा खालिस्तान का विरोध करने वाले सिखों का जीवन खतरे में पड़ गया है। जस्टिन ने अपने पिता की गलितयों से नहीं सीख कर स्थितियों को और जटिल बना दिया है। भारत का सहयोग ना करने के बजाय अपनी राजनीति चमकाने का निर्णय जस्टिन ट्रूडो को भारी पड़ने वाला है।

मंदिर में घुसकर देवी प्रतिमा को लात मारने वाला निकला सलीम, होटल से हैदराबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

हैदराबाद पुलिस ने मंगलवार (15 अक्टूबर 2024) को मुत्यालम्मा मंदिर में हुई तोड़फोड़ के मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया, जिसे सीसीटीवी फुटेज में एक इस्लामिक टोपी पहने देखा गया था, और उसकी पहचान सलीम सलमान ठाकुर के रूप में की गई।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलीम मस्जिद जाते समय मंदिर को निशाना बनाया था। पुलिस ने आरोपित से पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि वह सिकंदराबाद के ‘सिने पुलिस होटल’ में ठहरा हुआ था।

सलीम ने कबूल किया कि उसने होटल से मस्जिद जाते वक्त मंदिर पर हमला किया। आरोपित की जानकारी के आधार पर पुलिस ने 50 कमरों वाले होटल पर छापा मारा, जहाँ पता चला कि यह होटल ज्यादातर चोरों द्वारा किराए पर लिया जाता था।

पुलिस ने आगे बताया कि सलीम के साथ और भी असामाजिक तत्व मंदिर पर हमला कर रहे थे, लेकिन बाकी सभी भाग गए। बता दें कि सोमवार (14 सितंबर 2024) को तेलंगाना के कुर्मागुड़ा क्षेत्र में मुत्यालम्मा मंदिर की मूर्ति तोड़े जाने के बाद सिकंदराबाद में तनाव पैदा हो गया, जिससे स्थानीय हिंदू निवासियों में गुस्सा और विरोध भड़क गया।

यह घटना पास के पासपोर्ट कार्यालय के पास हुई बताई जा रही है, और एक इस्लामिक कट्टरपंथी को स्थानीय लोगों ने तुरंत पकड़ लिया। बाद में उसे मार्केट पुलिस स्टेशन की हद में पुलिस को सौंप दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। घटना के बाद अधिकारियों ने सुरक्षा कड़ी कर दी और शांति बहाल करने के प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच, स्थानीय लोगों ने मंदिर के पास प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शन में बीजेपी नेता भी शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान हैदराबाद लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार माधवी लता समेत कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी कर लिया गया। वहीं, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी भी मंदिर पहुँचे थे और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को ‘शर्मनाक‘ करार दिया और कुछ लोगों पर जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया।

इस बीच, घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें एक युवक सफेद कुर्ता और काली इस्लामिक टोपी पहने देवी की मूर्ति पर लात मारते हुए दिख रहा है। उसने मूर्ति को बेरहमी से तोड़ा और उसके टुकड़े ज़मीन पर फेंक दिए।

इस घटना का वीडियो पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। वीडियो में देवी की मूर्ति को तोड़ा हुआ देखा जा सकता है, जिससे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसके साथ ही मंदिर का बाहरी हिस्सा भी क्षतिग्रस्त और तोड़ा हुआ देखा जा सकता है।

हैदराबाद में हुई इस घटना ने हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है, जिन्होंने आरोपित के खिलाफ कड़ी सजा की माँग की है। फिलहाल इस मामले में पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

हमरे लड़िका को तड़पाय-तड़पाय के… बहराइच में हुई जिस राम गोपाल मिश्रा की हत्या उनके परिवार के साथ CM योगी ने बाँटा दर्द, न्याय का दिलाया भरोसा

राम गोपाल मिश्रा के परिजनों ने 15 अक्टूबर 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात। सीएम ने बहराइच की घटना को ‘अक्षम्य’ बताते हुए पीड़ित परिवार को ‘न्याय’ का भरोसा दिलाया। मिश्रा की 13 अक्टूबर को बहराइच में दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हमला करने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी।

य​ह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राम गोपाल के परिजन-रिश्तेदार हत्यारों को फाँसी देने और उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे हैं। राम गोपाल के पिता ने कहा है कि हत्यारों ने उनके परिवार को बर्बाद कर दिया है। इन लोगों ने पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है।

पीड़ित परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीर ट्विटर/एक्स पर पोस्ट करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा है, “दुख की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। आश्वस्त रहें, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना UP सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। इस घोर निंदनीय और अक्षम्य घटना के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

रामगोपाल की पत्नी, माता और पिता ने दोपहर लगभग 1 बजे CM योगी से मुलाकत की। इस दौरान भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह भी पीड़ित परिजनों के साथ थे। मुख्यमंत्री से मिल कर राम गोपाल के परिजन रोने लगे। योगी आदित्यनाथ ने उनको ढाढ़स बँधाया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने से पहले रामगोपाल मिश्रा के पिता कैलाशनाथ ने न्यूज एजेंसी ANI से बात की। उन्होंने कहा, “हमरे लड़िका को मारा गया तड़पाय-तड़पाय के। गोली से मारा गवा। तउ कय सजा दीन जाए उनका। हमार परिवार नष्ट कय दीन गय। (मेरे बेटे को तड़पा-तड़पा कर मारा गया है। गोली भी मार दी गई। अब उन सभी को सजा मिले। उन्होंने मेरे परिवार को तबाह कर दिया।)”

इसी घटना पर राम गोपाल मिश्रा के रिश्तेदार प्रमोद का भी बयान आया है। प्रमोद ने आरोप लगाया है कि राम गोपाल की हत्या के पीछे पुलिस की लापरवाही एक बड़ी वजह है। उन्होंने कहा, “गोपाल जब झंडा लहराते हुए आगे बढ़ा तो अब्दुल हमीद के लड़के उसे खींच ले गए।” प्रमोद का यह भी दावा है कि राम गोपाल को बचाने के लिए जब कुछ ग्रामीण आगे बढ़े तो उनके ऊपर भी गोलियाँ बरसाई गई।

प्रमोद ने बताया कि रामगोपाल के परिजनों की सबसे अहम माँग कातिलों को सजा और उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जाए है। इसी के साथ दिवंगत गोपाल की पत्नी को उचित मुआवजा मिलने की भी उम्मीद जताई गई है। पीड़ित परिजनों को इस बात का भरोसा है कि योगी सरकार में उनके साथ न्याय होगा।

शादी का झाँसा दे नाबालिग से किया रेप, हाई कोर्ट ने दी जमानत: कहा- 3 महीने में पीड़िता से विवाह करो, बच्चे के नाम पर ₹2 लाख का FD करो

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेप के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपित को जमानत दे दी है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं। जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने सहारनपुर निवासी आरोपित अभिषेक की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उसे पीड़िता से शादी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि आरोपित नवजात शिशु के नाम पर 2 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जमा करेगा, जो कि बच्चे के वयस्क होने तक उसके नाम पर सुरक्षित रहेगी।

ये मामला सहारनपुर जिले के थाना चिलकाना का है, जहाँ अभिषेक के खिलाफ पॉक्सो और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपित ने उसकी 15 वर्षीय बेटी से शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। बाद में आरोपित ने शादी से इंकार कर दिया। शिकायतकर्ता ने अपनी बेटी की उम्र 15 वर्ष बताई, जबकि आरोपित के वकील ने कोर्ट में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की उम्र 18 वर्ष है। इसी आधार पर आरोपित ने अपनी जमानत की अर्जी दाखिल की थी।

हाई कोर्ट ने आरोपित को जमानत देते हुए यह शर्त लगाई कि उसे जेल से रिहा होने के तीन महीने के भीतर पीड़िता से विवाह करना होगा। इसके अलावा नवजात शिशु के भविष्य की सुरक्षा के लिए आरोपित को जेल से रिहाई की तिथि से छह महीने के अंदर बच्चे के नाम पर 2 लाख रुपए की एफडी करानी होगी। यह राशि पीड़िता के बच्चे के वयस्क होने तक उसके नाम पर सुरक्षित रहेगी। हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपित को पीड़िता और उसके बच्चे की देखभाल करनी होगी।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा, “असली शोषण के मामलों और आपसी सहमति से बने रिश्तों के बीच फर्क करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे मामलों में न्याय करने के लिए सूझ-बूझ और सावधानीपूर्वक न्यायिक विचार की जरूरत होती है, ताकि न्याय सही तरीके से हो सके।” कोर्ट ने यह भी कहा, “जब तक किसी का अपराध साबित नहीं हो जाता, उसे निर्दोष माना जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को केवल आरोपों के आधार पर नहीं छीना जा सकता, जब तक उसका अपराध संदेह से परे साबित न हो जाए।”

कोर्ट ने यह भी जोर दिया, “न्यायिक प्रक्रिया में यह सिद्धांत प्रमुख है कि ‘जमानत सामान्य स्थिति है, और जेल भेजना अपवाद है’।” इस संदर्भ में कोर्ट ने आरोपित को जमानत देने का फैसला किया क्योंकि ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं था जिससे यह सिद्ध हो कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद भागने या न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करेगा।

आरोपित के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में कहा कि उसके साथ कोई बल प्रयोग नहीं किया गया। इसके अलावा, आरोपित ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह पीड़िता से शादी करने और नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए तैयार है। वकील ने यह भी कहा कि आरोपित कई महीनों से जेल में है और अगर उसे जमानत मिलती है, तो वह इसका दुरुपयोग नहीं करेगा।

राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपित जमानत मिलने के बाद न्याय से भागने की कोशिश करेगा या गवाहों को धमकाने का प्रयास करेगा।

नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से सही बर्ताव नहीं करता बॉलीवुड: मणिपुरी अभिनेता का छलका दर्द, कहा- ‘जिगरा’ बनाने वालों ने फँसाकर रखा, दूसरे मौके भी हाथ से निकल गए

बॉलीवुड फिल्म जिगरा में काम देने को लेकर पूर्वोत्तर के एक एक्टर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्टर ने कहा है कि बॉलीवुड में पूर्वोत्तर उन लोगों के साथ सही बर्ताव नहीं होता। एक्टर ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर लिख कर बताई है।

मणिपुर से आने वाले एक्टर बिजोऊ थांगजम ने रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को एक पोस्ट में लिखा, “मैं यहाँ पर जिगरा फिल्म पर दिव्या खोसला के कॉपी करने के आरोपों को लेकर नहीं बोलूँगा। लेकिन मैंने जिगरा की टीम के साथ अपने अनुभव को काफी समय तक दबा कर रखा था, लेकिन अब बताने का समय आ गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “2023 में, मुझे उनकी कास्टिंग टीम ने एक रोल के लिए ऑडिशन देने के लिए कहा था। मैंने उनकी टाइमलाइन के अनुसार चार महीने के भीतर दो बार अपने टेप भेज दिए थे। नवम्बर, 2023 के आखिर में, उन्होंने मुझे बताया कि मैं दिसंबर में शूटिंग में शामिल होऊंगा। यह कितनी शानदार बात होती।”

इसके बाद बिजोय ने अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने लिखा, “इसके बाद उन्होंने मुझे कभी भी कोई शूटिंग की तारीख नहीं बताई। इसके बावजूद उन्होंने मुझे पूरे दिसम्बर के लिए फंसा कर रखा और आशा की कि मैं किसी भी समय शूटिंग के लिए तैयार होऊँगा। मणिपुर के इम्फाल में रहने वाले एक आदमी के तौर पर मैंने शुरू में ही साफ़ कर दिया था कि मुझे यात्रा के इंतजाम करने की जरूरत पड़ेगी। हालाँकि लगता है कि इससे जिगरा के लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा।”

बिजोय ने इसके बाद आरोप लगाया कि जिगरा टीम के ढीलेढाले रवैये के कारण उन्हें और भी काम छोड़ने पड़े कब जबकि जिगरा में भी काम नहीं दिया गया। उन्होंने लिखा, “मैं पूरे एक महीने तक इन्तजार करता रहा। कास्टिंग टीम से बातचीत होती रही लेकिन शूटिंग के बारे में कोई अपडेट नहीं दिया गया। मुझे आखिर आखिरी बार 26 सितम्बर, 2024 को मैसेज किया गया उसके उसके बाद से पूरी तरह शान्ति हो गई। इस बीच मुझे अन्य प्रोजेक्ट भी छोड़ने पड़े, मैं उनका इन्तजार करता रहा।”

बिजोय ने इसके बाद आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर भारत से आने वाले एक्टरों के साथ भेदभाव होता है। उन्होंने लिखा, “मैं समझता हूँ कि बड़े प्रोडक्शन हाउस कैसे काम करते हैं। जिगरा के डायरेक्टर के प्रतिभाशाली हैं। लेकिन जिस तरह से उन्होंने इस पूरी स्थिति को संभाला वह बेहद खराब था। पूर्वोत्तर से आने वाले मेरे जैसे एक्टरों के लिए, यह काफी भेदभाव वाला लगा। मेरा समय बर्बाद हुआ, और मैंने बाकी मौके भी खो दिए।”

बिजोय ने लिखा कि वह किसी एजेंडा के तहत यह नहीं लिखा है बल्कि वह असलियत सामने लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को पता लगेगा कि आखिर हमें क्या-क्या झेलना पड़ता है। बिजॉय का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। बिजोय के इस पोस्ट के बाद कई लोगों ने उनका समर्थन किया।

जिस जिगरा फिल्म के ऊपर बिजोय ने आरोप लगाए हैं, उसे 11 अक्टूबर, 2024 को लॉन्च किया गया था। यह फिल्म मंगलवार (15 अक्टूबर, 2024) तक लगभग ₹18 करोड़ की कमाई कर चुकी है। अलिया भट्ट के प्रमुख रोल वाली यह फिल्म इस बीच विवादों में भी आ गई है और आरोप है कि इसमें सावी फिल्म की कहानी को कॉपी की गई।

खालिस्तानियों के लिए जन्नत है कनाडा: खुद जस्टिन ट्रूडो की पुलिस ने कबूला, वाशिंगटन पोस्ट ‘आपराधिक गतिविधियों’ के लिए अमित शाह को बता रहा जिम्मेदार

कनाडा की पुलिस ने 14 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें यह कहा गया कि भारत कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल है, जिसमें खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या भी शामिल है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के बयान में कहा गया कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे की वजह से उन्होंने इस मामले की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्णय लिया। एजेंसी ने साफ किया कि भारत की तरफ से पूरे सिख समुदाय को नहीं, बल्कि सिर्फ खालिस्तानी समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। अब यह बात साफ हो गई है कि कनाडा खालिस्तान समर्थकों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है।

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा कि उन्हें दक्षिण एशियाई समुदाय विशेष रूप से खालिस्तानी समर्थकों से जुड़ी कई हिंसक धमकियों का पता चला है। इनमें हत्या और वसूली जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। RCMP ने फरवरी 2024 में भारतीय सरकार के एजेंटों द्वारा कनाडा में चल रही आपराधिक गतिविधियों की जाँच के लिए एक स्पेशल टीम का गठन किया था। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस का दावा है कि भारतीय सरकार के एजेंट इन गतिविधियों को कनाडा में अंजाम दे रहे हैं और इसके लिए अपराधियों की मदद ले रहे हैं, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम प्रमुखता से लिया गया है।

रोचक बात यह है कि RCMP ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को इन आपराधिक गतिविधियों का मुख्य दोषी बताया और कहा कि भारतीय सरकार बिश्नोई के सहयोगियों का उपयोग खालिस्तानी आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। RCMP के सहायक आयुक्त ब्रिजिट गॉविन ने कहा, “भारत दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है, लेकिन विशेष रूप से खालिस्तानी तत्वों को। हम देख रहे हैं कि ये (भारत) ऑर्गनाइड्स क्रिमिनल्स के गिरोह से जुड़े लोगों/अपराधियों का उपयोग कर रहे हैं, जो विशेष रूप से बिश्नोई समूह के साथ जुड़े हैं।”

इस बीच, वाशिंगटन पोस्ट ने भारतीय गृह मंत्री अमित शाह पर कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडाई अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया है, जिसमें हरदीप सिंह निज्जर की हत्या भी शामिल है। इन आरोपों के पीछे इंटरसेप्टेड संचार और नई खुफिया जानकारी का दावा किया गया है।

कनाडाई सरकार ने इन आरोपों के जवाब में छह भारतीय राजनयिकों की पहचान की, जो खालिस्तानी आतंकवादियों पर जानकारी इकट्ठा करने में संलिप्त थे। इन राजनयिकों को कनाडा छोड़ने का आदेश दिया गया है, जिसमें कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा भी शामिल हैं। इसके जवाब में भारत ने भी छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी भारत पर आरोप लगाया है कि उनके पास इस बात के विश्वसनीय सबूत हैं कि भारतीय सरकार कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल है। भारत ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे ट्रूडो सरकार का राजनीतिक एजेंडा बताया है।

RCMP की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय राजनयिकों का आपराधिक गतिविधियों से गहरा संबंध है, जिसमें घर में घुसपैठ, गोलीबारी और हत्या शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय राजनयिकों द्वारा इकट्ठी की गई जानकारी भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) को भेजी गई, जिसने अलगाववादी व्यक्तियों पर हमलों के लिए आपराधिक सिंडिकेट्स का उपयोग किया।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें