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‘जिन्दा नहीं निकला अल्हम्दुलिल्लाह’: रामगोपाल मिश्रा की हत्या पर बहराइच की जमीन से सोशल मीडिया तक जश्न, आतंकियों को वकील दिलाने वाली जमीयत उलेमा की चिट्ठियों से शांति अपील

उत्तर प्रदेश के बहराइच में माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा के दौरान रामगोपाल मिश्रा की हत्या को लगभग 1 सप्ताह बीत चुके हैं। पिछले रविवार (13 अक्टूबर) को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने उनकी हत्या कर दी थी। मिश्रा की मौत पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ख़ुशी मना रहे हैं। ये हरकत सोशल मीडिया पर भी की गई। वहीं, बहराइच पुलिस शांति बहाली के लिए आतंकियों को वकील दिलाने के लिए कुख्यात जमीयत उलेमा से अपील जारी करवा रही है।

जश्न हो रहा रामगोपाल की हत्या पर

खुद को चश्मदीद बताते हुए हरदी थाना क्षेत्र के चंद्रपाल कुमार मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात की। उनका दावा है कि रामगोपाल मिश्रा की मौत पर मुस्लिम समुदाय के कई लोग ख़ुशी मना रहे हैं। बकौल चंद्रपाल, एक जगह उन्होंने कुछ मुस्लिमों को कहते सुना कि जो हुआ वो बहुत सही हुआ। जब चंद्रपाल ने उनसे पूछा कि ‘यही तुम्हारे घर में हुआ होता तो क्या कहते’? तब वो लोग बुरा मान गए।

बाजीराव पेशवा को अपना आदर्श मानने वाले महसी के आदित्य मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने रामगोपाल मिश्रा की हत्या को सेलिब्रेट किया। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक जिले अथवा क्षेत्र का एक भी मुस्लिम नेता रामगोपाल की हत्या पर संवेदना नहीं व्यक्ति की। इसके उलट, सभी लोग मृतक को ही दंगाई साबित करने पर तुले हुए हैं।

आदित्य मिश्रा का कहना है कि असली दंगाई मुस्लिम भीड़ पर ये नेता सभी खामोश हैं। उन्होंने कहा कि रामगोपल के कत्ल का सेलिब्रेशन न सिर्फ जमीनी स्तर पर हुआ, बल्कि इसे सोशल मीडिया पर भी देखा जा सकता है। सबूत के तौर पर आदित्य मिश्रा ने ऑपइंडिया को सोशल मीडिया का एक लिंक शेयर किया। यह लिंक ‘बहराइच क्वीन 786’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल का है।

इस हैंडल पर वो वीडियो शेयर हुआ है जिसमें रामगोपाल मिश्रा अब्दुल हमीद की छत पर खड़े दिख रहे हैं। कैप्शन के तौर पर इसमें बहराइच क्वीन ने लिखा, “वसीम जिस दिन मैदान में हम आएँगे।” इस वीडियो को इंस्टाग्रम पर अब तक सवा लाख से अधिक लोग देख चुके हैं। इसी जगह 800 से अधिक कमेंट हैं, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम समुदाय से हैं।

इसी में तौफीक खान नाम के एक यूजर ने हरे रंग के दिल का निशान बनाया और लिखा, “जिन्दा नहीं निकला। इंशाअल्लाह।” जीशान ने हँसी की 2 इमोजी बनाकर लिखा, “इसको गोली मार दी गई।” कनीज़ फातिमा ने सलमान अज़हरी वाली लाइन दोहराई और लिखा, “आज कुत्तों का वक्त है। कल हमारा दौर आएगा। इंशाअल्लाह।”

इसी पोस्ट के कमेंट में रियाज़ पठान 2 इमोजी लगाकर लिखता है, “पेल दिया गया दंगाई।” शब्बू निशा नाम की महिला के हैंडल से लिखा गया, “सुना है यह कुत्ते की मौत मारा गया।” खातून शब्बू निशा ने हँसी की एक इमोजी भी शेयर की है। मेजीब भाई नाम के हैंडल से रामगोपाल मिश्रा को माँ की गाली दी गई है। इसके अलावा मायरा सहित कई अन्य हैंडलों से ‘इस्लाम जिंदाबाद’ व ‘पठान जिंदाबाद’ आदि लिखकर रामगोपाल के कातिलों का उत्साहवर्धन किया गया है।

चित्र साभार – Insta/bahraich_queen786

जमीयत उलेमा के उर्दू वाले पत्रों से शांति की अपील

इस बीच बहराइच पुलिस ने जिले में शांति बहाली के लिए आधिकारिक तौर पर जमीयत उलेमा संगठन का सहारा लिया है। पुलिस ने अपने आधिकारिक ग्रुप में जमीयत उलेमा के उर्दू व हिंदी में लिखे गए पत्र शेयर किए हैं। सोमवार (14 अक्टूबर 2024) को लिखे गए इन पत्रों में मौलाना कारी जुबेर अहमद ने लोगों से फिरकारस्त ताकतों को सफल न होने देने की अपील की है। बताते चलें कि जमीयत उलेमा कई आतंकियों को कानूनी मदद दिलाने की वजह से अक्सर चर्चा में रहती है।

चित्र- बहराइच पुलिस मीडिया सेल

हम रोकते हैं बच्चों को गलत बात से, वो लालकर रहे थे कत्ल के लिए

ऑपइंडिया ने इस घटना के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा घायल किए गए कई हिन्दुओं से बात की। इन हिन्दुओं में 70 साल के वृद्ध व 90% दिव्यांग जन भी शामिल हैं। इन सभी ने हमें एक स्वर में बताया कि जब मुस्लिम भीड़ उन पर हमला कर रही थी, तब उसमें शामिल बच्चों और जवानों को उनके बुजुर्ग समझाने के बजाय ललकार रहे थे। हमसे दावा किया गया कि मस्जिद से हुए ऐलान के बाद भड़की हिंसा में मुस्लिम समुदाय के नाबालिग बच्चों से ले बुजुर्ग तक शामिल थे।

पहले भूख से तड़पाया, फिर यजीदी बच्चों का मीट खिलाया… ISIS की बर्बरता उस युवती से सुनिए जिसे आतंकियों ने 11 साल की उम्र में बनाया सेक्स स्लेव: गाजा से इजरायली फोर्स ने छुड़ाया

‘काफिरों’ के साथ इस्लामी आतंकी कैसी बर्बरता की हदें पार करते हैं ये किसी से छिपा नहीं है। अगर फिर भी कोई संदेह हो तो आतंकियों से संवेदना रखने वाले लोगों को 10 साल बाद गाजा से बचाई गई यजीदी युवती की आपबीती सुननी चाहिए। युवती के अनुसार, ISIS ने उन्हें और अन्य यजीदी महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ बनाकर कैद में रखा था और खाने में उन्हें इंसानी बच्चों का मीट परोसा जाता था।

पीड़ित यजीदी युवती का नाम फावजिया अमीन सिदो है। ISIS ने उन्हें 2014 में बंधक बनाया था जब वो 11 साल की थीं। बाद में उन्हें हमास ने कैद कर लिया। आज उनकी उम्र 21 है और इजरायल डिफेंस फोर्स व यूएस एबेंसी के कारण वो 10 साल बाद (अक्टूबर 2024 में) उस जहन्नुम से निकल पाई हैं।

एक दशक बाद घर लौटीं फावजिया ने बताया, कि जब वो 11 साल की थीं तब उन्हें और उनके भाई को ISIS ने कैद कर दिया था। आगे उन्होंने कहा, “घर से उठाने के बाद तो 4 दिन हमें भूख से तड़पाया गया। कुछ खाने को नहीं मिला। फिर आतंकियों ने हमसे कहा कि वो हमें खाना देंगे। उन्होंने हमारे लिए चावल बनाया और उसके साथ मीट खाने को दिया। मीट का स्वाद बहुत अजीब था। कुछ को तो पेट दर्द भी शुरू हो गया था उसे खाकर…।”

आगे वह कहती हैं, “हमने जब खाना खत्म किया तो हमें कहा गया कि ये मीट यजीदी बच्चों का था। फिर उन्होंने हमें तस्वीरें दिखाईं जिसमें वो बच्चों का कत्ल कर रहे थे। फोटो दिखाकर उन्होंने बोला कि ये वो बच्चे हैं जिनका मीट तुमने अभी खाया। तस्वीर देखते ही एक महिला का तो हार्ट फेल हो गया और वो कुछ समय बाद मर गई। वहीं हमारे साथ वो महिलाएँ भी थीं जो उन बच्चों की माँ थी। उनमें से एक ने तो अपने बच्चे का हाथ देख उसे पहचाना भी लिया था।”

2014 में बनाया गया था यजीदियों को बंधक

बता दें कि 2014 से ISIS लगातार यजीदी समुदाय के लोगों को निशाना बनाता आया है। कभी सामूहिक नरसंहार के जरिए, कभी गुलाम बनाकर, कभी धर्मांतरण के जरिए तो कभी उनकी जगहों से उन्हें विस्थापित होने को मजबूर करके।

आँकड़े बताते हैं कि 6000 से ज्यादा यजीदियों को ISIS ने इराक के सिंजार से बंधक बनाया था। महिलाओं का इस्तेमाल उनसे सेक्स गुलामी करवाने के लिए किया गया जबकि बच्चों को ट्रेंड करके तुर्की, सीरिया भेज दिया गया। सालों प्रयास के बाद इन बंधक बनाए गए यजीदियों में से 3500 का रेस्क्यू की बात खबरों में बताई जाती है वहीं 2600 अब भी लापता हैं।

फावजिया उन्हीं लोगों में से एक थीं जिन्हें बंधक बनाया गया। फावजिया के अनुसार, ISIS आतंकियों ने एक साल तक उन्हें सेक्स स्लेव बनाए रखा और उसके बाद उन्हें पाँच बार बेचा गया। उन्हें आखिरी बार एक फिलीस्तीनी आतंकी के हाथों बेचा गया। शुरू में वो खुद को बाथरूम में छिपाकर बचाती थीं मगर एक दिन उन्हें ड्रग देकर उनका रेप किया गया। जब वो प्रेगनेंट हो गई और 15 साल की उम्र में दो बच्चों की माँ बन गई। बाद में उन्हें हमास भेजा गया जहाँ जहन्नुम से बद्तर जिंदगी उन्हें देखने को मिली। पीड़िता के अनुसार एक बार तो वो घर से बाहर निकलीं तो उनके सिर पर बंदूक रख दिया गया और कहा कि उन्हें इसकी अनुमति नहीं है।

अब फिलहाल फावजिया उत्तरी इराक के सिंजार में है। इजरायल और यूएस ने मिलकर यहाँ से ISIS आतंकियों का प्रभाव समाप्त कर दिया है लेकिन अभी भी पश्चिमी एशिया और अफ्रीका में ISIS सक्रिय है।

सुशील शिंदे ने 11 साल बाद बताया ‘भगवा आतंकवाद’ कैसे गढ़ा: कहा- कॉन्ग्रेस ने बोलने को कहा था, मुझे नहीं पता भगवा के साथ आतंकवाद क्यों जोड़ा

कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 में गृहमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे ने ‘भगवा आतंकवाद’ पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भगवा आतंकवाद शब्द कहने के लिए उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस ने बोला था। शिंदे ने कहा कि वे इस शब्द का इस्तेमाल करना नहीं चाहते थे, लेकिन करना पड़ा। बता दें कि पहले पी. चिदंबरम और फिर शिंदे ने भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।

यूट्यूबर शुभांकर मिश्रा के साथ एक पॉडकास्ट में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं कॉन्ग्रेस से सेवानिवृत राजनेता सुशील कुमार शिंदे ने इस मुद्दे पर गंभीरता से बात की थी। भगवा आतंकवाद शब्द के इस्तेमाल को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उस वक्त रिकॉर्ड पर जो आया था, उन्होंने वही कहा था। ये उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस ने बताया था कि भगवा आतंकवाद हो रहा है।

शिंदे ने कहा, “उस वक्त पूछा था तो उस बारे में बोल दिया था भगवा आतंकवाद। बस इतना ही है। आतंकवाद शब्द लगाया, लेकिन सही बोले तो क्यों आतंकवाद शब्द लगाया मुझे पता नहीं है। लगाना नहीं चाहिए। ये गलत था। भगवा टेररिस्ट… ऐसा नहीं बोलना चाहिए। ये उस पार्टी की विचारधारा होती है। ये चाहे भगवा हो या रेड हो या सफेद हो। ऐसा कोई आतंकवाद नहीं होता है।”

बता दें कि भारत के गृहमंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने साल जनवरी 2013 में कहा था कि भाजपा और आरएसएस के कैंपों में ‘हिंदू आंतकवादियों’ को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस बयान को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई थी। हालाँकि, इन आलोचनाओं के बाद भी वे अपने बयान पर कायम थे।

तब गृहमंत्री शिंदे ने कहा था, “ये सब इतनी बार अख़बार में आ गया है। ये कोई नई चीज़ नहीं है जो मैंने आज कही है। ये भगवा आतंकवाद की ही बात मैंने की है, कोई दूसरी बात नहीं कही है।” दरअसल, 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान शिंदे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आरोप लगाया था।

अपने बयान के पीछे शिंदे ने एक कथित रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था, “हमारे पास रिपोर्ट आ गई है। जाँच में भाजपा हो या आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप, हिंदू आतंकवाद बढ़ाने का काम देख रहे हैं।समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी का धमाका हो, मक्का मस्जिद ब्लास्ट हो या फिर मालेगाँव, हिंदू चरमपंथियों ने वहाँ जाकर बम धमाके करवाए और फिर कह दिया कि ये धमाके अल्पसंख्यकों ने करवाए।”

सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि ऐसी कोशिशों से देश को सतर्क रहना चाहिए। शिंदे के इस बयान पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकवाद दी थी। इससे पहले गृहमंत्री रहते हुए कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने साल 2010 में सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।

केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में 25 अगस्त 2010 को डीजीपी और आईजी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”

‘नमाज पढ़ने की छूट, टीका लगाने पर सजा’: एयर इंडिया की हिंदू कर्मचारी ने मुस्लिम अधिकारी पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, न्याय के लिए PM मोदी से लगाई गुहार

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कार्यरत एयर इंडिया की महिला कर्मचारी चंचल त्यागी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने उत्पीड़न की शिकायत की है। चंचल का आरोप है कि एयर इंडिया की एक मुस्लिम अधिकारी महजबीन उन्हें माथे पर तिलक लगाने से रोक रही हैं। इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा, जब चंचल ने अपने इस उत्पीड़न के खिलाफ दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तहरीर भी दी, लेकिन वहाँ से कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने वीडियो जारी कर पीएम मोदी से लेकर अन्य नेताओं से न्याय की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सहारनपुर के जड़ौदा पांडा गाँव की निवासी चंचल त्यागी एयर इंडिया में ढाई साल से कार्यरत हैं। वो वर्तमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल नंबर 3 पर सहायक के पद पर काम कर रही हैं। चंचल का कहना है कि उन्होंने बचपन से ही सनातन परंपराओं का पालन किया है, जिसमें रोज पूजा के बाद तिलक लगाना शामिल है। शुरूआती दिनों में कंपनी में किसी को उनके तिलक लगाने से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन जब मुस्लिम अधिकारी महजबीन आईं, तो उन्होंने तिलक लगाने पर आपत्ति जताई और चंचल को तिलक हटाने का दबाव डालने लगीं।

चंचल ने कहा कि वह नवरात्रि के समय से महजबीन के निशाने पर हैं। महजबीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि एयर इंडिया में काम करने के लिए तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और अगर चंचल तिलक लगाकर ऑफिस आती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चंचल का दावा है कि उन्हें बार-बार तिलक न लगाने के लिए मजबूर किया गया, और जब उन्होंने इस दबाव को नजरअंदाज किया, तो उनके साथ अन्य तरीकों से उत्पीड़न शुरू हो गया।

चंचल त्यागी ने आरोप लगाया कि उनके काम में हस्तक्षेप किया जाने लगा, उन्हें बेवजह टोका-टोकी की जाने लगी। उन्होंने बताया कि वॉशरूम जाने तक पर उन्हें टोक दिया जाता था, और उनके काम की सही तरीके से एंट्री भी नहीं की जाती थी। 8 घंटे की ड्यूटी के बावजूद, आधे दिन की ही एंट्री की जाती थी। इसके अलावा, जब चंचल ने दिवाली की छुट्टी के लिए आवेदन किया, तो उसे भी निरस्त कर दिया गया। चंचल का मानना है कि उनके उत्पीड़न का मुख्य कारण उनका तिलक लगाना है।

चंचल त्यागी ने बताया कि महजबीन ने मुस्लिम स्टाफ को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने की अनुमति दी है, लेकिन जब चंचल अपनी सनातन परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर आती हैं, तो उन्हें इसके लिए सजा दी जाती है। चंचल ने वीडियो में कहा, “यह कोई पाकिस्तान नहीं है, जो हम तिलक नहीं लगा सकते। हिंदू संस्कार हमारे खून में हैं, और मैं इसे नौकरी के लिए नहीं छोड़ सकती।”

चंचल त्यागी ने अपने उत्पीड़न की शिकायत पहले एयरपोर्ट प्रशासन और फिर दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पास की, लेकिन जब वहाँ से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी व्यथा व्यक्त की और पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ने के अलावा उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि महजबीन लगातार उनका उत्पीड़न कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब एयर इंडिया की मुस्लिम अधिकारी महजबीन से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि कंपनी के नियम और ड्रेस कोड सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। महजबीन ने कहा, “कंपनी में ड्रेस कोड के तहत हिंदू कर्मचारी को तिलक लगाने और मुस्लिम कर्मचारी को टोपी पहनने की अनुमति नहीं है। एयरपोर्ट पर विभिन्न धर्मों के यात्री आते हैं, और इसलिए यह नियम बनाए गए हैं ताकि किसी भी धार्मिक प्रतीक को दिखाने से बचा जा सके।”

महजबीन ने यह भी कहा कि कंपनी में सभी धर्मों के लोग काम करते हैं और उन पर समान नियम लागू होते हैं। लेकिन चंचल त्यागी ने इन नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद उन्हें हिदायत दी गई थी।

चंचल त्यागी के वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ गया है। सोशल मीडिया पर कई लोग चंचल के समर्थन में आ गए हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, एयर इंडिया की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन महजबीन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया है।

जो विकास यादव अमेरिका में वांटेड, उसे दिल्ली पुलिस ने 10 महीने पहले गिरफ्तार किया था: खुद को लॉरेंस बिश्नोई का आदमी बता कारोबारी को धमकाया था, अब आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश में तलाश रही FBI

खालिस्तानी आतंकी गुरवतपंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश मामले में नया मोड़ आ गया है। अमेरिका की जाँच एजेसी FBI ने पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप जिस पूर्व भारतीय अधिकारी विकास यादव के खिलाफ लगाया है, उस पर दिल्ली पुलिस का केस दर्ज है और वह जमानत पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विकास यादव कोअप्रैल, 2024 में जमानत मिली थी। विकास यादव के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दिसम्बर, 2023 में हत्या की कोशिश और अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। यह मामला दिल्ली के एक व्यापारी ने दर्ज करवाया था।

दिल्ली के इस व्यापारी ने अपनी शिकायत में कहा था कि विकास यादव से वह एक मित्र के जरिए मिले थे। जिस व्यापारी ने विकास यादव के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करवाई है, वह आईटी सेक्टर का काम करते हैं। व्यापारी विकास यादव के शेयर मध्य एशिया में आईटी का काम लेना चाहता था।

उसे लगता था कि विकास यादव सरकार में कोई बहुत बड़े अधिकारी पद पर है। दोनों के बीच कई बार बातचीत भी हुई थी। व्यापारी का आरोप है कि एक दिन दिल्ली में विकास ने उन्हें मिलने बुलाया और वहाँ से अपने एक साथी के साथ उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद एक जगह ले जाकर मारपीट की और उनको लूट लिया।

व्यापारी का आरोप है कि विकास यादव ने खुद को गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई का आदमी बताया था और धमकी भी दी थी। व्यापारी की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने विकास यादव को गिरफ्तार किया था। इस मामले में जाँच के बाद विकास यादव को जमानत मिल गई थी।

इससे पहले विकास यादव को FBI ने पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोप में वांटेड घोषित किया था। FBI ने बताया था कि विकास यादव ने अमेरिका में पन्नू को मरवाने की साजिश रची और इसके लिए सुपारी दी। विकास यादव को पूर्व अर्धसैनिक बताया गया था।

अमेरिका ने पहले CC1 नाम दिया था। भारत ने हाल ही में बताया था कि विकास यादव अब नौकरी से निकाला जा चुका है। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि अमेरिका के विदेश मंत्रालय की इस बात की पुष्टि करते हैं कि विकास यादव अब भारत सरकार के लिए काम नहीं करता हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका ने आरोप लगाया है कि निखिल गुप्ता नाम का एक व्यक्ति अमेरिका में पन्नू को मारने की सुपारी दे रहा था, वह भारत सरकार के एक अधिकारी की शह पर पर काम करता था। अमेरिका ने इसके लिए कुछ सबूत भी जारी किए थे। अमेरिका ने अब यह अधिकारी विकास यादव बताया है।

‘काफिर से शादी कर इस्लाम का अपमान किया’: दिवाकर के इश्क में UP आई ईरान की फायजा डर के साए में जी रही, कट्टरपंथी कह रहे- तेरा हश्र बुरा होगा

मुरादाबाद में एक अंतरधार्मिक विवाह को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है, जहाँ ईरानी युवती फायजा और मुरादाबाद के यूट्यूबर दिवाकर सिंह को सोशल मीडिया पर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। फायजा और दिवाकर की मुलाकात तीन साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। इसके बाद दोनों ने ईरान और भारत में क्रमशः ईरानी और हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। इस विवाह को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, और दोनों पिछले छह महीनों से साथ रह रहे हैं।

फायजा ने बताया कि शादी के बाद से ही उन्हें और उनके पति को सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिलनी शुरू हो गईं। खासतौर पर फायजा को कहा जा रहा है कि वह भारत छोड़कर वापस ईरान चली जाएँ। धमकी भरे संदेशों में यह भी कहा गया कि उन्होंने “एक काफिर से शादी करके इस्लाम का अपमान किया है” और उन्हें “भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” धमकी देने वालों ने जाकिर नाइक के वीडियो देखने की सलाह भी दी है।

फायजा और दिवाकर

फायजा और दिवाकर के परिवारों को इस शादी से कोई आपत्ति नहीं थी और दोनों ने अपनी पसंद से शादी की थी। फायजा ने बताया कि वह दिवाकर के साथ खुश हैं और उनकी शादी पूरी तरह से उनकी मर्जी से हुई है। वह भारत के लोकतंत्र और कानून पर भरोसा करती हैं कि उनकी सुरक्षा की जाएगी। लेकिन सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों ने उनके जीवन को खतरे में डाल दिया है।

दिवाकर, जो एक ट्रैवल ब्लॉगर हैं, ने बताया कि जैसे ही यह मामला मीडिया में आया, धमकियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। पहले सिर्फ कुछ संदेश मिलते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया पर लगातार उन्हें और उनकी पत्नी को निशाना बनाया जा रहा है। फायजा ने कहा कि वह अब डर के साए में जी रही हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है। फायजा ने उम्मीद जताई है कि भारत सरकार और प्रशासन उनके मानवाधिकारों की रक्षा करेंगे और उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराएंगे।

इस मामले में फायजा और दिवाकर ने मुरादाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सतपाल अंतिल से मिलकर सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने बताया कि धमकियों से वे और उनका परिवार बेहद परेशान हैं और उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच के आदेश दिए हैं। एसपी सिटी रणविजय सिंह ने कहा कि पुलिस साइबर सेल धमकी देने वालों की पहचान करने में लगी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जो मुल्ले की सुनने के आदी, क्या वे मी लॉर्ड की सुनेंगे… सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह पर जो खींची नई लकीरें, क्या उससे मिटेगी पीरियड आते ही निकाह कर देने की मजहबी लकीर?

बालिग होने से पहले बच्चों की शादी करा देना आज से 20-25 साल पहले कोई बड़ी बात नहीं हुआ करती थी, लेकिन आज के समय में इनका होना चिंता का विषय है। कारण- शायद पहले लोगों में जागरुकता न रही हो, लेकिन अब बाल विवाह के दुष्प्रभावों को लेकर समाज में अभियान चलाए जाते हैं और इसकी रोकथाम के लिए कानून भी है।ॉ

बावजूद इसके भी अगर समाज में ये कुरीति जिंदा है तो स्थिति चिंताजनक है। मतलब साफ है कि लोग ये तो जान-समझ रहे हैं कि बचपन में शादी कर देने से बच्चों की जिंदगी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी, उनपर मानसिक और शारीरिक बल पड़ेगा…लेकिन सब समझने के बाद भी वो इससे निजात नहीं पा रहे।

बाल विवाह पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और टिप्पणी

हाल में सुप्रीम कोर्ट में CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की और 141 पन्नों के फैसला देते हुए साफ कहा, “बाल विवाह निषेध अधिनियम किसी भी ‘पर्सनल लॉ’ की परंपरा से बाधित नहीं हो सकता। ये बच्चों की आजादी, उनकी पसंद, उनके निर्णय लेने की क्षमता, बचपन में आनंद लेने के अधिकार को प्रभावित करता है।”

इसके साथ कोर्ट ने मामले पर फिक्र जाहिर करते हुए ‘सोसाइटी फॉर एनलाइटनमेंट एंड वॉलेंटरी एक्शन’ द्वारा 2017 में लगाई गई याचिका पर फैसला देते हुए कुछ निर्देश दिए-

  • दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा है कि बालविवाह रोकने के लिए राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र जिला स्तर पर चाइल्ड मैरिज ​प्रिवेंशन ऑफिसर नियुक्त किए जाएँ।
  • हर राज्य इस संबंध में 3 महीने में रिपोर्ट अपलोड करें।
  • स्कूल, पंचायत, स्थानीय संस्थाओं में चाइल्डलाइन (1098) और महिला हेल्पलाइन (181) की जानकारी दी जाए। बच्चों को समझाया जाए कि कैसे मदद ली जाती है।
  • स्कूलों, धार्मिक संस्थाओं और पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ। स्थानीय भाषा में प्रभावी होर्डिंग्स और स्लोगन बनाए जाएँ।
  • ‘बाल विवाह मुक्त गाँव’ की पहल हो। ऐसे गांवों व ग्राम पंचायतों को ‘बाल विवाह मुक्त’ सर्टिफिकेट दिया जाए। सामुदायिक नेतृत्व को सक्रिय भूमिका के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • राज्य बाल विवाह निषेध यूनिट बनाएँ। इसमें पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को रखा जाए, जिनमें 2 महिलाएँ जरूर हों।
  • मजिस्ट्रेट स्वत: संज्ञान लेकर निर्देश जारी कर सकेंगे। केंद्र, राज्य सरकारों के साथ मिलकर ऐसे मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएँ।
  • कोई सरकारी कर्मचारी बाल विवाह में शामिल पाया गया तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

भारत में घटे बाल विवाह के मामले, लेकिन खत्म क्यों नहीं हुए

ऊपर आँकड़े भले ही आपको यहाँ गिरते दिखें लेकिन बाल विवाह एक चिंता का विषय है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तरफ जहाँ सुप्रीम कोर्ट इसके रोकथाम के लिए तरीके सुझा रही है, निर्देश दे रही है। वहीं समाज में मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसी चीजें भी हैं जो एक मजहब को पूरी तरह से आजादी देती हैं कि लड़की का निकाह 15 साल की उम्र में करवा दिया जाए। यानी अगर कोई मुस्लिम परिवार बच्ची के इस उम्र में एंटर करते ही उनकी शादी करा देता है तो इसका मतलब ये है कि वो उनके हिसाब से गलत नहीं है और कानून भी उन्हें कोई सजा न दे।

संविधान से ऊपर मुस्लिम पर्सनल लॉ

ये आजादी एक समुदाय एक ऐसे देश में मिली हुई है जहाँ की सरकार से लेकर न्याय व्यवस्था बाल विवाह जैसे मुद्दे पर चिंतित है और विचार कर रहे हैं कि अभी जो लड़कियों की शादी की उम्र 18 है उसे बढ़ाकर 21 कर देनी चाहिए। ऐसे देश में एक मजहब अपना पर्सनल लॉ चलाता है और देश के संविधान, उसमें लिखी बात, मानवाधिकार बचाने के लिए लागू कानून को मानने से इनकार कर देता है। क्या बाल विवाह से लड़ने के क्रम में देश में एक समान कानून लागू करने का काम नहीं होना चाहिए। या फिर संविधान का दुहाई सिर्फ अपने वो अधिकार माँगने के लिए ही की जाएगी जो उनसे छीने ही नहीं गए। या आजादी ऐसे मामलों में चाहिए जो समाज को आगे बढ़ाने की जगह सदियों पहले के समय में ढकेंले

बीते समय भारत में कई ऐसे प्रदर्शन हुए हैं जहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों को संविधान का हवाला देते अधिकार की बात करते देखा गया, लेकिन बात जैसे ही इस्लामी कट्टरपंथी रवायतें बदलने (तीन तलाक से लेकर बुर्का पहनने) पर आई सब तुरंत एकजुट होकर अपने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दुहाई के अनुसार चलने की बात कहने लगे और धमकियाँ दी जाने लगीं कि वो मुस्लिम पर्सनल लॉ में छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।

मालूम हो कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937 के तहत नाबालिगों (18 साल से कम उम्र की लड़ी) को निकाह की अनुमति दी गई है। कानून के अनुसार लड़की के यौवन में प्रवेश करते ही उसे वयस्क मान लिया जाता है और उसका निकाह जायज होता है

देश का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते बताइए क्या ये रवायत सही है? क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का असर सिर्फ उन्हीं तक है जो इसको मानते हैं। न्यायालय में फैसले देते समय इसका असर कैसे पड़ता है ये तो आपने पढ़ा ही…अब सामाजिक तौर पर भी सोचिए। जहाँ ऐसी चीजों को बढ़ावा मिलेगा क्या उससे दूसरा समुदाय प्रभावित नहीं होगा! क्या वो देखा-देखी में अपनी कम उम्र की बेटी की शादी के ख्याल मन में नहीं लाएँगे?

ये ध्यान रखने वाली बात है कि देश में बाल विवाह के आँकड़े कम जरूर हुए लेकिन देश से खत्म नहीं हुए हैं। सरकार कानून बनाकर प्रयास कर रही है, सामाजिक संगठन अभियान चलाकर लोगों को जारूक कर रहे हैं, न्याय व्यवस्था बच्चों के अधिकार छीनने वालों पर कार्रवाई कर रही हैं… लेकिन ये सारी चीजें तब तक काफी नहीं हैं जब तक कि जमीनी स्तर पर इस काम न हो। ऐसे पर्सनल लॉ रहेने की वजह से हमेशा संविधान से चलने वाले देश और मुस्लिम पर्सनल लॉ मानने वालों के भी टकराव होगा। संविधान में मिले अधिकार की बात करके देश में एक अन्य कानून को समान रूप से चलाते रहना उचित नहीं है।

क्या होगा बाल विवाह का असर

बाल विवाह के दुष्परिणाम अनेक हैं और ये किसी धर्म-मजहब को देख अपना असर नहीं दिखाते। कम उम्र में निकाह या शादी से बच्चियों की शिक्षा रुकती है, उनका सामाजिक विकास बाधित होता है, उन्हें घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ आती हैं वो अलग। लड़कों पर पढ़ाई छोड़ जल्दी कमाने का दबाव होता है और लड़कियों पर परिवार बढ़ाने का। बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले ये नहीं सोचते कि बढ़ती दुनिया को देख आगे चलकर उनके बच्चे कितना पिछड़ा महसूस करेंगे और उनकी क्षमताएँ कैसे मरती चली जाएँगी। अगर सिर्फ ये तर्क देकर इसे जायज ठहराया जाएगा कि किसी पर्सनल लॉ के कारण ये उचित है तो ये जिद्द केवल और केवल समाज के भावी युवाओं से उनके अधिकार छीनने का काम करेगी और बाल अवस्था में ही उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर कर देगी, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।

ईंट मार प्रतिमा तोड़ी, DJ वाले को खींचकर मारा, फिर मस्जिद से हुआ ऐलान… चश्मदीदों ने बताया बइराइच में क्या-क्या हुआ, कहा- राम मंदिर से नाराज हैं मुस्लिम

बहराइच में 13 अक्टूबर 2024 को हुए सांप्रदायिक तनाव ने एक बार फिर जिले में खौफ और आतंक का माहौल बना दिया है। इस हिंसा में 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की निर्मम हत्या कर दी गई, जिससे हिंदू समुदाय में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह हमला पहले से सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था, जिसमें स्थानीय मस्जिद से भड़काऊ ऐलान किए गए थे और भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया गया था।

मूर्ति पर हमले से झगड़े की शुरुआत, फिर मस्जिद से ‘सभी को’ मारने का ऐलान

कट्टरपंथियों की हिंसा के शिकार हुए विनोद कुमार मिश्रा ने ऑपइंडिया से बातचीत में पूरे घटनाक्रम को याद किया और अपनी आपबीती सुनाई। विनोद मिश्रा ने शुरुआत से लेकर हिंसा तक की घटना को सिलसिलेवार तरीके से बताया कि कैसे एक शांत धार्मिक जुलूस ने अचानक हिंसा का रूप ले लिया। उन्होंने कहा, “जब हमारी मूर्ति मौके पर पहुँची, तो मुस्लिम लोगों ने मूर्ति पर ईंटें फेंकी, जिससे प्रतिमा का हाथ टूट गया और फिर दूसरी मूर्ति भी ईंट-पत्थर मारने की वजह से टूट गई। इसके बाद डीजे वाले को खींचकर मारा गया।”

मिश्रा का आरोप है कि इस विवाद की शुरुआत अब्दुल हमीद के बेटे ने की, जिसने छत से पत्थर फेंककर माहौल बिगाड़ा। इसके बाद हिंदू समुदाय ने धरने पर बैठने का निर्णय लिया और प्रशासन से हस्तक्षेप की माँग की। हालाँकि पुलिस और प्रशासन ने हिंदुओं को आश्वासन दिया कि मामले को संभाला जाएगा, लेकिन हिंसा थमने के बजाय और बढ़ गई। विनोद कुमार मिश्रा ने बताया, “मुस्लिमों ने जो किया, वो अन्याय है। हमने माफी की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने हमारी माँगें नहीं मानी।”

हिंसा को रोकने के प्रयास में विनोद कुमार मिश्रा और अन्य हिंदू नेताओं ने अब्दुल हमीद से बातचीत भी की। हालाँकि, हमीद ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि डीजे पर पाकिस्तान का गाना बज रहा था, जिससे मुस्लिमों को आपत्ति थी। विनोद कुमार मिश्रा ने बताया, “अब्दुल हमीद मेरे साथ ही पढ़ता था, इसलिए मैंने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने कहा कि उसका लड़का अब उसके काबू में नहीं है।”

विनोद ने भावुक होते हुए बताया कि उनके बचपन का दोस्त अब्दुल हमीद भी इस हिंसा में शामिल था। उन्होंने कहा, “बचपन का दोस्त था अब्दुल हमीद। मुझे कभी नहीं लगा था कि वो ऐसा करेगा। ये मेरे लिए बहुत बड़ा धक्का था।”

उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद से बातचीत के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही थी। इसके बाद मस्जिद से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का ऐलान किया गया, और लाउडस्पीकर पर कहा गया कि ‘जो जहाँ मिले, उसे मार डालो, काट दो।’ इसके तुरंत बाद करीब 150-200 लोगों की भीड़ हथियारों के साथ निकली और हमला शुरू कर दिया।

बाइक से भागने की कोशिश की, तो टायर काट डाला

विनोद कुमार मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी जान पर बनी आपबीती भी साझा की। जब वे अपनी बाइक से भागने की कोशिश कर रहे थे, तो उन पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। “गाड़ी स्टार्ट ही की थी, कि हमारे ऊपर हमला बोल दिया। 5-7 लोग आए और फरसे से हमला किया। मेरे अंगूठे और सर में गहरा घाव लगा। मैं लहूलुहान हो गया।” इसके बाद उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया गया।

विनोद ने बताया कि पुलिस की निष्क्रियता इस पूरे घटनाक्रम में बहुत ही चौंकाने वाली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक मुस्लिम भीड़ हमला करती रही, तब तक पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जब हिंदू लोग एकत्रित होकर जवाब देने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। “पुलिस ने हमारी कोई रिपोर्ट तक नहीं लिखी,” उन्होंने कहा। विनोद के अनुसार, इस हिंसा में 7-8 हिंदू घायल हुए, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

‘सिर्फ झंडा उतारने पर मार डालोगे?’

ऑपइंडिया से बातचीत में घटना स्थल पर मौजूद रहे चंद्रपाल मिश्रा ने बताया कि कैसे झंडा उतारने पर ओम प्रकाश को मार डाला गया। उन्होंने कहा, “उस लड़के (ओम प्रकाश) की क्या गलती थी? उसने किसी को नहीं मारा, उसने सिर्फ हरा झंडा ही उतारा था, जो पत्थर बरसाने के बाद किया गया था।”

चंद्रपाल ने यह भी बताया कि राम मंदिर बनने के बाद से मुस्लिमों में गुस्सा है, इसके बाद से ऐसी घटनाएँ बढ़ गई हैं। मुस्लिम राम मंदिर बनने का गुस्सा उतार रहे हैं। उन्होंने ताजिया को लेकर भी अपनी बात रखी। चंद्रपाल ने कहा, “हम लोग तो ताजिया में भी शामिल रहते थे लेकिन कोरोना के दौरान ताज़िया नहीं उठने की घटना से मुस्लिम समुदाय नाराज था, और इसी कारण से उन्होंने हिंदू जुलूस को निशाना बनाया।” चंद्रपाल ने कहा, “मुस्लिमों का कहना था कि हमारा ताज़िया नहीं उठा, तो हिंदुओं की मूर्ति भी नहीं उठने देंगे।”

अतीत में भी हो चुकी है इस तरह की घटना

इस हिंसा की घटनाएँ पहली बार नहीं हुई हैं। 1994-95 में भी बहराइच में ऐसी ही सांप्रदायिक घटनाएँ हुई थीं, जब मुस्लिम समुदाय ने मूर्तियों को रोकने का प्रयास किया था। विनोद कुमार मिश्रा ने इस घटना की तुलना करते हुए कहा कि इस बार हिंसा कहीं ज्यादा संगठित और भयावह थी। उन्होंने कहा, “अगर प्रशासन सख्त होता, तो ये घटना नहीं होती।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से डरने वाला नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “हम अगले साल भी यात्रा निकालेंगे, चाहे हमें बलिदान क्यों न हो जाएँ।”

बहराइच में हुई इस सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सांप्रदायिकता की आग कितनी घातक हो सकती है, जब इसे सही समय पर नियंत्रित नहीं किया जाता।

‘अल जजीरा’ ने हिंदुओं के अमेरिकी संगठन को किया बदनाम, HAF को बताया ‘भारतीय एजेंट’: भारत-मोदी घृणा में चलाया एक और प्रोपेगेंडा

क़तर की सरकार के पैसे पर चलने वाले भारत और हिन्दू विरोधी अल जजीरा ने हाल ही में एक लेख प्रकाशित किया है। इस लेख में ‘हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन’ नाम के संगठन पर भारत की मोदी सरकार के लिए अमेरिका में ‘प्रचार शाखा’ की तरह काम करने का आरोप लगाया है। अल जजीरा ने दावा किया कि यह संगठन अमेरिका में भारत सरकार के लिए लॉबिंग करता है।

अल जजीरा में 15 अक्टूबर, 2024 ‘कैपिटल हिल पर भारत की मोदी सरकार के लिए कौन कर रहा लॉबिंग’ (Who is lobbying for India’s Modi government on Capitol Hill) शीर्षक से यह लेख मुक्ता जोशी नाम की एक कथित पत्रकार ने लिखा है। जोशी खुद को वकील से बनी पत्रकार बताती है।

हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) अमेरिका में हिन्दू हितों के लिए काम करने वाला एक संगठन है। इसे विदेशी सरकार के लिए काम करने वाला एक संगठन घोषित करना उसके हिन्दू हित के लिए किए जाने वाले काम को रोकने का एक प्रयास है। साथ ही इस संगठन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठाने का यह एक प्रयास है।

यह सभी दावे करने के लिए अल जजीरा ने वाशिंगटन में काम करने वाले के बेनामी अमेरिकी कर्मचारी का हवाला दिया है। इसने आरोप लगाया कि हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन पाकिस्तान को सितंबर 2022 में F-16 लड़ाकू विमानों के लिए एक अपडेट लेने से रोकना चाहता था।

यह दावा काफी हास्यास्पद है क्योंकि हिन्दुओं के लिए काम करने वाला कोई भी संगठन पाकिस्तान का विरोध करेगा, क्योंकि पाकिस्तान खुले तौर भारत और हिन्दुओं का विरोध किया है। यह बात तब और भी स्पष्ट हो जाती है कि जब पाकिस्तान कुछ समय पहले आतंक पालने के लिए FATF की ग्रे सूची में था।

अल जजीरा का कहना है कि क्योंकि भारत सरकार पाकिस्तान को F-16 अपडेट नहीं लेना चाहती थी, इसीलिए हिन्दू अमेरिका फाउंडेशन अमेरिका में विरोध दर्ज करवा रही थी। जबकि असल बात ये है कि पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कोई भी मानवाधिकार के लिए काम करने वाला संगठन यही कदम उठाएगा।

बेनामी अमेरिकी कर्मचारी और आरोप

कतर से पैसे लेने वाले अल जजीरा में लिखने वाली मुक्ता जोशी ने लिखा, “बेनामी अमेरिकी कॉन्ग्रेस कर्मचारी से बात करने के बाद मुझे ये साफ़ हो गया कि हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) भारत सरकार की ओर से काम कर रहा था।” अल जजीरा ने इसके बाद HAF के बारे में दावा किया कि यह 2014 से ही भाजपा और मोदी सरकार के लिए काम किया है।

अल जजीरा ने HAF को एक विदेशी संस्था की कठपुतली के रूप में बदनाम करने की कोशिश की, जबकि असल बात यह है कि यह हिन्दुओं के अधिकारों के लिए अमेरिका में जबरदस्त काम करता है और इसकी अमेरिका काफी अच्छी साख है।

अल जजीरा ने आगे अपना प्रलाप जारी करते हुए “HAF निष्पक्ष होने के दावे के बावजूद भाजपा के वकील के रूप में उभरा है। यह भारत से संबंधित अमेरिकी विदेश नीति और अमेरिका में पारित किए जाने वाले कानून को प्रभावित करने के लिए काम करता है।”

HAF को ‘विदेशी एजेंट’ बताने का प्रयास

कथित ‘खोजी पत्रकार’ मुक्ता जोशी के लेख में माँग की गई कि HAF को विदेशी एजेंट के तौर पर अमेरिकी कानून के तहत रजिस्टर किया जाए। इसके पीछे मुक्ता जोशी ने भाजपा के लिए काम करने वाले प्रलाप का तर्क दिया था। HAF के मीडिया विभाग के डायरेक्टर मैट मैकडरमॉट ने अल जज़ीरा को इस लेख पर दिए गए बयान में कहा, ” अगर हमारी विचारधारा किसी विदेशी सरकार की विचारधारा से मेल खाती है तो यह अकेला तथ्य हमें विदेशी एजेंट घोषित किए जाने के लिए पर्याप्त नहीं है।”

तर्कों को धता बताते हुए मुक्त जोशी और अल जजीरा ने HAF के खिलाफ अपना प्रोपेगेंडा जारी रखा। HAF के खिलाफ अल जजीरा ये कुछ सबूत पाया है, जिसके शेयर वह इसे मोदी सरकार का एजेंट और विदेशी बताने पर तुला हुआ है। यह पढ़ने में ही हास्यास्पद लगते हैं। यह कथित सबूत निम्नलिखित हैं-

1. गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी पर वीजा प्रतिबंध लगाने पर HAF का विरोध

2. भारत और हिंदू धर्म पर कैलिफोर्निया की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का प्रस्ताव

3.दिवाली को अमेरिका में सरकारी त्यौहार के तौर पर मान्यता देने की वकालत

4.योग को बढ़ावा

5. हिंदुओं को निशाना बनाने वाली एकतरफा USCIRF रिपोर्ट की आलोचना

6. धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपने देश को छोड़ने वाले अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करने वाले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का समर्थन

7. सांसद प्रमिला जयपाल के हिंदू विरोधी प्रस्ताव की खिलाफत

इस लेख के अंत में दावा किया गया, “इस साल के आम चुनाव से पहले, जिसमें मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे थे, हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन ने भाजपा के मुद्दों को दोहराना जारी रखा।” हालाँकि, इस आरोप को साबित करने के लिए अल जजीरा ने कोई सबूत नहीं दिया।

दो अलग संस्थाओं को बताया अलग

अल जजीरा ने ‘पता लगाया’ कि HAF के बोर्ड में शामिल लोग एक अन्य संस्थान हिंदू अमेरिकन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (HAPAC) के बोर्ड में भी काम करते हैं। इसने दावा किया कि HAPAC ने 2012 से अब तक 200,000 डॉलर (₹1.68 करोड़) का राजनीतिक दान दिया है।

असल बात यह है कि HPAC और HAF दोनों अलग-अलग संस्थाएँ हैं। दोनों स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और अमेरिकी कानून के दायरे में रह कर काम करते हैं। यह सब जानने के बाद HAF और HAPAC को अल जजीरा ने एक ही बताने का प्रयास किया। इसके बाद अल जजीरा ने इस बात पर तक दुख जताया कि HAF के लोग किसी का प्रचार क्यों कर रहे हैं।

अल जजीरा की मोदी के प्रति घृणा

कतर से पैसे लेने वाले अल जजीरा 2002 के गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी के विषय में लगातार झूठी अफवाहें फैलाता रहा है। अल जजीरा गोधरा में हिन्दुओं पर हुए हमले को छुपाता रहा है और प्रधानमंत्री को दंगों को आरोपित बताता रहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त SIT ने 2012 में नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी। अमेरिकी सरकार द्वारा उन पर वीजा प्रतिबंध दंगों में उनकी कथित सहभागिता के आरोपों के कारण लगाया गया था, असल में यह आरोप झूठ थे और बाद में इस बात को सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया।

ऐसे में साफ़ हो जाता है कि अगर HAF नरेन्द्र मोदी को वीजा ना दिए जाने का विरोध कर रहे थे तो वह गलत नहीं थे। किसी नेता का प्रचार करना या फिर हिन्दुओं के अधिकार के लिए बात करना अल जजीरा के अनुसार, भाजपा का समर्थन करना हो जाता है।

असल में हिन्दू विरोधी एजेंडा है मकसद

अल जजीरा इस बात पर दुखी है कि HAF हिन्दुफोबिया की बात करता है। उसके दुख का कारण यह है कि हिन्दुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और हिन्दूफोबिया को इस्लामी कट्टरपंथियों और वापमंथी नकारते रहे हैं। यह तब है जब हिन्दुओं के विरुद्ध हमलों से अखबार पटे पड़े हैं।

कतर के पैसे पर चलने वाले अल जजीरा ने सितंबर 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ सम्मेलन के खिलाफ HAF द्वारा चलाए गए अभियान पर भी चिंता जताई। अल जजीरा ने कहा कि भले ही यह कार्यक्रम बाद में आयोजित हुआ लेकिन कई लोग इससे पीछे हट गए। HAF की राम माधव द्वारा प्रशंसा को भी अल जजीरा ने सही नहीं माना।

HAF और भारतीय दूतावास के बीच भी संबंध स्थापित करने का असफल प्रयास

अल जजीरा ने लिखा कि जून, 2017 में HAF के सदस्यों को भारतीय दूतावास ने आमंत्रित किया था और यह अलग बात थी। अल जजीरा को समझाना चाहिए कि आखिर किसी राष्ट्राध्यक्ष की एक दूसरे देश की यात्रा के दौरान हिन्दू समुदाय के लोग क्यों नहीं बुलाए जाएँगे।

अल जजीरा और उसकी लेख लिखने वाली मुक्ता जोशी इतनी शातिर हैं कि उन्होंने यह सारी बातें लिखने के बाद निष्कर्ष निकाला कि भारतीय दूतावास और HAF के बीच कोई संबंध नहीं है। ताकि आदमी आसानी से उनके एजेंडे को पहचान ना पाए।

भारत की धरती पर जन्म लेकर हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाली इस्लामी कट्टरपंथियों की ‘मानसिक गुलाम’ मुक्ता जोशी ने ट्विटर पर यह लेख साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने इस मामले की 7 महीने तक जाँच की है। हास्यास्पद यह है कि 7 महीने तक जाँच करने के बावजूद एक भी बात साबित नहीं कर पाई कि HAF कैसे भारत सरकार के लिए काम करता है। इन सबके बाद भी मुक्ता जोशी के इस लेख को अल जजीरा ने केवल इसलिए जगह दी है क्योंकि यह हिन्दू विरोधी एजेंडा को बढ़ाता है।

महाराष्ट्र CM रहते दुबई में दाऊद इब्राहिम से मिले थे शरद पवार: भीमराव अंबेडकर के पौत्र का दावा, कहा- बाबा सिद्दीकी के साथ जो हुआ वह केवल एक शुरुआत है

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व एनसीपी नेता शरद पवार के अंडरवर्ल्ड दाउद इब्राहिम से रिश्तों पर फिर दावा हुआ है। ये दावा वंचित बहुजन अघाड़ी नेता व भीम राव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने किया है। उन्होंने 18 अक्टूबर 2024 को मीडिया से बात करते कहा कि 1988-91 में जब शरद पवार मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने दुबई जाकर दाऊद इब्राहिम से मुलाकात की थी।

उन्होंने सवाल किया है कि क्या केंद्र सरकार ने उन्हें इस मुलाकात के लिए मंजूरी दी थी? अगर हाँ, तो केंद्र सरकार इसकी रिपोर्ट को पब्लिश करे। और अगर इस मुलाकात के लिए उन्हें मंजूरी नहीं मिली थी तो क्या उन्होंने लौटकर इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी?

अंबेडकर कहते हैं कि इतने समय बाद उन्होंने ये सवाल इसलिए उठाया है क्योंकि अब दोबारा से महाराष्ट्र में 90 की स्थिति बनती दिख रही है। बाबा सिद्दीकी के साथ जो हुआ वो केवल शुरुआत है। इसकी वजह क्या है केंद्र को इसे ढूँढना चाहिए।

पूर्व रॉ अधिकारी का दावा

मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है कि शरद पवार और दाऊद के संबंधों पर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले रॉ के एक पूर्व अधिकारी एनके सूद ने बताया था कि एनसीपी के मुखिया शरद पवार के भी दाऊद से संबंध थे। उन्होंने बताया था कि इसकी एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं से करीबी के चलते ही अंडरवर्ल्ड डॉन देश से भागने में सफल हुआ था। इसके अलावा उसे पकड़ने के लिए जो खुफिया ऑपरेशन चले वो भी इन्हीं करीबियों के कारण नहीं सफल हुए और इसी कारण दाऊद भारत भी नहीं लौटा। पूर्व रॉ अधिकारी ने बयान में कहा था कि जब दाऊद के सरेंडर की बात हुई थी तो शर्त सिर्फ ये थी कि उसे ऑर्थर जेल में थर्ड डिग्री न दी जाए। मगर शरद पवार ने उस माँग को भी नहीं स्वीकार। उन्हें डर था अगर दाऊद लौटता तो पवार समेत उन सभी नेताओं को डर था कि उसके मुँह खोलते ही इनका राजनैतिक करियर चौपट हो जाएगा।

मुंबई धमाकों पर बोला झूठ

इसके अलावा मालूम हो कि मुंबई ब्लास्ट जिनका इल्जाम दाऊद और टाइगर मेमन पर लगता है उसमें भी शरद पवार पर झूठ बयान देने का आरोप है। हमलों के तुरंत बाद शरद पवार नेदूरदर्शन पर आकर सबको कहा था कि 13 धमाके हुए हैं जिनमें मुस्लिम बहुल इलाके को भी निशाना बनाया गया। बाद में उन्होंने बताया कि उन्होंने ये झूठ सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए की थी ताकि हिंदुओं को लगे मुस्लिमों को भी निशाना बनाया गया है जबकि बहकीकत में जहाँ धमाके हुए थेवो जगह- मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, नरसी नाथ स्ट्रीट, शिव सेना भवन, एयर इंडिया बिल्डिंग, सेंचुरी बाज़ार, माहिम, झावेरी बाज़ार, सी रॉक होटल, प्लाजा सिनेमा, जुहू सेंटॉर होटल, सहार हवाई अड्डा और एयरपोर्ट सेंटॉर होटल थीं।