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मस्जिद से हुआ ऐलान- जो दिखे उसे काट दो… तलवार-डंडों के साथ सड़क पर उतर गई मुस्लिम भीड़: चश्मदीदों ने बताया बहराइच में हिंसा कैसे भड़की

बहराइच जिले के महराजगंज कस्बे में 13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए, जिनमें विनोद मिश्रा और उनके दिव्यांग भाई सत्यवान मिश्रा भी शामिल हैं। विनोद का हाथ टूट गया है और उनका सिर भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। वहीं, उनके भाई सत्यवान, जो 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं, भी इस हिंसा में बुरी तरह से घायल हो गए। इलाज के बाद अब दोनों अपने घर लौट आए हैं, लेकिन इस घटना ने उनके दिलों में गहरी चोट छोड़ी है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, कैसे हुई हिंसा की शुरुआत

विनोद और सत्यवान ने ‘आजतक’ से बातचीत में बताया कि उस दिन वे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में शामिल थे और डीजे के ठीक पीछे खड़े थे। अचानक अब्दुल हमीद के परिवार की ओर से डीजे पर बज रहे गाने पर आपत्ति जताई गई। जब डीजे नहीं रोका गया, तो डीजे ऑपरेटर को गालियाँ दी गईं और थप्पड़ मारा गया। इसके बाद डीजे की लीड खींच ली गई और दुर्गा प्रतिमा पर पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे मूर्तियाँ खंडित हो गईं। इस घटना के बाद तनाव बढ़ गया और हिंसा फैल गई।

विनोद मिश्रा बताते हैं कि उस वक्त उन्हें लग रहा था कि वे शायद इस हिंसा में बच नहीं पाएंगे। पत्थरबाजी में कई लोगों के सिर फट गए, तो कई के हाथ टूट गए। बवाल इतना बढ़ गया कि मस्जिदों से ऐलान किया जाने लगा कि “जो दिखे उसे काट दो।” इसके बाद भारी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथी तलवार और डंडे लेकर सड़कों पर निकल आए। शोभायात्रा में जा रही भीड़ भी उग्र हो गई और देखते ही देखते हिंसा ने विकराल रूप ले लिया।

विनोद का दावा है कि हिंसा के दौरान उनके घर पर भी हमला हुआ। अब्दुल हमीद के परिवार के लोग उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किसी तरह से उन्होंने अपनी जान बचाई। दूसरी ओर, रामगोपाल मिश्रा के परिवार पर भी हमला किया गया, जिनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रामगोपाल को बचाने के लिए लोग हमीद के घर में घुसे थे, लेकिन पत्थरबाजी के कारण उन्हें भी चोटें आईं। विनोद का कहना है कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका है।

हिंसा के बाद से ही महराजगंज कस्बे में तनाव का माहौल है। पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती कर दी गई है और हर आने-जाने वाले से सख्ती से पूछताछ की जा रही है। जिले में बाहरी लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इलाके में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है।

बहराइच हिंसा की जड़ें और पुलिस की कार्रवाई

13 अक्टूबर 2024 को बहराइच के महराजगंज कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद शुरू हुआ, जिससे हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद कस्बे में लगातार दो दिनों तक हिंसा होती रही, जिसमें उपद्रवियों ने कई दुकानों और घरों में आग लगा दी।

इस हत्याकांड के मुख्य आरोपितों में मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद तालिब शामिल थे, जिनकी पुलिस से मुठभेड़ बहराइच के नानपारा बायपास पर हुई। पुलिस ने उन्हें घेरकर जवाबी फायरिंग की, जिसमें दोनों आरोपी घायल हो गए। ये आरोपित नेपाल भागने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस ने इन्हें धर दबोचा।

इसके अलावा पुलिस ने पाँच और लोगों में से तीन अन्य मोहम्मद फहीन, मोहम्मद हमीद और मोहम्मद अफजल को भी गिरफ्तार किया। सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘कटे हुए पेड़ से ज्यादा सस्ता है कटा हुआ सिर’: 3 बेटियों के साथ बलिदान हुईं अमृता देवी, कुल 363 लोग कुल्हाड़ी से काटे गए, उसी समाज के लोगों का हुआ नरसंहार जिससे आता है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई

कटे हुए पेड़ से ज्यादा सस्ता है कटा हुआ सिर

यह आखिरी शब्द थे, उस महिला के लिए जो पेड़ ब​चाने के लिए बलिदान हो गईं। उनका नाम था- अमृता देवी बिश्नोई (Amrita Devi Bishnoi)। उनकी तीन बेटियाँ भी बलिदान हो गईं। कुल मिलाकर 363 लोगों का बलिदान हुआ। सबको कुल्हाड़ी से काटा (khejarli Massacre) गया था। ये सारे बलिदानी उसी बिश्नोई समाज से थे, जिस समाज का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) आजकल सुर्खियों में है।

अमृता देवी का बलिदान

बात 11 सितंबर 1730 की है। राजस्थान के शुष्क रेगिस्तान में प्रचुर मात्रा में खेजड़ी पेड़ों से भरा बिश्नोई समाज का एक खेजरली गाँव है। इस गाँव के लोग शुरुआत से ही वनस्पतियों को पूजनीय मानकर हमेशा उनकी पूजा करते हैं, जान देकर वृक्षों की रक्षा करते हैं। अमृता देवी बिश्नोई और बाकी 363 लोगों ने भी यही किया था। आज पूरा बिश्नोई समाज अपने पुरखों के बलिदान की कहानी बच्चे-बच्चे को सुनाता है। वहीं दुनिया उस घटना को ‘खेजरली नरसंहार’ के तौर पर जानती है।

इस नरसंहार के पीछे का कारण जोधपुर के तत्कालीन महाराजा अभय सिंह का एक आदेश बताया जाता है। 1730 में महाराजा की ओर से आदेश आया कि नए महल के निर्माण के लिए खेजरली गाँव में लगे खेजड़ी के पेड़ों को काटा जाए…आदेश सुन राजा के दूत बड़ी-बड़ी कुल्हाड़ी लेकर गाँव की ओर बढ़ने लगे। जब अमृता देवी को इसका पता चला तो वो अपनी तीन बेटियों के साथ राजा के लोगों के सामने आ खड़ी हुईं।

हाथ में कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने आए पुरुष हैरान थे कि वृक्ष के बदले वो महिला अपनी बेटियों समेत अपनी जान देने को तैयार थी। उनकी बहादुरी को देख समाज के सैंकड़ों लोग उनके पीछे थे। अमृता देवी को समझाया गया लेकिन पर्यावरण के लिए उनका अटूट प्रेम, जान से बढ़कर था। उन्होंने वही बात कही जो आपने ऊपर पढ़ीकटे हुए पेड़ से ज्यादा सस्ता है कटा हुआ सिर। वो पेड़ से लिपटी रहीं और आखिर में सैनिकों ने उनका सिर काटकर उनका शरीर चीर दिया। बेटियाँ स्तब्ध थीं। मगर उन्होंने भी वही किया जो माँ को करते देखा था।

अमृता देवी बिश्नोई और उनकी बेटियों के इस बलिदान की सूचना जब समाज के अन्य लोगों को मिली तो विरोध बढ़ गया। 83 गाँवों के बिश्नोई समाज के लोग वृक्षों को बचाने खेजरली पहुँचे और किसी ने जान की परवाह नहीं की। उन्होंने अहिंसक रास्ते पर चलते हुए अपनी वनस्पति बचाने की कोशिश की जिसके बाद कहा जाता है कि 49 गाँव के 363 लोग बलिदान हुए।

राजा ने बिश्नोई समाज से माँगी माफी, निकाला आदेश

इस बीच लड़की लाने का आदेश देने वाले राजा अभय सिंह को जब गाँव में चल रहे संघर्ष के बारे में पता चला, तब फौरन उन्होंने पेड़ काटने के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही बिश्नोई समाज के लोगों से न केवल माफी माँगी बल्कि एक आदेश जारी किया जिसके बाद इस समाज के लोगों के ग्रामों के आसपास पेड़ काटने और जानवर मारने पर रोक लगा दी गई।

साल बीते, दशक बीते, सदियाँ बीती। मगर सन् 1730 की यह घटना राजस्थान के लोग कभी नहीं भूले। नतीजतन खेजड़ी के पेड़ को प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना गया और 2013 में, पर्यावरण और वन विभाग ने 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के रूप में घोषित किया।

राजस्थान से बाहर अन्य़ समाज के लोग भी जानते हैं कि बिश्नोई समाज के लिए हर पौधा और जानवर मनुष्य जीवित प्राणी की तरह है। वह उन्हें संरक्षित करने के लिए किसी भी हद्द तक जाते हैं। बिश्नोइयों के उस प्रदर्शन का ही नतीजा था कि लोग प्रकृति को संरक्षित करने के लिए सचे हुए और हमने इतिहास में आगे चलकर टिहरी गढ़वाल में चिपको आंदोलन (1973), बिहार-झारखंड में जंगल बचाओ आंदोलन (1982), कर्नाटक के पश्चिमी घाट में अप्पिको चालुवली (1983) जैसे विरोध प्रदर्शन हुए। जिनका असर विदेशों तक देखने को मिला।

बिश्नोई समाज का परिचय

बता दें कि बिश्नोई समाज पश्चिमी थार रेगिस्तान और भारत के उत्तरी राज्यों में पाया जाने वाला समुदाय है। इसके संस्थापक जांभोजी महाराज है। बिश्नोई समाज उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मान उनकी पूजा करता है। उन्हीं के संदेशों को पालन कर ये समाज जीवनयापन करता है और यही वजह भी है कि ये काले हिरण को इतना मानते हैं। कहा जाता है कि गुरु जंभेश्वर ने अपने अनुयायियों से कहा था कि वह काले हिरण को उन्हीं का स्वरूप मान कर पूजा करें। यही वजह है कि बिश्नोई हिरणों की खास रूप से पूजा करते हैं। बिश्नोई समाज का मुख्य मंदिर ‘मुक्तिधाम मुकाम’ भी राजस्थान के बीकानेर में है।

नोट: इस रिपोर्ट में जिस खेजरी पेड़ के बारे में बात हुई है उसके बारे में बता दें कि इसे शमी के पेड़ के नाम से भी जाना जाता है। ये सामान्यत: रेगिस्तान में मिलता है लेकिन इसकी खास बात है कि रेगिस्तान के शुष्क माहौल में भी ये पेड़ हरा-भरा रहता है। मरुस्थल में ये न लोगों को केवल ठंडी छाँव देकर गर्मी से बचाता है बल्कि इसके पात पशुओं का आहार बनते हैं।

बहराइच में चलेगा योगी का बुलडोजर? जहाँ हुई हिंसा वहाँ अवैध निर्माणों पर लाल निशान, रिपोर्ट में दावा- सुनियोजित था हिंदुओं पर हमला, अब्दुल हमीद ने कर रखी थी पूरी तैयारी

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के महराजगंज कस्बे के हिंसा प्रभावित इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन ने अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगाए हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हमला सुनियोजित था।

इसके अनुसार मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद और उसके साथियों ने दहशत फैलाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। हमीद की छत पर पत्थर, ईंटें और काँच की बोतलें जमा की गईं थी। 13 अक्टूबर 2024 को इसी हिंसा के दौरान रामगोपाल मिश्रा की हत्या कर दी गई थी।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई: अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

बहराइच हिंसा के बाद योगी सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। बहराइच के महराजगंज कस्बे में अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने की योजना बनाई गई है। गुरुवार को राजस्व और लोक निर्माण विभाग की टीम ने अतिक्रमण चिह्नित कर लिया है। माना जा रहा है कि मुख्य आरोपितों समेत 30-40 मकान ध्वस्तीकरण की जद में आ सकते हैं।

महराजगंज कस्बे के कई दुकानदारों ने सड़क किनारे अतिक्रमण कर रखा है, जिससे रास्ते संकरे हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी अतिक्रमण के कारण शोभायात्रा के दौरान भीड़ और टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। माना जा रहा है कि इस अव्यवस्था के कारण ही बवाल भड़का, जिसमें रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

ग्रामीणों की शिकायत पर कुछ समय पहले ही महसी के विभिन्न कस्बों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। अब प्रतिमा विसर्जन यात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद यह अभियान फिर से शुरू होने की संभावना है।

बहराइच हिंसा की तैयारी पहले से, छत पर मिले ईंट-पत्थर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपितों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। इस दौरान दो मुख्य आरोपितों—मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद तालिब—के साथ पुलिस की मुठभेड़ भी हुई। यह मुठभेड़ बहराइच के नानपारा बायपास पर हुई, जहाँ पुलिस ने आरोपितों को घेर लिया था। पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों आरोपित घायल हो गए। इन आरोपितों को नेपाल भागने की फिराक में पकड़ा गया।

हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार बरामद

इस हत्याकांड में उपयोग किए गए हथियारों की भी बरामदगी हुई है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद भी आरोपितों के इरादे खतरनाक थे। उन्होंने अपने पास एक अवैध असलहा छिपा रखा था ताकि जरूरत पड़ने पर फिर से दहशत फैलाई जा सके। इसका प्रमाण उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग करके दे दिया।

घायल आरोपितों को इलाज के लिए पहले नानपारा सीएचसी ले जाया गया, फिर गंभीर हालत देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया, जहाँ चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात किए गए हैं।

मुठभेड़ के बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें एक पुलिसकर्मी आरोपियों से कहता है कि पुलिस पर हमला करना गलत था। इस पर एक आरोपी कहता है, “अब गलती नहीं करेंगे, हम लोग फायर करके भागना चाह रहे थे।” पुलिसकर्मी ने जवाब दिया, “पहले अपराध किया और फिर दूसरा अपराध कर रहे हो।” आरोपितों ने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन यह स्पष्ट था कि उनके इरादे बेहद खतरनाक थे।

पुलिस ने आरोपितों के ठिकानों पर छापा मारा और पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों के नाम मोहम्मद फहीन, मोहम्मद तालिब, मोहम्मद सरफराज, मोहम्मद हमीद और मोहम्मद अफजल हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, जो लोग इन आरोपियों को संरक्षण दे रहे थे, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि बहराइच में हिंसा की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि हिंसा के जिम्मेदार आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पता था क्यों हुई आतंकी निज्जर की हत्या, फिर भी बदला जाँच का रुख: कनाडा की पोल उनके ही पूर्व NSA ने खोली, विपक्ष बोला- ध्यान भटकाने के लिए भारत को घसीट रहे ट्रूडो

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत के बारे में कनाडा कि पूर्व NSA जोडी थॉमस ने नए खुलासे किए हैं। जोडी थॉमस ने कहा है कि कनाडा पुलिस ने पहले इसे जवाबी हत्या का मामला मान कर जाँच की थी। उन्हें लगा था कि यह कार्रवाई रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या के जवाब में की गई है। मलिक 1985 में एयर इंडिया विमान में धमाका करने का आरोपित था।

जोडी थॉमस ने यह खुलासे कनाडा में विदेशी दखल की जाँच करने वाली कमिटी के सामने किए हैं। इसी कमिटी के सामने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने के पक्के सबूत ना होने की बात कबूली थी। जोडी थॉमस ने इस कमिटी के सामने निज्जर की हत्या के मामले में जाँच की जानकारी दी है।

जोडी थॉमस निज्जर की हत्या के समय कनाडा की NSA थीं। उन्होंने इस कमिटी को बताया, “निज्जर की हत्या जून, 2023 में हुई थी। यह एक ही गुरूद्वारे में हुई दूसरी हाई प्रोफाइल हत्या थी। इसी गुरूद्वारे में ठीक एक साल पहले रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या हुई थी। तब पुलिस और खुफिया जाँच में शुरुआत में कहा गया था कि निज्जर की हत्या, मलिक की हत्या का जवाब थी।”

थॉमस ने इसके बाद बताया, “सिख समुदाय इस नतीजे से संतुष्ट नहीं था। वह इस मामले में अपनी शंकाएँ जता रहे थे। इस मामले में पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अच्छा काम किया। इस बात की काफी संभावना है कि यह एक एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग थी।”

भारत ने कनाडा से उसके आरोपों पर सबूत माँगे हैं। हालाँकि, कनाडा अभी तक इस मामले में कोई सबूत नहीं पेश कर पाया है। इसको लेकर भी जोडी थॉमस ने जानकारी दी। जोडी थॉमस ने कहा, “हम इस मामले में भारत को अपने साथ लाना चाहते थे। हम इसमें ऐसा सबूत भी रखना चाहते थे जो अमेरिका ने पन्नू मामले में रखा है। लेकिन यह कठिन था क्योंकि हमने जानकारी तो साझा की लेकिन अमेरिका के इतनी नहीं कर पाए क्योंकि हम तब तक जाँच भी कर रहे थे। हम किसी हत्या की साजिश की नहीं बल्कि असल हत्या की जाँच कर रहे थे।”

जोडी थॉमस के इस खुलासे के बाद भारत के उन दावों को और मजबूती मिली है कि वह निज्जर की हत्या में शामिल नहीं था और इस संबंध में कोई सबूत नहीं है। हालाँकि, जोडी थॉमस ने अपने बयान में भारत को ही इस हत्या का जिम्मेदार माना है। थॉमस ने भारत पर वैसे ही आरोप जड़े हैं जैसे उनके प्रधानमंत्री ट्रूडो ने लगाए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले ट्रूडो भी इसी कमिटी के सामने पेश हुए थे और उन्होंने भारत के दावे को मजबूत किया था। इसके बाद भारत ने कहा था कि कनाडा और भारत के रिश्तों को खराब करने के जिम्मेदार अकेले ट्रूडो होंगे। ट्रूडो के दावे पर कनाडा के भीतर भी सवाल उठे हैं।

कनाडा के बड़े नेता मैक्सिम बर्नियर ने ट्रूडो पर इस मामले के बहाने दूसरे विवादों पर पर्दा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि इस हत्या के मामले में कोई भी सबूत नहीं पेश किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हरदीप सिंह निज्जर कोई कनाडाई था।

बर्नियर ने एक्स पर लिखा, “एक मिथक को दूर किया जाना चाहिए, इस पूरे मुद्दे के केंद्र में जो खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर है और उसकी पिछले साल हत्या कर दी गई थी, एक कनाडाई था। वह असल में एक विदेशी आतंकवादी था जिसने 1997 से कई बार कनाडा में शरण लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उसके दावों को खारिज कर दिया गया लेकिन फिर भी उसे इस देश में रहने की अनुमति दी गई और किसी तरह 2007 में उसे नागरिकता दे दी गई।”

जस्टिन ट्रूडो के दावों पर कनाडा लगातार फंसता जा रहा है। कनाडा की स्थिति इस मामले में काफी कमजोर है और भारत झूठे आरोपों को कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। भारत ने कनाडा के 6 राजनयिकों को निकाल दिया है और अपने भी राजनयिक वापस बुला लिए हैं।

‘मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बहकाया, माफ कर दो’: हिंदू लड़कियों को रेप की धमकी देने वाला जहाँगीर अब जोड़ रहा हाथ, लगा रहा जय श्रीराम के नारे; देखिए Video

सोशल मीडिया पर हिंदुत्व की बात करने वालों के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिखते हैं। हाल में यही काम अजहान जहाँगीर नाम के बीटेक छात्र ने किया। अजहान ने सोशल मीडिया पर दो हिंदू लड़कियों को खुलेआम रेप की धमकियाँ दी और उनके लिए अश्लील भाषा का प्रयोग किया।

जब लोगों ने उसके कमेंट के स्क्रीनशॉट लेकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया तो अजहान घबरा गया और उसको अपना करियर बर्बाद होने का डर सताने लगा। इसके बाद उसने न केवल हाथ जोड़ हिंदुओं से माफी माँगी, बल्कि कहा कि वो सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहेगा।

अजहान ने उसका कमेंट वायरल होने के बाद एक वीडियो अपलोड की है। कैप्शन में लिखा है- “मुझसे गलती हो गई, मैं सभी हिंदुओं से माफी माँगता हूँ, मेरा करियर बर्बाद हो जाएगा।”

वीडियो में वो कहता नजर आया- “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मैं हाथ जोड़कर श्रेया जी और प्रतीक्षा जी से माफी माँगता हूँ। मैंने अपने कौम के कुछ नफरती लोगों के बहकावे में आकर ये सब ट्वीट कर दिया था। मैं आगे से सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहूँगा।”

अजहान ने आगे कहा, “जिन लड़कियों को मैंने रेप धमकियाँ दीं उनसे मैं हाथ जोड़कर माफी माँगता हूँ। अपने कौम के कट्टरवाद लोगों से इन्फ्लुएंस होकर मैंने ये सब कह दिया था। मैं आगे से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दूँगा। बाकी चीजों से कोसों दूर रहूँगा। जय श्रीराम। मुझे माफ कर दें।”

खबर में जोड़े गए स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि अजहान ने प्रतीक्षा और श्रेया नाम की लड़कियों के लिए कैसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। बाद में जब हिंदुत्व नाइट नाम की एक नेटीजन ने इस मुद्दे को उठाया और पूछा कि ये लड़का अजहान जहाँगीर स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी में पढ़ता है। क्या सच में यूनिवर्सिटी ऐसे छात्रों को सपोर्ट करती हैं। अगर नहीं, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। ये लोग कैंपस में पढ़ने वाली महिलाओं के लिए भी खतरा है। इसी ट्वीट के बाद अजहान की वीडियो सामने आई।

हमास चीफ याह्या सिनवार को ढेर कर इजरायल ने गाजा में शांति का दिया खुला ऑफर, बोले नेतन्याहू- बंधकों को वापस करो, हथियार डालो, कल समाप्त हो जाएगा युद्ध

इजरायल में नरसंहार के मास्टरमाइंड याह्या सिनवार को ठिकाने लगाए जाने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बयान जारी किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि सिनवार की मौत गाजा में चल रहे युद्ध का अंत नहीं बल्कि युद्ध के अंत की शुरुआत है।

बेंजामिन नेतन्याहू ने याह्या सिनवार के मारे जाने के बाद शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “एक साल पहले 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकी सरगना याह्या सिनवार ने एक नरसंहार की शुरुआत की थी। यह इजरायल की आजादी और होलोकॉस्ट के बाद अब तक का सबसे खतरनाक हमला था।”

नेतन्याहू ने आगे बताया, “सिनवार के आतंकियों ने 1200 निर्दोष लोगों को मार दिया। इनमें बच्चे, बूढ़े, होलोकॉस्ट से बचने वाले लोग शामिल थे। उन्होंने महिलाओं का रेप किया, पुरुषों के सर काटे। उन्होंने बच्चों को जलाया और 251 लोगों को बंधक बना लिया। अब इस आतंकी हमले का सरगना मारा जा चुका है, याह्या सिनवार मर चुका है।”

बेंजामिन नेतन्याहू ने सिनवार की मौत के बारे में बताते हुए कहा, “उसे राफा के भीतर इजरायली सुरक्षा बलों के बहादुर जवानों ने मार गिराया। यह गाजा के भीतर युद्ध का अंत नहीं है बल्कि यह युद्ध के अंत की शुरुआत है। मेरा गाजा के लोगों के लिए एक सीधा संदेश है, यह युद्ध आज कल सकता है अगर हमास अपने हथियार डाल दे और हमारे बंधको को लौटा दे।”

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि हमास ने अभी 101 लोगों को बंधक बना रखा है, इनमें इजरायली नागरिकों के अलावा दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल सबको वापस छुडवा कर उनके घर पहुंचाएगा, यह उसकी गारंटी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई हमास की मदद करेगा तो ढूंढ कर मारा जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ ईरान ने एक आतंक की धुरी बनाई थी, जो अब खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, “नसरल्लाह की मौत हो चुकी है, उसके डिप्टी मोहसिन की मौत हो चुकी है। हनियेह की मौत हो चुकी है और दाईफ की भी मौत हो चुकी है और अब सिनवार भी मारा जा चुका है। ईरान की आतंकी रिजीम जल्द ही खत्म होगी।”

इससे पहले बुधवार (17 अक्टूबर, 2024) को इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने राफा के भीतर एक इमारत में हमास के मुखिया याह्या सिनवार को मार गिराया। याह्या सिनवार के मारे जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह इजरायली सुरक्षाबलों से घिरा हुआ दिखाई पड़ता है।

सिनवार को जुलाई, 2024 में ही हमास का मुखिया बनाया गया था। सिनवार, इस्माइल हानियेह की मौत के बाद हमास का मुखिया बना था। खान युनिस के एक कैंप में पड़ा होने वाला सिनवार 7 अक्टूबर के हमले का मास्टरमाइंड था और हमास-ईरान को नजदीक लाने में उसकी प्रमुख भूमिका थी।

कहीं हिंदू लड़की का रेप, कहीं धर्म परिवर्तन का दबाव… कानपुर में ‘राज’ बन जफर ने तो पीलीभीत में ‘राहुल’ बन जावेद ने फँसाया: वीडियो से ब्लैकमेल कर रहे थे लव जिहादी

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के दो हालिया मामलों ने एक बार फिर समाज में चर्चा का विषय बना दिया है। दोनों ही घटनाओं में मुस्लिम युवकों ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू नाम से लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाया और फिर उनका शोषण किया। पहली घटना पीलीभीत की है, जहाँ जावेद नाम के युवक ने ‘राहुल’ बनकर युवती से दोस्ती की। वहीं, कानपुर में जफर नाम के युवक ने खुद को ‘राज’ बताकर नाबालिग को अपनी शिकार बनाया। इन दोनों ही मामलों में युवकों ने दुष्कर्म के बाद पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया और उनके अश्लील वीडियो बनाए।

पीलीभीत में राहुल बनकर जावेद ने किया लव जिहाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीलीभीत में जावेद नाम के युवक ने अपना नाम ‘राहुल’ बताकर एक युवती से सोशल मीडिया पर दोस्ती की। होली के समय वह उससे मिलने आया और एक कैफे में ले जाकर उसका दुष्कर्म किया। उसने इस घिनौने कृत्य का वीडियो भी बनाया और युवती को धमकी दी कि अगर वह उसके साथ नहीं रहेगी, तो वह यह वीडियो वायरल कर देगा। इस धमकी के बाद जावेद ने कई बार युवती का शारीरिक शोषण किया।

रविवार (13 अक्टूबर 2024) को दशहरे के मेले में आरोपित जावेद युवती से मिलने आया और जबरन उसे अपने साथ ले जाने लगा। युवती के विरोध करने पर उसने उसे पीटा और गला दबाने की कोशिश की। इस दौरान जावेद ने अपना असली नाम और मजहब बताया और युवती पर इस्लाम मजहब अपनाने का दबाव बनाया। उसने धमकी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करेगी, तो वह उसका वीडियो वायरल कर देगा। युवती के चिल्लाने पर आसपास के लोग इकट्ठे हो गए और जावेद मौके से भाग गया। बाद में युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जावेद को गिरफ्तार कर लिया है।

कानपुर में राज बनकर जफर ने नाबालिग से किया रेप, मतांतरण की साजिश

दूसरी घटना कानपुर के बिधनू थाना क्षेत्र की है, जहाँ जफर नाम के युवक ने खुद को ‘राज’ बताकर एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से दोस्ती की। एक दिन वह उसे स्कूल से घर छोड़ने के बहाने एक अनजान जगह ले गया और कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। इसके बाद उसने लड़की का अश्लील वीडियो बना लिया और उसे ब्लैकमेल करने लगा।

जब लड़की ने बात करना बंद कर दिया, तो जफर ने उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद उसने लड़की पर मतांतरण का दबाव भी बनाया। वीडियो वायरल होने के बाद लड़की ने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में भी मामला दर्ज कर आरोपित जफर की तलाश शुरू कर दी है।

असली पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों को बनाया शिकार

पीलीभीत और कानपुर की घटनाओं में कई समानताएँ हैं। दोनों ही मामलों में आरोपियों ने पहले अपनी मजहबी पहचान छुपाई, लड़कियों को धोखे से प्रेमजाल में फंसाया और फिर दुष्कर्म किया। इसके बाद उन्होंने पीड़िताओं को अश्लील वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल किया और जबरन मतांतरण का दबाव बनाया। इन घटनाओं ने लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दे पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

लव जिहाद के तहत अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहाँ मुस्लिम युवक अपनी असली पहचान छिपाकर, लड़कियों को मानसिक और शारीरिक रूप से शोषण का शिकार बनाते हैं। इसके बाद उन पर मतांतरण का दबाव डालते हैं। उत्तर प्रदेश में लव जिहाद से जुड़े कई मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, और सरकार ने इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

दोनों ही मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पीलीभीत में पुलिस ने आरोपित जावेद को गिरफ्तार कर लिया है और कानपुर में जफर की तलाश की जा रही है। पुलिस ने पीड़िताओं के बयान और उनके परिवारों की शिकायतों के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पत्नी सेक्स से करे इनकार, तो क्या पति के पास तलाक ही विकल्प: वैवाहिक बलात्कार पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, मैरिटल रेप को ‘अपराध’ बनाने के हक में नहीं केंद्र

सुप्रीम कोर्ट ने देश में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की माँग करने वालों की दलीलें सुनना चालू कर दिया है। कोर्ट ने यह माँग करने वालों से पूछा है कि आखिर यह देश में विवाह को लेकर क्या स्थिति पैदा करेगा। इससे पहले केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप को मान्यता देने का पक्ष लेने से इनकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने बुधवार (17 अक्टूबर, 2024) को मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की याचिकाएँ डालने वालों की दलीलें सुनना चालू किया और इस दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यदि वह उस कानून को खत्म कर दे, जिसके अंतर्गत पत्नियां अपने पति पर रेप का आरोप नहीं लगा सकतीं,तो क्या वह कोई नया अपराध परिभाषित कर रहा होगा। इसके अलावा कोर्ट ने इसे मैरिटल रेप घोषित करने के परिणामों पर भी चर्चा की।

जस्टिस जेबी पारदीवाला ने पूछा, “अगर पति सेक्स करने को कहता है और पत्नी मना कर देती है तथा वह मानती ​​है कि उसके पति को ऐसा नहीं करना चाहिए था। इसके बाद अगले दिन वह जाकर FIR भी दर्ज करा देती है कि ऐसा हुआ, तो आपका इस पर क्या नजरिया है। हम इस पर आपकी मदद चाहते हैं।”

मैरिटल रेप की माँग करने वालों की तरफ से पेश हुईं वकील करुणा नंदी ने इस पर कहा, “वर्तमान क़ानून सेक्स को लेकर मेरा ना कहने या फिर ख़ुशी से हाँ कहने का अधिकार छीन लेता है। कानून में दी गई छूट के कारण मैं (महिलाएँ) एक यौन वस्तु और कानूनी चीज बन कर रह गई हूँ।” करुणा नंदी ने दावा किया कि पितृसत्ता के खिलाफ एक लड़ाई है।

इस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला ने बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “तो आपका तर्क है कि यदि बीवी सेक्स को लेकर ‘नहीं’ कह दे तो पति के पास केवल एक विकल्प तलाक दाखिल करना है।” इस पर करुणा नंदी ने कहा पति को पत्नी की हाँ का इंतजार करना चाहिए और अगर वह तलाक लेना चाहता है तो वह भी ले सकता है।

करुणा नंदी ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने पर नया कानून बनाने के लिए सवाल पर कहा कि अभी के क़ानून के तहत ही यह किया जा सकता है। नंदी ने यह दलील भी दी कि किसी पति का अपनी पत्नी के साथ जबरदस्ती संबंध बनाना या फिर किसी दूसरे व्यक्ति का एक महिला के साथ संबंध बनाना एक समान हैं। नंदी ने नेपाल का उदाहरण भी दिया।

केंद्र ने क्या बताया था?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर ‘मैरिटल रेप’ को अपराध बनाने को अत्यधिक कठोर और असंगत बताया है। अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार कानूनी से अधिक सामाजिक मुद्दा है, जिसका सीधा असर आम समाज पर पड़ता है।

केंद्र ने तर्क दिया कि अगर ‘वैवाहिक बलात्कार’ को अपराध माना भी जाता है तो ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के बस की बात नहीं है। इस मुद्दे पर सभी हितधारकों से उचित परामर्श किए बिना या सभी राज्यों के विचारों को ध्यान में रखे बिना निर्णय नहीं लिया जा सकता।

केंद्र सरकार ने कहा कि विवाह में अपने जीवनसाथी से उचित यौन संबंध बनाने की निरंतर अपेक्षा की जाती है। ऐसी अपेक्षाएँ पति को अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उससे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं देती हैं। केंद्र ने कहा कि इस तरह के कृत्य के लिए बलात्कार विरोधी कानूनों के तहत किसी व्यक्ति को दंडित करना अत्यधिक और असंगत हो सकता है।

अभी क्या है कानून?

अभी के कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी, जिसकी आयु 18 वर्ष से कम है, से उसकी सहमति के बगैर सेक्स करता है, तो इसे रेप नहीं माना जाता। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के तहत, जिसमें रेप को लेकर कानून बनाए गए हैं, उसमें इस समबन्ध में एक अपवाद जोड़ा गया है। यह अपवाद संख्या 2 के नाम से प्रचलित है। पत्नी की बगैर सहमति के सेक्स करने को मैरिटल रेप घोषित करने की माँग करने वाले इस अपवाद को समाप्त करने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट पहुँचे हैं।

क्या होता है मैरिटल रेप?

दरअसल, पत्नी की अनुमति के बिना पति द्वारा जबरन शारीरिक संबंध बनाने को मैरिटल रेप या वैवाहिक बलात्कार कहा जाता है। इसे पत्नी के खिलाफ एक तरह की घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न माना जाता है। कई देशों में इसके लिए कानून भी बनाए गए हैं। हालाँकि, भारत में वैवाहिक संस्था बचाने के नजरिए से इसे अपराध का दर्जा नहीं दिया गया है।

मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की माँग का लगातार विरोध भी होता आया है। राष्ट्रीय पुरुष आयोग की अध्यक्ष बरखा त्रेहान ने इससे विवाह पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएँ जताई हैं। उन्होंने इसको लेकर कहा, “आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें पुरुषों को घरेलू मामलों में झूठा फँसाया जाता है। इस कारण से पुरुषों में आत्महत्या की दर भी बहुत अधिक बढ़ गई है। जब पुरुषों के खिलाफ इस सीमा तक पहले से ही दुराग्रह है तो ऐसे में वैवाहिक बलात्कार तो उसके खिलाफ एक बहुत बड़ा हथियार बन जाएगा।”

उन्होंने मैरिटल रेप की परिभाषा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में कहा, “आप ही बताएँ कि कैसे और कब कोई यह तय कर सकेगा कि बेडरूम में आखिर क्या हुआ था और इसकी सीमा में क्या-क्या आएगा? एक पति और पत्नी के बीच पचास तरह की लड़ाई होती है। ऐसे में कैसे तय हो पाएगा कि कब बलात्कार हुआ और कब आपसी सहमति से दोनों के बीच संबंध बने? यदि ऐसा ही रहेगा तो आज के युवा शादी करने से बचते फिरेंगे। वे शादी ही नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें इस बात का भय हमेशा रहेगा कि कब उन पर बलात्कारी होने का ठप्पा लग जाएगा?”

‘उन्हें पकड़ा जरूर, लेकिन मारा नहीं’: सरफराज-तालिब के ‘एनकाउंटर’ पर बोली रामगोपाल मिश्रा की विधवा, परिजन बोले- वे बिरयानी खाकर कुछ दिन में बाहर आ जाएँगे

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को बहराइच में हुई एक मुठभेड़ के बाद तालिब और सरफराज को गिरफ्तार किया है। इस दौरान दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने रविवार (13 अक्टूबर) को हुए रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में अब तक कुल 5 आरोपितों को गिरफ्तार करके उन पर NSA के तहत कार्रवाई का ऐलान किया है। हालाँकि रामगोपाल के परिजन व ग्रामीण इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। मुठभेड़ के बाद ऑपइंडिया ने रामगोपाल के गाँव रेहुआ से जमीनी हालातों का जायजा लिया।

एक और FIR, लगेगा NSA

रामगोपल हत्याकांड के बाद पुलिस नामजद व अज्ञात आरोपितों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। इस बीच पुलिस ने तालिब और सरफराज सहित 5 आरोपतितों को गिरफ्तार किया। तालिब और सरफराज को जब हथियार बरामदगी के लिए ले जाया गया तो उन्होंने पुलिस पर फायर किया। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी। वायरल हो रहे एक वीडियो में दोनों आरोपितों को कराहते हुए और पुलिस से माफ़ी माँगते देखा जा सकता है। घटना के एक वीडियो में घायल तालिब और सरफराज को पुलिस के कंधों में देखा जा सकता है।

ये दोनों बार-बार पुलिस से कह रहे, “दोबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे।” पुलिस ने दोनों को सरकारी वाहन में बिठाया और अस्पताल ले गई। पुलिस ने खुद पर हुए हमले की अलग से FIR तालिब और सरफराज पर दर्ज की है। इस FIR में हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराएँ लगाई गईं हैं। इस मुठभेड़ के बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने बताया कि कुल 5 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हाफ एनकाउंटर से संतुष्ट नहीं परिवार

तालिब और सरफराज से हुई मुठभेड़ व 5 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद रामगोपाल के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई को असंतोषजनक बताया है। रामगोपाल की विधवा रोली मिश्रा ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में रोली मिश्रा ने पुलिस पर रिश्वत लेने और अपनी माँगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। वीडियो में रोली ने कहा, “उन्हें पकड़े तो जरूर हैं लेकिन मारा नहीं गया है। हम लोगों को दिखा दिया गया है कि पैर पर गोली मारी गई है।”

ऐसा एनकाउंटर रामगोपाल के परिवार के लिए न्याय नहीं

एनकाउंटर के बाद ऑपइंडिया की टीम 17 अक्टूबर (गुरुवार) को रामगोपाल मिश्रा के गाँव रेहुआ पहुँची। गाँव में पुलिस की गाड़ियाँ लगातर हूटर बजा कर गश्त कर रहीं थीं। रामगोपाल मिश्रा के घर के चारों तरफ पुलिस और PAC के जवान तैनात कर दिए गए थे। किसी को भी घर के बाहर या अंदर आने-जाने की इजाजत नहीं थी। रामगोपाल के भाई हरिमिलन और परिजन राहुल मिश्रा ने हमें फोन पर बताया कि पुलिस के पहरे में वो भी कहीं निकल नहीं पा रहे हैं। मीडियाकर्मियों को भी पीड़ितों से बातचीत की अनुमति नहीं दी गई।

हमने रामगोपाल के घर के आसपास अन्य ग्रामीणों से बातचीत की। सड़क पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने हमें बताया कि वो आरोपितों को जीवित पकड़ने से खुश नहीं हैं। रामगोपाल के ही चचेरे भाई किशन मिश्रा ने कहा कि जिस हिसाब से उनके भाई को मारा गया उसके आगे ऐसे पैर में गोली वाली एनकाउंटर और गिरफ्तारियाँ न्याय नहीं माना जा सकता है। किशन मिश्रा ने आगे कहा, “ऐसा पहले होता था। बाबा की सरकार में ऐसा नहीं होता।” किशन मिश्रा का मानना है कि अब सरफराज और उसका परिवार आराम से जेल काटेगा और कुछ दिनों बाद बिरयानी खाकर छूट जाएगा।

घरों और बाजारों में टीवी से चिपके रहे लोग

दोपहर 3 बजे के आसपास अचानक ही महसी व आसपास यह खबर फैली थी कि रामगोपाल मिश्रा के कातिलों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। इस खबर के बाद पूरे बहराइच में लोग टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ देखने लगे। हमने महसी, हरदी और नथुरपुरवा आदि इलाकों सहित बहराइच शहर में भी देखा कि लोग घरों और दुकानों में टीवी पर एक-एक पल की खबर देख रहे थे। शुरू में लोगों को लगा कि सरफराज की मौत हो गई है, हालाँकि बाद में यह बात गलत निकली। फ़िलहाल एनकाउंटर को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

हिंदू लड़की को मुस्लिम बनाने के लिए आशिक अंसारी ने किया अगवा, पीड़ित पिता ने बताया लव जिहाद: तनाव के बाद बरेली के गाँव में भारी पुलिस फोर्स तैनात

उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के बिथरी चैनपुर क्षेत्र से एक और लव जिहाद का मामला सामने आया है, जहाँ मुस्लिम युवक आशिक अंसारी पर आरोप है कि उसने एक हिंदू युवती को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की। इस घटना ने गाँव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके चलते पुलिस ने सुरक्षा के लिए गाँव में फोर्स तैनात की है। फिलहाल आरोपित फरार है और युवती का भी कुछ पता नहीं चल पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिथरी चैनपुर थाना इलाके की 18 वर्षीय युवती 14 अक्टूबर को अपने घर से किसी काम के लिए निकली और फिर वापस नहीं आई। परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उसके पिता ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। हालाँकि, थोड़े समय बाद पता चला कि गाँव का ही युवक आशिक अंसारी उसे बहलाकर भगा ले गया है। युवती के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी लव जिहाद का शिकार हुई है और आशिक ने उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने का प्रयास किया है।

परिवार ने आरोप लगाया कि आशिक अंसारी के परिवार और उसके दोस्तों ने इस अपहरण में उसकी मदद की है। युवती के साथ घर से कुछ जेवरात और 10 हजार रुपये नकदी भी गायब थी। युवती के पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह से लव जिहाद के षड्यंत्र का शिकार हुई है और आशंका है कि उसका मतांतरण भी कराया जा सकता है।

इस घटना के बाद गाँव में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। हिंदू संगठनों ने इस घटना का कड़ा विरोध किया और युवती की तत्काल बरामदगी की माँग की। गाँव के लोग भी इस घटना से काफी आक्रोशित हैं, और हिंदू संगठनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए युवती की जल्द से जल्द बरामदगी की माँग की है।

पुलिस ने आशिक अंसारी, उसके परिवार और दोस्तों के खिलाफ अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जाँच जारी है और आरोपितों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने गाँव में किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए फोर्स तैनात कर दी है।