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आतंकियों की करते थे मदद, उनके लिए हथियार-पैसे जुटाते थे: सरकार ने J&K में 4 सरकारी कर्मचारियों को किया बर्खास्त, अब तक 60+ पर कार्रवाई

जम्मू कश्मीर में आतंकियों की मदद करने वाले और उनके लिए हथियार-पैसा जुटाने वाले 4 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। नौकरी से निकाले जाने वाले कर्मचारियों में से 2 पुलिसकर्मी हैं। सरकार इससे पहले भी दर्जनों कर्मचारियों पर कार्रवाई कर चुकी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने दो पुलिसकर्मी, एक शिक्षा विभाग के कर्मचारी और एक पंचायती राज कर्मचारी को नौकरी से बाहर किया है। सुरक्षा एजेंसियों को इनकी गतिविधियों पर शंका हुई थी और वह इनके खिलाफ जाँच कर रहीं थी। इनके नौकरी के नियमों का उल्लंघन करने पर बर्खास्त कर दिया गया।

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों का नाम इम्तियाज अहमद लोन, बाजिल अहमद मीर, मुश्ताक अहमद पीर और जैद शाह हैं। इनमें से कुछ आतंकियों को हथियार और संसाधन मुहैया करवा रहे थे जबकि बाकी पाकिस्तान के ड्रग तस्करों के साथ मिलकर कश्मीर में नशा फैलाने में जुटे थे।

यह पाकिस्तान के रास्ते आई ड्रग्स को कश्मीर में फैलाते थे और उससे मिले पैसे को आतंक के लिए देते थे। अब इनको जम्मू कश्मीर सरकार की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब जम्मू कश्मीर में सरकारी कर्मचारी आतंक की मदद करते पाए गए हों।

60 से अधिक पर हो चुकी कार्रवाई

जम्मू कश्मीर में इससे पहले जून में भी 4 कर्मचारियों पर ऐसी ही कार्रवाई की गई थी। इसके पहले नवम्बर, 2023 में भी 4 कर्मचारी नौकरी से निकाले गए थे, इन पर भी आतंकियों से संबंध रखने का आरोप था। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि सरकार कम से कम 55 ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर चुकी है जिनके आतंकियों से सबंध थे।

सरकार ने ऐसे कर्मचारियों की पहचान के लिए एक टास्कफोर्स का भी गठन किया हुआ है। नौकरी से निकाले जाने वाले अधिकांश कर्मचारी जम्मू कश्मीर के शिक्षा विभाग या फिर पुलिस विभाग से जुड़े हैं। यह आतंकियों के लिए जमीन तैयार करने का काम करते हैं।

four employees of jammu kashmir government dismissed on terror link charges

न्यूड फोटो बनाकर रब्बानी अब्बास नाबालिग लड़कियों को करता था ब्लैकमेल: यूपी STF ने किया गिरफ्तार, पूछताछ में बोला- कतर से मिली ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से यूपीएसटीएफ ने रब्बानी अब्बास नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। रब्बानी पर आरोप है कि वो साइबर अपराधों में संलिप्त था। लड़कियों से चैटिंग करना, उनकी तस्वीरें हासिल करके उन्हें न्यूड तस्वीर में एडिट करना, फिर लड़कियों को ब्लैकमेल करना, उनसे पैसे ऐंठना उसके काम थे। अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने बताया है कि गिरफ्तार आरोपितएआई/डीपफेक (AI/Deepfake) के जरिए लड़कियों की न्यूड तस्वीर बनाकर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देता था। इसके बाद जब लड़कियाँ डर जाती थीं तो उनसे मोटी रकम भी वसूलता था।

पुलिस को छानबीन में उसके पास से लड़कियों से चैटिंग के स्क्रीनशॉट, लड़कियों की न्यूड तस्वीरें और कई जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, उन्होंने आरोपित रब्बानी को चिनहट थाने से 500-700 मीटर दूर लखनऊ के मटियारी चौहारे से पकड़ा है। उसके विरुद्ध अब साइबर अपराध की गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।

एएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह ने जानकारी दी कि बीते दिनों लखनऊ के गाजीपुर में एक एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें बताया गया था कि एक 15 वर्षीय बच्ची की किसी ने AI व डीप फेक की मदद से न्यूड तस्वीर बनाई और उसे वायरल करने की धमकी देकर होटल में बुला रहा था। इसके बाद यूपी STF ने इस मामले की जाँच शुरू की और मंगलवार को चिनहट इलाके से बाराबंकी के रहने वाले रब्बानी को गिरफ्तार कर लिया।

एएसपी के मुताबिक, पूछताछ में रब्बानी ने बताया कि वह सिर्फ हाई स्कूल (दसवीं) पास है। जनवरी-2023 में वह नौकरी करने कतर गया था। वहीं पर उसने 6 महीने का कम्प्यूटर कोर्स किया। उसने इस दौरान एडिटिंग सीखी। फिर भारत वापस आ गया। इसके बाद जनवरी-2024 में उसने टेलीग्राम पर डीपफेक व Bot NubeeAl ग्रुप से जुडा। इस ग्रुप के जरिए उसे वेबसाइट और ऐप के माध्यम से न्यूड फोटो बनाने के लिए फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर, वेबसाइट और ऐप के साथ वीपीएन इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी हुई।

इसी सब के बाद रब्बानी ने नाबालिग लड़की के इंस्टा अकाउंट से मई 2024 में फोटो और वीडियो चोरी किए। फिर लड़की से चैट की और उसे उसकी न्यूड तस्वीरें भेजकर ब्लैकमेल किया। जब लड़की ने कहा कि वो स्टूडेंट और ऐसा न किया जाए तो रब्बानी ने उसे होटल में मिलने बुलाया।। इसके बाद उसे धमकी दी जाने लगी।

रब्बानी पर आरोप है कि वो करीब 10 लड़कियों के इंस्टा अकॉउंट से फोटो चोरी करके उन्हें मिलने बुला चुका है। उसके पास फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं जो उसने मेकर ऐप से बनाए थे। इसमे उसने अपना नाम राज सिंह बताया हुआ है। इसका प्रयोग वो लड़कियों के आगे खुद को आरजे बताने के लिए करता था और होटलों में इसी आईडी का इस्तेमाल करता था।

झारखंड में जलाभिषेक कर लौट रहे काँवड़ियों पर हमला, राँची-लोहरदगा ट्रेन पर पथराव: दूसरे समुदाय पर लगा मारपीट और लूटपाट का आरोप

झारखंड में भोलेनाथ पर जल अर्पित कर लौट रहे कांवड़ियों पर हमला किया गया। उनकी ट्रेन के ऊपर पथराव की भी सूचना है। यह घटना राँची से लोहरदगा के बीच हुई। कांवड़ियों ने इस मामले में प्रदर्शन किया है। हमला करने का आरोप दूसरे समुदाय पर लग रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोहरदगा जिले से कांवड़ियों का एक समूह राजधानी राँची के पहाड़ी महादेव मंदिर गया था। यह लोहरदगा से यहाँ कांवड़ लेकर जलाभिषेक करने गए थे। इन्होने सोमवार (22 जुलाई, 2024) को राँची में जल अर्पित किया और उसके बाद घर लौट रहे थे।

यह सभी कांवडिये राँची-लोहरदगा के बीच चलने वाली ट्रेन से लौट रहे थे। रास्ते में ही कुछ युवकों ने इन पर अभद्र टिप्पणियाँ और लड़ाई झगड़ा चालू कर दिया। उनके साथ मारपीट और गाली गलौज की गई और लूटपाट भी हुई। बताया गया कि यह मारपीट रास्ते के कई स्टेशन तक जारी रही।

एक पीड़ित ने सोने की चेन खींचने का आरोप भी लगाया है। कांवड़ियों से भरी ट्रेन पर पथराव की भी सूचना है। मीडिया रिपोर्ट्स में दूसरे समुदाय को इस घटना का आरोपित बताया गया है। कांवड़ियों ने घटना से क्षुब्ध होकर लोहरदगा पहुँचने पर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की माँग की। पुलिस प्रशासन ने कांवड़ियों को शांत करवाया है। वहीं RPF ने ऐसी किसी भी घटना की सूचना मिलने से इनकार किया है।

मामले को लेकर झारखंड भाजपा मुखिया और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले को उठाया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने लिखा, “रांची के पहाड़ी मंदिर में जलाभिषेक करने आए कांवड़ियों पर रांची-लोहरदगा ट्रेन में जानलेवा हमला और पथराव किए जाने की सूचना है। असामाजिक तत्वों द्वारा 2-3 स्टेशनों पर उक्त घटना को अंजाम दिया गया है। पवित्र सावन मास में शिवभक्तों के उपर ऐसा कायराना हमला निंदनीय एवं अक्षम्य है।”

हलाल है या झटका… मीट की दुकान के बाहर लिखो: जयपुर नगर निगम ने जारी किया आदेश, शिव मंदिर के पास और काँवड़ियों के रास्ते में मांस बेचने पर भी होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में खाने वाली दुकानों के बाहर मालिक का नाम लिखे जाने का मामला अभी शांत नहीं हुआ कि जयपुर नगर निगम द्वारा भी एक आदेश जारी करने की बात सामने आई है। आदेश में नगर निगम ने कहा है कि हर मीट की दुकान के बाहर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि दुकान में हलाल मीट मिलता है या फिर झटका।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार निगम ने अपने आदेश में खुले में मीट बेचने पर भी प्रतिबंध लगाया है। इसके अलावा ये भी साफ कहा है कि शहर में मीट की दुकानों के लिए लाइसेंस लेना होगा और केवल कमर्शियल जमीन पर ही मीट की दुकानें खोली जा सकेंगी। जो इस आदेश का पालन नहीं करेगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में महापौर सौम्या गुर्जर ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि जयपुर में 150 वार्ड हैं, मैं कई बार लोगों के बीच गई हूँ, इस दौरान लोगों ने इस संबंध में शिकायत की थी। बताया गया था कि कैसे दुकानों पर गंदगी होती है। अब एग्जीक्यूटिव कमेटी ने फैसला लिया है कि जहाँ लोग रहते हैं, उसके आसपास मीट की मंडी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मीट की दुकानों का लाइसेंस नगर निगम उन्हीं को देगा, जिसके पास दुकान का कमर्शियल पट्टा होगा। इसके अलावा महापौर ने काँवड़ यात्रा मार्गों की पवित्रता का भी ध्यान रखते हुए काँवड़ियों के रास्ते में और शिव मंदिर के निकट खुले में मीट बिक्री पर रोक लगाने की बात कही।

जो लोग अपने नाम और धर्म को छिपाकर अलग नाम से धंधा करते हैं उन लोगों के लिए महापौर ने कहा कि इंटरनेट मीडिया से जानकारी मिली है कि सियाराम नाम से कंपनी चलाने वाले तीन मालिक मुस्लिम हैं। ऐसे में पता चलना चाहिए कि कोई हिंदू देवी-देवताओं के नाम से गलत काम तो नहीं कर रहा है।

बता दें कि पिछले दिनों उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा के मद्देनजर सरकारों ने आदेश जारी किया था कि था दुकानदारों को अपना नाम सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित करना होगा। इसके बाद कई तस्वीरें सामने आई जिसमें दुकानदारों ने ऐसा किया भी हुआ था। हालाँकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर इस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी।

₹2000 का जुर्माना भी नहीं भर पा रहे उद्धव ठाकरे और संजय राउत, कोर्ट से माँगी 2 दिनों की मोहलत: रिपोर्ट में दावा, मानहानि का चल रहा केस

शिवसेना-यूबीटी के चीफ उद्दव ठाकरे और उनकी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत को मानहानि के मामले में कोर्ट की कार्रवाई को लेकर 2 हजार रुपए का जुर्माना भरना था, लेकिन वो भर नहीं पाए। जिसके बाद उन्होंने 2 दिन का और समय कोर्ट से माँगा है। उनकी तरफ से कहा गया है कि कोर्ट के अधिकारियों ने कैश एक्सेप्ट ही नहीं किया, इसलिए वो जुर्माने की राशि जमा नहीं कर पाए।

बता दें कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में एक लेख प्रकाशित करने के लिए ठाकरे और राउत के खिलाफ उनके एक पूर्व सहयोगी, शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के नेता राहुल शेवाले ने मानहानि का मामला दर्ज कराया था। शेवाले द्वारा दायर मानहानि की शिकायत की कार्यवाही मझगांव मजिस्ट्रेट अदालत में चल रही है। कार्यवाही के दौरान, मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों को मामले से बरी करने से इनकार कर दिया था और यह आदेश 26 अक्टूबर, 2023 को पारित किया गया था।

नियमों के अनुसार, दोनों को मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को तुरंत चुनौती देनी चाहिए थी, जो उन्होंने नहीं किया। पुनरीक्षण दायर करने के लिए नियमों के तहत निर्धारित बाहरी समय सीमा से 84 दिनों की देरी हुई। इस प्रकार, देरी को माफ करते हुए, सत्र न्यायालय ने 13 जून को उन पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। यह पैसा अगले दो दिनों के भीतर जमा किया जाना है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, ये फाइन उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले में लगाया गया है। उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने कहा कि उन्हें 14 जून को आदेश मिला और अदालत का कैश काउंटर, जहाँ पैसे जमा किए जाने थे, अगले दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अगले कुछ दिनों में अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन प्रक्रिया पूरी करने की औपचारिकताएँ पूरी नहीं हो सकीं और 10 दिन की अवधि बीत जाने के बाद कैश काउंटर पर मौजूद अधिकारियों ने पैसे लेने से इनकार कर दिया।

हालाँकि, शेवाले की ओर से पेश अधिवक्ता चित्रा सालुंखे ने दो दिन का समय माँगने वाले इस नए आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि उनके उदासीन रवैये के कारण ही नकद जमा प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। सालुंखे ने यह भी आरोप लगाया कि यह ठाकरे और राउत की ओर से केवल देरी करने की रणनीति है। अब इस मामले में स्पेशल कोर्ट 31 जुलाई को दलीलें सुनना जारी रखेगा।

T20 विश्व कप जीतने के बाद बागेश्वर धाम वाले बाबा के चरणों में कुलदीप यादव, गुरु पूर्णिमा पर लिया आशीर्वाद: टूर्नामेंट में झटके थे 10 विकेट

T20 विश्व कप 2024 की विजेता टीम के सदस्य कुलदीप यादव बागेश्वर धाम वाले बाबा पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के शरण में एक बार फिर से पहुँचे हैं। गुरु पूर्णिमा से जुड़े कार्यक्रम के दौरान बाएँ हाथ के रिस्ट स्पिनर कुलदीप यादव को मंच पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के चरणों में बैठे हुए देखा गया। कइयों का मानना है कि उन्होंने बागेश्वर धाम वाले बाबा को अपना गुरु मान लिया है। इससे पहले सितंबर 2023 में भी कुलदीप यादव उनका आशीर्वाद लेने पहुँचे थे।

उस दौरान ODI विश्व कप होना था, जिससे पहले उन्होंने बाबा का आशीर्वाद लिया था। कुलदीप यादव ने उस टूर्नामेंट में 11 मैचों में 15 विकेट झटके थे। वहीं ताज़ा T20 वर्ल्ड कप की बात करें तो कुलदीप यादव ने 5 मैचों में 10 विकेट झटके। अब गौतम गंभीर टीम इंडिया के मुख्य कोच बनाए गए हैं और उनके कार्यकाल में भारत पहली सीरीज श्रीलंका से खेलने जा रहा है। वनडे मैचों के लिए टीम में कुलदीप यादव का भी चयन किया गया है।

इस सीरीज से पहले वो मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित हनुमान जी की पीठ पर पहुँचे, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जहाँ के महंत हैं। पहले उनके दादा यहाँ के मठाधीश हुआ करते थे। वीडियो में सुरक्षाकर्मियों के साथ कुलदीप यादव को इस कार्यक्रम में पहुँचे हुए देखा जा सकता है। मंच पर पहुँच कर वो बागेश्वर धाम वाले बाबा के पाँव छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं, फिर वहीं नीचे पालथी मार पर बैठ जाते हैं। बताया जा रहा है कि वो परिवार समेत यहाँ पहुँचे थे।

फ़िलहाल इसका खुलासा नहीं हुआ है कि उन्होंने दीक्षा ली है या नहीं। कुलदीप यादव के प्रदर्शन की बात करें तो 29 वर्षीय गेंदबाज ने 103 वनडे मैचों में 168 विकेट झटके हैं। इस तरह अंतरराष्ट्रीय ट्वेंटी-ट्वेंटी मैचों में उनके नाम 39 पारियों में 69 विकेट दर्ज हैं। उन्होंने 12 टेस्ट मैच भी खेल रखे हैं और इस फॉर्मेट में उन्हें 22 पारियों में 53 विकेट प्राप्त हुए हैं। कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चाहल की जोड़ी को ‘कुलचा’ कहा जाता है, दोनों ने मिल कर कई बल्लेबाजों की नींद उड़ाई है।

‘सिक्योरिटी बुला कर बाहर निकालो’: वकील की बातों से भड़के CJI चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट का फैसला – दोबारा नहीं होगी NEET-UG की परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट में नीट-यूजी पेपर कांड को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि नीट-यूजी का एग्जाम रद्द नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इससे 155 परीक्षार्थियों को फायदा पहुँचा, जिनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। ऐसे में बाकी छात्रों को इसकी वजह से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि परीक्षा की पवित्रता का उल्लंघन किया गया था।

इस बीच, इस मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ एक सीनियर एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्परा पर भड़क गए। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अगर आप चुप नहीं होंगे, तो सिक्योरिटी बुलाकर आपको बाहर कर दिया जाएगा। इसके बावजूद जब सीनियर एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्परा बीच-बीच में बोलते रहे, तो सीजेआई ने बाकायदा गार्ड्स बुलाकर उन्हें बाहर करने के लिए बोल दिया। हालाँकि बाद में वो (सीनियर एडवोकेट) खुद कोर्ट रूम से बाहर चले गए।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार (23 जुलाई 2024) को सुप्रीम कोर्ट में नीट-यूजी से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई में बाधा डालने के लिए सीनियर एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्परा की खिंचाई की। चीफ जस्टिस ने तब हस्तक्षेप किया जब नेदुम्परा ने एक अन्य सीनियर एडवोकेट नरेन्द्र हुड्डा के बोलते समय बीच में बोल पड़े। हुड्डा की बात को बीच में काटते हुए नेदुम्बरा ने कहा, “मुझे कुछ कहना है।” इसके बाद सीजेआई ने उन्हें टोका। लेकिन जब वो नहीं मानें, तो सीजेआई भड़क उठे।

मैथ्यूज नेदुम्परा: मैं आपके सवाल का जवाब दे सकता हूँ। मैं यहाँ मौजूद सभी वकीलों में सबसे वरिष्ठ हूँ। मैं एमिकस (न्यायालय का मित्र) हूँ।

सीजेआई: नहीं। मैंने कोई एमिकस नियुक्त नहीं किया है।

नेदुम्परा: मैं आपके सवाल का जवाब दूँगा।

सीजेआई: मैं नहीं चाहता कि आप सवाल का जवाब दें। बैठ जाइए, नहीं तो मैं आपको कोर्ट से निकलवा दूँगा।

नेदुम्परा: अगर आप मेरा सम्मान नहीं करते हैं, तो मैं खुद ही चला जाऊँगा।

सीजेआई: जब हुड्डा बहस कर रहे हैं, तो मैं नहीं चाहता कि कोई भी हस्तक्षेप करे।

नेदुम्परा: मुझे बस एक बात ही कहनी है।

सीजेआई: (स्टाफ से) कृपया सुरक्षाकर्मियों को बुलाएँ और नेदुम्परा को कोर्ट से निकलवाएँ।

नेदुम्परा: मैं जा रहा हूँ। यह अनुचित है।

सीजेआई: मैथ्यूज, मैं कुछ ऐसा जारी करने के लिए बाध्य हो जाऊँगा जो बहुत ठीक नहीं होगा। आप किसी अन्य वकील को बाधित नहीं करेंगे। मैं इस न्यायालय में प्रक्रिया का प्रभारी हूँ। मैंने पिछले 24 वर्षों से न्यायपालिका को देखा है और मैं किसी भी वकील को मेरी अदालत की प्रक्रिया को निर्देशित करने की अनुमति नहीं दूँगा।

नेदुम्परा: मैंने 1979 से न्यायपालिका को देखा है!

सॉलिसिटर जनरल: यह अवमाननापूर्ण है…

नेदुम्परा: मैं जा रहा हूँ!

पहले भी कोर्ट में भिड़ चुके हैं नेदुम्बरा

बता दें कि नेदुम्परा पहले भी सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ से बहस कर चुके हैं। इस साल मार्च में इलेक्टोरल बॉन्ड मामले की सुनवाई के दौरान, नेदुम्परा ने चीफ जस्टिस की चेतावनी के बावजूद सुनवाई में बाधा डाली थी। चीफ जस्टिस ने नेदुम्परा से कहा था, “मुझ पर चिल्लाओ मत। यह कोई चौपाल की बैठक नहीं है, तुम कोर्ट में हो। तुम कोई अर्जी देना चाहते हो, अर्जी दाखिल करो। तुम्हें चीफ जस्टिस के तौर पर मेरा फैसला मिल गया है, हम तुम्हारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। अगर तुम अर्जी दाखिल करना चाहते हो, तो ईमेल पर दाखिल करो। इस कोर्ट में यही नियम है।”

वैसे बता दें कि ये वकील साहब 2019 में भी सुप्रीम कोर्ट में लड़ चुके हैं। तब इन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस पर एक साल की रोक भी लगी थी लेकिन जज को धौंस नहीं देने की अंडरटेकिंग देने पर जेल की सजा निलंबित कर दी गई थी।

‘एंजेल टैक्स’ खत्म होने का श्रेय लूट रहे P चिदंबरम, भूल गए कौन लेकर आया था: जानिए क्या है ये, कैसे 1.27 लाख StartUps को मिली बड़ी राहत

भारत में अभी की तारीख़ में 1.27 लाख से भी अधिक स्टार्टअप्स चल रहे हैं। साथ ही 110 से अधिक यूनिकॉर्न भी देश में पंजीकृत हैं। ऐसे में उन्हें राहत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘Angel Tax’ की व्यवस्था को ख़त्म कर दिया है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए इसे बेहतरीन फैसला बताया जा रहा है। 2024 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘एंजेल टैक्स’ को खत्म करने की घोषणा की। P चिदंबरम इस पर ताली पीट रहे हैं।

आगे बढ़ने से पहले समझ लेते हैं कि आखिर ये ‘एंजेल टैक्स’ होता क्या है। असल में ये व्यवस्था ऐसे स्टार्टअप्स के लिए सिरदर्द बन गया था, जो कुछ बड़ा करना चाहते हैं। इस कारण स्टार्टअप्स में निवेश का 30% हिस्सा टैक्स के रूप में सरकारी खजाने में चला जाता था। बाहरी निवेशकों से आने वाले निवेश को ‘बाहरी स्रोतों से आमदनी’ मानी जाती थी। यूनियन बजट 2024-25 के बाद अब भारतीय स्टार्टअप्स दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ेंगे, ये तय है।

आयकर अधिनियम, 1961 के 56(2)(viib) के तहत ‘एंजेल टैक्स‘ की व्यवस्था की गई थी। 2012 में कालाधन पर आए ‘व्हाइट पेपर’ के बाद इस टैक्स को लाया गया था। बताया गया था कि इसका उद्देश्य असूचीबद्ध कंपनियों के माध्यम से कालाधन पर लगाम लगाना है। असूचीबद्ध कंपनियों द्वारा भारतीय निवेशकों से जुटाए गए धन पर ये टैक्स तब लगाया जाता है, उस स्थिति में जब शेयरों के दाम कंपनी के ‘फेयर मार्केट वैल्यू’ (FVM) से अधिक हो जाए।

निवेश अगर FVM से अधिक हो गया तो इसके बीच जो अंतर होता है, उस पर 30.9% एंजेल टैक्स लगाया जाता था। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देने और अन्वेषण का समर्थन करने के लिए भी ‘एंजेल टैक्स’ को खत्म करने का फैसला लिया गया है। कई स्टार्टअप्स के पास पहले से ही कम बजट था, ऐसे में उन्हें इस टैक्स से खासी दिक्कत थी। उनके अधिकतर फंड टैक्स में ही चले जाते थे। इससे एंजेल इन्वेस्टर्स भी चिंताग्रस्त होते थे, क्योंकि उनके निवेश की स्क्रूटनी के कारण उन्हें डर बना रहता था।

इससे पहले सरकार ने 21 देशों के नॉन-रेजिडेंट निवेशकों को छूट दी थी। साथ ही मंत्रालय के पैनल द्वारा अनुमति प्राप्त निवेशकों को छूट दी जाती थी। P चिदंबरम ने मोदी सरकार के इस फैसले का श्रेय लेना शुरू कर दिया। उन्होंने लिखा कि ‘एंजेल टैक्स’ खत्म किए जाने के फैसले से उन्हें ख़ुशी हुई है। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस कई सालों से इसे खत्म करने की वकालत कर रही है और हाल ही में उनकी पार्टी के घोषणापत्र में पेज 31 पर भी ऐसा ही कहा गया है।

P चिदंबरम ने ये दावा तो कर दिया, लेकिन वो इस दौरान ये बताना भूल गए कि आखिर ये ‘एंजेल टैक्स’ लेकर कौन आया था। 2012 में जब इसे लाया गया था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली उस UPA-II सरकार में P चिदंबरम बतौर गृह मंत्री मजे काट रहे थे। प्रणब मुखर्जी तब केंद्रीय वित्त मंत्री हुआ करते थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। अब लोग P चिदंबरम को याद दिला रहे हैं कि जो चीज कॉन्ग्रेस लेकर आई, उसे हटाने की माँग वही क्यों कर रही थी, और जब मोदी सरकार ने ये कर दिया तो उसका श्रेय वो क्यों लूट रहे हैं जो इसे लेकर आए थे?

बजट के बाद सोना, कृषि और FMCG वाले शेयर चमके: स्टॉक-म्युचुअल फंड से कमाई पर सरकार ने बढ़ाया है टैक्स, ओवरऑल गिरा शेयर बाजार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 का बजट मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को लोकसभा में पेश कर दिया। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह पहला पूर्ण बजट है। बजट का मुख्य फोकस युवाओं का रोजगार और ग्रामीण क्षेत्र रहा। अन्य कई क्षेत्रों के लिए भी कई योजनाओं का ऐलान किया गया। बिहार और आंध्र प्रदेश पर विशेष ध्यान दिया गया। हालाँकि, इन सबके बावजूद शेयर बाजार ने बजट को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया।

टैक्स के चक्कर में टूटा बाजार

शेयर बाजार ने बजट को लेकर कोई ख़ास उत्साह नहीं दिखाया। बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (लम्बी अवधि तक किसी निवेश को रखने से होने वाले फायदे पर टैक्स) को बढ़ाया जाएगा। इसकी दरों को 10% को 12.5% कर दिया गया। इसके अलावा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स(छोटी अवधि में लाभ पर कर) को भी 15% से 20% कर दिया गया। अब स्टॉक और म्युचुअल फंड से होने वाली कमाई पर टैक्स बढ़ जाएगा। इस कारण बाजार को निराशा हुई।

इसके अलावा स्टॉक मार्केट में फ्यूचर एंड ऑपशंस ट्रेडिंग करने वाले निवेशक भी बजट से निराश हुए। F&O के लेनदेन पर कर की डर 0.1% से बढ़ा कर 0.2% कर दी गई। इस कारण से बाजार में रोजाना लेनदेन करने वालों और दलाल स्ट्रीट में भी निराशा छाई। शेयर बाजार को लेकर इससे पहले आर्थिक सर्वे में भी चेतावनी की बाते कही गईं थी, इस कारण से और भी उत्साह नहीं जाग पाया।

सोना, कृषि और FMCG स्टॉक बढ़े

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा ऐलान किया कि देश में सोने पर कस्टम ड्यूटी में भारी कमी की गई। सोने पर कस्टम ड्यूटी को अब 15% से घटा कर मात्र 6% पर ले गया गाया। इस कारण कल्याण ज्वेलर, टाइटन समेत सोने का कारोबार करने वाले कई शेयर उठ गए। वहीं सरकार ने कृषि को लेकर कई ऐलान किए, जिनमें जैविक खेती पर जोर दिया गया। इस कारण खेती के बीज बनाने वाली कम्पनियाँ बाजार में सबसे तेज रहीं।

बाजार के बाकी सेक्टर में मंदिर के बीच रोजमर्रा की जरूरत की चीजें बनाने वाली FMCG कम्पनियाँ भी फायदे में रहीं। दरअसल, सरकार ने तम्बाकू पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया। इसके अलावा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जिससे इन क्षेत्रों में माँग मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे इन कम्पनियों के स्टॉक बढ़ गए।

रक्षा और रेल स्टॉक वालों को निराशा लगी हाथ

बजट में रक्षा और रेल क्षेत्र के स्टॉक्स से आशा लगाए बैठे निवेशकों को भी इस बार निराशा हाथ लगी। रक्षा और रेल के लिए कोई विशेष ऐलान नहीं किए गए। उनका बजट भी लगभग अंतरिम बजट के समान ही रहा। रेलवे को लेकर बजट में कोई नए ऐलान नहीं थे, इसलिए रेलवे स्टॉक नीचे चले गए।

वहीं रक्षा क्षेत्र का बजट घटाए जाने के कारण रक्षा स्टॉक भी गिर गए। यह स्टॉक बीते कुछ वर्षों में काफी अच्छा लाभ निवेशकों को दे चुके हैं। हालाँकि, टैक्स बढ़ाए जाने के कारण SENSEX 73 अंक नीचे और निफ्टी 30 अंक नीचे बंद हुए। कई स्टॉक में 5% तक की गिरावट भी देखी गई है।

पत्रकार प्रदीप भंडारी बने BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता: ‘जन की बात’ के जरिए दिखा चुके हैं राजनीतिक समझ, रिपोर्टिंग से हिला दी थी उद्धव सरकार

भारतीय जनता पार्टी ने पत्रकार प्रदीप भंडारी को अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया है। इस तरह अब भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की संख्या 31 हो गई है, जिसमें सांसदों संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी जैसे बड़े नाम भी शामिल है। अनिल बलूनी BJP के मुख्य प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी हैं। प्रदीप भंडारी ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद अर्णब गोस्वामी के चैनल ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ पर कवरेज के दौरान सुर्खियाँ बटोरी थी, वो महाराष्ट्र की तत्कालीन MVA सरकार के खिलाफ खुल कर सामने आए थे।

प्रदीप भंडारी ‘जन की बात’ नामक सेफोलॉजिकल ब्रांड के संस्थापक भी हैं, कई चुनावों में उनके अनुमान सटीक साबित हुए हैं। साथ ही वो ITV नेटवर्क के ‘इंडिया न्यूज़’ के न्यूज़ डायरेक्टर भी रहे हैं, उसके बाद वो ‘Zee News’ से जुड़े रहे। हर चैनल पर उनके शो को खासी लोकप्रियता मिली। ‘ज़ी न्यूज़’ में उन्हें कंसल्टिंग एडिटर का पद दिया गया था। उन्होंने कर्नाटक स्थित ‘मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (MIT) से इलेक्ट्रॉनिक एवं कम्युनिकेशंस में इंजीनियरिंग कर रखा है।

प्रदीप भंडारी अब तक 40 चुनावों को लेकर अनुमान लगा चुके हैं। ‘इंडिया न्यूज़’ पर वो रोज रात 8 बजे ‘जनता का मुकदमा’ नामक शो लेकर आते थे। फरवरी 2021 में उन्होंने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ से बतौर कंसल्टिंग एडिटर इस्तीफा दे दिया था। ‘रिपब्लिक टीवी’ पर उन्हें ‘ललकार’ नामक शो के जरिए शोहरत मिली थी। वो थैलेसेमिया बीमारी को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं, इसके ब्रांड एम्बेस्डर हैं। प्रदीप भंडारी अब टीवी पर भाजपा का पक्ष रखते हुए दिखेंगे।

मुंबई में NCB की दफ्तर के बाहर कवरेज के दौरान प्रदीप भंडारी पर कुछ पत्रकारों ने ही हमला कर दिया था। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स के चलन को लेकर आवाज़ उठाने के कारण उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। खार पुलिस थाने में मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था। ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ जैसे प्रपंची मीडिया संस्थान अक्सर उनके खिलाफ झूठ फैलाते रहते हैं। प्रदीप भंडारी काफी ऊर्जावान तरीके से रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते रहे हैं।