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IAS ऑफिसर की बीवी भाग गई गैंगस्टर ‘महाराजा हाईकोर्ट’ के साथ, 9 महीने के बाद लौटी तो नहीं घुसने दिया घर में… जहर खाकर किया सुसाइड

गुजरात के गाँधीनगर में अपने गैंगस्टर प्रेमी के साथ भागने वाली एक IAS अधिकारी की पत्नी ने शनिवार (20 जुलाई 2024) को आत्महत्या कर ली। वह 9 महीना पहले तमिलनाडु के गैंगस्टर के साथ भागी थी। अब वह लौट आई थी और अपने पति के घर में जाना चाहती थी। हालाँकि, जब वह ऐसा नहीं कर पाई तो घर के दरवाजे पर ही आत्महत्या कर ली।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला गाँधीनगर के सेक्टर 19 का है। महिला के पति रंजीत कुमार गुजरात विद्युत नियामक आयोग में सचिव हैं। वहीं, आत्महत्या करने वाली महिला की उम्र 45 साल है और उसका नाम सूर्या जय है। सूर्या मूलत: तमिलनाडु की रहने वाली थी। उसने वहीं के एक गैंगस्टर महाराज हाईकोर्ट के साथ 9 महीने पहले घर से भाग गई थी।

इस बीच शनिवार को वह वापस लौटकर आई और अपने पति रंजीत कुमार के घर में घुसने की कोशिश की। हालाँकि, रंजीत कुमार ने अपने घरेलू स्टाफ से कहा था कि उनकी पत्नी को घर में ना घुसने दिया जाए। जब गार्ड ने घर में घुसने से रोका वह जहर खा ली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अधिकारी ने महिला का शव लेने से भी इनकार कर दिया।

पुलिस का कहना है कि महिला 14 साल के एक बच्चे के अपहरण में शामिल थी। सूत्रों का कहना है कि मदुरै में बच्‍चे के अपहरण मामले में तमिलनाडु पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए सूर्या अपने पति के घर गई होगी। महिला का नाम उसके गैंगस्टर प्रेमी ‘महाराजा हाईकोर्ट’ और उसके सहयोगी सेंथिल कुमार के साथ एक इस मामले में शामिल थी।

यह मामला 11 जुलाई को बच्चे की माँ के साथ पैसों के विवाद को लेकर है। इस विवाद में महिला के 14 साल के बेटे का अपहरण कर लिया गया था। आरोपितों ने महिला से 2 करोड़ रुपए की फिरौती माँगी थी। हालाँकि, मदुरै पुलिस बच्‍चे को बरामद करने में कामयाब रही। इसके बाद पुलिस ने सूर्या सहित इसमें शामिल लोगों की तलाश शुरू कर दी थी।

IAS के वकील हितेश गुप्ता ने बताया कि दंपति 2023 से अलग रह रहे थे और उनकी तलाक की प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस ने बताया, “रंजीत कुमार शनिवार को तलाक की याचिका को अंतिम रूप देने के लिए बाहर गए थे। पीछे से उनकी पत्नी ने घर में नहीं घुसने नहीं देने से परेशान होकर जहर खा लिया और 108 (एम्बुलेंस हेल्पलाइन नंबर) पर कॉल कर दिया।” दोनों की शादी साल 20 साल पहले हुई थी। उनके दो बच्चे हैं।

पुलिस को तमिल भाषा में लिखा एक सुसाइड नोट भी मिला है। हालाँकि, पुलिस ने सुसाइड नोट में क्या लिखा है उसके बारे में जानकारी देने से मना कर दिया है। वहीं, अधिकारी ने अपनी मृत पत्नी का शव लेने से मना कर दिया। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महिला ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को संबोधित एक पत्र छोड़ा है, जिसमें उसने अपनी ‘पीड़ा’ बताई है।

पत्र में महिला ने दावा किया है कि उसको गैंगस्टर ने अपने जाल में फँसाया था और वह दो आपराधिक मामलों में उलझ गई, जिसमें गैंगस्टर मुख्य आरोपित है। एक मामला एक महिला से ऋण वसूली से संबंधित है, जिसे गैंगस्टर ने पैसे दिए थे और दूसरा मामला एक लड़के के अपहरण का है। पत्र में कहा है कि उसका पति एक नेक आदमी है, जो उसकी अनुपस्थिति में उनके बच्चों की देखभाल करता है।

गाँधीनगर पुलिस का कहना है, “हमें नहीं पता कि वह जहर लेकर आई थी या नहीं। हम जाँच कर रहे हैं कि क्या महिला अपने पति से मिली थी और जब वह आई थी तो पति घर में मौजूद था।” पुलिस ने कहा कि महिला का शव ले जाने के लिए तमिलनाडु से उसका परिवार आ रहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि महिला वांछित है या नहीं इसकी जानकारी उसे नहीं है, क्योंकि उसने मदुरै पुलिस से संपर्क नहीं किया।

इस साल मार्च और अप्रैल में महिला ने अग्रिम जमानत के लिए मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में याचिका दी थी। हाई कोर्ट के आदेश अनुसार, तमिलनाडु के थूथुकुडी उत्तर पुलिस स्टेशन ने सूर्या के खिलाफ अश्लील शब्द बोलने, लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने, लोक सेवक को उनके कर्तव्य का पालन करते समय स्वेच्छा से चोट पहुँचाने और जानबूझकर स्वयं की वैध गिरफ्तारी में प्रतिरोध या अवैध बाधा उत्पन्न करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

जिन्होंने कोर्ट में डाले भोजशाला, काशी, मथुरा के मामले, उस हिंदू शिक्षक को मॉन्टेसरी स्कूल ने नौकरी से निकाला: प्रिंसिपल ने सारे केस वापस लेने का दबाव बनाया

लखनऊ के मॉन्टेसरी स्कूल में पढ़ाने वाले हिंदूवादी कुलदीप तिवारी को धर्म के लिए आवाज उठाने पर नौकरी से निकाल दिया गया है। इसकी जानकारी खुद कुलदीप तिवारी ने वीडियो के माध्यम से दी है और इस संबंध में जिलाधिकारी को शिकायत भी की है। शिकायत में उन्होंने बताया कि स्कूल ने उनके खिलाफ ये कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि वो धार्मिक टिप्पणियाँ करते थे, जनहित में डाले गए कई मुकदमों में वादी हैं, माथे पर तिलक लगाते हैं, कलावा पहनते हैं व शिखा रखते हैं।

अपने शिकायत पत्र में उन्होंने बताया कि वो 10 नवंबर 2009 से सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की ऐशबाग राजेंद्र नजर प्रथम शाखा में गणित टीचर के रूप में पढ़ाते रहे और सेवा में बिन किसी व्यवधान उन्होंने लगभग 15 साल से अध्यापन का काम किया है। उनके अनुसार नौकरी के दौरान वह साधारण भेष-भूषा में रहते थे, केवल हिंदू होने के नाते प्रतिदिन माथे पर तिलक लगाकर हैं, शिखा रखकर स्कूल जाते थे

तिवारी बताते हैं कि उनके द्वारा कोर्टों में डाले गए मुकदमे और उनकी भेष-भूषा की वजग से स्कूल की प्रिंसिपल जयश्रीकृष्णन एवं रीटा फ्लेमिंग द्वारा कई बार उन्हें कार्यालय में बुलाया गया और तिलक मिटाने व शिखा हटाने के लिए दबाव दिया गया। इसके अलावा उनका कहना है कि उनका अपमान करके कई बार उनका अभद्र ढंग से मजाक भी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार उनसे कहा गया था- “अगर CMS में नौकरी करनी है चुटिया हटाकर आइए।”

इसके अलावा बताया गया कि 29 अक्टूबर 2023 को उनकी अध्यक्षता में उनकी संस्था ने विशवेशवरैया सभागार में ज्ञानवापी मंदिर मॉडल की प्रदर्शनी तथा काशी मथुरा भोजशाला जन जागरण संबंधी एक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन कराया था। इसमें अनेक क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित विद्वानों, आध्यात्मिक गुरु एवं अधिवक्ताओं ने सहभागिता ली थी। इस आयोजन के बाद ही उनकी प्रिंसिपल ने उन्हें बुलाया और इस्तीफा देने की बात कही।

तिवारी के अनुसार प्रिंसिपल ने उनसे कहा, “आपने भोजशाला, ज्ञानवापी और मजारों को ध्वस्त किए जाने को लेकर जो भी केस किए हैं उन्हें या तो वापस लीजिए अन्यथा तत्काल प्रभाव से सीएमएस से इस्तीफा दीजिए।” इस पर तिवारी ने अपनी नौकरी बचाने के लिए कहा- “मैं जो भी कार्य कर रहा हूँ वो पूर्ण रूप से कानूनी है एवं जनहित में न्यायालयों के समक्ष विचाराधीन है। कोई भी केस वापस नहीं हो सकता।” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह भी कहा कि उनका कोई भी कार्य न तो सीएमएस के विरुद्ध है और न ही स्कूल की छवि बिगाड़ने के लिए किया गया है।

इसके बाद 22 मार्च को जब भोजशाला मामले में ASI सर्वे शुरू हुआ तो तिवारी भी इसमें शामिल हुए। जहाँ उन्होंने सर्वे संबंधी प्रगति पर मीडिया को बयान दिया। घटना के बाद फिर प्रिंसिपल ने कार्यालय में बुलाया और कहा गया कि उनसे पहले ही सारे केस वापस लेने को कहा गया था लेकिन उन्होंने चूँकि कोई केस वापस नहीं लिए इसलिए वो आगे नौकरी नहीं करेंगे। प्रिंसिपल ने उन्हें कहा- “आप स्वत: त्यागपत्र दे दें बेहतर होगा, वरना हम आपको बर्खास्त कर देंगे। पाई-पाई के मोहताज हो जाओगे फिर सड़क पर बैठकर हिंदुस्तव की रोटी खाना।”

इस बार भी कुलदीप तिवारी ने उन्हें समझाने का खूब प्रयास किया। लेकिन इस बार कारण बताओ नोटिस जारी करके उन्हें निरर्थक, आधारहीन, अप्रमाणिक एवं मनगढ़ंत कहानियों के साथ उन्हें 1 जुलाई को बर्खास्त कर दिया गया।

अब इसी मामले में उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिख शिकायत दी है। उन्होंने कहा कि स्कूल की प्रिंसिपल ने उनपर जबरन दबाव बनाया, धमकी दी, मानसिक प्रताड़नाएँ दी और शोषण किया। इसके अलावा इस तरह नौकरी से निकाले जाने को उन्होंने अपना अपमान बताया और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कहा।

उन्होंने कहा कि उनके द्वारा डाली गई याचिकाओं को वापस लेने का दबाव किन्हीं व्यक्तिगत कारणों से या दुर्भावना के कारण किया गया है। उन्हें शंका है इस मामले में किसी बाहरी, विदेशी, राष्ट्रविरोधी अथवा अन्य अराजत शक्तियों का दबाव भी हो सकता है। उन्होंने नौकरी से बर्खास्त होने का लेटर पाने के बाद साफ तौर पर कहा कि वो कि वो केस वापस नहीं लेंगे। उन्हें न्याय चाहिए।

बता दें कि कुलदीप तिवारी, इंदौर हाईकोर्ट में चल रहे भोजशाला प्रकरण के प्रमुख केस के वादी हैं। साथ ही काशी ज्ञानवापी प्रकरण के अति महत्वपूर्ण प्रमुख मामलों और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में संबंधित न्यायालयों में चल रही जनहित याचिकाओं के वादी व पक्षकर हैं। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी अवैध मजारों, मस्जिदों व अन्य गैरकानूनी मजहबी इमारतों को ध्वस्त किए जाने की माँग में वादी हैं।

एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, खेल के मैदान, गंगा पर पुल, पॉवर प्लांट… बजट 2024 में बिहार की बल्ले-बल्ले, एक्सप्रेसवे का बिछेगा जाल

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में बिहार के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट भाषणा में जानकारी देते ​हुए बताया है कि बिहार को मिलने वाली आर्थिक सहायता को तेज किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इससे बिहार के विकास को तेज करने में मिलेगी। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने पूर्वी क्षेत्र में औद्योगिक गलियारा बनाने का प्रस्ताव भी दिया। उन्होंने बिहार, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के लिए विशेष पैकेज देने की बात भी कही।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में बिहार और आंध्रप्रदेश को बड़े तोहफे दिये हैं। इस तरह उन्होंने सहयोगी पार्टियों को साधने का भी काम किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार में दो नये एक्सप्रेस-वे बनेंगे। गंगा नदी पर दो नए पुल बनेंगे। वित्त मंत्री ने बिहार में सड़क के लिये 26 हजार करोड़ रुपये का आवंटन रखा है। पटना-पूर्णिया के लिए एक्सप्रेस-वे बनेगा. बक्सर-भागलपुर के लिए एक्सप्रेस-वे बनेगा। साथ ही बिहार में नए मेडिकल कॉलेज और स्टेडियम की स्थापना होगी।

बिहार में नेपाल की तरफ से आने वाले पानी की वजह से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष पैकेज की घोषणा की है। इसके लिए 11,500 करोड़ का आबंटन किया गया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार बहुपक्षीय विकास एजेंसियों से सहायता के माध्यम से बिहार को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर पर हम बिहार के गया में औद्योगिक विकास को समर्थन देंगे। यह पूर्वी क्षेत्र के विकास को गति देगा। हम सड़क संपर्क परियोजनाओं पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर राजमार्ग, बोधगया-राजगीर-वैशाली-दरभंगा के विकास में भी सहयोग करेंगे। इसके साथ ही 21,400 करोड़ रुपये की लागत से बिहार के पीरपैंती में 2400 मेगावाट का नया बिजली संयंत्र स्थापित करने सहित बिजली परियोजनाएं शुरू की जाएँगी। बहुपक्षीय विकास बैंकों से बाहरी सहायता के लिए बिहार सरकार के अनुरोधों पर शीघ्रता से काम किया जाएगा।”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के अपने बजट में बिहार में विभिन्न सड़क परियोजनाओं के लिए 26,000 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, सरकार बिहार में हवाई अड्डे, मेडिकल कॉलेज और खेल अवसंरचना स्थापित करेगी। इसके अलावा, केंद्र बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए ‘पूर्वोदय’ नामक योजना विकसित करेगा। सीतारमण ने पूर्वी क्षेत्र में विकास के लिए औद्योगिक गलियारा तैयार करने का का भी उल्लेख किया।

जनजातीय समाज के 63000 गाँवों का विकास, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, छोटे कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार: जानिए बजट 2024 में और क्या-क्या

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2024 पेश किया। इसमें ‘विकसित भारत’ के लिए मोदी सरकार 9 प्राथमिकताएँ तय की हैं, जिनसे सबको मौका मिले – कृषि में उत्पादकता एवं लचीलापन, रोजगार एवं कौशल, समावेशी मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक न्याय, विनिर्माण एवं सेवाएँ, शहरी विकास, आपातकालीन सुरक्षा, बुनियादी ढाँचा, नवाचार अनुसंधान एवं विकास, अगली पीढ़ी के सुधार। शिक्षा, रोजगार एवं कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

भारत में महँगाई नियंत्रण में है और ये 4% की तरफ बढ़ रहा है। कृषि अनुसन्धान के क्षेत्र में मोदी सरकार ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु के हिसाब से फसलों को विकसित करने के लिए एग्रीकल्चर रिसर्च सेटअप की व्यापक समीक्षा की जाएगी। सरकार और बाहर से विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी, प्राइवेट सेक्टर को भी फंडिंग मिलेगी। 1 करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिंग के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही 10,000 बायो इनपुट रिसॉर्स सेंटर स्थापित किए जाएँगे।

दालों एवं तिलहन की उत्पादकता, रख-रखाव और बाज़ार के लिए रणनीति बनाई जा रही है। रोजगार एवं कौशल विकास में महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कामकाजी महिला हॉस्टलों एवं शिशु गृहों की स्थापना की जाएगी। प्रतिवर्ष 25,000 छात्रों के लिए 7.50 लाख रुपए ऋण की व्यवस्था कौशल विकास के लिए की जाएगी। घरेलू संस्थानों में उच्चतर शिक्षा के लिए 10 लाख रुपए तक के ऋण पर 3% वार्षिक ब्याज छूट की व्यवस्था की जाएगी।

महिलाओं एवं कन्याओं से संबंधित योजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। उत्तर-पूर्व में भारतीय डाक के 100 से अधिक शाखाएँ खोली जाएँगी। आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर बन रहे पोलावरम सिंचाई परियोजना के पूरी होने के बाद देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। विशाखापत्तनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए कोप्पार्थी और हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए ओरवाकल नोड में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा।

‘पूर्वोदय’ के तहत बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल का विकास किया जाएगा। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, बोधगया-राजगीर-दरभंगा सड़क के लिए निधि उपलब्ध कराई जाएगी और बक्सर में गंगा नदी पर 26,000 करोड़ रुपए की लागत से पुल बनाया जाएगा। भागलपुर के पीरपैंती में 2400 MW का पॉवर प्लांट 21,400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम योजना’ की घोषणा भी की गई है।

इसके तहत जनजातीय बहुल गाँवों के विकास के लिए कदम उठाए जाएँगे। इससे 63,000 गाँवों में जनजातीय समाज के 5 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। MSME सेक्टर को बैंक लोन में आसानी के लिए नई व्यवस्था लाई जाएगी। मुद्रा लोन को 10 से अब 20 लाख रुपए तक बढ़ाया जाएगा। 50 मल्टी-प्रोडक्ट फ़ूड इरेडिएशन इकाइयाँ स्थापित की जाएँगी। पारंपरिक कारीगरों के लिए ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र PPP मोड में स्थापित किए जाएँगे, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार मिले।

‘पूजा से पहले नदी में नहाने आए तो मार देंगे गोली’ : LOC में हिन्दू श्रद्धालुओं को पाकिस्तानी फौजी दे रहे धमकी, कश्मीरी पंडित बोले- डरेंगे नहीं

पाकिस्तान और उसकी फौज का हिन्दुओं से घृणा का रवैया का किसी से छिपा नहीं है। अब पाकिस्तानी फौज चाहती है कि कश्मीर में 75 वर्षों के संघर्ष के बाद चालू किए गए मंदिर में हिन्दू पूजा के दौरान किशनगंगा नदी में ना नहाएँ। पाक फौज ऐसा करने पर गोली मारने की चेतावनी देती है।

पाकिस्तानी फौज यह हरकत उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टीटवाल में स्थित हिन्दुओं के लिए पवित्र शारदा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ कर रही है। यह मंदिर लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर स्थित है। यहाँ पूजा से पहले किशनगंगा (नीलम) नदी में नहाने वाले श्रद्धालुओं को पाकिस्तान के फौजी गोली मारने की धमकी दे रहे हैं।

यह शारदा मंदिर किशनगंगा नदी के तट पर है और नदी के दूसरी तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर है। यहाँ पाक फौज के रेंजर्स तैनात हैं। यह लगातार लाउडस्पीकर से श्रद्धालुओं को धमका रहे हैं। उन्हें नहाने से रोक रहे हैं। उनको गोली मारने की धमकी देकर नदी में ना उतरने की चेतावनी दे रहे हैं।

इस मंदिर के निर्माण एवं देखरेख के लिए जिम्मेदार सेव शारदा कमेटी के मुखिया रवींदर पंडिता ने ऑपइंडिया से बताया, “यह मंदिर 5 जून, 2023 को खोला गया था। यहाँ 1947 से पहले यहाँ शारदा पीठ जाने के लिए बेसकैम्प बना हुआ था। हिन्दुओ और सिखों के लिए यहाँ धर्मशाला थी। यहीं से अब POK में स्थित शारदा पीठ के लिए यात्री जाते थे। 1947 के बाद जब मंदिर जाना बंद हो गया तो यहाँ भी स्थित सभी ढाँचे जीर्ण शीर्ण हालत में आ गए।”

उन्होंने बताया, “हमने इस मंदिर का निर्माण 2021 में चालू करने का निर्णय लिया ताकि शारदा पीठ के लिए हमारा संघर्ष बरकरार रहे। हमने यहाँ मंदिर बनवाया है। इसे जून, 2023 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। तब से यहाँ लगातार हिन्दू श्रद्धालु आ रहे हैं। यहाँ श्रद्धालु मंदिर जाने से पहले किशनगंगा नदी में नहाते हैं, उसके उस पर पाकिस्तानी फौज तैनात है। वह इन श्रद्धालुओं को गोली मारने की धमकी लाउडस्पीकर से देते हैं। हमने यह मामला सेना और प्रशासन को बताया है।”

उन्होंने बताया है कि पाकिस्तानी रेंजर्स की धमकी से वह डरने वाले नहीं हैं और अपने आराध्य की पूजा करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि है कि अभी यहाँ फायरिंग नहीं हुई है लेकिन धमकी लगातार मिल रही है। उन्होंने बताया कि सेना ने अब मामले को अपने हाथों में ले लिया है।

गौरतलब है कि पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित शारदा पीठ, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में से एक है। भारत के विभाजन के बाद से काफी बुरी हालत है। इसको लेकर लगातार माँग हो रही है। टीटवाल में स्थित मंदिर जम्मू कश्मीर की हिन्दू संस्कृति को बचाने का एक प्रयास है।

‘हिंदू आतंकी, मोदी कनाडा विरोधी’: मंदिर की दीवार पर लिखे गए भारत विरोधी नारे, खालिस्तानी आतंकियों की कारस्तानी पर कनाडा के सांसद ने जताई चिंता

कनाडा में फिर एक हिंदू मंदिर पर हमला किया गया है। मंदिर में तोड़फोड़ के साथ ही उसकी दीवारों पर हिंदूफोबिक बातें लिखी हैं। मंदिर की दीवार पर ‘मोदी और सांसद (कनाडा के) आर्य’ को कनाडा विरोधी और हिंदू आतंकी’ लिखा गया है। माना जाता है कि ये कारस्तानी खालिस्तान समर्थकों के हैं। कनाडा के हिंदू समुदाय ने सरकार से इसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है।

नेपियन के संसद सदस्य चंद्र आर्य ने हिंदू-कनाडाई समुदाय के खिलाफ नफरत एवं हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मंगलवार (23 जुलाई 2024) को सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक ट्वीट किया और कहा कि कनाडा के एडमॉन्टन स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर में फिर से तोड़फोड़ की गई है, जो चिंतित करने वाला है।

उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “कुछ वर्षों के दौरान ग्रेटर टोरंटो एरिया, ब्रिटिश कोलंबिया सहित कनाडा में हिंदू मंदिरों पर घृणित नारे लिखे जा रहे हैं। ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पिछले साल हिंदुओं को भारत वापस जाने के लिए कहा था। खालिस्तान समर्थकों ने ब्रैम्पटन और वैंकूवर में पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या का खुलेआम जश्न मनाया और घातक हथियारों की तस्वीरें लहराई थीं।”

चंद्र आर्य ने आगे कहा, “मैं हमेशा से कहता रहा हूँ कि खालिस्तानी चरमपंथी अपनी बयानबाजी से नफरत और हिंसा को उकसाते हैं और बच निकलते हैं। मैं फिर से कह रहा हूँ कि हिंदू-कनाडाई इससे चिंतित हैं। इससे पहले कि ये बयानबाजी हिंदू-कनाडाई लोगों के खिलाफ शारीरिक हिंसा में बदल जाए, मैं कनाडाई एजेंसियों से इसे गंभीरता से लेने का फिर से आह्वान कर रहा हूँ।”

कनाडा में मंदिर पर पहले भी हो चुके हैं हमले

इससे पहले खालिस्तानी आतंकियों ने 7 सितंबर 2023 को मंदिर को निशाना बनाया था। स्थानीय निवासी जब मंदिर पहुँचे तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने के फोटो, वीडियो सामने आए हैं। दीवारों पर ‘मोदी इज टेररिस्ट’ यानी ‘मोदी आतंकी है’ और ‘पंजाब इज नॉट इंडिया’ यानी ‘पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है’ लिखा देखा जा सकता है।

वहीं, 8 सितंबर 2023 को खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने वैंकूवर शहर में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की धमकी दी थी। इस धमकी के बाद भारतीय उच्चायोग ने कनाडाई विदेश मंत्रालय को खालिस्तानी आतंकियों के चलते उत्पन्न खतरे के बारे में सूचित किया था। हालाँकि, कनाडा की एजेंसियों ने इसको लेकर कोई खास कदम नहीं उठाए।

इससे पहले कनाडा के सरे शहर में ही 12 अगस्त 2023 को खालिस्तानियों ने लक्ष्मीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की थी। मंदिर के गेट पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के पोस्टर चिपका दिए थे। इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था। इस मुद्दे को लेकर भी हिंदू समुदाय ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

इतना ही नहीं, 31 जनवरी 2023 को कनाडा के ब्रैम्पटन में एक प्रमुख हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। इसके ऊपर भारत-विरोधी भड़काऊ बातें लिखी गई थीं। इसके बाद अप्रैल में भी कनाडा के ओंटारियो में एक और हिंदू मंदिर को खालिस्तानियों ने निशाना बनाया था। भारत-विरोधी नारे लिखे गए थे।

20000 महिलाओं को रेप-मौत से बचाने के लिए जब कॉन्ग्रेसी मंत्री ने RSS से माँगी थी मदद: एक पत्र में दर्ज इतिहास, जिसे छिपा लिया गया

कॉन्ग्रेस ने समय-समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर जो हमले किए वो किसी से छिपे नहीं है, लेकिन ये बात भी हकीकत है कि मुश्किल के समय में आरएसएस ही वो संगठन था जो नेहरू सरकार के सबसे ज्यादा काम आया था। बात 1947 की है। विभाजन की आग में लोग जल रहे थे। हिंदू और सिख महिलाओं का अपहरण हो रहा था। तब, तत्कालीन रक्षा मंत्री सरदार बलदेव सिंह ने तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने आरएसएस से मदद लेने की बात सुझाई थी। इस पत्र की एक कॉपी उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी भेजी थी।

पत्र की खास बात यह थी कि नेहरू सरकार में मंत्री होते सरदार बलदेव सिंह ने आरएसएस की मदद माँगी थी। पत्र के मुताबिक जिस समय ये मुद्दा उठाया गया था उस समय तक पश्चिम पंजाब से 20 हजार महिलाओं और लड़कियों का अपहरण हो चुका था। बताया जाता है कि आरएसएस ने उस समय पाकिस्तान में घुसकर लोगों की मदद की थी और कइयों को बचाया भी था। पत्र की कॉपी को आज सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। इसका कारण यही है कि हाल में मोदी सरकार ने आरएसएस पर लगे उस बैन को हटाया है जो कॉन्ग्रेस ने 58 साल पहले लगाया था।

इस पत्र में सरदार बलदेव सिंह ने पश्चिम पंजाब में गैर मुस्लिमों की चिंता जाहिर करते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल से साफ-साफ कहा था कि पश्चिम पंजाब के शहर और गाँव की एक भी जगह ऐसी नहीं है जहाँ पर महिलाएँ पीड़ित न हों, लड़कियों का अपहरण न हो रहा हो। उन्होंने इस पत्र में वो बिंदु सुझाए थे जिनके जरिए लड़कियों को बचाने का काम हो सकता है। इसमें सबसे पहले कहा गया था कि रेस्क्यू अधिकारी नियुक्त किए जाएँ, इन्हें अधिकार दिया जाए, इन्हें काम पूरा करने के लिए अगर पुलिस और मिलिट्री की जरूरत हो तो वो दी जाए।

आगे उन्होंने सीक्रेट सर्विस का जिक्र करते हुए ये भी बताया था कि इलाके में कुछ उत्साही युवा मुखबिर के रूप में कार्य करने के लिए इस्लाम अपनाने के लिए भी तैयार हैं. क्योंकि यही तरीका है जिससे कि सही जानकारी पाई जा सकती है। बलदेव सिंह ने इस पत्र में कहा था कि उन्हें लगता है कि उन्हें ऐसे युवाओं से मदद लेने से नहीं झिझकना चाहिए क्योंकि यही लोग उन्हें वास्तविक स्थिति बता सकते हैं। इसी पत्र में अगर आगे देखेंगे तो कहा गया है कि आरएसएस ‘फील्ड वर्क’ के लिए लोगों को अत्यधिक प्रशिक्षित करेगा और संघ प्रमुख श्री गोलवर्कर से परामर्श लिया जा सकता है।

तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा लिखा गया पत्र

पत्र में आरएसएस का नाम साफ-साफ है। इसके साथ ही नीचे तत्कालीन रक्षा मंत्री बलदेव सिंह के हस्ताक्षर भी हैं। इस पत्र को गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने लिखा था जबकि इसकी कॉपी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भेजे गई थी। इसके बाद जो हुआ वो इतिहास में दर्ज है।

बता दें कि सरदार बलदेव सिंह के इस पत्र से पहले ऐसा नहीं था कि आरएसएस स्वयंसेवक शांति से बैठे थे, वो उससे पहले भी पाकिस्तान में फँसे लोगों की मदद करने में लगे थे। शायद यही वजह थी कि उन्हें मुश्किल के समय में रक्षा मंत्री द्वारा याद किया गया। लाहौर में अंग्रेजी के प्रोफेसर एएन बाली ने 1949 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘नाउ इट कैन बी टोल्ड’ में बताया है कि कैसे संघ के स्वयंसेवकों ने सूबे के हर मोहल्ले में हिंदू-सिख महिलाओं और बच्चों को खतरनाक इलाकों से निकालकर सुरक्षित केंद्रों तक पहुँचाने का काम किया। हिंदुओं और सिखों को भारत ले जाने वाली ट्रेनों तक पहुँचाने के लिए लॉरी और बसों की व्यवस्था की गई और उसकी सुरक्षा के उपाय किए गए। हिंदू और सिख इलाकों में चौकसी रखी जाती थी और हमला होने पर बचाव के उपाय सिखाए जाते थे। यहाँ तक ​​कि पंजाब के कई जिलों में कॉन्ग्रेस के नेताओं ने भी अपने परिवारों और रिश्तेदारों को बचाने के लिए आरएसएस की मदद माँगी थी। बाद में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 11 अगस्त 1948 को संघ के दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवरकर ‘गुरुजी’ को लिखे पत्र में कहा था कि आरएसएस ने संकट के समय में हिंदू समाज की सेवा की है। संघ के युवाओं ने महिलाओं और बच्चों की रक्षा की और उनके लिए बहुत कुछ किया।

कागज तो दिखाना ही पड़ेगा: अमर, अकबर या एंथनी… भोले के भक्तों को बेचना है खाना, तो जरूरी है कागज दिखाना – FSSAI अब चलाए डंडा

सुप्रीम कोर्ट में सावन महीने के पहले दिन यानी सोमवार (22 जुलाई, 2024) को एक गंभीर मामला गया। मामला सावन में बम भोले का नारा लगा गंगाजल उठाने वाले कांवड़ियों से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट में कॉन्ग्रेसी वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका लगाई थी कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर दुकानदारों को नाम दिखाने का आदेश ठीक नहीं है।

जैसा कि अक्सर ऐसे हाई प्रोफाइल वकीलों के मामले में होता है, यह मामला भी तुरंत सुना गया। सुप्रीम कोर्ट में न्याय की राह तक रहे बाक़ी 65,000 मामले अपनी प्रतीक्षा जारी रख सकते हैं। मामला चूंकि हाई प्रोफाइल वकील ने दाखिल किया था और इसलिए दाखिल किया था कि कहीं सेक्युलरिज्म ना खतरे में पड़ जाए, इसलिए एक अंतरिम आदेश भी जारी हो गया।

आदेश सुनाने से पहले जज साहब ने एक कहानी सुनाई, कहानी में बताया कि केरल का एक मुस्लिम मालिक वाला रेस्टोरेंट, हिन्दू मालिक वाले रेस्टोरेंट से बढ़िया खाना खिलाता था। यह भी बताया कि यूपी और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर अगर कांवडियो को यह पता चल गया कि दुकान अब्दुल की है या फिर अभिमन्यु की, तो सेक्युलरिज्म और संविधान के आर्टिकल 14,15 और 17 का उल्लंघन हो जाएगा।

इसके बाद कोर्ट ने कलम उठाई और कहा कि यूपी और उत्तराखंड के इस आदेश को रोक दिया जाए, भले ही अंतरिम तौर पर रोका जाए। कोर्ट ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड में कांवड़ियों वाले रास्ते पर कोई भी दुकान लगाए, उसका नाम नहीं पता चलना चाहिए। कोर्ट ने अपनी कलम से यह भी लिखा कि पुलिस ऐसा करने के लिए किसी को मजबूर ना करे।

कोर्ट ने यह किस्से-कहानी और आदेश सुनाने के दौरान प्रबुद्ध कॉन्ग्रेसी वकील के अलावा दूसरी तरफ नहीं देखा। दरअसल, दूसरी तरफ देखने के लिए कोई था ही नहीं। ना उत्तर प्रदेश के वकील और ना ही उत्तराखंड सरकार का पक्ष रखने के लिए कोई यहाँ था। था इसलिए नहीं क्योंकि जिस याचिका पर सुनवाई हुई वह एक दिन पहले ही दाखिल हुई थी।

याचिका दाखिल हुई और सुनवाई हो गई, लखनऊ और देहरादून से वकील दिल्ली नहीं आ सके। खैर इन सब बातों के बीच कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नाम दिखने पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन कागज दिखाने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकारें सभी दुकानदारों को कागज दिखाने का आदेश दे सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस वाले डंडे के जोर से दुकानदारों को नाम छाती पर लटकाने को ना कहे लेकिन यूपी सरकार कानून के रास्ते पर चले। उसने तरीका भी बताया। कोर्ट ने बताया कि जिस कॉन्ग्रेस के वकील सिंघवी यह याचिका लाए हैं, उसी की सरकार 2006 और 2014 में पहले ही इस बात का इलाज कर चुकी है।

कोर्ट ने बताया कि 2006 में भारत खाद्य सुरक्षा के लिए एक कानून लाया गया था। इसका नाम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट था। इस कानून में कहा गया कि कोई ढाबा, रेस्टोरेंट या होटल जो खाने के नाम पर कुछ भी बेचता हो, उसे FSSAI से सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा। लेने के बाद इसे दुकान पर साफ़ अक्षरों में दिखाना भी पड़ेगा। इस सर्टिफिकेट में दुकानदार का नाम चाहे अब्दुल हो अभिषेक, लिखा होना चाहिए और साथ ही उसका पता और क्या बेचता है, यह सब बताना पड़ेगा।

कोर्ट ने एक और कानून बताया। इसको स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट कहा जाता है। यह कानून 2014 में सरकार लाई थी। इसके तहत रेहड़ी पटरी वालों को एक सर्टिफिकेट दिया जाना था। चाहे कोई फल का ठेला हो या घर घर जाकर सब्जी बेचने वाले, इन सबको नाम और क्या बेचते हैं ये बताते हुए सर्टिफिकेट में जानकारी देनी होगी। इसको माँगे जाने पर दिखाना भी होगा।

अब अगर कोई भले ही नाम ना बताए, कागज तो दिखाना ही पड़ेगा और जरूर दिखाना पड़ेगा। कांवड़ रूट के होटल-ढाबे पर अगर अब भोले के भक्त किसी से सर्टिफिकेट माँग बैठें तो फिर सिंघवी किस अदालत का रुख करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का कर नहीं सकते क्योंकि उसी ने कहा है कि कागज़ तो दिखाना पड़ेगा।

ऐसे में यूपी सरकार अब नासिर फल वाले को अपने नाम की तख्ती हटा कर अपना सर्टिफिकेट चिपकाने को बोल सकती है। इससे नाम क्या गाँव-पता भी मालूम हो जाएगा और सेक्युलरिज्म भी सुरक्षा के घेरे में रहेगा। कोर्ट को यूपी सरकार को यह राह दिखाने के लिए धन्यवाद तो देना ही चाहिए।

अब जब कागज दिखाने की बारी आएगी तो फिर से शायद फैज की नज्में गई जाएँ। कोई क्रांतिकारी यह भी लिख सकता है कि कांवड़ से अपना धंधा चलाएँगे पर कागज नहीं दिखाएँगे। अब नाम दिखाने से चालू हुई यह बहस कागज़ के रास्ते होते हुए कहाँ तक पहुँचती है, ये तो समय ही बताएगा।

हिंदू लड़कियों की दोस्ती (जबरन) मुस्लिम लड़कों से, धर्मांतरण-निकाह के लिए उकसाना: UP में लैक्मे एकेडमी का हाल, हिंदू से मुसलमान बनी डायरेक्टर पर आरोप

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित लैक्मे एकेडमी नाम के फैशन इंस्टीट्यूट चलाने वाली रक्शंदा खान पर छात्राओं ने धर्मांतरण के लिए माइंडवॉशस करने का आरोप लगाया। इंस्टीट्यूट की दो हिंदू छात्राओं और एक छात्र ने इस संबंध में जिले के कलेक्टर अनुज सिंह से मिलकर इसकी शिकायत की। छात्राओं का कहना है कि एकेडमी की डायरेक्टर उन पर मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करने का दबाव डालती हैं।

छात्राओं ने कहा कि कांठ रोड पर हरथला पुलिस चौकी के सामने स्थित एकेडमी की डायरेक्टर रक्शंदा खान कहती है, “मुस्लिम लड़कों से शादी करने में कोई दिक्कत नहीं। मैं भी पहले हिंदू थी। मैंने एक मुस्लिम से शादी की। अब मैं हिंदू धर्म छोड़कर मुसलमान बन चुकी हूँ और मुस्लिम परिवार में बहुत खुश हूँ।” छात्राओं ने एकेडमी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और रक्शंदा खान पर कार्रवाई की माँग की है।

दरअसल, सोमवार (22 जुलाई 2024) को एकेडमी में पढ़ने वाली तान्या चौधरी और स्वाति पाल एक छात्र के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुँची। उन्होंने आरोप लगाया कि सपना उर्फ रक्शंदा खान हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करने और धर्मांतरण कर शादी करने के लिए उकसाती है। वह हिंदू लड़कियों को जानबूझकर मुस्लिम लड़कों के साथ ग्रुप में रखती हैं। वह मुस्लिमों को प्रमोट करती है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में छात्राओं ने आगे कहा, “कांठ रोड पर स्थित लैक्मे एकेडमी मेकअप, हेयर और स्किन ट्रीटमेंट सिखाता है। इसके लिए कई अलग-अलग कोर्स चला रखे हैं। एकेडमी में लगभग सभी लड़के मुस्लिम और ज्यादातर लड़कियाँ हिंदू हैं। इन मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करने के लिए वह उकसाती है। रक्शंदा खान इसके लिए मुहिम चला रखी है।”

इसकी मालकिन और डायरेक्टर सपना है। वह धर्म परिवर्तन करके रक्शंदा खान बन चुकी है और मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया है। रक्शंदा हिंदू छात्राओं से कहती है, “मैं भी पहले हिंदू थी, लेकिन अब मुस्लिम हूँ। एक मुस्लिम के घर में रह रही हूँ। मुस्लिम लड़कों से शादी करने में कोई दिक्कत नहीं होती।” छात्राओं का कहना है कि जबरन उनका नाम मुस्लिम लड़कों के साथ जोड़ा जाता है।

तान्या चौधरी नाम की छात्रा ने कहा, “एडमिशन के टाइम बताया गया था कि एकेडमी में मांस-मछली पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन मुस्लिम लड़के यहाँ रोज मीट-मछली लेकर आते हैं और सबके सामने खाते हैं।” एक अन्य छात्रा स्वाति पाल ने कहा, रक्शंदा हिंदू धर्म को गंदी-गंदी गालियाँ देती है।” छात्राओं का कहना है उसकी बात नहीं मानने वाली हिंदू लड़कियों को तरह-तरह से परेशान किया जाता है।

वहीं, एक अन्य छात्रा स्वाति पाल का कहना है, “रक्शंदा खान ने हिंदू छात्राओं को माथे पर बिंदी, टीका, सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पहनने पर प्रतिबंध लगा रखा है। अगर शादीशुदा कोई लड़की मंगलसूत्र और सिंदूर लगाकर आ जाती है तो उसे इंस्टीट्यूट में वह घुसने नहीं देती है। दूसरी ओर मुस्लिम छात्रों और मुस्लिम ट्रेनर्स को एकेडमी में ही नमाज पढ़ने की आजादी है।”

इस घटना को लेकर मुरादाबाद पुलिस ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है। इस घटना को लेकर पोस्ट करने वाले एक यूजर के पोस्ट पर जवाब देते हुए मुरादाबाद पुलिस ने लिखा, “थाना प्रभारी प्रभारी सिविल लाईन्स को जाँच / आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।”

बता दें कि एक साल पहले राज राणा नाम के एक लड़के ने भी रक्शंदा खान पर धर्मांतरण का दबाव डालने का आरोप लगाया है। छात्र का कहना था कि रक्शंदा पढ़ाने के बजाय इस्लाम का प्रचार करती है। छात्र का आरोप था, “रक्शंदा कहती है कि अगर इस्लाम अच्छा नहीं है तो इतनी तादाद में हिंदू मजारों पर क्यों जाते हैं? जब मुस्लिम लड़की कन्वर्ट होकर हिंदू बनती है तो इतना बवाल क्यों नहीं होता?”

रक्शंदा खान मूल रूप से कानपुर के साकेत नगर की रहने वाली है। उसका जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और उसका मूल नाम सपना था। वो 5 बहनें और 1 भाई है। वह बहनों में सबसे छोटी है। करीब 17 साल पहले उसने शहनवाज खान नाम के एक मुस्लिम लड़के से प्यार के बाद निकाह कर लिया था। इसके लिए उसने हिंदू धर्म को छोड़कर इस्लाम कबूल कर लिया था।

‘कोई भी कार्रवाई हो तो हमारे पास आइए’: हाईकोर्ट ने 6 संपत्तियों को लेकर वक्फ बोर्ड को दी राहत, सेन्ट्रल विस्टा के तहत इन्हें नहीं छुआ जाएगा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड को बड़ी राहत दी है और उसे कार्रवाई से बचाया है। सोमवार (22 जुलाई, 2024) को उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर केंद्र सरकार सेन्ट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत उसकी संपत्तियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करती है तो वो अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने ये आदेश दिया। साथ ही कहा कि सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली हुई है।

बता दें कि इस परियोजना के तहत ही नया संसद भवन बन कर तैयार हुआ है, साथ ही इंडिया गेट के आसपास के इलाकों का सौंदर्यीकरण हुआ है, निर्माण कार्य अभी चल ही रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड से कहा कि वो 2021 में दायर अपनी याचिका वापस ले। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अपनी याचिका में 6 संपत्तियों की सुरक्षा की माँग की है। साथ ही निर्देश माँगा कि इनका संरक्षण भी किया जाए। वक्फ बोर्ड का कहना है कि वो ये माँग नहीं कर रहा कि सेन्ट्रल विस्टा परियोजना पर रोक लगे, बल्कि सिर्फ उसे उसकी संपत्तियाँ से बेदखल न किया जाए।

हालाँकि, जज ने बोर्ड को याचिका वापस लेने के लिए कहा। साथ ही कहा कि हम इसे और जटिल नहीं बनाना चाहते हैं। अदालत ने कहा कि जब भी वो कोई कार्रवाई करें, आप आ सकते हैं। साथ ही ये भी सलाह दी कि वक्फ बोर्ड नई याचिका भी दायर कर सकता है। बता दें कि इन संपत्तियों में मानसिंह रोड पर मस्जिद ज़ब्तागंज, रेडक्रॉस रोड पर जामा मस्जिद, उद्योग भवन के पास सुनहरी मस्जिद, मोतीलाल नेहरू मार्ग के पीछे स्थित मजार, कृषि भवन परिसर के भीतर स्थित मस्जिद और उप-राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के भीतर स्थित मस्जिद शामिल है

दिसंबर 2021 में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। साथ ही कहा था कि पुनर्विकास का कार्य अभी इन संपत्तियों तक पहुँचा भी नहीं है और ये एक लंबी योजना है। हाईकोर्ट ने कहा था कि उसे इस पर पूरा भरोसा है। सुनहरी बाग़ मस्जिद के पास एक मज़ार को ध्वस्त किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने बताया था कि ये कार्रवाई दिल्ली नगरपालिका (NDMC) का है।