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इंस्टाग्राम पर विधवा महिला से राहुल बनकर मिला वसीम मलिक, होटल में किया रेप, फिर धमकी देकर धर्मांतरण कराया: UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तरप्रदेश की हापुड़ पुलिस ने हाल में लव जिहाद के आरोपित वसीम मलिक को गिरफ्तार किया है। वसीम पर आरोप है कि उसने मुंबई की एक विधवा महिला को अपने जाल में राहुल बनकर फँसाया, फिर रेप करके उसकी वीडियो बनाई और उसके बाद मस्जिद में ले जाकर उसका धर्मांतरण करवा दिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, महिला की दोस्ती वसीम मलिक से इंस्टाग्राम पर हुई थी। वहाँ वसीम ने महिला को अपनी पहचान राहुल के तौर पर बताई, जिसके बाद दोनों में बातचीत शुरू हो गई। उसकी इंस्टा आईडी ब्लैक कमांडो नाम से थी। महिला की वसीम से जब बातचीत आगे बढ़ी तो वो उससे मिलने बाबूगढ़ पहुँची।

आरोपित यहाँ उसे एक होटल लेकर गया, फिर उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। यहाँ उसने महिला का दुष्कर्म किय़ा और फिर वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे दी। इसके बाद वो उसे लेकर दिल्ली आ गया। दिल्ली के जामा मस्जिद में पहले उसने महिला का धर्मांतरण कराया और बाद में उससे निकाह कर लिया।

वसीम की हकीकत का खुलासा होने के बाद महिला ने केस पुलिस में दर्ज कराया। शिकायत में उसने बताया कि वह पश्चिमी महाराष्ट्रम के अन्ना मुकादम क्षेत्र की रहने वाली विधवा महिला ने बताया कि उसके पति का देहांत वर्ष 2015 में हो गया था। उस समय वो सात माह की गर्भवती थी। बाद में उसे बेटी हुई। माँ-बेटी दोनों साथ रहते थे लेकिन कुछ साल पहले वसीम से मिलने के बाद सब बदल गया। धर्मांतरण के बाद उसका नाम आयशा करवा दिया गया।

वहीं वसीम उसको लेकर गौतम बुद्ध नगर के बरौला में रहने लगा। उसने पीड़िता की पुत्री पर भी दबाव बनाया कि वो भी इस्लाम कबूले। पीड़िता के अनुसार, आरोपित अब तक उससे 3 लाख रुपए हड़प चुका है। मामले में पीड़िता ने थाने में तहरीर दी जिसके बाद आरोपित के विरुद्ध केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया गया। हापुड़ पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 328, 376,506,420 के तहत मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा उसपर उ0प्र0 धर्म परिवर्तन अधिनियम से सम्बन्धित धारा भी लगाई गई है।

पहले मोदी सरकार की योजना की तारीफ़ की, आका से सन्देश मिलते ही कॉन्ग्रेस को देने लगे श्रेय: देखिए राजदीप सरदेसाई की ‘पत्तलकारिता’, पत्नी हैं TMC सांसद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड सातवीं बार संसद में बजट पेश किया। इस बजट में सभी का ख्याल रखा गया। युवाओं, महिलाओं, किसानों, नौकरी पेशा सभी के लिए बजट सकारात्मक रहा। इस बीच, कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की और सरकार पर कॉन्ग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र के नकल का आरोप लगाया, खासकर युवाओं के लिए 1 करोड़ इंटर्नशिप की घोषणा पर। हालाँकि इन सबके बीच लोकतंत्र के कथित ‘चौथे’ खंबे, खासकर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम से जुड़े ‘पत्रकारों’ का विचलन भी सामने आ गया। ऐसे ही एक कथित पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पहले तो मोदी सरकार के बजट की तारीफ की, लेकिन कुछ ही देर में ‘आकाओं’ का संदेश मिलते ही मोदी सरकार पर कॉन्ग्रेसी आरोपों को दोहराने लगे।

हालाँकि राजदीप सरदेसाई की चालाकी तुरंत ही पकड़ ली गई। समीर नाम के एक्स यूजर ने इस कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम की तरफ लोगों का ध्यान खींचा। समीर ने लिखा, “आप क्रोनोलॉजी को समझें: राजदीप ने युवाओं के लिए रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन के लिए मोदी सरकार की प्रशंसा की, लेकिन जयराम रमेश ने ट्वीट किया कि यह कॉन्ग्रेस से लिया गया है, तुरंत ही राजदीप ने ट्वीट को एडिट करके कॉन्ग्रेस को श्रेय दे दिया। एकदम जयराम की लिखी लाइनों की तरह…!!!”

अब इस पूरे खेल को समझिए। सबसे पहले राजदीप सरदेसाई ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए लिखा, “युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन और कौशल विकास योजनाओं को वित्त मंत्री के भाषण में प्राथमिकता दी गई। अच्छा! ?10 साल लग गए लेकिन उम्मीद है कि मोदी सरकार युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती को नकारने की मुद्रा से बाहर आ गई है!”

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट के काफी देर बाद जयराम रमेश का ट्वीट आया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर कॉन्ग्रेस की नकल के आरोप लगाए।

जयराम रमेश ने 11.42 बजे लिखा, “वित्त मंत्री ने कॉन्ग्रेस के न्याय पत्र 2024 से सीख ली है। उनका इंटर्नशिप कार्यक्रम स्पष्ट रूप से कॉन्ग्रेस के प्रस्तावित अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम पर आधारित है, जिसे हमने पहली नौकरी पक्की कहा था‌। लेकिन उन्होंने अपनी ट्रेडमार्क शैली में इसे हेडलाइन बनाने के लिए डिज़ाइन किया है। कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र में सभी डिप्लोमा धारकों और स्नातकों के लिए प्रोग्रामेटिक गारंटी थी, जबकि सरकार की योजना में मनमाने ढंग से लक्ष्य (1 करोड़ इंटर्नशिप) रख दिया गया है।”

जयराम रमेश का ट्वीट

शायद ‘आका’ का मैसेज पहुँचते ही राजदीप की आँखें खुल गईं। क्योंकि जयराम रमेश के ट्वीट के बाद राजदीप सरदेसाई ने तुरंत अपने ट्वीट को एडिट कर दिया। जयराम रमेश ने 11.42 ट्वीट किया और इसके एक मिनट के अंदर ही यानी 11.43 बजे राजदीप सरदेसाई ने अपना ट्वीट एडिट करते हुए मोदी सरकार की घोषणा का श्रेय कॉन्ग्रेस को दे दिया। एकदम उसी बोली में, जैसा जयराम रमेश ने लिखा है।

राजदीप सरदेसाई ने एडिटेड ट्वीट में लिखा, “युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन और कौशल योजनाओं को वित्त मंत्री के भाषण में प्राथमिकता दी गई। अप्रेंटिसशिप के अधिकार पर कॉन्ग्रेस के न्याय पत्र की तरह 1 करोड़ युवाओं के लिए इंटर्नशिप योजना। इसमें 10 साल लग गए, लेकिन उम्मीद है कि मोदी सरकार नौकरी की चुनौती पर इनकार करने की मुद्रा से बाहर आ गई है।”

राजदीप सरदेसाई का एडिटेड ट्वीट

बता दें कि राजदीप सरदेसाई जैसे बहुत सारे कथित ‘पत्रकार’ खास ‘इकोसिस्टम’ का हिस्सा हैं। जो अपने आकाओं के एक इशारे पर मुद्दों में हेर-फेर करने की आदत से परेशान रहे हैं। खुद राजदीप सरदेसाई की पूर्व ‘पत्रकार’ पत्नी सागरिका घोष मौजूदा समय में इंडी गठबंधन की सबसे अहम पार्टी टीएमसी की राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में साफ दिखता है कि एक ओर पत्नी अपनी घोषित राजनीतिक पार्टी के लिए खुलकर काम करती हैं, तो पति राजदीप अघोषित आकाओं के लिए दिन-रात एक किए रखते हैं।

‘ओम बिरला की बेटी से संबंधित पोस्ट 24 घंटे में हटाए X और गूगल’: दिल्ली हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश, पिता की वजह से IAS बनने का किया गया था दावा

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 जुलाई 2024) को गूगल और एक्स (पूर्व में ट्विटर) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बेटी को लेकर किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया। इन पोस्ट में ओम बिरला की बेटी अंजलि बिरला पर आरोप लगाया गया था कि अपने पिता के प्रभाव के कारण वह अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की है।

जस्टिस नवीन चावला ने अपने अंतरिम आदेश में एक्स (ट्विटर) तथा गूगल को 24 घंटे के भीतर इन पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने अज्ञात व्यक्तियों को बिरला के खिलाफ मानहानिकारक आरोप लगाने से रोक दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया बिरला यह साबित करने में सक्षम हैं कि विचाराधीन पोस्ट मानहानिकारक हैं।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, बिरला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर पेश हुए। नायर ने तर्क दिया कि इसी तरह का आरोप पहले भी वर्ष 2021 में सामने आया था। उन्होंने कहा कि उस वक्त समाचार प्रकाशनों द्वारा तथ्य-जाँच के बाद बिरला के IRPS अधिकारी होने का खुलासा होने के बाद विवाद शांत हो गया था।

अंजलि बिरला की ओर से नायर ने कोर्ट में बताया, “मैं वर्ष 2021 में एक अधिकारी बन गया था, लेकिन अब अचानक ये चीजें फिर से सामने आ गई हैं, क्योंकि NEET और UPSC परीक्षा विवाद चल रहा है। इससे (सोशल मीडिया पोस्ट से) ऐसा लगता है कि हम सभी इसका हिस्सा हैं… मेरी निजी तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट की जा रही हैं और कहा जा रहा है कि मैं एक मॉडल हूँ।”

दरअसल, कई मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया कि अंजलि बिरला पेशे से मॉडल हैं और अपने पिता के ‘शक्तिशाली पद’ की वजह से उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर ली। हालाँकि, अंजलि बिरला ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि ये सोशल मीडिया हैंडल उनके पिता को बदनाम करने के लिए संचालित किए जा रहे हैं।

इन सोशल मीडिया के खिलाफ अंजलि बिरला ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी याचिका में अंजलि बिरला ने एक्स (ट्विटर), गूगल और अज्ञात लोगों को पक्ष बनाया और उनके पोस्ट हटाने की माँग की। उन्होंने 16 एक्स अकाउंट का विवरण दिया, जिनके खिलाफ राहत माँगी गई थी। इनमें यूट्यूबर ध्रुव राठी का पैरोडी अकाउंट भी शामिल है।

सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों के विपरीत अंजलि बिरला आईएएस नहीं, बल्कि IRPS अधिकारी हैं। वह साल 2019 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में शामिल हुई थी। इसके बाद वह अप्रैल 2021 में आयोग में शामिल हुईं। उन्होंने पिछले साल अपना अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा किया है।

राक्षस के नाम पर शहर, जिसे आज भी हर दिन चाहिए एक लाश! इंदौर की महारानी ने बनवाया, जयपुर के कारीगरों ने बनाया: बिहार का वो मंदिर जिसका काशी की तरह होगा विकास

भारत सरकार ने बजट 2024 में देश के विभिन्न पर्यटन एवं तीर्थ स्थलों के विकास का भी ऐलान किया है। हमने देखा कि कैसे मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर और उत्तर प्रदेश के काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर मोदी सरकार ने बनवाया। असम में कामाख्या कॉरिडोर की तैयारी चल रही है। अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि गया के विष्णुपद मंदिर विश्वस्तरीय तीर्थस्थल और पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। काशी की तर्ज पर ही इसका विकास किया जाएगा।

गया के विष्णुपद मंदिर का एक प्राचीन इतिहास है। मंदिर के जिस मौजूदा स्वरूप को हम देखते हैं, उसका निर्माण 18वीं शताब्दी में इंदौर की मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। ये फाल्गुनी नदी के तट पर स्थित है। गया पवित्र बौद्ध स्थल महाबोधि मंदिर के लिए भी लोकप्रिय है, उसका भी इसी तर्ज पर विकास किया जाएगा। गया को पिंडदान के लिए जाना जाता है, अपने पुरखों के मोक्ष के लिए यहाँ पिंडदान की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।

विष्णुपद मंदिर में पत्थर पर भगवान श्रीहरि के दाहिने पाँव का चिह्न अंकित है, जिसे हम धर्मशिला के रूप में जानते हैं। वैशाली से प्राप्त टेराकोटा की प्राचीन लिखावट से पता चलता है कि विष्णुपद मंदिर चौथी शताब्दी में भी अस्तित्व में था। बताया जाता है कि अहिल्याबाई होल्कर द्वारा इस मंदिर के निर्माण कार्य में 12 वर्ष लगे थे, साथ ही 3 लाख रुपए का व्यय भी हुआ था। राजस्थान के जयपुर की स्थापत्य कला का भी यहाँ दर्शन होता है, इसका भी एक विशेष कारण है।

राजस्थान के जयपुर से महारानी अहिल्याबाई होल्कर 1000 पाषाण शिल्पियों को गया लेकर आई थीं, जिन्होंने मंदिर का निर्माण किया। इनमें से कई वापस लौट गए तो कई वहीं बस गए, जो आज भी पाषाण शिल्प के काम में जुटे हुए हैं। पत्थरकट्टी गाँव के भगवानदास गौड़ के बेटे रामचंद्र गौड़ इसका ही एक उदाहरण हैं। इन्होंने ही बुद्ध स्मृति पार्क में महात्मा बुद्ध की 12 फ़ीट ऊँची काले पत्थर की प्रतिमा बनाई थी, जिसका अनावरण दलाई लामा ने किया था।

ताम्बड़ा पत्थर को तराश कर विष्णुपद मंदिर का निर्माण किया गया था। ये काफी कठोर शिला होती है जिस पर काम करना मुश्किल होता है। कहते हैं कि चैतन्य महाप्रभु किशोरावस्था में ही इस मंदिर में पहुँचे थे, जहाँ उन्हें ईश्वर पुरी द्वारा दीक्षित किया गया था। पश्चिम बंगाल के नवद्वीप स्थित मायापुर में जन्मे चैतन्य महाप्रभु अपने पिता जगन्नाथ मिश्रा के पिंडदान के लिए गया आए थे। उन्होंने वहाँ 17 स्थानों पर पिंडदान किया। गया दर्शन के बाद ही उन्होंने संकीर्तन अभियान शुरू किया।

17 मार्च, 2023 को मंदिर से कुछ ही दूरी पर ISKCON संस्था ने चैतन्य महाप्रभु के पदचिह्न का अनावरण किया। इसके लिए 2300 स्क्वायर फ़ीट में निर्माण कार्य किया गया। इसका कलश, ध्वज और ध्वजस्तंभ सोने का बना हुआ है। बालगोविंद सेन नामक भक्त ने स्वर्णध्वज दान में दिया था। किवाड़ों में भी चाँदी के पत्थर लगे हैं। यहाँ काले पत्थर से बना हुआ 16 वेदियों का मंडप भी है। यहाँ सभा-मंडप की छत से पानी भी टपकता है। मलयागिरि चन्दन से प्रतिदिन श्रीहरि के पदचिह्न का शृंगार होता है, उस पर शंख, चक्र, गदा एवं पद्म अंकित किए जाते हैं।

इस मंदिर का इतिहास गयासुर नामक राक्षस से जुड़ा है, जिसके लिए भगवान विष्णु को यहाँ आना पड़ा था। इसीलिए इस जगह का नाम भी गया है। मान्यता है कि गयासुर के शरीर पर ही ये नगर बसा हुआ है। ‘वायु पुराण’ की मानें तो गयासुर ने कई वर्षों तक साँस रोक कर भगवान विष्णु की तपस्या की थी, जिससे देवता भयभीत हो गए थे। उसने खुद के सबसे पवित्र होने का वरदान माँगा, जिसके बाद उसके दर्शन से सभी को मोक्ष मिलने लगा। अंत में ब्रह्मा के नेतृत्व में देवताओं ने उसका शरीर यज्ञ के लिए माँगा।

यज्ञ संपन्न होने के पश्चात इस जगह के अति-पवित्र होने का वरदान ब्रह्मा जी ने दिया। कहा जाता है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने भी यहाँ अपने पिता पाण्डु का पिंडदान किया था। गया का वैदिक नाम ब्रह्मगया भी बताया गया है। गया शहर ब्रह्मयोनि पहाड़ियों से घिरा हुआ है। राजर्षि गय को भी इस नगर का संस्थापक बताया गया है, जिन्होंने यहाँ विशाल यज्ञ किया था। वो सूर्य के पौत्र थे। माँ सीता से भी इस जगह का इतिहास जुड़ा है। लोग गया को ‘गयाजी’ भी कहते हैं।

इस दौरान एक और रोचक तथ्य का जिक्र करना आवश्यक है। लोककथाओं की मानें तो गयासुर ने भगवान विष्णु से प्रतिदिन एक मुंड और एक पिंड का वरदान माँगा है। कोरोना महामारी के दौरान भी पंडों ने सुनिश्चित किया कि ये प्रथा टूटने न पाए। कोरोना के दौरान एक बार जब श्मशान घाट में कोई भी शव नहीं जला तो डोमराजा के नेतृत्व में एक पुतले को बाँध कर उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया। माना जाता है कि जिस दिन ये परंपरा पूरी नहीं की, उस दिन गयासुर जग जाएगा।

गया शहर में बचपन गुजारने वाले लोग भी बताते हैं कि पूर्व में जब किसी दिन किसी शव का अंतिम संस्कार नहीं होता था तो ‘डमी लाश’ की शवयात्रा निकाली जाती थी। स्थानीय लोगों में इस परंपरा को लेकर काफी आस्था है। धार्मिक मंत्रों के साथ नकली लाश का ही अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, अगर किसी दिन एक भी शव नहीं जला तो। फल्गु नदी की धारा भी रेत के नीचे से ही बहती है। पिंडदान के दौरान बालू हटाने पर पानी निकलता है। वहाँ स्थित अक्षय-वट के बारे में बताया जाता है कि ये हजारों वर्ष पुराना है।

माँ सीता ने भी यहाँ पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की थी। विष्णुपद मंदिर स्थित धर्मशिला ने बारे में बताया जाता है कि इसे स्वर्ग से लाया गया था। कथा ये भी है कि गयासुर ने जब देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया था तो भगवान विष्णु उनके अनुरोध पर उसका वध करने आए, फिर उन्होंने उसके शरीर को जमीन के नीचे दबा दिया। मरते समय उसने इस स्थल के पवित्र होने का वरदान माँगा। यहाँ बालू से पिंडदान की प्रथा है, जो माँ सीता के साथ शुरू हुई बताई जाती है।

भगवान विष्णु का पदचिह्न 13 इंच का है। 30 मीटर ऊँची ये अष्टभुजी मंदिर के निर्माण के लिए अतरी प्रखंड के पत्थरकटी से काला पत्थर लाया गया था। इसके सभा-मंडप में 44 स्तंभ हैं। मंदिर का मंडप 58 वर्गफुट के घेरे में है। 8 पंक्तियों में 4-4 संयुक्त स्तंभों पर ये मंदिर टिका हुआ है। गर्भगृह में 50 किलो चाँदी का छत्र और 50 किलो चाँदी का अष्टपहल है। मंदिर के निर्माण का वर्ष सन् 1787 बताया जाता है। मंदिर में लेटी हुई सद्योजात (देवी पार्वती) की एक दुर्लभ प्रतिमा भी है, जिनके गर्भनाल से गणेश जी जुड़े हुए दिखाए गए हैं।

बिहार सरकार ने इस मंदिर को ‘सुरक्षित घोषित स्मारक’ की सूची में रखा हुआ है। सितंबर-अक्टूबर के महीनों में हर साल पिंडदानियों की संख्या बढ़ जाती है। विष्णुपद मंदिर का इंदौर-जयपुर से कनेक्शन है ही, गया में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी देखने को मिलता है। यहाँ चीन से लेकर श्रीलंका तक के बौद्ध श्रद्धालु आते हैं। श्रीलंका के शासक मेधवर्मन ने यहाँ एक विहार का निर्माण करवाया था। गुप्त एवं कुषाण काल के निर्माण कार्य भी यहाँ देखने को मिलते हैं। अब यहाँ कॉरिडोर बनने से तीर्थयात्रियों को अच्छी सुविधाएँ मिलेंगी।

पेरिस में ऑस्ट्रेलिया से आई महिला से गैंगरेप, पाँच प्रवासियों ने बनाया निशाना: कुछ ही दिन में होने हैं ओलम्पिक खेल

फ्रांस की राजधानी पेरिस में ओलम्पिक खेल से कुछ दिन पहले ही एक ऑस्ट्रेलियाई महिला से गैंगरेप किया गया। महिला को पाँच प्रवासी लड़कों ने निशाना बनाया। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और गैंगरेप करने वाले को पकड़ने का प्रयास कर रही है। यह घटना पेरिस में होने वाले ओलम्पिक खेल से कुछ दिन पहले ही हुई है।

यह घटना मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को पुलिस के पास पहुँची है। पेरिस घूमने आई महिला ने पुलिस को बताया कि उसे इन पाँचों ने तब निशाना बनाया जब वह फ्रेंच नहीं बोल पाई और हड़बड़ी में दिखी। इसके बाद पाँचों ने उसे निशाना बनाया और गैंगरेप किया। पाँचों आरोपित अफ्रीकाई प्रवासी बताए जा रहे हैं, हालाँकि उनकी पहचान सामने नहीं आई है।

जानकारी के अनुसार, महिला सबसे पहले एक प्रसिद्द कबाब की दुकान के बाहर पहुँची, उसके कपड़े अस्त व्यस्त थे। उसने दुकान वालों से मदद लेनी चाही लेकिन भाषाई समस्या के चलते ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद उसे कुछ सरकारी कर्मचारियों ने देखा और अस्पताल में भर्ती करवाया।

बताया गया है कि महिला एक म्यूजिक फेस्टिवल के लिए पेरिस आई थी और उसे 21 जुलाई, 2024 को वापस जाना था। पुलिस अब इस मामले में CCTV कैमरों की सहायता से आरोपितों को पहचानने का प्रयास कर रही है और आरोपितों को पकड़ने के प्रयास में है।

वहीं ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने इस मामले में एक्शन लिया है। फ्रांस में स्थित ऑस्ट्रेलियाई दूतावास ने महिला को राजनयिक मदद देने की बात कही है। दूतावास ने कहा है कि उसने महिला पर हमले की जानकारी के बाद फ़्रांस के अधिकारियों को तलब किया है।

पुलिस ने बताया है कि वह जल्द ही आरोपितों को पकड़ लेगी और महिला को न्याय दिलाएगी। पेरिस में हुई यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़े कर रही है। इस घटना के बाद पेरिस पुलिस की आलोचना भी हो रही है। गौरतलब है कि पेरिस ओलम्पिक में लगभग 18000 जवानों को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है।

इसके अलावा यहाँ आने वाले खिलाडियों, दर्शकों और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए 45000 पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। कई देशों से पुलिस अधिकारी भी बुलाए गए हैं।

मुहर्रम पर हनुमान मंदिर के सामने मुस्लिम भीड़, लगाए ‘सिर तन से जुदा’ के नारे: वीडियो वायरल, UP पुलिस ने 40 पर की FIR

उत्तर प्रदेश के कानपुर में मुहर्रम जुलूस के वक्त मुस्लिमों द्वारा ‘सिर तन से जुदा’ की नारेबाजी की गई थी। जुलूस में शामिल भीड़ ने रावतपुर के हनुमान मंदिर के सामने ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा’ चिल्लाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया था। अब इसी संबंध में कानपुर पुलिस ने 40 लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया है।

आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त कल्याणपुर अभिषेक कुमार पांडेय ने वीडियो में बयान देते हुए बताया कि 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पांडेय ने बताया, “हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो क्लिप प्राप्त हुई थी जो 16/17 जुलाई 2024 की मध्य रात्रि को निकले मुहर्रम जुलूस से संबंधित थी। वीडियो में देखा गया कि कुछ लोगों ने आपत्तिजनक नारे लगाए। वीडियो क्लिप की जाँच के बाद आयोजक और 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

बता दें कि यह घटनाक्रम सोशल मीडिया के जरिए सामने आया था जहाँ एक वीडियो वायरल हुई थी जिसमें देखा गया था कि हिंदू मंदिर के बाहर मुस्लिम भीड़ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगा रही थी। वीडियो देखने के बाद पुलिस ने कहा था कि वे वीडियो की जाँच कर रहे हैं और उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले की जाँच कल्याणपुर एसीपी अभिषेक कुमार पाण्डेय को सौंपी गई थी और अब पुलिस ने 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

उल्लेखनीय है कि कानपुर के जूही थाना क्षेत्र में भी इसी तरह की घटना हुई थी, मुहर्रम जुलूस में शामिल कई लोगों ने ‘हिंदुस्तान में रहना है तो अल्लाह हू अकबर कहना है’ के नारे लगाए थे। घटना परमपुरवा इलाके में हुई थी। इस मामले में संयुक्त पुलिस आयुक्त हरीश चंदर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मामले की जाँच डीसीपी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि मुस्लिमों ने जानबूझकर बीजेपी पार्षद विद्या वर्मा के बाहर भड़काऊ नारे लगाए ताकि इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ा जा सके।

मार्तंड सूर्य मंदिर = शैतान की गुफा: विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला Unacademy का जहरीला वामपंथी पाठ, जानिए क्या है इतिहास

मशहूर ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म अनएकेडमी ने अपने लेख में ऐतिहासिक मार्तंड सूर्य मंदिर को “शैतान की गुफा” बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद अनएकेडमी को अपनी भूल को सुधारना पड़ा।

मार्तंड सूर्य मंदिर के इतिहास के बारे में अनएकेडमी के लेख में लिखा था, “मार्तंड सूर्य मंदिर, जिसे शैतान की गुफा भी कहा जाता है, भारत के जम्मू और कश्मीर में अनंतनाग शहर के पास स्थित एक हिंदू तीर्थस्थल है। इसे 8वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था और यह हिंदू धर्म के प्रमुख सूर्य देवता सूर्य को समर्पित था; सूर्य को उनके संस्कृत नाम मार्तंड से भी पहचाना जाता है। कश्मीर के पूर्व मुस्लिम सम्राट सिकंदर शाह मिरी के आदेश पर, 15वीं शताब्दी में शाह मिरी साम्राज्य की सेना ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था।”

22 जुलाई 2024 (सोमवार) को कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस विवादित अनएकेडमी लेख का स्क्रीनशॉट शेयर किया और सवाल किया कि उनके स्टडी मटेरियल के लिए कौन कंटेंट लिख रहा है। कई एक्स यूज़र्स ने पूछा कि क्या अनएकेडमी बॉलीवुड से स्क्रिप्ट लिखवा रहा है। एक एक्स यूजर अनुराधा गोयल ने पूछा, “वाकई @unacademy? क्या मार्तंड सूर्य मंदिर को शैतान की गुफा कहा जाता है या आप बॉलीवुड की मनगढ़ंत कहानियों से सबक ले रहे हैं?”

प्रसिद्ध लेखक और इतिहासकार विक्रम संपत ने अनएकेडमी द्वारा इतिहास को विकृत करने को “शर्मनाक” माना और पूछा कि क्या बॉलीवुड के स्क्रिप्ट राइटर इस एड-टेक प्लेटफॉर्म के लिए सामग्री बना रहे हैं। संपत ने पूछा, “यह बहुत ही भयानक है @unacademy कि आप मार्तंड सूर्य मंदिर को “शैतान की गुफा” कहते हैं! आपकी शैक्षिक सामग्री कौन बना रहा है – बॉलीवुड के स्क्रिप्ट राइटर? शर्मनाक।”

“जन की बात” के संस्थापक और पत्रकार प्रदीप भंडारी ने अनएकेडमी से अपनी वेबसाइट से “आपत्तिजनक” सामग्री हटाने को कहा। उन्होंने लिखा, “मार्तंड सूर्य मंदिर “शैतान की गुफा” नहीं है @unacademy ! इसे बदलो। यह हिंदू समुदाय के लिए अपमानजनक है।”

सोशल मीडिया यूजर्स की तीखी आलोचना के बीच, एड-टेक प्लेटफॉर्म ने हिंदू मंदिर पर अपने लेख को एडिट किया और उसमें से “शैतान की गुफा” को हटा दिया। हालाँकि, अनएकेडमी ने इतिहास को विकृत करने और इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा नष्ट किए गए एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर के राक्षसीकरण को सामान्य बनाने के लिए माफ़ी नहीं माँगी है।

साभार: अनएकेडमी स्क्रीनशॉट

कश्मीर में मार्तंड सूर्य मंदिर और सिकंदर ‘बुतशिकन’

कश्मीर के अनंतनाग में स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर हिंदू वास्तुकला और आध्यात्मिकता का ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व करता है। ललितादित्य मुक्तपीड द्वारा 8वीं शताब्दी में निर्मित, मार्तंड सूर्य मंदिर प्राचीन भारत की वास्तुकला और सांस्कृतिक कौशल का एक प्रमाण है। हालाँकि, 14वीं शताब्दी के दौरान, सिकंदर शाह मिरी जिसे सिकंदर बुतशिकन (मूर्ति-भंजक) के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं के खिलाफ अपनी नफरत के लिए मशहूर था, उसने काफ़िरों के मंदिरों को ध्वस्त कर दिया। यह दावा किया जाता है कि इस्लामी कट्टरपंथी ने मार्तंड मंदिर के खंडहरों को ‘शैतान की गुफ़ा‘ कहा था, हालाँकि, “शैतान की गुफ़ा” शब्द का उपयोग करने से संबंधित एक स्पष्ट प्रमाण नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि कश्मीरी मुसलमान हिंदू मंदिर को शैतान की गुफा कहते हैं। इसके सात ही बॉलीवुड, मीडिया और इस्लामी कट्टरपंथीवर्षों से हिंदू मंदिरों के इस अपमानजनक अपमान को उचित ठहराने और सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इसी सिलसिले में, टाइम्स नाउ ने पिछले साल एक फोटो स्टोरी प्रकाशित की थी जिसमें दावा किया गया था कि कश्मीरी मुसलमान इस हिंदू मंदिर को ‘शैतान की गुफा’ कहते हैं।

नाइम्स नाउ के लेख का स्क्रीनशॉट

बॉलीवुड फिल्म ‘हैदर’ में मार्तंड सूर्य मंदिर मार्तंड को बताया गया ‘शैतान की गुफा’

साल 2014 में फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज को अपनी फिल्म ‘हैदर‘ में हिंदू परंपराओं को बदनाम करने के लिए व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा था। शाहिद कपूर अभिनीत इस फिल्म में, सूर्य मंदिर को ‘बिस्मिल’ नाम के गाने में शैतान की गुफा कहा गया था। इसमें शाहिद मार्तंड सूर्य मंदिर के सामने डाँस करते दिखे हैं और मंदिर में शैतानी आकृति दिखाई देती है। इस गाने का लोगों ने खूब तीखा विरोध किया और कहा कि रचनात्मकता की आड़ लेकर हिंदुओं की भावनाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है।

बीते साल अप्रैल में ऑपइंडिया ने बताया था कि ईद-उल-फितर पर मुसलमानों ने मंदिर के अंदर पटाखे फोड़े थे।

अनएकेडमी से जुड़े पिछले विवाद

यह पहली बार नहीं है जब अनएकेडमी ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। साल 2021 में भी अनएकेडमी ने अपने ऑनलाइन टेस्ट मॉड्यूल में हिंदुओं के खिलाफ घृणा का प्रचार किया था और हिंदुओं को मुस्लिमों का विरोधी बताने के साथ ही कट्टरपंथी बताया गया था।

अनएकेडमी के टेस्ट मॉड्यूल में सवाल हिंदुओं को निशाना बनाते हुए लिखा गया, “एक्स नामक शहर में, ईद के अवसर पर मुस्लिम लोगों का एक समूह अपनी रैली निकाल रहा था। वे अपने नारे लगा रहे थे और अपने त्यौहार मना रहे थे। जब वे एक हिंदू बहुल कॉलोनी की गलियों से गुज़र रहे थे, तो इलाके के हिंदुओं ने उन पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया और दावा किया कि उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। क्या यह दावा सही है?” अनएकेडमी ने ऐसा तब लिख डाला, जब ये पूरी दुनिया में स्थापित हो चुका है कि हिंदुओं के जुलूस और त्यौहारों पर मुस्लिम कट्टरपंथी हमले करते हैं। लेकिन वापमंथी प्रचार तंत्र से जुड़े होने की वजह से अनएकेडमी ने पूरी पहचान को ही पलट दी। पीड़ित हिंदुओं की जगह मुस्लिमों को दिखाया और हिंदुओं को कट्टरपंथी दिखा दिया।

इस मामले में बवाल के बाद अनएकेडमी ने माफी माँगी और इस गलती के लिए थर्ड पार्टी को दोषी ठहरा दिया।

अनएकेडमी की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें यही नहीं रुकी। सितंबर 2020 में अनएकेडमी से जुड़े शिक्षक वरुण अवस्थी ने अपनी ऑनलाइन क्लास में छात्रों को एके-47 उठाने के लिए उकसाया था। वरुण की टिप्पणी से अनएकेडमी ने खुद को अलग कर दिया था। इसके अलावा उसी साल अनएकेडमी के एक शिक्षक ने ब्राह्मणों के खिलाफ घटिया टिप्पणी की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उसने कहा था, “ब्राह्मण सबसे बेकार (कामचोर) समूह (समुदाय) हैं।”

इसके अलावा अगस्त 2023 में अनएकेडमी के शिरक्ष करण सांगवान ने छात्रों से ‘शिक्षित राजनेताओं’ के लिए वोट करने के लिए कहकर विवाद खड़ा कर दिया। उसने ब्रिटिश उपनिवेशवादियों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने सही क़ानून बनाकर बेहतरीन काम किया और हाल ही में घोषित तीन नए कानूनों की आलोचना की, जो आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेते हैं। नेटिज़ेंस ने राजनीतिक प्रचार करने के लिए शिक्षा मंच का उपयोग करने के लिए सांगवान की कड़ी आलोचना की थी। इस मामले में सांगवान को अनएकेडमी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।

अब ‘शैतान की गुफा’ विवाद पर वापस आते हैं। अनएकेडमी द्वारा इस अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल न केवल एक तथ्यात्मक गलती है, बल्कि हिंदू समुदाय पर एक गंभीर हमला है। यह एक ऐसी कहानी को आगे बढ़ाता है जो हिंदुओं और उनकी विरासत को बदनाम करने वाली ऐतिहासिक कट्टरता को बढ़ाती है। एजुकेशनल कंटेंट में इस तरह की अपमानजनक गलत बयानी खतरनाक है क्योंकि यह युवा दिमाग को आकार देती है और पहले से ही निशाना बनाए जा रहे हिंदू समुदाय के खिलाफ झूठी कहानियों को बढ़ावा देती है। अब जबकि अनएकेडमी ने अपनी सामग्री से आपत्तिजनक शब्द को हटा दिया है, तो इस घटना को एजुकेशनल कंटेंट के माध्यम से फैलाई जा रही हिंदुओं के खिलाफ आक्रामकता को लेकर एक चेतावनी की तरह देखा जाना चाहिए।

मार्तंड सूर्य मंदिर हिंदुओं के लिए एक पूजनीय स्थल है, जिसे सूर्य देवता के सम्मान में बनाया गया है और इसे इस्लामवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अपमानजनक शब्द से लेबल करना हिंदू मंदिर के धार्मिक महत्व का घोर अपमान है। एक पवित्र हिंदू स्थल को “शैतान की गुफा” के बराबर मानना ​​एक घटिया तुलना है जो हिंदू मान्यताओं को नीचा दिखाती है और हिंदू विरासत को बदनाम करती है। ‘शैतान की गुफा’ शब्द इस्लामी आक्रमणकारियों की कट्टरता को दर्शाता है, जिन्होंने काफिर हिंदुओं की संस्कृति और धर्म को नष्ट करने की कोशिश की थी। इसे समकालीन संदर्भों में दोहराना, वह भी ‘एजुकेशनल’ प्लेटफॉर्म द्वारा, हिंदुओं के खिलाफ पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने और इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा है।

कहीं खुशी कहीं गम: बजट 2024-25 का इन सामानों पर पड़ा सीधा असर, जानिए क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महँगा

मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार (23 जुलाई 2024) को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश की। बजट में कृषि से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक, किसानों से लेकर मीडिल क्लास तक के लोगों के लिए कई घोषणाएँ की गई हैं। बजट घोषणा के कारण कई चीजों के दामों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और वे महँगे या सस्ते होंगे। बजट में 7 चीजों पर कस्टम ड्यूटी घटी है, जबकि 2 पर बढ़ी है।

इस बार जो सबसे अधिक राहत पहुँचाने वाली है, वह कैंसर के मरीजों के लिए दवाइयाँ। बजट में कैंसर से जुड़ी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएँ और उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। इससे कैंसर का इलाज सस्ता होगा। इससे कैंसर पीड़ितों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा। इसके साथ ही आयातित ज्वैलरी भी सस्ती करने की घोषणा की गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महिलाओं को भी बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने सोने और चाँदी पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 6 प्रतिशत कर दी है। इससे सोने और चाँदी के गहने सस्ते हो जाएँगे। मोबाइल फोन, मोबाइल चार्जर, बिजली के तार, एक्स-रे मशीन एवं ट्यूब और सोलर सेट्स पर भी टैक्स कम किया है। चमड़े से बनी वस्तुओं के साथ झींगा मछली के दाम में भी कमी आएगी।

बजट के कारण मोबाइल फोन भी सस्ता होगा। मोबाइल फोन और चार्जर पर ड्यूटी 15 प्रतिशत तक घटाई है। लिथियम आयन बैटरी सस्ती करने की भी घोषणा की गई है। इससे इलेक्ट्रिक व्हिकल भी सस्ते हो सकते हैं। देश में बनने वाले जूते, कपड़ा और चमड़े सस्ते होंगे।

ये सामान हुए महँगे

सरकार ने कुछ सामानों। पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है। इससे कुछ सामान महँगे हो जाएँगे। टेलीकॉम उपकरण पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को बढ़ा दिया है। पहले इन प्रोडक्ट्स पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती थी, लेकिन अब यह ड्यूटी 15 प्रतिशत लगेगी। वहीं सिगरेट सहित तंबाकू से बने उत्पाद भी महँगे हो जाएँगे।

सरकार ने प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर भी कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है। इसके कारण प्लास्टिक से बनी चीजों के दाम भी बढ़ जाएँगे। सोलर सेल या फिर सोलर मॉड्यूल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सोलर ग्लास पर भी टैक्स बढ़ाया गया है। इसका मतलब है कि सोलर सिस्टम से जुड़े सामान महँगे जाएँगे।

इस साल के बजट में केंद्र सरकार ने पेट्रोकेमिकल एवं अमोनियम नाइट्रेट पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है। इससे जुड़े सामानों के महँगे होने की आशंका है। हवाई जहाज की यात्रा अब महँगी हो जाएगी। वहीं, पीवीसी का आयात घटाने के लिए सरकार ने इसकी ड्यूटी में 10 से 25 फीसदी का इजाफा करके इसे महँगा बना दिया है।

घर के भीतर गाय काट रहे थे तीन ईसाई, पुलिस ने छापा मारकर पकड़ा, मौके से बरामद हुआ गौमांस: पंजाब की घटना

पंजाब के अमृतसर में तीन लोगों को गोहत्या के आरोप में पकड़ा गया है। यह तीनों घर के भीतर गोवंश काट कर उसका मांस बेचते थे। पुलिस ने इन्हें छापा मार कर पकड़ा है। तीनों के पास से बड़ी मात्रा में गोमांस मिला है। तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना अमृतसर ग्रामीण के रामदास थाने के दयाल भट्टी गाँव में हुई है। यहाँ पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोवंश को चोरी छुपे काट कर उसके मांस का व्यापार करते हैं। इस सूचना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करने की ठानी।

रामदास थाने की एक टीम ने SI नरेश कुमार के नेतृत्व में इन तीनों के घर पर छापा मारा तो यह गोमांस पकाते मिले। इनके पास 160 किलो गोमांस मिला। इसके अलावा घर से गोवंश की खाल और शरीर के अन्य हिस्से मिले हैं। इनको जब्त कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

गिरफ्तार किए जाने वाले तीनों आरोपितों का नाम निशान मसीह, अजय मसीह और सैमुअल मसीह है। रामदास पुलिस ने इस मामले में ऑपइंडिया को बताया कि इन तीनों को 21 जुलाई, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि तीनों आसपास के इलाकों में गोमांस की बिक्री भी अवैध रूप से करते थे। अब इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेशानुसार की जाएगी। गौरतलब है कि पंजाब में 1955 से ही गोवंश के मांस बेचने पर प्रतिबन्ध है। इसका उल्लंघन करने पर मोटे जुर्माने का प्रावधान है।

नेचुरल फार्मिंग क्या है, बजट में क्यों इसे 1 करोड़ किसानों से जोड़ने का ऐलान: गोबर-गोमूत्र के इस्तेमाल से बढ़ेगी किसानों की आय

भारत में 1 करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिंग से जोड़ा जाएगा। इसके लिए उन्हें सर्टिफिकेशन एवं ब्रांडिंग के जरिए सहायता दी जाएगी। वैज्ञानिक संस्थानों एवं ग्राम पंचायतों के माध्यम से इसे लागू किया जाएगा। 10,000 नीड बेस्ड बायो इनपुट सेंटर स्थापित किए जाएँगे। इसके तहत किसानों को उनकी फसलों, मिट्टी और जलवायु के हिसाब से संसाधन एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा होगा कि ये ‘नेचुरल फार्मिंग’ है क्या और इसका फायदा कैसे उठाएँ।

आपको ‘राष्ट्रीय मिशन प्राकृतिक खेती प्रबंधन एवं ज्ञान पोर्टल’ पर इससे संबंधित जानकारियाँ मिल जाएँगी। अब जानते हैं कि नेचुरल फार्मिंग है क्या। ये एक खेती की ऐसी व्यवस्था है, जिसमें केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ये खेती भारतीय परंपरा के हिसाब से की जाती है, लेकिन इसमें इकोलॉजी की आधुनिक समझ, तकनीक व न्यूनतम संसाधनों का इस्तेमाल और रिसाइक्लिंग पर ज़ोर दिया जाता है। इस प्रकार इसमें लागत भी कम आती है।

नेचुरल फार्मिंग से जैव विविधता बढ़ती है, पशुओं के स्वास्थ्य एवं संरक्षण को बल मिलता है, जलीय परतंत्र में शैवालों की वृद्धि रूकती है, जल संरक्षण होता है, वातावरण पर केमिकल युक्त खादों और कीटनाशकों से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाव मिलता है, मिट्टी का कटाव कम होता है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी ये सहायक है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और केरल नेचुरल फार्मिंग के मामले में अच्छा कर रहे हैं। हालाँकि, इसकी स्वीकार्यता फ़िलहाल शुरुआती चरण में है।

ये मिट्टी के स्वास्थ्य व गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके लिए बीज की स्थानीय वेराइटी का इस्तेमाल किया जाता है, किसी बाहरी इनपुट की ज़रूरत नहीं होती, खेत में ही सूक्ष्मजीवी पैदा किए जाते हैं जो बीज की सहायता करते हैं (उदाहरण – बीजामृत), इसी तरह मिट्टी को समृद्ध करने के लिए ‘जीवामृत’ जैसे सूक्ष्मजीवी पैदा किए जाते हैं, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण के लिए मिट्टी में सूक्ष्मजीवियों की अधिकतम गतिविधि सुनिश्चित की जाती है और मिश्रित फसलों के अलावा पेड़ों का एकीकरण किया जाता है।

नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, नीम अर्क, दशपर्णी अर्क जैसे प्राकृतिक फॉर्मूले का इस्तेमाल कीटनाशक के रूप में किया जाता है। अभी देश में 10 लाख हेक्टेयर से भी अधिक भूमि पर नेचुरल फार्मिंग हो रही है। इसमें कई चीजों के लिए गाय के गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है। स्थानीय स्तर पर जो पशु पाए जाते हैं, उनका इस्तेमाल होता है। भारत में ‘जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग’ लोकप्रिय है, जिससे ग्रीनहाउस गैस नहीं निकलता है और किसानों की आय भी बढ़ती है।

इससे ग्रामीण विकास होता है, रोजगार बढ़ता है। गायों पर आधारित प्राकृतिक खेती में तो पानी और बिजली की भी खपत 90% कम हो जाती है। सीधे शब्दों में समझें तो प्राकृतिक खेती एक रसायनमुक्त व्यवस्था है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो फसलों, पेड़ों और पशुधन को एकीकृत करती है। प्राकृतिक खेती प्राकृतिक या पारिस्थितिक प्रक्रियाओं, जो खेतों में या उसके आसपास मौजूद होती हैं, पर आधारित होती है।