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‘स्वार्थ की गंध नहीं आनी चाहिए, बात दूसरों की प्रियता की और मन में कपट’: राकेश टिकैत को प्रेमानंद महाराज की खरी-खरी, बोले – भोले-भाले हैं हमारे किसान

लगातार आंदोलन करने वाले और मोदी सरकार को धमकियाँ देने वाले राकेश टिकैत अब मथुरा के वृन्दावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुँचे। प्रेमानंद महाराज ने भी उन्हें कुछ ‘कड़वे सलाह’ दे डाले। बता दें कि राकेश टिकैत BKU (भारतीय किसान यूनियन) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, उनके भाई नरेश टिकैत संगठन के अध्यक्ष हैं। राकेश टिकैत उन किसान नेताओं में शामिल हैं, जिनके नेतृत्व में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं को 1 साल तक घेरे रखा गया था।

‘श्री हित राधा केली कुञ्ज’ आश्रम के संत प्रेमानंद महाराज ने राकेश टिकैत से कहा, “हमारे जो भारतीय किसान हैं वो बड़े भोले-भाले हैं। हमलोग किसान के घर में पैदा हुआ तो जानते हैं, फसल नष्ट हो गई तो समझो किसान नष्ट हो गया। कितनी मेहनत कर के वो अपनी फसल तैयार करता है और प्राकृतिक व नाना प्रकार की आपदाओं के कारण वो नष्ट हो जाती है। किसानों के पक्ष में खड़े होकर किसानों को अनुकूलता दिलाना और सुविधा दिलाना बहुत उत्तम कार्य है।”

इस दौरान पीत वस्त्र धारण करने वाले प्रेमानंद महाराज ने ये भी कहा कि किसानों के लिए आवाज़ उठाने की प्रक्रिया में स्वार्थ की गंध नहीं आनी चाहिए। उन्होंने समझाया कि स्वार्थ में कपट होती है, हम बात अपनी प्रियता की कर रहे हैं लेकिन उसमें मेरी स्वार्थ की पूर्ति है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ऐसी स्थिति में ये परमार्थ नहीं रहेगा, दूसरों के हित के लिए हम अपने प्राणों की बाजी भी लगा देते हैं तो इस लोक में और परलोक में भी मंगल होगा।

इस दौरान उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की चौपाई ‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई’ का जिक्र करते हुए कहा कि वो चाहेंगे कि परमार्थ की भावना से युक्त होकर किसानों की उन्नति हो, उनकी समस्याओं में सब साथ खड़े होकर उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा कि कई किसान असमर्थता के कारण आत्महत्या कर देते हैं, क्योंकि उनकी पहुँच नहीं होती और वो अपनी बात सरकार तक नहीं पहुँचा सकते। उन्होंने कहा कि कोई धनवान है फिर भी वो रुपया या सोना-चाँदी नहीं, वो खाएगा तो अन्न ही, इसीलिए किसानों की उन्नति आवश्यक है।

‘ये मंदिर ही नहीं बल्कि हिन्दुओं की भावनाओं पर हमला’: कनाडा के हिन्दू संगठन ने की ‘हिन्दूफोबिया’ पर कार्रवाई की माँग, खालिस्तानियों पर उठ रही उँगली

कनाडा में खालिस्तानियों का हौसला दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। खालिस्तानी अतिवादियों के समर्थन से चल रही जस्टिन ट्रूडो की सरकार खालिस्तानियों का ही साथ दे रही है। इस बीच, कनाडा के एडमॉन्टन के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में तोड़-फोड़ की गई। यहाँ के बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर पर सुबह-सुबह भारत विरोधी नारे लिखे गए। यही नहीं, पीएम मोदी के साथ ही भारतीय मूल के कनाडाई सांसद चंद्र आर्य को हिंदू आतंकवादी बताया गया।

कनाडा में हिंदू व्यापारिक समुदाय के हितों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित ‘कैनेडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स’ (सीएचसीसी) के एक बयान में कहा, “यह घटना न केवल एक बिल्डिंग (मंदिर)पर हमला है, बल्कि हिंदू समुदाय की भावनाओं और हमारे समाज के सम्मान एवं सहिष्णुता के सिद्धांतों का भी अपमान है।” कैनेडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कनाडा में “हिंदूफोबिया (हिंदुओं के खिलाफ पूर्वाग्रह) की बढ़ती लहर” का विरोध करते हुए कहा, “ये घटनाएँ बेहद परेशान करने वाली हैं और हमारे बहुसांस्कृतिक एवं समावेशी समाज में इनका कोई स्थान नहीं है।”

भारत की तरफ से भी इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। वैंकूवर में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “हम एडमॉन्टन में बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर को भारत विरोधी नारे लिखकर विरुपित किए जाने की निंदा करते हैं। हमने कनाडाई अधिकारियों से घटना की जांच करने और अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।”

कनाडा में जिस मंदिर पर हमला किया गया, वहाँ के स्थानीय हिंदू सांसद को भी हिंदू आतंकवादी लिखा गया। कनाडा के नेपियन से संसद सदस्य चंद्र आर्य ने इस हमले पर प्रतिक्रिया दी और खालिस्तानी अतिवादियों को इसका जिम्मेदार बताया। चंद्र आर्य ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “एडमॉन्टन में हिंदू मंदिर बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को फिर से तोड़ दिया गया है। पिछले कुछ सालों से ‘ग्रेटर टोरंटो एरिया, ब्रिटिश कोलंबिया और कनाडा के अन्य स्थानों में भारत विरोधी नारे के साथ तोड़फोड़ की जा रही है।”

सांसद आर्य ने आगे अपने पोस्ट में खालिस्तानी अतिवादियों को ट्रूडो सरकार से मिलने वाली छूट की तरफ इशारा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “कुछ वर्षों के दौरान ग्रेटर टोरंटो एरिया, ब्रिटिश कोलंबिया सहित कनाडा में हिंदू मंदिरों पर घृणित नारे लिखे जा रहे हैं। ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पिछले साल हिंदुओं को भारत लौट जाने के लिए कहा था। खालिस्तान समर्थकों ने ब्रैम्पटन और वैंकूवर में पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या का खुलेआम जश्न मनाया और घातक हथियारों की तस्वीरें लहराई थीं। जैसा कि मैं हमेशा से कहता रहा हूँ, खालिस्तानी चरमपंथी नफरत और हिंसा की अपनी सार्वजनिक बयानबाजी से आसानी से बच निकलते हैं। मैं एक बार फिर से बता रहा हूँ कि हिंदू कनाडाई सच में परेशान हैं। मैं फिर से कनाडा की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने का आह्वान करता हूँ। इससे पहले कि ये बयानबाजी हिंदू कनाडाई लोगों के खिलाफ हमलों में तब्दील हो जाए।”

बता दें कि कनाडा में हिंदू मंदिरों को खालिस्तान लगातार निशाना बना रहे हैं। कनाडा में हिंदुओं के प्रति लगातार हिंसा बढ़ी है। खालिस्तान समर्थक अक्सर हिंदू मंदिरों को निशाना बनाते हैं। आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के मारे जाने के बाद से खालिस्तान समर्थक उग्र हैं और वे अक्सर भारत विरोधी गतिविधियों को कनाडा में अंजाम देते हैं। अगस्त 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया था और खालिस्तानी जनमत संग्रह का पोस्टर लगा दिया गया था।

‘मेरे बेटे को मार डाला’: आधुनिक पश्चिमी सभ्यता ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स को भी दे दिया ऐसा दर्द, कहा – Woke वाले दिमागी वायरस को ख़त्म कर दूँगा

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने ‘Woke Mind Virus’ पर करारा निशाना साधा है। एलन मस्क इस दौरान अपने परिवार पर इसका दुष्प्रभाव पड़ने के कारण दुःख में भी दिखे। बता दें कि X (पूर्व में ट्विटर), Tesla और SpaceX जैसी विशाल कंपनियाँ चलाने वाले एलन मस्क की संपत्ति 248.70 बिलियन डॉलर (20.82 लाख करोड़ रुपए) की है। सोचिए, जब वामपंथी विचारधारा में पश्चिमी अत्याधुनिकता के मिलावट ने ऐसा गलत असर डाला है कि धरती का सबसे अमीर शख्स भी उसके सामने मजबूर है।

बता दें कि एक्शन मस्क का बेटा विलियम जेन्ना विल्सन ने अपना लिंग-परिवर्तन करा लिया और लड़की बन गया। पहले उसका नाम जेवियर हुआ करता था।डॉ जॉर्डन पीटरसन के साथ एक इंटरव्यू में एलन मस्क ने कहा कि अपने बेटे के यौवन को अवरुद्ध करने (Puberty Blocking) के लिए उन्हें धोखे में रखा गया। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान उन्हें गुमराह करने के लिए परिस्थिति पैदा की गई। वो ‘Puberty Blocker’ की तुलना नसबंदी वाले दवाओं से करते हैं।

एलन मस्क ने बताया कि उन्हें पूरी तरह सूचित नहीं किया गया था कि ट्रीटमेंट के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। ‘लिंग की पुष्टि’ किए जाने की अवधारणा को उन्होंने एक ‘भयानक प्रथा’ करार दिया। उनका मानना है कि वो अपने बेटा खो चुके हैं, उनके बेटे को मार डाला जा चुका है। उन्होंने इसे ‘Woke Mind Virus’ का दुष्प्रभाव बताते हुए कहा कि वो इसे खत्म कर देंगे। बता दें कि जो शख्स कुछ ज़्यादा ही जागरुक होकर उलटी-सीधी और अजीबोगरीब विचारों पर चलने लगे उसे Woke कहते हैं।

डॉ जॉर्डन पीटरसन को भी कहना पड़ा कि लिंग-परिवर्तन के लिए इस तरह का ट्रीटमेंट एकदम दुष्टतापूर्ण है। दोनों ने इस पर सहमति जताई कि ये प्रक्रिया कराने वालों को जेल होना चाहिए। एलन मस्क ने कहा कि ऐसे बच्चों को इसका शिकार बनाया जा रहा है, जो अभी सहमति देने की उम्र तक ही नहीं पहुँचे हैं। बता दें कि लिंग-परिवर्तन कराने वाले को उसके पुराने नाम से पुकारना ‘Deadnaming’ कहलाता है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि उनका बेटा मर चुका है।

जून 2022 में जेवियर (अब विलियम जेन्ना विल्सन) के खुलासे के बाद एलन मस्क ने SpaceX का मुख्यालय कैलिफोर्निया से टेक्सास स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। वो कैलिफोर्निया के कानूनों से चिढ़ चुके थे, खासकर उस बिल से जिसके तहत प्रावधान किया गया था कि अगर कोई बच्चा अपना जेंडर अलग आइडेंटिफाई करता है तो उसके अभिभावकों को सूचित नहीं किया जाएगा। एलन मस्क का कहना था कि ये नीतियाँ परिवारों और कंपनियों के लिए हानिकारक हैं।

‘बंद ही रहेगा शंभू बॉर्डर, JCB लेकर नहीं कर सकते प्रदर्शन’: सुप्रीम कोर्ट ने ‘आंदोलनजीवी’ किसानों को दिया झटका, 15 अगस्त को दिल्ली कूच का किया था ऐलान

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बॉर्डर को अभी बंद ही रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसान JCB लेकर प्रदर्शन करने नहीं आ सकते। कोर्ट ने कहा है कि वह अब एक कमेटी बनाएगा जो किसानों और सरकार, दोनों का पक्ष सुनेगी।

बुधवार (24 जुलाई, 2024) को शंभू बॉर्डर से बैरिकेड को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कुछ प्रबुद्ध जनों की एक कमेटी बनाएगा जो इस मसले का हल निकालेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब और हरियाणा इस कमेटी के लिए नाम सुझा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तब तक शंभू बॉर्डर को बंद रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसके बाद ही पंजाब और हरियाणा आपस में बातचीत करके बैरिकेड हटाने पर काम करेंगे और चरणबद्ध तरीके से उन्हें हटाएँगे। तब तक दोनों राज्य यथास्थिति बनाएँ रखें।

सुप्रीम कोर्ट में किसान और बैरिकेड के मामले की सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के तरीके पर पर भी टिप्पणी की गई। सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि किसान प्रदर्शन के नाम पर टैंक और बख्तरबंद गाड़ियाँ लेकर आना चाहते हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसान ऐसे प्रदर्शन नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और किसानों के बीच विश्वास की कमी की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान पंजाब का भी पक्ष सुना जिसने कहा कि शंभू बॉर्डर बंद होने के कारण उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है।

गौरलतब है कि पंजाब और हरियाणा के बीच पड़ने वाला शंभू बॉर्डर बीते फरवरी माह से ही बंद है। यहाँ किसानों ने डेरा जमाया हुआ है और वह दिल्ली आकर प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में 15 अगस्त को दिल्ली आकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में इस मामले पर सुनवाई करते हुए हरियाणा को आदेश दिया था कि वह बैरिकेड हटा दे। इस निर्णय के विरुद्ध हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था जिसने हाई कोर्ट के फैसले से इतर बॉर्डर खोलने पर अभी के लिए रोक लगाई है।

अब नेशनल एकेडमी के आदेश को भी धता बता रहीं IAS पूजा खेडकर: FIR होने के बाद 5 दिन से लापता, UPSC का दिया समय हुआ पूरा

IAS पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि पूजा खेडकर शुरुआती समय से ही ओबीसी कोटे का फायदा उठाती आई हैं जबकि वो माता-पिता दोनों के प्रशासनिक सेवाओं में होने के कारण क्रीमी लेयर वाली श्रेणी में आती हैं। उन्होंने 2007 में एमबीबीएस में एडमिशन में लेने के लिए भी इस कोटे का इस्तेमाल किया था।

एक ओर जहाँ उनके एमबीबीएस एडमिशन से लेकर यूपीएससी में एंट्री पाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं ये भी सामने आया है कि वो 5 दिन से लापता हैं। उनकी किसी को कोई जानकारी नहीं हैं। 23 जुलाई को उन्हें मसूरी स्थित LBSNA यूपीएससी ट्रेनिंग सेंटर में बुलाया गया था लेकिन वो वहाँ उपस्थित नहीं हुईं। अब यूपीएससी द्वारा दी गई समय सीमा समाप्त हो गई है।

इससे पहले 16 जुलाई को महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव नितिन गद्रे ने पूजा खेडकर को पत्र लिखकर बताया कि सरकार के साथ उनकी ट्रेनिंग अवधि समाप्त कर दी गई है। वहीं सूत्रों ने बताया कि पूजा खेडकर ने न तो अकादमी में रिपोर्ट की है और न ही पत्र का जवाब दिया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा महाराष्ट्र सरकार को लिखे पत्र में कहा गया है, “यह निर्णय लिया गया है कि 2023 बैच की आईएएस पूजा खेडकर का जिला प्रशिक्षण स्थगित रखा जाए और उन्हें आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए तुरंत अकादमी में वापस बुलाया जाए। राज्य सरकार से अनुरोध है कि वह परिवीक्षाधीन को तुरंत कार्यमुक्त करे और उन्हें जल्द से जल्द अकादमी में आने को कहें।”

बता दें कि पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस में पूजा खेडकर के खिलाफ गलत बयानबाजी और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के मामले में आपराधिक केस दर्ज किया गया था। वहीं यूपीएससी ने उनकी उम्मीदवारी को रद्द करने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही इस बात पर विचार शुरू हुआ था कि पूजा खेडकर को भविष्य में ऐसी परीक्षा देने से भी प्रतिबंधित कर दिया जाएय़

इसके अतिरिक्त केंद्र ने पुणे पुलिस को आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर के माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक अधिकारियों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में खुद को नॉन क्रीमी लेयर का फायदा उठाने के लिए दावा किया था कि उनके माता-पिता एक दूसरे से अलग हो गए हैं। अब केंद्र ने ऐसे ही पूजा खेडकर द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की जाँच के लिए एकल सदस्यीय समिति भी गठित की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वह 2023 के बैच की आईएएस हैं।

पूजा खेडकर का पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि पूजा खेडकर का मामला पिछले दिनों चर्चा में आया था जब पुणे जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव से उनकी शिकायत ये कहते हुए की थी कि वो वीआईपी ट्रीटमेंट की माँग कर रही हैं औऱ अधिकारियों को परेशान कर रही हैं। इसके बाद उनका ट्रांसफर वाशिम कराया गया और फिर उनके खिलाफ और खुलासे होने शुरू हुए। मामला धीरे-धीरे उनके दिव्यांग होने वाले प्रमाण पत्र पर उठा, फिर उनके ओबीसी कोटे पर और फिर उनके माता-पिता पर। इससे पहले पुलिस ने पूजा खेडकर की माँ को भी गिरफ्तार किया ता।

2018, 2019, 2023, 2024… साल दर साल ‘ये मोदी सरकार का अंतिम बजट’ कह-कह कर थके संजय झा: जिस कॉन्ग्रेस ने अनुशासनहीन कह कर निकाला, उसी के लिए बैटिंग

सोशल मीडिया और टीवी न्यूज़, 2023 चैनलों पर I.N.D.I. गठबंधन के अघोषित प्रवक्ता संजय झा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को पेश किए गए वार्षिक बजट को ‘मोदी सरकार का अंतिम बजट’ बताया है। खबर ये नहीं है, असली खबर तो ये है कि 2018, 2019 और 2023 में भी वो यही बात कह चुके हैं। हर साल वार्षिक बजट के बाद वो खुद को संतुष्ट करने के लिए ये बात बोलते हैं, फिर भी अगला बजट मोदी सरकार ही लेकर आती है।

संजय झा ने लिखा, “इस बजट के बारे में सबसे अच्छी बात ये है कि आशा है कि ये मोदी सरकार का आखिरी बजट है।” बता दें कि ये धारणा इस उम्मीद पर आधारित है कि सत्ता में साझीदार आंध्र प्रदेश की TDP या बिहार की JDU मोदी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी और सरकार गिर जाएगी। हालाँकि, ये दोनों बार-बार दोहरा चुके हैं कि वो NDA में ही रहेंगे। इसी तरह संजय झा ने 2023 के वार्षिक बजट को उबाऊ बताया था और कहा था कि ये ‘विनाशकारी’ भाजपा को बाय-बाय कहने का समय है, इसे इनका अंतिम बजट रहने दीजिए।

तब उन्होंने उम्मीद थी कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार होगी, लेकिन पार्टी को 240 सीटें मिलीं। भाजपा के अलावा किसी अन्य दल को पिछली बार इससे अधिक सीटें 1991 में ही मिली थीं। इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पेश हुए बजट के दौरान भी उन्होंने उस चुनाव में भाजपा की हार की आशा के साथ इसे पार्टी का अंतिम बजट बनाया। हालाँकि, अकेले दम पर 303 सीटें लेकर भाजपा ने 2014 के प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ दिया।

इसी तरह 2018 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए बजट को उन्होंने भाजपा का अंतिम बजट बताया था। 2024 में वो इसे नकली बजट बताते हुए कह रहे हैं कि ‘असली’ वालों को वोट दीजिए। उनका इशारा आगामी विधानसभा चुनावों पर है। हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। संजय झा उसी कॉन्ग्रेस के लिए बल्लेबाजी कर रहे हैं, जिसने उन्हें जुलाई 2020 में पार्टी से निकाल बाहर किया था।

राजस्थान के सचिन पायलट का समर्थन करने पर उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगा कर उन्हें निलंबित किया गया था। सचिन पायलट तब उप-मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, उन्होंने तत्कालीन CM अशोक गहलोत के कारण बगावत की थी। हालाँकि, अंत में उन्हें तो मना लिया गया लेकिन संजय झा नहीं रहे, पार्टी में। संजय झा उसके बाद किसी पार्टी में नहीं गए, लेकिन मजबूरन टीवी न्यूज़ चैनलों पर विपक्ष का ही पक्ष रखते नज़र आते हैं।

1 साल में 15% बढ़ गया टूरिज्म सेक्टर, पहुँचे 2 करोड़ से अधिक पर्यटक: J&K में बदलाव की बयार, इस वर्ष 6 महीने में ही पहुँच गए 1 करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए बजट में 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस साल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए 42,277.74 करोड़ रुपए का बजट दिया गया है। केंद्र सरकार ने बताया है कि जम्मू-कश्मीर का विकास तेज गति से हो रहा है, जिसमें कोई रुकावट न आने पाए, इसके लिए बजट को बढ़ाया गया है। साथ ही केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि आर्टिकल 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पर्यटन तेजी से बढ़ा है।

केंद्रीय मंत्री ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया है कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से हर साल पर्यटन की वजह से कमाई में बढ़ोतरी हुई है। हर साल राज्य की कमाई में 15 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। वहीं, पर्यटकों की संख्या को देखें तो साल 2023 में पर्यटकों की संख्या 2.11 करोड़ से अधिक दर्ज की गई थी, वहीं इस साल ये संख्या जून के आखिर तक ही 1.08 करोड़ के पार जा चुका है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में पूछे गए सवाल के जवाब में लिखित में जानकारी देते हुए कहा कि अगस्त 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर के हालात बहुत तेजी से सुधरे हैं। उन्होंने साल दर साल का आँकड़ा जारी करते हुए बताया कि कोविड प्रभावित वर्ष 2020 में 34 लाख 70 हजार 834 पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुँचे थे। साल 2021 में 1 करोड़ 13 लाख 14 हजार 884 लोग केंद्रशासित प्रदेश पहुँचे, तो साल 2022 में ये आँकड़ा 1 करोड़ 88 लाख 64 हजार 332 हो गया। वहीं, 2023 में सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ये आँकड़ा 2 लाख 11 हजार 24 हजार 674 तक पहुँच गया, तो इस साल अभी जून 2024 तक ये आँकड़ा 1 करोड़ 8 लाख 41 हजार 9 लोगों तक पहुँच चुका है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बताया कि इस बीच में सरकार ने जम्मू एंड कश्मीर टूरिज्म पॉलिसी 2020 बनाया, तो जम्मू एंड कश्मीर इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2021 बनाकर केंद्र शासित प्रदेश में टूरिज्म सेक्टर को इंडस्ट्री घोषित किया। इसके साथ ही सरकार ने जम्मू एंड कश्मीर फिल्म पॉलिसी 2021 लागू, तो 75 ऑफ-बीट डेस्टिनेशंस की पहचान कर उन्हें पर्यटकों से जोड़ा।

सरकार ने बताया है कि जम्मू और कश्मीर में जी-20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की मीटिंग के बाद से इंटरनेशनल टूरिस्ट की संख्या भी बढ़ी है। वहीं, कमाई की बात करें तो इस केंद्र शासित प्रदेश के कुल जीडीपी में साल 2019-20 में टूरिज्म सेक्टर का योगदा जहाँ 7.84 प्रतिशत था, तो 2022-23 में ये बढ़कर 8.47 प्रतिशत हो गया। इस तरह से राज्य को बीते तीन सालों में होने वाली कमाई में साल दर साल करीब 15.13 प्रतिशत कमाई की बढ़ोतरी हो रही है, जो उसके विकास में मदद कर रही है।

उड़ान भरते ही जमीन पर गिरा विमान, आग लगने से 18 की मौत: नेपाल के काठमांडू एयरपोर्ट से वीडियो आई सामने, पायलट का इलाज जारी

बुधवार (24 जुलाई, 2024) को नेपाल की राजधानी काठमांडू में के बड़ा विमान हादसा हो गया। नेपाल के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एक विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई। मौके पर राहत बचाव टीम मौजूद है।

जानकारी के अनुसार, त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर यह हादसा विमान के उड़ान भरते समय हुआ। इस विमान में 19 लोग सवार थे। यह विमान सौर्य एयरलाइन्स का था। विमान राजधानी काठमांडू से पोखरा को जा रहा था। हादसे का समय सुबह लगभग 11 बजे बताया जा रहा है।

बताया गया कि उड़ान भरने के दौरान विमान का एक पंख झुक गया और वह एयरपोर्ट के क्षेत्र में ही जाकर गिर गया। इसके बाद इस विमान में तुरंत आग लग गई। हादसे की सूचना पर राहत बचाव टीमें यहाँ पहुँची। राहत बचाव टीमों ने विमान में लगी आग को बुझाया।

बताया गया कि विमान में सवार 19 में से 18 की मौत मौके पर ही हो गई है। इनके शव भी बरामद हो गए हैं। वहीं विमान उड़ा रहे कैप्टन MR शाक्य इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। उन्हें काठमांडू मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है।

विमान दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मलबा और आग की लपटों समेत धुआँ देखा गया। त्रिभुवन एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने इस हादसे को देखा और कुछ ने वीडियो भी बनाया। हादसे के कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त विमान बोम्बर्डियर कम्पनी का CRJ-200 था।

वायरल वीडियो में दिखता है कि विमान हवा में गोते लगाकर जमीन में गिरता है और इसमें आग लग जाती है। नेपाल की विमान नियामक एजेंसी ने भी 18 मौतों की पुष्टि कर दी है। नेपाल पुलिस ने बताया है कि इसमें सवार सभी 19 लोग एयरलाइन्स के ही कमर्चारी थे और पोखरा में विमान के मेंटेनेस के लिए ही जा रहे थे।

बांग्लादेशियों को ‘शरण देने’ वाले CM ममता बनर्जी के बयान पर बांग्लादेश सरकार ने ही किया विरोध: दिल्ली भेजा पत्र, कहा- इससे फैल सकता भ्रम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बांग्लादेशियों को शरण देने के बयान पर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है। बांग्लादेश ने ममता बनर्जी के बयान को भ्रम पैदा करने वाला बताया है। इससे पहले भाजपा भी उनके बयान को लेकर विरोध कर चुकी है।

बांग्लादेश की शेख हसीना शेख हसीना सरकार में विदेश मंत्री हसन महमूद ने इस मामले पर कहा, “हमारे नजदीकी सम्बन्धों वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए हम यह साफ करना चाहते हैं कि उनके बयान में भ्रम की बहुत गुंजाइश है। इसलिए, हमने भारत सरकार को एक नोट दिया है।” बांग्लादेश सरकार ने भारतीय विदेश मंत्रालय को एक नोट भी संबंध में भेजा है। इसमें ममता बनर्जी के बयान पर विरोध जताया गया है।

ममता बनर्जी ने हाल ही में एक रैली में कहा था कि अगर बांग्लादेश से लोग शरण लेने पश्चिम बंगाल में आते हैं तो जरूर वह उन्हें शरण देंगी। उन्होंने कहा था, “बांग्लादेश के मामलों पर मुझे कुछ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि यह एक देश है और इस मुद्दे पर जो कुछ भी कहा जाना चाहिए वह केंद्र सरकार का विषय है। लेकिन मैं आपको यह बता सकती हूँ कि अगर लोग हमारे दरवाजे खटखटाते हैं, तो हम निश्चित रूप से उन्हें शरण देंगे।”

उनका यह बयान बांग्लादेश में हाल के दिनों में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद आया था। बांग्लादेश में जुलाई माह की शुरुआत से ही सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर प्रदर्शन हो रहे थे। यह प्रदर्शन आरक्षण खत्म किए जाने को लेकर हो रहे थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण में बदलाव के निर्णय के बाद प्रदर्शनों को रोक दिया गया है।

दरअसल, बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने 1 जुलाई, 2024 को दिए गए फैसले में देश में 56% आरक्षण दोबारा से चालू करने का फैसला किया था। इसमें से 30% आरक्षण 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वालों के वंशजों को दिया जाता था। यह 56% 2018 में शेख हसीना की सरकार ने ही खत्म कर दिया था।

हाई कोर्ट के इस निर्णय का छात्र छात्राएँ विरोध कर रहे थे। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में लड़ने वाली तीसरी पीढ़ी को क्यों मिल रहा है। हाई कोर्ट के इस निर्णय में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव कर दिए हैं। इसके बाद से प्रदर्शनकारी शांत हैं। इन प्रदर्शनों में लगभग 100 से अधिक मौतें हुई हैं।

मानहानि मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली कोर्ट ने जारी किया समन, BJP नेता की शिकायत के बाद सुनवाई: अदालत ने कहा- स्पीड पोस्ट, इलेक्ट्रॉनिक मोड सबसे भेजो नोटिस

दिल्ली की एक अदालत ने प्रोपगेंडाबाज यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ मानहानि मामले में समन जारी किया है। ये समन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुरेश करमशी नखुआ द्वारा दायर मामले में जारी हुआ है। नखुआ का आरोप हैकि ध्रुव राठी ने उन्हें ‘हिंसक और गालीबाज’ ट्रोल कहकर उनका अपमान किया।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की साकेत कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज गुंजन गुप्ता ने 19 जुलाई को राठी के नाम समन जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि ध्रुव राठी को स्पीड पोस्ट, कूरियर के अलावा इलेक्ट्रॉनिक मोड से भी समन भेजा जाए। कोर्ट में भाजपा नेता नखुआ की तरफ से वकील राघव अवस्थी और मुकेश शर्मा पेश हुए।

बता दें कि ध्रुव राठी ने 7 जुलाई 2024 को अपने यूट्यूब चैनल पर “माई रिप्लाई टू गोदी यूट्यूबर्स | एल्विश यादव | ध्रुव राठी” शीर्षक से एक वीडियो बनाई थी। इसी वीडियो के बाद नखुआ ने उनकी वीडियो के खिलाफ आपत्ति जताई थी। नखुआ ने कहा था कि राठी द्वारा लगाए गए आरोपों के कारण उन्हें (नखुआ को) व्यापक निंदा और उपहास का सामना करना पड़ा है।

इसके अलावा यह भी कहा गया कि वीडियो में सारे आरोप निराधार और दुर्भावना से लगाए गए हैं। इससे न केवल वादी यानी नखुआ के चरित्र पर संदेह पैदा होता बल्कि समाज में उन्होंने जो सम्मान अर्जित किया है वो भी धूमिल होता है। राठी की वीडियो का नतीजा दूरगामी हो सकता है जिससे लोगों में उनके प्रति विश्वास कम हो सकता है। उन्होंने मामला दायर कराते हुए यह भी कहा था कि ये वीडियो उनके व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों क्षेत्रों को अपूरणीय रूप से प्रभावित करती है, जिसका असर पूरी तरह कभी खत्म नहीं हो पाएगा।