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आजादी के वक्त थे 3 मुस्लिम बहुल जिले, अब 9 हैं: बंगाल BJP प्रमुख ने कहा- असम और बंगाल में डेमोग्राफी बदलाव सोची-समझी रणनीति, सीएम हिमंता के बयान का किया समर्थन

बंगाल भाजपा के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने असम में डोमोग्राफी बदलाव की बात कही थी। मजूमदार ने कहा कि असम में बायोलॉजिकल तरीके से डेमोग्राफी बदलाव नहीं हुआ है। यह बदलाव घुसपैठ का नतीजा है। उन्होंने बंगाल को भी इस समस्या से पीड़ित बताया।

सुकांत मजूमदार ने कहा कि बंगाल में भी इसी तरह अवैध घुसपैठ कराकर डेमोग्राफी को बदला गया है। ऐसा सिर्फ असम और बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत हुआ है, खासकर सीमा से सटे राज्यों में स्वतंत्रता के 70 से 75 सालों में बड़ा डेमोग्राफिक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि ये सबके लिए चिंता का विषय है, क्योंकि बायोलॉजिकल तरीके से ये आबादी नहीं बढ़ी है।

मजूमदार ने आगे कहा कि अगर बायोलॉजिकल तरीके से आबादी बढ़ती तो बच्चे पैदा होते, बड़े होते और देश के नागरिक बनते। इस तरह से अगर डेमोग्राफी में परिवर्तन हुआ होता तो चिंता की बात नहीं रहती। लेकिन, बाहर से लाकर बसाए गए लोग चिंता के विषय हैं। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध तरीके से डेमोग्राफी चेंज हुई है। इसकी योजना देश के बाहर कहीं से हो रही है।

सुकांत मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आजादी के पहले और आजादी के बाद भी तीन जिले मुस्लिम बहुल थे। अब नौ जिले मुस्लिम बहुल हो गए हैं। उन्होंने कहा, “ये कहाँ से हो रहा है? कैसे हो रहा है? इतनी जनसंख्या कैसे बढ़ रही है? प्राकृतिक तरीके से इस तरह से जनसंख्या नहीं बढ़ सकती है।”

उन्होंने कहा, “आप डेटा देख लिजिए, डेटा तो साइंस है, आपको उसको अपनाना पड़ेगा, मतलब डेमोग्राफी चेंज हुई है और पूरी योजनाबद्ध तरीके से हुई है। और इसका प्लानिंग यदि देश के बाहर से कहीं से हो रहा है और भविष्य में यदि ऐसा कुछ निकल… तो मैं आश्चर्य नहीं करूँगा।”

दरअसल, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राँची में एक सभी को संबोधित करते हुए कहा असम में डेमोग्राफी बदलाव पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह विषय उनके लिए राजनीतिक नहीं, बल्कि जीवन और मरण का विषय है। सीएम सरमा ने कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो असम साल 2041 तक मुस्लिम राज्य बन जाएगा। 

राँची में हिमंता ने कहा, “असम की आबादी का हमने विश्लेषण किया तो पाया कि साल 1951 के राज्य में मुस्लिम आबादी 12 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 40 फीसदी पर पहुँच गई है। बता दें कि हिमंता बिस्वा सरमा झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के सह-प्रभारी हैं। इसी के मद्देनजर वो राँची में एक आम सभा को संबोधित कर रहे थे।

हिमंता सरमा के इस बयान पर कई मुस्लिम नेताओं ने प्रतिक्रिया दी। हैदराबाद से लोकसभा सांसद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम नेताओं ने सरमा पर जुबानी हमला बोल दिया। ओवैसी ने कहा कि हिमंता सरमा मुस्लिमों की आबादी को लेकर गलत आँकड़ा दे रहे हैं।

बता दें कि आजादी के बाद से असम और बंगाल की जनसंख्या संतुलन में भारी बदलाव हुआ है। इन दोनों राज्यों में मुस्लिमों की जनसंख्या अचानक बढ़ गई है। यह बदलाव खास तौर पर 1961 से 1991 के बीच हुई। साल 1961 से 2011 के बीच में असमिया लोगों की जनसंख्या में बायोलॉजिकल तरीके से गिरावट दर्ज की गई जबकि राज्य की जनसंख्या लगातार बढ़ रही थी।

शुक्र है मीलॉर्ड ने भी माना कि वो इंसान हैं! चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने को कर्नाटक हाई कोर्ट ने नहीं माना था अपराध, अब बदला फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने देखने को लेकर दिए अपने आदेश को वापस ले लिया है। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने कहा कि जज भी मानव हैं, उनसे भी गलतियाँ हो सकती हैं। दरअसल, हाई कोर्ट ने 10 जुलाई को दिए अपने आदेश में कहा था कि ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67B के तहत अपराध नहीं हो सकता है।

न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने शुक्रवार (19 जुलाई 2024) को निर्णय वापस लेते हुए कहा, “हम भी इंसान हैं और हमसे भी गलतियाँ होती रहती हैं। सुधार का मौका हमेशा मिलता है। इस संबंध में जाँच की जाएगी और नया ऑर्डर दिया जाएगा। यह ऑर्डर रद्द किया जाता है।” उन्होंने आगे कहा, “इस न्यायालय ने धारा 67B (B) पर ध्यान दिए बिना आदेश पारित कर दिया, यह एक त्रुटि है।”

जस्टिस नागप्रसन्ना ने एन. इनायतुल्ला के खिलाफ आरोपों को खारिज कर दिया था। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा था कि केवल ऑनलाइन अश्लील सामग्री को देखने भर से कोई आरोपित नहीं हो जाता है। उन्होंने कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 67B के तहत मुकदमा चलाने के लिए सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करना जरूरी होता है। अदालत के इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी।

राज्य सरकार ने अदालत में एक रिकॉल आवेदन दायर किया। इसके बाद अदालत ने पाया कि उसके फैसले में सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 67B के उपबंध (B) पर ध्यान ही नहीं दिया गया था। इस उपबंध में कहा गया है कि बच्चों को अश्लील या यौन रूप से चित्रित करने वाली सामग्री का निर्माण, संग्रह, खोज, ब्राउज, डाउनलोड, विज्ञापन, प्रचार, आदान-प्रदान या वितरण करना धारा 67B के दायरे में आता है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 67B(B) इस मामले के लिए प्रासंगिक है। इसके साथ ही यह भी कहा कि प्रारंभिक निर्णय में इस प्रावधान पर विचार नहीं करके गलती की गई थी। इसके कारण कार्यवाही को निरस्त किया गया है। इसके बाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश एम प्रसन्ना ने अपने पुराने आदेश को रद्द कर दिया।

क्या है मामला?

दरअसल, एम इनायतुल्ला ने 23 मार्च 2023 को दोपहर 3.30 से 4.40 बजे के बीच अपने मोबाइल फोन पर बच्चों की अश्लील तस्वीरें देखी थीं। इस संबंध में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए पोर्टल के जरिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने जानकारी प्राप्त की। इसके बाद बेंगलुरु के साइबर क्राइम स्टेशन को एक रिपोर्ट भेजी।

इस रिपोर्ट की पुष्टि होने के बाद जाँच में बच्चों के अश्लील वीडियो देखने वाले व्यक्ति का नाम इनायतुल्ला पाया गया। इनयातुल्ला के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67B (B) के तहत 3 मई 2023 को बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद आरोपित ने शिकायत रद्द करने की माँग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है टिप्पणी

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी एक ऐसा ही मामला आया था। इस पर सुनवाई करते हुए इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बच्चों द्वारा अश्लील वेबसाइट देखना अपराध नहीं है, लेकिन इस प्रकार की सामग्री में बच्चों का इस्तेमाल किया जाना अपराध है। दरअसल, यह मामला मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने से संबंधित थी।

दरअसल, मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश N आनंद वेंकटेश ने 11 जनवरी 2024 को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और IT (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के तहत अपराध नहीं है। पॉर्नोग्राफी के लिए बच्चे का इस्तेमाल किया जाता है, तभी पॉक्सो के तहत मामला बनेगा।

मद्रास हाई कोर्ट जाति-वर्ण पर अपने फैसले में कर चुका है संशोधन

इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने इस साल अपने और निर्णय में संशोधन किया था। यह निर्णय जाति प्रथा और वर्ण आश्रम से संबंधित था। मद्रास हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अनीता सुमंत ने कहा था कि जाति व्यवस्था में समस्या है लेकिन यह व्यवस्था एक सदी से भी कम पुरानी है और इसका दोष पुरातन वर्ण व्यवस्था पर नहीं मढ़ा जा सकता।

इसको लेकर सवाल उठने लगे तो मद्रास हाई कोर्ट ने इस फैसले में संशोधन किया। अपने नए फैसले में हाई कोर्ट ने लिखा गया है, “जातियों का वर्गीकरण, जैसा कि हमें आज दिखता है, काफी नई और हालिया सोच है।” यह आदेश हिंदू मुन्नानी संस्था द्वारा उदयानिधि स्टालिन, तमिलनाडु के राज्यमंत्री पीके शेखरबाबू सांसद ए राजा के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया था।

इस याचिका में विवादित बयानों के बावजूद उनके पद पर बने रहने पर प्रश्न उठाए गए थे। गौरलतब है कि 2 सितंबर 2023 को चेन्नई में एक कार्यक्रम में उदयानिधि स्टालिन ने कहा था कि कुछ चीजों का न केवल विरोध होना चाहिए बल्कि उन्हें समाप्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “जिस तरह डेंगू, मच्छर, मलेरिया और कोरोनो वायरस को खत्म किया जाना चाहिए, उसी तरह हमें सनातन धर्म को भी खत्म करना होगा।” 

आरक्षण के खिलाफ बांग्लादेश में धधकी आग में 115 की मौत, प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश: वहाँ फँसे भारतीयों को वापस ला रही है मोदी सरकार

आरक्षण के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों की हिंसा के कारण बांग्लादेश के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को उतारा गया है। इसके साथ ही उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के भी आदेश जारी किए गए हैं। वहाँ हिंसा में अब तक 115 लोगों की जान जा चुकी है और 1500 से अधिक लोग घायल हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने रविवार (21 जुलाई) और सोमवार (22 जुलाई) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। सिर्फ आपातकालीन सेवाओं को ही चालू रखने की अनुमति दी गई है। वहीं, पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इंटरनेट सेवा और रेल सेवा को बंद कर सेना पर तैनात किया गया है। राजधानी ढाका की सड़कों पर सैनिक और पुलिस गश्त कर रहे हैं।

वहाँ के कई टेलीविजन समाचार चैनलों ने न्यूज का प्रसारण बंद कर दिया है। वहीं, ज़्यादातर स्थानीय अख़बारों की वेबसाइटें बंद हो गई हैं। इस बीच, बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक और प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कुछ प्रमुख सरकारी वेबसाइटों को हैक कर लिया। इसके साथ ही 19 जुलाई को ढाका के नरसिंगडी जेल पर हमला करके उसमें बंद 800 कैदियों को भगा दिया गया और जेल को आग लगा दी गई।

हालात का समाधान निकालने के लिए शुक्रवार (19 जुलाई) की देर रात दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने बैठक की। इस दौरान कम-से-कम तीन छात्र नेता मौजूद थे। उन्होंने सरकार के प्रतिनिधि कानून मंत्री अनीसुल हक से मौजूदा कोटा प्रणाली में सुधार, झड़पों के बाद पुलिस द्वारा बंद किए गए छात्र छात्रावासों को फिर से खोलने और कुछ विश्वविद्यालय को अधिकारियों को पद से हटाने की माँग की।

बांग्लादेश की हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहाँ फँसे अपने नागरिकों को सुरक्षित वापसी का रास्ता तैयार कर लिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, शनिवार (20 जुलाई) तक 978 भारतीय स्वदेश लौट आए हैं। इनमें से 778 लोग भूमि सीमा के माध्यम से और 200 से अधिक विमान के माध्यम से वापस लौटे। भारत ने बांग्लादेश की हालत को ‘आंतरिक मामला’ बताते हुए टिप्पणी से परहेज किया है।

पीएम हसीना ने 14 जुलाई को कहा, “अगर स्वतंत्रता सेनानियों के पोते-पोतियों को कोटा का लाभ नहीं मिलता तो क्या रजाकारों के पोते-पोतियों को इसका लाभ मिलना चाहिए?” हसीना ने कोटा प्रणाली का बचाव करते हुए कहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अपने योगदान के लिए दिग्गजों को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए, चाहे उनकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो।

इस बयान के बाद बांग्लादेश के छात्र कोटा प्रणाली को समाप्त करने की माँग करते हुए सड़कों पर उतर आए। दरअसल, 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ़ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानियों के परिजनों को 30% आरक्षण दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों को बांग्लादेश की विपक्षी और कट्टर इस्लामी खालीदा जिया का समर्थन हासिल है।

हिंसा का कारण

दरअसल, बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में कुछ समूहों के लिए 2018 तक 56% आरक्षण का प्रावधान था। इन्हें बांग्लादेश में बेहद आकर्षक माना जाता है। इन समूहों में विकलांग व्यक्ति (1%), स्वदेशी समुदाय (5%), महिलाएँ (10%), अविकसित जिलों के लोग (10%) और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार (30%) शामिल हैं।

इससे योग्यता के आधार पर चयन के लिए केवल 44% सीटें बचीं। साल 2018 में छात्र समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके कारण हसीना सरकार ने कोटा पूरी तरह से खत्म कर दिया। फिर जून 2024 में हाई कोर्ट फिर बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को पलट दिया और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए 30% आरक्षण को खत्म करने को अवैध ठहराया।

काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर परिसर के दुकानदारों को लगाना होगा नेम प्लेट: बिहार के बोधगया की दुकानों में खुद ही लगाया बोर्ड, बोले- व्यवसाय पर कोई फर्क नहीं

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग में पड़ने वाले दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के योगी सरकार के निर्देश के बाद भले विपक्षी दल इस पर विवाद कर रहे हों, लेकिन यह नियम धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत में लागू हो रहा है। यूपी की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार के बाद यह मध्य प्रदेश के उज्जैन, बिहार के गया आदि जगहों पर नेम प्लेट लगने लगे हैं। इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने की माँग उठ रही है।

उज्जैन में नेम प्लेट का आदेश

उज्जैन नगर निगम ने शनिवार (20 जुलाई 2024) को दुकान मालिकों को अपनी दुकानों के बाहर अपना नाम और मोबाइल नंबर की प्लेट लगाने का निर्देश दिया। उज्जैन के मेयर मुकेश ततवाल ने कहा कि इस आदेश का पहली बार उल्लंघन करने पर 2,000 रुपए और दूसरी बार 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

ततवाल ने कहा कि उज्जैन की मेयर-इन-काउंसिल ने 26 सितंबर 2002 को दुकानदारों को अपना नाम प्रदर्शित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इसे आपत्तियों और औपचारिकताओं के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया था। अब इस प्रस्ताव को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर ने कहा कि यह कदम एमपी दुकान स्थापना अधिनियम या गुमास्ता लाइसेंस में निहित है।

मेयर ने कहा, “उज्जैन एक धार्मिक और पवित्र शहर है। लोग यहाँ धार्मिक आस्था के साथ आते हैं। उन्हें उस दुकानदार के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे वे सामान खरीद रहे हैं। अगर कोई ग्राहक असंतुष्ट है या उसके साथ धोखा हुआ है तो दुकानदार के बारे में जानकारी होने से उसकी समस्या हल हो सकती है।”

वहीं, इंदौर से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुकानों के बाहर दुकानदार का नाम लिखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हर छोटा-बड़ा व्यक्ति अपना नाम बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। उन्होंने इसे आस्था के साथ-साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के दुकानों पर भी नेम प्लेट

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम के आसपास स्थित दुकानदारों को भी अपने नाम का बोर्ड लगाना होगा। गोदौलिया में शनिवार (20 जुलाई 2024) को पुलिस ने दुकानदारों से बात की और उन्हें अपना नाम लिखने के लिए कहा। काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र में लगभग 500 दुकानें हैं। इन दुकानों में लगभग 15 प्रतिशत दुकानें मुस्लिमों की हैं।

वहीं, राष्ट्रीय हिंदू दल के पदाधिकारियों ने भी दुकानों पर भगवा झंडा और आधार कार्ड रखने के लिए कहा है। उधर, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने मंदिर के बाहर दुकानदारों को नाम लिखने की अपील की है। बता दें कि सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार लगभग 1 करोड़ लोगों के आने के अनुमान है।

प्रशासन के मुताबिक, इस आदेश के बाद अब मंदिर के बाहर स्थित दुकानदार श्रद्धालुओं को गुमराह करके पूजा सामग्री की बिक्री नहीं कर पाएँगे। दुकान मालिक का नाम लिखकर किराएदार दुकान संचालित नहीं कर सकेंगे। उन्हें बाहर अपना असली नाम-पता लिखना होगा। मंदिर के सामने देवी-देवताओं के नाम लिखकर गैर-धर्म के दुकानदार व्यवसाय करते मिले हैं। पुलिस ने उन्हें नोटिस थमाया है।

मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा, “यह आदेश सरकार के नहीं हैं। पुलिस विभाग ने दुकानदारों की पहचान के लिए सख्ती की है। सोशल मीडिया पर अक्सर ये दिखता है कि एक वर्ग के लोग मांस भी खा रहे हैं और शाकाहारी खाने का सामान भी बेच रहे हैं। ऐसे भी वीडियो देखने में आए हैं कि खाने पर पहले थूकते हैं, फिर बेच रहे हैं। ऐसे में एक वर्ग, जो सामान खरीद रहा है, उसकी आस्था को चोट पहुँचती है।”

बिहार के गया स्थित महाबोधि मंदिर के दुकानदारों ने लगाए नेम प्लेट

उत्तर प्रदेश में शुरू हुए इस नियम को लेकर भले ही विपक्ष राजनीति करे, लेकिन श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने इसे सही बताया है। यही कारण है कि बिहार के गया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के बाहर स्थित दुकानदारों ने अपने मन से दुकानों पर नेम प्लेट लगा ली है। हिंदू और मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी स्वेच्छा से फल की दुकानों के आगे ये नेमप्लेट लगा रखा है।

सावन के महीने में बोधगया के महाबोधि मंदिर में भी काँवड़िया पहुँचते हैं और गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव पर जल और बेल पत्र चढ़ाते है। इसको देखते हुए स्थानीय दुकानदारों ने आपसी सहमति से दुकान के आगे नेम प्लेट लगाने का फैसला लिया है। यहाँ पर कुछ फल दुकानदार तो बीते 20 सालों से अपने दुकान पर अपना नाम लिखे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके व्यापार पर फर्क नहीं पड़ता।

मुहर्रम में शर्बत बाँट रही थी हिन्दू लड़की, उठा कर ले गए: न्याय के लिए प्रदर्शन कर रहे माता-पिता, बेटी का कोई अता-पता नहीं

साल 2021, 19 अगस्त.. दिन गुरुवार। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सुक्कुर का उपनगरीय इलाका संगरार। मुहर्रम का जुलूस निकल रहा था। लोग मातम मना रहे थे। कुछ लोग शर्बत बाँट रहे थे। इन्हीं शर्बत बाँटने वालों में शामिल थी 7 साल की प्रिया… उस दिन के तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रिया का अता-पता नहीं है।

मुहर्रम के जुलूस में मातम मना रही भीड़ प्रिया को खा गई, या कोई हैवान इस मातमी भीड़ से निकल कर बच्ची को निगल गया, अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है। माता-पिता परेशान हैं। रातों में उठकर अचानक बैठ जाते हैं, बेटी की याद में रोने लग जाते हैं। अब परेशान होकर वो पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी और सबसे बड़े शहर कराची में प्रदर्शन कर रहे हैं। सिंध प्रांत के मंत्री उनसे मिलते हैं, पुलिस अधिकारी उनसे मिलते हैं, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं है।

7 साल की प्रिया अब 10 साल की हो रही होगी। उनकी सलामती की दुआ माँगते और उसे खोजने की गुहार लगाते प्रिया की माँ वीणा कुमारी और पिता राज कुमार पाल ने कराची के क्लिफ्टन इलाके के मशहूर तीन तलवार नाम की जगह पर शुक्रवार (19 जुलाई 2024) को प्रदर्शन किया। उन्होंने ये प्रदर्शन इसलिए किया, ताकी लोगों को याद दिलाया जा सके कि उनकी बेटी का अब तक पता नहीं चल पाया है।

इस प्रदर्शन के दौरान सिंध के गृह मंत्री जिया लैंग्रोव और पुलिस महानिरीक्षक जावेद ओधो ने प्रिया के माता-पिता से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि एक संयुक्त जाँच दल (जेआईटी) मामले पर काम कर रहा है, जिसके बाद माता-पिता ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। इसके बाद प्रिया के पिता राज कुमार पाल ने कहा, “उन्होंने हमसे फिर वादा किया है कि वे हमारी बेटी की तलाश कर रहे हैं और वह जल्द ही बरामद हो जाएगी।”

पुलिस महानिरीक्षक जावेद ओधो ने कहा कि तमाम जाँच के बाद भी किसी गवाह को याद नहीं है कि छोटी लड़की के साथ क्या हुआ था। उन्होंने कहा कि जेआईटी इस मामले को सुलझाने के लिए दिन-रात काम कर रही है और हमारे पास जल्द ही जवाब होगा। हालाँकि इसका क्या जवाब होगा, इसका अंदाजा सभी को है।

बता दें कि सिंध प्रांत के कई हिस्सों में नाबालिग हिंदू किशोरियों की ही नहीं, बल्कि विवाहित हिंदू महिलाओं तक का अपहरण और उनका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कर लेने के अनगिनत मामले आते रहे हैं। पाकिस्तान में हिंदुओं पर होने वाली बेइंतिहाँ जुल्म की खबरें कभी-कभार मीडिया में भी आ जाती है, लेकिन ऐसे मामलों में कभी ठोस कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई होती भी है, तो स्थानीय ताकतवर कट्टरपंथी मुस्लिमों के दबाव में वो बंद कर दी जाती है और मामला हमेशा ढाक के तीन पात की तरह वैसे का वैसे ही रह जाता है और फिर उसी तरह की दूसरी घटनाओं पर हल्ला मचना शुरू हो जाता है। घटना दर घटना घटती जाती हैं। पीड़ित सुबकते रहते हैं, लेकिन कभी न्याय नहीं मिल पाता। खैर, न्याय की बात करना भी जहाँ बेमानी हो, वहाँ न्याय की उम्मीद क्या करना?

‘मध्य प्रदेश और बिहार में भी काँवर यात्रा मार्ग में ढाबों-ठेलों पर लिखा हो मालिक का नाम’: पड़ोसी राज्यों में CM योगी के फैसलों की गूँज, उठी माँग

उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले सभी ढाबों-ठेलों को आदेश दिया गया है कि वो अपने मालिकों के नाम भी प्रदर्शित करें। भले ही ये निर्णय सभी जाति-धर्मों के लिए लिया गया है और इसका उद्देश्य पारदर्शिता है, लेकिन मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग को इससे खासी परेशानी हो रही है जिसका प्रतिनिधित्व AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और TMC के फिरहाद हकीम जैसे लोग कर रहे हैं। वहीं सामान्य लोग पूछ रहे हैं कि जब मुस्लिम ‘हलाल’ सर्टिफिकेट को प्राथमिकता देता है तो क्या काँवड़िए पवित्रता के लिए स्वेच्छा से ये नहीं चुन सकते कि वो कहाँ से खाना खाएँ?

इस फैसले की गूँज अब मध्य प्रदेश और बिहार में भी सुनाई दे रही है, जहाँ के भाजपा विधायकों ने यूपी जैसा फैसला लागू करने की माँग की है। मध्य प्रदेश में जहाँ भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है और मोहन यादव मुख्यमंत्री हैं, वहीं बिहार में NDA की सरकार है जिसमें JDU के नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। JDU और TDP केंद्र में भाजपा के 2 सबसे बड़े साझीदारों में से हैं। बिहार में तो नहीं, लेकिन MP में उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह का फैसला जल्द लागू होगा।

इंदौर से BJP विधायक रमेश मेंदोला ने सीएम यादव को एक चिट्ठी लिखी है। उन्होंने ये आदेश देने का अनुरोध किया है कि हर दुकान के सामने दुकानदार का नाम लिखा जाए। उन्होंने कहा कि नाम पूछना ग्राहक का अधिकार है और नाम बताने में दुकानदारों को शर्म नहीं बल्कि गर्व होना चाहिए। उन्होंने राज्य के हर छोटे-बड़े कारोबारी के लिए ऐसा नियम बनाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि इससे कारोबारियों की पहचान स्थापित होगी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के तीव्र होने के कारण बाजार मजबूत होगा।

वहीं बिहार में भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा यूपी जैसा फैसला यहाँ लागू हो जाता है तो सारा झगड़ा ही खत्म हो जाएगा, यात्री इच्छानुसार अपनी पसंद की दुकान पर जाएँगे। मधुबनी के बिस्फी से MLA बचौल ने कहा कि इससे बाद में होने वाले विवादों से छुटकारा मिल जाएगा, काँवड़ियों को झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। बता दें कि बिहार से बड़ी संख्या में काँवड़ यात्री झारखंड के देवघर स्थित वैद्यनाथ धाम में जल अर्पण करने जाते हैं। वहीं मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं।

‘लैंड जिहाद और लव जिहाद को बढ़ावा दे रही हेमंत सोरेन की सरकार’: झारखंड में गरजे अमित शाह, कहा – बिगड़ रहा जनसंख्या का संतुलन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ‘भूमि जिहाद’, ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उन पर तीखा हमला किया। अमित शाह ने कहा कि ‘भूमि जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तन ला रहे हैं। उन्होंने रांची में भारतीय जनता पार्टी की बैठक के दौरान यह टिप्पणी की।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा – ‘मैं आदिवासी भाइयों और बहनों से अपील करना चाहता हूँ कि वे ऐसी सरकार चुनें जो घुसपैठ रोक सके। अगर घुसपैठ नहीं रुकी तो आदिवासियों की जमीन और जंगल दोनों खतरे में पड़ जाएँगे। घुसपैठ का मुद्दा आदिवासियों के लिए एक बड़ा सवाल है। कॉन्ग्रेस, हेमंत सोरेन और उनके मंत्री जिन्हें अभी गिरफ्तार किया गया है, ने झारखंड में घुसपैठ करके आदिवासियों के खिलाफ लव जिहाद, जमीन जिहाद और जंगल जिहाद को अंजाम दिया है।’

केंद्रीय गृह मंत्री ने झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ के लिए राज्य के सीएम हेमंत सोरेन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे खुद को आदिवासी सीएम बताते हैं, लेकिन आदिवासियों की चिंता करने के बदले लैंड और लव जिहाद के जरिए उनकी जमीन लूटने वाले घुसपैठियों को संरक्षण दे रहे हैं। झारखंड में आदिवासियों की संख्या लगातार घट रही है।

गृहमंत्री अमित शाह ने जनसभा में कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में आज देश का चहुँमुखी विकास हो रहा है, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार की नाकामी के कारण झारखंड इस विकास यात्रा में पीछे छूट गया है। झारखंड की जनता ने इस बार प्रदेश में बदलाव का कमल खिलाने का संकल्प लिया है। आने वाले चुनाव में भाजपा के कार्यकर्ता मोदी जी के कार्यों से जन-जन को अवगत कराकर प्रदेश में परिवारवाद, भ्रष्टाचार व जातिवाद मुक्त सरकार बनाने वाले हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ भी अहम बैठक की। इस बैठक में उन्होंने सभी से चुनाव में जुट जाने के लिए कहा। अमित शाह ने इसकी जानकारी एक्स पर देते हुए लिखा, “आज (20 जुलाई 2024) राँची (झारखंड) में प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में पदाधिकारियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। झारखंड को हेमंत सोरेन की सरकार ने केवल ठगने का काम किया है। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं ने यह ठान लिया है कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनाकर प्रदेशवासियों को उनका अधिकार दिलाएँगे और झारखंड को देश में नंबर 1 राज्य बनाएँगे।”

बीजेपी के इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान, सह प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्व सरमा, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, झारखंड बीजेपी के प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए कहा कि विस्तृत सम्मेलन में झारखंड के हर बूथ से कार्यकर्ता आए हैं। मैं आप सभी का मनपूर्वक अभिनंदन करता हूं, आपकी ताकत से ही झारखंड में भाजपा 9 सीटें जीती है।

हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार सबसे ज्यादा भ्रष्ट

कॉन्ग्रेस और जेएमएम पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा, “झारखंड हमेशा से नक्सलवाद से पीड़ित राज्य था, लेकिन मोदी जी ने बिहार और झारखंड से नक्सलवाद को समाप्त किया है। इंडी अलायंस वाले कहते हैं कि हमने विकास किया है। हेमंत सोरेन जी, केंद्र में 10 साल कॉन्ग्रेस ने शासन किया और 10 साल भाजपा ने, आप हिसाब लेकर आइए, मैं तो भाजपा का हिसाब लेकर आया हूँ। मैं झारखंड को आज बताने आया हूँ कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाली सरकार सबसे भ्रष्ट सरकार है। कॉन्ग्रेस के एक सांसद के घर से 300 करोड़ रुपए मिलते हैं। एक मंत्री के PA के घर से 30 करोड़ मिलते हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी जवाब दे कि ये पैसा किसका है? कॉन्ग्रेस ऐसे भ्रष्टाचारियों को लेकर चलती है और JMM भी उनके साथ है।

चीन में जिस पुल को कहते थे इंजीनियरिंग का मिसाल, वो ढह गया: बारिश में बही गाड़ियाँ, 30+ लापता

उत्तरी चीन में मूसलाधार बारिश के कारण एक पुल ढहने से 12 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग लापता हो गए। चीन की सरकारी मीडिया ने शनिवार (20 जुलाई) को यह जानकारी दी। हाल के दिनों में उत्तरी और मध्य चीन के बड़े हिस्से में भारी बारिश हुई है, जिससे बाढ़ आ गई है और काफी नुकसान हुआ है।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी शानक्सी प्रांत में स्थित यह पुल शुक्रवार रात “अचानक भारी बारिश और बाढ़ के कारण” टूट गया। शिन्हुआ ने बताया कि शांग्लुओ शहर में सभी 12 पीड़ित पाँच वाहनों के अंदर पाए गए, जिन्हें पुल के नीचे नदी से बरामद किया गया। इसमें कहा गया है कि कम से कम 31 लोग लापता हैं और शुरुआती जाँच से पता चला है कि 17 कारें और आठ ट्रक नदी में गिर गए हैं। राज्य टेलीविजन पर दिखाई गई तस्वीरों में पुल का हिस्सा डूबा हुआ दिखाया गया है, जिसके ऊपर से नदी बह रही है।

शिन्हुआ के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों को ढूँढने के लिए “सम्पूर्ण प्रयास” करने का आग्रह किया है। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन के याआन कस्बे में शनिवार (20 जुलाई 2024) को भयंकर तूफान के कारण अचानक बाढ़ आने के बाद 30 से अधिक लोग लापता बताए गए हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष शी जिनपिंग ने यह निर्देश तब दिया जब भारी बारिश के कारण आई बाढ़ के कारण शुक्रवार रात करीब 8:40 बजे शांग्लुओ शहर के झाशुई काउंटी में स्थित पुल ढह गया। शनिवार दोपहर 12 बजे तक 12 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 31 अन्य लापता थे। शी ने कहा कि तत्काल प्राथमिकता बचाव कार्य चलाना, लापता लोगों की तलाश करने के लिए हर संभव प्रयास करना और हताहतों की संख्या को न्यूनतम करना है। उन्होंने प्रभावित लोगों के परिवारों की सहायता के लिए भी प्रयास करने का आग्रह किया।

मुस्लिम मुल्कों में चलता है ‘झटका’ मांस? मक्का-मदीना के रास्ते में हाजियों को थूक वाला पानी पिलाते हैं हिन्दू? देवी-देवताओं के नाम से इतना प्यार है तो कर लो घर-वापसी

हम कई बार इस बात को देख चुके हैं कि काँवड़ यात्रा के दौरान मजहबी भीड़ काँवड़ियों के ऊपर हमले भी करते हैं, उनके रास्ते में मांस भी फेंकते हैं और यही नहीं, भगवान शिव और उनके पूरे परिवार का मजाक भी बनाते हैं। इन्हीं सबके मद्देनज़र इस प्रकार के सांप्रदायिक दंगों और झगड़ों से निपटने के लिए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने एक नियम बनाया कि रास्ते में जितने भी ठेले और ढाबे आदि होंगे वो सब अपने सही और असली नाम के साथ ही दुकान लगाएँगे ताकि किसी भी प्रकार से भक्तों को असुविधा ना हो।

और, यह नियम किसी एक मजहब के लिए नहीं बल्कि प्रत्येक दुकानदार के लिए है। क्योंकि, कई बार इस बात को देखा गया है कि तीर्थयात्री काँवड़िए वहाँ पर जाकर भोजन तो कर लेते हैं लेकिन बाद में पता लगता है कि यह तो कोई ‘थूक नान’ स्पेशलिस्ट वालों का ढाबा था। मुजफ्फरनगर प्रशासन के इसी नियम पर बहुत सारे ऐसे सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि मुस्लिम लोगों द्वारा अपने ढाबों पर बनाए जाने वाले खानों में थूकने के कई वीडियो सामने आए हैं।

हमने रोटियों पर थूकते हुए कई वीडियो देखे हैं। आम पर पेशाब करते हुए मुहम्मदिनों को कौन नहीं जानता है? खीरों को थूक में लपेटकर पॉलिथीन में भरने वाली वीडियो अभी हमारी आँखों के सामने आ जाती है तो मन में घृणा पैदा हो जाती है। बर्तनों को चाटने वाले वीडियो, सब्जियों को नाली में धोने वाले वीडियो, हिंदू बहुल क्षेत्र में गौमांस के समोसे खिलौने वाले दीनी व्यक्ति के वीडियो। दूध में थूकने वाले दीन के पक्के दूधिए का वीडियो। होटल में काम करने वाले मुस्लिम लड़कों द्वारा भोजन पर थूकने वाले वीडियो। दिल्ली का वह वीडियो जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति पानी की बोतलों में थूक रहा है।

एक बूढ़े बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति द्वारा सेबों पर थूकने वाला वीडियो या फिर इसी प्रकार कपड़ों पर इस्त्री करने वाले बुजुर्ग का वह वीडियो जिसमें वह मुँह में पानी भरकर कपड़ों पर थूक रहा है। या फिर ड्राई फ्रूट्स के ऊपर ऐसे ही मुँह में पानी भरकर छिड़काव करता अधेड़ नमाजी हो। या वह छोटे बच्चों का वीडियो जिसमें वह लोग उज्जैन महाकाल की यात्रा के ऊपर थूक रहे हैं। ऐसे तमाम वीडियो हमें बताते हैं कि किस प्रकार हिंदुओं को अपना जूठा खिलाने की सड़ी हुई घिनौनी मानसिकता इस रेगिस्तानी कैंसर रूपी कल्ट के दिमाग में पनपती रहती है।

इसके अलावा काँवड़ियों पर हमला करना, उनके ऊपर थूकना, भगवान शिव के पूरे परिवार पर आपत्तिजनक फब्तियाँ कसना, काँवड़ियों के रास्ते में मांस के लोथडे फेंकना – यह सब घटनाएँ बहुत आम है। हम अभी रियासी की घटना भूले नहीं जिसमें 6000 रुपए के लिए 9 देवी भक्तों की जान लेने वाला इसी कैंसर रूपी मजहब का व्यक्ति था। गद्दार पुलिस अधिकारी DSP शेख आदिल मुस्ताक जो भारत की सुरक्षा की शपथ लेकर आतंकवादियों को हमारी सेना की सभी जानकारियां देता रहता था और किस प्रकार कानून के हाथों से बचना चाहिए वह सब हथकंडे भी आतंकवादियों को बताता था।

आज उसी के कारण हमारे सेना के अधिकारी और जवान बलिदान हुए। और यह लोग सोचते हैं कि हम फिर भी इन्हें अपना भाई माने और उनके थूक नान खाएँ, गौंमांस मिश्रित समोसे खाएँ और जब यह हमारी बहन बेटियों को छेड़े, हमारे भाइयों पर हमला करें तो हम चुपचाप अपने घर के ऊपर यह लिखकर भाग जाएँ कि यह मकान बिकाऊ है। अब थोड़ी विवेचना उन ढाबों पर भी करते हैं जहाँ यह लोग हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट करने का पूरा षड्यंत्र चलाते होंगे अन्यथा अगर किसी को उनके ढाबे या होटल में खाना है तो वह वैसे भी चला जाएगा लेकिन नाम बदलकर ठीक उसी प्रकार से धोखा दिया जाता है जिस प्रकार ‘लव जिहाद’ करने वाला अब्दुल हिंदू बहन बेटियों को धोखे में रखकर उनका मजहब परिवर्तित करता है।

अभी कुछ दिन पहले ही लखनऊ के एक व्यापारी के साथ घटी दुर्घटना सामने आई थी जिसमें हिंदू व्यापारी ने एक मुस्लिम व्यक्ति को अपने यहाँ नौकर रखा था और इस नौकर ने व्यापारी की इकलौती बेटी के बाथरूम में कैमरा लगाकर उसके वीडियो बनाए और फिर उसे काफी लंबे समय तक ब्लैकमेल करता रहा था। अभी उसे घटना को बीते ज्यादा समय नहीं हुआ एक और घटना हमारे सामने है बिहार के VIP पार्टी के संस्थापक व पूर्व मंत्री मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी का केस नया ताजा ही है।

जीतन ने ताउम्र हिंदू-मुस्लिम एकता की बात की, उन्होंने हिंदुओं को भले ही पीछे धकेल दिया लेकिन मुस्लिमों को हमेशा प्रायोरिटी पर रखा, इसी के चलते जीतन ने एक नौकर रखा हुआ था जिसका नाम था काजिम अंसारी। पिछले दिनों काजिम ने जतन से डेढ़ लाख रूपए उधार लिए थे समय से न लौटने पर जीतन ने उसे बीच-बीच में कई बार पैसे वापस करने के लिए टोका जिससे काजिम को गुस्सा आ गया और वह अपने साथियों को लेकर एक रात जीतन के घर में घुस गया और उसके साथ वही हश्र किया जैसा काजिम हर बकरा ईद पर एक बकरे के साथ किया करता है।

अर्थात, तुम लोग उन्हें भाई मानकर गरीब मानकर मजलूम मानकर नौकरी पर तो रखते हो लेकिन उनकी नजर या तो तुम्हारी बेटियों पर होती है या फिर तुम्हारे धन ऐश्वर्य और पैसे पर होती है। फिर ऐसे में सामान्य लोग जो यह खबरें सुनते और पढ़ते हैं या अपने आस पड़ोस में ऐसी घटनाओं को होते हुए देखते हैं क्या वह उनके हाथ का पानी भी पीना मंजूर करेंगे ऐसे में इन लोगों ने कैसे सोच लिया कि शिव भक्त और भोजन में पवित्रता रखने वाले लोग उनके हाथ का थूका हुआ खाना खाएँगे या फिर मांस मिश्रित पकवान ग्रहण करेंगे?

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ‘जनता वैष्णो ढाबा’ चलता है। लोग सोचते हैं कि यह कोई शाकाहारी ढाबा है जिसका मालिक कोई हिंदू होगा। लेकिन 15 साल से चल रहे इस ढाबे का मालिक मोहम्मद अनस सिद्की है। आगरा मथुरा रोड पर ‘श्री खाटू श्याम ढाबा’ वर्षों से चल रहा है। लोग धोखे में यहां पर शुद्ध शाकाहारी भोजन खोजते हुए पहुँच जाते हैं जबकि इसके मालिक का नाम मोहम्मद इरशाद है। बरेली में ‘चौधरी स्वीट्स’ के मालिक का नाम अहमद मियाँ है।

अब तो ‘अग्रवाल स्वीट्स’ के मालिक भी मुस्लिम बने बैठे हैं जहाँ से हिंदू बड़े चाव से अपने मनपसंद व्यंजन खरीदना है जबकि उसे पता ही नहीं केस में कितने मोमिनो का थूक मिला हुआ है। बिहार में चलने वाली एक दुकान जिसका नाम ‘अर्जुन सिंह’ था यहाँ पर इसका मालिक मोहम्मद उजियार आलम निकला जो हिंदू बनकर अपनी दुकान पर हिंदू लड़कियों से छेड़छाड़ किया करता था। हरिद्वार रोड पर ‘न्यू गणपति टूरिस्ट ढाबा’ चलता है जिसका मालिक मोहम्मद वसीम है।

मुजफ्फरनगर के हाईवे NH 58 पर स्थित ‘ओम शिव वैष्णव ढाबा’ चलता है जिसका मालिक मोहम्मद आदिल है। खुलासा होने के बाद आजकल इसने अपने ढाबे का नाम बदलकर ‘वेलकम टू पिकनिक पॉइंट टूरिस्ट ढाबा’ कर दिया है। हर की पैड़ी पर बहुत सारे भोजनालय चलते हैं जबकि उनके मालिक भी मुस्लिम है। इसी प्रकार एक आरोपी को जब पकड़ा गया तो उसने अपना नाम चुन्नू बताया लेकिन आधार कार्ड पर देखने के बाद पता लगता है कि इसके अब्बा का नाम मोहम्मद मुनीर था, जबकि नगर निगम के उप नियमों के अनुसार हर की पैड़ी क्षेत्र में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।

खतौली में ‘शिव पंजाबी ढाबा’ चलता है जिसका मालिक भी मुस्लिम ही निकला। दिल्ली के किशनगंज बाजार में एक मुस्लिम युवक द्वारा राम मीट शॉप खोली गई बाद में खुलासा होने पर यह भी विक्टिम कार्ड खेलने लगा। उत्तर प्रदेश में ही राज मेहंदी स्टोर के नाम से बहुत सी दुकान चलती हैं जो हिंदू बहुलक क्षेत्र में जानबूझकर खोली जाती हैं और हिंदू लड़कियों को मेहंदी लगाने के नाम पर खुल्लम-खुल्ला ‘लव जिहाद’ को प्रमोट करते हैं।

मथुरा में ताजमहल नाम से एक होटल चलता है जिसका मालिक जमील अहमद है जबकि मथुरा के मंदिर एरिया में नॉनवेज की बिक्री प्रतिबंधित है। लेकिन नाम बदलकर यह लोग नॉनवेज का धंधा भी चलाते हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ‘श्री लक्ष्मी शुद्ध फैमिली ढाबा’ दिखाई दे रहा था जबकि इसका मालिक मोहम्मद शमशेर था। धार मध्य प्रदेश में हिंदू देवता साँवड़िया के नाम से मोहम्मद इलियास दुकान चलता था।

अब एक बात सोचिए कि जब एक मुस्लिम झटके का मीट नहीं खा सकता, जब एक मौलाना अपनी भीड़ को यह कह रहा है कि तुम हिंदुओं की पूजा पाठ का प्रसाद मत खाओ यह हमारे दीन में हराम है पाप है। जब वह लोग टूथपेस्ट से लेकर चड्डी-बनियान, भोजन और साबुन-शैंपू व कपड़े, यहाँ तक की टूरिज्म भी हलाल सर्टिफाइड ही इस्तेमाल करते हैं ताकि इनकी अर्थव्यवस्था, इस्लामी अर्थव्यवस्था मजबूत हो और ये लोग यहाँ पर पूरी तरह कब्जा कर सके।

ये लोग जो भी हमसे कमाते हैं उससे ही तो इनकी आर्थिक व्यवस्था और स्थिति मजबूत होती है, उसी का इस्तेमाल ये हमारे खिलाफ करते हैं तो फिर हिंदू क्यों मजबूर हो कि वह उनके हाथ का खाए। ईद के दौरान मुस्लिम घूम-घूम कर अपनी कम्युनिटी में कहते हैं कि वो सिर्फ मुस्लिमों की दुकानों से ही सामान खरीदे, हिंदुओं की दुकान से सामान ना खरीदें। जब उस पर किसी को कोई एतराज नहीं है तो फिर इन चीजों पर क्यों ऐतराज़ है? जिनके कारण अब तक काँवड़ यात्रा के दौरान काफी सारे सांप्रदायिक झगड़े पनप चुके हैं क्योंकि काँवड़िया यह सोचकर किसी भोजनालय में प्रवेश करता है कि यह किसी हिंदू का होगा लेकिन जैसे कि मैंने वीडियो की शुरुआत में ही बताया कि हमारे पास कई ऐसे उदाहरण है कि यह लोग हमारे धर्म के खिलाफ काम करते हैं, हमारे लोगों को जूठा खिलाते हैं, हमारे लोगों को पूज्य गाय माता का मांस खिलाते हैं हमारी बहन-बेटियों को झूठा नाम बात कर ‘लव जिहाद’ करते हैं, और उनको इस्लाम में कन्वर्ट करते हैं।

यही लोग हिंदुओं के घरों में पहले नौकरी करते हैं और फिर उनकी बहन बेटियों के बाथरूम में कैमरा लगाकर वीडियो बनाते हैं उन्हें ब्लैकमेल करते हैं तो फिर जब एक शिव भक्त को पता लगेगा कि इसका असली मालिक एक मुस्लिम है तो क्या वह प्रतिक्रिया नहीं देगा। झूठ बोलकर व्यापार क्यों करना है हिंदुओं के साथ? इस बात पर कोई बात नहीं कर रहा है। इसी कारण फिर झगड़ा होते हैं और फिर यही अब्दुल जो वैष्णो देवी के नाम से ढाबा खोल कर बैठा है यही फिर विलाप करता है। किसी ने सोशल मीडिया पर मुजफ्फरनगर पुलिस के इस आदेश की मुखालफत करते हुए कहा कि हमारे मुस्लिम देशों में भी हिंदू जाते हैं वहाँ पर वह लोग व्यापार करते हैं लेकिन उनके साथ तो ऐसा नहीं होता लेकिन सवाल यह है कि क्या हिंदू लोग मक्का-मदीना या हिजरत के रास्ते में ढाबे खोलकर बैठे हुए हैं क्या उन्होंने हाजियों को कभी धोखा हुआ खिलाया क्या उन्होंने कभी हजरत करने वालों को थूक कर पानी पिलाया?

अरे यह सब तो छोड़िए, हिंदू जिनको कि मुस्लिम की किताबों में काफिर प्रजाति बताया गया है वह लोग तो उसे रास्ते पर भी कम नहीं रख सकते, मक्का मदीना की तो बात ही छोड़ दो और यही नहीं भारत के मुस्लिम भी इस बात का पक्ष लेते हैं कि जब हिंदू इस्लाम को मानते नहीं या फिर उनकी आस्था हमारे मजहब में नहीं है तो फिर वह उसे स्थान पर जाएँ ही क्यों? वही भारतीय मुस्लिम आज दोगलेपन की हद मचाकर रोना-पीटना मचा रहा है?

क्या यह लोग कभी खुद को आईने में नहीं देखते? क्या जो हिंदू मुस्लिम देशों में अपने होटल या ढाबे चला रहे हैं वो वहाँ के मुस्लिमों को झटके का मीट चोरी छिपे खिलाते हैं? क्या उनके भोजन में थूकते हैं? या फिर इस्लाम में अभक्ष्य जानवर के गोश्त के समोसे उनको खिलाते हैं? इन बातों का जवाब किसी के पास नहीं होता। ये लोग सिर्फ विरोध करने के लिए पैदा हुए हैं। ये लोग सिर्फ हिंदुओं के देवी-देवताओं को गाली देने के लिए पैदा हुए हैं।

और अगर कोई इनको इन्हीं की दवाई चखा दे तो फिर इनका रोना स्टार्ट हो जाता है। संविधान से पहले कुरान बताने वाले देश से पहले इस्लाम बताने वाले आज सही सुनता और भाईचारा पर बड़े-बड़े भाषण दे रहे हैं तो ऐसा लगता है जैसे इनकी फूफी मियाँ खलीफा ब्रह्मचर्य पर तकरीर कर रही हो। मेरा तो बस इसे इतना ही कहना है कि तुमको हिन्दू नामों से, भगवानों से इतना ही प्यार है तो क्यों नहीं तुम हिन्दू ही बन जाते हो घर-वापसी कर के? सारा झगड़ा ही खतम हो जाएगा।

हर साल ‘शिव ढाबे’ वाला सलमान भी काँवड़ लेकर जाए, ‘शिव शक्ति ढाबे’ वाला शाहरूख घर में जगराता करवाए और वैष्णो ढाबे वाला जफरूल अपनर घर हवन करवाए। जगह-जगह पर काँवड़ियों के लिए जल के प्याऊ लगवाए जैसे हिंदू उनके लिए निशुल्क भंडारे और छोटे-छोटे चिकित्सालय खुलवाते हैं। उससे भी अधिक पवित्रता के साथ भोजन परोसने का इंतजाम करवाए तो कितना अच्छा भाईचारे का माहौल बने और हिंदू चाह कर भी इनके ढाबों का विरोध ना कर पाए।

या फिर यह भाईचारा केवल तभी बनता है जब कोई पुजारी अपने मंदिर में इफ्तारी पार्टी करवाता है या फिर हिंदू जालीदार टोपी पहनकर ईद की मुबारकबाद देता घूमता है या फिर एंबुलेंस और स्कूल बसें एक साइड रोक कर इनकी नमाज के लिए सड़क पर जगह देता है। हिंदू समाज आज उसे दोगलेपन को जानना चाहता है जिसके तहत हमारी आस्था का मजाक बनाना और फिर हमसे ही पैसा कमाना… सिर्फ यही उन्हें अच्छा लगता है। और या फिर तब तुमको किताब की आयतें याद आ जाती हैं? “काफिरों को अपना दोस्त ना बनाओ..”- (5:51), तुम कीचड़ में डूब क्यों नहीं मरते?

बांग्लादेश से 1000 छात्र पहुँचे भारत, नेपाल-भूटान की भी की जा रही मदद: आरक्षण विरोधी दंगों में जल रहा है पड़ोस का इस्लामी मुल्क

बांग्लादेश आरक्षण विरोधी हिंसा की आग में झुलस रहा है। पूरे देश में कर्फ्यू है। प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ बरस रही हैं। अब तक 2000 से ज्यादा लोगों के घायल होने तो सवा सौ से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। मारे गए अधिक लोग छात्र हैं और सत्ताधारी पार्टी आवामी लीग के विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ता। इस बीच, बांग्लादेश में पढ़ रहे भारत के करीब 5000 हजार छात्रों में से करीब 1 हजार छात्र वापस आ चुके हैं।

बांग्लादेश में मौजूद सभी छात्रों से भारत सरकार संपर्क में है। करीब 200 छात्र हवाई जहाजों से वापस आए हैं, तो बाकी सड़क, पानी के रास्ते। यही नहीं, भारत अपने पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान के छात्रों को भी उनके देश वापस जाने में मदद कर रहा है और उन्हें भारत में एंट्री दे रहा है। अधिकतर भारतीय और विदेशी छात्र उत्तर पूर्वी राज्यों खासकर मेघालय के रास्ते भारत में पहुँच रहे हैं। वहीं, बहुत सारे छात्रों के पश्चिम बंगाल के रास्ते भी भारत में एंट्री का विकल्प चुना है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और आसान मार्ग उपलब्‍ध कराने के लिए सिविल एविएशन, इमिग्रेशन, बंदरगाहों और सीमा सुरक्षा बल के साथ सहयोग कर रहा है। अब तक 778 भारतीय छात्र विभिन्न बंदरगाहों के माध्यम से भारत लौट आए हैं। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इसके अलावा करीब 200 छात्र ढाका और चटगाँव एयरपोर्ट के जरिए नियमित उड़ान सेवाओं से घर लौटे हैं।

भारतीय उच्चायोग बांग्लादेश की विभिन्‍न यूनिवर्सिटी में अभी भी करीब चार हजार छात्रों के साथ लगातार संपर्क में है। अनुरोध पर नेपाल और भूटान के छात्रों को भी भारत में प्रवेश करने में सहायता दी गई है। इसके साथ ही ढाका में स्थित भारतीय उच्चायोग ढाका और चटगाँव से भारत के लिए उड़ान सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश के सिविल एविएशन अधिकारियों और कमर्शियल एयरलाइनों के साथ समन्‍वय में जुटा है, जिसका उपयोग भारतीय नागरिक घर लौटने के लिए कर सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्‍लादेश में स्थिति बिगड़ गई है। प्रदर्शन को दबाने के लिए सैनिक शहरों पर गश्त कर रहे हैं। दंगा पुलिस ने सरकार द्वारा लगाए गए कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाले प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की है, जिससे माहौल अस्थिर और खतरनाक हो गया है। इस सप्ताह हिंसा में कम से कम 115 लोगों की मौतें हुई हैं, जो प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। पुलिस के अव्यवस्था को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद कर्फ्यू के साथ पीएम हसीना के कार्यालय से सैन्य तैनाती का अनुरोध भी किया गया।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के 1971 के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले दिग्गजों के परिवार के सदस्यों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाता है। इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह प्रणाली भेदभावपूर्ण है और प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के समर्थकों को भेदभावपूर्ण और असंगत रूप से लाभ पहुँचाती है। प्रदर्शनकारी मौजूदा कोटा को बदलने के लिए मेरिट पर आधारित प्रणाली की वकालत करते हैं।