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हज पर मुस्लिम मर्द अपने ही मजहब की बच्चियों-औरतों के साथ करते हैं यौन शोषण: जिन-जिन ने झेला, पढ़िए उनकी कहानी

इस्लाम को मानने वाले हज को लेकर काफी संवेदनशील दिखते हैं। मक्का-मदीना-काबा आदि को लेकर आम बोलचाल में ‘पाक’ शब्द जैसे विशेषण भी लगाते हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि ऊपर जिन कुकर्मों की लिस्ट है, वो सब हज पर किया गया है। 

दिखने/लगने और होने में लेकिन फर्क होता है। हज पर गई औरतों-बच्चियों ने जो-जो भोगा है, उससे इस्लाम के इस ‘पाक’ स्थान पर गए मर्दों की नापाक मानसिकता को समझ सकते हैं। और हाँ, हज पर गए मुस्लिम मर्दों की नापाक हरकतों को उजागर भी मुस्लिम बच्चियों-औरतों ने ही किया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ये वो चंद उदाहरण हैं, जो सामने आए हैं। असंख्य आपबीती पीड़ितों के दिलों में हैं, क्योंकि खुलेआम कह देने से इस्लाम खतरे में आ जाता है। कुछ बहादुर औरतों-बच्चियों ने आपबीती तो सुनाई, लेकिन कट्टर इस्लामी समाज के डर से अपना नाम तक उजागर करने से बचीं।

हज में 13 साल की बच्ची: यौन शोषण, स्तन दबोचा जाना

मिस्र की 13 साल की बच्ची हज पर गई। अपनी बहनों और माँ के साथ। एक दुकानदार ने इतनी कम उम्र की बच्ची को भी वहाँ नहीं छोड़ा। गंदे इशारे करके उसे अपने पास बुलाया। वो चुप रही, खुद पर शर्म महसूस करते रही, अफसोस के साथ। 

दूसरी बार भी यह बच्ची हज पर गई। तब उम्र थी 17 साल। इस बार पिछली बार से भी ज्यादा बुरा हुआ। शैतान को पत्थर मारने वाली जगह पर भीड़ थी। वहीं पर उसने महसूस किया कि किसी ने उसके स्तनों को दबोच लिया है। जब वो पीछे मुड़ कर देखी तो स्तन दबोचने वाला अपनी बीवी के साथ खड़ा था।

10 साल की बच्ची को पीछे से दबोचा, सीने पर हाथ घुमाकर जांघ दबाई

पाकिस्तान की 10 साल की बच्ची अपने अम्मी-अब्बा और बहन के साथ खुशी-खुशी हज पर गई। ये सोचकर कि ये उसकी खुशकिस्मती है। काबा को देख बच्ची और उसकी बहन दोनों बहुत खुश थे, लेकिन तभी भीड़ में से एक शख्स ने उसे पीछे से जकड़ लिया। बच्ची डर गई और माँ के पास चली गई। उसने ये बात माँ को डर से नहीं बताई।

वहाँ से निकल उसे लगा वो सुरक्षित है, लेकिन जैसे ही वो मक्का से मदीना जाने के लिए बस में बैठी उसके पास ड्राइवर आ गया। उसने सीट के पास खड़े होकर उसकी छाती पर हाथ फिराया और फिर उसकी जांघ दबोच ली। बच्ची को घिन्न आ रही थी लेकिन डर से उसने किसी को नहीं बोला। ड्राइवर पर्दे ठीक करने के बहाने अपनी कमर उसके मुँह पर लगाता रहा।

17 साल की लड़की के पीछे दबाया लिंग

इंडोनेशिया से साल 2011 में एक 17 साल की लड़की हज के लिए गई। वहाँ पहले उसे होटल में छेड़खानी का सामना करना पड़ा। फिर काबा में तवाफ के वक्त। लड़की के अनुसार, तवाफ के वक्त कोई शक्स पीछे से आया और अपना लिंग उनके पीछे दबाने लगा।

लड़की को लगा इतनी ‘पाक’ जगह ऐसी हरकत कौन करेगा, लेकिन ऐसा हुआ तो उसका ध्यान इबादत में नहीं लग पाया। वो बस सोचती रही कि कब मक्का से वापस घर जाएँगी। लड़की ने बताया कि उसने इस घटना के बारे किसी को नहीं बताया लेकिन उसे लगता रहा कि जब हम मस्जिद में होते हैं तब ऐसा कुछ हो तो ये सबसे बुरी चीज है।

21 साल की पाकिस्तानी महिला के पकड़े नितंब

21 साल की उम्र में अमेरिका में रहने वाली पाकिस्तानी महिला ने पहली बार हज किया। वहाँ वह काबा को छूने के लिए करीब जाना चाहती थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि उस भीड़ में उसके साथ क्या होने वाला है।

काबा को छूने की इच्छा से भीड़ के बीच गई उस लड़की के किसी ने अचानक नितंब पकड़ लिए। लड़की को पहले लगा सिर्फ ये कोई धक्का है। हालाँकि फिर थोड़ी देर में उसे स्तन दबोच लिए गए। लड़की ने उस शख्स को घूरकर देखा तो वो मुस्कुराता रहा। लड़की चिल्लाई, गार्डों से शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

लड़की बताती है कि वो कई लोगों को जानती है जिनके साथ हज के दौरान ऐसी घटना घटी। अपने भयावह अनुभव के बाद वो दोबारा कभी हज पर नहीं गई। उसने वहाँ भगदड़ झेली और उत्पीड़न देखा।

32 साल की ब्रिटिश महिला और हज: स्तन दबोचे, लिंग पीछे दबाया, उंगली डालने की कोशिश की

2007 में 32 साल की एक ब्रिटिश महिला हज करने गई। उसे पहले ही बताया गया था कि हज के दौरान उसे लोग अनुचित ढंग से छू सकते हैं। हालाँकि उसे लगा कि इतनी पाक जगह ऐसा कौन करेगा… लेकिन जो कहा गया था वैसा हुआ, वो भी मस्जिद में घुसने के साथ ही।

महिला ने बताया कि मस्जिद में घुसने के वक्त ही किसी ने उसके स्तनों को टाइट से दबोचा। महिला समझ गई कि ये अंजाने में नहीं हुआ। महिला ने पीछे घूमकर देखा तो वो व्यक्ति उसे घूर रहा था।

दूसरी घटना महिला के साथ मस्जिद के भीतर हुई। इबादत के वक्त अचानक उसकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में कुछ दबाव महसूस हुआ। पहले महिला ने सोचा कि भीड़ है तो लोग एक दूसरे से टकरा रहे हैं, मगर फिर जब वो दबाव जारी रहा तो वो समझ गई कि एक व्यक्ति अपना लिंग उसमें दबा रहा है। महिला डर गई। उसने पुलिस से शिकायत की, पर कोई सुनवाई तक नहीं हुई। पुलिस वाले ने महिला को अनसुना कर दिया।

तीसरी घटना महिला के साथ तब हुई जब वो हज से संबंधित खरीदारी कर रही थी। महिला के अनुसार, अचानक उसे एक झटका लगा। उसने देखा कि एक बुजुर्ग ने उसके नितंबों के बीच उंगली डाल दी थी। ये इतनी तेजी से किया गया था कि उंगली लगभग उसके अंदर थीं। महिला ने जब इस घटना के बाद उस बुजुर्ग को देखा तो वो उसने माफी माँगने की बजाय मुस्कुराया और अल्हम्दुलिल्लाह कहा।

हज पर गई महिलाएँ हुई गायब

इन कहानियों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मक्का-मदीना में अपने अनुभवों को साझा कर रहे हैं। इसी क्रम में एक यूजर ने बताया कि वो एक दंपति को जानता है जो हज के लिए गए थे, लेकिन शौहर अकेले ही लौटा क्योंकि बीवी को कैब ड्राइवर ने किडनैप कर लिया था। शौहर ने अपनी बीवी बहुत खोजी लेकिन दोबारा उसे वो महिला नहीं मिली।

इस घटना को जानकर भी लोग हैरानी जता रहे हैं। प्रतिक्रिया में लोगों का कहना है कि ये हादरा उनके दोस्त ने भी उन्हें सुनाया लेकिन उन्होंने इस पर विश्वास नहीं किया था। दोस्त ने बताया था कि लड़की को किडनैप करके बहुत दिन उसका रेप किया गया। बाद में उसे उसी होटल में छोड़ दिया गया पर लड़की ने सुसाइड कर ली थी। एक यूजर ने बताया कि ऐसी घटना उनके पड़ोसियों के रिश्तेदारों के साथ हुई थी। निकाह के बाद जोड़ा मदीना गया लेकिन जैसे ही लड़का उतरा, ड्राइवर ने गाड़ी चला दी और लड़की को लेकर फरार हो गया।

59 साल की महिला हुई मक्का से गायब, 42 साल की महिला की हत्या

दक्षिणी सुलेमानिया प्रांत के कलर शहर की एक महिला सऊदी अरब में उमराह के लिए गई थी, लेकिन वहाँ उसका अपहरण हो गया। महिला की उम्र 59 साल थी। वो अपने परिवार और भाई के साथ मक्का गई थी। वहाँ महिला के भाई ने व्हीलचेयर ली और एक व्यक्ति से कहा कि जब उनका सर्कल पूरा हो जाए तो वो उन्हें उनके पास ले आए। हालाँकि वो आदमी दोबारा महिला को लेकर वापस नहीं लौटा। बहुत छानबीन पर भी महिला का कुछ पता नहीं चला। इसी तरह 42 साल की महिला का अपहरण भी मक्का में हुआ, जिसकी बाद में गला दबाकर हत्या कर दी गई थी।

बता दें कि ये अपहरण और हत्या की घटनाएँ आज से सऊदी अरब से नहीं आ रहीं। ऐसी खबरों की तारीख बहुत पुरानी-पुरानी भी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत की लड़कियाँ भी अरब में ऐसी घटनाओं का शिकार हुई हैं। 2010 में भी वहाँ हैदराबाद से हज करने गई एक लड़की गायब हुई थी। घरवाले बार-बार कह रहे थे कि ये गुमशुदगी का मामला नहीं है उसका अपहरण हुआ है। अगर वो गुम होती तो अपनी अम्मी या अब्बा को कॉल करती। लेकिन उसका अपहऱण ही हुआ है। इसी तरह 2019 में हैदराबाद के मुरादनगर की 23 साल की महिला अपने शौहर, सास के साथ उमराह पर गई, लेकिन अचानक वो वहाँ से गायब हो गई। महिला को खोजने के खूब प्रयास हुए लेकिन कुछ पॉजिटिव रिस्पांस नहीं आया।

बाइडेन बाहर, कमला हैरिस पर संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ओबामा ने चली चाल, समर्थन पर कहा – भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी में काफी हलचल है। 21 जुलाई 2024 को जो बाइडेन ने आगामी चुनावों में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से अपनी दूरी का ऐलान किया था और कमला हैरिस का नाम पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाया था। हालाँकि अब खबर आ रही है कि इसी पार्टी से पूर्व में राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने कमला हैरिस को उम्मीदवार मानने से गुरेज किया है।

जानकारी के मुताबिक बराक ओबामा ने जो बाइडेन के इस फैसले को समर्थन दिया कि वो चुनावों से दूरी बना रहे हैं लेकिन कमला हैरिस के नामांकन पर वो खुशी नहीं जाहिर कर पाए। उन्होंने बाइडेन के ऐलान के बाद उनकी उपलब्धियों को तो गिनाया, लेकिन कमला हैरिस को लेकर वो कहते दिखे, “हम अनजान राहों पर आगे बढ़ रहे हैं और भविष्य में क्या होगा कोई नहीं जानता, लेकिन मुझे उम्मीद है कि हमारी पार्टी के नेता कुछ ऐसा करेंगे, जिससे सर्वश्रेष्ठ नामांकन सामने आएगा। मुझे विश्वास है कि जो बाइडन का एक समृद्ध, उदार और एकजुट अमेरिका का विजन अगस्त में होने वाले डेमोक्रेटिक कन्वेंशन में दिखाई देगा।”

ओबामा बोले “जो बाइडन संघर्ष से पीछे हटने वाले नेता नहीं हैं, मगर अब मशाल अगले दावेदार को थमाना उनके लिए बहुत मुश्किल है, लेकिन उन्हें लगा कि यह अमेरिका के लिए सबसे सही फैसला है। यह बाइडन का देश के प्रति प्यार का सबूत है।” इसी तरह पूर्व हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ने भी बाइडेन की तारीफ की लेकिन कमला हैरिस के समर्थन में कुछ भी नहीं कहा। दोनों नेताओं की इसी चुप्पी के कारण माना जा रहा है कि वो कमला हैरिस को समर्थन नहीं देना चाहते।

बता दें कि जो बाइडेन के ट्वीट के बाद 59 वर्षीय कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन उससे पहले उन्हें आधिकारिक रूप से उम्मीदवार बनने के लिए अगले महीने प्रस्तावित ‘डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन’ के दौरान डेलीगेट (पार्टी मतदाताओं के प्रतिनिधि) का समर्थन हासिल करना ज़रूरी है। अब चूँकि बाइडन के पास 3,896 ‘प्रतिनिधि’ हैं, और उम्मीदवार बनाने के लिए 1,976 ‘प्रतिनिधि’ की आवश्यकता होती है तो संभव है कमला हैरिस के लिए समर्थन पाना आसान हो। फिलहाल के लिए पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन हैरिस को समर्थन दे चुके हैं। इसीलिए कहा जा रहा है कि 19 अगस्त से शिकागो में शुरू होने वाले ‘डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन’ के दौरान उम्मीदवार चुना जाना और आसान हो गया है। बस अटकलें हैं तो हैरिस के गुरु माने जाने वाले ओबामा के समर्थन पर। उनका कमला को तुरंत सपोर्ट न करना कई सवाल उठाए हुए हैं।

ताकि किसी का न हो रघुवंशी और रंगनाथाचार्य जैसा हाल… मोदी सरकार ने 58 साल पहले RSS पर लगे बैन को हटाया, कॉन्ग्रेसी तिलमिलाए

कॉन्ग्रेस को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से समस्या है ये तो सब जानते हैं लेकिन किसी को ये नहीं पता होगा कि ये समस्या शुरू से इतनी बड़ी रही है कि 60 के दशक में कॉन्ग्रेस ने सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर बैन ही लगा दिया था।

1966 में, केंद्र सरकार में काम करने वाले कर्मचारियों को आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने को लेकर प्रतिबंध लगाया था। अब मोदी सरकार ने इस प्रतिबंध को 58 साल बाद हटाया है। वहीं कॉन्ग्रेस के कई नेता इससे संबंधित नोटिस जारी करते हुए जानकारी दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने  1966 के आदेश की फोटो भी शेयर की और अपनी नाराजगी जताई।

हिंदू विवेक केंद्र में आरएसएस पर लगे बैन पर एक रिपोर्ट प्रकाशित है। इस रिपोर्ट में कई जानकारियाँ दी गई हैं जैसे कब-कब आरएसएस पर बैन लगाया गया और कब-कब आरएसएस संगठन से जुड़े लोगों को टारगेट करने का प्रयास हुआ।

कॉन्ग्रेस के टारगेट पर था RSS

इस रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस को खुलेआम टारगेट करना कॉन्ग्रेस ने तब से शुरू किया जब महात्मा गाँधी की हत्या की गई। कॉन्ग्रेस ने मौके का फायदा उठाते हुए उनपर बैन लगाया। बाद में गृहमंत्री सरदार पटेल ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और साथ ही आरएसएस द्वारा देश भर में सत्यग्रह किए जाने के बाद इस बैन को हटाया गया। हालाँकि बैन हटने का अर्थ ये नहीं था कि कॉन्ग्रेस की नजर इस संगठन से हट गई। 1966 में सरकारी कर्मचारियों को इस संगठन की गतिविधियों में भाग लेने से रोक दिया गया।

फिर 1975 में जब इमरजेंसी लागू हुई तो फिर आरएसएस को बैन किया गया। तब भी, आरएसएस ने अपने ऊपर लगे बैन के खिलाफ आवाज उठाई। 1977 के चुनावों में उनके विरोध में प्रदर्शन किया। नतीजतन न केवल पार्टी हारी, बल्कि इंदिरा गाँधी और उनके बेटे संजय गाँधी तक अपनी सीटों से हार गए। आरएएस से बैन फिर हटाया गया।

1992 में जब अयोध्या में कारसेवा के बाद बाबरी ढाँचा गिरा तो फिर कॉन्ग्रेस को आरएसएस पर बैन लगाने का मौका मिला गया। इस पर आरएसएस पर बैन UAPA 1967 के प्रावधानों के तहत लगाया गया। ढाँचा गिरने का सारा इल्जाम आरएसएस पर लगा दिया गया। बात ट्रिब्यूनल कोर्ट तक पहुँची लेकिन कोर्ट को आरएसएस के विरुद्ध पर्याप्त सबूत नहीं मिले और उन्होंने आरएसएस को बैन करने की माँग हटा दी।

आरएसएस से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी से हटाया

मालूम हो कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की इच्छा जब कॉन्ग्रेस की पूरी नहीं हुई तो फिर उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को इस संगठन की गतिविधियों में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया। उन्होंने पुलिस से कहा कि वो सत्यापित करें कि केंद्र में काम करने वाले लोग आरएसएस से तो नहीं जुड़े, अगर जुड़ें हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द कर दो। उन्हें नौकरी देने से मन कर दो, नौकरी से हटा दो।

इसका एक उदाहरण रामशंकर रघुवंशी का मामला बताया जाता है। रिपोर्ट् के अनुसार रघुवंशी स्कूल शिक्षक थे। ऱघुवंशी को पहले पूर्व में हुए सत्यापन पर स्कूल में शामिल कर लिया गया। हालाँकि बाद में पुलिस ने सरकार को बताया कि वो अंएक समय में आरएसएस और जनसंघ की गतिविधियों में शामिल थे तो उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। इसी तरह, रंगनाथाचार्य अग्निहोत्री को कर्नाटक में मुंसिफ के पद के लिए चुना गया था। पुलिस सत्यापन में पता चला कि वे अतीत में येलबुर्गा में आरएसएस के आयोजक थे। सरकार ने उन्हें अपनी नौकरी में प्रवेश देने से मना कर दिया।

एक अन्य मामले नागपुर के चिंतामणि का है। जो कि उप पोस्ट मास्टर थे। उन पर आरोप लगाया गया था कि वे आरएसएस के सदस्य हैं और संक्रांति के अवसर पर आरएसएस कार्यालय गए थे। इतनी सी बात के लिए चिंतामणि को सेवा से हटा दिया गया था। हालाँकि बाद में वो इंसाफ के लिए मैसूर हाई कोर्ट पहुँचे। जहाँ अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा,

  • “प्रथम दृष्टया आरएसएस एक गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक संगठन है। इसमें गैर-हिंदुओं के प्रति कोई घृणा या दुर्भावना नहीं है। देश के कई प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्तियों ने इसके कार्यों की अध्यक्षता करने या इसके स्वयंसेवकों के काम की सराहना करने में संकोच नहीं किया है। हमारे जैसे देश में जहाँ लोकतंत्र है (जैसा कि संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है), यह प्रस्ताव स्वीकार करना उचित नहीं होगा कि ऐसे शांतिपूर्ण या अहिंसक संघ की सदस्यता और उसकी गतिविधियों में भागीदारी मात्र से कोई व्यक्ति (जिसके चरित्र और पूर्ववृत्त में कोई अन्य दोष नहीं है) मुंसिफ के पद पर नियुक्त होने के लिए अनुपयुक्त हो जाएगा।”

बाद में उन्होंने विशेष सिविल अपील संख्या 22/52 में बॉम्बे (नागपुर बेंच) में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जहाँ कोर्ट ने कई अहम बातें कहीं।0 न्यायालय ने कहा, “याचिकाकर्ता चिंतामणि के मामले में, पहला आरोप यह है कि वह आरएसएस की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और उसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे है। हालांकि चिंतामणि ने इस आरोप से इनकार किया है, मगर हम मान सकते हैं कि प्रतिवादी के अनुसार आरोप सत्य है… लेकिन ये भी गौर हो आरएसएस ऐसा संगठन नहीं है जिसे गैरकानूनी घोषित किया गया हो। आरोप में यह भी नहीं बताया गया है कि आरएसएस की कौन सी गतिविधियाँ हैं, जिनमें भागीदारी या जिनसे जुड़ाव को विध्वंसक माना जाता है।”

कोर्ट ने चिंतामणि पर लगाए गए आरोपों को लेकर कहा कि सरकार बेहद अस्पष्ट है। जब तक किसी व्यक्ति पर उचित रूप से यह संदेह न हो कि वह कुछ गैरकानूनी काम कर रहा है या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए हानिकारक है, तब तक यह कहना मुश्किल है कि किसी ऐसी संस्था से जुड़ाव मात्र, जिसे न तो गैरकानूनी घोषित किया गया है और न ही किसी असामाजिक या देशद्रोही गतिविधियों या शांति भंग करने वाली गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप या दिखाया गया है, नियम 3 के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है।

बता दें कि ये मामले केवल तीन हैं लेकिन कहा जाता है कि कई उच्च न्यायालयों में इस तरह उन आरएसएस सदस्यों के मामलों की सुनवाई की गई जिन्हें मात्र संगठन से जुड़ने पर नौकरी से निकाले जाने के प्रयास हुए। अब मोदी सरकार के इस फैसले को कॉन्ग्रेस भले ही कितना नकारात्मक दिखाने का प्रयास करे लेकिन जो लोग आरएसएस को जानते समझते हैं वो इस कदम की तारीफ कर रहे हैं।

आम सैनिकों जैसी ड्यूटी, सेम वर्दी, भारतीय सेना में शामिल हो चुके हैं 1 लाख अग्निवीर: आरक्षण और नौकरी भी

उत्तराखंड सरकार ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार अग्निवीरों को न सिर्फ नौकरी देगी, बल्कि आरक्षण की भी व्यवस्था करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की सेवा कर लौटने वाले सभी अग्निवीरों को राज्य सरकार की सेवाओं में समायोजित किया जाएगा। साथ ही उनके लिए आरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। इस बीच, भारतीय सेना में शामिल अग्निवीरों की संख्या 1 लाख के पार हो गई है, 50 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है। सेना ने बताया है कि वो आम सैनिकों की तरह सभी ड्यूटी निभा रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार की बड़ी घोषणा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया है कि राज्य की नौकरियों में अग्निवीरों को समायोजित किया जाएगा। इसमें (राज्य सरकार की नौकरियों में) उनके लिए (अग्निवीरों के लिए) आरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। धामी ने एक कार्यक्रम में कहा कि अग्निवीर योजना लाए जाने के बाद उन्होंने सेना के अधिकारियों, पूर्व अधिकारियों, जवानों और अन्य लोगों के साथ बैठक की थी। सरकार ने 15 जून 2022 को ही ऐलान कर दिया था कि उत्तराखंड सरकार अग्निवीरों को राज्य सरकार की नौकरियों में समायोजित करेगी और अब उस दिशा में आधिकारिक तौर पर कदम बढ़ा दिए गए हैं।

धामी ने कहा कि अगर इस काम के लिए विशेष कानून बनाने की जरूरत पड़ी, तो राज्य सरकार ये कदम भी उठाएगी। धामी ने कहा कि उत्तराखंड सैनिकों का राज्य है, यहाँ सैनिकों को अपने आगामी जीवन को लेकर परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने अधिकारियों को ठोस योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अग्निवीरों को प्राथमिकता के तौर पर समायोजित किया जाएगा। बता दें कि हरियाणा सरकार भी राज्य सरकार की नौकरियों में समायोजन और आरक्षण की घोषणा कर चुकी है।

सेना में 1 लाख अग्निवीर हो चुके हैं भर्ती, 50 हजार की भर्ती प्रक्रिया जारी

अग्निपथ योजना की वर्तमान स्थिति और नियोजित अग्निवीरों की संख्या के बारे में भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल चन्नीरा बंसी पोनप्पा ने कहा, “जून 2022 से यह योजना शुरू की गई है और फिर दिसंबर 2022-जनवरी 2023 में हमारे पास पहला बैच था जिसे भर्ती किया गया और नामांकित किया गया। लगभग 1 लाख अग्निवीर सेना में भर्ती हुए हैं। इसमें लगभग 200 महिलाएँ भी शामिल हैं, लगभग 70,000 को पहले ही इकाइयों में भेजा जा चुका है और वे बटालियनों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं… इसमें लगभग 100 महिला पुलिस भी शामिल हैं। इस वर्ष 2024-25 में लगभग 50,000 वैकेंसी जारी की गई है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया जारी है।”

भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल चन्नीरा बंसी पोनप्पा ने कहा, “अग्निवीर वो सभी काम कर रहे हैं, जो आम सैनिक करते हैं। चाहे वो ऑपरेशन काम हो या अन्य पेशेवर काम। अग्विनीर सेना में पूरी तरह से घुलमिल गए हैं। वे एक जैसी वर्दी पहनते हैं और एक जैसी ड्यूटी करते हैं।”

बता दें कि भारत सरकार ने 2022 में अग्रिवीर स्कीम की घोषणा की थी। जिसमें 4 साल के लिए उनकी भर्ती की जाएगी। इस दौरान उनकी ट्रेनिंग और उच्च शिक्षा की भी व्यवस्था की जाएगी। इसमें से 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में स्थाई कमीशन दिया जाएगा, जबकि 75 अग्निवीरों को वापस देश की सिविलयन लाइफ में भेज दिया जाएगा। इन अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस में आरक्षण दिया जाएगा।

2 की हत्या कर फरार हो गया ड्रग्स तस्कर उमर, तेज़ाब डाल कर बिगाड़ दिया था चेहरा: 12 साल बाद दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 51 साल के खूँखार अफीम तस्कर और 2 दोस्तों के हत्यारे मोहम्मद उमर को गिरफ्तार कर लिया है। उसने 2012 में अपने दूसरे दोस्त की हत्या के बाद उसके चेहरे पर तेजाब डाल कर जला दिया था, ताकि उसकी पहचान न होने पाए। इसके बाद उमर अपने परिवार समेत फरार हो गया था और नेपाल जाकर छिप गया था। करीब 12 साल तक उसकी तलाश की गई और उस पर 50 हजार का ईनाम भी घोषित किया गया था, जिसके बाद अब उसे आनंद विहार बस टर्मिनस इलाके से मुखबिर की सूचना पर पकड़ लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पकड़े गए अपराधी की पहचान मोहम्मद उमर उर्फ ​​उमरदीन के रूप में हुई है जो उत्तर प्रदेश के बेहराइच का निवासी है। वह देश छोड़कर नेपाल चला गया था, जहां वह 12 वर्षों से फर्जी पहचान पत्र के साथ रह रहा था।

डीसीपी (स्पेशल सेल) अमित कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने जघन्य मामलों में शामिल घोषित अपराधियों और इनामी अपराधियों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है, जिनका लंबे समय से पता नहीं चल पाया था। पुलिस ने सोनिया विहार थाने में 2012 में दर्ज एक हत्या के मामले में वांछित एक ऐसे ही अपराधी मोहम्मद उमर की पहचान की और उसके बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। पुलिस को 16 जुलाई को उमर की गतिविधि के बारे में सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और उपरोक्त इनामी अपराधी मोहम्मद उमर को चौधरी चरण सिंह सर्विस रोड, डीडीए कार्यालय, आनंद विहार बस टर्मिनल, दिल्ली के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

डीसीपी ने उमर के बारे में बताते हुए कहा कि आरोपित उमर नईम, तस्लीम, मुकेश और मोती के संपर्क में आया और 2010 में मादक पदार्थ अफीम की तस्करी में शामिल हो गया और लोगों को रियाल (सऊदी मुद्रा) बदलने का लालच देकर धोखा दिया। डीसीपी ने कहा, “वर्ष 2011 में उसे अमरोहा, उत्तर प्रदेश में आर्म्स एक्ट और धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तार किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने नईम, तस्लीम, मुकेश और मोती के साथ फिर से मादक पदार्थ अफीम की तस्करी शुरू कर दी।” उसके साथियों नईम, तस्लीम और मोती ने उसे बताया कि मुकेश ने अमरोहा पुलिस को उसके बारे में जानकारी दी है। इसलिए मोहम्मद उमर ने नईम, तस्लीम और मोती के साथ मिलकर मुकेश को खत्म करने की योजना बनाई।

डीसीपी ने कहा, “नईम, तस्लीम और मोती ने बागपत उत्तर प्रदेश में मुकेश की हत्या की थी। इस मामले में नईम, तस्लीम और मोती को गिरफ्तार किया गया था। 2012 में उमर ने नईम के साथ मिलकर सोनिया विहार दिल्ली के इलाके में तस्लीम की हत्या कर दी थी और पुलिस को गुमराह करने और उसकी पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर तेजाब डालकर उसका चेहरा बिगाड़ दिया था।” इस घटना के बाद उमर अपने परिवार के साथ नेपाल भाग गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए छद्म पहचान के साथ वहाँ रहने लगा। वह रुपाड़िया सीमा पार नेपाल की तरफ रहता था और काम के सिलसिले में कभी-कभार भारत आता था।

पूरी हुई ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा की तैयारियाँ: 24 घंटे के लिए इंटरनेट-SMS सब पर रोक, पिछले साल मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं और पुलिस को बनाया था निशाना

हरियाणा के मेवात क्षेत्र में आने वाले नूहँ में 24 घंटों के लिए बल्क एमएसएम, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। यहाँ सोमवार (22 जुलाई 2024) को ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जानी है, जिसे लेकर सरकार अलर्ट पर है। बीते साल, ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदू भक्तों पर मुस्लिमों ने घेर कर हमला किया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। मुस्लिम भीड़ ने साइबर थाने को भी निशाना बनाया था और आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान 150 से अधिक गाड़ियों को भी आग लगा दी गई थी। इस हमले के बाद हिंसा गुरुग्राम तक फैल गई थी।

ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा पर हुए हमले के काफी समय बाद तक तनाव बना रहा था और पुलिस को अपराधियों-दंगाइयों को पकड़ने के लिए बड़ा अभियान चलाना पड़ा था। इस मामले में आरोपित दंगाई पहाड़ियों पर छिपे थे, जिसके लिए पुलिस को ड्रोन की सहायता लेनी पड़ी और एनकाउंटर के बाद कई अपराधियों को पकड़ा था। इस बार प्रशासन कोई ढील नहीं देना चाहता।

इंटरनेट, बल्क एमएसएम पर 24 घंटों की रोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के मेवात जिले के नूहँ में इंटरनेट सेवाओं औऱ बल्क एसएमएस पर पाबंदी लगाई है। पुलिस अधीक्षक विजय प्रताप ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा से पहले यह फैसला लिया है। इंटरनेट सेवाएँ रविवार शाम 6:00 बजे से लेकर 22 जुलाई शाम 6 बजे तक बाधित रहेगी।

हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अनुराग रस्तोगी के एक आदेश के अनुसार, जिले में इंटरनेट सेवा रविवार शाम 6 बजे से सोमवार शाम 6 बजे तक निलंबित रहेगी। आदेश में कहा गया है कि नूहँ में तनाव, आंदोलन, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और शांति और सौहार्द में खलल पैदा होने की आशंका है। ऐसे में इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। यह पाबंदी वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए किया गया।

हालाँकि सार्वजनिक सुविधा व लोगों की बुनियादी घरेलू जरूरतों के अनुसार व्यक्तिगत एसएमएस, मोबाइल रिचार्ज, बैंकिंग एसएमएस, वॉइस कॉल, कॉर्पोरेट और घरेलू ब्रॉडबैंड व लीज लाइनों द्वारा प्रदान की जाने वाली इंटरनेट सेवाओं को छूट दी गई है।

गौरतलब है कि पिछले साल 31 जुलाई को हरियाणा के नूहँ में मुस्लिम भीड़ द्वारा विश्व हिंदू परिषद के जुलूस को रोकने की कोशिश की गई थी। उन्होंने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। इस दौरान मंदिर को घेर कर किए गए हमले में 5 लोगों और दो होमगार्डों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 15 अन्य घायल हो गए थे। ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान धर्म के नाम पर कुछ अराजक तत्व आपसी सौहार्द बिगाड़ने में कामयाब न हो इसको लेकर पुलिस सख्त हो गई है।

भारत के ओलंपिक खिलाड़ियों को मिला BCCI का साथ, जय शाह ने किया ₹8.50 करोड़ मदद का ऐलान: पेरिस में पदकों का रिकॉर्ड तोड़ने को तैयार है टीम

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पेरिस ओलंपिक अभियान के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन को 8.5 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक पोस्ट साझा करते हुए इस बात की जानकारी दी है।

बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि बीसीसीआई 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे बेहतरीन एथलीटों का समर्थन करेगा। हम ओलंपिक अभियान के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) को 8.5 करोड़ रुपए दे रहे हैं। हमारे पूरे दल को हमारी शुभकामनाएँ। भारत को गौरवान्वित करें! जय हिंद!”

पेरिस ओलंपिक की शुरुआत में अब सात दिन का समय शेष बचा है। भारत ने आगामी टूर्नामेंट के लिए 117 खिलाड़ियों का दल भेजा है। इसमें सबसे बड़ा दल एथीलट्स के इवेंट्स में हिस्सा लेने वाले 29 खिलाड़ियों का शामिल है, जिसकी अगुवाई टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रो इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा करेंगे। ओलंपिक के इतिहास में ये भारत का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा दल है।

भारत की तरफ से पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुए 117 एथलीट्स के दल में 70 पुरुष और 47 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। ट्रैक एंड फील्ड इवेंट के बाद शूटिंग के इवेंट्स में भारत के सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है जिसमें कुल 21 एथलीट शामिल हैं। वहीं वेटलिफ्टिंग के इवेंट में सिर्फ मीराबाई चानू ने क्वालीफाई किया है जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल को अपने नाम किया था। एथीलट्स के अलावा 67 कोच और 72 सपोर्ट स्टाफ का दल भी पेरिस ओलंपिक एथलीटों की मदद के लिए गया है।

वामपंथी सरकार ने चलवाई गोली, मारे गए 13 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता: जानें क्यों ममता बनर्जी मना रहीं ‘शहीद दिवस’, TMC ने हाईजैक किया कॉन्ग्रेस का कार्यक्रम?

ममता बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी ने रविवार (21 जुलाई 2024) को शहीद दिवस कार्यक्रम मनाया। कभी शहीद दिवस कार्यक्रम कॉन्ग्रेस मनाती थी, लेकिन ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस पार्टी से अलग होने के बाद युवा कॉन्ग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की हत्या को अपने नाम के साथ जोड़ लिया और उसका इस्तेमाल कम्युनिष्टों की जड़ काटने में किया। दरअसल, साल 1993 में तब युवा कॉन्ग्रेस की नेता रही ममता बनर्जी की अगुवाई में युवा कॉन्ग्रेसियों का बड़ा प्रदर्शन राइटर्स बिल्डिंग के सामने होना था, लेकिन कोलकाता पुलिस की गोलीबारी में 13 युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की जान चली गई थी।

क्यों गई थी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की जान?

दरअसल, पश्चिम बंगाल में वामदलों के शासन के दौरान राशन कार्ड दिखाने पर वोटिंग की अनुमति मिल जाती थी। लेकिन कॉन्ग्रेस माँग कर रही थी कि वोटिंग के लिए सिर्फ मतदाता पहचान पत्र को ही मान्य किया जाए, राशन कार्ड पर वोटिंग को रोका जाए। उस समय ज्योति बसु पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने कॉन्ग्रेस की माँग को खारिज कर दिया था। वहीं, ममता बनर्जी पूरे जोश में थी। वो साल 1984 के लोकसभा चुनाव में दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को धूल चटा चुकी थी। ऐसे में युवा कॉन्ग्रेस का नेतृत्व करते हुए उनकी अगुवाई में ही ये रैली निकली थी, जिसमें बाद में 13 युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की जान चली गई थी।

कॉन्ग्रेस अगले साल से हर साल पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को शहीद दिवस के तौर पर मनाती रही, लेकिन साल 1998 में ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस छोड़कर टीएमसी का गठन किया, तो इस शहीद दिवस को भी कॉन्ग्रेस से छीन लिया। इसके बाद से 21 जुलाई को टीएमसी हर साल बड़े पैमाने पर शहीद दिवस मनाती है, जिसे ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में सीपीआई(एम) के खिलाफ खुद के तने रहने के तौर पर प्रस्तुत करती हैं।

इस साल भी 1 जुलाई को टीएमसी ने कोलकाता के धर्मतला इलाके में एक बड़ी रैली का आयोजन किया। इस रैली में इंडी गठबंधन के उसके साथी पहुँचे। एक तरफ तो इंडी गठबंधन से खुद बाहर हुई ममता बनर्जी इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही हैं, वहीं, इंडी बंधन में शामिल कम्युनिष्ट पार्टियों को चिढ़ाते हुए उनके ही सहयोगियों को मंच पर भी बुला रही हैं। ये किस तरह की राजनीति ममता बनर्जी कर रही हैं, शायद उन्हें खुद भी नहीं मालूम, क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान एक तरफ तो वो खुद को इंडी गठबंधन से अलग भी बताती रही, तो बाहर से इंडी गठबंधन को समर्थन देने का भरोसा भी जताती रही, जबकि खुद पूरे पश्चिम बंगाल में वामदलों और कॉन्ग्रेस के खिलाफ चुनाव भी लड़ती रही, तो यूपी में सपा-कॉन्ग्रेस के गठबंधन में शामिल होकर भदोही लोकसभा सीट पर भी चुनाव लड़ लिया।

खैर, टीएमसी हर साल शहीद दिवस के मौके पर अपने अगले साल के राजनीतिक कदमों का मोटा-मोटा ब्यौरा पेश करती है। इस बार टीएमसी ने अभी से साल 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं को जुट जाने का ऐलान कर दिया है।

‘लोगों की हत्या कर रहे, अपहरण कर रहे’: गोविंदानंद ने अविमुक्तेश्वरानंद के ‘शंकराचार्य’ होने पर उठाए सवाल, कहा – गैर-जमानती वॉरंट के बाद कोर्ट में बोला झूठ

अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयानबाजी करने वाले अविमुक्तेश्वरानंद के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य होने को लेकर संत गोविंदानंद सरस्वती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने वाराणसी की अदालत का आदेश दिखाते हुए कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को फरार घोषित किया जा चुका है, उनके खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी किया गया था। गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि बाद में इन्होंने कोर्ट पहुँच कर चालाकी से छल-कपट से आत्मसमर्पण किया और झूठ कहा कि वो शंकराचार्य हैं, पूरी दुनिया में लोग रो रहे हैं और उन्हें मार्गदर्शन देना है, लेकिन उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है।

गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद इस दौरान मध्य प्रदेश के एक आश्रम समेत कई जगह छिप कर भागते-फिरते रहे। उन्होंने बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट में जाकर भी ये सब बोल सकते हैं, उन्हें न्याय चाहिए लेकिन तारीख़ पर तारीख़ बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि उधर सुनवाई अटकी पड़ी है, इधर देश में आग लग रही है और नुकसान हो रहा है। गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि देशहित में वो सारे दस्तावेज सार्वजनिक कर रहे हैं।

उन्होंने इस दौरान महाभारत के द्रौपदी के चीरहरण के प्रसंग को याद किया और कहा कि अगर उनकी गलती है तो ईश्वर उन्हें क्षमा करें। गोविंदानंद सरस्वती ने कहा, “अविमुक्तेश्वरानंद लोगों को मार रहे हैं, अपहरण करवा रहे हैं। भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा पर आपत्ति उठाते हैं, संन्यासी बन कर शादियों में जाते हैं। केदारनाथ में 228 किलोग्राम सोना गायब होने को लेकर झूठ बोलते हैं। इन्हें ये तक पता नहीं कि सोना और पीतल क्या होता है, क्योंकि ये डुप्लीकेट हैं।”

गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि अगर वो असली चिट्ठा खोलने को आए तो बहुत समस्या हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वो दंडी संन्यासी हैं, उनसे कोई क्या छीन लेगा। उन्होंने कहा कि न्याय और धर्म अलग है। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि जमानत के लिए वकीलों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद ने वकीलों से बैठक की, लेकिन 51 में से सिर्फ एक इन्हें ही बेल नहीं मिला। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इन्हें पीटा, लेकिन इन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए था।

कॉन्टैक्ट लेंस पहना, और अंधी हो गई अभिनेत्री… बीच कार्यक्रम में बंद हो गया दिखाई देना, जाना पड़ा डॉक्टर के पास

अभिनेत्री जैस्मिन भसीन की आँखें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कारण है – कॉन्टैक्ट लेंस। बता दें कि आजकल कॉन्टैक्ट लेंस पहनना आम बात है, कुछ लोग शौक से तो कुछ स्वास्थ्य कारणों से इसे पहनते हैं। ‘बिग बॉस 14’ का हिस्सा रहीं जैस्मिन भसीन ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस पहना और कुछ ही पल के बाद उन्हें दिखना बंद हो गया, वो अंधी हो गईं। उनकी आँखें ज़ख़्मी हो गईं। इसका दुष्प्रभाव ऐसा पड़ा कि उनके आँखों का कॉर्निया (सुरक्षात्मक परत) ही क्षतिग्रस्त हो गया।

ये घटना बुधवार (17 जुलाई, 2024) की है। लेंस पहनने के तुरंत बाद ही उन्हें समझ आ गया था कि कुछ गड़बड़ है, क्योंकि उनकी आँखों में दर्द होने लगा था। फिर उन्हें दिखाई देना बंद हो गया। स्थिति इतनी ख़राब हो गई कि उन्हें पूरे कार्यक्रम के दौरान काला चश्मा पहनना पड़ा। बिना सहारे के वो चल भी नहीं पाती थीं। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवती उन्हें पकड़ कर मंच पर ले जा रही है और एक शख्स ने उनका हाथ पकड़ के सहारा दिया हुआ है।

कार्यक्रम के तुरंत बाद जैस्मिन भसीन को आँखों के डॉक्टर के पास जाना पड़ा। हालाँकि, उन्होंने जानकारी दी है कि अब उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है। अभिनेत्री ने बताया कि कार्यक्रम को लेकर करार के कारण वो तुरंत डॉक्टर के पास नहीं गईं। उनकी टीम ने उनका साथ दिया, क्योंकि उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। डॉक्टर ने उनकी आँखों के ऊपर बैंडेज लगाया। उन्हें रिकवर होने में 5 दिन लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि अब भी उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा है, दर्द के कारण वो सो भी नहीं पाती हैं।

हालाँकि, जैस्मिन भसीन का कहना है कि उन्हें कोई काम नहीं रोकना पड़ा है। दिल्ली के बाद मुंबई में उनका इलाज चला। बता दें कि 2011 में तमिल फिल्म ‘वानम’ से डेब्यू करने वाली जैस्मिन भसीन ने टीवी सीरियल ‘टशन-ए-इश्का’ और ‘दिल से दिल तक’ के जरिए नाम बनाया है। साथ ही वो ‘खतरों के खिलाड़ी 9’ और ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी – मेड इन इंडिया’ जैसे रियलिटी शो में भी काम किया है। वो एक सिख परिवार से आती हैं और उनकी शिक्षा कोटा में हुई है।