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अमेरिकी राजनीति में नहीं थम रहा नस्लवाद और हिंदू घृणा: विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड के बाद अब ऊषा चिलुकुरी बनीं नई शिकार

सोमवार (स्थानीय समयानुसार 15 जुलाई) को रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन (आरएनसी) के दौरान रिपब्लिकन पार्टी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 5 नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार के रूप में चुना। इसके बाद ने ओहियो के सीनेटर जेडी वेंस को अपना रनिंग मेट और उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया। ट्रंप द्वारा रनिंग मेट घोषित किए जाने के बाद वेंस को बधाई मिली, लेकिन तुरंत ही उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा चिलुकुरी वेंस, जो धर्म से हिंदू हैं, के खिलाफ नस्लवादी, हिंदू विरोधी टिप्पणियों और अपशब्दों की बौछार शुरू हो गई।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने उषा को “अभिजात वर्ग” के लिए एक आदर्श उदाहरण और “राजनीतिक साइफर” के रूप में बताया। इस ‘राजनीतिक साइफर’ शब्द का इस्तेमाल कम से कम अच्छे संदर्भ में तो नहीं ही किया जाता।

यही नहीं, कई एक्स यूज़र्स और अमेरिकियों ने उषा के खिलाफ़ अपमानजनक हिंदूफोबिक बातें लिखी और मिश्रित नस्ल, जातीयता वाला ‘पजीत’ (पजीत शब्द का इस्तेमाल हिंदुओं को गाली देने के तौर पर किया जाता है।) आदि कहा। कई अन्य लोगों ने जातिवादी टिप्पणियाँ की, जबकि कई लोगों ने उन्हें ‘कुलीन’ वर्ग की महिला के तौर पर ही खारिज कर दिया। इसके साथ ही कुछ यूजर्स ने उन्हें हिंदुत्व का एक टूल बताया और उन पर ‘ईसाई-हिंदू दबदबे’ और ‘हिंदू-यहूदी गठजोड़’ आदि को आगे बढ़ाने और जोड़ने का आरोप लगाया।

मशहूर एक्स हैंडल्स में से एक ईयर ऑफ द क्रैकन ने एक थ्रेड शेयर किया है, जिसमें एक्स यूजर्स ने उषा चिलुकुरी के खिलाफ घृणित, नस्लभेदी, जातिवादी और ज़ेनोफोबिक टिप्पणियाँ की हैं।

एक एक्स यूजर ने लिखा कि उषा के माध्यम से रिपब्लिकन पार्टी ‘खोखले भारतीय अमेरिकियों’ का वोट हासिल करना चाहती है, जो पहचान की राजनीति को प्रमुखता देते हैं। इससे रिपब्लिकन पार्टी ‘हिंदू वर्चस्ववादियों’ के वोट भी हासिल करेगी, जो ईसाई-हिंदू गठजोड़ के बीच एकता बनाने का काम करते हैं।

एक अन्य यूजन ने दावा किया कि उषा, विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड सहित अमेरिकी राजनीति में सक्रिय सभी भारतीय मूल के या हिंदू धर्म से संबंधित लोग हिंदुत्व स्पेक्ट्रम से आते हैं।

फैक्ट्स चेजर नाम के एक्स हैंडल ने उषा और विवेक रामास्वामी के खिलाफ नस्लवादी और जातिवादी गालियाँ दीं।

एनोनप्रेस्बी ने लिखा कि जेडी वेंस के बारे में सबसे “घटिया तथ्य” यह है कि उनकी पत्नी एक “हिंदू” हैं, जिसके लिए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए, जैसे कि हिंदू होना अमेरिका में एक अपराध है और एक राजनीतिक रूप से अछूत धर्म है।

एक यूजर ने हिंदुओं और यहूदियों के बीच गठजोड़ का आरोप लगाते हुए लिखा कि “हिंदू-यहूदी थीसिस इस समय अपने चरम पर है।” संयोग से यह जोड़ा ईसाई और हिंदू धर्म से है।

उषा चिलुकुरी भी उन अमेरिकी में शामिल, जिन्हें हिंदू होने की वजह से बनाया गया निशाना

कई यूजर्स ने जेडी वेंस की पत्नी उषा चिलुकुरी वेंस के खिलाफ उनकी धार्मिक और जातिगत पहचान के लिए अपमानजनक और नस्लवादी, ज़ेनोफ़ोबिक-युक्त टिप्पणियाँ कीं, लेकिन उनमें से कुछ ने विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड को उनकी पहचान के लिए भी घसीटा। संयोग से इसी तरह की नस्लवादीटिप्पणियाँ तब सामने आईं जब विवेक और तुलसी ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में जोरदार चर्चा शुरू की और अपने लिए एक बड़ा वोटिंग फैन बेस खड़ा किया।

इसी साल मई में अमेरिकी टिप्पणीकार और लेखिका एन कूल्टर ने विवेक रामास्वामी के ही पॉडकास्ट पर बताया था कि वो उन्हें इसलिए वोट नहीं देती, क्योंकि वो भारतीय हैं।

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की दौड़ के दौरान कई मौकों पर उन्हें हिंदू धर्म पर सवालों का सामना करना पड़ा। उनसे अक्सर ये पूछा जाता कि अमेरिका एक ईसाई बहुल देश है, ऐसे में क्या कोई गैर-ईसाई व्यक्ति देश का प्रभावी नेतृत्व कर पाएगा? उन पर उठते सवाल दिखाते हैं कि अमेरिका में गैर-ईसाईयों और खास कर हिंदुओं के प्रति राजनीतिक रूप से कितनी गहरी घृणा है। कई मौकों पर रामास्वामी को अमेरिका की बड़ी हस्तियों की तरफ से भी ऐसे नस्लवाद का सामना करना पड़ा।

विवेक रामास्वामी को पिछले साल जुलाई में हैंक कुनेमैन नाम के अमेरिकी पादरी से हिंदू-विरोधी टिप्पणियाँ इसलिए सुननी पड़ी थी, क्योंकि वो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिक पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में थे। अपने कार्यक्रम में कुनेमैन ने कहा था, “हम एक देश के रूप में खतरे में हैं। खासकर जेन-Z और मिलेनियल्स मेरी बात पर ध्यान दें। आप लोगों को यह नया युवा लड़का (विवेक रामास्वामी) पसंद आ सकता है।”

उसने बेशर्मी से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था, “वो (रामास्वामी) प्रभु यीशु की सेवा नहीं करता है, तो क्या हम किसी ऐसे व्यक्ति को वोट देंगे, जो बाइबल को नहीं मानता?” यही नहीं, उसने आगे कहा था, “क्या आप (मतदाता) उसे व्हाइट हाउस में अपने अजीब देवताओं को रखने की जगह देंगे? वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो नीतियों को समझता हैं, ऐसे में क्या हम आँखें मूँद लेंगे?” हैरानी की बात नहीं है कि उसके बयान का लोगों ने समर्थन किया, जो अमेरिकी समाज के बड़े हिस्से में व्यापक रूप से फैले नस्लवाद की पोल खोलता है।

इसी तरह पिछले साल फरवरी में पॉलिटिकल कमेंटेटर एन कूल्टर ने ‘द मार्क सिमोन शो’ में निक्की हेली के खिलाफ नस्लभेदी बयान दिया था। उसने निक्की को बेतुक्री इंसान बताया था और हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि “गाय की पूजा का क्या मतलब है। वो (हिंदू) भूखे मर रहे हैं,और गाय की पूजा कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि उनके पास चूहों का एक मंदिर है, जहाँ वे चूहों की पूजा करते हैं।”

बता दें कि साल 2020 में अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य चुनी गई तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी, जब उन्होंने यूएसए में हिंदूफोबिया का जिक्र किया था। तुलसी गबार्ड ने कहा था कि कॉन्ग्रेस के लिए जब भी वो चुनावी तैयारी करती हैं या राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होती हैं, तब-तब उन्हें हिंदूफोबिया का अनुभव होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में नेता और मीडिया न सिर्फ इसे बर्दास्थ करते हैं, बल्कि इसे बढ़ावा भी देते हैं।

बता दें कि अपने मीडिया, सिनेमा, थिंक टैंक और राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से अमेरिका खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, जो एक समतावादी समाज के मॉडल का समर्थन करता है। वो कोशिश करता है कि उसका मॉडल दुनिया के अन्य देश भी अपनाएँ और धार्मिक स्वतंत्रता, नस्लवाद, ज़ेनोफोबिया आदि पर रोक लगाने के लिए अमेरिकी सरकार के निर्देशों को पानें। हालाँकि तथ्य यह है कि अमेरिका दुनिया भर में नस्लवाद, ज़ेनोफोबिया और धार्मिक घृणा अपराधों के लिए बदनाम रहा है। ये तब और भी सामने आ जाता है, जब कोई गैर ईसाई या अश्वेत व्यक्ति अपनी मेहनत से आगे बढ़ता है, तब यही अमेरिकी उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और उनके अंदर की घृणा बाहर आ जाती है।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

गया था बेटे का निकाह तय करने, होनेवाली बहू की अम्मी को ही लेकर भागा 10 बच्चों का पिता शकील: महिला के भी हैं 6 बच्चे, लड़का-लड़की परेशान

उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक अजीबोगरीब मामला देखने में आया है। यहाँ एक पिता अपने बेटे का निकाह तय करने के लिए जिस लड़की के घर में गया था, उसकी अम्मी को लेकर फरार हो गया। प्यार की नाटकीय कहानी के बाद यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस मामले में केस भी दर्ज कराया गया है। पुलिस जाँच कर रही है।

दरअसल यह पूरा मामला कोतवाली गंज डुंडवारा क्षेत्र का है। यहाँ दो महीने पहले दो मुस्लिम परिवारों ने अपने बेटे-बेटी की निकाह के लिए रिश्ता तय किया था। लड़की के अब्बू ने बताया कि उसकी बेटी का रिश्ता शकील के बेटे से तय हुआ था। रिश्ता तय होने के बाद शकील अक्सर उसके यहाँ आने-जाने लगा। इससे लड़के के अब्बू और लड़की की अम्मी के बीच नजदीकियाँ बढ़ गईं।

बातचीत होने के बाद दोनों के बीच प्यार हो गया। कुछ दिन बाद पता चला कि शकील अपने बेटे का निकाह को छोड़कर अपने निकाह के चक्कर में पड़ गया और समधन को लेकर गायब हो गया। इसकी जानकारी जब आरोपित के होने वाले समधी को लगी तो उसके होश उड़ गए। उसने आरोपित शकील के खिलाफ थाने में अपहरण का मामला दर्ज करवाया है।

इस घटना के बाद लड़के और लड़की का निकाह अधर में लटक गया। समधन के 6 बच्चे हैं। उसने अपनी ननद की एक बेटी को भी गोद ले रखा है। इस तरह उसके कुल 7 बच्चे हैं। वहीं, आरोपित शकील 10 बच्चों का अब्बू है। इसके बावजूद दोनों में प्यार पनप गया और दोनों अपने बच्चों की निकाह की परवाह किए बिना रफ्फू-चक्कर हो गए।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि घटना 3 जून को घटी और विवाह ईद के दिन 17 जून को होना तय था, जबकि अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि विवाह 17 जुलाई को होना था। खैर, घटना जब की भी हो गई, अपने बेटे और बेटी की निकाह से पहले लड़के के अब्बू और लड़की की अम्मी भाग एक दूसरे के साथ भाग गई।

कासगंज के सीओ विजय राणा के मुताबिक, थाना गंज डुंडवारा निवासी मोहम्मद पप्पू ने 8 जून को अपनी बीबी के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी। पप्पू ने 11 जुलाई को फिर प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि जिले के गणेशपुर निवासी शकील उसकी बीवी को भगाकर ले गया है। सीओ का कहना है कि अब एफआईआर लिखकर जाँच की जा रही है। जल्द बरामदगी की जाएगी।

महिलाओं का नहाते हुए छिपकर वीडियो बनाते थे नसीबुद्दीन और मुर्तजा, पॉर्न साइट पर डालकर कमाते थे पैसे: असम पुलिस ने दबोचा, फोन में मिले कई अश्लील क्लिप

असम पुलिस ने नागाँव में अपने घर में नहा रही एक महिला का वीडियो बनाने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान नसीबुद्दीन और मुर्तजा हसन के रूप में हुई है।

पीड़िता ने जब देखा कि कोई व्यक्ति वेंटिलेशन के ज़रिए उसका वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा है तो उसने शोर मचा दिया। उसकी चीखें सुनकर पीड़िता के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने आरोपित को पकड़ लिया और उनकी जमकर धुनाई की। इसके बाद दोनों को पुलिस को हवाले कर दिया गया। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन जब्त किए और खुलासा किया कि वे अश्लील वीडियो को पोर्न वेबसाइट पर अपलोड करके पैसे कमाते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये वारदात नागाँव के खुटीकोटिया इलाके की है, जो हैबरगाँव पुलिस चौकी इलाके में आता है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार (14 जुलाई) को महिला ने देखा कि कोई उसका वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा है। जब वह नहा रही थी, तो आरोपित वेंटिलेशन के ज़रिए मोबाइल फोन कैमरा इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद उसने शोर मचाया जिसके बाद उसके परिवार के सदस्य और पड़ोसी मौके पर पहुँच गए और उन्होंने आरोपितों की जमकर पिटाई कर पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस ने दोनों की पहचान नसीबुद्दीन और मुर्तजा हसन के रूप में की। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए और जाँच के बाद पाया कि उनके फोन में कई आपत्तिजनक वीडियो हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपित नहाती हुई या अन्य आपत्तिजनक स्थिति में महिलाओं के अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करते थे और फिर इन वीडियो को पोर्न साइट्स पर अपलोड कर पैसे कमाते थे।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा , “हमें उनके फोन पर कई आपत्तिजनक क्लिप और वीडियो मिले हैं। वे महिलाओं को नहाते, कपड़े बदलते और अन्य आपत्तिजनक स्थितियों में रिकॉर्ड कर रहे थे। वे पैसे कमाने के लिए उन वीडियो को विभिन्न पोर्न साइट्स पर अपलोड करते थे। हम उनसे पूछताछ कर रहे हैं।”

केरल में कॉन्ग्रेस नेता हुआ था गिरफ्तार

बता दें कि इसी साल मई महीने में केरल पुलिस ने कोल्लम के एक शौचालय में कैमरा लगाकर महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोप में आशिक बदरुद्दीन नामक एक स्थानीय युवा कॉन्ग्रेस नेता को गिरफ्तार किया था। बदरुद्दीन थेनमाला में शौचालय संचालक के तौर पर काम कर रहा था और महिलाओं द्वारा वीडियो बनाने की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपित आशिक बदरुद्दीन पुनालुर ब्लॉक में युवा कॉन्ग्रेस का महासचिव था।

उडुपी बाथरूम वीडियो मामला

इसी तरह की एक घटना बीते साल जुलाई महीने में कर्नाटक में हुई थी, जिसमें मार्च 2024 आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) ने तीन मुस्लिम लड़कियों के खिलाफ चार्जशीट दयर किया, जो आठ महीने पहले कर्नाटक के उडुपी शहर में नेत्र ज्योति कॉलेज के शौचालय के अंदर अपने हिंदू सहपाठी की रिकॉर्डिंग करते हुए पकड़ी गई थीं।

21 जुलाई 2023 को कर्नाटक के एक संगठन ऑल कॉलेज स्टूडेंट पावर (ACSP) ने उडुपी जिले के पुलिस अधीक्षक को नेत्र ज्योति कॉलेज में हुए इस अपराध के बारे में लिखा, जहाँ मुस्लिम समुदाय की तीन छात्राओं ने चुपके से हिंदू छात्राओं का वीडियो बनाया और मोबाइल फोन पर शेयर किया। ACSP द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, नेत्र ज्योति कॉलेज के छात्रों को 20 जुलाई को इस बारे में पता चला और उन्होंने इसका विरोध किया। इस पूरे मामले को वामपंथी इकोसिस्टम ने ‘डाउन प्ले‘ कर छिपाने की कोशिश की थी।

जिस मौलाना अकरम की मौत को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या बता हेट क्राइम का रोया था रोना, उसके घर से मिला सुसाइड नोट: दूसरा निकाह नहीं कर पाने से परेशान था 6 बच्चों का अब्बू

यूपी के मुरादाबाद में 8 जुलाई को मौलाना अकरम की मौत की हत्या हुआ थी, लेकिन उसका शव तीन दिन बाद घर के पास ही स्थित एक खहंडर में मिला था। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर इसे मुस्लिमों के खिलाफ हेट क्राइम बताकर प्रचारित किया था और हिंदुओं को कटघरे में खड़ा किया था। अब उसी मौलाना अकरम की मौत से पर्दा उठता दिख रहा है। दरअसल, मौलाना अकरम के घर से 2 पन्नों का एक सुसाइड नोट उसके परिवार जनों को ही मिला है, जिसमें साफ लिखा है कि वो निजी समस्याओं और दूसरा निकाह करने को लेकर परेशान था। ये सुसाइड नोट उर्दू में मिला है। फिलहाल पुलिस ने इस सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

बता दें कि मौलाना अकरम की मौत गोली लगने की वजह से हुई थी, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इसे हिंदुओं द्वारा की गई हत्या बताया था और सोशल मीडिया पर हिंदुओं को लेकर तमाम आरोप लगाए गए थे। यही नहीं, कई इस्लामिक कठमुल्लों ने दावा किया कि मौलाना मोहम्मद अकरम की हत्या लोकसभा चुनाव के बाद हुए राजनीतिक विवाद के चलते की गई, लेकिन अब ये साफ होता दिख रहा है कि मौलाना अकरम की मौत हत्या नहीं, बल्कि सुसाइड थी।

दरअसल, मौलाना अकरम का खून से सना शव मिला था, जिसके बाद डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी के प्रवक्ता सलमान निज़ामी ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “यूपी में एक और मौलाना मारा गया। जैसा कि मैंने कहा, कुछ सीटों पर जश्न दुख में बदल जाएगा। अंत में, मुस्लिमों को कोई मंत्रालय नहीं मिलेगा या वे सत्ता में नहीं आएंगे। न ही वे जिनके लिए उन्होंने वोट दिया था, उनके लिए बोलेंगे। लेकिन उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और तकलीफ़ उठानी पड़ेगी!”

एक अन्य पोस्ट में निज़ामी ने मौलाना की हत्या की घटनाओं का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी की चुप्पी पर सवाल उठाने के लिए किया और आरोप लगाया कि वे केवल चुनाव के दौरान मुस्लिमों का इस्तेमाल करते हैं और बाद में उन्हें छोड़ देते हैं। उसके पोस्ट में संकेतों माध्यम ये बताने की कोशिश की गई कि मौलाना अकरम की हत्या प्लानिंग की साथ हुई और वो इसलिए, ताकि मुस्लिमों को निशाना बनाया जा सके। उसका इशारा हिंदुओं की तरफ था।

कई अन्य सोशल मीडिया हैंडलों ने भी इसी तरह की कहानी फैलाई थी, जिसमें कहा गया था कि मौलाना की हत्या लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद एक मुस्लिम विरोधी नफरती अपराध था।

हालाँकि, अब यह बात सामने आई है कि मौलाना ने आत्महत्या की है और किसी राजनीतिक साजिश के तहत उनकी हत्या नहीं की गई है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना रामपुर जिले के चौपुरा इलाके के रहने वाले थे और चौपुरा से 18 किलोमीटर दूर भैसिया गांव में स्थित मस्जिद के मौलाना थे। वह अपनी पत्नी और 6 बीवी- 4 बेटियों और 2 बेटों के साथ गाँव में रहते थे। 11 जून को मौलाना का शव उसके घर के पास एक अज्ञात जगह पर मिला। पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि मौलाना की बीवी और 3 बच्चे घटना से 2 दिन पहले ही उसे छोड़कर चले गए थे, जबकि उसके 3 बच्चे मौलाना के पास ही रह रहे थे।

मौलाना की मौत की रात को लेकर यह दावा किया गया कि किसी ने उन्हें उनके घर के बाहर बुलाया था जिसके बाद उनका शव पाया गया। हालाँकि, मौलाना के परिवार वालों ने उनके घर से मिले सुसाइड नोट को पुलिस को सौंप दिया है। इसमें मौलाना ने अपने नोट में कई निजी बातें लिखी थीं, जिन्हें आगे की जाँच के लिए फोरेंसिक को भेज दिया गया है। इस नोट में ये भी लिखा गया है कि वो दूसरा निकाह करना चाहते थे, लेकिन कर नहीं पाए।

मौलाना अकरम के परिजनों ने सुसाइड नोट की लिखावट को मौलाना अकरम का ही बताया है। इस मामले में पुलिस ने कहा है कि वो फिलहाल जाँच कर रही है।

‘एक भी धर्मांतरण हुआ तो तौकीर रजा की जीभ काट लूँगा’: सामूहिक निकाह के ऐलान के बाद माहौल गर्म, पुलिस बोली- शांति-व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने देंगे

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने प्रशासन से सामूहिक धर्मांतरण और निकाह के लिए अनुमति माँगी है। हालाँकि, पुलिस ने साफ कह दिया है कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। जोर-जबरदस्ती करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

बरेली दंगे के मास्टमाइंड मौलाना तौकीर के ऐलान पर एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि किसी को भी शहर या जनपद की शांति व्यवस्था के साथ शरारत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अनुराग आर्य ने कहा कि 15 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट को एक आयोजन के लिए आवेदन दिया गया था, जिसकी जाँच पुलिस कर रही है। जाँच के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।

तौकीर रजा के ऐलान के बाद अब तक 512 मुस्लिम लड़कियों की घर वापसी करवाकर हिंदू युवकों से शादी करवाने वाले पंडित केके शंखधर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि तौकीर रजा 2010 दंगे का आरोपित है और वह सावन के महीने में शहर का माहौल बिगाड़ना चाहता है। तौकीर रजा को लेकर उन्होंने कहा, “तुम्हारे पूर्वज भी तो हिंदू थे। तुम भी आ जाओ। हम तुम्हारा भी घर वापसी करवाते हैं।”

हिंदू संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है और तौकीर रजा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग भी की है। मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने मौलाना तौकीर रजा की जीभ काटने की धमकी दी है। उन्होंने कहा, “एक भी हिंदू का धर्म परिवर्तन कराया तो बरेली आकर जीभ काट दूँगा। धर्म परिवर्तन करा के देख लें, हम बरेली में तुम्हें रहने लायक नहीं छोड़ेंगे।”

दिनेश ने मौलाना तौकीर रजा की संपत्ति की जाँच कराने और उनके ठिकानों पर बुलडोजर चलाने की भी माँग की है। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा जैसे लोग हिंदुस्तान का खाते हैं और गुण पाकिस्तान का गाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में रहकर हिंदुस्तान में दंगा भड़काने का काम किया जा रहा है। यह हिंदुओं का देश है और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने की बात की जा रही है।

दरअसल, तौकरी रजा ने मीडिया को कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है। मौलाना ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है।

मौलाना तौकीर ने कहा कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।

पूजा खेडकर की ट्रेनिंग रोक LBS नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी ने वापस बुलाया, 23 जुलाई तक करना होगा रिपोर्ट: कई गड़बड़ियों के बाद जाँच के घेरे में हैं ट्रेनी IAS

महाराष्ट्र की ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की ट्रेनिंग होल्ड कर दी गई है। उन्हें वाशिम के असिस्टेंट कमिश्नर के पोस्ट से तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। साथ ही उन्हें मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडिमिनिस्ट्रेशन एकेडमी वापस बुला लिया गया है। उन्हें आधिकारिक तौर पर पत्र भेजकर मसूरी बुलाया गया है, जहाँ 23 जुलाई से पहले उन्हें रिपोर्ट करना होगा। लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडिमिनिस्ट्रेशन अकेडमी ने महाराष्ट्र सरकार को भी सूचित कर दिया है कि पूजा खेडकर की ट्रेनिंग होल्ड कर उन्हें मसूरी तलब किया गया है।

लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी द्वारा पूजा खेडकर को जारी आदेश में कहा गया है, “आपके जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित रखने तथा आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए आपको तुरंत वापस बुलाने का निर्णय लिया है। अतः आपको महाराष्ट्र राज्य सरकार के जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम से मुक्त किया जाता है। एकेडमी का पत्र इसके साथ संलग्न है। आपको 23 जुलाई, 2024 से पहले एकेडमी में शामिल होने का निर्देश दिया जाता है।”

तमाम गड़बड़ियों के संकेत, कार्रवाई तय

बता दें कि अभी तक जहाँ उनकी अनुचित माँगों और शारीरिक दिव्यांगता से जुड़े फर्जी डॉक्यूमेंट के कारण वे सवालों के घेरे में थीं तो वहीं अब मामले में पता चला है कि पूजा खेडकर ने अपनी उम्र को लेकर भी झूठ बोला है। खबरों के मुताबिक पूजा खेडकर ने महज 3 साल के अंतर में दो डॉक्यूमेंट में अपनी उम्र अलग-अलग बताई। इसके मुताबिक उनकी उम्र 3 साल में सिर्फ 1 साल बढ़ी है।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने साल 2020 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल को एक एप्लीकेशन दिया था, जिसमें उनकी उम्र 30 साल और साल 2023 में इस प्रकार के डॉक्यूमेंट में उनकी उम्र 31 साल दिखाई दे रही है। इन्हीं डॉक्यूमेंट को देखते हुए सवाल खड़ा हो रहा है कि जब ऐसा नहीं हो सकता कि दिसंबर 2020 से लेकर 2023 तक में पूजा खेडकर की उम्र केवल 1 साल बढ़ी हो तो इससे तो यही साफ है कि उन्होंने अपनी उम्र को लेकर दस्तावेजों में झूठ बोला है।

इसके अलावा पूजा खेडकर के नाम को लेकर भी बवाल है। उन्होंने साल 2020 में अपने दस्तावेज में अपना नाम डॉ खेडकर पूजा दिलीप राओ बताया था। वहीं 2023 में उन्होंने अपना मिस पूजा मनोरमा लिखा था। वहीं पिता के नाम की स्पेलिंग को भी बदल दिया था। 2023 में उन्होंने नाम उन्होंने ऐसा क्यों किया इसकी छानबीन की जा रही है। उनके नाम में डॉक्टर होने और फिर डॉक्टर हटाने की चर्चा मीडिया में तेज है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया।

बता दें कि इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि पूजा खेडकर ने 2007 में एमबीबीएस में एडमिशन लेते समय भी घालमेल किया था। दरअसल, पूजा खेडकर ने एमबीबीएस में ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर के तहत एडमिशन लिया था जबकि उनके माता-पिता प्रशासनिक अधिकारी थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस, एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. अरविंद वी. भोरे ने दावा किया था कि IAS अधिकारी डॉ पूजा खेडकर ने 2007 में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए ओबीसी सर्टिफिकेट जमा किया था। इस दौरान उन्होंने ओबीसी खानाबदोश जनजाति-3 कैटेगरी के तहत एडमिशन लिया था, जो वंजारी समुदाय के लिए रिजर्व है। एडमिशन के वक्त उन्होंने किसी प्रकार की फिजिकल डिसेबिलिटी को लेकर कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया था।

मुहर्रम की जुलूस में फिलिस्तीन के झंडे और टी-शर्ट: कश्मीर से लेकर बिहार तक पुलिस अलर्ट, FIR के बाद कई को दबोचा, कैमूर में प्रिंटिंग प्रेस पर छापेमारी

मुहर्रम के जुलूस में बिहार, यूपी, कश्मीर और गुजरात सहित देश में कई जगहों पर हिंदू विरोधी घटनाएँ भी सामने आ रही हैं। कट्टरपंथ से त्रस्त गुजरात के वडोदरा स्थित सावली में मोहर्रम पर फिलिस्तीन का झंडा फहराया गया है। इस झंडे को देखकर पुलिस सचेत हो गई। पुलिस ने इसका संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। इस मामले में फिलहाल तीन नाबालिग लड़कों से पूछताछ की जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक, घटना 14 जुलाई 2024 की शाम की है। वडोदरा के सावली में मुस्लिम इलाके लाहौरी वाघा में मोहर्रम की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच किसी ने धार्मिक झंडों के बीच फिलिस्तीन का भी झंडा फहरा दिया। फिलिस्तीन का झंडा देखकर पुलिस हैरान रह गई और उसने बिना किसी देरी के इस झंडे को तुरंत उतार दिया।

इसके बाद पुलिस ने खुद इस मामले में कार्रवाई करते हुए जाँच शुरू कर दी। ऑपइंडिया ने इस संबंध में सावली पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर तैनात पीएसआई कमालिया से संपर्क किया। उन्होंने बताया, “सावली पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाँ, इस संबंध में 3 नाबालिगों से पूछताछ की जा रही है।”

उधर बिहार में भी कई जगहों पर मुहर्रम के जुलूस के साथ फिलिस्तीन के झंडे लहराए गए। बिहार के कैमूर में मुहर्रम के जुलूस के साथ फिलिस्तीन के झंडे लहराने के साथ-साथ फिलिस्तीनी झंडे वाले झंडे पहने लोगों ने बवाल काटा था। इसके बाद कैमूर प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस ने सोमवार (15 जुलाई) को कैमूर की प्रिंटिंग प्रेस की दुकानों पर छापेमारी की।

कैमूर पुलिस को जानकारी मिली थी कि फिलिस्तीन के झंडे और टी-शर्ट बनाए जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने मोहनिया स्थित प्रिंटिंग प्रेस की दुकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस ने सभी प्रिंटिंग प्रेस वालों को चेतावनी दी है। प्रशासन ने कहा है कि अगर कोई भी शख्स जुलूस के दौरान आपत्तिजनक सामान के साथ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

वहीं, बिहार के नवादा से भी ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है। नवादा के धमौल बाजार का बताए जा रहे इस वीडियो में मुहर्रम के जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा लहराया जा रहा है। इसके बाद नवादा एसपी ने टीम गठन करके जाँच करने के लिए कहा। टीम ने फिलिस्तीन का झंडा लहराने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह वीडियो 15 जुलाई का बताया जा रहा है।

इससे पहले, बिहार के ही दरभंगा में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया था। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों पर एफआईआर की है। आरोपितों की पहचान मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद इब्राहिम के रूप में हुई है। इसके अलावा कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। यह घटना 8 जुलाई 2024 की है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर से भी ऐसा ही वीडियो सामने आया है। वीडियो में मुहर्रम के जुलूस के में मुस्लिम मुल्क फिलिस्तीन का झंडा लहराया जा रहा है। दरअसल, एक छोटी गाड़ी पर ताजिया निकाला गया था, जिस पर कई लाउस्पीकर लगे हुए थे। इन लाउस्पीडकर में नारे लगाए जा रहे थे। इस दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराते हुए देखा गया।

कश्मीर में भी 15 जुलाई को मुहर्रम के जुलूस के दौरान कई जगहों पर फिलिस्तीन के झंडा लहराने की बात कही जा रही है। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई लड़कों को गिरफ्तार कर किया है। कहा जा रहा है कि जूलूस के दौरान कुछ युवा अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे भी लगा रहे थे। बता दें कि एलजी प्रशासन द्वारा लगातार दूसरे वर्ष मुहर्रम जुलूस की इजाजत दी गई है।

‘मुस्लिम पुलिसकर्मी रख सकते हैं छोटी दाढ़ी’: मद्रास हाई कोर्ट का फैसला, हज से लौटकर बढ़ी दाढ़ी में अधिकारियों से मिला था याचिकाकर्ता

मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मुस्लिम पुलिसकर्मियों को भी दाढ़ी रखने की अनुमति है। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस वाले सलीके से कटी हुई, साफ-सुथरी छोटी दाढ़ी रख सकते हैं, इसके लिए उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट ने 1957 के मद्रास पुलिस राजपत्र का भी हवाला दिया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी ने 5 जून 2024 के अपने आदेश में कहा है कि भारत विविध धर्मों और रीति-रिवाजों का देश है और पुलिस विभाग अपने मुस्लिम कर्मचारियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दाढ़ी रखने के लिए दंडित नहीं कर सकता।

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आधेश में कहा, “मद्रास पुलिस राजपत्र के मानदंड इस तथ्य पर प्रकाश डालते हैं कि मुस्लिमों को ड्यूटी के दौरान भी साफ-सुथरी दाढ़ी रखने की अनुमति है। भारत विविध धर्मों और रीति-रिवाजों का देश है, इस भूमि की सुंदरता और विशिष्टता नागरिकों की मान्यताओं और संस्कृति की विविधता में निहित है। तमिलनाडु सरकार के पुलिस विभाग के लिए सख्त अनुशासन की आवश्यकता है, लेकिन विभाग में अनुशासन बनाए रखने का कर्तव्य प्रतिवादियों को अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुस्लिम कर्मचारियों को दाढ़ी रखने के लिए दंडित करने की अनुमति नहीं देता है, जो वे पैगंबर मोहम्मद की आज्ञाओं का पालन करते हुए अपने पूरे जीवन में करते(धार्मिक कार्य) हैं।”

यह आदेश एक पुलिस कॉन्स्टेबल की याचिका पर पारित किया गया था, जो मक्का से लौटने के बाद बढ़ी हुई दाढ़ी में अपने वरिष्ठ अधिकारी से मिला था। साल 2018 में कॉन्स्टेबल 31 दिनों की छुट्टी लेकर मक्का की यात्रा यानी हज यात्रा पर गया था, वहाँ से लौटने के बाद उसके पैरों में संक्रमण हो गया था और उसने छुट्टी बढ़ाने की माँग को लेकर वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की थी। लेकिन असिस्टेंट कमिश्नर रैंक के अधिकारी ने छुट्टी से बढ़ाने से इन्कार कर दिया, साथ ही बढ़ी हुई दाढ़ी को लेकर सफाई माँगी थी।

साल 2019 में डीसीपी ने कॉन्स्टेबल से औपचारिक तौर पर स्पष्टीकरण माँगा, जिसमें मद्रास पुलिस नियमावली के उल्लंघन की बात कही गई थी। इसके बाद कॉन्स्टेबल के खिलाफ 2 आरोप तय किए गए। पहला-दाढ़ी बढ़ाने और दूसरा-31 दिन की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर आने की जगह 20 दिन की अतिरिक्त छुट्टी माँगना।

साल 2021 में डीसीपी ने आदेश दिया कि कॉन्स्टेबल का 3 साल का इन्क्रीमेंट सजा के तौर पर रोका जाए, जिसके बाद कॉन्स्टेबल ने कमिश्नर के सामने अपील की। कमिश्नर ने सजा को 3 साल से घटाकर 2 साल कर दी। लेकिन कॉन्स्टेबल ने हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी, जिस पर हाई कोर्ट ने 5 जून को उसे राहत दी। हाई कोर्ट ने सजा को गलत बताया और कमिश्नर के आदेश को रद्द करते हुए 8 सप्ताह के भीतर कानून के तहत नया आदेश देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि कॉन्स्टेबल को मेडिकल आधार पर आपसी सहमति के आधार पर छुट्टी दी जानी चाहिए थी।

आज भी फैसले की प्रतीक्षा में कन्हैयालाल का परिवार, नूपुर शर्मा पर भी खतरा; पर ‘सर तन से जुदा’ की नारेबाजी वाले हो गए बरी भी: व्यवस्था का यह ‘न्याय’ आपको कचोटता नहीं?

इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा की नेता नूपुर शर्मा द्वारा दिए गए बयान को मुद्दा बनाकर देश को झुलसाने की कोशिश की जा रही थी। 17 जून 2022 का दिन था। नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में राजस्थान के अजमेर में मुस्लिमों द्वारा मौन जुलूस निकाला जा रहा था। लगभग 3000 लोगों वाली जुलूस जब अजमेर शरीफ दरगाह के पास पहुँचा तो वहाँ मजमा लगा दिया गया।

रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर भड़काऊ भाषण दिया जाने लगा। इस्लाम और रसूल की निंदा को करने को मौत की सजा की बात कही जाने लगी। इस दौरान लाउडस्पीकर से ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। भीड़ भी उन्माद में आकर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने लगी। इस पूरे जुलूस का नेतृत्व कर रहा था अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती।

चिश्ती ने मौन जुलूस के नाम पर परमिशन लिया था। प्रशासन ने उसे समझाया भी था कि जुलूस में किसी तरह की भड़काऊ बयानबाजी या नारे नहीं लगने चाहिए। हालाँकि, गौहर चिश्ती ने इस चेतावनी को अपने पैरों की जूती पर लिया। जुलूस में जमकर भड़काऊ नारे लगाए गए। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। राजस्थान पुलिस के कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने भी अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था।

इसको लेकर वायरल वीडियो में दरगाह के बाहर गौहर ने कहा था, “हम अपने हुजूर की शान में गुस्ताखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुस्ताख-ए-रसूल की एक सज़ा… सर तन से जुदा, सर तन से जुदा। अपने आका की इज्जत के लिए हम सर कटाने को तैयार हैं। नूपुर ने हमारे आका की शान में गुस्ताखी की है, इसलिए उसे जीने का हक नहीं है। नूपुर शर्मा मुर्दाबाद।”

इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज करके गौहर चिश्ती सहित 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, स्थानीय कोर्ट ने मंगलवार (16 जुलाई 2024) को कोर्ट ने इन सभी आरोपितों को बरी कर दिया। वहीं, एक अन्य आरोपित फरार है। उसे जमानत पर रिहा किया या था, लेकिन वह फरार हो गया। उसको लेकर कोर्ट ने अभी कोई निर्णय नहीं दिया है।  

इस तरह के छोटी-छोटी रैलियाँ और जुलूस देश के अलग-अलग हिस्से में हो रहे थे और देश में माहौल को गर्म रखने की कोशिश जारी थी। समय गुजरता जा रहा था, लेकिन इसका असर दिखता रहा। दिन था 28 जून 2022 का। उदयपुर में कन्हैयालाल नाम का एक दर्जी की गला काटकर सार्वजनिक रूप से हत्या कर दी गई थी।

इस दौरान आरोपित मोहम्मद रियाज़ अंसारी और मोहम्मद गौस ने गला काटने का वीडियो भी बनाया था। कन्हैयालाल की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करते हुए अपने ह्वाट्सऐप स्टेटस पर एक पोस्ट लगा दिया। हालाँकि, यह पोस्ट कन्हैया लाल के लड़के ने लगाया था। इसके बावजूद रियाज और गौस ने कन्हैयालाल की गला काटकर हत्या कर दी।

कन्हैयालाल की हत्या के तार गौहर चिश्ती से जुड़े भी सामने आए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि कन्हैयालाल की हत्या के बाद रियाज और गौस भागकर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती के पास अजमेर ही आ रहे थे। हालाँकि, शक्ति सिंह और प्रह्लाद सिंह नाम के दो युवकों ने इन दोनों आरोपितों को दौड़कर पकड़ लिया था और पुलिस के हवाले कर दिया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि गौहर चिश्ती 17 जून 2022 को उदयपुर भी गया था। वहाँ उसने ‘सर कलम करने’ के नारे लगवाए थे। वहाँ उसकी मोहम्मद रियाज से मुलाकात की बात भी कही गई थी। बताया जा रहा है कि गौहर चिश्ती ने ही रियाज और गौस को कन्हैयालाल के कत्ल का वीडियो बनाने को भी कहा था। हालाँकि, रास्ते में ये दोनों पकड़े गए थे।

गौहर चिश्ती के इन कारनामों के दो साल बाद आखिरकार कोर्ट ने उसे सारे आरोपों से मुक्त कर दिया। इतना ही नहीं, गौहर चिश्ती के साथ ही उसके पाँच अन्य आरोपितों को भी रिहा कर दिया गया। इस मामले में अदालत के निर्णय का अभी पूरा निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन दोनों के पक्ष के वकीलों की बातों से साफ लगता है कि मामला साक्ष्य की कमजोरी का है।

आरोपितों की ओर से पेश कोर्ट में पेश वकील अजय वर्मा का कहना है कि भड़काऊ नारे वाले जो भी वीडियो सामने आए थे, उनका सत्यापन नहीं हो पाया है। पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, वे भी अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। वकील ने कहा कि कोर्ट ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाया और सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

इससे साफ लगता है कि पुलिस ने इस मामले की पैरवी ढंग नहीं कर पाई। जो वीडियो वायरल हुआ, उसका सत्यापन नहीं करा पाना भी एक बड़ी नाकामी है। जिस पुलिसकर्मी जयनारायण जाट ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वे घटना के दिन ड्यूटी निजाम गेट पर थी। इस बात को भी जाट एवं अन्य पुलिसकर्मी पेश नहीं कर पाए।

इस मामले में दो साल पूरा होते ही इन आरोपितों के मामले में फैसला हो गया और वे दोषमुक्त होकर बाहर आ गए। हालाँकि, सरकार इस फैसले को आगे हाई कोर्ट में चुनौती देती है तो वो अलग बात है। हालाँकि, कन्हैयालाल के परिजन आज भी न्याय की आस में बैठे हैं। कन्हैयालाल के बेटे ने ऐलान किया है कि जब तक उसके पिता को न्याय नहीं मिलता, तब तक वह नंगे पैर रहेगा।

इतना ही नहीं, मृत कन्हैयालाल की हत्या के दो साल बाद भी उनकी अस्थि कलश विसर्जन की बाट जोह रही है। उनके हत्यारों को सजा हो तो परिवार उनकी अस्थि को पवित्र नदियों के जल में प्रवाहित करे। हालाँकि, नजदीकी भविष्य में इसकी गुंजाइश कम दिखती है। उधर, मामला सामने आने के बाद अजमेर दरगाह पर लोगों की आवाजाही कम हो गई थी, लेकिन फिर से वहाँ चहल-पहल बढ़ गई है।

जिस गली में कन्हैयालाल की दुकान थी और जहाँ उनका घर है, वहाँ आज भी दहशत का माहौल है। हर तरफ एक भयानक खामोशी फैली हुई थी। उस गली से गुजरने की आज भी कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता है। वहाँ के हालात आज भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। अगर कन्हैयालाल के हत्यारों को सजा मिल भी जाए और उनकी अस्थियों को प्रवाहित कर भी दी जाए तो गलियों का डर दशकों तक कंपकंपी पैदा करती रहेगी।

किसानों के प्रदर्शन से NHAI का ₹1000 करोड़ का नुकसान, टोल प्लाजा करने पड़े थे फ्री: हरियाणा-पंजाब में रोड हो गईं थी जाम

किसान प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को तगड़ा नुकसान हुआ है। दो किसानों के धरना प्रदर्शन के चक्कर में NHAI को ₹1000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। यह नुकसान हरियाणा और पंजाब में स्थित टोल प्लाजा पर हुआ है।

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार दिसम्बर, 2020 से दिसम्बर, 2021 और फरवरी, 2024 से मार्च 2024 के बीच चले किसानों के धरना प्रदर्शन के कारण NHAI को टोल प्लाजा पर फीस का संग्रह रोकना पड़ा था। इसके कारण उसे इस अवधि में ₹1000 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।

यह जानकारी ट्रिब्यून को RTI के माध्यम से मिली है। RTI में बताया गया है कि दिसम्बर 2020 से दिसम्बर 2021 के बीच चले किसान प्रदर्शन के दौरान घरौंदा टोल प्लाजा पर ₹304 करोड़ जबकि घग्गर टोल प्लाजा पर ₹151 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके अलावा पानीपत के टोल प्लाजा पर ₹77 करोड़, थाना टोल प्लाजा पर ₹23 करोड़ और सैनी माजरा में ₹20.70 करोड़ का नुकसान हुआ था। यह सभी टोल प्लाजा NHAI के अम्बाला डिविजन के अंतर्गत आते हैं।

इसी दौरान NHAI के सोनीपत डिवीजन में भागन टोल प्लाजा पर ₹154 करोड़, रोहड़ टोल प्लाजा पर ₹85 करोड़, मकरौली दाहर टोल प्लाजा पर ₹70 करोड़, छारा टोल प्लाजा पर ₹17 करोड़ और किताला टोल प्लाजा पर ₹13 करोड़ का नुकसान हुआ। दिसम्बर 2020 से दिसम्बर 2021 तक किसान प्रदर्शन के दौरान कुल मिलाकर ₹914 करोड़ का नुकसान हुआ।

वहीं 12 फरवरी, 2024 से मार्च, 2024 के दौरान चले किसान प्रदर्शन में घरौंदा टोल प्लाजा पर ₹4.91 करोड़ और घग्गर टोल प्लाजा पर ₹98.55 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके अलावा भगन टोल प्लाजा पर ₹4.27 करोड़ और रोहड़ टोल प्लाजा पर ₹53 लाख का नुकसान हुआ। किसान प्रदर्शन के दूसरे चरण में लगभग ₹108 करोड़ नुकसान हुआ। इस तरह दोनों चरण में मिलाकर NHAI को ₹1000 करोड़ से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा। यह नुकसान राष्ट्रीय राजमार्ग 44 और 152 पर हुआ है।

इसी दौरान गाजियाबाद के NHAI यूनिट को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर भी ₹15.4 करोड़ का नुकसान झेला। किसानों के धरना प्रदर्शन के कारण यह एक्सप्रेसवे लगभग 2 महीने तक बंद रहा। NHAI के लिए यह टोल वह कम्पनियाँ इकट्ठा करती हैं जो यह रोड बनाती हैं। अब NHAI ने इन कम्पनियों को उतनी ही अवधि के लिए टोल वसूलने की इजाजत दी गई है।

इस किसान प्रदर्शन को लेकर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने उस समय बताया था कि 12 महीनों में देश को इस आंदोलन के कारण करीब ₹60,000 करोड़ का नुकसान हुआ था। व्यापारियों के संगठन ने कहा था कि ये घाटा मुख्यतः इस आंदोलन के शुरुआती स्टेज यानी, नवंबर-दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में हुआ था। इस दौरान भी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में काफी दिक्कतें आई थी।