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फेक एड्रेस पर बनवाया राशन कार्ड, फिर इसी कार्ड का इस्तेमाल कर लिया दिव्यांगता का सर्टिफिकेट: IAS पूजा खेडकर का एक और फ्रॉड आया सामने, पारिवारिक बंगले के पास चला बुलडोजर

महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को लेकर हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। कभी उनके नाम में कुछ गड़बड़ मिलती है तो कभी प्रमाणपत्र में… हर दस्तावेज में कुछ न कुछ फर्जीवाड़ा निकलने के बीच अब पता चला है कि पूजा खेडकर ने गलत एड्रेस कार्ड देकर राशन कार्ड बनवाया हुआ था और इसका प्रयोग उन्होंने दिव्यांगता सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए किया था।

पूजा खेडकर से जुड़ी ये नई जानकारी इंडिया टुडे की पड़ताल में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पूजा खेडकर ने पिंपरी के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल से फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाया था। इसके लिए उन्होंने अपना एड्रेस पिंपरी चिंचवाड़ में बताया था और आगे प्लॉट नंबर 53, देहू-आलंदी, तलवड़े लिखा था।

जाँच होने के बाद सामने आया कि ये एड्रेस कोई रिहायशी प्रॉपर्टी नहीं है बल्कि बंद हो चुकी कंपनी थर्मोवेरिटा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड की है, मगर पूजा खेडकर ने इसका प्रयोग राशन कार्ड बनवाने के लिए किया और फिर उस राशन कार्ड की मदद से वह वीसीएफ अस्पताल से दिव्यांगता सर्टिफिकेट हासिल करने में सफल हो पाईं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में जोड़े गए दस्तावेज

हैरानी की बात ये है कि पूजा खेडकर ने जिस कंपनी का एड्रेस अपने राशन कार्ड के लिए दिया था उसी कंपनी के नाम पर रजिसटर्ड ऑडी कार वह चलाती थीं। कंपनी पर ढाई लाख से ज्यादा का टैक्स बकाया है। इसका कनेक्शन पूजा से क्या है ये सामने अभी नहीं आ पाया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी ने पूजा खेडकर का महाराष्ट्र से ट्रेनिंग प्रोग्राम को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही एकेडमी ने उन्हें तत्काल वापस बुलाने के लिए लेटर भी जारी किया। एकेडमी ने महाराष्ट्र सरकार को भी इस संबंध में पत्र लिखकर जानकारी दी थी। पूजा खेडकर को भेजे गए निर्देश में कहा गया था कि उनको जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित रखने तथा आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए तुरंत वापस बुलाने का निर्णय लिया है।

पूजा खेडकर के घर चला बुलडोजर

बता दें कि ट्रेनी महिला आईएएस के मामले में इतने खुलासे होने के बीच एक भी खबर सामने आई थी कि पूजा खेडकर की माँ मनोरमा के बंगले के पास अवैध अतिक्रमण हो रखा था। इसपर कुछ दिन पहले पुणे नगर निगम ने उन्हें नोटिस भी जारी किया। सुनवाई न होने पर आज वहाँ नगर निगम ने बुलडोजर चला दिया। दरअसल, पुणे के बाणेर इलाके में खेडकर परिवार का बंगला स्थित है। इन्होंने बंगले के सौंदर्यीकरण के लिए फुटपाथ पर अतिक्रमण कर रखा था। लोगों के पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथ पर उन्होंने पेड़-पौधे लगा दिए थे। पूजा खेडकर के खिलाफ विवाद बढ़ने के बीच पुणे नगर निगम का ध्यान इस पर गया और उन्होंने इसपर संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया और आज इस पर बुलडोजर एक्शन लिया गया।

‘गवाहों के हस्ताक्षर नहीं, खुद ही गढ़ दिया नम्बी नारायणन का भी बयान’: CBI की चार्जशीट में खुलासा – केरल पुलिस और IB को पता था ISRO जासूसी कांड के नहीं हैं सबूत

1994 में आया ‘ISRO जासूसी कांड’ पूर्णतः फर्जी था और S विजयन नामक एक सर्किल इंस्पेक्टर ने मलेशिया की एक महिला से बदला लेने के लिए ये पूरी कहानी रची थी। 30 वर्षों बाद इस मामले में दायर की गई CBI चार्जशीट तो यही कहती है। तिरुवनंतपुरम स्थित ‘चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट’ (CJM) के समक्ष दायर चार्जशीट में बताया गया है कि कैसे मरियम रशीदा के साथ हवस की आग न बुझा पाने के कारण S विजयन ने उससे बदला लेने की ठानी और इस मामले में ISRO के वैज्ञानिकों को भी घसीट लिया।

मरियम रशीदा को 2 बार गिरफ्तार किया गया था और उनके वीजा व श्रीलंका जाने का टिकट भी पुलिस ने रख लिया था, 27 मार्च, 2024 को CBI ने दायर की गई चार्जशीट में ये बताया है। मरियम रशीदा को 1994 में एक बार 20 अक्टूबर और फिर उनकी कस्टडी खत्म होने से 1 दिन पहले 13 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। उनके व्यक्तिगत संपर्कों के आधार पर उनके जासूस होने की बात कही गई। विजयन ने कहानी बनाई थी कि रूटीन चेक के दौरान उसे मरियम रशीदा पर शक हुआ था, और वो होटल में रुकने फिर किराए के घर में रहने के लिए आ रहे पैसे के स्रोत के बारे में नहीं बता पाईं।

जबकि सच्चाई ये थी कि वीजा की अवधि बढ़ाने के किए खुद मरियम रशीदा पुलिस के पास गई थीं। फिर S विजयन उसके घर पहुँचा और जबरदस्ती की, लेकिन सफल न हो पाने के बाद वो बदला लेने के लिए अड़ गया। विजयन उसके होटल वाले कमरे और फिर घर में भी गया था। उसके साथ रह ही फौजिया को उसने बाहर भेज दिया था। विजयन ने उनका वीजा रख लिया था, ऐसे में उन्हें भारत में रुकना पड़ा और इसे ही आधार बना कर विजयन ने FIR दायर करवाई।

इसमें सबसे पहले ISRO के वैज्ञानिक D शशिकुमारन को फँसाया गया। वो ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ (LPSC) से जुड़ा हुआ था। VR राजीवन तब पुलिस कमीशन थे। IB को सूचित किया गया, लेकिन उसे जासूसी वाली कोई बात मिली ही नहीं। विजयन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि दोनों महिलाएँ भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के खिलाफ काम कर रही थीं, जिससे पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते भी खराब होंगे। असिस्टेंट पुलिस प्रॉसिक्यूटर हबीब पिल्लई की सलाह के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई, लेकिन पिल्लई ने इसे नकार दिया।

इसमें IB के कुछ अधिकारियों ने भी केरल पुलिस का साथ दिया। CBI ने IB द्वारा दायर की गई 4 रिपोर्ट्स को देखा, लेकिन किसी पर भी हस्ताक्षर नहीं था। किसी भी गवाह के बयान के नीचे उसका हस्ताक्षर नहीं था। गवाहों के बयान के न सिर थे न पाँव। केरल पुलिस की 16 नवंबर, 1994 की डायरी में लिखा गया कि मरियम रशीदा और फौजिया D शशिकरण के अलावा बेंगलुरु में रूस की स्पेस एजेंसी ग्लावकोस्मोस के एजेंट K चंद्रशेखर से संपर्क में थीं।

‘बहुमूल्य सूचनाएँ’ बाहर भेजने का आरोप लगाया गया, लेकिन बताया नहीं गया कि वो कौन सी सूचनाएँ थीं। खुद नम्बी नारायणन व अन्य वैज्ञानिकों के बयान पुलिस ने खुद से गढ़े। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर S जोगेश ने नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्होंने CBI को बताया कि उन्हें पूछताछ के दौरान आसपास भी नहीं फटकने दिया गया। SIT के मुखिया सिबी मैथ्यूज ने उन्हें नम्बी नारायणन का टाइप किया हुआ बयान सौंपा, जिस पर उन्हें सिर्फ सिग्नेचर करना था।

CBI की चार्जशीट में कहा गया है कि केरल पुलिस और IB अधिकारियों को ये पूरी तरह पता था कि जासूसी के आरोपों के पक्ष में सबूतों का अभाव था और पूछताछ रिपोर्ट की विषय-वास्तु भी आधारहीन थी, फिर भी गिरफ़्तारी के लिए इन्हीं चीजों का इस्तेमाल किया गया। बेंगलुरु के एक सुधीर शर्मा नामक लेबर कॉन्ट्रैक्टर को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। अप्रैल 2021 में जैन कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस के 11 और IB के 7 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने के लिए कहा।

पटना से मोतिहारी तक बवाल लेकर आया मुहर्रम जुलूस: पथराव-मारपीट में दर्जनों घायल, पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा

मुहर्रम के मौके पर जुलूस के दौरान बिहार के पटना, वैशाली, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और मोतिहारी बवाल की खबरें सामने आई हैं। मोहर्रम जुलूस के दौरान दो के बीच जमकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 6 लोग घायल हो गए। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस को आखिरकार लाठी भाँजनी पड़ी।

पटना में जुलूस के दौरान जमकर हंगामा किया गया। पटना के राजा बाजार में ताजिया जुलूस के दौरान देर रात तोड़फोड़ की गई थी। ताजिया जुलूस के दौरान राजा बाजार के मदरसा गली में शुभम किराना स्टोर में तोड़फोड़ की गई। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। दुकानदार ने पहले हमले की बात कही, लेकिन बाद में मुकर गया। उसने कहा कि वह किसी लफड़े में नहीं पड़ना चाहता।

वैशाली में बिदुपुर थाना के माइल भैरोपुर गाँव में मोहर्रम जुलूस के दौरान दो पक्षों ने एक-दूसरे के ताजिया पर जमकर पथराव किया। इसमें 6 लोग घायल हो गए। वहीं, एक युवक पर तलवार से हमला किया गया। युवक को बिदुपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। बाद में उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टर ने सदर अस्पताल हाजीपुर रेफर कर दिया है।

मुंगेर में मोहर्रम जुलूस के दौरान दो दलों के बीच विवाद हो गया। हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार के मोमिन टोला और रौशन नगर के इमामबाड़ा के समीप दोनों पक्ष ने एक-दूसरे पर जमकर पथराव किया। इसमें 6 लोग घायल हो गए हैं। इसके कारण तनाव फैल गया है। इस दौरान मुख्य बाजार में भागदौड़ का माहौल बना रहा है।

मुजफ्फरपुर में भी कुछ ऐसा मामला सामने आया है। वहाँ डीजे जब्त करने पहुँची पुलिस टीम पर हमला किया गया है। इसके बाद भीड़ पुलिसकर्मियों पर आक्रोशित हो गई और उसे लगभग एक किलोमीटर तक दौड़ाकर उन पर पथराव किया। इस घटना में करीब 12 पुलिसकर्मी घायल हाे गए। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

मोतिहारी में ताजिया निकालने के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया। पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। दरअसल, मोहर्रम के दौरान 20-30 युवक हाथों में लाठी-डंडा लेकर करतब दिखा रहे थे। इस दौरान एक युवक फिलिस्तीन का झंडा लेकर घुमा रहा था। इसका वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने दबोच लिया।

वहीं, सीतामढ़ी के मेहसौल चौक और किरण चौक पर बुधवार (17 जुलाई) की सुबह दो ताजिया जुलूस में शामिल लोगों के बीच विवाद हो गया। इस बीच दोनों पक्षों में पत्थरबाजी हो गई। पथराव में दोनों पक्षों के करीब 25 लोग घायल हुए हैं। इस दौरान पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज भाँजी।

मुस्लिम आबादी में विस्फोट से लेकर ‘अल्पसंख्यक मोर्चा’ तक पर भाजपाई मुखर: सुवेंदु बोले- जो हमारे साथ हम उसके साथ, असम के CM ने कहा- डेमोग्राफी चेंज जीवन-मौत का सवाल

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के भीतर जनसांख्यिकी में बदलाव को अपने लिए जिन्दगी और मौत का मुद्दा बताया है। उन्होंने असम में मुस्लिम जनसंख्या की बढ़ोतरी को लेकर भी आँकड़े दिए हैं। उन्होंने यह बयान झारखंड की राजधानी राँची में दिया है। वहीं पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने अल्पसंख्यक मोर्चा के औचित्य पर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि हम उनके साथ हैं, जो हमारे साथ है।

हिमंता बिस्वा सरमा को झारखंड में भाजपा का सह प्रभारी बनाया गया है। वर्तमान में वह झारखंड के दौरे पर हैं। उन्होंने राँची में एक बैठक में हिस्सा लिया और झारखंड में घुसपैठ और आदिवादी लड़कियों के धर्म परिवर्तन को बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा, “झारखंड में घुसपैठिया यहाँ की बेटियों से शादी कर रहे हैं। यह रोकने में झारखंड की JMM-कॉन्ग्रेस विफल है। घुसपैठिए पहले असम-बंगाल आते हैं। उनको पहले रोकने की जिम्मेदारी केंद्र की है लेकिन अगर वो एक बार अंदर आ गए तो उन पर कार्रवाई राज्य सरकार को करनी होती है।”

उन्होंने कहा, “झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश भी दिया है कि घुसपैठियों को पकड़ा जाए और बंद किया जाए। फॉरेनर्स कानून के अंतर्गत घुसपैठिए बाहर निकालने का अधिकार राज्य सरकार का होता है, मैं असम में यह काम रोज करता हूँ। यदि आप अपना काम नहीं कर रहे हैं तो दिल्ली पर दोष डाल रहे हैं तो आपको कुर्सी छोड़ दीजिए।”

उन्होंने जनसांख्यिकी की समस्या को लेकर कहा, “बदलती जनसांख्यिकी मेरे लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। असम में 1951 में मुस्लिम जनसंख्या 12% थी अब यह बढ़ कर 40% हो चुकी है। आज असम में पूरा जिला खो चुके हैं। मेरे लिए यह राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि जीने-मरने का मुद्दा है। मैं इससे रोज संघर्ष करता हूँ।”

गौरतलब है कि असम के पश्चिम बंगाल की सीमा से लगने वाले जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठ अब बड़ा मुद्दा बन रही है। कई जगह पर मुस्लिमों के जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनके लिए बनाए गए कानूनों का फायदा उठाने की बात भी सामने आई है। वहीं कुछ जगह पर वोटरों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी देखी गई है।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा- जो हमारे साथ हम उसके साथ

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि जो हमारे साथ हैं अब हम उसके साथ हैं। वह पश्चिम बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “हम अब तक राष्ट्रवादी मुस्लिमों के विषय में बात करते थे और कहते थे सबका साथ, सबका विकास। अब और नहीं अब जो हमारे साथ वो उसके साथ। अब अल्पसंख्यक मोर्चा की जरूरत नहीं है। सबका साथ, सबका विकास बंद करो।”

सुवेंदु अधिकारी ने यह बयान वायरल होने के बाद इस पर ट्वीट भी किया। उन्होंने कहा, “मेरे बयान को गलत संदर्भ में लिया जा रहा है। मैं साफ़ तौर पर कहता हूँ कि जो राष्ट्रवादी हैं, इस देश और बंगाल के लिए खड़े हैं, हमें उनके साथ होना चाहिए। जो हमारे साथ नहीं खड़े हैं, देश और बंगाल के खिलाफ काम करते हैं, हमें उनका पर्दाफाश करना चाहिए। हमें इसी के साथ ममता बनर्जी की तरह लोगों को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक में नहीं बाँटना चाहिए और उन्हें भारतीय के रूप में देखना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के नारे को पूरी तरह से मानता हूँ।”

सद्दाम सरदार ने घर में बना रखी थी सुरंग, बंगाल पुलिस पहुँची तो इसी से बांग्लादेश भाग गया: सोने की मूर्तियों के नाम पर करता था जालसाजी

पश्चिम बंगाल में अष्ठधातु और सोने की फर्जी मूर्तियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन सप्लाई करने वाले तस्कर सद्दाम सरदार ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। दरअसल, दक्षिण 24 परगना जिले में जब तस्कर सद्दाम सरदार और उसके भाई सैरुल को पुलिस ने पकड़ा, तो भीड़ ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया और दोनों को छुड़ा लिया। इसके कुछ घंटों पर जब पुलिस टीम फिर से उसे पकड़ने के अभियान में जुटी और उसके घर पर छापा मारने पहुँची, तो उसके घर में 2 महिलाएँ मिली। दोनों महिलाओं ने पुलिस को उलझा कर रखा और सद्दाम सरदार को फरार होने का समय मिल गया।

दरअसल, वो घर में तो घुसा था, लेकिन उसके बाद गायब हो गया। पुलिस टीम ने घर में जब तलाशी ली, तो उसके होश उड़ गए, क्योंकि वहाँ एक सुरंग मिली, जिसका रास्ता सुंदर बन की तरफ जाता था। वहीं से सद्दाम सरदार फरार होने में सफल रहा। माना जा रहा है कि वो सीमा पार कर बांग्लादेश भाग गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला दक्षिण 24 परगना जिले के कुलतली का बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि कंक्रीट की सुरंग का एक छोर सद्दाम सरदार के घर के एक भूमिगत कमरे में खुलता है, जबकि दूसरा छोर एक नहर से जुड़ा है। पुलिस ने सोमवार (15 जुलाई 2024) को सरदार को उस मामले में गिरफ्तार किया, जिसमें उसने नकली सोने की मूर्ति के जरिए नादिया जिले के एक व्यक्ति से ₹12 लाख की ठगी की थी, हालाँकि भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला करके सरदार को छुड़ा लिया था। बदमाशों ने पुलिस को डराने के लिए कुछ राउंड हवाई फायरिंग भी की थी।

पुलिस ने बताया कि इस घटना के बाद में पुलिस की बड़ी टीम सरदार के घर की तलाशी के लिए गाँव पहुँची, तभी उसके घर में 40 फुट की सुरंग का पता चला। ऐसा माना जा रहा है कि वो इसी रास्ते फरार होकर बांग्लादेश में दाखिल हो गया। पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार ने कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा। बरुईपुर पुलिस जिले के एक अधिकारी ने कहा, “सद्दाम और उसका भाई सैरुल कई मामलों में आरोपित हैं। पुलिस के उनके घर पर छापा मारे जाने की स्थिति में भागने के लिए ही घर में सुरंग बनाई गई थी।”

पुलिस अधिकारी ने बताया, “वह संभावित खरीदारों को यह कहकर लुभाता था कि उसके पास सोने की छड़ें और मूर्तियाँ हैं जिन्हें वह सस्ते दामों पर बेचना चाहता है। वह उन्हें नकली सोने की वस्तुएँ दिखाता था। जब खरीदार आते थे, तो सद्दाम उन्हें एक सुनसान जगह पर ले जाता था और उस व्यक्ति पर हमला करता था और उसका सारा सामान छीन लेता था।”

पुलिस की पूछताछ में इन महिलाओं ने बताया कि सद्दाम इन मूर्तियों की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करता था। इसके लिए विधिवत अखबारों और सोशल मीडिया में विज्ञापन भी देता था। इसमें प्राचीनतम और अष्टधातु की मूर्तियों की बिक्री का दावा करता था, इसके लिए ग्राहकों से मोटी रकम वसूल करता था और उन्हें प्राचीनतम जैसी दिखने वाली नकली मूर्तियाँ भेज देता था।

YouTube पर सिखाती थी कैसे हो नॉर्मल डिलीवरी, ‘डॉक्टर’ सलमा का खुद का ही अस्पताल निकला फर्जी: जच्चा-बच्चा की मौत, पैथोलॉजी सेंटर सील

यूट्यूब पर डॉ सलमा नासिर नाम की महिला गर्भवती महिलाओं की ‘नॉर्मल डिलीवरी’ पर वीडियो बनाती है। इंस्टाग्राम पर भी सलमा नासिर के 50 हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उसका अस्पताल सीज कर दिया गया है। यहाँ जच्चा-बच्चा को गलत खून चढ़ाने से मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासनिक जाँच में सलमा का अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन और बिना ट्रेंड स्टाफ के चलता पाया गया। यही नहीं, पैथोलॉजी सेंटर भी फर्जी तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसके बाद प्रशासन ने सबकुछ सीज कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 जुलाई) को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे डॉ. सलमा नासिर के हेल्थ केयर सेंटर को सील कर दिया । निरीक्षण के दौरान उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यूट्यूबर और डॉक्टर सलमा नासिर के इस अस्पताल में अवैध लैब भी पाई। दोनों ‘दुकानों’ को सील करने के साथ ही टीम ने मझोला थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत भी दर्ज कराई।

मंगलवार को नोडल अधिकारी वैक्स/उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने रहमत नगर स्थित सलमा नासिर हेल्थ केयर का निरीक्षण किया। क्लीनिक पर जयंतीपुर निवासी आरिफ (18 वर्ष) खून के नमूने ले रहा था। आरिफ 11वीं का छात्र है, जो पिछले दो माह से नमूने एकत्र कर रहा है। इसके अलावा डिंगरपुर निवासी सना खान वहाँ खाना बनाती मिली। निरीक्षण के दौरान आठ बेड, एक एनआईसीयू बेड, एक फोटोथेरेपी मशीन और एक ऑपरेशन थियेटर संचालित पाया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया कि डॉ. सलमा नासिर अस्पताल चलाती हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल में अवैध पैथोलॉजी लैब भी चलती मिली।

अस्पताल के लेटरहेड पर डॉ. मोहम्मद असीम, डीएमएलटी और डॉ. के कुमार, एमडी पैथोलॉजी दोनों का उल्लेख था, लेकिन उनमें से कोई भी अस्पताल में नहीं था। अवैध पैथोलॉजी लैब के अंदर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रक्त संग्रह बैग, एक माइक्रोस्कोप, एक सेंट्रीफ्यूज, एक ब्लड रोलर, एक सेल काउंटर और एक मॉनिटर मिला। जब सीएमओ और उनकी टीम ने निरीक्षण किया तो सलमा नासिर के अस्पताल में दो मरीज भर्ती थे।

नोडल अधिकारी-उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि जाँच के दौरान दवाइयाँ भी पाई गईं। इनमें मल्टीविटामिन, बीटामेथासोन सोडियम फॉस्फेट और रैनिटिडीन आदि शामिल हैं। डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा, “अस्पताल को सील करने के अलावा अस्पताल के संचालक और चिकित्सक के खिलाफ थाना मझोला में मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि संचालक के द्वारा आम लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ एवँ धोखाधड़ी की जा रही है।” उन्होंने बताया कि अस्पताल न तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में पंजीकृत है और न ही उन्होंने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी के कार्यालय में पंजीकरण से संबंधित कोई रिकॉर्ड जमा किया है। स्वास्थ्य सेवा सुविधा में कोई पेशेवर डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। अस्पताल में आग से सुरक्षा या बायोमेडिकल कचरे के निपटान की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।

मुहर्रम की जुलूस में शरबत पीने से 400 बीमार, होने लगा उल्टी-दस्त: भीड़ ने डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर ORS पीया, महिलाएँ और बच्चे भी शामिल

राजस्थान के बांसवाड़ा में मंगलवार (17 जुलार्ई 2024) को रात्रि में मुहर्रम की जुलूस के दौरान शरबत पीने से करीब 400 लोग उल्टी दस्त के शिकार हो गए। सबसे पहले महात्मा गाँधी अस्पताल में 3 बच्चे एडमिट हुए। इसके बाद रात फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए एक के बाद एक करके विभिन्न अस्पतालों में भर्ती होते गए। कुछ लोगों ने डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर खुद उपचार करना शुरू कर दिया।

वहीं, घटनास्थल से करीब 250 मीटर की दूरी पर स्थित सिटी डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर लोगों ने रात में ओआरएस निकालकर पीना शुरू कर दिया। हालाँकि, कुछ देर में डॉक्टरों की एक टीम पहुँची और 105 लोगों का उपचार किया। सीएमएचओ डॉक्टर हीरालाल ने बताया कि महात्मा गाँधी अस्पताल में अभी तक करीब 400 लोग उपचार के लिए पहुँचे थे। इनमें से करीब 100 लोग अभी भी भर्ती हैं।

जानकारी मुताबिक, ताजिया जुलूस में शामिल लोगों को पीने के लिए शरबत दिया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इस शरबत को पीने के बाद ही लोग बीमार पड़े हैं। उल्टी-दस्त के कारण परेशान लोगों में बड़ी संख्या में बच्चे एवं बुजुर्ग भी शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन मौैके पर पहुँची और डॉक्टरों को बुलाया। फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है।

सीएमएचओ ने बताया कि संभव हुआ तो सैंपल की जाँच करवाए जाएँगे। वहीं, अंजुमन इस्लामिया के सदर शोएब खान ने बताया कि यह घटना 12:00 बजे के आसपास की है। दरअसल धार्मिक जुलूस के दौरान समाज के लोगों ने छबील लगाया था। इसका शरबत पीने से बच्चे, औरतें व बुजुर्ग सभी बीमार पड़ गए। सभी को महात्मा गाँधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

‘228 किलो सोना चोरी होने का सबूत दें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, या जाएँ कोर्ट’: मंदिर समिति की दो टूक, पूछा – कॉन्ग्रेस के एजेंडे को बढ़ा रहे हैं आगे?

उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लगातार विवादों में हैं। मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी में उन्हें देखा गया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे आशीर्वाद भी लिया। वहीं उसके बाद उन्होंने भाजपा पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ विश्वासघात का आरोप मढ़ दिया। साथ ही केदारनाथ मंदिर से 228 किलोग्राम सोना चोरी होने का आरोप भी लगा दिया। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर भी उन्होंने विवादित बयानबाजी की थी।

अब बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने उन पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण बयान बताते हुए कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने आरोप के समर्थन में सबूत पेश करें। वहीं दिल्ली में किसी ‘केदारनाथ धाम ट्रस्ट’ द्वारा बुरारी में मंदिर बनाने के संबंध में उन्होंने कहा कि इसका उत्तराखंड सरकार से कोई संबंध नहीं है, न ही राज्य सरकार ने इसमें पैसा लगाया है। हालाँकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसमें बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए थे।

अजेंद्र अजय ने कहा कि सीएम धामी से साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने अनुरोध किया था, ऐसे में वो धार्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि ऐसी भी शिकायतें आई हैं कि केदारनाथ-बद्रीनाथ के नाम पर ट्रस्ट-संगठन बना कर धर्मशाला-अस्पताल-मंदिर के निर्माण के नाम पर दान माँगा जा रहा है, वहीं एप बना के केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में पूजा कराने के लिए ऑनलाइन पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन मामलों का विधिक परीक्षण कराया जा रहा है।

उन्होंने ये भी बताया कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केदारनाथ-बद्रीनाथ की तस्वीरें लगाए जाने के संबंध में भी जाँच करा कर कार्यवाही की जाएगी। वहीं सोना चोरी होने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सम्मान करते हैं, लेकिन वो दिन भर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि विवाद पैदा करना, सनसनी फैलाना और खबरों में बने रहने की उनकी आदत हो गई है। उन्होंने चुनौती दी कि अविमुक्तेश्वरानंद सबूत और तथ्य पेश करें।

अजेंद्र अजय ने कहा कि बयानबाजी की बजाए अविमुक्तेश्वरानंद को सक्षम पदाधिकारी से संपर्क कर जाँच की माँग करनी चाहिए, या फिर सुप्रीम कोर्ट अथवा हाईकोर्ट में जाना चाहिए। केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जनहित याचिका दायर कर जाँच की माँग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम की गरिमा को ठेस पहुँचाने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर वो केवल विरोध करने, विवाद पैदा करने या कॉन्ग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के ‘लोकल कोटा’ पर उठे सवाल, उद्योगपति बोले- प्राइवेट सेक्टर में कन्नड़ भाषियों को रिजर्वेशन भेदभावपूर्ण, बिल रद्द करें

कर्नाटक में निजी नौकरियों में कन्नड़ भाषाई लोगों को 50-75% आरक्षण देने का निर्णय कारोबारी समुदाय को रास नहीं आया है। इस संबंध में बिल कैबिनेट से पास होने के बाद कई कारोबारियों ने अपनी राय इस संबंध में रखी है। उन्होंने इसकी आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया है। कारोबारियों ने कहा है कि इसमें कुछ छूट दी जानी चाहिए।

कर्नाटक सरकार के निर्णय पर कन्नड़ उद्योगपति और मनिपाल ग्लोबल सर्विसेस के चेयरमैन TV मोहनदास पाई ने एक्स पर लिखा, ”इस बिल को रद्द कर देना चाहिए। यह भेदभावपूर्ण, रूढ़िवादी और संविधान के विरुद्ध है। क्या सरकार को यह प्रमाणित करना है कि हम कौन हैं? यह एनिमल फार्म जैसा एक फासीवादी बिल है, अविश्वसनीय बात है कि कॉन्ग्रेस इस तरह का बिल ला सकती है। क्या अब एक सरकारी अधिकारी निजी क्षेत्र के इंटरव्यू में बैठेगा? क्या लोगों को भाषा की परीक्षा देनी पड़ेगी?”

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह बिल अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है। कर्नाटक सरकार का यह कदम अनुच्छेद 19 के विरुद्ध है। इससे पहले हरियाणा सरकार ने यही करने की कोशिश की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी। अगर आपको लोगों को नौकरी देनी है तो उन्हें कौशल का प्रशिक्षण दें। उनको इंटर्नशिप करवाएँ।”

TV मोहनदास पाई के अलावा दवाइयों के लिए कच्चा माल उपलब्ध करवाने वाली देश की सबसे बड़ी कम्पनी बायोकॉन लिमिटेड की मुखिया किरण मजुमदार शॉ ने भी इस बिल को लेकर अपनी चिंताएँ प्रकट कीं। उन्होंने लिखा, “टेक हब के रूप में हमें स्किल्ड लोगों की आवश्यकता है। भले ही हमारा उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार देना हो, हमें इस कदम से टेक्नोलॉजी में अपनी अच्छी स्थिति को प्रभावित नहीं करना चाहिए। ऐसी कुछ नीतियाँ होनी चाहिए जो विशेष भर्तियों में इस नीति से छूट दें।”

बाइक टैक्सी कम्पनी युलू के को फाउंडर और कर्नाटक ASSOCHAM के सह चेयरमैन RK मिश्रा ने इसे अदूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने लिखा, “कर्नाटक सरकार का एक और विचित्र कदम। स्थानीय लोगों के आरक्षण को जरूरी कर दिया और हर कम्पनी में एक सरकारी आदमी बिठाना। इससे भारतीय IT कम्पनियाँ और जीसीसी डरेंगे। अदूरदर्शी।”

गौरतलब है कि मंगलवार (15 जुलाई, 2024) को बेंगलुरु में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई है। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए।

बिल के अनुसार कर्नाटक में जन्मा या कर्नाटक में पिछले 15 वर्षों से रह रहा कोई भी व्यक्ति कन्नड़ माना जाएगा और इसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। कन्नड़ आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को 12वीं पास होना चाहिए और इस दौरान उसके पास कन्नड़ एक विषय के तौर पर होनी जरूरी है। यदि उसके पास यह नहीं है तो उसे कन्नड़ सीखनी होगी।

लोको पायलट की गलती से मालगाड़ी से नहीं टकराई थी कंचनजंगा एक्सप्रेस, जाँच रिपोर्ट में बताया- ट्रेन रोकने की पूरी कोशिश की थी: पत्नी बोलीं- अब उनकी आत्मा को शांति मिलेगी

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस के बीच हुई टक्कर के मामले में जाँच पूरी होने के बाद कुछ नए तथ्य निकलकर सामने आए हैं। पहले जहाँ पूरे हादसे के लिए लोको पायलट को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था तो वहीं अब इस मामले की जाँच के बाद निकलकर आया है कि हादसे में कंचनजंगा एक्सप्रेस का लोको पायलट जिम्मेदार नहीं था।

बता दें कि 17 जून को सिलिगुड़ी में दो ट्रेनों के बीच टक्कर मामले में 10 लोगों की मौत हुई थी जबकि 43 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद तुरंत मान लिया गया था कि ये हादसा लोको पायलट की गलती के कारण हुआ। इस आरोप को सुन लोको पायलट के परिवार वालों को भी धक्का लगा था। हालाँकि अब रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त (CCRS) ने इस मामले में जाँच की और पाया कि कंचनजंगा ट्रेन के लोको पायलट अनिल कुमार घटना के लिए जिम्मेदार नहीं थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, “ऑटो सिग्नल क्षेत्रों में ट्रेन परिचालन प्रबंधन में कई लेवल पर खामियों, लोको पायलट और स्टेशन मास्टर को उचित परामर्श न दिए जाने से कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसा होना तय ही था।” रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के दिन वहाँ से गुजरने वाले अधिकतर लोको पायलट्स को इसकी जानकारी ही नहीं थी कि खराब सिग्नल हो तो ट्रेन 15 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलानी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, CCRS की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि मालगाड़ी के लोको पायलट को कंचनजंगा एक्सप्रेस की मौजूदगी के बावजूद उस सेक्शन पर जाने की अनुमति दी गई थी। उन्हें बिना किसी सावधानी आदेश के सभी खराब सिग्नल को पार करने का गलत मेमो दिया गया था। जाँच में पाया गया कि मालगाड़ी 78 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल कर रही थी, तभी लोको पायलट ने कंचनजंगा एक्सप्रेस के पिछले हिस्से को देखा और आपातकालीन ब्रेक लगाया।

लोको पायलट ने कोशिश पूरी की कि किसी तरह ट्रेन रुक जाए मगर इतने कम समय में ये संभव नहीं हुआ। ट्रेन कंचनजंगा से टकराने से पहले केवल 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक ही धीमी हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिल ने 5 मिनट में 10 बार थ्रॉटल को एडजस्ट किया था, जो उनकी सतर्कता को दर्शाता है।

अब इस जाँच के बाद रेलवे अधिकारियों ने ये भी बताया है कि अनिल कुमार के परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। एनएफआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पेंशन आदेश भी जारी कर दिया गया है और ग्रेच्युटी का भुगतान जल्द ही कर दिया जाएगा। इसके अलावा चूँकि उनके बेटे अभी नाबालिग हैं, इसलिए उनमें से एक को वयस्क होने पर रेलवे में नौकरी की पेशकश की जाएगी।

परिजनों ने ली राहत की सांस

बता दें कि सीसीआरएस की रिपोर्ट आने के बाद अनिल कुमार की पत्नी ने राहत की सांस ली है। उन्होंने अनिल के इस मामले में दोषमुक्त होने पर कहा ट्रेन हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर उनके पति को दोषी ठहरा दिया गया था। वो लोग इस आरोप को सुनकर सदमे में आ गए थे। हालाँकि अब परिवार को संतुष्टि है कि रेलवे ने उचित जाँच की और अनिल कुमार को निर्दोष पाया। पत्नी ने कहा, “अब उनकी आत्मा को शांति मिलेगी”। अनिल कुमार के केवल परिजन ही नहीं बल्कि आस पड़ोस के लोग भी मानते हैं कि इस मामले में कुमार की गलती नहीं हो सकती क्योंकि उनका करियर हमेशा बेदाग रहा है। वे अपनी इमानदारी के लिए जाने जाते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अनिल कुमार की पड़ोसी काजल दास ने कहा कि एक मृत व्यक्ति को दुर्घटना के लिए दोषी ठहराना गलत है जबकि वो व्यक्ति अपना बचाव करने के लिए मौजूद भी नहीं था।