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मुहर्रम की जुलूस में शरबत पीने से 400 बीमार, होने लगा उल्टी-दस्त: भीड़ ने डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर ORS पीया, महिलाएँ और बच्चे भी शामिल

राजस्थान के बांसवाड़ा में मंगलवार (17 जुलार्ई 2024) को रात्रि में मुहर्रम की जुलूस के दौरान शरबत पीने से करीब 400 लोग उल्टी दस्त के शिकार हो गए। सबसे पहले महात्मा गाँधी अस्पताल में 3 बच्चे एडमिट हुए। इसके बाद रात फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए एक के बाद एक करके विभिन्न अस्पतालों में भर्ती होते गए। कुछ लोगों ने डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर खुद उपचार करना शुरू कर दिया।

वहीं, घटनास्थल से करीब 250 मीटर की दूरी पर स्थित सिटी डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर लोगों ने रात में ओआरएस निकालकर पीना शुरू कर दिया। हालाँकि, कुछ देर में डॉक्टरों की एक टीम पहुँची और 105 लोगों का उपचार किया। सीएमएचओ डॉक्टर हीरालाल ने बताया कि महात्मा गाँधी अस्पताल में अभी तक करीब 400 लोग उपचार के लिए पहुँचे थे। इनमें से करीब 100 लोग अभी भी भर्ती हैं।

जानकारी मुताबिक, ताजिया जुलूस में शामिल लोगों को पीने के लिए शरबत दिया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इस शरबत को पीने के बाद ही लोग बीमार पड़े हैं। उल्टी-दस्त के कारण परेशान लोगों में बड़ी संख्या में बच्चे एवं बुजुर्ग भी शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन मौैके पर पहुँची और डॉक्टरों को बुलाया। फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है।

सीएमएचओ ने बताया कि संभव हुआ तो सैंपल की जाँच करवाए जाएँगे। वहीं, अंजुमन इस्लामिया के सदर शोएब खान ने बताया कि यह घटना 12:00 बजे के आसपास की है। दरअसल धार्मिक जुलूस के दौरान समाज के लोगों ने छबील लगाया था। इसका शरबत पीने से बच्चे, औरतें व बुजुर्ग सभी बीमार पड़ गए। सभी को महात्मा गाँधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

‘228 किलो सोना चोरी होने का सबूत दें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, या जाएँ कोर्ट’: मंदिर समिति की दो टूक, पूछा – कॉन्ग्रेस के एजेंडे को बढ़ा रहे हैं आगे?

उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लगातार विवादों में हैं। मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी में उन्हें देखा गया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे आशीर्वाद भी लिया। वहीं उसके बाद उन्होंने भाजपा पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ विश्वासघात का आरोप मढ़ दिया। साथ ही केदारनाथ मंदिर से 228 किलोग्राम सोना चोरी होने का आरोप भी लगा दिया। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर भी उन्होंने विवादित बयानबाजी की थी।

अब बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने उन पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण बयान बताते हुए कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने आरोप के समर्थन में सबूत पेश करें। वहीं दिल्ली में किसी ‘केदारनाथ धाम ट्रस्ट’ द्वारा बुरारी में मंदिर बनाने के संबंध में उन्होंने कहा कि इसका उत्तराखंड सरकार से कोई संबंध नहीं है, न ही राज्य सरकार ने इसमें पैसा लगाया है। हालाँकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसमें बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए थे।

अजेंद्र अजय ने कहा कि सीएम धामी से साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने अनुरोध किया था, ऐसे में वो धार्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि ऐसी भी शिकायतें आई हैं कि केदारनाथ-बद्रीनाथ के नाम पर ट्रस्ट-संगठन बना कर धर्मशाला-अस्पताल-मंदिर के निर्माण के नाम पर दान माँगा जा रहा है, वहीं एप बना के केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में पूजा कराने के लिए ऑनलाइन पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन मामलों का विधिक परीक्षण कराया जा रहा है।

उन्होंने ये भी बताया कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केदारनाथ-बद्रीनाथ की तस्वीरें लगाए जाने के संबंध में भी जाँच करा कर कार्यवाही की जाएगी। वहीं सोना चोरी होने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सम्मान करते हैं, लेकिन वो दिन भर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि विवाद पैदा करना, सनसनी फैलाना और खबरों में बने रहने की उनकी आदत हो गई है। उन्होंने चुनौती दी कि अविमुक्तेश्वरानंद सबूत और तथ्य पेश करें।

अजेंद्र अजय ने कहा कि बयानबाजी की बजाए अविमुक्तेश्वरानंद को सक्षम पदाधिकारी से संपर्क कर जाँच की माँग करनी चाहिए, या फिर सुप्रीम कोर्ट अथवा हाईकोर्ट में जाना चाहिए। केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जनहित याचिका दायर कर जाँच की माँग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम की गरिमा को ठेस पहुँचाने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर वो केवल विरोध करने, विवाद पैदा करने या कॉन्ग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के ‘लोकल कोटा’ पर उठे सवाल, उद्योगपति बोले- प्राइवेट सेक्टर में कन्नड़ भाषियों को रिजर्वेशन भेदभावपूर्ण, बिल रद्द करें

कर्नाटक में निजी नौकरियों में कन्नड़ भाषाई लोगों को 50-75% आरक्षण देने का निर्णय कारोबारी समुदाय को रास नहीं आया है। इस संबंध में बिल कैबिनेट से पास होने के बाद कई कारोबारियों ने अपनी राय इस संबंध में रखी है। उन्होंने इसकी आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया है। कारोबारियों ने कहा है कि इसमें कुछ छूट दी जानी चाहिए।

कर्नाटक सरकार के निर्णय पर कन्नड़ उद्योगपति और मनिपाल ग्लोबल सर्विसेस के चेयरमैन TV मोहनदास पाई ने एक्स पर लिखा, ”इस बिल को रद्द कर देना चाहिए। यह भेदभावपूर्ण, रूढ़िवादी और संविधान के विरुद्ध है। क्या सरकार को यह प्रमाणित करना है कि हम कौन हैं? यह एनिमल फार्म जैसा एक फासीवादी बिल है, अविश्वसनीय बात है कि कॉन्ग्रेस इस तरह का बिल ला सकती है। क्या अब एक सरकारी अधिकारी निजी क्षेत्र के इंटरव्यू में बैठेगा? क्या लोगों को भाषा की परीक्षा देनी पड़ेगी?”

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह बिल अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है। कर्नाटक सरकार का यह कदम अनुच्छेद 19 के विरुद्ध है। इससे पहले हरियाणा सरकार ने यही करने की कोशिश की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी। अगर आपको लोगों को नौकरी देनी है तो उन्हें कौशल का प्रशिक्षण दें। उनको इंटर्नशिप करवाएँ।”

TV मोहनदास पाई के अलावा दवाइयों के लिए कच्चा माल उपलब्ध करवाने वाली देश की सबसे बड़ी कम्पनी बायोकॉन लिमिटेड की मुखिया किरण मजुमदार शॉ ने भी इस बिल को लेकर अपनी चिंताएँ प्रकट कीं। उन्होंने लिखा, “टेक हब के रूप में हमें स्किल्ड लोगों की आवश्यकता है। भले ही हमारा उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार देना हो, हमें इस कदम से टेक्नोलॉजी में अपनी अच्छी स्थिति को प्रभावित नहीं करना चाहिए। ऐसी कुछ नीतियाँ होनी चाहिए जो विशेष भर्तियों में इस नीति से छूट दें।”

बाइक टैक्सी कम्पनी युलू के को फाउंडर और कर्नाटक ASSOCHAM के सह चेयरमैन RK मिश्रा ने इसे अदूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने लिखा, “कर्नाटक सरकार का एक और विचित्र कदम। स्थानीय लोगों के आरक्षण को जरूरी कर दिया और हर कम्पनी में एक सरकारी आदमी बिठाना। इससे भारतीय IT कम्पनियाँ और जीसीसी डरेंगे। अदूरदर्शी।”

गौरतलब है कि मंगलवार (15 जुलाई, 2024) को बेंगलुरु में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई है। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए।

बिल के अनुसार कर्नाटक में जन्मा या कर्नाटक में पिछले 15 वर्षों से रह रहा कोई भी व्यक्ति कन्नड़ माना जाएगा और इसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। कन्नड़ आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को 12वीं पास होना चाहिए और इस दौरान उसके पास कन्नड़ एक विषय के तौर पर होनी जरूरी है। यदि उसके पास यह नहीं है तो उसे कन्नड़ सीखनी होगी।

लोको पायलट की गलती से मालगाड़ी से नहीं टकराई थी कंचनजंगा एक्सप्रेस, जाँच रिपोर्ट में बताया- ट्रेन रोकने की पूरी कोशिश की थी: पत्नी बोलीं- अब उनकी आत्मा को शांति मिलेगी

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस के बीच हुई टक्कर के मामले में जाँच पूरी होने के बाद कुछ नए तथ्य निकलकर सामने आए हैं। पहले जहाँ पूरे हादसे के लिए लोको पायलट को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था तो वहीं अब इस मामले की जाँच के बाद निकलकर आया है कि हादसे में कंचनजंगा एक्सप्रेस का लोको पायलट जिम्मेदार नहीं था।

बता दें कि 17 जून को सिलिगुड़ी में दो ट्रेनों के बीच टक्कर मामले में 10 लोगों की मौत हुई थी जबकि 43 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद तुरंत मान लिया गया था कि ये हादसा लोको पायलट की गलती के कारण हुआ। इस आरोप को सुन लोको पायलट के परिवार वालों को भी धक्का लगा था। हालाँकि अब रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त (CCRS) ने इस मामले में जाँच की और पाया कि कंचनजंगा ट्रेन के लोको पायलट अनिल कुमार घटना के लिए जिम्मेदार नहीं थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, “ऑटो सिग्नल क्षेत्रों में ट्रेन परिचालन प्रबंधन में कई लेवल पर खामियों, लोको पायलट और स्टेशन मास्टर को उचित परामर्श न दिए जाने से कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसा होना तय ही था।” रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के दिन वहाँ से गुजरने वाले अधिकतर लोको पायलट्स को इसकी जानकारी ही नहीं थी कि खराब सिग्नल हो तो ट्रेन 15 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलानी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, CCRS की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि मालगाड़ी के लोको पायलट को कंचनजंगा एक्सप्रेस की मौजूदगी के बावजूद उस सेक्शन पर जाने की अनुमति दी गई थी। उन्हें बिना किसी सावधानी आदेश के सभी खराब सिग्नल को पार करने का गलत मेमो दिया गया था। जाँच में पाया गया कि मालगाड़ी 78 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल कर रही थी, तभी लोको पायलट ने कंचनजंगा एक्सप्रेस के पिछले हिस्से को देखा और आपातकालीन ब्रेक लगाया।

लोको पायलट ने कोशिश पूरी की कि किसी तरह ट्रेन रुक जाए मगर इतने कम समय में ये संभव नहीं हुआ। ट्रेन कंचनजंगा से टकराने से पहले केवल 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक ही धीमी हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिल ने 5 मिनट में 10 बार थ्रॉटल को एडजस्ट किया था, जो उनकी सतर्कता को दर्शाता है।

अब इस जाँच के बाद रेलवे अधिकारियों ने ये भी बताया है कि अनिल कुमार के परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। एनएफआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पेंशन आदेश भी जारी कर दिया गया है और ग्रेच्युटी का भुगतान जल्द ही कर दिया जाएगा। इसके अलावा चूँकि उनके बेटे अभी नाबालिग हैं, इसलिए उनमें से एक को वयस्क होने पर रेलवे में नौकरी की पेशकश की जाएगी।

परिजनों ने ली राहत की सांस

बता दें कि सीसीआरएस की रिपोर्ट आने के बाद अनिल कुमार की पत्नी ने राहत की सांस ली है। उन्होंने अनिल के इस मामले में दोषमुक्त होने पर कहा ट्रेन हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर उनके पति को दोषी ठहरा दिया गया था। वो लोग इस आरोप को सुनकर सदमे में आ गए थे। हालाँकि अब परिवार को संतुष्टि है कि रेलवे ने उचित जाँच की और अनिल कुमार को निर्दोष पाया। पत्नी ने कहा, “अब उनकी आत्मा को शांति मिलेगी”। अनिल कुमार के केवल परिजन ही नहीं बल्कि आस पड़ोस के लोग भी मानते हैं कि इस मामले में कुमार की गलती नहीं हो सकती क्योंकि उनका करियर हमेशा बेदाग रहा है। वे अपनी इमानदारी के लिए जाने जाते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अनिल कुमार की पड़ोसी काजल दास ने कहा कि एक मृत व्यक्ति को दुर्घटना के लिए दोषी ठहराना गलत है जबकि वो व्यक्ति अपना बचाव करने के लिए मौजूद भी नहीं था।

मुझे नहीं देखना किसी का वक्ष-नितंब… 20 मिनट में ही नंगों की महफिल से भागीं बॉलीवुड की हिरोइन, कहा- मैं बहुत देशी हूँ: जानिए क्या होता है ‘बॉडी पॉजिटिविटी’ पार्टी

90 के दशक में बॉलीवुड में नजर आने वाली एक्ट्रेस सुचित्रा कृष्णामूर्ति ने हाल में न्यूड पार्टी में शामिल होने की बात अपने एक्स अकॉउंट पर स्वीकार की। सुचित्रा ने बताया कि वो बर्लिन में न्यूड पार्टी का हिस्सा बनीं और वहाँ जाकर उन्हें इतना अजीब लगा कि उन्होंने 20 मिनट में ही उस जगह को छोड़ दिया और घर आकर मन शांत करने के लिए गायत्री मंत्र सुना।

सुचित्रा ने इस घटना के बारे में 14 जुलाई को ट्वीट किया था। अपने ट्वीट में उन्होंने बताया था- “मैंने अभी अभी बर्लिन में एक बॉडी पॉजिटिविटी/नेकेड पार्टी अटेंड की। मुझे वो कहावत याद आ गई- इतने भी खुले दिमाग के मत बनो कि दिमाग ही बाहर गिर जाए। मैं हमेशा देसी गर्ल रहूँगी। नहाने की जरूरत महसूस हो रही है और थोड़ा सा गायत्री मंत्र का जाप करना जरूरी लग रहा है। बाप रे।”

उनके ट्वीट के बाद जब बॉलीवुड हंगामा ने उनसे इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि वहाँ (बर्लिन) ऐसी चीजें बहुत कॉमन हैं। उनका मकसद बॉडी पॉजिटिविटी को प्रमोट करना और शरीर को लेकर होने वाली चिंताओं को दूर करना है। सुचित्रा आगे कहती हैं- “मैंने इसीलिए सोचा चलो ठीक है एक्सपीरियंस कर लेते हैं। पार्टी बार में हो रही थी जो कि एक दोस्त के दोस्त का था। मुझे गेस्ट लिस्ट में रखा गया खा। मैं चली गई तो गई लेकिन वहाँ से फिर तुरंत भागीं। क्योंकि मैं बहुत देसी लड़की हूँ। मुझे किसी के बूब्स और बटक नहीं देखने हैं।”

सुचित्रा ने अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि बर्लिन में जो उन्होंने देखा वो सब अच्छी मंशा से था। उसे मजे और पॉजिटिव चीजों के लिए आयोजित किया गया था। वो सब वल्गर भी नहीं था, लेकिन भारतीय होने के नाते हम अपने शरीर को लेकर सचेत रहते हुए बड़े हुए हैं। जैसे हर चीज संभालो और छुपाओ। सुचित्रा ने बताया कि उन्हें मजा तो बहुत आया लेकिन वे देसी गर्ल हैं इसलिए वे वहाँ 20 मिनट ही रुकीं और फिर वापस आ गईं।

बॉडी पॉजिटिविटी का अर्थ

बता दें कि बॉडी पॉजिटिविटी पार्टियों का कॉन्सेप्ट यही होता है कि लोग अपने शरीर और दूसरों के शरीर को उनकी शक्ल-सूरत और आकार को बिन परवाह किए स्वीकार करें। फोर्ब्स में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, यह एक ऐसा आंदोलन है जो आकार, रूप, त्वचा के रंग, लिंह और शारीरिक क्षमताओं की परवाह किए बिना सभी तरह के शरीरों को स्वीकृति देने का बढ़ावा देता है। कुछ लोग इस तरह के आंदोलन को यह भी कहते हैं कि यह मूवमेंट सिर्फ मोटापे जैसी चीजों को बढ़ावा देने के लिए है। हालाँकि इसका समर्थन करने वाले मानते हैं कि वो नग्न होकर जब एक दूसरे के सामने आते हैं जो इससे सामने वाला मानव शरीर के प्रति सहज हो पाता है।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में भी लागू किया कोटा, कन्नड़ भाषियों को नौकरियों में 50-75% रिजर्वेशन: हरियाणा के ऐसे ही फॉर्मूले को हाई कोर्ट ने बताया था ‘असंवैधानिक’

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य में निजी संस्थानों में कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षण लागू करने का फैसला लिया है। सिद्दारमैया कैबिनेट ने इस संबंध में एक बिल पर मुहर लगाई है। इस बिल में कहा है गया है कि राज्य की गैर प्रबंधकीय नौकरियों में 75% और प्रबंधकीय नौकरियों में 50% आरक्षण कन्नड़ भाषाई लोगों को दिया जाएगा।

मंगलवार (15 जुलाई, 2024) को बेंगलुरु में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए।

बिल के अनुसार कर्नाटक में जन्मा या कर्नाटक में पिछले 15 वर्षों से रह रहा कोई भी व्यक्ति कन्नड़ माना जाएगा और इसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। कन्नड़ आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को 12वीं पास होना चाहिए और इस दौरान उसके पास कन्नड़ एक विषय के तौर पर होनी जरूरी है। यदि उसके पास यह नहीं है तो उसे कन्नड़ सीखनी होगी।

बिल में यह भी कहा गया है कि यदि कम्पनियों को अपनी नौकरियों के लिए गैर कन्नड़ लोगों की भर्ती करना आवश्यक हो जाता है और कन्नड़ भाषाई उपलब्ध नहीं है, तो उन्हने छूट दी जा सकती है। इसके लिए कम्पनियों को आवेदन देना होगा और इस पर सरकार का निर्णय अंतिम होगा।

बिल में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी स्थिति में किसी भी दफ्तर, कम्पनी या फैक्ट्री में ऊँचे पदों पर काम करने वाले कन्नड़ 25% से कम नहीं होने चाहिए। इसके अलावा इनकी संख्या निचली नौकरियों में 50% रहनी ही चाहिए। ऐसा ना करने पर कम्पनियों को ₹25,000 तक का जुर्माना झेलना पड़ेगा। इस बिल को कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विधानसभा के चालू सत्र में पेश किया जाएगा।

100% आरक्षण का ट्वीट किया, फिर हटाया

जहाँ बिल में अधिकतम 75% आरक्षण की बात की गई है, वहीं राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक ट्वीट में C और D ग्रुप की नौकरियों में 100% आरक्षण की बात कही। उन्होंने लिखा, एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कल कैबिनेट की बैठक में राज्य के सभी निजी उद्योगों में “C और D” ग्रेड पदों पर 100% कन्नड़ लोगों को नियुक्त करना जरूरी बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी गई।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह हमारी सरकार की इच्छा है कि कन्नड़ लोगों को उनकी मातृभूमि में आरामदायक जीवन जीने का अवसर दिया जाए और कन्नड़ भूमि में नौकरियों से बाहर होने से बचाया जाए। हम कन्नड़ समर्थक सरकार हैं। हमारी प्राथमिकता कन्नडिगाओं के कल्याण की देखभाल करना है।” यह ट्वीट बाद में डिलीट कर दिया गया।

हरियाणा ने भी उठाया था कदम, हाई कोर्ट ने कर दिया था रद्द

कर्नाटक ऐसा पहला राज्य नहीं है जिसने स्थानीय लोगों को निजी नौकरियों में आरक्षण देने का निर्णय लिया हो। इससे पहले जनवरी, 2022 में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने राज्य के भीतर निजी नौकरियों में 75% पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया था। इस संबंध में हरियाणा ने कानून भी बनाया था। इस कानून को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नवम्बर, 2023 में असंवैधानिक करार दे दिया था और इसे रद्द कर दिया था।

हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हरियाणा ने कहा था कि बिल को रद्द करने के लिए जो कारण बताए गए हैं, वह सही नहीं हैं। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2024 में केंद्र से भी जवाब माँगा था। अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ही लंबित है।

100 लोगों से पूछताछ, 50 गवाह… स्वाति मालीवाल से बदसलूकी पर 500 पन्नों की चार्जशीट, दिल्ली पुलिस ने बताया- बिभव कुमार पर केस चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट के मामले के दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में आरोपित बिभव कुमार के खिलाफ 500 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। अभी तक आई जानकारी के अनुसार, 100 लोगों से पूछताछ के बाद इस चार्जशीट में 50 लोगों के बयान जोड़े गए हैं जिन्हें गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

गवाहों की लिस्ट में घटना के दौरान मुख्यमंत्री आवास में मौजूद दिल्ली पुलिस के सुरक्षा यूनिट के पुलिसकर्मियों, जाँच से जुड़े पुलिसकर्मी, मालीवाल की मेडिकल जाँच करने वाले एम्स के डाक्टरों व अन्य शामिल हैं। आरोप पत्र में पुलिस ने दावा किया है कि कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। बिभव के ऊपर सबूतों से छेड़छाड़, फोन फॉर्मेट करने, पासवर्ड छिपाने, सीसीटीवी फुटेज मिटाने आदि का आरोप लगा है।

जानकारी के मुताबिक ये चार्जशीट मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल की अदालत में दाखिल की गई, जिन्होंने बिभव कुमार की न्यायिक हिरासत को 30 जुलाई तक बढ़ाया था। बिभव कुमार इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि 30 जुलाई को बिभव को फिजिकली वहाँ प्रेसेंट होना होगा।

सुनवाई के दौरान अदालत को अभियोजन पक्ष ने बताया कि पुलिस ने आरोपित के खिलाफ चार्जशीट में आईपीसी की धारा 201 (अपराध के साक्ष्य को गायब करना), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 341 (गलत तरीके से रोकना), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354 बी (महिला का वस्त्र हरण करने के इरादे से उसके खिलाफ बल प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (किसी भी शब्द, हाव-भाव या वस्तु का उपयोग करके महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना) को जोड़ा है।

स्वाति मालीवाल मारपीट केस

उल्लेखनीय है कि 13 मई को सीएम आवास पर स्वाति मालीवाल से बदसलूकी करने का आरोप बिभव कुमार पर लगा था। स्वाति ने सामने आकर बताया था कि बिभव ने उन्हें छाती, पेट और कमर पर मारा था। इसके बाद बिभव को 18 मई को गिरफ्तार किया गया था और पूरे मामले में जाँच हुई थी। इस बीच बिभव ने कई बार बेल की गुहार लगाई। हालाँकि कोर्ट ने सबूतों को मिटाने और गवाहों को प्रभावित करने वाले बिंदु पर गौर करते हुए बेल खारिज कर दी। पहली याचिका ट्रायल कोर्ट में 27 मई को खारिज हुई। फिर 7 जून को और आखिरी वाली 12 जुलाई को।

‘गाड़ न दिया तो अपने बाप की बेटी नहीं’: कॉन्ग्रेस की जिस महिला नेता के लिए अलका लांबा ने कहा ‘जूते मार बाहर करो’ उसने दी चुनौती, कहा- यह ब्राह्मणों का अपमान

मध्य प्रदेश में महिला कॉन्ग्रेस की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हंगामा हो गया। यह बैठक महिला कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ले रहीं थी। इस बैठक में प्रदेश की महामंत्री मधु शर्मा को अलका लांबा ने जूते मारकर बाहर निकालने की बात की। इसके बाद मधु शर्मा बैठक से बाहर चली आईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बैठक भोपाल में मंगलवार (16 जुलाई, 2024) को हो रही थी। इसमें महिला कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों को बुलाया गया था। बैठक में 50 से अधिक पदाधिकारियों को शामिल होना था लेकिन यहाँ मात्र 19 पदाधिकारी ही पहुँचे थे।

बैठक में सिंगरौली की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री मधु शर्मा भी मौजूद थीं। उन्होंने यहाँ बैठक के लिए बनाई गई सूची पर आपत्ति जताई। शर्मा ने प्रश्न उठाया कि उनका इस सूची में नाम नहीं है। इस पर अलका लांबा ने उनके साथ बहस चालू कर दी।

अलका लांबा ने मधु शर्मा को तुरंत बैठक से बाहर निकलने को कह दिया। इस पर मधु शर्मा ने उन्हें जवाब दिया कि उनकी नियुक्ति अलका लांबा ने ही की और नियुक्ति पत्र भी दिया है। मधु शर्मा के इस जवाब पर अलका लांबा ने बता दिया कि मध्य प्रदेश में कई नियुक्तियाँ फर्जी हैं।

मधु शर्मा इस पर भड़क गईं और पूछा कि क्या पदाधिकारियों को बैठक में जूते खाने बुलाया गया है। अलका लांबा इसके बाद अभद्रता पर उतर आईं और कहा कि मधु शर्मा जूते खाने लायक हैं और उन्हें जूते मरकर बाहर निकाल दिया जाए। मधु शर्मा ने इस पर उन्हें चुनौती दे डाली कि उन्हें बैठक से कोई नहीं निकाल सकता। मधु शर्मा ने कहा कि अगर अलका लांबा अपने बाप की बेटी हैं तो उन्हें बैठक से निकाल कर दिखाएँ। मधु शर्मा ने कहा कि अगर ऐसा होगा तो अलका लांबा को जमीन में गाड़ देंगी, ऐसा नहीं किया तो अपने बाप की बेटी नहीं।

मधु शर्मा ने इसे ब्राम्हण और विंध्य क्षेत्र का अपमान बताया। मधु शर्मा ने कहा कि वह पिछले 4 दशक से कॉन्ग्रेस में हैं जबकि अलका लांबा कुछ समय पहले ही पार्टी में आई है। उन्होंने कहा कि लांबा पहले AAP में रह चुकी हैं। मधु शर्मा ने कहा कि अलका लांबा अव्यावहारिक महिला हैं। इस मामले में अलका लांबा की तरफ से कोई बयान अभी सामने नहीं आया है।

अंदर थे डोनाल्ड ट्रंप, बाहर AK-47-चाकू लेकर घूम रहे थे लोग: एक को पुलिस ने मार गिराया-दूसरा गिरफ्तार, रिपोर्ट में दावा- पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या करवाना चाहता है ईरान

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर पेंसिलवेनिया में हुए हमले के पहले उनकी हत्या की साजिश के बारे में खुफिया जानकारी सामने आई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि ईरान डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या के लिए हमला करवा सकता है। इस कारण से उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प की हत्या की साजिश की यह सूचना जून महीने में प्राप्त हुई थी। इसके बाद उनके आसपास अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। बताया गया कि यह सूचना एक मानव स्रोत के जरिए आई थी क्योंकि बीते कुछ दिनों में लगातार ईरान में ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा चल रही है।

पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के शासनकाल में इराक के भीतर बड़े ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी पर ड्रोन हमला हुआ था। इसमें सुलेमानी की मौत हो गई थी। यह हमला अमेरिका ने ही किया था। इसके बाद से लगातार ट्रम्प की जान को लेकर ईरान से खतरा है।

व्हाईट हाउस ने इस संबध में कहा है कि वह लगातार ट्रम्प के जीवन पर ईरानी खतरों का जायजा लेते रहते हैं। व्हाईट हाउस ने कहा कि यह खतरे ईरान की सुलेमानी की हत्या का बदला लेने की इच्छा के कारण पैदा होते हैं।

ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और द्वेषपूर्ण बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के एक प्रवक्ता ने इसी के साथ ट्रम्प को एक अपराधी बताया है। ईरान ने इस मामले पर कहा, “ईरान के दृष्टिकोण से, ट्रम्प एक अपराधी हैं, जिन पर जनरल सुलेमानी की हत्या का आदेश देने के लिए मुकदमा चलाया जाना चाहिए उन्हने उसे कानून की अदालत में दंडित किया जाना चाहिए। ईरान ने उन्हें कटघरे में लाने के लिए कानूनी रास्ता चुना है।”

ट्रम्प पर हमला करने वाले हमलावर का अभी कोई ईरान कनेक्शन सामने नहीं आया है। यह खतरा अलग से ही मालूम हुआ है। गौरतलब है कि 13 जुलाई, 2024 को रैली को संबोधित करते समय ट्रम्प पर एक 20 वर्षीय हमलावर ने गोलियाँ बरसा दी थीं। उसको मौके पर ही मार गिराया गया था।

रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन के पास चाकूधारी का एनकाउंटर

वर्तमान में अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन चल रही है। इसमें देश बहर से रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य शामिल हुए हैं। इस कंवेंशन में डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार JD वेंस भी शामिल हो रहे हैं। यह मिल्कॉवे शहर में हो रही है।

इस आयोजनस्थल के पास ही पुलिस ने एक चाकूधारी व्यक्ति को मार गिराया। वह इस कायर्क्रम के पास ही हाथों में दो चाकू लेकर लहरा रहा था। पहले पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास किया और आत्मसमर्पण करने को कहा। हालाँकि, चाकू लिए व्यक्ति ने उनकी बात नहीं सुनी और एक आदमी पर हमला कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने उसे गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। यह एनकाउंटर यहाँ मौजूद ओहायो राज्य की पुलिस ने किया। बताया गया कि मारा गया व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था और सड़कों पर ही घूमा करता था।

इसी कायर्क्रम स्थल के पास पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसके पास से एक AK-47 रायफल और उसकी गोलियाँ बरामद हुईं। बताया गया कि यह व्यक्ति मुंह पर मास्क पहने हुए था और कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूरी पर था। उसके पास सुरक्षाबलों द्वारा उपयोग किए जाने वाला एक बैग भी था।

पुलिस को उसकी हरकतों पर शक हुआ और उसकी तलाशी ली गई। इसके पास AK-47 का कोई वैध परमिट बरामद नहीं हुआ। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जिस DM ने पूजा खेडकर का किया ट्रांसफर, उनके खिलाफ महिला IAS ने उत्पीड़न की शिकायत की: ‘VIP ट्रीटमेंट’ की डिमांड के बाद पुणे से वाशिम भेजी गईं थी

साल 2023 के बैच की आईएस पूजा खेडकर का विवाद लंबा खिंचता जा रहा है। हाल में उनके डॉक्यूमेंट्स पर उठ रहे सवालों के बीच उनकी ट्रेनिंग पर रोक लगाते हुए उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में वापस बुला लिया गया है और उन्हें 23 जुलाई तक रिपोर्ट करने को कहा गया है । इधर पूजा खेडकर ने भी इस मामले में शिकायत करने वाले और उनका ट्रांसफर करने वाले पुणे जिलाधिकारी के खिलाफ प्रताड़ना का केस दर्ज कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूजा खेडकर ने ये शिकायत वाशिम थाने में पुणे जिलाधिकारी सुहास दिवासे के खिलाफ करवाई है। पुणे डीएम सुहास दिवासे ने ही मुख्य सचिव को पत्र लिखखर पूजा खेडकर की अनुचित माँगों के बारे में उन्हें अवगत करवाया था। जिसके बाद पहले पत्र चर्चा में आया और बाद में पूजा खेडकर से जुड़ी बातें खुलीं।

सुहास दिवासे की शिकायत के बाद सोशल मीडिया पर खलबली मच गई। इस दौरान पूजा खेडकर से जुड़ी तमाम जानकारियाँ तो सामने आई हीं, साथ ही उनके माता-पिता की दबंगई का भी पता चला। पहले खबर आई की पूजा खेडकर अपने ट्रेनी पीरियड में रहने के दौरान ही लाल-नीली बत्ती की गाड़ी, वीआईपी नंबर प्लेट और अलग चैंबर माँग रही हैं। बाद में पता चला कि उन्होंने जो अपनी दिव्यांगता का प्रमाण दिया है उसमें भी झोल है। फिर सामने आया कि ओबीसी आरक्षण पाने वाली पूजा खेडकर क्रीमी लेयर में आती हैं क्योंकि उनके माता-पिता दोनों प्रशासननिक अधिकारी रहे हैं। इसके अलावा उनके पिता दिलीप खेडकर द्वारा डॉक्टरों को धमकाने की बात भी सामने आई और माँ मनोरमा खेडकर की किसानों को धमकाने की वीडियो भी। धीरे-धीरे ये बात भी खुली कि पूजा खेडकर ने अपनी नाम, उम्र और अन्य चीजों में झोल किया हुआ था।