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‘रुक जाएगा विकास’: कर्नाटक सरकार के 75% आरक्षण वाले बिल से डरा IT कंपनियों का सबसे बड़ा समूह, CM नायडू के मंत्री बेटे ने कहा – आंध्र में स्वागत है, हम देंगे सारी सुविधाएँ

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार ने मैनेजमेंट से जुड़ी 50% और नॉन-मैनेजमेंट से जुड़ी 75% नौकरियों को स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दिया है। इसके बाद IT कंपनियों के सबसे बड़े समूह ने इस कदम की आलोचना की है। ‘कर्नाटक स्टेट एम्प्लॉयमेंट ऑफ लोकल इंडस्ट्रीज फैक्ट्रीज इस्टैब्लिशमेंट एक्ट बिल, 2024’ का विरोध करते हुए ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एन्ड सर्विस कंपनीज’ (NASSCOM) ने कहा है कि वो फैसले को लेकर हताश एवं चिंतित है। उसने याद दिलाया कि तक कंपनियाँ कर्नाटक की GDP में 25% का योगदान देती हैं।

IT कंपनियों के सबसे बड़े संघ ने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं की कमी होने के कारण कंपंनियों को किसी अन्य राज्य का रुख करने को मजबूर होना पड़ सकता है। NASSCOM ने कहा है कि आज की प्रतियोगी दुनिया में ज्ञान पर आधारित कारोबार वहीं स्थापित होंगे जहाँ प्रतिभाएँ होंगी, क्योंकि दक्ष कर्मचारी सफलता के लिए ज़रूरी हैं। नैसकॉम ने कहा कि दुनिया भर में प्रतिभाओं की कमी है और कर्नाटक कोई अपवाद नहीं है। संस्था ने कहा कि किसी भी राज्य को तकनीक का हब बनने के लिए उसे दुनिया भर की प्रतिभाओं को आकर्षित करना होगा, साथ ही उसे स्थानीय प्रतिभाओं को भी तैयार करना होगा।

संगठन ने याद दिलाया कि बेंगलुरु देश का ‘सिलिकन वैली’ माना जाता है, यहाँ सामाजिक-आर्थिक विकास में इसका खासा योगदान है, इसी कारण यहाँ राष्ट्रीय औसत से अधिक प्रतिव्यक्ति आय है। संगठन ने याद दिलाया कि राज्य में 11,000 स्टार्टअप हैं। NASSCOM ने कहा कि नए बिल से न सिर्फ इंडस्ट्री के विकास को बाधित करेगा, बल्कि बल्कि नौकरियों और राज्य की वैश्विक छवि पर भी दुष्प्रभाव डालेगा। संगठन ने कहा कि इस फैसले से कंपनियाँ बाहर जाएँगी।

उधर आंध्र प्रदेश सरकार ने NASSCOM की चिंताओं को जायज बताते हुए कंपनियों को आमंत्रित किया है। उन्होंने नैस्कॉम के सदस्यों से कहा कि हम आपकी निराशा समझते हैं, हम आपकी IT सेवाओं का विस्तार करने के लिए स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम में AI एन्ड डेटा क्लस्टर सेंटर बनाया जा रहा है। राज्य के IT, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि उनके पिता चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार कंपनियों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएँ, निर्बाध पॉवर सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा दक्ष प्रतिभाएँ भी देंगी।

‘तलाक, तलाक, तलाक… योर एक्स वाइफ’: दुबई की शहजादी शेखा महरा ने शौहर को छोड़ा, इंस्टाग्राम पर ही शरिया की उड़ा दी धज्जियाँ

दुबई की शहजादी शेखा महरा बिंत मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने इस्लामिक कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपने शौहर शेख माना बिन मोहम्मद बिन राशिद बिन माना अल मकतूम को तलाक दे दिया है। इस्लामिक कानूनों के तहत महिला अपने शौहर को तलाक नहीं दे सकती, बल्कि इसके लिए ‘खुला’ की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ये तलाक की तरह ही होता है, लेकिन शहदारी महरा ने सोशल मीडिया पर ही अपने शौहर और शरिया कानून दोनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए ‘तलाक…तलाक…तलाक’ बोल दिया है। शहजादी महरा ने तलाक की घोषणा उस समय में की है, जब उन्होंने महज 2 माह पहले ही बेटी को जन्म दिया है।

शहजादी शेखा महरा बिंत मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की ओर से इंस्‍टाग्राम पर किए गए पोस्‍ट से शौहर के साथ उनकी तल्‍खी का अंदाजा लगाया जा सकता है। शेखा महरा ने पोस्‍ट किया, “डियर हसबैंड…आप किसी और के साथ हैं, ऐसे में मैं आपको तलाक देने की घोषणा करती हूँ। मैं आपको तलाक देती हूँ, मैं आपको तलाक देती हूँ और मैं आपका तलाक देती हूँ। अपना ख्‍याल रखें…आपकी एक्‍स वाइफ।” सोशल मीडिया में शेखा महरा के इस ऐलान से खलबली मच गई। लोगों को पहले लगा कि उनके इंस्‍टग्राम अकाउंट को किसी ने हैक कर लिया है, फिर बाद में हकीकत का पता चला।

शुरुआत में सभी को लगा कि शेखा महरा का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया है, लेकिन बाद में ये साफ हो गया कि उन्होंने अपने शौहर को तलाक दे दिया है और उनकी प्रोफाइल पर पोस्ट उन्हीं के द्वारा किया गया है।

बता दें कि पिछले साल ही मई महीने में इस जोड़े की शादी हुई थी। 12 महीने बाद शेखा महरा ने बेटी को जन्म दिया। इस दौरान शेखा माहरा ने बच्चे को जन्म देने के की खबर साझा की थी। वहीं, कुछ समय पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी बच्ची के साथ पोस्ट किया था और लिखा था ‘सिर्फ हम दोनों।’ तभी से इस बात की चर्चा की जा रही थी कि दोनों के बीच कुछ सही नहीं चल रहा है। हालाँकि शेखा माहरा की तरफ से की गई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, कई लोग राजकुमारी की तारीफ कर रहे हैं।

होटलों, दुकानों और ठेले वालों को मालिक और कर्मचारियों के नामों की लगानी होगी सूची: यूपी में 240 km काँवड़िया मार्ग के लिए जारी हुआ आदेश, ओवैसी उखड़े

हिंदुओं का पवित्र महीना सावन 22 जुलाई 2024 से शुरू होने जा रहा है। इस महीने में हिंदू श्रद्धालु काँवड़ यात्रा करके भगवान भोले नाथ के दरबार जल अर्पित करते हैं। भक्तों की किसी प्रकार की दिक्कत ना हो, इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा का एक प्रमुख मार्ग मुजफ्फरनगर के लोगों के लिए जिला प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

काँवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण एवं कुशलता संपन्न कराने के लिए मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक सिंह ने काँवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और होटलों पर उसके मालिक और संचालकों (उसे चलाने वालों) के नाम लिखने का आदेश दिया है। पुलिस ने हाईवे और नई मंडी, छपार व पुरकाजी, मंसूरपुर व खतौली आदि थानों की पुलिस ने कार्रवाई शुरू करा दी।

मुजफ्फरनगर जिले की सीमा पुरकाजी के गाँव भूराहेड़ी चेकपोस्ट से खतौली के भंगेला व बुढ़ाना, फुगाना, तितावी थानों की तक है, जिसमें काँवड़ यात्रा होती है। जिले के 240 किलोमीटर लंबे काँवड़ मार्ग है। हरिद्वार से आते समय हाईवे पर काफी होटल और ढाबे मुस्लिम समुदाय केे लोगों के भी हैं। इससे काँवड़ियों के इन होटलों और ढाबों में रुकने की संभावना बन जाती है।

इसको देखते हुए ही जिला प्रशासन ने सभी होटल और ढाबों पर प्रोपराइटर व संचालकों के नाम लिखने का आदेश दिया है, ताकि काँवड़ियों में भ्रम ना रहे। एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा, “काँवड़ यात्रा की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। जनपद के 240 किलोमीटर लंबे काँवड़ मार्ग पर जितनी भी होटल, ढाबे या ठेले हैं, जहाँ से भी काँवड़िया अपनी खाद्य सामग्री खरीद सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “सबको निर्देशित किया गया है कि इन होटलों-दुकानों-ढाबों-ठेलों पर प्रोपराइटर या काम करने वालों के नाम जरूर लिखें। यह इसलिए जरूरी है, ताकि किसी भी काँवड़िये के मन में किसी भी प्रकार का कोई संशय ना रहे। इससे ऐसी स्थिति ना बने जिसे कोई आरोप-प्रत्यारोप हो और कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो। यह सब सुरक्षा के लिए है।”

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल और लोनी के भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने मुस्लिम दुकानदारों ने हिंदू नाम से ढाबा खोलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये लोग अपना मजहब छिपाकर अपने होटल-ढाबे का नाम जनता वैष्णो ढाबा, साईं ढाबा, कृष्णा होटल आदि रखे हुए हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस पर कार्रवाई करने को कहा था। 

मुजफ्फरनगर प्रशासन के इस आदेश के बाद हैदराबाद से लोकसभा सांसद और AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ने सवाल उठाया है। सोशल मीडिया साइट X पर ओवैसी ने लिखा है, “उत्तर प्रदेश पुलिस के आदेश के अनुसार अब हर खाने वाली दुकान या ठेले के मालिक को अपना नाम बोर्ड पर लगाना होगा, ताकि कोई काँवड़िया गलती से मुसलमान की दुकान से कुछ न खरीद ले। इसे दक्षिण अफ्रीका में अपारथाइड कहा जाता था और हिटलर की जर्मनी में इसका नाम ‘Judenboycott’ था।”

खुलेआम इस्लामी धर्मांतरण और निकाह वाला कार्यक्रम स्थगित, मौलाना तौकीर रज़ा का हिन्दू संगठन कर रहे थे विरोध: बरेली के दंगों में आ चुका है नाम

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने सामूहिक धर्मांतरण एवं निकाह के कार्यक्रम कोे स्थगित कर दिया है। दरअसल, हिंदू संगठनों के विरोध और सावन जैसे पवित्र महीने के शुरू होने से पहले शहर में किसी तरह की अशांति को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। इसको देखते हुए प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी।

प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं देने को लेकर तौकीर रजा ने कहा, “हम कानून के दायरे में काम करते हैं। सामूहिक निकाह कार्यक्रम प्रशासन की अनुमति के बाद ही आयोजित किया जाएगा। हमने प्रशासन से अनुमति माँगी थी, जो नहीं दी गई। प्रशासन की अनुमति के बिना कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।”

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के प्रदेश प्रभारी नदीम कुरैशी ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट ने धर्म परिवर्तन कर जोड़ों का विवाह कराने की अनुमति नहीं दी है। इसलिए कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस कार्यक्रम में 23 लड़के-लड़कियों का इस्लाम में धर्मांतरण कराने के बाद उनका निकाह कराने की घोषणा की गई थी।

तौकीर रजा के इस घोषणा का हिंदू संगठनों ने खूब विरोध किया था। इसके बाद पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया। पुलिस ने साफ कह दिया था कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी भी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगर कोई जोर-जबरदस्ती करने की कोशिश करता है तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।

बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि किसी को भी शहर या जनपद की शांति व्यवस्था के साथ शरारत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अनुराग आर्य ने कहा कि 15 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट को एक आयोजन के लिए आवेदन दिया गया था, जिसकी जाँच पुलिस कर रही है। जाँच के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।

दरअसल, तौकरी रजा ने मीडिया को कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है। मौलाना ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है।

मौलाना तौकीर ने कहा कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।

हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी, पुलिस से झड़प: कुछ ऐसे निकला उत्तराखंड में उपचुनाव जीतने वाले काजी निजामुद्दीन का विजय जुलूस, इरफान-अबरार समेत 5 गिरफ्तार

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की मंगलौर विधानसभा सीट पर हुए उप-चुनाव में कॉन्ग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को जीत मिली। इस जीत के बाद मंगलौर में कॉन्ग्रेस विधायक का विजय जुलूस निकला, जिसमें कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटापत्थरबाजी, झड़प और बवाल की इन घटनाओं में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पचान इरफान, अबरार, कामिल, शमसाद और इरफान नाम के एक अन्य व्यक्ति के रूप में हुई है। इस बवाल में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने कई टीमें बनाई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधानसभा उप-चुनाव में जीत के बाद कॉन्ग्रेस के समर्थकों ने बिना अनुमति के ही विजय जुलूस निकाल दिया। इस विजय जुलूस के दौरान दूसरी पार्टियों के समर्थकों, हिंदू परिवारों के घरों और दुकानों पर पथराव किया। यही नहीं, काजी मोहम्मद निजामुद्दीन के कट्टरपंथी इस्लामिल समर्थकों ने लोगों पर हमला भी किया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ भी झड़प की और अभद्रता की।

मंगलवार (16 जुलाई 2024) को पुलिस ने बताया कि कॉन्ग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन के विजय जुलूस में दुकानों और घरों पर पथराव किया गया और लाठियों से भी हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन और उनके समर्थकों ने विजय जुलूस निकालने के लिए पुलिस से अनुमति नहीं ली थी। इसके बाद, गुंडों ने इलाके में मौजूद दूसरे दलों के समर्थकों और हिंदू परिवारों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। वे पुलिस कर्मियों से भी भिड़ गए और सड़कों पर हंगामा किया, इस हंगामे के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद पुलिस ने संगीता, एसआई नवीन नेगी और नौशाद की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

इस दौरान काजी निजामुद्दीन के समर्थकों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वो ‘कानून तोड़ेंगे’, क्योंकि विधानसभा उप-चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद उनके पास इसका ‘लाइसेंस’ है।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने घटना में शामिल सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए। पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए साक्ष्य जुटाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें भी गठित की हैं। आरोपितों की पहचान के लिए पुलिस टीम वीडियो फुटेज और इंटरनेट पर वायरल कई वीडियो के साथ-साथ मैनुअल इनपुट का विश्लेषण कर रही है।

हिंसक घटना की जाँच के दौरान पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम इरफान पुत्र जुएब, अबरार पुत्र शुएब और इरफान पुत्र दिलनवाज हैं। ये सभी मोहल्ला मिर्दगान, मंगलौर के रहने वाले हैं। अन्य दो आरोपितों में कामिल पुत्र साकिब और शमशाद पुत्र सनाउल्लाह शामिल हैं। ये सभी सराय अजीज, मंगलौर के रहने वाले हैं। इस मामले में आगे की पुलिस कार्रवाई चल रही है।

‘वो मुख्यमंत्री हैं, आतंकवादी नहीं’: पाकिस्तान और इमरान खान का उदाहरण देकर भी अरविंद केजरीवाल को HC से बेल नहीं दिला पाए सिंघवी, ऑर्डर रिजर्व

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शराब घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर से जमानत नहीं दी है। उच्च न्यायालय ने आदेश को रिजर्व रख लिया और कहा कि सोमवार (29 जुलाई, 2024) को फैसला सुनाया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश लिखने के लिए समय चाहिए। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले की सुनवाई की। अरविंद केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, विक्रम चौधरी और N हरिहरन ने उच्च न्यायालय में दलीलें पेश की।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल एक मुख्यमंत्री हैं, वो कोई आतंकवादी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ट्रायल कोर्ट ने जमानत दे रखी है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण दिया जहाँ इमरान खान को एक मामले में रिहा होने के बाद दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया जाता है। सिंघवी ने कहा कि हम वो देश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि CBI सिर्फ एक ही चीज कह रही है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल से जेल से बाहर भी पूछताछ की जा सकती है।

CBI की तरफ से पेश हुए वकील DP सिंह ने कहा कि सिंघवी के दावे के उलट अरविंद केजरीवाल को एक गवाह के रूप में नहीं बुलाया गया था बल्कि धारा-160 के तहत आरोपित, संदिग्ध या गवाह किसी से भी पूछताछ की जा सकती है, उन्हें बुलाया जाता है जो तथ्यों से परिचित हों। अभिषेक मनु सिंघवी ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी को ‘इन्सुरेंस अरेस्ट’ कह कर संबोधित किया। वहीं DP सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को जमानत सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए मिली थी।

CBI ने बताया कि अरविंद केजरीवाल को पहले भी गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन सुनवाई खत्म होने का इंतज़ार किया गया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसमें कम्प्लीट स्टे लगाने के बाद ही उन्हें गिरफ्तार किया गया। अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि 17 अगस्त, 2022 को CBI ने जो FIR दर्ज की थी उसमें अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं है। उनका कहना था कि तिहाड़ जेल में भी 3 घंटे केजरीवाल से पूछताछ हुई। उन्होंने बताया कि 2 बार सुप्रीम कोर्ट और 1 बार ट्रायल कोर्ट राहत दे चुका है।

सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को 10% आरक्षण: हरियाणा के CM सैनी का ऐलान- आयुसीमा में भी मिलेगी छूट, बंदूक का लाइसेंस भी मिलेगा

भारतीय सेनाओं में भर्ती की नई योजना अग्निवीर पर उठ रहे सवालों के बीच हरियाणा की सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार (17 जुलाई 2024) को कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से अग्निवीरों को पुलिस भर्ती और माइनिंग गार्ड समेत कई अन्य पदों की भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही 5 लाख रुपए ब्याज मुक्त ऋण देने की बात भी कही है।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि पीएम मोदी सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना लागू की थी। इस योजना के तहत अग्निवीरों को 4 साल के लिए भारतीय सेना में तैनात किया जाता है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार अब अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार द्वारा भर्ती किए जाने वाले कॉन्स्टेबल, माइनिंग गार्ड, फॉरेस्ट गार्ड, जेल वॉर्डन और SPO के पदों पर सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देगी।”

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उम्र संबंधी छूट का भी जिक्र किया। सीएम सैनी ने कहा कि ग्रुप C और D की भर्ती में अग्निवीरों को आयुसीमा में 3 साल की छूट दी जाएगी। इसके अलावा, ग्रुप C की भर्ती में 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा। वहीं, इसके पहले बैच वाले को आयुसीमा में पाँच साल की छूट मिलेगी। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई निजी कंपनी किसी अग्निवीर को 30,000 रुपए वेतन देती है तो सरकार उस कंपनी को सालाना 60,000 रुपए की सब्सिडी देगी। इसके अलावा, अग्निवीरों को हथियारों का लाइसेंस देने की भी उन्होंने घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों को अपना व्यवसाय शुरू करने पर 5 लाख रुपए तक की राशि बिना ब्याज के जी जाएगी।

बता दें कि सीआरपीएफ, बीएसएफ जैसे सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्सेस ने भी अग्निवीरों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी। इन संस्थानों के संबंधित प्रमुखों ने कहा था कि आने वाले सभी CRPF, BSF रिक्रूटमेंट्स में अग्निवीर के रूप में सेना में सेवा दे चुके युवाओं के लिए 10 प्रतिशत पद आरक्षित रखे जाएँगे। इसके साथ आयुसीमा में भी छूट दी जाएगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी अग्निवीर योजना को लेकर लगातार दुष्प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत अच्छी योजना है। इससे स्किल्ड यूथ फोर्स तैयार होता है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर में युवाओं की 4 सालों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

मॉल में बेटे के साथ फिल्म देखने जा रहे थे बुजुर्ग, धोती पहना देख गार्ड ने गेट पर ही रोक दिया: Video वायरल, किसान संगठन धोती में प्रदर्शन करने पहुँचे

कर्नाट़क की राजधानी बेंगलुरु में फकीरअप्पा नाम के बुजुर्ग व्यक्ति को धोती पहनकर म़़ॉल में घुसने से मना कर दिया गया। बुजुर्ग व्यक्ति मॉल में अपने बेटे के साथ फिल्म देखने पहुँचे थे। उन्होंने टिकट भी पहले से कराई हुई थी फिर भी मॉल के गार्ड उन्हें उनकी धोती देख रोकने लगे।

काफी जिरहबाजी के बाद एंट्री हुई, लेकिन फिर बुजुर्ग के बेटे ने एक वीडियो बनाई जिसमें उसने पूरी घटना के बारे में बताया। अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसे देख किसान संगठन से लेकर कन्नड़ समर्थक संगठन काफी नाराज हैं। वह इस घटना के विरोध में प्रदर्शन करने मॉल के बाहर पहुँच गए।

सामने आई जानकारी के अनुसार, मामला मंगलवार (16 जुलाई 2024) की शाम का है। बुजुर्ग को धोती पहनकर जीटी वर्ल्ड मॉल में एंट्री लेने से मना किया गया था। इसके बाद वहाँ काफी बहस हुई। वीडियो में देख सकते हैं कि बुजुर्ग बता रहे हैं कि मॉल के गार्ड ने उन्हें पैंट में आने को कहा था, लेकिन उन्होंने कहा कि वो तो बहुत दूर से मॉल में आए हैं और वो धोती छोड़कर पैंट नहीं पहन सकते। इसके बाद मॉल के गार्ड और उनमें बहुत बहस हुई तब जाकर बुजुर्ग को मॉल में एंट्री दी गई।

वीडियो के जरिए जब इस बारे में संगठनों को पता चला तो वो भी भड़क गए। नतीजतन किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने तो बुधवार को जीटी वर्ल्ड के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया। इस दौरन सभी प्रदर्शनकारी धोती पहनकर मॉल के बाहर आए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा, “यहाँ एक किसान आया था, उसने धोती पहन रखी थी। इसलिए सुरक्षा गार्ड ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। इसलिए हम यहाँ विरोध कर रहे हैं।”

वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों में नाराजगी है कि एक बुजुर्ग के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। लोग माँग कर रहे हैं कि इस मॉल पर फाइन लगाया जाना चाहिए जो इन्हें ये नहीं पता कि इंसान के साथ व्यवहार कैसे करते हैं।

12वीं पास को ₹6000, डिप्लोमा वाले को ₹8000, ग्रेजुएट को ₹10000: क्या है महाराष्ट्र की ‘लाडला भाई योजना’, कैसे और किनको मिलेगा फायदा?

महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने युवाओं को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार युवाओं को 6 हजार से 10 रुपए हर महीने देगी। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने लाडली बहन योजना की तर्ज पर ‘लाडला भाई योजना’ शुरू किया है। इस योजना के तहत युवाओं को प्रतिमाह 6 हजार रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक दिए जाएँगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में ‘लाडला भाई योजना’ के तहत 12वीं पास करने वाले युवाओं को 6 हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। डिप्लोमा करने वाले युवाओं को आठ हजार रुपए हर महीने मिलेंगे, और ग्रेजुएट युवाओं को 10 हजार रुपए हर महीने दिए जाएँगे।

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने जून में पेश किए गए अपने बजट में बेटियों के लिए माझी लड़की योजना की घोषणा की थी। इसके साथ ही लाडली बहन योजना भी चलाई जा रही है। जिसके बाद से युवकों के लिए भी इस तरह की योजनाओं की माँग की जा रही थी और अब सरकार ने लाडला भाई योजना की घोषणा कर दी है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि राज्य सरकार लड़कियों के लिए लाडली बहन योजना लेकर आई है। उन्होंने कहा कि हम लड़कों के लिए लाडला भाई योजना भी लेकर आए हैं। लाडला भाई योजना के तहत 12वीं पास से डिप्लोमा और डिग्री धारक युवकों को हर महीने नकद राशि दी जाएगी। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, इस योजना से महाराष्ट्र में कुशल जनशक्ति तैयार होगी। हम प्रदेश के साथ देश के उद्योग जगत को कुशल युवा देने जा रहे हैं। सरकार युवाओं को उनकी नौकरियों में कुशल बनाने के लिए भुगतान करने जा रही है।

सीएम शिंदे ने कहा, ”इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सरकार ने ऐसी योजना पेश की है। इस योजना के माध्यम से हमने बेरोजगारी का समाधान ढूँढ लिया है। इस योजना के तहत हमारे युवा कारखानों में ट्रेनिंग हासिल करेंगे और सरकार उन्हें वजीफा देगी। इसके तहत युवाओं को एक साल तक अप्रेंटिसशिप भी मिलेगी और फिर अप्रेंटिसशिप के अनुभव के आधार पर युवाओं को नौकरी मिलेगी।”

महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षण योजना नाम की इंटर्नशिप योजना के ज़रिए राज्य के बेरोज़गार युवाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए 5,500 करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना बनाई है। प्रतिस्पर्धी नौकरी बाज़ार के लिए युवाओं की रोज़गार क्षमता और कौशल में सुधार करने के लिए डिज़ाइन की गई इस पहल की घोषणा उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजीत पवार ने बजट 2024-25 में की थी।

उद्योगपतियों के बाद कॉन्ग्रेस के ‘लोकल कोटा’ पर IT इंडस्ट्री भी भड़की, NASSCOM ने कहा- बिल वापस नहीं हुआ तो जाएँगे कर्नाटक से बाहर: कन्नड़ बोलने वालों को प्राइवेट सेक्टर में 50-75% रिजर्वेशन

कर्नाटक सरकार का कन्नड़ लोगों को निजी नौकरियों में 50-75% तक का आरक्षण देने वाला बिल गले की फांस बनता जा रहा है। प्रमुख कारोबारियों के बाद अब IT कंपनी संगठन NASSCOM (नेशनल असोसिएशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेस कंपनीस) ने भी इस निर्णय अपनी चिंताएँ जाहिर की हैं। NASSCOM ने कर्नाटक सरकार से इस बिल को वापस लेने की माँग की है और कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें राज्य से बाहर जाने का कदम उठाना पड़ सकता है।

NASSCOM ने एक पत्र जारी करके इस नए बिल को लेकर समस्याएँ बताई हैं। इस पत्र में NASSCOM ने कहा, “टेक सेक्टर कर्नाटक की अर्थव्यवस्था और समाज के विकास में बड़ा कारक रहा है। टेक सेक्टर राज्य की GDP में लगभग 25% योगदान देता है और प्रदेश के रफ़्तार से तरक्की में बड़ा सहायक रहा है जिससे राज्य की प्रति व्यक्ति आय देश के औसत से ऊँची हो गई है। राज्य में देश के 30% GCC (ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर) और 11,000 स्टार्टअप हैं।”

NASSCOM ने इस बिल पर चिंता जताते हुए कहा, “इस तरह के बिल बेहद परेशान करने वाला है, यह ना केवल टेक इंडस्ट्री के विकास में बाधा डालेगा, बल्कि यहाँ नौकरियों और कर्नाटक के ब्रांड पर भी असर डालेगा। NASSCOM सदस्य इस बिल के प्रावधानों को लेकर काफी चिंतित हैं और राज्य सरकार से इसे वापस लेने की माँग करते हैं।”

NASSCOM ने कहा कि इस बिल से राज्य के विकास और कम्पनियों के राज्य से बाहर जाने और स्टार्टअप को मुश्किल में पड़ने का खतरा है। NASSCOM ने कहा है कि इस कानून के कारण कम्पनियों को बाहर जाना पड़ सकता है जिससे उन्हें टैलेंट मिल सके।

देश भर की 3200 से अधिक टेक कम्पनियाँ NASSCOM की सदस्य हैं और 245 बिलियन डॉलर (लगभग ₹20 लाख करोड़) की इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करती है। NASSCOM के विरोध के कारण कर्नाटक सरकार पर अब दबाव बन रहा है। NASSCOM से पहले NITI आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कान्त ने भी इस बिल को लेकर चिंताएँ जाहिर की।

उन्होंने कहा, कि यह एक अच्छा कदम नहीं है और इसका देश में IT सेक्टर तंत्र पर नुकसानदेह प्रभाव पड़ेगा। इस कदम से IT सेक्टर बढ़ने की बजाय रुक जाएगा। इससे पहले देश के बड़े कारोबारियों ने भी इस बिल की आलोचना की थी।

BIOCON कि मुखिया किरण मजूमदार शॉ, मनिपाल ग्लोबल सिस्टम के मुखिया TV मोहनदास पाई और युलू के को फाउंडर RK मिश्रा ने इस बिल में खामियां बताई थी। मोहनदास पाई ने इस कानून को अलोकतांत्रिक करार दिया था और इसे वापस लेने की माँग की थी।

गौरतलब है कि मंगलवार (15 जुलाई, 2024) को बेंगलुरु में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई है। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए।

बिल के अनुसार कर्नाटक में जन्मा या कर्नाटक में पिछले 15 वर्षों से रह रहा कोई भी व्यक्ति कन्नड़ माना जाएगा और इसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। कन्नड़ आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को 12वीं पास होना चाहिए और इस दौरान उसके पास कन्नड़ एक विषय के तौर पर होनी जरूरी है। यदि उसके पास यह नहीं है तो उसे कन्नड़ सीखनी होगी।