Home Blog Page 794

नाम, उम्र, सर्टिफिकेट… IAS बनने के लिए पूजा खेडकर ने सबमें किया झोल, UPSC एप्लीकेशन से खुले राज, OBC कोटे का भी झूठ बोला

महिला ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को लेकर मीडिया में नई जानकारी सामने आई है। अभी तक जहाँ उनकी अनुचित माँगों और शारीरिक दिव्यांगता से जुड़े फर्जी डॉक्यूमेंट के कारण वे सवालों के घेरे में थीं तो वहीं अब मामले में पता चला है कि पूजा खेडकर ने अपनी उम्र को लेकर भी झूठ बोला है। खबरों के मुताबिक पूजा खेडकर ने महज 3 साल के अंतर में दो डॉक्यूमेंट में अपनी उम्र अलग-अलग बताई। इसके मुताबिक उनकी उम्र 3 साल में सिर्फ 1 साल बढ़ी है।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने साल 2020 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल को एक एप्लीकेशन दिया था, जिसमें उनकी उम्र 30 साल और साल 2023 में इस प्रकार के डॉक्यूमेंट में उनकी उम्र 31 साल दिखाई दे रही है। इन्हीं डॉक्यूमेंट को देखते हुए सवाल खड़ा हो रहा है कि जब ऐसा नहीं हो सकता कि दिसंबर 2020 से लेकर 2023 तक में पूजा खेडकर की उम्र केवल 1 साल बढ़ी हो तो इससे तो यही साफ है कि उन्होंने अपनी उम्र को लेकर दस्तावेजों में झूठ बोला है।

इसके अलावा पूजा खेडकर के नाम को लेकर भी बवाल है। उन्होंने साल 2020 में अपने दस्तावेज में अपना नाम डॉ खेडकर पूजा दिलीप राओ बताया था। वहीं 2023 में उन्होंने अपना मिस पूजा मनोरमा लिखा था। वहीं पिता के नाम की स्पेलिंग को भी बदल दिया था। 2023 में उन्होंने नाम उन्होंने ऐसा क्यों किया इसकी छानबीन की जा रही है। उनके नाम में डॉक्टर होने और फिर डॉक्टर हटाने की चर्चा मीडिया में तेज है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया।

फोटो साभार: इंडिया टीवी

बता दें कि इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि पूजा खेडकर ने 2007 में एमबीबीएस में एडमिशन लेते समय भी घालमेल किया था। दरअसल, पूजा खेडकर ने एमबीबीएस में ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर के तहत एडमिशन लिया था जबकि उनके माता-पिता प्रशासनिक अधिकारी थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस, एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. अरविंद वी. भोरे ने दावा किया था कि IAS अधिकारी डॉ पूजा खेडकर ने 2007 में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए ओबीसी सर्टिफिकेट जमा किया था। इस दौरान उन्होंने ओबीसी खानाबदोश जनजाति-3 कैटेगरी के तहत एडमिशन लिया था, जो वंजारी समुदाय के लिए रिजर्व है। एडमिशन के वक्त उन्होंने किसी प्रकार की फिजिकल डिसेबिलिटी को लेकर कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया था।

12 साल की दलित बच्ची से 50 साल के इसरार ने किया रेप, पुलिस ने पकड़ा तो बोला- मेरे ऊपर शैतान सवार था: पीड़ित पिता को भी दी थी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में रविवार (14 जुलाई 2024) को 50 साल के अधेड़ इसरार उर्फ गुड्डू ने 12 साल की बच्ची के साथ रेप किया। बच्ची एससी समुदाय की है और पड़ोस में ही रहती है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपित इसरार उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि जब उससे पुलिस ने पूछताछ की, तो उसने कहा कि “मेरे ऊपर शैतान सवार हो गया था।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला सदर बाजार इलाके का है। जहाँ रविवार को 50 साल का इसरार उर्फ गुड्डू 12 साल की बच्ची को पड़ोस की दुकान में ले गया और उसके साथ रेप किया। उसने रेप के बाद बच्ची को छोड़ दिया। इस दौरान सामान लेकर घर की तरफ आ रहे बच्ची के पिता ने उसे रोते देखा, तो उसने पूरी बात बताई। लेकिन जब बच्ची के पिता ने इसरार से पूछा, तो वो बच्ची के पिता को भी धमकाने लगा। इस मामले में सूचना मिलने ही हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग भी पहुँच गए और उनकी मदद से पीड़ित बच्ची के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी के मुताबिक, इसरार उर्फ गुड्डू ने पुलिस ने पूछताछ में खुद पर शैतान के सवार होने की बात कही। उसने कहा, “मेरे ऊपर शैतान सवार हो गया था।” इस मामले में पुलिस ने आरोपित इसरार को वारदात के कुछ ही घंटों के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया। वो फरार हो गया था, लेकिन मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पॉक्सो, एससी-एसटी एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

शाहजहाँपुर के एएसपी (सिटी) संजय कुमार ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्ची की हालत स्थिर है, और वो खतरे से बाहर है। फिलहाल पुलिस अग्रिम कार्रवाई कर रही है।

अजमेर दरगाह के बाहर ‘सर तन से जुदा’ की गूँज के 11 दिन बाद उदयपुर में काट दिया गया था कन्हैयालाल का गला, 2 साल बाद भड़काऊ नारेबाजी में खादिम गौहर चिश्ती सहित 6 बरी

राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के सामने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाले दरगाह के खादिम मौलवी गौहर चिश्ती सहित छह आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। भाजपा नेता नूपुर शर्मा के बयान के बाद इस्लामी कट्टरपंथी देश में महौल बिगाड़ रहे थे। इनमें ये लोग भी शामिल थे। इसके बाद उदयपुर में कन्हैया लाल दर्जी का गला रेत दिया गया। देश के कई इलाकों से भी ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं।

खादिम सहित सभी छह आरोपितों को एडीजे-4 कोर्ट ने बरी किया है। यह मामला पिछले दो साल से ट्रायल कोर्ट में चल रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 22 गवाह और 32 दस्तावेज पेश किए गए थे। दोनों पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद जज रितु मीणा सभी आरोपितों को बरी कर दिया। इस मामले में एक आरोपित अहसानुल्लाह फरार है। उस पर कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया।

‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाले इस मामले में जिन आरोपितों को बरी किया गया है, उनके नाम हैं- दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती, अजमेर के रहने वाले 31 साल के ताजिम सिद्दीकी पुत्र नईम खान, 42 साल के फखर जमाली पुत्र सैयद मोहम्मद जुबैर जमाली, 47 साल के रियाज हसन दल पुत्र हसन, 48 साल के मोईन खान पुत्र स्व. शमसुद्दीन खान और 45 साल के नासिर खान।

दरगाह के सामने अपने साथियों सहित ‘सर तन से जुदा’ के भड़काऊ नारे लगाने वाले दरगाह के मौलवी गौहर चिश्ती को साल 2022 में तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, नूपुर शर्मा प्रकरण के दौरान मौलाना का एक वीडियो वायरल हुआ था।। इस वीडियो में ये सभी आपत्तिजनक नारे लगाते हुए दिखे थे। इसके बाद इनके खिलाफ जून 2022 में मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले में सरकारी वकील गुलाम नजमी फारूकी ने बताया कि कोर्ट ने पूरा निर्णय अभी आउट नहीं किया है। वर्तमान में सिर्फ इसकी घोषणा की गई है। इसमें सभी छह आरोपितों को सभी धाराओं में बरी करने की बात कही गई है। सरकारी वकील ने बताया कि पूरा जजमेंट देखने के बाद वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। वहीं, फरार आरोपित अहसानुल्लाह पर कोई फैसला नहीं आया है।

वहीं, आरोपितों की ओर से पेश वकील अजय वर्मा का कहना है कि भड़काऊ नारे वाले जो भी वीडियो सामने आए थे, उनका सत्यापन नहीं हो पाया। पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, वे भी अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। वकील अजय वर्मा ने कहा कि कोर्ट ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाया और सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी वकील फारूकी ने बताया कि इस पूरे प्रकरण का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो के आधार पर अजमेर के रहने वाले चार आरोपितों- ताजिम सिद्दीकी, फखर जमाली, रियाज हसन दल, मोईन खान, नासिर खान को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान मौलाना गौहर चिश्ती फरार हो गया था। उसे हैदराबाद में अहसानुल्लाह ने शरण दी थी।

इस मामले में पुलिस ने 15 जुलाई 2022 को दरगाह के मौलाना गौहर चिश्ती और अहसानुल्लाह को पकड़ लिया था। बाद में आरोपित अहसानुल्लाह को जमानत पर रिहा किया गया था। इसके बाद वह फरार हो गया। उसकी खोज-खबर नहीं मिली। जाँच अधिकारी दलबीर सिंह की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने अहसानुल्लाह को 12 मार्च 2024 को फरार घोषित कर दिया था।

उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड में NIA के निशाने पर भी गौहर चिश्ती था। भड़काऊ भाषण और नारेबाजी के बाद खादिम गौहर चिश्ती ने उदयपुर यात्रा की थी। इसके साथ ही गौहर की कुछ पुरानी संदिग्ध फोटो भी सामने आई थी, जिसमें गौहर चिश्ती CRPF परिसर का VIDEO बनाते हुए दिख रहा था। हालाँकि, गौहर चिश्ती से पूछताछ में कुछ भी काम की जानकारी सामने नहीं आई थी।

बता दें कि नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर पर दिए गए बयान के बाद कट्टरपंथियों ने इसे ईशनिंदा बताकर देश में माहौल खराब करने की घोषणा की थी। इसके बाद 17 जून 2022 को कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसमें उन्होंने कहा कि था कि घटना के दिन वह दोपहर करीब 3 बजे निजाम गेट पर ड्यूटी दे रहे थे। उस दौरान मौन जुलूस निकाला जा रहा था।

जाट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस दौरान सुनियोजित तरीके से खादिम गौहर चिश्ती हित कुछ लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिए थे। उसमें रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए थे। जुलूस में 2500-3000 लोगों की भीड़ दरगाह के सामने जुटी थी। जाट की रिपोर्ट के आधार पर चिश्ती पर हिंसा के लिए भीड़ को उकसाने और हत्या की अपील करने का मामला दर्ज किया गया था।

इस घटना के बाद 28 जून 2022 को उदयपुर में कन्हैयालाल नाम के एक दर्जी की गला काटकर सार्वजनिक रूप से हत्या कर दी गई थी। इस दौरान आरोपित मोहम्मद रियाज़ अंसारी और मोहम्मद गौस ने गला काटने का वीडियो भी बनाया था। बाद में पुलिस ने इन दोनों आरोपितों को पकड़ लिया। ये दोनों अभी जेल में हैं। वहीं, कन्हैया लाल के परिजनों को अभी भी न्याय का इंतजार है।

कन्हैया लाल के बेटे घोषणा की है कि जब तक उनके पिता को न्याय नहीं मिल जाता, तब वे जूता-चप्पल नहीं पहनेंगे और नंगे पैर रहेंगे। इतना ही नहीं, मृतक कन्हैया लाल की अस्थियाँ भी विसर्जन की बाट खोज रही हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। दूसरी तरफ, आपत्तिजनक नारे लगाकर लोगों को उकसाने वाले खादिम सहित अन्य आरोपितों के मामले में तेजी से सुनवाई होते हुए उन्हें बरी भी कर दिया गया।

जिस किले में प्रवेश करने से शिवाजी को रोक नहीं पाई मसूद की फौज, उस विशालगढ़ में बढ़ रहा दरगाह: काटे जा रहे जानवर-156 अतिक्रमण, मंदिरों की दुर्गति

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक किला है, विशालगढ़। लगभग 1000 साल पुराना यह विशालगढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज के वीरतापूर्ण जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। यह किला आजकल अवैध कब्जे की खबरों को लेकर चर्चा में है। इस किले की वर्तमान स्थिति काफी चिंतनीय है।

कोल्हापुर में स्थित इस विशालगढ़ किले में शिवाजी महाराज बीजापुर के सुलतान आदिलशाह के एक सेनापति सिद्दी मसूद के चंगुल से बच कर पहुँचे थे। सिद्दी मसूद उन्हें दो महीने तक घेरने के बाद भी नहीं पकड़ पाया था। उनको इस किले तक पहुँचाने में बाजी प्रभु और फूलजी प्रभु ने उनके यहाँ तक पहुँचाने के लिए एक युद्ध भी लड़ा था। वर्तमान में यह किला अवैध अतिक्रमण के चंगुल में है।

इस किले में काफी संख्या में लोग रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिमों की है। यह सामने आया है कि किले में मुस्लिम समुदाय अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। यहाँ स्थित एक दरगाह को अवैध रूप से बढ़ाया गया है जबकि इसी किले के भीतर स्थित मंदिरों को जीर्ण शीर्ण अवस्था में छोड़ दिया गया है। किले के भीतर पशु काटने की बात भी कही गई है।

‘अवैध मस्जिद ‘के साथ ही हो रहा अतिक्रमण

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, विशालगढ़ किले के भीतर 156 ऐसे ढाँचे हैं, जिनको अवैध रूप से बनाया गया है। इनमें से 100 से अधिक मुस्लिम समुदाय के हैं। यहाँ लोहे की शीट लगाकर अतिक्रमण किया गया है। इस किले को 1999 में ASI संरक्षित संरचना घोषित किया गया था। इस सर्वे में किले के भीतर 12 धार्मिक स्थल पाए गए थे, इनमें से 11 हिन्दू स्थल थे जबकि 1 दरगाह थी। इस दरगाह को मलिक रेहान बाबा दरगाह नाम से जाना जाता है।

बताया गया है कि दरगाह के पास का इलाका पहले बहुत छोटा था और अब यह बढ़ कर 1000 स्क्वायर फीट से अधिक हो चुका है। इसके अलावा दरगाह के पीछे एक मस्जिद को भी बढ़ाया गया है। इस मस्जिद का क्षेत्रफल बढ़ाने की कोई अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए यह अवैध है। किले के भीतर अधिकांश अतिक्रमण इसी इलाके में हुआ है। दरगाह के आसपास कई अवैध दुकानें भी खुली हैं, यह दुकानें दरगाह में चढ़ने वाली चादर, अगरबत्ती और फूल आदि बेचती हैं।

स्थानीय हिन्दू बताते हैं कि जिन मलिक रेहान बाबा के लिए यह दरगाह बनाई गई है वह आदिलशाह का एक आक्रान्ता था जिसे यहाँ युद्ध में मार दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम कहते हैं कि बाबा 2000 साल पहले यहाँ रहे थे। वहीं इस किले का इतिहास ही 1000 साल पुराना बताया जाता है, ऐसे में बाबा मलिक दरगाह के 2000 साल रहने की बात नहीं समझ आती। इस दरगाह पर 2015 में ₹10 लाख खर्च कर इसे संवारा भी गया था।

हिन्दू मंदिरों का बुरा हाल

जहाँ एक ओर किले के भीतर बनी दरगाह में काफी लोग आते जाते हैं और यहाँ दुकाने खुली हुई हैं, वहीं किले के भीतर बने मंदिरों का बुरा हाल है। वर्तमान में यहाँ 20-24 हिन्दू मंदिर है लेकिन यह काफी खराब हालत में हैं। इनकी देखरेख निलेश हर्दिकर करते हैं, वह 61 वर्ष के हैं। वह इन मंदिरों की देखरेख करते हैं। वह रोज इन मन्दिरों में जाते हैं, सफाई करते है हैं पूजा भी करते हैं। वह रोज यहाँ पूजा करने के लिए लगभग 16 किलोमीटर चलते हैं।

उन्होंने बताया कि किले के भीतर 156 जगह पर अतिक्रमण हुआ है। उन्होंने बताया कि इन मंदिरों के विषय में जल्द कोई कदम नहीं उठाए गए तो जल्द ही यह एकदम जीर्ण शीर्ण हालत में आ जाएँगे। इस किले के भीतर उन दो योद्धाओं के समाधि स्थल भी हैं, जिन्होंने शिवाजी महाराज के लिए युद्ध लड़ा था। उन तक पहुँचने का भी सही रास्ता नहीं है। यहाँ रस्ते में कूड़ा पडा रहता है। किले के भीतर कुछ सरकार विभागों के बीच विवाद भी है, इस कारण काम में भी देरी होती है।

विशालगढ़ में पशु वध पर बैन की माँग

किले में स्थित इस दरगाह पर पशुओं की क़ुरबानी भी होती है। यहाँ दरगाह में बकरे और मुर्गे की बलिकुर्बानी दी जाती है। इस किले में पशु वध पर रोक लगाने की माँग भी लगातार हिन्दू करते आए हैं। इसको लेकर 2023 में राज्य के पुरातत्व विभाग ने इस पर रोक लगा दी थी। लेकिन 2024 में दरगाह में होने वाले उर्स के दौरान कुर्बानी की अनुमति बॉम्बे हाई कोर्ट ने दे दी थी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के अन्य किसी किले के भीतर पशुओं को काटने की इजाजत नहीं है।

किले में जनसंख्या भी बढ़ी

विशालगढ़ किले के भीतर 1953 में 33 वोटर रहते थे, इनमें 12 मुस्लिम समुदाय से थे। इसके बाद यह संख्या लगातार बढ़ती गई। 2022 के सरकारी दस्तावेजों के हिसाब से, यहाँ कुल 459 लोग रह रहे थे। इनमें से 290 मुस्लिम और 169 हिन्दू थे। बताया गया कि पिछले 4-5 दशक में यहाँ मुस्लिम आबादी बढ़ी है। यहाँ अस्थायी रूप से रहने वालों को इंदिरा आवास योजना के तहत घर दिए जाने के प्रमाण भी हैं। कई हिन्दू संगठन किले के भीतर से अतिक्रमण हटाने की माँग लम्बे समय से कर रहे हैं।

गौरतलब है कि विशालगढ़ जैसा अतिक्रमण का मामला महाराष्ट्र के ही सतारा जिले में बने हुए प्रतापगढ़ किले में हुआ था। यहाँ मुस्लिम सेनापति अफजल खान की कब्र के आसपास अवैध निर्माण किया गया था। यहाँ कुछ मौलाना आकर रहने लगे थे। इसके बाद वह इस किले में जाने वालों को अफजल खान की वीरता की गाथाएँ भी सुनाने लगे थे। यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट भी पहुँचा था। हाई कोर्ट ने यहाँ से यह अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। 2022 में जाकर यह अतिक्रमण मुक्त करवाया सका था।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से सिद्धि सोमानी ने अंग्रेजी में लिखी है, इसे आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)

बॉलीवुड की जो हिरोइन रही है ‘Say No to Drugs’ की ब्रांड एम्बेसडर, उसका भाई ड्रग्स के धंधे में गिरफ्तार: ₹35 लाख की कोकीन मिली, सुशांत की मौत के बाद भी आया था नाम

बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के भाई अमन प्रीत सिंह को ड्रग्स लेने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, अमन प्रीत नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे ड्रग्स रैकेट में शामिल थे जिसमें 13 लोग आरोपित बनाए गए हैं। पुलिस ने कहा है कि वो इस मामले की जाँच कर रहे हैं कि अमन प्रीत अन्य आरोपितों के संपर्क में कब आए थे, फिलहाल उन्हें कोकीन का सेवन करने के मामले में पकड़ा गया है।

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरोह का सरगना नाइजीरिया का डिवाइन इबुका सुजी है। वह एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट चला रहा है। वह हैदराबाद और भारत के अन्य शहरों में ड्रग्स पहुँचाने के लिए अपने मुख्य सहयोगी ओनुओहा ब्लेसिंग को नाइजीरिया से दिल्ली भेजता है। वह फ्लाइट/ट्रेन दोनों से यात्रा करती है और डीलरों को आपूर्ति करती है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार (15 जुलाई) को तेलंगाना एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो यानी TGANB ने सूचना मिलने पर साइबराबाद पुलिस और नरसिंगी पुलिस के साथ मिलकर एक फ्लैट में छापा मारा। फ्लैट से 35 लाख की कीमत का 199 ग्राम कोकीन बरामद किया। साथ ही कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। इसी दौरान अमन प्रीत सिंह का नाम भी उछला कि कोकीन का सेवन उन्होंने भी किया। पुलिस ने जानकारी के आधार पर 13 लोगों को गिरफ्तार किया।

बता दें कि पहली बार नहीं कि ड्रग केस में कहीं से अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह का नाम आया हो। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2017 में खुले हैदराबाद ड्रग रैकेट से सम्बंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री (टॉलीवुड) से जुड़ी 10 हस्तियों को नोटिस भेजा था। उसमें भी सुपरस्टार रवि तेजा, राना डग्गबली के साथ रकुल प्रीत सिंह का भी नाम था।

इसके अलावा साल 2020 में जब एक्ट्रेस सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का मामला आया था उसके बाद भी ड्रग्स से जुड़े केस बहुत सुर्खियों में थे। उस समय एनसीबी की जाँच के दौरान रकुल प्रीत सिंह रडार पर थीं। उनके साथ सारा अली खान व अन्य अभिनेत्रियों से भी पूछताछ हुई थी। दिलचस्प बात ये है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जाँच में शामिल रहीं रकुल प्रीत सिंह को एक समय में ‘say no to drugs’ (ड्रग्स को नहीं कहो) अभियान का हिस्सा बनाया था।

बॉडी की तौबा-तौबा हो गई… ‘लीजेंड चैंपियन्स’ को Video पड़ी भारी, हरभजन-युवराज-सुरेश रैना-गुरकीरत मान के खिलाफ पुलिस से शिकायत: जानिए क्या है मामला

भारत की साल 2011 की क्रिकेट विश्व कप चैंपियन टीम के 3 बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ दिल्ली में एफआईआर दर्ज हुई है। ये एफआईआर युवराज सिंह, हरभजन सिंह, सुरेश रैना के साथ ही गुरकीरत मान के खिलाफ भी की गई है। इसके साथ ही मेटा-इंडिया के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसी बीच, हरभजन सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने हाथ जोड़कर माफी माँगी है।

दरअसल, कुछ दिन पहले इंग्लैंड में खेले गए लीडेंट्स वर्ल्ड कप में भी भारतीय टीम ने ट्रॉफी जीती थी। इसी ट्रॉफी की जीत के बाद पूर्व खिलाड़ियों ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में युवराज सिंह, हरभजन सिंह और रैना लँगड़ाते हुए और अपनी पीठ पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि मैच के कारण उनके शरीर पर कितना शारीरिक असर पड़ा है। वीडियो के साथ टाइटल में लिखा गया, ‘बॉडी की तौबा-तौबा हो गई है 15 दिनों के लीजेंड क्रिकेट में…शरीर का हर हिस्सा टूट रहा है। हमारे भाइयों विकी कौशल और करण औजला को हमारे तौबा-तौबा गाने के संस्करण से सीधी चुनौती। क्या गाना है।’ हालाँकि विवाद बढ़ने की वजह से हरभजन सिंह ने ये वीडियो हटा लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉइमन्ट फॉर डिसएबल्ड के अध्यक्ष अरमान अली ने दिल्ली के अमर कॉलोनी पुलिस थाना के प्रभारी से चारों क्रिकेटरों की शिकायत की है। इसके साथ ही उन्होंने मेटा इंडिया की उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संध्या देवनाथन के खिलाफ भी शिकायत की है।

अरमान अली बोले, “मुझे लगता है कि यह भारत के 10 करोड़ से अधिक दिव्यांग लोगों का अपमान है, हरभजन सिंह एक सांसद हैं और उन्हें दिव्यांगों के लिए आवाज उठानी चाहिए, लेकिन वह किस तरह का वीडियो बना रहे हैं? भारत में दिव्यांगता को लेकर जागरूकता की भारी कमी है, आप मिथक फैला रहे हैं और उनका मजाक उड़ा रहे हैं और इसीलिए मैंने शिकायत दर्ज कराई है।”

इस बीच, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और क्रिकेट के मैदान में टर्बनेटर के नाम से मशहूर हरभजन सिंह ने लोगों से माफी माँगी है। हरभजन सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं इंग्लैंड में चैंपियनशिप जीतने के बाद सोशल मीडिया पर हमारे ‘तौबा तौबा’ वाले हाल के वीडियो के बारे में शिकायत कर रहे हैं उन लोगों को स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हम किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे। हम हर व्यक्ति और समुदाय का सम्मान करते हैं और यह वीडियो सिर्फ 15 दिनों तक लगातार क्रिकेट खेलने के बाद हमारे शरीर पर पड़ने वाले असर को दिखाने के लिए था। हम किसी का अपमान नहीं कर रहे। अगर फिर भी आप लोगों को यही लगता है, तो मैं अपनी तरफ से बस इतना ही कह सकता हूं कि सभी से माफी चाहता हूँ… कृपया इसे यहीं रोकें और आगे बढ़ें। खुश और स्वस्थ रहें।”

बता दें कि वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स की ट्रॉफी भारत की टीम ने जीता। ये टूर्नामेंट इंग्लैंड में खेला गया, जिसमें लीग मैचों में चौथे नंबर की टीम रहे भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को बुरी तरह से हराया। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जिमसें युवराज सिंह मैन ऑफ द मैच रहे थे।

हाथ में कलावा बाँध दिल्ली में हिंदू युवती को फँसाया, बरेली ले जाकर बना दिया मुसलमान: हाई कोर्ट ने इम्तियाज अंसारी को जमानत से किया इनकार, नरगिस-तस्लीम की मदद से बनाए फर्जी दस्तावेज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल में एक इम्तियाज अंसारी नाम के मुस्लिम शख्स की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इम्तियाज पर आरोप है कि उसने हिंदू लड़की को हिंदू बनने का नाटक करके फँसाया और उसके बाद उसे इस्लाम में परिवर्तित कराने की कोशिश करने लगा।

लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसपर लगे आरोपों की गंभीरता पर गौर किया। अंसारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 में मामला दर्ज है। इसके अलावा अंसारी पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3/5(1) भी लगी है।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि बरेली के लाडपुर उस्मानपुर के इम्तियाज अंसारी ने कुमकुम नाम की लड़की के नाम पर फर्जी आवास प्रमाण बनवाया था और इसमें उसकी मदद गाँव की प्रधान नरगिस खातून और उसके पति तस्लीम ने की थी। दस्तावेजों में बताया गया था कि कुमकुम एक मुस्लिम महिला है और लाडपुर उस्मानपुर में रहती है जबकि पिता का नाम इम्तियाज अहमद है।

अभियोजन पक्ष ने जानकारी दी कि कुमकुम के बारे में लगाए गए दस्तावेज गलत थे। वह गोपाल नागर और सुषमा देवी की बेटी है जो सरिता विहार के राजस्थानी कैंप में रहती है। उसने दिल्ली के सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और फिर फैक्ट्री में काम करने लगी थी। इसी फैक्ट्री में इसकी मुलाकात अंसारी से हुई।

शुरू में अंसारी ने कुमकुम से अपनी पहचान छिपाई। वो अपने हाथ में कलावा बाँधकर उसे गुमराह करता था। जब कुमकुम पहली बार उस्मानपुर गई तब उसे अंसारी की हकीकत के बारे में पता चला और ये भी जानकारी हुई कि कैसे उसकी पहचान से खिलवाड़ किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने इस दौरान कुमकुम को इस्लाम में परिवर्तन कराने की कोशिशों के बारे में भी बताया।

हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और लड़की द्वारा दर्ज कराए गए बयान पर गौर करते हुए अंसारी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया और माना कि अंसारी ने जिस तरह से लड़की का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की वो धोखेबाजी में आता है।

‘मैं कुरान नहीं पढ़ूँगी, सर बहुत गंदे हैं’: बच्ची को दीनी तालीम देने घर आता था अफजाल, कई बार किया रेप; सहारनपुर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में प्राइवेट ट्यूटर अफजाल ने एक नाबालिग लड़की के साथ कई बार रेप किया है। अफजाल 14 साल की लड़की को कुरान पढ़ाने के लिए उसके घर पर जाया करता था। इस घटना की जानकारी होने के बाद लड़की के अम्मी-अब्बू ने अफजाल के खिलाफ मामला करा दिया। पुलिस ने आरोपित कुरान टीचर को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला सहारनपुर के थाना सदर बाजार का है। रक्खा कॉलोनी निवासी अफजाल नाबालिग छात्रा को कुरान पढ़ाने के लिए उसके घर पर जाया करता था। घर में जब बच्ची के माता-पिता नहीं होते तो वह उसके साथ छेड़छाड़ करता था। एक दिन उसने नाबालिग के का बलात्कार कर दिया। इसके बाद वह बच्ची को डराकर कई बार उसके साथ बलात्कार किया।

इससे तंग आकर एक दिन छात्रा ने अपनी अम्मी से कहा कि अब वह अफजाल से ट्यूशन नहीं पढ़ेगी। उसने कहा, “मैं सर से कुरान नहीं पढूँगी। सर बहुत गंदे हैं। वह बैड टच करते हैं।” बेटी के साथ इस घटना को सुनकर नाबालिग की माँ के होश उड़ गए। इसके बाद वह बच्ची को लेकर थाना सदर बाजार पहुँची। वहाँ उसने पुलिस को सारी करतूत बताई।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। इसके साथ ही आरोपित अफजाल को गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिग के परिजनों ने बताया, “हम बेटी को टीचर के भरोसे छोड़ देते थे कि वह उसे कुरान पढ़ाएगा और अच्छी तालीम देगा। लेकिन, टीचर ने बच्ची के साथ गलत काम किया। गंदी हरकतें की है। मेरी बेटी 14 साल की है। उसका जीवन बर्बाद कर दिया।”

पीड़िता की अम्मी बोली, “मेरी बेटी को कुरान पढ़ाने के लिए एक टीचर घर आता था। एक दिन मेरी बेटी ने रोते हुए कुरान पढ़ने से मना कर दिया। उसने कहा कि मैं सर से कुरान नहीं पढ़ूँगी। इस पर मैंने कारण पूछा तो उसने बताया कि टीचर गंदे हैं। वो कुरान पढ़ाने के बहाने गंदी-गंदी हरकत करते हैं। उन्होंने कई बार मेरे साथ गलत काम किया है। मैं उनसे नहीं पढूँगी।”

एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया, दो दिन पहले सदर बाजार थाना क्षेत्र के एक वादी पक्ष आते हैं अपनी बेटी को लेकर। बेटी नाबालिग है और उसकी उम्र 14-15 साल है। उसके द्वारा इल्जाम लगाया जाता है कि एक मुस्लिम पुरुष ने पढ़ाई कराने के बहाने उसके साथ दुष्कर्म किया और पिछले कुछ समय से वह ऐसा करता आ रहा है। डर के मारे लड़की ने अब तक कुछ कहा नहीं था।”

एसपी सिटी मांगलिक ने आगे बताया, बाद में उसने अपने परिजनों को इसके बारे में बोला और परिजन उसको यहाँ लेकर आए। थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्ची का मेडिकल कराया और इसमें जो मुख्य आरोपित अफजाल है, उसको गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।”

3 औरतें+2 मर्द… भोपाल में घूम-घूमकर बाँट रहे धर्मांतरण का ऑफर, ईसाई बनने पर ₹20 लाख नगद-मकान-बच्चों की फ्री पढ़ाई का लालच: पुलिस ने तीन को दबोचा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन ईसाई महिलाओं ने गरीब बस्ती में घूम-घूम कर लोगों को धर्मांतरण करने का ऑफर दिया। ईसाई बनने के एवज में लोगों को ₹20 लाख की पेशकश की गई। इसके साथ और कई वादे किए गए। महिलाओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले में FIR भी दर्ज करवाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (14 जुलाई, 2024) को भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र की एक बस्ती में तीन महिलाएँ और दो पुरुष घूम रहे थे। इन महिलाओं का नाम मैरी बस्तवाल, मैरी मसीह और सुमन मसीह हैं। यह महिलाएँ बस्ती में कई परिवारों को ईसाई बनने का प्रलोभन दे रहीं थी।

यह महिलाएँ इन परिवारों को बता रहीं थी कि यदि वह ईसाई बनते हैं तो उन्हें ₹20 लाख मिलेंगे। इसके अलावा उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा। इन महिलाओं ने उन परिवारों को मकान का भी प्रलोभन दिया। महिलाओं ने बस्ती के लोगों को आर्थिक तंगी और दुखों से बचने के लिए ईसाई प्रार्थना करने को कहा।

इन लोगों ने यहाँ ईसाई धर्म साहित्य भी बाँटा। इस बीच यहीं के कारोबारी धनवीर सिंह की निगाह उनके ऊपर पड़ गई। उन्होंने जब महिलाओं से पूछताछ की तो महिलाओं ने उन्हें जवाब दिया कि वह अपने धर्म का प्रचार कर रही हैं। उन्होंने धनवीर सिंह को भी ईसाई बनने का ऑफर दे डाला।

महिलाओं ने धर्मवीर सिंह को ईसाई बनने के फायदे गिनाने चालू कर दिए। एक महिला ने बताया कि वह दो महीने पहले ही ईसाई बनी है और उसे मकान और नकद रूपए मिले हैं। महिलाओं ने कारोबारी के बच्चों को मिशनरी स्कूल में पढ़ाने के फायदे गिनाए।

इसके बाद धनवीर सिंह ने पुलिस बुला ली। इन महिलाओं को पुलिस पकड़ कर ले गई। उनके साथ आए दोनों युवक भाग गए। महिलाओं के पास मौजूद प्रचार सामग्री को पुलिस ने जब्त कर लिया। धनवीर सिंह ने इस मामले में पुलिस के पास FIR दर्ज करवा दी है। पुलिस आगे जाँच करके इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

जिस भोजशाला को मुस्लिम कहते हैं कमाल मौलाना मस्जिद, वह मंदिर ही है: ASI ने हाई कोर्ट को बताया- मंदिरों के हिस्से पर बने हैं मस्जिद के स्तंभ, हिंदू प्रतीकों-छवियों को कर दिया विकृत

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में ASI ने कहा है कि भोजशाला का वर्तमान परिसर यहाँ पहले मौजूद मंदिर के अवशेषों से बनाया गया था। ASI ने रिपोर्ट में इस संबंध में कई जानकारियाँ भी दी गई हैं।

ASI ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है, “खंभों और की सजावट और उन पर बने भित्तिचित्रों की वास्तुकला से यह कहा जा सकता है कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे। बेसाल्ट के ऊँचे परिसर पर मस्जिद के स्तम्भ बनाते समय इनका दोबारा इस्तेमाल हुआ है। एक स्तम्भ, जिसमे चारों दिशाओं में खाने बने हुए हैं, उसमे देवताओं की नष्ट की हुईं छवियाँ भी हैं। एक स्तंभ के दूसरे आधार पर भी एक खाने में एक देवता की छवि को दर्शाया गया है। दो स्तंभों पर खड़ी छवियों को काट दिया गया है और वे पहचान में नहीं आती।”

ASI ने कोर्ट को बताया है कि यहाँ मानवों और जानवरों के भित्तिचित्रों को नष्ट कर दिया गया है क्योंकि मस्जिद के भीतर इनकी इजाजत नहीं होती है। ASI ने कहा है कि इनको तोड़ने के प्रयास और इनके टूटे हिस्से परिसर में देखे जा सकते हैं। ASI ने कहा है कि यहाँ मौजूद मस्जिद की दीवाल बाकी परिसर से नई है। उसका निर्माण उस सामान से किया गया है जो बाकी पूरे परिसर की निर्माण सामग्री से अलग है।

ASI ने कोर्ट को बताया, “वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और खुदाई था प्राप्त अवशेषों, मूर्तियों और शिलालेखों, कला और धर्मग्रंथों के अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मौजूदा परिसर पहले के मंदिर के अवशेषों से बनाई गई है।”

ASI ने यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को 98 दिन सर्वे करने के बाद 15 जुलाई, 2024 को सौंपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सर्वे में ASI को इस सर्वे के दौरान चाँदी, तांबे, एल्युमिनियम और स्टील के 31 सिक्के मिले हैं। यह सिक्के अलग-अलग ऐतिहासिक समय के हैं। इसमें दिल्ली के सल्तनत काल, मुग़ल काल और अलग-अलग समय के हैं। सिक्कों के अलावा 94 वास्तुशिल्प मिले हैं। इनमें मूर्तियाँ, मूर्तियों के खंडित हिस्से और पत्थरों पर उकेरी प्रतिमाएँ शामिल हैं।

इस सर्वे में यह भी पाया गया है कि यहाँ के स्तम्भों पर मूर्तियाँ उकेरी गई थी। इन पर बने हुए देवता सशस्त्र थे। बताया गया कि इन छवियों में ब्रम्हा, गणेश, नरसिंह और भैरव के साथ ही पशुओं की आकृतियाँ भी हैं। इनमें कुछ मानव आकृतियाँ भी हैं।

इसके अलावा इस परिसर के एक हिस्से में भित्तिचित्रों में मानव औए सिंह समेत कई पशुओं के मुख वाली आकृतियाँ भी हैं। एक हिस्से में यह विकृत की गई थीं जबकि कुछ जगह यह सुरक्षित थीं। यहाँ कई शिलालेख भी मिले हैं। इनमें कई रचनाएँ लिखी हुई हैं। इन रचनाओं से भोजशाला के रूप में जानकारी मिलती है।

बताया गया है कि सर्वे में मिले एक शिलालेख में यहाँ परमार वंश के राजा नरवर्मन का शासन था। इससे इंगित होता है कि यहाँ मुस्लिमों के शान करने से पहले हिन्दू शासक शासन कर रहे थे। रिपोर्ट में यहाँ से मिले अन्य कई शिलालेख और चिन्ह को रिपोर्ट में जगह दी गई है। यह रिपोर्ट लगभग 2000 पेज की है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई, 2024 को है।

मालूम हो कि इस संबंध में हिंदू पक्ष ने याचिका डाली हुई है कि भोजशाला उनकी माँ वाग्देवी का मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे अपना मजहबी स्थल बताकर सर्वे के खिलाफ बोल रहे हैं। इस मामले में 11 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सर्वे की अनमुति दी थी। 22 मार्च से सर्वे शुरू हुआ, 1 अप्रैल को मुस्लिम पक्ष इसे रोकने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, 29 अप्रैल को एएसआई के आवेदन पर सर्वे की समयसीमा और बढ़ाई गई, अब इस मामले में ASI ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है।

वाग्देवी मंदिर कैसे बना कमालुद्दीन मस्जिद

गौरतलब है कि भोजशाला विवाद बहुत पुराना विवाद है। हिंदू पक्ष का मत है कि ये माता सरस्वती का मंदिर है जिसकी स्थापना राजा भोज ने सन् 1000-1055 के मध्य कराई थी। सदियों पहले मुसलमान आक्रांताओं ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहाँ मौलाना कमालुद्दीन (जिस पर तमाम हिंदुओं को छल-कपट से मुस्लिम बनाने के आरोप हैं) की मजार बना दी थी जिसके बाद यहाँ मुस्लिमों का आना जाना शुरू हो गया और अब इसे नमाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

हालाँकि हिंदू पक्ष का कहना है कि ये उनका मंदिर ही है क्योंकि आज भी इसके खंभों पर देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे साफ दिखते हैं। इसके अलावा दीवारों पर ऐसी नक्काशी है जिसमें भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक हैं।