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कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में भी लागू किया कोटा, कन्नड़ भाषियों को नौकरियों में 50-75% रिजर्वेशन: हरियाणा के ऐसे ही फॉर्मूले को हाई कोर्ट ने बताया था ‘असंवैधानिक’

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य में निजी संस्थानों में कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षण लागू करने का फैसला लिया है। सिद्दारमैया कैबिनेट ने इस संबंध में एक बिल पर मुहर लगाई है। इस बिल में कहा है गया है कि राज्य की गैर प्रबंधकीय नौकरियों में 75% और प्रबंधकीय नौकरियों में 50% आरक्षण कन्नड़ भाषाई लोगों को दिया जाएगा।

मंगलवार (15 जुलाई, 2024) को बेंगलुरु में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए।

बिल के अनुसार कर्नाटक में जन्मा या कर्नाटक में पिछले 15 वर्षों से रह रहा कोई भी व्यक्ति कन्नड़ माना जाएगा और इसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। कन्नड़ आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को 12वीं पास होना चाहिए और इस दौरान उसके पास कन्नड़ एक विषय के तौर पर होनी जरूरी है। यदि उसके पास यह नहीं है तो उसे कन्नड़ सीखनी होगी।

बिल में यह भी कहा गया है कि यदि कम्पनियों को अपनी नौकरियों के लिए गैर कन्नड़ लोगों की भर्ती करना आवश्यक हो जाता है और कन्नड़ भाषाई उपलब्ध नहीं है, तो उन्हने छूट दी जा सकती है। इसके लिए कम्पनियों को आवेदन देना होगा और इस पर सरकार का निर्णय अंतिम होगा।

बिल में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी स्थिति में किसी भी दफ्तर, कम्पनी या फैक्ट्री में ऊँचे पदों पर काम करने वाले कन्नड़ 25% से कम नहीं होने चाहिए। इसके अलावा इनकी संख्या निचली नौकरियों में 50% रहनी ही चाहिए। ऐसा ना करने पर कम्पनियों को ₹25,000 तक का जुर्माना झेलना पड़ेगा। इस बिल को कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विधानसभा के चालू सत्र में पेश किया जाएगा।

100% आरक्षण का ट्वीट किया, फिर हटाया

जहाँ बिल में अधिकतम 75% आरक्षण की बात की गई है, वहीं राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक ट्वीट में C और D ग्रुप की नौकरियों में 100% आरक्षण की बात कही। उन्होंने लिखा, एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कल कैबिनेट की बैठक में राज्य के सभी निजी उद्योगों में “C और D” ग्रेड पदों पर 100% कन्नड़ लोगों को नियुक्त करना जरूरी बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी गई।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह हमारी सरकार की इच्छा है कि कन्नड़ लोगों को उनकी मातृभूमि में आरामदायक जीवन जीने का अवसर दिया जाए और कन्नड़ भूमि में नौकरियों से बाहर होने से बचाया जाए। हम कन्नड़ समर्थक सरकार हैं। हमारी प्राथमिकता कन्नडिगाओं के कल्याण की देखभाल करना है।” यह ट्वीट बाद में डिलीट कर दिया गया।

हरियाणा ने भी उठाया था कदम, हाई कोर्ट ने कर दिया था रद्द

कर्नाटक ऐसा पहला राज्य नहीं है जिसने स्थानीय लोगों को निजी नौकरियों में आरक्षण देने का निर्णय लिया हो। इससे पहले जनवरी, 2022 में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने राज्य के भीतर निजी नौकरियों में 75% पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया था। इस संबंध में हरियाणा ने कानून भी बनाया था। इस कानून को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नवम्बर, 2023 में असंवैधानिक करार दे दिया था और इसे रद्द कर दिया था।

हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हरियाणा ने कहा था कि बिल को रद्द करने के लिए जो कारण बताए गए हैं, वह सही नहीं हैं। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2024 में केंद्र से भी जवाब माँगा था। अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ही लंबित है।

100 लोगों से पूछताछ, 50 गवाह… स्वाति मालीवाल से बदसलूकी पर 500 पन्नों की चार्जशीट, दिल्ली पुलिस ने बताया- बिभव कुमार पर केस चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट के मामले के दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में आरोपित बिभव कुमार के खिलाफ 500 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। अभी तक आई जानकारी के अनुसार, 100 लोगों से पूछताछ के बाद इस चार्जशीट में 50 लोगों के बयान जोड़े गए हैं जिन्हें गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

गवाहों की लिस्ट में घटना के दौरान मुख्यमंत्री आवास में मौजूद दिल्ली पुलिस के सुरक्षा यूनिट के पुलिसकर्मियों, जाँच से जुड़े पुलिसकर्मी, मालीवाल की मेडिकल जाँच करने वाले एम्स के डाक्टरों व अन्य शामिल हैं। आरोप पत्र में पुलिस ने दावा किया है कि कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। बिभव के ऊपर सबूतों से छेड़छाड़, फोन फॉर्मेट करने, पासवर्ड छिपाने, सीसीटीवी फुटेज मिटाने आदि का आरोप लगा है।

जानकारी के मुताबिक ये चार्जशीट मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल की अदालत में दाखिल की गई, जिन्होंने बिभव कुमार की न्यायिक हिरासत को 30 जुलाई तक बढ़ाया था। बिभव कुमार इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि 30 जुलाई को बिभव को फिजिकली वहाँ प्रेसेंट होना होगा।

सुनवाई के दौरान अदालत को अभियोजन पक्ष ने बताया कि पुलिस ने आरोपित के खिलाफ चार्जशीट में आईपीसी की धारा 201 (अपराध के साक्ष्य को गायब करना), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 341 (गलत तरीके से रोकना), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354 बी (महिला का वस्त्र हरण करने के इरादे से उसके खिलाफ बल प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (किसी भी शब्द, हाव-भाव या वस्तु का उपयोग करके महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना) को जोड़ा है।

स्वाति मालीवाल मारपीट केस

उल्लेखनीय है कि 13 मई को सीएम आवास पर स्वाति मालीवाल से बदसलूकी करने का आरोप बिभव कुमार पर लगा था। स्वाति ने सामने आकर बताया था कि बिभव ने उन्हें छाती, पेट और कमर पर मारा था। इसके बाद बिभव को 18 मई को गिरफ्तार किया गया था और पूरे मामले में जाँच हुई थी। इस बीच बिभव ने कई बार बेल की गुहार लगाई। हालाँकि कोर्ट ने सबूतों को मिटाने और गवाहों को प्रभावित करने वाले बिंदु पर गौर करते हुए बेल खारिज कर दी। पहली याचिका ट्रायल कोर्ट में 27 मई को खारिज हुई। फिर 7 जून को और आखिरी वाली 12 जुलाई को।

‘गाड़ न दिया तो अपने बाप की बेटी नहीं’: कॉन्ग्रेस की जिस महिला नेता के लिए अलका लांबा ने कहा ‘जूते मार बाहर करो’ उसने दी चुनौती, कहा- यह ब्राह्मणों का अपमान

मध्य प्रदेश में महिला कॉन्ग्रेस की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हंगामा हो गया। यह बैठक महिला कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ले रहीं थी। इस बैठक में प्रदेश की महामंत्री मधु शर्मा को अलका लांबा ने जूते मारकर बाहर निकालने की बात की। इसके बाद मधु शर्मा बैठक से बाहर चली आईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बैठक भोपाल में मंगलवार (16 जुलाई, 2024) को हो रही थी। इसमें महिला कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों को बुलाया गया था। बैठक में 50 से अधिक पदाधिकारियों को शामिल होना था लेकिन यहाँ मात्र 19 पदाधिकारी ही पहुँचे थे।

बैठक में सिंगरौली की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री मधु शर्मा भी मौजूद थीं। उन्होंने यहाँ बैठक के लिए बनाई गई सूची पर आपत्ति जताई। शर्मा ने प्रश्न उठाया कि उनका इस सूची में नाम नहीं है। इस पर अलका लांबा ने उनके साथ बहस चालू कर दी।

अलका लांबा ने मधु शर्मा को तुरंत बैठक से बाहर निकलने को कह दिया। इस पर मधु शर्मा ने उन्हें जवाब दिया कि उनकी नियुक्ति अलका लांबा ने ही की और नियुक्ति पत्र भी दिया है। मधु शर्मा के इस जवाब पर अलका लांबा ने बता दिया कि मध्य प्रदेश में कई नियुक्तियाँ फर्जी हैं।

मधु शर्मा इस पर भड़क गईं और पूछा कि क्या पदाधिकारियों को बैठक में जूते खाने बुलाया गया है। अलका लांबा इसके बाद अभद्रता पर उतर आईं और कहा कि मधु शर्मा जूते खाने लायक हैं और उन्हें जूते मरकर बाहर निकाल दिया जाए। मधु शर्मा ने इस पर उन्हें चुनौती दे डाली कि उन्हें बैठक से कोई नहीं निकाल सकता। मधु शर्मा ने कहा कि अगर अलका लांबा अपने बाप की बेटी हैं तो उन्हें बैठक से निकाल कर दिखाएँ। मधु शर्मा ने कहा कि अगर ऐसा होगा तो अलका लांबा को जमीन में गाड़ देंगी, ऐसा नहीं किया तो अपने बाप की बेटी नहीं।

मधु शर्मा ने इसे ब्राम्हण और विंध्य क्षेत्र का अपमान बताया। मधु शर्मा ने कहा कि वह पिछले 4 दशक से कॉन्ग्रेस में हैं जबकि अलका लांबा कुछ समय पहले ही पार्टी में आई है। उन्होंने कहा कि लांबा पहले AAP में रह चुकी हैं। मधु शर्मा ने कहा कि अलका लांबा अव्यावहारिक महिला हैं। इस मामले में अलका लांबा की तरफ से कोई बयान अभी सामने नहीं आया है।

अंदर थे डोनाल्ड ट्रंप, बाहर AK-47-चाकू लेकर घूम रहे थे लोग: एक को पुलिस ने मार गिराया-दूसरा गिरफ्तार, रिपोर्ट में दावा- पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या करवाना चाहता है ईरान

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर पेंसिलवेनिया में हुए हमले के पहले उनकी हत्या की साजिश के बारे में खुफिया जानकारी सामने आई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि ईरान डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या के लिए हमला करवा सकता है। इस कारण से उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प की हत्या की साजिश की यह सूचना जून महीने में प्राप्त हुई थी। इसके बाद उनके आसपास अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। बताया गया कि यह सूचना एक मानव स्रोत के जरिए आई थी क्योंकि बीते कुछ दिनों में लगातार ईरान में ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा चल रही है।

पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के शासनकाल में इराक के भीतर बड़े ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी पर ड्रोन हमला हुआ था। इसमें सुलेमानी की मौत हो गई थी। यह हमला अमेरिका ने ही किया था। इसके बाद से लगातार ट्रम्प की जान को लेकर ईरान से खतरा है।

व्हाईट हाउस ने इस संबध में कहा है कि वह लगातार ट्रम्प के जीवन पर ईरानी खतरों का जायजा लेते रहते हैं। व्हाईट हाउस ने कहा कि यह खतरे ईरान की सुलेमानी की हत्या का बदला लेने की इच्छा के कारण पैदा होते हैं।

ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और द्वेषपूर्ण बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के एक प्रवक्ता ने इसी के साथ ट्रम्प को एक अपराधी बताया है। ईरान ने इस मामले पर कहा, “ईरान के दृष्टिकोण से, ट्रम्प एक अपराधी हैं, जिन पर जनरल सुलेमानी की हत्या का आदेश देने के लिए मुकदमा चलाया जाना चाहिए उन्हने उसे कानून की अदालत में दंडित किया जाना चाहिए। ईरान ने उन्हें कटघरे में लाने के लिए कानूनी रास्ता चुना है।”

ट्रम्प पर हमला करने वाले हमलावर का अभी कोई ईरान कनेक्शन सामने नहीं आया है। यह खतरा अलग से ही मालूम हुआ है। गौरतलब है कि 13 जुलाई, 2024 को रैली को संबोधित करते समय ट्रम्प पर एक 20 वर्षीय हमलावर ने गोलियाँ बरसा दी थीं। उसको मौके पर ही मार गिराया गया था।

रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन के पास चाकूधारी का एनकाउंटर

वर्तमान में अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन चल रही है। इसमें देश बहर से रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य शामिल हुए हैं। इस कंवेंशन में डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार JD वेंस भी शामिल हो रहे हैं। यह मिल्कॉवे शहर में हो रही है।

इस आयोजनस्थल के पास ही पुलिस ने एक चाकूधारी व्यक्ति को मार गिराया। वह इस कायर्क्रम के पास ही हाथों में दो चाकू लेकर लहरा रहा था। पहले पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास किया और आत्मसमर्पण करने को कहा। हालाँकि, चाकू लिए व्यक्ति ने उनकी बात नहीं सुनी और एक आदमी पर हमला कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने उसे गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। यह एनकाउंटर यहाँ मौजूद ओहायो राज्य की पुलिस ने किया। बताया गया कि मारा गया व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था और सड़कों पर ही घूमा करता था।

इसी कायर्क्रम स्थल के पास पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसके पास से एक AK-47 रायफल और उसकी गोलियाँ बरामद हुईं। बताया गया कि यह व्यक्ति मुंह पर मास्क पहने हुए था और कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूरी पर था। उसके पास सुरक्षाबलों द्वारा उपयोग किए जाने वाला एक बैग भी था।

पुलिस को उसकी हरकतों पर शक हुआ और उसकी तलाशी ली गई। इसके पास AK-47 का कोई वैध परमिट बरामद नहीं हुआ। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जिस DM ने पूजा खेडकर का किया ट्रांसफर, उनके खिलाफ महिला IAS ने उत्पीड़न की शिकायत की: ‘VIP ट्रीटमेंट’ की डिमांड के बाद पुणे से वाशिम भेजी गईं थी

साल 2023 के बैच की आईएस पूजा खेडकर का विवाद लंबा खिंचता जा रहा है। हाल में उनके डॉक्यूमेंट्स पर उठ रहे सवालों के बीच उनकी ट्रेनिंग पर रोक लगाते हुए उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में वापस बुला लिया गया है और उन्हें 23 जुलाई तक रिपोर्ट करने को कहा गया है । इधर पूजा खेडकर ने भी इस मामले में शिकायत करने वाले और उनका ट्रांसफर करने वाले पुणे जिलाधिकारी के खिलाफ प्रताड़ना का केस दर्ज कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूजा खेडकर ने ये शिकायत वाशिम थाने में पुणे जिलाधिकारी सुहास दिवासे के खिलाफ करवाई है। पुणे डीएम सुहास दिवासे ने ही मुख्य सचिव को पत्र लिखखर पूजा खेडकर की अनुचित माँगों के बारे में उन्हें अवगत करवाया था। जिसके बाद पहले पत्र चर्चा में आया और बाद में पूजा खेडकर से जुड़ी बातें खुलीं।

सुहास दिवासे की शिकायत के बाद सोशल मीडिया पर खलबली मच गई। इस दौरान पूजा खेडकर से जुड़ी तमाम जानकारियाँ तो सामने आई हीं, साथ ही उनके माता-पिता की दबंगई का भी पता चला। पहले खबर आई की पूजा खेडकर अपने ट्रेनी पीरियड में रहने के दौरान ही लाल-नीली बत्ती की गाड़ी, वीआईपी नंबर प्लेट और अलग चैंबर माँग रही हैं। बाद में पता चला कि उन्होंने जो अपनी दिव्यांगता का प्रमाण दिया है उसमें भी झोल है। फिर सामने आया कि ओबीसी आरक्षण पाने वाली पूजा खेडकर क्रीमी लेयर में आती हैं क्योंकि उनके माता-पिता दोनों प्रशासननिक अधिकारी रहे हैं। इसके अलावा उनके पिता दिलीप खेडकर द्वारा डॉक्टरों को धमकाने की बात भी सामने आई और माँ मनोरमा खेडकर की किसानों को धमकाने की वीडियो भी। धीरे-धीरे ये बात भी खुली कि पूजा खेडकर ने अपनी नाम, उम्र और अन्य चीजों में झोल किया हुआ था।

अमेरिकी राजनीति में नहीं थम रहा नस्लवाद और हिंदू घृणा: विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड के बाद अब ऊषा चिलुकुरी बनीं नई शिकार

सोमवार (स्थानीय समयानुसार 15 जुलाई) को रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन (आरएनसी) के दौरान रिपब्लिकन पार्टी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 5 नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार के रूप में चुना। इसके बाद ने ओहियो के सीनेटर जेडी वेंस को अपना रनिंग मेट और उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया। ट्रंप द्वारा रनिंग मेट घोषित किए जाने के बाद वेंस को बधाई मिली, लेकिन तुरंत ही उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा चिलुकुरी वेंस, जो धर्म से हिंदू हैं, के खिलाफ नस्लवादी, हिंदू विरोधी टिप्पणियों और अपशब्दों की बौछार शुरू हो गई।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने उषा को “अभिजात वर्ग” के लिए एक आदर्श उदाहरण और “राजनीतिक साइफर” के रूप में बताया। इस ‘राजनीतिक साइफर’ शब्द का इस्तेमाल कम से कम अच्छे संदर्भ में तो नहीं ही किया जाता।

यही नहीं, कई एक्स यूज़र्स और अमेरिकियों ने उषा के खिलाफ़ अपमानजनक हिंदूफोबिक बातें लिखी और मिश्रित नस्ल, जातीयता वाला ‘पजीत’ (पजीत शब्द का इस्तेमाल हिंदुओं को गाली देने के तौर पर किया जाता है।) आदि कहा। कई अन्य लोगों ने जातिवादी टिप्पणियाँ की, जबकि कई लोगों ने उन्हें ‘कुलीन’ वर्ग की महिला के तौर पर ही खारिज कर दिया। इसके साथ ही कुछ यूजर्स ने उन्हें हिंदुत्व का एक टूल बताया और उन पर ‘ईसाई-हिंदू दबदबे’ और ‘हिंदू-यहूदी गठजोड़’ आदि को आगे बढ़ाने और जोड़ने का आरोप लगाया।

मशहूर एक्स हैंडल्स में से एक ईयर ऑफ द क्रैकन ने एक थ्रेड शेयर किया है, जिसमें एक्स यूजर्स ने उषा चिलुकुरी के खिलाफ घृणित, नस्लभेदी, जातिवादी और ज़ेनोफोबिक टिप्पणियाँ की हैं।

एक एक्स यूजर ने लिखा कि उषा के माध्यम से रिपब्लिकन पार्टी ‘खोखले भारतीय अमेरिकियों’ का वोट हासिल करना चाहती है, जो पहचान की राजनीति को प्रमुखता देते हैं। इससे रिपब्लिकन पार्टी ‘हिंदू वर्चस्ववादियों’ के वोट भी हासिल करेगी, जो ईसाई-हिंदू गठजोड़ के बीच एकता बनाने का काम करते हैं।

एक अन्य यूजन ने दावा किया कि उषा, विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड सहित अमेरिकी राजनीति में सक्रिय सभी भारतीय मूल के या हिंदू धर्म से संबंधित लोग हिंदुत्व स्पेक्ट्रम से आते हैं।

फैक्ट्स चेजर नाम के एक्स हैंडल ने उषा और विवेक रामास्वामी के खिलाफ नस्लवादी और जातिवादी गालियाँ दीं।

एनोनप्रेस्बी ने लिखा कि जेडी वेंस के बारे में सबसे “घटिया तथ्य” यह है कि उनकी पत्नी एक “हिंदू” हैं, जिसके लिए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए, जैसे कि हिंदू होना अमेरिका में एक अपराध है और एक राजनीतिक रूप से अछूत धर्म है।

एक यूजर ने हिंदुओं और यहूदियों के बीच गठजोड़ का आरोप लगाते हुए लिखा कि “हिंदू-यहूदी थीसिस इस समय अपने चरम पर है।” संयोग से यह जोड़ा ईसाई और हिंदू धर्म से है।

उषा चिलुकुरी भी उन अमेरिकी में शामिल, जिन्हें हिंदू होने की वजह से बनाया गया निशाना

कई यूजर्स ने जेडी वेंस की पत्नी उषा चिलुकुरी वेंस के खिलाफ उनकी धार्मिक और जातिगत पहचान के लिए अपमानजनक और नस्लवादी, ज़ेनोफ़ोबिक-युक्त टिप्पणियाँ कीं, लेकिन उनमें से कुछ ने विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड को उनकी पहचान के लिए भी घसीटा। संयोग से इसी तरह की नस्लवादीटिप्पणियाँ तब सामने आईं जब विवेक और तुलसी ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में जोरदार चर्चा शुरू की और अपने लिए एक बड़ा वोटिंग फैन बेस खड़ा किया।

इसी साल मई में अमेरिकी टिप्पणीकार और लेखिका एन कूल्टर ने विवेक रामास्वामी के ही पॉडकास्ट पर बताया था कि वो उन्हें इसलिए वोट नहीं देती, क्योंकि वो भारतीय हैं।

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की दौड़ के दौरान कई मौकों पर उन्हें हिंदू धर्म पर सवालों का सामना करना पड़ा। उनसे अक्सर ये पूछा जाता कि अमेरिका एक ईसाई बहुल देश है, ऐसे में क्या कोई गैर-ईसाई व्यक्ति देश का प्रभावी नेतृत्व कर पाएगा? उन पर उठते सवाल दिखाते हैं कि अमेरिका में गैर-ईसाईयों और खास कर हिंदुओं के प्रति राजनीतिक रूप से कितनी गहरी घृणा है। कई मौकों पर रामास्वामी को अमेरिका की बड़ी हस्तियों की तरफ से भी ऐसे नस्लवाद का सामना करना पड़ा।

विवेक रामास्वामी को पिछले साल जुलाई में हैंक कुनेमैन नाम के अमेरिकी पादरी से हिंदू-विरोधी टिप्पणियाँ इसलिए सुननी पड़ी थी, क्योंकि वो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिक पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में थे। अपने कार्यक्रम में कुनेमैन ने कहा था, “हम एक देश के रूप में खतरे में हैं। खासकर जेन-Z और मिलेनियल्स मेरी बात पर ध्यान दें। आप लोगों को यह नया युवा लड़का (विवेक रामास्वामी) पसंद आ सकता है।”

उसने बेशर्मी से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था, “वो (रामास्वामी) प्रभु यीशु की सेवा नहीं करता है, तो क्या हम किसी ऐसे व्यक्ति को वोट देंगे, जो बाइबल को नहीं मानता?” यही नहीं, उसने आगे कहा था, “क्या आप (मतदाता) उसे व्हाइट हाउस में अपने अजीब देवताओं को रखने की जगह देंगे? वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो नीतियों को समझता हैं, ऐसे में क्या हम आँखें मूँद लेंगे?” हैरानी की बात नहीं है कि उसके बयान का लोगों ने समर्थन किया, जो अमेरिकी समाज के बड़े हिस्से में व्यापक रूप से फैले नस्लवाद की पोल खोलता है।

इसी तरह पिछले साल फरवरी में पॉलिटिकल कमेंटेटर एन कूल्टर ने ‘द मार्क सिमोन शो’ में निक्की हेली के खिलाफ नस्लभेदी बयान दिया था। उसने निक्की को बेतुक्री इंसान बताया था और हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि “गाय की पूजा का क्या मतलब है। वो (हिंदू) भूखे मर रहे हैं,और गाय की पूजा कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि उनके पास चूहों का एक मंदिर है, जहाँ वे चूहों की पूजा करते हैं।”

बता दें कि साल 2020 में अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य चुनी गई तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी, जब उन्होंने यूएसए में हिंदूफोबिया का जिक्र किया था। तुलसी गबार्ड ने कहा था कि कॉन्ग्रेस के लिए जब भी वो चुनावी तैयारी करती हैं या राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होती हैं, तब-तब उन्हें हिंदूफोबिया का अनुभव होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में नेता और मीडिया न सिर्फ इसे बर्दास्थ करते हैं, बल्कि इसे बढ़ावा भी देते हैं।

बता दें कि अपने मीडिया, सिनेमा, थिंक टैंक और राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से अमेरिका खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, जो एक समतावादी समाज के मॉडल का समर्थन करता है। वो कोशिश करता है कि उसका मॉडल दुनिया के अन्य देश भी अपनाएँ और धार्मिक स्वतंत्रता, नस्लवाद, ज़ेनोफोबिया आदि पर रोक लगाने के लिए अमेरिकी सरकार के निर्देशों को पानें। हालाँकि तथ्य यह है कि अमेरिका दुनिया भर में नस्लवाद, ज़ेनोफोबिया और धार्मिक घृणा अपराधों के लिए बदनाम रहा है। ये तब और भी सामने आ जाता है, जब कोई गैर ईसाई या अश्वेत व्यक्ति अपनी मेहनत से आगे बढ़ता है, तब यही अमेरिकी उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और उनके अंदर की घृणा बाहर आ जाती है।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

गया था बेटे का निकाह तय करने, होनेवाली बहू की अम्मी को ही लेकर भागा 10 बच्चों का पिता शकील: महिला के भी हैं 6 बच्चे, लड़का-लड़की परेशान

उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक अजीबोगरीब मामला देखने में आया है। यहाँ एक पिता अपने बेटे का निकाह तय करने के लिए जिस लड़की के घर में गया था, उसकी अम्मी को लेकर फरार हो गया। प्यार की नाटकीय कहानी के बाद यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस मामले में केस भी दर्ज कराया गया है। पुलिस जाँच कर रही है।

दरअसल यह पूरा मामला कोतवाली गंज डुंडवारा क्षेत्र का है। यहाँ दो महीने पहले दो मुस्लिम परिवारों ने अपने बेटे-बेटी की निकाह के लिए रिश्ता तय किया था। लड़की के अब्बू ने बताया कि उसकी बेटी का रिश्ता शकील के बेटे से तय हुआ था। रिश्ता तय होने के बाद शकील अक्सर उसके यहाँ आने-जाने लगा। इससे लड़के के अब्बू और लड़की की अम्मी के बीच नजदीकियाँ बढ़ गईं।

बातचीत होने के बाद दोनों के बीच प्यार हो गया। कुछ दिन बाद पता चला कि शकील अपने बेटे का निकाह को छोड़कर अपने निकाह के चक्कर में पड़ गया और समधन को लेकर गायब हो गया। इसकी जानकारी जब आरोपित के होने वाले समधी को लगी तो उसके होश उड़ गए। उसने आरोपित शकील के खिलाफ थाने में अपहरण का मामला दर्ज करवाया है।

इस घटना के बाद लड़के और लड़की का निकाह अधर में लटक गया। समधन के 6 बच्चे हैं। उसने अपनी ननद की एक बेटी को भी गोद ले रखा है। इस तरह उसके कुल 7 बच्चे हैं। वहीं, आरोपित शकील 10 बच्चों का अब्बू है। इसके बावजूद दोनों में प्यार पनप गया और दोनों अपने बच्चों की निकाह की परवाह किए बिना रफ्फू-चक्कर हो गए।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि घटना 3 जून को घटी और विवाह ईद के दिन 17 जून को होना तय था, जबकि अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि विवाह 17 जुलाई को होना था। खैर, घटना जब की भी हो गई, अपने बेटे और बेटी की निकाह से पहले लड़के के अब्बू और लड़की की अम्मी भाग एक दूसरे के साथ भाग गई।

कासगंज के सीओ विजय राणा के मुताबिक, थाना गंज डुंडवारा निवासी मोहम्मद पप्पू ने 8 जून को अपनी बीबी के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी। पप्पू ने 11 जुलाई को फिर प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि जिले के गणेशपुर निवासी शकील उसकी बीवी को भगाकर ले गया है। सीओ का कहना है कि अब एफआईआर लिखकर जाँच की जा रही है। जल्द बरामदगी की जाएगी।

महिलाओं का नहाते हुए छिपकर वीडियो बनाते थे नसीबुद्दीन और मुर्तजा, पॉर्न साइट पर डालकर कमाते थे पैसे: असम पुलिस ने दबोचा, फोन में मिले कई अश्लील क्लिप

असम पुलिस ने नागाँव में अपने घर में नहा रही एक महिला का वीडियो बनाने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान नसीबुद्दीन और मुर्तजा हसन के रूप में हुई है।

पीड़िता ने जब देखा कि कोई व्यक्ति वेंटिलेशन के ज़रिए उसका वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा है तो उसने शोर मचा दिया। उसकी चीखें सुनकर पीड़िता के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने आरोपित को पकड़ लिया और उनकी जमकर धुनाई की। इसके बाद दोनों को पुलिस को हवाले कर दिया गया। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन जब्त किए और खुलासा किया कि वे अश्लील वीडियो को पोर्न वेबसाइट पर अपलोड करके पैसे कमाते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये वारदात नागाँव के खुटीकोटिया इलाके की है, जो हैबरगाँव पुलिस चौकी इलाके में आता है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार (14 जुलाई) को महिला ने देखा कि कोई उसका वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा है। जब वह नहा रही थी, तो आरोपित वेंटिलेशन के ज़रिए मोबाइल फोन कैमरा इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद उसने शोर मचाया जिसके बाद उसके परिवार के सदस्य और पड़ोसी मौके पर पहुँच गए और उन्होंने आरोपितों की जमकर पिटाई कर पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस ने दोनों की पहचान नसीबुद्दीन और मुर्तजा हसन के रूप में की। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए और जाँच के बाद पाया कि उनके फोन में कई आपत्तिजनक वीडियो हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपित नहाती हुई या अन्य आपत्तिजनक स्थिति में महिलाओं के अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करते थे और फिर इन वीडियो को पोर्न साइट्स पर अपलोड कर पैसे कमाते थे।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा , “हमें उनके फोन पर कई आपत्तिजनक क्लिप और वीडियो मिले हैं। वे महिलाओं को नहाते, कपड़े बदलते और अन्य आपत्तिजनक स्थितियों में रिकॉर्ड कर रहे थे। वे पैसे कमाने के लिए उन वीडियो को विभिन्न पोर्न साइट्स पर अपलोड करते थे। हम उनसे पूछताछ कर रहे हैं।”

केरल में कॉन्ग्रेस नेता हुआ था गिरफ्तार

बता दें कि इसी साल मई महीने में केरल पुलिस ने कोल्लम के एक शौचालय में कैमरा लगाकर महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोप में आशिक बदरुद्दीन नामक एक स्थानीय युवा कॉन्ग्रेस नेता को गिरफ्तार किया था। बदरुद्दीन थेनमाला में शौचालय संचालक के तौर पर काम कर रहा था और महिलाओं द्वारा वीडियो बनाने की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपित आशिक बदरुद्दीन पुनालुर ब्लॉक में युवा कॉन्ग्रेस का महासचिव था।

उडुपी बाथरूम वीडियो मामला

इसी तरह की एक घटना बीते साल जुलाई महीने में कर्नाटक में हुई थी, जिसमें मार्च 2024 आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) ने तीन मुस्लिम लड़कियों के खिलाफ चार्जशीट दयर किया, जो आठ महीने पहले कर्नाटक के उडुपी शहर में नेत्र ज्योति कॉलेज के शौचालय के अंदर अपने हिंदू सहपाठी की रिकॉर्डिंग करते हुए पकड़ी गई थीं।

21 जुलाई 2023 को कर्नाटक के एक संगठन ऑल कॉलेज स्टूडेंट पावर (ACSP) ने उडुपी जिले के पुलिस अधीक्षक को नेत्र ज्योति कॉलेज में हुए इस अपराध के बारे में लिखा, जहाँ मुस्लिम समुदाय की तीन छात्राओं ने चुपके से हिंदू छात्राओं का वीडियो बनाया और मोबाइल फोन पर शेयर किया। ACSP द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, नेत्र ज्योति कॉलेज के छात्रों को 20 जुलाई को इस बारे में पता चला और उन्होंने इसका विरोध किया। इस पूरे मामले को वामपंथी इकोसिस्टम ने ‘डाउन प्ले‘ कर छिपाने की कोशिश की थी।

जिस मौलाना अकरम की मौत को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या बता हेट क्राइम का रोया था रोना, उसके घर से मिला सुसाइड नोट: दूसरा निकाह नहीं कर पाने से परेशान था 6 बच्चों का अब्बू

यूपी के मुरादाबाद में 8 जुलाई को मौलाना अकरम की मौत की हत्या हुआ थी, लेकिन उसका शव तीन दिन बाद घर के पास ही स्थित एक खहंडर में मिला था। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर इसे मुस्लिमों के खिलाफ हेट क्राइम बताकर प्रचारित किया था और हिंदुओं को कटघरे में खड़ा किया था। अब उसी मौलाना अकरम की मौत से पर्दा उठता दिख रहा है। दरअसल, मौलाना अकरम के घर से 2 पन्नों का एक सुसाइड नोट उसके परिवार जनों को ही मिला है, जिसमें साफ लिखा है कि वो निजी समस्याओं और दूसरा निकाह करने को लेकर परेशान था। ये सुसाइड नोट उर्दू में मिला है। फिलहाल पुलिस ने इस सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

बता दें कि मौलाना अकरम की मौत गोली लगने की वजह से हुई थी, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इसे हिंदुओं द्वारा की गई हत्या बताया था और सोशल मीडिया पर हिंदुओं को लेकर तमाम आरोप लगाए गए थे। यही नहीं, कई इस्लामिक कठमुल्लों ने दावा किया कि मौलाना मोहम्मद अकरम की हत्या लोकसभा चुनाव के बाद हुए राजनीतिक विवाद के चलते की गई, लेकिन अब ये साफ होता दिख रहा है कि मौलाना अकरम की मौत हत्या नहीं, बल्कि सुसाइड थी।

दरअसल, मौलाना अकरम का खून से सना शव मिला था, जिसके बाद डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी के प्रवक्ता सलमान निज़ामी ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “यूपी में एक और मौलाना मारा गया। जैसा कि मैंने कहा, कुछ सीटों पर जश्न दुख में बदल जाएगा। अंत में, मुस्लिमों को कोई मंत्रालय नहीं मिलेगा या वे सत्ता में नहीं आएंगे। न ही वे जिनके लिए उन्होंने वोट दिया था, उनके लिए बोलेंगे। लेकिन उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और तकलीफ़ उठानी पड़ेगी!”

एक अन्य पोस्ट में निज़ामी ने मौलाना की हत्या की घटनाओं का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी की चुप्पी पर सवाल उठाने के लिए किया और आरोप लगाया कि वे केवल चुनाव के दौरान मुस्लिमों का इस्तेमाल करते हैं और बाद में उन्हें छोड़ देते हैं। उसके पोस्ट में संकेतों माध्यम ये बताने की कोशिश की गई कि मौलाना अकरम की हत्या प्लानिंग की साथ हुई और वो इसलिए, ताकि मुस्लिमों को निशाना बनाया जा सके। उसका इशारा हिंदुओं की तरफ था।

कई अन्य सोशल मीडिया हैंडलों ने भी इसी तरह की कहानी फैलाई थी, जिसमें कहा गया था कि मौलाना की हत्या लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद एक मुस्लिम विरोधी नफरती अपराध था।

हालाँकि, अब यह बात सामने आई है कि मौलाना ने आत्महत्या की है और किसी राजनीतिक साजिश के तहत उनकी हत्या नहीं की गई है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना रामपुर जिले के चौपुरा इलाके के रहने वाले थे और चौपुरा से 18 किलोमीटर दूर भैसिया गांव में स्थित मस्जिद के मौलाना थे। वह अपनी पत्नी और 6 बीवी- 4 बेटियों और 2 बेटों के साथ गाँव में रहते थे। 11 जून को मौलाना का शव उसके घर के पास एक अज्ञात जगह पर मिला। पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि मौलाना की बीवी और 3 बच्चे घटना से 2 दिन पहले ही उसे छोड़कर चले गए थे, जबकि उसके 3 बच्चे मौलाना के पास ही रह रहे थे।

मौलाना की मौत की रात को लेकर यह दावा किया गया कि किसी ने उन्हें उनके घर के बाहर बुलाया था जिसके बाद उनका शव पाया गया। हालाँकि, मौलाना के परिवार वालों ने उनके घर से मिले सुसाइड नोट को पुलिस को सौंप दिया है। इसमें मौलाना ने अपने नोट में कई निजी बातें लिखी थीं, जिन्हें आगे की जाँच के लिए फोरेंसिक को भेज दिया गया है। इस नोट में ये भी लिखा गया है कि वो दूसरा निकाह करना चाहते थे, लेकिन कर नहीं पाए।

मौलाना अकरम के परिजनों ने सुसाइड नोट की लिखावट को मौलाना अकरम का ही बताया है। इस मामले में पुलिस ने कहा है कि वो फिलहाल जाँच कर रही है।

‘एक भी धर्मांतरण हुआ तो तौकीर रजा की जीभ काट लूँगा’: सामूहिक निकाह के ऐलान के बाद माहौल गर्म, पुलिस बोली- शांति-व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने देंगे

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने प्रशासन से सामूहिक धर्मांतरण और निकाह के लिए अनुमति माँगी है। हालाँकि, पुलिस ने साफ कह दिया है कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। जोर-जबरदस्ती करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

बरेली दंगे के मास्टमाइंड मौलाना तौकीर के ऐलान पर एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि किसी को भी शहर या जनपद की शांति व्यवस्था के साथ शरारत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अनुराग आर्य ने कहा कि 15 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट को एक आयोजन के लिए आवेदन दिया गया था, जिसकी जाँच पुलिस कर रही है। जाँच के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।

तौकीर रजा के ऐलान के बाद अब तक 512 मुस्लिम लड़कियों की घर वापसी करवाकर हिंदू युवकों से शादी करवाने वाले पंडित केके शंखधर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि तौकीर रजा 2010 दंगे का आरोपित है और वह सावन के महीने में शहर का माहौल बिगाड़ना चाहता है। तौकीर रजा को लेकर उन्होंने कहा, “तुम्हारे पूर्वज भी तो हिंदू थे। तुम भी आ जाओ। हम तुम्हारा भी घर वापसी करवाते हैं।”

हिंदू संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है और तौकीर रजा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग भी की है। मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने मौलाना तौकीर रजा की जीभ काटने की धमकी दी है। उन्होंने कहा, “एक भी हिंदू का धर्म परिवर्तन कराया तो बरेली आकर जीभ काट दूँगा। धर्म परिवर्तन करा के देख लें, हम बरेली में तुम्हें रहने लायक नहीं छोड़ेंगे।”

दिनेश ने मौलाना तौकीर रजा की संपत्ति की जाँच कराने और उनके ठिकानों पर बुलडोजर चलाने की भी माँग की है। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा जैसे लोग हिंदुस्तान का खाते हैं और गुण पाकिस्तान का गाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में रहकर हिंदुस्तान में दंगा भड़काने का काम किया जा रहा है। यह हिंदुओं का देश है और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने की बात की जा रही है।

दरअसल, तौकरी रजा ने मीडिया को कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है। मौलाना ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है।

मौलाना तौकीर ने कहा कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।