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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में NDA की बड़ी जीत, सभी 9 उम्मीदवार जीते: INDI गठबंधन कर रहा 2 से संतोष, 1 सीट पर करारी हार

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में NDA गठबंधन (महायुती) ने बड़ी जीत हासिल की है। इस चुनाव में उतरे उसके सभी उम्मीदवार जीत गए हैं। INDI गठबंधन को इन चुनावों में एक सीट पर हार झेलनी पड़ी है। INDI गठबंधन के कुछ विधायकों के सत्ता पक्ष के लिए वोट करने की भी सूचना है।

गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को आयोजित इन चुनावों में भाजपा महायुती ने 11 में से 9 सीटें हासिल की। उसने इन चुनावों के लिए 9 उम्मीदवार ही उतारे थे। इस प्रकार उसके सभी उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। इन 9 में 5 पर भाजपा जबकि 2 पर NCP (अजित पवार) और 2 पर शिवसेना (शिंदे) को जीत हासिल हुई।

दूसरी तरफ INDI गठबंधन की तरफ से कॉन्ग्रेस, शिवसेना UBT और PWP पार्टी ने अपना एक-एक उमीदवार उतारा था। इनमें से PWP के उम्मीदवार जयंत पाटील को शरद पवार की NCP का समर्थन हासिल था। वोटों की गिनती के बाद शिवसेना और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जीत हासिल कर सके जबकि जयंत पाटील को हार का मुंह देखना पड़ा।

महायुती में भाजपा की तरफ से पंकजा मुंडे, परिणय फुल्के, अमित गोरखे, योगेश तिलेखर और सदाभाव खोत ने जीत हासिल की। वहीं NCP (अजित पवार) के राजेश विटेकर और शिवाजीराव गरजे भी जीत हासिल करने में सफल रहे। इसके अलावा शिवसेना की भावना गवली और कृपाल तमाने ने भी जीत हासिल की।

कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रद्न्य साटव जबकि शिवसेना (UBT) की तरफ से मिलिंद नार्वेकर भी जीत गए। इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी सूचना है। बताया गया कि INDI गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस के 7 विधायकों ने महायुती को वोट दिया है।

इस चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 23 विधायकों का वोट चाहिए था। महायुती की तरफ से उतारे गए उम्मीदवारों में से अधिकांश को 23 से अधिक वोट मिले। कुछ उम्मीदवारों को 26 तो कुछ को 24 वोट मिले। इस प्रकार उन्हें जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई।

वहीं दूसरी तरफ INDI गठबंधन के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर 59 वोट मिले। इन तीनों पार्टियों के पास इस चुनाव में 66 वोट थे, इस प्रकार इनका 7 वोट का नुकसान दिखा। इसी कारण से जयंत पाटील की हार भी हुई, वह 23 की जगह केवल 12 वोट पा सके। उन्हें इस गठबंधन ने इस उम्मीद में उतारा था कि अजित पवार की NCP के कुछ विधायकों का समर्थन मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इन विधानपरिषद के इन चुनावों से महायुती को बढ़त मिली है। इन चुनावों से उसकी लोकसभा चुनावों में हुई बड़ी हार का असर भी कम होते हुए दिख रहा है। ऐसे में अब देखना होगा कि आगे विधानसभा चुनावों क्या माहौल रहता है।

केरल के शिव मंदिर के ट्रस्ट में शामिल हुए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता तो भड़का नेतृत्व, दिया अल्टीमेटम: जिलाध्यक्ष पीके फैसल बोले – ये सही नहीं किया

केरल के कासरगोड जिले में स्थित एक मंदिर के ट्रस्ट में पद लेना कॉन्ग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने पाँच नेताओं और कार्यकर्ताओं को पद छोड़ने सम्बन्धी अल्टीमेटम थमा दिया है। कासरगोड के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा है कि इन नेताओं ने मंदिर ट्रस्ट में पद लेकर अच्छा नहीं किया है।

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, कासरगोड में भगवान शिव को समर्पित मल्लिकार्जुन मंदिर के ट्रस्ट में हाल ही में 2 कॉन्ग्रेस नेताओं और 3 कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया गया था। इनमें कासरगोड के जिला सचिव गोविंदन नायर, महिला कॉन्ग्रेस सचिव उषा एस, जिला परिषद की सदस्य अर्जुनन थयलंगादी और उमेश के समेत मनोज एसी को मंदिर के ट्रस्ट में जगह दिया गया था। इनमें से गोविंदन नायर को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है।

इन लोगों की नियुक्त के बाद स्थानीय कॉन्ग्रेस नेतृत्व भड़क गया है। उसने इन नेताओं पर प्रश्न उठाए हैं और कार्रवाई की माँग की है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कदम को वामपंथी सरकार द्वारा दी गई पोस्ट माना है। कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने अब इन नेताओं को इन पदों से हटने को कहा है। अगर यह नेता ऐसा नहीं करते तो इन पर पार्टी कार्रवाई होगी।

इस मामले में कासरगोड के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष पीके फैसल ने बताया कि इन नेताओं ने यह पद लेकर सही काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसकी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता लगातार शिकायत कर रहे थे। फैसल ने बताया इससे यह सन्देश जा रहा था कि इस सीट पर जीत के लिए वामपंथी सरकार ने यह पद उपहार में दिए हैं।

गौरतलब है कि जिस मंदिर ट्रस्ट में यह पद दिए गए हैं, वह मालाबार देवास्वम बोर्ड के अंतर्गत आता है। उसने इन पदों के लिए आवेदन माँगे थे। इन पदों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओ ने भी आवेदन दिए थे लेकिन उन्हें साक्षात्कार में चयनित नहीं किया गया। ऐसे में कॉन्ग्रेस नेता बोर्ड में शामिल हो गए। इन पदों पर कॉन्ग्रेस नेताओं की नियुक्ति को लेकर अन्य कई प्रश्न भी उठे हैं। दरअसल, नियमानुसार यह पद नेताओं को नहीं दिए जाते, लेकिन इस बार इन सभी पर कॉन्ग्रेस नेताओं की नियुक्ति हुई है।

इस्लाम नहीं अपनाने पर दोस्त की हिंदू पत्नी का सिर कर दिया कलम, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शोएब अख्तर को जमानत देने से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 9 जुलाई को एक हिंदू लड़की की हत्या के आरोपित शोएब अख्तर को जमानत देने से इनकार कर दिया। दरअसल, लड़की ने साल 2020 में इस अपराध के सह-आरोपित एजाज अहमद से शादी की थी, लेकिन शादी के बाद उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया जा रहा था। लड़की ने जब धर्मांतरण से इनकार कर दिया तो उसकी हत्या कर दी गई।

न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने अपराध की प्रकृति, आवेदक शोएब अख्तर को सौंपी गई भूमिका और मुकदमे के चरण को ध्यान में रखते हुए आरोपित को जमानत पर रिहा करने का कोई ठोस कारण नहीं पाया। शोएब अख्तर पर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में चोपन पुलिस ने IPC की धारा 302 और 201 (सबूतों को छिपाना) के तहत मामला दर्ज किया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपित शोएब अख्तर ने प्रिया की इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उसने सह-आरोपित उसके दोस्त एजाज अहमद से शादी करने के बाद इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया था। जैसा कि ऑपइंडिया ने 2020 में बताया था कि आरोपित एजाज प्रिया सोनी को तब तक अपने घर नहीं लाना चाहता था जब तक कि वह इस्लाम धर्म नहीं अपना ले।

चूँकि पीड़िता अपनी हिंदू पहचान छोड़ने के लिए राजी नहीं थी, इसलिए एजाज ने उसे ओबला इलाके में एक किराए के कमरे में रखा। यहाँ वह पीड़िता पर इस्लाम अपनाने का लगातार दबाव बना रहा था। जब मृतका ने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया तो गुस्साए एजाज ने अपने एक अन्य दोस्त शोएब अख्तर को बुलाया। दोनों मुस्लिम युवक प्रिया को पास के जंगल में ले गए और वहाँ उसकी हत्या कर दी।

दरअसल, सिंदुरिया गाँव के एक चौकीदार को 21 सितंबर 2020 को सूचना मिली कि नाले में एक सिर कटी एक लाश पड़ी है। पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर उसकी पहचान शुरू कर दी। बाद में पता चला कि यह लाश प्रिया नाम की एक हिंदू महिला की थी। प्रिया ने कुछ दिनों पहले ही एजाज अहमद उर्फ आसिफ के साथ शादी की थी। हालाँकि, वह धर्मांतरण नहीं करना चाहती थी।

मृतका की बहन शर्मिला ने कहा कि प्रिया उसे बताती थी कि एजाज अहमद और उसका दोस्त शोएब अख्तर उस पर इस्लाम अपनाने का लगातार दबाव बना रहे थे, जबकि वह ऐसा करने के लिए तैयार नहीं थी। अदालत के आदेश में कहा गया है, “दोनों आरोपियों को एक साथ पकड़ा गया और उनके खुलासे पर आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।”

यह दूसरी बार है जब शोएब अख्तर ने जमानत की अर्जी दाखिल की है। इसी साल जनवरी महीने में हाईकोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। यह उसकी दूसरी जमानत अर्जी है। इसे भी इसी आधार पर कोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इस मामले का निपटारा जल्द करने का आदेश दिया है।

कर्नाटक के बाद अब हिमाचल में फँसी कॉन्ग्रेस सरकार: गारंटी योजना के तहत सबको मुफ्त बिजली देने का किया था ऐलान, अब लगाई ये बंदिश

हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य में मुफ्त बिजली योजना बंद करने का निर्णय लिया है। कॉन्ग्रेस सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य में आयकर भरने वालों को मुफ्त बिजली नहीं मिलेगी। यह निर्णय राज्य की आर्थिक हालत पतली होने के कारण लिया गया है।

गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को शिमला में हुई सुक्खू सरकार की कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि राज्य के आयकर दाता परिवारों को मासिक तौर पर 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ नहीं मिलेगा। अब तक इन परिवारों को भी 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिला करती थी।

इस योजना को केवल आयकर भरने वाले परिवारों के लिए ही हटाया गया है। आयकर ना भरने वाले परिवारों और गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के लिए महीने की 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिलती रहेगी।

कॉन्ग्रेस सरकार ने इस निर्णय के पीछे राज्य की आर्थिक हालत बताई है। कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा है कि राज्य की आर्थिक हालत खराब है और बिजली कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए भी पैसे नहीं हैं, ऐसे में इन परिवारों के लिए सब्सिडी हटा दी गई है।

हिमाचल प्रदेश के सभी परिवारों को जयराम ठाकुर की भाजपा सरकार ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का ऐलान किया था। उन्होंने राज्य के 14 लाख परिवारों को मुफ्त बिजली दी थी। अब कॉन्ग्रेस सरकार कह रही है कि यह सब्सिडी उसके लिए बोझ है।

कॉन्ग्रेस सरकार जहाँ अब मुफ्त बिजली बंद करने जा रही है, तो वहीं वह इससे पहले राज्य 300 यूनिट मुफ्त बिजली वादा कर रही थी। कॉन्ग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य में गारंटी दी थी कि वह सभी परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त देगी। यह वादा अभी तक पूरा नहीं कर पाई है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश से पहले कर्नाटक में गारंटी स्कीम लाई गईं थी। इनमें भी मुफ्त बिजली, मुफ्त राशन, महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और बेरोजगारी भत्ता समेत महिलाओं को नकदी हस्तांतरण योजना शामिल थी। इन गारंटियों के कारण अब राज्य की आर्थिक हालत पर असर पड़ रहा है, राज्य के अधिकारी भी मान रहे हैं कि इसके कारण विकास कार्य नहीं हो रहे।

कॉन्ग्रेस सरकार ने लिया ₹19,000 करोड़ कर्ज

बिजली सब्सिडी बंद करने के बीच कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ा दिया है।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP के 5% के ऊपर है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

ब्रिटेन के गुरुद्वारे में माथा टेकने के बहाने घुसा नाबालिग, कटार उठाकर श्रद्धालुओं पर कर दिया हमला: 2 सिख युवतियाँ घायल, पुलिस ने आरोपित को दबोचा

ब्रिटेन के ग्रेवसेंड स्थित एक गुरुद्वारे में 17 साल के एक नाबालिग ने श्रद्धालुओं पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में 2 पंजाबी युवतियाँ घायल हो गई हैं। उनके हाथों में चोट आई हैं। बाद में पुलिस ने श्रद्धालुओं की मदद से आरोपित नाबालिग को दबोच लिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस दिख रहा है कि नाबालिग जमीन पर गिरा हुआ है और पुलिस वाले उसे दबोच रहे हैं।

केंट पुलिस ने बताया कि गुरुवार (11 जुलाई 2024) की रात 8.10 बजे अधिकारियों को सिरी गुरु नानक दरबार गुरुद्वारा में यह घटना हुई। घटना के दौरान कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन दो महिलाओं को चोट लगीं, जिसके कारण अस्पताल में उनका इलाज करवाया गया। घटनास्थल से एक धारदार हथियार बरामद किया गया है।

सामने आए फुटेज में दिख रहा है कि खून से लथपथ एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी और गुरुद्वारा के श्रद्धालु पकड़े हैं। बाद में पुलिस ने शख्स को गिरफ्तार कर लिया। माना जाता है कि नाबालिग ने इस घटना को हेट क्राइम के तहत अंजाम दिया है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि किसी और की तलाश नहीं की जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों कहना है कि गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धालु माथा टेक रहे थे। इसी दौरान आरोपित किशोर सिख श्रद्धालु बनकर गुरुद्वारा परिसर में घुसा। उसने माथा टेकते समय वहीं रखी कृपाण उठा ली और श्रद्धालुओं की बढ़कर उन पर हमला करना शुरू कर दिया। इस घटना में दो पंजाबी युवतियां घायल हो गई। एक युवती के हाथ पर चोट आई, जबकि दूसरी की बाजू और हाथ से खून बह रहा था।

केंट पुलिस के डिटेक्टिव सुपरिटेंडेंट इयान डायबॉल ने कहा, “हम गुरुद्वारे में हुई इस घटना के संबंध में सिख समुदाय की चिंताओं को समझते हैं। हालाँकि, हम इसे एक अलग घटना के रूप में देख रहे हैं। हम लोगों को आश्वस्त कर रहे हैं कि गश्ती दल इलाके में रहेंगे। हम सिख समुदाय को उनके निरंतर समर्थन और सहायता के लिए धन्यवाद देते हैं।”

इस घटना को लेकर ग्रेवेसेंड के लेबर सांसद लॉरेन सुलिवन ने कहा, “मैं आज शाम ग्रेवसेंड के गुरुद्वारे में हुई घटना से स्तब्ध और दुखी हूँ। मेरी संवेदनाएँ उन लोगों, उनके परिवार और उनके समुदाय के साथ हैं।मैं इस भयानक घटना पर उनकी त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आपातकालीन सेवाओं को धन्यवाद देना चाहूँगी।”

‘मेरी माँगें मान लो, नहीं तो परिवार सहित बन जाऊँगा मुस्लिम’: गुजरात के कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी बोले- मेरे दादा नवाब के लोगों को नंगा करके मारते थे

गोंडल और जूनागढ़ के दो नेताओं के बीच का झगड़ा राजनीति से होते हुए सामाजिक और अब धर्म तक पहुँच गया है। मामला गोंडल के पूर्व भाजपा विधायक जयराज सिंह जाडेजा और जूनागढ़ के कॉन्ग्रेस नेता एवं दलित समाज के अध्यक्ष राजू सोलंकी के बेटों के बीच का है। दोनों परिवारों के बीच विवाद इस हद तक बढ़ गया है कि दलित नेता राजू सोलंकी ने परिवार समेत इस्लाम धर्म अपनाने की धमकी दी है।

आगे बढ़ने से पहले संजय सोलंकी और उनके पिता राजू सोलंकी एवं उनके परिवार के बारे में जानते हैं। संजय सोलंकी जूनागढ़ से NSUI के नेता हैं। उनके पिता राजू सोलंकी दलित समुदाय के नेता एवं कॉन्ग्रेस से पूर्व पार्षद हैं। राजू सोलंकी की पत्नी यानी संजय सोलंकी की माँ गीताबेन सोलंकी भी नेता हैं। वह जूनागढ़ में पार्षद रह चुकी हैं।

वह एक बार भाजपा से पार्षद बने और बाद में पार्टी बदलकर दो बार कॉन्ग्रेस से चुनाव लड़े। राजू सोलंकी खुद को अंबेडकरवादी बताते हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और सार्वजनिक मंचों पर अपने पूर्वजों को क्षत्रिय बताते हुए दलित समुदाय को शिक्षित और संगठित होने का संदेश देते रहते हैं। अखबार दिव्य भास्कर से बात करते हुए राजू सोलंकी ने अपने परिवार को पूँजीपति बताया है।

कहाँ से शुरू हुआ पूरा विवाद?

घटना 30 मई 2024 की है। गोंडल के रहने वाले भाजपा के पूर्व विधायक जयराज सिंह जडेजा के बेटे ज्योतिरादित्य सिंह उर्फ गणेश जड़ेजा किसी काम से जूनागढ़ गए थे। इसी दौरान ट्रैफिक में गाड़ी चलाने को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी के बेटे संजय सोलंकी से उनका विवाद हो गया। इस बीच दोनों के बीच तीखी नोक-झोंक हो गई और मामला मारपीट तक पहुँच गया।

इस घटना के बाद संजय सोलंकी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। संजय ने दावा किया कि ज्योतिरादित्य सिंह उर्फ गणेश जड़ेजा ने कार में उनके साथ मारपीट की और उनका वीभत्स वीडियो बनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें गोंडल ले जाया गया, जहाँ उनके साथ मारपीटा की गई, जातीय दुर्व्यवहार किया गया और धमकी दी गई।

शिकायत के बाद जूनागढ़ ए डिवीजन पुलिस ने गणेश जड़ेजा समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद सभी को कोर्ट में पेश किया गया और उनकी रिमांड माँगी गई। हालाँकि, कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए सभी को न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया। इस बीच गणेश समेत तमाम लोगों ने कोर्ट में जमानत की अर्जी दी, लेकिन वह खारिज हो गई। सभी फिलहाल जेल में हैं।

झगड़े को पहले सामाजिक और फिर राजनीतिक रंग दिया गया

इस मामले में न्यायपालिका अपना काम कर रही है। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी और उनके द्वारा संचालित दलित संगठन लगातार शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। दो व्यक्तियों के झगड़े को लेकर दो समाजों को आमने-सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। राजू सोलंकी और कई अन्य तथाकथित दलित नेताओं के नेतृत्व में जूनागढ़ से गोंडल तक रैलियाँ निकाली गईं।

इस बीच गोंडल की सड़कों पर घूम-घूम कर दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाली हरकतें की गईं। राजू सोलंकी ने गोंडल में दलित समाज का महासम्मेलन आयोजित किया, जहाँ मंच से कई ऐसी बातें कही गईं जिससे दोनों समाज के बीच विवाद कम होने की बजाय और बढ़ गया। इतना ही नहीं, इस पूरे प्रदर्शन को राजनीतिक रंग देने की भी कोशिश की गई।

राजू सोलंकी ने माँग की है कि इस मामले में गोंडल के पूर्व विधायक और गणेश के पिता जयराज सिंह जड़ेजा को भी गिरफ्तार किया जाए। राजू ने दावा किया कि जयराज सिंह की शह पर ही गणेश ने उनके बेटे को पीटा है। राजू ने माँग की कि उनके खिलाफ धारा 120 बी के तहत कार्रवाई की जाए। हालाँकि, उन्होंने अभी तक अपनी बात साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।

मामला यहीं नहीं खत्म हुआ। जयराज सिंह को गिरफ्तार कर जेल में डालने की माँग चल ही रही थी कि राजू सोलंकी ने गणेश की माँ और गोंडल की मौजूदा विधायक गीताबा जड़ेजा से इस्तीफे की माँग कर दी। उन्होंने कहा कि अगर गीताबा जाडेजा ने बीजेपी विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया या राज्य सरकार ने उनका पद वापस नहीं लिया तो वह गाँधीनगर पहुँचकर दलित समुदाय के साथ उग्र प्रदर्शन करेंगे।

राजू सोलंकी ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से किसी भी पार्टी से समर्थन नहीं मिल रहा है। दिव्य भास्कर को राजू सोलंकी ने बताया कि वह कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी और उत्तर प्रदेश के तथाकथित दलित नेता चंद्रशेखर रावण उनके संपर्क में हैं। इस तरह वे मामले को सुलझाने के बजाय वह राज्य में दो समाज के बीच खाई पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस्लाम कबूल करने की धमकी देकर धार्मिक रंग देने की कोशिश

एक तरफ ये माँगें की जा रही हैं तो दूसरी तरफ कानून गणेश जड़ेजा कानून का सामना कर रहे हैं। हालाँकि, अपनी दाल नहीं गलते देख राजू सोलंकी ने विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट और मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई तो वे अपने परिवार सहित इस्लाम अपना लेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के करीब 150 परिवार भी उनके साथ इस्लाम कबूल करेंगे।

राजू सोलंकी हाल ही में अपने दो-तीन साथियों के साथ कलेक्टर कार्यालय जाकर वहाँ से धर्मांतरण के लिए फॉर्म भी लाए हैं। समाज में बदलाव लाने की अपनी इच्छा के बारे में अक्सर मंच से बोलने वाले राजू को हाल ही में यह कहते हुए सुना गया कि वह हिंदू धर्म से तंग आ चुके हैं। उनका कहना है कि हिंदू धर्म में उन्हें अधिकार नहीं है। वे सरकार और प्रशासन पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

वे न्याय नहीं मिलने की बात कहकर मीडिया में को बता रहे हैं कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई और जयराज सिंह को गिरफ्तार नहीं किया गया और गीताबा का विधायक पद नहीं लिया गया तो वे अपने परिवार के 150 लोगों के साथ इस्लाम कबूल कर लेंगे। हालाँकि, उनके इस बयान से मुस्लिम समाज में नाराजगी है और मुस्लिम नेताओं ने व्यक्तिगत झगड़ों के बीच में इस्लाम को न लाने को कहा है।

हम ‘डेढ़ दरबार’, हमारे दादाजी ने जूनागढ़ नवाब के आदमियों को नंगा करके मारा था: राजू सोलंकी

इन सबके बीच राजू सोलंकी का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी मंच से दो समाजों के बीच जहर घोलने वाला बयान देते सुनाई दे रहे थे। उन्होंने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा, “आप संविधान के आने के बाद लड़ रहे हैं, मेरे दादाजी ने आजादी से पहले नवाबशाही के दौरान नवाब के लोगों को मारा था।”

वीडियो में राजू सोलंकी आगे कहते दिख रहे हैं, “मेरे दादाजी के पिता बेचर बापा की वर्षों पहले जूनागढ़ में हत्या कर दी गई थी, क्या हुआ होगा? नवाबशाही काल में मेरे दादा सोमभाई नवाब के आदमियों को नंगा करके मारते थे। मेरा रुतबा उससे (पूर्व विधायक जयराजसिंह) ज्यादा है। उससे सवा गुना ज्यादा है, इसलिए मैं गोंडल आया हूँ।”

खुद को बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का अनुयायी बताते हुए कॉन्ग्रेस नेता राजू सोलंकी ने जयराज सिंह जडेजा को चुनौती दी। राजू सोलंकी ने जाति की बात करते हुए कहा, “तू भले ही दरबार हो (गुजरात में क्षत्रिय ठाकुरों को दरबार कहकर बुलाया जाता है), हम तुझसे डेढ़ गुना ज्यादा दरबार हैं।” इसके अलावा, वीडियो में इस्लाम अपनाने और राजू को रफीक बनाने की भी बात कही गई है।

पुलिस पर हमला, हत्या की धमकी, अपहरण: राजू सोलंकी और बेटे संजय का आपराधिक प्रोफ़ाइल

दबाव की राजनीति करने वाले राजू सोलंकी पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों पर भी गंभीर अपराध दर्ज हैं। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजू सोलंकी के खिलाफ साल 2014 से साल 2023 तक राजू पर पुलिस पर हमला, हत्या की धमकी, मारपीट, डकैती, सूदखोरी, अवैध हथियार, अपहरण और जुआ जैसे मामले दर्ज हैं।

वहीं, राजू सोलंकी के बेटे और एनएसयूआई नेता संजय सोलंकी का भी आपराधिक इतिहास है। संजय सोलंकी के खिलाफ 3 अलग-अलग अपराध दर्ज हैं। इसके साथ ही राजू पुत्र देव सोलंकी के खिलाफ भी 2 अपराध दर्ज हैं। राजू सोलंकी पर मारपीट और अपहरण का पहला मामला 8 जुलाई 2014 को दर्ज किया गया था। फिर 8 अक्टूबर 2014 को पुलिस कॉन्स्टेबल से मारपीट का मामला दर्ज किया गया।

अक्टूबर माह में ही 29 तारीख को राजू सोलंकी के खिलाफ जुआ खेलने का अपराध दर्ज किया गया था। इस बार छापेमारी के दौरान उन्होंने एक बार फिर पुलिस पर हमला किया और एक सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसे एक अलग अपराध के रूप में भी दर्ज किया गया। इसके बाद 12 मार्च 2016 को उनके खिलाफ मारपीट और हत्या की धमकी का मामला दर्ज किया गया।

रिपोर्ट (आर्काइव) के मुताबिक, राजू सोलंकी की करमकुंडली यहीं खत्म नहीं होती। साल 2016 में 4 अप्रैल को उनके खिलाफ अपहरण, गंभीर मारपीट और डकैती का अपराध दर्ज किया गया था। इसके बाद 23 सितंबर 2017 को उनके खिलाफ मारपीट का अपराध दर्ज किया गया। इस दौरान उनके पास से अवैध हथियार मिला था और आर्म्स एक्ट के तहत भी अपराध दर्ज किया गया।

फिर 14 दिसंबर 2017 को राजू सोलंकी पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का अपराध दर्ज किया गया। 2 जून 2020 को सूदखोरी और रंगदारी वसूलने, 1 फरवरी 2022 को मारपीट और जान से मारने की धमकी देने, 16 अगस्त 2022 को मारपीट करने का मामला दर्ज हुआ। 27 सितंबर 2023 को हत्या के प्रयास के लिए राजू सोलंकी के खिलाफ 12वाँ अपराध दर्ज किया गया था।

(इस खबर को क्रुणाल सिंह राजपूत ने मूल रूप से गुजराती में लिखा है। आप इस लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)

नेपाल में गिरी चीन समर्थक प्रचंड सरकार, विश्वास मत हासिल नहीं कर पाए माओवादी: सहयोगी ओली ने हाथ खींचकर दिया तगड़ा झटका

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बड़ी राजनीतिक हलचल हुई है। नेपाल में गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की गद्दी चली गई है। उन्होंने अपना बहुमत खो दिया है। वह देश की संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहुमत सिद्ध करने में असफल रहे हैं।

गुरुवार को संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान में प्रचंड मात्र 63 वोट जुटा पाए। वहीं उनके विरुद्ध 194 वोट पड़े। नेपाल में सरकार बनाने के लिए प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों में से 138 वोट चाहिए होते हैं, जो दहल नहीं जुटा पाए और उनकी सत्ता चली गई।

प्रचंड की सत्ता गिराने में सबसे बड़ा हाथ नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का रहा। अब तक ओली की एमाले कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रचंड की पार्टी CPN-माओवादी सेंटर के साथ गठबंधन कर रखा था। नेपाल में सबसे हालिया चुनाव 2022 में हुए थे, इन चुनावों में किसी भी दल को सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली थी।

इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर नेपाली कॉन्ग्रेस सामने आई थी, इसके पास 89 सीटें थीं। वहीं ओली की पार्टी की पार्टी को 79 सीटें मिली थी। प्रचंड की पार्टी को मात्र 30 सीटें मिली थी लेकिन वह जोड़तोड़ से प्रधानमंत्री बन गए थे, उन्हें ओली ने समर्थन दे दिया था। प्रधानमंत्री प्रचंड की इस गठबंधन सरकार को अभी 19 महीने ही सत्ता में हुए थे।

हालाँकि, बीते कुछ समय से गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। इसी कारण से ओली ने समर्थन खींचने का फैसला लिया। उनके समर्थन खींचने के कारण सरकार अल्पमत में आ गई। ओली ने इसी के साथ नई सरकार के लिए भी विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस से समझौता कर लिया है।

जल्द ही नेपाल में ओली की अगुवाई वाली सरकार बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। बताया गया है कि केपी शर्मा ओली पहले डेढ़ साल तक प्रधानमंत्री रहेंगे और इसके बाद नेपाली कॉन्ग्रेस के मुखिया शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री बनाए जाएँगे। इसके अलावा आपस में कई मंत्रालयों और सत्ता का बँटवारा किया जाएगा।

यह भी बताया जा रहा है कि ओली और दहल के बीच बात बिगड़ने का कारण प्रचंड सरकार द्वारा हाल ही में पेश किया गया बजट रहा। इसके अलावा नेपाल के सिक्योरिटी बोर्ड के मुखिया की नियुक्ति इस गठबंधन के टूटने की सबसे बड़ी वजह रही। इसी कारण से ओली ने कॉन्ग्रेस के साथ अपनी नजदीकियाँ बढ़ा लीं।

गौरतलब है कि नेपाल की आंतरिक राजनीतिक वर्ष 2008 में राजशाही के पूर्णतया खत्म होने के बाद अस्थिर ही रही है। वर्ष 2008 से 2024 के बीच नेपाल में 13 बार प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। इस बीच नेपाल के संविधान में भी बदलाव हुए हैं। प्रचंड की सरकार गिरने के बाद पुनः संविधान में संशोधन की बात हो रही है।

नेपाल की इस राजनीतिक हलचल का भारत पर क्या असर होगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा। जहाँ पहले प्रचंड को प्रबल चीन समर्थक माना जाता था, वहीं हालिया दिनों में वह भारत के करीब आते नजर आए थे। वह भारत दौरे में मंदिरों में भी गए थे।

दूसरी तरफ ओली का कार्यकाल भारत और नेपाल के रिश्तों के बीच तल्खी वाला रहा था। ओली कार्यकाल के दौरान नेपाल ने भारतीय इलाकों को अपने नक़्शे में दिखाना चालू कर दिया था, जिसके बाद विवाद हुआ था।

केरल लोक सेवा आयोग में सदस्य बनाने के लिए CPM कार्यकर्ता ने लिए ₹22 लाख, नहीं बना पाया तो फैला रायता, पैसे लौटाए: आरोपों पर घिरी वामपंथी सरकार

वामपंथी शासन वाले राज्य केरल में ऊँचे पदों पर पैसा लेकर तैनाती देने में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है CPM के एक नेता ने लोगों से राज्य के बड़े पदों पर बैठाने के नाम पर लाखों रुपए वसूले। जब उसका काम नहीं बन सका तो मामला खुलने के डर से पैसे लौटा दिए गए। अब इस मामले में राज्य सरकार बैकफुट पर है जबकि विपक्ष हमलावर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोझिकोड के एक डॉक्टर दंपती से एक CPM कार्यकर्ता प्रमोद कूट्टुली ने ₹22 लाख लिए थे। उसने इन दोनों से वादा किया था कि वह इन्हें राज्य के लोक सेवा आयोग (KPSC) में सदस्य बनवा देगा। उसने सत्ताधारी वामपंथी पार्टी के बड़े नेताओं से अपनी पहचान होने का भी दावा किया था।

जब पैसे देने के लम्बे समय तक ऐसा ना हो सका तो डॉक्टर दंपती ने प्रमोद से प्रश्न किए। इसके बाद उसने दोनों को राज्य की आयुष परिषद में जगह दिलाने का झाँसा दिया। हालाँकि, वह इसमें भी सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद डॉक्टर दंपती ने कोझिकोड के CPM नेतृत्व से इस मामले की शिकायत की।

इसके बाद CPM नेता को पैसे लौटाने पड़े। प्रमोद पर यह झाँसा देने के लिए केरल के मंत्री मोहम्मद रियास और कोझिकोड जिले के सचिव पी मोहनन का नाम उपयोग करने का आरोप है। हालाँकि, प्रमोद ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है।

इस मामले में पुलिस का एक्शन भी चालू हो गया है। पुलिस ने महिला डॉक्टर के पति का बयान दर्ज किया है और मामले की जाँच चालू कर दी है। महिला के पति ने बताया है कि उन्होंने ₹20 लाख सदस्य बनने और ₹2 लाख अन्य खर्चे के लिए दिए थे।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद CPM सरकार कठघरे में है। कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य के महत्वपूर्ण पदों को बेचा जा रहा है। इसी को लेकर राज्य की विधानसभा में भी हंगामा हुआ है। कॉन्ग्रेस ने पूछा है कि अब तक इस मामले में FIR क्यों नहीं दर्ज हुई और एक्शन क्यों नहीं लिया गया। कॉन्ग्रेस ने इसको लेकर विधानसभा में भी हल्ला किया।

भाजपा ने इस मामले में राज्य की वामपंथी सरकार को घेरा है। भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने राजधानी तिरुवनंतपुरम में राज्य लोक सेवा आयोग के बाहर इन भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया है। उन पर पुलिस ने पानी की बौछार चलाई है।

उधर कॉन्ग्रेसी बक रहे गाली पर गाली, इधर राहुल गाँधी कह रहे – स्मृति ईरानी अभद्र पोस्ट मत करो: नेटीजन्स बोले – 98 चूहे खाके बिल्ली हज को चली

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का दोहरा चेहरा सामने आया है। उन्होंने आज अपने एक्स पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्मृति ईरानी के लिए गंदे शब्दों का प्रयोग न किया जाए क्योंकि हार-जीत जीवन में लगी रहती है।

हास्यास्पद बात ये है कि एक तरफ राहुल गाँधी ऐसे ट्वीट करके खुद को नैतिक रूप से परिपक्व दिखाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी के कार्यकर्ता स्मृति ईरानी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

जैसे स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस का ट्वीट देखिए। 4 सितंबर 2023 को राहुल गाँधी के समर्थक के इस अकॉउंट पर स्मृति ईरानी के लिए पोस्ट किया गया- “मुझे फ्लाइंग किस पसंद नहीं है… मुझे मिडल फिंगर पसंद है।” ये ट्वीट तब किया गया था जब संसद में स्मृति ईरानी ने फ्लाइंग किस किए जाने का विरोध किया था।

इसी तरह एक रौशनी कुशल हैं। रौशनी कुशल ने 27 जनवरी 2024 को ट्वीट किया था जिसमें था- बोलकर कि 13 रुपए किलो मिलेगी चीनी, किधर गायब हो गई स्मृति कमीनी।

अब इन्हीं समर्थकों के पोस्ट शेयर करके सवाल हो रहा है कि अगर वाकई राहुल को नैतिकता का इतना ज्ञान है तो फिर उन्होंने ऐसे कमेंट करने वालों के विरुद्ध उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की थी। क्यों अपने समर्थकों को रोकने के लिए ऐसे पोस्ट नहीं किए थे। आज जब लोकसभा चुनाव के नतीजों को समय बीत गया है। हर कॉन्ग्रेसी अपनी बात कह चुका है, तब ऐसी बातें करने का क्या फायदा है। एक यूजर ने तो लिखा भी- ’98 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।’

MP में अंग्रेजी स्कूल ने हिंदू छात्राओँ को बना दिया ‘ईसाई’, छत्तीसगढ़ में फर्जी दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण

मध्य प्रदेश के एक नामी अंग्रेजी स्कूल में छात्राओं की स्कूल स्थानांतरण सर्टिफिकेट (TC) में उनका धर्म बदलने का आरोप लगाया है। छात्राओं के अभिभावक ने मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से इसकी शिकायत की है। वहीं, छत्तीसगढ़ में दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा था। इसको लेकर हिंदू संगठनों ने शिकायत की है।

मध्य प्रदेश के दामोह में स्थित गुड शेफर्ड इंग्लिश मीडियम स्कूल की दो छात्राओं के स्थानांतरण प्रमाण पत्र पर हिंदू धर्म की जगह ईसाई धर्म लिखे जाने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि स्कूल प्रशासन की इस गलती के कारण उन्हें नए स्कूल में नामांकन लेने में समस्या हो रही है। छात्राओं के अभिभावक ने इस मामले की लिखित शिकायत राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष दर्ज कराई है।

इस मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग ने जिलाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविंद्र मोरे ने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रहने वाले रवि शंकर ने शिकायत दर्ज कराई है कि गुड शेफर्ड स्कूल द्वारा उनकी दो बेटियों के स्थानांतरण प्रमाण पत्र में धर्म हिंदू की स्थान ईसाई लिख दिया गया है।

आयोग द्वारा कलेक्टर को लिखा गया पत्र (साभार: लल्लूराम)

पत्र में कहा गया है कि रवि शंकर का परिवार हिंदू है और उनके द्वारा अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र भी दर्शाया गया है। आयोग ने इस बात की संभावना जताई है कि स्कूल द्वारा छात्राओं के दस्तावेज में षडयंत्रपूर्वक धर्म बदला गया है। आयोग का पत्र मिलने के बाद कलेक्टर ने जाँच का आदेश दिया है।

बता दें कि इस स्कूल पर इसी तरह के आरोप पहले भी लगे थे। इसको लेकर 17 फरवरी और 15 मार्च 2024 को संबंधित स्कूल का आयोग व विभागीय टीम द्वारा निरीक्षण किया गया था। इस दौरान स्कूल प्रबंधन व शैक्षणिक विभाग उपस्थित नहीं हुआ था। टीम की जाँच में धर्मांतरण के आरोपों से जुड़े कई तथ्य भी सामने आए थे। इसके आधार पर आयोग के पत्र जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण

छत्तीसगढ़ के बालोद में विश्व हिंदू परिषद सहित हिंदू संगठनों ने फर्जी दवाखाने की आड़ में धर्मांतरण कराने की शिकायत की है। उनका कहना है कि यह क्लिनिक बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा है और धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है। सीएमएचओ महेश सूर्यवंशी ने कहा कि क्लीनिक को तीन दिन में जवाब देने के लिए नोटिस दिया गया है, वरना कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, जिले के डौंडीलोहारा नगर के संजय नगर में लंबे समय से इएचपी दवाखाना संचालित है। इसका संचालन मनोज साहू और यामिनी साहू द्वारा किया जा रहा है। दोनों पति-पत्नी हैं। डौंडीलोहारा भाजपा नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए इएचपी दवाखाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने को लेकर डौंडीलोहारा एसडीएम को पत्र लिखा है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि गाँव-गाँव में अवैध प्रार्थना सभा चल रही है और लोगों के धर्मांतरण करने के लिए उकसाया जा रहा है। पत्र मिलने के बाद एसडीएम शिवनाथ बघेल ने सीएमएचओ को पत्र लिखकर जाँच करने के लिए कहा। महेश सूर्यवंशी ने कहा कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिलता है तो नर्सिंग होम एक्ट अधिनियम 2010 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

टीवी 9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, VHP डौंडीलोहारा के जिलाध्यक्ष बलराम गुप्ता ने दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण का रैकेट चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि क्लिनिक संचालक मनोज साहू और उसकी पत्नी यामिनी साहू पर क्लिनिक की आड़ में घर में अवैध प्रार्थना सभा कराने का आरोप पहले भी लग चुका है। यह मामला पुलिस के पास जाँच में लंबित है।