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बनारस के घाट, काशी की चाट… अनंत-राधिका के विवाह स्थल की झलकियाँ: विदेशी भी रंगे होंगे भारत के रंग में, नीता अंबानी ने साझा किया वीडियो

अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी से पहले चल रहे कार्यक्रम कई महीनों से चर्चा में हैं। इन कार्यक्रमों में अब तक भारतीय सभ्यता, हिंदू संस्कार, देश की आध्यात्मिक इतिहास का खूब ध्यान दिया गया है। आज भी कुछ यही देखने को मिलेगा। दरअसल, नीता अंबानी ने शादी से कुछ घंटे पहले एक वीडियो साझा करके विवाह स्थल की कुछ झलकियाँ दिखाई हैं जिनसे पता चल रहा है कि कैसे वो विवाह स्थल में काशी को खास महत्व दिया गया है।

इन झलकियों को साझा करते हुए वो कहती हैं, “जय काशी विश्वनाथ, काशी के साथ मेरी भक्ति का एक गहरा और विशेष नाता रहा है। मेरे और मेरे परिवार के लिए ये हमेशा जरूरी रहा कि हमेशा से किसी भी जरूरी और शुभ काम से पहले देवी और देवताओं का आशीर्वाद लें।”

उन्होंने कहा, “कुछ हफ्ते पहले मैं अपने बच्चों अनंत और राधिका की शादी से पहले काशी गई थी। मैं हमेशा काशी से हमेशा अभिभूत रही हूँ, ये सबसे पुराना जीवित शहर है… रोशनी का शहर… भारतीय सभ्यता का उद्गम स्थल।”

नीता अंबानी ने कहा, “अनंत अंबानी और राधिका की शादी के दौरान हमने भारतीय सभ्यता और कला को दिखाने का प्रयास किया है। इसके लिए 1000 कारीगरों, शिल्पकारों, बुनकरों, कलाकारों को साथ लाया गया। मैं खुश हूँ कि मैं शादी में काशी की खूबसूरती और पावनता को दिखा सकूँगी।” उन्होंने कहा, “गंगा किनारे बजने वाली शहनाई की वो धुन, जो हर शादी को खास बना देती है। मैंने काशी में महसूस किया कि महादेव यहाँ वास करते हैं। गणपति संग नंदी जहाँ मंत्रों की गूँज है। पावन है यह नगरी, काशी नगरी।”

बता दें कि राधिका और अनंत की शादी से पहले नीता अंबानी की यह वीडियो इसलिए आई है क्योंकि जियो वर्ल्ड सेंटर में एक बनारस का कॉर्नर भी सजाया गया है। इसमें काशी की झलक देखने को मिलेगी। जैसे कार्यक्रम में बनारस के घाटों जैसे घाट बनाए गए हैं ताकि मेहमान इन घाटों पर काशी को महसूस कर सकें। नीता अंबानी की वीडियो में दिखाए गए दृश्य विवाह स्थल के ही हैं। इसके अलावा पता चला है कि इस शादी को लेकर पूरे जियो वर्ल्ड सेंटर को भारतीय थीम पर सजाया गया है। देश से लेकर विदेशी तक सबको यहाँ भारतीय सभ्यता के अनुरूप ढला देखा जाएगा।

‘9वीं बार नहीं बचेगी तेरी जान’: रिश्तेदारी में भागने के बावजूद इस युवक को बार-बार काट रहा साँप, डॉक्टरों की कमिटी करेगी जाँच

ताज़ा अपडेट: जाँच में सामने आया है कि विकास दुबे को साँप ने बस एक बार ही काटा था। उसके बाद 6 बार इसे बस स्नेक-फोबिया हुआ, यानी उसे लगा कि साँप ने काटा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसकी जाँच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हुए प्राइवेट हॉस्पिटल के इलाज पर संदेह जताया है। साँप से बहुत ज़्यादा डर जाने के बाद स्नेक-फोबिया हो जाता है। निजी अस्पतालों ने उसे बताया भी नहीं कि उसे साँप ने नहीं डसा है, ये सिर्फ फोबिया है।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक युवक को एक साँप ने 40 दिन में 7 बार काट और हर बार डॉक्टरों की मदद से उसकी जान बच गई। 24 साल युवक विकास दुबे का दावा है कि उसने सपने में साँप को देखा देखा और साँप ने उससे कहा कि वह उसे 9 बार काटेगा, और उस दौरान उसे कोई नहीं बचा पाएगा। अब मामले में जिले के कलेक्टर ने सदस्यों की कमिटी बनाकर जाँच का आदेश दिया है।

फतेहपुर प्रशासन ने कलेक्टर के आदेश को बाकायदा एक कमेटी बनाई है। इस कमिटी में तीन डॉक्टरों को शामिल किया गया है। साँप द्वारा बार-बार काटने, उसका इलाज करने जैसे कई बिंदु की जाँच करेगी। उसके बाद रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी। सीएमओ डॉक्टर राजीव नयन गिरी ने कहा है कि यह कमिटी विकास का इलाज करने वाले निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर से भी पूछताछ करेगी।

युवक का हर बार इलाज करने वाले डॉक्टर जवाहरलाल का कहना है, “यह हैरान करने वाला संयोग है। हर बार उसे एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन और इमरजेंसी दवाएँ देकर इलाज करते हैं और वह ठीक होकर घर चला जाता है।” डॉक्टर का कहना है कि विकास के शरीर पर हर बार साफ तौर पर साँप के काटने के निशान मिलते हैं।

इस बार गुरुवार को साँप ने उसे एक बार फिर काट लिया। सातवीं बार जब साँप ने युवक को काटा तो उसकी हालत नाजुक हो गई। उसे शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह आईसीयू में भर्ती है। इलाज कर रहे डॉक्टर जवाहरलाल के अनुसार, अभी हालत चिंताजनक बनी हुई है और लगभग 12 से 24 घंटे बाद कुछ बता पाना मुमकिन होगा।

दरअसल, मामला मलवा थाना क्षेत्र के सौरा गाँव का है। यहाँ के रहने वाले विकास दुबे का दावा है कि एक साँप उनके पीछे हाथ धोकर पड़ा है। साँप से बचने के लिए विकास पहले अपनी मौसी के यहाँ भागकर गया, फिर चाचा के यहाँ गया। हालाँकि, साँप ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और बार-बार उसे डँसा। इस घटना से इलाके के लोग भी हैरान हैं।

विकास ने बताया कि 2 जून की रात 9 बजे बिस्तर से उतरने के दौरान साँप ने उन्हें पहली बार काटा था। इसके बाद परिजन पास के ही एक प्राइवेट नर्सिंग होम में ले गए। इलाज के 8 दिन बाद यानी 10 जून की रात को साँप ने दूसरी बार काटा। वो फिर ठीक होकर घर वापस आ गया। इसके बाद विकास भागकर मौसी के यहाँ चला गया, लेकिन 28 जून को वहाँ भी साँप ने पाँचवी बार काट लिया।

विकास का कहना है कि पिछले 40 दिनों में यह साँप उन्हें 7 बार काट चुका है। साँप काटने से पहले हर बार उन्हें आभास हो जाता है। साँप काटने के बाद वह इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं और इलाज कराते हैं। विकास का दावा है कि तीसरी बार काटने के बाद रात में साँप ने सपना दिया था।

विकास का दावा है कि सपने में साँप ने कहा, “मैं तुझे नौ बार काटूँगा, लेकिन आठवीं बार तक बच जाएगा। नौंवी बार कोई भी शक्ति, तांत्रिक और डॉक्टर नहीं बचा पाएगा और तुझे साथ ले जाऊँगा।” इस मामले को लेकर विकास के परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। अब प्रशासन ने इस पर कदम उठाया है।

‘बहू ने एक बार भी नहीं कहा ‘कीर्ति चक्र’ छूकर भी देख लीजिए’: बलिदानी कैप्टन के पिता बोले – पैसों को लेकर नहीं है कोई मतभेद, रोती हुईं माँ ने कहा – अब जीना नहीं चाहती

सियाचिन में बलिदान हुए कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत भारत सरकार ने ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा, जिसे उनकी पत्नी स्मृति सिंह और माँ मंजू देवी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्राप्त किया। अब परिवार में सास-बहू में थी ठन गई है, माता-पिता ने मीडिया के सामने आकर बहू स्मृति पर कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ‘कीर्ति चक्र’ स्मृति लेकर चली गईं, उन्हें कुछ नहीं मिला। बलिदानी कैप्टन की माँ ने ‘बहुऍं भाग जाती हैं’ कह कर बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

अब ‘News 18’ से बात करते हुए वीरगति को प्राप्त कैप्टन अंशुमान सिंह की माँ ने कहा कि ‘कीर्ति चक्र’ लेकर बहू अपने मायके गुरदासपुर चली गई हैं। दिवंगत अंशुमान सिंह के पिता खुद सेना से रिटायर हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर बलिदान को गले लगाया, अंतिम यात्रा में लोग उनका नाम लिख कर पुष्पवर्षा कर रहे थे – इसे वो आज भी अपने दिलों में सँजो कर रखे हुए हैं, CM योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने समय उन्हें अपनापन महसूस हुआ।

उन्होंने राज्य व केंद्र सरकारों द्वारा किए गए सहयोग को लेकर कृतज्ञता जताई, लेकिन साथ ही कहा कि यूपी सरकार ने जो 50 लाख रुपए दिए थे उसमें से 35 लाख रुपए बहू और 15 लाख रुपए उन्हें मिले थे। उन्होंने आगे बताया कि राज्य सरकार ने सड़क के नामकरण का आश्वासन दिया था, जिसके लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सर्कुलर जारी कर दिया है। उन्होंने ये भी बताया कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाए की प्रक्रिया भी मुख्यमंत्री ने आगे बढ़ा दी है।

बीमा के पैसों को लेकर उन्होंने बताया कि वो भी 50:50 डिस्ट्रीब्यूट हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि पैसे को लेकर उनका कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने ‘दर्द’ की बात करते हुए कहा, “जिस दिन राष्ट्रपति भवन में मेरी पत्नी जा रही थीं, वहाँ जो पेपर दिया गया उसे उन्होंने हाथ से पकड़ा। मेरी बहू ने कहा होगा, जिसके बाद CO साहब ने कहा कि ये अच्छा नहीं लगा। हमने कहा कि आपकी इच्छा है तो हम रक्षा अलंकरण समारोह में नहीं जाएँगे। मैंने अपनी पत्नी से सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से सम्मान लेने के दौरान हाथ लगाने के लिए कहा और उन्होंने ऐसा ही किया, फिर झिझक के साथ हाथ हटा लिया।”

बलिदानी कैप्टन के पिता ने कहा कि वहाँ से लौटने के बाद लखनऊ में अंशुमान सिंह की मूर्ति के पास ‘कीर्ति चक्र’ लगाए जाने का निवेदन दिया, जिस पर उन्होंने विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि ‘भारत मंडपम’ में डिनर के दौरान बहू के पास ‘कीर्ति चक्र’ था, लेकिन उन्होंने एक बार भी नहीं का कि पापा आप इसे एक बार हाथ में ले लीजिए। उन्होंने कहा कि वो खुद एक फौजी हैं, वो इसे महसूस करते। उन्होंने कहा कि पैसे को लेकर कुछ नहीं है।

उन्होंने ये माँग भी की कि पत्नी के साथ-साथ माता-पिता को भी एक रेप्लिका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें फ़ख्र है कि उनका बेटा कायर नहीं वीर था। वहीं अंशुमान सिंह की माँ ने कहा कि उनका बेटा वहाँ होते साँस ले रहे होते कम से कम तो उन्हें बहुत अच्छा लगता। उन्होंने कहा कि आज भी वो दिन-रात 19 जुलाई, 2023 का दर्द लेकर बैठी हुई हैं। उन्होंने बताया कि ‘कीर्ति चक्र’ के रिहर्सल के दौरान उनकी बहू ने मुद्दा बनाया, वो उनके लिए बहू नहीं बेटे की तरह ही है। उन्होंने कहा कि उनके 2 और बच्चे हैं, वो चाहेंगी कि वो फौज में जाएँ, उन्हें अब भी डर नहीं लगता है।

उन्होंने कहा, “माँ के लिए हर बच्चा बराबर होता है, ये बच्चे पर निर्भर करता है कि वो इसका दिल जीतता है। हर माँ अच्छी होती है, लेकिन वो बेटा ऐसा था जिसे सम्मान मिला।” पिता ने बताया कि ये उनकी जानकारी में नहीं था कि उनके बेटे और स्मृति 8 साल के रिश्ते में थे। उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने शादी का समर्थन किया था। उन्होंने बताया कि अपनी बहू को वो अंशुमान कह कर ही बुलाती थीं, वो उनकी बेटी ही हैं अभी भी।

इससे पाहे अंशुमान सिंह के पिता ने NOK (नेक्स्ट ऑफ किन) वाले सेना के नियम में बदलाव की माँग की थी। राहुल गाँधी ने भी परिवार से मुलाकात की थी। भारतीय सेना में ट्रेंड है कि विवाह के बाद जवान द्वारा सामान्यतः अपनी पत्नी को शत-प्रतिशत नॉमिनी बना दिया जाता है। कुछ जवान ऐसे भी आते हैं जो 70:30 का फॉर्मूला रखते हैं, यानी 70% नॉमिनी पत्नी होती हैं और 30% माता-पिता। नियम के तहत तो 50:50 फॉर्मूले की व्यवस्था भी है, लेकिन कुछ ही जवान इसे चुनते हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक को अपने साथ ले गई ED: जनजातीय समाज के फंड में घोटाले का मामला, महर्षि वाल्मीकि निगम के कर्मचारी की आत्महत्या से खुला मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक बी नागेन्द्र को हिरासत में लिया है। उन्हें उनके घर पर दो दिन तक चली छापेमारी के बाद हिरासत में लिया गया है। नागेन्द्र को कर्नाटक के वाल्मीकि निगम में करोड़ों के अवैध ट्रांसफर घोटाला मामले में हिरासत में लिया गया है।

ED इससे पहले 10 जुलाई, 2024 को उनके घर पहुँची थी और छापेमारी कर रही थी। दो दिन चली इस छापेमारी के बाद कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार के पूर्व मंत्री नागेन्द्र को ED अपने साथ ले गई। ED ने कर्नाटक में इस दौरान और जगह छापेमारी भी की। ED ने एक और कॉन्ग्रेस विधायक बसानागौड़ा दद्दल के घर पर भी तलाशी ली।

बी नागेन्द्र ने जून माह में सिद्दारमैया सरकार से मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया था। वह सिद्दारमैया सरकार में अनुसूचित जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्होंने यह इस्तीफ़ा कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति कल्याण विकास निगम (KMVSTDC) में करोड़ों की गड़बड़ी में नाम सामने आने के बाद दिया था।

बी नागेन्द्र जी जिस महर्षि वाल्मीकि फंड घोटाले में हिरासत में लिए गए हैं, उसकी जाँच CBI, ED और राज्य सरकार की SIT कर रही है। यह पूरा मामला लगभग ₹88 करोड़ सरकारी धन के दुरुपयोग और उसके अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने से जुड़ा हुआ है।

क्या है वाल्मीकि फंड घोटाला?

कर्नाटक सरकार KMVSTDC प्रदेश की जनजातीय जनता के कल्याण के लिए चलाती है। इसके अंतर्गत जनजातीय जनसंख्या के लिए रोजगार समेत विशेष योजनाएँ लाई जाती हैं। कर्नाटक सरकार इसके लिए अलग से बजट देती है। इसी महर्षि वाल्मीकि फंड में घोटाले की बात सामने आई है।

यह पूरा मामला एक आत्महत्या से चालू हुआ था। मई, 2024 में इसी निगम से जुड़े एक 48 वर्षीय कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके उच्चाधिकारियों ने उस पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह निगम के खातों से पैसा ट्रांसफर करे।

उसने आरोप लगाया था कि यह काम निगम का पैसा हड़पने के लिए किया गया था। उसका आरोप था कि यह काम एक मंत्री के मौखिक आदेशों के आधार पर किया गया था। उसने अपने विभाग के अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था।

आत्महत्या करने वाले कर्मचारी चंद्रशेखर ने सुसाइड नोट में बताया था कि उसे उच्चाधिकारियों ने इस बात के लिए निर्देशित किया था कि वह निगम के एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखे। यह पैसा यूनियन बैंक के वसंत नगर ब्रांच से एमजी रोड ब्रांच में डाला जाना था।

इसी के तहत वाल्मीकि निगम के खातों से निकाला गया पैसा इसके बाद अन्य खातों में भेज दिया गया। इस पूरे खेल में ₹187 करोड़ का लेनदेन हुआ। इसमें से लगभग ₹88 करोड़ अवैध खातों में भेजा गया। जब यह मामला खुला तो चंद्रशेखर डर गया और उसने आत्महत्या कर ली।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद कई बैंक कर्मचारियों समेत KMVSTDC के कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। भाजपा ने इस मामले में बी नागेन्द्र का इस्तीफा मांगा था। इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इस मामले की जाँच CBI को हस्तांतरित करने की माँग भी हुई थी। अब इस घोटाले में बी नागेन्द्र की भूमिका की जाँच हो रही है।

‘मंडी के लोगों की समस्याएँ संसद में उठाऊँगी,’: कंगना रनौत ने अपने लोकसभा क्षेत्र में खोला नया दफ्तर, ‘आधार कार्ड’ को मुद्दा बना कर कॉन्ग्रेस खड़ा कर रही बखेड़ा

कंगना रनौत के एक बयान पर कॉन्ग्रेस हंगामा मचा रही है। दरअसल, “मुझसे मिलना है तो आधार कार्ड लेकर आएँ..” मंडी लोकसभा क्षेत्र की सांसद कंगना रनौत के इस बयान पर हिमाचल प्रदेश में बवाल मच गया है। अब कॉन्ग्रेस उनके बयान पर सवाल उठाते हुए कह रही है कि किसी चुने हुए प्रतिनिधि का अपने क्षेत्र की जनता के साथ ऐसा व्यवहार ठीक नहीं है।

दरअसल, कंगना रनौत ने अपने दफ्तर का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, ”हमारा यही लक्ष्य है कि जनता आकर हमसे जुड़े, न कि सिर्फ काम करवाने के उद्देश्य से आए। जो जनसेवा की इच्छा रखते हैं, राजनीति में उत्सुकता रखते हैं, वे यहाँ आकर जुड़ें। मैं आते-जाते अक्सर आपको मिलूँगी। कोई भी चर्चा करनी हो तो आप बेझिझक यहाँ आएँ।” कंगना का कहना है कि स्थानीय लोग अगर अपनी समस्याएँ लिखकर और आधार कार्ड की कॉपी के साथ आएँगे, तो काम आसानी से हो जाएगा, क्योंकि उनसे मिलने पर्यटक भी आते हैं। ऐसे में पर्यटक और स्थानीय लोगों में अंतर हो पाएगी।

कंगना रनौत ने मंडी के अपने दफ्तर का पता बताते हुए कहा कि, ”हिमाचल में बहुत ज्यादा पर्यटक आते हैं, इसलिए आपका मंडी क्षेत्र का आधार कार्ड होना जरूरी है और साथ में जो संसदीय क्षेत्र से जुड़ा आपका काम है, वह भी चिट्ठी पर लिखा हुआ होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि, ”टूरिस्ट इतने ज्यादा आते हैं कि आम लोगों को असुविधा हो जाती है।” कंगना ने आगे कहा, ”आप मिलकर चर्चा करते हैं तो अच्छा होता है। व्यक्तिगत रूप से आकर मिलें। आपको लगता है कि कोई विषय संसद में उठना चाहिए, तो मैं आपकी आवाज हूँ।”

इसके साथ ही कंगना ने कहा कि अगर आप मुझसे व्यक्तिगत तौर पर मिलना चाहते हैं और आप अपर हिमाचल से हैं तो आप कुल्लू-मनाली वाले मेरे घर पर आएँ। अगर आप मंडी सदर आना चाहते हैं तो इस कार्यालय में आएँ। लोवर हिमाचल के लोग से कंगना का कहना है कि उनके सकाघाट के घर पर बने कार्यालय में आकर मिलें।

कंगना का कहना है कि जब आप मिलकर अपना कोई काम बताते हैं, उस पर चर्चा करते हैं तो हमारे लिए भी अच्छा हो जाता है। मेल या फाइल में काम आता है तो वह भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, इसलिए कोशिश करें कि यहां आएं और मिलकर अपना काम बताएँ। काम आप कोई भी लेकर आएँ, हम आपको अच्छे से गाइड करेंगे। उन्होंने कहा, अगर आपको लगता है कि आपका कोई मुद्दा पार्लियामेंट में उठना चाहिए तो मैं आपकी वो आवाज हूँ।

कॉन्ग्रेस नेता और मंडी लोकसभा चुनाव में कंगना से हारने वाले विक्रमादित्य सिंह का कहना है, “अगर लोग मुझसे मिलना चाहते हैं तो उन्हें आधार कार्ड लाने की कोई जरूरत नहीं है।” उन्होंने कहा, हम जनता के प्रतिनिधि हैं। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम राज्य के हर वर्ग के लोगों के मुलाकात करें। फिर चाहे वह छोटे कार्य के लिए आए हों या बड़े कार्य लेकर। हालाँकि विक्रमादित्य समेत कॉन्ग्रेसी नेता कंगना के बयान को कुछ इस तरह से पेश कर रहे हैं, कि कंगना आम लोगों से नहीं मिलती, जबकि कंगना ने साफ तौर पर कहा है कि वो मंडी के लोगों के काम के लिए हर समय उपलब्ध हैं।

‘विकास कार्यों के लिए नहीं बच रहे पैसे’: कर्नाटक में कॉन्ग्रेसी CM के सलाहकार ने ही खोल दी सरकार की पोल, राहुल गाँधी की गारंटी योजनाएँ पार्टी के लिए बन रहीं गले की फाँस

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार के वित्तीय सलाहकार ने गुरुवार (11 जुलाई 2024) को कहा कि गारंटी योजनाओं के कारण राज्य में विकास कार्यों के लिए धन नहीं है। इससे पहले कॉन्ग्रेस सरकार ने अपनी चुनावी गारंटियों के तहत दलित एवं जनजातीय विकास के लिए दिए गए फंड को वापस ले लिया था। इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने सरकार को तलब किया था।

दरअसल, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के वित्तीय सलाहकार बसवराज रायारेड्डी यलबुर्गा तालुका के मंगलुरु गाँव में एक झील पर काम का शुभारंभ करने के बाद किसानों की बैठक में भाग ले रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि गारंटी योजनाओं ने राज्य के विकास को प्रभावित किया है। इसके कारण राज्य के विकास कार्यों के लिए धन नहीं बचा है।

रायारेड्डी ने कहा, “कई विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्य करवाने के लिए फंड की माँग कर रहे हैं, लेकिन सरकार के पास पैसा नहीं है। हम गारंटी योजनाओं पर करीब 65,000 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। चूँकि मैं वित्तीय सलाहकार हूँ, इसलिए मैं किसी तरह अनुदान प्राप्त करने का प्रबंध कर रहा हूँ। गारंटी सरकार पर बोझ बन गई है।”

बसवराज रायारेड्डी ने आगे कहा, “लोग विकास चाहते हैं, लेकिन मेरा विश्वास करें, बिल्कुल भी पैसा नहीं है। मैं वित्तीय सलाहकार हूँ, इसलिए मैं यहाँ झील विकास परियोजना के लिए 970 करोड़ रुपए का धन जुटाने में कामयाब रहा। हालाँकि, इस परियोजना के लिए कोई जमीन देने के लिए आगे नहीं आ रहा है।” उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री के करीब हैं, इसलिए वित्तीय समस्याओं से परिचित हैं।

इस बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि गारंटी योजनाओं के कारण सरकार को किसी तरह की वित्तीय समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंनेे कहा, “गारंटी योजनाएँ किसी भी संसाधन को खत्म नहीं कर रही हैं। हम उन्हें जारी रखेंगे। हमने वोट के लिए गारंटी शुरू नहीं की है। यह उन लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए है, जो मूल्य वृद्धि से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।”

ST-SC के विकास का पैसा भी गारंटियों योजनाओं में लगाया

बताते चलें कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को दलित एवं जनजातीय समुदाय के विकास के लिए जारी फंड को वापस लेने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने तलब किया था। कॉन्ग्रेस सरकार ने अपनी चुनावी गारंटियाँ पूरी करने के लिए दलित और जनजातीयों के विकास के लिए जारी किया गया फंड वापस ले लिया था।

NCSC के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा था, “कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए जारी किया गया फंड अन्य कार्य के लिए दुरुपयोग किया। यह अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए उठाए गए कदम के विरुद्ध है। इसका NCSC ने संज्ञान लिया है और इस मामले में कर्नाटक सरकार को नोटिस भेजा है। यदि कर्नाटक सरकार इस मामले में जवाब नहीं देती तो कार्रवाई की जाएगी।”

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने राज्य के दलित-जनजातीयों को दिए गए ₹14,730 करोड़ फंड को अब अपनी गारंटियों में खर्च करेगी। सिद्धारमैया सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹39,121 करोड़ की धनराशि दलित और जनजातीयों के फंड के रूप में जारी किया था। कर्नाटक में नियमों के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है, लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार ने इसमें से लगभग एक तिहाई फंड काट दिया।

इससे पहले जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था। इसकी काफी आलोचना हुई थी। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह कहकर अपना बचाव करने का प्रयास किया था कि यह दूसरी योजनाओं को दिया जाने वाला यह पैसा भी गरीबों के विकास में लगेगा।

राज्य में जीत को कॉन्ग्रेस ने किए थे ‘रेवड़ी’ वादे

साल 2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने पाँच गारंटी दी थी। इन्हें ‘रेवड़ी’ कहा गया था। कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। इसे गृह ज्योति योजना का नाम दिया गया था। इसके अलावा गृह लक्ष्मी नाम की योजना के अंतर्गत कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि वह राज्य की महिलाओं को ₹2000 प्रतिमाह देगी।

कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति और मुफ्त सुविधाओं के वादों से अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले बोझ को दरकिनार करते हुए हर परिवार को 10 किलो अनाज देने का भी वादा किया था। इसे अन्न भाग्य योजना का नाम दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया था। इसके अलावा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी ₹1500 देने की बात कही गई थी।

इनमें से कुछ योजनाएँ पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं तो कुछ को आंशिक रूप से लागू किया गया है। कॉन्ग्रेस के इन ‘रेवड़ी’ वादों का असर अब राज्य के खजाने पर दिख रहा है और वह राजस्व बढ़ाने के लिए नई-नई जुगत भिड़ा रही है। वह राज्य की आम जनता को अब नए कर और बढ़े करों से लादना चाह रही है। साथ ही वह कमाई के नए जुगाड़ भी लगा रही है।

हाथ में पिस्तौल, पीछे बाउंसर, किसानों को धमकी… अब IAS पूजा खेडकर की माँ का आया वीडियो, मीडिया वालों के कैमरे पर भी मारा हाथ

महाराष्ट्र की ट्रेनी महिला आईएएस पूजा खेडकर इन दिनों खूब चर्चा में हैं। उनकी मनमानियों और अनुचित माँगों के कारण सरकार को उनका ट्रांसफर पुणे से वाशिम करना पड़ा, लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी उनसे जुड़ा विवाद शांत नहीं हुआ। अब उनकी माँ मनोरम खेडकर की एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में पूजा खेडकर की माँ के हाथ में पिस्तौल देखने को मिल रही है।

वीडियो में देख सकते हैं कि पूजा खेडकर की माँ मनोरम खेडकर हाथ में बंदूक लेकर कुछ लोगों को धमका रही हैं। बताया जा रहा है कि जिन्हें मनोरम खेडकर द्वारा धमकी दी जा रही है वो और कोई नहीं बल्कि किसान हैं और पूजा की माँ उन्हें जमीन कब्जाने के लिए धमकी दे रही हैं। वीडियो में उनके पीछे बाउंसर खड़े दिखते हैं और बड़ी गाड़ी खड़ी दिखती है।

अब इसी वीडियो को शेयर करते हुए लोग पूजा खेडकर के परिवार के बारे में सवाल उठाल रहे हैं। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पूजा खेडकर के पिता ने सरकारी नौकरी के दौरान खूब संपत्ति जुटाई थी। इसके बाद उन्होंने कई जगहों में जमीनें खरीदी। इसी क्रम में जमीन पुणे जले के मुल्शी तहसील में भी खरीदी और बाद में आसपास के किसानों की जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश होने लगी।

कथिततौर पर ये वीडियो उसी समय का है। वीडियो में नजर आ रहे किसान खेडकर की माँ के रवैया का विरोध कर रहे थे तभी, उन्होंने बंदूर लेकर सबको धमकाना शुरू किया। रिपोर्ट में ये भी दावा है कि जब लोगों ने मनोरम खेडकर की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराने का प्रयास किया तो शिकायत दर्ज नहीं हो पाई थी।

मालूम हो कि ये मनोरम खेडकर की यह कोई पहली वीडियो सामने नहीं आई है। इससे पहले भी उनके घर के बाहर की एक वीडियो सामने आई थी। वहाँ उन्होंने मीडियाकर्मियों पर हमला किया था। इस दौरान वो मीडियाकर्मियों को ये कहते सुनाई पड़ी थाीं- “अगर मेरी बेटी ने सुसाइड कर लिया तो मैं आप सबको अंदर डाल दूँगी।” इस दौरान उन्होंने मीडियाकर्मियों के कैमरों पर भी हाथ मारे थे।

उल्लेखनीय है कि पूजा खेडकर से जुड़ा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों पुणे जिलाधिकारी द्वारा शिकायत करने से उनका मामला मीडिया में आया। पता चला कि कैसे लाल-नीली बत्ती के लिए पूजा खेडकर हंगामा कर रही थीं। वहीं उनके पिता भी जिलाधिकारियों को धमका रहे थे कि या तो उनकी बेटी की बात मानी जाए वरना अंजाम भुगतने होंगे। इसके बाद पूजा खेडकर की ज्वानिंग पर सवाल उठे। उनके ओबीसी दर्जे पर सवाल उठे। उनके द्वारा दिए गए मॉक टेस्ट पर भी सवाल उठे। नतीजा ये हुआ कि सरकार ने फैसला लिया कि मोदी सरकार ने निर्णय की समिति उनकी ज्वानिंग मामले में जाँच करेगी।

तमिलनाडु में एक और YouTuber की गिरफ़्तारी, DMK सरकार की आलोचना करने पर मानहानि का आरोप: गाना गाया तो उठा कर ले गई पुलिस

तमिलनाडु में यूट्यूबर सत्ताई दुरईमुरुगन की गिरफ़्तारी के बाद एक बार फिर से राज्य में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले के आरोप लग रहे हैं। सत्ताई दुराईमुरुगन ‘नाम तमिलार काची (NTK)’ के नेता भी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री MK स्टालिन की सरकार की आलोचना की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार (11 जुलाई, 2024) को उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि का अपमान करने के आरोप में कोर्तल्लम में पुलिस ने गिरफ्तार किया।

मामला विकरावंडी विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि चुनाव प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने करुणानिधि को लेकर एक आपत्तिजनक गाना गाया। नेता प्रतिपक्ष इदाप्पदी K पलानीस्वामी ने भी उनकी गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए तुरंत रिहाई की माँग की है। वहीं NTK के मुखिया S सीमन ने भी स्टालिन सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए उसी गाने को मीडिया के सामने दोबारा गाया। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए।

सीमन ने कहा कि जो लोग भी राज्य सरकार की आलोचना करते हैं और गड़बड़ियों की बात करते हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने 33 दिनों में 133 हत्याएँ होने का दावा करते हुए का कि उन्हें कमजोर करने के लिए दुराईमुरुगन को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पूछा कि क्या करूणानिधि की आलोचना करना अपराध है? इससे पहले दुराईमुरुगन को CM एमके स्टालिन के खिलाफ 2021 में दिए गए एक भाषण के कारण भी गिरफ्तार किया गया था।

उन्हें जमानत भी मिल गई थी, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने इस जमानत को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए पूछा था कि इसमें मानहानि कहाँ है और कौन ये निर्णय लेगा कि ये मानहानि है। हाल ही में तमिलनाडु में एक अन्य यूट्यूबर सुवुक्कु शंकर को भी गिरफ्तार कर के प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगा था। दुराईमुरुगन की गिरफ्तार की निंदा करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने भी कहा है कि जिस शब्द के लिए ये कार्रवाई की है उसे करुणानिधि ने खुद कई बार सोशल मीडिया पर डाला था।

ड्रग्स के साथ धराया खालिस्तानी सांसद अमृतपाल सिंह का भाई: एक तरफ नशे के खिलाफ मुहिम चलाने का ढोंग, दूसरी तरफ नशा का ही कारोबार

पंजाब के खडूस साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद बने खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का भाई ड्रग्स के नशे में गिरफ्तार हुआ है। जिस समय वो गिरफ्तार हुआ, वो नशे में डूबा हुआ था। पुलिस की गिरफ्त में आए अमृतपाल के भाई का नाम हरप्रीत सिंह है और वो अमृतपाल के चुनावी मुहिम में शामिल था।

खास बात ये है कि ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया अमृतपाल युवाओं को नशे से दूर ले जाने का दावा करता है और सिखों को अमृत चखाकर नशे से दूर करने की कसमें दिलाता है, लेकिन उसका भाई नशेड़ी निकला। बता दें कि अमृतपाल सिंह पर ये भी आरोप है कि उसके कथित ‘नशामुक्ति’ केंद्रों को हथियारों के डिपो और ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। इस मामले में पंजाब पुलिस कार्रवाई भी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जालंधर के फिल्लौर में अमृतपाल के भाई हरप्रीत सिंह को पुलिस ने ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। एसएसपी अंकुर गुप्ता और डीएसपी फिल्लौर सर्वणजीत सिंह ने बताया कि हरप्रीत सिंह के पास से 4 ग्राम ड्रग्स बरामद की गई है। जिस वक्त उसे काबू किया गया वह पूरी तरह नशे में था और उसके दो साथियों को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने इस समय मामले की वीडियोग्राफी भी कराई है। फिल्लौर हाईवे पर नाकाबंदी के दौरान दोनों को काबू किया गया।

डीएसपी सर्वणजीत सिंह ने बताया कि जो ड्रग्स बरामद की गई है वह उसके पास कहाँ से आई, इस बारे में पता लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हरप्रीत का मेडिकल करवाया गया है, नशे की पुष्टि हुई है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

निर्दलीय सांसद बना है अमृतपाल

असम की डिब्रुगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब सीट से नवनिर्वाचित सांसद अमृतपाल सिंह को बतौर सांसद शपथ लेने के लिए चार दिनों की पैरोल की मंजूरी मिली थी। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह को खडूर साहिब से एक लाख से अधिक वोटों से जीत मिली थी। वो निर्दलीय चुनाव लड़ा था।

1 लाख शरणार्थियों को पेरिस से निकाल बाहर करेगा फ़्रांस, ओलंपिक का होना है आयोजन: मोहम्मद इब्राहिम जैसे कई लोग खुद को बता रहे ‘डरा हुआ’

पश्चिमी एशिया और अफ्रीकी महाद्वीप से शरण लेने पहुँचे लाखों लोगों को फ्रांस की सरकार शहर से ही निकाल रही है, खासकर उन लोगों को, जो बेघरबार हैं और सड़कों से लेकर खाली बिल्डिंगों में शरण लिए हुए हैं। ऐसा ओलंपिक की आड़ में किया जा रहा है, लेकिन मिशन की असली वजह को छिपाया जा रहा है। लोगों को ये कह कर बसों में बिठाकर दूर-दराज के इलाकों में पहुँचाया जा रहा है, कि उनके लिए ठिकानों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि फ्रांस की चरमराती व्यवस्था को छिपाया जा सके।

दरअसल, कुछ दिनों में पेरिस ओलंपिक का आयोजन होने जा रहा है। आयोजन की जगह को पेरिस के उपनगरीय इलाके को बनाया गया है, जहाँ इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए अरबों यूरो खर्च किए गए हैं। लेकिन जिस इलाके में ओलंपिक विलेज बसाया गया है, वहाँ फ्राँस के किसी भी इलाके के मुकाबले सर्वाधिक प्रवासी लोग रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वादा किया है कि ओलंपिक खेलों में देश की भव्यता का प्रदर्शन किया जाएगा। लेकिन ओलंपिक गाँव पेरिस के सबसे गरीब उपनगरों में से एक में बनाया गया है, जहाँ हजारों लोग सड़कों पर बने शिविरों, आश्रयों या छोड़ दिए गए इमारतों में रहते हैं। ऐसे में बीते एक साल में 5 हजार से अधिक लोगों को उस इलाके से बाहर निकाला गया है। बाहर निकाले जा रहे अधिकतर लोग गरीब मुल्कों से बेहतर जीवन की आस में फ्रांस में रह रहे हैं, लेकिन अब उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

चाड से मोहम्मद इब्राहिम ने कहा, “हमें ओलंपिक खेलों के कारण निष्कासित कर दिया गया था, जिन्हें ओलंपिक विलेज के पास एक खाली पड़े सीमेंट फैक्ट्री से निकाला गया था। वे पेरिस के दक्षिण में एक खाली इमारत में चले गए, जहाँ से पुलिस ने अप्रैल में निवासियों को निकाला था। एक बस ने उन्हें दो घंटे दक्षिण-पश्चिम में ऑरलियन्स के बाहर एक शहर में पहुँचाया।”

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक से फ्रांस पहुँचे अमर अलामीन ने कहा कि फ्रांस के अधिकारी उन्हें कोई भी टिकट थमा दे रहे हैं और टिकट पर जिस जगह का नाम लिखा है, उन्हें वही बस पकड़नी पड़ती है। वैसे, फ्रांस की सरकार की तरफ से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है, लेकिन सरकार का दावा है कि लोग अपनी मर्जी से जा रहे हैं। फ्रांस सरकार पूरे देश में 10 जगहों पर ऐसे शेल्टर होम बना रही है, जहाँ प्रवासियों को रखा जाएगा। फ्रांस की राजधानी के आसपास करीब 1 लाख बेघर लोग रहते हैं, ऐसे में 10 जगहों पर बनाए गए शेल्टर होम पर्याप्त नहीं हैं।

प्रवासियों से डरे हुए हैं लोग

फ्रांस में प्रवासियों को ठिकाने दिए जा रहे हैं, तो स्थानीय लोगों में डर भी बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अपने ही देश में असुरक्षा महसूस होती है। एक फ्रांसीसी नागरिक ने कहा, “हम अब फ्रांस में सुरक्षित महसूस नहीं करते। अप्रवासियों के पास घर हैं जबकि हम फ्रांसीसी लोगों के पास घर नहीं है, यह अस्वीकार्य है।” दरअसल, फ्रांस में अभी चुनाव हुए हैं, जिसमें पहले दौर में सत्ताधारी वामपंथी पार्टियों को बुरी हार झेलनी पड़ी थी, लेकिन दूसरे दौर में सभी वापमंथी पार्टियों ने एकजुट होकर दक्षिणपंथी पार्टियों की सीटें कम कर दी हैं। इसके बावजूद मरीन ली पेन की दक्षिणपंथी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनने में कामयाब रही है।

नेशनल रैली के एक समर्थक ने कहा, “हम, फ्रांसीसी लोग, जो कुछ हो रहा है उससे थक चुके हैं। हमारे लिए, वामपंथी, दक्षिणपंथी, हमेशा एक ही बात है। इसलिए हमें नेशनल रैली में शामिल होना पड़ा। व्यक्तिगत रूप से, मैंने नेशनल रैली के लिए मतदान किया क्योंकि हम बदलाव चाहते हैं।”

वामपंथी पार्टियों के गठबंधन से समर्थकों में राहत

न्यू पॉपुलर फ्रंट के एक कट्टर समर्थक ने कहा, “मुझे खुशी है कि वामपंथियों ने जीत हासिल की, क्योंकि मेरे लिए यह वास्तव में सबसे अच्छा निर्णय है। हमने इतिहास में और आज भी यूरोप में इटली के साथ जो देखा है, वह बहुत अच्छा नहीं है। उन्होंने आरएसए (एक्टिव सॉलिडैरिटी इनकम) को हटा दिया है, इसलिए दूर-दराज़ को वापस लाना अच्छा विचार नहीं है।”

बता दें कि इसी माह पेरिस ओलंपिक की शुरुआत हो रही है। पेरिस ओलंपिक की तैयारियाँ लंबे समय से चल रही हैं। ऐसे में फ्रांस की सरकार कोशिश कर रही है कि वो फ्रांस की चमक-दमक को दिखाए, इसीलिए फ्रांस की सड़कों पर रह रहे लोगों को वो हटा रही है, ताकि फ्रांस की असलियत और फ्रांस की समस्याओं को दुनिया से छिपाए रख सके।