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नेपाल में गिरी चीन समर्थक प्रचंड सरकार, विश्वास मत हासिल नहीं कर पाए माओवादी: सहयोगी ओली ने हाथ खींचकर दिया तगड़ा झटका

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बड़ी राजनीतिक हलचल हुई है। नेपाल में गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की गद्दी चली गई है। उन्होंने अपना बहुमत खो दिया है। वह देश की संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहुमत सिद्ध करने में असफल रहे हैं।

गुरुवार को संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान में प्रचंड मात्र 63 वोट जुटा पाए। वहीं उनके विरुद्ध 194 वोट पड़े। नेपाल में सरकार बनाने के लिए प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों में से 138 वोट चाहिए होते हैं, जो दहल नहीं जुटा पाए और उनकी सत्ता चली गई।

प्रचंड की सत्ता गिराने में सबसे बड़ा हाथ नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का रहा। अब तक ओली की एमाले कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रचंड की पार्टी CPN-माओवादी सेंटर के साथ गठबंधन कर रखा था। नेपाल में सबसे हालिया चुनाव 2022 में हुए थे, इन चुनावों में किसी भी दल को सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली थी।

इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर नेपाली कॉन्ग्रेस सामने आई थी, इसके पास 89 सीटें थीं। वहीं ओली की पार्टी की पार्टी को 79 सीटें मिली थी। प्रचंड की पार्टी को मात्र 30 सीटें मिली थी लेकिन वह जोड़तोड़ से प्रधानमंत्री बन गए थे, उन्हें ओली ने समर्थन दे दिया था। प्रधानमंत्री प्रचंड की इस गठबंधन सरकार को अभी 19 महीने ही सत्ता में हुए थे।

हालाँकि, बीते कुछ समय से गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। इसी कारण से ओली ने समर्थन खींचने का फैसला लिया। उनके समर्थन खींचने के कारण सरकार अल्पमत में आ गई। ओली ने इसी के साथ नई सरकार के लिए भी विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस से समझौता कर लिया है।

जल्द ही नेपाल में ओली की अगुवाई वाली सरकार बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। बताया गया है कि केपी शर्मा ओली पहले डेढ़ साल तक प्रधानमंत्री रहेंगे और इसके बाद नेपाली कॉन्ग्रेस के मुखिया शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री बनाए जाएँगे। इसके अलावा आपस में कई मंत्रालयों और सत्ता का बँटवारा किया जाएगा।

यह भी बताया जा रहा है कि ओली और दहल के बीच बात बिगड़ने का कारण प्रचंड सरकार द्वारा हाल ही में पेश किया गया बजट रहा। इसके अलावा नेपाल के सिक्योरिटी बोर्ड के मुखिया की नियुक्ति इस गठबंधन के टूटने की सबसे बड़ी वजह रही। इसी कारण से ओली ने कॉन्ग्रेस के साथ अपनी नजदीकियाँ बढ़ा लीं।

गौरतलब है कि नेपाल की आंतरिक राजनीतिक वर्ष 2008 में राजशाही के पूर्णतया खत्म होने के बाद अस्थिर ही रही है। वर्ष 2008 से 2024 के बीच नेपाल में 13 बार प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। इस बीच नेपाल के संविधान में भी बदलाव हुए हैं। प्रचंड की सरकार गिरने के बाद पुनः संविधान में संशोधन की बात हो रही है।

नेपाल की इस राजनीतिक हलचल का भारत पर क्या असर होगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा। जहाँ पहले प्रचंड को प्रबल चीन समर्थक माना जाता था, वहीं हालिया दिनों में वह भारत के करीब आते नजर आए थे। वह भारत दौरे में मंदिरों में भी गए थे।

दूसरी तरफ ओली का कार्यकाल भारत और नेपाल के रिश्तों के बीच तल्खी वाला रहा था। ओली कार्यकाल के दौरान नेपाल ने भारतीय इलाकों को अपने नक़्शे में दिखाना चालू कर दिया था, जिसके बाद विवाद हुआ था।

केरल लोक सेवा आयोग में सदस्य बनाने के लिए CPM कार्यकर्ता ने लिए ₹22 लाख, नहीं बना पाया तो फैला रायता, पैसे लौटाए: आरोपों पर घिरी वामपंथी सरकार

वामपंथी शासन वाले राज्य केरल में ऊँचे पदों पर पैसा लेकर तैनाती देने में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है CPM के एक नेता ने लोगों से राज्य के बड़े पदों पर बैठाने के नाम पर लाखों रुपए वसूले। जब उसका काम नहीं बन सका तो मामला खुलने के डर से पैसे लौटा दिए गए। अब इस मामले में राज्य सरकार बैकफुट पर है जबकि विपक्ष हमलावर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोझिकोड के एक डॉक्टर दंपती से एक CPM कार्यकर्ता प्रमोद कूट्टुली ने ₹22 लाख लिए थे। उसने इन दोनों से वादा किया था कि वह इन्हें राज्य के लोक सेवा आयोग (KPSC) में सदस्य बनवा देगा। उसने सत्ताधारी वामपंथी पार्टी के बड़े नेताओं से अपनी पहचान होने का भी दावा किया था।

जब पैसे देने के लम्बे समय तक ऐसा ना हो सका तो डॉक्टर दंपती ने प्रमोद से प्रश्न किए। इसके बाद उसने दोनों को राज्य की आयुष परिषद में जगह दिलाने का झाँसा दिया। हालाँकि, वह इसमें भी सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद डॉक्टर दंपती ने कोझिकोड के CPM नेतृत्व से इस मामले की शिकायत की।

इसके बाद CPM नेता को पैसे लौटाने पड़े। प्रमोद पर यह झाँसा देने के लिए केरल के मंत्री मोहम्मद रियास और कोझिकोड जिले के सचिव पी मोहनन का नाम उपयोग करने का आरोप है। हालाँकि, प्रमोद ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है।

इस मामले में पुलिस का एक्शन भी चालू हो गया है। पुलिस ने महिला डॉक्टर के पति का बयान दर्ज किया है और मामले की जाँच चालू कर दी है। महिला के पति ने बताया है कि उन्होंने ₹20 लाख सदस्य बनने और ₹2 लाख अन्य खर्चे के लिए दिए थे।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद CPM सरकार कठघरे में है। कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य के महत्वपूर्ण पदों को बेचा जा रहा है। इसी को लेकर राज्य की विधानसभा में भी हंगामा हुआ है। कॉन्ग्रेस ने पूछा है कि अब तक इस मामले में FIR क्यों नहीं दर्ज हुई और एक्शन क्यों नहीं लिया गया। कॉन्ग्रेस ने इसको लेकर विधानसभा में भी हल्ला किया।

भाजपा ने इस मामले में राज्य की वामपंथी सरकार को घेरा है। भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने राजधानी तिरुवनंतपुरम में राज्य लोक सेवा आयोग के बाहर इन भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया है। उन पर पुलिस ने पानी की बौछार चलाई है।

उधर कॉन्ग्रेसी बक रहे गाली पर गाली, इधर राहुल गाँधी कह रहे – स्मृति ईरानी अभद्र पोस्ट मत करो: नेटीजन्स बोले – 98 चूहे खाके बिल्ली हज को चली

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का दोहरा चेहरा सामने आया है। उन्होंने आज अपने एक्स पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्मृति ईरानी के लिए गंदे शब्दों का प्रयोग न किया जाए क्योंकि हार-जीत जीवन में लगी रहती है।

हास्यास्पद बात ये है कि एक तरफ राहुल गाँधी ऐसे ट्वीट करके खुद को नैतिक रूप से परिपक्व दिखाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी के कार्यकर्ता स्मृति ईरानी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

जैसे स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस का ट्वीट देखिए। 4 सितंबर 2023 को राहुल गाँधी के समर्थक के इस अकॉउंट पर स्मृति ईरानी के लिए पोस्ट किया गया- “मुझे फ्लाइंग किस पसंद नहीं है… मुझे मिडल फिंगर पसंद है।” ये ट्वीट तब किया गया था जब संसद में स्मृति ईरानी ने फ्लाइंग किस किए जाने का विरोध किया था।

इसी तरह एक रौशनी कुशल हैं। रौशनी कुशल ने 27 जनवरी 2024 को ट्वीट किया था जिसमें था- बोलकर कि 13 रुपए किलो मिलेगी चीनी, किधर गायब हो गई स्मृति कमीनी।

अब इन्हीं समर्थकों के पोस्ट शेयर करके सवाल हो रहा है कि अगर वाकई राहुल को नैतिकता का इतना ज्ञान है तो फिर उन्होंने ऐसे कमेंट करने वालों के विरुद्ध उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की थी। क्यों अपने समर्थकों को रोकने के लिए ऐसे पोस्ट नहीं किए थे। आज जब लोकसभा चुनाव के नतीजों को समय बीत गया है। हर कॉन्ग्रेसी अपनी बात कह चुका है, तब ऐसी बातें करने का क्या फायदा है। एक यूजर ने तो लिखा भी- ’98 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।’

MP में अंग्रेजी स्कूल ने हिंदू छात्राओँ को बना दिया ‘ईसाई’, छत्तीसगढ़ में फर्जी दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण

मध्य प्रदेश के एक नामी अंग्रेजी स्कूल में छात्राओं की स्कूल स्थानांतरण सर्टिफिकेट (TC) में उनका धर्म बदलने का आरोप लगाया है। छात्राओं के अभिभावक ने मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से इसकी शिकायत की है। वहीं, छत्तीसगढ़ में दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा था। इसको लेकर हिंदू संगठनों ने शिकायत की है।

मध्य प्रदेश के दामोह में स्थित गुड शेफर्ड इंग्लिश मीडियम स्कूल की दो छात्राओं के स्थानांतरण प्रमाण पत्र पर हिंदू धर्म की जगह ईसाई धर्म लिखे जाने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि स्कूल प्रशासन की इस गलती के कारण उन्हें नए स्कूल में नामांकन लेने में समस्या हो रही है। छात्राओं के अभिभावक ने इस मामले की लिखित शिकायत राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष दर्ज कराई है।

इस मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग ने जिलाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविंद्र मोरे ने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रहने वाले रवि शंकर ने शिकायत दर्ज कराई है कि गुड शेफर्ड स्कूल द्वारा उनकी दो बेटियों के स्थानांतरण प्रमाण पत्र में धर्म हिंदू की स्थान ईसाई लिख दिया गया है।

आयोग द्वारा कलेक्टर को लिखा गया पत्र (साभार: लल्लूराम)

पत्र में कहा गया है कि रवि शंकर का परिवार हिंदू है और उनके द्वारा अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र भी दर्शाया गया है। आयोग ने इस बात की संभावना जताई है कि स्कूल द्वारा छात्राओं के दस्तावेज में षडयंत्रपूर्वक धर्म बदला गया है। आयोग का पत्र मिलने के बाद कलेक्टर ने जाँच का आदेश दिया है।

बता दें कि इस स्कूल पर इसी तरह के आरोप पहले भी लगे थे। इसको लेकर 17 फरवरी और 15 मार्च 2024 को संबंधित स्कूल का आयोग व विभागीय टीम द्वारा निरीक्षण किया गया था। इस दौरान स्कूल प्रबंधन व शैक्षणिक विभाग उपस्थित नहीं हुआ था। टीम की जाँच में धर्मांतरण के आरोपों से जुड़े कई तथ्य भी सामने आए थे। इसके आधार पर आयोग के पत्र जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण

छत्तीसगढ़ के बालोद में विश्व हिंदू परिषद सहित हिंदू संगठनों ने फर्जी दवाखाने की आड़ में धर्मांतरण कराने की शिकायत की है। उनका कहना है कि यह क्लिनिक बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा है और धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है। सीएमएचओ महेश सूर्यवंशी ने कहा कि क्लीनिक को तीन दिन में जवाब देने के लिए नोटिस दिया गया है, वरना कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, जिले के डौंडीलोहारा नगर के संजय नगर में लंबे समय से इएचपी दवाखाना संचालित है। इसका संचालन मनोज साहू और यामिनी साहू द्वारा किया जा रहा है। दोनों पति-पत्नी हैं। डौंडीलोहारा भाजपा नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए इएचपी दवाखाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने को लेकर डौंडीलोहारा एसडीएम को पत्र लिखा है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि गाँव-गाँव में अवैध प्रार्थना सभा चल रही है और लोगों के धर्मांतरण करने के लिए उकसाया जा रहा है। पत्र मिलने के बाद एसडीएम शिवनाथ बघेल ने सीएमएचओ को पत्र लिखकर जाँच करने के लिए कहा। महेश सूर्यवंशी ने कहा कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिलता है तो नर्सिंग होम एक्ट अधिनियम 2010 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

टीवी 9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, VHP डौंडीलोहारा के जिलाध्यक्ष बलराम गुप्ता ने दवाखाना की आड़ में धर्मांतरण का रैकेट चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि क्लिनिक संचालक मनोज साहू और उसकी पत्नी यामिनी साहू पर क्लिनिक की आड़ में घर में अवैध प्रार्थना सभा कराने का आरोप पहले भी लग चुका है। यह मामला पुलिस के पास जाँच में लंबित है।

नूहँ में ब्रज जलाभिषेक यात्रा के बीच बिट्टू बजरंगी को हत्या की धमकी: हिन्दू संगठनों ने पंचायत कर सौंपा ज्ञापन, मुस्लिमों बोले – बाहरियों की एंट्री बैन हो

हरियाणा का मेवात क्षेत्र पिछले साल हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की वजह से चर्चा में रहा था। नूहँ से लेकर गुरुग्राम तक हिंदुओं पर हमले हुए थे, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी, तो 300 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो गए थे। इस साल 22 जुलाई 2024 यानी सावन के पहले सोमवार को फिर से वो ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जाएगी, जो परंपरागत रूप से काफी पहले से निकलती रही है। लेकिन इस बार पिछले साल की तरह कोई हिंसा न हो, इसे लेकर हिंदू संगठन सतर्क हैं, साथ ही प्रशासन भी यात्रा से जुड़ी तैयारियों में जुट गया है। वहीं, इस बीच गौरक्षक बिट्टू बजरंगी को फोन पर धमकी मिली है, कि वो इस साल नूहँ न जाएँ वर्ना उनकी हत्या कर दी जाएगी।

हिंदू संगठनों की पंचायत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नूहँ में ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकालने को लेकर हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों ने पंचायत की है, जिसमें आसपास के गाँवों से भी भारी संख्या में लोग पहुँचे। ये पंचायत गुरुवार (11 जुलाई 2024) को किरा गाँव में स्थित वीर भगत सिंह गौशाला में हुई। पंचायत में आस पास के गाँवों के अलावा नूहँ, पुन्हाना, पिनगवाँ, तावडू, पलवल, हथीन, सोहना, गुरुग्राम से भी लोग पहुँचे। इस पंचायत में कहा गया कि यात्रा शांतिपूर्ण रहे, इसकी जिम्मेदारी हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों की भी है। इसके लिए सरकार और जिला प्रशासन को भी सुरक्षा की जिम्मेदारी सही से उठानी चाहिए, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। इस पंचायत में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

मुस्लिम बोले, बाहरी लोगों के आने पर लगे रोक

एक तरफ हिंदू पक्ष के लोगों ने पंचायत कर शांतिपूर्ण जलाभिषेक की बात कही, तो दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि प्रशासन इस धार्मिक यात्रा में बाहर के लोगों को आने से रोके। मेवात विकास सभा से जुड़े लोगों ने कहा कि पिछले साल की हिंसा से काफी नुकसान हुआ। इस बार ऐसी किसी भी घटना को प्रशासन न होने दे। इसलिए वो बाहर से आने वाले लोगों को रोके, ताकि माहौल न बिगड़े।

बिट्टू बजरंगी को जान से मारने की धमकी

फरीदाबाद के संजय इन्क्लेव में रह रहे गौरक्षक बिट्टू बजरंगी को जान से मारने की धमकी मिली है। बिट्टू बजरंगी ने मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी के मामले में सारन थाना में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस के अनुसार बिट्टू बजरंगी ने शिकायत में बताया है कि 6 जुलाई 2024 को वह अपने घर पर था। इस दौरान उसके मोबाइल फोन पर अनजान नंबर से एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने बिट्टू को नूहँ आने से मना किया। साथ ही कहा कि इस बार नूहँ आने पर उसे जान से मार दिया जाएगा। पुलिस अज्ञात के खिलाफ मामला दर्जकर जाँच शुरू कर दी है

बता दें कि ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा हर साल सावन के पहले सोमवार को निकलती है। ये नूहँ के नल्हड़ मंडिर से शुरू होकर फिजोरपुर झिरका के झिर मंजिर से होते हुए सिंगाव गाँव के शिव मंदिर पर समाप्त होती है, जहाँ श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। बीते साल 2023 में नूहँ में इस जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिमों ने हमला बोल दिया था, जिसमें काफी हंगामा हुआ है। इस हमले की आग नूहँ से लेकर गुरुग्राम तक फैल गई थी। इंटरनेट बंद करना पड़ा था, तो 300 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ की गई थी। इस हिंसा में 6 लोगों की मौत भी हुई थी।

अब से हर साल 25 जून होगा ‘संविधान हत्या दिवस’: मोदी सरकार ने जारी की अधिसूचना, अमित शाह बोले – तानाशाही मानसिकता से घोंटा गया था लोकतंत्र का गला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस’ घोषित किया है। यही वो दिन था जब 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल घोषित करते हुए विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। साथ ही मीडिया पर भी अंकुश लगा दिया गया था, सरकार तय करती थी क्या छपेगा और क्या नहीं। आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी के बेटे संजय सिंह ने हजारों लोगों की जबरन नसबंदी करवाई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ताज़ा फैसले का ऐलान करते हुए याद किया कि कैसे इंदिरा गाँधी ने बेशर्मी से तानाशाही मानसिकता का परिचय देते हुए हमारे लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था। उन्होंने याद किया कि कैसे लाखों लोग जेल में ठूँस दिए गए थे, मीडिया की आवाज़ को दबा दिया गया था। अमित शाह ने ऐलान किया कि हर साल इसकी स्मृति में भारत सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि इस दिन देश उन महान लोगों के योगदानों का स्मरण करेगा, जिन्होंने आपातकाल का दर्द को सहन किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ये निर्णय लिए जाने के पीछे उद्देश्य है उन लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान करना, जिन्होंने दमनकारी सरकार के हाथों अकल्पनीय उत्पीड़न का सामना करने के बावजूद लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इससे प्रत्येक भारतीय में व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं लोकतंत्र की रक्षा की अखंड ज्योति को प्रज्वलित रखने में मदद मिलेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझाया कि ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने से कॉन्ग्रेस जैसी तानाशाही ताकतों को उस भयावहता को फिर से दोहराने से रोका जा सकेगा। इसके लिए जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के लोगों को भविष्य में सत्ता के घोर दुरुपयोग को रोकने के लिए इसके जरिए प्रतिबद्ध किया गया है। नोटिफिकेशन में लिखा है कि भारत के लोगों का संविधान और लोकतंत्र पर दृढ विश्वास है। इससे कॉन्ग्रेस को करारा झटका लगा है जो लगातार संविधान-संविधान की रट लगा रही थी और भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार फैला रही थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, “25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाना हमें याद दिलाएगा कि जब भारत के संविधान को कुचला गया था, तब क्या हुआ था। यह उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है, जिन्होंने आपातकाल की ज्यादतियों के कारण कष्ट झेले थे, जो भारतीय इतिहास का एक काला दौर था।” बता दें कि पीएम मोदी खुद आपातकाल विरोधी आंदोलन में सक्रिय थे, उस दौरान उन्होंने पुलिस से बचने के लिए एक सिख की वेशभूषा भी धरी थी।

‘सरकारी खजाने को ₹4000 करोड़ का नुकसान, सिद्दरमैया की पत्नी को पॉश इलाके में दे दी सरकार जमीन’: विरोध कर रहे BJP नेता हिरासत में, कॉन्ग्रेसी CM ने अलापा जाति का राग

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती से जुड़े जमीन घोटाले के एक मामले में भाजपा ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसके बाद पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने भी पार्वती के खिलाफ शिकायत दायर किया है। इसे ‘मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी’ स्कैम कहा जा रहा है। आरोप है कि मुआवजे की योजना का गलत फायदा उठा कर कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री की पत्नी ने मैसूर के पॉश इलाके में जमीन अपने नाम करा ली। उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 फॉर्मूला के तहत इसकी आधी जमीन अन्यत्र मुहैया कराई गई।

ये योजना उनलोगों के लिए लाई गई थी, जिनकी जमीन का अधिग्रहण विकास परियोजनाओं के कारण सरकार को करना पड़ता है। अब आरोप है कि इसके तहत कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाया गया है। आरोप है कि CM की पत्नी को दक्षिण मैसूर के प्राइम रियल एस्टेट में 38,283 स्क्वायर फ़ीट जमीन दी गई। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध तरीके से इसे लिया गया। पुलिस ने इस मामले में कोई FIR नहीं दर्ज की है, कहा है कि MUDA इस मामले की जाँच कर रहा है।

प्रदेश भाजपा का कहना है कि इससे राज्य सरकार के खजाने को 4000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं सीएम सिद्दारमैया का कहना है कि जिस जमीन के बदले उनकी पत्नी को जमीन दी गई वो उनके साले ने अपनी बहन को गिफ्ट की थी। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा का कहना है कि इस जमीन को 2004 में खरीदा गया था और 2010 में गिफ्ट किया गया था। इसके लिए दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई। अब इस मामले से बचने के लिए सिद्दारमैया ने नया पैंतरा आजमाया है।

वो कह रहे हैं कि पिछड़ी जाति से होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति कर रहे हैं, साथ ही कहा कि हमें जवाब देने भी आता है। कर्नाटक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष BY विजयेंद्र विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्हें भी हिरासत में लिया गया। मैसूर में MUDA के दफ्तर के बाहर भाजपा ने बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उन्हें बस में बिठा कर वापस ले जाया गया। आरोप है कि पार्वती को जो जमीन दी गई, उसके दाम ली गई जमीन से कई गुना अधिक हैं।

पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी पर चलेगा हत्या के प्रयास का मामला: TDP विधायक की शिकायत पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने दर्ज की FIR, 2 पुलिस अधिकारी भी लपेटे में

YSR कॉन्ग्रेस पार्टी के मुखिया और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई है। उन पर हत्या के प्रयास के मामले में यह FIR दर्ज हुई है। उन पर यह FIR सत्ताधारी TDP के एक विधायक ने दर्ज करवाई है। उनके साथ कुछ पुलिस अफसरों के नाम भी इस FIR में दर्ज किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, TDP विधायक रघु राम कृष्णम राजू ने गुंटूर में यह FIR दर्ज करवाई है। राजू पहले नरसापुरम लोकसभा सीट से YSRCP से सांसद थे। उनका आरोप है कि राज्य CID ने उन्हें गिरफ्तार कर उनके साथ बदसलूकी की थी। उनका आरोप है कि यह सब कुछ तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के कहने पर हुआ।

राजू ने इस मामले में राज्य के पुलिस खुफिया विभाग के पूर्व मुखिया PSR अंजनायेलु और CID के ASP जी पर्भवती को भी आरोपित बनाया है। MLA राजू का आरोप है कि उन्हें 2021 में गिरफ्तार किया गया था और बिना कोई ट्रांजिट वारंट के CID द्वारा गुंटूर ले जाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ उनके साथ पुलिस अफसरों ने मारपीट की।

उन्हें चमड़े की बेल्ट और लाठियों से पीटा गया और उन्हें दवाइयाँ भी नहीं लेने दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनका मोबाइल ले लिया और उसे जबरदस्ती खुलवाया। इसके अलावा उन्हें जान से मारने की धमकी भी पुलिस अधिकारियों ने दी।

अब इस शिकायत के आधार पुलिस अधिकारियों के साथ ही पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी को आरोपित बनाते हुए पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस FIR में हत्या के प्रयास, षड्यंत्र रचने, मारपीट समेत कई धाराएँ लगाई गई हैं।

गौरतलब है कि राम कृष्ण राजू 2018 में भाजपा छोड़ कर YSRCP में शामिल हुए थे। 2019 लोकसभा चुनाव में राजू को YSRCP ने नरसापुरम लोकसभा सीट से टिकट दिया था। वह यह सीट TDP उम्मीदवार को हरा कर जीत भी गए थे। हालाँकि, सांसद बनने के बाद उनके रिश्ते YSRCP और जगन मोहन रेड्डी से बिगड़ गए।

उनके कुछ बयान भी सामने आए थे जहाँ उन्होंने YSRCP मुखिया की आलोचना की थी। इसके बाद उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज कर उन्हें मई, 2021 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जहाँ से उन्हें जमानत मिली थी।

उधर बेल को जीत दिखा रही थी AAP, इधर 25 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए अरविंद केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट बोला – CM बने रहना है या नहीं इस पर लें निर्णय

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 25 जुलाई 2024 तक बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीएम केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद यह आदेश आया है। दरअसल, केजरीवाल को सीबीआई ने 26 जून को गिरफ्तार किया था। अब तक वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की न्यायिक हिरासत में थे।

दरअसल, सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ी अनियमितताओं में अरविंद केजरीवाल को मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक बताया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में CBI ने कहा था कि केजरीवाल के करीबी सहयोगी और AAP के पूर्व मीडिया प्रभारी विजय नायर विभिन्न शराब निर्माताओं और व्यापारियों के संपर्क में थे और आबकारी नीति में उनके अनुकूल प्रावधानों के लिए रिश्वत की माँग की थी।

सीबीआई ने अपने पिछले आरोपपत्र में कहा था कि आम आदमी पार्टी को मिले 100 करोड़ रुपए की रिश्वत में से 44.45 करोड़ रुपए की राशि जून 2021 से जनवरी 2022 के दौरान ‘हवाला चैनलों’ के माध्यम से गोवा स्थानांतरित की गई थी। इन पैसों का उपयोग वहाँ के विधानसभा चुनाव अभियान में पार्टी का प्रचार-प्रसार करने के लिए किया गया था।

राउज एवेन्यू का निर्णय आने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जुलाई 2024) को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा कि चूँकि मामला जीवन के अधिकार से जुड़ा है और गिरफ्तारी का मुद्दा बड़ी बेंच को भेजा गया है, इसलिए केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अरविंद केजरीवाल को तय करना है कि उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए या नहीं। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, “हम इस तथ्य से अवगत हैं कि अरविंद केजरीवाल एक निर्वाचित नेता हैं, लेकिन वे पिछले 90 दिनों से अधिक समय से कारावास में हैं।”

उल्लेखनीय है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। अब उन्हें भले ही सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है लेकिन अभी वह जेल से बाहर नहीं आ पाएँगे। उन्हें ईडी के बाद सीबीआई ने अरेस्ट किया था। उस मामले में भी दिल्ली सीएम ने हाई कोर्ट में चुनौती थी। अब मामले की सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

महाराष्ट्र में MLC चुनाव में फिर ज़िंदा हुआ ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’: जेल से पहुँचे विधायक की वोटिंग का विरोध, रिजल्ट से पता चलेगा MVA-महायुति में कौन कितने पानी में

महाराष्ट्र में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान जारी है। शुक्रवार (12 जुलाई) की सुबह 9 बजे से विधान भवन कॉम्प्लेक्स में वोटिंग हो रही है, जिसमें दोपहर 2 बजे तक 270 विधायक वोट डाल चुके हैं। ये वोटिंग शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसकी गिनती शाम 5 बजे की जाएगी।

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक कैंडिडेट को 23 विधायकों के वोट चाहिए। इनमें बीजेपी के 103, शिवसेना (शिंदे गुट) के 38, एनसीपी (अजित गुट) के 42, कॉन्ग्रेस के 37, शिवसेना (यूबीटी) के 15 और एनसीपी (शरद पवार) के 10 विधायक हैं। विधान परिषद के 11 सदस्य 27 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। इनकी जगह भरने के लिए 11 सीटों पर 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में अभी 274 विधायक हैं, जो इनके लिए वोट कर रहे हैं। अब सिर्फ 4 विधायक वोटिंग के लिए बचे हैं।

महाराष्ट्र में सत्ता संभाल रही महायुति ने चुनाव में 9 कैंडिडेट उतारे हैं। इसमें बीजेपी ने सबसे ज्यादा 5 कैंडिडेट खड़े किए हैं। वहीं, अजित पवार की एनसीपीऔर शिवसेना शिंदे गुट ने दो-दो कैंडिडेट उतारे हैं। विपक्ष में बैठी महाविकास अघाड़ी के 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें कॉन्ग्रेस और शिवसेना- यूबीटी ने 1-1 कैंडिडेट खड़ा किया है, जबकि शरद पवार की एनसीपी-एसपी शेतकरी कामगार पक्ष के उम्मीदवार जयंत पाटिल का समर्थन कर रही है। जयंत पाटिल अभी एमएलसी हैं।

बीजेपी विधायक की वोटिंग का विरोध

शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ पर पुलिस स्टेशन में फायरिंग करने वाले बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ भी मतदान करने विधान भवन पहुँचे। उन्हें मतदान के लिए कोर्ट से परमिशन मिली थी। कॉन्ग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) उनकी वोटिंग का विरोध कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस ने विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर गायकवाड़ को मतदान के लिए रोकने की माँग की है।

शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि साल 2022 में विधान परिषद ​​​​​​ के चुनाव में ​एनसीपी के विधायक नवाब मलिक और अनिल देशमुख को मतदान की अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में महेश को भी वोटिंग की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। हालाँकि वो अनुमति लेकर विधान भवन पहुँचे हैं। महेश गायकवाड़ कल्याण (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र के विधायक है। उन्हें फरवरी में पुलिस स्टेशन के अंदर एक शिवसेना नेता पर गोली चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

बता दें कि एमएलसी चुनाव को देखते हुए रिजॉर्ट पॉलिटिक्स एक बार फिर से चर्चा में लौट आई। तमाम दलों ने अपने विधायकों में एकजुटता बनाए रखने के लिए रिजॉर्ट्स में रखा और फिर सभी विधायक वोटिंग के लिए पहुँचे। याद दिला दें कि ऐसी ही रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के बीच शिवसेना टूट गई थी और उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद एकनाथ शिंदे की अगुवाई में नई सरकार बनी।