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आपातकाल को जायज ठहराने में जुटे राजदीप सरदेसाई और प्रियंका चतुर्वेदी: ‘संविधान हत्या दिवस’ से बिफरा विपक्षी गिरोह, कहा- संविधान के तहत थी इमरजेंसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ घोषित किया है। इसी दिन 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल घोषित करते हुए विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। साथ ही मीडिया पर भी अंकुश लगा दिया था। अब उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी और कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने आपातकाल का समर्थन किया है।

उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया साइट X पर आपातकाल का समर्थन किया। उन्होंने लिखा, “क्या कोई माननीय गृह मंत्री अमित शाह को बताएगा कि आपातकाल संवैधानिक रूप से उपलब्ध धारा के आधार पर लगाया गया था? संविधान हत्या दिवस कहना हास्यास्पद है, क्योंकि यह वही संविधान था जिसमें आपातकाल की धारा थी!”

चतुर्वेदी ने आगे कहा, “यह आपातकाल की अति हो सकती है और इसे घोषित करने के लिए अधिकार को कमज़ोर किया जा सकता है या आपातकाल घोषित करने के लिए राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं, लेकिन यह निश्चित रूप से संवैधानिकता की मृत्यु नहीं हो सकती है! ख़ुद बदलने चले थे संविधान, मिल गया उसका परिणाम, इसलिए हो रहे हैं हैरान। अब आये दिन दे रहें ऐसे बयान।”

प्रियंका चतुर्वेदी की तरह ही पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी आपातकाल का समर्थन किया है। राजदीप ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “ब्रेकिंग न्यूज़: मोदी सरकार ने कहा है कि वह 25 जून को 1975 की आपातकाल की वर्षगाँठ को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाएगी। विपक्ष के नारे ‘संविधान ख़तरे में है’ और ‘संविधान हत्या दिवस’ के बीच हम संविधान का ओवरडोज़ ले रहे हैं!”

राजदीप ने आगे लिखा, “सच तो यह है कि संविधान को सही मायने में बचाने/सम्मान करने का एकमात्र तरीका संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना है। पहला कदम: हर सरकार, चाहे वह केंद्र हो या राज्य, एजेंसियों का दुरुपयोग बंद करे! 75 के आपातकाल की निंदा करने और फिर उसके मुख्य पापों को दोहराने का कोई मतलब नहीं है! सुर्खियाँ बटोरने वाली नौटंकी कम, ज़्यादा सारगर्भित बातें!”

संविधान हत्या दिवस का ऐलान करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कैसे इंदिरा गाँधी ने तानाशाही मानसिकता का परिचय देते हुए लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था। उन्होंने याद किया कि कैसे लाखों लोग जेल में ठूँस दिए गए थे, मीडिया की आवाज़ को दबा दिया गया था। अमित शाह ने ऐलान किया कि हर साल इसकी स्मृति में भारत सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

पाकिस्तान में जहाँ-जहाँ होने हैं चैंपियंस ट्रॉफी के मैच, वहाँ-वहाँ आतंकी बुरहान वानी के समर्थन में रैलियाँ: इधर शाहिद अफरीद कह रहे – खेल को राजनीति से दूर रखे भारत

पाकिस्तान में ICC चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन होना है। हालाँकि, कहा जा रहा है कि BCCI ने मन बना लिया है कि भारतीय क्रिकेट टीम को इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए वहाँ नहीं भेजा जाएगा, बल्कि श्रीलंका या UAE का वैकल्पिक वेन्यू के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। अब चैंपियंस ट्रॉफी पर आतंकवाद का साया मँडरा रहा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और वित्तीय राजधानी कही जाने वाली कराची में आतंकी बुरहान वानी के समर्थन में रैलियाँ की जा रही हैं।

असल में जम्मू कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी बुरहान वानी को जुलाई 2016 में भारतीय सेना ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। पाकिस्तान में उसकी ‘डेथ एनिवर्सरी’ मनाई जा रही है। बुरहान वानी हिज़्बुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ था, जो भारत के अलावा यूरोप, कनाडा और अमेरिका में भी प्रतिबंधित संगठन है। 8 जुलाई को वो मारा गया था, उसी दिन इस साल बदनौता गाँव में हमला कर आतंकियों ने सेना के 5 जवानों की जान ले ली। सोशल मीडिया पर उसके लिए अभियान चलाया जा रहा है।

‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, बुरहान वानी को ‘शहीद’ बताते हुए 843 पोस्ट ‘X’ पर किए गए हैं। कराची, इस्लामाबाद, मुजफ्फराबाद और नीलम घाटी में 20 ऐसे लोकेशन मिले हैं, जहाँ इस आतंकवादी के समर्थन में रैलियाँ हुईं। ये इलाके ICC कैंपियन्स ट्रॉफी की मेजबानी करने वाले मैदानों से नज़दीक हैं, ऐसे में इस टूर्नामेंट पर सुरक्षा को लेकर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। कराची में नेशनल क्रिकेट स्टेडियम से मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर प्रदर्शनकारियों को भारत विरोधी नारेबाजी करते हुए देखा गया।

इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने जमावड़ा किया। ये जगह रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर है। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी खेल को राजनीति से दूर रखने की बातें कर के और पाकिस्तान में विराट कोहली की फैन फॉलोविंग का हवाला देकर भारतीय टीम को पाकिस्तान का दौरा करने बोल रहे हैं, लेकिन वो खुद एक कट्टरपंथी रहे हैं और PoK पर पाकिस्तान के दावे का समर्थन करते हैं।

पकिस्तान के स्पोर्ट्स पत्रकार शोएब जट्ट ने भी पाकिस्तान के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्हें भारत से बात करनी चाहिए, बजाए बयानबाजी करने के। पाकिस्तान हर साल 8 जुलाई को ‘रेजिस्टेंस डे’ मनाता है। PoK के मुजफ्फराबाद में भी 300 से अधिक युवक बुरहान वानी की तस्वीर हाथ में लेकर प्रदर्शन करते हुए निकले। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC-AJK) ने भी इस्लामाबाद में रैलियाँ निकाली हैं। कराची स्थित आर्ट्स काउंसिल से लेकर प्रेस क्लब तक ऐसी रैलियाँ हुई हैं। हाल ही में कश्मीर के रियासी में आतंकियों ने बस पर गोलीबारी कर 9 श्रद्धालुओं को मार डाला था, जिसमें महिलाएँ-बच्चे भी थे।

जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल को अब दिल्ली के LG जितनी शक्तियाँ, ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए भी उनकी अनुमति ज़रूरी: मोदी सरकार के आदेश पर भड़के उमर अब्दुल्ला

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दी दिल्ली जैसा संवैधानिक अधिकार देने की कवायद शुरू कर दी है, दिल्ली की तरह जम्मू कश्मीर के एलजी को भी अब ​प्रशासनिक शक्तियाँ दी जा रही है। जम्मू-कश्मीर में अब ट्रांसफर और पोस्टिंग एलजी की अनुमति के बिना नहीं हो पाएगी। इसका जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विरोध किया है, वहीं महबूबा मुफ्ती ने अब तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 55 के तहत संशोधित नियमों को अधिसूचित किया है, इसमें एलजी को अधिक शक्ति देने का प्रावधान है। इसमें नई धाराएँ जोड़ी गई है।

जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार (12 जुलाई 2024) को एक अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को आईएएस और आईपीएस जैसे अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग, पुलिस, कानून और व्यवस्था के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के मामलों में अधिक अधिकार मिलेंगे।

मुख्य नियमों में नियम 42 के बाद 42ए जोड़ा गया है, जिससे उपराज्यपाल को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बने राज्य के लिए महाधिवक्ता और विधि अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार मिल गया है। 42बी यह भी स्पष्ट करता है कि अभियोजन स्वीकृति देने या अस्वीकार करने या अपील दायर करने के प्रस्ताव भी एलजी द्वारा ही दिए जाएंगे।

आपको बता दें कि जब से जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन हुआ है, तब से वहाँ चुनाव नहीं हो पाए हैं। मगर जब भी सरकार का गठन होगा तब सबसे अधिक शक्तियाँ राज्यपाल के पास होंगी। ये शक्तियाँ ऐसी ही हैं, जैसे दिल्ली के एलजी के पास होती है।

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को लेकर कड़ी आलोचना की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, “एक और संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव करीब हैं। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण, अविभाजित राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर समय सीमा तय करने की दृढ़ प्रतिबद्धता इन चुनाव के लिए एक शर्त है। जम्मू-कश्मीर के लोग शक्तिहीन, रबर स्टैम्प सीएम से बेहतर के हकदार हैं, जिन्हें अपने चपरासी की भी नियुक्ति के लिए एलजी से गिड़गिड़ाना पड़ेगा।”

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिया गया स्पेशल स्टेट्स खत्म कर दिया है। इसके साथ पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों को बाँट दिया। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। लद्दाख में विधानसभा नहीं है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए 30 सितंबर की समयसीमा तय की है।

लालू यादव ने हाथ जोड़ अनिल अंबानी को किया प्रणाम, प्रियंका चतुर्वेदी ने एन्जॉय किया ‘यादगार क्षण’: अनंत अंबानी की शादी में I.N.D.I. नेताओं का जमावड़ा, सलमान खुर्शीद भी दिखे खुश

जहाँ एक तरफ I.N.D.I. गठबंधन के नेता पानी पी-पी कर एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को कोसते हैं, वहीं दूसरी तरह उनके यहाँ मेहमान बन कर जाते हैं और दावत भी उड़ाते हैं। शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को भी ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला जब NCP (SP) के मुखिया शरद पवार, TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी, राजद सुप्रीमो लालू यादव, शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे व प्रियंका चतुर्वेदी और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत कई नेता मुकेश अंबानी के मेहमान बन कर मुंबई पहुँचे।

बता दे कि मुकेश अंबानी के बेटे अनंत की शादी वीरेन मर्चेंट की बेटी राधिका से हो रही है। इसी समारोह में एक तरह से ‘मिनी I.N.D.I. गठबंधन’ पहुँचा था। गाँधी परिवार निमंत्रण के बावजूद इस शादी समारोह में नहीं पहुँचा, क्योंकि जनता के सामने भद्द पिटने का डर था। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी इस शादी समारोह में सपरिवार मौजूद रहे। ये सब वही नेता हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के लिए मुकेश अंबानी से उनकी नज़दीकी होने की बात कहते हैं।

सोशल मीडिया में शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का भी मजाक उड़ रहा है, जिन्होंने इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ अनंत अंबानी-राधिका मर्चेंट की शादी में पोज दिया। उन्होंने इसे एक यादगार क्षण करार दिया। प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘X’ पर इस तस्वीर को न पोस्ट करते हुए इंस्टाग्राम पर डाला। ये वही प्रियंका चतुर्वेदी हैं, जो ‘मोदी अंबानी फ्रेंडशिप गोल्स’ की बात करते हुए ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ गाने के बोल शेयर कर चुकी हैं।

वहीं इस शादी समारोह में लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, बहू राजश्री और बेटी मीसा भारती के साथ शामिल हुए। लालू यादव जब समारोह में पहुँचे तो मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लालू यादव ने हाथ जोड़ कर अनिल अंबानी को नमस्कार किया। अखिलेश यादव अपनी बेटी और पत्नी डिंपल के साथ समारोह में मौजूद रहे। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस नेता सलमान ख़ुर्शीद भी अपने परिवार के साथ भोज खाने के लिए पहुँचे।

‘अमेरिका की उप-राष्ट्रपति ने राहुल गाँधी से फोन पर की बात, दुनिया मानती है अगला PM’: कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम के साथ-साथ मीडिया ने चलाई खबर, जानें क्या है सच

कॉन्ग्रेस का इकोसिस्टम कह रहा है कि अमेरिका की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाकात की है। कॉन्ग्रेस से जुड़े हैंडलों के अलावा पार्टी समर्थक पत्रकार भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं। यहाँ तक कि कई मीडिया संस्थानों ने भी इस रिपोर्ट को जम कर चलाया। द इकोनॉमिक टाइम्स’, ‘टाइम्स नाउ’, NDTV ‘द फ़ेडरल न्यूज़’, ‘डेक्कन हेराल्ड’, Outlook, ‘ABP न्यूज़’ और ‘टेलीग्राफ इंडिया’ ने इस खबर को शेयर किया।

कई मीडिया संस्थानों ने चलाई कमला हैरिस के राहुल गाँधी से बात करने की खबर

इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने भी इस खबर को शेयर किया। खुद को लेखक बताने वाले हर्ष तिवारी ने दावा किया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गाँधी का कद काफी बढ़ गया है, दुनिया उन्हें अगले प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है। इंदिरा गाँधी के कट्टर समर्थक रविंदर कपूर ने भी इस रिपोर्ट को शेयर किया। कॉन्ग्रेस के सबसे वफादार पत्रकार आदेश रावल ने भी यही दावा किया। ‘कॉन्ग्रेस टास्कफोर्स’ से जुड़े अंकित मयंक ने लिखा कि LoP बनने के बाद राहुल गाँधी के लिए किसी देश के बड़े नेता से ये पहली बातचीत है।

नागालैंड की कॉन्ग्रेस नेता वेनिशा G कीबा ने भी इस दावे को दोहराया। मोदी विरोधी ट्वीट्स करने वाले गरुराज अनजान ने इसे एक बदलाव करार दिया। कॉन्ग्रेस के एक अन्य कट्टर समर्थक प्रह्लाद दलवाड़ी ने तो राहुल गाँधी को ‘भारत का शैडो प्रधानमंत्री’ तक करार दिया। ‘ABP न्यूज़’ के आशीष सिंह भी ये दावा करने वालों में शामिल रहे। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के राजनीतिक संपादक विनोद शर्मा ने तो ये तक लिख दिया कि ‘चंपू मीडिया’ इस पर कुछ नहीं कह रहा है, केवल आपातकाल की रट लगा रहा है।

अब हम आपको इस दावे की सच्चाई बताते हैं। असल में राहुल गाँधी से कमरा हैरिस ने कोई बातचीत नहीं की है। अमेरिका की उप-राष्ट्रपति की वेबसाइट पर भी इस संबंध में कुछ उपलब्ध नहीं है, न ही अमेरिकी मीडिया ने ऐसा कुछ चलाया है। अमेरिका में समाचार एजेंसी PTI के चीफ कॉरेस्पोंडेंट ललित K झा ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कार्यालय से बात की। अमेरिकी वाईस प्रेसिडेंट ऑफिस ने कहा है कि ये खबर गलत है। इधर कॉन्ग्रेस समर्थक फर्जी खबर पर लहालोट हुए जा रहे थे।

‘झूठ फैला रहा जमीयत, कठमुल्लों के बहकावे में न आएँ’: बाल आयोग के अध्यक्ष ने याद दिलाई मदरसे में हिन्दू बच्चे के खतना की घटना, कहा – स्कूलों में भर्ती किए जाएँ छात्र

मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ ही आधुनिक शिक्षा भी जरूरी है। मदरसों में सिर्फ मुस्लिम बच्चों को ही नहीं, बल्कि हिंदू व अन्य गैर मुस्लिम बच्चों को भी शिक्षा मिलनी चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि मदरसों को शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे में लाया जाए। ऐसा कहना है राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) का, जिसने यूपी सरकार के उस आदेश का समर्थन किया है, जिसमें राज्य के सभी मदरसों को शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे में लाए जाने की बात कही है। हालाँकि यूपी सरकार के इस आदेश का जमीयत उलमा-ए-हिंद विरोध कर रहा है, जिस पर अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पलटवार किया है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा कि उन्होंने मदरसों को अपग्रेड करने की बात कही है, जहाँ मजहबी शिक्षा के साथ आधुनिक पढ़ाई भी होनी चाहिए, साथ ही अन्य धर्मों के बच्चों को भी शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बच्चों को भी स्कूलों में दाखिल कराया जाना चाहिए। NCPCR के अध्यक्ष ने दारुल उलूम देवबंद के साथ ही जमीयत उलमा-ए-हिंद को भी निशाने पर लिया है, जिसने सरकारी स्कूलों में बच्चों को गैर-मजहबी प्रार्थनाओं में शामिल होने के खिलाफ उन्हें भड़काने की कोशिश की है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर लिखा, “मदरसा, इस्लामिक मज़हबी शिक्षा सिखाने का केंद्र होता है और शिक्षा अधिकार क़ानून के दायरे के बाहर होता है। ऐसे में मदरसों में हिंदू व अन्य ग़ैर मुस्लिम बच्चों को रखना न केवल उनके संवैधानिक मूल अधिकार का हनन है बल्कि समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलने का कारण भी बन सकता है। इसलिए NCPCR ने देश की सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि संविधान के अनुरूप मदरसों के हिंदू बच्चों को बुनियादी शिक्षा का अधिकार मिले इसलिए उन्हें स्कूल में भर्ती करें और मुस्लिम बच्चों को भी धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा का अधिकार देने के लिए प्रबंध करें। तत्संबंध में उत्तरप्रदेश की राज्य सरकार के मुख्यसचिव महोदय ने आयोग की अनुशंसा के अनुरूप आदेश जारी किया था।”

प्रियंक कानूनगो ने आगे लिखा, “समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि जमीयत ए उलेमा ए हिन्द नामक इस्लामिक संगठन इस आदेश बारे में झूठी अफ़वाह फैला कर लोगों को गुमराह कर सरकार की ख़िलाफ़त में जन सामान्य की भावनाएँ भड़काने का काम कर रहा है, ये मौलवियों का एक संगठन है जो कि मदरसा दारुल उलूम देवबंद की एक शाखा ही है जो कि जिसके द्वारा गजवा ए हिन्द का समर्थन करने पर आयोग ने कार्रवाई की है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष उत्तरप्रदेश के देवबंद से सटे हुए एक गाँव में चल रहे एक मदरसे में एक गुमशुदा हिंदू बच्चे की पहचान बदलने और ख़तना कर धर्मांतरण करने की घटना से सांप्रदायिक सामंजस्य बिगड़ा था। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ये कार्रवाई ज़रूरी है।”

उन्होंने आगे लिखा, “उत्तरप्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम भी लागू है, किसी को भी बच्चों की धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन नहीं करना चाहिए। मेरी जनसामान्य से यह हाथ जोड़कर विनती है कि ये मामला बच्चों के अधिकार का है किसी भी कट्टरपंथी कठमुल्ले के बहकावे में न आयें और बच्चों के एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने में सहभागी बनें। अफ़वाह फैलाने वालों पर कार्रवाई हेतु सरकार से पृथक निवेदन किया जा रहा है।”

बता दें कि मदरसों से जुड़े अवैध धर्म परिवर्तन के भी मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, मदरसों के माध्यम से मुस्लिम बच्चों को सिर्फ धार्मिक शिक्षा दी जाती है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि मुस्लिम बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ ही आधुनिक शिक्षा भी दी जाए, ताकि उनका समग्र विकास हो सके। लेकिन जमीयत जैसे संगठन मुस्लिम बच्चों की अलग पहचान और उनमें मजहबी कट्टरता भरने की कोशिश में लगे रहते हैं। हालाँकि यूपी सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य के 4 हजार से ज्यादा मदरसों को शिक्षा के अधिकार के तहत एक-समान शिक्षण नीति लागू करनी पड़ेगी।

IAS पूजा खेडकर के डिसेबिलिटी-OBC सर्टिफिकेट की होगी जाँच, जा सकती है नौकरी भी: पिस्टल लहराने वाली माँ के खिलाफ आर्म्स एक्ट में दर्ज हुआ केस

ट्रेनिंग के दौरान ही VIP सुविधाओं की डिमांड कर नखरा करने वाली IAS पूजा खेडकर की नौकरी जा सकती है। पूजा ने खुद को दिव्यांग और OBC बता कर UPSC परीक्षा दी थी। अब केंद्र सरकार इस मामले की जाँच करेगी। केंद्र सरकार ने एक अधिकारी को इसकी जाँच सौंप दी है। इसके लिए एक सदस्यीय पैनल का गठन किया गया है। अगर गलत तथ्य पेश करने का आरोप सही पाया जाता है तो उन पर कार्रवाई होगी। ‘डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एन्ड ट्रेनिंग (DoPT)’ के एडिशन सेक्रेटरी मनोज द्विवेदी इस मामले की जाँच करेंगे।

दस्तावेजों की जाँच तक इसकी सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जिस अथॉरिटी ने उन्हें दस्तावेज दिए हैं, पता लगाया जाएगा कि उसने बारीकी से जाँच की थी या नहीं। साथ ही पूजा खेडकर AIIMS में मेडिकल टेस्ट के लिए क्यों नहीं उपस्थित हुईं, इसे भी खँगाला जा रहा है। उन्हें ‘पर्सन्स विथ बेंचमार्क डिसैबिलिटीज (PwBD)’ कैटेगरी में रखा गया है। DoPT जाँच रिपोर्ट आने के बाद महाराष्ट्र सरकार से अनुशंसा करेगा कि इस मामले में क्या करना चाहिए। न सिर्फ उनकी नौकरी जा सकती है, बल्कि धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।

सामाजिक कल्याण मंत्रालय से भी DoPT इस मामले की जाँच के लिए सहयोग लेगा। पूजा खेडकर ने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से बताया है, लेकिन उनके पिता भी IAS रह चुके हैं और लोकसभा का चुनाव लड़ते वक्त उन्होंने अपनी संपत्ति 40 करोड़ रुपए की घोषित की थी। AIIMS के डॉक्टरों से सलाह ली जा रही है कि दृष्टि और मानसिक दिव्यांगता का पूजा खेडकर ने जो दावा किया है, वो सरकारी नौकरी के लिए लिए ज़रूरी मानक पूरा करता है या नहीं। बताया जा रहा है कि हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं।

उधर किसानों को पिस्टल लेकर धमकाती हुई उनकी माँ का पुराना वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुलशी में जमीन कब्जाने का आरोप झेल रहीं मनोरमा खेडकर को किसानों को धमकाते हुए देखा गया था। मामला 1 वर्ष पूर्व का है। किसानों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिशों के बावजूद पुलिस ने उन्हें लौटा दिया था। पूजा के नाम पर 22 करोड़ रुपए की जमीन और 2 फ्लैट्स दर्ज हैं। 24 वर्षीय पूजा खेडकर का UPSC में 841 रैंक आया था। उनके पिता दिलीप IAS से रिटायर्ड हैं।

जिसे ‘चाणक्य’ बताया, उसके समर्थन के बावजूद हारा मौजूदा MLC: महाराष्ट्र में ऐसे बिखरा MVA गठबंधन, कॉन्ग्रेस विधायकों ने अपनी ही पार्टी को दिया धोखा

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे, तो इंडी गठबंधन में शामिल पार्टियाँ (कॉन्ग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, एनसीपी-शरद पवार) आगे निकल गई थी, लेकिन सवा महीने के अंदर हुए महाराष्ट्र के एमएलसी चुनाव में इस गठबंधन को जोरदार धक्का लगा है।

महाराष्ट्र में एमएलसी चुनाव के लिए 11 सीटों पर 12 उम्मीदवार खड़े थे। इसमें से बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति (बीजेपी, शिवसेना-शिंदे और एनसीपी-अजित पवार) के पास 8 उम्मीदवारों को जिताने की ताकत थी, लेकिन उसने 9 उम्मीदवार खड़े किए और सभी जीत गए, जबकि संख्या बल होने के बावजूद इंडी गठबंधन के 4 में से 3 ही उम्मीदवार जीत सके। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि कॉन्ग्रेस के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी।

ऐसा रहा एमएलसी चुनाव का हाल

गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को आयोजित इन चुनावों में भाजपा महायुती ने 11 में से 9 सीटें हासिल की। उसने इन चुनावों के लिए 9 उम्मीदवार ही उतारे थे। इस प्रकार उसके सभी उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। इन 9 में 5 पर भाजपा जबकि 2 पर NCP (अजित पवार) और 2 पर शिवसेना (शिंदे) को जीत हासिल हुई। दूसरी तरफ INDI गठबंधन की तरफ से कॉन्ग्रेस, शिवसेना UBT और PWP पार्टी ने अपना एक-एक उमीदवार उतारा था। इनमें से PWP के उम्मीदवार जयंत पाटील को शरद पवार की NCP का समर्थन हासिल था। वोटों की गिनती के बाद शिवसेना और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जीत हासिल कर सके जबकि जयंत पाटील को हार का मुंह देखना पड़ा।

महायुती में भाजपा की तरफ से पंकजा मुंडे, परिणय फुल्के, अमित गोरखे, योगेश तिलेखर और सदाभाव खोत ने जीत हासिल की। वहीं NCP (अजित पवार) के राजेश विटेकर और शिवाजीराव गरजे भी जीत हासिल करने में सफल रहे। इसके अलावा शिवसेना की भावना गवली और कृपाल तमाने ने भी जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रज्ञा साटव जबकि शिवसेना (UBT) की तरफ से मिलिंद नार्वेकर भी जीत गए। लेकिन शरद पवार के समर्थन से चुनाव लड़ रहे जयंत पाटील को हार मिली।

एमएलसी चुनाव में वोटों का ऐसा रहा गणित

महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 23 विधायकों का वोट चाहिए था। महायुती की तरफ से उतारे गए उम्मीदवारों में से अधिकांश को 23 से अधिक वोट मिले। कुछ उम्मीदवारों को 26 तो कुछ को 24 वोट मिले। इस प्रकार उन्हें जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई। वहीं दूसरी तरफ INDI गठबंधन के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर 59 वोट मिले।

एमएलसी चुनाव में तीनों पार्टियों के पास इस चुनाव में 66 वोट थे, इस प्रकार इनका 7 वोट का नुकसान दिखा। इसी कारण से जयंत पाटील की हार भी हुई, वह 23 की जगह केवल 12 वोट पा सके। उन्हें इस गठबंधन ने इस उम्मीद में उतारा था कि अजित पवार की NCP के कुछ विधायकों का समर्थन मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

इंडी गठबंधन के कथित चाणक्य शरद पवार की हार

खास बात ये है कि आखिरी समय में उद्धव ठाकरे ने अपने पीए-मिलिंद नार्वेकर को मैदान में उतारा और उन्हें जिता भी लिया, लेकिन जिस जयंत पाटील के पक्ष में महाराष्ट्र की राजनीति के कथित चाणक्य और गठबंधन के अगुवा शरद पवार खुद खड़े थे, उन्हें ही हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में मान सकते हैं कि क्रॉस वोटिंग करने वाली कॉन्ग्रेस में तो गड़बड़ दिख ही रही है, लेकिन एमएलसी चुनाव में हार हुई है सीधे-सीधे शरद पवार की।

दरअसल, शरद पवार का खेमा दावा कर रहा था कि उसके पक्ष में एनसीपी-अजित पवार गुट के भी विधायक हैं। लेकिन अजित गुट के तो छोड़िए, खुद एमवीए के अपने सहयोगी यानी कॉन्ग्रेस के ही वोट शरद पवार के समर्थन वाले जयंत पाटील को नहीं मिले।

खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस बात पर मुहर लगाई कि इंडी गठबंधन के विधायकों ने उनके प्रत्याशी के लिए वोट किया। ऐसे में साफ दिख रहा है कि जिस इंडी गठबंधन को लोकसभा चुनाव में सफलता मिली थी, वो एमएलसी चुनाव आते-आते तक महज सवा महीनों में ही बिखर गया है।

…तो फिर बिखर जाएगा इंडी गठबंधन?

अगले 2-3 माह बाद ही राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। कॉन्ग्रेस के जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है, माना जा रहा है कि उन्हें अब कॉन्ग्रेस से कोई मौका नहीं मिलने वाला। वो शिंदे या अजित पवार के गुट में जाएँगे, अगर सीधे बीजेपी में नहीं आ सके तो, इससे फायदा तो महायुती गठबंधन यानी एनडीए का ही होना है। वहीं, इस चुनाव से पहले जहाँ शिंदे गुट और अजित पवार गुट में सेंध लगाने के दावे किए जा रहे थे, उसकी भी सच्चाई सामने आ चुकी है।

एमएलसी चुनावों के नतीजे साफ बताते हैं कि इस चुनाव में बीजेपी गठबंधन को फायदा ही फायदा हुआ है, तो इंडी गठबंधन को नुकसान ही नुकसान। ऐसे में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इंडी गठबंधन कैसे खुद को एकजुट रख पाएगा, अभी तो यही सवाल खड़ा हो गया है।

18 बैंक खाते, 95 करोड़ रुपए, अब तक 11 शिकंजे में… जनजातीय समाज का पैसा डकारने के मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री गिरफ्तार, खुद को पिछड़ों का रहनुमा बताती है पार्टी

कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री B नागेंद्र को ED ने 13 घंटे की पूछताछ के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। 52 वर्षीय नेता को 94.73 करोड़ रुपए की हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। मामला ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMVSTDCL)’ से जुड़ा हुआ है। यानी, जो पैसा अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए था, उसमें कॉन्ग्रेस नेता ने गड़बड़ी की। बता दें कि कॉन्ग्रेस अक्सर खुद को दलितों और जनजातीय समाज का रहनुमा बता कर पेश करती है।

शनिवार (13 जुलाई, 2024) को ही 4 बार के विधायक B नागेंद्र को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 18 जुलाई तक ED की कस्टडी में भेज दिया गया। कॉन्ग्रेस के ही एक अन्य विधायक बसनगौड़ा दद्दल KMVSTDCL के अध्यक्ष रहे हैं। उनके ठिकानों पर भी ED ने छापेमारी की थी। ED ने दोनों कॉन्ग्रेस नेताओं के निजी सहायकों से भी इस संबंध में पूछताछ की थी। ये मामला निगम के पूर्व कर्मचारी K चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद सामने आया था।

K चंद्रशेखरन कॉर्पोरेशन की ऑडिटिंग में शामिल थे और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिल कर काम कर रहे थे। 26 मई को उन्होंने आत्महत्या की थी। उन्होंने 6 पन्नों का एक नोट भी छोड़ा है, जिसमें ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ में हुई वित्तीय गड़बड़ियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में बताया गया है। उस दौरान B नागेंद्र कर्नाटक के जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्हें इस घोटाले के सामने आने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था।

कर्नाटक पुलिस ने मामले की जाँच के लिए CID SIT का गठन किया था। अब तक इस मामले में 11 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 18 बैंक खातों में भेजे गए 40 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं। सीधे शब्दों में समझें तो पूरा मामला ये है कि ST निगम के कुछ अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर के अवैध रूप से 94,73,08,500 रुपए विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए। कॉर्पोरेशन के बाद इस लेनदेन से संबंधित कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं थी।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर और बेंगलुरु के रीजनल ईस्ट के हेड ने CBI के समक्ष इस मामले में एक अलग शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सरकारी खजाने से 89.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जिसमें से मात्र 5 करोड़ रुपए ही वापस जब्त किए जा सके हैं। जिन 18 बैंक खातों में पैसे भेजे गए, उनमें से आधे हैदराबाद स्थित RBL बैंक खाते के हैं और 31 मार्च को इन्हें खोला गया था। UBI अधिकारियों की शिकायत पर CBI ने अलग मामला दर्ज कर रखा है।

जहाँ तक B नागेंद्र की बात है, उन्होंने 2008 में कर्नाटक के विजयनगर जिले के कुडलिगी विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। 2013 में भी वो अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। उस समय वो भाजपा में हुआ करते थे, लेकिन 2018 में पाला बदलते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस का रुख किया और बेल्लारी ग्रामीण क्षेत्र से जीत दर्ज की। 2023 में वो फिर यहीं से जीते और उन्हें मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की सरकार में युवा मामलों, खेल और जनजातीय कल्याण जैसे मंत्रालय सौंपे गए। हालाँकि, 1 वर्ष ही वो इस पद पर रह सके।

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में NDA की बड़ी जीत, सभी 9 उम्मीदवार जीते: INDI गठबंधन कर रहा 2 से संतोष, 1 सीट पर करारी हार

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में NDA गठबंधन (महायुती) ने बड़ी जीत हासिल की है। इस चुनाव में उतरे उसके सभी उम्मीदवार जीत गए हैं। INDI गठबंधन को इन चुनावों में एक सीट पर हार झेलनी पड़ी है। INDI गठबंधन के कुछ विधायकों के सत्ता पक्ष के लिए वोट करने की भी सूचना है।

गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को आयोजित इन चुनावों में भाजपा महायुती ने 11 में से 9 सीटें हासिल की। उसने इन चुनावों के लिए 9 उम्मीदवार ही उतारे थे। इस प्रकार उसके सभी उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। इन 9 में 5 पर भाजपा जबकि 2 पर NCP (अजित पवार) और 2 पर शिवसेना (शिंदे) को जीत हासिल हुई।

दूसरी तरफ INDI गठबंधन की तरफ से कॉन्ग्रेस, शिवसेना UBT और PWP पार्टी ने अपना एक-एक उमीदवार उतारा था। इनमें से PWP के उम्मीदवार जयंत पाटील को शरद पवार की NCP का समर्थन हासिल था। वोटों की गिनती के बाद शिवसेना और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जीत हासिल कर सके जबकि जयंत पाटील को हार का मुंह देखना पड़ा।

महायुती में भाजपा की तरफ से पंकजा मुंडे, परिणय फुल्के, अमित गोरखे, योगेश तिलेखर और सदाभाव खोत ने जीत हासिल की। वहीं NCP (अजित पवार) के राजेश विटेकर और शिवाजीराव गरजे भी जीत हासिल करने में सफल रहे। इसके अलावा शिवसेना की भावना गवली और कृपाल तमाने ने भी जीत हासिल की।

कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रद्न्य साटव जबकि शिवसेना (UBT) की तरफ से मिलिंद नार्वेकर भी जीत गए। इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी सूचना है। बताया गया कि INDI गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस के 7 विधायकों ने महायुती को वोट दिया है।

इस चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 23 विधायकों का वोट चाहिए था। महायुती की तरफ से उतारे गए उम्मीदवारों में से अधिकांश को 23 से अधिक वोट मिले। कुछ उम्मीदवारों को 26 तो कुछ को 24 वोट मिले। इस प्रकार उन्हें जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई।

वहीं दूसरी तरफ INDI गठबंधन के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर 59 वोट मिले। इन तीनों पार्टियों के पास इस चुनाव में 66 वोट थे, इस प्रकार इनका 7 वोट का नुकसान दिखा। इसी कारण से जयंत पाटील की हार भी हुई, वह 23 की जगह केवल 12 वोट पा सके। उन्हें इस गठबंधन ने इस उम्मीद में उतारा था कि अजित पवार की NCP के कुछ विधायकों का समर्थन मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इन विधानपरिषद के इन चुनावों से महायुती को बढ़त मिली है। इन चुनावों से उसकी लोकसभा चुनावों में हुई बड़ी हार का असर भी कम होते हुए दिख रहा है। ऐसे में अब देखना होगा कि आगे विधानसभा चुनावों क्या माहौल रहता है।